Official NCERT Solutions for Class 12 History: Chapter 05 यात्रियों के नज़रिए
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Chapter-wise Solutions for History: Chapter 05 यात्रियों के नज़रिए
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Question 1: किताब-उल-हिन्द पर लेख लिखिए।
Answer:
अलबरूनी की कृति 'किताब-उल-हिन्द' की भाषा सरल और स्पष्ट है। यह अरबी भाषा में लिखी गई एक विशाल ग्रंथ है, जो धर्म और दर्शन, त्योहारों, खगोल-विज्ञान, रीति-रिवाजों, प्रथाओं, सामाजिक जीवन, भार तथा मापन विधियों, मूर्तिकला, कानून, मापतंत्र विज्ञान आदि विषयों के आधार पर अस्सी अध्यायों में विभाजित है। अलबरूनी ने प्रत्येक अध्याय में प्रायः एक विशिष्ट शैली का प्रयोग किया है। वह प्रत्येक अध्याय की एक प्रश्न से प्रारंभ करता है। इसके बाद संस्कृतवादी परंपराओं पर आधारित वर्णन है और अंत में अन्य संस्कृतियों के साथ एक तुलना की गई है। आज के कुछ विद्वानों का तर्क है कि अलबरूनी का गणित और की तरफ झुकाव था, इसी कारण उसकी पुस्तक, जो लगभग एक ज्यामितीय संरचना है, बहुत ही स्पष्ट बन पड़ी है।
मुख्य बिंदु:
• यह अरबी भाषा में रचित एक व्यापक ग्रंथ है जो 80 अध्यायों में विभाजित है।
• इसमें धर्म, दर्शन, खगोल विज्ञान, रीति-रिवाज और सामाजिक जीवन का विस्तृत वर्णन है।
• इसके लेखन में वैज्ञानिक और तुलनात्मक दृष्टिकोण का प्रयोग किया गया है।
आम गलतियाँ:
• इसे फारसी भाषा में रचित बताना।
• अध्यायों की संख्या या विषय-वस्तु को गलत लिखना।
• अलबरूनी की लेखन शैली के अनूठे प्रारूप (प्रश्न से शुरुआत) का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) पुस्तक का नाम 'किताब-उल-हिन्द' सही ढंग से उद्धृत करें।
b) इसकी शैली और विभिन्न विषयों (जैसे खगोल, सामाजिक जीवन) का संक्षेप में उल्लेख करें।
c) उत्तर को आकर्षक बनाने के लिए बुलेट पॉइंट्स का प्रयोग करें।
Question 2: इब्न-बूटूता और बर्नियर ने जिन दृष्टिकोणों से भारत में अपनी यात्राओं के वृत्तांत लिखे थे, उनकी तुलना कीजिए तथा अंतर बताइए।
Answer:
इब्न-बूटूता ने हर उस चीज़ का वर्णन करने की इच्छा की जिसे उसने अपने विशिष्ट गुण के कारण प्रभावित किया हो। दूसरी ओर बर्नियर एक अलग बुद्धिजीवी परंपरा से संबंधित था।
इब्न-बूटूता ने भारत की विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों, आस्थाओं, राजनीतिक गतिविधियों के बारे में लिखा। उसे जो कुछ विचित्र लगता था, उसका वह विशेष रूप से वर्णन करता था। उदाहरण के लिए उसने नारियल तथा पान का बहुत ही रोचक ढंग से वर्णन किया है। इब्न-बूटूता ने भारत की शहरी संस्कृति तथा बाजारों की चहल-पहल पर भी प्रकाश डाला। इसके विपरीत बर्नियर ने भारतीय समाज की त्रुटियों को उजागर करने पर जोर दिया है। वह भारत की प्रत्येक स्थिति की तुलना यूरोप और विशेषकर फ्रांस की स्थितियों से करता था। उसने यही दिखाने का प्रयास किया कि विकास की दृष्टि से भारत यूरोप की तुलना में पिछड़ा हुआ है।
मुख्य बिंदु:
• इब्न-बूटूता ने अपनी यात्रा के दौरान विचित्र और नई चीजों को अपनी जिज्ञासा के कारण प्रमुखता से लिखा।
• बर्नियर का दृष्टिकोण आलोचनात्मक था और वह यूरोप तथा भारत की तुलना करने में व्यस्त था।
• बर्नियर ने भारतीय समाज और व्यवस्था की कमियों को उजागर किया जबकि इब्न-बूटूता ने शहरी संस्कृति व बाजारों का सजीव चित्रण किया।
आम गलतियाँ:
• दोनों यात्रियों के उद्देश्यों और लेखन शैली को एक समान मान लेना।
• बर्नियर के तुलनात्मक दृष्टिकोण और यूरोपीय श्रेष्ठता के पूर्वाग्रह को स्पष्ट न करना।
• इब्न-बूटूता की जिज्ञासा और विविधता के प्रति आकर्षण को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) दोनों के बीच मुख्य अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाएं (जिज्ञासा बनाम तुलनात्मक आलोचना)।
b) इब्न-बूटूता के उदाहरण (नारियल, पान, बाजार) और बर्नियर के यूरोप-केंद्रित विचारों का उल्लेख करें।
c) तुलना को स्पष्ट करने के लिए उत्तर को पैराग्राफ या बिंदुओं में विभाजित करें।
Question 3: बर्नियर के वृत्तांत से उभरने वाले शहरी केंद्रों के चित्र पर चर्चा कीजिए।
Answer:
बर्नियर मुगलकालीन शहरों को 'शिविर नगर' कहता है, जिससे उसका आशय उन नगरों से था जो अपने अस्तित्व और बने रहने के लिए राजकीय शिविर पर निर्भर थे। उसका विश्वास था कि राजकीय दरबार के आगमन के साथ अस्तित्व में आते थे और इसके कहीं और चले जाने के बाद तेजी से पतनमुख हो जाते थे। 17वीं शताब्दी में लगभग 15 प्रतिशत जनसंख्या नगरों में रहती थी। यह अनुपात उस समय की पश्चिमी यूरोप की नगरी जनसंख्या के अनुपात से अधिक था। फिर भी बर्नियर मुगलकालीन शहरों को शिविर नगर कहता है। अहमदावाद जैसी शहरी केंद्रों में सभी महाजनों का सामूहिक प्रतिनिधित्व व्यापारिक समुदाय के मुखिया द्वारा होता था जिसे नगर सेठ कहा जाता था।
मुख्य बिंदु:
• बर्नियर ने मुगलकालीन नगरों को 'शिविर नगर' की संज्ञा दी क्योंकि वे राजकीय दरबार पर निर्भर थे।
• इन नगरों का पतन राजकीय शिविर के स्थानांतरण के साथ हो जाता था।
• उस समय लगभग 15 प्रतिशत आबादी नगरों में निवास करती थी, जो पश्चिमी यूरोप से अधिक थी।
आम गलतियाँ:
• बर्नियर द्वारा दिए गए 'शिविर नगर' शब्द के अर्थ को गलत समझना।
• नगरीय जनसंख्या के प्रतिशत (15%) का उल्लेख न करना।
• व्यापारिक संगठनों और 'नगर सेठ' की भूमिका को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) 'शिविर नगर' (Camp Towns) शब्दावली का विशेष रूप से प्रयोग करें।
b) बर्नियर के दृष्टिकोण और वास्तविक नगरीय स्थिति के बीच अंतर स्पष्ट करें।
c) व्यापारिक नेटवर्क और नगर सेठ के महत्व को संक्षिप्त में बताएं।
Question 4: इब्न बूटूता द्वारा दास प्रथा के संबंध में दिए गए साक्ष्यों का विवेचन कीजिए।
Answer:
इब्न-बूटूता के विवरण से प्रतीत होता है कि दासों में काफी विभेद था। दासों को सामान्यतः घरेलू श्रम के लिए ही इस्तेमाल किया जाता था, और इब्न-बूटूता ने इनकी सेवाओं को, पालकी या डोले में पुरुषों और महिलाओं को ले जाने में विशेष रूप से अनिवार्य पाया। इब्न-बूटूता बताता है कि सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक ने नसरुद्दीन नामक एक धर्मोपदेशक के प्रवचन से प्रसन्न होकर उसे एक लाख टका (मुद्रा) तथा दो सौ दास दिए थे। जब इब्न-बूटूता मुल्तान पहुँचा तो उसने गवर्नर को किसमिस तथा बादाम के साथ एक दास और घोड़ा भेंट के रूप में दिया था। जब वह सिंह पहुँचा तो उसने भी सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक का भेंट में देने के लिए घोड़े, ऊँट तथा दासा खरीदे थे। इब्न-बूटूता के अनुसार, बाजारों में दास किसी भी अन्य वस्तु की तरह खुलेआम बेचे जाते थे। सुल्तान अपने अमीरों पर नज़र रखने के लिए दासियों को नियुक्त करता था।
मुख्य बिंदु:
• दासों का उपयोग घरेलू श्रम और परिवहन (पालकी उठाने) के लिए किया जाता था।
• दासों को उपहार के रूप में देने और बाजारों में खुलेआम बेचने की प्रथा थी।
• सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक के दरबार में दासों का विशेष महत्व था और सुल्तान अमीर-उमरा पर नजर रखने के लिए दासियों का प्रयोग करता था।
आम गलतियाँ:
• सभी दासों को एक ही श्रेणी में रखना, जबकि उनमें सामाजिक विभेद था।
• दासों के व्यापार और उपहार लेन-देन के उदाहरणों का उल्लेख न करना।
• सुल्तान द्वारा प्रशासनिक निगरानी में दासियों के उपयोग को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) इब्न-बूटूता के यात्रा वृत्तांत से विशेष उदाहरण (जैसे तुगलक द्वारा उपहार देना) शामिल करें।
b) दासों की क्रय-विक्रय प्रणाली और बाजारों का जिक्र करना न भूलें।
c) उत्तर को तथ्यात्मक और स्पष्ट भाषा में लिखें।
Question 5: सती प्रथा के कौन से तत्वों ने बर्नियर का ध्यान अपनी ओर खींचा?
Answer:
सभी तत्कालीन यूरोपीय यात्रियों और लेखकों के लिए, महिलाओं से किया जाने वाला बर्ताव, अक्सर पश्चिमी तथा पूर्वी समाजों के बीच भिन्नता का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता था। यह आश्चर्यजनक बात नहीं है कि बर्नियर ने सती प्रथा का विस्तृत विवरण के लिए चुना। उसने लिखा कि हालांकि कुछ महिलाएं प्रसन्नता से मृत्यु को गले लगा लेती थीं, अन्य को मरने के लिए बाध्य किया जाता था। सती प्रथा मध्यकालीन हिंदू समाज में व्यापक कुप्रथाओं में सर्वाधिक घृणित प्रथा थी। बर्नियर सती प्रथा का वर्णन करते हुए लिखते हैं कि 'लाहौर में मैंने एक बहुत ही सुंदर अल्पवयस्क विधवा जिसकी मेरे विचार में बारह वर्ष से अधिक नहीं थी, की बलि होते देखी। उस भयानक नर्क की ओर जाते हुए वह असहाय छोटी बच्ची जीवित से अधिक प्रतीत हो रही थी, उसके मस्तिष्क की व्यथा का वर्णन नहीं किया जा सकता, वह कांपते हुए बुरी तरह से रो रही थी, लेकिन तीन-चार ब्राह्मण, एक बूढ़ी औरत, जिसने उसे अपनी आस्तीन के नीचे दबाया हुआ था, की सहायता से उस अनिच्छुक पीड़िता को घातक स्थल की ओर ले गए। उसे लकड़ियों पर बैठाया, उसके हाथ-पॉंव बाँध दिए ताकि वह भाग न जाए और इस स्थिति में उस मासूम प्राणी को जिंदा जला दिया गया। मैं अपनी भावनाओं को दबाने में असमर्थ था...' इस वर्णन से स्पष्ट होता है कि सती प्रथा के अंतर्गत होने वाली महिलाओं की अल्पवयस्कता, अनिच्छा तथा व्यथा आदि जैसे तत्वों ने बर्नियर का ध्यान आकर्षित किया था।
मुख्य बिंदु:
• महिलाओं के प्रति बर्ताव को पूर्वी और पश्चिमी समाज की भिन्नता का संकेतक माना गया।
• बर्नियर ने सती प्रथा को समाज की सबसे घृणित और क्रूर प्रथा के रूप में देखा।
• उसने एक कम उम्र की विधवा के जीवित जलाए जाने का अत्यंत मार्मिक और व्यथित करने वाला वर्णन किया।
आम गलतियाँ:
• सती प्रथा को केवल स्वेच्छा से होने वाली घटना मान लेना।
• बर्नियर के व्यक्तिगत अनुभवों और भावनाओं के वर्णन को छोड़ देना।
• पीड़ित महिलाओं की अल्पवयस्कता और जबरदस्ती का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) बर्नियर द्वारा दिए गए लाहौर के वाकया (उदाहरण) का संक्षेप में उल्लेख करें।
b) महिलाओं की विवशता और क्रूरता के तत्वों को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
c) इतिहास में लैंगिक दृष्टि और यूरोपीय यात्रियों के दृष्टिकोण को समझकर उत्तर लिखें।
Question 6: जाति व्यवस्था के संबंध में अल-बूनरी की व्याख्या पर चर्चा कीजिए।
Answer:
अलबरूनी जाति व्यवस्था का वर्णन करते हुए लिखते हैं कि हर वह वस्तु जो अपवित्र हो जाती है, अपनी पवित्रता की मूल स्थिति को पुनः प्राप्त करने का प्रयास करती है और सफल होती है। सूर्य हवा को स्वच्छ करता है और समुद्र में नमक पानी को गंदा होने से बचाता है। अल-बूनरी जोर देकर कहता है कि यदि ऐसा नहीं होता तो पृथ्वी पर जीवन असंभव होता। उसके अनुसार जाति व्यवस्था में संत्रहित अपवित्रता प्रकृति के नियमों के विरुद्ध थी। अलबरूनी वर्ण व्यवस्था का इस प्रकार उल्लेख करता है- सबसे ऊँची जाति ब्राह्मणों की है जिनके विषय में हिंदुओं के ग्रंथ हमें बताते हैं कि वे ब्रह्मा के सिर से उत्पन्न हुए थे और क्योंकि ब्रह्मा, प्रकृति नामक शक्ति का ही दूसरा नाम है, और सिर... शरीर का सबसे ऊपरी भाग है, इसलिए ब्राह्मण पूरी प्रजाति के सबसे चुनिंदा भाग हैं। इसी कारण से हिंदू उन्हें मानव जाति में सबसे उत्तम मानते हैं। अगली जाति क्षत्रियों की है जिनका सृजन पैसा कहा जाता है, ब्रह्मा के कंधों और हाथों से हुआ था। उनका दर्जा ब्राह्मणों से अधिक नीचे नहीं है; उसके बाद वैश्य आते हैं जिसका उद्भव ब्रह्मा की जंघाओं से हुआ था। शूद्र जिनका सृजन उनके चरणों से हुआ था। जाति व्यवस्था के विषय में अलबरूनी का विवरण उसके इसके नियामक संस्कृत ग्रंथों के अध्ययन से तुरंत तह से गहनता से प्रभावित था। इन ग्रंथों में ब्राह्मणों के दृष्टिकोण से जाति व्यवस्था को संचालित करने वाले नियमों का प्रतिपादन किया गया था।
मुख्य बिंदु:
• अलबरूनी ने जाति व्यवस्था को प्रकृति के नियमों (शुद्धता और अपवित्रता के चक्र) के संदर्भ में समझाने का प्रयास किया।
• उसने हिंदुओं के चार वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र) की उत्पत्ति ब्रह्मा के विभिन्न अंगों से बताई।
• उसका यह अध्ययन मुख्य रूप से संस्कृत के धार्मिक एवं कानूनी ग्रंथों पर आधारित था।
आम गलतियाँ:
• अलबरूनी के वर्ण व्यवस्था के विश्लेषण को उसकी अपनी मौलिक सोच मान लेना, जबकि यह संस्कृत ग्रंथों पर आधारित था।
• शुद्धता और अपवित्रता के प्राकृतिक उदाहरणों (सूर्य, हवा, समुद्र) को छोड़ देना।
• चारों वर्णों की उत्पत्ति के क्रम को गलत लिखना।
Exam Tips:
a) अलबरूनी के स्रोत (संस्कृत ग्रंथ) का उल्लेख अवश्य करें।
b) शुद्धता और अपवित्रता संबंधी उसके वैज्ञानिक तर्कों को स्पष्ट करें।
c) ब्राह्मणों से लेकर शूद्रों तक की उत्पत्ति का क्रम सही ढंग से दर्शाएं।
Question 7: क्या आपको लगता है कि तत्कालीन शहरी केंद्रों में जीवन-शैली की सही जानकारी प्राप्त करने में इब्न बूटूता का वृत्तांत सहायक है? अपने उत्तर के कारण दीजिए।
Answer:
हम इस बात से सहमत हैं कि समकालीन शहरी केंद्रों में जीवन- शैली सही जानकारी प्राप्त करने में इब्न-बूटूता का वृत्तांत सहायक है। इब्न-बूटूता के अनुसार उपमहाद्वीप के नगरों में इच्छा शक्ति, साधनों तथा कौशल वाले लोगों के लिए भरपूर अवसर थे। ये नगर घनी आबादी वाले थे। परंतु कुछ नगर युद्ध तथा अभियानों के कारण नष्ट भी हो चुके थे। इब्न-बूटूता दिल्ली को भारत में सबसे बड़ा शहर बताता है जिसकी जनसंख्या बहुत अधिक थी। दौलतबाद (महाराष्ट्र) भी कुछ कम नहीं था। यह आकार में दिल्ली को चुनौती देता था। अधिकांश शहरों में भीड़-भाड़ वाली सड़कें तथा रंगीन बाजार थे जो अलग-अलग प्रकार की वस्तुओं से भरे रहते थे। इब्न-बूटूता के अनुसार भारतीय सेना के इतना अधिक उत्पादन होने का कारण मिट्टी का उपजाऊपन था। अतः किसानों के लिए वर्ष में दो फसलें उगाना आसान था। उपमहाद्वीप व्यापार तथा वाणिज्य के एशियाई तंत्रों से भली-भांति जुड़ा हुआ था। भारतीय माल की मध्य तथा दक्षिण-पूर्व एशिया में बहुत माँग थी। इससे व्यापारियों को बहुत लाभ होता था। इब्न-बूटूता ने स्वयं बड़े पैमाने पर यात्राएँ की, पवित्र स्थल खला को देखा। उसने शहरी केंद्रों की उस विश्वासघाती संस्कृति का गहन अध्ययन किया जहाँ अरबी, फारसी, तुर्की तथा अन्य भाषाएँ बोलने वाले लोग विचारों, सूचनाओं का आदान-प्रदान करते थे। इब्न-बूटूता के अनुसार शहरी केंद्रों का व्यापार विकसित था।
मुख्य बिंदु:
• इब्न-बूटूता ने भारतीय नगरों (जैसे दिल्ली और दौलतबाद) की विशाल जनसंख्या और समृद्धि का वर्णन किया है।
• उसने बाजारों, भीड़-भाड़ वाली सड़कों और विभिन्न प्रकार की वस्तुओं की उपलब्धता का सजीव चित्रण किया है।
• कृषि की उर्वरता और एशियाई व्यापारिक तंत्र के साथ भारत के जुड़ाव को स्पष्ट रूप से दर्शाया है।
आम गलतियाँ:
• केवल यात्रा वृत्तांत की कहानियों पर ध्यान देना और आर्थिक-व्यापारीय पहलुओं को छोड़ देना।
• दिल्ली और दौलतबाद जैसे प्रमुख नगरों के तुलनात्मक विवरण का उल्लेख न करना।
• सांस्कृतिक आदान-प्रदान और बहुभाषी परिवेश को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) उत्तर की शुरुआत स्पष्ट सहमति के साथ करें।
b) दिल्ली और दौलतबाद के उदाहरणों का प्रयोग करें।
c) कृषि और व्यापारिक गतिविधियों के महत्व को बिंदुओं के माध्यम से समझाएं।
Question 8: चर्चा कीजिए कि बर्नियर का वृत्तांत किस सीमा तक इतिहासकारों को समकालीन ग्रामीण समाज को पुनर्निमित करने में सक्षम करता है?
Answer:
बर्नियर का वृत्तांत हद तक इतिहासकारों को समकालीन ग्रामीण समाज को पुनर्निमित करने में सक्षम करता है। बर्नियर ने समकालीन ग्रामीण समाज पर प्रकाश डालते हुए बताया है कि यहाँ की भूमि रेतीली और बंजर है और यहाँ की खेती अच्छी नहीं है। इन इलाकों की आबादी भी कम है। लालची स्वामियों की माँगों को पूरा करने में असमर्थ निर्धन ग्रामीण को न केवल जीवन निर्वाह के साधनों से वंचित कर दिया जाता है बल्कि उन्हें अपने बच्चों से भी हाथ धोना पड़ता है। उसके बच्चों को दास बना लिया जाता है। कृषि योग्य क्षेत्र में खेती नहीं होती क्योंकि श्रमिकों का अभाव है। गवर्नरों द्वारा किए गए बुरे व्यवहार के कारण श्रमिक मर जाते हैं। बर्नियर का कहना है कि मुगल साम्राज्य में सम्राट संपूर्ण भूमि का स्वामी था और इसको अपने अमीरों के बीच बाँटता था। उसके अनुसार भूमि पर निजी स्वामित्व न रहने के कारण किसान अपने बच्चों को भूमि नहीं दे सकते थे। इसका विवरण विश्वसनीय नहीं है क्योंकि राज्य केवल राजस्व या लगान वसूल करता था। भूमि पर उसका अधिकार नहीं था। बर्नियर बड़े विश्वास से कहता है, "भारत में मध्य की स्थिति के लोग नहीं हैं।"
मुख्य बिंदु:
• बर्नियर ने ग्रामीण समाज की गरीबी, बंजर भूमि और किसानों की दयनीय दशा का वर्णन किया है।
• उसने मुगल साम्राज्य में भूमि के राजकीय स्वामित्व (निजी स्वामित्व के अभाव) को किसानों की बदहाली का मुख्य कारण बताया।
• हालांकि उसके विवरण में कुछ अतिशयोक्ति थी (जैसे मध्य वर्ग का पूर्ण अभाव और निजी भूमि का न होना), फिर भी यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की झलक देता है।
आम गलतियाँ:
• बर्नियर के इस दावे को पूर्णतः सत्य मान लेना कि भारत में भूमि का निजी स्वामित्व बिल्कुल नहीं था।
• ग्रामीण समाज की समस्याओं के केवल एक पहलू (शोषण) पर ध्यान केंद्रित करना।
• किसानों की दयनीय स्थिति और बच्चों को दास बनाए जाने की व्यवस्था के संदर्भ को गलत लिखना।
Exam Tips:
a) यह स्पष्ट करें कि बर्नियर का दृष्टिकोण यूरोपीय पूर्वाग्रहों से प्रभावित था।
b) राजकीय भू-स्वामित्व के सिद्धांत और उसके प्रभावों का उल्लेख करें।
c) 'भारत में मध्य वर्ग के लोग नहीं हैं' इस प्रसिद्ध कथन का संदर्भ सहित वर्णन करें।
Question 9: यह बर्नियर से लिया गया एक उदाहरण है: ऐसे लोगों द्वारा तैयार सुंदर शिल्पकारी की बहुत उदाहरण है, जिनके पास औजारों का अभाव है और जिनके विषय में यह भी नहीं कहा जा सकता कि उन्होंने किसी निपुण कारीगर से कार्य सीखा है। कभी-कभी वे यूरोप में तैयार वस्तुओं की इतनी निपुणता से नकल करते हैं कि असली और नकली के बीच के अंतर कर पाना मुश्किल हो जाता है। अन्य वस्तुओं में, भारतीय लोग बेहतरीन बढ़ई, और ऐसे सुंदर स्वर्णभूषण बनाते हैं कि संदेह होता है कि कोई यूरोपीय स्वर्णकार कारीगर के इन उत्कृष्ट नमूनों से बेहतर बना सकता है। मैं अक्सर इनके चित्रों की सुंदरता, मृदुलता तथा सूक्ष्मता से आकर्षित हुआ हूँ। उनके द्वारा अलिखित शिल्प कार्यों को सूचीबद्ध कीजिए तथा इसकी तुलना अध्याय में वर्णित गतिविधियों से कीजिए।
Answer:
बर्नियर द्वारा अलिखित शिल्प कार्य तथा इसकी तुलना अध्याय में वर्णित गतिविधिः - चित्रकारी, रंग-रोगन, रेशम, जरी और बारीक मलमल का काम, सोने के बर्तन बनाना, जूते बनाना, बढ़ईगिरी, कपड़े सिलना, सोने तथा चाँदी की वस्तुएँ बनाना। ये सभी गतिविधियाँ राजकीय कारखानों में चलती थीं। बर्नियर इन कारखानों को शिल्पकारों की कार्यशाला कहता है। इब्न-बूटूता ने भी भारतीय कपड़ों की प्रशंसा की है।
अध्याय में वर्णित शिल्प गतिविधियों से पता चलता है कि कारखानों अथवा पाठशालाओं में कारीगर विशेषों की देख-रेख में कार्य करते थे।
मुख्य बिंदु:
• बर्नियर ने भारतीय शिल्पकारों की अद्भुत कारीगरी और उनकी नकल करने की क्षमता की प्रशंसा की है।
• शिल्प कार्यों में चित्रकारी, रंग-रोगन, जरी, मलमल, स्वर्ण आभूषण और बढ़ईगिरी शामिल थे।
• ये सभी कार्य राजकीय कारखानों (कार्यशालाओं) में विशेष कारीगरों की देख-रेख में संपन्न होते थे।
आम गलतियाँ:
• शिल्प गतिविधियों की सूची को अधूरा छोड़ देना या गलत गतिविधियों का उल्लेख करना।
• राजकीय कारखानों और व्यक्तिगत शिल्पकारों की कार्यप्रणाली में अंतर न समझ पाना।
• बर्नियर के उस कथन को नजरअंदाज करना जिसमें उसने यूरोपीय और भारतीय शिल्प की तुलना की है।
Exam Tips:
a) शिल्प कार्यों की एक स्पष्ट सूची (चित्रकारी, जरी, मलमल, आभूषण आदि) बनाएं।
b) राजकीय कारखानों (Karkhanas) के स्वरूप और उनमें होने वाले कार्यों का संक्षेप में वर्णन करें।
c) भारतीय शिल्पकारों की निपुणता और सूक्ष्मता के प्रति बर्नियर के आकर्षण का उल्लेख करें।
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NCERT Solutions for Class 12 History Chapter 05 यात्रियों के नज़रिए
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