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CBSE Class 12 HIndi Sure Shot Questions (3). CBSE issues sample papers every year for students for class 12 board exams. Students should solve the CBSE issued sample papers to understand the pattern of the question paper which will come in class 12 board exams this year. The sample papers have been provided with marking scheme. It’s always recommended to practice as many CBSE sample papers as possible before the board examinations. Sample papers should be always practiced in examination condition at home or school and the student should show the answers to teachers for checking or compare with the answers provided. Students can download the sample papers in pdf format free and score better marks in examinations. Refer to other links too for latest sample papers.
सुनिश्चित लघुत्तरात्मक प्रश्न
(क) आरोह भाग-2 (काव्य-खण्ड)
Question 1. मैं और, और जग और कहाँ का नाता - पंक्ति में और शब्द की विशेषता बताइए |
Answer: इस पंक्ति में 'और' शब्द का तीन बार अलग-अलग अर्थों में प्रयोग हुआ है, जिसके कारण यहाँ यमक अलंकार की सुंदर छटा दर्शनीय है। पहले 'और' का अर्थ है - मेरा स्वभाव दुनिया से भिन्न है, दूसरे 'और' का अर्थ है - यह संसार एक अलग ही ढंग का है, तथा तीसरे 'और' का अर्थ है - हम दोनों के बीच कोई सीधा संबंध (नाता) नहीं है। इस प्रकार, 'और' शब्द यहाँ कवि और संसार के बीच के विरोधाभास और अलगाव को विशिष्टता से प्रकट करता है।
In simple words: यहाँ 'और' शब्द तीन बार आया है और हर बार उसका मतलब अलग है। कवि खुद को और दुनिया को बिल्कुल अलग-अलग स्वभाव का बताते हैं।
Exam Tip: परीक्षा में यमक अलंकार का नाम और तीनों 'और' शब्दों के अलग-अलग अर्थ स्पष्ट रूप से लिखने पर ही पूरे अंक मिलते हैं।
Question 3. शीतल वाणी में आग -के होने का क्या आशय है ?
Answer: 'शीतल वाणी में आग' होने का आशय यह है कि कवि की वाणी बाहरी तौर पर भले ही अत्यंत कोमल, मधुर और शांत (शीतल) लगती हो, परंतु उनके हृदय के भीतर समाज की विसंगतियों और कुरीतियों के विरुद्ध गहरे आक्रोश, विद्रोह और प्रेम की तीव्र तड़प की ऊष्मा (आग) विद्यमान है। यह विरोधाभास उनके आंतरिक संघर्ष को प्रकट करता है।
In simple words: कवि की आवाज़ भले ही मीठी और शांत हो, लेकिन उनके विचारों में क्रांति और बदलाव लाने का गहरा जोश है।
Exam Tip: उत्तर लिखते समय "वाणी की बाहरी कोमलता" और "भीतर छिपी क्रांति/विद्रोह की आग" के विरोधाभास को स्पष्ट रूप से रेखांकित करें।
Question 4. hदन जल्दी-जल्दी ढलता क्यों जान पड़ता है ?
Answer: जब कोई पथिक या अपने घोंसलों की ओर लौटती चिड़िया अपने गंतव्य के करीब पहुँचती है, तो उनके मन में अपने प्रियजनों और बच्चों से मिलने की व्याकुलता और उत्कंठा तीव्र हो जाती है। इस आतुरता और प्रियजनों की चिंता के कारण उनके पैरों की गति तेज हो जाती है और उनके लिए समय अत्यंत तेजी से बीतता हुआ महसूस होता है, जिससे दिन जल्दी-जल्दी ढलता हुआ प्रतीत होता है।
In simple words: जब हमें अपने घर पहुँचने की जल्दी होती है या किसी प्रियजन से मिलने की तीव्र इच्छा होती है, तो हमें लगता है कि समय बहुत जल्दी-जल्दी भाग रहा है।
Exam Tip: उत्तर में "प्रियजनों से मिलने की व्याकुलता/चिंता" और "समय का तेजी से बीतना" दोनों बिंदुओं को मिलाकर लिखें।
Question 5. जन्भ से ही िे अऩने साथ राते हैं कऩास –फच्िों के फाये भें ऐसा तमों कहा गमा है ?
Answer: बच्चों के संबंध में ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि कपास की तरह बच्चे भी अत्यंत कोमल, पवित्र, निर्मल और लचीले स्वभाव के होते हैं। उनके शरीर में गजब की कोमलता और लचीलापन होता है, जिसके कारण वे किसी भी प्रकार की चोट, गिरने या आघात को आसानी से सहन कर लेते हैं। कपास का हल्कापन और निश्छलता उनके बाल-मन का प्रतिनिधित्व करती है।
In simple words: बच्चों का शरीर कपास की तरह बहुत नरम और लचीला होता है। उनमें किसी भी मुश्किल या चोट को सहने की गजब की क्षमता होती है।
Exam Tip: कपास की स्वाभाविक विशेषताओं (कोमलता, हल्कापन, लचीलापन) को बच्चों की शारीरिक और मानसिक प्रवृत्तियों से जोड़कर समझाएं।
Question 6. ऩतॊगों के साथ-साथ िे बी उड़ यहे हैं - फच्िों का उड़ान से कै सा सम्फन्ध फनता है ?
Answer: पतंग उड़ाते समय बच्चों का मन और उनकी कल्पनाएँ भी पतंग की ऊंचाइयों के साथ आकाश में गोते लगाने लगती हैं। पतंग की हर एक ऊँची उड़ान के साथ बच्चों के हृदय का रोमांच, उत्साह और आनंद भी नई ऊंचाइयों को छूता है। इस प्रकार, पतंग की भौतिक उड़ान बच्चों के बाल-मन की आंतरिक उमंग और कल्पनाओं की उड़ान का माध्यम बन जाती है।
In simple words: पतंग को आसमान छूता देखकर बच्चों का मन भी खुशी और उमंग से झूम उठता है। पतंग की ऊंचाई उनकी खुद की कल्पनाओं की उड़ान बन जाती है।
Exam Tip: पतंग की "ऊंचाई" और बच्चों के "उत्साह/रोमांच" के आत्मीय व भावनात्मक संबंध को स्पष्ट रूप से समझाएं।
Question 7. ‘सफ घय एक कय देने के भाने फच्िा ही जाने’ का अथथ स्ऩष्ट कीश्जए |
Answer: इस कथन का अर्थ यह है कि बच्चे खेलते समय जात-पात, धर्म, अमीर-गरीब, या अपने-पराए जैसी संकीर्ण सामाजिक सीमाओं और भेदभावों को बिल्कुल नहीं मानते। वे हर घर को अपना समझते हैं और अपनी निश्छल क्रीड़ा से सभी को आपस में आत्मीयता से जोड़ देते हैं। उनकी दृष्टि में संपूर्ण समाज एक समान होता है।
In simple words: बच्चे बिना किसी भेदभाव के सबके साथ खेलते हैं। वे अपनी निष्कपट भावना से समाज की सभी दूरियों को मिटाकर एकता का संदेश देते हैं।
Exam Tip: "भेदभाव रहित खेल" और "सामाजिक दूरियों को मिटाना" जैसे शब्दों का प्रयोग उत्तर को अधिक प्रभावी बनाता है।
Question 8. ‘बाषा की सहूलरमत’ से फयतने से तमा अलबप्राम है ?
Answer: 'भाषा की सहूलियत बरतने' से कवि का अभिप्राय यह है कि मनुष्य को अपने मन के विचारों को व्यक्त करने के लिए जबरदस्ती कठिन, क्लिष्ट या आडंबरपूर्ण शब्दों के जाल में नहीं फंसना चाहिए। इसके स्थान पर उसे अत्यंत सरल, सहज और स्वाभाविक भाषा का प्रयोग करना चाहिए ताकि उसकी बात पाठकों या श्रोताओं तक आसानी से पहुँच सके।
In simple words: अपनी बात को हमेशा आसान शब्दों में कहना चाहिए, न कि उसे जबरदस्ती मुश्किल शब्दों से घुमा-फिराकर पेश करना चाहिए।
Exam Tip: उत्तर में "सहजता", "सरलता" और "स्वाभाविकता" जैसे कीवर्ड का प्रयोग अवश्य करें।
Question 9. ‘कै भये भें फॊद अऩाहहज’ कविता के व्मॊग को स्ऩष्ट कीश्जए |
Answer: इस कविता में आधुनिक मीडिया और दूरदर्शन संचालकों की संवेदनहीनता तथा व्यावसायिक क्रूरता पर तीखा व्यंग्य किया गया है। मीडियाकर्मी अपने व्यावसायिक लाभ और टीआरपी (TRP) को बढ़ाने के लिए एक बेबस अपाहिज व्यक्ति के निजी दुख-दर्द का खुलेआम प्रदर्शन करते हैं। वे सहानुभूति का दिखावा करके वास्तव में उसकी लाचारी का तमाशा बनाते हैं।
In simple words: यह कविता दिखाती है कि कैसे टीवी चैनल वाले अपने फायदे के लिए किसी गरीब या बेबस इंसान के दुख-दर्द को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाते हैं और दया का नाटक करते हैं।
Exam Tip: उत्तर में "मीडिया की संवेदनहीनता" और "व्यावसायिक स्वार्थ/TRP की होड़" को मुख्य रूप से रेखांकित करें।
Question 10. ‘कै भये भें फॊद अऩाहहज’ कविता करूणा के भुखौटे भें निऩी क्रूयता की कविता है- का अथथ स्ऩष्ट कीजिए |
Answer: इस कथन का अर्थ यह है कि दूरदर्शन के कार्यक्रम संचालक ऊपर से तो ऐसा ढोंग करते हैं जैसे वे अपाहिज के प्रति गहरी करुणा और हमदर्दी रखते हैं, परंतु उनका आंतरिक उद्देश्य केवल अपने कार्यक्रम को बिकाऊ बनाना होता है। इसके लिए वे उस लाचार व्यक्ति से अत्यंत असंवेदनशील, बेतुके और आहत करने वाले सवाल पूछते हैं, जो उनकी छिपी हुई क्रूर मानसिकता को उजागर करता है।
In simple words: टीवी वाले दिखावा तो दया और मदद करने का करते हैं, लेकिन असल में वे उस लाचार इंसान को रोने पर मजबूर करके अपनी क्रूरता दिखाते हैं।
Exam Tip: "सहानुभूति का बाहरी मुखौटा" और "भीतर छिपी व्यावसायिक क्रूरता" के अंतर्विरोध को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question 11. हटप्ऩणी कीश्जए - गयफीरी गयीफी, बीतय की सरयता, फहराती सहराती आत्भीमता, भभता के फादर |
Answer: इन काव्यात्मक पदों पर संक्षिप्त टिप्पणी इस प्रकार है:
- गरबीली गरीबी: इसका अर्थ है स्वाभिमान से युक्त गरीबी। कवि अपनी निर्धनता से लज्जित नहीं है, बल्कि उसे बड़े गर्व के साथ स्वीकार करता है।
- भीतर की सरिता: इसका आशय कवि के हृदय में निरंतर उमड़ने वाली कोमल मानवीय भावनाओं और नए विचारों के अनवरत प्रवाह से है।
- बहलाती सहलाती आत्मीयता: इसका तात्पर्य उस सघन आत्मीय स्पर्श और सांत्वना देने वाले स्नेह से है जो कवि को कठिन समय में मानसिक संबल प्रदान करता है।
- ममता के बादल: यह प्रिय के असीम, सघन और कल्याणकारी प्रेम को दर्शाता है, जो कवि के जीवन को हमेशा स्नेहिल शीतल छाया से घेरे रहता है।
In simple words: कवि अपनी गरीबी को स्वाभिमान से अपनाता है, उसके हृदय में भावनाओं की नदी बहती है, और प्रिय का सच्चा प्यार उसे हमेशा सांत्वना और सुकून देता है।
Exam Tip: टिप्पणी वाले प्रश्नों में प्रत्येक पद के लिए अलग-अलग उपशीर्षक बनाकर संक्षिप्त, सटीक और व्याख्यात्मक उत्तर लिखें।
Question 12. उषा के जाद टू ूटने का तमा आशम है ?
Answer: 'उषा का जादू टूटने' का आशय सूर्योदय होने से है। सूर्य के उदित होने से पूर्व भोर के समय आकाश में पल-पल बदलते अद्भुत और सम्मोहक दृश्य अत्यंत जादुई प्रतीत होते हैं। जैसे ही सूर्य क्षितिज पर उदित होता है और उसकी सुनहरी किरणें चारों ओर फैलती हैं, वैसे ही वह सारा प्राकृतिक सौंदर्य और सम्मोहन धीरे-धीरे एकदम समाप्त हो जाता है।
In simple words: सूरज उगने से पहले आसमान में जो सुंदर नजारे दिखते हैं, वे सूरज की तेज धूप आते ही गायब हो जाते हैं। इसे ही उषा का जादू टूटना कहते हैं।
Exam Tip: उत्तर में "सूर्योदय होने के कारण" और "पल-पल बदलते प्राकृतिक सौंदर्य का विलीन होना" दोनों पहलुओं को स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 13. ‘उषा’ कविता गाॉि की सुफह का गनतशील शब्दचित्र है – स्ऩष्ट कीश्जए |
Answer: इस कविता में कवि शमशेर बहादुर सिंह ने गाँव की सुबह के दृश्यों को सजीव करने के लिए राख से लीपे हुए गीले चौके, काली सिल पर पिसी हुई केसर और स्लेट पर लाल खड़िया मलने जैसे ग्रामीण बिंबों का क्रमिक प्रयोग किया है। इसमें गतिशीलता तब पैदा होती है जब ये स्थिर दृश्य धीरे-धीरे बदलते हुए सूर्योदय की लालिमा और नीले आकाश में झिलमिलाती देह के रूप में परिवर्तित होते जाते हैं।
In simple words: कवि ने गाँव की सुबह के सुंदर दृश्यों - जैसे चूल्हा लीपना, सिल पर केसर पीसना आदि को शब्दों के माध्यम से जीवंत और गतिशील रूप में पेश किया है।
Exam Tip: "ग्रामीण बिंबों" और "चित्रों के निरंतर बदलाव (गतिशीलता)" का उल्लेख करना उत्तर को पूर्ण बनाता है।
Question 14. ‘विप्रि-यि से िोटे ही हैं शोबा ऩाते’ का आशम स्ऩष्ट कीश्जए |
Answer: इसका आशय यह है कि जब भी समाज में क्रांति या विद्रोह की गर्जना (विप्लव-रव) होती है, तो उससे सदा शोषित, पीड़ित और निम्न वर्ग (छोटे लोग) ही सबसे अधिक लाभान्वित और आनंदित होते हैं। बड़ी-बड़ी अट्टालिकाओं में रहने वाले पूंजीपति वर्ग के लोग क्रांति के भय से कांप उठते हैं, जबकि आम जनता को नया जीवन और अधिकार प्राप्त होते हैं।
In simple words: जब समाज में बड़ा बदलाव या क्रांति आती है, तो उसका सबसे ज्यादा फायदा गरीब और दबे-कुचले लोगों को होता है, उन्हें सम्मान मिलता है।
Exam Tip: "क्रांति का शंखनाद" और "शोषित/गरीब वर्ग का कल्याण" जैसे प्रभावी शब्दों का प्रयोग करें।
Question 15. ‘फादर याग’ कविता की बाषागत विशेषताएॉ लरखखए |
Answer: 'बादल राग' कविता की भाषागत मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
1. इस कविता में ओज गुण से युक्त तत्सम प्रधान खड़ी बोली का अत्यंत प्रभावशाली प्रयोग किया गया है।
2. भाषा में उत्कृष्ट नाद-सौंदर्य, प्रतीकात्मकता और बिंब-योजना विद्यमान है, जिससे बादलों की गर्जना और क्रांति का कोलाहल पाठक के मन में जीवंत हो उठता है।
In simple words: कविता की भाषा वीर रस से भरी हुई है और इसमें संस्कृत के सुंदर व कड़े शब्दों का प्रयोग किया गया है जो पढ़ने में बादलों के गरजने जैसा अहसास कराते हैं।
Exam Tip: भाषा शैली की विशेषताओं में "ओज गुण", "तत्सम प्रधान खड़ी बोली" और "नाद-सौंदर्य" का उल्लेख अवश्य करें।
Question 16. तुरसीदास को अऩने मुग की आचथथक विषभता की अच्िी सभझ थी – स्ऩष्ट कीश्जए |
Answer: तुलसीदास ने अपने समय की भयानक दरिद्रता, अकाल और बेरोजगारी का अत्यंत सजीव व यथार्थ चित्रण किया है। उन्होंने कवितावली में लिखा है कि उनके समय में किसान, व्यापारी, भिखारी और चाकर सभी आजीविकाहीन थे। पेट की भूख शांत करने के लिए लोग अपने बच्चों तक को बेचने को विवश थे। यह यथार्थ चित्रण प्रमाणित करता है कि उन्हें अपने युग की आर्थिक विषमता की गहरी समझ थी।
In simple words: तुलसीदास जी के समय में बहुत गरीबी थी। लोग दाने-दाने को तरसते थे और पेट भरने के लिए गलत काम तक करने को तैयार थे। तुलसीदास ने इस लाचारी को बहुत करीब से देखा था।
Exam Tip: उत्तर में "आजीविकाहीनता", "भयानक अकाल" और "पेट की भूख के कारण लाचारी" जैसे ऐतिहासिक संदर्भों का वर्णन करें।
Question 17. ‘ति प्रताऩ उय याखी प्रबु, भें ककसके प्रताऩ की फात की गई है औय तमों ?
Answer: इस पंक्ति में हनुमान जी द्वारा भगवान श्री राम के प्रताप (महिमा और शक्ति) की बात की गई है। जब हनुमान जी मूर्छित लक्ष्मण के प्राण बचाने के लिए संजीवनी बूटी लेकर लंका लौट रहे थे, तब मार्ग में भरत जी के बाण से आहत होने के उपरांत वे उनसे कहते हैं कि हे प्रभु! मैं आपके प्रताप को हृदय में धारण कर समय रहते लंका पहुँच जाऊँगा। वे राम के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा व्यक्त करने के लिए ऐसा कहते हैं।
In simple words: यहाँ हनुमान जी ने श्री राम के प्रताप यानी उनकी महिमा की बात की है। उन्हें भरोसा था कि राम जी के नाम और शक्ति के सहारे वे लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लेकर समय पर पहुँच जाएंगे।
Exam Tip: प्रसंग का संक्षेप में उल्लेख करते हुए हनुमान जी के "राम-भक्ति" और "भरत के प्रति आदर" को रेखांकित करें।
Question 18. खद का ऩयदा खोरने से कवि का तमा आशम है ु ?
Answer: 'खुद का परदा खोलने' से कवि फ़िराक गोरखपुरी का आशय अपनी स्वयं की कमियों, दोषों, कुंठाओं या निजी कमजोरियों को जगजाहिर करना है। कवि उन लोगों पर कटाक्ष करते हैं जो दूसरों की निंदा या बुराई करके असल में समाज के सामने अपनी ही संकीर्ण सोच और चारित्रिक दुर्बलताओं का परदा खोल देते हैं।
In simple words: दूसरों की बुराई करने वाले लोग अनजाने में दुनिया को यह बता देते हैं कि वे खुद कितने बुरे और छोटी सोच वाले हैं।
Exam Tip: "निजी कमियों का उद्घाटन" और "दूसरों की निंदा करने वालों पर करारा व्यंग्य" के भाव को स्पष्ट करें।
Question 19. कवि नेककस आधाय ऩयखेत औय कागज़ के ऩन्ने की तुरना की है ?
Answer: कवि उमाशंकर जोशी ने सृजन कर्म और फसल उत्पादन की समानताओं के आधार पर चौकोने कागज के पन्ने की तुलना एक छोटे चौकोने खेत से की है। जिस प्रकार किसान खेत में अन्न का भौतिक बीज बोता है, वैसे ही कवि कागज के पन्ने पर भावों और विचारों का बीज बोता है। बाद में, खेत में फसल पकती है और कागज पर कालजयी कविता का निर्माण होता है।
In simple words: जैसे किसान खेत में बीज डालकर अनाज उगाता है, वैसे ही कवि कागज के पन्ने पर अपने विचारों के बीज बोकर एक सुंदर कविता तैयार करता है।
Exam Tip: "भावों का बीज", "कागज रूपी खेत" और "कविता रूपी अमर फसल" के रूपक को अच्छी तरह से समझाएं।
Question 20. यस का अऺमऩात्र से कवि ने यिना कभथ की ककन विशेषताओॊ की ओय इॊचगत ककमा है ?
Answer: 'रस का अक्षयपात्र' के माध्यम से कवि ने रचना कर्म की अमरता, असीमता और अक्षयता की ओर संकेत किया है। भौतिक खेत की फसल तो कटने के बाद समाप्त हो जाती है, परंतु कविता रूपी अक्षयपात्र का रस कभी समाप्त नहीं होता। पाठक इसे सदियों तक जितना अधिक ग्रहण करते हैं, इसका सौंदर्य और रस उतना ही अधिक बढ़ता जाता है।
In simple words: कविता एक ऐसा बर्तन है जिसका रस कभी खत्म नहीं होता। इसे जितनी बार भी पढ़ा जाए, यह हमेशा नया और आनंद देने वाला बना रहता है।
Exam Tip: "रचना कर्म की अमरता" और "काव्य-रस का कभी समाप्त न होना" जैसी अद्वितीय विशेषताओं को उत्तर में अवश्य लिखें।
(ख) आरोह भाग-2 (गद्य-खण्ड)
Question 21. ‘भेये नाभ की विशारता भेये लरए दिथह है’रेखखका ने ऐसा तमों कहा होगा ु ?
Answer: लेखिका महादेवी वर्मा के नाम का अर्थ 'महान देवी' है। भक्तिन जब उनके घर आई, तो वह उनके इस नाम के महात्म्य को बहुत बड़ा मानती थी। लेखिका को स्वयं लगता था कि वे एक साधारण और सहज स्वभाव की स्त्री हैं, इसलिए उनके नाम के साथ जुड़ा यह गौरव उनके वास्तविक जीवन के लिए एक भारी दायित्व या कठिन बोझ (दुर्वह) के समान था।
In simple words: लेखिका का नाम महादेवी था जिसका मतलब 'बड़ी देवी' होता है। उन्हें लगता था कि उनका नाम उनकी साधारण ज़िंदगी के मुकाबले बहुत भारी-भरकम है।
Exam Tip: नाम के शाब्दिक अर्थ ("महान देवी") और लेखिका की "सादगी/सहजता" के बीच के विरोधाभास को स्पष्ट रूप से समझाएं।
Question 22. बश्ततन अऩना िास्तविक नाभ रोगो से तमों िुऩाती थी ?
Answer: भक्तिन का वास्तविक नाम 'लक्ष्मिन' (लक्ष्मी) था, जो धन, ऐश्वर्य और समृद्धि की देवी का प्रतीक है। इसके विपरीत, उसका संपूर्ण जीवन अत्यधिक दरिद्रता, पारिवारिक उपेक्षा, संघर्ष और दुखों में बीता था। वह मानती थी कि इस नाम को जानकर लोग उसकी वर्तमान दयनीय स्थिति का उपहास उड़ाएंगे, इसी ग्लानि और उपहास से बचने के लिए वह अपना नाम छुपाती थी।
In simple words: भक्तिन का असली नाम लक्ष्मी था, लेकिन वह बहुत गरीब थी। उसे लगता था कि लोग उसके नाम का मज़ाक उड़ाएंगे, इसलिए वह अपना नाम सबसे छुपाती थी।
Exam Tip: "नाम के अर्थ और जीवन की वास्तविक विपरीत स्थिति का अंतर्विरोध" तथा "सामाजिक उपहास का भय" उत्तर के मुख्य बिंदु हैं।
Question 23. ‘ज़ेफ बयी हो औय भभन खारी हो’ का आशम स्ऩष्ट कीश्जए |
Answer: इस कथन का आशय यह है कि जब किसी मनुष्य के पास खर्च करने के लिए पर्याप्त धन तो होता है, परंतु उसे अपनी वास्तविक आवश्यकताओं का कोई ज्ञान नहीं होता (मन खाली होना)। ऐसी स्थिति में मनुष्य बाजार के कृत्रिम आकर्षण में फंस जाता है और अपनी क्रय-शक्ति दिखाने के लिए अनावश्यक और अनुपयोगी वस्तुएं खरीद लेता है, जो अंततः अशांति बढ़ाती हैं।
In simple words: जब जेब में बहुत पैसे हों पर हमें यह न पता हो कि हमें क्या खरीदना है, तो हम फालतू की चीजें खरीदकर पैसे बर्बाद कर देते हैं।
Exam Tip: "बाजारूपन", "क्रय-शक्ति (Purchasing Power)" और "अनावश्यक उपभोग" को इस कथन के माध्यम से समझाएं।
Question 24. ‘फाज़ाय को साथथकता बी िही भनुष्म देता है जो जानता है कक िह तमा िाहता है – फाज़ाय दशथन के आधाय ऩय
Answer: इस कथन का अर्थ यह है कि जो व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं के प्रति पूरी तरह सचेत होता है, वह बाजार जाकर केवल अपनी जरूरत की सामग्री खरीदता है। इससे बाजार का भी सही उपयोग होता है और ग्राहक को भी परम संतोष मिलता है। इसके विपरीत, बिना सोचे-समझे केवल दिखावे के लिए खरीदारी करने वाले लोग बाजार का शोषण करते हैं और महंगाई व बाजारूपन को बढ़ावा देते हैं।
In simple words: बाजार का सही फायदा वही उठा सकता है जिसे पता हो कि उसे क्या चाहिए। बिना जरूरत के घूमने वाले लोग केवल दिखावे और फालतू खर्च को बढ़ावा देते हैं।
Exam Tip: "बाजार की वास्तविक सार्थकता" और "आवश्यकता के अनुसार विवेकपूर्ण खरीदारी" पर विशेष बल दें।
Question 25. फाज़ाय का जाद िढ़ने औय उतयने ऩय व्मश्तत को कै सा रगता है ू ?
Answer: बाजार का जादू चढ़ने पर व्यक्ति को हर चमकीली वस्तु आकर्षक और अपने लिए अत्यंत आवश्यक प्रतीत होती है, और वह फिजूलखर्ची कर बैठता है। परंतु जब वह जादू उतरता है, तो उसे भली-भांति एहसास होता है कि जो चीजें उसने सुख और आराम के लिए खरीदी थीं, वे वास्तव में उसके जीवन में बाधा पहुँचा रही हैं और उसकी मानसिक शांति को नष्ट कर रही हैं।
In simple words: जादू चढ़ने पर सब कुछ खरीदने का मन करता है, लेकिन जादू उतरने पर समझ आता है कि फालतू का सामान घर में केवल कबाड़ और सिरदर्द बढ़ाता है।
Exam Tip: जादू चढ़ने की स्थिति ("आकर्षण और भ्रम") और जादू उतरने की स्थिति ("पश्चाताप और यथार्थ का बोध") दोनों का तुलनात्मक वर्णन करें।
Question 26. इॊदय सेना ऩय ऩानी पै कने के विषम भें जीजी औय रेखक के वििाय ककस प्रकाय लबन्न थे ?
Answer: इंद्र सेना पर पानी फेंकने को लेकर लेखक और जीजी के विचार पूरी तरह से विपरीत थे। लेखक वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखते थे, इसलिए वे इसे पानी की घोर बर्बादी, अंधविश्वास और पाखंड मानते थे। इसके विपरीत, जीजी पारंपरिक आस्था और धार्मिक विश्वास से प्रेरित थीं। उनका तर्क था कि यह पानी की बर्बादी नहीं बल्कि इंद्र देवता को दिया जाने वाला 'अर्घ्य' (दान) है, क्योंकि बिना त्याग किए फल की प्राप्ति नहीं होती।
In simple words: लेखक इसे पानी की बर्बादी और अंधविश्वास कहते थे, जबकि जीजी का मानना था कि बारिश पाने के लिए यह इंद्र देव को दिया जाने वाला एक जरूरी दान है।
Exam Tip: लेखक के "तार्किक व वैज्ञानिक दृष्टिकोण" और जीजी के "धार्मिक विश्वास व त्याग के सिद्धांत" की तुलना स्पष्ट शब्दों में करें।
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Question 27. आशम स्ऩष्ट कीश्जए-‘ऩानी झभाझभ फयसता है ऩय गगयी पुटी की पुटी यह जाती है, फैर वऩमासे के प्मासे यह जाते हैं |’
Answer: इस कथन के माध्यम से लेखक ने स्वतंत्र भारत की दोषपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था, योजनाओं की विफलता और सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर तीखा कटाक्ष किया है। सरकार द्वारा जन कल्याण के लिए भारी बजट और अनेक योजनाएं (पानी का बरसना) भेजी जाती हैं, परंतु भ्रष्टाचार के कारण वे योजनाएं धरातल पर जरूरतमंदों (गगरी और बैल) तक नहीं पहुँच पातीं, और गरीब जनता सदैव विकास से वंचित रह जाती है।
In simple words: सरकार से बहुत सारा पैसा और मदद आती है, लेकिन भ्रष्टाचार की वजह से वह गरीब जनता तक नहीं पहुँच पाती और वे हमेशा की तरह परेशान ही रहते हैं।
Exam Tip: "विकास योजनाओं की विफलता" और "प्रशासनिक भ्रष्टाचार/कमियों" को इस रूपक के जरिए भली-भांति स्पष्ट करें।
Question 28. ‘ऩहरिान की ढोरक’ ऩाठ के आधाय ऩय याजा साहफ के िरयत्र की कोई दो विशेषताएॉ फताओ ?
Answer: 'पहलवान की ढोलक' पाठ के आधार पर राजा साहब के चरित्र की दो प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
1. कला-प्रेमी और पारखी व्यक्तित्व: वे कला और प्रतिभा के सच्चे संरक्षक थे, इसीलिए उन्होंने लुट्टन पहलवान की हिम्मत और प्रतिभा को पहचानकर उसे अपने राज-दरबार में आश्रय और सम्मान दिया।
2. संवेदनशील और प्रजावत्सल शासक: वे अपनी प्रजा के दुख-दर्द के प्रति संवेदनशील थे और उन्होंने हमेशा अपनी प्रजा के हितों की रक्षा की तथा लुट्टन का भरण-पोषण किया।
In simple words: राजा साहब अच्छे लोगों की कद्र करना जानते थे और लुट्टन पहलवान की मदद करके उन्होंने अपनी दयालुता दिखाई।
Exam Tip: राजा साहब के लुट्टन पहलवान को "राज-दरबार में स्थान देने" और उनकी "संवेदनशीलता" से संबंधित प्रसंग का उल्लेख करें।
Question 29. ‘ढोरक की थाऩ भत गाॉि भें सॊजीिनी शश्तत बायती यहती थी ृ ’ कै से ? स्ऩष्ट कीश्जए |
Answer: अकाल और महामारी (हैजा और मलेरिया) के कारण जब पूरे गाँव में मौत का सन्नाटा छाया हुआ था और लोग दम तोड़ रहे थे, तब लुट्टन पहलवान की ढोलक की आवाज रात भर गूंजती थी। यह आवाज मृतप्राय हो चुके ग्रामीणों के मन से मौत के भयानक डर को कम करती थी। ढोलक की थाप उनके भीतर जीने का हौसला जगाती थी और उनकी सुस्त पड़ चुकी नसों में संघर्ष करने की संजीवनी शक्ति भरती थी।
In simple words: महामारी के समय जब हर तरफ मौत छाई थी, तब पहलवान की ढोलक की आवाज लोगों को हिम्मत देती थी और उनके मन से मौत का डर दूर भगाती थी।
Exam Tip: "रात के सन्नाटे को तोड़ना", "मौत का भय कम करना" और "जीने की इच्छा व साहस जगाना" जैसे कीवर्ड का प्रयोग करें।
Question 30. लसद्ाॊत करा को जन्भ देते हैं मा करा लसद्ाॊतों को जन्भ देती है ? स्ऩष्ट कीश्जए |
Answer: वास्तव में कला पहले अस्तित्व में आती है और सिद्धांत बाद में बनते हैं, अतः कला ही सिद्धांतों को जन्म देती है। जब कोई असाधारण कलाकार अपनी स्वाभाविक प्रतिभा और कल्पनाशीलता से एक महान कृति का सृजन करता है, तो आलोचक और विद्वान उस कलाकृति का सूक्ष्म विश्लेषण करके उसके नियम और सिद्धांत निर्धारित करते हैं। कला सदैव स्वतंत्र और सिद्धांतों से परे होती है।
In simple words: पहले कोई सुंदर कला बनाई जाती है, फिर बाद में लोग उसके नियम और तरीके (सिद्धांत) तय करते हैं। इसलिए कला से ही सिद्धांतों का जन्म होता है।
Exam Tip: "कला की स्वाभाविकता व प्राथमिकता" और "सिद्धांतों का बाद में विश्लेषणात्मक रूप में बनना" स्पष्ट रूप से समझाएं।
Question 31. िारी िैऩलरन की कपल्भ करा की विशेषताएॉ फताओ ?
Answer: चार्ली चैपलीन की फिल्म कला की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
1. मूक अभिनय और सार्वभौमिकता: उनकी फिल्मों में संवाद न के बराबर होने के कारण उनकी कला भाषा और भूगोल की सीमाओं को लांघकर संपूर्ण विश्व के दर्शकों के दिलों को छू लेती थी।
2. हास्य और करुणा का अद्भुत सामंजस्य: वे दर्शकों को हंसाते-हंसाते उनकी आँखों में आँसू ला देते थे। उनका अभिनय समाज के दबे-कुचले और आम आदमी की पीड़ा को हास्य के पुट के साथ जीवंत करता था।
In simple words: चार्ली बिना बोले अपनी एक्टिंग से सबको हंसाते और रुलाते थे। उनकी फ़िल्में दुनिया के किसी भी कोने का देश का इंसान आसानी से समझ सकता था।
Exam Tip: "हास्य और करुणा का अनूठा मिश्रण" और "मूक अभिनय की सार्वभौमिक स्वीकार्यता" को मुख्य बिंदु बनाएं।
Question 32. ‘ककसका ितन कहाॉ है - िह जो कस्टभ के इस तयफ़ मा उस तयफ़’ साकपमा ने ऐसा तमों कहा होगा ?
Answer: साफिया ने ऐसा इसलिए कहा होगा क्योंकि उसने अनुभव किया कि भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बावजूद दोनों देशों के आम नागरिकों के दिलों में एक-दूसरे के प्रति असीम स्नेह, यादें और आत्मीयता बरकरार है। कस्टडी और सीमा रेखाओं के कठोर पहरे भी इंसानी जज्बातों और अपनी जन्मभूमि के प्रति लगाव को दबाने में असमर्थ हैं। मनुष्य का वतन सरहदों की तुलना में उसकी यादों में बसता है।
In simple words: भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद भी लोगों के दिलों में एक-दूसरे के लिए प्यार था। साफिया को लगा कि दिल का रिश्ता सरहदों और कड़े नियमों से बड़ा होता है।
Exam Tip: "विभाजन की मानवीय पीड़ा" और "भावनाओं व मातृभूमि के प्रेम की सरहद विहीनता" को केंद्र में रखकर उत्तर लिखें।
Question 33. नभक कहानी भें बायत ि ऩाक की जनता के आयोवऩत बेदबािों के फीि भुहब्फत का नभकीन स्िाद घुरा हुआ है, कै से ?
Answer: यद्यपि भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक दूरियां और कृत्रिम सीमाएं थोपी गई थीं, परंतु दोनों देशों की जनता के दिलों में मुहब्बत का नमकीन स्वाद घुला हुआ था। साफिया का सिख बीवी के लिए लाहौर से नमक लाना, ढाका के कस्टम अधिकारी का अपनी जन्मभूमि को याद करना और भारतीय सीमा पर सुनील दास गुप्ता का ढाका को अपना वतन कहना यह प्रमाणित करता है कि मानवीय भावनाएं और पुरानी यादें आज भी सरहदों से बड़ी हैं।
In simple words: राजनीति ने दोनों देशों को अलग तो कर दिया, पर लोगों के दिलों का प्यार कम नहीं हुआ। साफिया का लाहौर से नमक लाना और अधिकारियों का अपनी पुरानी यादें ताजा करना इसका सबसे बड़ा सबूत है।
Exam Tip: "सिख बीवी का लाहौरी नमक के प्रति प्रेम" और "कस्टम अधिकारियों की अपनी जन्मभूमि के प्रति यादें" मुख्य उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 34. हाम िह अिधत आज कहाॉ है ू | ऐसा कहा कय रेखक ने ककस ओय सॊके त ककमा है ?
Answer: ऐसा कहकर लेखक हजारीप्रसाद द्विवेदी जी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की ओर संकेत किया है। शिरीष के फूल की भांति ही गांधीजी भी देश के भीषण कोलाहल, हिंसा, विद्वेष और विषम राजनीतिक परिस्थितियों के बीच पूरी तरह शांत, अडिग, अनासक्त और सत्य-अहिंसा के मार्ग पर स्थिर बने रहे। वे वास्तव में आधुनिक युग के एक महान अवधूत थे।
In simple words: यहाँ लेखक ने शिरीष के फूल की तुलना महात्मा गांधी से की है, जो हर मुश्किल और हिंसा के बीच भी शांत रहकर देश को राह दिखाते रहे।
Exam Tip: शिरीष के फूल के स्वाभाविक गुणों (धैर्य, प्रतिकूलता में अडिग रहना) को "गांधीजी के अहिंसक व्यक्तित्व" से जोड़कर स्पष्ट करें।
Question 35. रेखक ने लशयीष को कारजमी अिधत तमों कहा है ू ?
Answer: लेखक ने शिरीष को 'कालजयी अवधूत' (समय को जीतने वाला संन्यासी) इसलिए कहा है क्योंकि वह भीषण गर्मी, तपती धूप और लू के थपेड़ों के बीच भी पूरी तरह हरा-भरा, शांत और फूलों से लदा रहता है। जब अन्य सभी पेड़ सूख जाते हैं, तब भी शिरीष अपने भीतर से जीवन-रस खींचकर खिला रहता है। उसका यह अद्भुत धैर्य और संघर्षशीलता उसे एक महान योगी बनाती है।
In simple words: शिरीष का पेड़ भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों में भी हरा-भरा और फूलों से भरा रहता है। वह मुश्किल समय में भी हार नहीं मानता, बिल्कुल एक सच्चे साधु की तरह।
Exam Tip: "विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहना", "आंतरिक जिजीविषा (जीने की इच्छा)" जैसे दार्शनिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करें।
Question 36. रेखक के अनुसाय भनुष्म की ऺभताएॉ ककन-ककन फातों ऩय ननबथय यहती हैं ?
Answer: लेखक डॉ. भीमराव आंबेडकर के अनुसार मनुष्य की क्षमताएं निम्नलिखित तीन प्रमुख बातों पर पूरी तरह निर्भर करती हैं:
1. शारीरिक वंश-परंपरा: माता-पिता से प्राप्त होने वाले आनुवंशिक और शारीरिक गुण।
2. सामाजिक उत्तराधिकार: समाज से प्राप्त होने वाली शिक्षा, संस्कृति, ज्ञान, आर्थिक अवसर और परिवेश।
3. व्यक्तिगत प्रयत्न: मनुष्य की अपनी स्वयं की मेहनत, लगन, लगनशीलता और इच्छाशक्ति।
In simple words: इंसान की कामयाबी उसकी अच्छी सेहत, उसे मिलने वाली शिक्षा व अवसरों, और उसकी खुद की मेहनत पर निर्भर करती है।
Exam Tip: आंबेडकर जी के सामाजिक सिद्धांतों के अनुसार तीनों श्रेणियों (वंश-परंपरा, सामाजिक उत्तराधिकार, व्यक्तिगत प्रयास) को क्रमबद्ध रूप में लिखें।
(ग) वितान भाग-2
Question 37. ऩाठ के आधाय ऩय फताइए कक ककशन दा की ऩयम्ऩया को ननबाते हुए मशोधय फाफू ित्तथभान से तारभेर नहीॊ फफठा ऩाते हैं |
Answer: यशोधर बाबू अपने गुरु किशन दा के सिद्धांतों, सादगी और पुराने संस्कारों के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं। वे संयुक्त परिवार, पुरानी जीवन शैली और सादगी पसंद करते हैं, जबकि उनके बच्चे आधुनिक उपभोक्तावादी सोच, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और दिखावे की संस्कृति को अपनाते हैं। इस वैचारिक मतभेद और किशन दा की परंपराओं के प्रति अत्यधिक निष्ठा के कारण यशोधर बाबू बदलते समय (वर्तमान) के साथ सामंजस्य स्थापित नहीं कर पाते हैं।
In simple words: यशोधर बाबू पुरानी सोच और सादगी पसंद करते हैं, जबकि उनके बच्चे नए जमाने के हिसाब से जीना चाहते हैं। इसी वजह से घर में हमेशा अनबन रहती है।
Exam Tip: "पीढ़ियों का अंतराल (Generation Gap)" और "किशन दा के प्रति यशोधर बाबू की अंध-निष्ठा" को उत्तर में जरूर दर्शाएं।
Question 38. रेखक कविमों को आदभी तमों सभझाने रगा ? ऩहरे िह उन्हें तमा सभझता था ?
Answer: पहले लेखक (आनंद यादव) समझता था कि कवि कोई असाधारण, अलौकिक या देवतुल्य जीव होते हैं जो इस सामान्य दुनिया से परे होते हैं। परंतु जब वह अपने अध्यापक सौंदलगेकर जी के निकट संपर्क में आया, जो स्वयं एक उत्कृष्ट कवि थे, तो उसने देखा कि वे भी आम मनुष्यों की तरह ही व्यवहार करते हैं, खाते-पीते हैं। इसके बाद लेखक को भली-भांति समझ आया कि कवि भी हमारे जैसे हाड़-मांस के सामान्य मनुष्य ही होते हैं।
In simple words: पहले लेखक को लगता था कि कवि कोई जादूगर या अनोखे प्राणी होते हैं, पर अपने मास्टर जी को देखकर उसे समझ आया कि कवि भी हमारे जैसे आम इंसान ही होते हैं।
Exam Tip: "सौंदलगेकर जी का प्रभाव" और "कवियों के प्रति लेखक की सोच में आया बदलाव" को स्पष्ट करें।
Question 39. ‘भुअनजो-दड़ो’ कहाॉ है औय मह तमों प्रलसद् है ?
Answer: 'मुअनजो-दड़ो' वर्तमान समय में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित एक ऐतिहासिक पुरातत्व स्थल है। यह स्थल अपनी अत्यंत प्राचीन, विकसित और सुव्यवस्थित 'सिंधु घाटी सभ्यता' के उत्कृष्ट नगर नियोजन (Town Planning) के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यहाँ की पक्की सड़कें, व्यवस्थित जल निकासी व्यवस्था और योजनाबद्ध मकान आज भी आधुनिक इंजीनियरिंग के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
In simple words: मुअनजो-दड़ो पाकिस्तान के सिंध में है। यह हज़ारों साल पुरानी बहुत ही साफ-सुथरी और शानदार शहर नियोजन व्यवस्था के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है।
Exam Tip: "सिंधु घाटी सभ्यता", "नगर नियोजन" और "जल निकासी व्यवस्था" जैसे तकनीकी शब्दों का उत्तर में प्रयोग करें।
Question 40. लसन्धु घाटी की सभ्मता को जर ु -सॊस्कृनत तमों कहा गमा है ?
Answer: सिंधु घाटी सभ्यता को 'जल-संस्कृति' इसलिए कहा गया है क्योंकि इस प्राचीन सभ्यता का पूरा जीवन और नगर नियोजन पानी के कुशल प्रबंधन पर आधारित था। मुअनजो-दड़ो में पानी के लिए लगभग 700 कुएँ, विशाल सार्वजनिक स्नानागार, प्रत्येक घर के भीतर पक्के स्नानघर और गंदे पानी की निकासी के लिए ढकी हुई नालियों की बेहतरीन व्यवस्था थी, जो जल के प्रति उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दर्शाती है।
In simple words: इस सभ्यता के लोग पानी का बहुत सम्मान और सही इस्तेमाल करते थे। शहर में सैकड़ों कुएं, नहाने के बड़े तालाब और ढकी हुई नालियां थीं, इसलिए इसे जल-संस्कृति कहते हैं।
Exam Tip: "नालियों की व्यवस्था", "कुओं की संख्या (लगभग 700)" और "सार्वजनिक स्नानागार" का उदाहरण देकर समझाएं।
Question 41. एन फ्रैं क भहहराओॊ के फाये भें तमा सोिती थी ?
Answer: एन फ्रैंक का सोचना था कि महिलाओं को समाज में पुरुषों के बिल्कुल समान अधिकार, स्वतंत्रता और सम्मान मिलना चाहिए। वह महिलाओं को केवल गृहणी या बच्चे पैदा करने का जरिया मानने के रूढ़िवादी विचार के सख्त खिलाफ थी। उसका मानना था कि बच्चे को जन्म देने की प्रक्रिया में महिलाएं जो असहनीय दर्द और साहस दिखाती हैं, वह किसी वीर सैनिक के युद्ध क्षेत्र में लड़ने से भी कहीं अधिक महान है।
In simple words: एन का मानना था कि महिलाओं को सिर्फ घर के कामों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्हें पुरुषों के बराबर आजादी और तरक्की के मौके मिलने चाहिए।
Exam Tip: एन फ्रैंक के "प्रगतिशील नारीवादी विचारों" और "सैनिकों से महिलाओं की तुलना" वाले बिंदु को विशेष रूप से लिखें।
(घ) जन संचार के माध्यम
Question 42. बायत भें ऩहरा िाऩाखाना कहाॉ औय कफ खरा ु ?
Answer: भारत में पहला छापाखाना (प्रिंटिंग प्रेस) सन् 1556 ईस्वी में गोवा में स्थापित किया गया था। इसे मुख्य रूप से ईसाई मिशनरियों ने अपनी धार्मिक पुस्तकों और साहित्य के मुद्रण के लिए खोला था।
In simple words: भारत की पहली प्रिंटिंग प्रेस साल 1556 में गोवा में खुली थी, जिसका इस्तेमाल ईसाई धर्म की किताबें छापने के लिए किया जाता था।
Exam Tip: वर्ष (1556) और स्थान (गोवा) को पूरी तरह स्पष्ट और सटीक लिखें।
Question 43. ‘ऩेज थ्री’ मा ऩीत ऩत्रकारयता ककसे कहा जाता है ?
Answer: 'पेज थ्री' या पीत पत्रकारिता (Yellow Journalism) उस पत्रकारिता को कहते हैं जिसमें गंभीर और राष्ट्रहित से जुड़े मुद्दों को छोड़कर मशहूर हस्तियों (Celebrities) की निजी जिंदगी, उनके फैशन शो, पार्टियों, सनसनीखेज अफवाहों और अमीर लोगों के विलासिता पूर्ण जीवन को बढ़ा-चढ़ाकर और चटपटे ढंग से छापा जाता है।
In simple words: पेज थ्री या पीत पत्रकारिता का मतलब है बड़ी हस्तियों की पार्टियों, गॉसिप और सनसनीखेज अफवाहों को मिर्च-मसाला लगाकर छापना।
Exam Tip: "सनसनीखेज खबरें", "मशहूर हस्तियों की निजी जिंदगी" और "गंभीर मुद्दों की अनदेखी" इसके प्रमुख बिंदु हैं।
Question 44. फ़ीिय रेखन की बाषा शैरी कै सी होनी िाहहए ?
Answer: फीचर लेखन की भाषा शैली सरल, सुबोध, रोचक, आकर्षक और काव्यात्मक होनी चाहिए। इसमें समाचार की तरह शुष्क या नीरस तथ्यों का विवरण नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसी कल्पनाशील और सजीव प्रस्तुति होनी चाहिए जो पाठक के मन में दृश्य उत्पन्न कर दे और उसे अंत तक जोड़े रखे।
In simple words: फीचर की भाषा बहुत आसान, दिलचस्प और ऐसी होनी चाहिए जो पढ़ते ही दिल को छू जाए और मन में तस्वीर सी बन जाए।
Exam Tip: भाषा की "सजीवता", "रोचकता" और "काव्यात्मकता" का विशेष उल्लेख करें।
Question 45. ऩत्रकारयता की बाषा भें ‘फीट’ ककसे कहते हैं ?
Answer: पत्रकारिता की भाषा में 'बीट' (Beat) का अर्थ संवाददाता के विशेष कार्यक्षेत्र या रुचि के विषय से है। जैसे - खेल, राजनीति, अपराध, शिक्षा, पर्यावरण या व्यापार। जिस पत्रकार की जिस क्षेत्र में विशेष विशेषज्ञता और रुचि होती है, उसे उसी बीट की खबरें एकत्र करने का जिम्मा सौंपा जाता है।
In simple words: बीट का मतलब पत्रकार का खास काम का क्षेत्र होता है, जैसे कोई सिर्फ खेल की खबरें लिखता है तो खेल उसकी 'बीट' है।
Exam Tip: "विशेष कार्यक्षेत्र" और "रुचि के अनुसार विभाजन" को स्पष्ट शब्दों में समझाएं।
Question 46. उल्टा वऩयालभड शैरी तमा होती है ?
Answer: उल्टा पिरामिड शैली (Inverted Pyramid Style) समाचार लेखन की सबसे लोकप्रिय और मानक शैली है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण और मुख्य समाचार को सबसे पहले (इंट्रो या मुखड़ा में) लिखा जाता है, उसके बाद घटते क्रम में कम महत्वपूर्ण विवरण (बॉडी) दिया जाता है और अंत में निष्कर्ष लिखकर समाचार समाप्त किया जाता है।
In simple words: समाचार लिखने का वह तरीका जिसमें सबसे मुख्य और बड़ी बात सबसे ऊपर लिखी जाती है, और कम जरूरी बातें नीचे विस्तार से बताई जाती हैं।
Exam Tip: इसके तीन प्रमुख हिस्सों - इंट्रो/मुखड़ा (Intro), बॉडी (Body) और समापन (Conclusion) का नाम देकर समझाएं।
Question 47. ककन्हीॊ िाय हहॊदी सभािाय िैनरों के नाभ लरखखए |
Answer: चार प्रमुख हिंदी समाचार चैनल निम्नलिखित हैं:
1. आज तक (Aaj Tak)
2. एबीपी न्यूज़ (ABP News)
3. एनडीटीवी इंडिया (NDTV India)
4. न्यूज़18 इंडिया (News18 India)
In simple words: चार बड़े हिंदी न्यूज़ चैनल आज तक, एबीपी न्यूज़, एनडीटीवी इंडिया और न्यूज़18 इंडिया हैं।
Exam Tip: वर्तनी की शुद्धता का ध्यान रखते हुए भारत में प्रचलित हिंदी समाचार चैनलों के नाम लिखें।
Question 48. इॊटयनेट ऩबत्रका के रोकवप्रम होने के कोई दो कायण लरखखए |
Answer: इंटरनेट पत्रकारिता के अत्यंत लोकप्रिय होने के दो प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
1. तुरंत और तीव्र अपडेट (Real-time updates): इसके माध्यम से देश-विदेश की पल-पल की खबरें तुरंत पाठकों तक पहुँच जाती हैं।
2. दृश्य-श्रव्य (मल्टीमीडिया) का सजीव उपयोग: खबरों के साथ वीडियो, ऑडियो और लाइव तस्वीरें उपलब्ध होने से पाठकों के लिए खबरों को समझना और उन पर विश्वास करना आसान हो जाता है।
In simple words: इंटरनेट पर खबरें बहुत जल्दी मिल जाती हैं और साथ में वीडियो व सजीव तस्वीरें होने से इसे पढ़ना ज़्यादा आसान और भरोसेमंद लगता है।
Exam Tip: "सजीव अपडेट" और "मल्टीमीडिया (दृश्य-श्रव्य माध्यम) की उपलब्धता" जैसे तकनीकी बिंदुओं को शामिल करें।
Question 49. सभािाय औय फ़ीिय भें तमा अतय है ?
Answer: समाचार और फीचर में निम्नलिखित मुख्य अंतर होते हैं:
1. समाचार पूरी तरह से यथार्थवादी, निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ तथ्यों पर आधारित होता है, जबकि फीचर में लेखक अपनी व्यक्तिगत भावनाएं, विचार, और दृष्टिकोण भी शामिल कर सकता है।
2. समाचार उल्टा पिरामिड शैली में लिखा जाता है और इसकी एक निश्चित समय-सीमा (Dead-line) होती है, जबकि फीचर की कोई निश्चित लेखन शैली नहीं होती और यह समाचारों की तुलना में अधिक विस्तृत और लंबे समय तक उपयोगी रहता है।
In simple words: समाचार केवल तथ्यों और सच पर आधारित होता है जिसे उल्टा पिरामिड शैली में लिखते हैं, जबकि फीचर में थोड़ी कल्पना और लेखक की अपनी राय भी शामिल हो सकती है।
Exam Tip: अंतर स्पष्ट करते समय लेखन शैली (उल्टा पिरामिड बनाम कथात्मक शैली) और लेखक की व्यक्तिगत राय की उपस्थिति का उल्लेख जरूर करें।
Question 50. भुहद्रत भाध्मभ की कोई दो ऐसी विशेषताएॉ फताओ जो इरैतरोननक भाध्मभ भें नहीॊ है |
Answer: मुद्रित माध्यम (जैसे समाचार पत्र, पत्रिकाएं) की दो अनूठी विशेषताएं निम्नलिखित हैं जो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में उपलब्ध नहीं होतीं:
1. स्थायित्व और संभालकर रखना (Permanence): छपे हुए शब्दों को पाठक लंबे समय तक सुरक्षित रख सकता है और अपनी सुविधानुसार जब चाहे तब पढ़ सकता है।
2. गहन चिंतन और पठन-गति की स्वतंत्रता: मुद्रित माध्यम को पढ़ते समय पाठक अपनी गति से पढ़ सकता है, बीच में रुककर उस खबर पर सोच-विचार कर सकता है, जो तेज गति से चलने वाले इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में संभव नहीं है।
In simple words: छपी हुई किताबों या अखबारों को हम सालों-साल अलमारी में सुरक्षित रख सकते हैं, और अपनी मर्जी से धीरे-धीरे सोच-समझकर पढ़ सकते हैं।
Exam Tip: "लिखित शब्दों का स्थायित्व" और "पाठक की अपनी सुविधानुसार पठन-गति" को मुद्रित माध्यम की मुख्य ताकत के रूप में समझाएं।
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