CBSE Class 12 Hindi Revision Worksheet Set 04

Chapter-wise Worksheets for Class 12 Hindi: All Chapters

Access comprehensive chapter-wise worksheets for All Chapters using the CBSE Class 12 Hindi Revision Worksheet Set 04. Designed to align with the 2026-27 academic syllabus for Class 12 Hindi, these printable practice sets help students reinforce key concepts and improve their overall exam readiness.

Practice Class 12 Hindi Worksheets: All Chapters

Navigate directly to the solved Hindi worksheets using the digital viewer below. Each practice set includes detailed step-by-step solutions, allowing students to instantly cross-check their work and identify areas requiring further revision.

अंतरा

1. रामविलास शर्मा - यथासंवै रोचते विश्वम्

Question 1. 'साहित्य समाज का दर्पण है' - इस प्रचलित धारणा के विरोध में लेखक ने क्या तर्क दिए हैं?
Answer: लेखक रामविलास शर्मा का मानना है कि 'साहित्य समाज का दर्पण है' यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। उनका तर्क है कि समाज और साहित्य का संबंध अत्यंत गतिशील और अन्योन्याश्रित है। दर्पण तो केवल वस्तु का यथावत प्रतिबिंब प्रस्तुत करता है, जबकि साहित्यकार अपने युग की समस्याओं, संघर्षों और आदर्शों को केवल देखता ही नहीं, बल्कि उनमें सुधार लाने की चेतना भी जगाता है। साहित्य समाज का मार्गदर्शन करता है और उसे एक नई दिशा प्रदान करता है, इसलिए साहित्य को केवल दर्पण कहना उसकी सृजनात्मकता को सीमित करना है।
In simple words: साहित्य केवल समाज की नकल नहीं करता, बल्कि समाज को सुधारने और आगे बढ़ाने का मार्ग दिखाता है।

Exam Tip: लेखक के तर्कों को स्पष्ट करते समय 'दर्पण' और 'मार्गदर्शक' शब्दों का उचित प्रयोग करें।

 

Question 2. 15वीं - 16वीं सदी में हिंदी-साहित्य ने मानव जीवन के विकास में क्या भूमिका निभाई?
Answer: 15वीं और 16वीं सदी का कालखंड भारतीय इतिहास और विशेषकर हिंदी साहित्य में भक्तिकाल के रूप में स्वर्ण युग माना जाता है। इस काल में हिंदी साहित्य ने मानव जीवन के विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संतों और भक्तों (जैसे कबीर, सूरदास, तुलसीदास, मीरा) ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में व्याप्त जातिभेद, पाखंड, ऊँच-नीच और धार्मिक संकीर्णता का विरोध किया। उन्होंने मानवता, प्रेम, समानता, और भाईचारे का संदेश देकर निराश और शोषित समाज को एक नई ऊर्जा और जीने की राह दिखाई।
In simple words: भक्तिकाल के साहित्य ने समाज से कुप्रथाओं को दूर कर प्रेम, समानता और मानवता का संदेश फैलाया।

Exam Tip: इस उत्तर में भक्तिकाल के कवियों और उनके संदेशों का संक्षिप्त उल्लेख अवश्य करें।

 

Question 3. साहित्यकार के लिए स्रष्टा और द्रष्टा होना अत्यंत अनिवार्य है - क्यों और कैसे?
Answer: साहित्यकार के लिए 'स्रष्टा' (रचना करने वाला) और 'द्रष्टा' (दूरदर्शी या दृष्टा - जो सत्य को गहराई से देखता है) दोनों होना अनिवार्य है। 'द्रष्टा' वह है जो अपने समय और समाज की गहराइयों को, उसकी समस्याओं और संभावनाओं को स्पष्ट रूप से देख और समझ सके। 'स्रष्टा' वह है जो उस देखे हुए यथार्थ को अपनी कला और शब्दों के माध्यम से एक सुंदर और प्रभावशाली साहित्यिक कृति का रूप दे सके। जब तक लेखक समाज को सही दृष्टि से देखेगा नहीं (द्रष्टा नहीं बनेगा), तब तक वह समाजोपयोगी और महान साहित्य की रचना (स्रष्टा) नहीं कर सकता।
In simple words: अच्छा साहित्य लिखने के लिए समाज की गहरी समझ (द्रष्टा) और उसे रचना में ढालने की कला (स्रष्टा) दोनों जरूरी हैं।

Exam Tip: 'स्रष्टा' और 'द्रष्टा' शब्दों के शाब्दिक अर्थ को स्पष्ट करते हुए उत्तर की शुरुआत करें।

 

Question 4. रामविलास शर्मा का साहित्यिक जीवन परिचय दीजिए।
Answer: डॉ. रामविलास शर्मा हिंदी के प्रख्यात आलोचक, निबंधकार, विचारक और भाषाविद् थे। उनका जन्म 10 अक्टूबर 1912 को उन्नाव (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उन्होंने अंग्रेजी में एम.ए. और पीएचडी की उपाधि प्राप्त की और लंबे समय तक अध्यापन कार्य किया। वे प्रगतिशील लेखक संघ से गहराई से जुड़े रहे। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'भारत में अंग्रेजी राज और मार्क्सवाद', 'प्रेमचंद और उनका युग', 'निराला की साहित्य साधना', 'भारतेन्दु हरिश्चंद्र' और 'भाषा और समाज' शामिल हैं। उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। उनका निधन 30 मई 2000 को हुआ।
In simple words: डॉ. रामविलास शर्मा महान आलोचक थे जिन्होंने मार्क्सवादी दृष्टिकोण से हिंदी साहित्य का ऐतिहासिक मूल्यांकन किया।

Exam Tip: लेखक की प्रमुख कृतियों और उनकी आलोचनात्मक दृष्टि के मुख्य बिंदुओं को बुलेट पॉइंट्स में लिखें।

 

2. हजारी प्रसाद द्विवेदी - कुटज

Question 1. 'जीना भी एक कला है' - कुटज के आधार पर सिद्ध कीजिए।
Answer: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित निबंध 'कुटज' में लेखक ने कुटज के पौधे के माध्यम से जीवन जीने की कला का गहरा संदेश दिया है। कुटज (शिरीष या केतकी जैसा एक पर्वतीय पौधा) अत्यधिक विषम, शुष्क और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी हिमालय की चट्टानों पर चट्टान को चीरकर जीता है। वह किसी के सामने हाथ नहीं फैलाता, बल्कि अपनी शक्ति से जीवित रहता है। लेखक के अनुसार, जीवन सिर्फ सांसें चलाना नहीं है, बल्कि हर परिस्थिति में अपनी स्वाभिमान और जीने की इच्छा शक्ति को बनाए रखना ही असली जीना है।
In simple words: कठिन परिस्थितियों में भी हार न मानकर शान से जीना ही कुटज सिखाता है।

Exam Tip: कुटज के संघर्ष और स्वाभिमान के गुणों को मुख्य रूप से अपने उत्तर में दर्शाएं।

 

Question 2. पाठ के आधार पर सिद्ध कीजिए कि 'दुख और सुख तो मन के विकल्प हैं'।
Answer: 'कुटज' निबंध में आचार्य द्विवेदी जी बताते हैं कि जीवन में सुख और दुख बाहरी परिस्थितियों से ज्यादा हमारे मन की स्थिति पर निर्भर करते हैं। जो व्यक्ति मन से कमजोर होता है, वह छोटी-छोटी बाधाओं से टूट जाता है और उसे हर तरफ दुख ही दुख दिखाई देता है। इसके विपरीत, जो व्यक्ति मानसिक रूप से दृढ़ और संतोषी होता है, वह विकट से विकट परिस्थितियों में भी प्रसन्न रहता है। कुटज का पौधा भी यही सिखाता है कि अभावों में भी जो व्यक्ति निराश नहीं होता, उसके लिए सारे दुख अर्थहीन हो जाते हैं।
In simple words: सुख और दुख का अनुभव हमारे मन के नजरिए पर निर्भर करता है, परिस्थितियों पर नहीं।

Exam Tip: मानसिक दृढ़ता और दृष्टिकोण के महत्व को उदाहरण सहित स्पष्ट करें।

 

Question 3. हजारी प्रसाद द्विवेदी की भाषा-शैली और रचनाओं पर टिप्पणी कीजिए।
Answer: आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हिंदी के निबंधकार, उपन्यासकार और इतिहासकार के रूप में जाने जाते हैं। उनकी भाषा संस्कृतनिष्ठ, परिमार्जित, गंभीर और प्रांजल है, जिसमें आम बोलचाल के शब्दों का भी सुंदर समन्वय मिलता है। उनकी शैली में पांडित्य, व्यंग्य, संवादात्मकता और विचारात्मकता का अद्भुत मिश्रण है। उनकी प्रमुख रचनाओं में उपन्यास - 'बाणभट्ट की आत्मकथा', 'पुनर्नवा', 'चारु चंद्रलेख'; निबंध संग्रह - 'कल्पलता', 'अशोक के फूल', 'कुटज', 'विचार और वितर्क'; तथा आलोचना ग्रंथ - 'हिंदी साहित्य की भूमिका' प्रमुख हैं।
In simple words: द्विवेदी जी की भाषा संस्कृत के शब्दों से युक्त और शैली अत्यधिक ज्ञानात्मक व विचारात्मक है।

Exam Tip: उपन्यास, निबंध और आलोचना तीनों श्रेणियों से कम से कम एक-एक प्रसिद्ध रचना का नाम अवश्य लिखें।

 

3. ममता कालिया - दूसरा देवदास

Question 1. निम्न पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए -
क. 'उसके चेहरे पर इतना विभोर विनीत भाव था मानो उसने अपना सारा अहम् त्याग दिया है, उसके अंदर स्व से जनित कोई कुंठा शेष नहीं है, वह शुद्ध रूप से चेतनस्वरूप, आत्माराम, निर्मलानंद है।'
ख. 'एकदम अंदर के प्रकोष्ठा में चामुंडा रूप धारिणी मंसादेवी स्थापित थी। व्यापार यहाँ भी था।'

Answer:
क. इन पंक्तियों का आशय यह है कि जब मनुष्य अपने अहंकार (अहम्) और हीनभावना (कुंठा) को पूरी तरह त्याग देता है, तब उसका मन एकदम पवित्र और शांत हो जाता है। वह व्यक्ति स्वार्थ की सीमाओं से ऊपर उठकर आत्मिक आनंद और दिव्यता का अनुभव करता है, जैसा कि कहानी के पात्र की मनोस्थिति को देखकर महसूस होता है।
ख. इन पंक्तियों का आशय धार्मिक स्थलों और मंदिरों में प्रचलित व्यावसायिकता और पाखंड पर व्यंग्य करना है। लेखक यह बताना चाहता है कि जहाँ एक ओर लोग बाहर से बड़े शांत और धार्मिक दिखाई देते हैं, वहीं दूसरी ओर उनके भीतर स्वार्थ, क्रूरता (चामुंडा रूप) और पैसे कमाने की लालसा (व्यापार) छिपी होती है।
In simple words: पहली पंक्ति अहंकारहीन पवित्र मन को दर्शाती है, जबकि दूसरी पंक्ति मंदिरों में फैले व्यावसायिक पाखंड पर व्यंग्य करती है।

Exam Tip: दोनों गद्यांशों के संदर्भ और लेखिका ममता कालिया के व्यंग्यात्मक दृष्टिकोण को स्पष्ट करें।

 

Question 2. 'दूसरा देवदास' कहानी के शीर्षक की सार्थकता पर विचार कीजिए।
Answer: 'दूसरा देवदास' ममता कालिया की एक अत्यंत भावुक और आधुनिक संवेदना वाली कहानी है। शरत्चंद्र चट्टोपाध्याय के प्रसिद्ध उपन्यास 'देवदास' का नायक देवदास पारो के वियोग और असफल प्रेम के कारण शराब के नशे में अपनी जीवनलीला समाप्त कर लेता है। इसके विपरीत, इस कहानी का मुख्य पात्र संदीप आधुनिक युग का युवा है जो प्रेम में निराशा मिलने पर जीवन से हार नहीं मानता, बल्कि गंगा के तट पर बैठकर अपनी पीड़ा को सहता है और आत्महत्या या नशे के रास्ते पर न जाकर जीवन की वास्तविकता को स्वीकार करता है। इस प्रकार, यह आधुनिक संदर्भ का 'देवदास' है जो परिस्थितियों से लड़ना जानता है, इसलिए शीर्षक पूर्णतः सार्थक है।
In simple words: पारंपरिक देवदास की तरह यह पात्र हार नहीं मानता, बल्कि आधुनिक समय में संघर्ष करते हुए जीता है, इसलिए शीर्षक सार्थक है।

Exam Tip: पारंपरिक देवदास और इस कहानी के पात्र के दृष्टिकोण में अंतर स्पष्ट करते हुए उत्तर समाप्त करें।

 

4. घनानंद - कवित्त

Question 1. घनानंद की प्रेमभावना पर टिप्पणी कीजिए।
Answer: रीतिकाल के मुक्तक कवि घनानंद की प्रेमभावना अत्यंत गहरी, सच्ची और एकनिष्ठ है। वे 'सुजान' नामक नर्तकी से अगाध प्रेम करते थे। उनका प्रेम केवल शारीरिक आकर्षण न होकर आत्मा का समर्पण था। उनके काव्य में प्रेम की पीड़ा (विरह) का अत्यंत मर्मस्पर्शी और यथार्थ चित्रण मिलता है। घनानंद के अनुसार प्रेम का मार्ग सीधा और सरल है, जहाँ चतुराई या छल-कपट के लिए कोई स्थान नहीं है। विरह की कसौटी पर कसा हुआ उनका प्रेम शुद्ध स्वर्ण की भांति चमकता है।
In simple words: घनानंद का प्रेम सच्चा और एकनिष्ठ था जिसमें विरह की पीड़ा और आत्मसमर्पण की पराकाष्ठा मिलती है।

Exam Tip: प्रेम में 'विरह की प्रधानता' और 'छल-रहित मार्ग' बिंदुओं को अपने उत्तर में मुख्य रूप से शामिल करें।

 

Question 2. घनानंद की भाषा संबंधी विशेषताएँ लिखिए।
Answer: घनानंद ब्रजभाषा के सिद्धहस्त और महान कवि माने जाते हैं। उनकी भाषा संबंधी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. उनकी ब्रजभाषा अत्यंत परिमार्जित, मधुर, प्रवाहमयी और साहित्यिक है।
2. उन्होंने बोलचाल के शब्दों के साथ-साथ मुहावरों और लोकोक्तियों का अत्यंत सटीक प्रयोग किया है।
3. उनकी भाषा में लाक्षणिकता और व्यंजना शक्ति का अद्भुत प्रयोग देखने को मिलता है।
4. उनके काव्य में कृत्रिमता का अभाव है, भावों के अनुसार ही शब्दों का स्वतः चयन हुआ है।
In simple words: घनानंद की ब्रजभाषा बहुत ही स्वाभाविक, मधुर और लाक्षणिक है जिसमें मुहावरों का सुंदर प्रयोग है।

Exam Tip: ब्रजभाषा पर अधिकार और लाक्षणिकता शब्द का प्रयोग उत्तर में अवश्य करें।

 

अंतराल - आरोहण

Question 1. पर्वतारोहण पर्वतीय लोगों की दिनचर्या है, वही दिनचर्या अब आजीविका का माध्यम बन गई है - कैसे?
Answer: पर्वतीय क्षेत्रों (जैसे हिमालयी इलाकों) में रहने वाले लोगों के लिए ऊँचे-नीचे पहाड़ों पर चढ़ना और उतरना उनकी दैनिक जीवनशैली या दिनचर्या का एक स्वाभाविक हिस्सा होता है। वे बचपन से ही कठिन रास्तों और ढलानों पर चलने के आदी होते हैं। समय के साथ जब देश-विदेश से पर्यटक और पर्वतारोहण के शौकीन लोग इन क्षेत्रों में आने लगे, तब पर्वतीय लोगों की यही सहज दिनचर्या उनकी आजीविका (कमाई का साधन) बन गई। वे पर्यटकों के लिए गाइड, पोर्टर (कुली), कैंप व्यवस्थापक और रक्षक की भूमिका निभाकर अपनी आजीविका कमाने लगे।
In simple words: पहाड़ों पर चलना पहाड़ी लोगों का रोजमर्रा का काम था, जो अब पर्यटकों की मदद करके पैसे कमाने का जरिया बन गया है।

Exam Tip: पर्वतीय जीवन की सहजता और पर्यटन व्यवसाय के विकास के अंतर्संबंध को स्पष्ट करें।

 

Question 2. शैला और रूप ने मिलकर किस तरह पहाड़ पर अपनी मेहनत से नई जिंदगी की कहानी लिखी?
Answer: शैला और रूप ने विपरीत परिस्थितियों और सामाजिक वर्जनाओं से लड़कर पहाड़ की कठिन चट्टानों और बंजर भूमि पर अपनी कड़ी मेहनत से एक नई जिंदगी की शुरुआत की। उन्होंने हार मानने के बजाय पर्वतीय क्षेत्र में कृषि, बागवानी और अन्य कठिन श्रम वाले कार्यों को अपनाया। अपनी अदम्य जिजीविषा और आपसी सहयोग से उन्होंने न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण किया, बल्कि समाज के सामने यह मिसाल पेश की कि दृढ़ संकल्प और मेहनत से किसी भी बंजर या कठिन परिस्थिति को खुशहाल जीवन में बदला जा सकता है।
In simple words: दोनों ने कड़ी मेहनत और संघर्ष से पर्वतीय इलाके में अपने लिए एक सफल और स्वावलंबन भरी जिंदगी बनाई।

Exam Tip: संघर्ष, मेहनत और स्वावलंबन जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए उत्तर को प्रभावशाली बनाएं।

 

बिस्कोहर की माटी

Question 1. पाठ के लेखक का नाम लिखें तथा बताएँ कि यह अंश कहाँ से उद्धृत है?
Answer: पाठ 'बिस्कोहर की माटी' के लेखक प्रसिद्ध कथाकार **विश्वनाथ त्रिपाठी** जी हैं। यह संस्मरणात्मक निबंध लेखक की चर्चित आत्मकथात्मक कृति **'देवा का बचपन'** या उनके प्रसिद्ध संस्मरण संग्रह से उद्धृत किया गया है, जिसमें लेखक ने अपने गाँव बिस्कोहर के प्राकृतिक परिवेश, पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं और अपने बचपन की स्मृतियों का बहुत ही सजीव चित्रण किया है।
In simple words: इस पाठ के लेखक विश्वनाथ त्रिपाठी हैं और यह उनकी ग्रामीण स्मृतियों पर आधारित आत्मकथात्मक अंश है।

Exam Tip: लेखक का नाम और उनकी मूल पुस्तक/संग्रह का नाम बिल्कुल सटीक लिखें।

 

Question 2. 'बच्चे का माँ का दूध पीना सिर्फ दूध पीना नहीं, माँ से बच्चे के सारे संबंधों का जीवन-चरित होता है' - टिप्पणी कीजिए।
Answer: इस कथन का आशय यह है कि शिशु का अपनी माँ का स्तनपान करना केवल शारीरिक पोषण या भूख मिटाने की क्रिया नहीं है, बल्कि यह माँ और बच्चे के बीच के अगाध भावनात्मक, मानसिक और आत्मिक जुड़ाव का प्रतीक है। दूध पीते समय बच्चा माँ की धड़कन, उसकी गर्माहट, उसके दुलार और उसकी ममता को महसूस करता है। यह स्पर्श बच्चे के जीवन का पहला और सबसे मजबूत भावनात्मक पाठ होता है जो उसके संपूर्ण व्यक्तित्व और जीवन के संस्कारों की नींव रखता है।
In simple words: माँ का दूध सिर्फ आहार नहीं, बल्कि बच्चे के साथ उसके प्रेम, सुरक्षा और जीवनभर के रिश्ते की पहली कड़ी है।

 

Question 1. विशेष लेखन क्या है? कुछ विशेष क्षेत्रों के नाम लिखिए।
Answer: जब किसी सामान्य समाचार से हटकर किसी विशेष, गंभीर या खास विषय पर गहरी छानबीन, विश्लेषण और तकनीकी जानकारी के साथ रिपोर्ट तैयार की जाती है, तो उसे 'विशेष लेखन' (Specialized Writing) कहा जाता है। इसके अंतर्गत आम खबरों की रिपोर्टिंग से अलग हटकर विषय की तह तक जाया जाता है।
विशेष लेखन के कुछ प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं:
1. खेलकूद
2. व्यापार और अर्थजगत
3. विज्ञान और प्रौद्योगिकी
4. पर्यावरण और जलवायु
5. कृषि और रक्षा
In simple words: सामान्य खबरों के अलावा किसी खास और गंभीर विषय पर गहराई से लिखना विशेष लेखन कहलाता है।

Exam Tip: परिभाषा के साथ कम से कम चार-पाँच प्रमुख विशेष क्षेत्रों के नाम अवश्य लिखें।

 

Question 2. 'बीट' किसे कहते हैं?
Answer: पत्रकारिता की भाषा में 'बीट' रिपोर्टर के कार्यक्षेत्र या रिपोर्टिंग के नियत क्षेत्र को कहा जाता है। समाचार पत्र या मीडिया संस्थान में काम करने वाले संवाददाताओं (रिपोर्टर्स) के बीच उनकी रुचि, विशेषज्ञता और क्षमता के अनुसार खबरें कवर करने के क्षेत्र बाँट दिए जाते हैं, जैसे खेल बीट, अपराध (क्राइम) बीट, राजनीतिक बीट, शिक्षा बीट आदि। रिपोर्टर को अपनी बीट से जुड़ी हर छोटी-बड़ी खबर पर नजर रखनी होती है।
In simple words: किसी पत्रकार को उसकी रुचि के अनुसार रिपोर्टिंग के लिए सौंपा गया खास क्षेत्र 'बीट' कहलाता है।

Exam Tip: 'बीट' पत्रकारिता का एक तकनीकी शब्द है, इसे स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।

 

Question 3. 'बीट रिपोर्टिंग' और 'विशेष रिपोर्टिंग' में क्या अंतर है?
Answer: 'बीट रिपोर्टिंग' और 'विशेष रिपोर्टिंग' में मुख्य अंतर निम्नलिखित है:
- **बीट रिपोर्टिंग:** इसमें रिपोर्टर अपनी तयशुदा बीट (क्षेत्र) की रोजमर्रा की नियमित खबरें, घटनाएँ और सूचनाएँ एकत्र करता है (जैसे अपराध बीट या खेल बीट की रोज की खबरें)। इसमें सामान्य जानकारी और त्वरित कवरेज पर जोर होता है।
- **विशेष रिपोर्टिंग:** इसमें किसी सामान्य खबर से हटकर किसी विशेष, जटिल या गंभीर विषय पर गहरी छानबीन, आँकड़ों के विश्लेषण और पृष्ठभूमि के साथ रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसके लिए नियमित बीट रिपोर्टर होना जरूरी नहीं है, बल्कि इसके लिए गहन शोध की आवश्यकता होती है।
In simple words: बीट रिपोर्टिंग दैनिक नियमित खबरें एकत्र करना है, जबकि विशेष रिपोर्टिंग किसी खास विषय पर गहन शोध और विश्लेषण के साथ की जाती है।

Exam Tip: दोनों के बीच अंतर को स्पष्ट करने के लिए नियमितता और गहन विश्लेषण शब्दों का प्रयोग करें।

 

Question 4. विशेष लेखन की भाषा शैली कैसी होनी चाहिए?
Answer: विशेष लेखन की भाषा शैली विषय के अनुसार लचीली, स्पष्ट, प्रांजल और बोधगम्य होनी चाहिए। इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं:
1. भाषा सरल और आम पाठकों की समझ में आने वाली होनी चाहिए, भले ही विषय तकनीकी (जैसे विज्ञान या अर्थशास्त्र) हो।
2. यदि विषय से संबंधित कोई विशेष तकनीकी शब्दावली (Jargon) है, तो उसका प्रयोग स्पष्टीकरण के साथ किया जाना चाहिए।
3. शैली आलेखीय, विश्लेषणात्मक और तथ्यात्मक होनी चाहिए जिसमें आँकड़ों और चार्ट्स का उचित प्रयोग हो।
In simple words: विशेष लेखन की भाषा गंभीर और तथ्यात्मक होने के साथ-साथ आम पाठकों के लिए समझने में आसान होनी चाहिए।

Exam Tip: तकनीकी शब्दों के प्रयोग और सरलता के संतुलन पर विशेष बल दें।

 

Question 5. विशेष रिपोर्टिंग की सूचनाओं के स्रोत कौन-कौन से हो सकते हैं?
Answer: विशेष रिपोर्टिंग के लिए सूचनाओं और तथ्यों के स्रोत निम्नलिखित हो सकते हैं:
1. सरकारी विभाग, मंत्रालय और उनके द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेज व आंकड़े।
2. संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री और बुद्धिजीवी।
3. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान, थिंक टैंक और सर्वे रिपोर्ट्स।
4. पीड़ित पक्ष, चश्मदीद गवाह और जमीनी स्तर पर धरातल से जुटाए गए आंकड़े।
5. इंटरनेट, प्रतिष्ठित पत्रिकाएं, पुस्तकें और अभिलेखागार (Archives)।
In simple words: सरकारी दस्तावेज, विशेषज्ञ साक्षात्कार, शोध रिपोर्ट और जमीनी आंकड़े विशेष रिपोर्ट के मुख्य स्रोत होते हैं।

 

Question 6. विज्ञान के क्षेत्र में काम कर रही भारत की पाँच संस्थाओं के नाम लिखो।
Answer: विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रही भारत की पाँच प्रमुख संस्थाएँ निम्नलिखित हैं:
1. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO - इस्रो)
2. भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC - बार्क)
3. वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR - सीएसआईआर)
4. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO - डीआरडीओ)
5. भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc - आईआईएससी, बेंगलुरु)
In simple words: ISRO, BARC, CSIR, DRDO और IISc भारत की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाएँ हैं।

Exam Tip: संस्थाओं के पूरे नाम हिंदी और कोष्ठक में उनके संक्षिप्त अंग्रेजी नाम भी लिखें।

 

Question 7. पर्यावरण पर छपने वाली किन्हीं तीन पत्रिकाओं के नाम लिखो।
Answer: पर्यावरण, प्रकृति और जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित भारत की तीन प्रसिद्ध पत्रिकाएँ निम्नलिखित हैं:
1. डाउन टू अर्थ (Down To Earth)
2. सैपियंस (Sapiens - पर्यावरण व विज्ञान केंद्रित)
3. प्रकृति और पर्यावरण / पर्यावरण डाइजेस्ट (या वल्र्ड वाइफ फंड पत्रिका)
In simple words: 'डाउन टू अर्थ' पर्यावरण से जुड़ी देश की सबसे प्रसिद्ध पत्रिका है।

Exam Tip: 'डाउन टू अर्थ' पत्रिका का नाम अवश्य लिखें क्योंकि यह पर्यावरण पत्रकारिता में सबसे चर्चित है।

 

Question 8. दिल्ली महानगर में स्त्रियों की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त करते हुए किसी समाचार पत्र के संपादक को पत्र लिखो।
Answer:
सेवा में,
संपादक महोदय,
दैनिक हिन्दुस्तान,
नई दिल्ली।

विषय: दिल्ली महानगर में महिलाओं की असुरक्षा और बढ़ते अपराधों पर चिंता व्यक्त करते हुए।

महोदय,
आपके लोकप्रिय समाचार पत्र के माध्यम से मैं दिल्ली महानगर में महिलाओं की सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति पर प्रशासन और आम जनता का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ।

आज राजधानी दिल्ली में महिलाएँ किसी भी समय, चाहे दिन हो या रात, अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही हैं। सूनसान सड़कें, खराब स्ट्रीट लाइटें, बसों और मेट्रो में बढ़ती छेड़छाड़, और रात के समय पुलिस गश्त की कमी ने अपराधियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं। निर्भया कांड जैसी वीभत्स घटनाओं के बाद भी समाज और व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं आया है। आए दिन अखबारों में महिलाओं के खिलाफ अपराध की खबरें पढ़ने को मिलती हैं, जिससे हर संवेदनशील नागरिक का सिर शर्म से झुक जाता है।

अतः आपके प्रतिष्ठित समाचार पत्र के स्तंभों के माध्यम से मैं सरकार और पुलिस प्रशासन से यह पुरजोर मांग करता हूँ कि वे सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करें, हर कोने में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, पुलिस गश्त बढ़ाई जाए और दोषियों को त्वरित व कठोर सजा दी जाए ताकि दिल्ली की महिलाओं को एक भयमुक्त और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

धन्यवाद।

भवदीय,
क.ख.ग.
रोहिणी, नई दिल्ली。
Answer: (उपर्युक्त प्रारूप औपचारिक पत्र लेखन का मानक प्रारूप है, जिसे परीक्षा में ज्यों का त्यों लिखा जाना चाहिए।)
In simple words: यह औपचारिक पत्र दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा की मांग करते हुए संपादक के नाम लिखा गया है।

Exam Tip: पत्र लिखते समय औपचारिक पत्र के प्रारूप (प्रेषक, सेवा में, विषय, संबोधन, मुख्य भाग, और हस्ताक्षर) का पूर्ण पालन करें।

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