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Access comprehensive chapter-wise worksheets for All Chapters using the CBSE Class 12 Hindi Revision Worksheet Set 02. Designed to align with the 2026-27 academic syllabus for Class 12 Hindi, these printable practice sets help students reinforce key concepts and improve their overall exam readiness.
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काव्य - सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय'
Question 1. कवि अज्ञेय ने दीपक क्या विशेषताएँ बतलाई हैं?
Answer: कवि अज्ञेय ने 'यह दीप अकेला' कविता में दीपक को मानवीय चेतना, जीवंतता और समाज का एक लघु किंतु महत्वपूर्ण अंग माना है। दीपक स्नेह (प्रेम) से भरा हुआ है, गर्व से भरा हुआ है और वह स्वयंभू (अपनी योग्यता से उत्पन्न) है। कवि के अनुसार यह दीपक भले ही अकेला है, परंतु यह अपनी पूर्ण ऊर्जा और प्रकाश के साथ समाज और विराट के सम्मुख समर्पित होने की क्षमता रखता है।
In simple words: कवि ने दीपक को प्रेम, गर्व और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया है जो अकेला होते हुए भी प्रकाश फैलाने की शक्ति रखता है।
Exam Tip: उत्तर लिखते समय दीपक और समाज के प्रतीकार्थ (व्यष्टि और समष्टि) का उल्लेख अवश्य करें।
Question 2. कवि समाज के विषय में क्या सोचता है?
Answer: कवि समाज को एक 'विराट' शक्ति या वृहत्तर इकाई के रूप में देखता है। कवि का मानना है कि जिस प्रकार एक छोटा दीपक अपनी महत्ता खो देता है यदि वह समाज रूपी पंक्ति या विराट में विलीन नहीं होता, उसी प्रकार व्यक्ति का वास्तविक विकास और सार्थकता समाज के साथ जुड़ने में ही है। समाज व्यक्तियों का ही एक विशाल समूह है जो उन्हें पहचान, सुरक्षा और दिशा प्रदान करता है।
In simple words: कवि समाज को एक विशाल शक्ति मानता है जिसके साथ जुड़कर ही व्यक्ति का जीवन सार्थक और पूर्ण बनता है।
Exam Tip: 'व्यष्टि' (व्यक्ति) और 'समष्टि' (समाज) के पारस्परिक संबंध को स्पष्ट करना मुख्य बिंदु है।
Question 3. कवि ने 'मैंने देखा एक बूँद' कविता में किस सत्य के दर्शन किए?
Answer: कवि ने 'मैंने देखा एक बूँद' कविता में क्षणिकता और शाश्वतता के सत्य के दर्शन किए हैं। आकाश से अलग होकर सागर में मिलने वाली एक छोटी सी पानी की बूँद भले ही कुछ पलों (क्षण भर) की मेहमान हो, परंतु जब वह विराट सागर में समा जाती है, तो वह नश्वरता के बंधन से मुक्त होकर अमर (अविनाशी) हो जाती है। यह जीवन की नश्वरता और उसकी व्यापकता का प्रतीक है।
In simple words: कवि ने यह सत्य देखा कि एक छोटी और क्षणभंगुर बूँद भी बड़े सागर में मिलकर अमर बन जाती है, ठीक वैसे ही मनुष्य का जीवन है।
Exam Tip: 'क्षणिकता' और 'विराटता' के दार्शनिक दृष्टिकोण को उदाहरण सहित समझाएँ।
Question 4. काव्य-सौंदर्य स्पष्ट करें -
Question 4(क). 'यह प्रकृत, स्वयंभू, ब्रह्म, अपुतः इसको शक्ति दे दो।'
Answer: भाव-सौंदर्य: इस पंक्ति में कवि ने अज्ञेय के व्यक्ति-स्वातंत्र्य और उसके मौलिक अस्तित्व को रेखांकित किया है। व्यक्ति प्रकृति प्रदत्त, स्वतंत्र और अपनी शक्ति से परिपूर्ण है।
शिल्प-सौंदर्य: संस्कृतनिष्ठ शब्दावली (प्रकृत, स्वयंभू, ब्रह्म, अपुतः) का सुंदर प्रयोग हुआ है। भाषा में दार्शनिक गहराई और ओज गुण विद्यमान है।
In simple words: यहाँ व्यक्ति के स्वतंत्र और स्वाभाविक अस्तित्व को स्वीकार करते हुए उसे समाज से जोड़ने की शक्ति देने की बात कही गई है।
Exam Tip: भाव-सौंदर्य और शिल्प-सौंदर्य दोनों बिंदुओं को अलग-अलग लिखकर उत्तर को प्रभावी बनाएं।
Question 4(ख). 'सूने विराट के सम्मुख / हर आलोक हुआ अपनापन / है उन्मोचन / नश्वरता के दाग से।'
Answer: भाव-सौंदर्य: जब व्यक्ति (दीपक) अपने अहंकार और अकेलेपन को छोड़कर विराट (समाज/समष्टि) में समर्पित हो जाता है, तो उसका प्रकाश सबके लिए अपनापन बन जाता है। यही समर्पण मनुष्य को उसकी नश्वरता रूपी सीमा से मुक्त कर अमर कर देता है।
शिल्प-सौंदर्य: 'विराट', 'आलोक', 'उन्मोचन' जैसे शब्दों का चयन सटीक है। प्रतीकात्मक शैली के माध्यम से जीवन के बड़े सत्य को उजागर किया गया है।
In simple words: विराट समाज से जुड़ने पर व्यक्ति का अकेलापन मिट जाता है और वह अपनी नश्वरता से मुक्ति पाकर अमर हो जाता है।
Exam Tip: प्रतीकों के अर्थ (दीपक = व्यक्ति, विराट = समाज) को स्पष्ट करना न भूलें।
Question 5. भाव स्पष्ट करें -
'यह समिधा-सी आग हठीला बिरला सुलग-इगा
यह अद्वितीय-यह मेरा-यह स्वयं विसर्जित
यह दीप, अकेला, स्नेह भरा
यह गर्व भरा मदमाता।'
Answer: इन पंक्तियों में कवि ने दीपक (व्यक्ति) के व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों को उकेरा है। यह दीपक अपने स्नेह (प्रेम) से परिपूर्ण है, अपने होने पर गर्व और आत्मविश्वास (मदमस्त) रखता है। यह अद्वितीय है और यज्ञ में डाली जाने वाली समिधा की भाँति हठीला और विसर्जन की भावना रखने वाला है। बिरला ही ऐसा व्यक्ति होता है जो समाज के कल्याण हेतु स्वयं को समर्पित (विसर्जित) करने का साहस रखता है।
In simple words: कवि कहते हैं कि यह अकेला दीपक प्रेम से भरा, स्वाभिमानी और अनोखा है, जो हठपूर्वक जलकर समाज के लिए खुद को मिटाने को तैयार रहता है।
Exam Tip: 'समिधा', 'अद्वितीय' और 'विसर्जित' शब्दों के विशेषार्थ को समझकर उत्तर लिखें।
गद्य -
1. सुभिरिन के मनके (चंद्रधर शर्मा 'गुलेरी')
Question 1. 'बालक बच गया' पाठ के आधार पर आधुनिक शिक्षा पर किए गए व्यंग्य को स्पष्ट करें।
Answer: 'बालक बच गया' निबंध में चंद्रधर शर्मा गुलेरी ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली की खोखली और रटने की प्रवृत्ति पर तीखा व्यंग्य किया है। शिक्षा प्रणाली बच्चों की मौलिकता, आनंद और रचनात्मकता को कुचलकर उन्हें केवल किताबी कीड़ा या उपाधि प्राप्त करने का यंत्र बना देती है। बालक की सहज बुद्धि और जिज्ञासा का गला घोंटकर उसे जिस प्रकार शिक्षा दी जाती है, लेखक ने उसे शिक्षा के नाम पर बच्चे के मानसिक विकास की हत्या बताया है।
In simple words: आधुनिक शिक्षा बच्चों की बुद्धि और आनंद को मार देती है, लेखक ने इसी रटने वाली शिक्षा व्यवस्था पर करारा व्यंग्य किया है।
Exam Tip: शिक्षा प्रणाली की संकीर्णता और बाल-मनोविज्ञान की उपेक्षा पर विशेष ध्यान दें।
Question 2. 'चंडी के पुर्जे' पाठ के माध्यम से लेखक धर्म के क्षेत्र में व्याप्त किस प्रवृत्ति की ओर संकेत किया है?
Answer: 'चंडी के पुर्जे' पाठ के माध्यम से लेखक ने धर्म के क्षेत्र में बढ़ते पाखंड, औपचारिकता और यंत्रवत कर्मकांडों पर संकेत किया है। लोग धर्म को वास्तविक जीवन में अपनाने के बजाय केवल पूजा-पाठ और दिखावे की मशीनी प्रक्रिया बना चुके हैं। मनुष्य धर्म की मूल भावना (दया, करुणा, नैतिकता) को भूलकर रूढ़ियों और स्वार्थी अनुष्ठानों में उलझ गया है, जहाँ भगवान भी एक व्यापार की वस्तु बन गए हैं।
In simple words: लेखक ने बताया है कि लोग धर्म को सच्चे आचरण से दूर करके मात्र दिखावे और मशीनी कर्मकांडों तक सीमित कर चुके हैं।
Exam Tip: धर्म के नाम पर पाखंड और मानवीय संवेदनाओं की सुदूरता को मुख्य बिंदु बनाएं।
Question 3. 'ढेलचुनों' प्रसंग में समाज में व्याप्त किस कुरीति पर व्यंग्य किया गया है?
Answer: 'ढेलचुनों' प्रसंग के माध्यम से समाज में व्याप्त अंधविश्वासों, भाग्यवादी सोच और मूर्खतापूर्ण रूढ़ियों पर व्यंग्य किया गया है। लोग जीवन के गंभीर और तार्किक निर्णयों के लिए तर्कसंगत विचार करने के बजाय ढेले (पत्थर के टुकड़े) चुनने जैसी बाल-क्रीड़ाओं या अंधविश्वासी तौर-तरीकों का सहारा लेते हैं। यह समाज की वैचारिक दिवालियापन और विवेकहीनता को दर्शाता है।
In simple words: गंभीर मामलों में भी लोग समझदारी से काम लेने के बजाय अंधविश्वास और ढेले चुनने जैसी मूर्खतापूर्ण प्रथाओं पर भरोसा करते हैं।
Exam Tip: अंधविश्वास और विवेकहीनता के खिलाफ लेखक के व्यंग्यात्मक दृष्टिकोण को स्पष्ट करें।
Question 4. 'वेद' के चयन के विषय में स्त्रियों की भारतीय समाज में क्या स्थिति है?
Answer: भारतीय समाज में ऐतिहासिक रूप से स्त्रियों की स्थिति को दोयम दर्जे का और पुरुषों के आधीन माना गया है। 'वेद' या ज्ञान-विज्ञान के चयन और अध्ययन के संदर्भ में स्त्रियों को स्वतंत्रता या समान अधिकार नहीं दिए गए। उन्हें पुरुष प्रधान समाज की रूढ़ियों और सीमाओं में बांधकर रखा गया है, जिससे उनके स्वतंत्र व्यक्तित्व और बौद्धिक विकास के अवसर सीमित कर दिए गए हैं।
In simple words: समाज में स्त्रियों को ज्ञान और शिक्षा के उचित अधिकार से वंचित रखकर उन्हें पुरुषों के अधीन समझा गया है।
Exam Tip: पुरुष-प्रधान समाज की मानसिकता और स्त्री-अधिकारों की उपेक्षा को दर्शाएं।
2. संवदिया (फणीश्वरनाथ रेणु)
Question 1. संवदिया कहानी में लेखक ने किस घटना की तुलना द्रौपदी चीर हरण से की है और क्यों?
Answer: संवदिया कहानी में लेखक ने हरगोबिन द्वारा बड़ी बहुरिया के अपमानजनक और दयनीय संदेश को गाँव के लोगों (मलिक परिवार के सदस्यों) के सामने सुनाए जाने की स्थिति की तुलना द्रौपदी चीर हरण से की है। जिस प्रकार भरी सभा में द्रौपदी का चीरहरण हुआ था और कोई उसकी रक्षा के लिए आगे नहीं आया था, उसी प्रकार बड़ी बहुरिया के स्वाभिमान और उसकी पीड़ा को सरेआम बेइज्जत किया जा रहा था और परिवार के लोग मूकदर्शक बने तमाशा देख रहे थे।
In simple words: बड़ी बहुरिया की बेइज्जती और उसके दुखों को खुलेआम तमाशा बनाए जाने की तुलना महाभारत में द्रौपदी के चीरहरण से की गई है।
Exam Tip: पौराणिक संदर्भ (द्रौपदी चीरहरण) और सामाजिक संवेदना की तुलनात्मक व्याख्या करें।
Question 2. हरगोबिन की बड़ी बहुरिया के प्रति भावनाओं का वर्णन कीजिए।
Answer: हरगोबिन के मन में बड़ी बहुरिया के प्रति अगाध आदर, सहानुभूति और करुणा का भाव है। वह बड़ी बहुरिया को केवल अपनी मालकिन या काम देने वाली नहीं, बल्कि अपनी बहन या सम्मानित गृहणी मानता है। जब वह बड़ी बहुरिया की दयनीय स्थिति, अकेलेपन और उसके घरौंदे के उजड़ने की बात सुनता है, तो उसका हृदय द्रवित हो उठता है। वह बड़ी बहुरिया की रक्षा और उसके स्वाभिमान को बचाने के लिए अपनी नौकरी और तानों की भी परवाह नहीं करता।
In simple words: हरगोबिन बड़ी बहुरिया का बहुत सम्मान करता है और उनकी दयनीय हालत देखकर उनका दुख दूर करने के लिए पूरी तरह समर्पित हो जाता है।
Exam Tip: मानवीय संवेदना, आदर और कर्तव्यनिष्ठा के भावों को मुख्य रूप से दर्शाएँ।
Question 3. अपने गाँव वापस पहुँचने पर हरगोबिन की स्थिति विक्षिप्तों जैसी क्यों हो गई थी?
Answer: जब हरगोबिन ने अपनी माँ के मायके (या अपने गाँव) में बड़ी बहुरिया का संदेश सुनाया और वहाँ के लोगों का उदासीन, क्रूर तथा अपमानजनक व्यवहार देखा, तो उसका संवेदनशील मन टूट गया। परिवार और समाज के लोगों द्वारा बड़ी बहुरिया की सहायता करने से इंकार करना और उस पर छींटाकशी करना उसके कोमल हृदय पर आघात था। इस मानसिक और आत्मिक पीड़ा के कारण उसकी स्थिति विक्षिप्तों (पागलों) जैसी हो गई थी।
In simple words: गाँववालों का निर्दयी और स्वार्थी व्यवहार देखकर हरगोबिन का संवेदनशील मन आहत हो गया और वह मानसिक रूप से विक्षिप्त जैसा हो गया।
Exam Tip: संवेदनशीलता के आहत होने और मानसिक द्वंद्व का सुंदर वर्णन करें।
अपठित गद्यांश -
Question 1. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
एक दो गोले लगाने के बाद अगर मोती हासिल नहीं होता तो लोग सागर के सिरे दोष मढ़ने लगते हैं, जबकि दोष उनकी अपनी गोताखोरी में ही होता है। छोटे और अहम् सभी कायदों को सदा पूरा मन लगाकर कीजिए। इंसान हर किस्म की चुनौतियों और परेशानियों से लड़ने में असमर्थ नहीं है। कभी होती है इरादे के पाने के दृढ़ निश्चय की। इंसान मन में कुछ भी करने की ठान ले, वह कर सकता है। ईश्वर समस्त वस्तु-जीव जगत का सम्पूर्ण योग है और उसका प्रतिरूप इंसान के भीतर है। इंसान ईश्वर की तरह कुछ भी कर सकता है यदि वह अपनी आगामी प्रकृति के साथ एकाकार होना सीख ले।एकाग्रता से बड़ा इंसान का कोई मित्र नहीं है।
एक किसान ने कुआँ खोदना शुरू किया। दस हाथ खोदने पर पानी नहीं निकला, तो वह निराश हो गया। दूसरी जगह खोदने लगा। फिर दूसरी जगह भी दस हाथ खोदने पर पानी नहीं निकला, तो तीसरी जगह खुदाई शुरू कर दी। इस प्रकार पाँच-सात स्थानों पर उसने छोड़ा लेकिन कहीं पानी नहीं निकला। वह बेहद दुखी हुआ और निराश मन से घर लौट आया। अगले दिन उसने अपनी कहानी धर्मगुरु को सुनाई। धर्मगुरु उसे समझाते हुए बोले, "तुमने पाँच स्थानों पर दस-दस हाथ खोदकर पचास हाथ भूमि खोदी। यदि तुम अलग-अलग न खोदकर एक ही स्थान पर इतना खोदते, तो तुम्हें पानी अवश्य मिल जाता। वास्तव में तुमने धैर्य नहीं रखा और थोड़ा-थोड़ा खोदकर निर्णय बदल लिया। अब तुम एकाग्रता से एक ही स्थान पर खोदो और जब तक पानी न निकले, तब तक खोदना जारी रखो। तुम्हें सफलता अवश्य मिलेगी!" राजा विक्रमादित्य के परिसंचों लक्षण जानने वाला एक ज्योतिषी आया। उनके सामुद्रिक लक्षणों को देखकर ज्योतिषी गहरी सोच में डूब गया। वास्तव में वे सामुद्रिक लक्षणों के आधार पर उन्हें दुर्बल, दीन-हीन और कंगाल होना चाहते, लेकिन वे स्वस्थ सम्राट हैं। ज्योतिषी की बौखलाहट भाँप कर राजा विक्रमादित्य बोले, "बाहरी लक्षणों से अगर आप संतुष्ट नहीं तो जरा ठहरिए ........ छाती चीर कर दिखाता हूँ, भीतर के लक्षण।" ज्योतिषी श्रीयुक्त से बोला, "नहीं-नहीं मैं समझ गया!" आप निर्णय हैं, पुरुषार्थी, एकाग्र हैं इसलिए समस्त परिस्थितियाँ आपके अनुकूल हो रही हैं।
सच है कि युग इंसान को नहीं बनाता, बल्कि इंसान युग को बनाता है। एकाग्रता में हाथी की लकीरों बदलने की क्षमता है, जो सच्चा सम्राट तक बना सकती है।
(क) सफलता प्राप्त करने के लिए किन-किन गुणों की आवश्यकता होती है और क्यों?
Answer: सफलता प्राप्त करने के लिए दृढ़ निश्चय, कठोर गोताखोरी (कठिन परिश्रम), धैर्य, अनुशासन और सबसे बढ़कर 'एकाग्रता' जैसे गुणों की आवश्यकता होती है। ये गुण व्यक्ति को भटकाव से बचाकर उसके लक्ष्य पर पूरी ऊर्जा केंद्रित करने में मदद करते हैं।
In simple words: सफलता पाने के लिए पक्का इरादा, धैर्य, मेहनत और एकाग्रता बहुत जरूरी हैं।
Exam Tip: गद्यांश के मुख्य संदेश 'एकाग्रता और धैर्य' को उत्तर का आधार बनाएं।
Question 1(ख). अक्ष्य प्रकृति के साथ एकाकार होना व्यक्ति के लिए लाभकारी क्यों है?
Answer: अक्ष्य प्रकृति के साथ एकाकार होने से व्यक्ति के भीतर अपार आंतरिक शक्ति और ईश्वर तुल्य सृजन क्षमता जागृत होती है, जिससे वह किसी भी कठिन परिस्थिति का सामना आसानी से कर सकता है।
In simple words: प्रकृति के साथ एकरूप होने से इंसान के भीतर छिपी अनंत शक्तियाँ जाग जाती हैं।
Exam Tip: प्रकृति और मानव चेतना के एकीकरण के लाभ को संक्षेप में लिखें।
Question 1(ग). किसान को अपने लक्ष्य में सफलता क्यों नहीं मिली?
Answer: किसान को सफलता इसलिए नहीं मिली क्योंकि उसने धैर्य की कमी के कारण अलग-अलग जगहों पर थोड़ा-थोड़ा खोदकर अपनी मेहनत बिखेर दी और एक ही निश्चित स्थान पर लगातार (एकाग्र होकर) खुदाई नहीं की।
In simple words: किसान ने धैर्य खो दिया और अलग-अलग जगह थोड़े-थोड़े गड्ढे खोदे, इसलिए उसे पानी नहीं मिला।
Exam Tip: किसान के उदाहरण द्वारा 'धैर्य और निरंतरता' के महत्व को स्पष्ट करें।
Question 1(घ). धर्मगुरु ने किसान को क्या गुरुमंत्र दिया?
Answer: धर्मगुरु ने किसान को गुरुमंत्र दिया कि वह अपनी ऊर्जा को अलग-अलग जगहों पर न बिखेरे बल्कि एकाग्र होकर एक ही स्थान पर तब तक खुदाई करे जब तक कि पानी न निकल जाए।
In simple words: धर्मगुरु ने समझाया कि एक ही जगह पर लगातार मेहनत करने से ही सफलता मिलती है।
Exam Tip: धर्मगुरु के संदेश को उद्धृत करते हुए उत्तर दें।
Question 1(ङ). मानव किस आधार पर विषम परिस्थितियों को अपने अनुरूप कर सकता है? राजा विक्रमादित्य के दृष्टांत द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Answer: मानव अपने पुरुषार्थ, दृढ़ निश्चय और एकाग्रता के बल पर विषम परिस्थितियों को अपने अनुकूल कर सकता है। राजा विक्रमादित्य के सामुद्रिक लक्षण भले ही साधारण या प्रतिकूल दिखते थे, लेकिन उनके आंतरिक पुरुषार्थ, एकाग्रता और मजबूत इच्छाशक्ति ने उनकी किस्मत की रेखाओं को ही बदल दिया।
In simple words: मनुष्य अपनी मेहनत और पक्के इरादे से बुरी से बुरी परिस्थिति को भी बदल सकता है, जैसे राजा विक्रमादित्य ने किया।
Exam Tip: पुरुषार्थ और भाग्य के संघर्ष में पुरुषार्थ की विजय को रेखांकित करें।
Question 1(च)(I) सरल वाक्य बनाइए -
'एकाग्रता से हाथ की लकीरें बदलने का दमखम है, जो सच्चा सम्राट बना सकती है।'
Answer: एकाग्रता में हाथ की लकीरें बदलकर सच्चा सम्राट बनाने का दमखम है।
In simple words: दो उपवाक्यों को मिलाकर एक मुख्य क्रिया वाला सरल वाक्य बनाया गया है।
Exam Tip: सरल वाक्य में एक ही मुख्य उद्देश्य और विधेय होता है।
Question 1(च)(II) विपरीतार्थक शब्द लिखिए -
अक्षम, निर्णय।
Answer:क्षम, अनिर्णय
In simple words: दिए गए शब्दों के विलोम शब्द लिखे गए हैं।
Exam Tip: उपसर्ग या विपरीतार्थी नियमों का ध्यान रखें।
Question 1(च)(III) उपसर्ग छाँटकर दो नए शब्द बनाइए -
प्रकृति।
Answer:उपसर्ग: प्र
दो नए शब्द: प्रबल, प्रगति
In simple words: 'प्र' उपसर्ग जोड़कर दो नए शब्द बनाए गए हैं।
Exam Tip: मूल शब्द से पहले जुड़ने वाले शब्दांश को उपसर्ग कहते हैं।
Question 1(च)(IV) भाववाचक संज्ञाएँ बनाइए -
एकाग्र, गुरु।
Answer:एकाग्र - एकाग्रता
गुरु - गुरुत्व या गौरव
In simple words: शब्दों को भाववाचक संज्ञा के रूप में बदला गया है।
Exam Tip: भाववाचक संज्ञाएँ किसी गुण, दशा या भाव का बोध कराती हैं।
Question 1(छ) परिच्छेद का शीर्षक लिखिए।
Answer:एकाग्रता और सफलता / एकाग्रता का महत्त्व
In simple words: गद्यांश का केंद्रीय भाव एकाग्रता पर आधारित है, अतः उपयुक्त शीर्षक यही होगा।
Exam Tip: शीर्षक हमेशा संक्षिप्त और गद्यांश के मुख्य विचार से जुड़ा होना चाहिए।
अपठित पद्यांश -
Question 1. निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
उस दिन इन आँखों से वे पैर
भूल नहीं पाऊँगा फटी विवाडियाँ
खूब गई दुधिया निगाहों में
घास गई कुसुम-कोमल मन में
(क) कवि किसके खुरदरे पैरों की बात कर रहा है?
(ख) रिक्शा वाले के पैरों में बिवाइयों और गाँठों से भरे छ्त्ते क्यों पड़ गए थे?
(ग) कवि ने मन और दृष्टि के लिए किन उपमानों का प्रयोग किया है?
(घ) 'पैर्रों के हिसाब से धोए जा रहे रे' से कवि किस कटु सत्य की ओर संकेत करता है?
(ङ) कवि को क्यों लगता है कि वह रिक्शा चालक के बिवाई पड़े पैरों को भूल नहीं पाएगा?
वह जो सड़क पर खून बह रहा है
इसे सुंघर कर तो देखो
और पहिचानने की कोशिश करो
यह हिंदू का है या मुसलमान का
किसी सिक्ख का या ईसाई का
किसी बहिन का या भाई का
सड़क पर इधर-उधर पड़े
पत्थरों के बीच में दर्द
टिफिन कॅरियर में
जो रोटी की महक आ रही है
वह किस जाति की है?
क्या तुम मुझे यह बता सकते हो?
उन रक्षा मन कमान, चार जुगों, दो मार्वियों
कितना और छिलानों का काम क्या है?
क्या तुम मुझे बता सकते हो?
स्कूल से कभी न लौटने वाली
बच्ची की प्रतीक्षा में खड़ी
माँ के आँसुओं का धर्म क्या है?
और अस्पताल में दाखिल
अखियों की चीखों का मर्म क्या है?
ये रक्त सने कपड़े
उस आदमी के हैं
जिसके हाथ
मिलों में कपड़ा बुनते हैं
कारखानों में जूते बनाते हैं
खेतों में बीज डालते हैं
पुस्तकें लिखते, खिलौने बनाते हैं
और शहर की
अंधेरी सड़कों के लैम्प-पोस्टर जलाते हैं
(क) खून को पहचानना क्यों नहीं जा सकता?
(ख) प्रतीक्षा में खड़ी माँ के आँसुओं का क्या कारण है?
(ग) टिफिन में रखी रोटी, फटी जूते आदि का संबंध समाज के किस वर्ग से है?
(घ) साम्प्रदायिक हिंसा के शिकार कौन लोग होते हैं?
(ङ) कविता में श्रमिकों और कृषकों के प्रति लेखक की सहानुभूति के औचित्य को स्पष्ट कीजिए।
(क) खून को पहचानना क्यों नहीं जा सकता?
Answer: खून का कोई धर्म, जाति या मजहब नहीं होता। सभी इंसानों का खून लाल रंग का होता है, इसलिए साम्प्रदायिक हिंसा में बहे खून को हिंदू-मुसलमान या किसी धर्म में विभाजित नहीं किया जा सकता।
In simple words: खून का कोई मजहब नहीं होता, इसलिए नफरत फैलाने वाले उसे किसी खास धर्म से नहीं जोड़ सकते।
Exam Tip: मानवीयता और समरसता के संदेश को स्पष्ट करें।
Question (ख). प्रतीक्षा में खड़ी माँ के आँसुओं का क्या कारण है?
Answer: स्कूल से कभी न लौटने वाली उस मासूम बच्ची की प्रतीक्षा कर रही माँ के आँसुओं का कारण साम्प्रदायिक दंगे और हिंसा है, जिसमें उसकी संतान असमय काल का ग्रास बन गई है।
In simple words: दंगों और हिंसा की भेंट चढ़ चुकी अपनी बच्ची के कभी न लौटने का गम उस माँ के आँसुओं का कारण है।
Exam Tip: हिंसा की विभीषिका और माँ के दर्द को संवेदनशीलता के साथ लिखें।
Question (ग). टिफिन में रखी रोटी, फटी जूते आदि का संबंध समाज के किस वर्ग से है?
Answer: टिफिन में रखी साधारण रोटी और फटे जूतों का संबंध समाज के शोषित, गरीब, श्रमिक और मेहनतकश वर्ग से है, जो अपनी मेहनत से समाज को पालता है लेकिन स्वयं अभावों में जीता है।
In simple words: इन चीजों का संबंध गरीब मजदूर और मेहनतकश वर्ग से है।
Exam Tip: श्रमिक वर्ग के जीवन संघर्ष और उनकी सादगी को दर्शाएँ।
Question (घ). साम्प्रदायिक हिंसा के शिकार कौन लोग होते हैं?
Answer: साम्प्रदायिक हिंसा के शिकार हमेशा वे आम, गरीब और मासूम लोग होते हैं जिनका धर्म की राजनीति से कोई लेना-देना नहीं होता; जैसे मजदूर, बच्चे, महिलाएँ और मेहनतकश आम नागरिक।
In simple words: दंगों और हिंसा में हमेशा आम गरीब, मजदूर और मासूम लोग ही पिसते हैं।
Exam Tip: हिंसा की राजनीति और उसके दुष्परिणामों पर प्रकाश डालें।
Question (ङ). कविता में श्रमिकों और कृषकों के प्रति लेखक की सहानुभूति के औचित्य को स्पष्ट कीजिए।
Answer: कविता में श्रमिकों और कृषकों के प्रति लेखक की सहानुभूति पूर्णतया उचित है क्योंकि यही वे लोग हैं जो अपने खून-पसीने से वस्त्र बुनते हैं, अन्न उगाते हैं, कारखानों में काम करते हैं और समाज का संपूर्ण निर्माण करते हैं। इसके बावजूद वे ही हिंसा, उपेक्षा और गरीबी का शिकार बनते हैं।
In simple words: जो लोग पूरी मेहनत से दुनिया को संवारते हैं, वे ही सबसे ज्यादा दुख झेलते हैं, इसलिए उनके प्रति कवि की सहानुभूति पूरी तरह न्यायसंगत है।
Exam Tip: श्रम का सम्मान और शोषित वर्ग के प्रति मानवीय दृष्टिकोण को उत्तर का मुख्य आधार बनाएं।
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