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Question 10.1: मोनोसैकेराइड क्या होते हैं?
Answer:
मोनोसैकेराइड ऐसे कार्बोहाइड्रेट होते हैं जिन्हें पॉलीहाइड्रॉक्सी एल्डिहाइड या कीटोन की सरल इकाइयों देने के लिए आगे जल अपघटित नहीं किया जा सकता है।
मोनोसैकेराइड्स को कार्बन परमाणुओं की संख्या और उनमें मौजूद कार्यात्मक समूह के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
एल्डिहाइड समूह वाले मोनोसैकेराइड को एल्डोस कहा जाता है और कीटो समूह वाले मोनोसैकेराइड को किटोस के रूप में जाना जाता है।
मुख्य बिंदु:
• इनका सरल रासायनिक सूत्र \( C_n(H_2O)_n \) होता है।
• ये जल में अत्यधिक घुलनशील होते हैं।
• ग्लूकोज और फ्रक्टोज इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
आम गलतियाँ:
• इन्हें अन्य कार्बोहाइड्रेट्स की तरह जल-अपघटित करने का प्रयास करना।
• एल्डोज और कीटोस में अंतर स्पष्ट न करना।
• केवल ग्लूकोज को ही एकमात्र मोनोसैकेराइड समझना।
Exam Tips:
a) परिभाषा लिखते समय 'पॉलीहाइड्रॉक्सी' शब्द का उल्लेख अवश्य करें।
b) वर्गीकरण के आधार (कार्बन संख्या और क्रियात्मक समूह) को स्पष्ट रूप से बताएं।
c) उदाहरण के साथ उत्तर समाप्त करें ताकि प्रभाव अच्छा पड़े।
Question 10.2: अपचायी शर्करा क्या होती है?
Answer:
अपचायी शर्करा वे कार्बोहाइड्रेट हैं जो फेलिंग विलयन और टॉलेन अभिकर्मक को अपचयित करते हैं।
सुक्रोज को छोड़कर सभी मोनोसैकेराइड और डाइसैकेराइड, अपचायी शर्करा हैं।
मुख्य बिंदु:
• इनमें मुक्त एल्डिहाइड या कीटोन समूह उपस्थित होता है।
• ये फेलिंग विलयन के साथ लाल अवक्षेप देते हैं।
• ये टॉलेन अभिकर्मक के साथ रजत दर्पण बनाते हैं।
आम गलतियाँ:
• सुक्रोज को अपचायी शर्करा मान लेना।
• अभिकर्मकों के नाम गलत लिखना।
• अपचयन की प्रक्रिया को ऑक्सीकरण समझ लेना।
Exam Tips:
a) अपचायी शर्करा की पहचान के लिए अभिकर्मकों (फेलिंग और टॉलेन) का उल्लेख जरूर करें।
b) सुक्रोज का अपवाद हमेशा याद रखें और लिखें।
c) संक्षिप्त और सटीक परिभाषा लिखें।
Question 10.3: पौधों में कार्बोहाइड्रेट्स के दो मुख्य कार्यों को लिखिए।
Answer:
पौधों में कार्बोहाइड्रेट के दो मुख्य कार्य हैं:
1. पॉलीसैकेराइड जैसे स्टार्च भंडारण अणुओं के रूप में काम करते हैं।
2. सेलुलोज, जो एक पॉलीसैकेराइड है, कोशिका भित्ति के निर्माण के लिए प्रयोग किया जाता है।
मुख्य बिंदु:
• स्टार्च पौधों में ऊर्जा का मुख्य रिजर्व स्रोत है।
• सेलुलोज पौधों को संरचनात्मक मजबूती प्रदान करता है।
• ये पादप शरीर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आम गलतियाँ:
• जन्तुओं के कार्यों को पौधों के कार्यों में मिला देना।
• केवल ऊर्जा उत्पादन लिखना और संरचनात्मक कार्य भूल जाना।
• स्टार्च और सेलुलोज की भूमिका को आपस में बदलना।
Exam Tips:
a) बिंदुओं में उत्तर लिखें ताकि परीक्षक को स्पष्टता दिखे।
b) ऊर्जा भंडारण और संरचनात्मक निर्माण दोनों पक्षों को शामिल करें।
c) सटीक शब्दावली का प्रयोग करें।
Question 10.4: निम्नलिखित को मोनोसैकेराइड तथा डाइसैकेराइड में वर्गीकृत कीजिए - राइबोज, 2-D ऑक्सीराइबोज, माल्टोज, गैलैक्टोज, फ्रक्टोज तथा लैक्टोज
Answer:
मोनोसैकेराइड: राइबोज, 2-D ऑक्सीराइबोज, गैलैक्टोज, फ्रक्टोज
डाइसैकेराइड: माल्टोज, लैक्टोज
मुख्य बिंदु:
• मोनोसैकेराइड एक इकाई से बने होते हैं।
• डाइसैकेराइड दो मोनोसैकेराइड इकाइयों से मिलकर बनते हैं।
• सभी दिए गए नामों को सही श्रेणियों में बांटा गया है।
आम गलतियाँ:
• माल्टोज या लैक्टोज को मोनोसैकेराइड समझ लेना।
• राइबोज और डीऑक्सीराइबोज को डाइसैकेराइड मान लेना।
• वर्गीकरण में नाम छोड़ देना।
Exam Tips:
a) दो अलग-अलग headings बनाकर उत्तर दें।
b) प्रत्येक नाम की सही वर्तनी लिखें।
c) वर्गीकरण का आधार स्पष्ट रखें।
Question 10.5: ग्लाइकोसाइडी बंध से आप क्या समझते हैं?
Answer:
ग्लाइकोसाइडी बंध एक पानी के अणु के नुकसान से ऑक्सीजन परमाणु के माध्यम से दो मोनोसैकेराइड इकाइयों के बीच बनने वाले बंध को संदर्भيت करता है।
उदाहरण के लिए, एक सुक्रोज अणु में, दो मोनोसैकेराइड इकाइयाँ, ग्लूकोज और β-फ्रक्टोज, एक ग्लाइकोसाइडी बंध द्वारा एक साथ जुड़ते हैं।
मुख्य बिंदु:
• यह दो मोनोसैकेराइड्स के बीच बनता है।
• इसमें निर्जलीकरण (जल का निकलना) होता है।
• यह ईथर लिंकेज (-O-) के रूप में होता है।
आम गलतियाँ:
• बंध को पेप्टाइड बंध समझ लेना।
• जल के जुड़ने की प्रक्रिया लिखना जबकि इसमें जल निकलता है।
• सही उदाहरण न देना।
Exam Tips:
a) ऑक्सीजन सेतु (Oxygen bridge) का उल्लेख जरूर करें।
b) सुक्रोज का उदाहरण देकर समझाएं।
c) रासायनिक दृष्टि से इसे ईथर बंध के रूप में परिभाषित करें।
Question 10.6: ग्लाइकोजन क्या होता है तथा ये स्टार्च से किस प्रकार भिन्न है?
Answer:
ग्लाइकोजन एक कार्बोहाइड्रेट (पॉलिसैकेराइड) है। जानवरों में, कार्बोहाइड्रेट ग्लाइकोजन के रूप में जमा होते हैं।
स्टार्च एक कार्बोहाइड्रेट है जिसमें दो घटक होते हैं - एमाइlose (15-20%) और एमाइलोपेक्टिन (80-85%)।
ग्लाइकोजन में केवल एक घटक होता है जिसकी संरचना एमाइलोपेक्टिन के समान होती है। इसके अलावा, ग्लाइकोजन एमाइलोपेक्टिन की तुलना में अधिक शाखित होता है।
मुख्य बिंदु:
• ग्लाइकोजन को जंतु स्टार्च भी कहा जाता है।
• यह यकृत और मांसपेशियों में संचित होता है।
• यह स्टार्च की तुलना में अधिक अत्यधिक शाखित होता है।
आम गलतियाँ:
• ग्लाइकोजन को पौधों का भोजन मान लेना।
• स्टार्च और ग्लाइकोजन की संरचना में अंतर न स्पष्ट करना।
• एमाइलोज और एमाइलोपेक्टिन का प्रतिशत गलत लिखना।
Exam Tips:
a) जंतुओं में संचय का विशेष उल्लेख करें।
b) शाखन (branching) के अंतर को प्रमुखता से बताएं।
c) स्पष्ट बिंदुओं में तुलना करें।
Question 10.7: (अ) सुक्रोज तथा (ब) लैक्टोज के जल-अपघटन से कौन से उत्पाद प्राप्त होते हैं?
Answer:
(अ) जल अपघटन पर, सुक्रोज α-D-ग्लूकोज का एक अणु और β-D-फ्रक्टोज का एक अणु देता है।
(ब) लैक्टोज का जल अपघटन β-D-गैलेक्टोज और β-D-ग्लूकोज देता है।
मुख्य बिंदु:
• सुक्रोज के जल-अपघटन से ग्लूकोज और फ्रक्टोज मिलते हैं।
• लैक्टोज के जल-अपघटन से ग्लूकोज और गैलेक्टोज मिलते हैं।
• ये दोनों डाइसैकेराइड हैं।
आम गलतियाँ:
• α और β विन्यासों को ध्यान में न रखना।
• उत्पादों के नाम गलत लिखना।
• जल-अपघटन की प्रक्रिया को उल्टा लिखना।
Exam Tips:
a) प्रश्नों के भागों (अ) और (ब) को अलग-अलग हल करें।
b) विन्यास (α और β) का सही उल्लेख करें।
c) रासायनिक नामों को पूरा लिखें।
Question 10.8: स्टार्च तथा सेलुलोज में मुख्य संरचनात्मक अंतर क्या है?
Answer:
स्टार्च में दो घटक होते हैं। एमाइलोज α-D-(+)-ग्लूकोज इकाइयों की एक लंबी रेखीय श्रृंखला है जो \(C_1-C_4\) ग्लाइकोसाइडी बंध (\(α\)-बंध) से जुड़ती है।
एमाइलोपेक्टिन α-D-ग्लूकोज इकाइयों का एक शाखित-श्रृंखला बहुलक है, जिसमें श्रृंखला \(C_1-C_4\) ग्लाइकोसाइडी बंध द्वारा बनाई जाती है और शाखित \(C_1-C_6\) ग्लाइकोसाइडी बंध द्वारा होती है।
दूसरी ओर, सेलुलोज \(C_1-C_4\) ग्लाइकोसाइडी बंध (\(β\)-बंध) से जुड़ने वाली β-D-ग्लूकोज इकाइयों की एक सीधी-श्रृंखला पॉलीसैकेराइड है।
मुख्य बिंदु:
• स्टार्च में α-ग्लाइकोसाइडी बंध होता है।
• सेलुलोज में β-ग्लाइकोसाइडी बंध होता है।
• स्टार्च ऊर्जा देता है जबकि सेलुलोज संरचनात्मक कार्य करता है।
आम गलतियाँ:
• α और β बंधों के स्थानों को मिला देना।
• ग्लाइकोसाइडी बंध के कार्बन नंबर गलत लिखना।
• अंतर को स्पष्ट रूप से न समझाना।
Exam Tips:
a) बंधों के प्रकार (\(α\) और \(β\)) को रेखांकित करें।
b) संरचनात्मक भिन्नता को स्पष्ट रूप से बिंदुवार लिखें।
c) कार्बन संख्याओं (\(C_1-C_4\) आदि) का सही उल्लेख करें।
Question 10.9: क्या होता है जब D-ग्लूकोज की अभिक्रिया निम्नलिखित अभिकर्मकों से करते हैं? (i) HI (ii) ब्रोमीन जल (iii) \(HNO_3\)
Answer:
(i) जब D-ग्लूकोज को HI के साथ लंबे समय तक गर्म किया जाता है, तो n-हेक्सेन बनता है।
(ii) जब D-ग्लूकोज को \(Br_2\) पानी से उपचारित किया जाता है, तो D-ग्लूकोनिक अम्ल उत्पन्न होता है।
(iii) \(HNO_3\) से उपचारित करने पर D-ग्लूकोज सैकारिक अम्ल देने के लिए ऑक्सीकृत हो जाता है।
मुख्य बिंदु:
• HI के साथ अपचयन से सभी 6 कार्बन सीधी श्रृंखला में जुड़ जाते हैं।
• ब्रोमीन जल एक दुर्बल ऑक्सीकारक है जो -CHO को -COOH में बदलता है।
• सांद्र \(HNO_3\) एक प्रबल ऑक्सीकारक है जो दोनों सिरों को कार्बोक्सिलिक अम्ल में बदलता है।
आम गलतियाँ:
• ब्रोमीन जल और \(HNO_3\) के उत्पादों में भ्रमित होना।
• n-हेक्सेन के स्थान पर कोई अन्य एल्केन लिखना।
• रासायनिक समीकरणों में संरचनाएं गलत बनाना।
Exam Tips:
a) तीनों भागों के लिए रासायनिक समीकरण अवश्य बनाएं।
b) अभिकर्मकों के प्रभाव को स्पष्ट रूप से शब्दों में भी लिखें।
c) उत्पादों के नाम सही-सही लिखें।
Question 10.10: ग्लूकोज की उन अभिक्रियाओं का वर्णन कीजिए जो इसकी विवृत श्रृंखला संरचना के द्वारा नहीं समझाई जा सकती।
Answer:
(i) एल्डिहाइड्स 2, 4-DNP परीक्षण, शिफ परीक्षण देते हैं और \(NaHSO_4\) के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन सल्फाइट योगज उत्पाद बनाते हैं। हालांकि, ग्लूकोज इन अभिक्रियाओं से नहीं गुजरता है।
(ii) ग्लूकोज का पेंटाएसीटेट हाइड्रोक्सिलएमीन के साथ अभिक्रिया नहीं करता है। यह दर्शाता है कि एक मुक्त -CHO समूह ग्लूकोज में मौजूद नहीं है।
(iii) ग्लूकोज दो क्रिस्टलीय रूपों में α और β मौजूद है। α-रूप (\(m.p. = 419 K\)) ग्लूकोज के सांद्र विलयन से 303 K पर क्रिस्टलीकृत होता है और β-रूप (\(m.p. = 423 K\)) 371 K पर गर्म और संतृप्त जलीय घोल से क्रिस्टलीकृत होता है। इस प्रक्रिया को ग्लूकोज की विवृत श्रृंखला संरचना द्वारा नहीं समझाया जा सकता है।
मुख्य बिंदु:
• ग्लूकोज कुछ विशिष्ट एल्डिहाइड परीक्षण नहीं देता है।
• पेंटाएसीटेट हाइड्रॉक्सिलएमीन के साथ ऑक्सिम नहीं बनाता।
• इसके चक्रीय (cyclic) स्वरूप के कारण विवृत श्रृंखला सभी गुण नहीं दर्शाती।
आम गलतियाँ:
• केवल एक ही बिंदु लिखकर छोड़ देना।
• 2,4-DNP और शिफ परीक्षण का गलत उल्लेख करना।
• चक्रीय संरचना की उपेक्षा करना।
Exam Tips:
a) तीनों अपवादों को अलग-अलग बिंदुओं में समझाएं।
b) 'विवृत श्रृंखला' (Open chain) और 'चक्रीय संरचना' के अंतर को समझें।
c) परीक्षणों के नाम स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 10.11: आवश्यक तथा अनावश्यक अमीनो अम्ल क्या होते हैं? प्रत्येक प्रकार के दो उदाहरण दीजिए।
Answer:
मानव शरीर को आवश्यक अमीनो अम्ल की आवश्यकता होती है, लेकिन उन्हें शरीर में संश्लेषित नहीं किया जा सकता है। उन्हें भोजन के माध्यम से लिया जाना चाहिए।
उदाहरण के लिए: वैलिन और ल्यूसीन।
गैर-आवश्यक अमीनो अम्ल की भी मानव शरीर को आवश्यकता होती है, लेकिन उन्हें शरीर में संश्लेषित किया जा सकता है।
उदाहरण के लिए: ग्लाइसिन और एलेनिन।
मुख्य बिंदु:
• आवश्यक अमीनो अम्ल आहार द्वारा प्राप्त होते हैं।
• अनावश्यक अमीनो अम्ल शरीर द्वारा स्वयं बनाए जाते हैं।
• दोनों ही प्रोटीन निर्माण के लिए जरूरी हैं।
आम गलतियाँ:
• आवश्यक और अनावश्यक शब्दों के अर्थ को उल्टा समझ लेना।
• उदाहरण गलत लिख देना।
• परिभाषा अधूरी छोड़ देना।
Exam Tips:
a) परिभाषा लिखते समय 'शरीर में संश्लेषण' मुख्य बिंदु रखें।
b) प्रत्येक के कम से कम दो उदाहरण जरूर दें।
c) उत्तर को स्पष्ट और संतुलित रखें।
Question 10.12: प्रोटीन के संदर्भ में निम्नलिखित को परिभाषित कीजिए - (i) पेप्टाइड बंध (ii) प्राथमिक संरचना (iii) विकृतीकरण
Answer:
(i) एमाइड का निर्माण में ऐमीनो अम्ल के एक अणु के -COOH समूह और ऐमीनो अम्ल के दूसरे अणु के -\(NH_2\) समूह के बीच जिसमें एक पानी के अणु अवमुक्त होता है, जिसे पेप्टाइड बंध कहा जाता है।
(ii) प्रोटीन की प्राथमिक संरचना उस विशिष्ट अनुक्रम को दर्शाती है जिसमें विभिन्न ऐमीनो अम्ल मौजूद हैं, अर्थात पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला में ऐमीनो अम्ल के बीच संबंधों का क्रम। प्रत्येक प्रोटीन में ऐमीनो अम्ल की व्यवस्था का क्रम अलग होता है। अनुक्रम में परिवर्तन एक अलग प्रोटीन बनाता है।
(iii) एक जैविक प्रणाली में, एक प्रोटीन में एक अद्वितीय 3-आयामी संरचना और एक अद्वितीय जैविक गतिविधि पाई जाती है। ऐसे में प्रोटीन को मूलभूत प्रोटीन कहा जाता है। हालांकि, जब मूलभूत प्रोटीन के तापमान में परिवर्तन या रासायनिक परिवर्तन जैसे pH में परिवर्तन जैसे भौतिक परिवर्तनों के अधीन होता है, तो इसके H-बंध परिवर्तित होते हैं। यह परिवर्तन कणों को खोलती है और कुंडलित वक्रता को खोलती है। नतीजतन, प्रोटीन अपनी जैविक गतिविधि खो देता है। प्रोटीन द्वारा जैविक गतिविधि के इस नुकसान को विकृतीकरण कहा जाता है। विकृतीकरण के दौरान, प्रोटीन की द्वितीयक तथा तृतीयक संरचनाएँ नष्ट हो जाती हैं हैं परंतु प्राथमिक संरचना अपरिवर्तित रहती है।
मुख्य बिंदु:
• पेप्टाइड बंध एक एमाइड लिंकेज है।
• प्राथमिक संरचना अमीनो अम्लों का क्रम निर्धारित करती है।
• विकृतीकरण से प्रोटीन की त्रि-विमीय संरचना नष्ट होती है पर प्राथमिक संरचना सुरक्षित रहती है।
आम गलतियाँ:
• विकृतीकरण में प्राथमिक संरचना के नष्ट होने का दावा करना।
• पेप्टाइड बंध को ग्लाइकोसाइडी बंध समझ लेना।
• प्राथमिक संरचना के महत्व को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) तीनों भागों (i, ii, iii) को स्पष्ट रूप से अलग-अलग हेडिंग देकर लिखें।
b) विकृतीकरण के उदाहरण (जैसे अंडे का उबलना) का संदर्भ दें।
c) पेप्टाइड बंध में जल के निष्कासन को दर्शाएं।
Question 10.13: प्रोटीन की द्वितीयक संरचना के सामान्य प्रकार क्या हैं?
Answer:
प्रोटीन की माध्यमिक संरचना के दो सामान्य प्रकार हैं:
(i) \(α\)-कुंडलित वक्रता संरचना
(ii) \(β\)-प्लीटेड शीट संरचना
मुख्य बिंदु:
• \(α\)-हेलिक्स एक कुंडलित संरचना है जो हाइड्रोजन बंधों से स्थिर होती है।
• \(β\)-प्लीटेड शीट में श्रृंखलाएं एक-दूसरे के पास व्यवस्थित होती हैं।
• दोनों द्वितीयक संरचना के मुख्य प्रकार हैं।
आम गलतियाँ:
• प्राथमिक या तृतीयक संरचनाओं को द्वितीयक में मिला देना।
• नामों की वर्तनी गलत लिखना।
• केवल एक प्रकार का उल्लेख करना।
Exam Tips:
a) दोनों प्रकारों के नाम साफ-साफ लिखें।
b) संक्षिप्त विवरण देना भी लाभदायक होता है।
c) ग्रीक अक्षरों (\(α\) और \(β\)) का सही प्रयोग करें।
Question 10.14: प्रोटीन की \(α\)-हैलिक्स संरचना के स्थिरीकरण में कौन से आबंध सहायक होते हैं?
Answer:
प्रत्येक ऐमीनो अम्ल अवशेष के -\(NH\) समूह और \(C=O\) कुंडলিত वक्रता के आसन्न घुमावों के समूह के बीच बने H-आबंध को स्थिर करने में मदद करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• हाइड्रोजन बंध इसमें मुख्य भूमिका निभाते हैं।
• यह अंतra-आणविक (Intramolecular) H-बंध होते हैं।
• यह संरचना को एक कुंडलिनी रूप देते हैं।
आम गलतियाँ:
• पेप्टाइड बंध को इसके स्थिरीकरण का मुख्य कारण बताना।
• हाइड्रोजन बंध की स्थिति गलत बताना।
• अंतर-आणविक और अंतra-आणविक में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) हाइड्रोजन आबंध (Hydrogen bond) का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) -\(NH\) और \(C=O\) समूहों के मध्य अंतःक्रिया दर्शाएं।
c) उत्तर को संक्षिप्त और बिन्दुकृत रखें।
Question 10.15: रेशेदार तथा गोलिकाकार (globular) प्रोटीन को विभेदित कीजिए।
Answer:
रेशेदार प्रोटीन:
1. यह पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला द्वारा गठित एक फाइबर जैसी संरचना है। ये प्रोटीन मजबूत हाइड्रोजन और डाइसल्फ़ाइड बंधों द्वारा एक साथ बंधे रहते हैं।
2. यह आमतौर पर पानी में अघुलनशील होता है।
3. रेशेदार प्रोटीन आमतौर पर संरचनात्मक उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं। उदाहरण के लिए केराटिन बाल, उन तथा रेशम में उपस्थित तथा मायोसिन मांसपेशियों में उपस्थित है।
गोलिकाकार प्रोटीन:
इस प्रोटीन में पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला अपने चारों ओर मुड़ी हुई होती है, जिससे एक गोलाकार संरचना बनती है।
यह आमतौर पर पानी में घुलनशील होता है।
सभी एन्जाइम गोलिकाकार प्रोटीन होते हैं। कुछ हार्मोन जैसे इंसुलिन भी गोलिकाकार प्रोटीन हैं।
मुख्य बिंदु:
• रेशेदार प्रोटीन जल में अघुलनशील और धागेनुमा होते हैं।
• गोलिकाकार प्रोटीन जल में घुलनशील और गोलाकार होते हैं।
• इनके कार्य और उदाहरण भिन्न होते हैं।
आम गलतियाँ:
• दोनों की घुलनशीलता को आपस में बदलना।
• उदाहरणों को गलत श्रेणी में रख देना।
• संरचनात्मक अंतर स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) अंतर स्पष्ट करने के लिए तालिका (Table) का प्रयोग करें।
b) घुलनशीलता, आकृति और उदाहरण के आधार पर तुलना करें।
c) केराटिन और इंसुलिन जैसे सटीक उदाहरण दें।
Question 10.16: ऐमीनो अम्लों की उभयधर्मी प्रकृति को आप कैसे समझाएंगे?
Answer:
जलीय घोल में, एक ऐमीनो अम्ल का कार्बोक्सिल समूह एक प्रोटॉन खो सकता है और ऐमीनो समूह एक द्विध्रुवीय आयन देने के लिए एक प्रोटॉन को स्वीकार कर सकता है जिसे जwitter आयन कहा जाता है।
इसलिए, जwitter आयニック रूप में, ऐमीनो अम्ल दोनों के रूप में (एक अम्ल और एक क्षार के रूप में) कार्य कर सकता है।
इस प्रकार ऐमीनो अम्ल उभयधर्मी व्यवहार प्रदर्शित करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• ज्विटर आयन (Zwitter ion) द्विध्रुवीय होता है।
• यह अम्लीय और क्षारीय दोनों प्रकार के अभिकर्मकों से क्रिया कर सकता है।
• इसमें आंतरिक उदासीनीकरण होता है।
आम गलतियाँ:
• ज्विटर आयन की सही संरचना न बनाना।
• उभयधर्मी प्रकृति का कारण स्पष्ट न करना।
• आवेशों को गलत दर्शाना।
Exam Tips:
a) ज्विटर आयन की रासायनिक संरचना अवश्य बनाएं।
b) प्रोटॉन के स्थानांतरण को स्पष्ट रूप से समझाएं।
c) उभयधर्मी (Amphoteric) शब्द को परिभाषित करें।
Question 10.17: एन्जाइम क्या होते हैं?
Answer:
एन्जाइम प्रोटीन होते हैं जो जैविक अभिक्रियाओं को उत्प्रेरित करते हैं। वे प्रकृति में बहुत विशिष्ट हैं और एक विशेष क्रियाधार के लिए केवल एक विशेष अभिक्रिया उत्प्रेरित करते हैं। एन्जैमो का नाम आमतौर पर विशेष क्रियाधार या क्रियाधार के वर्ग के नाम पर रखा जाता है।
उदाहरण के लिए, माल्टोज के जल अपघटन को ग्लूकोज में उत्प्रेरित करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले एन्जाइम को माल्टज नाम दिया गया है।
\(C_{12}H_{22}O_{11} \xrightarrow{\text{माल्टज}} 2 C_6H_{12}O_6\)
एक क्रियाधार के ऑक्सीकरण को उत्प्रेरित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले एन्जैमो को दूसरे क्रियाधार के साथ-साथ कम करने के लिए ऑक्सीडोरीडक्टेस एन्जाइम के रूप में नामित किया जाता है। एक एन्जाइम का नाम ऐस (ase) से समाप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• एन्जाइम जैव-उत्प्रेरक (Biocatalysts) होते हैं।
• ये अत्यधिक विशिष्ट प्रकृति के होते हैं।
• रासायनिक नाम के अंत में 'ase' प्रत्यय लगता है।
आम गलतियाँ:
• एन्जाइम को केवल साधारण उत्प्रेरक मानना।
• उनकी विशिष्टता (specificity) का उल्लेख न करना।
• रासायनिक समीकरण न लिखना।
Exam Tips:
a) इन्हें 'जैविक उत्प्रेरक' के रूप में परिभाषित करें।
b) माल्टज का उदाहरण और समीकरण दें।
c) नामकरण की पद्धति (-ase) का उल्लेख करें।
Question 10.18: प्रोटीन की संरचना पर विकृतीकरण का क्या प्रभाव होता है?
Answer:
जब प्राकृत प्रोटीन में भौतिक परिवर्तन करते हैं, जैसे- ताप में परिवर्तन अथवा रासायनिक परिवर्तन करते हैं, जैसे, pH में परिवर्तन आदि किया जाता है तो हाइड्रोजन आबंधों में अस्तव्यस्तता उत्पन्न हो जाती है। जिसके कारण गोलिका (ग्लोब्यूल) खुल जाती है तथा हैलिक्स अकंुडलित हो जाती है तथा प्रोटीन अपनी जैविक सक्रियता को खो देता है। इसे प्रोटीन का विकृतीकरण कहते हैं। विकृतीकरण के दौरान द्वितीयक तथा तृतीयक संरचनाएँ नष्ट हो जाती हैं परंतु प्राथमिक संरचना अपरिवर्तित रहती है। अर्थात जैसे ही प्रोटीन की द्वितीयक और तृतीयक संरचनाएं नष्ट हो जाती हैं, एन्जाइम अपनी क्रियाविधि खो देता है।
मुख्य बिंदु:
• द्वितीयक और तृतीयक संरचनाएं नष्ट हो जाती हैं।
• प्राथमिक संरचना अप्रभावित रहती है।
• प्रोटीन अपनी जैविक सक्रियता खो देता है।
आम गलतियाँ:
• प्राथमिक संरचना के भी नष्ट होने का दावा करना।
• रासायनिक परिवर्तनों के प्रभाव को न बताना।
• जैविक सक्रियता पर पड़ने वाले प्रभाव को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) स्पष्ट रूप से बताएं कि कौन सी संरचनाएं नष्ट होती हैं और कौन सी सुरक्षित रहती हैं।
b) भौतिक और रासायनिक कारणों का उल्लेख करें।
c) जैविक सक्रियता के नुकसान को मुख्य परिणाम के रूप में दर्शाएं।
Question 10.19: विटामिनों को किस प्रकार वर्गीकृत किया गया है? रक्त के थक्के जमने के लिए जिम्मेदार विटामिन का नाम दीजिए।
Answer:
पानी या वसा में घुलनशीलता के आधार पर विटामिन को दो समूहों में वर्गीकृत किया जाता है।
वसा में घुलनशील विटामिन : वे विटामिन जो वसा और तेलों में घुलनशील हैं, लेकिन पानी में नहीं, इस समूह के हैं।
उदाहरण के लिए: विटामिन A, D, E, और K
पानी में घुलनशील विटामिन : पानी में घुलनशील विटामिन इस समूह से संबंधित हैं। उदाहरण के लिए, बी समूह विटामिन (\(B_1, B_2, B_6, B_12, आदि\)) और विटामिन C हालांकि, विटामिन H न तो पानी में न ही वसा में घुलनशील है।
रक्त के जमनाव के लिए विटामिन K जिम्मेदार होता है।
मुख्य बिंदु:
• वर्गीकरण घुलनशीलता (पानी या वसा) के आधार पर होता है।
• वसा-घुलनशील विटामिन शरीर में संचित हो सकते हैं।
• विटामिन K रक्त का थक्का जमाने में मदद करता है।
आम गलतियाँ:
• विटामिनों के उदाहरण गलत समूहों में लिख देना।
• रक्त का थक्का जमाने वाले विटामिन का नाम भूल जाना।
• जल और वसा में घुलनशील विटामिनों की सूची मिला देना।
Exam Tips:
a) वर्गीकरण का आधार (घुलनशीलता) सबसे पहले लिखें।
b) दोनों श्रेणियों के उदाहरण स्पष्ट दें।
c) रक्त के थक्के वाले प्रश्न का सीधा और स्पष्ट उत्तर दें।
Question 10.20: विटामिन A व विटामिन C हमारे लिए आवश्यक क्यों हैं? उनके महत्वपूर्ण स्रोत दीजिए।
Answer:
विटामिन A की कमी से जिरोफ्थैल्मिया (आंख के कॉर्निया का कठोरीकरण), रात्रि अंधता हो जाती है। विटामिन C की कमी से स्कर्वी (मसूड़ों से खून आना) होता है। विटामिन A के स्रोत मछली के यकृत का तेल, गाजर, मक्खन और दूध हैं। विटामिन C के स्रोत खट्टे फल, आंवला और हरी पत्तेदार सब्जियां आदि हैं।
मुख्य बिंदु:
• विटामिन A आँखों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
• विटामिन C प्रतिरक्षा प्रणाली और त्वचा के लिए आवश्यक है।
• दोनों की कमी से विशिष्ट बीमारियां होती हैं।
आम गलतियाँ:
• विटामिन A और C की कमियों को आपस में बदल देना।
• स्रोतों के नाम गलत लिखना।
• बीमारियों के नाम अशुद्ध लिखना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक विटामिन के लिए कमी से होने वाला रोग और स्रोत अलग-अलग दर्शाएं।
b) वैज्ञानिक नामों (जैसे स्कर्वी) की सही वर्तनी लिखें।
c) दैनिक जीवन से जुड़े स्रोत दें।
Question 10.21: न्यूक्लिक अम्ल क्या होते हैं? इनके दो महत्वपूर्ण कार्य लिखिए।
Answer:
न्यूक्लिक अम्ल सभी जीवित कोशिकाओं के नाभिक में पाए जाने वाले जैव-अणु होते हैं, जो गुणसूत्रों के घटकों में से एक के रूप में होते हैं। न्यूक्लिक अम्ल मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं:
डीऑक्सीराइबोक्लीनिक अम्ल (DNA) और राइबोक्लीनिक अम्ल (RNA)। न्यूक्लिक अम्ल को पॉली-न्यूक्लियोटाइड के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि ये न्यूक्लियोटाइड्स की लंबी-श्रृंखला पॉलीमर हैं।
न्यूक्लिक अम्ल के दो मुख्य कार्य हैं:
1. DNA एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में निहित लक्षणों के संचरण का कार्य करते हैं। संचरण की इस प्रक्रिया को आनुवंशिकता कहते हैं।
2. न्यूक्लिक अम्ल (DNA और RNA दोनों) एक कोशिका में प्रोटीन संश्लेषण में मदद करते हैं। भले ही प्रोटीन वास्तव में एक कोशिका में विभिन्न RNA अणुओं द्वारा संश्लेषित होते हैं, एक विशेष प्रोटीन के संश्लेषण के लिए संदेश DNA में मौजूद होता है।
मुख्य बिंदु:
• ये कोशिका के केंद्रक में पाए जाते हैं।
• ये न्यूक्लियोटाइड के बहुलक (Polymers) हैं।
• आनुवंशिक सूचनाओं का संचरण और प्रोटीन संश्लेषण इनके मुख्य कार्य हैं।
आम गलतियाँ:
• न्यूक्लिक अम्ल को प्रोटीन या कार्बोहाइड्रेट समझ लेना।
• कार्यों को अस्पष्ट रूप से लिखना।
• DNA और RNA के कार्यों में अंतर न बताना।
Exam Tips:
a) परिभाषा में 'पॉली-न्यूक्लियोटाइड' शब्द का प्रयोग अवश्य करें।
b) दोनों महत्वपूर्ण कार्यों को बिंदुओं में लिखें।
c) आनुवंशिकता और प्रोटीन संश्लेषण को मुख्य बिंदुओं के रूप में उभारें।
Question 10.22: न्यूक्लियोसाइड तथा न्यूक्लियोटाइड में क्या अंतर होता है?
Answer:
एक न्यूक्लियोसाइड शर्करा की \(1'\) स्थिति पर क्षार के जुड़ने से बनता है।
न्यूक्लियोसाइड = शर्करा + क्षार
दूसरी ओर, न्यूक्लिक अम्ल के सभी तीन मूल घटक (जैसे, पेंटोस शुगर, फॉस्फोरस अम्ल और क्षार) एक न्यूक्लियोटाइड में मौजूद होते हैं।
न्यूक्लियोटाइड = शर्करा + क्षार + फॉस्फोरिक अम्ल
मुख्य बिंदु:
• न्यूक्लियोसाइड में फॉस्फेट समूह नहीं होता।
• न्यूक्लियोटाइड में फॉस्फेट समूह जुड़ा होता है।
• दोनों न्यूक्लिक अम्ल की मूलभूत इकाइयां हैं।
आम गलतियाँ:
• दोनों के घटकों को आपस में मिला देना।
• फॉस्फोरिक अम्ल की उपस्थिति/अनुपस्थिति को ध्यान में न रखना।
• समीकरण रूप में गलत लिखना।
Exam Tips:
a) अंतर को स्पष्ट समीकरण रूप में लिखें (\(न्यूक्लियोसाइड = शर्करा + क्षार\))।
b) फॉस्फोरिक अम्ल की भूमिका को मुख्य अंतर बताएं।
c) संक्षिप्त और स्पष्ट उत्तर दें।
Question 10.23: DNA के दो रज्जुक्र समान नहीं होते, अपितु एक दूसरे के पूरक होते हैं। समझाइए।
Answer:
DNA की पेचदार संरचना में, दो रज्जुक्र विशिष्ट जोड़े के क्षारकों को हाइड्रोजन बंध द्वारा एक साथ रखी जाती है। साइटोसिन ग्वानिन के साथ हाइड्रोजन बंधन बनाता है, जबकि ऐडेनीन थायेमीन के साथ हाइड्रोजन बंधन बनाता है। नतीजतन, दो रज्जुक्र एक दूसरे के पूरक हैं।
मुख्य बिंदु:
• क्षार युग्मन नियम (Base pairing rule) लागू होता है।
• A हमेशा T के साथ और C हमेशा G के साथ जुड़ता है।
• हाइड्रोजन बंध दोनों रज्जुकों को जोड़कर रखते हैं।
आम गलतियाँ:
• क्षार युग्मों के जोड़ों को गलत लिखना (जैसे A का G के साथ जोड़ना)।
• हाइड्रोजन बंध के स्थान पर सहसंयोजक बंध लिखना।
• पूरक शब्द का अर्थ न समझाना।
Exam Tips:
a) क्षार युग्मन के विशिष्ट जोड़े (A-T और C-G) अवश्य लिखें।
b) हाइड्रोजन बंध का उल्लेख करना न भूलें।
c) पूरक (Complementary) होने का कारण स्पष्ट करें।
Question 10.24: DNA तथा RNA के बीच महत्वपूर्ण संरचनात्मक एवं क्रियात्मक अंतर लिखिए।
Answer:
DNA तथा RNA के बीच संरचनात्मक अंतर इस प्रकार हैं:
1. DNA अणुओं में शर्करा की अर्द्धांश मात्रा β-D-2 डीऑक्सीराइबोज है। RNA अणुओं में शर्करा की अर्द्धांश मात्रा β-D-राइबोज होती है।
2. DNA में यूरेसिल (U) होता है। इसमें थायेमीन (T) नहीं होता है। RNA में थायेमीन (T) होता है। इसमें यूरेसिल (U) नहीं होता है।
3. DNA की पेचदार संरचना द्विरज्जुक्र द्विकुंडली है। RNA की पेचदार संरचना एक रज्जुक्र कुंडली होती है।
DNA तथा RNA के बीच कार्यात्मक अंतर इस प्रकार हैं:
1. DNA आनुवंशिकता का रासायनिक आधार है। RNA आनुवंशिकता के लिए जिम्मेदार नहीं है।
2. DNA अणु प्रोटीन का संश्लेषण नहीं करते हैं, लेकिन कोशिकाओं में प्रोटीन के संश्लेषण के लिए संदेश स्थानांतरित करते हैं। प्रोटीन कोशिकाओं में RNA अणुओं द्वारा संश्लेषित होते हैं।
मुख्य बिंदु:
• शर्करा का अंतर (डीऑक्सीराइबोज बनाम राइबोज)।
• नाइट्रोजन क्षारकों का अंतर (थैमीन बनाम यूरेसिल)।
• कार्य का अंतर (आनुवंशिक सूचना बनाम प्रोटीन संश्लेषण)।
आम गलतियाँ:
• DNA और RNA की शर्कराओं के नाम में भ्रमित होना।
• एकल और द्वि-रज्जुकी संरचनाओं को उलटा लिखना।
• कार्यों को मिला देना।
Exam Tips:
a) संरचनात्मक और कार्यात्मक अंतरों की अलग-अलग तालिका या बिंदु बनाएं।
b) शर्करा और क्षारकों के अंतर को मुख्य रूप से दर्शाएं।
c) उत्तर को सुव्यवस्थित रखें।
Question 10.25: कोशिका में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के RNA कौन से हैं?
Answer:
कोशिका में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के RNA निम्नलिखित हैं:
1. संदशवाहक RNA (m-RNA)
2. राइबोसोमल RNA (r-RNA)
3. अंतरण RNA (t-RNA)
मुख्य बिंदु:
• mRNA संदेश को केंद्रक से बाहर लाता है।
• rRNA राइबोसोम का निर्माण करता है।
• tRNA अमीनो अम्लों को प्रोटीन संश्लेषण स्थल तक लाता है।
आम गलतियाँ:
• RNA के प्रकारों के पूरे नाम न लिखना।
• डीएनए के प्रकारों को इसमें शामिल करना।
• वर्तनी की अशुद्धियाँ करना।
Exam Tips:
a) तीनों प्रकारों के नाम संक्षिप्त रूप (mRNA, rRNA, tRNA) और पूर्ण रूप दोनों में लिखें।
b) उत्तर को सूची के रूप में प्रस्तुत करें।
c) प्रत्येक के कार्य का संक्षिप्त संकेत देना भी अच्छा रहता है।
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