Class 12 Hindi Practice Sheet: CBSE Class 12 Hindi Revision Worksheet Set 06
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पाठ्यक्रम:
अंतरा गद्य - 1. दूसरा देवदास, 2. कुटज
अंतराल - सूरदास की झोपड़ी
अभिव्यक्ति - अप्रत्याशित लेखन
दूसरा देवदास
सप्रसंग व्याख्या: इस भीड़ में दौड़ नहीं थी, अतिक्रमण नहीं था और भी अनोखी बात यह थी कि कोई भी स्नानार्थी किसी सैलानी आनंद में डुबकी नहीं लगा रहा था बल्कि स्नान से ज्यादा ध्यान ले रहा था। दूर जलधारा के बीच एक आदमी सूर्य की ओर उन्मुख हाथ जोड़े खड़ा था। उसके चेहरे पर इतना विभोर, विनीत भाव था मानो उसने अपना सारा अहम् त्याग दिया है।
Answer: संदर्भ: यह पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक 'अंतरा' भाग-2 के अंतर्गत मम्मट नाथ गुप्त द्वारा रचित पाठ 'दूसरा देवदास' से ली गई हैं।
व्याख्या: लेखक काशी में गंगा तट के वातावरण का वर्णन करते हुए कहता है कि वहाँ स्नान करने वालों में कोई हड़बड़ी, भगदड़ या नियमों का उल्लंघन नहीं था। लोग केवल मौज-मस्ती के लिए स्नान नहीं कर रहे थे, बल्कि उनका पूरा ध्यान भक्ति और आत्मिक शांति की ओर था। जल के बीच में एक व्यक्ति सूर्य की तरफ मुँह करके हाथ जोड़े पूरी श्रद्धा से खड़ा था। उसके चेहरे के भाव देखकर ऐसा प्रतीत होता था कि उसके मन में अहंकार का पूरी तरह नाश हो चुका है और वह पूर्णतः ईश्वर को समर्पित है।
In simple words: गंगा तट पर लोग मस्ती करने के बजाय पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ स्नान और ध्यान कर रहे थे, जहाँ एक व्यक्ति पूरी तरह अहंकार छोड़कर सूर्य की उपासना में लीन था।
Exam Tip: संदर्भ लिखते समय पाठ और लेखक का नाम स्पष्ट रूप से लिखें तथा व्याख्या में मुख्य भाव (भक्ति और अहम् का त्याग) को अवश्य उजागर करें।
Question 1. संभव को दूसरा देवदास क्यों कहा गया है?
Answer: संभव को दूसरा देवदास इसलिए कहा गया है क्योंकि जिस प्रकार प्रसिद्ध उपन्यास 'देवदास' का नायक देवदास पारो के वियोग में और अपनी असफल प्रेम कहानी के कारण काशी की गलियों और घाटों पर भटकता है, उसी प्रकार संभव भी अपने जीवन की एक अधूरी और दुखद घटना के बाद मानसिक संताप में काशी के घाट पर आता है। उसकी मनोदशा और वियोग की स्थिति प्राचीन देवदास जैसी ही प्रतीत होती है।
In simple words: उपन्यास के देवदास की तरह संभव भी प्रेम में असफलता और वियोग के कारण काशी के घाटों पर दुखी अवस्था में भटक रहा था।
Exam Tip: चंद्रकांता और संभव के प्रेम प्रसंग तथा देवदास की तुलनात्मक स्थिति का संक्षिप्त उल्लेख उत्तर में जरूर दें।
Question 2. एक छोटी-सी मुलाकात ने नास्तिक संभव को आस्तिकता की ओर कैसे मोड़ दिया?
Answer: संभव अपने जीवन के दुख और निराशा के कारण ईश्वर और धर्म से विमुख (नास्तिक) हो चुका था। लेकिन काशी के घाट पर एक छोटी-सी बच्ची (चमेली) से हुई मुलाकात और उसके सहज व निष्कलुष विश्वास ने संभव के जीवन की दिशा बदल दी। उस अोध और सरल बच्ची के सान्निध्य में संभव को आंतरिक शांति और जीवन का नया अर्थ मिला, जिससे उसका विश्वास पुनः आस्था और ईश्वर में जागृत हो गया।
In simple words: एक छोटी बच्ची की मासूमियत और उसके साथ हुई सरल बातचीत ने संभव के निराशा भरे मन में आस्था की ज्योति जला दी।
Exam Tip: घटना के मर्म को समझाते हुए बच्ची के प्रभाव और संभव की मानसिक स्थिति में आए सकारात्मक बदलाव को स्पष्ट करें।
कुटज
सप्रसंग व्याख्या: दुख और सुख तो मन के विकल्प हैं। सुखी वह है जिसका मन वश में है, दुखी वह है जिसका मन परवश है। परवश होने का अर्थ है खुशामद करना, दाँत निपोरना, चाटुकारिता करना, हजूरी। जिसका मन वश में नहीं है वही दूसरे के मन का छंदावर्तन करता है।
Answer: संदर्भ: यह गद्यांश आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित निबंध 'कुटज' से अवतरित है।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि मनुष्य का सुख और दुख बाहरी परिस्थितियों पर नहीं, बल्कि उसके अपने मन की स्थिति पर निर्भर करता है। जिसका मन उसके नियंत्रण में रहता है, वह हर परिस्थिति में प्रसन्न रहता है। इसके विपरीत, जिस व्यक्ति का मन परतंत्र होता है, उसे दूसरों की चापलूसी, खुशामद और गुलामी करनी पड़ती है। ऐसे लोग हमेशा दूसरों के इशारों पर नाचते हैं और आंतरिक रूप से दुखी व कमजोर होते हैं।
In simple words: सुख और दुख मन की स्थिति हैं; जो व्यक्ति अपने मन को नियंत्रित नहीं कर पाता, उसे दूसरों की चापलूसी करनी पड़ती है।
Exam Tip: आचार्य द्विवेदी की दार्शनिक शैली को दर्शाते हुए 'मन का वश में होना' और 'परवशता' के अंतर को स्पष्ट शब्दों में लिखें।
Question 1. कुटज के मस्तोंमौला पेड़ अपना भाग्य कहाँ से और कैसे प्राप्त करते हैं?
Answer: कुटज का पेड़ अत्यंत विषम और प्रतिकूल परिस्थितियों (जैसे नग्न पाषाण की कठोर चट्टानों, जलहीन और शुष्क वातावरण) में भी जीवित रहता है। वह अपना भाग्य किसी के सामने हाथ फैलाकर या भीख मांगकर प्राप्त नहीं करता, बल्कि अपनी जिजीविषा (जीने की इच्छा), कठोर संघर्ष और अपनी जड़ों के बल पर पाताल से रस खींचकर खुद अपना भाग्य बनाता है।
In simple words: कुटज कड़े संघर्ष और अपनी जिजीविषा के बल पर बंजर चट्टानों के बीच भी खुद अपना जीवन और भाग्य तलाशता है।
Exam Tip: कुटज के माध्यम से लेखक के संघर्ष और स्वावलंबन के संदेश को मुख्य रूप से रेखांकित करें।
Question 2. कुटज को 'उजाड़ का साथी' और 'गाढ़े का साथी' क्यों कहा गया है?
Answer: कुटज ऐसी जगहों पर उगता है और पनपता है जहाँ चारों तरफ उजाड़, वीरान और पथरीली जमीन होती है, इसलिए उसे 'उजाड़ का साथी' कहा गया है। साथ ही, जब भयंकर गर्मी और सूखे की स्थिति होती है, जब बड़े-बड़े पौधे और वृक्ष सूख जाते हैं, तब भी कुटज हरा-भरा डटा रहता है। संकट और विपत्ति के समय भी साथ निभाने के कारण उसे 'गाढ़े का साथी' कहा गया है।
In simple words: वीरान जगहों पर उगने और हर कठिन परिस्थिति में डटे रहने के कारण कुटज को उजाड़ और संकट का साथी कहा गया है।
Exam Tip: दोनों शब्दों ('उजाड़ का साथी' और 'गाढ़े का साथी') के प्रतीकात्मक अर्थ को उदाहरण सहित समझाइए।
Question 3. कुटज को अपराजित जीवनी शक्ति वाला क्यों कहा गया है?
Answer: कुटज को अपराजित जीवनी शक्ति वाला इसलिए कहा गया है क्योंकि वह जीवन के हर प्रकार के संघर्ष, अभाव और प्रतिकूल वातावरण को चुनौती देते हुए सदा जीवित रहता है। उसे न तो गर्मियों की प्रचंड धूप हरा सकती है और न ही चट्टानों की कठोरता। उसकी जीने की इच्छा इतनी प्रबल है कि वह हर परिस्थिति में अजय बना रहता है।
In simple words: विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने और हमेशा जीवित रहने की अद्भुत क्षमता के कारण कुटज को अपराजित कहा गया है।
Exam Tip: 'अपराजित' शब्द का अर्थ स्पष्ट करते हुए उसकी जीने की दृढ़ इच्छाशक्ति का उल्लेख करें।
Question 4. कुटज मनुष्य को क्या संदेश देता है?
Answer: कुटज मनुष्य को यह संदेश देता है कि परिस्थिति चाहे जितनी भी प्रतिकूल और कठिन क्यों न हो, मनुष्य को कभी भी घबराना नहीं चाहिए और न ही हार माननी चाहिए। स्वावलंबन, अडिग आत्मविश्वास, जीने की अदम्य इच्छा (जिजीविषा) और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहना ही सच्चा मानवीय जीवन है। हमें दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी ताकत पर जीना चाहिए।
In simple words: कुटज संदेश देता है कि कठिन समय में भी हिम्मत न हारकर स्वावलंबन और आत्मविश्वास के साथ डटे रहना चाहिए।
Exam Tip: संदेश को नैतिक और प्रेरणादायक रूप में लिखकर उत्तर का समापन करें।
हजारी प्रसाद द्विवेदी और ममता कालिया के जीवन वृत्त तथा रचनाओं का परिचय देते हुए उनकी भाषा शैली पर टिप्पणी कीजिए।
Answer: 1. आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी:
- जीवन परिचय: इनका जन्म सन 1907 में बलिया (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। ये हिंदी के प्रख्यात निबंधकार, उपन्यासकार, आलोचक और शोधकर्ता थे। इनका निधन सन 1979 में हुआ.
- प्रमुख रचनाएँ: 'बाणभट्ट की आत्मकथा', 'पुनर्नवा', 'चारु चंद्रलेख' (उपन्यास); 'कुटज', 'अशोक के फूल', 'कल्पलता' (निबंध संग्रह); 'हिंदी साहित्य की भूमिका' (आलोचना).
- भाषा शैली: इनकी भाषा संस्कृतनिष्ठ, गंभीर, परिमार्जित और प्रवाहमयी है। शैली में आधिपत्य, विचारात्मकता, व्यंग्यात्मकता और व्यास शैली का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
2. ममता कालिया:
- जीवन परिचय: इनका जन्म सन 1940 में वृंदावन (उत्तर प्रदेश) में हुआ। ये समकालीन हिंदी साहित्य की सशक्त कहानीकार और उपन्यासकार हैं.
- प्रमुख रचनाएँ: 'बेघर', 'नरक दर नरक', 'एक पत्नी के नोट्स' (उपन्यास); 'छुटकारा', 'getItemId' (कहानियाँ).
- भाषा शैली: इनकी भाषा बहुत ही सहज, सरल, व्यावहारिक और आद्योपांत जीवंत है। इन्होंने बोलचाल की आम भाषा का प्रयोग किया है जिसमें संवाद शैली और मनोवैज्ञानिक गहराई स्पष्ट झलकती है।
In simple words: आचार्य द्विवेदी की भाषा संस्कृतनिष्ठ और विचारात्मक है, जबकि ममता कालिया की भाषा अत्यंत सरल, व्यावहारिक और जीवन के यथार्थ के निकट है।
Exam Tip: दोनों लेखकों के जीवन परिचय में जन्म-मृत्यु, दो-दो प्रमुख कृतियाँ और भाषा की विशेषता (तत्सम बनाम व्यावहारिक) को बिंदुवार लिखें।
सूरदास की झोपड़ी
आशय स्पष्ट कीजिए:
1. अंधे भिखारी के लिए दरिद्रता इतनी लज्जा की बात नहीं जितना धन।
2. गरीब की हाय बड़ी जानलेवा होती है।
3. आशा से ज्यादा दीर्घजीवी और कोई वस्तु नहीं होती है।
Answer: 1. आशय: समाज में एक सामान्य गरीब या भिखारी होने पर किसी को विशेष हीनता नहीं महसूस होती, क्योंकि वह उसकी सामान्य स्थिति मानी जाती है। किंतु जब वही गरीब व्यक्ति अपनी मेहनत और पाई-पाई जोड़कर थोड़ी सी धन-दौलत जमा कर लेता है और यदि वह चोरी हो जाए या छिन जाए, तो समाज के सामने उसका उपहास उड़ता है और उसे अधिक लज्जा व अपमान का सामना करना पड़ता है।
2. आशय: जब कोई शक्तिशाली या धनवान व्यक्ति किसी असहाय, गरीब और शोषित व्यक्ति पर अत्यधिक अत्याचार करता है, तो उस गरीब की आह या बददुआ बहुत भयानक होती है। वह अन्याय करने वाले के पूरे परिवार और उसके सुख-चैन को नष्ट कर देती है।
3. चरण: आशा एक ऐसी अमर भावना है जो मनुष्य को सबसे कठिन और निराशाजनक परिस्थितियों में भी जीवित रखती है। सब कुछ छिन जाने के बाद भी इंसान की उम्मीद कभी नहीं मरती; वह अंत तक जीवित रहती है।
In simple words: धनहीन होने से अधिक लज्जा धन छिनने पर होती है, गरीब की हाय बहुत खतरनाक होती है, और आशा मनुष्य का सबसे लंबा साथ निभाने वाली भावना है।
Exam Tip: मुंशी प्रेमचंद की इस कहानी के प्रसंग से जोड़ते हुए प्रत्येक कथन के मर्म को स्पष्ट करें।
Question 1. झोपड़ी जल जाने पर सूरदास के अंतर्द्वंद्व को स्पष्ट कीजिए।
Answer: सूरदास की झोपड़ी जल जाने के बाद उसके मन में गहरा अंतर्द्वंद्व उत्पन्न होता है। एक तरफ उसे इस बात का दुख था कि उसकी जीवनभर की जमापूंजी (पैसे) जलकर राख हो गई, जिससे उसके गृहस्थी बसाने और शादी करने का सपना टूट गया था। दूसरी तरफ, उसका सात्विक और परोपकारी मन यह सोचकर शांत होता है कि कम से कम इस आग में किसी बेकसूर जीव या पड़ोसी का नुकसान नहीं हुआ। वह अपनी इस बड़ी हानि को भगवान की इच्छा मानकर स्वीकार करने की कोशिश करता है।
In simple words: झोपड़ी जलने से जमापूंजी नष्ट होने का दुख था, लेकिन साथ ही किसी का अहित न होने की संतृप्ति भी उसके मन में थी।
Exam Tip: सूरदास की उदात्त मानसिकता और उसकी मानवीय संवेदनाओं को उत्तर का केंद्रबिंदु बनाएं।
Question 2. सूरदास ने किन आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए धन एकत्रित किया था?
Answer: सूरदास ने अपनी झोपड़ी में जो पैसे छिपाकर रखे थे, वे उसने अपनी कुछ बुनियादी और सामाजिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बड़ी मेहनत से जोड़े थे। वह उन पैसों से अपनी शादी करना चाहता था, अपने पितरों का पिंडदान व श्राद्ध कर्म करना चाहता था और कुछ पैसे समाज के कल्याण व परोपकार के कार्यों में लगाना चाहता था ताकि उसका जीवन सार्थक हो सके।
In simple words: सूरदास ने विवाह करने, पितरों का पिंडदान करने और कुछ सामाजिक कार्य करने के लिए मेहनत से धन इकट्ठा किया था।
Exam Tip: सूरदास के सपनों और उसकी सामाजिक जिम्मेदारियों (विवाह और पिंडदान) का स्पष्ट उल्लेख करें।
Question 3. 'यह फूस की राख न थी, उसकी अभिलाषाओं की राख थी।' - विवेचना कीजिए।
Answer: यह कथन सूरदास की मनोव्यथा को पूरी गहराई से उजागर करता है। सूरदास के लिए उसकी झोपड़ी केवल तिनकों और फूस का एक ढांचा नहीं थी, बल्कि उसमें उसके जीवन के तमाम सुनहरे सपने, गृहस्थ बसने की उम्मीदें, समाज में सम्मान से जीने की अभिलाषाएं और उसकी वर्षों की मेहनत जुड़ी हुई थी। जब भैरों द्वारा लगाई गई आग में झोपड़ी जलकर राख हो गई, तो केवल घास-फूस ही नहीं जली, बल्कि सूरदास के वे सारे सपने और अरमान हमेशा के लिए जलकर राख हो गए।
Answer: (Alternative view) झोपड़ी का जलना केवल भौतिक क्षति नहीं थी, बल्कि एक गरीब के स्वाभिमान और भविष्य के सपनों का अंत था।
In simple words: झोपड़ी के साथ-साथ सूरदास के वे सारे सपने और अरमान जल गए जो उसने अपने जीवन के लिए संजोए थे।
Exam Tip: रूपक अलंकार के प्रयोग और सूरदास की मानसिक त्रासदी को ध्यान में रखते हुए उत्तर लिखें।
Question 4. सूरदास का कथन है, 'जीवन एक खेल है, इसे खेलो।' इस संदर्भ में सूरदास स्वयं कितना खरा उतरता है?
Answer: सूरदास का यह दार्शनिक दृष्टिकोण है कि जीवन को एक खेल की तरह लेना चाहिए जिसमें हार-जीत, सुख-दुख और लाभ-हानि तो चलती रहती है। इस कथन पर सूरदास स्वयं पूरी तरह खरा उतरता है। अपनी झोपड़ी के जल जाने, सारी पूंजी लुट जाने और भैरों द्वारा अपमानित किए जाने के बावजूद वह टूटता नहीं है। वह कुछ क्षणों के शोक के बाद पुनः अपनी हार को स्वीकार करके मुस्कुराता है और अपनी राख पर दोबारा झोपड़ी बनाने का संकल्प लेता है। वह जीवन की हर चुनौती का सामना एक सच्चे खिलाड़ी की तरह करता है।
In simple words: सब कुछ लुट जाने के बाद भी सूरदास निराश नहीं होता, बल्कि एक खिलाड़ी की तरह दोबारा संघर्ष शुरू करने का संकल्प लेता है।
Exam Tip: सूरदास के चरित्र की सहनशीलता, कर्मठता और दार्शनिक सोच को उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
अभिव्यक्ति और माध्यम
निम्न विषयों के निबंध लिखने के लिए विषयों को चुनकर मुख्य बिंदुओं को शीर्षक के रूप में लिखो -
1. भ्रष्टाचार - कारण और निवारण
2. हमारी शिक्षा पद्धति के दोष
3. बदलते जीवन मूल्य
4. माता-पिता की नौकरी के बीच बिखरता बचपन
5. राष्ट्र निर्माण में युवा पीढ़ी का योगदान
Answer: प्रत्येक विषय के प्रमुख उप-शीर्षक (मुख्य बिंदु) निम्नलिखित रूप में लिखे जा सकते हैं:
1. भ्रष्टाचार - कारण और निवारण:
- प्रस्तावना: भ्रष्टाचार का अर्थ और वर्तमान स्वरूप
- भ्रष्टाचार के प्रमुख कारण (नैतिक पतन, लालच, ढीली कानून व्यवस्था)
- समाज और अर्थव्यवस्था पर दुष्परिणाम
- निवारण के उपाय (कड़े कानून, पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था, नैतिक शिक्षा)
- उपसंहार
2. हमारी शिक्षा पद्धति के दोष:
- प्रस्तावना: शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य बनाम वर्तमान प्रणाली
- सैद्धांतिक एवं रटन विद्या पर अत्यधिक जोर
- व्यावसायिक और कौशल विकास की कमी
- परीक्षा प्रणाली की विसंगतियाँ और मानसिक तनाव
- सुधार हेतु आवश्यक कदम
- उपसंहार
3. बदलते जीवन मूल्य:
- प्रस्तावना: भारतीय संस्कृति और पारंपरिक मूल्य
- आधुनिकीकरण और पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव
- संयुक्त परिवारों का विघटन और बढ़ती संवेदनहीनता
- भौतिकतावाद और स्वार्थ की भावना में वृद्धि
- मूल्यों की पुनर्स्थापना की आवश्यकता
- उपसंहार
4. माता-पिता की नौकरी के बीच बिखरता बचपन:
- प्रस्तावना: आधुनिक कामकाजी जीवनशैली और भागदौड़
- माता-पिता दोनों का नौकरीपेशा होना और समय का अभाव
- बच्चों का एकाकीपन, मोबाइल और टीवी पर निर्भरता
- संस्कारों और भावनात्मक जुड़ाव की कमी
- संतुलन बनाने के उपाय
- उपसंहार
5. राष्ट्र निर्माण में युवा पीढ़ी का योगदान:
- प्रस्तावना: देश के विकास में युवाओं की भूमिका
- ऊर्जा, नवीन सोच और तकनीकी कौशल का उपयोग
- सामाजिक कुप्रथाओं और भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुखर होना
- शिक्षा, खेल और विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति
- युवाओं का कर्तव्य और दिशाहीनता की चुनौती
- उपसंहार
In simple words: किसी भी निबंध को प्रभावी बनाने के लिए उसे प्रस्तावना, मुख्य कारणों/पक्षों और उपसंहार जैसे तार्किक उप-शीर्षकों में विभाजित करना चाहिए।
Exam Tip: अप्रत्याशित या सामान्य विषयों पर निबंध की रूपरेखा बनाते समय क्रमबद्धता (Introduction, Body Paragraphs, Conclusion) का विशेष ध्यान रखें।
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