NCERT Solutions Class 12 History Chapter 12 Framing the Constitution (संविधान का निर्माण) in Hindi

Official NCERT Solutions for Class 12 History: Chapter 12 संविधान का निर्माण

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Chapter-wise Solutions for History: Chapter 12 संविधान का निर्माण

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Question 1: उद्देश्य प्रस्ताव में किन आदर्शों पर जोर दिया गया था?

Answer:

13 दिसंबर 1946 को जवाहरलाल नेहरू ने संविधान सभा के सामने 'उद्देश्य प्रस्ताव' पेश किया था। इस प्रस्ताव में भारतीय संविधान के बुनियादी आदर्शों और उद्देश्यों को रेखांकित किया गया था।
इस प्रस्ताव के मुख्य आदर्श निम्नलिखित थे:
• भारत को एक स्वतंत्र, संप्रभु और लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करना।
• ब्रिटिश भारत के सभी क्षेत्रों, रियासतकों और बाहर के ऐसे क्षेत्रों को जो भारतीय संघ में शामिल होना चाहते हैं, मिलाकर एक संघ बनाना।
• नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, अवसर की समानता, कानून के समक्ष समता और विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास व कार्य की स्वतंत्रता प्रदान करना।
• अल्पसंख्यकों, पिछड़ी जातियों और जनजातीय क्षेत्रों के लिए पर्याप्त सुरक्षा और संरक्षण की व्यवस्था करना।
• विश्व शांति और मानवता के कल्याण में योगदान देना।

मुख्य बिंदु:

• पंडित नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था।
• इसमें संप्रभुता जनता में निहित होने की बात कही गई थी।
• नागरिकों के मौलिक अधिकारों और न्याय पर विशेष जोर दिया गया था।

आम गलतियाँ:

• केवल रियासतों के एकीकरण को ही उद्देश्य प्रस्ताव मान लेना।
• सामाजिक न्याय और आर्थिक न्याय के अंतर को स्पष्ट न करना।
• प्रस्ताव पेश करने वाले नेता का नाम गलत लिखना।

Exam Tips:

a) उद्देश्य प्रस्ताव की तिथि (13 दिसंबर 1946) और इसके प्रस्तोता का नाम अवश्य लिखें।
b) बिंदुओं के रूप में उत्तर लिखने से परीक्षक पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।
c) 'संप्रभु' और 'लोकतांत्रिक' शब्दों के अर्थ को संक्षेप में स्पष्ट करें।

 

Question 2: विभिन्न समूह 'अल्पसंख्यक' शब्द को किस तरह परिभाषित कर रहे थे?

Answer:

संविधान सभा में 'अल्पसंख्यक' शब्द की परिभाषा को लेकर विभिन्न समूहों और नेताओं के अलग-अलग दृष्टिकोण थे:
• कुछ मुस्लिम नेताओं का मानना था कि मुसलमानों को संख्या की दृष्टि से बहुसंख्यक हिंदुओं के अनुपात में बहुत कम होने के कारण अल्पसंख्यक माना जाए।
• कुछ सिख नेताओं ने सिखों को अल्पसंख्यक घोषित करने और विशेष सुविधाओं की मांग की।
• दलित नेताओं (जैसे बी. आर. अंबेडकर और जे. के. खांडेकर) का तर्क था कि दलितों को वास्तविक अल्पसंख्यक माना जाना चाहिए जिन्हें सदियों से दबाया-कुचला गया है।
• आदिवासी नेताओं (जैसे जयपाल सिंह) ने कहा कि आदिवासी समुदाय, जो अपनी संस्कृति और परंपराओं के साथ प्रकृति के करीब रहता है, उसे भी विशेष सुरक्षा की आवश्यकता है।
• एन. जी. रंगा जैसे नेताओं ने किसानों और मेहनतकश आम जनता को ही सबसे बड़ा अल्पसंख्यक और पीड़ित वर्ग बताया।

मुख्य बिंदु:

• अल्पसंख्यक की परिभाषा केवल धार्मिक आधार पर नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक आधार पर भी दी गई।
• दलितों और आदिवासियों ने अपनी ऐतिहासिक उपेक्षा को आधार बनाया।
• अलग निर्वाचन क्षेत्र की मांग पर लंबी बहस हुई।

आम गलतियाँ:

• अल्पसंख्यकों को केवल धार्मिक संदर्भ में सीमित कर देना।
• आदिवासी और दलित नेताओं के दृष्टिकोण को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) विभिन्न नेताओं (जयपाल सिंह, बी. आर. अंबेडकर, एन. जी. रंगा) के विचारों का उल्लेख अवश्य करें।
b) बहुसांस्कृतिक और बहुभाषी समाज के संदर्भ को समझाएं।
c) उत्तर को सारगर्भित और बिंदुवार प्रस्तुत करें।

 

Question 3: प्रांतों के लिए ज्यादा शक्तियों के पक्ष में क्या तर्क दिए गए?

Answer:

संविधान सभा में कुछ सदस्य प्रांतों को अधिक शक्तियां देने के पक्ष में थे ताकि वे स्थानीय विकास और प्रशासन को बेहतर ढंग से चला सकें। इसके समर्थन में निम्नलिखित तर्क दिए गए:
• देश का आकार बहुत बड़ा था और यहाँ की विविधता को देखते हुए केंद्रीयकृत शासन चलाना कठिन था।
• प्रांतों के पास अधिक शक्तियां होने से विकास कार्यों में तेजी आती और स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान होता।
• के. संथानम जैसे सदस्यों का तर्क था कि केंद्र के पास बहुत अधिक जिम्मेदारियां होने से वह बोझ तले दब जाएगा और प्रांतों के पास काम करने की स्वतंत्रता नहीं बचेगी।
• मैसूर के सदस्य ने दलील दी कि यदि प्रांतों को मजबूत नहीं किया गया, तो वे केंद्र के खिलाफ विद्रोह कर सकते हैं।

मुख्य बिंदु:

• देश की विशालता और विविधता के कारण प्रांतों की स्वायत्तता जरूरी मानी गई।
• अत्यधिक केंद्रीकरण से प्रशासनिक विफलता का डर था।
• के. संथानम ने प्रांतीय स्वायत्तता की जोरदार वकालत की।

आम गलतियाँ:

• केवल केंद्र के पक्ष को लिखना और प्रांतीय तर्कों को छोड़ देना।
• ऐतिहासिक संदर्भ को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) प्रांतीय शक्तियों के समर्थकों के नाम (जैसे के. संथानम) का उल्लेख करें।
b) केंद्रीयकरण बनाम विकेंद्रीकरण के तर्क को स्पष्ट रूप से समझाएं।
c) उत्तर में संतुलन बनाए रखें।

 

Question 4: महात्मा गांधी को ऐसा क्यों लगता था कि हिन्दुस्तानी राष्ट्रीय भाषा होनी चाहिए?

Answer:

महात्मा गांधी का मानना था कि हिन्दुस्तानी (हिंदी और उर्दू का मिला-जुला रूप) ही भारत की राष्ट्रीय भाषा बनने के सबसे उपयुक्त है क्योंकि:
• यह भाषा उत्तर और दक्षिण के लोगों के बीच संवाद का एक माध्यम बन सकती थी और विभिन्न समुदायों को जोड़ सकती थी।
• हिन्दुस्तानी आम जनता की बोलचाल की भाषा थी जिसे हिंदू और मुसलमान दोनों आसानी से समझ और बोल सकते थे।
• गांधी जी के अनुसार भाषा को किसी एक धर्म या वर्ग से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, बल्कि इसे बहुसंस्कृतिवाद का प्रतीक होना चाहिए।
• बाद में भाषा का राजनीतिकरण होने लगा और इसे संस्कृतनिष्ठ हिंदी या फारसीयुक्त उर्दू बनाने की होड़ शुरू हो गई, जिससे गांधी जी चिंतित थे।

मुख्य बिंदु:

• हिन्दुस्तानी हिंदी और उर्दू का एक सहज और लोकप्रिय मिश्रण थी।
• गांधी जी ने इसे राष्ट्रीय एकता का मुख्य आधार माना।
• भाषा के सांप्रदायिकरण का गांधी जी ने हमेशा विरोध किया।

आम गलतियाँ:

• हिन्दुस्तानी को केवल शुद्ध हिंदी मान लेना।
• गांधी जी के दृष्टिकोण को संप्रदाय विशेष से जोड़ना।

Exam Tips:

a) 'हिन्दुस्तानी' और 'संस्कृतनिष्ठ हिंदी' के अंतर को स्पष्ट करें।
b) राष्ट्रीय एकता में भाषा की भूमिका को रेखांकित करें।
c) उत्तर को तार्किक और सरल भाषा में लिखें।

 

Question 5: वे कौन-सी ऐतिहासिक ताकतें थीं जिन्होंने संविधान का स्वरूप तय किया?

Answer:

भारतीय संविधान का निर्माण केवल संविधान सभा के सदस्यों की दूरदर्शिता का परिणाम नहीं था, बल्कि इसके पीछे कई ऐतिहासिक ताकतें थीं:
• स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विकसित हुए लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी मूल्य।
• भारत सरकार अधिनियम 1935 (Government of India Act 1935) का व्यापक प्रभाव, जिसके प्रशासनिक ढांचे को बड़े पैमाने पर अपनाया गया।
• कैबिनेट मिशन योजना (1946) के प्रावधानों के अंतर्गत संविधान सभा का गठन होना।
• राष्ट्रीय आंदोलन की लंबी परंपरा, जिसमें समानता, स्वतंत्रता और न्याय के आदर्शों को गहराई से आत्मसात किया गया था।

मुख्य बिंदु:

• राष्ट्रीय आंदोलन के विचार संविधान की आत्मा बने।
• 1935 के अधिनियम से प्रशासनिक और कानूनी ढांचे की रूपरेखा मिली।
• कैबिनेट मिशन योजना के तहत सभा की चुनाव प्रक्रिया निर्धारित हुई।

आम गलतियाँ:

• केवल विदेशी अधिनियमों को संविधान का एकमात्र स्रोत मान लेना।
• राष्ट्रीय आंदोलन के योगदान की उपेक्षा करना।

Exam Tips:

a) 1935 के अधिनियम का उल्लेख करना न भूलें।
b) राष्ट्रीय आंदोलन के प्रभावों को बिंदुओं में समझाएं।
c) उत्तर में ऐतिहासिक निरंतरता को दिखाएं।

 

Question 6: दलित समूहों की सुरक्षा के पक्ष में गए विभिन्न दावों पर चर्चा कीजिए।

Answer:

संविधान निर्माण के दौरान दलितों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के संबंध में कई दावे और विचार रखे गए:
• डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने छुआछूत (अस्पृश्यता) के पूर्ण उन्मूलन और दलितों के लिए सरकारी नौकरियों व विधायिका में आरक्षण की पुरजोर वकालत की।
• मद्रास के जे. के. खांडेकर और अन्य नेताओं ने दलितों के लिए विशेष राजनीतिक अधिकारों की मांग की ताकि वे समाज में अपनी स्थिति सुधार सकें।
• कुछ नेताओं का मानना था कि केवल कानूनी उपायों से भेदभाव समाप्त नहीं होगा, बल्कि समाज की मानसिकता में बदलाव लाना होगा।
• अंततः संविधान में अस्पृश्यता को एक दण्डनीय अपराध घोषित किया गया और दलितों के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान किए गए।

मुख्य बिंदु:

• डॉ. अंबेडकर दलित अधिकारों के सबसे मुखर प्रवक्ता थे।
• अस्पृश्यता को समाप्त करना संविधान का एक प्रमुख लक्ष्य बना।
• राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर सुरक्षा की मांग की गई।

आम गलतियाँ:

• केवल आरक्षण को एकमात्र समाधान मान लेना।
• दलित नेताओं के योगदान को कम करके आंकना।

Exam Tips:

a) डॉ. बी. आर. अंबेडकर के विचारों का प्रमुखता से उल्लेख करें।
b) 'अस्पृश्यता का उन्मूलन' अनुच्छेद का संदर्भ दें।
c) उत्तर को संवेदनशीलता और तथ्यात्मक रूप से लिखें।

 

Question 7: संविधान सभा के कुछ सदस्यों ने उस समय की राजनीतिक परिस्थिति और एक मजबूत केंद्र सरकार की जरूरत के बीच क्या संबंध देखा?

Answer:

देश विभाजन की त्रासदी, सांप्रदायिक हिंसा और प्रशासनिक चुनौतियों को देखते हुए संविधान सभा के अधिकांश सदस्यों का मानना था कि एक शक्तिशाली केंद्र सरकार का होना देश की एकता और अखंडता के लिए अनिवार्य है:
• बी. आर. अंबेडकर और गोपालस्वामी आयंगर जैसे नेताओं ने तर्क दिया कि एक मजबूत केंद्र ही देश को आंतरिक शांति और बाहरी खतरों से सुरक्षित रख सकता है।
• देश के उस समय के हालात (जैसे दंगे, शरणार्थी समस्या और आर्थिक संकट) को देखते हुए कमजोर केंद्र देश को विघटन की ओर ले जा सकता था।
• प्रांतीय स्वायत्तता के समर्थक भी यह मानने लगे थे कि देश की एकता बनाए रखने के लिए केंद्र का मजबूत होना आवश्यक है।

मुख्य बिंदु:

• देश का विभाजन और दंगे मजबूत केंद्र की आवश्यकता के मुख्य कारण बने।
• बाहरी आक्रमण और आंतरिक अशांति से निपटने के लिए केंद्र को सर्वोपरि माना गया।
• अंबेडकर और आयंगर ने केंद्रीय शक्तियों का समर्थन किया।

आम गलतियाँ:

• प्रांतीय स्वायत्तता और मजबूत केंद्र के बीच के संतुलन को न समझ पाना।
• तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों की उपेक्षा करना।

Exam Tips:

a) विभाजन और शरणार्थी संकट जैसे कारकों का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) मजबूत केंद्र के पक्ष में दिए गए तर्कों को बिंदुवार लिखें।
c) संविधान निर्माताओं की दूरदर्शिता को दर्शाएं।

 

Question 8: संविधान सभा ने भाषा के विवाद को हल करने के लिए क्या रास्ता निकाला?

Answer:

भाषा के मुद्दे पर संविधान सभा में तीखी बहस हुई क्योंकि हिंदी के समर्थकों और विरोधियों के बीच मतभेद थे। अंततः एक मध्यम मार्ग (फॉर्मूला) निकाला गया जिसे 'मुंशी-अयंगर फॉर्मूला' कहा जाता है:
• इसके अनुसार, हिंदी (देवनागरी लिपि में) को भारत की 'राजभाषा' घोषित किया गया, न कि 'राष्ट्रभाषा'।
• यह तय किया गया कि शुरुआती 15 वर्षों तक सरकारी कार्यों में अंग्रेजी का प्रयोग जारी रहेगा।
• प्रत्येक प्रांत को अपने आधिकारिक कार्यों के लिए अपनी क्षेत्रीय भाषा चुनने का अधिकार दिया गया।
• इस प्रकार सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करते हुए एक व्यावहारिक समाधान निकाला गया ताकि देश में भाषाई आधार पर टकराव न हो।

मुख्य बिंदु:

• हिंदी को राष्ट्रभाषा के बजाय 'राजभाषा' का दर्जा दिया गया।
• अंग्रेजी के प्रयोग को 15 वर्षों के लिए बढ़ाया गया।
• प्रांतीय भाषाओं को पूर्ण सम्मान और स्वतंत्रता दी गई।

आम गलतियाँ:

• 'राजभाषा' और 'राष्ट्रभाषा' के अंतर को भ्रमित करना।
• 15 साल की संक्रमण काल की अवधि का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) मुंशी-अयंगर फॉर्मूले का स्पष्ट जिक्र करें।
b) देवनागरी लिपि और राजभाषा शब्दों का सही प्रयोग करें।
c) भाषाई विवाद के समाधान को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करें।

 

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