NCERT Solutions Class 12 History Chapter 10 Rebels and the Raj (विद्रोह और राज) in Hindi

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Question 1: बहुत सारे स्थानों पर विद्रोही सिपाहियों ने नेतृत्व संभालने के लिए पुराने शासकों से क्या आग्रह किया?

Answer:

बहुत सारे स्थानों पर विद्रोही सिपाहियों ने नेतृत्व संभालने के लिए पुराने शासकों से निम्नलिखित आग्रह किए:
• विद्रोही सिपाहियों ने पुराने शासकों से नेतृत्व संभालने के लिए आग्रह किया क्योंकि उन्हें युद्ध करने तथा शासन करने का काफी अनुभव था।
• वे जन आंदोलन को और सशक्त बनाना चाहते थे।
• सर्वप्रथम मेरठ के विद्रोही सिपाही दिल्ली गए तथा मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर से नेतृत्व का आग्रह किया।
• कानपुर में सिपाहियों तथा शहर के लोगों ने पेशवा बाजीराव द्वितीय के उत्तराधिकारी नाना साहब को विद्रोह संभालने के लिए विवश किया।
• अवध में नवाब वाजिद अली शाह जैसे प्रसिद्ध शासक को गद्दी से हटा देने तथा उनके राज्य पर अधिकार करने की यादें लोगों के मन में अभी भी जिंदा थीं। अतः लखनऊ में ब्रिटिश सत्ता के दहन के समाचार पर लोगों ने नवाब के युवा पुत्र बिरजिस को अपना नेता घोषित किया।
• जनसाधारण को अपने पुराने शासकों से बहुत लगाव था। अतः उन्हें लगा कि ब्रिटिश शासकों ने अनुचित रूप से उन्हें उनकी सत्ता से हटा दिया था। ऐसे शासकों के नेतृत्व में उनका विद्रोह अधिक लोकप्रिय तथा शक्तिशाली बन सकता था।

मुख्य बिंदु:

• पुराने शासकों के अनुभव का लाभ उठाना
• जनता का पुराने राजाओं के प्रति भावनात्मक जुड़ाव
• विद्रोह को वैधता और व्यापक समर्थन दिलाना

आम गलतियाँ:

• केवल एक ही शासक का उल्लेख करना
• सिपाहियों के मुख्य उद्देश्य को न समझना
• ऐतिहासिक तथ्यों को संक्षिप्त रूप में गलत लिखना

Exam Tips:

a) विभिन्न क्षेत्रों के उदाहरण दें जैसे दिल्ली, कानपुर और लखनऊ।
b) मुख्य बिंदुओं को बुलेट पॉइंट्स में स्पष्ट रूप से लिखें।
c) नवाब वाजिद अली शाह और बिरजिस कादिर का संदर्भ अवश्य दें।

 

Question 2: उन साक्ष्यों के बारे में चर्चा कीजिए जिनसे पता चलता है कि विद्रोही योजनाबद्ध और समन्वित ढंग से काम कर रहे थे?

Answer:

विद्रोहियों के योजनाबद्ध और समन्वित ढंग से काम करने के कई साक्ष्य हैं:
• विद्रोह के सुनिश्चित होने के विषय में इतिहासकार चार्ल्स बॉल लिखते हैं कि सिपाहियों की पंचायतें कानपुर सिपाही लाइन में जुटती थीं तथा कुछ निश्चित फैसले लिए जाते थे।
• विद्रोह के समय अवध मिलिट्री पुलिस के कैप्टन हियर्स की सुरक्षा का दायित्व भारतीय सिपाहियों पर था। जहाँ कैप्टन हियर्स तैनात था वहीं 41 वीं नेटिव इन्फैंट्री भी तैनात थी। इन्फैंट्री का विचार था कि क्योंकि वे अपने सभी गोरे अफसरों को खत्म कर चुके थे इसलिए अवध मिलिट्री का यह दायित्व है कि या तो वे हियर्स की हत्या कर दें या फिर उसे गिरफ्तार कर लें।
• वास्तव में सिपाही लाइनों में रहते थे तथा सभी की जीवन-शैली एक समान थी। इसके अतिरिक्त उनमें से अधिकांश सिपाही एक ही जाति के होते थे।

मुख्य बिंदु:

• सिपाहियों की पंचायतें और सामूहिक निर्णय
• सैन्य इकाइयों के बीच आपसी समन्वय
• एक जैसी जीवनशैली और सामाजिक पृष्ठभूमि

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि विद्रोह पूरी तरह से अचानक और बिना योजना के था
• चार्ल्स बॉल के साक्ष्य को नजरअंदाज करना
• जातिगत और समान पृष्ठभूमि के प्रभाव को न लिखना

Exam Tips:

a) चार्ल्स बॉल के संदर्भ का उल्लेख जरूर करें।
b) अवध मिलिट्री पुलिस और इन्फैंट्री के तालमेल को स्पष्ट करें।
c) समन्वित कार्रवाई के ठोस उदाहरण दें।

 

Question 3: 1857 के घटनाक्रम को निर्धारित करने में धार्मिक विश्वासों की किस हद तक भूमिका थी?

Answer:

1857 के घटनाक्रम को निर्धारित करने में धार्मिक विश्वासों ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:
• बैरकपुर छावनियों की एक घटना ऐसी थी जिसका संबंध गाय तथा सुअर की चर्बी वाले कारतूसों से था। जब मेरठ छावनियों में अंग्रेज अधिकारियों ने भारतीय सैनिकों को चर्बी वाले कारतूस मुँह से खोलने के लिए विवश किया। तब मेरठ के सिपाहियों ने सभी अंग्रेज अधिकारियों को मार दिया। हिंदू तथा मुसलमान सभी सैनिक अपने धर्म को भ्रष्ट होने से बचाने के विचार के साथ दिल्ली आ गए।
• लार्ड विलियम बैंटिक ने एक नियम पास किया जिसके अनुसार ईसाई धर्म को अपनाने पर ही हिंदू पिता की संपत्ति पर पुत्र को अधिकार मिल सकता था।
• कई स्थानों पर विद्रोह का संदेश आम लोगों के द्वारा तथा धार्मिक लोगों के द्वारा ही फैलाया गया।
• अंग्रेजों का उद्देश्य भारत में धर्म प्रचार करना नहीं था बल्कि धन प्राप्त करना था परंतु व्यापारियों के साथ धर्म प्रचारक भी भारत आए। धर्मप्रचारकों ई ईसाई बनने वाले व्यक्तियों को पद प्रदान करने में प्राथमिकता मिलती थी।

मुख्य बिंदु:

• चर्बी वाले कारतूसों की घटना
• धार्मिक स्वतंत्रता पर अंग्रेजों का हस्तक्षेप
• ईसाई मिशनरियों की गतिविधियाँ और कानून

आम गलतियाँ:

• धार्मिक कारणों को केवल एक अफवाह तक सीमित मान लेना
• लॉर्ड विलियम बैंटिक के सामाजिक-धार्मिक सुधारों का गलत उल्लेख करना
• सैनिकों के असंतोष के मूल कारणों को छोड़ देना

Exam Tips:

a) चर्बी वाले कारतूस की घटना का विस्तृत विवरण दें।
b) धार्मिक रूपांतरण से जुड़े कानूनों का जिक्र करें।
c) उत्तर लिखते समय धर्म और राजनीति के अंतर्संबंध को स्पष्ट करें।

 

Question 4: विद्रोहियों के बीच एकता स्थापित करने के लिए क्या तरीके अपनाए गए?

Answer:

विद्रोहियों के बीच एकता स्थापित करने के लिए निम्नलिखित तरीके अपनाए गए:
• इस विद्रोह को एक ऐसे युद्ध के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा था जिसमें हिंदू तथा मुसलमान दोनों का लाभ-हानि बराबर था।
• विद्रोह के समय लोगों की जाति तथा धर्म को स्थान नहीं दिया गया। विद्रोही ने जो घोषणाएँ की थीं उनमें जाति तथा धर्म का भेदभाव किए बिना समाज के सभी वर्गों का आह्वान किया था।
• बहादुर शाह के नाम से जारी की गई घोषणा में मुहम्मद तथा महावीर दोनों की दुहाई देते हुए जनता से इस विद्रोह में सम्मिलित होने की अपील की जाती थी।
• इस विद्रोह में विद्रोहियों ने मिलकर अपने शत्रु फिरंगियों का सामना किया। उन्होंने दोनों समुदायों में लोकप्रिय तीन भाषाओं हिंदी, फारसी तथा उर्दू में अपीलें की।
• विद्रोहियों ने कई संचार माध्यमों का उपयोग किया। सिपाही एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा रहे थे। विद्रोहियों ने कार्यवाही की समरूपता, एक जैसी योजना तथा समन्वय स्थापित किया ताकि लोगों में एकता की भावना जागृत हो सके।
• कई स्थानों पर सिपाही अपनी लाइनों में रात के समय पंचायतें करते थे, जहाँ सामूहिक रूप से कई फैसले लिए जाते थे।

मुख्य बिंदु:

• हिंदू-मुसलमान एकता के लिए संयुक्त अपील
• बहुभाषी घोषणाओं का प्रयोग (हिंदी, फारसी, उर्दू)
• पंचायतों के माध्यम से सामूहिक निर्णय

आम गलतियाँ:

• केवल एक धार्मिक समुदाय पर ध्यान केंद्रित करना
• संचार माध्यमों और भाषाओं की भूमिका को छोड़ देना
• विद्रोही घोषणाओं के स्वरूप को स्पष्ट न करना

Exam Tips:

a) बहादुर शाह की घोषणा में मुहम्मद और महावीर दोनों के उदाहरण का उल्लेख करें।
b) हिंदी, फारसी और उर्दू भाषाओं के प्रयोग को महत्व दें।
c) साझा शत्रु 'फिरंगियों' के खिलाफ एकजुटता के बिंदु को उभारें।

 

Question 5: अंग्रेजों ने विद्रोह को कुचलने के लिए क्या कदम उठाए?

Answer:

अंग्रेजों ने विद्रोह को कुचलने के निम्नलिखित कदम उठाए:
• अंग्रेजों ने विद्रोह का दमन बहुत क्रूरतापूर्वक किया।
• अंग्रेजों ने सैनिक टुकड़ियाँ लगाने से पहले उनकी मदद के लिए कुछ कानून तथा मुकदमों की घोषणा की।
• अंग्रेजों ने सम्पूर्ण उत्तर भारत में मार्शल लॉ लागू कर दिया। फौजी अफसरों को आदेश दिया कि विद्रोह में भाग लेने वालों पर मुकदमा चलाया जाए।
• गंगा घाटी में सैनिक टुकड़ियों ने गाँव-गाँव जाकर विद्रोह का दमन किया।
• अंग्रेजों ने 'फूट डालो और राज करो' की नीति अपनाई।
• विद्रोह के दमन के लिए ब्रिटेन से आई सेना को कलकत्ता तथा पंजाब में लगा दिया गया। जून 1857 से सितम्बर 1857 के बीच उन्होंने दिल्ली पर अधिकार कर लिया। दोनों पक्षों की बहुत हानि हुई।
• अंग्रेजों ने कूटनीति का सहारा लिया। शिथिल तथा जमींदारों को विद्रोह से दूर रखा।

मुख्य बिंदु:

• मार्शल लॉ लागू करना और क्रूर दमन
• विदेशों से अतिरिक्त सैन्य सहायता मंगाना
• 'फूट डालो और राज करो' तथा कूटनीति का प्रयोग

आम गलतियाँ:

• केवल सैन्य कार्रवाई का जिक्र करना और राजनीतिक/कूटनीतिक उपायों को छोड़ना
• मार्शल लॉ के प्रभाव को स्पष्ट न करना
• दमन के विभिन्न चरणों को कालानुक्रम में न लिखना

Exam Tips:

a) मार्शल लॉ और फौजी अदालतों की भूमिका समझाएँ।
b) पंजाब और कलकत्ता से सेना बुलाए जाने का संदर्भ दें।
c) जमींदारों को अलग करने की कूटनीति का वर्णन करें।

 

Question 6: अवध में विद्रोह इतना व्यापक क्यों था? किसान, तालुकदार और जमींदार उसमें क्यों शामिल हुए?

Answer:

1851 ई. में गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी ने अवध की रियासत के बारे में कहा था कि 'ये गिलास फूल एक दिन हमारे ही मुँह में आकर गिरेगा।' पाँच साल बाद, 1856 ई. में इस रियासत को औपचारिक रूप से ब्रिटिश साम्राज्य का अंग घोषित कर दिया गया। रियासत पर कब्जे का यह सिलसिला काफी लम्बा चला। 1801 ई. से अवध में सहायक संधि थोप दी गई। इस संधि में शर्त थी कि नवाब अपनी सेना खत्म कर दे, रियासत में अंग्रेज टुकड़ियों की तैनाती की इजाजत दे तथा दरबार में मौजूद ब्रिटिश रेजिडेंट की सलाह पर काम करें। अपनी सैनिक ताकत से वंचित हो जाने के बाद नवाब अपनी रियासत में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार अंग्रेजों पर निर्भर होता जा रहा था। इसके बाद विद्रोही मुख्यआओं तथा तालुकदारों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं था। अवध पर कब्जे में अंग्रेजों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही थी। उन्हें लगता था कि वहाँ की जमीन नील और कपास की खेती के लिए उपयुक्त है तथा इस इलाके को उत्तरी भारत के एक बड़े बाजार के रूप में विकसित किया जा सकता है। 1850 के दशक की शुरुआत तक वे देश के अधिकतर बड़े हिस्सों को जीत चुके थे। कर्नाटक, मराठा भूमि, दोआब, बंगाल तथा पंजाब सभी अंग्रेजों के पास थे।
अवध में विद्रोह का बहुत प्रसार हुआ। किसानों, जमींदारों, तालुकदारों सभी ने भाग लिया। अवध में विद्रोह का नेतृत्व लखनऊ से बेगम हजरत महल ने किया। अवध के जमींदारों ने बेगम की मदद की। बेगम ने 4 जून 1857 ई. में अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर का अवध का नवाब घोषित किया तथा अंग्रेजों के विरुद्ध क्रांति शुरू की। अवध में ब्रिटिश शासन के जाने से वहाँ के लोगों ने बहुत कुछ सहन किया तनाव पर बहुत अत्याचार हुआ। यही कारण था कि 1857 ई. का विद्रोह उनकी सभी भावनाओं, परंपराओं तथा मुद्दों, निशानियों की अभिव्यक्ति का सूत्र बन गया। अवध के अधिग्रहण से नवाब की गद्दी समाप्ति के साथ तालुकदार भी tabah हो गए। उनकी सेना तथा सम्पत्ति दोनों खत्म हो गए। तालुकदारों से सत्ता हस्तांतरित कर दी गई। तालुकदार किसानों से बहुत सारा धन तथा राजस्व वसूल करते थे परंतु वे किसानों के हितैषी थे। फलस्वरूप तालुकदार तथा किसान अंग्रेजों के विरुद्ध थे तथा क्रोधित थे। किसान फौजी बैरकों जाकर सिपाहियों से मिल गए। इस प्रकार किसान भी सिपाहियों के विद्रोही कार्य में सम्मिलित हो गए।

मुख्य बिंदु:

• 1856 में अवध का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय
• तालुकदारों की सत्ता और राजस्व अधिकारों का छिनना
• किसानों और सिपाहियों का संयुक्त असंतोष

आम गलतियाँ:

• केवल किसानों की भागीदारी लिखना और तालुकदारों को भूल जाना
• सहायक संधि के प्रभावों को गलत लिखना
• बेगम हजरत महल और बिरजिस कादिर की भूमिका को न दर्शाना

Exam Tips:

a) लॉर्ड डलहौजी के कथन ("गिलास फूल...") का उल्लेख करें।
b) तालुकदारों और किसानों के साझा आर्थिक हितों को स्पष्ट करें।
c) अवध के विलय को विद्रोह के केंद्र के रूप में समझाएँ।

 

Question 7: विद्रोही क्या चाहते थे? विभिन्न सामाजिक समूहों की दृष्टि में कितना फर्क था?

Answer:

विद्रोही भारत से ब्रिटिश शासन को पूर्णतः समाप्त करना चाहते थे। विभिन्न सामाजिक समूहों का एक ही उद्देश्य था - 'भारत से ब्रिटिश शासन को भारत से उखाड़ फेंकना।' जब से ब्रिटिश शासन आया था भारत के प्रत्येक वर्ग को हानि का सामना करना पड़ा। सभी लोगों में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध असंतोष का भाव था। इसलिए विभिन्न वर्गों ने विद्रोह किया। विभिन्न सामाजिक समूह अपने-अपने हितों की रक्षा के लिए विद्रोह करना चाहते थे और उन सभी का सामान्य उद्देश्य एक ही था। मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहब, पेशवा बाजीराव द्वितीय, जात नेता शाहमल, राजा कुँवरसिंह, अवध की बेगम हजरत महल, बड़े-बड़े जागीरदार तथा तालुकदार ये सभी ब्रिटिश सत्ता को समाप्त करना चाहते थे। अंग्रेजों ने भारतीय राज्यों तथा रियासतों का विलय अपने साम्राज्य में कर लिया तथा जमींदारी बंदोबस्त के अंतर्गत भू-राजस्व के रूप में विशाल धनराशि जमींदारों को दे दी। सरकारी व्यापारी सूची, कर परिवहन संबंधी नीतियाँ भारतीय व्यापारियों के हितों के विरुद्ध थीं। देश के आंतरिक एवं बाह्य व्यापार पर विदेशी उद्योगपतियों का नियंत्रण था। 1857 के विद्रोहियों में एकता के विचार दिखते थे तथा उनकी घोषणाएँ थीं कि जाति व धर्म से ऊपर होती थीं। देश में एकता स्थापित करने के लिए विद्रोह को हिंदू तथा मुसलमान दोनों के लिए समान लाभ के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा था। विद्रोही चाहते थे कि अंग्रेजों के स्थान पर किसी भारतीय सत्ता शासन हो जिससे उनके अच्छे कम हो सके। विद्रोही अंग्रेजों से छुटकारा पाना चाहते थे। दिल्ली, कानपुर, लखनऊ आदि स्थानों पर ब्रिटिश सत्ता ध्वस्त हो जाने के पश्चात् विद्रोहियों ने एक समान सत्ता तथा शासन स्थापित करने की कोशिश की।

मुख्य बिंदु:

• ब्रिटिश शासन को पूरी तरह समाप्त करना सबका साझा उद्देश्य
• विभिन्न वर्गों (जमींदार, किसान, व्यापारी, शासक) के अलग-अलग तात्कालिक हित
• नई व्यवस्था में भारतीय शासन की पुनर्स्थापना की चाह

आम गलतियाँ:

• सभी समूहों के हितों को एक ही मान लेना बिना अंतर समझे
• आर्थिक और सामाजिक नीतियों के प्रभावों को न जोड़ना
• घोषणाओं के उद्देश्यों को स्पष्ट न करना

Exam Tips:

a) साझा उद्देश्य (ब्रिटिश राज का अंत) और विशिष्ट हितों (राजा, किसान, व्यापारी) में अंतर स्पष्ट करें।
b) विभिन्न नेताओं और उनके उद्देश्यों के उदाहरण दें।
c) उत्तर को सुव्यवस्थित बिंदुओं में लिखें।

 

Question 8: 1857 के विद्रोह के बारे में चित्रों से क्या पता चलता है? इतिहासकार इन चित्रों का किस तरह विश्लेषण करते हैं?

Answer:

1857 ई. के विद्रोह के बारे में चित्रों से निम्न बातें पता चलती हैं:
• विद्रोह के संबंध में अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए चित्रों में अंग्रेजों को बचाने वाले तथा विद्रोहियों को कुचलने वाले अंग्रेज नायकों का अभिनंदन रक्षकों के रूप में किया जाता है।
• इससे संबंधित टॉमस जोन्स बार्कर द्वारा 1859 ई. में निर्मित चित्र 'द रिलीफ ऑफ़ लखनऊ' विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
• विद्रोह के समय तथा उसके पश्चात् कई विषयों का चित्रांकन किया गया है।
• ब्रिटिश अखबारों में भारत में हिंसा के चित्र और खबरें बहुत छपती थीं। जिनको देखकर तथा पढ़कर ब्रिटेन की जनता प्रतिशोध तथा सबक सिखाने की मांग कर रही थी।
• कुछ चित्र ऐसे भी थे जिनमें महिलाओं के उग्र रूप को दिखाया गया। उनकी द्वारा दिखाए गए साहस और वीरता का चित्रांकन भी किया गया है।
• चित्र में बढ़ते की भावना के टफून में अंग्रेजों द्वारा विद्रोही की निर्ममता से की गई हत्या का प्रदर्शन किया गया है।
• कई बच्चों तथा औरतों के चित्र बनाए गए। जोजोसेफ़ लोएल पेटेल के 'स्मृति चित्र में अंग्रेज औरतें तथा बच्चे एक घेरे में एक-दूसरे से लिपटे दिखाई देते हैं। उन्हें लाचार तथा मासूम बताया गया है।
• 1857 के विद्रोह को एक राष्ट्रवादी आंदोलन के रूप में चित्रित किया गया था।
• एक चित्र में झाँसी की रानी को घोड़े पर सवार एक हाथ में तलवार तथा दूसरे हाथ में घोड़े की रस्ब पकड़े दिखाया गया है।
• बार्कर की एक अन्य पेंटिंग में कैम्पबेल के आने पर आनंद मनाते हुए दिखाया गया है। अगले चित्र में पड़े हुए शवों तथा घायल इस घेराबंदी के समय हुई लड़ाई की गवाही देते हैं।
• कुछ चित्रों में ईसाईयत की रक्षा के लिए संघर्ष को दिखाया गया है।

मुख्य बिंदु:

• ब्रिटिश चित्रों में अंग्रेजों की वीरता और मासूमियत का चित्रण
• भारतीय विद्रोहियों को क्रूर और हिंसक रूप में दिखाना
• टॉमस जोन्स बार्कर और जोसेफ लोएल पेटेल की पेंटिंग्स का महत्व

आम गलतियाँ:

• केवल भारतीय दृष्टिकोण को चित्रों में देखना, जबकि अधिकांश चित्र ब्रिटिश दृष्टिकोण से बने थे
• प्रमुख चित्रकारों और उनकी कलाकृतियों के नाम न लिखना
• चित्रों के पीछे छिपे राजनीतिक उद्देश्यों को न समझना

Exam Tips:

a) टॉमस जोन्स बार्कर के चित्र 'द रिलीफ ऑफ़ लखनऊ' का उदाहरण दें।
b) ब्रिटिश जनता में प्रतिशोध की भावना जगाने में चित्रों की भूमिका समझाएँ।
c) रानी लक्ष्मीबाई के राष्ट्रवादी चित्रों का भी उल्लेख करें।

 

Question 9: एक चित्र और एक लिखित पाठ को चुनकर किन्हीं दो स्रोतों की पड़ताल कीजिए और इस बारे में चर्चा कीजिए कि उनसे विजेताओं और पराजितों के दृष्टिकोण के बारे में क्या पता चलता है?

Answer:

पाठ्य-पुस्तक के एक चित्र में यह दिखाया गया है कि अंग्रेजों ने जिस संघर्ष को एक 'सैन्य विद्रोह' मात्र कहा भारतीय के लिए ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारत का प्रथम स्वतंत्रता था। झाँसी में विद्रोह का नेतृत्व रानी लक्ष्मीबाई ने किया था। चित्र में रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की सजीव मूर्ति के रूप में चित्रित किया गया है। इस चित्र को देखने से प्रतीत होता है कि झाँसी में महिलाओं ने पुरुषों के वस्त्र धारण कर अस्त्र-शस्त्र धारण करके ब्रिटिश सैनिकों का मुकाबला किया। लोक छवियों में झाँसी की रानी ने वीरता से डटकर अंग्रेजों का सामना किया। रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की प्रशंसा तथा उनकी वीरता व साहस का गुणगान करते हुए सुभद्रा कुमारी चौहान ने लिखा है - 'खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी।'
पाठ्य-पुस्तक में एक चित्रकार फेलिस बीतो द्वारा बनाया गया एक चित्र जिसमें लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह द्वारा बनवाए गए रंगबाग के खण्डहरों में 4 व्यक्ति दर्शाए गए हैं। 1857 ई. के विद्रोह में इसकी रक्षा के लिए 2000 से अधिक विद्रोही सिपाही तैनात थे। इन सैनिकों को केम्पबेल की सेना ने मार डाला। इसमें नरकंकालों को दिखाया गया है।

मुख्य बिंदु:

• विजेताओं (अंग्रेजों) और पराजितों (भारतीयों) के दृष्टिकोण में अंतर
• रानी लक्ष्मीबाई के वीरतापूर्ण चित्रण और लोकगीतों का महत्व
• फेलिस बीतो के चित्रों में तबाही और नरकंकालों का अंकन

आम गलतियाँ:

• केवल पाठ का वर्णन करना और चित्र के संदर्भ को छोड़ देना
• विजेताओं और पराजितों के दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से अलग न करना
• सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता या फेलिस बीतो के चित्रों के प्रभाव को न लिखना

Exam Tips:

a) रानी लक्ष्मीबाई से जुड़े साहित्यिक और दृश्यात्मक स्रोतों का मेल दिखाएं।
b) फेलिस बीतो के फोटोग्राफ्स/चित्रों के माध्यम से ब्रिटिश क्रूरता या विजय का दृष्टिकोण समझाएँ।
c) दोनों पक्षों के अंतर्विरोधी नजरिए को स्पष्ट करें।

 

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