NCERT Solutions Class 12 Chemistry Chapter 10 Biomolecules (जैव अणु) Intext Questions in Hindi

Step-by-Step Textbook Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 10 जैव अणु

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Question 10.1: ग्लूकोस तथा सुкроस जल में विलय हैं जबकि साइक्लोहैक्सैन अथवा बेजीन (सामान्य छः सदस्यीय वलय युक्त यौगिक) जल में अवलेय होते हैं। समझाइए।

Answer:

ग्लूकोस अणु में पाँच \( -\text{OH} \) समूह होते हैं जबकि एक सुкроस अणु में आठ \( -\text{OH} \) समूह होते हैं।
इस प्रकार, ग्लूकोस और सुкроस पानी के साथ व्यापक हाइड्रोजन बंधन बनाते हैं।
इसीलिए, ये पानी में घुलनशील हैं।
लेकिन साइक्लोहैक्सैन और बेंजीन में \( -\text{OH} \) समूह नहीं होते हैं।
इसलिए, ये पानी के साथ हाइड्रोजन बंधन नहीं बना सकते हैं और परिणामस्वरूप, पानी में अवलनशील होते हैं।

मुख्य बिंदु:

• ग्लूकोस और सुкроस में हाइड्रोजन आबंधन बनाने वाले \( -\text{OH} \) समूह उपस्थित होते हैं।
• साइक्लोहैक्सैन और बेंजीन अध्रुवीय हाइड्रोकार्बन हैं जो जल के साथ हाइड्रोजन आबंध नहीं बनाते।
• "समान घुलाता है समान को" (Like dissolves like) के सिद्धांत के अनुसार ध्रुवीय विलायक में ध्रुवीय यौगिक घुलते हैं।

आम गलतियाँ:

• केवल आणविक भार को विलेयता का कारण बताना।
• हाइड्रोजन आबंधन की भूमिका को स्पष्ट न करना।
• साइक्लोहैक्सैन और बेंजीन की संरचना को गलत समझना।

Exam Tips:

a) हाइड्रोजन आबंधन (Hydrogen bonding) का उल्लेख उत्तर में अवश्य करें।
b) विलेयता समझाने के लिए ध्रुवीय और अध्रुवीय प्रकृति का स्पष्ट अंतर लिखें।
c) \( -\text{OH} \) समूहों की संख्या का सटीक संदर्भ दें।

 

Question 10.2: लैक्टोज के जलअपघटन से किन उत्पादों के बनने की अपेक्षा करते हैं?

Answer:

लैक्टोज के जलअपघटन से \( \beta \text{-D} \) गैलक्टोज और \( \beta \text{-D} \) ग्लूकोस प्राप्त होते हैं।
लैक्टोज एक डिसैकेराइड है जो गैलक्टोज और ग्लूकोस इकाइयों से मिलकर बना होता है।
जलअपघटन की प्रक्रिया में ग्लाइकोसाइडिक बंध टूट जाता है।

मुख्य बिंदु:

• लैक्टोज एक डाइसैकराइड है जिसका अणुसूत्र \( \text{C}_{12}\text{H}_{22}\text{O}_{11} \) है।
• जलअपघटन पर यह एक मोल \( \beta \text{-D-गलक्टोज} \) और एक मोल \( \beta \text{-D-ग्लूकोस} \) देता है।
• इसमें \( \text{C-1} \) गैलक्टोज और \( \text{C-4} \) ग्लूकोस के मध्य \( \beta \text{-glycosidic linkage} \) होता है।

आम गलतियाँ:

• केवल ग्लूकोस लिखना और गैलक्टोज को भूल जाना।

• ऐल्फा (\( \alpha \)) और बीटा (\( \beta \)) विन्यास में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) उत्पादों के नाम के साथ उनका विन्यास (\( \beta \text{-D} \)) स्पष्ट लिखें।
b) रासायनिक समीकरण द्वारा जलअपघटन को प्रदर्शित करें।
c) ग्लाइकोसाइडिक बंध के प्रकार का उल्लेख करना न भूलें।

 

Question 10.3: D-ग्लूकोस के पेन्टाएसीटेट में आप ऐल्डिहाइड समूह की अनुपस्थिति के कैसे समझाइएंगे?

Answer:

D-ग्लूकोस ऐल्डिहाइड (\( -\text{CHO} \)) समूह या कार्बोनिल कार्बन की उपस्थिति के कारण hydroxylamine (\( \text{NH}_2\text{OH} \)) के साथ एक ऑक्सिम बनाने के लिए प्रतिक्रिया करता है।
यह तब होता है जब ग्लूकोस की चक्रीय संरचना एक जलीय माध्यम में एक खुली श्रृंखला संरचना बनाती है, जो तब \( \text{NH}_2\text{OH} \) के साथ प्रतिक्रिया करके ऑक्सिम देती है।
लेकिन D-ग्लूकोस का पेन्टाएसीटेट, \( \text{NH}_2\text{OH} \) के साथ प्रतिक्रिया नहीं करता है।
ऐसा इसलिए है क्योंकि पेन्टाएसीटेट एक खुली श्रृंखला संरचना नहीं बनाता है क्योंकि इसका मुक्त \( -\text{CHO} \) समूह एमीनीकरण द्वारा संरक्षित हो जाता है या चक्रीय रूप में स्थिर रहता है।

मुख्य बिंदु:

• D-ग्लूकोस मुक्त \( -\text{CHO} \) समूह की उपस्थिति के कारण ऑक्सिम बनाता है।
• पेन्टाएसीटेट बनने पर मुक्त ऐल्डिहाइड समूह उपलब्ध नहीं रहता।
• यह प्रयोग सिद्ध करता है कि ग्लूकोस का पेन्टाएसीटेट चक्रीय रूप में या विहित रूप में रहता है।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि पेन्टाएसीटेट में भी मुक्त ऐल्डिहाइड समूह होता है।
• ऑक्सिम निर्माण की प्रक्रिया को गलत लिखना।
• चक्रीय और खुली श्रृंखला के संतुलन को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) \( \text{NH}_2\text{OH} \) के साथ अभिक्रिया का संदर्भ अवश्य दें।
b) खुली श्रृंखला और चक्रीय संरचना के अंतर को समझाएं।
c) पेन्टाएसीटेट की संरचना का मुख्य कारण स्पष्ट करें।

 

Question 10.4: ऐमीनो अम्लों के गलनांक एवं जल में विलेयता सामान्यतः संगत हैलो अम्लों की तुलना में अधिक होती है। समझाइए।

Answer:

दोनों अम्लीय (कार्बोक्सिल) और क्षारीय (ऐमीनो) समूह ऐमीनो अम्ल के एक ही अणु में मौजूद होते हैं।
जलीय घोल में, कार्बोक्सिल समूह एक प्रोटॉन खो सकता है और ऐमीनो समूह एक प्रोटॉन को स्वीकार कर सकता है, इस प्रकार एक द्विध्रुवीय आयन को जन्म देता है जिसे zwitter ion (ज्विटर आयन) के रूप में जाना जाता है।
इस द्विध्रुवीय व्यवहार के कारण, इसमें और जल के साथ मजबूत इलेक्ट्रोस्टैटिक आकर्षण होते हैं।
लेकिन हैलो-अम्ल इस तरह के द्विध्रुवीय व्यवहार को प्रदर्शित नहीं करते हैं।
इस कारण से, पानी में ऐमीनो अम्ल का गलनांक और घुलनशीलता संबंधित हैलो-अम्ल की तुलना में अधिक होता है।

मुख्य बिंदु:

• ऐमीनो अम्ल ज्विटर आयन (Zwitter ion) के रूप में विद्यमान रहते हैं।
• ज्विटर आयनिक संरचना के कारण अणुओं के मध्य प्रबल स्थिरवैद्युत बल (Electrostatic forces) कार्य करते हैं।
• जल के साथ इनका प्रबल द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण होता है।

आम गलतियाँ:

• ज्विटर आयन की संरचना को गलत बनाना।
• गलनांक अधिक होने का कारण केवल आणविक द्रव्यमान को बताना।
• हैलो अम्लों और ऐमीनो अम्लों की संरचनात्मक तुलना न करना।

Exam Tips:

a) ज्विटर आयन की संरचना का चित्र या समीकरण जरूर दर्शाएं।
b) अंतराआण्विक बलों (Intermolecular forces) का स्पष्ट उल्लेख करें।
c) उत्तर को बिंदुवार लिखकर स्पष्ट करें।

 

Question 10.5: अंडे को उबालने पर उसमें उपस्थित जल कहाँ चला जाता है?

Answer:

जब एक अंडे को उबाला जाता है, तो अंडे के अंदर मौजूद प्रोटीन विकृत हो जाता है और जम जाता है।
अंडे को उबालने के बाद उसमें मौजूद पानी को जमा हुआ प्रोटीन हाइड्रोजन-बंधन के जरिए अवशोषित कर लेता है।

मुख्य बिंदु:

• उबालने पर अंडे का ऐल्बुमिन प्रोटीन विकृत (Denature) हो जाता है।
• प्रोटीन की त्रि-विमीय संरचना बदल जाती है।
• मुक्त जल हाइड्रोजन आबंधों के माध्यम से संकुचित प्रोटीन जाल में फंस जाता है।

आम गलतियाँ:

• यह सोचना कि पानी वाष्प बनकर उड़ जाता है।
• प्रोटीन के विकृतीकरण (Denaturation) की प्रक्रिया को न समझना।
• हाइड्रोजन आबंधन की भूमिका को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) प्रोटीन के विकृतीकरण (Denaturation of protein) शब्द का प्रयोग करें।
b) हाइड्रोजन आबंधन द्वारा जल के बंधने की प्रक्रिया को स्पष्ट करें।
c) उत्तर संक्षिप्त और वैज्ञानिक रूप से सटीक लिखें।

 

Question 10.6: हमारे शरीर में विटामिन C संचित क्यों नहीं होता?

Answer:

विटामिन C हमारे शरीर में जमा नहीं हो सकता क्योंकि यह पानी में घुलनशील है।
परिणामतः, यह मूत्र के माध्यम से आसानी से उत्सर्जित हो जाता है।

मुख्य बिंदु:

• विटामिन C (एस्कॉर्बिक अम्ल) जल में अत्यधिक घुलनशील होता है।
• जल-घुलنशील होने के कारण यह शरीर के ऊतकों में वसा की तरह संग्रहित नहीं हो सकता।
• इसे नियमित रूप से आहार के माध्यम से लेना आवश्यक होता है।

आम गलतियाँ:

• विटामिन C को वसा-घुलनशील (Fat-soluble) मान लेना।
• शरीर से इसके उत्सर्जन के मार्ग को गलत बताना।
• भंडारण और संचयन के अंतर को न समझना।

Exam Tips:

a) जल-विलेय (Water-soluble) होने की विशेषता पर जोर दें।
b) मूत्र के माध्यम से उत्सर्जन का स्पष्ट कारण बताएं।
c) वसा-विलेय विटामिनों (जैसे A, D, E, K) के साथ अंतर स्पष्ट रखें।

 

Question 10.7: यदि DNA के थायेमीन युक्त न्यूक्लियोटाइड्स का जलअपघटन किया जाए तो कौन-कौन से उत्पाद बनेंगे?

Answer:

जब थायमीन युक्त DNA से एक न्यूक्लियोटाइड जलअपघथित होता है, तो थायमिन \( \beta \text{-D-2-ऑक्सीराइबोज़} \) और फॉस्फोरस अम्ल उत्पादों के रूप में प्राप्त होते हैं।

मुख्य बिंदु:

• न्यूक्लियोटाइड तीन घटकों से मिलकर बनता है: नाइट्रोजन क्षारक, शर्करा और फॉस्फेट समूह।
• पूर्ण जलअपघटन से फॉस्फोरस अम्ल (\( \text{H}_3\text{PO}_4 \)), डीऑक्सीराइबोज़ शर्करा और थायमीन क्षारक प्राप्त होते हैं।
• DNA में यह घटक विशिष्ट रूप से पाए जाते हैं।

आम गलतियाँ:

• न्यूक्लियोटाइड और न्यूक्लियोसाइड के बीच अंतर न समझना।
• शर्करा का सही प्रकार (ऑक्सीराइबोज़ के बजाय डीऑक्सीराइबोज़) न लिखना।
• फॉस्फोरस अम्ल को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) न्यूक्लियोटाइड के घटकों के नाम स्पष्ट रूप से लिखें।
b) शर्करा का नाम \( \beta \text{-D-2-ऑक्सीराइबोज़} \) सही रूप में लिखें।
c) उत्पादों की सूची सटीक दें।

 

Question 10.8: जब RNA का जलअपघटन किया जाता है तो प्राप्त क्षारकों की मात्राओं के मध्य कोई संबंध नहीं होता। यह तथ्य RNA की संरचना के विषय में क्या संकेत देता है?

Answer:

एक RNA अणु द्विकुंडलिनी होता है जिसमें क्षारकों की जोड़ी होती है।
एडेमीन हमेशा थाईमीन के साथ जुड़ता है, जबकि साइटोसिन हमेशा ग्वानीन के साथ जुड़ता है।
अतः DNA के जल-अपघटन पर, उत्पादित एडेमीन की मात्रा थाईमीन के बराबर होती है और इसी प्रकार साइटोसिन की मात्रा ग्वानीन की मात्रा के बराबर होती है।
लेकिन जब RNA को जलअपघटित किया जाता है, तो प्राप्त विभिन्न क्षारकों की मात्रा के बीच कोई संबंध नहीं होता।
इसलिए, RNA एकल-कुंडलित है।

मुख्य बिंदु:

• DNA में चारगाफ नियम (Chargaff's rule) लागू होता है क्योंकि वह द्विरज्जुकी (Double-stranded) होता है।
• RNA एकल रज्जुकी (Single-stranded) संरचना रखता है।
• एकल रज्जुकी होने के कारण क्षारकों के युग्मन का नियम (A=T, G=C) RNA पर लागू नहीं होता।

आम गलतियाँ:

• चारगाफ के नियम को RNA पर भी लागू मान लेना।
• RNA और DNA की संरचनात्मक भिन्नता को न समझना।
• एकल-कुंडलित और द्विकुंडलिनी संरचना में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) चारगाफ नियम (Chargaff's rule) का संदर्भ दें।
b) एकल-कुंडलित (Single-stranded) शब्द का प्रयोग उत्तर में अवश्य करें।
c) क्षारकों की मात्रा में समानता न होने का मुख्य कारण स्पष्ट करें।

 

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