Solutions for Class 12 Chemistry: Chapter 09 एमीन
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Practice Class 12 Chemistry Solutions: Chapter 09 एमीन
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Question 9.1: निम्नलिखित ऐमीनों को प्राथमिक, द्वितीयक अथवा तृतीयक ऐमीनों में वर्गीकृत कीजिए-
(i) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{NH}_2 \)
(ii) \( (\text{CH}_3)_2\text{CHNH}_2 \)
(iii) \( (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{CHNH}_2 \)
(iv) \( (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{N} \)
(v) देखिये चित्र में
Answer:
ऐमीन के वर्गीकरण के लिए नाइट्रोजन परमाणु से जुड़े एल्किल समूहों की संख्या देखी जाती है।
प्राथमिक (\( 1^\circ \)) ऐमीन: नाइट्रोजन परमाणु से केवल एक एल्किल समूह जुड़ा होता है।
द्वितीयक (\( 2^\circ \)) ऐमीन: नाइट्रोजन परमाणु से दो एल्किल समूह जुड़े होते हैं।
तृतीयक (\( 3^\circ \)) ऐमीन: नाइट्रोजन परमाणु से तीन एल्किल समूह जुड़े होते हैं।
अतः दिए गए यौगिकों का वर्गीकरण इस प्रकार है:
(i) प्राथमिक (\( 1^\circ \)) ऐमीन
(ii) प्राथमिक (\( 1^\circ \)) ऐमीन
(iii) प्राथमिक (\( 1^\circ \)) ऐमीन
(iv) तृतीयक (\( 3^\circ \)) ऐमीन
(v) द्वितीयक (\( 2^\circ \)) ऐमीन
मुख्य बिंदु:
• प्राथमिक ऐमीन में \( -\text{NH}_2 \) समूह होता है।
• द्वितीयक ऐमीन में \( -\text{NH}- \) समूह होता है।
• तृतीयक ऐमीन में केवल नाइट्रोजन परमाणु होता है जिस पर कोई हाइड्रोजन नहीं जुड़ा होता।
आम गलतियाँ:
• एल्किल समूहों की संख्या की जगह कार्बन श्रृंखला की लंबाई गिन लेना।
• नाइट्रोजन पर उपस्थित हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या को नजरअंदाज करना।
• प्राथमिक और द्वितीयक ऐमीन की पहचान में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) नाइट्रोजन परमाणु से सीधे जुड़े कार्बन परमाणुओं (या एल्किल समूहों) की संख्या गिनकर वर्गीकरण करें।
b) संरचना सूत्र को खोलकर देखने से प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक की पहचान आसान हो जाती है।
c) परिभाषाओं को स्पष्ट रूप से याद रखें।
Question 9.2: अणु सूत्र \( \text{C}_4\text{H}_{11}\text{N} \) से प्राप्त विभिन्न समावयवी ऐमीनों की संरचना लिखिए।
(i) सभी समावयवों के आईयूपीएसी नाम लिखिए।
(ii) विभिन्न युग्मों द्वारा कौन से प्रकार की समावयवता प्रदर्शित होती है?
Answer:
अणु सूत्र \( \text{C}_4\text{H}_{11}\text{N} \) के लिए संभव समावयवी और उनके नाम निम्नलिखित हैं:
1. \( \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{CH}_2-\text{CH}_2-\text{NH}_2 \) - ब्यूटेन-1-ऐमीन (\( 1^\circ \))
2. \( (\text{CH}_3)_2\text{CH}-\text{CH}_2-\text{NH}_2 \) - 2-मेथिलप्रोपेन-1-ऐमीन (\( 1^\circ \))
3. \( \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{CH}(\text{NH}_2)-\text{CH}_3 \) - ब्यूटेन-2-ऐमीन (\( 1^\circ \))
4. \( (\text{CH}_3)_3\text{C}-\text{NH}_2 \) - 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऐमीन (\( 1^\circ \))
5. \( \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{CH}_2-\text{NH}-\text{CH}_3 \) - N-मेथिलप्रोपेनामीन (\( 2^\circ \))
6. \( (\text{CH}_3)_2\text{CH}-\text{NH}-\text{CH}_3 \) - N-मेथिलप्रोपेन-2-ऐमीन (\( 2^\circ \))
7. \( \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{NH}-\text{CH}_2-\text{CH}_3 \) - N-एथिलएथेनामीन (\( 2^\circ \))
8. \( (\text{CH}_3)_2\text{N}-\text{CH}_2-\text{CH}_3 \) - N,N-डाइमेथिलएथेनामीन (\( 3^\circ \))
समावयवता के प्रकार:
• प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीन आपस में क्रियात्मक समावयवता प्रदर्शित करते हैं।
• कार्बन श्रृंखला में भिन्नता रखने वाले समावयवी श्रृंखला समावयवता प्रदर्शित करते हैं।
• मुख्य श्रृंखला में स्थिति बदलने वाले समावयवी स्थिति समावयवता प्रदर्शित करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• \( \text{C}_4\text{H}_{11}\text{N} \) कुल 8 समावयवी ऐमीन बनाता है।
• इसमें प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक तीनों प्रकार के ऐमीन शामिल हैं।
• आईयूपीएसी नामकरण नियमों का पालन करते हुए प्रत्यय 'ऐमीन' का प्रयोग होता है।
आम गलतियाँ:
• किसी समावयवी को छोड़ देना या एक ही संरचना को दोबारा लिख देना।
• आईयूपीएसी नाम में कार्बन संख्या गलत गिनना।
• समावयवता के प्रकार को गलत पहचानना।
Exam Tips:
a) पहले सभी प्राथमिक ऐमीन, फिर द्वितीयक और अंत में तृतीयक ऐमीन लिखकर व्यवस्थित करें।
b) प्रत्येक संरचना का आईयूपीएसी नाम सावधानी से लिखें।
c) श्रृंखला और स्थिति समावयवता के अंतर को समझकर उत्तर दें।
Question 9.3: आप निम्नलिखित परिवर्तन कैसे करेंगे?
(i) बेन्जीन से ऐनिलिन
(ii) बेन्जीन से N,N-डाइमेथिलऐनिलिन
(iii) \( \text{Cl}-(\text{CH}_2)_4-\text{Cl} \) से हेक्सेन-1, 6-डाइऐमीन
Answer:
(i) बेन्जीन से ऐनिलिन:
बेन्जीन की क्रिया सांद्र \( \text{HNO}_3 \) और सांद्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) के साथ कराने पर नाइट्रोबेन्जीन बनता है:
\( \text{C}_6\text{H}_6 + \text{HNO}_3 \xrightarrow{\text{H}_2\text{SO}_4} \text{C}_6\text{H}_5\text{NO}_2 + \text{H}_2\text{O} \)
इसके पश्चात नाइट्रोबेन्जीन का उत्प्रेरकी हाइड्रोजनीकरण (\( \text{H}_2/\text{Pd} \) या \( \text{Sn/HCl} \)) करने पर ऐनिलिन प्राप्त होती है:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{NO}_2 + 3\text{H}_2 \xrightarrow{\text{Pd}} \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + 2\text{H}_2\text{O} \)
(ii) बेन्जीन से N,N-डाइमेथिलऐनिलिन:
पहले बेन्जीन को ऐनिलिन में परिवर्तित किया जाता है (जैसा ऊपर बताया गया है)।
इसके बाद ऐनिलिन की अभिक्रिया मेथिल क्लोराइड (\( \text{CH}_3\text{Cl} \)) के आधिक्य के साथ कराई जाती है:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + 2\text{CH}_3\text{Cl} \rightarrow \text{C}_6\text{H}_5\text{N}(\text{CH}_3)_2 + 2\text{HCl} \)
(iii) \( \text{Cl}-(\text{CH}_2)_4-\text{Cl} \) से हेक्सेन-1,6-डाइऐमीन:
1,4-डाइक्लोरोब्यूटेन की अभिक्रिया ऐथेनॉलिक पोटैशियम साइनाइड (\( \text{KCN} \)) के साथ कराने पर डाइसाइनाइड बनता है:
\( \text{Cl}(\text{CH}_2)_4\text{Cl} + 2\text{KCN} \rightarrow \text{NC}(\text{CH}_2)_4\text{CN} + 2\text{KCl} \)
इसके पश्चात इसका अपचयन \( \text{H}_2/\text{Ni} \) द्वारा करने पर हेक्सेन-1,6-डाइऐमीन प्राप्त होता है:
\( \text{NC}(\text{CH}_2)_4\text{CN} + 4\text{H}_2 \xrightarrow{\text{Ni}} \text{H}_2\text{N}-\text{CH}_2-(\text{CH}_2)_4-\text{CH}_2-\text{NH}_2 \)
मुख्य बिंदु:
• नाइट्रोबेन्जीन के अपचयन से ऐनिलिन बनती है।
• ऐल्किलिकरण द्वारा ऐमीन में कार्बन श्रृंखला बढ़ाई जा सकती है।
• साइनाइड के पूर्ण अपचयन से प्राथमिक ऐमीन बनते हैं और कार्बन श्रृंखला लंबी होती है।
आम गलतियाँ:
• अभिकर्मकों (Reagents) के नाम या सूत्र गलत लिखना।
• समीकरणों को संतुलित न करना।
• चरणों का क्रम गलत करना।
Exam Tips:
a) रासायनिक परिवर्तनों को हमेशा तीर के निशान पर सही अभिकर्मক लिखकर दर्शाएं।
b) ऐनिलिन बनाने की प्रयोगशाला और औद्योगिक विधि को याद रखें।
c) कार्बन श्रृंखला बढ़ाने के लिए साइनाइड विधि का अभ्यास करें।
Question 9.4: निम्नलिखित को उनके बढ़ते हुए क्षारकीय प्रबलता के क्रम में लिखिए-
(i) \( \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2, \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2, \text{NH}_3, \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_2\text{NH}_2 \) और \( (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{NH} \)
(ii) \( \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2, (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{NH}, (\text{C}_2\text{H}_5)_3\text{N}, \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 \)
(iii) \( \text{CH}_3\text{NH}_2, (\text{CH}_3)_2\text{NH}, (\text{CH}_3)_3\text{N}, \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2, \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_2\text{NH}_2 \)
Answer:
(i) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 < \text{NH}_3 < \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_2\text{NH}_2 < \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2 < (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{NH} \)
कारण: ऐनिलिन में एकाकी युग्म बेन्जीन वलय के साथ अनुनाद में होता है, जिससे यह प्रोटॉन ग्रहण करने के लिए कम उपलब्ध होता है। जबकि ऐलिफैटिक ऐमीन अधिक क्षारकीय होते हैं।
(ii) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 < \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2 < (\text{C}_2\text{H}_5)_3\text{N} < (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{NH} \)
कारण: जलीय विलयन में प्रेरणिक प्रभाव, हाइड्रेशन प्रभाव और steric hindrance (त्रिविम बाधा) के संयुक्त प्रभाव के कारण द्वितीयक ऐमीन सबसे अधिक क्षारकीय होता है।
(iii) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 < \text{CH}_3\text{NH}_2 < (\text{CH}_3)_3\text{N} < (\text{CH}_3)_2\text{NH} \)
कारण: मेथिल समूह वाले ऐमीनों में भी जलीय माध्यम में द्वितीयक ऐमीन की क्षारकता सबसे अधिक होती है।
मुख्य बिंदु:
• इलेक्ट्रॉन दाता समूह (+I प्रभाव) क्षारकता बढ़ाते हैं।
• एरोमैटिक ऐमीन (ऐनिलिन) कम क्षारकीय होते हैं क्योंकि एकाकी युग्म विस्थानीकृत होता है।
• जलीय माध्यम में \( 2^\circ > 1^\circ > 3^\circ \) का क्रम समानताः देखा जाता है (मेथिल/एथिल श्रृंखला के लिए)।
आम गलतियाँ:
• केवल प्रेरणिक प्रभाव देखना और जलीय माध्यम के कारकों को भूल जाना।
• \( 3^\circ \) ऐमीन को सबसे अधिक क्षारकीय मान लेना।
• बढ़ते और घटते क्रम के चिन्हों (< और >) में गलती करना।
Exam Tips:
• प्रश्न में पूछे गए क्रम (बढ़ता हुआ या घटता हुआ) को ध्यान से पढ़ें।
• अनुनाद और प्रेरणिक प्रभाव के तर्कों को स्पष्ट रूप से उत्तर में लिखें।
• एथिल और मेथिल दोनों श्रृंखलाओं के लिए जलीय माध्यम के क्षारकीय क्रम को याद रखें।
Question 9.5: निम्नलिखित अम्ल-क्षारक अभिक्रिया को पूर्ण कीजिए तथा उत्पादों के नाम लिखिए-
(i) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{NH}_2 + \text{HCl} \rightarrow \)
(ii) \( (\text{C}_2\text{H}_5)_3\text{N} + \text{HCl} \rightarrow \)
Answer:
(i) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{NH}_2 + \text{HCl} \rightarrow \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{NH}_3^+\text{Cl}^- \)
उत्पाद का नाम: n-प्रोपेলামीन हाइड्रोक्लोराइड
(ii) \( (\text{C}_2\text{H}_5)_3\text{N} + \text{HCl} \rightarrow [(\text{C}_2\text{H}_5)_3\text{NH}]^+\text{Cl}^- \)
उत्पाद का नाम: ट्राइएथिलammonium क्लोराइड
मुख्य बिंदु:
• ऐमीन प्रकृति में क्षारक होते हैं क्योंकि नाइट्रोजन पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म उपस्थित होता है।
• अम्ल के साथ अभिक्रिया करके ये लवण (Ammonium salts) बनाते हैं।
• यह अभिक्रिया ऐमीनों की क्षारकीय प्रकृति को सिद्ध करती है।
आम गलतियाँ:
• आयनिक बंध और उपसहसंयोजक बंध को गलत तरीके से दर्शाना।
• उत्पादों के नाम लिखने में भूल करना।
• हाइड्रोजन आयन को जोड़ना भूल जाना।
Exam Tips:
a) ऐमीन की अम्ल के साथ अभिक्रिया को लवण निर्माण के रूप में समझें।
b) उत्पादों के आईयूपीएसी या सामान्य नाम दोनों स्पष्ट लिखें।
c) समीकरण को संतुलित रूप में प्रस्तुत करें।
Question 9.6: सोडियम कार्बोनेट विलयन की उपस्थिति में मेथिल आयोडाइड के आधिक्य द्वारा ऐनिलिन के ऐल्किलन में उत्पन्न होने वाले उत्पादों के लिए अभिक्रिया लिखिए।
Answer:
जब ऐनिलिन की अभिक्रिया मेथिल आयोडाइड के आधिक्य के साथ सोडियम कार्बोनेट (\( \text{Na}_2\text{CO}_3 \) विलयन) की उपस्थिति में कराई जाती है, तो पहले N-मेथिलऐनिलिन, फिर N,N-डाइमेथिलऐनिलिन और अंत में चतुष्क अमोनियम लवण बनता है:
1. \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{CH}_3\text{I} \rightarrow \text{C}_6\text{H}_5\text{NHCH}_3 + \text{HI} \)
2. \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NHCH}_3 + \text{CH}_3\text{I} \rightarrow \text{C}_6\text{H}_5\text{N}(\text{CH}_3)_2 + \text{HI} \)
3. \( \text{C}_6\text{H}_5\text{N}(\text{CH}_3)_2 + \text{CH}_3\text{I} \rightarrow [\text{C}_6\text{H}_5\text{N}(\text{CH}_3)_3]^+\text{I}^- \) (N,N,N-ट्राइमेथिलऐनिलिनियम आयोडाइड)
\( \text{Na}_2\text{CO}_3 \) का कार्य अभिक्रिया में उत्पन्न होने वाले \( \text{HI} \) को उदासीन करना है ताकि अभिक्रिया आगे बढ़ सके।
मुख्य बिंदु:
• मेथिल आयोडाइड के आधिक्य के कारण यह अभिक्रिया तृतीयक ऐमीन पर रुकती नहीं बल्कि चतुष्क अमोनियम लवण बनाती है।
• \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \) एक दुर्बल क्षारक है जो \( \text{HI} \) को नष्ट करता है।
• यह ऐनिलिन के exhaustive methylation (पूर्ण ऐल्किलन) का उदाहरण है।
आम गलतियाँ:
• \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \) की भूमिका को स्पष्ट न करना।
• केवल एक ही उत्पाद (डाइमेथिलऐनिलिन) लिखकर छोड़ देना जबकि आधिक्य दिया है।
• चतुष्क अमोनियम लवण का सूत्र गलत लिखना।
Exam Tips:
a) सभी चरणों की समीकरणों को क्रमानुसार लिखें।
b) \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \) के उपयोग का कारण अवश्य बताएं।
c) उत्पादों के नाम सही-सही लिखें।
Question 9.7: ऐनिलिन की बेन्जॉयल क्लोराइड के साथ रासायनिक अभिक्रिया द्वारा उत्पन्न उत्पादों के नाम लिखिए।
Answer:
जब ऐनिलिन की अभिक्रिया बेन्जॉयल क्लोराइड (\( \text{C}_6\text{H}_5\text{COCl} \)) के साथ क्षारक (जैसे \( \text{NaOH} \)) की उपस्थिति में कराई जाती है, तो N-फेनिलबेन्जेनामाइड (या ऐनिलालाइड) बनता है। इस प्रक्रिया को बेन्जोलीकरण (Benzoylation) कहते हैं:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{C}_6\text{H}_5\text{COCl} \xrightarrow{\text{NaOH}} \text{C}_6\text{H}_5-\text{NH}-\text{CO}-\text{C}_6\text{H}_5 + \text{HCl} \)
उत्पाद का नाम: N-फेनिलबेन्जेनामाइड (बेन्जानिलाइड)।
मुख्य बिंदु:
• यह एक नाभिकीय प्रतिस्थापन अभिक्रिया है जिसमें ऐमीन का हाइड्रोजन परमाणु बेन्जॉयल समूह द्वारा प्रतिस्थापित होता है।
• इसे शोटेन-बाउमान (Schotten-Baumann) अभिक्रिया भी कहा जाता है।
• यह अभिक्रिया प्राथमिक और द्वितीयक ऐमीनों की पहचान में उपयोग होती है।
आम गलतियाँ:
• बेन्जॉयल क्लोराइड का सूत्र गलत लिखना।
• उत्पाद का नाम गलत या अधूरा लिखना।
• क्षारक की उपस्थिति का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) अभिक्रिया की रासायनिक समीकरण संतुलित रूप में लिखें।
b) उत्पाद 'N-फेनिलबेन्जेनामाइड' का नाम और संरचना स्पष्ट बनाएं।
c) इस अभिक्रिया का अन्य नाम (शोटेन-बाउमान अभिक्रिया) भी याद रखें।
Question 9.8: अणुसूत्र \( \text{C}_3\text{H}_9\text{N} \) से प्राप्त विभिन्न समावयवों की संरचना लिखिए। उन समावयवों के आईयूपीएसी नाम लिखिए जो नाइट्रस अम्ल के साथ नाइट्रोजन गैस मुक्त करते हैं।
Answer:
अणुसूत्र \( \text{C}_3\text{H}_9\text{N} \) के लिए निम्नलिखित समावयवी संभव हैं:
1. \( \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{CH}_2-\text{NH}_2 \) - प्रोपेन-1-ऐमीन (\( 1^\circ \))
2. \( \text{CH}_3-\text{CH}(\text{NH}_2)-\text{CH}_3 \) - प्रोपेन-2-ऐमीन (\( 1^\circ \))
3. \( \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{NH}-\text{CH}_3 \) - N-मेथिलएथेनामीन (\( 2^\circ \))
4. \( (\text{CH}_3)_3\text{N} \) - N,N-डाइमेथिलमेथेनामीन (\( 3^\circ \))
नाइट्रस अम्ल (\( \text{HNO}_2 \) अर्थात् \( \text{NaNO}_2 + \text{HCl} \)) के साथ केवल प्राथमिक ऐमीन (\( 1^\circ \)) अभिक्रिया करके ऐलिफैटिक डाइऐजोनियम लवण बनाते हैं जो अत्यधिक अस्थिर होने के कारण अपघटित होकर \( \text{N}_2 \) गैस मुक्त करते हैं:
\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{NH}_2 + \text{HNO}_2 \rightarrow \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{OH} + \text{N}_2\uparrow + \text{HCl} \)
अतः प्रोपेन-1-ऐमीन और प्रोपेन-2-ऐमीन \( \text{N}_2 \) गैस मुक्त करेंगे।
मुख्य बिंदु:
• \( \text{C}_3\text{H}_9\text{N} \) के कुल 4 समावयवी बनते हैं।
• केवल प्राथमिक ऐमीन ही नाइट्रस अम्ल से क्रिया करके नाइट्रोजन गैस मुक्त करते हैं।
• द्वितीयक और तृतीयक ऐमीन अलग प्रकार के उत्पाद (जैसे नाइट्रोसोमाइन या लवण) बनाते हैं।
आम गलतियाँ:
• द्वितीयक या तृतीयक ऐमीनों से भी नाइट्रोजन गैस निकलने का भ्रम पालना।
• समावयवियों के आईयूपीएसी नाम गलत लिखना।
• \( \text{HNO}_2 \) के निर्माण के अभिकर्मकों का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) प्राथमिक ऐमीनों की पहचान नाइट्रस अम्ल परीक्षण से की जाती है, इस तथ्य को याद रखें।
b) सभी संरचनाएं बनाकर उनके आईयूपीएसी नाम स्पष्ट दें।
c) समीकरण में \( \uparrow \) चिन्ह द्वारा गैस मुक्त होना दर्शाएं।
Question 9.9: निम्नलिखित परिवर्तन कीजिए-
(i) 3-मेथिलऐनिलिन से 3-नाइट्रोटॉलूईन
(ii) ऐनिलिन से 1,3,5-ट्राइब्रोमोबेन्जीन
Answer:
(i) 3-मेथिलऐनिलिन से 3-नाइट्रोटॉलूईन:
1. पहले 3-मेथिलऐनिलिन का डाइऐजोटाइजेशन (डाइएजोटन) \( \text{NaNO}_2 + \text{HCl} \) द्वारा \( 0^\circ\text{C}-5^\circ\text{C} \) पर किया जाता है जिससे डाइऐजोनियम लवण बनता है।
2. इसके पश्चात इसकी अभिक्रिया हाइपोफॉस्फोरस अम्ल (\( \text{H}_3\text{PO}_2 \)) या एथेनॉल के साथ कराने पर डाइऐजोनियम समूह का अपचयन \(-\text{H}\) द्वारा होता है और टॉलूईन बनता है।
3. इसके बाद टॉलूईन का सांद्र \( \text{HNO}_3 \) एवं \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) द्वारा नाइट्रीकरण करने पर 3-नाइट्रोटॉलूईन (मेटा-नाइट्रोटॉलूईन) प्राप्त होता है।
(ii) ऐनिलिन से 1,3,5-ट्राइब्रोमोबेन्जीन:
1. पहले ऐनिलिन की ब्रोमीन जल (\( \text{Br}_2/\text{H}_2\text{O} \)) के साथ अभिक्रिया कराने पर 2,4,6-ट्राइब्रोमोऐनिलिन का श्वेत अवक्षेप बनता है।
2. इसके बाद ऐमीनो समूह (\(-\text{NH}_2\)) को हटाने के लिए इसका डाइऐजोटाइजेशन किया जाता है और फिर \( \text{H}_3\text{PO}_2 \) (हाइपोफॉस्फोरस अम्ल) या एथेनॉल द्वारा अपचयन करके \( -\text{NH}_2 \) समूह को \( -\text{H} \) से प्रतिस्थापित किया जाता है, जिससे 1,3,5-ट्राइब्रोमोबेन्जीन प्राप्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• डाइऐजोनियम लवण मध्यवर्ती के रूप में एरोमैटिक यौगिकों के रूपांतरण में बहुत उपयोगी होते हैं।
• \( -\text{NH}_2 \) समूह को हटाने के लिए डाइएजोटन के बाद \( \text{H}_3\text{PO}_2 \) का प्रयोग किया जाता है।
• ऐनिलिन अत्यधिक सक्रिय होने के कारण ब्रोमीन जल के साथ सीधे तीनों पदों (2,4,6) पर प्रतिस्थापन देती है।
आम गलतियाँ:
• डाइऐजोटाइजेशन के लिए तापमान की शर्त (\( 0^\circ-5^\circ\text{C} \)) भूल जाना।
• \( -\text{NH}_2 \) समूह को सीधे हटाने के चरण को भूल जाना।
• अभिकर्मकों के क्रम को गलत लिखना।
Exam Tips:
a) बहु-चरणीय (Multi-step) परिवर्तनों में प्रत्येक चरण के अभिकर्मक को तीर के ऊपर साफ-साफ लिखें।
b) डाइऐजोनियम मध्यवर्ती बनाने और हटाने की तकनीक का बार-बार अभ्यास करें।
c) अभिक्रियाओं में तापमान का विशेष ध्यान रखें।
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