CBSE Class 11 Hindi Elective Reading Comprehensive Questions

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Access the complete assignment PDF for Class 11 Hindi below. Regular practice with these targeted academic tasks builds familiarity with standard question patterns and helps secure higher marks in final school evaluations.

अभ्यास कार्य (1)

Question (क). आत्मनिर्भर व्यक्ति किस प्रकार का होता है? वह अपने जीवन को सुखी कैसे बनाता है?
Answer: आत्मनिर्भर व्यक्ति दासता की श्रृंखलाओं से मुक्त होता है और वह कभी भी दूसरों का मुँह नहीं देखता है। वह कठिन से कठिन कार्य को स्वयं करने की क्षमता रखता है। वह अपने सुखी जीवनयापन के लिए स्वयं सामग्री जुटाता है, अथक प्रयास करता है और छोटी-छोटी बातों के लिए दूसरों का सहारा नहीं ढूँढता, बल्कि अपने परिश्रम और स्वावलंबन से अपने जीवन को सुखी बनाता है।
In simple words: आत्मनिर्भर व्यक्ति किसी पर निर्भर न रहकर अपने परिश्रम से अपना जीवन सुखी बनाता है।

Exam Tip: उत्तर लिखते समय गद्यांश की पंक्तियों का ज्यों का त्यों प्रयोग करने के बजाय अपने सरल शब्दों में सार लिखें।

 

Question (ख). स्वावलंबन का श्रेष्ठ उदाहरण कहाँ और किस रूप में मिलता है?
Answer: स्वावलंबन का श्रेष्ठ उदाहरण जापान में मिलता है, जहाँ भयानक नरसंहार और आर्थिक क्षति होने के बाद भी वहाँ की जनता ने अपनी अटूट मेहनत, परिश्रम और स्वावलंबन के बल पर कुछ ही वर्षों में देश को फिर से हरा-भरा और समृद्ध बना दिया।
In simple words: जापान की जनता ने अपनी मेहनत से यह सिद्ध कर दिया कि स्वावलंबन ही सफलता की कुंजी है।

Exam Tip: गद्यांश में दिए गए विशिष्ट उदाहरणों (जैसे जापान) को उत्तर में अवश्य शामिल करें।

 

Question (ग). किस प्रकार के व्यक्ति भाग्य और विधाता को दोष देते हैं तथा उनका स्वभाव कैसा बन जाता है?
Answer: जो व्यक्ति कायर, भीरु, निरुत्साही, अनुत्साही, अकर्मण्य और आलसी होते हैं, वे स्वयं अपने हाथ-पैर नहीं हिलाते और अपनी असफलता के लिए दैव, ईश्वर, भाग्य तथा विधाता को दोष देते हैं। उनका स्वभाव रोना-झिड़कना बन जाता है और पग-पग पर उन्हें भयंकर विपत्तियों का सामना करना पड़ता है।
In simple words: आलसी और अकर्मण्य लोग मेहनत न करके अपनी किस्मत को कोसते रहते हैं।

Exam Tip: अकर्मण्य व्यक्तियों के नकारात्मक गुणों (आलस, कायरता आदि) को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।

 

Question (घ). क्रमशः उपसर्ग और प्रत्यय अलग कीजिए - दास्ता, परश्रित
Answer: 'दास्ता' शब्द में 'ता' प्रत्यय है (दास + ता), और 'पराश्रित' शब्द में 'परा' उपसर्ग है (परा + आश्रित)।
In simple words: दास्ता में प्रत्यय और परश्रित में उपसर्ग अलग किया गया है।

Exam Tip: उपसर्ग शब्द के आगे और प्रत्यय शब्द के पीछे जुड़कर नया अर्थ बनाते हैं, इसे ध्यान रखें।

 

Question (ङ). अवतरण से 'प्यास' तथा 'डरपोक' शब्दों के समानार्थी शब्द छाँटिए।
Answer: 'प्यास' का समानार्थी शब्द 'तृष्णा' है तथा 'डरपोक' का समानार्थी शब्द 'कायर' और 'भीरू' है।
In simple words: प्यास के लिए तृष्णा और डरपोक के लिए कायर शब्द गद्यांश में प्रयुक्त हुआ है।

Exam Tip: समानार्थी शब्दों को गद्यांश के संदर्भ के अनुसार ही चुनें।

 

Question (च). विशेषण बनाइए - उन्नति, मानव
Answer: 'उन्नति' का विशेषण 'उन्नत' है तथा 'मानव' का विशेषण 'मानवीय' या 'मानवेंद्र' है।
In simple words: संज्ञा शब्दों से उनके विशेषण रूप बनाए गए हैं।

Exam Tip: संज्ञा से विशेषण बनाते समय प्रत्यय का सही प्रयोग करें।

 

Question (छ). उपयुक्त गद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक लिखिए।
Answer: 'स्वावलंबन का महत्व' या 'आत्मनिर्भरता और सफलता'
In simple words: यह गद्यांश पूरी तरह से स्वावलंबन की महत्ता पर आधारित है।

Exam Tip: शीर्षक हमेशा संक्षिप्त (1-3 शब्द) और गद्यांश के मुख्य भाव से जुड़ा होना चाहिए।

 

(2)

Question (क). हमारे धर्मनीतिगार नैतिक मूल्यों के प्रति विशेष जागरूक क्यों थे?
Answer: हमारे धर्मनीतिगारों की यह धारणा थी कि नैतिक मूल्यों की दृढ़ता से पालन किए बिना किसी भी समाज की आर्थिक व सामाजिक प्रगति की नीतियाँ प्रभावी नहीं हो सकतीं। वे उच्चकोटि की जीवन-प्रणाली के निर्माण के लिए नैतिकता को अत्यंत आवश्यक मानते थे।
In simple words: समाज की वास्तविक उन्नति के लिए नैतिक मूल्यों का पालन अनिवार्य माना गया है।

Exam Tip: उत्तर में आर्थिक और सामाजिक प्रगति के साथ नैतिकता के संबंध को स्पष्ट करें।

 

Question (ख). विवेक बुद्धि क्या है? यह कब निर्मित होती है?
Answer: विवेक बुद्धि वह आंतरिक शक्ति है जिसके द्वारा मनुष्य उच्चकोटि की जीवन-प्रणाली का निर्माण करता है। यह तब निर्मित होती है जब सब लोगों के संकल्प, निश्चय और अभिप्राय समान हों, सबके हृदय में समानता की भव्य भावना हो और सभी लोग पारस्परिक सहयोग से कार्य करें।
In simple words: सामूहिक सद्भाव और समान संकल्पों से ही विवेक बुद्धि का विकास होता है।

Exam Tip: वेद की ऋचा पर आधारित इस कथन के मुख्य बिंदुओं को उत्तर में शामिल करें।

 

Question (ग). सामाजिक अनुशासन से क्या तात्पर्य है? यह भावना व्यक्ति में कब जागृत होती है?
Answer: सामाजिक अनुशासन से तात्पर्य है कि व्यक्ति अपने आचार और चरित्र को श्रेष्ठ रखे तथा वाणी, बाहू और उदर पर नियंत्रण रखे। यह भावना व्यक्ति में तब जागृत होती है जब वह मानव-प्राणियों में ही नहीं, वरन सभी जीवधारियों में अपनी आत्मा का दर्शन करता है।
In simple words: सभी जीवों में आत्मदर्शन करने से ही वास्तविक सामाजिक अनुशासन उत्पन्न होता है।

Exam Tip: अनुशासन और सभी जीवों के प्रति समभाव के अंतर्संबंध को समझें।

 

Question (घ). 'उत्कृष्ट' और 'प्रगति' शब्दों के विलोम लिखिए।
Answer: 'उत्कृष्ट' का विलोम 'निकृष्ट' है तथा 'प्रगति' का विलोम 'अग्रगति' या 'अवनति' है।
In simple words: उत्कृष्ट का उल्टा निकृष्ट और प्रगति का उल्टा अवनति होता है।

Exam Tip: विलोम शब्द लिखते समय तत्सम शब्दों के साथ तत्सम शब्द का ही प्रयोग करें।

 

Question (ङ). 'आर्थिक' और 'मनुष्यत्व' शब्दों में प्रत्यय बताइए।
Answer: 'आर्थिक' शब्द में 'इक' प्रत्यय है (अर्थ + इक) तथा 'मनुष्यत्व' शब्द में 'त्व' प्रत्यय है (मनुष्य + त्व)।
In simple words: आर्थिक में इक और मनुष्यत्व में त्व प्रत्यय लगा है।

Exam Tip: मूल शब्द को अलग करके प्रत्यय पहचानना सबसे सटीक तरीका है।

 

Question (च). 'चरित्र' और 'निर्माण' शब्दों से विशेषण बनाइए।
Answer: 'चरित्र' का विशेषण 'चारित्रिक' है तथा 'निर्माण' का विशेषण 'निर्मित' है।
In simple words: चरित्र से चारित्रिक और निर्माण से निर्मित विशेषण शब्द बनते हैं।

 

Question (छ). प्रस्तुत गद्यांश के लिए एक उपयुक्त शीर्षक दीजिए।
Answer: 'चरित्र-निर्माण और नैतिक मूल्य'
In simple words: गद्यांश में चरित्र के महत्व और नैतिक मूल्यों पर प्रकाश डाला गया है।

Exam Tip: शीर्षक गद्यांश के केंद्रीय विचार को पूरी तरह से प्रतिबिंबित करना चाहिए।

 

अभ्यास कार्य (1)

Question (क). कवि अशोक की तरह पछताने की बात क्यों करता है?
Answer: कवि ऐसा इसलिए कहता है क्योंकि यदि मनुष्य स्वार्थवश पेड़ों को काट देगा, तो भविष्य में उसे शीतल छाया और फल नहीं मिलेंगे। जिस प्रकार अशोक वृक्ष के समान राजा ने पछताया था, उसी प्रकार विनाश के बाद मनुष्य को भी गहरी वेदना और पछतावा होगा।
In simple words: पेड़ काटने पर भविष्य में मिलने वाले कष्टों के कारण पछताना पड़ेगा।

Exam Tip: पेड़ों के पर्यावरणीय महत्व को ध्यान में रखते हुए उत्तर लिखें।

 

Question (ख). कवि ने 'लज्जावसन' किसे कहा है? ये 'लज्जावसन' किसके हैं?
Answer: कवि ने पेड़ों और हरियाली को धरती माता का 'लज्जावसन' (वस्त्र) कहा है, जो इस वसुंधरा की सुंदरता और आवरण हैं।
In simple words: पेड़-पौधे और हरियाली ही धरती के वस्त्र या आवरण हैं।

Exam Tip: 'लज्जावसन' का अर्थ वस्त्र या आवरण होता है।

 

Question (ग). पेड़ों के कटने से क्या कुप्रभाव पड़ेगा?
Answer: पेड़ों के कटने से धरती पर शीतल छाया समाप्त हो जाएगी, खाने के लिए फल नहीं मिलेंगे, वर्षा कराने वाले बादल नहीं बरसेंगे और उपजाऊ खेत रेगिस्तान में बदल जाएंगे।
In simple words: पेड़ों के विनाश से पर्यावरण असंतुलित हो जाएगा और सूखा पड़ जाएगा।

Exam Tip: वनों की कटाई के परिणामों को बिंदुवार स्पष्ट करें।

 

Question (घ). 'रेगिस्तानों में तब्दील हो जाएँगे खेत' से कवि का क्या आशय है?
Answer: इससे कवि का आशय यह है कि जब जल को सींचने वाले पेड़ और नदियाँ नष्ट हो जाएंगी, तो उपजाऊ भूमि बंजर और रेगिस्तान बन जाएगी।
In simple words: हरियाली और पानी के अभाव में खेत बंजर हो जाएंगे।

Exam Tip: लाक्षणिक अर्थ को स्पष्ट करते हुए सीधा उत्तर दें।

 

Question (ङ). उपर्युक्त काव्यांश का शीर्षक लिखिए।
Answer: 'पेड़ बचाओ' या 'वृक्षारोपण और पर्यावरण'
In simple words: यह कविता पेड़ों के संरक्षण का संदेश देती है।

 

Question (क). इस संसार में सचचर और अचल क्या कर रहे हैं तथा उन्हें क्या धुल है?
Answer: इस संसार में सभी सचचर और अचल निरंतर कर्म मेंतल्लीन हैं। सभी को अपने-अपने नियत कर्म करने की धुन और व्रत है।
In simple words: संसार के सभी प्राणी और वस्तुएं अपने निर्धारित कार्यों में लगे हैं।

 

Question (ख). सूर्य, चन्द्र और पत्ता किस प्रकार कर्मरत हैं?
Answer: सूर्य संसार में प्रकाश और रस बरसा रहा है, और जीवन-भर तूप सहकर वसुधा पर छाया कर रहा है तथा तुच्छ सा पत्ता भी अपने छोटे से कर्म में पूरी तरह तत्पर है।
In simple words: प्रकृति का हर घटक चाहे वह सूर्य हो या पत्ता, अपना कर्तव्य निभा रहा है।

 

Question (ग). तिनका किस प्रकार अपने जीवन को सार्थक करता है?
Answer: तिनका अपने छोटे से जीवन के उद्देश्य को पूरा करने में और अपने नियत कर्म को पूर्ण करने में अपने शरीर को समर्पित कर देता है।
In simple words: अत्यंत तुच्छ तिनका भी अपने छोटे से कर्तव्य को पूरी निष्ठा से पूरा करता है।

 

Question (घ). काव्यांश में निहित उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए।
Answer: इस काव्यांश का मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि संसार में कोई भी प्राणी या वस्तु निष्क्रिय नहीं है; सभी को अपने कर्म पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए।
In simple words: कर्म ही जीवन का सच्चा उद्देश्य है।

 

Question (ङ). उपर्युक्त काव्यांश से अनुप्रास अलंकार का एक उदाहरण छाँटिए।
Answer: 'ससचर-अचल' या 'सोम सुधा बरसाता' में वर्णों की आवृत्ति के कारण अनुप्रास अलंकार है।
In simple words: जहाँ एक वर्ण की बार-बार आवृत्ति हो, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।

 

Question (क). जीवन में गति न हो तो क्या परिणाम हो सकता है?
Answer: जीवन में गति न होने पर मनुष्य किसी गड्ढे या विपत्ति में पड़कर नष्ट हो सकता है, उसका विकास रुक जाता है और वह प्रगति के पथ पर आगे नहीं बढ़ पाता।
In simple words: गति रुकने से जीवन का अंत या पतन हो जाता है।

 

Question (ख). जीवन के संदर्भ में 'आँधी-तूफान' का क्या अर्थ है?
Answer: जीवन के संदर्भ में 'आँधी-तूफान' का अर्थ जीवन में आने वाली भयंकर कठिनाइयाँ, बाधाएँ और संकट हैं।
In simple words: जीवन की बड़ी कठिनाइयों को आँधी-तूफान कहा गया है।

 

Question (ग). गंगा-यमुना की जलधारा के इठलाने का क्या कारण है?
Answer: गंगा-यमुना की जलधारा के इठलाने का कारण यह है कि उसने अपनी गति और निरंतरता के बल पर रास्ते में आने वाली हर चट्टान और बाधा को लात मारकर पार कर लिया है और निर्भीक होकर बह रही है।
In simple words: बाधाओं को पार करके आगे बढ़ने के गर्व के कारण जलधारा इठलाती है।

 

Question (घ). निर्झर की बूँदों से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
Answer: निर्झर की बूँदों से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हमें कभी रुकना नहीं चाहिए, हर बाधा का डटकर सामना करना चाहिए क्योंकि 'गति ही जीवन है'।
In simple words: निरंतर आगे बढ़ते रहना और संघर्ष करना ही जीवन की सीख है।

 

Question (ङ). 'झर-झर' में कौन सा अलंकार है?
Answer: 'झर-झर' शब्द में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है।
In simple words: एक ही शब्द का दो बार प्रयोग होने पर पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार होता है।

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