Official NCERT Solutions for Class 12 History: Chapter 01 ईंटें मनके तथा अस्थियाँ
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Chapter-wise Solutions for History: Chapter 01 ईंटें मनके तथा अस्थियाँ
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Question 1: हड़प्पा सभ्यता के शहरों में लोगों को उपलब्ध भोजन सामग्री की सूची बनाइए। इन वस्तुओं को उपलब्ध कराने वाले समूहों की पहचान कीजिए।
Answer:
हड़प्पा सभ्यता के शहरों में विभिन्न प्रकार की भोजन सामग्रियों का उपयोग किया जाता था। पुरातत्वविदों ने वहाँ से मिले पौधों और जानवरों के अवशेषों के आधार पर भोजन सामग्री का पता लगाया है।
हड़प्पा सभ्यता में निम्नलिखित भोजन सामग्रियाँ उपलब्ध थीं:
1. अनाज और पौधे: गेहूँ, जौ, दाल, सफेद चना, तिल, चावल, बाजरा, ज्वार और विभिन्न प्रकार के फल जैसे खरबूजा।
2. पशु उत्पाद: दूध और इसके उत्पाद, तथा विभिन्न प्रकार का मांस जैसे मछली, भेड़, बकरी, सूअर और गोमांस।
इन वस्तुओं को उपलब्ध कराने वाले प्रमुख समूह निम्नलिखित थे:
• शिकारी और संग्राहक: जो जंगलों से कंदमूल, फल और शिकार प्राप्त करते थे।
• किसान: जो खेतों में विभिन्न प्रकार के अनाज और फसलें उगाते थे।
• पशुपालक: जो पशुओं को पालकर दूध, मांस और अन्य उत्पाद उपलब्ध कराते थे।
• मछुआरे: जो नदियों और तालाबों से मछली पकड़ते थे।
मुख्य बिंदु:
• हड़प्पावासी शाकाहारी और मांसाहारी दोनों प्रकार का भोजन करते थे।
• विभिन्न अनाजों और बीजों के अवशेष मिलने से उनकी कृषि की उन्नत जानकारी मिलती है।
• समाज के विभिन्न वर्ग अपनी आजीविका के लिए कृषि, पशुपालन और शिकार पर निर्भर थे।
आम गलतियाँ:
• केवल अनाजों का उल्लेख करना और पशु उत्पादों को छोड़ देना।
• भोजन सामग्री उपलब्ध कराने वाले समूहों के बजाय केवल खाद्य पदार्थों के नाम लिखना।
• संकलित जानकारी को स्पष्ट बिंदुओं में विभाजित न करना।
Exam Tips:
a) भोजन सामग्री और उन्हें उपलब्ध कराने वाले समूहों को अलग-अलग शीर्षकों के तहत लिखें ताकि उत्तर स्पष्ट लगे।
b) प्राप्त अनाजों के वैज्ञानिक या सामान्य नाम जैसे गेहूँ, जौ, बाजरा आदि का सटीक उल्लेख करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और तथ्यात्मक बनाए रखें।
Question 2: पुरातत्वविद हड़प्पा समाज में सामाजिक-आर्थिक भिन्नताओं का पता किस प्रकार लगाते हैं? वे कौन सी भिन्नताओं पर ध्यान देते हैं?
Answer:
पुरातत्वविद हड़प्पा समाज में सामाजिक और आर्थिक भिन्नताओं का पता लगाने के लिए मुख्य रूप से दो प्रमुख विधियों का अध्ययन करते हैं: समाधान (दफनाने के तरीके) और वस्तुएँ (पुरावस्तुएँ)।
1. पुरावस्तुओं का वर्गीकरण:
• पुरातत्वविद वस्तुओं को दो वर्गों में विभाजित करते हैं—उपयोगी और विलासिता की वस्तुएँ।
• सामान्य वस्तुएँ: जो पत्थर या मिट्टी जैसे सामान्य पदार्थों से आसानी से बन जाती हैं और बस्तियों में सर्वत्र मिलती हैं, जैसे चक्कियाँ, मृद्भाण्ड, सुई आदि।
• विलासिता की वस्तुएँ: जो दुर्लभ, महँगे और कठिन तकनीकों से बने पदार्थों से होती थीं, जैसे फाइकस (फायन्स) के छोटे पात्र, लापीस लाजुली (मणि), सोने के मनके आदि। ऐसी वस्तुएँ केवल कुछ ही बड़ी बस्तियों से मिली हैं।
2. समाधानों का अध्ययन:
• हड़प्पा काल में मृतकों को आमतौर पर गर्तों (गड्ढों) में दफनाया जाता था। कुछ कब्रों की बनावट से सामाजिक भिन्नता का संकेत मिलता है।
• मृतकों के साथ विभिन्न प्रकार के आभूषण, ताँबे के दर्पण और मनके रखे जाते थे, जो इस बात का प्रमाण हैं कि कुछ लोग अधिक संपन्न थे।
मुख्य बिंदु:
• सामाजिक भिन्नता जानने के लिए पुरावस्तुओं की प्रकृति (सामान्य या दुर्लभ) का अध्ययन किया जाता है।
• समाधानों में दफन की गई वस्तुओं से मृतकों की आर्थिक स्थिति का अनुमान लगाया जाता है।
• विलासिता की वस्तुएँ उच्च वर्ग की उपस्थिति को दर्शाती हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल सामाजिक भिन्नता लिखकर आर्थिक भिन्नता के स्रोतों को छोड़ देना।
• फायन्स और अन्य दुर्लभ सामग्रियों का उल्लेख न करना।
• समाधानों के महत्व को गलत तरीके से समझाना।
Exam Tips:
a) पुरावस्तुओं के दोनों प्रकार (उपयोगी और विलासिता) को उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
b) समाधानों में मिलने वाली सामग्री और उनके सामाजिक निहितार्थ को बिंदुवार समझाएँ।
c) उत्तर में 'पुरातत्वविदों के दृष्टिकोण' शब्द का सही प्रयोग करें।
Question 3: क्या आप इस तथ्य से सहमत हैं कि हड़प्पा सभ्यता के शहरों की जल निकास प्रणाली, नगर योजना की ओर संकेत करती है? अपने उत्तर के कारण बताइए।
Answer:
हाँ, हम इस कथन से पूर्णतः सहमत हैं कि हड़प्पा सभ्यता के शहरों की जल निकास प्रणाली एक उत्कृष्ट नगर योजना की ओर संकेत करती है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
1. सड़कों और गलियों का ग्रिड पैटर्न: हड़प्पा के शहर एक निश्चित योजना के तहत बसाए गए थे जहाँ सड़कें और गलियाँ एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं।
2. नालियों का निर्माण: घरों की गंदी नालियों को गली की मुख्य नालियों से जोड़ा गया था। नालियाँ ईंटों से ढकी होती थीं और उनकी सफाई के लिए जगह-जगह पर संपिंड (हौज) बनाए गए थे।
3. व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्वच्छता: घरों की दीवारें सड़कों की तरफ से इस प्रकार बनाई जाती थीं कि पानी आसानी से बहकर नालियों में जाए। हर घर का एक कम से कम एक दीवार गली से सटा होता था ताकि गंदा पानी सीधे बाहर जा सके।
4. उत्कृष्ट इंजीनियरिंग: जल निकासी प्रणाली इतनी व्यवस्थित थी कि यह प्राचीन विश्व में अन्यत्र देखने को नहीं मिलती।
मुख्य बिंदु:
• हड़प्पा की नगर योजना ग्रिड पद्धति पर आधारित थी।
• जल निकासी प्रणाली उच्च कोटि की स्वच्छता और इंजीनियरिंग का प्रमाण है।
• ढकी हुई नालियाँ और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता था।
आम गलतियाँ:
• जल निकासी और नगर योजना को अलग-अलग विषय मान लेना, जबकि दोनों आपस में जुड़े हैं।
• सड़कों के समकोण पर काटने के नियम का उल्लेख न करना।
• नालियों की ढकी हुई संरचना के बारे में न बताना।
Exam Tips:
a) नगर योजना के प्रमुख लक्षणों (सड़कें, नालियाँ, घर) को अलग-अलग बिंदुओं में लिखें।
b) यह स्पष्ट करें कि कैसे जल निकास प्रणाली हड़प्पावासियों की स्वच्छता के प्रति जागरूकता को दर्शाती है।
c) उत्तर में 'समकोण' और 'ढकी हुई नालियाँ' जैसे तकनीकी शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
Question 4: हड़प्पा सभ्यता में मनके बनाने के लिए प्रयुक्त पदार्थों की सूची बनाइए। कोई भी एक प्रकार का मनका बनाने की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
Answer:
हड़प्पा सभ्यता में मनके बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के पदार्थों का उपयोग किया जाता था।
प्रयुक्त पदार्थों की सूची:
1. पत्थर: कार्नेलियन (सुंदर लाल रंग का पत्थर), जैस्पर, स्फटिक, क्वार्ट्ज और सेलखड़ी (सॉफ्ट स्टोन)।
2. धातुएँ: ताँबा, काँसा और सोना।
3. अन्य पदार्थ: शंख, फैयांस (फाइन्स) और पक्की हुई चिकनी मिट्टी।
मनके बनाने की प्रक्रिया (विशेषकर सेलखड़ी या कार्नेलियन के मनके):
• कच्चे माल की प्राप्ति और तैयारी: कार्नेलियन को पहले पीले रंग के कच्चे माल और उत्पादन के विभिन्न चरणों में आग में पकाकर लाल रंग में बदला जाता था।
• छीलने और काटने की प्रक्रिया: कठोर पत्थरों को छोटे टुकड़ों में तोड़कर उन्हें बारीक छीलकर अंतिम रूप दिया जाता था।
• छिद्र करने की तकनीक: चहुँदड़ों, लोथल और धोलावीरा से छेद करने के विशेष उपकरण मिले हैं। सेलखड़ी जैसे नरम पत्थरों को आसानी से तराशा जा सकता था, जबकि कठोर पत्थरों के लिए विशेष ड्रिल या सुइयों का प्रयोग होता था।
• अंतिम रूप: घिसाई, पॉलिश और अंत में छेद करने के बाद मनका पूरी तरह तैयार होता था।
मुख्य बिंदु:
• मनके कई प्रकार के पत्थरों, धातुओं और शंखों से बनाए जाते थे।
• कार्नेलियन को लाल रंग देने के लिए उसे आग में पकाया जाता था।
• चहुँदड़ो और लोथल मनका निर्माण के प्रमुख केंद्र थे।
आम गलतियाँ:
• केवल पदार्थों के नाम लिखकर निर्माण प्रक्रिया का वर्णन छोड़ देना।
• कार्नेलियन पत्थर को पकाने की प्रक्रिया का उल्लेख न करना।
• छिद्र करने की तकनीकी जटिलता को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) पदार्थों की सूची को श्रेणीबद्ध (पत्थर, धातु, अन्य) रूप में लिखें।
b) मनका निर्माण प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से (जैसे- छीलना, पकाना, छेद करना) समझाएँ।
c) उत्पादन केंद्रों जैसे चहुँदड़ो और लोथल का नाम अवश्य उल्लेखित करें।
Question 5: चित्र 1 को देखिए और इसका वर्णन कीजिए। शव किस प्रकार रखा गया है? उसके समीप कौन सी वस्तुएँ रखी गई हैं? क्या शरीर पर कोई पुरावस्तु है? क्या इनसे कंकाल के लिंग का पता चलता है?
Answer:
चित्र 1 में हड़प्पाकालीन एक समाधान (कब्र) का दृश्य दिखाया गया है, जिसके आधार पर निम्नलिखित विवरण दिया जा सकता है:
1. शव को रखने का तरीका: शव को सामान्यतः उत्तर-दक्षिण दिशा में लिटाकर दफनाया जाता था। सिर उत्तर की ओर और पैर दक्षिण की ओर होते थे।
2. समीप रखी वस्तुएँ: शव के समीप मृद्भाण्ड (मिट्टी के बर्तन), आभूषण और कभी-कभी दैनिक उपयोग की वस्तुएँ रखी जाती थीं जो परलोक में उनके उपयोग की मान्यता को दर्शाती हैं।
3. शरीर पर पुरावस्तुएँ: कुछ कब्रों में मृतकों के शरीर पर मनकों के हार, ताँबे के दर्पण या आभूषण मिले हैं।
4. कंकाल के लिंग का निर्धारण: शव के साथ मिले आभूषणों या अन्य वस्तुओं के आधार पर कभी-कभी पुरातत्वविद लिंग का अनुमान लगाते हैं (जैसे महिलाओं की कब्रों में आभूषण मिलना), लेकिन यह पूरी तरह निश्चित नहीं होता कि केवल आभूषणों से ही लिंग की सटीक पहचान की जा सके।
मुख्य बिंदु:
• हड़प्पा सभ्यता में मृतकों को उत्तर-दक्षिण दिशा में दफनाया जाता था।
• कब्रों में बर्तन और आभूषण जैसी सामग्रियाँ रखना उनकी धार्मिक या सांस्कृतिक मान्यताओं का हिस्सा था।
• लिंग की पहचान कंकाल की शारीरिक बनावट और साथ की वस्तुओं के आधार पर की जाती है।
आम गलतियाँ:
• कब्र में रखी जाने वाली वस्तुओं की उपेक्षा करना।
• कंकाल के लिंग निर्धारण को पूरी तरह अचूक मान लेना।
• उत्तर-दक्षिण दिशा की स्थिति का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) समाधान की दिशा (उत्तर-दक्षिण) को मुख्य रूप से दर्शाएँ।
b) कब्रों में मिलने वाली वस्तुओं और उनके प्रतीकात्मक अर्थ को स्पष्ट करें।
c) कंकाल के लिंग निर्धारण में आने वाली कठिनाइयों का संक्षिप्त उल्लेख करें।
Question 6: मोहनजोदड़ो की कुछ विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Answer:
मोहनजोदड़ो हड़प्पा सभ्यता का सबसे प्रसिद्ध और सुव्यवस्थित नगर था। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. सुनियोजित नगर योजना: यह शहर दो भागों में विभाजित था—छोटा लेकिन ऊँचा 'दुर्ग' (Citadel) और बड़ा तथा नीचे बसा 'निचला शहर'।
2. विशाल स्नानागार (Great Bath): दुर्ग क्षेत्र में एक अत्यंत सुंदर और विशाल स्नानागार मिला है, जिसके चारों ओर सीढ़ियाँ बनी थीं। इसका प्रयोग संभवतः किसी विशेष अनुष्ठानिक स्नान के लिए किया जाता था।
3. अन्नगार (Granary): यहाँ एक बड़ा अन्नगार मिला है जहाँ अनाज सुरक्षित रखा जाता था।
4. उत्कृष्ट जल निकासी प्रणाली: घरों का गंदा पानी ढकी हुई नालियों के माध्यम से बाहर निकलता था, जो नगर की स्वच्छता का उत्कृष्ट प्रमाण है।
5. सड़क व्यवस्था: सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं, जिससे पूरा शहर आयताकार खंडों में विभाजित प्रतीत होता था।
मुख्य बिंदु:
• मोहनजोदड़ो हड़प्पा सभ्यता का सबसे बड़ा और सुनियोजित नगर था।
• विशाल स्नानागार और अन्नगार यहाँ की वास्तुकला के उत्कृष्ट नमूने हैं।
• शहर का दो भागों (दुर्ग और निचला शहर) में विभाजन इसकी सामाजिक व्यवस्था को दर्शाता है।
आम गलतियाँ:
• विशाल स्नानागार के धार्मिक या अनुष्ठानिक महत्व का उल्लेख न करना।
• दुर्ग और निचले शहर की स्थिति को स्पष्ट न करना।
• केवल एक या दो विशेषताओं तक उत्तर सीमित रखना।
Exam Tips:
a) मोहनजोदड़ो की विशेषताओं को शीर्षकों (जैसे- नगर योजना, विशाल स्नानागार, जल निकास) के अंतर्गत लिखें।
b) 'दुर्ग' और 'निचला शहर' शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
c) उत्तर को बिंदुवार लिखकर आकर्षक बनाएँ।
Question 7: हड़प्पा सभ्यता में शिल्प उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की सूची बनाइए तथा चर्चा कीजिए कि ये किस प्रकार प्राप्त किए जाते होंगे।
Answer:
हड़प्पा सभ्यता में शिल्प उत्पादन (जैसे मनके, मोहरें, आभूषण आदि) के लिए विभिन्न प्रकार के कच्चे माल की आवश्यकता होती थी।
कच्चे माल की सूची:
• पत्थर: सेलखड़ी, कार्नेलियन, जैस्पर, स्फटिक, क्वार्ट्ज और लापीस लाजुली (वैदूर्य मणि)।
• धातुएँ: ताँबा, काँसा और सोना।
• अन्य सामग्री: शंख, पक्की मिट्टी और लकड़ी।
कच्चे माल की प्राप्ति के तरीके:
1. स्थानीय उपलब्धता: कुछ सामग्रियाँ जैसे सेलखड़ी और चिकनी मिट्टी स्थानीय स्तर पर मिल जाती थीं।
2. अभियान भेजना: ताँबे के लिए खेतड़ी क्षेत्र (राजस्थान) और सोने के लिए दक्षिण भारत में अभियान भेजे जाते थे।
3. व्यापारिक संबंध: लाजवर्द मणि (लापीस लाजुली) अफगानिस्तान के बदख्शाँ क्षेत्र से और कार्नेलियन गुजरात से मँगाया जाता था।
मुख्य बिंदु:
• शिल्प उत्पादन के लिए कच्चा माल स्थानीय और बाहरी दोनों क्षेत्रों से प्राप्त किया जाता था।
• खेतड़ी (ताँबा) और दक्षिण भारत (सोना) प्रमुख स्रोत थे।
• लंबी दूरी के व्यापार का नेटवर्क हड़प्पा सभ्यता में स्थापित था.
आम गलतियाँ:
• केवल कच्चे माल की सूची लिखना और उनकी प्राप्ति के स्रोतों का वर्णन न करना।
• खेतड़ी और बदख्शाँ जैसे महत्वपूर्ण स्थलों के नाम भूल जाना।
• धातुओं और पत्थरों को अलग-अलग वर्गीकृत न करना।
Exam Tips:
a) कच्चे माल की सूची और प्राप्ति के तरीकों को अलग-अलग अनुच्छेदों में लिखें।
b) राजस्थान के खेतड़ी और अफगानिस्तान के क्षेत्रों का विशेष उल्लेख करें।
c) मानचित्र के दृष्टिकोण से भी इन स्थानों को याद रखें।
Question 8: चर्चा कीजिए कि पुरातत्वविद किस प्रकार अतीत का पुनर्निर्माण करते हैं?
Answer:
पुरातत्वविद अतीत का पुनर्निर्माण मुख्य रूप से भौतिक अवशेषों, पुरावस्तुओं और उनके वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर करते हैं। इसके प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं:
1. वस्तुओं की प्राप्ति और वर्गीकरण: पुरातत्वविद खुदाई में प्राप्त वस्तुओं (बर्तन, औजार, आभूषण आदि) को उनकी उपयोगिता और सामग्री के आधार पर वर्गीकृत करते हैं।
2. सामाजिक और आर्थिक भिन्नताओं का अध्ययन: कब्रों में मिलने वाली वस्तुओं और विलासिता की वस्तुओं के आधार पर समाज की आर्थिक स्थिति का आकलन किया जाता है।
3. उपयोगिता का निर्धारण: किसी वस्तु के कार्य को समझने के लिए आधुनिक प्रयोगों या साक्ष्यों की तुलना की जाती है (जैसे पीसने के उपकरण)।
4. धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का अध्ययन: टेराकोटा की मूर्तियाँ, मुहरों पर बने चित्र और समाधान पद्धतियाँ धार्मिक मान्यताओं के पुनर्निर्माण में मदद करती हैं।
5. पर्यावरणीय साक्ष्य: पौधों के अवशेष, जानवरों की हड्डियाँ और परागकणों का विश्लेषण करके तत्कालीन जलवायु और खान-पान का पता लगाया जाता है।
मुख्य बिंदु:
• अतीत का पुनर्निर्माण केवल कल्पना पर नहीं बल्कि वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित होता है।
• पुरावस्तुओं का वर्गीकरण और उनका विश्लेषण सबसे महत्वपूर्ण चरण है।
• धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक जीवन को समझने के लिए बहु-आяमी स्रोतों का प्रयोग किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• केवल साहित्यिक साक्ष्यों की बात करना जबकि हड़प्पा के संदर्भ में लिपि अभी तक पढ़ी नहीं गई है।
• वर्गीकरण और विश्लेषण की प्रक्रिया को स्पष्ट न करना।
• भौतिक अवशेषों के महत्व को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) यह स्पष्ट करें कि हड़प्पा सभ्यता की लिपि न पढ़े जाने के कारण पुरातत्वविदों को भौतिक साक्ष्यों पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
b) वर्गीकरण, वर्गीकरण के आधार और निष्कर्ष निकालने की प्रक्रिया को क्रमिक रूप से लिखें।
c) अपने उत्तर में 'भौतिक अवशेष' और 'वैज्ञानिक विश्लेषण' शब्दों का प्रयोग करें।
Question 9: हड़प्पा समाज में शासकों द्वारा किए जाने वाले संभावित कार्यों की चर्चा कीजिए।
Answer:
हड़प्पा सभ्यता में शासन व्यवस्था का स्वरूप स्पष्ट नहीं है, फिर भी पुरातात्विक साक्ष्यों और इतिहासकारों के विचारों के आधार पर शासकों द्वारा किए जाने वाले संभावित कार्य निम्नलिखित हो सकते हैं:
1. नगर योजना और निर्माण कार्य: शहरों का सुनियोजित विकास, बड़ी सड़कों, नालियों और विशाल भवनों (जैसे दुर्ग और स्नानागार) का निर्माण कार्य शासकों की देखरेख में होता होगा।
2. कृषि और व्यापार का नियंत्रण: शहरों के लिए अनाज की आपूर्ति सुनिश्चित करना और लंबी दूरी के व्यापार (जैसे ताँबा, सोना और बहुमूल्य पत्थर मँगाना) का नियंत्रण करना।
3. रक्षा और सुरक्षा: बाहरी आक्रमणों या बाढ़ जैसी आपदाओं से नगर की सुरक्षा के लिए दीवारें और किलेबंदी का निर्माण कराना।
4. धार्मिक और अनुष्ठानिक कार्य: समाज में एकता बनाए रखने के लिए धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन करना, जिससे शासक अपनी वैधता सिद्ध करते हों।
5. मानकीकृत वजन और माप प्रणाली: व्यापार में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बाट और माप के मानक तय करना।
मुख्य बिंदु:
• हड़प्पा सभ्यता में किसी एक केंद्रीय शासक के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलते हैं, लेकिन विशाल निर्माण कार्य किसी केंद्रीय सत्ता की ओर संकेत करते हैं।
• नगर नियोजन, मानकीकृत बाट और व्यापार का नियंत्रण शासकों के प्रमुख कार्य रहे होंगे।
• कुछ विद्वान मानते हैं कि यहाँ कोई एक राजा नहीं बल्कि कई शासक रहे होंगे।
आम गलतियाँ:
• यह दावा करना कि हड़प्पा में निश्चित रूप से एक ही राजा था, जबकि इतिहासकार इस पर बंटे हुए हैं।
• शासकों के प्रशासनिक और आर्थिक कार्यों को छोड़ देना।
• केवल धार्मिक कार्यों तक शासक की भूमिका सीमित रखना।
Exam Tips:
a) उत्तर की शुरुआत में यह लिखें कि हड़प्पा में शासन का स्वरूप विवादास्पद है।
b) शासकों के संभावित कार्यों को बिंदुओं में (जैसे नगर निर्माण, व्यापार नियंत्रण, सुरक्षा) लिखें।
c) इतिहासकारों के विभिन्न मतों (जैसे मैके, पिगट) का संक्षिप्त संदर्भ दे सकते हैं।
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