Step-by-Step Textbook Solutions for Class 12 History Chapter 02 राजा किसान और नगर
Access comprehensive textbook solutions for Chapter 02 राजा किसान और नगर using the official curriculum guides for Class 12 History. Designed to align with the 2026-27 NCERT standards, these detailed answers help students reinforce core academic concepts.
Download Chapter 02 राजा किसान और नगर Textbook Solutions PDF
Navigate directly to the solved History textbook exercises using the digital viewer below. Each solution includes detailed step-by-step explanations, allowing students to instantly cross-check their work and identify areas requiring further revision.
Question 1: आरंभिक ऐतिहासिक नगरों में शिल्पकमला के उत्पादन के प्रमाणों की चर्चा कीजिए। हड़प्पा के नगरों के प्रमाण से ये प्रमाण कितने भिन्न हैं?
Answer:
आरंभिक ऐतिहासिक नगरों में शिल्प उत्पादन के कई प्रमाण मिले हैं। यहाँ से सोने, चाँदी, सीप, हाथी दाँत आदि के प्रमाण मिले हैं। इन स्थलों से मिट्टी के कटोरे तथा थालियाँ मिली हैं जिन पर चमकदार कलई चढ़ी है। इन्हें काले रंग की पॉलिश वाले मिट्टी के बर्तन (N.B.P.W.) कहा जाता है। इन नगरों में मृदभांड के साथ-साथ टेस्ट तथा बेहतर बनावट वाले मॉडल भी प्राप्त हुए हैं। नगरों में वस्त्र बुनने का कार्य, ज्वर का कार्य, औजार, आभूषण बनाने का कार्य भी होता है।
भिन्नता:
• हड़प्पा सभ्यता के लोग लोहे के प्रयोग को नहीं जानते थे इसके विपरीत आरंभिक नगरों के लोगों को लोहे का ज्ञान था।
• हड़प्पा सभ्यता के नगर सुनियोजित ढंग से बनाए गए थे इसके विपरीत आरंभिक नगरों में ये व्यवस्था देखने को नहीं मिलती थी।
• हड़प्पा सभ्यता तथा आरंभिक नगरों के भवनों तथा मकानों की बनावट में भिन्नता थी।
मुख्य बिंदु:
• काले रंग की पॉलिश वाले मृदभांड (N.B.P.W.) की प्राप्ति।
• लोहे के औजारों और हथियारों का व्यापक प्रयोग।
• विभिन्न प्रकार के शिल्पों और आभूषण निर्माण के प्रमाण।
आम गलतियाँ:
• हड़प्पा और आरंभिक ऐतिहासिक काल की शिल्प कला को एक ही मान लेना।
• लोहे के प्रयोग की स्थिति को स्पष्ट न करना।
• मृदभांडों के प्रकारों का गलत वर्णन करना।
Exam Tips:
a) दोनों कालों के बीच तुलनात्मक अंतर स्पष्ट रूप से लिखें।
b) पुरातात्विक साक्ष्यों जैसे N.B.P.W. का उल्लेख अवश्य करें।
c) बिंदुओं में उत्तर लिखकर अंक प्राप्त करने की संभावना बढ़ाएँ।
Question 2: महाजनपदों के विशिष्ट अभिलक्षणों का वर्णन कीजिए।
Answer:
महाजनपदों के विशिष्ट अभिलक्षण निम्नलिखित हैं:
• आरंभिक भारतीय इतिहास में छठी शताब्दी ई. पू. को एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी काल माना जाता है।
• इस काल को प्रायः आरंभिक राज्यों, नगरों, लोहे के बढ़ते प्रयोग और सिक्कों के विकास के साथ जोड़ा जाता है।
• इसी काल में बौद्ध और जैन सहित विभिन्न दार्शनिक विचारधाराओं का विकास हुआ।
• प्रत्येक महाजनपद की एक राजधानी होती थी जिसे प्रायः किले से घेरा जाता था।
• किलेबंद राजधानियों के रख-रखाव तथा प्रारंभी सेनाओं और नौकरशाही के लिए भारी आर्थिक स्रोत की आवश्यकता होती थी।
• लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व से संस्कृत में ब्राह्मणों ने धर्मशास्त्र नामक ग्रंथों की रचना आरंभ की।
• शासकों का काम किसानों, व्यापारियों और शिल्पकारों से कर (टैक्स) तथा भेंट वसूलना माना जाता था।
• संपत्ति जुटाने का एक वैध उपाय पड़ोसी राज्यों पर आक्रमण करके धन इकट्ठा करना भी माना जाता था।
• धीरे-धीरे कुछ राज्यों ने अपनी स्थायी सेनाएँ और नौकरशाही तंत्र तैयार कर लिये थे।
मुख्य बिंदु:
• महाजनपदों की संख्या सोलह थी और इनकी राजधानियाँ किलेबंद थीं।
• राजाओं द्वारा कर (tax) संग्रहण की नियमित व्यवस्था।
• ब्राह्मणों द्वारा धर्मशास्त्रों की रचना और सेना का गठन।
आम गलतियाँ:
• महाजनपदों की विशेषताओं को केवल राजाओं तक सीमित रखना।
• किलेबंदी के आर्थिक और सुरक्षा कारणों को न समझाना।
• छठी शताब्दी ई.पू. के परिवर्तनों की उपेक्षा करना।
Exam Tips:
a) महाजनपदों की प्रशासनिक व्यवस्था को बिंदुओं में दर्शाएँ।
b) धर्मशास्त्रों और कर प्रणाली के महत्व को समझाएँ।
c) छठी शताब्दी ई.पू. के ऐतिहासिक महत्व को भूमिका में अवश्य लिखें।
Question 3: सामान्य लोगों के जीवन का पुनर्निर्माण इतिहासकार कैसे करते हैं?
Answer:
सामान्य लोगों के जीवन का पुनर्निर्माण इतिहासकार निम्न प्रकार से करते हैं - भारतीय समाज के सामान्य लोगों के बारे में साहित्य से जानकारी मिलती है। विभिन्न साहित्यिक स्रोतों से उत्तर भारत तथा दक्षिण भारत के कई क्षेत्रों में विकसित नगर नियोजन के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। इतिहासकार सामान्य लोगों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए दान-संबंधी गतिविधियों तथा रिकार्डों का अध्ययन करते हैं।
भूमिदान के प्रवचन से किसानों के बीच के संबंधों के बारे में पता चलता है। नगरों में सामान्य लोगों में बढ़ई, लोहार, धोबी, बुनकर, छोटे व्यापारी आदि व्यक्ति रहते थे। शवों के अंतिम संस्कार के तरीकों के द्वारा भी इतिहासकार सामान्य लोगों के जीवन के बारे में जानकारी देते हैं। सामान्य लोगों के शवों के साथ विभिन्न प्रकार के लोहे के उपकरण तथा हथियारों को भी दफनाया जाता था। ग्रंथों के साथ ही सिक्कों, अभिलेखों तथा चित्रों जैसे ऐतिहासिक स्रोतों से भी इतिहासकार जानकारी देते हैं।
मुख्य बिंदु:
• पुरातात्विक अवशेष और औजारों का अध्ययन।
• लोक-साहित्य और धार्मिक ग्रंथों का विश्लेषण।
• शवों के अंतिम संस्कार की पद्धतियों से सामाजिक स्थिति का आकलन।
आम गलतियाँ:
• केवल राजाओं और उच्च वर्ग के इतिहास को ही संपूर्ण इतिहास मान लेना।
• सामान्य लोगों के अध्ययन के स्रोतों की अनदेखी करना।
• उत्तर और दक्षिण भारत के साक्ष्यों में अंतर न स्पष्ट करना।
Exam Tips:
a) सामान्य वर्ग (बढ़ई, लोहार, बुनकर आदि) का विशेष रूप से उल्लेख करें।
b) पुरातात्विक और साहित्यिक दोनों स्रोतों के योगदान को समझाएँ।
c) उत्खनन से प्राप्त वस्तुओं के महत्व को बताएँ।
Question 4: पांड्य सरदार (स्रोत 3) को दी जाने वाली वस्तुओं की तुलना दंगुन गाँव (स्रोत 8) की वस्तुओं से कीजिए। आपको क्या समानताएँ और असमानताएँ दिखाई देती हैं?
Answer:
इस अध्याय में वर्णित स्रोत 3 तथा स्रोत 8 के अध्ययन से जानकारी मिलती है कि पांड्य सरदार को दी जाने वाली वस्तुओं तथा दंगुन गाँव की वस्तुओं में समानताएँ तथा असमानताएँ दोनों ही देखने को मिलती हैं।
• जब पांड्य सरदार सेनगुतुवन बनवाया पर थे तो उन्हें अपनी प्रजा द्वारा हिरनों के बाल से बने चँवर, हाथीदाँत, गत्रा, फूल, सुपारी, हल्दी, आम तथा कस्तूरी मृग जैसी महत्वपूर्ण वस्तुएँ भेंट दी गईं। इसी प्रकार गुप्त साम्राज्य के एक अभिलेख से पता चलता है कि दंगुन गाँव के लोग अधिकारियों को आसनों में उपयोग की जाने वाली जानवरों की खाल, फल तथा कोयला, अन्य खनिज पदार्थ आदि महत्वपूर्ण भेंट देते थे।
• पांड्य सरदार को मिलने वाली वस्तुओं की सूची गुप्त को मिलने वाली वस्तुओं की सूची से काफी अधिक थी।
• प्रभावी गुप्त अभिलेख से पता चलता है कि वाकाटक अधिकार क्षेत्रों में राज्य को मदिरा खरीदने और नमक हेतु खुदाई करने के राजसी अधिकारों को लागू करवा जाने का भी अधिकार था। परंतु पांड्य अधिकार क्षेत्रों में हमें ऐसा कोई उल्लेख मिलता है।
मुख्य बिंदु:
• राजाओं और सरदारों को दी जाने वाली स्थानीय भेंटें।
• प्राकृतिक उत्पादों (फल, खाल, कस्तूरी) का आदान-प्रदान।
• प्रादेशिक शासकों और स्थानीय प्रशासन के अधिकारों में अंतर।
आम गलतियाँ:
• दोनों स्रोतों के मूल पाठ को ठीक से समझे बिना तुलना करना।
• समानता और असमानता के बिंदुओं को स्पष्ट रूप से अलग न करना।
• क्षेत्रीय विभिन्नताओं की उपेक्षा करना।
Exam Tips:
a) उत्तर में स्पष्ट रूप से 'समानताएँ' और 'असमानताएँ' की हेडिंग दें।
b) स्रोतों के आधार पर विशिष्ट वस्तुओं (जैसे चंदन, खाल, हाथीदाँत) के नाम लिखें।
c) गुप्त काल और संगम काल के संदर्भ को ध्यान में रखें।
Question 5: अभिलेख शास्त्रियों की कुछ समस्याओं की सूची बनाइए।
Answer:
अभिलेख शास्त्रियों की समस्याएँ निम्न प्रकार से हैं:
• अभिलेख शास्त्रियों को बार-बार अभिलेखों में लिखे कथनों का परीक्षण करना पड़ता है जिससे वे यह पता लगा सकें कि उनमे लिखा है वह सत्य है, संभव है या अतिशयोक्तिपूर्ण है।
• अभिलेख शास्त्रियों को अभिलेखों को बड़े ध्यान से पढ़ना पड़ता है जिससे कि लेखक का मूल अर्थ न बदल जाए।
• कई बार अभिलेख शास्त्रियों को कई बार अभिलेखों को पढ़ने तथा उसका अर्थ निकालने में बहुत कठिनाई आती है क्योंकि कई अभिलेखों में एक ही राजा के लिए अलग-अलग उपाधियों तथा नामों का प्रयोग किया जाता है।
• अभिलेखों की लिपियों को पढ़ने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उदाहरणार्थ हड़प्पा सभ्यता की मुहरों तथा अन्य वस्तुओं पर दिए गए लेखों को अभी तक नहीं पढ़ा जा सका है।
• अभिलेखों में दिए गए वाक्यों के अर्थ को समझने में भी कठिनाई आती है। पश्चिमोत्तर से मिले अभिलेख अरमाइक तथा यूनानी भाषा में है और अशोक के अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा में हैं।
मुख्य बिंदु:
• लिपियों का न पढ़ा जाना और क्षतिग्रस्त होना।
• अतिशयोक्तिपूर्ण और बढ़ा-चढ़ाकर लिखे गए कथन।
• राजाओं की अलग-अलग उपाधियों के कारण भ्रम की स्थिति।
आम गलतियाँ:
• केवल भाषा की समस्या लिखना, लिपि और अर्थ की समस्याओं को छोड़ देना।
• हड़प्पा की लिपि के न पढ़े जाने के बिंदु को शामिल न करना।
• राजाओं की उपाधि संबंधी जटिलता को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) अभिलेख शास्त्रियों की समस्याओं को पाँच अलग-अलग बिंदुओं में लिखें।
b) भाषा (प्राकृत, अरमाइक) और लिपि (ब्राह्मी, खरोष्ठी) का अंतर स्पष्ट करें।
c) अतिशयोक्ति और सत्यता की परख वाले बिंदु को प्रमुखता दें।
Question 6: मौर्य प्रशासन के प्रमुख अभिलक्षणों की चर्चा कीजिए। अशोक के अभिलेखों में इनमें से कौन-कौन से तत्वों के प्रमाण मिलते हैं?
Answer:
मौर्य प्रशासन के प्रमुख अभिलक्षण:
कौटिल्य के सप्तांग सिद्धांत के अनुसार राज्य के 7 अंग होते थे: राजा, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, सेना तथा मित्र।
• मौर्य कला - राजकीय कला - चंद्रगुप्त का महल इसका प्रमुख उदाहरण है जिसके अवशेष पटना के निकट कुमार गाँव में मिलते हैं।
• स्तंभ - ये मौर्यकाल की सर्वोच्च कला है। इसे चुनार लंबा पत्थर से बनाया गया था।
• स्तूप - ये पक्की ईटों से निर्मित थे। साँची का स्तूप अशोक द्वारा निर्मित है।
• मंत्रियों की योग्यता की जाँच को उपधा परीक्षण कहते थे।
केंद्रीय शासन - कौटिल्य ने 27 प्रकार के अध्यक्षों का वर्णन किया है:
सीताध्यक्ष (कृषि विभाग), विविता अध्यक्ष (खनिज विभाग), लक्षणाध्यक्ष (मुद्रा जारी करने वाला), प्रतिवेदक (सूचना अधिकारी), रूपदर्शक (मुद्रा की शुद्धता की जाँच करने वाला) आदि।
• प्रांतीय शासन - सौराष्ट्र प्रांत का राज्यपाल चंद्रगुप्त मौर्य के समय पुष्पगुप्त था तथा अशोक के समय तुषाश्त था।
• जिला शासक - इसके अधिकारी स्थानिक कहलाते थे।
• गोप - इसके अंतर्गत 10 गाँव होते थे।
• 6 समितियाँ - मेगस्थनीज की इंडिका किताब में 6 समिति का वर्णन है। ये समितियाँ इस प्रकार हैं - उद्योग, व्यापार, विक्रय निरीक्षण, कर वसूली, जन्म व मृत्यु प्रमाण-पत्र, विदेशियों की यात्रा।
• सैन्य प्रशासन - मेगस्थनीज ने सैन्य गतिविधियों के समन्वय के लिए छह उपसमितियों के साथ एक समिति का उल्लेख किया है। मौर्यकाल में पैदल सेना, घुड़सवार सेना, गज सेना तथा रथ सेना प्रमुख थी।
• न्याय व्यवस्था - मौर्यकाल में विभिन्न प्रकार के मामलों के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के न्यायालयों की व्यवस्था थी।
• कंटक - फोजदारी न्यायलय
• संस्था - गुッツचर विभाग
• मुद्रा व्यवस्था - पाँचवीं शताब्दी ईसा पूर्व में सर्वप्रथम सिक्के जारी किए गए थे। इन्हें आहत मुद्रा कहते थे। मासक तथा तापणी दो ताँबे के सिक्के थे। मौर्य प्रशासन के सिक्कों में मसूर, चंद्रमा तथा पर्वत की आकृति प्रमुख थी।
• गुप्तचर व्यवस्था - मौर्य काल में संस्था और संचरा नामक दो गुप्तचर संस्थाएँ थीं।
अशोक के अभिलेख:
• अभिलेखों को पढ़ने की शुरुआत जेम्स प्रिसेप ने 1837 में की थी।
• अशोक का सबसे छोटा अभिलेख रूम्मिर्दई है। रूम्मिर्दई है। स्तंभलेख से मौर्यकालीन अर्थव्यवस्था की जानकारी मिलती है।
• अशोक के अभिलेख मौर्यकाल की कला के उत्कृष्ट नमूने हैं।
• अशोक ने अपने राज्याभिषेक के आठ वर्ष बाद 9वें वर्ष में कलिंग की विजय की जिसका उल्लेख उनके 13वें शिलालेख में मिलती है।
• धर्मसहिष्णुता जो मौर्य प्रशासन का एक प्रमुख गुण अभिलक्षण था जिसका प्रमाण अशोक के शिलालेखों में मिलता है।
• दीर्घ शिलालेख - ये 8 स्थानों से प्राप्त हुए हैं - गिरनार - काठियावाड़, गुजरात (ब्राह्मी लिपि), सोपार - ठाणे, महाराष्ट्र (ब्राह्मी लिपि), ऐरगुड़ी - कुर्नुल जिला, आंध्र प्रदेश, धौला - जगन्नाथपुरी, उड़ीसा (ब्राह्मी लिपि), शाहबाज गढ़ी - पेशावर, पाकिस्तान (खरोष्ठी लिपि), मनसेहरा - हजारा, पाकिस्तान (खरोष्ठी लिपि)।
• लघु शिलालेख - ये शिलालेख कई स्थानों से प्राप्त हुए हैं - रूपनाथ - जबलपुर (मध्य प्रदेश), गुर्जरा - दतिया (मध्य प्रदेश), वैराट - राजस्थान, सारो मारो - शहडोल (मध्य प्रदेश), पानगुरड़िया - सीहोर (मध्य प्रदेश), मास्की - आंध्रप्रदेश, नेतूरू - कर्नाटक।
मुख्य बिंदु:
• सप्तांग सिद्धांत और केंद्रीय प्रशासन के विभिन्न विभाग।
• मौर्य कला (स्तंभ, स्तूप, महल) की विशेषताएँ।
• अशोक के अभिलेखों का वितरण और उनकी लिपियाँ।
आम गलतियाँ:
• मौर्य प्रशासन और अशोक के अभिलेखों के दोनों भागों को ठीक से अलग न करना।
• प्रांत, जिला और ग्राम स्तर की प्रशासनिक इकाइयों के नाम भूल जाना।
• गुप्तचर और सैन्य व्यवस्था का संक्षिप्त वर्णन न करना।
Exam Tips:
a) इस बड़े प्रश्न के उत्तर को उप-शीर्षकों (जैसे केंद्रीय प्रशासन, प्रांतीय शासन, कला, अभिलेख) में बाँटकर लिखें।
b) मौर्य अधिकारियों (जैसे सीताध्यक्ष, गोप, स्थानिक) के नाम जरूर लिखें।
c) जेम्स प्रिसेप और कलिंग युद्ध (13वाँ शिलालेख) का उल्लेख अवश्य करें।
Question 7: यह बीसवीं शताब्दी के एक सुविख्यात अभिलेख शास्त्री, डी.सी. सरकार का वक्तव्य है: भारतीयों के जीवन, संस्कृति और गतिविधियों का ऐसा कोई पक्ष नहीं है जिसका प्रतिबिंब अभिलेखों से नहीं है। चर्चा कीजिए।
Answer:
अभिलेख शास्त्री, डी.सी. सरकार द्वारा दिया गया तर्क कि भारतीयों के जीवन, संस्कृति और गतिविधियों का ऐसा कोई पक्ष नहीं है जिसका प्रतिबिंब अभिलेखों से नहीं है। यह कथन सत्य है। क्योंकि अभिलेख पुरातात्विक स्रोतों में बहुत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। अभिलेखों को एक स्थायी प्रमाण के रूप में देखा जाता है।
• अभिलेखों से हमें किसी राजा तथा उसके राज्य विस्तार के बारे में पता चलता है।
• राजाओं के नाम के बारे में जानकारी मिलती है। अशोक के लिए 'देवानाम प्रिय' और 'प्रियदर्शी' नाम प्रयोग किए गए हैं जिनकी जानकारी हमें अशोक के शिलालेखों से मिलती है।
• अभिलेखों से ऐतिहासिक घटनाओं की जानकारी प्राप्त होती है। जैसे कि समुद्रगुप्त के जीवन की घटनाओं का वर्णन इलाहाबाद प्रशस्ति से माना जा सकता है।
• अभिलेखों से राजाओं के चरित्र के बारे में पता चलता है। इलाहाबाद प्रशस्ति में समुद्रगुप्त को महान योद्धा तथा विद्वान बताया गया है।
• अभिलेखों से राजाओं तथा सामंतों के द्वारा किए गए भूमिदान, भू-व्यवस्था तथा उनके प्रशासन के बारे में भी जानकारी मिलती है।
• अभिलेख ऐतिहासिक काल निर्धारण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
• अभिलेख में वर्णित भाषा से उस काल के साहित्य के बारे में जानकारी मिलती है। जैसे कि - संस्कृत, पाली, प्राकृत, तमिल, तेलगु आदि भाषाओ का प्रयोग किया गया है। अभिलेखों की भाषा से हमें तत्कालीन धर्म की जानकारी देते हैं।
• अभिलेखों से वहाँ की सामाजिक व्यवस्था के बारे में पता चलता है। अतः यह कहना उचित होगा कि अभिलेख भारतीय जीवन, कला तथा संस्कृति के दर्पण हैं।
मुख्य बिंदु:
• अभिलेखों में राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक जीवन का समावेश।
• राजाओं की उपलब्धियों और प्रशस्तियों (जैसे इलाहाबाद प्रशस्ति) का विवरण।
• भाषाओं, लिपियों और भूमिदान की आर्थिक व्यवस्था की जानकारी।
आम गलतियाँ:
• डी.सी. सरकार के कथन के पक्ष में पर्याप्त तर्क न देना।
• केवल राजाओं तक अभिलेखों के महत्व को सीमित कर देना।
• साहित्यिक और सांस्कृतिक पक्षों की उपेक्षा करना।
Exam Tips:
a) कथन की पुष्टि में विभिन्न प्रकार के अभिलेखों (दान, प्रशस्ति, राजकीय आदेश) का जिक्र करें।
b) समुद्रगुप्त की इलाहाबाद प्रशस्ति का उदाहरण अवश्य दें।
c) अंत में निष्कर्ष लिखें कि अभिलेख 'इतिहास के दर्पण' हैं।
Question 8: मौर्य काल में विकसित राजत्व के विचारों की चर्चा कीजिए।
Answer:
उत्तर मौर्यकाल में विकसित राजत्व के विचार - उत्तर मौर्य काल में राजा उच्च स्थिति प्राप्त करने के लिए स्वयं को देवी-देवताओं के साथ जोड़ने लगे। कुषाण शासकों के राजत्व के प्रमुख प्रमाण उनके सिक्के तथा मूर्तियाँ से मिलती हैं। कुषाण शासकों के सिक्कों पर राजा की एक भव्य मूर्ति दिखाई गई है। सिक्के के दूसरी ओर एक देवता का चित्र है। कुषाण शासकों के ये सिक्के कुषाणों को देवता तुल्य दर्शने के लिए जारी किए गए थे। कई कुषाण शासकों ने अपने नाम के आगे देवपुत्र की उपाधि भी लगाई। गुप्त काल में भी राजत्व के विचारों का विकास हुआ। इस काल में कुछ शक्तिशाली सामंत राजा भी बन जाते थे।
गुप्त शासकों के इतिहास के निर्माण में साहित्य, सिक्कों और अभिलेखों की सहायता ली जाती है। इसके अलावा कवियों ने अपने राजा की प्रशंसा में कई प्रशस्तियों का सहारा लिया था।
उदाहरण: इलाहाबाद का प्रयाग प्रशस्ति अभिलेख जिसमें लेखक हरिषेण ने समुद्रगुप्त को बहुत ही शक्तिशाली सम्राट बताया था। ऐसी प्रशंसा के पीछे राजत्व के विचारों का ही उल्लेख हो रहा है।
मुख्य बिंदु:
• राजाओं द्वारा स्वयं को देवी-देवताओं से जोड़ना (जैसे देवपुत्र उपाधि)।
• कुषाण और गुप्त कालीन सिक्कों तथा मूर्तियों पर राजसी चित्रण।
• सामंतों के उभरने और प्रशस्तियों (हरिषेण की प्रयाग प्रशस्ति) के माध्यम से राजत्व का सुदृढ़ीकरण।
आम गलतियाँ:
• केवल मौर्य काल तक सीमित रहना, जबकि प्रश्न 'उत्तर मौर्य काल' के राजत्व पर भी केंद्रित है।
• 'देवपुत्र' उपाधि और कुषाण सिक्कों के महत्व को न समझाना।
• प्रशस्तियों की भूमिका का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) कुषाणों की 'देवपुत्र' उपाधि का विशेष रूप से उल्लेख करें।
b) गुप्त काल में प्रयाग प्रशस्ति और सामंतवाद के प्रभाव को समझाएँ।
c) राजत्व में धार्मिक और दैवीय तत्वों के समावेश को स्पष्ट करें।
Question 9: वर्णित काल में कृषि के तौर-तरीकों में किस हद तक परिवर्तन हुए ?
Answer:
वर्णित काल में कृषि के तौर-तरीकों में आए परिवर्तन - छठी शताब्दी ई. पू. से छठी शताब्दी ई.- तक किसान द्वारा कृषि उत्पादन के कई तरीकों को अपनाया गया। 600 ई. पू. से 600 ई. के समय राजाओं द्वारा करों की माँग बढ़ने लगी थी। करों की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए किसानों कृषि के तरीकों में कई परिवर्तन करना शुरू किया।
• उपज बढ़ाने के लिए कृत्रिम सिंचाई का प्रयोग किया गया। सिंचाई के लिए कुँओं, नहरों तथा तालाबों का प्रयोग किया गया था।
• लोहे के फाल वाले हल के प्रयोग से फसलों की उपज बढ़ने लगी। इसके बाद भी ऐसे हलों का प्रयोग कुछ भाग में ही रहा। किसान उपमहाद्वीप के पूर्वोत्तर तथा मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में रहते थे। उन्होंने खेती के लिए कुदाल का उपयोग किया।
• उपज बढ़ाने के लिए हल का प्रयोग किया। भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में लोहे के फाल वाले हलों द्वारा उर्वर भूमि की जुताई की जाने लगी।
• बड़े-बड़े जमीदार और ग्राम प्रधान किसानों पर नियंत्रण रखते थे। यह संभव है कि गाँवों में रहने वाले विभिन्न वर्गों में विभिन्नता का कारण भूमि के स्वामित्व, श्रम तथा नयी प्रौद्योगिकी के उपयोग पर आधारित हो। सुदर्शन झील का उल्लेख कई अभिलेखों से मिलता है।
मुख्य बिंदु:
• लोहे के फाल वाले हलों का व्यापक प्रसार।
• धान की रोपाई और कृत्रिम सिंचाई (कुएँ, तालाब, नहरें) का विकास।
• कृषि उत्पादन में वृद्धि और ग्रामीण समाज में असमानता का उभरना।
आम गलतियाँ:
• केवल हल के प्रयोग को लिखना, सिंचाई और रोपाई की तकनीक को छोड़ देना।
• पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों के कृषि तरीकों (कुदाल बनाम हल) का अंतर न बताना।
• कृषि परिवर्तनों के आर्थिक कारणों (करों की माँग) को न समझाना।
Exam Tips:
a) कृषि तकनीक के बदलावों को बिंदुओं में लिखें (जैसे लोहे का फाल, सिंचाई, धान की रोपाई)।
b) ग्रामीण समाज के स्तरीकरण (जमींदार, छोटे किसान, मजदूर) का उल्लेख करें।
c) सुदर्शन झील का उदाहरण सिंचाई व्यवस्था के संदर्भ में अवश्य दें।
Free study material for History
NCERT Solutions for Class 12 History Chapter 02 राजा किसान और नगर
Textbook Solutions for Class 12 History Chapter 02 राजा किसान और नगर
Access structured NCERT textbook solutions for Chapter 02 राजा किसान और नगर. Designed in alignment with the latest academic curriculum for Class 12 History, these answers cover all end-of-chapter exercises to support daily learning and homework completion.
Mastering Theoretical and Practical Questions
Beyond providing final answers, these guides offer step-by-step breakdowns for complex queries in the Class 12 History module. This approach helps students balance theoretical depth with practical problem-solving skills required for NCERT exams.
Effective Self-Study and Homework Assistance
These resources act as an effective roadmap for daily homework tasks and independent study. Supplement your review of Chapter 02 राजा किसान और नगर with official sample papers and interactive practice tests available on our platform free of charge.
FAQs
The complete and updated NCERT Solutions Class 12 History Chapter 02 Kings Farmers and Towns (राजा किसान और नगर) in Hindi is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 History are as per latest NCERT curriculum.
Yes, our experts have revised the NCERT Solutions Class 12 History Chapter 02 Kings Farmers and Towns (राजा किसान और नगर) in Hindi as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the History concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.
Toppers recommend using NCERT language because NCERT marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our NCERT Solutions Class 12 History Chapter 02 Kings Farmers and Towns (राजा किसान और नगर) in Hindi will help students to get full marks in the theory paper.
Yes, we provide bilingual support for Class 12 History. You can access NCERT Solutions Class 12 History Chapter 02 Kings Farmers and Towns (राजा किसान और नगर) in Hindi in both English and Hindi medium.
Yes, you can download the entire NCERT Solutions Class 12 History Chapter 02 Kings Farmers and Towns (राजा किसान और नगर) in Hindi in printable PDF format for offline study on any device.