NCERT Solutions Class 12 History Chapter 11 Mahatma Gandhi and the Nationalist Movement (महात्मा गांधी और राष्ट्रीय आंदोलन) in Hindi

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 12 History Chapter 11 महात्मा गांधी और राष्ट्रीय आंदोलन

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Question 1: महात्मा गांधी ने खुद को आम लोगों जैसा दिखने के लिए क्या किया?

Answer:

महात्मा गांधी ने आम लोगों से जुड़ने और उनके साथ समानता स्थापित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उन्होंने आम लोगों की तरह वस्त्र धारण किए और अपना जीवन जन-सेवा के कार्यों में समर्पित कर दिया।
गांधी जी ने महंगे विदेशी वस्त्रों का त्याग कर केवल खादी की लंगोट और चादर पहनना शुरू किया। वे नियमित रूप से हाथ से सूत कातने के लिए चरखा चलाते थे ताकि वे श्रम के महत्व को दर्शा सकें।
वे हमेशा आम बोलचाल की भाषा (हिन्दी-हिन्दुस्तानी) का प्रयोग करते थे। 1921 में दक्षिण भारत की यात्रा के दौरान उन्होंने अपने सिर के बाल मुंडवा लिए और सिर्फ एक सूती वस्त्र पहनने लगे ताकि वे गरीबों के साथ पूरी तरह एकरूप हो सकें।
जनसामान्य के प्रति गांधी जी का दृष्टिकोण बेहद सहानुभूतिपूर्ण था, जिससे वे समाज के हर वर्ग के बीच घुल-मिल जाते थे।

मुख्य बिंदु:

• खादी के वस्त्र पहनना और चरखा चलाना।
• आम बोलचाल की भाषा का प्रयोग करना।
• साधारण जीवनशैली अपनाकर गरीबों से जुड़ना।
• जनसामान्य के प्रति अत्यधिक सहानुभूति रखना।

आम गलतियाँ:

• केवल वस्त्र बदलने की बात लिखना, जबकि भाषा और रहन-सहन का प्रभाव भी महत्वपूर्ण था।
• चरखे के महत्व और श्रम के प्रति दृष्टिकोण को न समझाना।
• तिथियों या घटनाओं का गलत उल्लेख करना।

Exam Tips:

a) गांधी जी के सादे जीवन और पहनावे के बदलाव को स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।
b) 'स्वदेशी' और 'खादी' के प्रयोग पर विशेष बल दें।
c) उत्तर को प्रभावशाली बनाने के लिए उनके दक्षिण भारत की यात्रा के प्रसंग का उल्लेख अवश्य करें।

 

Question 2: किसान महात्मा गांधी को किस तरह देखते थे?

Answer:

किसान महात्मा गांधी को अपना मसीहा और उद्धारकर्ता मानते थे। वे उन्हें 'महात्मा' कहकर पुकारते थे और उनमें चमत्कारी शक्तियां होने का विश्वास करते थे। किसानों के मन में यह धारणा थी कि गांधी जी को ब्रिटिश शासकों ने उनकी कठिनाइयों को दूर करने के लिए भेजा है और उनके पास इतनी शक्ति है कि वे सभी अधिकारियों के आदेशों को अस्वीकार कर सकते हैं।
गांधी जी से जुड़ी कई तरह की लोक-कथाएँ और अफवाहें फैल गई थीं कि यदि कोई व्यक्ति गांधी जी की आलोचना करेगा तो उसके घर में आपदा आ जाएगी या उसकी फसल नष्ट हो जाएगी।
किसान यह मानते थे कि गांधी जी उनकी भारी लगान और करों से रक्षा करेंगे तथा उन्हें जमींदारों के शोषण से मुक्ति दिलाकर उनकी स्वायत्तता वापस दिलवाएंगे।

मुख्य बिंदु:

• किसानों द्वारा गांधी जी को मसीहा मानना।
• गांधी जी की चमत्कारी शक्तियों और लोक-कथाओं का प्रसार।
• किसानों की रक्षा करने वाले के रूप में उनकी छवि।
• जमींदारों और ब्रिटिश शासन से मुक्ति की उम्मीद।

आम गलतियाँ:

• केवल राजनीतिक नेता के रूप में देखना और किसानों की धार्मिक/चमत्कारी मान्यताओं को नजरअंदाज करना।
• अफवाहों के नकारात्मक पहलुओं को ही लिखना, सकारात्मक उम्मीदों को छोड़ देना।
• उत्तर को अत्यधिक संक्षिप्त लिखना।

Exam Tips:

a) किसानों की भावनाओं और 'मसीहा' छवि को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
b) अफवाहों की भूमिका का उल्लेख करें जो किसानों को गोलबंद करने में सहायक थीं।
c) उत्तर में 'उद्धारकर्ता' और 'स्वायत्तता' जैसे शब्दों का उचित प्रयोग करें।

 

Question 3: नमक कानून स्वतंत्रता संघर्ष का महत्वपूर्ण मुद्दा क्यों बन गया था?

Answer:

नमक कानून स्वतंत्रता संघर्ष का एक केंद्रीय मुद्दा इसलिए बन गया क्योंकि नमक प्रत्येक भारतीय के दैनिक जीवन की मूलभूत आवश्यकता था। ब्रिटिश सरकार ने नमक उत्पादन पर अपना एकाधिकार स्थापित कर रखा था और इसे बनाना गैर-कानूनी घोषित कर दिया था, जिससे लोगों को ऊंचे दामों पर विदेशी या सरकारी नमक खरीदना पड़ता था।
नमक पर कर लगाने के इस निर्णय को भारतीयों ने अन्यायपूर्ण माना क्योंकि यह प्रकृति की देन था जिस पर हर व्यक्ति का अधिकार होना चाहिए।
गांधी जी ने औपनिवेशिक शासन के विरोध के प्रतीक के रूप में नमक को चुना क्योंकि यह अमीर और गरीब दोनों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण था।
नमक आंदोलन ने पूरे देश को एकजुट कर दिया और इसने ब्रिटिश शासन के सबसे घृणित कानूनों में से एक के खिलाफ व्यापक जन-आंदोलन का रूप ले लिया।

मुख्य बिंदु:

• नमक का हर घर की बुनियादी जरूरत होना।
• ब्रिटिश सरकार का नमक उत्पादन पर एकाधिकार और भारी कर लगाना।
• गांधी जी द्वारा इसे औपनिवेशिक विरोध का प्रतीक बनाना।
• समाज के सभी वर्गों (अमीर-गरीब) को एकजुट करना।

आम गलतियाँ:

• केवल नमक कानून टूटने की बात लिखना, उसके आर्थिक और सामाजिक प्रभावों को न बताना।
• नमक को अन्य करों की तरह सामान्य कर मान लेना।
• दांडी यात्रा के मुख्य उद्देश्य को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) 'एकाधिकार' और 'बुनियादी आवश्यकता' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें।
b) समझाइए कि कैसे एक साधारण वस्तु ने राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले लिया।
c) उत्तर में ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों के अन्यायपूर्ण स्वरूप को उजागर करें।

 

Question 4: राष्ट्रीय आंदोलन के अध्ययन के लिए अखबार महत्वपूर्ण स्रोत क्यों हैं?

Answer:

राष्ट्रीय आंदोलन के अध्ययन के लिए अखबार अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत हैं क्योंकि इनसे उस समय की घटनाओं, गतिविधियों और विचारों की सजीव जानकारी मिलती है।
अखबारों में राष्ट्रीय आंदोलन के नेताओं के भाषणों, प्रस्तावों और अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों का विस्तृत विवरण छपता था।
अखबारों के माध्यम से यह भी पता चलता है कि आम जनता और राष्ट्रवादी नेता क्या सोच रहे थे, क्योंकि इसमें जनता की प्रतिक्रियाएं भी प्रकाशित होती थीं।
इसके अलावा, ब्रिटिश अधिकारी अखबारों पर कड़ी नजर रखते थे, जिससे हमें सरकार के दृष्टिकोण और उनकी चिंताओं की भी जानकारी मिलती है।

मुख्य बिंदु:

• समकालीन घटनाओं और गतिविधियों की विस्तृत जानकारी।
• नेताओं के भाषणों और जनता की प्रतिक्रियाओं का प्रकाशन।
• ब्रिटिश प्रशासन की नजर और नीतियों का पता चलना।
• राष्ट्रीय चेतना के प्रसार में प्रेस की भूमिका।

आम गलतियाँ:

• अखबारों को केवल सूचना का साधन मानना, ऐतिहासिक विश्लेषण का स्रोत न समझना।
• सरकारी और गैर-सरकारी अखबारों के अंतर को स्पष्ट न करना।
• संक्षिप्त उत्तर लिखना और मुख्य बिंदुओं को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) स्रोत के रूप में अखबारों के महत्व को तार्किक रूप से समझाएं।
b) यह बताएं कि अखबारों से जनता और सरकार दोनों पक्षों के विचार कैसे सामने आते थे।
c) उत्तर में इतिहासकारों द्वारा इन स्रोतों के उपयोग का जिक्र करें।

 

Question 5: चरखे को राष्ट्रवाद का प्रतीक क्यों चुना गया?

Answer:

चरखे को राष्ट्रवाद का प्रतीक इसलिए चुना गया क्योंकि यह स्वदेशी और आर्थिक स्वावलंबन का सबसे बड़ा प्रतीक था। गांधी जी चाहते थे कि लोग मशीनरी और विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता छोड़कर अपने हाथों से सूत कातकर कपड़े बनाएं।
चरखा ग्रामीण गरीबों को अतिरिक्त आय प्रदान करने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का माध्यम था।
पारंपरिक समाज में सूत कातने के काम को निम्न दृष्टि से देखा जाता था, लेकिन गांधी जी ने इसे श्रम की गरिमा से जोड़कर समाज में समानता का संदेश दिया।
इस प्रकार, चरखा केवल एक यंत्र नहीं बल्कि स्वतंत्रता, आत्मनिर्भरता और भारतीय समाज के पुनरुत्थान का प्रतीक बन गया।

मुख्य बिंदु:

• स्वदेशी और आर्थिक स्वावलंबन का प्रतीक।
• ग्रामीण गरीबों और बेरोजगारों को रोजगार व आय देना।
• शारीरिक श्रम की गरिमा को पुनर्जीवित करना।
• मशीनीकरण और विदेशी वस्तुओं का विरोध।

आम गलतियाँ:

• चरखे को केवल वस्त्र निर्माण का यंत्र मानना, उसके वैचारिक और आर्थिक महत्व को भूल जाना।
• गांधी जी के मशीनीकरण के दृष्टिकोण को गलत तरीके से प्रस्तुत करना।
• श्रम की गरिमा के बिंदु को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) 'स्वावलंबन' और 'श्रम की गरिमा' जैसे शब्दों का उत्तर में प्रयोग अवश्य करें।
b) स्पष्ट करें कि कैसे चरखे ने आम जनता को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ा।
c) खादी और चरखे के अंतर्संबंध को समझाएं।

 

Question 6: असहयोग आंदोलन एक तरह का प्रतिरोध कैसे था?

Answer:

असहयोग आंदोलन ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध एक बड़ा प्रतिरोध था, जिसकी शुरुआत महात्मा गांधी ने अगस्त 1920 में की थी। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य अंग्रेजों के अन्यायपूर्ण कानूनों और कार्यों का शांतिपूर्ण विरोध करना था।
इसके तहत विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में जाना बंद कर दिया, वकीलों ने अदालतों का बहिष्कार किया और जगह-जगह विदेशी वस्तुओं की होली जलाई गई।
लोगों ने कर चुकाने से मना कर दिया और ब्रिटिश उपाधियों तथा सम्मानों को वापस लौटा दिया।
यह आंदोलन ब्रिटिश शासन को यह जताने के लिए था कि भारतीय अब उनके साथ सहयोग नहीं करेंगे और अपनी स्वतंत्रता के लिए अहिंसक तरीके से संघर्ष करेंगे।

मुख्य बिंदु:

• ब्रिटिश शासन के साथ सहयोग न करने की नीति।

• सरकारी संस्थाओं, अदालतों और उपाधियों का त्याग।
• विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और स्वदेशी का अपनाना।
• अहिंसक तरीके से औपनिवेशिक सत्ता को चुनौती देना।

आम गलतियाँ:

• आंदोलन को केवल हिंसात्मक या नकारात्मक मान लेना।

• असहयोग के विभिन्न रूपों (जैसे वकीलों, छात्रों, किसानों की भूमिका) को स्पष्ट न करना।
• सही तिथियों और घटनाओं का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) असहयोग के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को समझाएं।

b) बताएं कि यह पहला अखिल भारतीय जन-आंदोलन था।
c) 'प्रतिरोध' शब्द के अर्थ को आंदोलन के क्रियान्वयन के साथ जोड़कर लिखें।

 

Question 7: गोलमेज सम्मेलन में हुई वार्ता से कोई नतीजा क्यों नहीं निकल पाया?

Answer:

लंदन में आयोजित गोलमेज सम्मेलनों से कोई ठोस नतीजा इसलिए नहीं निकल पाया क्योंकि वहां भाग लेने वाले विभिन्न प्रतिनिधि अपने-अपने व्यक्तिगत और सांप्रदायिक हितों से प्रेरित थे।
प्रथम गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया था, जिससे उसका कोई औचित्य नहीं रहा। द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया, लेकिन अंग्रेजों ने भारत की पूर्ण स्वतंत्रता की मांग को ठुकरा दिया।
इसके अलावा, सम्मेलन में भाग लेने वाले अन्य नेताओं (जैसे डॉ. बी.आर. अंबेडकर, मुस्लिम लीग के प्रतिनिधि आदि) ने अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों और सांप्रदायिक अधिकारों की मांग की, जिससे आपसी मतभेद और गहरे हो गए।
ब्रिटिश सरकार भी भारत को तुरंत सत्ता सौंपने के पक्ष में नहीं थी और वह फूट डालो और राज करो की नीति पर कायम रही।

मुख्य बिंदु:

• कांग्रेस का प्रथम सम्मेलन में अनुपस्थित रहना।
• अंग्रेजों द्वारा भारत की पूर्ण स्वतंत्रता की मांग को अस्वीकार करना।
• विभिन्न नेताओं के बीच सांप्रदायिक और सीटों के बंटवारे पर मतभेद।
• ब्रिटिश सरकार की असहयोगात्मक और फूट डालो नीति।

आम गलतियाँ:

• केवल गांधी जी की असफलता मान लेना, जबकि राजनीतिक और सांप्रदायिक कारण अधिक जिम्मेदार थे।
• तीनों सम्मेलनों की अलग-अलग स्थितियों को स्पष्ट न करना।
• डॉ. अंबेडकर और गांधी जी के बीच के मतभेदों को गलत संदर्भ में प्रस्तुत करना।

Exam Tips:

a) दूसरे गोलमेज सम्मेलन और गांधी-इरविन समझौते के संदर्भ को समझाइए।
b) सांप्रदायिक समस्या और अलग निर्वाचन की मांग के प्रभाव को स्पष्ट करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और तथ्यात्मक रखें।

 

Question 8: महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय आंदोलन के स्वरूप को किस तरह बदल डाला?

Answer:

महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय आंदोलन को केवल वकीलों और बुद्धिजीवियों के दायरे से निकालकर एक विशाल जन-आंदोलन में बदल दिया। उन्होंने आंदोलन में किसानों, मजदूरों, महिलाओं और समाज के पिछड़े वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की।
उन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए अहिंसा, सत्याग्रह और नैतिक बल को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया।
गांधी जी ने हिंदू-मुस्लिम एकता, छुआछूत का अंत और स्वदेशी के प्रसार को राष्ट्रीय एजेंडे का मुख्य हिस्सा बनाया।
उन्होंने असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन के माध्यम से ब्रिटिश साम्राज्य को उसकी जड़ों से हिला दिया और राष्ट्रीयता की भावना को गांव-गांव तक पहुंचाया।

मुख्य बिंदु:

• आंदोलन को जन-साधारण तक पहुंचाना (एलीट वर्ग से बाहर करना)।
• अहिंसा और सत्याग्रह को मुख्य हथियार बनाना।
• समाज सुधार (अस्पृश्यता निवारण, हिंदू-मुस्लिम एकता) को राष्ट्रवाद से जोड़ना।
• बड़े पैमाने पर जन-आंदोलनों (असहयोग, सविनय अवज्ञा, भारत छोड़ो) का संचालन।

आम गलतियाँ:

• केवल गांधी जी के व्यक्तिगत योगदान की चर्चा करना और जनता की भूमिका को भूल जाना।

• अहिंसा और सत्याग्रह के दर्शन को स्पष्ट न करना।
• कालक्रम (Chronology) का ध्यान न रखना।

Exam Tips:

a) गांधी जी के आगमन से पहले और बाद के राष्ट्रीय आंदोलन की तुलना करें।

b) 'जन-आधार' (Mass Base) शब्द का प्रयोग उत्तर में अवश्य करें।
c) उनके प्रमुख आंदोलनों के योगदान को क्रमानुसार दर्शाएं।

 

Question 9: निजी पत्रों और आत्मकथाओं से किसी व्यक्ति के बारे में क्या पता चलता है? ये स्रोत सरकारी ब्यूरो से किस तरह भिन्न हैं?

Answer:

निजी पत्रों और आत्मकथाओं से किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत विचारों, भावनाओं, महत्वाकांक्षाओं, संघर्षों और उसकी निजी जीवनशैली की गहरी जानकारी मिलती है। निजी पत्रों से हमें यह पता चलता है कि व्यक्ति अपने मित्रों, परिजनों या सहयोगियों से किस प्रकार संवाद करता था और उसके मन में क्या चल रहा था।
ये स्रोत सरकारी ब्यूरो (रिपोर्ट्स और दस्तावेजों) से काफी भिन्न होते हैं क्योंकि सरकारी रिपोर्टें हमेशा प्रशासनिक और पुलिस के दृष्टिकोण से लिखी जाती थीं। उनमें जनता की वास्तविक भावनाओं और आंदोलनों के भीतर के कारणों को अक्सर छुपा दिया जाता था या उनके प्रति पूर्वाग्रह रखा जाता था।
इसके विपरीत, आत्मकथाएं और निजी पत्र हमें अधिक आत्मपरक, संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण प्रदान करते हैं, हालांकि इनमें लेखक का अपना दृष्टिकोण भी प्रधान होता है।

मुख्य बिंदु:

• निजी पत्रों से व्यक्तिगत संबंधों और आंतरिक विचारों की जानकारी।
• आत्मकथाओं से जीवन के संघर्षों और अनुभवों का व्यक्तिगत दृष्टिकोण।
• सरकारी रिपोर्टों का औपचारिक और दमनकारी प्रशासनिक दृष्टिकोण होना।
• दोनों प्रकार के स्रोतों में उद्देश्य और विश्वसनीयता का अंतर।

आम गलतियाँ:

• निजी पत्रों को पूरी तरह निष्पक्ष मान लेना, जबकि उनमें भी व्यक्तिगत पूर्वाग्रह हो सकते हैं।
• सरकारी और निजी स्रोतों के अंतर को स्पष्ट रूप से न समझा पाना।

• केवल परिभाषा लिखकर छोड़ देना।

Exam Tips:

a) दोनों स्रोतों की विशेषताओं और सीमाओं (Limitations) को तुलनात्मक रूप से लिखें।
b) इतिहास लेखन में व्यक्तिगत स्रोतों के महत्व को समझाएं।
c) 'आत्मपरक' और 'वस्तुनिष्ठ' शब्दों का उचित प्रयोग करें।

 

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