Official NCERT Solutions for Class 12 Chemistry: Chapter 09 एमीन
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Chapter-wise Solutions for Chemistry: Chapter 09 एमीन
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Question 9.1: निम्नलिखित यौगिकों को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों में वर्गीकृत कीजिए तथा इनके IUPAC नाम लिखिए:
(i) \( (\text{CH}_3)_2\text{CHNH}_2 \)
(ii) \( \text{CH}_3(\text{CH}_2)_2\text{NH}_2 \)
(iii) \( \text{CH}_3\text{NHCH}(\text{CH}_3)_2 \)
(iv) \( (\text{CH}_3)_3\text{CNH}_2 \)
(v) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NHCH}_3 \)
(vi) \( (\text{CH}_3\text{CH}_2)_2\text{NCH}_3 \)
(vii) \( m\text{-BrC}_6\text{H}_4\text{NH}_2 \)
Answer:
(i) \( 1^\circ \) ऐमीन; 2-मेथिलप्रोपेन-1-ऐमीन
(ii) \( 1^\circ \) ऐमीन; प्रोपेन-1-ऐमीन
(iii) \( 2^\circ \) ऐमीन; \( N \)-मेथिलप्रोपेन-2-ऐमीन
(iv) \( 1^\circ \) ऐमीन; 2-मेथिलप्रोपेन-2-ऐमीन
(v) \( 2^\circ \) ऐमीन; \( N \)-मे틸એमीन या \( N \)-मेथिलएनिलीन
(vi) \( 3^\circ \) ऐमीन; \( N \)-एथिल-\( N \)-मेथिलएथेनामीन
(vii) \( 1^\circ \) ऐमीन; 3-ब्रोमोबे젠ऐमीन या 3-ब्रोमोएनिलीन
मुख्य बिंदु:
• प्राथमिक ऐमीन में नाइट्रोजन परमाणु एक ऐल्किल या ऐरिल समूह से जुड़ा होता है।
• द्वितीयक ऐमीन में नाइट्रोजन परमाणु दो समूहों से जुड़ा होता है।
• तृतीयक ऐमीन में नाइट्रोजन परमाणु तीन समूहों से जुड़ा होता है।
• IUPAC नामकरण में मुख्य कार्बन श्रृंखला का चयन करके पूर्वलग्न 'ऐमीनो' या 'N-प्रतिस्थापित' का प्रयोग किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• प्राथमिक और द्वितीयक ऐमीन की पहचान में भ्रम होना।
• IUPAC नाम लिखते समय श्रृंखला की सही लंबाई न गिनना।
• \( N \)-प्रतिस्थापि का नामकरण गलत क्रम में लिखना।
Exam Tips:
a) संरचना को खोलकर (expanded structure) देखने से ऐमीन की कोटि तुरंत स्पष्ट हो जाती है।
b) IUPAC नाम लिखते समय वर्णमाला क्रम (alphabetical order) का ध्यान रखें।
c) संरचना और वर्गीकरण के अंक अलग-अलग हो सकते हैं, दोनों को स्पष्ट लिखें।
Question 9.2: निम्नलिखित युग्मों के यौगिकों में विभेद के लिए एक रासायनिक परीक्षण दीजिए:
(i) मेथिलऐमीन एवं डाइमेथिलऐमीन
(ii) द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीन
(iii) एथिलऐमीन एवं एनिलीन
(iv) एनिलीन एवं बेंजिलऐमीन
(v) एनिलीन एवं \( n \)-मेथिलएनिलीन
Answer:
(i) मेथिलऐमीन और डाइमेथिलऐमीन को कार्बिलऐमीन परीक्षण द्वारा पहचाना जा सकता है। प्राथमिक ऐमीन (\( \text{CH}_3\text{NH}_2 \)) क्लोरोफॉर्म और ऐल्कोहॉली \( \text{KOH} \) के साथ गर्म करने पर दुर्गंधयुक्त मेथिल आइसोसाइनाइड देता है, जबकि डाइमेथिलऐमीन \( (\text{CH}_3)_2\text{NH} \) यह परीक्षण नहीं देता है।
(ii) हिंसबर्ग अभिकर्मक (\( \text{C}_6\text{H}_5\text{SO}_2\text{Cl} \)) परीक्षण: द्वितीयक ऐमीन हिंसबर्ग अभिकर्मक के साथ ऐसा सल्फोनामाइड बनाते हैं जो क्षार में अघुलनशील होता है, जबकि तृतीयक ऐमीन हिंसबर्ग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया नहीं करते हैं।
(iii) एजो-डाई परीक्षण: एथिलऐमीन और एनिलीन को एजो-डाई परीक्षण द्वारा अलग किया जा सकता है। एनिलीन \( 0-5^\circ\text{C} \) पर \( \text{HNO}_2 \) के साथ अभिक्रिया करके डाइऐजोनियम लवण बनाती है जो 2-नेफ्थॉल के साथ नारंगी रंजक देता है, जबकि एथिलऐमीन नाइट्रोजन गैस मुक्त करती है और रंगीन रंजक नहीं बनाती।
(iv) बेंजिलऐमीन \( \text{HNO}_2 \) के साथ अभिक्रिया करके अस्थायी डाइऐजोनियम लवण बनाती है जो जल अपघटन पर बेंजिल ऐल्कोहॉलबनाता है, जबकि एनिलीन निम्न ताप पर स्थिर डाइऐजोनियम लवण बनाती है।
(v) कार्बिलऐमीन परीक्षण: एनिलीन (प्राथमिक ऐमीन) कार्बिलऐमीन परीक्षण देती है जिससे दुर्गंधयुक्त आइसोसाइनाइड बनता है, जबकि \( n \)-मेथिलएनिलीन (द्वितीयक ऐमीन) यह परीक्षण नहीं देती है।
मुख्य बिंदु:
• कार्बिलऐमीन परीक्षण केवल प्राथमिक ऐमीनों के लिए है।
• हिंसबर्ग परीक्षण \( 1^\circ, 2^\circ \) और \( 3^\circ \) ऐमीनों में भेद करने के लिए सर्वोतम है।
• एजो-डाई परीक्षण ऐरिफ़ैटिक और ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीनों में अंतर करता है।
आम गलतियाँ:
• अभिकर्मकों के रासायनिक सूत्र (जैसे हिंसबर्ग अभिकर्मक) गलत लिखना।
• तापमान की शर्तों (जैसे \( 0-5^\circ\text{C} \)) को न लिखना।
• समीकरणों में संतुलन (balancing) भूल जाना।
Exam Tips:
a) परीक्षण के नाम के साथ विशिष्ट प्रेक्षण (जैसे रंग परिवर्तन, दुर्गंध) अवश्य लिखें।
b) रासायनिक समीकरणों को संतुलित रूप में प्रदर्शित करें।
c) अंतर स्पष्ट करते समय तालिका (table) का उपयोग करें ताकि उत्तर स्पष्ट दिखे।
Question 9.3: निम्नलिखित के कारण बताइए:
(i) एनिलीन का \( \text{p}K_b \), मेथिलऐमीन से अधिक होता है।
(ii) एथिलऐमीन जल में विलेय है जबकि एनिलीन नहीं।
(iii) मेथिलऐमीन फेरिक क्लोराइड के साथ जल में अभिक्रिया करने पर जलयोजित फेरिक ऑक्साइड का अवक्षेप देता है।
(iv) यद्यपि ऐमीनो समूह इलेक्ट्रॉनारागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में आर्थो एवं पैरा निर्देशक होता है फिर भी एनिलीन नाइट्रीकरण द्वारा यथेष्ट मात्रा में मेटानाइट्रोएनिलीन देती है।
(v) एनिलीन फ्रीडेल-काफ्ट्स अभिक्रिया प्रदर्शित नहीं करती।
(vi) ऐरोमैटिक ऐमीनों के डाइऐजोनियम लवण ऐलिफैटिक ऐमीनों से प्राप्त लवण से अधिक स्थायी होते हैं।
(vii) प्राथमिक ऐमीन के संश्लेषण के लिए गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण को प्राथमिकता दी जाती है।
Answer:
(i) एनिलीन में \( -\text{NH}_2 \) समूह का एकाकी युग्म अनुनाद के कारण बेंजीन वलय के साथ विस्थानीकृत हो जाता है, जिससे प्रोटॉन ग्रहण करने के लिए इलेक्ट्रॉन युग्म कम उपलब्ध रहता है। अतः एनिलीन दुर्बल क्षारक है और इसका \( \text{p}K_b \) मान अधिक होता है।
(ii) एथिलऐमीन जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन आबंध बना लेती है, जिससे यह जल में घुलनशील है। इसके विपरीत, एनिलीन में बड़ा hydrophobic फेनिल समूह (\( -\text{C}_6\text{H}_5 \)) होने के कारण यह जल के साथ प्रभावी H-आबंध नहीं बना पाती।
(iii) मेथिलऐमीन जल में घुलकर \( \text{OH}^- \) आयन देती है, जिससे विलयन की क्षारकता बढ़ जाती है। यह \( \text{Fe}^{3+} \) आयनों के साथ क्रिया करके जलयोजित फेरिक ऑक्साइड का भूरा अवक्षेप बनाती है।
(iv) अम्लीय माध्यम में नाइट्रीकरण के दौरान एनिलीन प्रोटonis होकर ऐनिलिनियम आयन (\( -\text{NH}_3^+ \)) बनाती है, जो कि एक प्रबल मेटा-निर्देशक समूह है। इसी कारण कुछ मात्रा में मेटा-उत्पाद भी प्राप्त होता है।
(v) एनिलीन लुईस अम्ल \( \text{AlCl}_3 \) के साथ लवण बना लेती है जिससे नाइट्रोजन पर धनात्मक आवेश आ जाता है और वलय निष्क्रिय हो जाती है। इसलिए यह फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया नहीं देती।
(vi) ऐरोमैटिक डाइऐजोनियम लवण अनुनाद (resonance) के कारण स्थायी होते हैं, जबकि ऐलिफैटिक डाइऐजोनियम लवणों में ऐसा स्थायित्व नहीं पाया जाता।
(vii) गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण से केवल शुद्ध प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होती है, इसमें \( 2^\circ \) या \( 3^\circ \) ऐमीन सह-उत्पाद के रूप में नहीं बनते हैं।
मुख्य बिंदु:
• अनुनाद प्रभाव क्षारीयता को कम करता है।
• H-आबंध विलेयता को निर्धारित करता है।
• लवण बनना फ्रीडेल-क्राफ्ट्स अभिक्रिया में मुख्य बाधा है।
आम गलतियाँ:
• \( \text{p}K_b \) मान अधिक होने का अर्थ कम क्षारीय होना है, इसे उल्टा समझ लेना।
• नाइट्रीकरण में ऐनिलिनियम आयन की भूमिका को स्पष्ट न करना।
• अनुनाद संरचनाओं को गलत बनाना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक कारण स्पष्ट करते समय संबंधित रासायनिक संरचना या अनुनाद का संदर्भ दें।
b) 'कम क्षारीय' और 'अधिक \( \text{p}K_b \)' के संबंध को ठीक से समझकर लिखें।
c) मुख्य बिंदुओं को बुलेट पॉइंट्स में लिखें ताकि परीक्षक को जाँचने में आसानी हो।
Question 9.4: निम्नलिखित को क्रम में लिखिए:
(i) \( \text{p}K_b \) मान के घटते क्रम में: \( \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2, \text{C}_6\text{H}_5\text{NHCH}_3, (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{NH} \) एवं \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2$
\)
(ii) क्षारीय प्रबली के घटते क्रम में: \( \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2, \text{C}_6\text{H}_5\text{N}(\text{CH}_3)_2, (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{NH} \) एवं \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2$
\)
(iii) क्षारीय प्रबली के बढ़ते क्रम में:
(a) एनिलीन, पैरा-नाइट्रोएनिलीन, एवं पैरा-टॉलूडीन
(b) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2, \text{C}_6\text{H}_5\text{NHCH}_3, \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_2\text{NH}_2$
\)
(iv) गैस अवस्था में घटते हुए क्षारीय प्राबल्य के क्रम में: \( \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2, (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{NH}, (\text{C}_2\text{H}_5)_3\text{N} \) एवं \( \text{NH}_3$
\)
(v) क्वथनांक के बढ़ते क्रम में: \( \text{C}_2\text{H}_5\text{OH}, (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{NH}, \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2$
\)
(vi) जल में विलेयता के बढ़ते क्रम में: \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2, (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{NH}, \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2 \)
Answer:
(i) \( \text{p}K_b \) का घटتا क्रम (यानी क्षारीयता का बढ़ता क्रम):
\( (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{NH} > \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2 > \text{C}_6\text{H}_5\text{NHCH}_3 > \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 \)
अतः \( \text{p}K_b \) का घटता क्रम होगा:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 > \text{C}_6\text{H}_5\text{NHCH}_3 > \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2 > (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{NH} \)
(ii) क्षारीय प्राबल्य का घटता क्रम:
\( (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{NH} > \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2 > \text{C}_6\text{H}_5\text{N}(\text{CH}_3)_2 > \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 \)
(iii) (a) पैरा-नाइट्रोएनिलीन \( < \) एनिलीन \( < \) पैरा-टॉलूडीन
(iii) (b) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 < \text{C}_6\text{H}_5\text{NHCH}_3 < \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_2\text{NH}_2 \)
(iv) गैस अवस्था में क्षारीय प्राबल्य का घटता क्रम (+I प्रभाव के आधार पर):
\( (\text{C}_2\text{H}_5)_3\text{N} > (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{NH} > \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2 > \text{NH}_3 \)
(v) क्वथनांक का बढ़ता क्रम (H-आबंध के सामर्थ्य के आधार पर):
\( (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{NH} < \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2 < \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} \)
(vi) जल में विलेयता का बढ़ता क्रम:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 < (\text{C}_2\text{H}_5)_2\text{NH} < \text{C}_2\text{H}_5\text{NH}_2 \)
मुख्य बिंदु:
• प्रबल क्षारक का \( \text{p}K_b \) मान कम होता है।
• +I प्रभाव (प्रेrणात्मक प्रभाव) ऐल्किल समूहों में क्षारीयता बढ़ाता है।
• ऑक्सीजन की उच्च विद्युतऋणात्मकता के कारण ऐल्कोहॉल में H-आबंध सबसे मजबूत होता है।
आम गलतियाँ:
• \( \text{p}K_b \) और \( K_b \) के संबंध में भ्रमित होकर उल्टा क्रम लिख देना।
• जलीय अवस्था और गैसीय अवस्था के क्षारीय क्रम को आपस में मिला देना।
Exam Tips:
a) क्रम लिखने वाले प्रश्नों में हमेशा पहले रफ कार्य में क्षारीयता का सही क्रम निकालें।
b) 'घटते' और 'बढ़ते' शब्दों को ध्यानपूर्वक पढ़ें।
c) +I प्रभाव और विलायकीकरण (solvation) प्रभाव के मुख्य कारणों को संक्षिप्त में याद रखें।
Question 9.5: इन्हें आप कैसे परिवर्तित करेंगे:
(i) एथेनॉइक अम्ल को मेथेनेमीन में
(ii) हैक्सेननाइट्रิล को 1-ऐमीनोपेन्टेन में
(iii) मेथेनॉल को एथेनॉइक अम्ल में
(iv) एथेनेमीन को मेथेनेमीन में
(v) एथेनॉइक अम्ल को प्रोपेनॉइक अम्ल में
(vi) मेथेनेमीन को एथेनेमीन में
(vii) नाइट्रोमेथेन को डाइमेथिलऐमीन में
(viii) प्रोपेनॉइक अम्ल को एथेनॉइक अम्ल में
Answer:
(i) एथेनॉइक अम्ल \( \xrightarrow{\text{SOCl}_2} \text{CH}_3\text{COCl} \xrightarrow{\text{NH}_3} \text{CH}_3\text{CONH}_2 \xrightarrow{\text{Br}_2/\text{NaOH}} \text{CH}_3\text{NH}_2 \)
(ii) हैक्सेननाइट्राइल \( \xrightarrow{\text{H}^+/\text{H}_2\text{O}} \text{C}_5\text{H}_{11}\text{COOH} \xrightarrow{\text{SOCl}_2} \text{C}_5\text{H}_{11}\text{COCl} \xrightarrow{\text{NH}_3} \text{C}_5\text{H}_{11}\text{CONH}_2 \xrightarrow{\text{Br}_2/\text{KOH}} \text{C}_5\text{H}_{11}\text{NH}_2 \) (1-ऐमीनोपेन्टेन)
(iii) मेथेनॉल \( \xrightarrow{\text{PCl}_3} \text{CH}_3\text{Cl} \xrightarrow{\text{NaCN}} \text{CH}_3\text{CN} \xrightarrow{\text{H}^+/\text{H}_2\text{O}} \text{CH}_3\text{COOH} \)
(iv) एथेनेमीन \( \xrightarrow{\text{HNO}_2} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{OH} \xrightarrow{\text{KMnO}_4/\text{H}^+} \text{CH}_3\text{COOH} \xrightarrow{\text{NH}_3/\Delta} \text{CH}_3\text{CONH}_2 \xrightarrow{\text{Br}_2/\text{NaOH}} \text{CH}_3\text{NH}_2 \)
(v) एथेनॉइक अम्ल \( \xrightarrow{\text{LiAlH}_4} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{OH} \xrightarrow{\text{PCl}_5} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{Cl} \xrightarrow{\text{NaCN}} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CN} \xrightarrow{\text{H}^+/\text{H}_2\text{O}} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{COOH} \)
(vi) मेथेनेमीन \( \xrightarrow{\text{HNO}_2} \text{CH}_3\text{OH} \xrightarrow{\text{PCl}_5} \text{CH}_3\text{Cl} \xrightarrow{\text{NaCN}} \text{CH}_3\text{CN} \xrightarrow{\text{H}_2/\text{Ni}} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{NH}_2 \)
(vii) नाइट्रोमेथेन \( \xrightarrow{\text{Sn/HCl}} \text{CH}_3\text{NH}_2 \xrightarrow{\text{CHCl}_3/\text{KOH}/\Delta} \text{CH}_3\text{NC} \xrightarrow{\text{Na/C}_2\text{H}_5\text{OH}} (\text{CH}_3)_2\text{NH} \)
(viii) प्रोपेनॉइक अम्ल \( \xrightarrow{\text{NH}_3/\Delta} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CONH}_2 \xrightarrow{\text{Br}_2/\text{NaOH}} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{NH}_2 \xrightarrow{\text{HNO}_2} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{OH} \xrightarrow{\text{KMnO}_4/\text{H}^+} \text{CH}_3\text{COOH} \)
मुख्य बिंदु:
• कार्बन श्रृंखला बढ़ाने के लिए साइनाइड (\(-\text{CN}\)) बनाना सबसे अच्छा तरीका है।
• कार्बन श्रृंखला घटाने के लिए हॉफमैन ब्रोमामाइड निम्नीकरण अभिक्रिया का उपयोग होता है।
• अभिकर्मकों (जैसे \( \text{Br}_2/\text{NaOH}, \text{HNO}_2, \text{LiAlH}_4 \)) का सही चयन आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• कार्बन परमाणुओं की संख्या (chain length) का ध्यान न रखना।
• गलत अभिकर्मक का प्रयोग करके उत्पाद बदल देना।
Exam Tips:
a) रूपांतरण (conversion) के प्रश्नों में चरणों को तीर के निशान (\(\rightarrow\)) के साथ स्पष्ट रूप से लिखें।
b) हॉफमैन ब्रोमामाइड अभिक्रिया और साइनाइड निर्माण के चरणों को अच्छी तरह अभ्यास कर लें।
c) अभिकर्मकों की परिस्थितियों (\(\Delta, \text{HCl}\) आदि) को तीर के ऊपर अवश्य दर्शाएं।
Question 9.6: प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक ऐमीनों की पहचान की विधि का वर्णन कीजिए। इन अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण भी लिखिए।
Answer:
प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीनों में विभेद और पहचान के लिए मुख्य रूप से हिंसबर्ग परीक्षण (\( \text{C}_6\text{H}_5\text{SO}_2\text{Cl} \), बेंजीनसल्फonyl क्लोराइड) का उपयोग किया जाता है:
1. प्राथमिक ऐमीन: यह हिंसबर्ग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया करके \( N \)-एथिलबेंजीनसल्फोनामाइड बनाती है, जिसमें नाइट्रोजन से जुड़ा हाइड्रोजन परमाणु प्रबल इलेक्ट्रॉन-निकाय सल्फोनील समूह के कारण अम्लीय होता है। अतः यह क्षार (\(\text{NaOH}\)) में घुलनशील होता है।
2. द्वितीयक ऐमीन: यह हिंसबर्ग अभिकर्मक के साथ अभिक्रिया करके \( N,N \)-डाइऐथिलबेंजीनसल्फोनामाइड बनाती है। इसमें नाइट्रोजन पर कोई हाइड्रोजन परमाणु नहीं होता, अतः यह अम्लीय नहीं है और क्षार में अघुलनशील रहता है।
3. चाहें तो कार्बिलऐमीन परीक्षण द्वारा भी प्राथमिक ऐमीन की पुष्टि की जा सकती है। तृतीयक ऐमीन हिंसबर्ग अभिकर्मक के साथ कोई अभिक्रिया नहीं करती है।
मुख्य बिंदु:
• हिंसबर्ग अभिकर्मक \( \text{C}_6\text{H}_5\text{SO}_2\text{Cl} \) है।
• प्राथमिक ऐमीन का सल्फोनामाइड क्षार में घुलनशील होता है।
• द्वितीयक ऐमीन का सल्फोनामाइड क्षार में अघुलनशील होता है।
• तृतीयक ऐमीन कोई अभिक्रिया नहीं देती।
आम गलतियाँ:
• क्षार में घुलनशीलता के नियमों को आपस में मिला देना।
• समीकरणों में हाइड्रोजन की उपस्थिति या अनुपस्थिति को गलत दर्शाना।
Exam Tips:
a) इस प्रश्न के उत्तर में रासायनिक समीकरण लिखना अनिवार्य है।
b) तीनों ऐमीनों के लिए अलग-अलग बुलेट पॉइंट बनाकर स्पष्टीकरण दें।
c) हिंसबर्ग अभिकर्मक का पूरा नाम और सूत्र सही-सही लिखें।
Question 9.7: निम्न पर लघु टिप्पणी लिखिए:
(i) कार्बिलऐमीन अभिक्रिया
(ii) डाइऐजोकरण
(iii) हॉफमैन ब्रोमामाइड डिग्रेडेशन (निम्नीकरण) अभिक्रिया
(iv) युग्मन अभिक्रिया
(v) अमोनीअपचयन
(vi) ऐसीटिलन
(vii) गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण
Answer:
(i) कार्बिलऐमीन अभिक्रिया: ऐलिफैटिक और ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीनों को क्लोरोफॉर्म और ऐल्कोहॉली पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ गर्म करने पर दुर्गंधयुक्त आइसोसाइनाइड (कार्बिलऐमीन) बनते हैं। द्वितीयक और तृतीयक ऐमीन यह अभिक्रिया नहीं देते हैं।
(ii) डाइऐजोकरण: प्राथमिक ऐरोमैटिक ऐमीन को \( 0-5^\circ\text{C} \) पर नाइट्रस अम्ल (\( \text{HNO}_2 \) या \( \text{NaNO}_2 + \text{HCl} \)) के साथ अभिकृत करने पर ऐरोमैटिक डाइऐजोनियम लवण बनते हैं।
(iii) हॉफमैन ब्रोमामाइड निम्नीकरण अभिक्रिया: जब किसी एमाइड को ब्रोमीन और जलीय \( \text{NaOH} \) के साथ उपचारित किया जाता है, तो मूल एमाइड से एक कार्बन परमाणु कम वाला प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होता है।
(iv) युग्मन अभिक्रिया: ऐरोजनियस डाइऐजोनियम लवण फिनोल या ऐरोमैटिक ऐमीन के साथ coupling करके रंगीन 'ऐजो रंजक' बनाते हैं।
(v) अमोनीअपचयन: ऐल्किल हैलाइड की अमोनिया के साथ नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया द्वारा प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक ऐमीनों का मिश्रण प्राप्त होता है।
(vi) ऐसीटिलन: प्राथमिक और द्वितीयक ऐमीनों की अम्ल क्लोराइड, एनहाइड्राइड या एस्टर के साथ अभिक्रिया द्वारा \( -\text{NH}_2 \) या \( -\text{NH} \) समूह के हाइड्रोजन का ऐसीटिल समूह द्वारा प्रतिस्थापन ऐसीटिलन कहलाता है।
(vii) गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण: थैलिमाइड की एथेनॉलिक \( \text{KOH} \) और ऐल्किल हैलाइड के साथ अभिक्रिया के पश्चात जल-अपघटन द्वारा शुद्ध प्राथमिक ऐमीन प्राप्त करने की यह एक उत्तम विधि है।
मुख्य बिंदु:
• कार्बिलऐमीन परीक्षण केवल प्राथमिक ऐमीनों की पहचान के लिए है।
• हॉफमैन निम्नीकरण में कार्बन श्रृंखला छोटी हो जाती है।
• युग्मन अभिक्रिया रंगीन ऐजो यौगिक बनाती है।
आम गलतियाँ:
• टिप्पणियों में अभिकर्मकों के नाम या उनके रासायनिक सूत्र भूल जाना।
• हॉफमैन निम्नीकरण में कार्बन कम होने की बात को न लिखना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक टिप्पणी के साथ एक छोटा और संतुलित रासायनिक समीकरण अवश्य लिखें।
b) मुख्य शब्दावली (जैसे नाभिकरागी, आइसोसाइनाइड, ऐजो रंजक) का प्रयोग करें।
c) परिभाषा को सटीक और संक्षिप्त रखें।
Question 9.8: निम्न परिवर्तन निष्पादित कीजिए:
(i) नाइट्रोबेन्जीन से बेंजोइक अम्ल
(ii) बेन्जीन से \( m \)-ब्रोमोफिनॉल
(iii) बेन्जोइक अम्ल से एनिलीन
(iv) एनिलीन से 2, 4, 6-ट्राइब्रोमोफ्लुओरोबेन्जीन
(v) बेंजिल क्लोराइड से 2-\( p \)-फेनिलाएथेनेमीन
(vi) क्लोरोबेन्जीन से \( p \)-क्लोरोएनीलीन
(vii) एनिलीन से \( p \)-ब्रोमोएनीलीन
(viii) बेन्जमाइड से टॉलूडीन
(ix) एनिलीन से बेन्जाइल ऐल्कोहॉल
Answer:
(i) नाइट्रोबेन्जीन \( \xrightarrow{\text{H}_2/\text{Pd}} \) एनिलीन \( \xrightarrow{\text{NaNO}_2+\text{HCl}, 273-278\text{K}} \) बेंजीनडाइएजोनियम क्लोराइड \( \xrightarrow{\text{CuCN}/\text{KCN}} \) बेंजोनिट्राइल \( \xrightarrow{\text{H}_3\text{O}^+} \) बेंजोइक अम्ल
(ii) बेन्जीन \( \xrightarrow{\text{HNO}_3/\text{H}_2\text{SO}_4} \) नाइट्रोबेंजीन \( \xrightarrow{\text{Br}_2} m \)-ब्रॉमोनाइट्रोबेंजीन \( \xrightarrow{\text{Sn/HCl}} m \)-ब्रोमोएनिलीन \( \xrightarrow{\text{NaNO}_2+\text{HCl}} \) डाइऐजोनियम लवण \( \xrightarrow{\text{H}_2\text{SO}_4/\Delta} m \)-ब्रोमोफिनॉल
(iii) बेंजोइक अम्ल \( \xrightarrow{\text{SOCl}_2} \) बेंजॉयल क्लोराइड \( \xrightarrow{\text{NH}_3} \) बेंजमाइड \( \xrightarrow{\text{Br}_2/\text{NaOH}} \) एनिलीन
(iv) एनिलीन \( \xrightarrow{\text{Br}_2/\text{H}_2\text{O}} \) 2,4,6-ट्राइब्रोमोएनिलीन \( \xrightarrow{\text{NaNO}_2/\text{HCl}} \) डाइऐजोनियम लवण \( \xrightarrow{\text{HBF}_4} \) फ़्लुओरोबेन्जीन (बाल्श-शीमैन अभिक्रिया)
(v) बेंजिल क्लोराइड \( \xrightarrow{\text{ethanolic NaCN}} \) बेंजाइल सायनाइड \( \xrightarrow{\text{H}_2/\text{Ni}} \) 2-फेनिलाएथेनेमीन
(vi) क्लोरोबेन्जीन \( \xrightarrow{\text{HNO}_3/\text{H}_2\text{SO}_4} p \)-नाइट्रोक्लोरोबेंजीन (मुख्य उत्पाद) \( \xrightarrow{\text{H}_2/\text{Pd}} p \)-क्लोरोएनीलीन
(vii) एनिलीन \( \xrightarrow{(\text{CH}_3\text{CO})_2\text{O}/\text{pyridine}} N \)-फिनाएथेनामाइड \( \xrightarrow{\text{Br}_2/\text{CH}_3\text{COOH}} p \)-bromo \( N \)-फिनाएथेनामाइड \( \xrightarrow{\text{OH}^-\text{or H}^+} p \)-ब्रोमोएनीलीन
(viii) बेंजमाइड \( \xrightarrow{\text{Br}_2/\text{NaOH}} \) एनिलीन \( \xrightarrow{\text{NaNO}_2+\text{HCl}} \) डाइऐजोनियम लवण \( \xrightarrow{\text{H}_3\text{PO}_2} \) बेंजीन \( \xrightarrow{\text{CH}_3\text{Cl}/\text{anhydrous AlCl}_3} \) टॉलूडीन (या टॉलूईन)
(ix) एनिलीन \( \xrightarrow{\text{NaNO}_2+\text{HCl}} \) बेंजीनडाइएजोनियम क्लोराइड \( \xrightarrow{\text{CuCN}} \) बेंजोनिट्राइल \( \xrightarrow{\text{H}_3\text{O}^+} \) बेंजोइक अम्ल \( \xrightarrow{(i) \text{LiAlH}_4, (ii) \text{H}_2\text{O}} \) बेंजाइल ऐल्कोहॉल
मुख्य बिंदु:
• ऐरोमैटिक परिवर्तन में डाइऐजोनियम लवण एक महत्वपूर्ण मध्यवर्ती (intermediate) है।
• समूह सुरक्षा (protection) के लिए ऐसीटिलन का उपयोग किया जाता है।
• अनुनाद के प्रभाव से o/p और m-निर्देशित उत्पादों का चयन होता है।
आम गलतियाँ:
• अभिकर्मकों का क्रम गलत लिख देना।
• \( p \)-उत्पाद के स्थान पर गलती से \( o \)-उत्पाद मुख्य मान लेना।
Exam Tips:
a) परिवर्तनों को चरण-दर-चरण ऐरो (\(\rightarrow\)) लगाकर साफ-सुथरा दर्शाएं।
b) प्रत्येक तीर के ऊपर सही अभिकर्मक और तापमान लिखें।
c) मुख्य और सह-उत्पादों का ध्यान रखें।
Question 9.9: निम्न अभिक्रियाओं में A, B तथा C की संरचना दीजिए:
(i) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{I} \xrightarrow{\text{NaCN}} \text{A} \xrightarrow{\text{OH}^-\text{ जल अपघटन}} \text{B} \xrightarrow{\text{NaOH, Br}_2} \text{C} \)
(ii) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2\text{Cl} \xrightarrow{\text{CuCN}} \text{A} \xrightarrow{\text{H}_2\text{O}/\text{H}^+} \text{B} \xrightarrow{\text{NH}_3/\Delta} \text{C} \)
(iii) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{Br} \xrightarrow{\text{KCN}} \text{A} \xrightarrow{\text{LiAlH}_4} \text{B} \xrightarrow{\text{HNO}_2, 0^\circ\text{C}} \text{C} \)
(iv) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NO}_2 \xrightarrow{\text{Fe/HCl}} \text{A} \xrightarrow{\text{NaNO}_2+\text{HCl}, 273\text{K}} \text{B} \xrightarrow{\text{H}_2\text{O}/\text{H}^+} \text{C} \)
(v) \( \text{CH}_3\text{COOH} \xrightarrow{\text{NH}_3/\Delta} \text{A} \xrightarrow{\text{NaOH/Br}_2} \text{B} \xrightarrow{\text{HNO}_2} \text{C} \)
(vi) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NO}_2 \xrightarrow{\text{Fe/HCl}} \text{A} \xrightarrow{\text{HNO}_2, 273\text{K}} \text{B} \xrightarrow{\text{C}_2\text{H}_5\text{OH}} \text{C} \)
Answer:
(i) A = \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CN} \) (प्रोपेनाइड्राइल)
B = \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{COOH} \) (प्रोपेनॉइक अम्ल)
C = \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{NH}_2 \) (एथेनेमीन)
(ii) A = \( \text{C}_6\text{H}_5\text{CN} \) (बेंजोनिट्राइल)
B = \( \text{C}_6\text{H}_5\text{COOH} \) (बेंजोइक अम्ल)
C = \( \text{C}_6\text{H}_5\text{CONH}_2 \) (बेंज़माइड)
(iii) A = \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CN} \) (प्रोपेनेनिट्राइल)
B = \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{NH}_2 \) (प्रोपेन-1-ऐमीन)
C = \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{OH} \) (प्रोपेन-1-ऑल)
(iv) A = \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 \) (एनिलीन)
B = \( \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2^+\text{Cl}^- \) (बेंजीनडाइएजोनियम क्लोराइड)
C = \( \text{C}_6\text{H}_5\text{OH} \) (फिनॉल)
(v) A = \( \text{CH}_3\text{CONH}_2 \) (एथेनामाइड)
B = \( \text{CH}_3\text{NH}_2 \) (मेथेनेमीन)
C = \( \text{CH}_3\text{OH} \) (मेथेनॉल)
(vi) A = \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 \) (एनिलीन)
B = \( \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2^+\text{Cl}^- \) (बेंजीनडाइएजोनियम क्लोराइड)
C = \( \text{C}_6\text{H}_5\text{OH} \) (फिनॉल) या \( \text{C}_6\text{H}_6 \)
मुख्य बिंदु:
• अभिकर्मक श्रृंखला को ध्यान से समझकर मध्यवर्ती यौगिक पहचानें।
• \( \text{NaCN} \) कार्बन श्रृंखला बढ़ाता है जबकि हॉफमैन निम्नीकरण श्रृंखला घटाता है।
• \( \text{HNO}_2 \) प्राथमिक ऐमीन को ऐल्कोहॉल में बदल देती है।
आम गलतियाँ:
• कार्बन परमाणुओं की गिनती में गलती करना।
• कार्यात्मक समूह (functional group) को गलत पहचानना।
Exam Tips:
a) A, B, C की संरचनाओं के IUPAC नाम और रासायनिक सूत्र दोनों लिखें।
b) अभिक्रिया के प्रत्येक चरण को अलग से लिखकर जांच लें।
c) तीर के ऊपर दिए गए अभिकर्मकों के प्रभाव को अच्छी तरह याद रखें।
Question 9.10: एक ऐरोमैटिक यौगिक 'A' जलीय अमोनिया के साथ गर्म करने पर यौगिक 'B' बनाता है जो \( \text{Br}_2 \) एवं KOH के साथ गर्म करने पर अणु सूत्र \( \text{C}_6\text{H}_7\text{N} \) वाला यौगिक C बनाता है। A, B एवं C यौगिकों की संरचना एवं इनके IUPAC नाम लिखिए।
Answer:
दिया गया है कि यौगिक 'C' का अणु सूत्र \( \text{C}_6\text{H}_7\text{N} \) है और यह \( \text{Br}_2 \) एवं KOH के साथ गर्म करने पर (हॉफमैन ब्रोमामाइड अभिक्रिया द्वारा) बना है, अतः 'C' एनिलीन (\( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 \)) है।
चूँकि 'B' से 'C' (एनिलीन) बनता है, इसलिए 'B' बेंज़माइड (\( \text{C}_6\text{H}_5\text{CONH}_2 \)) होना चाहिए।
तथा 'A' जलीय अमोनिया के साथ गर्म करने पर 'B' (बेंज़माइड) बनाता है, अतः 'A' बेंजोइक अम्ल (\( \text{C}_6\text{H}_5\text{COOH} \)) है।
• यौगिक A: बेंजोइक अम्ल (\( \text{C}_6\text{H}_5\text{COOH} \))
• यौगिक B: बेंज़माइड (\( \text{C}_6\text{H}_5\text{CONH}_2 \))
• यौगिक C: एनिलीन या बेंजीनऐमीन (\( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 \))
मुख्य बिंदु:
• \( \text{C}_6\text{H}_7\text{N} \) एनिलीन की संरचना को इंगित करता है।
• हॉफमैन ब्रोमामाइड अभिक्रिया एमाइड से ऐमीन बनाती है।
• अम्ल और अमोनिया की क्रिया एमाइड देती है।
आम गलतियाँ:
• यौगिकों के क्रम को उल्टा समझ लेना।
• नामकरण में IUPAC के स्थान पर सामान्य नाम लिखना (यदि IUPAC पूछा गया हो)।
Exam Tips:
• पीछे से (यौगिक C से A की ओर) पहेली को हल करना शुरू करें।
• प्रत्येक यौगिक का रासायनिक नाम और संरचना दोनों स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
• उत्तर के अंत में तीनों यौगिकों के नाम एक साथ स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध करें।
Question 9.11: निम्नलिखित अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए:
(i) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{CHCl}_3 + (\text{alkoholi}) \text{KOH} \rightarrow \)
(ii) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2\text{Cl} + \text{H}_3\text{PO}_2 + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \)
(iii) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{H}_2\text{SO}_4 (\text{sandr}) \rightarrow \)
(iv) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2\text{Cl} + \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} \rightarrow \)
(v) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{Br}_2(\text{aq}) \rightarrow \)
(vi) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + (\text{CH}_3\text{CO})_2\text{O} \rightarrow \)
(vii) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2\text{Cl} \xrightarrow[(ii) \text{NaNO}_2/\text{Cu, }\Delta]{(i) \text{HBF}_4} \)
Answer:
(i) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{CHCl}_3 + 3\text{KOH} \rightarrow \text{C}_6\text{H}_5\text{NC} + 3\text{KCl} + 3\text{H}_2\text{O} \) (फेニल आइसोसाइनाइड)
(ii) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2\text{Cl} + \text{H}_3\text{PO}_2 + \text{H}_2\text{O} \rightarrow \text{C}_6\text{H}_6 + \text{N}_2 + \text{H}_3\text{PO}_3 + \text{HCl} \) (बेंजीन)
(iii) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{H}_2\text{SO}_4(\text{sandr}) \rightarrow [\text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_3]^+\text{HSO}_4^- \) (एनिलीनियम हाइड्रोजन सल्फेट)
(iv) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2\text{Cl} + \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} \rightarrow \text{C}_6\text{H}_6 + \text{CH}_3\text{CHO} + \text{N}_2 + \text{HCl} \) (बेंजीन)
(v) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + 3\text{Br}_2(\text{aq}) \rightarrow 2,4,6\text{-त्राइब्रोमोएनिलीन} + 3\text{HBr} \)
(vi) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + (\text{CH}_3\text{CO})_2\text{O} \rightarrow \text{C}_6\text{H}_5\text{-NH-COCH}_3 + \text{CH}_3\text{COOH} \) (\( N \)-फिनाएथेनामाइड)
(vii) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2\text{Cl} \xrightarrow[(ii) \text{NaNO}_2/\text{Cu, }\Delta]{(i) \text{HBF}_4} \text{C}_6\text{H}_5\text{NO}_2 + \text{N}_2 + \text{NaBF}_4 \) (नाइट्रोबेन्जीन)
मुख्य बिंदु:
• कार्बिलऐमीन अभिक्रिया आइसोसाइनाइड बनाती है।
• \( \text{H}_3\text{PO}_2 \) डाइऐजोनियम समूह का अपचयन करके बेंजीन देता है।
• जलीय ब्रोमीन से त्रि-ब्रोमीनीकरण (2,4,6-स्थान पर) होता है।
आम गलतियाँ:
• उत्पादों के संतुलन (stoichiometry) में गड़बड़ी करना।
• अभिकर्मकों के प्रभाव को गलत समझना।
Exam Tips:
a) पूरी रासायनिक समीकरण लिखें, केवल तीर के आगे उत्पाद न छोड़ें।
b) महत्वपूर्ण अभिक्रियाओं (जैसे कार्बिलऐमीन और ब्रोमीनीकरण) के नाम याद रखें।
c) उप-उत्पादों (by-products) को भी संतुलित रूप में लिखें।
Question 9.12: ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन को गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण से क्यों नहीं बनाया जा सकता है?
Answer:
गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण में थैलिमाइड के पोटैशियम लवण की ऐल्किल हैलाइड के साथ नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया (\( \text{S}_\text{N}2 \)) कराई जाती है। लेकिन एरिल हैलाइड (जैसे क्लोरोबेंजीन) अनुनाद प्रभाव के कारण कार्बन-हैलोजन बंध में आंशिक द्विबंध गुण रखते हैं और इनमें \( \text{S}_\text{N}2 \) प्रतिस्थापन बहुत कठिन होता है। इसलिए ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन इस विधि द्वारा नहीं बनाए जा सकते हैं।
मुख्य बिंदु:
• गैब्रियल थैलिमाइड संश्लेषण में \( \text{S}_\text{N}2 \) क्रियाविधि होती है।
• एरिल हैलाइडों में \( \text{C-Cl} \) बंध आंशिक द्विबंध रखता है।
• ऐरिल समूह नाभिकरागी प्रतिस्थापन के प्रति निष्क्रिय होते हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल विलेयता या H-आबंध का कारण बता देना।
• \( \text{S}_\text{N}2 \) क्रियाविधि और आंशिक द्विबंध के प्रभाव का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) उत्तर में 'अनुनाद' और 'आंशिक द्विबंध लक्षण' जैसे मुख्य वैज्ञानिक शब्द अवश्य लिखें।
b) कारण स्पष्ट करने के लिए संक्षिप्त संरचनात्मक संदर्भ दें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और सटीक रखें।
Question 9.13: ऐलिफैटिक एवं ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीनों की नाइट्रस अम्ल से अभिक्रिया लिखिए।
Answer:
(i) ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन: यह \( 273-278\text{K} \) पर नाइट्रस अम्ल (\( \text{NaNO}_2 + \text{HCl} \)) के साथ अभिक्रिया करके स्थिर ऐरोमैटिक डाइऐजोनियम लवण बनाती है जो \( \text{NaCl} \) और \( \text{H}_2\text{O} \) बनाते हैं।
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{NH}_2 + \text{HNO}_2 \xrightarrow{273-278\text{K}} \text{C}_6\text{H}_5\text{N}_2^+\text{Cl}^- + \text{H}_2\text{O} \)
(ii) ऐलिफैटिक प्राथमिक ऐमीन: यह नाइट्रस अम्ल के साथ अभिक्रिया करके अस्थायी ऐलिफैटिक डाइऐजोनियम लवण बनाती है जो तुरंत अपघटित होकर \( \text{N}_2 \) गैस के निष्कासन के साथ ऐल्कोहॉल का उत्पादन करती है।
\( \text{R-NH}_2 + \text{HNO}_2 \rightarrow [\text{R-N}_2^+\text{Cl}^-] \xrightarrow{\text{H}_2\text{O}} \text{R-OH} + \text{N}_2 \uparrow + \text{HCl} \)
मुख्य बिंदु:
• तापमान की स्थिति (\( 273-278\text{K} \)) ऐरोमैटिक लवणों के स्थायित्व के लिए आवश्यक है।
• ऐलिफैटिक ऐमीन नाइट्रोजन गैस का बुलबुला छोड़ती हैं।
• दोनों के उत्पाद काफी भिन्न होते हैं।
आम गलतियाँ:
• दोनों प्रकार की ऐमीनों के लिए एक जैसी रासायनिक प्रवृत्ति मान लेना।
• तापमान का उल्लेख करना भूल जाना।
Exam Tips:
a) दोनों भागों (ऐलिफैटिक और ऐरोमैटिक) को अलग-अलग उप-शीर्षकों में लिखें।
b) दोनों के रासायनिक समीकरणों को संतुलित रूप में दर्शाएं।
c) डाइऐजोनियम लवण के स्थायित्व का मुख्य अंतर स्पष्ट करें।
Question 9.14: निम्नलिखित में प्रत्येक का संभावित कारण बताइए:
(i) समतुल्य अणु द्रव्यमान वाले ऐमीनों की अम्लता ऐल्कोहॉलों से कम होती है।
(ii) प्राथमिक ऐमीन का क्वथनांक तृतीयक ऐमीन से अधिक होता है।
(iii) ऐरोमैटिक ऐमीनों की तुलना में ऐलिफैटिक ऐमीन प्रबल क्षारक होते हैं।
Answer:
(i) ऐमीन से प्रोटॉन निकलने पर ऐमाइड आयन बनता है जबकि ऐल्कोहॉल से प्रोटॉन निकलने पर ऐल्कॉक्साइड आयन बनता है। ऑक्सीजन, नाइट्रोजन की तुलना में अधिक विद्युतऋणात्मक है, अतः \( \text{RO}^- \) आयन \( \text{R-NH}^- \) की तुलना में ऋणावेश को अधिक आसानी से समायोजित कर लेता है। इसलिए ऐल्कोहॉल अधिक अम्लीय होते हैं।
(ii) प्राथमिक ऐमीन के अणुओं में दो हाइड्रोजन परमाणु होते हैं, जिसके कारण वे व्यापक अंतः-आणविक हाइड्रोजन आबंध बनाते हैं। इसके विपरीत, तृतीयक ऐमीन में कोई हाइड्रोजन परमाणु न होने के कारण यह H-आबंध नहीं बना पाती। अतः प्राथमिक ऐमीन का क्वथनांक अधिक होता है।
(iii) ऐरोमैटिक ऐमीनों में \( -\text{NH}_2 \) समूह का एकाकी युग्म अनुनाद के कारण बेंजीन वलय के साथ विस्थानीकृत हो जाता है, जिससे प्रोटॉन ग्रहण करने के लिए इलेक्ट्रॉन कम उपलब्ध होते हैं। इसके विपरीत ऐलिफैटिक ऐमीनों में \( +\text{I} \) प्रभाव के कारण इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ता है, जिससे वे प्रबल क्षारक होते हैं।
मुख्य बिंदु:
• विद्युतऋणात्मकता अम्लता को प्रभावित करती है (\( \text{O} > \text{N} \)).
• हाइड्रोजन आबंध की संख्या क्वथनांक तय करती है।
• अनुनाद प्रभाव क्षारीयता को कम करता है।
आम गलतियाँ:
• अम्लता और क्षारीयता के कारणों को आपस में मिला देना।
• H-आबंध की संख्या और अणुओं की संरचना को गलत समझना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक कथन का उत्तर वैज्ञानिक तर्कों (विद्युतऋणात्मकता, H-आबंध, अनुनाद) के आधार पर दें।
b) तुलनात्मक शब्दों का स्पष्ट प्रयोग करें।
c) मुख्य बिंदुओं को बिंदुवार लिखें।
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