Class 12 Hindi Practice Sheet: CBSE Class 12 Hindi Revision Worksheet Set 01
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जयशंकर प्रसाद - कार्नेलिया का गीत , देवसेना का गीत
Question 1. 'उड़ते खग' और 'बरसाती आँखों के बादल' में क्या विशेष अर्थ व्यंजित होता है?
Answer: 'उड़ते खग' अनजान और दूर देश से आने वाले अनजान पक्षियों के प्रतीक हैं जो बिना किसी सहारे के अज्ञान क्षितिज की ओर बढ़ते हैं, जो प्रवासियों या अज्ञानता में भटकने वालों की स्थिति को दर्शाता है। 'बरसाती आँखों के बादल' करुणा, वेदना, विरह और आंसुओं की अधिकता को व्यक्त करते हैं जो जीवन की दुखद स्मृतियों से उपजे हैं।
In simple words: उड़ते खग अनिश्चित भविष्य और अजनबीपन को तथा बरसाती आँखें दुखों व आंसुओं को दर्शाती हैं।
Exam Tip: ऐसे प्रतीकात्मक प्रश्नों में कवि के आंतरिक भावों और मानवीकरण अलंकार को अवश्य स्पष्ट करें।
Question 2. 'जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस पंक्ति का आशय यह है कि भारत देश अपनी असीम उदारता, आतिथ्य सत्कार और करुणा के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ आने वाले हर अनजान व्यक्ति और शरणार्थी को अपनापन, आश्रय और संबल प्राप्त होता है, ठीक वैसे ही जैसे थके-हारे पक्षी को अंततः सुरक्षित ठिकाना मिल जाता है।
In simple words: भारत में अजनबी लोगों को भी अपनेपन का अहसास और आश्रय मिलता है।
Exam Tip: भारतीय संस्कृति के मूल गुणों जैसे 'वसुधैव कुटुम्बकम' और अतिथि देवो भव का उल्लेख करें।
Question 3. 'कार्नेलिया का गीत' के आधार पर भारत की प्राकृतिक व भारतीयों की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
Answer: भारत की प्राकृतिक विशेषता यह है कि यहाँ सूर्योदय का सौंदर्य अत्यंत मनमोहक है, नदियाँ और प्रकृति चारों ओर हरियाली व सुख बिखेरती हैं तथा ताम्रवर्ण बादलों में संध्या का सुंदर रूप झलकता है। भारतीयों की चारित्रिक विशेषता यह है कि वे अत्यंत दयालु, परोपकारी, सहृदय और अतिथि-सत्कार करने वाले होते हैं जो अनजान लोगों को भी प्रेम व आश्रय देते हैं।
In simple words: भारत की प्रकृति सुंदर है और यहाँ के लोग बहुत दयालु और मेहमाननवाज होते हैं।
Exam Tip: उत्तर को दो भागों (प्राकृतिक और चारित्रिक) में विभाजित करके बिंदुवार लिखें।
Question 4. काव्य सौंदर्य स्पष्ट करें -
क. हेम कुंभ ले उषा सवेरे- भरती ढुलकाती सुख मेरे
मंदिर उघड़ते रहते जब जग कर रजनी भर तारा
Answer: भाव सौंदर्य: इसमें प्रातःकाल के आगमन का अत्यंत सुकुमार और मानवीकृत चित्रण है जहाँ उषा स्वर्ण कलश (सूर्य/ओस) लेकर संसार में सुख बिखेरती है। शिल्प सौंदर्य: 'हेम कुंभ' में रूपक अलंकार तथा 'उषा' में मानवीकरण अलंकार है। भाषा संस्कृतनिष्ठ, कोमल कांत पदावली से युक्त और प्रवाहमयी है।
In simple words: यहाँ सुबह के सुंदर रूप का वर्णन है जब प्रकृति चारों ओर सुख और शीतलता फैलाती है।
Exam Tip: काव्य सौंदर्य के उत्तर में भाव-सौंदर्य और शिल्प-सौंदर्य दोनों अलग-अलग headings के अंतर्गत लिखें।
Question 4. (ख) श्रमृत स्वप्न की मधुमाया में गहन-विपिन की तरु छाया में
पथिक उनींदी श्रुति में किसने यह विहाग की तान उठाई
Answer: भाव सौंदर्य: देवसेना अपने जीवन के अंतिम पड़ाव या थके हुए क्षणों में अतीत की मधुर स्मृतियों और विरह की वेदना को याद करती है। शिल्प सौंदर्य: 'मधुमाया' और 'विहाग की तान' में संगीतात्मकता है। 'तरु छाया में' अनुप्रास अलंकार की छटा है। भाषा लाक्षणिक और भावपूर्ण है।
In simple words: यहाँ थके हुए पथिक रूपी जीवन में किसी अनजाने संगीत या वेदना के गूँजने का सुंदर भाव है।
Exam Tip: शब्दों के अर्थ (जैसे विहाग = रात्रि का एक राग) लिखकर उत्तर को प्रभावशाली बनाएं।
निराला - सरोज स्मृति , गीत गाने दो मुझे
सरोज - स्मृति
Question 1. सरोज के नव वधू रूप की शकुंतला के साथ क्या समानता है?
Answer: कवि निराला ने अपनी पुत्री सरोज के विवाह के समय उसके सौंदर्य की तुलना महाकवि कालिदास की प्रसिद्ध पात्र शकुंतला से की है। जिस प्रकार शकुंतला का पालन-पोषण प्रकृति के सानिध्य में हुआ था और वह अकृत्रिम सौंदर्य की मूर्ति थी, उसी प्रकार सरोज भी अत्यंत सरल, स्वाभाविक, निश्चल और स्वाभाविक रूप से सुंदरी थी। दोनों के जीवन में मातृत्व के सुख का अभाव था और दोनों का विवाह शकुन-अपशकुन के बीच हुआ।
In simple words: सरोज का प्राकृतिक और निश्चल सौंदर्य कालिदास की शकुंतला जैसा ही पवित्र और सुंदर था।
Exam Tip: कालिदास की शकुंतला के प्रसंग को सरोज के व्यक्तित्व से जोड़कर स्पष्ट करें।
Question 2. निराला ने जिस प्रकार अपनी पुत्री का विवाह किया आज के संदर्भ में उसकी प्रासंगिकता बताइए?
Answer: निराला ने रूढ़ियों और पारंपरिक आडंबरों के विरुद्ध जाकर अपनी पुत्री का विवाह अत्यंत सादगी से संपन्न कराया था, जिसमें किसी प्रकार का दिखावा या दहेज प्रथा का समर्थन नहीं था। आज के आधुनिक संदर्भ में यह घटना अत्यधिक प्रासंगिक है क्योंकि आज भी समाज में शादियों पर होने वाले फिजूलखर्च, दहेज और प्रदर्शन की प्रवृत्ति बढ़ रही है। निराला का यह कदम समाज को सादगी और आडंबरहीन जीवन का संदेश देता है।
In simple words: निराला ने बिना किसी दिखावे और दहेज के बेटी का विवाह किया था, जो आज के समय में भी एक बड़ा संदेश है।
Exam Tip: समाज सुधार और दहेज-विरोधी दृष्टिकोण को मुख्य बिंदु बनाएं।
Question 3. निराला ने अपनी पुत्री का तर्पण किस प्रकार किया?
Answer: निराला ने पारंपरिक कर्मकांडों के अनुसार मृत पुत्री का तर्पण करने के स्थान पर अपने समस्त जीवन के संचित कर्मों, संघर्षों, त्याग और साहित्यिक साधना का पुण्य फल अपनी पुत्री सरोज को समर्पित करके उसका तर्पण किया। उन्होंने अपने आंसुओं और वियोग की पीड़ा को ही पुत्री के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बनाया।
In simple words: निराला ने पारंपरिक पूजा-पाठ की बजाय अपने जीवन के अच्छे कर्मों और त्याग का पुण्य अपनी बेटी को अर्पित किया।
Exam Tip: कवि के विद्रोही और संवेदनशील रूप का उल्लेख करना न भूलें।
गीत गाने दो मुझे
Question 1. 'गीत और गाने का भाव दुःख और निराशा से लड़ने की शक्ति देते हैं' कविता के आधार पर सिद्ध करो।
Answer: कविता में कवि निराला जीवन की कठिन परिस्थितियों, शोषण और निराशा से टूट चुके समाज में नया जीवन फूंकने के लिए गीत गाने की इच्छा व्यक्त करते हैं। जीवन में जब चारों ओर वेदना के बादल छाए हों और कंठ आंसुओं से रुंध गया हो, तब प्रेरणादायक गीत या स्वर ही मनुष्य को भीतर से मजबूत बनाते हैं और उसे हार न मानने की शक्ति प्रदान करते हैं।
In simple words: मुश्किल समय में गीत और संगीत मनुष्य को निराशा से उबारकर आगे बढ़ने की शक्ति देते हैं।
Exam Tip: कविता की पंक्तियों 'कंठ रुक गया है प्रलय का' का संदर्भ देते हुए उत्तर लिखें।
Question 2. निराला ने 'ठग-ठाकुरों' के द्वारा किसकी ओर संकेत किया है?
Answer: निराला ने 'ठग-ठाकुरों' शब्दों के माध्यम से समाज के उन शोषक वर्गों, पूंजीपतियों, सामंतवादियों और अवसरवादियों की ओर संकेत किया है जो आम जनता, गरीबों और मजदूरों का शोषण करते हैं, उनकी मेहनत की कमाई हड़प लेते हैं और उन्हें जीवनभर छले जाने को विवश करते हैं।
In simple words: ठग-ठाकुर समाज के शोषक और धनी लोगों के प्रतीक हैं जो गरीबों को लूटते हैं।
Exam Tip: सामाजिक विषमता और शोषण शब्द का प्रयोग अवश्य करें।
Question 3. पंक्तियों का आशय स्पष्ट करें -
क. श्रृंगार रहा जो निराकार
ख. भर गया है जहर से संसार जैसे हार खाकर
Answer: (क) इसका आशय यह है कि जीवन का जो वास्तविक सौंदर्य और प्रेम अमूर्त व निराकार रूप में हृदय में बसा था, वह अभावों और संघर्षों के कारण बिखर गया।
(ख) इसका आशय है कि चारों ओर फैली कठिनाइयों, छल-क्रेप और निराशा से हारकर मनुष्य का जीवन रूपी संसार विषैला और कड़वाहट से भर गया है, जहाँ हर कोई त्रस्त है।
In simple words: जीवन के सौंदर्य के नष्ट होने और दुनिया में चारों ओर दुख व कड़वाहट फैलने का भाव व्यक्त हुआ है।
Exam Tip: दोनों पंक्तियों के प्रतीकार्थ को स्पष्ट करते हुए उत्तर दें।
गद्य
प्रेमघन की छायास्मृति - रामचंद्र शुक्ल
Question 1. लेखक (शुक्ल जी) के मन में बचपन में भारतेंदु जी के संबंध में कैसी भावना जगी और क्यों?
Answer: लेखक रामचंद्र शुक्ल के बालमन में भारतेंदु हरिश्चंद्र के प्रति अगाध श्रद्धा, प्रेम और कौतूहल की भावना जाग उठी थी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनके पिता को भारतेंदु जी के नाटक बहुत पसंद थे और वे ग्रामीण परिवेश में रहते हुए भी साहित्य प्रेमियों के संपर्क में आए थे। भारतेंदु जी का व्यक्तित्व और उनका साहित्य उस समय के नवयुवकों और साहित्यप्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत था, जिससे लेखक के मन में उनके प्रति अद्वितीय आकर्षण पैदा हुआ।
In simple words: पिता के साहित्यिक प्रेम और भारतेंदु जी की महानता के कारण शुक्ल जी के मन में उनके प्रति गहरा आदर भाव पैदा हुआ।
Exam Tip: शुक्ल जी के बाल्यकाल के संस्कारों और साहित्यिक वातावरण का उल्लेख करें।
Question 2. प्रेमघन के भाषा के संबंध में क्या विचार थे?
Answer: बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमघन' भाषा के प्रति बहुत सचेत और गंभीर थे। वे पुरानी हिंदी, टकसाली भाषा और ग्रामीण शब्दों के प्रयोग के पक्षधर थे। वे बातचीत और लेखन में ऐसी भाषा का प्रयोग पसंद करते थे जिसमें स्वाभाविकता हो और जो जनता के हृदय तक सीधी उतर सके। वे आधुनिक कृत्रिमता और अंग्रेजीियत से दूर रहकर अपनी संस्कृति से जुड़ी भाषा के प्रयोग पर बल देते थे।
In simple words: प्रेमघन जी टकसाली और स्वाभाविक हिंदी भाषा के प्रयोग पर जोर देते थे।
Exam Tip: प्रेमघन जी की भाषा शैली की विशेषताएं (जैसे व्यंग्यात्मकता और ठेठपन) दर्शाएं।
Question 3. पाठ के आधार पर प्रेमघन के व्यक्तित्व का वर्णन कीजिए।
Answer: प्रेमघन जी एक अनूठे और विलक्षण व्यक्तित्व के धनी थे। वे भारतेंदु युग के प्रमुख साहित्यकार थे जो पुरानी तहजीब, नवाबियत और रईसी ठाट-बाट के साथ जीवन जीते थे। उनके बाल बड़े-बड़े थे, वे कंधे पर चादर रखते थे, हर बात को बहुत ही संभलकर और अनूठे अंदाज में कहते थे। वे स्वभाव से थोड़ा शर्मीले और गंभीर थे तथा उनका पूरा परिवेश भारतीय संस्कृति और कला प्रेम से ओत-प्रोत था।
In simple words: प्रेमघन जी रईसी ठाट-बाट, गंभीर स्वभाव और पुरानी तहजीब वाले एक अनूठे साहित्यकार थे।
Exam Tip: उनके बाहरी रूप-रंग और उनके भीतर छिपे साहित्यकार के अद्भुत समन्वय का वर्णन करें।
निबंध - लगभग (350-400 शब्द)
प्रकृति का संरक्षण : मानव जाति की रक्षा
विषय पर सारगर्भित निबंध लिखिए
Question 1. प्रकृति का संरक्षण : मानव जाति की रक्षा विषय पर निबंध लिखिए।
Answer:
प्रस्तावना: प्रकृति मनुष्य की जननी है। जन्म से लेकर मृत्यु तक मनुष्य अपनी प्रत्येक आवश्यकता के लिए प्रकृति पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर रहता है। जल, वायु, वन, मिट्टी और जीव-जंतु इस विशाल प्राकृतिक तंत्र के अभिन्न अंग हैं। प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति में प्रकृति को पूजनीय माना गया है, किंतु आधुनिक विकास की अंधी दौड़ ने इस संतुलन को गंभीर रूप से हिला दिया है।
प्रकृति के दोहन के दुष्परिणाम: आज औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण पर्यावरण का संतुलन बिगड़ चुका है। वैश्विक तापन (Global Warming), प्रदूषण, ग्लेशियरों का पिघलना, और अनियोजित बारिश इसके प्रत्यक्ष परिणाम हैं। जब-जब मानव ने प्रकृति के नियमों के साथ खिलवाड़ किया है, तब-तब बाढ़, सूखा, भूकंप और महामारियों के रूप में प्रकृति ने अपना विकराल रूप दिखाया है।
संरक्षण की आवश्यकता: प्रकृति का संरक्षण केवल पौधों को बचाना नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण मानव जाति के अस्तित्व की गारंटी है। स्वच्छ वायु और शुद्ध जल के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। यदि आज हमने पेड़ों की कटाई और प्रदूषण पर रोक नहीं लगाई, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए यह सुंदर पृथ्वी रहने योग्य नहीं बचेगी।
उपसंहार: 'प्रकृति है तो हम हैं' - इस सत्य को हमें समझना होगा। वृक्षारोपण, प्लास्टिक का त्याग, नवीकरणीय ऊर्जा का प्रयोग और प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग ही मानव जाति की रक्षा का एकमात्र मार्ग है। आइए, हम सब मिलकर प्रकृति के संरक्षण का संकल्प लें।
In simple words: प्रकृति को बचाना ही इंसानी जीवन को सुरक्षित रखना है, क्योंकि प्रकृति के बिना जीवन असंभव है।
Exam Tip: निबंध की शुरुआत एक सुंदर उद्धरण या श्लोक से करें और अंत में सकारात्मक संदेश अवश्य दें।
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