NCERT Solutions Class 12 Chemistry Chapter 08 Aldehydes Ketones and Carboxylic Acids (एल्डिहाइड कीटोन एवं कार्बोक्सिलिक अम्ल) Exercise Questions in Hindi

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Question 8.1: निम्नलिखित पदों (शब्दों) से आप क्या समझते हैं? प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
(i) सायनाहाइड्रिन
(ii) ऐसीटेल
(iii) सेमीकार्बेजोन
(iv) ऐल्डॉल
(v) हेमीऐसीटेल
(vi) ऑक्सिम
(vii) कीटेल
(viii) इमीन
(ix) 2, 4-डीएनपी व्युत्पन्न
(x) शिफ्-क्षारक

Answer:

(i) सायनाहाइड्रिन: वे कार्बनिक यौगिक जिनमें \( RR'C(OH)CN \) सूत्र होता है, सायनाहाइड्रिन कहलाते हैं। उदाहरण: ऐसीटोन सायनाहाइड्रिन।
(ii) ऐसीटेल: ये जैम-डायलकॉक्सीऐल्केन्स हैं जिसमें दो ऐलकॉक्सी समूह मूल कार्बन परमाणु पर मौजूद होते हैं।
(iii) सेमीकार्बेजोन: ये कीटोन या ऐल्डिहाइड के व्युत्पन्न हैं जिन्हें ऐल्डिहाइड या कीटोन के सेमीकार्बेजाइड के साथ संघनन अभिक्रिया द्वारा उत्पादित किया जाता है।
(iv) ऐल्डॉल: यह एक \( \beta \)-हाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड या कीटोन होता है।
(v) हेमीऐसीटेल: ये \( \alpha \)-ऐलकॉक्सी ऐल्कोहॉल हैं।
(vi) ऑक्सिम: ये कार्बनिक यौगिकों का एक वर्ग हैं जिनका सामान्य सूत्र \( RR'CNOH \) होता है।
(vii) कीटेल: ये जैम-डायलकॉक्सीऐल्केन हैं जिसमें श्रृंखला के भीतर एक ही कार्बन परमाणु पर दो ऐलकॉक्सी समूह मौजूद होते हैं।
(viii) इमीन: ये रासायनिक यौगिक हैं जिनमें कार्बन-नाइट्रोजन द्विबंध होता है।
(ix) 2, 4-डीएनपी व्युत्पन्न: जब ऐल्डिहाइड या कीटोन 2, 4-डाइनाइट्रोफेनिलहाइड्रिजिन के साथ अभिकृत करते हैं, तो 2, 4-DNP व्युत्पन्न बनते हैं।
(x) शिफ्-क्षारक: यह एक रासायनिक यौगिक है जिसमें कार्बन-नाइट्रोजन द्विबंध होता है जिसमें नाइट्रोजन परमाणु पर एरिल या ऐल्किल समूह जुड़ा होता है, लेकिन हाइड्रोजन नहीं।

मुख्य बिंदु:

• कार्बोनील यौगिकों की नाभिकीय योगात्मक अभिक्रियाओं के ये महत्वपूर्ण उत्पाद हैं।
• इनके निर्माण में न्यूक्लियोफिलिक आक्रमण और संघनन मुख्य चरण हैं।
• ये यौगिक विभिन्न क्रियात्मक समूहों की पहचान और उनके लक्षण वर्णन में उपयोग होते हैं।

आम गलतियाँ:

• हेमीऐसीटेल और ऐसीटेल की संरचना में अंतर न समझ पाना।
• ऑक्सिम और इमीन के सामान्य सूत्रों में हाइड्रोजन की स्थिति को गलत लिखना।
• 2, 4-DNP व्युत्पन्न के रंगीन अवक्षेप की प्रकृति को भूल जाना।

Exam Tips:

a) सभी व्युत्पन्नों की सामान्य संरचनाओं के सूत्र स्पष्ट रूप से याद रखें।
b) प्रत्येक पद के निर्माण की रासायनिक समीकरण का अभ्यास करें।
c) संरचनाओं में कार्बन और नाइट्रोजन की संयोजकता का विशेष ध्यान रखें।

 

Question 8.2: निम्नलिखित यौगिकों के आईयूपीएसी (IUPAC) नामपद्धति में नाम लिखिए -
(i) \( \text{CH}_3\text{CH(CH}_3)\text{CH}_2\text{CHO} \)
(ii) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{COCH(C}_2\text{H}_5)\text{CH}_2\text{Cl} \)
(iii) \( \text{CH}_3\text{CH}=\text{CHCHO} \)
(iv) \( \text{CH}_3\text{COCH}_2\text{COCH}_3 \)
(v) \( \text{CH}_3\text{CH(CH}_3)\text{CH}_2\text{C(CH}_3)_2\text{COCH}_3 \)
(vi) \( \text{(CH}_3)_3\text{CCH}_2\text{COOH} \)
(vii) \( \text{OHCCH}_2\text{CHO}\text{-p} \)

Answer:

(i) 4-मेथिलपेटेनैल
(ii) 6-क्लोरो-4-एथिलहेक्सेन्स-3-ऑिन
(iii) बूट-2-एन-1-अल
(iv) पेंटेन-2, 4-डίοॉर्न
(v) 3, 3, 5-ट्राइमेथिलहेक्सेन्स-2-ऑिन
(vi) 3, 3-डाइमेथिलबुटैनोईक अम्ल
(vii) बेंजीन-1, 4-डाइएकार्बिल्डहाइड

मुख्य बिंदु:

• प्राथमिकता क्रम के अनुसार मुख्य क्रियात्मक समूह का चयन करना।
• सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला का चुनाव करना।
• पूर्वग् और अनुलग्न का सही उपयोग करना।

आम गलतियाँ:

• क्रियात्मक समूह के कार्बन को मुख्य श्रृंखला में शामिल न करना।
• अंकन (numbering) गलत सिरे से शुरू करना।
• प्रतिस्थापियों के अंग्रेजी वर्णमाला क्रम का पालन न करना।

Exam Tips:

a) IUPAC नाम लिखते समय सबसे पहले मुख्य क्रियात्मक समूह की पहचान करें।
b) बहुबंधों (double/triple bonds) और क्रियात्मक समूहों को न्यूनतम अंक देने का नियम याद रखें।
c) कोमा और हाइफ़न का उचित प्रयोग करें।

 

Question 8.3: निम्नलिखित यौगिकों की संरचना बनाइए।
(i) 3-मेथिलब्यूटेनैल
(ii) p-नाइट्रोप्रोपियोफीनोन
(iii) p-मेथिलबेन्ज़ैल्डिहाइड
(iv) 4-मेथिलपेन्ट-3-ईन-2-ऑिन

Answer:

(i) \( \text{(CH}_3)_2\text{CH}-\text{CH}_2-\text{CHO} \)
(ii) \( \text{O}_2\text{N}-\text{C}_6\text{H}_4-\text{CO}-\text{CH}_2\text{CH}_3 \)
(iii) \( \text{CH}_3-\text{C}_6\text{H}_4-\text{CHO} \)
(iv) \( \text{CH}_3-\text{C(CH}_3)=\text{CH}-\text{CO}-\text{CH}_3 \)

मुख्य बिंदु:

• नाम से मूल हाइड्रोकार्बन श्रृंखला की पहचान।
• दिए गए स्थान पर क्रियात्मक समूह और प्रतिस्थापित जोड़ना।
• कार्बन की चतुःसंयोजकता संतुष्ट करना।

आम गलतियाँ:

• डबल बॉन्ड या कीटोन समूह की सही स्थिति पर न दर्शाना।
• बेन्जीन रिंग पर ऑर्थो, मेटा या पैरा स्थितियों में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) संरचना बनाते समय हमेशा पीछे से (मूल शब्द से) शुरुआत करें।
b) संख्यांकन के अनुसार समूहों को ठीक स्थान पर रखें।
c) हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या की जाँच अवश्य करें।

 

Question 8.4: निम्नलिखित ऐल्डिहाइडों एवं कीटोनो के आईयूपीएसी (IUPAC) नाम लिखिए और जहाँ संभव हो सके साधारण नाम भी दीजिए।
(i) \( \text{CH}_3\text{CO(CH}_2)_4\text{CH}_3 \)
(ii) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CHBrCH}_2\text{CH(CH}_3)\text{CHO} \)
(iii) \( \text{H}_3(\text{CH}_2)_5\text{CHO} \)
(iv) \( \text{Ph}-\text{CH}=\text{CH}-\text{CHO} \)
(v) \( \text{PhCOCH}_3 \)

Answer:

(i) IUPAC नाम: हेptan-2-ऑिन, साधारण नाम: मेथिल n-प्रोपिल कीटोन
(ii) IUPAC नाम: 4-ब्रोमो-2-मेथिलहेक्सैनैल, साधारण नाम: \( (\gamma \)-ब्रोमो-\( \alpha \)-मेथिल-कैप्रॉल्डिहाइड)
(iii) IUPAC नाम: हेptanैल
(iv) IUPAC नाम: 3-फेनिलप्रॉप-2-ईनैल, साधारण नाम: \( \beta \)-फेनोलाक्रोलिन
(v) IUPAC नाम: साइक्लोपेटेनकार्बाल्डिहाइड
(vi) IUPAC नाम: डाइफेनिलमेथेनोन, साधारण नाम: बेन्जोफेनोन

मुख्य बिंदु:

• कीटोन और ऐल्डिहाइड के IUPAC नियमों का सही अनुप्रयोग।
• एरोमैटिक यौगिकों के प्रचलित साधारण नामों की जानकारी।
• श्रृंखला में हैलोजन और अन्य प्रतिस्थापियों का नामकरण।

आम गलतियाँ:

• साधारण नाम लिखते समय ग्रीक अक्षरों (\( \alpha, \beta, \gamma \)) का गलत स्थान पर प्रयोग करना।
• IUPAC नियमों में स्थिति अंक भूल जाना।

Exam Tips:

a) मुख्य रूप से IUPAC नाम पर ध्यान दें, साधारण नाम वैकल्पिक रूप से याद रखें।
b) फेनिल समूह (\( \text{C}_6\text{H}_5-\) या \( \text{Ph}-\)) वाले यौगिकों का नामकरण सावधानी से करें।
c) श्रृंखला के कुल कार्बन गिनकर ही नाम अंतिम करें।

 

Question 8.5: निम्नलिखित व्युत्पनों की संरचना बनाइए-
(i) बेन्जैल्डिहाइड का 2, 4-डाइनाइट्रोफेनिलहाइड्रजोन
(ii) साइक्लोप्रोपेनोन ऑक्सिम
(iii) ऐसीटैल्डिहाइडडाइमेथिलऐसीटेल
(iv) साइक्लोबूटेटोन का सेमीकार्बेजोन
(v) हेक्सन-3-ऑिन का एथिलीन कीटेल
(vi) फॉर्मेल्डिहाइड का मेथिल हेमीऐसीटेल

Answer:

(i) बेन्जैल्डिहाइड 2, 4-डाइनाइट्रोफेनिलहाइड्रजोन की संरचना में बेन्जीन रिंग \( \text{-CH=N-NH-C}_6\text{H}_3(\text{NO}_2)_2 \) से जुड़ी होती है।
(ii) साइक्लोप्रोपेनोन रिंग पर \( \text{=N-OH} \) समूह जुड़ा होता है।
(iii) \( \text{CH}_3-\text{CH(OCH}_3)_2 \)
(iv) साइक्लोबूटेटोन रिंग पर \( \text{=N-NH-CO-NH}_2 \) जुड़ा होता है।
(v) हेक्सन-3-ऑिन और एथिलीन ग्लाइकोल से बना चक्रिय कीटेल।
(vi) \( \text{H}_2\text{C(OH)(OCH}_3) \)

मुख्य बिंदु:

• कार्बोनील समूह की नाभिकीय योगात्मक-लोपन अभिक्रियाओं के उत्पाद।
• व्युत्पन्नों के निर्माण में जल के अणु का निष्कासन होता है।
• चक्रिय कीटेल और ऐसीटेल बनाने के लिए डाइऑल या ऐल्कोहॉल का उपयोग।

आम गलतियाँ:

• 2, 4-DNP में नाइट्रो समूहों की स्थिति (2 और 4) गलत दर्शाना।
• हेमीऐसीटेल और ऐसीटेल में \( -\text{OH} \) और \( -\text{OR} \) समूहों की संख्या में भ्रम होना।

Exam Tips:

a) व्युत्पन्न बनाने के लिए मूल कार्बोनील समूह के ऑक्सीजन को \( \text{H}_2 \) के साथ हटाकर शेष भाग जोड़ें।
b) चक्रिय संरचनाओं (साइक्लोप्रोपेन, साइक्लोबूटेटोन) को स्पष्ट रूप से चित्रित करें।
c) संरचनाओं में बंधों की सही दिशा और संख्या दिखाएं।

 

Question 8.6: साइक्लोहेक्सेनेकार्बाल्डिहाइड की निम्नलिखित अभिकर्मकों के साथ अभिक्रिया से बनने वाले उत्पादों को पहचानिए -
(i) \( \text{PhMgBr} \) एवं तत्पश्चात \( \text{H}_3\text{O}^+ \)
(ii) टॉलेंन अभिकर्मक
(iii) सेमीकार्बेजाइड एवं दुर्बल अम्ल
(iv) एथेनॉल का अधिक्य तथा अम्ल
(v) जिंक अमलगम एवं तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल

Answer:

(i) \( \text{PhMgBr} \) के साथ अभिक्रिया के पश्चात जलअपघटन से \( \alpha \)-फेनिसाइक्लोहेक्साइलमेकार्विनॉल बनता है।
(ii) टॉलेंन अभिकर्मक के साथ ऑक्सीकरण पर साइक्लोहेक्सेनेकार्बोजिलेट आयन और रजत दर्पण (Silver mirror) बनता है।
(iii) सेमीकार्बेजाइड के साथ संघनन से साइक्लोहेक्सेनेकार्बाल्डिहाइड सेमीकार्बेजोन बनता है।
(iv) एथेनॉल के अधिक्य और शुष्क \( \text{HCl} \) गैस के साथ अभिक्रिया से साइक्लोहेक्सेनेकार्बाल्डिहाइड डाइएथिलऐसीटेल बनता है।
(v) क्लीमेंसन अपचयन द्वारा यह मेथिलसाइक्लोहेक्सेन में बदल जाता है।

मुख्य बिंदु:

• ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक ऐल्डिहाइड से द्वितीयक ऐल्कोहॉल देते हैं।
• टॉलेंन परीक्षण ऐल्डिहाइड की विशिष्ट पहचान है।
• क्लीमेंसन अपचयन कार्बोनील समूह को \( -\text{CH}_2- \) समूह में अपचयित करता है।

आम गलतियाँ:

• ग्रिग्नार्ड अभिक्रिया में जलअपघटन चरण को छोड़ देना।
• ऐसीटेल निर्माण में मोनोऐल्कोहॉल और डाइऐल्कोहॉल के अनुपात का ध्यान न रखना।

Exam Tips:

a) अभिकर्मकों के नाम और उनके विशिष्ट कार्यों की सूची याद रखें।
b) रासायनिक समीकरणों को संतुलित रूप में लिखें और उत्पादों के नाम स्पष्ट लिखें।
c) अपचयन अभिक्रियाओं (जैसे क्लीमेंसन) के अभिकर्मक ठीक से याद रखें।

 

Question 8.7: निम्नलिखित में से कौन से यौगिकों में ऐल्डोल संघनन होगा, किनमें केनिजारो अभिक्रिया होगी और किनमें उपरोक्त में से कोई क्रिया नहीं होगी? ऐल्डोल संघनन तथा केनिजारो अभिक्रिया में संभावित उत्पादों की संरचना लिखिए।
(i) मेथेनल
(ii) 2-मेथिलपेन्टेनल
(iii) बेन्जैल्डिहाइड
(iv) बेन्जोफिनोन
(v) साइक्लोहेक्सानेन
(vi) 1-फेनिलप्रोपैनोन
(vii) फेनिलऐसीटैल्डिहाइड
(viii) ब्यूटेन-1-ऑल
(ix) 2, 2-डाइमेथिलब्यूटेनैल

Answer:

कम से कम एक \( \alpha \)-हाइड्रोजन वाले मेथेनल ऐल्डिहाइड और कीटोन ऐल्डोल संघनन से गुजरते हैं।
(i) मेथेनल - केनिजारो अभिक्रिया
(ii) 2-मेथिलपेन्टेनल - ऐल्डोल संघनन
(iii) बेन्जैल्डिहाइड - केनिजारो अभिक्रिया
(iv) बेन्जोफिनोन - कोई अभिक्रिया नहीं
(v) साइक्लोहेक्सानेन - ऐल्डोल संघनन
(vi) 1-फेनिलप्रोपैनोन - ऐल्डोल संघनन
(vii) फेनिलऐसीटैल्डिहाइड - ऐल्डोल संघनन
(viii) ब्यूटेन-1-ऑल - कोई अभिक्रिया नहीं (यह ऐल्कोहॉल है)
(ix) 2, 2-डाइमेथिलब्यूटेनैल - केनिजारो अभिक्रिया (\( \alpha \)-हाइड्रोजन अनुपस्थित)

मुख्य बिंदु:

• ऐल्डोल संघनन के लिए \( \alpha \)-हाइड्रोजन होना अनिवार्य है।
• केनिजारो अभिक्रिया के लिए \( \alpha \)-हाइड्रोजन अनुपस्थित होने चाहिए।
• ऐल्कोहॉल (जैसे ब्यूटेन-1-ऑल) इन दोनों अभिक्रियाओं को नहीं देते हैं।

आम गलतियाँ:

• \( \alpha \)-हाइड्रोजन की पहचान करने में गलती करना।
• कीटोन और ऐल्डिहाइड की शर्तों को आपस में मिला देना।

Exam Tips:

a) यौगिक का क्रियात्मक समूह और उसके पास वाले कार्बन पर हाइड्रोजन की संख्या पहले चेक करें।
b) यदि \( \alpha \)-\text{H} है तो ऐल्डोल, यदि नहीं है तो केनिजारो की संभावना देखें।
c) उत्पादों की संरचना बनाते समय जल के निष्कासन का ध्यान रखें।

 

Question 8.8: एथैनोल को निम्नलिखित यौगिकों में कैसे परिवर्तित करेंगे?
(i) ब्यूटेन-1, 3-डाइऑल
(ii) बूट-2-ईनैल
(iii) बूट-2-इणोइक अम्ल

Answer:

(i) तनु क्षार से अभिक्रिया करने पर एथैनैल 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनल उत्पन्न करता है जो अपचयन पर ब्यूटेन-1, 3-डाइऑल देता है।
(ii) तनु क्षार से अभिक्रिया करने पर एथैनैल 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनल देता है जो गर्म करने पर बूट-2-ईनैल बनाता है।
(iii) उपरोक्त अभिक्रिया में उत्पादित बूट-2-ईनैल को जब टॉलेंन अभिकर्मक के साथ उपचारित किया जाता है तो बूट-2-इणोइक अम्ल उत्पन्न करता है।

मुख्य बिंदु:

• कार्बन श्रृंखला की लंबाई बढ़ाने के लिए ऐल्डोल संघनन का उपयोग किया जाता है।
• \( \beta \)-हाइड्रॉक्सी ऐल्डिहाइड को गर्म करने पर निर्जलीकरण से \( \alpha, \beta \)-असंतृप्त ऐल्डिहाइड बनता है।
• ऐल्डिहाइड का ऑक्सीकरण करने पर कार्बोक्सिलिक अम्ल प्राप्त होता है।

आम गलतियाँ:

• तापमान और अभिकर्मकों का सही क्रम न लिखना।
• निर्जलीकरण के दौरान जल के अणु को ठीक से न दर्शाना।

Exam Tips:

a) परिवर्तन वाले प्रश्नों में चरणों को तीर के निशानों द्वारा स्पष्ट रूप से दिखाएं।
b) प्रत्येक पद पर उपयोग होने वाले अभिकर्मक (जैसे \( \text{NaOH}, \text{NaBH}_4 \)) तीर के ऊपर लिखें।
c) कार्बन परमाणुओं की संख्या का मिलान हर चरण में करें।

 

Question 8.9: प्रोपेनेल एवं ब्यूटेनेल के ऐल्डोल संघनन से बनने वाले चार संभावित उत्पादों के नाम एवं संरचना सूत्र लिखिए। प्रत्येक में बताइए कि कौन सा ऐल्डिहाइड नाभिकरागी और कौन सा इलेक्ट्रॉन्तरागी होगा?

Answer:

प्रोपेनेल और ब्यूटेनेल के मिश्रण के ऐल्डोल संघनन से निम्नलिखित चार उत्पाद बनते हैं:
1. 3-हाइड्रॉक्सी-2-मेथिलपेन्टेनल (प्रोपेनेल के दो अणुओं से)
2. 2-ऐथिल-3-हाइड्रॉक्सीहेक्सेनैल (ब्यूटेनेल के दो अणुओं से)
3. 2-पेथिल-3-हाइड्रॉक्सीपेन्टेनल (ब्यूटेनेल नाभिकरागी और प्रोपेनेल इलेक्ट्रॉन्तरागी)
4. 2-एथिल-3-हाइड्रॉक्सीहेक्सेनैल (प्रोपेनेल नाभिकरागी और ब्यूटेनेल इलेक्ट्रॉन्तरागी)

मुख्य बिंदु:

• क्रॉस ऐल्डोल संघनन में दो अलग-अलग कार्बोनील यौगिकों के बीच अभिक्रिया होती है।
• इसमें कुल चार संभावित उत्पाद (दो स्व-संघनन और दो क्रॉस संघनन) प्राप्त होते हैं।
• \( \alpha \)-हाइड्रोजन युक्त कारेबन से इनॉलिक एनायन (नाभिकरागी) बनता है।

आम गलतियाँ:

• चारों उत्पादों के नाम और संरचनाएं लिखने में भ्रमित होना।
• नाभिकरागी और इलेक्ट्रॉन्तरागी की भूमिका को गलत पहचानना।

Exam Tips:

a) क्रॉस ऐल्डोल के सभी संभावित संयोजनों को क्रमित रूप से लिखें।
b) प्रत्येक उत्पाद का IUPAC नाम सही से दें।
c) अभिक्रिया की क्रियाविधि को ध्यान में रखते हुए नाभिकरागी का चयन करें।

 

Question 8.10: एक कार्बनिक यौगिक जिसका अणुसूत्र \( \text{C}_9\text{H}_{10}\text{O} \) है 2, 4-DNP व्युत्पन्न बनाता है, टॉलेंन अभिकर्मक को अपचयित करता है तथा केनिजारो अभिक्रिया देता है। प्रबल ऑक्सीकरण पर वह 1, 2-बेन्जीनडाइकार्बोजिलिक अम्ल बनाता है। यौगिक को पहचानिए।

Answer:

यह दिया गया है कि यौगिक (अणुसूत्र \( \text{C}_9\text{H}_{10}\text{O} \)) 2, 4-DNP व्युत्पन्न बनाता है और टॉलेंन अभिकर्मक को अपचयित करता है। इसलिए, यह यौगिक एक ऐल्डिहाइड होना चाहिए। यौगिक केनिजारो से गुजरता है और ऑक्सीकरण पर 1, 2-बेन्जीनडाइकार्बोजिलिक अम्ल देता है। इसलिए, \( -\text{CHO} \) समूह सीधे एक बेंजीन वलय से जुड़ा होता है और यह बेन्जैल्डिहाइड ऑर्थो-प्रतिस्थापित होता है। इसलिए, यौगिक 2-एथिलबेन्जैल्डिहाइड है।

मुख्य बिंदु:

• 2, 4-DNP परीक्षण कार्बोनील समूह (ऐल्डिहाइड या कीटोन) की उपस्थिति दर्शाता है।
• टॉलेंन अभिकर्मक का अपचयन यह सिद्ध करता है कि यौगिक ऐल्डिहाइड है।
• ऑक्सीकरण उत्पाद 1, 2-बेन्जीनडाइकार्बोजिलिक अम्ल (थैलिक अम्ल) यह बताता है कि समूह ऑर्थो स्थिति पर हैं।

आम गलतियाँ:

• अणुसूत्र से केवल संरचना का अनुमान लगाना और परीक्षणों के निष्कर्षों को नजरंदाज करना।
• ऑर्थो, मेटा, पैरा स्थितियों में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) ऐसे पहेलीनुमा प्रश्नों में प्रत्येक दिए गए संकेत (Clues) को अलग से नोट करें।
b) परीक्षणों के आधार पर क्रियात्मक समूह को पहले निश्चित करें।
c) अंतिम संरचना की पुष्टि सभी दी गई शर्तों के साथ करके देखें।

 

Question 8.11: एक कार्बनिक यौगिक 'क' (आणविक सूत्र \( \text{C}_8\text{H}_{16}\text{O}_2 \)) को तनु सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ जलअपघटित करने के उपरांत एक कार्बोक्सिलिक अम्ल 'ख' एवं एक ऐल्कोहॉल 'ग' प्राप्त हुई। 'ग' को क्रोमिक अम्ल के साथ ऑक्सीकृत करने पर 'ख' उत्पन्न होता है। 'ग' निर्जलीकरण पर बूट-1-ईन देता है। अभिक्रियाओं में प्रयुक्त होने वाली सभी रासायनिक समीकरणों को लिखिए।

Answer:

ऐल्कोहॉल 'ग' का क्रोमिक अम्ल के साथ ऑक्सीकरण पर अम्ल 'ख' देता है। इस प्रकार, 'ख' और 'ग' में समान संख्या में कार्बन परमाणु होने चाहिए। चूंकि यौगिक 'क' में कुल 8 कार्बन परमाणु होते हैं, 'ख' और 'ग' में से प्रत्येक में 4 कार्बन परमाणु होते हैं। पुनः निर्जलीकरण होने पर ऐल्कोहॉल बूट-1-ईन देता है। इसलिए, 'ग' सीधी श्रृंखला का है और इसलिए यह बूटन-1-ऑल है। ऑक्सीकरण पर बूटन-1-ऑल बूटानोईक अम्ल देता है। अतः अम्ल 'ख' बूटानोईक अम्ल है। इसलिए, आणविक सूत्र \( \text{C}_8\text{H}_{16}\text{O}_2 \) वाला एस्टर बूटिलबूटानोएट है।

मुख्य बिंदु:

• एस्टर का जलअपघटन अम्ल और ऐल्कोहॉल देता है।
• प्राथमिक ऐल्कोहॉल का क्रोमिक अम्ल द्वारा ऑक्सीकरण समान कार्बन वाले अम्ल में होता है।
• निर्जलीकरण द्वारा ऐल्कीन का निर्माण एल्काइल श्रृंखला की संरचना बताता है।

आम गलतियाँ:

• कार्बन परमाणुओं की कुल संख्या का सही वितरण न करना।
• प्राथमिक और द्वितीयक ऐल्कोहॉल के ऑक्सीकरण उत्पादों में अंतर न समझना।

Exam Tips:

a) आणविक सूत्र से एस्टर, ईथर या अम्ल की पहचान करने के नियम याद रखें।
b) जलअपघटन और ऑक्सीकरण अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण चरणबद्ध लिखें।
c) यौगिकों के नाम और सूत्र दोनों साथ में दर्शाएं।

 

Question 8.12: निम्नलिखित यौगिकों को उनसे संबंधित (कोष्ठकों में दिए गए) गुणधर्मों के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
(i) ऐसीटिलऐडिहाइड, ऐसीटोन, डाइ-तープतीक-बूटिलकीटोन, मेधिलतृतीपक-बूटिलकीटोन (\text{HCN} के प्रति अभिक्रियाशीलता)
(ii) बेन्जोइक अम्ल, 4-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल, 3, 4-डाइनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल, 4-मेथॉक्सी बेन्जोइक अम्ल (अम्लता के क्रम में)
(iii) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH(Br)COOH}, \text{CH}_3\text{CH(Br)}\text{CH}_2\text{COOH}, (\text{CH}_3)_2\text{CHCOOH}, \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{COOH} \) (अम्लता के क्रम में)

Answer:

(i) जैसे-जैसे यौगिक पर ऋणात्मक आवेश बढ़ता है, \text{HCN} के साथ इसकी अभिक्रियाशीलता कम होती जाती है। इसलिए, दिए गए यौगिकों में +I प्रभाव बढ़ता है जैसा कि नीचे दिखाया गया है। अतः \( \text{HCN} \) के प्रति उनकी बढ़ती अभिक्रियाशीलता का क्रम:
डाइ-तृतीपक-बूटिलकीटोन < मेधिलतृतीपक-बूटिलकीटोन < ऐसीटोन < ऐसीटिलऐडिहाइड
(ii) प्रोटॉन खोने के बाद, कार्बोक्सिलिक अम्ल एक ऋणात्मक आवेश प्राप्त करता है। +I प्रभाव वाले समूह अम्ल की प्रबलता कम करते हैं और -I प्रभाव वाले समूह अम्ल की प्रबलता बढ़ाते हैं। अतः अम्लता का बढ़ता क्रम:
4-मेथॉक्सीबेन्जोइक अम्ल < बेन्जोइक अम्ल < 4-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल < 3, 4-डाइनाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
(iii) प्रेरणिक प्रभाव दूरी बढ़ने पर कम हो जाता है। अतः अम्लता का बढ़ता क्रम:
\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{COOH} < (\text{CH}_3)_2\text{CHCOOH} < \text{CH}_3\text{CH(Br)}\text{CH}_2\text{COOH} < \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH(Br)COOH} \)

मुख्य बिंदु:

• +I प्रभाव (इलेक्ट्रॉन-दाता समूह) अम्लता को घटाते हैं और नाभिकरागी योग को भी कम करते हैं।
• -I प्रभाव (इलेक्ट्रॉन-ग्राही समूह) अम्लता को बढ़ाते हैं।
• त्रिविम बाधा (Steric hindrance) कार्बोनील यौगिकों की प्रतिक्रियाशीलता को कम करती है।

आम गलतियाँ:

• +I और -I प्रभावों के प्रभाव को आपस में उलटा समझ लेना।
• दूरी के साथ प्रेरणिक प्रभाव के कम होने के नियम को भूल जाना।

Exam Tips:

a) अम्लता के क्रम के लिए संयुग्मी क्षार (Conjugate base) की स्थिरता का नियम ध्यान रखें।
b) अभिक्रियाशीलता के लिए त्रिविम बाधा और इलेक्ट्रॉनिक कारकों दोनों का विश्लेषण करें।
c) बढ़ते (<) या घटते (>) चिन्हों का प्रयोग बहुत सावधानी से करें।

 

Question 8.13: निम्नलिखित यौगिक युगमों में विभेद करने के लिए सरल रासायनिक परीक्षण को दीजिए-
(i) प्रोपेनेल एवं प्रोपेनोन
(ii) एसीटोफिनोन एवं बेन्जोफिनोन
(iii) फ़ीनॉल एवं बेन्जोइक अम्ल
(iv) बेन्जोइक अम्ल एवं एथिलबेन्जोएट
(v) पेंटेन-2-ऑिन एवं पेंटेन-3-ऑिन
(vi) बेन्जैल्डिहाइड एवं एसीटोफिनोन
(vii) एथैनेल एवं प्रोपेनेल

Answer:

(i) टॉलेंन परीक्षण: प्रोपेनेल एक ऐल्डिहाइड है, यह टॉलेंन अभिकर्मक को अपचयित कर देता है, लेकिन प्रोपेनोन कीटोन होने के कारण ऐसा नहीं करता।
(ii) आयोडोफॉर्म परीक्षण: एसीटोफिनोन एक मेथिल कीटोन है जो आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है, जबकि बेन्जोफिनोन नहीं देता।
(iii) फ़ेर्रिक क्लोराइड परीक्षण: फ़ीनॉल उदासीन \( \text{FeCl}_3 \) के साथ बैंगनी रंग देता है, लेकिन बेन्जोइक अम्ल भूरे रंग का अवक्षेप देता है।
(iv) सोडियम बाइकार्बोनेट परीक्षण: बेन्जोइक अम्ल \( \text{NaHCO}_3 \) के साथ \( \text{CO}_2 \) गैस के बुलबुले देता है, एथिलबेन्जोएट नहीं।
(v) पेंटेन-2-ऑिन आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है, जबकि पेंटेन-3-ऑिन नहीं।
(vi) टॉलेंन परीक्षण: बेन्जैल्डिहाइड टॉलेंन अभिकर्मक को अपचयित करता है, एसीटोफिनोन नहीं।
(vii) आयोडोफॉर्म परीक्षण: एथैनेल आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है, प्रोपेनेल नहीं।

मुख्य बिंदु:

• टॉलेंन और फेलिंग परीक्षण केवल ऐल्डिहाइड देते हैं।
• आयोडोफॉर्म परीक्षण \( \text{CH}_3-\text{CO-} \) समूह वाले यौगिक देते हैं।
• \( \text{NaHCO}_3 \) परीक्षण कार्बोक्सिलिक अम्लों की पहचान के लिए है।

आम गलतियाँ:

• परीक्षण के दौरान अभिकर्मकों के नाम या रंग परिवर्तन को गलत लिखना।
• कीटोन और ऐल्डिहाइड के विशिष्ट परीक्षणों को आपस में मिला देना।

Exam Tips:

a) विभेद वाले प्रश्नों में हमेशा ऐसा परीक्षण चुनें जिसमें एक यौगिक धनात्मक और दूसरा ऋणात्मक परिणाम दे।
b) परीक्षण का नाम (जैसे टॉलेंन, आयोडोफॉर्म, फेर्रिक क्लोराइड) स्पष्ट रूप से लिखें।
c) होने वाले रंग परिवर्तन या अवक्षेप को समीकरण सहित या शब्दों में अवश्य दर्शाएं।

 

Question 8.14: बेन्जीन से निम्नलिखित यौगिकों का विरचन आप किस प्रकार करेंगे? आप कोई भी अकार्बनिक अभिकर्मक एवं कोई भी कार्बनिक अभिकर्मक, जिसमें एक से अधिक कार्बन न हो, का उपयोग कर सकते हैं।
(i) मेथिल बेन्जोएट
(ii) m-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
(iii) p-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल
(iv) फेनिलऐसीटिक अम्ल
(v) p-नाइट्रोबेन्जैल्डिहाइड

Answer:

(i) बेन्जीन की \( \text{Br}_2/\text{FeBr}_3 \) से अभिक्रिया के बाद मैग्नीशियम और शुष्क बर्फ, फिर एस्टरीकरण द्वारा मेथिल बेन्जोएट बनता है।
(ii) बेन्जीन का नाइट्रीकरण करके m-नाइट्रॉबेन्जोइक अम्ल बनाया जाता है।
(iii) फ्रीडेल-क्राफ्ट्स ऐल्किलन और नाइट्रीकरण चरणों द्वारा p-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल प्राप्त होता है।
(iv) बेन्जीन से क्लोरोमेथिलकरण या ग्रिग्नार्ड विधि द्वारा फेनिलऐसीटिक अम्ल बनता है।
(v) बेन्जीन के नाइट्रीकरण और क्लोरोमेथिलन से p-नाइट्रोबेन्जैल्डिहाइड बनता है।

मुख्य बिंदु:

• बेन्जीन वलय पर प्रतिस्थापन (इलेक्ट्रॉنزरागी aromatic substitution) का सही क्रम अपनाना।
• ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक का उपयोग करके कार्बन श्रृंखला बढ़ाना।
• ऑक्सीकरण द्वारा ऐल्किल समूह को कार्बोक्सिलिक अम्ल में बदलना।

आम गलतियाँ:

• निर्देशकारी समूहों (ortho/para या meta directing) का ध्यान न रखना।
• अभिकर्मकों का क्रम गलत लिखना जिससे अवांछित उत्पाद बने।

Exam Tips:

a) परिवर्तन वाले प्रश्नों में प्रत्येक पद के अभिकर्मक और परिस्थितियों को साफ-साफ लिखें।
b) मेटा-निर्देशक और ऑर्थो/पैरा-निर्देशक समूहों के नियमों का पालन करें।
c) अंतिम यौगिक की संरचना की जाँच प्रारंभिक पदार्थ से करें।

 

Question 8.15: आप निम्नलिखित रूपांतरणों को अधिकतम दो चरणों में किस प्रकार से संपन्न करेंगे?
(i) प्रोपेनोन से प्रोपीन
(ii) बेन्जोइक अम्ल से बेन्जैल्डिहाइड
(iii) एथैनॉल से 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनल
(iv) बेन्जीन से m-नाइट्रोएसीटोफिनोन
(v) बेन्जैल्डिहाइड से बेन्जोफिनोन
(vi) ब्रोमोबेन्जीन से 1-फेनिलएथेनॉल
(vii) बेन्जैल्डिहाइड से 3-फेनिलप्रोपেন-1-ऑल
(viii) बेन्जैल्डिहाइड से \( \alpha \)-हाइड्रॉक्सीफेनिलऐसीटिक अम्ल
(ix) बेन्जोइक अम्ल से m-नाइट्रोबेन्जिल ऐल्कोहॉल

Answer:

(i) प्रोपेनोन का \( \text{NaBH}_4 \) से अपचयन और फिर सांद्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) के साथ निर्जलीकरण से प्रोपीन बनता है।
(ii) बेन्जोइक अम्ल को \( \text{SOCl}_2 \) और फिर \( \text{H}_2/\text{Pd-BaSO}_4 \) (रोजेनमुंड अपचयन) द्वारा बेन्जैल्डिहाइड में बदलते हैं।
(iii) एथैनॉल का ऑक्सीकरण और फिर ऐल्डोल संघनन द्वारा 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनल बनता है।
(iv) बेन्जीन का फ्रीडेल-क्राफ्ट्स ऐसीलीकरण और फिर नाइट्रीकरण करते हैं।
(v) बेन्जैल्डिहाइड की \( \text{PhMgBr} \) से अभिक्रिया और ऑक्सीकरण द्वारा बेन्जोफिनोन बनता है।
(vi) ब्रोमोबेन्जीन से ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक बनाकर एथेनेल के साथ अभिक्रिया कराते हैं।
(vii) बेन्जैल्डिहाइड का ऐल्डोल/संघनन और अपचयन करते हैं।
(viii) बेन्जैल्डिहाइड की \( \text{HCN} \) और जलअपघटन से अभिक्रिया कराते हैं।
(ix) बेन्जोइक अम्ल का नाइट्रीकरण और \( \text{LiAlH}_4 \) द्वारा अपचयन करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• अधिकतम दो चरणों की सीमा का ध्यान रखना।
• रोजेनमुंड, ग्रिग्नार्ड और ऐल्डोल जैसी नाम अभिक्रियाओं का प्रभावी उपयोग।
• क्रियात्मक समूहों का अंतःपरिवर्तन (Interconversion)।

आम गलतियाँ:

• दो से अधिक चरणों का उपयोग करना जबकि प्रश्न में अधिकतम दो चरण पूछे गए हों।
• अभिकर्मकों के नाम या उनके रासायनिक सूत्र गलत लिखना।

Exam Tips:

a) छोटे और सीधे मार्गों (Shortest routes) का चयन करें।
b) प्रत्येक चरण में अभिकारक, अभिकर्मक और उत्पाद स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
c) नाम अभिक्रियाओं के विशिष्ट अभिकर्मकों को याद रखें।

 

Question 8.16: निम्नलिखित पदों (शब्दों) का वर्णन करो-
(i) ऐसिटिलीकरण
(ii) क्रॉस ऐल्डोल संघनन
(iii) केनिजारो अभिक्रिया
(iv) विकार्बोक्सिललन

Answer:

(i) ऐसिटिलीकरण: किसी कार्बनिक यौगिक में एक ऐसीटिल क्रियात्मक समूह को शामिल करने को ऐसिटिलीकरण कहा जाता है।
(ii) क्रॉस ऐल्डोल संघनन: जब दो भिन्न ऐल्डिहाइडों, या दो भिन्न कीटोनों, या एक ऐल्डिहाइड और एक कीटोन के बीच ऐल्डॉल संघनन किया जाता है, तो इसे क्रॉस ऐल्डोल संघनन कहते हैं।
(iii) केनिजारो अभिक्रिया: सांद्र क्षार से अभिक्रिया करने पर ऐल्डिहाइडों की स्व-ऑक्सीकरण-अपचयन अभिक्रिया जिसमें कोई \( \alpha \)-हाइड्रोजन नहीं होता है, केनिजारो कहलाती है।
(iv) विकार्बोक्सिललन: वह अभिक्रिया है जिसमें कार्बोक्सिलिक अम्ल हाइड्रोकार्बन बनाने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड खो देता है।

मुख्य बिंदु:

• ये सभी कार्बनिक रसायन की महत्वपूर्ण नाम अभिक्रियाएँ और प्रक्रियाएँ हैं।
• प्रत्येक की अपनी विशिष्ट रासायनिक शर्तें और अभिकर्मक होते हैं।
• ये संश्लेषण (Synthesis) में कार्बन श्रृंखला को छोटा या बड़ा करने के काम आती हैं।

आम गलतियाँ:

• क्रॉस ऐल्डोल और सामान्य ऐल्डोल की परिभाषा में अंतर न स्पष्ट करना।
• केनिजारो के लिए आवश्यक \( \alpha \)-हाइड्रोजन की अनुपस्थिति की शर्त भूल जाना।

Exam Tips:

a) परिभाषा के साथ एक उपयुक्त रासायनिक समीकरण अवश्य दें।
b) मुख्य शर्तों (जैसे 'बिना \( \alpha \)-हाइड्रोजन के' या 'क्षार की उपस्थिति') को रेखांकित करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और बिंदुओं में लिखें।

 

Question 8.17: निम्नलिखित प्रत्येक संश्लेषण में छूटे हुए प्रारंभिक पदार्थ, अभिकर्मक अथवा उत्पादों को लिखकर पूर्ण कीजिए-
(i) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{COONa} + \text{NaOH/CaO, ताप} \rightarrow \dots \)
(ii) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{COOH} + \text{SOCl}_2 \rightarrow \dots \)
(iii) \( \text{C}_6\text{H}_5\text{CHO} + \text{H}_2\text{NCONHH}_2 \rightarrow \dots \)
(iv) बेन्जीन + \( \text{CH}_3\text{COCl} \xrightarrow{\text{निर्जिल AlCl}_3} \dots \)
(v) \( \text{RCHO} + 2[\text{Ag(NH}_3)_2]^+ + 3\text{OH}^- \rightarrow \dots \)
(vi) \( \text{RCH}_2\text{COOH} \xrightarrow{\text{(i) } \text{Cl}_2/\text{Red P (ii) H}_2\text{O}} \dots \)
(vii) \( \text{RCOCH}_2\text{COOCH}_3 \xrightarrow{\text{(i) } \text{NaBH}_4 \text{ (ii) H}^+} \dots \)
(viii) साइक्लोहेक्सेनॉन् + \( \text{H}_2\text{NOH} \rightarrow \dots \)
(ix) \( \text{RCH=CH-CHO} \xrightarrow{\text{CrO}_3} \dots \)
(x) \( \text{साइक्लोहेक्सीन} \xrightarrow{\text{(i) O}_3 \text{ (ii) Zn-H}_2\text{O}} \dots \)

Answer:

(i) प्रोपेन + \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \)
(ii) बेन्जोयल क्लोराइड (\( \text{C}_6\text{H}_5\text{COCl} \)) + \( \text{SO}_2 + \text{HCl} \)
(iii) बेन्जैल्डिहाइड सेमीकार्बेजोन + \( \text{H}_2\text{O} \)
(iv) एसीटोफिनोन (\( \text{C}_6\text{H}_5\text{COCH}_3 \)) + \( \text{HCl} \)
(v) \( \text{RCOO}^- + 2\text{Ag} \downarrow + 4\text{NH}_3 + 2\text{H}_2\text{O} \)
(vi) \( \alpha \)-क्लोरोकार्बोक्सिलिक अम्ल (\text{Hell-Volhard-Zelinsky अभिक्रिया})
(vii) \( \text{RCH(OH)CH}_2\text{COOCH}_3 \)
(viii) साइक्लोहेक्सेनों ऑक्सिम
(ix) \( \text{RCH=CH-COOH} \)
(x) हेक्सेन-1, 6-डाइअल (\text{ओजोनोपlysis उत्पाद})

मुख्य बिंदु:

• नाम अभिक्रियाओं (जैसे HZ-अभिक्रिया, ओजोनोपlysis, विकार्बोक्सिलन) के उत्पाद पहचानना।
• अभिकर्मकों के विशिष्ट प्रभावों को याद रखना।
• रासायनिक समीकरणों को संतुलित करना।

आम गलतियाँ:

• सह-उत्पाद (by-products जैसे \( \text{SO}_2, \text{HCl} \) आदि) लिखना भूल जाना।
• अपचयन और ऑक्सीकरण अभिकर्मकों के सही उत्पाद न पहचान पाना।

Exam Tips:

• ऐसे पूर्ण करने वाले प्रश्नों के लिए NCERT की सभी मुख्य अभिक्रियाओं की सूची तैयार रखें।
• केवल मुख्य उत्पाद ही नहीं, बल्कि उप-उत्पाद भी लिखें यदि आवश्यक हो।
• समीकरणों में तीर के ऊपर दी गई परिस्थितियों को ध्यान से पढ़ें।

 

Question 8.18: निम्नलिखित के संभावित कारण दीजिए-
(i) साइक्लोहेक्सेनोने अच्छी लम्बाई में सायनाहाइड्रिन बनाता है। परन्तु 2, 2, 6-ट्राइमेथिलसाइक्लोहेक्सेनोने ऐसा नहीं करता।
(ii) सेमीकार्बेजाइड में दो \( -\text{NH}_2 \) समूह होते हैं, परन्तु केवल एक \( -\text{NH}_2 \) समूह ही सेमीकार्बेजोन विरचन में प्रयुक्त होता है।
(iii) कार्बोक्सिलिक अम्ल एवं ऐल्कोहॉल से, अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में एस्टर के विरचन के समय जल अथवा एस्टर जैसे ही निर्मित होता है उसको निकाल दिया जाना चाहिए।

Answer:

(i) इस मामले में, नाभिकरागी \( \text{CN}^- \) बिना किसी त्रिविम बाधा के आसानी से आक्रमण कर सकता है। हालांकि, 2, 2, 6-ट्राइमेथिलसाइक्लोहेक्सानेन के मामले में, \( \alpha \)-स्थानों पर मेथिल समूह त्रिविम बाधाएं प्रदान करते हैं और परिणामस्वरूप, \( \text{CN}^- \) प्रभावी ढंग से हमला नहीं कर सकता है।
(ii) इसलिए, अनुनाद में शामिल \( -\text{NH}_2 \) समूह पर इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है। नतीजतन, यह एक नाभिकरागी के रूप में कार्य नहीं कर सकता है। चूंकि अन्य \( -\text{NH}_2 \) समूह अनुनाद में शामिल नहीं है; यह एक नाभिकरागी के रूप में कार्य कर सकता है और सेमीकार्बेजोन बनाने के लिए ऐल्डिहाइड या कीटोन के कार्बोनील-कार्बन परमाणु पर हमला कर सकता है।
(iii) यदि पानी या एस्टर बनने के तुरंत बाद नहीं हटाया जाता है, तो यह अभिकारकों को वापस देने के लिए अभिक्रिया करता है क्योंकि यह अभिक्रिया प्रतिवर्ती है। इसलिए, संतुलन को आगे की दिशा में स्थानांतरित करने के लिए, यानी अधिक एस्टर का उत्पादन करने के लिए, दोनों में से किसी एक को हटा दिया जाना चाहिए।

मुख्य बिंदु:

• त्रिविम बाधा (Steric hindrance) नाभिकरागी योगात्मक अभिक्रियाओं की दर को कम करती है।
• अनुनाद (Resonance) के कारण लोन पेयर की उपलब्धता प्रभावित होती है।
• ला शातेलिए (Le Chatelier) के नियम के अनुसार साम्यावस्था को आगे बढ़ाने के लिए उत्पादों को हटाना जरूरी है।

आम गलतियाँ:

• त्रिविम प्रभावों को ठीक से न समझा पाना।
• अनुनाद संरचनाओं में इलेक्ट्रॉन विस्थापन की दिशा गलत दिखाना।

Exam Tips:

a) कारण स्पष्ट करते समय त्रिविम बाधा और इलेक्ट्रॉनिक प्रभावों का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) ली-शातेलिए नियम का संदर्भ देकर साम्यावस्था की बात समझाएं।
c) उत्तर को वैज्ञानिक शब्दावली में सटीक रूप से लिखें।

 

Question 8.19: एक कार्बनिक यौगिक में 69 - 77% कार्बन 11 - 63% हाइड्रोजन तथा शेष ऑक्सीजन है। यौगिक का आणविक द्रव्यमान 86 है। यह टॉलेंन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता परंतु सोडियम हाइड्रोजनसल्फाइट के साथ योगय यौगिक देता है तथा आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है। प्रबल ऑक्सीकरण पर एथैनोइक तथा प्रोपेनोइक अम्ल देता है। यौगिक की संभावित संरचना लिखिए।

Answer:

कार्बन का \% = 69.77 %, हाइड्रोजन का \% = 11.63 %
ऑक्सीजन का \% = \( 100 - (69.77 + 11.63) = 18.6 \% \)
परमाणुओं का सरल अनुपात C : H : O = \( 5 : 10 : 1 \)
अतः यौगिक का मूलानुपाती सूत्र \( \text{C}_5\text{H}_{10}\text{O} \) है।
आणविक द्रव्यमान 86 है, इसलिए आणविक सूत्र \( \text{C}_5\text{H}_{10}\text{O} \) ही है।
यह टॉलेंन अभिकर्मक को अपचयित नहीं करता, अतः यह कीटोन है। यह आयोडोफॉर्म परीक्षण देता है, अतः यह मेथिल कीटोन है।
ऑक्सीकरण पर एथैनोइक और प्रोपेनोइक अम्ल देता है। अतः यौगिक पेंटेन-2-ऑल है।

मुख्य बिंदु:

• प्रतिशतता से मूलानुपाती सूत्र (Empirical formula) ज्ञात करना।
• आणविक द्रव्यमान की सहायता से वास्तविक आणविक सूत्र निकालना।
• दिए गए परीक्षणों (टॉलेंन, आयोडोफॉर्म) से क्रियात्मक समूह की स्थिति तय करना।

आम गलतियाँ:

• मूल अनुपात निकालते समय दशमलव या पूर्णांक की गणना में गलती करना।
• परीक्षणों के परिणामों से कीटोन या ऐल्डिहाइड का गलत चयन करना।

Exam Tips:

a) आंकिक प्रश्नों में सारणी बनाकर तत्वों के प्रतिशत, परमाणु भार और मोल अनुपात निकालें।
b) परीक्षणों के निष्कर्षों को क्रमबद्ध तरीके से लिखकर संरचना निश्चित करें।
c) अंत में IUPAC नाम और संरचना दोनों स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 8.20: यद्यपि फ़ॉक्साइड आयन की अनुनादी संरचनाएँ कार्बोक्सिलेट आयन की तुलना में अधिक है परंतु कार्बोक्सिलिक अम्ल फ़ीनॉल की अपेक्षा प्रबल अम्ल है। क्यों?

Answer:

फ़ेनाक्साइड आयन के अनुनाद संरचनाओं से यह देखा जा सकता है कि II, III और IV में कम विद्युत ऋणात्मक कार्बन परमाणु ऋणात्मक आवेश वहन करते हैं। इसलिए, ये तीन संरचनाएँ फ़ेनाक्साइड आयन की स्थिरता की दिशा में नगण्य योगदान देती हैं।
इसके अलावा, अनुनादित संरचनाओं A और B में, ऋणात्मक आवेश दो ऑक्सीजन परमाणुओं पर निरूपित होता है। लेकिन फ़ॉक्साइड आयन की अनुनाद संरचनाओं I और V में, ऋणात्मक आवेश एक ही ऑक्सीजन परमाणु पर स्थानीयकृत होता है। इसलिए, कार्बोक्सिलेट आयन की अनुनादी संरचनाएँ फ़ेनाक्साइड आयन की तुलना में इसकी स्थिरता में अधिक योगदान करती हैं। नतीजतन, कार्बोक्सिलेट आयन फ़ेनाक्साइड आयन की तुलना में अधिक अनुनाद-स्थिर होता है। इसलिए, कार्बोक्सिलिक अम्ल फ़ीनॉल की तुलना में अधिक प्रबल अम्ल है।

मुख्य बिंदु:

• संयुग्मी क्षार की स्थिरता अम्ल की प्रबलता निर्धारित करती है।
• कार्बोक्सिलेट आयन में ऋणात्मक आवेश दो विद्युतऋणात्मक ऑक्सीजन परमाणुओं पर समान रूप से वितरित (Delocalized) होता है।
• फ़ेनाक्साइड आयन में आवेश कम विद्युतऋणात्मक कार्बन परमाणुओं पर भी आता है।

आम गलतियाँ:

• केवल अनुनाद संरचनाओं की संख्या गिनकर निष्कर्ष निकालना (गुणवत्ता देखना भूल जाना)।
• ऑक्सीजन और कार्बन की विद्युतऋणाता के प्रभाव को नजरंदाज करना।

Exam Tips:

a) उत्तर लिखते समय 'आवेश के स्थिरीकरण' (Charge delocalization) और 'विद्युतऋणाता' शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
b) कार्बोक्सिलेट आयन और फ़ेनाक्साइड आयन की तुलना स्पष्ट रूप से समझाएं।
c) यह तर्क दें कि अधिक विद्युतऋणात्मक परमाणु पर ऋणात्मक आवेश अधिक स्थायी होता है।

 

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