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अन्तरा भाग-1 काव्य-खण्ड
छात्र-निर्देश:
पाठ्य पुस्तक का काव्य खण्ड 20 अंक का है।
सप्रसंग व्याख्या (एक) - 8 अंक
काव्य पर आधारित प्रश्न (दो) - 6 अंक (3+3)
काव्य-सौन्दर्य आधारित प्रश्न (दो) - 6 अंक (3+3)
क) व्याख्या का उत्तर तीन उपशीर्षकों में देना अनिवार्य है: 1. प्रसंग, 2. व्याख्या, 3. शिल्प-सौन्दर्य
1. प्रसंग - इसके अंतर्गत कवि और कविता का नाम अनिवार्य रूप से दें। पाठ्यपुस्तक का नाम न लिखें। एक पंक्ति में काव्य का पूर्वार्पर प्रसंग लिखें।
2. व्याख्या - काव्य पंक्तियों को समझने के उपरांत अर्थ को अपने शब्दों में व्यक्त करें। कविता की व्याख्या कवि के मत एवं भावानुसार करें, अपना मत प्रस्तुत न करें।
3. शिल्प-सौन्दर्य - इसमें भाषा, रस, छन्द, अलंकार आदि का निरूपण करें।
ख) काव्य-सौन्दर्य - इसे केवल दो उपशीर्षकों में विभक्त करें।
1. भाव-सौन्दर्य - इसके अंतर्गत एक या दो पंक्तियों में मात्र भाव स्पष्टीकरण करें।
2. शिल्प-सौन्दर्य - इसमें कवि की भाषिक विशेषता, विशिष्ट प्रयोग, रस, छन्द, अलंकार आदि का निरूपण, लय, चित्रात्मकता, बिम्ब योजना आदि को स्पष्ट करें।
व्याख्या एवं काव्य-सौन्दर्य का अंतर स्पष्ट करने के लिए एक ही काव्यांश को उदाहरण स्वरूप दिया गया है: "झहरि-झहरि झीनी ...... आँसू ह्वै दृगु में।"
Answer: यह निर्देश विद्यार्थियों को ग्यारहवीं कक्षा की अंतरा भाग-1 पाठ्यपुस्तक के काव्य-खण्ड की परीक्षा के लिए अंक-विभाजन और उत्तर लिखने की उचित पद्धति समझाने के उद्देश्य से दिए गए हैं।
In simple words: यह पृष्ठ परीक्षा में काव्य-खण्ड के प्रश्नों के उत्तर लिखने के नियमों और अंकों के विभाजन की जानकारी देता है।
Exam Tip: परीक्षा में व्याख्या और काव्य-सौन्दर्य के प्रश्नों के उत्तर देते समय निर्धारित उपशीर्षकों (जैसे प्रसंग, व्याख्या, शिल्प-सौन्दर्य) का ही प्रयोग करें।
पाठ-1 कबीर
कबीर के पद
कवि: कबीर (भक्तिकालिन निर्गुण काव्य धारा के संत कवि)
रचनाएँ: बीजक, साखी, सबद, रमैनी। कबीर की कुछेक रचनाएँ गुरु ग्रंथ साहब में संकलित हैं।
काव्यगत विशेषताएँ:
कबीर की भाषा सधुक्कड़ी है। जन भाषा की सहजता में गूढ़ दार्शनिक चिंतन की अभिव्यक्ति है।
कबीर के काव्य में तुकांतकता और लय के कारण गेय तत्व हैं (कबीर के सभी पद गाए जा सकते हैं)।
अपनी बात को स्पष्ट करने हेतु दृष्टांत एवं साक्ष्य का प्रयोग किया है।
कबीर के काव्य में अलंकारों का सहज व स्वाभाविक प्रयोग है। भावपूर्ण अभिव्यक्ति कबीर के काव्य, उनकी रचनाओं का आन्तरिक गुण है।
पद-1 "अरे इन दोहुन राह न पाई ........................ राह है जाई।"
Answer: मूल भाव: प्रस्तुत पद में कबीर ने धर्म के वास्तविक स्वरूप के प्रति हिन्दुओं और मुसलमानों की अनभिज्ञता को उजागर किया है। दोनों ही बाहरी क्रियाकलापों को धर्म के संदर्भ में ग्रहण कर अपने धर्म को दूसरे धर्म में श्रेष्ठ सिद्ध करने हेतु प्रयासरत रहते हैं। कबीर ने धार्मिक पाखंडों का विरोध किया है। इन बाह्य क्रिया-कलापों में उलझे रहने के कारण दोनों (हिन्दू और मुसलमान) ईश्वर प्राप्ति की राह से भटक गए हैं।
व्याख्या बिन्दु: हिन्दू और मुसलमान के धार्मिक पाखंडों का विरोध करते हुए उन पर प्रहार किया है। बाह्य पाखंडों के कारण ईश्वर प्राप्ति के मार्ग से भटक जाते हैं। ईश्वर तक पहुँच नहीं पाते, उन्हें अपनी राह नहीं मिलती। दोनों ही अपने धार्मिक कर्म काण्ड को श्रेष्ठ मानकर दूसरे को गलत मानते हैं। कबीर हिन्दुओं के बारे में बताते हैं कि किस प्रकार वे लोग वर्ण भेद करते हैं तथा निम्न जाति को अपने पानी का बर्तन का स्पर्श तक नहीं करने देते हैं इस प्रकार ऐसे वे स्वयं को उच्च वर्ण का सिद्ध करते हैं। दूसरी ओर वे हिन कर्मों में प्रवृत्त हैं। मुसलमानों की दशा भी समान है। एक ओर तो वे ईश्वर प्राप्ति में संत, फकीर, पीर, औलिया बन जाते हैं अर्थात् सांसारिक मोह माया से परे हैं तो दूसरी ओर सामिष हैं। जीव हत्या करते हैं। अपनी बहन से विवाह कर लेते हैं जो कि हिन्दू धर्मानुसार सर्वथा अनुचित है। कबीर कहते हैं कि उन्होंने हिन्दू-मुसलमान दोनों के आडंबरों को देखा है और जानते हैं कि इस प्रकार ईश्वर प्राप्ति संभव नहीं है। मोक्ष की प्राप्ति केवल ईश्वर भक्ति से संभव है। इसके लिए बाह्य आडंबरों की आवश्यकता नहीं है। कबीर की भाषा सधुक्कड़ी है। सहज सामान्य भाषा में ईश्वर प्राप्ति जैसे रहस्यमय भाव की अभिव्यक्ति है। शब्द चयन भावपूर्ण एवं भावानुकूल है। 'सब सखियाँ' 'कहे कबीर' में अनुप्रास अलंकार है। गीति तत्व द्रष्टव्य है।
In simple words: कबीर दास जी ने इस पद में हिन्दू और मुसलमानों द्वारा किए जाने वाले बाहरी दिखावों और पाखंडों की कड़ी आलोचना की है।
Exam Tip: कबीर की भाषा को 'सधुक्कड़ी' या 'पंचमेल खिचड़ी' कहा जाता है, इसे उत्तर में अवश्य उल्लेख करें।
अभ्यास कार्य
व्याख्या: "अरे इन दोहुन राह न पाई ........................ राह है जाई।"
बौद्धिक प्रश्न:
Question 1. कबीर ईश्वर-प्राप्ति के किस राह पर चलने की बात कर रहे है?
Answer: कबीर ईश्वर-प्राप्ति के लिए बाहरी दिखावों, पाखंडों और कर्मकांडों को छोड़कर सच्चे मन से भक्ति करने तथा प्रेम के मार्ग पर चलने की बात करते हैं।
In simple words: कबीर सच्चे मन और भक्ति की राह पर चलने को कहते हैं।
Exam Tip: पाखंड मुक्ति और आंतरिक शुद्धता को उत्तर का मुख्य आधार बनाएं।
Question 2. कबीर ने किस-किस पर प्रहार किया है?
Answer: कबीर ने हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मों के रूढ़िवादी लोगों, मौलवी-पंडितों और उनके पाखंडपूर्ण बाह्य आचरणों पर कड़ा प्रहार किया है जो धर्म के नाम पर समाज में भेद पैदा करते हैं।
In simple words: कबीर ने दोनों धर्मों के झूठे दिखावों और पाखंडों पर चोट की है।
Exam Tip: दोनों धर्मों की बुराइयों का समान रूप से खंडन किया गया है, इसे स्पष्ट करें।
Question 3. 'हिंदुन की हिंदुहाई देखी तुरकन की तुरकाई' का आशय स्पष्ट करें।
Answer: इसका आशय यह है कि कबीर ने हिन्दुओं और मुसलमानों दोनों के धार्मिक अहंकार और रूढ़ियों को देखा है। हिन्दू अपनी जाति और पवित्रता का अहंकार रखते हैं, जबकि मुसलमान अपनी श्रेष्ठता का दावा करते हैं, किंतु दोनों ही धर्म के वास्तविक मर्म को नहीं समझते।
In simple words: दोनों धर्मों के लोग अपने-अपने धर्म को श्रेष्ठ मानकर अहंकार में डूबे हैं।
Exam Tip: सांप्रदायिक पाखंड को रेखांकित करने वाली इस पंक्ति का अर्थ विस्तार से लिखें।
Question 4. कबीर ने किन-किन बाह्य आडंबरों का उल्लेख किया है?
Answer: कबीर ने माला फेरने, तिलक लगाने, टोपी पहनने, मस्जिद में जाकर नमाज पढ़ने, तीर्थ यात्रा करने, जाति-पाँति का भेद मानने और जीव हत्या जैसे बाह्य आडंबरों का उल्लेख किया है।
In simple words: माला, तिलक, नमाज और जाति-भेद जैसे बाहरी दिखावों की बात की है।
Exam Tip: विभिन्न धार्मिक क्रिया-कलापों के उदाहरण दें।
Question 5. सिद्ध कीजिए कि उक्त पद में कबीर का समाज-सुधारक रूप प्रदर्शित होता है।
Answer: कबीर ने समाज में व्याप्त धार्मिक कट्टरता, जाति-पाँति के भेदभाव, ऊँच-नीच और पाखंडों की खुलकर निंदा की है और लोगों को मानवता तथा सच्चाई का पाठ पढ़ाया है, जिससे उनका समाज-सुधारक रूप स्पष्ट झलकता है।
In simple words: समाज की बुराइयों को दूर करने का प्रयास ही कबीर को महान समाज-सुधारक बनाता है।
Exam Tip: समाज सुधारक के रूप में कबीर के तर्कों को प्रमुखता दें।
Question 6. उक्त पद कबीर के समन्वयवादी दृष्टिकोण का श्रेष्ठ उदाहरण है, कैसे?
Answer: कबीर ने हिन्दू और मुसलमान दोनों की समान रूप से आलोचना की है और किसी एक पक्ष का पक्षपात न करके दोनों को सच्चाई का मार्ग दिखाया है, जो उनके निष्पक्ष और समन्वयवादी दृष्टिकोण को दर्शाता है।
In simple words: कबीर ने बिना पक्षपात किए दोनों धर्मों की कमियों को उजागर किया है।
Exam Tip: समन्वयवादी दृष्टिकोण का अर्थ निष्पक्ष भाव से समाज को सही राह दिखाना है।
पद-2 "बालम आवो हमारे ........................ जिव जाय रे।"
Answer: मूल भाव: कबीर ने स्वयं को परमात्मा की प्रेयसी (साधक) के रूप में चित्रित किया है। परमात्मा से मिलन की उत्कंठ आकांक्षा को शब्दबद्ध किया है। कवि ईश्वर के हृदय में स्थान प्राप्ति के लिए इच्छुक हैं। ईश्वर मिलन न होने से वे दुखी हैं। इस पद में उनका विरहणी नायिका के रूप में चित्रण है। 'कामिन को है बालम प्यारा, ज्यों प्यासे को नीर' - दृष्टांत के माध्यम से मिलन की तीव्र इच्छा व्यक्त की है। परमात्मा का सान्निध्य न मिलने के कारण कबीर को न तो अन्न अच्छा लगता है और न ही नींद आती है। यह वियोग अवस्था है। निर्गुणमार्गी कबीर वियोग की चरमावस्था, हृदय की व्याकुलता और तीव्र मिलनकाकांक्षा की अभिव्यक्ति के लिए साधक को प्रेयसी के साकार रूप में प्रदर्शित करते हैं। यहाँ कबीर निर्गुण और सगुण-दो भिन्न मतों के बीच एक साम्य स्थापित करते हुए दिखायी देते हैं। कबीर की भाषा सधुक्कड़ी (उस समय की प्रचलित जन भाषाओं का मिला-जुला रूप) है। श्रृंगार के वियोग पक्ष का चित्रण है। विप्रलंभ श्रृंगार, तुकांतकता और लय के कारण गीतितत्व विद्यमान है। 'दुखिया देह', 'कोई कहै', 'जिव जाय' में अनुप्रास अलंकार है। 'कामिन को है बालम प्यारा ज्यों प्यासे को नीर' में दृष्टांत है。
In simple words: इस पद में जीवात्मा रूपी प्रेयसी परमात्मा रूपी प्रियतम के वियोग में अत्यंत व्याकुल है।
Exam Tip: यहाँ निर्गुण संत होते हुए भी कबीर ने लौकिक प्रेम के माध्यम से अलौकिक प्रेम (रहस्यवाद) को प्रकट किया है।
अभ्यास कार्य
व्याख्या: 'बालम आवो ......................... जिव जाय रे।'
काव्य-सौन्दर्य:
अन्न न भावै नींद न आवै, गृह-बन धैरे न धीर रे।
कामिन को है बालम प्यारा, ज्यों प्यासे को नीर रे।
बौद्धिक प्रश्न:
Question 1. कबीर ने परमात्मा को और स्वयं को किस रूप में चित्रित किया है?
Answer: कबीर ने परमात्मा को अपने प्रियतम (बालम) के रूप में तथा स्वयं को उनकी प्रेयसी (विह्वला साधिका) के रूप में चित्रित किया है।
In simple words: परमात्मा प्रियतम हैं और भक्त उनकी प्रेयसी है।
Exam Tip: रहस्यवादी काव्य में यह प्रतीक बहुत प्रसिद्ध है।
Question 2. किस के बिना देह 'दुखिया' है?
Answer: परमात्मा रूपी प्रियतम के बिना साधक की देह 'दुखिया' है।
In simple words: ईश्वर से मिलन न होने पर शरीर दुखी रहता है।
Exam Tip: वियोग दशा को स्पष्ट करें।
Question 3. कबीर को अन्न न भाने, और नींद न आने का कारण क्या है?
Answer: परमात्मा से वियोग और उनके दर्शन की तीव्र लालसा के कारण कबीर को अन्न नहीं भाता और नींद नहीं आती है।
In simple words: ईश्वर की याद में चैन और भूख-प्यास मिट गई है।
Exam Tip: वियोग की अतिरंजनापूर्ण स्थिति को दर्शाया गया है।
Question 4. कबीर की किस अवस्था का चित्रण किया गया है?
Answer: कबीर की काव्य रचना में प्रेम के वियोग पक्ष (विप्रलंभ श्रृंगार) तथा विरह की चरमावस्था का चित्रण किया गया है।
In simple words: यहाँ वियोग और तड़प की स्थिति का वर्णन है।
Exam Tip: विप्रलंभ श्रृंगार रस का नाम अवश्य लिखें।
Question 5. पर उपकारी से कबीर क्या आशा करता है?
Answer: परोपकारी से कबीर यह आशा करते हैं कि वे उनके प्रियतम (परमात्मा) को उनका संदेश जाकर सुनाएँ।
In simple words: प्रियतम तक संदेश पहुँचाने की गुहार लगाई गई है।
Exam Tip: यहाँ संदेशवाहक के रूप में परोपकारी का स्मरण किया गया है।
Question 6. इस पद में कौन सा रस है?
Answer: इस पद में श्रृंगार रस का विरह पक्ष (विप्रलंभ श्रृंगार) है।
In simple words: वियोग श्रृंगार रस प्रमुख है।
Exam Tip: रस का नाम स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 7. 'दुखिया देह' 'जिव जाय' में कौन सा अलंकार है?
Answer: यहाँ वर्णों की आवृत्ति के कारण 'अनुप्रास अलंकार' है।
In simple words: अनुप्रास अलंकार है जहाँ वर्ण दोहराए गए हैं।
Exam Tip: वर्णों के मेल से बनने वाले अलंकारों को पहचानना सीखें।
पाठ-2 सूरदास
कवि: सूरदास (सगुण भक्तिधारा के कृष्णभक्त कवि)
रचनाएँ: सूरसारावली, साहित्य लहरी, सूर सागर।
काव्यगत विशेषताएँ:
सूरदास के पदों की भाषा ब्रज है। साधारण बोलचाल की ब्रज भाषा का परिष्कृत रूप है।
काव्य में माधुर्य गुण, स्वाभाविकता और सजीवता विद्यमान है।
तुकांतकता तथा लय के कारण संगीतात्मकता का समावेश है। पद गेय (गाने योग्य) है।
सूरदास ने मुख्यत: बाल लीला (कृष्ण) एवं राधा-कृष्ण प्रेम, गोपियों के प्रेम का चित्रण किया है।
सूरदास के पदों में अलंकरण सायास न होकर अनायास है। अनुप्रास, रूपक, श्लेष आदि अलंकारों का सहज प्रयोग है। काव्य सरस है। भावानुरूपा शब्द चयन है।
पद-1 "खेलन में को काको ......................................... करि नंद-दुहैयाँ"
Answer: मूल भाव: सूरदास ने कृष्ण की बाल लीला का वर्णन किया है। सूरदास ने बाल सुलभ चेष्टाओं का सूक्ष्म चित्रण किया है।
व्याख्या बिन्दु: ग्वाल-मित्रगण कृष्ण से कहते हैं कि तुम अपनी हार स्वीकार नहीं करते, हम पर अधिकार जताने का प्रयास करते हैं, तो तुम्हारे साथ खेलना कौन पसंद करेगा? खेल में सभी बराबर होते हैं। कोई बड़ा छोटा नहीं होता। खेल में किसी प्रकार की विषमता (जातिगत, अमीरी-गरीबी) के लिए स्थान कोई नहीं होता। कृष्ण हार जाने पर भी अपनी हार स्वीकार नहीं करते। ग्वालों (मित्रों) का कहना है कि न तुम जाति से हमसे ऊँचे हो और न ही हम तुम्हारी शरण में हैं। तुम अधिक गाय होने के तथा सम्पन्न परिवार के होने के कारण हम पर अधिकार जताते हो। यह सुनकर कृष्ण रूठ जाते हैं। मित्र कहते हैं कि खेल में क्रोध का कोई स्थान नहीं है। कृष्ण देखते हैं कि ग्वालबालों पर उनके रूठने का कोई अवसर नहीं हो रहा और सब खेल बन्द कर इधर-उधर बैठ गए हैं। वे मन ही मन खेलना चाहते हैं इसलिए नन्द बाबा की दुहाई देकर अपनी बाजी देने को तैयार हो जाते हैं और हार स्वीकार कर लेते हैं। सूरदास की भाषा ब्रज है। बालनोविज्ञान का सूक्ष्म चित्रण है। पद में तुकांतकता तथा लय का समावेश है। 'दुहाई देना' - मुहावरे का प्रयोग किया गया है। 'को काको', 'हरि हारे', 'दाऊँ दियौ' में अनुप्रास अलंकार है।
In simple words: बालकृष्ण खेल में हार न मानने पर मित्रों से रूठ जाते हैं और अंत में नंद बाबा की कसम खाकर अपनी हार स्वीकार करते हैं।
Exam Tip: बाल-मनोविज्ञान और सूर की ब्रजभाषा की सहजता का वर्णन करना न भूलें।
अभ्यास कार्य
व्याख्या: "खेलन में को काको गुसैयाँ ......................... करि नन्द दुहैयाँ।"
बौद्धिक प्रश्न:
Question 1. प्रस्तुत पद में किस भाव का चित्रण है?
Answer: प्रस्तुत पद में बाल-सुलभ क्रीड़ा, मित्रों के बीच आपसी नोकझोंक, बालहठ और बाल-मनोविज्ञान का सुंदर चित्रण है।
In simple words: बच्चों के खेल और रूठने-माने का स्वाभाविक वर्णन है।
Exam Tip: बाल मनोविज्ञान शब्द का प्रयोग करें।
Question 2. खेल में कौन जीता और कौन हारा?
Answer: खेल में ग्वाल-बाल (श्रीदामा आदि) जीत गए और कृष्ण हार गए।
In simple words: ग्वाले जीत गए और कृष्ण हार गए।
Exam Tip: प्रसंग के अनुसार ग्वालों की विजय स्पष्ट करें।
Question 3. कृष्ण क्यों रूठ जाते हैं?
Answer: कृष्ण हार जाने पर भी जब अपनी हार नहीं मानते और मित्रों द्वारा उन्हें ताना दिया जाता है, तो वे अभिमानवश रूठ जाते हैं।
In simple words: हार स्वीकार न करने पर जब मित्रों ने टोका तो कृष्ण रूठ गए।
Exam Tip: बालहट को कारण के रूप में दर्शाएं।
Question 4. श्रीदामा जीतने पर क्या कहते हैं?
Answer: श्रीदामा कहते हैं कि तुम जाति या धन के बल पर हमसे बड़े नहीं हो और न ही हम तुम्हारी शरण में हैं, इसलिए खेल के नियम सबके लिए समान हैं।
In simple words: श्रीदामा ने कहा कि खेल में कोई बड़ा-छोटा नहीं होता।
Exam Tip: समता के भाव को स्पष्ट करें।
Question 5. मित्र, कृष्ण की बात न मानने का क्या तर्क देते हैं?
Answer: मित्र तर्क देते हैं कि खेल में सभी बराबर होते हैं, यहाँ कोई राजा या अमीर-गरीब नहीं होता, इसलिए हार-जीत सबको माननी पड़ती है।
In simple words: खेल में सब बराबर होते हैं, कोई श्रेष्ठ नहीं होता।
Exam Tip: खेल की निष्पक्षता का तर्क मित्रों ने दिया।
Question 6. खेल में किस चीज का स्थान नहीं है?
Answer: खेल में किसी भी प्रकार के अहंकार, पक्षपात, जातिगत या आर्थिक ऊँच-नीच और क्रोध का कोई स्थान नहीं होता।
In simple words: खेल में अहंकार और भेदभाव की जगह नहीं होती।
Exam Tip: समानता का भाव खेल का मूल है।
Question 7. कृष्ण किसकी दुहाई देते हैं?
Answer: कृष्ण खेल को दोबारा शुरू करने के लिए नंद बाबा की दुहाई देते हैं।
In simple words: कृष्ण नंद बाबा की कसम खाते हैं।
Exam Tip: दुहाई देने का अर्थ कसम खाना है।
Question 8. कृष्ण अपनी हार क्यों स्वीकार कर लेते हैं?
Answer: कृष्ण मित्रों के साथ फिर से खेलना चाहते थे और जब कोई अन्य उपाय नहीं सूझा, तो वे खेल जारी रखने के लिए अपनी हार स्वीकार कर लेते हैं।
In simple words: खेलने की इच्छा के कारण कृष्ण ने हार मान ली।
Exam Tip: बाल-सुलभ जिद और खेलने की ललक को कारण बताएं।
Question 9. हार स्वीकार करने के उपरांत कृष्ण क्या करते हैं?
Answer: हार स्वीकार करने के उपरांत कृष्ण अपनी बारी देते हैं और खेल को पुनः आगे बढ़ाते हैं।
In simple words: कृष्ण अपनी बाजी देकर खेल फिर शुरू करते हैं।
Exam Tip: खेल की निरंतरता बनी रहती है।
Question 10. प्रस्तुत पद की भाषा कौन-सी है?
Answer: प्रस्तुत पद की भाषा साहित्यिक ब्रजभाषा है।
In simple words: ब्रजभाषा का प्रयोग किया गया है।
Exam Tip: सूरदास की अधिकांश रचनाओं की भाषा ब्रज ही है।
पद-2 "मुरली तऊ गोपालहंं ............................... सीस डुलावति"
कवि: सूरदास
Answer: मूल भाव: कवि सूरदास के प्रस्तुत पद में कृष्ण के प्रति गोपियों के अनन्य प्रेम की अभिव्यक्ति है। मुरली के प्रति गोपियाँ ईर्ष्या भाव रखती हैं।
व्याख्या बिन्दु: प्रस्तुत पद में श्रृंगार के वियोग पक्ष का चित्रण है। गोपियों का कहना है कि मुरली के कारण ही उन्हें कृष्ण का सान्निध्य प्राप्त नहीं होता। मुरली कृष्ण से अनेकानेक कार्य करवाती है। वह कृष्ण की अधर-सेज पर विश्राम करती है और सुकुमार कृष्ण से अपनी प्रत्येक आज्ञा का पालन करवाती है। मुरली की आज्ञापालन में कृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा बन जाती है। गिरिजधर (पर्वत उठाने वाले) कृष्ण का सिर भी मुरली के समक्ष झुक जाता है। गोपियों का मानना है कि कृष्ण मुरली के अधीन हैं। गोपियाँ यह भी मानती हैं कि मुरली के कारण ही कृष्ण उन पर क्रोधित होते हैं। समस्त गोपियाँ मुरली (बाँसुरी) तथा कृष्ण को साथ देखकर मुरली के प्रति ईर्ष्या भाव रखती हैं। उन्हें कृष्ण और मुरली का साथ-साथ होना कष्ट देता है। सम्पूर्ण पद में माधुर्यगुण युक्त ब्रज भाषा है। श्रृंगार रस का चित्रण है। तुकांतकता और लय के कारण गीति तत्व विद्यमान है। मुरली का मानवीकरण किया गया है। 'साज-सज्जा', 'कोप करावति' में अनुप्रास अलंकार है। 'अधर-सज्जा', 'कर-पल्लव' - में रूपक अलंकार है। 'गिरिधर नार नवावति' में - श्लेष अलंकार है। गोपियों की मनोदशा का स्वाभाविक चित्रण किया गया है।
In simple words: गोपियाँ बांसुरी से जलती हैं क्योंकि वह कृष्ण को अपने वश में रखती है।
Exam Tip: गोपियों की ईर्ष्या और मुरली के प्रति उनके सौतिया डाह भाव को स्पष्ट करें।
अभ्यास कार्य
व्याख्या: "मुरली तऊ गोपालहिंग ........................................ सीस डुलावति"
काव्य सौन्दर्य:
"कोमल तन आज्ञा करावति, कटि टेढ़ौ है आवति।
अति आधीन सुजान कनौड़ै, गिरिधर नार नवावति।।"
बौद्धिक प्रश्न:
Question 1. मुरली के प्रति गोपियों का क्या भाव है?
Answer: मुरली के प्रति गोपियों के मन में गहरी ईर्ष्या और सौतिया डाह का भाव है क्योंकि वह कृष्ण को उनसे दूर रखती है।
In simple words: गोपियाँ बांसुरी से ईर्ष्या करती हैं।
Exam Tip: गोपियों के ईर्ष्या भाव को मुख्य बिंदु बनाएं।
Question 2. सखियाँ आपस में क्या बात करती हैं?
Answer: सखियाँ आपस में चर्चा करती हैं कि यह छोटी सी बांसुरी हम सबका सौभाग्य छीनकर कृष्ण को अपने इशारों पर नचा रही है।
In simple words: बांसुरी कैसे कृष्ण को नचाती है, सखियाँ यही चर्चा करती हैं।
Exam Tip: गोपियों की व्यथा को दर्शाएं।
Question 3. मुरली कृष्ण से क्या-क्या कार्य कराती हैं?
Answer: मुरली कृष्ण से कोमल शरीर को थकाने वाले कार्य कराती है, उन्हें त्रिभंगी मुद्रा में खड़ा करती है और उनका सिर अपने आगे झुकवा लेती है।
In simple words: बांसुरी कृष्ण से अपनी हर आज्ञा का पालन करवाती है।
Exam Tip: मुरली के प्रभाव वाले पदों का उल्लेख करें।
Question 4. गोपियों को ऐसा क्यों लगता है कि मुरली ही कृष्ण के क्रोध का कारण है?
Answer: गोपियों को लगता है कि मुरली कृष्ण का पूरा ध्यान अपनी ओर खींच लेती है, जिससे कृष्ण गोपियों पर ध्यान नहीं देते और रुष्ट हो जाते हैं।
In simple words: बांसुरी के कारण ही कृष्ण गोपियों पर गुस्सा होते हैं।
Exam Tip: गोपियों का यह भ्रम और ईर्ष्या स्वाभाविक है।
Question 5. कृष्ण की किस मुद्रा का उल्लेख है?
Answer: पद में कृष्ण की त्रिभंगी मुद्रा तथा कमर झुकाकर खड़े होने की मुद्रा का उल्लेख है।
In simple words: कृष्ण की टेढ़ी कमर और त्रिभंगी मुद्रा का वर्णन है।
Exam Tip: त्रिभंगी मुद्रा कृष्ण की प्रसिद्ध भंगिमा है।
Question 6. अधर को सेज क्यों कहा गया है?
Answer: कृष्ण के होंठों पर हमेशा मुरली टिकी रहती है, इसलिए होंठों (अधर) को मुरली के सोने की सेज कहा गया है।
In simple words: होठों पर बांसुरी ऐसे रहती है जैसे वह उसकी सेज हो।
Exam Tip: रूपक अलंकार का सुंदर प्रयोग यहाँ हुआ है।
Question 7. 'कर-पल्लव पल्युटावति' का आशय स्पष्ट करें।
Answer: इसका आशय यह है कि बांसुरी अपने इशारों पर कृष्ण के कोमल हाथों और अंगों की मुद्राओं को बदलवाती रहती है।
In simple words: बांसुरी कृष्ण के हाथों को अपने अनुसार नचाती है।
Exam Tip: कर-पल्लव का अर्थ हाथों रूपी कोमल पत्ते है।
Question 8. "भृकुटि कुटिल, नैन नासा पुट", में कौन सा भाव व्यक्त हुआ है?
Answer: इसमें कृष्ण के क्रोध और खीझ का भाव व्यक्त हुआ है जो वे बांसुरी के प्रभाव में आकर प्रदर्शित करते हैं।
In simple words: क्रोध और झुंझलाहट का भाव झलकता है।
Exam Tip: चेहरे के हाव-भाव से प्रकट होने वाला क्रोध।
Question 9. पद की भाषा कौन सी है?
Answer: पद की भाषा साहित्यिक ब्रजभाषा है।
In simple words: ब्रजभाषा का प्रयोग हुआ है।
Exam Tip: सूर के पदों की मुख्य भाषा ब्रज है।
Question 10. इस पद में कौन सा रस है?
Answer: इस पद में श्रृंगार रस (विशेषकर वियोग श्रृंगार) की प्रधानता है।
In simple words: वियोग श्रृंगार रस है।
Exam Tip: रस का नाम उचित संदर्भ के साथ लिखें।
पाठ-3 कवि देव
हँसी की चोट, सपना, दरबार
कवि: देव (रीतिकालिन कवि)
रचनाएँ: रामविलास, भाव विलास, भवानी विलास, राग रत्नाकर, अष्टयाम, प्रेदीपिका
काव्यगत विशेषताएँ:
देव प्रेम और प्राकृतिक सौन्दर्य के कवि हैं। माधुर्य गुण युक्त कोमल ब्रज भाषा रागात्मक भावनाओं के लिए सर्वथा उपयुक्त है। देव के काव्य में संवेदनशीलता है। अलंकारों का अत्यंत सहज व स्वाभाविक प्रयोग काव्य सौन्दर्य में श्रीवृद्धि कर रहा है। देव के काव्य में मुहावेरेदार भाषा के दर्शन होते हैं।
देव ने प्रकृति का सजीव एवं चित्रात्मक वर्णन प्रस्तुत किया है। अपनी रचनाओं में कवि देव ने श्रृंगार का उदात्त रूप प्रस्तुत किया है।
पद-1 'हँसी की चोट' -
साँसनि ही सौं .......................... हरि जूहरि।।
कवि: देव
छंद: सवैये
Answer: मूल भाव: प्रस्तुत सवैया गोपियों की विरह दशा का अतिश्योक्तिपूर्ण वर्णन है। कृष्ण से मिलने की उत्कट इच्छा की अभिव्यक्ति है।
व्याख्या बिन्दु: कृष्ण के मधुरा जाने के उपरांत गोपियाँ हँसना भूल गई हैं अर्थात् सदा दुखी और व्याकुल रहती हैं। कृष्ण के वियोग में गोपियों की विरह दशा का चित्रात्मक वर्णन किया गया है। विरह की व्याकुलता के कारण शरीर के पाँच तत्वों में से मात्र आकाश तत्व शेष है। विरह की उद्वेगता के कारण श्वास की गति में वृद्धि होने के कारण (साँस तेज चलना) वायु तत्व का ह्रास हो गया है। निरंतर अश्रु बहने से (रोने से) शरीर से जल तत्व निकल गया है। शरीर के दुर्बल होने से भूमि तत्व समाप्त हो गया है। मुख के तेजहीन होने से अग्नि तत्व का क्षीण होना दर्शाया गया है। मिलन की आशा के कारण केवल आकाश तत्व शेष है। कृष्ण के जाने पर गोपियों का हृदय उनके साथ चला गया। कृष्ण ने उनके हृदय का हरण कर लिया है। गोपियाँ अत्यंत व्याकुल हैं तथा कृष्ण को प्रतिपल ढूँढ़ती रहती हैं। उन्हें मिलन की आकांक्षा है। छन्द सवैया है। श्रृंगार रस के वियोग पक्ष (विप्रलंभ श्रृंगार) का चित्रण है। तुकांतकता और माधुर्य गुण द्रष्टव्य है। तन की तनुता, हरै हाँसि, हेरि हियो में अनुप्रास अलंकार है। 'मुख फेर लेना' मुहावरे का प्रयोग किया गया है। 'हेरि हियो जु लियो हरि जू हरि' में यमक अलंकार है।
In simple words: गोपियाँ कृष्ण के वियोग में इतनी दुखी हैं कि उनके शरीर के चार तत्व समाप्त हो गए हैं और केवल श्वास (आकाश) बचा है।
Exam Tip: पंचतत्वों के क्षय होने के माध्यम से विरह की अतिरंजनापूर्ण अभिव्यक्ति को स्पष्ट करें।
अभ्यास कार्य
व्याख्या कार्य: "साँसनि ही सौं समीर ........................................ हरि जू हरि"
काव्य सौन्दर्य: "जा दिन तै मुख फेरि हरै हाँसि, हेरि हियो जु लिया हरि जू हरि"
बौद्धिक प्रश्न:
Question 1. गोपियों की किस दशा का वर्णन किया गया है?
Answer: गोपियों की अत्यंत दयनीय, व्याकुल और वियोग से पीड़ित विरह दशा का वर्णन किया गया है।
In simple words: गोपियों की विरह और तड़प की दशा का वर्णन है।
Exam Tip: वियोग दशा को मुख्य बिंदु बनाएं।
Question 2. गोपियों की इस दशा का कारण क्या है?
Answer: कृष्ण का मथुरा चले जाना और उनके वियोग में तड़पना ही गोपियों की इस दशा का मुख्य कारण है।
In simple words: कृष्ण के दूर जाने से गोपियाँ ऐसी हो गई हैं।
Exam Tip: कृष्ण का वियोग इस दशा का मूल है।
Question 3. उपर्युक्त सवैये में किन पाँच तत्वों का उल्लेख किया गया है?
Answer: पाँच तत्व हैं - क्षिति (पृथ्वी), जल, पावक (अग्नि), गगन (आकाश) और समीर (वायु)।
In simple words: शरीर जिन पाँच तत्वों से बना है, उन्हीं का उल्लेख है।
Exam Tip: शरीर रचना के प्राचीन भारतीय दर्शन का संदर्भ दें।
Question 4. पाँच में से कौन-सा तत्व शेष है और क्यों?
Answer: केवल 'आकाश' तत्व शेष है क्योंकि कृष्ण से मिलने की हल्की सी आस रूपी श्वास अभी भी शरीर में टिकी हुई है।
In simple words: केवल आकाश तत्व बचा है क्योंकि साँसें चल रही हैं।
Exam Tip: मिलन की आशा प्राण बचाए रखती है।
Question 5. प्रस्तुत छंद कौन-सा है तथा इसमें कौन-सा रस है?
Answer: प्रस्तुत छंद 'सवैया' है तथा इसमें 'विप्रलंभ श्रृंगार' (वियोग श्रृंगार) रस है।
In simple words: सवैया छंद और वियोग श्रृंगार रस है।
Exam Tip: छंद और रस दोनों का नाम स्पष्ट लिखें।
Question 6. गोपियों की दशा का वर्णन किस प्रकार किया गया है?
Answer: गोपियों की दशा का वर्णन अतिशयोक्तिपूर्ण शैली में पंचतत्वों के क्षय के माध्यम से किया गया है।
In simple words: बहुत बढ़ा-चढ़ाकर विरह का वर्णन किया गया है।
Exam Tip: अतिशयोक्ति अलंकार का प्रयोग यहाँ हुआ है।
Question 7. चार तत्व कैसे क्षीण हो रहे हैं?
Answer: रोने से जल तत्व, आहें भरने से वायु तत्व, शरीर सूखने से पृथ्वी तत्व और मुख का तेज मिटने से अग्नि तत्व क्षीण हो गए हैं।
In simple words: विरह के कारण शरीर के चार प्रमुख तत्व नष्ट हो चुके हैं।
Exam Tip: प्रत्येक तत्व के क्षीण होने का कारण अलग से बताएं।
Question 8. गोपियों का हृदय किसके साथ चला गया?
Answer: गोपियों का हृदय कृष्ण के साथ चला गया क्योंकि कृष्ण ने उनके हृदय को चुरा लिया था।
In simple words: कृष्ण गोपियों का दिल अपने साथ ले गए।
Exam Tip: हृदय हरण की बात कवि ने कही है।
Question 9. गोपियाँ क्या भूल गई हैं और क्यों?
Answer: गोपियाँ हँसना भूल गई हैं क्योंकि कृष्ण के बिना उनके जीवन में केवल दुख और विरह की वेदना रह गई है।
In simple words: दुख के कारण गोपियाँ हँसना भूल गई हैं।
Exam Tip: प्रसंग के आरंभ में ही हँसी खो जाने की बात है।
Question 10. 'हरि हियो जु लियो हरि जू हरि' में कौन-सा अलंकार है?
Answer: इसमें 'यमक अलंकार' है जहाँ 'हरि' शब्द के अलग-अलग अर्थ (कृष्ण, चुराना आदि) हैं।
In simple words: यमक अलंकार है जहाँ एक शब्द कई बार आए और अर्थ भिन्न हो।
Exam Tip: यमक अलंकार के उदाहरण के रूप में इसे तैयार रखें।
सपना
झहरि-झहरि झीनी ........................... है दृगन में
कवि: देव (रीतिकालिन कवि)
छंद: कवित्त
Answer: मूल भाव: प्रस्तुत सवैये में श्रृंगार के दोनों पक्षों (संयोग एवं वियोग) का वर्णन है एक गोपी के कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम को दर्शाया गया है।
व्याख्या बिन्दु: वर्षा ऋतु का वर्णन है। वर्षा हो रही है, आकाश में काली घटा है। निद्रामग्न गोपी स्वप्न देख रही है। स्वप्न में कृष्ण उससे झुला झूलने का आग्रह कर रहे हैं। गोपी यह सुनकर अत्यधिक प्रसन्न हो जाती है। झुला झूलने के लिए उठने लगी थी कि उसकी नींद टूट जाती है। कृष्ण के सान्निध्य का स्वप्न भंग हो गया। जाग्रत अवस्था में वह पाती है कि आकाश में न तो बादल हैं और न ही घनश्याम (कृष्ण)। उसे प्रतीत होता है कि जागने पर उसका भाग्य सो गया। जाग्रत अवस्था को वह अपना दुर्भाग्य मानती है यह उसे कष्टदायी प्रतीत होता है। निद्रा का संयोग जाग्रत अवस्था में विरह दशा में परिवर्तित हो जाता है। वर्षा की बूँदें अश्रु बनकर उसकी आँखों में उतर गई हैं। प्रस्तुत छंद कवित्त हैं इसमें श्रृंगार के दोनों पक्षों (संयोग और वियोग) का चित्रण है। कोमलकांत ब्रज भाषा का प्रयोग, तुकांतकता द्रष्टव्य है। 'निगोड़ी नींद' में अनुप्रास अलंकार है। 'झहरि-झहरि', 'घहरि-घहरि' में पुनरुक्तिप्रकाश अलंकार है। "सोए गए भाग मेरे जानि वा जगन में" - विरोधाभास अलंकार है। कवि ने 'फूला न समाना' मुहावरे का प्रयोग किया है।
In simple words: गोपी को सपने में कृष्ण के साथ झूला झूलने का प्रसंग आता है, किंतु नींद खुलने पर वियोग और आँखों में आँसू आ जाते हैं।
Exam Tip: संयोग से वियोग में परिवर्तन की यह अनूठी शैली 'सपना' कविता की विशेषता है।
अभ्यास कार्य
व्याख्या: "झहरि-झहरि झीनी ......................... है दृगन में" की सप्रसंग व्याख्या करें।
प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश 'सपना' से लिया गया है। इसके रचयिता रीतिकालिन कवि देव हैं। इसमें कवि ने श्रृंगार के संयोग और वियोग पक्षों का चित्रण एक साथ किया है।
व्याख्या: गोपी नींद में स्वप्न देख रही है। आकाश में काले बादल घिरे हुए हैं। वर्षा हो रही है। इस मनभावन वातावरण में कृष्ण उसे अपने साथ झुला झूलने के लिए कह रहे हैं। यह सुनकर वह अत्यधिक प्रसन्न हो जाती है। वह कृष्ण के साथ जाने के लिए उठने ही लगती है कि उसकी नींद टूट जाती है। नींद टूट जाने पर श्री कृष्ण के सान्निध्य का स्वप्न भंग हो जाता है। वह अपने इस स्वप्न भंग से दुखी होती है। जाग्रत अवस्था में कृष्ण का न होना उसके लिए कष्टदायक है। वह कहती है कि मेरे जागने से मेरा भाग्य सो गया अर्थात् कृष्ण का साथ छूट गया। नींद टूटने पर उसे ज्ञात होता है कि वहाँ न बादल हैं और न ही कृष्ण। उसे ऐसा प्रतीत होता है कि वर्षा की बूँदें आँसू बन कर उसकी आँखों में आ गई हैं।
शिल्प सौन्दर्य: कवि ने ब्रजभाषा का प्रयोग किया है। श्रृंगार के दोनों पक्षों (संयोग व वियोग) को एक साथ दर्शाया है। कोमलतांत पदावली का प्रयोग किया है। चित्रात्मकता, तुकांतकता है। गेयता का गुण विद्यमान है। पुनरुक्तिप्रकाश, अनुप्रास, उत्प्रेक्षा, मानवीकरण अलंकारों का सहज प्रयोग किया गया है।
काव्य-सौन्दर्य:
"झहरि-झहरि झीनी .......................... दृगन में।"
भाव-सौन्दर्य: प्रस्तुत पंक्तियों में श्रृंगार के संयोग और वियोग पक्ष का चित्रण निद्रा में स्वप्न और स्वप्न-भंग के माध्यम से दर्शाया है। कृष्ण के प्रति गोपी की प्रेम-भावना को व्यक्त किया है।
शिल्प-सौन्दर्य: भाषा - ब्रज, रस - श्रृंगार, गुण - माधुर्य, चित्रात्मकता, लय एवं तुकांतकता। अलंकार - उत्प्रेक्षा, मानवीकरण, अनुप्रास।
Answer: यहाँ गोपी के माध्यम से कवि ने स्वप्न में मिलने वाले सुख (संयोग) और जागने पर मिलने वाले दुख (वियोग) का बहुत ही सुंदर काव्यात्मक रूप प्रस्तुत किया है।
In simple words: सपने का सुख टूटने पर जब गोपी की आँख खुलती है, तो वास्तविकता का दुख उसके आंसुओं में बदल जाता है।
Exam Tip: 'झहरि-झहरि' और 'घहरि-घहरि' शब्दों में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है, इसे अवश्य लिखें।
कवि-परिचय
कवि परिचय का प्रश्न 5 अंक का है। इसे तीन उपशीर्षकों में देना अनिवार्य है:-
(1) किस काल के कवि हैं तथा जीवन-परिचय
(2) रचनाएँ
(3) काव्यगत विशेषताएँ
काव्य-सौन्दर्य:
"झहरि-झहरि झीनी बूँद है परति मानो
घहरि-घहरि घटा घेरी है गगन में"
बौद्धिक प्रश्न:
Question 1. 'सपना' में गोपी की किन दो अवस्थाओं का चित्रण है?
Answer: 'सपना' में गोपी की निद्रावस्था (स्वप्न में मिलन का सुख) और जाग्रत अवस्था (स्वप्न टूटने पर वियोग का दुख) का चित्रण है।
In simple words: सपने का सुख और जागने के बाद का दुख चित्रित है।
Exam Tip: संयोग और वियोग दोनों अवस्थाएं एक साथ दिखाई गई हैं।
Question 2. गोपी क्या स्वप्न देख रही है?
Answer: गोपी स्वप्न देख रही है कि वर्षा ऋतु में कृष्ण उसे अपने साथ झूला झूलने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।
In simple words: गोपी सपने में कृष्ण के साथ झूला झूल रही है।
Exam Tip: वर्षा और झूले का प्रसंग स्वप्न का मुख्य आधार है।
Question 3. 'सपना' में कौन सी ऋतु का वर्णन है?
Answer: 'सपना' में वर्षा ऋतु (सावन) का सुंदर वर्णन है।
In simple words: सावन या वर्षा ऋतु का वर्णन किया गया है।
Exam Tip: घटा और झीनी बूँदें वर्षा ऋतु की सूचक हैं।
Question 4. नींद टूटने से भाग सो जाने का क्या आशय है?
Answer: इसका आशय यह है कि नींद खुलते ही कृष्ण का सान्निध्य छूट गया, जिसे गोपी ने अपने भाग्य का सो जाना या दुर्भाग्य माना।
In simple words: नींद खुलने पर कृष्ण के चले जाने को गोपी अपना दुर्भाग्य मानती है।
Exam Tip: भाग्य सो जाने का अर्थ सुख का अंत होना है।
Question 5. नींद को निगोड़ी क्यों कहा गया है?
Answer: नींद को निगोड़ी इसलिए कहा गया है क्योंकि उसी के टूटने से कृष्ण के साथ चल रहा सुंदर स्वप्न और मिलन का सुख समाप्त हो गया।
In simple words: नींद ने सुंदर सपना तोड़ दिया इसलिए उसे कोसा गया है।
Exam Tip: बोलचाल की भाषा में 'निगोड़ी' शब्द का प्रयोग व्यंग्य या प्रेमपूर्ण झिड़की के रूप में होता है।
Question 6. स्वप्न टूटने पर गोपी ने क्या अनुभव किया?
Answer: स्वप्न टूटने पर गोपी ने पाया कि पास में न तो कृष्ण हैं और न ही बादल, और उसकी आँखों से बहने वाले आँसू वर्षा की बूँदें बन गए हैं।
In simple words: सपना टूटते ही गोपी ने खुद को अकेला और आंसुओं से भरा पाया।
Exam Tip: वास्तविकता के धरातल पर गोपी का अकेलापन स्पष्ट करें।
Question 7. "वेई छाई बूँदें मेरे आँसु हैं दृगन में" का आशय स्पष्ट करें।
Answer: इसका आशय यह है कि आसमान में जो वर्षा की बूँदें छाई हुई थीं, वे स्वप्न टूटने के बाद गोपी की आँखों से बहते हुए आँसू बन गई हैं।
In simple words: आसमान की बूँदें गोपी के आँसू बनकर आँखों में उतर आई हैं।
Exam Tip: प्रकृति और मन की दशा का सुंदर सामंजस्य दिखाया गया है।
Question 8. उपयुक्त छंद कौन सा है तथा इसमें किस रस का चित्रण है?
Answer: प्रस्तुत छंद 'कवित्त' है तथा इसमें 'श्रृंगार रस' (संयोग और वियोग दोनों) का चित्रण है।
In simple words: कवित्त छंद और श्रृंगार रस का प्रयोग है।
Exam Tip: छंद और रस दोनों की सटीक जानकारी दें।
Question 9. प्रस्तुत छंद की भाषा के दो गुण लिखें।
Answer: 1. कोमलकांत पदावलीयुक्त ब्रजभाषा का प्रयोग। 2. संगीतात्मकता, लय और चित्रात्मकता का गुण।
In simple words: ब्रजभाषा की मधुरता और चित्रों जैसा दृश्य प्रस्तुत करने की क्षमता।
Exam Tip: भाषा की सुंदरता से जुड़े दो बिंदु अवश्य लिखें।
Question 10. "उठि गई सो निगोड़ी नींद / सोए गए भाग मेरे" इन पंक्तियों में अलंकार स्पष्ट करें।
Answer: इन पंक्तियों में 'मानवीकरण अलंकार' (नींद का मानव की तरह उठना) तथा 'विरोधाभास अलंकार' (जागने पर भाग्य का सो जाना) है।
In simple words: मानवीकरण और विरोधाभास अलंकार का सुंदर प्रयोग है।
Question 11. फूला न समाना एक मुहावरा है जिसका अर्थ है अत्यधिक प्रसन्न होना।
Answer: जब गोपी को स्वप्न में कृष्ण मिलते हैं, तो वह फूला न समाती है (अत्यधिक प्रसन्न होती है)।
In simple words: बहुत अधिक खुश हो जाना इस मुहावरे का अर्थ है।
Exam Tip: मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग दोनों सीखें।
दरबार
कवि: देव
छंद: सवैये
मूल भाव: कवि ने दरबारी तथा सामंती वातावरण पर व्यंग्य किया है। कवि ने इसमें दर्शाया है कि दरबारी वातावरण में विवेक के स्थान पर चाटुकारिता का प्राधान्य रहता है।
व्याख्या बिन्दु: देव ने यह दर्शाया है कि दरबारी वातावरण में दरबारी निष्क्रिय और अकर्मण्य हो गए हैं। वह अंधे, बहरे और गूँगे बनकर केवल दर्शक है। राजा भी वस्तुस्थिति से अनभिज्ञ (अनजान) बना रहता है। दरबारी और राजा दोनों भोगविलास, रगरंग में लीन रहते हैं। सब केवल अपनी स्वार्थ पूर्ति में लगे रहते हैं। दूसरों के विषय में सोचते ही नहीं हैं। बुद्धि और विवेक भ्रष्ट हो चुका है। लोग (प्रजा) दिन रात भोग विलास की भौतिक सुख-सुविधा की सामग्री एकत्र करने में लगे रहते हैं। भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे लोग नट की भांति नाचते हैं। अपनी बुद्धि, विवेक का प्रयोग नहीं करते। इस प्रकार के वातावरण में बुद्धि, काव्य एवं कला का कोई मोल नहीं है। यह वातावरण काव्य एवं कला की अनुभूति तथा अभिव्यक्ति के मार्ग में बाधक है, सर्वथा अनुपयुक्त है। देव का अधिकांश जीवन राजाश्रय में व्यतीत हुआ। इस पद में उन्होंने दरबारी जीवन के तीखे एवं कटु यथार्थ को अभिव्यक्त किया है। अनुभव की प्रामाणिकता सर्वत्र द्रष्टव्य है। देव की काव्यभाषा ब्रज है 'सवैया' छंद का प्रयोग किया गया है। 'रुचि राच्यों', 'निसि नाच्यों' में अनुप्रास अलंकार है।
In simple words: कवि ने दरबारी संस्कृति पर करारा व्यंग्य किया है जहाँ चापलूसी और भोग-विलास का बोलबाला होता है।
Exam Tip: सामंती व्यवस्था और दरबारी चाटुकारिता पर कवि के व्यंग्य को मुख्य विषय बनाएँ।
अभ्यास कार्य
बौद्धिक प्रश्न:
Question 1. 'दरबार' की भाषा कौन सी है तथा यह किस छंद में रचित है?
Answer: 'दरबार' कविता की भाषा ब्रजभाषा है तथा यह 'सवैया' छंद में रचित है।
In simple words: ब्रजभाषा और सवैया छंद का प्रयोग हुआ है।
Exam Tip: भाषा और छंद का नाम संक्षिप्त रूप में दें।
Question 2. 'दरबार' में किस प्रकार के वातावरण को दर्शाया गया है?
Answer: दरबार में चाटुकारिता, भोग-विलास, निष्क्रियता, अकर्मण्य, और विवेकहीनता से युक्त सामंती वातावरण को दर्शाया गया है।
In simple words: चापलूसी और भोग-विलास से भरे माहौल का वर्णन है।
Exam Tip: सामंती परिवेश के दोषों को उजागर करें।
Question 3. राजा और दरबारी दोनों कैसे हैं?
Answer: राजा अपनी जनता की वास्तविक स्थिति से अनजान और उदासीन है, तथा दरबारी केवल स्वार्थ पूर्ति और भोग-विलास में डूबे हुए हैं।
In simple words: राजा और दरबारी दोनों भोग-वििलास में मग्न हैं।
Exam Tip: राजा के अज्ञान और दरबारियों की चापलूसी को बताएं।
Question 4. दरबारी किस में लीन है?
Answer: दरबारी राग-रंग, भोग-विलास और अपनी स्वार्थसिद्धि में लीन हैं।
In simple words: दरबारी केवल ऐशो-आराम में डूबे रहते हैं।
Exam Tip: स्वार्थ और भोग विलास मुख्य प्रवृत्तियाँ हैं।
Question 5. ऐसा क्यों कहा गया है कि लोगों की मति भ्रष्ट हो गई है?
Answer: ऐसा इसलिए कहा गया है क्योंकि लोग विवेक का इस्तेमाल करने के बजाय भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे नट की तरह नाच रहे हैं।
In simple words: लोग बुद्धि छोड़कर केवल दिखावे और सुख के पीछे भाग रहे हैं।
Exam Tip: विवेक शून्यता को मतिभ्रष्ट होने का कारण बताया गया है।
Question 6. काव्य और कला की पहचान को किस प्रकार अनदेखा किया जाता है?
Answer: दरबारी संस्कृति में चाटुकारिता और मूर्खता का बोलबाला होने के कारण सच्ची कला और काव्य का कोई आदर नहीं होता, उन्हें अनदेखा कर दिया जाता है।
In simple words: चापलूसी के आगे सच्ची कला का कोई सम्मान नहीं होता।
Exam Tip: कला के अवमूल्यन को दर्शाएं।
Question 7. 'सगरी निसि नाच्यो' का आशय स्पष्ट करें।
Answer: इसका आशय है कि दरबारी लोग बिना किसी विवेक या उद्देश्य के रात-दिन चापलूसी और भोग-विलास में ही नाचते-कूदते रहते हैं।
In simple words: लोग रात-दिन बिना सोचे-समझे चापलूसी के नाच में लगे रहते हैं।
Exam Tip: चाटुकारिता की पराकाष्ठा को यह पंक्ति दर्शाती है।
Question 8. 'दरबार' का मूल भाव लिखें।
Answer: 'दरबार' कविता का मूल भाव सामंती और दरबारी संस्कृति की पोल खोलना है, जहाँ चापलूसी, अकर्मण्यता और भोग-विलास ही सर्वोपरि होते हैं।
In simple words: दरबारी जीवन के पाखंड और खोखलेपन पर व्यंग्य करना ही इसका मूल भाव है।
Exam Tip: व्यंग्यात्मक शैली को मुख्य विशेषता के रूप में लिखें।
पाठ-4 पद्माकर
रीतिकालिन कवि पद्माकर
रचनाएँ: विरोधवली, पद्माभरण, राम रसायन, गंगा लहरी, हिम्मतबहादुर, विरुदावली।
'कविराज शिरोमणि' की उपाधि से सम्मानित
काव्यगत विशेषताएँ:
कवि पद्माकर रीतिकालिन कवि हैं। उनकी भाषा माधुर्य गुण युक्त ब्रज भाषा है। अपनी अधिकतर रचनाओं में उन्होंने प्रेम और सौन्दर्य का सजीव चित्रण किया है। पद्माकर के ऋतु वर्णन में चित्रात्मकता और अपूर्व बिम्ब योजना के दर्शन होते हैं।
अलंकारिता उनके काव्य का प्रधान गुण है। अलंकार, विशिष्ट अधिक प्रयोग में उनका काव्य अपूर्व है। भाषा भावानुकूल और शब्द चयन विषयुकूल हैं। लाक्षणिक शब्द प्रयोग सूक्ष्म अनुभूतियों को सहज ही प्रस्तुत करता है। भाषा में प्रवाह तथा गति है। पद्माकर ने अधिकांशतः कवित्त और सवैये छंद का प्रयोग किया है।
कविता-1 "औरै भाँति कुंजन ............................. बन है गए।।"
कवि: पद्माकर
छंद: कवित्त
Answer: मूल भाव: बसंत ऋतु के आगमन का चित्रण किया है। ऋतुराज के प्राकृतिक सौन्दर्य का तथा नवयुवकों एवं पक्षी-समाज पर पड़ने वाले उसके प्रभाव का चित्रात्मक वर्णन किया है।
व्याख्या बिन्दु: ऋतुराज वसंत की मादकता का मनोहारी चित्रण किया है। वसंत के आगमन से प्रकृति की शोभा में, वातावरण में वृद्धि होती है। समस्त प्रकृति राग, रस और रंग से पूरित हो उठती है। मन व शरीर में उत्साह का संचार होता है। वसंत ऋतु एक अलग ही प्रकार का चमत्कारपूर्ण प्राकृतिक परिवर्तन और सौंदर्य लेकर आती है। कवित्त की भाषा ब्रज है। भाषा में तुकांतकता और माधुर्य गुण द्रष्टव्य है वसंत ऋतु का मनभावन चित्रण, अलंकारों एवं शब्दवृत्ति से प्रभावी बन गया है। 'औरै' शब्द की आवृत्ति से काव्य में चमत्कार उत्पन्न हो गया है।
In simple words: वसंत ऋतु के आते ही प्रकृति, जीव-जंतुओं और मनुष्यों में एक नया उल्लास और चमत्कारिक परिवर्तन आ जाता है।
Exam Tip: वसंत के मादक प्रभाव और ब्रजभाषा के प्रवाह को उत्तर में जरूर रेखांकित करें।
अभ्यास कार्य
व्याख्या: "औरै भाँति ....................................... बन है गए।"
काव्य सौन्दर्य: "औरै भाँति .............................. औरै छवि है गए।।"
बौद्धिक प्रश्न:
Question 1. किस ऋतु का चित्रण किया गया है?
Answer: इसमें ऋतुओं के राजा 'वसंत' (ऋतुराज) का मनोहारी चित्रण किया गया है।
In simple words: वसंत ऋतु का वर्णन किया गया है।
Exam Tip: वसंत को ऋतुराज कहा जाता है।
Question 2. इस ऋतु के आगमन से किस किस पर क्या-क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: वसंत के आगमन से प्रकृति की कुंजों, गलियों, पक्षियों, भौरों और मनुष्यों के मन में उमंग, उल्लास और नया सौंदर्य भर जाता है।
In simple words: प्रकृति और सभी जीवों में नया उत्साह और रंग भर जाता है।
Exam Tip: व्यापक प्रभाव को स्पष्ट करें।
Question 3. 'ऋतुराज' शब्द का प्रयोग किसके लिए किया गया है और क्यों?
Answer: 'ऋतुराज' शब्द का प्रयोग वसंत ऋतु के लिए किया गया है क्योंकि यह सभी ऋतुओं में सबसे सुंदर, सुहावनी और उल्लासपूर्ण होती है।
In simple words: वसंत को सब ऋतुओं का राजा माना जाता है।
Exam Tip: ऋतुराज का शाब्दिक अर्थ ऋतुओं का राजा है।
Question 4. 'ऋतुराज' के आगमन से प्रकृति में क्या परिवर्तन होते हैं?
Answer: प्रकृति में चारों तरफ हरियाली छा जाती है, नए फूल खिलते हैं, भौरें गूँजते हैं और सब कुछ रंग-बिरंगा व मादक हो जाता है।
In simple words: प्रकृति में रंग-बिरंगे फूल और हरियाली छा जाती है।
Exam Tip: प्राकृतिक परिवर्तनों का वर्णन करें।
Question 5. 'औरै भाँति' की आवृत्ति से काव्य में उत्पन्न चमत्कार को स्पष्ट करें।
Answer: 'औरै भाँति' शब्दों की बार-बार आवृत्ति से वसंत के कारण प्रकृति में आए अनूठे, अनोखे और जादुई बदलाव का विशेष चमत्कार उत्पन्न हुआ है।
In simple words: शब्दों की आवृत्ति से वसंत के अनोखेपन का सुंदर प्रभाव दिखता है।
Exam Tip: पुनरावृत्ति से उत्पन्न सौंदर्य को समझाएं।
Question 6. "छलिया छबीले छैल औरै छवि है गए" में अलंकार स्पष्ट करें।
Answer: इसमें 'छ' वर्ण की बार-बार आवृत्ति होने के कारण 'अनुप्रास अलंकार' तथा शब्दों के विशेष प्रयोग से काव्य सौंदर्य बढ़ा है।
In simple words: छ वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास अलंकार है।
Exam Tip: वर्णों की आवृत्ति अनुप्रास की पहचान है।
कवित्त-2
"गोकुल के कुल .......................................... निचोरत बनै नहीं।।"
कवि: पद्माकर
छंद: कवित्त
Answer: मूल भाव: होली के त्योहार के माध्यम से कृष्ण के प्रति गोपियों के प्रेम को चित्रित किया है। स्याम रंग (कृष्ण प्रेम) में डूबी गोपी इस रंग को सदा अपने साथ रखना चाहती है।
व्याख्या बिन्दु: होली के त्योहार का वर्णन है गोपियाँ लोक निंदा की परवाह किए बिना 'स्याम रंग' में कृष्ण के प्रेम के रंग से स्वयं को मुक्त नहीं करना चाहतीं। होली के अवसर पर सब त्योहार की मस्ट मस्ती में मग्न हैं लोग (गोपियाँ, ग्वाल-बाल) इतने मग्न हैं कि सभी ने लाज त्याग दी है। दूसरे को रंगने और स्वयं को बचाने के लिए सब इधर उधर भाग रहे हैं। इस खेल में एक गोपी श्याम रंग में डूब गई। सखियों के कहने पर भी उसने अपने कपड़े नहीं निचोड़े। वह 'स्याम रंग' अर्थात् कृष्ण प्रेम को अपने से अलग नहीं कर सकती। उसका हृदय तो श्याम (कृष्ण) ने हर लिया है। कृष्ण प्रेम में डूबी गोपिका का मानना है कि कपड़ों का श्याम रंग निचोड़ने पर उससे कृष्ण-प्रेम छूट जाएगा। भाषा ब्रज है। कोमलकांत पदावली माधुर्य गुण से युक्त है। काव्य में प्रवाह और चित्रात्मकता है। 'स्याम रंग' में श्लेष अलंकार है। 'गोप गाउन', 'परोस पिछवारन', 'चुराई चित्त', में अनुप्रास अलंकार का चमत्कार द्रष्टव्य है।
In simple words: होली में कृष्ण के प्रेम रंग में रंगी गोपी अपने कपड़े नहीं निचोड़ना चाहती ताकि उसका कृष्ण प्रेम बना रहे।
Exam Tip: 'स्याम रंग' शब्द का श्लेष (एक अर्थ काला रंग, दूसरा कृष्ण का प्रेम) स्पष्ट करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
अभ्यास कार्य
व्याख्या: "गोकुल के कुल ........................................ निचोरत बनै नहीं।"
काव्य सौन्दर्य:
'हौं तो स्याम रंग में चुराई चित्त चोराचोरी
बोरत तौ बोरयौ पै निचोरत बनै नहीं।'
बौद्धिक प्रश्न:
Question 1. कवित्त में किस त्योहार का चित्रण है?
Answer: कवित्त में उल्लास और मस्ती भरे 'होली' के त्योहार का चित्रण है।
In simple words: होली के त्योहार का वर्णन किया गया है।
Exam Tip: होली का त्योहार राधा-कृष्ण की प्रेमलीला से जुड़ा है।
Question 2. इस त्योहार का लोगों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Answer: इस त्योहार के प्रभाव से गोकुल के सभी लोग लोक-लाज और संकोच छोड़कर होली की मस्ती और प्रेम रंग में डूब जाते हैं।
In simple words: लोग लोक-लाज छोड़कर होली की मस्ती में खो जाते हैं।
Exam Tip: लोक-लाज त्यागने की बात प्रमुख है।
Question 3. गोपी कौन-से रंग में डूबी है?
Answer: गोपी होली के रंग के साथ-साथ कृष्ण के प्रेम रूपी 'स्याम रंग' में पूरी तरह डूबी हुई है।
In simple words: गोपी कृष्ण के प्रेम के रंग में डूबी है।
Exam Tip: श्लेष अर्थ वाला 'स्याम रंग' यहाँ मुख्य है।
Question 4. गोपी क्या नहीं करना चाहती और क्यों?
Answer: गोपी अपने रंगों से भीगे वस्त्रों को निचोड़ना नहीं चाहती क्योंकि उसका मानना है कि ऐसा करने से उसका कृष्ण-प्रेम भी निकल जाएगा।
In simple words: गोपी अपने कपड़े नहीं निचोड़ना चाहती ताकि कृष्ण का प्रेम न छूट जाए।
Exam Tip: गोपी की अनन्य प्रेम भावना को स्पष्ट करें।
Question 5. होली के अवसर पर लोग क्या त्याग देते हैं?
Answer: होली के अवसर पर लोग अपनी कुल-मर्यादा और लोक-लाज का संकोच त्याग देते हैं।
In simple words: लोग लोक-लाज और संकोच छोड़ देते हैं।
Exam Tip: होली की मस्ती की यह विशेषता है।
Question 6. पद्माकर की भाषा कौन सी है?
Answer: पद्माकर की भाषा प्रवाहमयी और साहित्यिक ब्रजभाषा है।
In simple words: ब्रजभाषा का प्रयोग किया गया है।
Exam Tip: रीतिकाल के अधिकांश कवियों की तरह इनकी भाषा भी ब्रज है।
कवित्त-3
"भौरै को ........................................ सुहावनो लगरत है।"
कवि: पद्माकर
छंद: कवित्त
Answer: मूल भाव: प्रस्तुत कवित्त में वर्षा ऋतु के सौन्दर्य एवं इस ऋतु में होने वाले प्राकृतिक परिवर्तन का चित्रण किया है।
व्याख्या बिन्दु: वर्षा ऋतु के मनभावन रूप का वर्णन कवि ने सुन्दर चित्रात्मक शब्दों में किया है। वर्षा ऋतु के आगमन से सम्पूर्ण वातावरण भौरों की गुंजन से गूँज उठता है। ऐसा प्रतीत होता है कि कोई मल्हार राग गा रहा हो। वर्षा ऋतु में मेघ पानी के साथ साथ प्रेम की वर्षा भी करते हैं। हृदय में प्रेम भावना जागृत होती है। इस समय नायिका को अपना प्रियतम सर्वाधिक प्रिय प्रतीत होता है। नायिका अपने प्रियतम का सान्निध्य चाहती है। समस्त वातावरण बादलों की गर्जन तथा मोर के कलवर से पूरित है। इस मनमोहक वातावरण में नायिका झूलाना झूलना चाहती है। वर्षा ऋतु का सुन्दर चित्रण है। कवित्त की भाषा ब्रज है। इसमें माधुर्यगुण एवं लय का समावेश है। 'मंजुल मलार', 'छवि छावनों' में अनुप्रास अलंकार है।
In simple words: सावन के सुहाने मौसम में भौरों की गूँज और बारिश के बीच नायिका को अपने प्रियतम की याद सताती है।
Exam Tip: सावन के प्राकृतिक सौंदर्य और मल्हार राग के प्रसंग को उत्तर में शामिल करें।
अभ्यास कार्य
व्याख्या: "भौरैजान को गुंजन ..................................... सुहावनो लागत है।"
काव्य सौन्दर्य:
'कहें पद्माकर गुमानहूँ तें मानहूँ तें
प्रानहूँ तें प्यारो मनभावनो लागत है।'
बौद्धिक प्रश्न:
Question 1. प्रस्तुत कवित्त में किस ऋतु का वर्णन किया गया है?
Answer: प्रस्तुत कवित्त में सुहावनी 'वर्षा ऋतु' (सावन) का वर्णन किया गया है।
In simple words: वर्षा या सावन ऋतु का वर्णन है।
Exam Tip: सावन के महीने का विशेष महत्व होता है।
Question 2. सावन के आगमन पर प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों का उल्लेख करें।
Answer: सावन में चारों तरफ हरियाली छा जाती है, काले बादल गरजते हैं, भौरे गूँजते हैं और मोर नाचते हैं।
In simple words: काले बादल, हरियाली और भौरों की गूँज सुनाई देती है।
Exam Tip: प्रकृति के उल्लासपूर्ण दृश्यों का वर्णन करें।
Question 3. 'प्राणों से प्रिय' का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
Answer: 'प्राणों से प्रिय' का प्रयोग नायिका के प्रियतम (नायक) के लिए किया गया है।
In simple words: प्रेमिका के प्रियतम के लिए यह शब्द है।
Exam Tip: नायक के प्रति प्रेम की अधिकता को दर्शाता है।
Question 4. सावन में मेघ पानी के साथ साथ और क्या बरसाते हैं?
Answer: सावन में मेघ पानी के साथ-साथ हृदय में प्रेम और मादकता भी बरसाते हैं।
In simple words: बादल पानी के साथ प्रेम और उमंग बरसाते हैं।
Exam Tip: भावुकता और प्रेम के संदर्भ को स्पष्ट करें।
Question 5. कवि ने सावन की किन विशेषताओं का चित्रण किया है?
Answer: भौरों की गूँज, मल्हार राग, बादलों की गर्जना और मनमोहक हरियाली जैसी विशेषताओं का चित्रण किया है।
In simple words: भौरों की गूँज और सुहावने मौसम का वर्णन है।
Exam Tip: सावन की विशेषताओं को बिंदुओं में बता सकते हैं।
Question 6. प्रियतम के विषय में क्या कहा गया है?
Answer: प्रियतम के विषय में कहा गया है कि वह अभिमान और मान-मनुहार से भी बढ़कर प्राणों से भी अधिक प्यारा लगता है।
In simple words: प्रियतम प्राणों से भी बढ़कर प्यारा प्रतीत होता है।
Exam Tip: प्रेम की पराकाष्ठा को दर्शाती पंक्ति है।
Question 7. प्रस्तुत पद की भाषा कौन सी और कैसी है?
Answer: प्रस्तुत पद की भाषा साहित्यिक, कोमलकांत और प्रवाहमयी ब्रजभाषा है।
In simple words: मधुर और प्रवाहमयी ब्रजभाषा है।
Exam Tip: भाषा की सुंदरता की सराहना करें।
पाठ-5
कवि: सुमित्रानंदन पंत (मूलतः छायावादी काव्यधारा के कवि)
रचनाएँ: वीणा, ग्रंथि, ग्राम्या, पल्लव, गुंजन, उत्तरा, लोकायतन (महाकाव्य)
पुरस्कार: सोवियत लैंड नेहरू, साहित्य अकादमी, भारतीय ज्ञानपीठ
काव्यगत विशेषताएँ:
पंत जी मूलतः छायावादी काव्यधारा के कवि हैं। प्रकृति प्रेम एवं सौंदर्य के कवि पंत जी के काव्य में कल्पनाशीलता, प्रवाह, गति एवं भावुकता है। भाषा तत्सम प्रधान खड़ी बोली है। भाव और विषयानुसार, उर्दू, फारसी, सामान्य आंचलिका भाषा का प्रयोग मिलता है। प्रकृति के अनेकानेक रूपों, उसके पल-पल परिवर्तनशील सौंदर्य का चित्रात्मक वर्णन किया है। अनूठी बिम्ब योजना और तुकांतकता पंत जी के काव्य की विशेषताएँ हैं।
छायावादी काव्यधारा के कवि पंत जी के काव्य में रस, छन्द, अलंकार आदि विशिष्ट भाषिक प्रयोग एवं भावना का अद्भुत सामंजस्य है। गीतत्मक शैली में रचना काव्य, अधिकांशतः: श्रृंगार एवं करुण रस प्रधान है। उपमा, रूपक, मानवीकरण इत्यादि अलंकारों के संयोजन से काव्य सौन्दर्य में वृद्धि तथा भाषिक चमत्कार को देखा जा सकता है। शब्दों का भावानुकूल एवं विषयानुसार चयन शब्द शिल्पी पंत के काव्य में सर्वत्र द्रष्टव्य है।
कविता - संध्या के बाद
कवि - सुमित्रानंदन पंत
Answer: मूल भाव: प्रस्तुत कविता में ग्रामीण जन जीवन के सामाजिक यथार्थ को अभिव्यक्त किया गया है। संध्या समय होने वाले प्राकृतिक परिवर्तनों, ग्राम्य जीवन के दैनिक कार्य व्यापार को वर्णित किया गया है। कविता के माध्यम से मानवता का संदेश दिया गया है। एक नई सामाजिक व्यवस्था और समता की आवश्यकता की ओर संकेत किया गया है। शोषण से, दरिद्रता से मुक्ति की कामना है। गाँव में व्याप्त दुःख, दैन्य, उत्पीड़न, निराशा का करुण एवं भावपूर्ण चित्र उकेरा है।
व्याख्या बिन्दु: प्रस्तुत कविता पंत जी द्वारा रचित 'ग्राम्या' संकलन से ली गई है। 'संध्या के बाद' में ग्रामीण परिवेश का चित्रण है। प्रकृति पर संध्याकालीन लालिमा के प्रभाव को अत्यन्त चित्रात्मक ढंग से दर्शाया है। कवि ने संध्या का चित्रण पक्षी रूप में किया है। (सिमटा पंख सांझ की लाली) झरनों का शतमুখী स्वरूप, गंगाजल का चितकबरा होना, रेत पर धूप-छांव का खेल आदि प्राकृतिक परिवर्तनों को बिम्बों द्वारा दर्शाया है। संध्या के समय, बस्ती मंदिर के घंटों तथा शंख ध्वनि से पूरित हो उठती है। संध्या की आभा का सुन्दर वर्णन है।
In simple words: इस कविता में ग्रामीण जीवन के यथार्थ, गरीबी और प्रकृति के सांझकालीन सौंदर्य का सजीव चित्रण है।
Exam Tip: छायावाद के सुकुमार कवि पंत की यह कविता प्रगतिवादी यथार्थ और ग्रामीण जीवन की करुण कथा से जुड़ी है।
दैनिक कार्य व्यापार समाप्त कर घर लौटे थके व्यापारियों और कृषकों का वर्णन है। गाड़ियों और गाय के कारण पूरा वातावरण धूल से भर जाता है। धीरे-धीरे पूरी बस्ती अंधकार में डूब जाती है। गाँव में दरिद्रता, उत्पीड़न और निराशा व्याप्त है। व्यक्ति (गाँव वाले) अपने दैन्य भाव को, दुःख को प्रकट करने में अक्षम हैं। उनका क्रंदन और रुदन अनभिव्यक्त है, मूक है। इस दुःख नैराश्य को देखकर, अनुभव कर गाँव के बनिए के मन में मानवता जाग्रत होती है। उसे अपना जीवन असफल और निरर्थक प्रतीत होता है।
घटते प्रकाश में रात की कालिमा धीरे-धीरे गहरी होती है। प्रकृति के समस्त उपकरण अंधकार मग्न हो रहे हैं। कुत्तों के भौंकने तथा सियारों के रोने से गाँव में व्याप्त दुःख, दैन्य और उत्पीड़न मुखरित हो उठता है। घरों से उठती धू्म-रेखा को नीले रेशम की सी जाली कहा है (उपमा) सारा वातावरण आलस्यमग्न जान पड़ता है। दुःख, गरीबी, निराशा, पीड़ा ही ग्रामीण जीवन की परिभाषा है।
कवि दरिद्रता को पाप का कारण मानते हैं। गाँव के बनिए के माध्यम से गाँववालों की दैन्य स्थिति, पाप के अंत की कामना की है। ग्रामीण जीवन की इस दशा का दोषी व्यक्ति विशेष न होकर व्यवस्था है। इसी व्यवस्था में परिवर्तन होना चाहिए। जनता को परिश्रम का फल उसके कार्य के अनुपात में मिलना चाहिए। सामाजिक समता की स्थापना की ओर संकेत किया गया है।
बनिया अपना स्वभाव (पैसे कमाना, स्वार्थ सिद्ध करना, ठगना) नहीं त्यागता। उसकी कथनी (सोच) और करनी में अन्तर है। वह अपने विचारों (सामाजिक समता, नई व्यवस्था) को अपने व्यवहार अपने आचरण में नहीं लाता। आटा लेने आई बुढ़िया का शोषण करता है। आटा कम तोलता है और पैसे पूरे लेता है। सारी बस्ती निद्रा, आलस्य और निराशा में डूब जाती है।
कविता की भाषा तत्सम प्रधान खड़ी बोली है। विषय तथा भावानुकूल, यत्र-तत्र उर्दू-फारसी, आंचलिक शब्दों एवं सामान्य बोलचाल की भाषा का प्रयोग द्रष्टव्य है। रस, छन्द, अलंकार, विशिष्ट भाषिक प्रयोगों की दृष्टि से यह कविता उत्तम है।
'संध्या के बाद' प्राकृतिक सौंदर्य और सामाजिक यथार्थ की कविता है। ग्राम्य जीवन की करुण कथा का मार्मिक वर्णन द्रष्टव्य है। प्रकृति के परिवर्तनशील रूप को बिम्बों द्वारा दर्शाया गया है। चित्रात्मक वर्णन से प्रकृति सजीव हो उठती है। उपमा, अनुप्रास तथा पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार द्रष्टव्य है। दीप शिखा-सा, ज्योति स्तंभ-सा, केंचुला-सा, बगुलों-सा, स्वर्ण चूर्ण-सी, रेशम की-सी हल्की जाली आदि में उपमा अलंकार है। 'कँप कँप', 'अपनी-अपनी' में पुनरुक्तिप्रकाश, 'घुस घरौंदे', 'दैन्य दुःख', 'मौत मन्द' आदि में अनुप्रास अलंकार, 'दांड़ी मारना' - मुहावरे का प्रयोग है।
सम्पूर्ण कविता में लय के कारण गेयता के दर्शन होते हैं।
Answer: पंत जी ने ग्रामीण परिवेश के माध्यम से समाज की असमानता और गरीबों के शोषण पर प्रहार किया है।
In simple words: ग्रामीण जीवन की कठिनाइयों और शोषक प्रवृत्ति का मार्मिक चित्रण किया गया है।
Exam Tip: प्रकृति चित्रण और सामाजिक यथार्थ का सुंदर समन्वय इस कविता की मुख्य विशेषता है।
अभ्यास-कार्य
व्याख्या:
1. 'मन से कढ़ अवसाद श्रान्ति ................... मूक निराशा।'
2. 'व्यवस्था में जग की ...................... अधिकारी धन का?'
3. 'नील लहरियों में लोड़ित .................... बँधे समुज्ज्वल'
काव्य-सौन्दर्य:
1. 'सिमटा पंख साँझ ......................... निर्झर।'
2. 'तट पर बगुलों-सी .......................... अंतर रोदन!'
बौद्धिक प्रश्न:
Question 1. कविता में किस समय का चित्रण है?
Answer: कविता में दिन ढलने के बाद के समय यानी 'संध्या के बाद' के समय का चित्रण है।
In simple words: शाम ढलने के बाद के समय का वर्णन है।
Exam Tip: कविता का शीर्षक ही इसका उत्तर स्पष्ट करता है।
Question 2. गाँव का वातावरण कैसा है?
Answer: गाँव का वातावरण गरीबी, निराशा, थकान, खामोशी और गहरी उदासी से भरा हुआ है।
In simple words: गाँव में गरीबी, खामोशी और उदासी का माहौल है।
Exam Tip: ग्रामीण यथार्थ की विडंबना को दर्शाएं।
Question 3. पंत किस प्रकार के कवि हैं?
Answer: पंत जी मूलतः प्रकृति के सुकुमार कवि तथा छायावादी काव्यधारा के प्रमुख हस्ताक्षर हैं।
In simple words: पंत प्रकृति प्रेमी और छायावादी कवि हैं।
Exam Tip: सुकुमार कवि की उपमा पंत को दी जाती है।
Question 4. पंत की भाषा पर अपने विचार व्यक्त करें।
Answer: पंत जी की भाषा तत्सम प्रधान, परिमार्जित और चित्रात्मक खड़ी बोली है जिसमें भावों के अनुसार शब्दों का सटीक चयन मिलता है।
In simple words: उनकी भाषा बहुत सुंदर, साहित्यिक और चित्रात्मक है।
Exam Tip: तत्सम प्रधान खड़ी बोली का उल्लेख अवश्य करें।
Question 5. 'सौ मुखों वाला' किसे और क्यों कहा गया है?
Answer: झरनों को 'सौ मुखों वाला' कहा गया है क्योंकि वे अनेक धाराओं में बँटकर नीचे बहते हैं।
In simple words: झरनों की कई धाराएँ होने के कारण उन्हें ऐसा कहा गया है।
Exam Tip: झरने के बहुमुखी रूप को दर्शाया गया है।
Question 6. सिक्कता, सलिल तथा समीर को स्नेह सूत्र में बँधा क्यों कहा गया है?
Answer: रेत (सिक्कता), पानी (सलिल) और हवा (समीर) प्राकृतिक रूप से आपस में मिलकर एक सुंदर दृश्य बनाते हैं, इसलिए उन्हें स्नेह सूत्र में बँधा कहा गया है।
In simple words: प्रकृति के ये तत्व आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़े हैं।
Exam Tip: प्राकृतिक उपादानों का समन्वय स्पष्ट करें।
Question 7. वृद्धाइयों और बगुलों के साम्य को स्पष्ट करें।
Answer: नदी के तट पर बैठी वृद्ध महिलाओं और बगुलों के सफेद रंग तथा उनकी शांत मुद्रा में समानता दिखाई गई है।
In simple words: बूढ़ी औरतों और बगुलों दोनों की शांत स्थिति में एक जैसी झलक दिखती है।
Exam Tip: उपमा और रूपक का सुंदर प्रयोग यहाँ हुआ है।
Question 8. कर्म और गुण के समान वितरण, को स्पष्ट करते हुए बताएँ कि किस व्यवस्था की ओर संकेत किया गया है?
Answer: इसमें शोषणमुक्त, समतावादी और सामाजिक न्याय पर आधारित एक नई समाजवादी व्यवस्था की ओर संकेत किया गया है।
In simple words: बराबरी और न्याय वाली नई सामाजिक व्यवस्था की बात की गई है।
Exam Tip: प्रगतिवादी सोच और समतावादी समाज का दृष्टिकोण स्पष्ट करें।
Question 9. गाँव के बनिए के मन में कौन-सा भाव, कब और क्यों जाग्रत हुआ?
Answer: बनिए के मन में मानवता और ग्लानि का भाव संध्या समय गाँव के दुखों और निराशा को देखकर जाग्रत हुआ।
In simple words: गाँव की गरीबी देखकर बनिए को अपनी स्वार्थ भरी जिंदगी पर पछतावा हुआ।
Exam Tip: शोषक वर्ग के भीतर भी मानवीय संवेदना जागने का प्रसंग है।
Question 10. पाप का कारण किसे कहा गया है और क्यों?
Answer: गरीबी और आर्थिक असमानता को पाप का कारण कहा गया है क्योंकि गरीबी मनुष्य की नैतिकता और मानवता को नष्ट कर देती है।
In simple words: गरीबी ही सारे पापों और बुराइयों की जड़ है।
Exam Tip: आर्थिक विपन्नता को सामाजिक पतन का कारण माना गया है।
Question 11. गाँव का बनिया अपनी वृत्ति नहीं छोड़ पाता। ऐसा किस घटना से पता चलता है?
Answer: यह इस घटना से पता चलता है कि मानवता की बात सोचने के बावजूद वह आटा लेने आई गरीब बुढ़िया को कम तौलता है और पूरे पैसे लेता है।
In simple words: बूढ़ी औरत को कम आटा तौलने से उसकी ठगने की आदत का पता चलता है।
Exam Tip: कथनी और करनी के अंतर को यह घटना दर्शाती है।
Question 12. 'ज्योति स्तंभ-सा', 'दीप शिखा-सी', 'रेशम की-सी' जाली में कौन सा अलंकार है?
Answer: इन सभी में 'उपमा अलंकार' है क्योंकि सा, सी, जैसी वाचक शब्दों से तुलना की गई है।
In simple words: तुलना करने के कारण यहाँ उपमा अलंकार है।
Exam Tip: उपमा अलंकार की पहचान वाचक शब्द होते हैं।
Question 13. कवि ने बुढ़िया के शोषण को दर्शाने हेतु किस मुहावरे का प्रयोग किया है?
Answer: कवि ने शोषण को दर्शाने के लिए 'दांडी मारना' (कम तौलना) मुहावरे का प्रयोग किया है।
In simple words: तोल में बेईमानी करने के लिए 'दांडी मारना' मुहावरा आया है।
Exam Tip: मुहावरों के सटीक प्रयोग से भाषा जीवंत होती है।
Question 14. बस्ती के छोटे से गाँव के अवसाद को किन किन उपकरणों द्वारा अभिव्यक्त किया गया है?
Answer: कुत्तों के भौंकने, सियारों के रोने, धुएँ की रेखा, मूक क्रंदन और अंधकार जैसे उपकरणों से अवसाद को व्यक्त किया गया है।
In simple words: प्राकृतिक और परिवेशीय आवाज़ों व दृश्यों से गाँव के दुख को दिखाया गया है।
Exam Tip: वातावरण के उदास तत्वों की सूची दें।
पाठ-6
कवयित्री: महादेवी वर्मा
कविताएँ: जाग तुझको दूर जाना, सब आँखों के आँसू उजले
महादेवी जी की प्रसिद्धि विशेषतः कवयित्री के रूप में है, परन्तु ये मौलिक गद्यकार भी हैं। महादेवी वर्मा छायावादी काव्य में एक प्रमुख स्तंभ हैं।
रचनाएँ: काव्य संग्रह- नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत और दीपशिखा
गद्य रचनाएँ - पथ के साथी, अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ, श्रृंखला की कड़ियाँ आदि।
काव्यगत विशेषताएँ:
इनके काव्य में गीत और संगीत का सामंजस्य है। संगीतात्मकता, लाक्षणिकता, चित्रमयता और रहस्यभास, काल्पनिकत्व और प्रकृति-सौंदर्य उनके गीतों की विशेषता है। महादेवी वर्मा की कविता में बिंबों और प्रतीकों की सुन्दर योजना है। इनके काव्य में तत्सम शब्दों का अत्यधिक प्रयोग हुआ है। भाषा संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली है। प्रकृति का सुन्दर चित्रण हुआ है।
पुरस्कार: 'भारतीय ज्ञानपीठ', 'पद्मभूषण' अलंकरण से सम्मानित।
जाग तुझको दूर जाना
मूल भाव: 'जाग तुझको दूर जाना' कविता के माध्यम से कवयित्री मानव को निरन्तर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है तथा भीषण कठिनाइयों की चिंता न करते हुए अपने देश के प्रति सदैव कर्तव्यनिष्ठ रहने के लिए प्रेरित करती है।
व्याख्या बिन्दु: इस कविता में कवयित्री ने मानव को आँधी, तूफान, भूकंप की चिंता न करते हुए सांसारिक मोह-माया के बंधनों को त्याग कर समस्त सुखों, भोग-विलासों को छोड़कर, कष्टों को भूलकर कठिनाइयों का सामना करते हुए निरन्तर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी है।
"मोम के बंधन" कथन से कवयित्री का आशय है कि ये बंधन मोम के समान कोमल हैं। मनुष्य को ये मानवीय रिश्ते और आपसी संबंध नहीं रोक सकते अर्थात् आजादी की लड़ाई में तुम्हें अपनों से मुँह मोड़ना होगा। 'मोम के बंधन' मानवीय रिश्तों और आपसी संबंधों के प्रतीक हैं। 'तितलियों के पर' का प्रयोग सुंदर युवतियों और ऐश्वर्यपूर्ण जिंदगी की सुख-सुविधाओं के संदर्भ में किया गया है।
In simple words: कवयित्री मनुष्य को हर बाधा और मोह-माया को पार करके अपने महान लक्ष्य की ओर बढ़ने का संदेश देती है।
Exam Tip: राष्ट्रीय चेतना और साधक के जीवन के संघर्ष का सुंदर प्रतीक इस कविता में मिलता है।
कवयित्री मानव का सांसारिक मोह-माया, सुख-सुविधाओं, भोग विलास, नाते-रिश्ते आदि के बंधनों से मुक्त होकर निरंतर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहने के लिए जागृति का संदेश दे रही है।
कविता में 'अमरता सुत' संबोधन मानव के लिए आया है क्योंकि उसे अमर रहकर संसार के दुखों को समाप्त करना है। इसलिए कवयित्री उसे मृत्यु के भय को हृदय में नहीं बसाने के लिए कहती हैं तथा अमरता का पुत्र बनकर समस्त कठिनाइयों से जूझते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
इस कविता में संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली का प्रयोग किया गया है। बिम्बों और प्रतीकों की सुंदर योजना की गई है। प्रश्नात्मक शैली का प्रयोग किया गया है। 'जीवन-सुधा' में रूपक अलंकार, 'सो गई आंधी में' मानवीकरण अलंकार है।
Answer: महादेवी वर्मा की यह कविता साधना और देशभक्ति का अनूठा संदेश देती है जहाँ जीवन की हर चुनौती का सामना करने का आह्वान है।
In simple words: कठिनाइयों से डरे बिना अपने पथ पर निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी गई है।
Exam Tip: प्रतीकात्मक भाषा और ओजपूर्ण शैली को उत्तर में उल्लेखित करें।
अभ्यास कार्य
बौद्धिक प्रश्न:
Question 1. 'जाग तुझको दूर जाना' कविता में कवयित्री किसको सम्बोधित कर रही है?
Answer: कवयित्री सोए हुए मानव (साधक या देशवासी) को अपनी मंजिल पाने के लिए संबोधित कर रही है।
In simple words: कवयित्री मनुष्य या साधक को जगाने का प्रयास कर रही है।
Exam Tip: मानव या साधना पथ के पथिक को संबोधित किया गया है।
Question 2. 'जाग तुझको दूर जाना' कविता में कवयित्री मानव को किन विपरीत परिस्थितियों से आगे बढ़ने के लिए उत्साहित कर रही है?
Answer: आँधी, तूफान, बिजली की चमक, कठिनाइयों, मोह-माया और सुख-सुविधाओं जैसी विपरीत परिस्थितियों से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।
In simple words: सभी बाधाओं और तूफानों से बेपरवाह होकर आगे बढ़ने को कहा गया है।
Exam Tip: प्राकृतिक आपदाओं और सांसारिक मोह को बाधा बताया गया है।
Question 3. 'मोम के बंधन' और तितलियों के पर' का प्रयोग कवयित्री ने किस संदर्भ में किया है और क्यों?
Answer: इनका प्रयोग सांसारिक सुखों, प्रेम और मोह-माया के कोमल रिश्तों के संदर्भ में किया है जो लक्ष्य प्राप्ति के मार्ग में रुकावट बनते हैं।
In simple words: ये कोमल रिश्ते और ऐशो-आराम इंसान को उसकी मंजिल से भटका सकते हैं।
Exam Tip: दोनों प्रतीकों का अर्थ सांसारिक मोह और क्षणिक सुख है।
Question 4. कविता में 'अमरता-सुत' का संबोधन किसके लिए और क्यों आया है?
Answer: यह संबोधन मनुष्य के लिए आया है क्योंकि उसकी आत्मा अमर है और उसे अपनी अमरता के अनुरूप महान कार्य करने हैं।
In simple words: मनुष्य अमर आत्मा का अंश है, इसलिए उसे डरना नहीं चाहिए।
Exam Tip: अमरता का पुत्र होने का अर्थ महान और उच्च लक्ष्य रखना है।
Question 5. 'जाग तुझको दूर जाना' कविता की मूल संवेदना अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: जीवन के मार्ग में आने वाली हर बाधा, मोह और आराम को त्यागकर अपने महान लक्ष्य की ओर निरंतर और अडिग भाव से आगे बढ़ते रहना ही इस कविता की मूल संवेदना है।
In simple words: सभी कठिनाइयों को पार कर अपनी मंजिल तक पहुँचना ही कविता का संदेश है।
Exam Tip: निरंतरता और संघर्षशीलता इसकी मूल भावना है।
Question 6. 'नाश पथ पर अपने चिह्न छोड़ना' किसको संबोधित है?
Answer: यह उस साधक या कर्मवीर को संबोधित है जो विनाश और कठिनाइयों के बीच भी अपनी सफलता की महान छाप छोड़ता है।
In simple words: कठिन रास्तों पर भी अपनी बहादुरी के निशान छोड़ने की बात है।
Exam Tip: संघर्षशील जीवन का यह द्योतक है।
Question 7. 'तू न अपनी छांह को अपने लिए कारा बनाना' का क्या आशय है?
Answer: इसका आशय यह है कि अपनी ही असफलताओं, सीमाओं या स्वार्थों के दायरे में खुद को सीमित (कैद) न करो।
In simple words: अपनी कमजोरियों को अपने लिए जेल न बनने दो।
Exam Tip: संकीर्णता से ऊपर उठने का संदेश है।
व्याख्या: 'बाँध लेंगे क्या तुझे .................... उर में बसाना?'
'कह न ठंडी सांस में ............................. कलियाँ बिछाना!'
काव्य सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए: 'विश्व का क्रंदन ........................ अपने लिए कारा बनाना।'
कविता - 'सब आँखों के आँसू उजले'
मूल भाव: 'सब आँखों के आँसू उजले' में प्रकृति के उस स्वरूप की चर्चा हुई है जो सत्य है, यथार्थ है और जो लक्ष्य तक पहुँचने में मनुष्य की मदद करता है। जीवन की सच्चाई को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त किया है।
व्याख्या बिन्दु: कवयित्री ने 'आँसू' के लिए 'उजले' विशेषण का प्रयोग इसलिए किया है क्योंकि वे मन की सत्य भावनाओं के प्रतीक हैं। दुःख और सुख मिलने पर स्वयं ही मनुष्य की आँखों से छलछला आते हैं। सपनों को सच बनाने के लिए मनुष्य को जीवन में आने वाली कठिनाइयों, सुख-दुःखों का साहसपूर्वक सामना करना चाहिए। दीपक की भाँति जलने और फूल की तरह खिलना चाहिए।
'नीलम' का रंग नीला होता है। यहाँ कवयित्री ने इसे नीले आकाश के संदर्भ में प्रयुक्त किया है और 'मरकत' का आशय पन्ना है जिसके हरे रंग के कारण उसे हरी-भरी पृथ्वी के संदर्भ में प्रयुक्त किया गया है। आशय है कि नीले आकाश और हरी पृथ्वी के संपुट (फलक) के मध्य प्राणिियों के जीवन रूपी मोती का निर्माण होता है।
In simple words: कवयित्री ने आंसुओं की पवित्रता और प्रकृति के विभिन्न रूपों के माध्यम से जीवन के सत्य को प्रस्तुत किया है।
Exam Tip: 'उजले आँसू' और प्राकृतिक उपादानों के प्रतीकों को स्पष्ट करना न भूलें।
कवयित्री ने जीवन के सत्यों को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त किया है। कवयित्री ने प्रकृति के उपादानों के माध्यम से स्वप्न बुने हैं और इन स्वप्नों में सत्य को उद्घाटित किया है। फूलों में मकरंद भरना, सूर्य के प्रकाश से संसार को आलोकित करना, झरने का बहना, दीपक का जलकर सृष्टि को उजाला प्रदान करना तथा फूलों की सुगंध बिखेर कर संसार को सुगंध से भर देना प्रकृति के स्वप्न है जिन में सत्य निहित होता है।
झरने में अमृत की धारा बहती है और पानी से मोती निकलता है। इसी प्रकार व्यक्ति के हृदय से, आँखों से जो आँसू निकलते हैं वे मोती के समान पवित्र और चमकदार होते हैं।
कविता में वर्णात्मक शैली है, छायावादी प्रभाव स्पष्ट है। तत्सम और तद्भव शब्दों का प्रयोग है। पुनरुक्तिप्रकाश, उपमा और विरोधाभास अलंकारों का प्रयोग है। भाषा सरल, सहज और बोधगम्य है। लाक्षणिकता द्रष्टव्य है।
Answer: महादेवी वर्मा की यह कविता प्रकृति और मानवीय भावनाओं के गहरे जुड़ाव को उजागर करती है।
In simple words: सुख-दुख और आंसुओं के माध्यम से जीवन के सत्य को प्रकृति से जोड़ा गया है।
Exam Tip: प्रकृति के प्रतीकों और मानवीय संवेदनाओं का मेल समझें।
अभ्यास कार्य
व्याख्या: निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-
(क) 'आलोक लुटाता वह ....................... कब फूल जला'
(ख) 'नभ तारक-सा ......................... हीरक पिघला?'
काव्य सौन्दर्य स्पष्ट कीजिए: 'संसृति के प्रति पग में मेरी ...................... एकाकी प्राण चला'
बौद्धिक प्रश्न:
Question 1. महादेवी वर्मा ने 'आँसू के लिए उजले' विशेषण का प्रयोग किस संदर्भ में किया है और क्यों?
Answer: आँसू के लिए 'उजले' विशेषण का प्रयोग इसलिए किया गया है क्योंकि वे मन की सच्ची, पवित्र और निष्कपट भावनाओं के प्रतीक होते हैं।
In simple words: आँसू पवित्र और सच्चे हृदय की भावनाओं को दर्शाते हैं इसलिए उन्हें उजला कहा गया है।
Exam Tip: पवित्रता और सच्चाई उजले शब्द का मूल अर्थ है।
Question 2. सपनों को सत्यरूप में ढालने के लिए कवयित्री ने किन यथार्थपूर्ण स्थितियों का सामना करने को कहा है?
Answer: जीवन की कठिनाइयों, संघर्षों, सुख-दुख और विपरीत परिस्थितियों का साहसपूर्वक सामना करने को कहा है।
In simple words: सपनों को सच करने के लिए जीवन की कठिनाइयों से लड़ना पड़ता है।
Exam Tip: संघर्ष और यथार्थ का सामना करना जरूरी है।
Question 3. प्रकृति किस प्रकार मनुष्य को उसके लक्ष्य तक पहुँचाने में सहायक सिद्ध होती है?
Answer: प्रकृति अपने त्याग, निरंतरता, प्रकाश, सुगंध और झरने जैसी प्रेरणाओं से मनुष्य को अडिग रहने की सीख देती है।
In simple words: प्रकृति के कार्य हमें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
Exam Tip: प्रकृति की प्रेरणाओं को उत्तर में शामिल करें।
Question 4. 'सपने-सपने में सत्य ढला' पंक्ति के आधार पर कविता की मूल संवेदना अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: मनुष्य के कल्पनाशील सपने और जीवन के कठोर सत्य दोनों मिलकर ही उसके जीवन को सार्थक और सुंदर बनाते हैं।
In simple words: कल्पना और यथार्थ का मेल ही जीवन का वास्तविक सत्य है।
Exam Tip: स्वप्न और सत्य के समन्वय को समझाएं।
Question 5. 'निर्झर' 'क्षुर-धारा' और 'मोती' को महादेवी ने किस तरह आँसू से जोड़ा है?
Answer: जिस प्रकार झरने की धार और पानी से मोती निकलते हैं, उसी प्रकार मनुष्य के दुखों से छलके आँसू भी मोती जैसे पवित्र होते हैं।
In simple words: झरनों की धारा और मोतियों की तरह आँसू भी अमूल्य और पवित्र हैं।
Exam Tip: उपमा और रूपक के द्वारा आंसुओं की महिमा बताई गई है।
Question 6. 'सब आँखों के आँसू उजले' कविता के अन्त में कवयित्री क्या कामना करती है?
Answer: कवयित्री कामना करती है कि सभी के जीवन के दुःख और आँसू पवित्रता के साथ मानवता के कल्याण में लगें।
In simple words: सबके आँसू सच्चे और जीवन कल्याणकारी हों, यही कामना है।
Exam Tip: कल्याण की भावना कविता का अंत है।
Question 7. कवयित्री ने किसके माध्यम से जीवन की सच्चाई को प्रस्तुत किया है?
Answer: कवयित्री ने प्रकृति के विभिन्न उपादानों (फूल, तारे, झरने, दीपक आदि) के माध्यम से जीवन की सच्चाई को प्रस्तुत किया है।
In simple words: प्रकृति की चीजों के जरिए जीवन का सच बताया गया है।
Exam Tip: प्रकृति के माध्यम से दर्शन समझाना छायावाद की खूबी है।
पाठ-7
कवि: नरेंद्र शर्मा
कविता: नींद उचट जाती है
रचनाएँ: काव्य संग्रह- प्रभात फेरी, प्रवासी के गीत, पलाशावन, मिट्टी और फूल, हंसमाला, रक्तचंदन आदि हैं।
खंडकाव्य: द्रौपदी
काव्यगत विशेषताएँ:
इनका आगमन छायावादी कवि के रूप में हुआ और धीरे-धीरे प्रगतिशील रचनाओं की ओर मुड़ गए। नरेंद्र शर्मा मूलतः गीतकार हैं। प्रगतिवादी चेतना से प्रभावित होने के कारण राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहे। इनकी भाषा सरल एवं प्रवाहपूर्ण है। संगीतात्मकता और स्पष्टता उनके गीतों की विशेषता है। कविता में तत्सम, तद्भव, देशज तथा अरबी, फारसी सभी प्रकार के शब्दों का प्रयोग सहजता के साथ हुआ है। गीतिका, हरिगीतिका प्रिय छंद रहे। जनमानस की भाषा का प्रयोग किया है। प्रिय अलंकार-उपमा, रूपक, अन्योक्ति, उत्प्रेक्षा, मानवीकरण।
मूल भाव: कविता में एक ऐसी लंबी रात का वर्णन किया है जिसमें कवि को डरावने सपने आते हैं तथा रात समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है। कवि को प्रकाश की कोई किरण भी नहीं दिखाई दे रही है। यह अँधेरा दो स्तरों पर है-व्यक्ति के स्तर पर स्वप्न और निराशा का है, समाज के स्तर पर विकास, चेतना और जागृति के न होने का अँधेरा है। कवि जागरण के द्वारा इन दोनों अँधेरों को दूर करने और प्रकाश लाने की बात करता है। सामाजिक व्यवस्था, कुरीतियों के कारण कवि के अंतरمن में बेचैनी है। इनके काव्य में वैयक्तिकतना तथा निराशा का स्वर है। कवि व्यक्तिगत जीवन की निराशा तथा सामाजिक जीवन के यथार्थ की विषमताओं के अंधकार से जूझता नजर आता है。
व्याख्या बिन्दु:
1. कवि ने भीतर के डरावने सपनों से अधिक भयानक, समाज में व्याप्त कुव्यवस्था एवं कुरीतियों को माना है। संसार में خوشحالی (खुशहाली) कब होगी यही सोचकर कवि का मन बेचैन है।
2. अंदर का भय कवि की चेतना पर इस कदर हावी है कि बाहर सुनहरी भोर होने पर भी वह उससे मुक्त नहीं हो पाता और उसकी मनःस्थिति निराशापूर्ण बनी रहती है।
In simple words: इस कविता में कवि ने व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर व्याप्त निराशा, अंधकार और बेचैनी का बहुत ही सुंदर व यथार्थ चित्रण किया है।
Exam Tip: व्यक्तिगत निराशा और सामाजिक चेतना के द्वंद्व को उत्तर का मुख्य बिंदु बनाएं।
3. सांसारिक दुःखों के कारण कवि सो नहीं पाते। कवि को आशा है कि सुबह का प्रकाश न केवल कवि के दुःख को बल्कि सांसारिक दुःखों को भी समाप्त कर देगा।
4. समाज में चेतना और जागृति न पाकर, व्यवस्था परिवर्तन में असमर्थ अर्थात् परिवर्तन न कर सकने से व्याकुल होकर कवि चेतन से जड़ होने की बात कहता है।
5. संसार में विषमता रूपी अंधकार की परतें इतनी जटिल हो गयी है कि उसे दूर करने की आशा रूपी ज्योति पृथ्वी का चक्कर लगाती बेबस घूम रही है वह चाहकर भी उस निराशाরূপी अंधकार में प्रवेश नहीं कर पा रही।
6. कवि का मानना है कि रात भर करवटें बदलने के कारण जब नींद खराब हो जाती है, वे आँखे खोलना चाहते हैं। आँखे खोलने पर सांसारिक दुःख उनकी आँखों के सामने चक्कर काटने लगते हैं। इसलिए कवि कहते हैं मेरे अंतर्यननों के आगे से शिला न तम की हट पाती है।
7. बाहर के डरावने अंधेरे को देखकर कवि की आँखें दुःखाने लगती हैं। गहरे और सुनसान अँधेरे में कुत्ते के भौंकने की और गीदड़ की डरावनी की आवाज़ से रात अधिक भयानक लगती है। सुख के क्षण दूर होते चले जाने के कारण इन्हीं सुखी क्षणों की ओर अधिक प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
8. कवि का 'जागृति' से अभिप्राय सामाजिक चेतना, से है। 'अनिद्रा' से आशय व्याकुल मनः स्थिति के कारण नींद न आना तथा 'भव-निशा अँधेरी' से अभिप्राय संसार में व्याप्त निराशा, भय एवं आशंका की अंधियारी रात से है।
9. सामाजिक व्यवस्था के कारण कवि के अंतरمن में बेचैनी है। कविता में तत्सम एवम् तद्भव शब्दों का मिश्रण है।
10. गेय एवं लयात्मकता है
11. भाषा सरल, सुबोध एवम् प्रवाहमयी है।
Answer: नरेंद्र शर्मा की यह कविता आंतरिक और बाह्य दोनों प्रकार के अंधकार से मुक्ति पाने के छटपटाहट को दर्शाती है।
In simple words: सामाजिक और व्यक्तिगत दुखों के कारण नींद न आने की पीड़ा को कविता में उकेरा गया है।
Exam Tip: 'अनिद्रा' और 'जागृति' के प्रतीकात्मक अर्थ को जरूर समझाएं।
अभ्यास कार्य
व्याख्या:
निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-
(क) जब-तब नींद उचट जाती है ............................ आने की आहट आती है।
(ख) करवट नहीं बदलता है तम ......................... आस रात भटकाती है。
(ग) जागृति नहीं अनिद्रा तेरी .............................. शिला न तम की हट पाती है
बौद्धिक प्रश्न:
Question 1. कविता के आधार पर बताइए की कवि की दृष्टि में बाहर का अँधेरा भीतरी दु:स्वप्नों से अधिक भयावाह क्यों है?
Answer: बाहर का अँधेरा समाज की वास्तविक कुव्यवस्था, असमानता और अचेतना का प्रतीक है, जो केवल सपनों का नहीं बल्कि जीवन का कड़वा सच है।
In simple words: सामाजिक बुराइयों का यह वास्तविक अंधकार सपनों से भी ज्यादा खतरनाक है।
Exam Tip: सामाजिक यथार्थ और व्यक्तिगत स्वप्न का अंतर स्पष्ट करें।
Question 2. बाहर के अँधेरे को देखकर कवि की क्या दशा होती है?
Answer: बाहर के असीम और डरावने अंधकार को देखकर कवि की आँखें दुखने लगती हैं और उसका मन गहरी निराशा से भर जाता है।
In simple words: बाहर का अंधकार देखकर कवि की आँखें और मन दोनों व्यथित हो जाते हैं।
Exam Tip: मानसिक पीड़ा को दर्शाएं।
Question 3. नींद उचट जाने पर कवि की मनोदशा का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।
Answer: नींद उचट जाने पर कवि का मन बेचैन हो जाता है, वह बार-बार करवटें बदलता है और उसे समाज की चिंता सताने लगती है।
In simple words: नींद टूटने पर कवि को चिंता और बेचैनी घेर लेती है।
Exam Tip: अनिद्रा और बेचैनी की स्थिति को समझाएं।
Question 4. कवि को रात-भर कौन-सी आशा भटकाती है?
Answer: सुबह होने और उजाला आने की झूठी या धुंधली आशा कवि को पूरी रात भटकाती रहती है।
In simple words: सवेरा होने की उम्मीद कवि को पूरी रात जगाए रखती है।
Exam Tip: सवेरे की आस और निराशा के चक्र को बताएं।
Question 5. कवि चेतन से फिर जड़ होने की बात क्यों कहता है?
Answer: समाज में चेतना जगाने में असमर्थ रहने और लगातार मिल रही निराशा के कारण कवि का मन अकर्मण्य या जड़ होने की बात सोचता है।
In simple words: समाज को न बदल पाने की लाचारी से कवि निराश हो जाता है।
Exam Tip: सामाजिक निराशा इसका प्रमुख कारण है।
Question 6. अंधकार भरी धरती पर ज्योति चकपफेरी क्यों देती है?
Answer: आशा और प्रकाश की किरण इस उम्मीद में चारों तरफ चक्कर लगाती है कि शायद कहीं तो इस अंधकार का अंत हो सके।
In simple words: उजाले की किरण अंधकार को मिटाने के लिए बेबस होकर चक्कर लगाती है।
Exam Tip: प्रकाश की लाचारी को दर्शाया गया है।
Question 7. 'अंतर्यननों के आगे से शिला न तम की हट पाती है।' 'तम की शिला' से कवि का क्या तात्पर्य है?
Answer: 'तम की शिला' से तात्पर्य समाज और जीवन में जमी हुई गहरी, अचल और कठोर निराशा तथा अज्ञान के अंधकार से है।
In simple words: बहुत गहरी और न हटने वाली निराशा रूपी चट्टान।
Exam Tip: रूपक अलंकार के रूप में 'तम की शिला' का अर्थ समझें।
Question 8. जागृति, अनिद्रा और भव-निशा अँधेरी से कवि का सामाजिक संदर्भों में क्या अभिप्राय है?
Answer: जागृति का अर्थ सामाजिक चेतना, अनिद्रा का अर्थ बेचैनी और भव-निशा अँधेरी का अर्थ संसार में व्याप्त भयंकर निराशा और अज्ञान है।
In simple words: ये सभी शब्द समाज की चेतना, बेचैनी और अंधकार के प्रतीक हैं।
Exam Tip: प्रतीकों के सामाजिक अर्थ स्पष्ट करें।
Question 9. अन्दर का भय कवि के नयनों को सुनहली भोर का अनुभव क्यों नहीं होने दे रहा है?
Answer: क्योंकि कवि के मन पर सामाजिक और व्यक्तिगत दुखों का साया इतना गहरा है कि बाहर उजाला होने पर भी उसे अंधेरा ही दिखाई देता है।
In simple words: मन का दुख और डर उजाले को भी महसूस नहीं होने देता।
Exam Tip: मानसिक स्थिति की उदासी को स्पष्ट करें।
Question 10. सन्नाटा कब गहरा हो जाता है?
Answer: जब रात के समय कुत्ते भौंकते हैं और गीदड़ रोते हैं, तब सूनेपन और निराशा के कारण सन्नाटा और अधिक गहरा हो जाता है।
In simple words: रात की डरावनी आवाज़ों से सन्नाटा और भयानक हो जाता है।
Exam Tip: परिवेशीय ध्वनियाँ भय बढ़ाती हैं।
Question 11. फिर सोने और गहरी निद्रा में खोने की बात क्यों कही गई है?
Answer: समाज की विसंगतियों को न बदल पाने की विवशता और लगातार संघर्ष करने से थक जाने के कारण गहरी नींद में जाने की बात कही गई है।
In simple words: संघर्ष करके थक जाने के बाद विश्राम या हार मान लेने की स्थिति है।
Exam Tip: अत्यधिक मानसिक थकान इसका कारण है।
पाठ-8 बादलों को घिरते देखा है
कवि: नागार्जुन (छायावादोत्तर के प्रगतिशील कवि)
रचनाएँ: काव्य संग्रह - युगधारा, प्यासी पथराई आँखें, सतरंगे पंखों वाली, तालाब की मछलियाँ, हज़ार-हज़ार बाहों वाली, तुमने कहा था आदि।
उपन्यास: बलचनमा, रतिनाथ की चाची, कुंभीपाक, उग्रतारा आदि।
काव्यगत विशेषताएँ:
इनका वास्तविक नाम वैद्यनाथ मिश्र था। नागार्जुन मूलतः जन-भावनाओं के कवि हैं। फक्कड़पन और घुमक्कड़जी उनके जीवन की प्रमुख विशेषता है। राजनीतिक, सामाजिक वातावरण उनकी कविता का मूल स्वर है। इनकी कविताज़ों में धारदार व्यंग्य मिलता है। छंदबद्ध और छंदमुक्त दोनों प्रकार की कविताएँ रची। बाद की उनकी भाषा अधिक संस्कृतनिष्ठ है। पूर्ववर्ती काव्य में भाषा का बहुत सरल और सहज रूप मिलता है।
मूल भाव: 'बादलों को घिरते देखा है' में प्रकृति के साथ-साथ जन-जीवन का सुन्दर चित्रण हुआ है। कैलाश पर्वत पर जाकर कवि ने सारे घटनाक्रम को अपनी आँखों से देखा है। कविता में उन्होंने बादल के कोमल और कठोर दोनों रूपों का वर्णन किया है। जिसमें हिमालय की बर्फीली घाटियों, झीलों, झरनों तथा देवदार के जंगलों के साथ-साथ किन्नर-किन्नरियों के जीवन का यथार्थ चित्रण है।
व्याख्या बिन्दु:
'बादलों को घिरते देखा है' कविता में कवि ने स्वयं कैलाश पर्वत पर जाकर इन सभी प्राकृतिक दृश्यों को अपनी आँखों से देखा है। कवि ने झीलों में तैरते हंसो, शैवालों की हरी घास पर प्रणय-क्रीड़ा करते चकवा चकवी, अपनी सुगन्ध के स्रोत को खोजते कस्तूरी मृग, कैलाश शीर्ष पर गरजकर भिड़ते बादलों और किन्नर-किन्नरियों के जीवन का यथार्थ चित्रण किया है। सफेद चोटियों का वर्णन किया है। स्वच्छ, निर्मल, बर्फ की सफेद चादर से ढकी चोटियों पर बादल को घिरते देखा है। चकवा-चकवी को रातभर अलग रहने के कारण दुःखी और सुबह होते ही पुनर्मिलन के कारण मानसरोवर में विचरण करते एक-दूसरे के साथ छेड़छाड़ और प्यार भरी क्रीड़ाएँ करते देखा है। कस्तूरी मृग अपनी ही नाभि से आने वाली उन्मादक सुगन्ध के स्रोत को खोजने के लिए दुर्गम घाटियों में इधर-उधर दौड़ता फिरता है परन्तु उसे खोजने में असफल होकर स्वयं पर चिढ़ता है।
In simple words: नागार्जुन ने कैलाश पर्वत और हिमालय की वादियों में प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य और जीवों की गतिविधियों का सजीव वर्णन किया है।
Exam Tip: प्रकृति के कोमल और कठोर दोनों रूपों तथा नागार्जुन की घुमक्कड़ी प्रवृत्ति का उल्लेख करें।
कैलाश पर्वत पर बरसते बादलों को देखकर कवि को कालिदास रचित ग्रन्थ 'मेघदूत' में वर्णित उस मेघ की स्मृति हो आती है जिसे अपना दूत बनाकर यक्ष ने अपनी पत्नी के पास भेजा था। कवि उस मेघदूत का प्रत्यक्ष देखना चाहता है परन्तु असफल रहता है। अतः वह उसे कालिदास की कल्पना कहकर संतोष कर लेता है। कैलाश पर्वत पर शीतऋतु में घनघोर बरसते बादलों को देखा है। बादलों को बरसते देखकर कालिदास को याद करते हैं। कालिदास 'मेघदूत' में वर्षा का पानी तेज वेग से आकाश में घूमने लगता है लेकिन कवि को कालिदास का 'मेघदूत' कहीं भी दिखाई नहीं देता। कवि उसे कल्पना कहकर छोड़ने की बात करते हैं। 'बादलों को घिरते देखा है' बार-बार दोहराए जाने का कारण है कि कवि ने इस कविता में जितने भी दृश्य चित्र बनाए हैं उन सब में बादल को घिरते दिखाया गया है। हिमालय की ऊँची सफेद चोटियों पर मानसरोवर और अन्य झीलों में पावल, शीत, ग्रीष्म और बसंत ऋतु, किन्नर जाति के वर्णन में बादल घिर आते हैं। कविता में वर्णनात्मक, चित्रात्मक शैली का प्रयोग किया है। तत्सम और तद्भव शब्दावली है। संस्कृतानिष्ठ शब्दावली, भाषा सहज, सरल, सुन्दर एवं प्रसंगानुकूल है।
Answer: कवि ने हिमालय के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ वहाँ के जीव-जंतुओं और पौराणिक संदर्भों को बहुत सुंदरता से जोड़ा है।
In simple words: बादलों के घिरने के दृश्यों के माध्यम से प्रकृति के विविध रूपों का सुंदर वर्णन किया गया है।
Exam Tip: कालिदास के 'मेघदूत' और कैलाश पर्वत के प्रसंग को जरूर लिखें।
अभ्यास कार्य
व्याख्या:
(क) छोटे-छोटे मोती जैसे ................................. कमलों पर गिरते देखा है।
(ख) दुर्गम बर्फानी घाटी में ................................. अपने पर चिढ़ते देखा है।
(ग) ढूँढ़ा बहुत परन्तु लगा क्या ........................ गरज गरज भिड़ते देखा है।
आशय स्पष्ट कीजिए:
अलख नाभि से उठने वाले .............................
मैंने तो भीषण जाड़ों में ..................................
बौद्धिक प्रश्न:
Question 1. 'बादलों को घिरते देखा है' कविता में बादलों के सौंदर्य चित्रण के अतिरिक्त अन्य किन दृश्यों का चित्रण किया गया है?
Answer: मानसरोवर में तैरते हंस, चकवा-चकवी का प्रेम, कस्तूरी मृग की बेचैनी, देवदार के वन और किन्नर-किन्नरियों के जीवन का चित्रण किया गया है।
In simple words: झीलों, पक्षियों, मृग और पर्वतीय जीवन के सुंदर दृश्यों का वर्णन है।
Exam Tip: प्रकृति के विविध उपादानों की सूची दें।
Question 2. प्रणय-कलह से कवि का क्या तात्पर्य है?
Answer: प्रणय-कलह से तात्पर्य प्रेमी-प्रेमिका या चकवा-चकवी के बीच होने वाली प्रेमभरी नोकझोंक और रूठने-माने की क्रीड़ा से है।
In simple words: प्रेम में होने वाली छोटी-मोटी खट्टी-मीठी नोकझोंक।
Exam Tip: चकवा-चकवी के संदर्भ में इसे समझें।
Question 3. कस्तूरी मृग के अपने पर ही चिढ़ने के क्या कारण है?
Answer: कस्तूरी मृग अपनी ही नाभि से आने वाली सुगंध के स्रोत को बाहर तलाशता है और न मिलने पर स्वयं पर ही झुंझलाता है।
In simple words: कस्तूरी की खुशबू खुद उसके अंदर होती है, पर वह उसे बाहर ढूंढता है।
Exam Tip: कस्तूरी मृग की पौराणिक और प्राकृतिक विशेषता।
Question 4. बादलों का वर्णन करते हुए कालिदास की याद क्यों आती है? कालिदास के मेघदूत का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
Answer: क्योंकि कालिदास ने भी अपने ग्रंथ 'मेघदूत' में इसी प्रकार के बादलों और हिमालयी सौंदर्य का अद्भुत वर्णन किया है। 'मेघदूत' में यक्ष द्वारा मेघ को दूत बनाकर अपनी पत्नी के पास भेजने की कथा है।
In simple words: कालिदास ने भी मेघदूत में हिमालय और बादलों का सुंदर वर्णन किया है।
Exam Tip: 'मेघदूत' महाकवि कालिदास का प्रसिद्ध खंडकाव्य है।
Question 5. कविता में वर्णित प्रकृति चित्रण एवं जन जीवन को अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: कवि ने हिमालय की बर्फीली वादियों, वहाँ के पक्षियों, वन्य जीवों और किन्नर समाज के सुख-दुख भरे जीवन का बहुत ही जीवंत चित्रण किया है।
In simple words: पर्वतीय प्रकृति और वहाँ रहने वाले लोगों के जीवन का सजीव वर्णन किया गया है।
Exam Tip: प्रकृति और मानव जीवन का परस्पर संबंध दर्शाएं।
Question 6. कवि ने 'महामेघ को झांफनिल से गरज-गरज भिड़ते देखा है' क्यों कहा है?
Answer: कैलाश पर्वत की ऊँची चोटियों पर जब विशाल बादल आपस में टकराते हैं, तो उनका वह गर्जना भरा रूप बहुत भयानक और सुंदर होता है।
In simple words: पर्वतों पर बादलों के आपस में टकराने और गरजने का दृश्य बहुत भव्य होता है।
Exam Tip: बादलों के टकरवाने की भयंकरता को स्पष्ट करें।
Question 7. कवि ने पावल और शरदकाल में बादलों के जिन विशेष रूपों का वर्णन किया है, उन्हें अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: वर्षा ऋतु में बादल बरसकर उमंग जगाते हैं, तो शरदकाल या शीतकाल में वे बर्फ से ढकी चोटियों पर गरजते और घिरते हैं।
In simple words: अलग-अलग ऋतुओं में बादलों के बरसने और घिरने के सुंदर रूप दिखाए गए हैं।
Exam Tip: ऋतुओं के अनुसार बादलों की स्थिति बदलती है।
Question 8. 'बादलों को घिरते देखा है'- पंक्ति को बार-बार दोहराए जाने से कविता में क्या सौंदर्य आया है? अपने शब्दों में लिखिए।
Answer: इस पंक्ति के बार-बार आने से कविता में एक लय, संगीतात्मकता और केंद्रीय भाव से जुड़ाव बना रहता है जो हर दृश्य को आपस में जोड़ता है।
In simple words: यह पंक्ति कविता को एक सूत्र में पिरोती है और इसका मुख्य आकर्षण बढ़ाती है।
Exam Tip: आवृति से उत्पन्न लय और प्रभाव को समझाएं।
Question 9. 'बादलों को घिरते देखा है' कविता के आधार पर नागार्जुन की भाषा-शैली पर प्रकाश डालिए।
Answer: नागार्जुन की भाषा सहज, सरल, संस्कृतनिष्ठ और चित्रात्मक है। उनकी शैली वर्णनात्मक और दृश्यों को आँखों के सामने साकार करने वाली है।
In simple words: भाषा बहुत सरल और चित्रोपयोगी है जो दृश्य को जीवंत कर देती है।
Exam Tip: चित्रात्मकता और सहजता भाषा की मुख्य विशेषता है।
पाठ-9 हस्तक्षेप
कवि: श्रीकांत वर्मा (नयी कविता)
रचनाएँ: काव्य संग्रह- भटका मेघ, दिनारंभ, मयंकदर्पण, जलसा घर, मघ।
कहानी संग्रह- झाड़ी संवाद
उपन्यास- दूसरी बार
आलोचना- जिरह,
यात्रावृत्तांत-अपोलो का रथ
काव्यगत विशेषताएँ:
कवि का साहित्यिक जीवन एक पत्रकार के रूप में शुरू हुआ। तुलसी पुरस्कार, आचार्य नंद दुलारे वाजपेयी पुरस्कार और शिखर सम्मान से सम्मानित किया गया। इनकी कविता में एक आक्रोश है जो व्यक्तिगत न होकर जन-आक्रोश है। वही कविता की ताकत भी है। यही नहीं उन्होंने कविता को एक जीवंत भाषा दी जिसका मूल स्रोत आम जनता की बोली में है।
श्रीकांत वर्मा की भाषा जनमानस की है। भाषा में सरल और तद्भव शब्दों की भरमार है। कम शब्दों में अधिक संकेत देना उनकी विशेषता है। चित्रात्मकता, संवादात्मकता और नाटकीयता उनकी भाषा की अन्य विशेषताएँ हैं। भाषा शैली सरल, सहज एवं प्रभावशाली है। कविताओं में शासक वर्ग की तानाशाही और अत्याचारों का वर्णन है।
मूल भाव: कवि ने हस्तक्षेप कविता में आम व्यक्ति को गलत निर्णयों के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया है। कवि आम जनता का आह्वान करते हुए कहते हैं कि सत्तासीन लोगों द्वारा लिये गलत निर्णयों के विरुद्ध आवाज उठानी चाहिए। कवि ने जनतंत्र में स्थापित गलत परंपराओं पर व्यंग्य किया है।
व्याख्या बिन्दु:
'हस्तक्षेप' कविता में सत्ता की क्रूरता और उसके कारण पैदा होने वाले प्रतिरोध को दिखाया गया है। व्यवस्था को जनतांत्रिक बनाने के लिए हस्तक्षेप की जरूरत होती है वरना व्यवस्था निरंकुश हो जाएगी।
In simple words: यह कविता सत्ता की निरंकुशता के खिलाफ आम आदमी को चुप न बैठने और व्यवस्था में 'हस्तक्षेप' करने की प्रेरणा देती है।
Exam Tip: लोकतंत्र में नागरिक की सक्रियता और हस्तक्षेप के महत्व को रेखांकित करें।
जनतांत्रिक व्यवस्था में तानाशाही और गलत निर्णयों के कारण आम आदमी दुःखी एवं पीड़ित है। नेताओं द्वारा आम आदमी को गुमराह किया जाता है कि वह उनकी सत्ता के विरोध में एक शब्द भी न कहें, गलत निर्णयों को भी स्वीकार करें। सत्ताधारी ऐश्वर्यपूर्ण जीवन जीते हैं। इस व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए कवि कहते हैं कि मगध को बनाए रखना है, तो मगध में शांति रहनी ही चाहिए।
मुर्दा व्यक्ति से तात्पर्य शोषित व्यक्ति जिसका सब कुछ लुट चुका है। उसके पास अब खोने के लिए कुछ नहीं है। ऐसे व्यक्ति का कोई क्या बिगाड़ सकेगा। वह डर भय से बहुत दूर जा चुका है। जीवित व्यक्ति तंत्र में हस्तक्षेप करने का साहस नहीं कर पाता क्योंकि उसे अपनी मृत्यु तथा सुख सुविधाएँ छिन जाने का भय रहता है। मुर्दा अव्यवस्था में हस्तक्षेप करता है। यह प्रश्न आम आदमी से कहता है कि जब मैं इस अव्यवस्था के खिलाफ खड़ा हो सकता हूँ तो तुम क्यों नहीं? मुर्दा जन-जागृति का भी कार्य करता है।
शान्ति किसी भी व्यवस्था को कायम रखने के लिए बुनियादी शर्त है। अतः सत्ता पक्ष शांति-व्यवस्था बिगड़ने का भय दिखाकर जनता को हस्तक्षेप से रोकता है।
मगध के लोगों में इस बात का डर है कि टोकने का रिवाज न बन जाए। टोकने वालों की संख्या में वृद्धि होने से शासन तंत्र को नुकसान हो जाएगा। चीख पुकार करने वाले को राष्ट्रद्रोही समझ कर दण्डित किया जाता है। लाक्षणिक प्रयोगों का स्पष्टीकरण
(क) 'कोई छींकता तक नहीं'-'छींक' जैसी प्राकृतिक क्रिया भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंधित है।
(ख) 'कोई चीखता तक नहीं' - निरंकुश शासक वर्ग के विरुद्ध कोई भी व्यक्ति आवाज़ नहीं उठा सकता। अपना आक्रोश व्यक्त नहीं कर सकता।
(ग) 'कोई टोकता तक नहीं' - व्यवस्था की कमियों का विरोध करने के लिए मगध का कोई भी मनुष्य हस्तक्षेप करने का साहस नहीं जुटा पाता।
Answer: सत्ता की मनमानी और आम जनता की चुप्पी पर यह कविता एक जोरदार राजनीतिक व्यंग्य है।
In simple words: तानाशाही व्यवस्था में लोगों के डर और चुप रहने की प्रवृत्ति पर करारा प्रहार किया गया है।
Exam Tip: 'मगध' को तानाशाही सत्ता का प्रतीक माना गया है, इसे स्पष्ट करें।
अभ्यास कार्य
व्याख्या:
(क) मगध को बनाए रखना है, तो ............................. मगध है, तो शांति है।
(घ) तुम बच नहीं सकते ................................. मनुष्य क्यों मरता है।
(ग) कोई चीखता तक नहीं ................................ क्या कहेंगे लोग?
निम्नलिखित लाक्षणिक प्रयोगों को स्पष्ट कीजिए-
(क) कोई छींकता तक नहीं
(ख) कोई चीखता तक नहीं
(ग) कोई टोकता तक नहीं।
बौद्धिक प्रश्न:
Question 1. मगध के माध्यम से 'हस्तक्षेप' कविता किस व्यवस्था की ओर इशारा कर रही है?
Answer: मगध के माध्यम से यह कविता तानाशाही, निरंकुश और जनता के दमन पर आधारित राजनीतिक व्यवस्था की ओर इशारा कर रही है।
In simple words: मगध तानाशाही और दमनकारी शासन व्यवस्था का प्रतीक है।
Exam Tip: मगध को प्रतीकात्मक रूप में समझें।
Question 2. 'मगध को बनाए रखना है, तो मगध में शांति रहनी ही चाहिए' भाव स्पष्ट कीजिए।
Answer: इसका आशय है कि शासक वर्ग अपनी तानाशाही सत्ता को बचाए रखने के लिए जनता की हर आवाज और विरोध को शांति के नाम पर दबा देता है।
In simple words: सत्ता अपनी कुर्सी बचाने के लिए जनता को चुप रखना चाहती है।
Exam Tip: शांति के नाम पर होने वाले दमन को स्पष्ट करें।
Question 3. मुर्दा शब्द का प्रयोग किसके लिए हुआ है?
Answer: 'मुर्दा' शब्द का प्रयोग उस शोषित, भयमुक्त और विवश व्यक्ति के लिए हुआ है जिसने अन्याय के आगे सब कुछ सह लिया है और अब वह किसी से नहीं डरता।
In simple words: डरों से मुक्त हो चुके शोषित व्यक्ति को 'मुर्दा' कहा गया है।
Exam Tip: प्रतीकात्मक अर्थ को समझें।
Question 4. मुर्दें का हस्तक्षेप क्या प्रश्न खड़ा करता है?
Answer: मुर्दे का हस्तक्षेप यह प्रश्न खड़ा करता है कि जब एक सब कुछ खो चुका व्यक्ति अन्याय के खिलाफ बोल सकता है, तो जीवित और समझदार लोग क्यों चुप बैठे हैं?
In simple words: मुर्दा पूछता है कि जब मैं बोल सकता हूँ, तो जीवित लोग क्यों चुप हैं?
Exam Tip: कविता का यह सबसे महत्वपूर्ण वैचारिक बिंदु है।
Question 5. मगध निवासी हस्तक्षेप से क्यों कतराते हैं?
Answer: मगध निवासी अपनी जान, माल, सुख-सुविधाओं और शासन के दंड के भय से व्यवस्था में हस्तक्षेप करने से कतराते हैं।
In simple words: डर और सजा मिलने के भय से लोग कुछ नहीं बोलते।
Exam Tip: भय और आतंक शासन का हथियार है।
Question 6. मगध के लोगों में किस बात का डर है?
Answer: मगध के लोगों में इस बात का डर है कि यदि उन्होंने व्यवस्था को टोका या सवाल उठाया, तो उन्हें राष्ट्रद्रोही घोषित कर दंडित किया जाएगा।
In simple words: सरकार के खिलाफ बोलने पर सजा मिलने का डर लोगों में है।
Exam Tip: विरोध करने पर मिलने वाली सजा का भय।
Question 7. मगध की निरंकुश शासन व्यवस्था में कोई चीख-पुकार क्यों नहीं कर सकता?
Answer: क्योंकि निरंकुश शासन ने विरोध के हर स्वर, चीख और यहाँ तक कि सामान्य प्रतिक्रियाओं तक पर प्रतिबंध लगा रखा है।
In simple words: कड़े पहरे और दमन के कारण कोई आवाज नहीं उठा सकता।
Exam Tip: दमनकारी नीतियों का परिणाम है।
Question 8. 'मगध अब कहने को मगध है, रहने को नहीं' के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
Answer: कवि कहना चाहता है कि अब वहाँ मानवीय स्वतंत्रता, न्याय और जीवन जीने का उचित वातावरण समाप्त हो चुका है, केवल नाममात्र की व्यवस्था बची है।
In simple words: अब वहाँ इंसानियत से जीने की जगह नहीं बची है, केवल तानाशाही बची है।
Exam Tip: व्यवस्था के खोखलेपन को यह पंक्ति दर्शाती है।
Question 9. 'हस्तक्षेप कविता सत्ता की क्रूरता और उसके कारण पैदा होने वाले प्रतिरोध की कविता है' स्पष्ट कीजिए।
Answer: कविता दिखाती है कि कैसे शासक वर्ग क्रूरता से जनता को दबाता है, और फिर उसी दमन के बीच से जनता का विरोध या हस्तक्षेप जन्म लेता है।
In simple words: सत्ता के अत्याचार और उसके खिलाफ उठने वाली आवाज की कहानी है यह कविता।
Exam Tip: अत्याचार और प्रतिरोध का द्वंद्व मुख्य विषय है।
पाठ-10 घर में वापसी
कवि: सुदामा पांडेय 'धूमिल' (प्रगतिवादी-प्रयोगवादी)
रचनाएँ: काव्य संग्रह- संसद से सड़क तक, कल सुनना मुझे तथा सुदामा पांडेय का प्रजातंत्र आदि।
इनकी अनेक रचनाएँ समकालीन पत्र-पत्रिकाओं में बिखरी पड़ी है जिनका संकलन कार्य अभी नहीं हो पा रहा है। इनकी अनेक रचनाएँ अभी तक अप्रकाशित है। मरणोपरांत इन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
काव्यगत विशेषताएँ:
प्रगतिवादी-प्रयोगवादी कवि धूमिल ग्रामीण वातावरण के कवि हैं। इनके काव्य में समसामयिक जीवन की झलक, व्यंग्य, ग्रामीण संस्कारों से युक्त, नारी जाति के प्रति कोमल भाव हैं। इन्होंने अपने काव्य में मुहावरे, लोकोक्तियों और सूक्तियों का सुन्दर प्रयोग किया है। संवादात्मक शैली का प्रयोग करके भाषा में जान फूँक दी है। लाक्षणिकता एवं प्रतीकात्मकता, मुक्त छंदों का प्रयोग किया है। भाषा सहज, सरल एवं भावपूर्ण है।
मूल भाव: 'घर में वापसी' कविता धूमिल जी की गरीबी से लड़ रहे परिवार की करुण, कथा है। इसमें कवि ने स्पष्ट किया है कि गरीबी एक अभिशाप है। यह सारे रिश्ते-नातों के बीच एक दीवार खड़ी कर देती है। एक ही परिवार में रहने वाले लोग आपस में अनबन बन जाते हैं। एक साथ रहते हुए भी अपना दुःख प्रकट नहीं करते। रिश्ते होते हुए भी खुलते नहीं। कितना अच्छा होता यदि ये रिश्ते मधुर बन जाते।
व्याख्या बिन्दु:
1. कविता में एक ऐसे घर की कामना है जहाँ गरीबी दीवार की तरह बाधक न हो। माँ-पिता, बेटी, पत्नी के बीच स्नेहपूर्ण संबंध ताकि जीवन-संघर्ष में घर का सुख प्राप्त हो सकें।
2. कवि मानता है कि वास्तव में वे स्वजन हैं, पर वे बहुत गरीब हैं अभावग्रस्त हैं। गरीबी के कारण पारिवारिक बिखराव आ गया है। जिस कारण अपने दुःख-सुख को एक दूसरे के सामने कह नहीं पाते। गरीबी के कारण संबंध होकर भी नहीं है।
In simple words: धूमिल की यह कविता गरीबी के कारण परिवारों में टूटते रिश्तों और संवादहीनता का बहुत ही यथार्थ चित्रण करती है।
Exam Tip: गरीबी और संवादहीनता को पारिवारिक टूटन का मुख्य कारण बताया गया है।
3. कवि परिवार के सदस्यों को सदस्य न मानकर पाँच जोड़ी आँखें इसलिए मानता है क्योंकि गरीबी के कारण वे पाँचों आपस में खुलकर बातें नहीं करते। उनमें ममता, प्यार और अपनापन की भावना खत्म हो चुकी है। एक-दूसरे को देखते तो हैं लेकिन प्रेम भाव की कमी होती है।
5. 'पत्नी की आँखें, आँखें नहीं हाथ हैं, जो मुझे थामे हैं' से कवि का अभिप्राय है कि उसकी पत्नी मुसीबत के समय उसे बहुत सहारा देती है। हमेशा उत्साहित करती है। कुछ न होने पर भी निराश नहीं होने देती। कवि अपनी पत्नी से प्रेरित होकर गरीबी से लड़ रहा है।
6. रिश्तों के न खुलने का कारण है निर्धनता। परिवार के सदस्यों में निर्धनता के कारण मानसिक तनाव है। वे खुलकर बातें नहीं कर पाते। गरीबी रिश्तों की मधुरता को समाप्त कर देती है। गरीबी के तनाव के कारण सभी के मुँह अलग-अलग दिशाओं में हैं।
7. कवि ऐसे घर की इच्छा करता है जिसमें गरीबी और अभाव के कारण बिखराव न हो। पारिवारिक संबंधों में टूटन न हो और न ही दिखावा हो। घर के सभी सदस्य प्रेम-भावना से रहते हुए दुःख दर्द को एक-दूसरे के सामने प्रकट कर सकें।
(क) कवि ने माँ की आँखों को तीर्थयात्रा की बस के दो पंचर पहिए कहा है। 'पड़ाव' शब्द का प्रयोग प्रतीकात्मक है, यह मृत्यु का प्रतीक है। 'दो पंचर पहिए' प्रतीकार्थ है ज्योतिहीन दो आँखें। 'पंचर पहिए' में अनुप्रास अलंकार है।
(ख) कवि ने पिता की आँखों को लोहसाँय की ठंडी सलाखें बताया है। प्रतीक रूप में प्रयुक्त किया है। यौवनावस्था में पिता तेजस्वी और रौबदार रहे होंगे पर बुढ़ापे और गरीबी ने उनके तेज को उनसे छीन लिया है। भाषा सहज, सरल, भावपूर्ण है। लाक्षणिकता एवं प्रतीकार्तकता विद्यमान है। मुक्त छंद हैं।
Answer: धूमिल की कविता घर के भीतर गरीबी के कारण उत्पन्न हुए अजनबीपन और संवादहीनता के दर्द को बखूबी बयान करती है।
In simple words: गरीबी कैसे अपनों के बीच भी दूरी पैदा कर देती है, यही इस कविता का सार है।
Exam Tip: माँ की आँखें और पिता की आँखों के प्रतीकों (पंचर पहिए और ठंडी सलाखें) को जरूर समझाएं।
अभ्यास कार्य
व्याख्या कार्य:
'वैसे हम स्वजन हैं, क्योंकि हम पेशेवर गरीब हैं'
'रिश्ते हैं, लेकिन खुलते नहीं हैं ...................... यह मेरा घर है।'
निम्नलिखित का काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए:-
(क) माँ की आँखें पड़ाव से पहले ही तीर्थयात्रा की बस में दो पंचर पहिए हैं।
(ख) पिता की आँखें लोहसांय की ठंडी सलाखें हैं।
बौद्धिक प्रश्न:
Question 1. 'घर में वापसी' कविता का मूल भाव क्या है?
Answer: गरीबी और आर्थिक अभाव के कारण परिवार के सदस्यों के बीच पनपी संवादहीनता, अजनबीपन और टूटे हुए रिश्तों का दर्द इस कविता का मूल भाव है।
In simple words: गरीबी की वजह से परिवार में रिश्तों का टूटना और अपनापन खत्म होना इसका मूल भाव है।
Exam Tip: गरीबी और पारिवारिक अलगाव मुख्य विषय है।
Question 2. कवि किस प्रकार के घर में वापसी की इच्छा करता है?
Answer: कवि ऐसे घर में वापसी चाहता है जहाँ गरीबी की दीवार न हो, जहाँ अपनों के बीच संवाद हो, प्रेम हो और आत्मीयता हो।
In simple words: कवि ऐसे घर की कामना करता है जहाँ प्रेम और अपनेपन की मिठास हो।
Exam Tip: आदर्श और आत्मीय पारिवारिक माहौल की चाह।
Question 3. घर एक परिवार है, परिवार में पाँच सदस्य हैं किन्तु कवि पाँच सदस्य नहीं उन्हें पाँच जोड़ी आँखें मानता है, क्यों?
Answer: क्योंकि गरीबी और तनाव के कारण वे लोग आपस में बात नहीं करते, केवल एक-दूसरे को चुपचाप देखते रहते हैं, इसलिए वे परिवार न होकर केवल अलग-अलग आँखें हैं।
In simple words: बातचीत बंद होने के कारण वे परिवार न रहकर बस अलग-अलग लोग बनकर रह गए हैं।
Exam Tip: संवादहीनता को रेखांकित करने वाला सुंदर प्रतीक है।
Question 4. परिवार के सदस्य घर में रहते हुए भी करीब नहीं हैं। क्यों?
Answer: लगातार बनी रहने वाली गरीबी, मानसिक तनाव और चिंताओं के कारण परिवार के सदस्यों के बीच भावनात्मक दूरी आ गई है।
In simple words: गरीबी और तनाव के कारण अपनों के बीच दूरियाँ आ गई हैं।
Exam Tip: आर्थिक संकट का मनोवैज्ञानिक प्रभाव।
Question 5. कवि के सामने ऐसी कौन सी विवशता है जो पारिवारिक रिश्तों की मधुरता को समाप्त कर देती है?
Answer: भुखमरी और गरीबी की विवशता ऐसी है जो इंसान की सारी संवेदनाओं और रिश्तों की मिठास को खत्म कर देती है।
In simple words: गरीबी और पेट भरने की चिंता सारे रिश्ते फीके कर देती है।
Exam Tip: रोजी-रोटी का संघर्ष रिश्तों पर भारी पड़ता है।
Question 6. 'पत्नी की आँखे आँखें नहीं हाथ हैं जो मुझे थामे हैं।' से कवि का क्या अभिप्राय है?
Answer: इसका अभिप्राय यह है कि उसकी पत्नी ही इस मुश्किल जीवन-संघर्ष में उसे नैतिक संबल और सहारा देती है।
In simple words: पत्नी ही इस संघर्ष भरे जीवन में कवि का सबसे बड़ा सहारा है।
Exam Tip: पत्नी के संबल रूपी रूपक को समझाएं।
Question 7. कवि ने 'भुन्ना-सी ताला' किसे कहा है? उसे तोड़ने का क्या उपाय बताया है?
Answer: यह रिश्तों में पड़े अजनबीपन और संवादहीनता के ताले की ओर संकेत है, जिसे आपसी प्रेम, संवाद और गरीबी दूर करके ही तोड़ा जा सकता है।
In simple words: रिश्तों के बीच के सन्नाटे को बातचीत और प्यार से ही तोड़ा जा सकता है।
Exam Tip: मौन और संवादहीनता को तोड़ने की बात की गई है।
Question 8. पारिवारिक रिश्तों के न खुलने का क्या कारण है?
Answer: पारिवारिक रिश्तों के न खुलने का मुख्य कारण निरंतर गरीबी और उससे उपजा हुआ मानसिक तनाव है।
In simple words: गरीबी और तनाव के कारण रिश्ते खिल नहीं पाते।
Exam Tip: गरीबी और कुंठा मुख्य कारण हैं।
पूरक पुस्तक अंतराल भाग - 1
पाठ्यक्रम में पूरक पुस्तक को इसलिए समाहित किया जाता है ताकि छात्र की भाषिक तथा साहित्यिक रूचियों का विकास हो सके।
कक्षा 11 में हिन्दी (ऐच्छिक) के अंतर्गत पूरक पुस्तक के रूप में 'अंतराल' हमारे समक्ष है। इस पुस्तक को साहित्य की तीन विधाओं से अलंकृत किया गया है। एकांकी, आत्मकथा एवं जीवनी। पुस्तक प्रारंभ करने पूर्व हमें एकांकी, आत्मकथा एवं जीवनी के अर्थ को समझाना होगा।
Answer: यह परिचय ग्यारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पूरक पाठ्यपुस्तक 'अंतराल' के उद्देश्य और उसमें संकलित गद्य विधाओं (एकांकी, आत्मकथा, जीवनी) से परिचित कराने के लिए है।
In simple words: यह पृष्ठ अंतराल पुस्तक के पाठ्यक्रम में शामिल होने के उद्देश्य और उसकी गद्य विधाओं की जानकारी देता है।
Exam Tip: पूरक पुस्तक से गद्य विधाओं पर आधारित प्रश्न पूछे जा सकते हैं, अतः इनकी परिभाषा तैयार रखें।
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