Official NCERT Solutions for Class 12 Chemistry: Chapter 07 एल्कोहल फिनॉल एवं ईथर
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Chapter-wise Solutions for Chemistry: Chapter 07 एल्कोहल फिनॉल एवं ईथर
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Question 7.1: निम्नलिखित यौगिकों के आईूपीयसी (IUPAC) नाम लिखिए।
(i) \( \text{CH}_3-\text{CH}-\text{CH}-\text{C}-\text{CH}_3 \) (ऊपर और नीचे क्रमशः एक-एक \( \text{CH}_3, \text{OH}, \text{CH}_3 \) जुड़े हैं)
(ii) \( \text{H}_3\text{C}-\text{CH}_2-\text{CH}_2-\text{CH}-\text{CH}-\text{CH}_2-\text{CH}_3 \) (नीचे \( \text{OH} \) और \( \text{C}_2\text{H}_5 \) जुड़े हैं)
(iii) \( \text{CH}_3-\text{CH}-\text{CH}-\text{CH}_3 \) (नीचे \( \text{OH} \) समूह जुड़े हैं)
(iv) \( \text{OH}-\text{CH}_2-\text{CH}-\text{CH}_2-\text{OH} \) (नीचे \( \text{OH} \) समूह जुड़ा है)
(v) \( 2 \)-मेथिलफीनॉल
(vi) \( 4 \)-मेथिलफीनॉल
(vii) \( \text{CH}_3 \) समूह और \( \text{OH} \) समूह युक्त बेंजीन वलय
(viii) \( \text{CH}_3 \) और \( \text{OH} \) युक्त अन्य बेंजीन वलय व्युत्पन्न
(ix) \( \text{CH}_3-\text{O}-\text{CH}_2-\text{CH}-\text{CH}_3 \) (नीचे \( \text{CH}_3 \) जुड़ा है)
(x) \( \text{C}_6\text{H}_5-\text{O}-\text{C}_2\text{H}_5 \)
(xi) \( \text{C}_6\text{H}_5-\text{O}-\text{C}_7\text{H}_{15}(n-) \)
(xii) \( \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{O}-\text{CH}-\text{CH}_2-\text{CH}_3 \) (नीचे \( \text{CH}_3 \) जुड़ा है)
Answer:
दिए गए कार्बन यौगिकों के आईूपीयसी (IUPAC) नाम निम्नलिखित हैं:
(i) \( 2, 2, 4 \)-ट्राइमेथिलपेंटेन-\( 3 \)-ऑल
(ii) \( 5 \)-एथिलहेप्टेन-\( 2, 4 \)-डाइऑल
(iii) ब्यूटेन-\( 2, 3 \)-डाइऑल
(iv) प्रोपेन-\( 1, 2, 3 \)-ट्राइऑल
(v) \( 2 \)-मेथिलफीनॉल
(vi) \( 4 \)-मेथिलफीनॉल
(vii) \( 2, 5 \)-डाइमेथिलफीनॉल
(viii) \( 2, 6 \)-डाइमेथिलफीनॉल
(ix) \( 1 \)-मेथॉक्सी-\( 2 \)-मेथिलप्रोपेन
(x) एथॉक्सीबेन्जीन
(xi) \( 1 \)-फेनॉक्सीहेप्टेन
(xii) \( 2 \)-एथॉक्सीब्यूटेन
मुख्य बिंदु:
• आईूपीयसी नामकरण में सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला का चयन किया जाता है जिसमें क्रियात्मक समूह शामिल हो।
• संख्यांकन उस सिरे से किया जाता है जिससे मुख्य क्रियात्मक समूह (\( -\text{OH} \)) को न्यूनतम अंक मिले।
• ईथर के नामकरण में एल्कोक्सी समूह को प्रतिस्थापी के रूप में लिखा जाता है।
आम गलतियाँ:
• कार्बन श्रृंखला चुनते समय क्रियात्मक समूह वाले कार्बन को नजरअंदाज करना।
• संख्यांकन गलत सिरे से शुरू करना जिससे क्रियात्मक समूह को बड़ा अंक मिले।
• पूर्वग्नु (Prefix) और अनुलग्न (Suffix) का अंग्रेजी वर्णमाला के क्रम में न लिखना।
Exam Tips:
a) संरचना को खोलकर सही कार्बन श्रृंखला की पहचान करें।
b) प्राथमिकता क्रम के अनुसार मुख्य क्रियात्मक समूह का चयन करें।
c) अंकों और अक्षरों के बीच हाइफन (-) तथा अंकों के बीच अल्पविराम (,) का उचित प्रयोग करें।
Question 7.2: निम्नलिखित आईूपीयसी (IUPAC) नाम वाले यौगिकों की संरचनाएँ लिखिए:
(i) \( 2 \)-मेथिलब्यूटेन-\( 2 \)-ऑल
(ii) \( 1 \)-फेनिलप्रोपैन-\( 2 \)-ऑल
(iii) \( 3, 5 \)-डाइमेथिलसाइक्लोहेक्सेन-\( 1, 3, 5 \)-ट्राइऑल
(iv) \( 2, 3 \)-डाइएथिलफीनॉल
(v) \( 1 \)-एथॉक्सीप्रोपेन
(vi) \( 2 \)-एथॉक्सी-\( 3 \)-मेथिलपेंटेन
(vii) साइक्लोहेक्सिलमेथेनॉल
(viii) साइक्लोहेक्साइलपेटेन-\( 3 \)-ऑल
(ix) साइक्लोपेन्टेन-\( 3 \)-ईन-\( 1 \)-ऑल
(x) \( 4 \)-क्लोरो-\( 3 \)-एथिलब्यूटेन-\( 1 \)-ऑल
Answer:
दिए गए आईूपीयसी नामों के आधार पर रासायनिक संरचनाएँ इस प्रकार हैं:
(i) ब्यूटेन श्रृंखला के दूसरे कार्बन पर एक \( -\text{OH} \) और एक \( -\text{CH}_3 \) समूह जुड़ा होता है: \( (\text{CH}_3)_2\text{C}(\text{OH})\text{CH}_2\text{CH}_3 \)
(ii) प्रोपेन श्रृंखला के दूसरे कार्बन पर \( -\text{OH} \) और पहले पर फेनिल समूह जुड़ा होता है: \( \text{C}_6\text{H}_5-\text{CH}_2-\text{CH}(\text{OH})-\text{CH}_3 \)
(iii) साइक्लोहेक्सेन वलय के \( 1, 3, 5 \) स्थानों पर \( -\text{OH} \) तथा \( 3, 5 \) पर मेथिल समूह जुड़े होते हैं।
(iv) फीनॉल वलय के \( 2 \) और \( 3 \) स्थान पर एथिल समूह जुड़े होते हैं।
(v) \( \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{O}-\text{CH}_2-\text{CH}_2-\text{CH}_3 \)
(vi) \( \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{CH}(\text{CH}_3)-\text{CH}(\text{OC}_2\text{H}_5)-\text{CH}_3 \)
(vii) साइक्लोहेक्सेन वलय से सीधे जुड़े कार्बन पर \( -\text{CH}_2\text{OH} \) जुड़ा होता है।
(viii) पेंटेन श्रृंखला के तीसरे कार्बन पर \( -\text{OH} \) तथा तीसरे कार्बन से साइक्लोहेक्साइल समूह जुड़ा होता है।
(ix) साइक्लोपेंटेन वलय में \( 3 \) व \( 4 \) के बीच द्विबंध तथा पहले कार्बन पर \( -\text{OH} \) होता है।
(x) \( \text{Cl}-\text{CH}_2-\text{CH}(\text{C}_2\text{H}_5)-\text{CH}_2-\text{CH}_2-\text{OH} \)
मुख्य बिंदु:
• संरचना बनाते समय सबसे पहले मूल हाइड्रोकार्बन श्रृंखला या वलय खींचें।
• अनुलग्न (Suffix) के आधार पर मुख्य क्रियात्मक समूह को सही स्थिति पर दर्शाएं।
• प्रतिस्थापियों को उनके उचित लोकेन्ट (अंक) पर व्यवस्थित करें।
आम गलतियाँ:
• मूल श्रृंखला में कार्बन परमाणुओं की संख्या गलत गिनना।
• क्रियात्मक समूह को गलत कार्बन पर रख देना।
• वलय संरचनाओं और खुली श्रृंखलाओं में अंतर न समझना।
Exam Tips:
a) हमेशा पीछे से (जनक नाम से) संरचना बनाना शुरू करें।
b) वलय वाले यौगिकों में कार्बन की संयोजकता \( 4 \) का विशेष ध्यान रखें।
c) संरचनाओं को स्पष्ट रूप से बॉन्ड-लाइन या संघनन सूत्र में प्रदर्शित करें।
Question 7.3: (i) आण्विक सूत्र \( \text{C}_5\text{H}_{12}\text{O} \) वाले एल्कोहॉलों के सभी समावयवों की संरचना लिखिए एवं उनके आईूपीयसी नाम दीजिए।
(ii) प्रश्न \( 11-3 \) (यहाँ \( 7.3 \) का भाग ii) के समावयवी एल्कोहॉलों को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक एल्कोहॉलों में वर्गीकृत कीजिए।
Answer:
(i) \( \text{C}_5\text{H}_{12}\text{O} \) के सभी संभव एल्कोहॉल समावयवों की संरचनाएँ और उनके आईूपीयसी नाम:
1. \( \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{CH}_2-\text{CH}_2-\text{CH}_2-\text{OH} \) (पेंटेन-\( 1 \)-ऑल)
2. \( \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{CH}_2-\text{CH}(\text{OH})-\text{CH}_3 \) (पेंटेन-\( 2 \)-ऑल)
3. \( \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{CH}(\text{OH})-\text{CH}_2-\text{CH}_3 \) (पेंटेन-\( 3 \)-ऑल)
4. \( \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{CH}(\text{CH}_3)-\text{CH}_2-\text{OH} \) (\( 2 \)-मेथिलब्यूटेन-\( 1 \)-ऑल)
5. \( \text{CH}_3-\text{CH}(\text{CH}_3)-\text{CH}_2-\text{CH}_2-\text{OH} \) (\( 3 \)-मेथिलब्यूटेन-\( 1 \)-ऑल)
6. \( (\text{CH}_3)_2\text{C}(\text{OH})-\text{CH}_2-\text{CH}_3 \) (\( 2 \)-मेथिलब्यूटेन-\( 2 \)-ऑल)
7. \( \text{CH}_3-\text{CH}(\text{CH}_3)-\text{CH}(\text{OH})-\text{CH}_3 \) (\( 3 \)-मेथिलब्यूटेन-\( 2 \)-ऑल)
8. \( (\text{CH}_3)_3\text{C}-\text{CH}_2-\text{OH} \) (\( 2, 2 \)-डाइमेथिलप्रोपेन-\( 1 \)-ऑल)
(ii) वर्गीकरण:
• प्राथमिक एल्कोहॉल (\( 1^\circ \)): पेंटेन-\( 1 \)-ऑल, \( 2 \)-मेथिलब्यूटेन-\( 1 \)-ऑल, \( 3 \)-मेथिलब्यूटेन-\( 1 \)-ऑल, \( 2, 2 \)-डाइमेथिलप्रोपेन-\( 1 \)-ऑल।
• द्वितीयक एल्कोहॉल (\( 2^\circ \)): पेंटेन-\( 2 \)-ऑल, पेंटेन-\( 3 \)-ऑल, \( 3 \)-मेथिलब्यूटेन-\( 2 \)-ऑल।
• तृतीयक एल्कोहॉल (\( 3^\circ \)): \( 2 \)-मेथिलब्यूटेन-\( 2 \)-ऑल।
मुख्य बिंदु:
• \( \text{C}_5\text{H}_{12}\text{O} \) कुल \( 8 \) संरचनात्मक समावयव प्रदर्शित करता है।
• प्राथमिक एल्कोहॉल में \( -\text{OH} \) समूह प्राथमिक कार्बन से जुड़ा होता है।
• तृतीयक एल्कोहॉल में \( -\text{OH} \) समूह तृतीयक कार्बन से जुड़ा होता है।
आम गलतियाँ:
• समावयव बनाते समय श्रृंखला समावयवता और स्थिति समावयवता में भ्रमित होना।
• एक ही यौगिक को नाम बदलकर दोबारा लिख देना।
• \( 1^\circ, 2^\circ, 3^\circ \) की पहचान में \( -\text{OH} \) से जुड़े कार्बन की अन्य कार्बन से संयोजकता न देखना।
Exam Tips:
a) समावयवों की संख्या ज्ञात करने के लिए कार्बन कंकाल (Carbon skeleton) विधि का प्रयोग करें।
b) श्रृंखला छोटी करते समय मेथिल समूहों की स्थिति का ध्यान रखें।
c) वर्गीकरण करते समय \( -\text{OH} \) युक्त कार्बन से जुड़े एल्किल समूहों की संख्या गिनें।
Question 7.4: समझाइए कि प्रोपेनॉल का क्वथनांक, हाइड्रोकार्बन ब्यूटेन से अधिक क्यों होता है?
Answer:
प्रोपेनॉल (\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{OH} \)) के अणुओं के बीच अंतराआण्विक हाइड्रोजन बंध पाया जाता है, जबकि ब्यूटेन (\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{CH}_3 \)) के अणुओं में केवल दुर्बल वांडरवाल्स आकर्षण बल होते हैं।
हाइड्रोजन बंध को तोड़ने के लिए अतिरिक्त ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
इस कारण से, प्रोपेनॉल का क्वथनांक समान आण्विक द्रव्यमान वाले हाइड्रोकार्बन ब्यूटेन की तुलना में काफी अधिक होता है।
मुख्य बिंदु:
• एल्कोहॉल में ध्रुवीय \( \text{O}-\text{H} \) बंध होने के कारण हाइड्रोजन बॉन्डिंग होती है।
• हाइड्रोकार्बन में अध्रुवीय \( \text{C}-\text{H} \) बंध होते हैं, अतः हाइड्रोजन बंध संभव नहीं है।
• अंतराआण्विक हाइड्रोजन बंध के कारण अणुओं का संगनन होता है।
आम गलतियाँ:
• केवल आण्विक द्रव्यमान की तुलना करना और हाइड्रोजन बंध को नजरअंदाज करना।
• अंतराआण्विक और अंतरआण्विक हाइड्रोजन बंध में अंतर न समझना।
Exam Tips:
a) उत्तर में 'अंतराआण्विक हाइड्रोजन आबंधन' (Intermolecular Hydrogen bonding) शब्द का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) हाइड्रोजन बंध को संरचनात्मक आरेख द्वारा दर्शाएं।
c) वांडरवाल्स बलों और हाइड्रोजन बंध की ऊर्जा की तुलनात्मक बात लिखें।
Question 7.5: समतुल्य आण्विक भार वाले हाइड्रोकार्बनों की अपेक्षा एल्कोहॉल जल में अधिक विलेय होते हैं। इस तथ्य को समझाइए।
Answer:
एल्कोहॉल के अणु जल के अणुओं के साथ हाइड्रोजन बंध बना लेते हैं, क्योंकि एल्कोहॉल में ध्रुवीय \( -\text{OH} \) समूह उपस्थित होता है।
इसके विपरीत, हाइड्रोकार्बन पानी के साथ हाइड्रोजन बंध नहीं बना सकते क्योंकि वे अध्रुवीय होते हैं।
परिणामस्वरूप, समान आण्विक द्रव्यमान वाले हाइड्रोकार्बन की तुलना में एल्कोहॉल पानी में आसानी से घुल जाते हैं (विलेय होते हैं)।
मुख्य बिंदु:
• जल और एल्कोहॉल दोनों में हाइड्रोजन बंध बनाने की क्षमता होती है ('समान घुले समान में' सिद्धांत)।
• एल्किल समूह का आकार बढ़ने पर जल में विलेयता घटती है क्योंकि हाइड्रोफोबिक भाग बढ़ता है।
• \( -\text{OH} \) समूह हाइड्रोजन बंध के कारण जलयोजित हो जाता है।
आम गलतियाँ:
• विलेयता का कारण केवल आण्विक भार को मानना।
• जल अणुओं के साथ बनने वाले हाइड्रोजन बंध का सही चित्र न बना पाना।
Exam Tips:
a) 'हाइड्रोजन आबंधन' को मुख्य कारण के रूप में लिखें।
b) एल्कोहॉल और जल के बीच बनने वाले \( \text{H-bond} \) का प्रतीकात्मक निरूपण करें।
c) एल्किल समूह के प्रभाव (जल-विरामी प्रकृति) का संक्षेप में जिक्र करें।
Question 7.6: हाइड्रोबोरेशन-ऑक्सीकरण अभिक्रिया से आप क्या समझते हैं? इसे उदाहरण सहित समझाइए।
Answer:
डाइबोरान (\( (\text{BH}_3)_2 \)) एल्कीन से अभिक्रिया करके एक योगज उत्पाद ट्राइऐल्किल बोरॉन बनाता है, जो जलीय सोडियम हाइड्रोक्साइड की उपस्थिति में हाइड्रोजन परॉक्साइड द्वारा ऑक्सीकृत होकर एल्कोहॉल देता है।
उदाहरण के लिए, प्रोपीन की अभिक्रिया डाइबोरान से कराने पर त्रि-प्रोपिल बोरॉन बनता है, जो \( \text{H}_2\text{O}_2/\text{OH}^- \) द्वारा ऑक्सीकृत होकर प्रोपेन-\( 1 \)-ऑल देता है।
रासायनिक समीकरण:
\( 3\text{CH}_3-\text{CH}=\text{CH}_2 + (\text{BH}_3)_2 \longrightarrow (\text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{CH}_2)_3\text{B} \)
\( (\text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{CH}_2)_3\text{B} + 3\text{H}_2\text{O}_2 + 3\text{OH}^- \longrightarrow 3\text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{CH}_2-\text{OH} + \text{B}(\text{OH})_3 \)
मुख्य बिंदु:
• यह अभिक्रिया ऐंटी-मार्कोनीकॉफ़ नियम के अनुसार होती है।
• इसमें उत्पाद के रूप में प्राथमिक एल्कोहॉल प्राप्त होता है।
• यह एल्कीन के जलयोजन की एक वैकल्पिक विधि है जिसमें पुनर्विन्यास नहीं होता।
आम गलतियाँ:
• मार्कोनीकॉफ़ नियम के अनुसार उत्पाद (द्वितीयक एल्कोहॉल) बना देना।
• अभिकर्मकों \( \text{BH}_3 \) और \( \text{H}_2\text{O}_2/\text{OH}^- \) को गलत क्रम में लिखना।
Exam Tips:
a) अभिक्रिया का नाम और उसमें प्रयुक्त अभिकर्मकों को स्पष्ट रूप से लिखें।
b) यह दर्शाएं कि इसमें \( -\text{OH} \) समूह कम प्रतिस्थापित कार्बन पर जुड़ता है।
c) संतुलित रासायनिक समीकरण अवश्य दें।
Question 7.7: आण्विक सूत्र \( \text{C}_7\text{H}_8\text{O} \) वाले मोनोहाइड्रिक फीनॉलों की संरचनाएँ तथा आईूपीयसी (IUPAC) नाम लिखिए।
Answer:
आण्विक सूत्र \( \text{C}_7\text{H}_8\text{O} \) वाले मोनोहाइड्रिक फीनॉल के कुल तीन समावयव (क्रेकॉल) संभव हैं:
1. \( 2 \)-मेथिलफीनॉल (\( o \)-क्रेकॉल): बेंजीन वलय पर \( -\text{OH} \) के सापेक्ष आर्थो स्थिति पर \( -\text{CH}_3 \) समूह।
2. \( 3 \)-मेथिलफीनॉल (\( m \)-क्रेकॉल): बेंजीन वलय पर \( -\text{OH} \) के सापेक्ष मेटा स्थिति पर \( -\text{CH}_3 \) समूह।
3. \( 4 \)-मेथिलफीनॉल (\( p \)-क्रेकॉल): बेंजीन वलय पर \( -\text{OH} \) के सापेक्ष पैरा स्थिति पर \( -\text{CH}_3 \) समूह।
मुख्य बिंदु:
• इस सूत्र में एक बेंजीन वलय (\( \text{C}_6\text{H}_4 \)), एक हाइड्रॉक्सिल समूह (\( -\text{OH} \)) और एक मेथिल समूह (\( -\text{CH}_3 \)) शामिल है।
• इन्हें सामान्यतः क्रेकॉल कहा जाता है।
• यह स्थिति समावयवता (Positional isomerism) का उदाहरण है।
आम गलतियाँ:
• \( -\text{OH} \) और \( -\text{CH}_3 \) की सापेक्ष स्थितियों (आर्थो, मेटा, पैरा) को गलत बनाना।
• संरचनाओं की संख्या कम या ज्यादा लिखना।
Exam Tips:
a) सभी संरचनाओं के आईूपीयसी नाम के साथ सामान्य नाम भी लिखें।
b) बेंजीन वलय में द्विबंधों की स्थिति को सही से दर्शाएं।
c) कार्बन और हाइड्रोजन की कुल संख्या का मिलान अवश्य करें।
Question 7.8: ऑर्थो तथा पैरा-नाइप्रॉफीनॉलों के मिश्रण को भाप-आसवन द्वारा पृथक करने में भाप-वाष्शील समावयवी का नाम बताइए। इसका कारण दीजिए।
Answer:
भाप-वाष्पशील समावयवी ऑर्थो-नाइट्रोफीनॉल (\( o \)-नाइट्रोफीनॉल) है।
इसका कारण यह है कि ऑर्थो-नाइट्रोफीनॉल के अणुओं के भीतर अंतraआण्विक हाइड्रोजन आबंधन (Intramolecular hydrogen bonding) पाया जाता है, जिससे यह संगुणित नहीं होता और आसानी से वाष्पीकृत हो जाता है।
इसके विपरीत, पैरा-नाइट्रोफीनॉल में अंतराआण्विक हाइड्रोजन आबंधन (Intermolecular hydrogen bonding) होता है जिसके कारण अणु संगुणित हो जाते हैं और उनका क्वथनांक उच्च होता है।
मुख्य बिंदु:
• \( o \)-नाइट्रोफीनॉल में chelation (किलेशन) या अंतराआण्विक हाइड्रोजन बंध बनता है।
• \( p \)-नाइट्रोफीनॉल में अणुओं के बीच संघनन होने के कारण वाष्पशीलता कम होती है।
• भाप-आसवन (Steam distillation) का उपयोग वाष्पशील यौगिकों के पृथक्करण के लिए किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• अंतराआण्विक और अंतraआण्विक हाइड्रोजन बंध के नाम में भ्रमित होना।
• दोनों के क्वथनांक में अंतर का गलत कारण बताना।
Exam Tips:
a) \( o \)-isomer में 'अंतraआण्विक' और \( p \)-isomer में 'अंतराआण्विक' शब्द का सही प्रयोग करें।
b) हाइड्रोजन बंध का रेखाचित्र बनाकर अंतर स्पष्ट करें।
c) वाष्शीलता का सीधा संबंध अंतराआण्विक आकर्षण बलों से होता है।
Question 7.9: क्यूमीन से फीनॉल बनाने की अभिक्रिया का समीकरण दीजिए।
Answer:
फीनॉल तैयार करने के लिए, क्यूमीन (आइसोप्रोपिलबेन्जीन) को पहले हवा (ऑक्सीजन) की उपस्थिति में ऑक्सीकृत करके क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड बनाया जाता है।
फिर, क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड को तनु अम्ल के साथ उपचारित करके फीनॉल और उपउत्पाद के रूप में एसीटोन प्राप्त किया जाता है।
रासायनिक समीकरण:
चरण 1: \( \text{C}_6\text{H}_5\text{-CH}(\text{CH}_3)_2 + \text{O}_2 \xrightarrow{368-408\text{ K}} \text{C}_6\text{H}_5-\text{C}(\text{CH}_3)_2-\text{O}-\text{O}-\text{H} \)
चरण 2: \( \text{C}_6\text{H}_5-\text{C}(\text{CH}_3)_2-\text{O}-\text{O}-\text{H} \xrightarrow{\text{H}^+, 323-363\text{ K}} \text{C}_6\text{H}_5\text{OH} + \text{CH}_3\text{COCH}_3 \)
मुख्य बिंदु:
• यह औद्योगिक स्तर पर फीनॉल बनाने की सबसे महत्वपूर्ण विधि है।
• इसमें मूल्यवान सह-उत्पाद के रूप में एसीटोन प्राप्त होता है।
• क्यूमीन का ऑक्सीकरण वायुमंडलीय ऑक्सीजन द्वारा होता है।
आम गलतियाँ:
• मध्यवर्ती उत्पाद 'क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड' की संरचना गलत बनाना।
• उपउत्पाद एसीटोन का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) दोनों चरणों के तापमान और उत्प्रेरक को तीर के ऊपर स्पष्ट लिखें।
b) क्यूमीन की संरचना \( (\text{C}_6\text{H}_5-\text{CH}(\text{CH}_3)_2) \) सही से दर्शाएं।
c) यह एक उच्च व्यावसायिक महत्व की अभिक्रिया है, इसे चरणबद्ध तरीके से याद रखें।
Question 7.10: क्लोरोबेन्जीन से फीनॉल बनाने की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
Answer:
क्लोरोबेन्जीन को \( \text{NaOH} \) (\( 623\text{ K} \) ताप और \( 320\text{ atm} \) दाब पर) के साथ गर्म करने पर सोडियम फीनऑक्साइड बनता है, जो अम्ल के साथ अम्लीकरण करने पर फीनॉल देता है।
रासायनिक समीकरण:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{Cl} + 2\text{NaOH} \xrightarrow{623\text{ K, } 320\text{ atm}} \text{C}_6\text{H}_5\text{ONa} + \text{NaCl} + \text{H}_2\text{O} \)
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{ONa} \xrightarrow{\text{HCl}} \text{C}_6\text{H}_5\text{OH} + \text{NaCl} \)
मुख्य बिंदु:
• यह डॉग प्रक्रम (Dow's Process) कहलाता है।
• इस अभिक्रिया में अति उच्च ताप और दाब की आवश्यकता होती है क्योंकि \( \text{C-Cl} \) बंध में आंशिक द्विबंध गुण होता है।
• अंतिम चरण में सोडियम फीनऑक्साइड का अम्लीकरण किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• तापमान और दाब की शर्तें भूल जाना।
• सीधे क्लोरोबेन्जीन से फीनॉल बनाते समय बीच में सोडियम फीनऑक्साइड न बनाना।
Exam Tips:
a) तीर के ऊपर \( 623\text{ K} \) और \( 320\text{ atm} \) लिखना अनिवार्य है।
b) दो चरणों (स्रष्टि और अम्लीकरण) को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
c) सह-उत्पाद \( \text{NaCl} \) और \( \text{H}_2\text{O} \) को भी संतुलित करें।
Question 7.11: एथीन के जलयोजन से एथनॉल प्राप्त करने की क्रियाविधि लिखिए।
Answer:
एथनॉल बनाने के लिए एथीन के जलयोजन के तंत्र में तीन मुख्य चरण शामिल हैं:
चरण 1: \( \text{H}_3\text{O}^+ \) के इलेक्ट्रॉनरागी हमले द्वारा एथीन का कार्बोकैटायन बनाने के लिए प्रोटोनन:
\( \text{H}_2\text{O} + \text{H}^+ \rightleftharpoons \text{H}_3\text{O}^+ \)
\( \text{CH}_2=\text{CH}_2 + \text{H}_3\text{O}^+ \rightleftharpoons \text{CH}_3-\text{CH}_2^+ + \text{H}_2\text{O} \)
चरण 2: कार्बोकैटायन पर पानी का नाभिकरागी हमला:
\( \text{CH}_3-\text{CH}_2^+ + :\text{H}_2\text{O} \rightleftharpoons \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{O}^+\text{H}_2 \)
चरण 3: एथनॉल बनाने के लिए अवक्षेपण (प्रोटॉन का निष्कासन):
\( \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{O}^+\text{H}_2 + \text{H}_2\text{O} \rightleftharpoons \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{OH} + \text{H}_3\text{O}^+ \)
मुख्य बिंदु:
• यह अभिक्रिया अम्ल उत्प्रेरित जलयोजन (Acid-catalyzed hydration) का उदाहरण है।
• इसमें मार्कोनीकॉफ़ नियम का पालन होता है।
• उत्प्रेरक के रूप में प्रयुक्त \( \text{H}^+ \) अंतिम चरण में पुन: प्राप्त हो जाता है।
आम गलतियाँ:
• कार्बोकैटायन मध्यवर्ती के निर्माण को गलत दर्शाना।
• अंतिम चरण में प्रोटॉन का निष्कासन भूल जाना।
Exam Tips:
a) तीनों चरणों (प्रोटोनन, नाभिकरागी आक्रमण, डीप्रोटोनन) की हेडिंग स्पष्ट लिखें।
b) घुमावदार तीरों (Curved arrows) द्वारा इलेक्ट्रॉन के संचलन को सही दिशा में दिखाएं।
c) उत्क्रमणीयता (\( \rightleftharpoons \)) के चिह्नों का सही प्रयोग करें।
Question 7.12: आपको बेन्जीन, सांद्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) और \( \text{NaOH} \) दिए गए हैं। इन अभिकर्मकों के उपयोग द्वारा फीनॉल के विरचन की समीकरण लिखिए।
Answer:
दिए गए अभिकर्मकों द्वारा बेन्जीन से फीनॉल बनाने के चरण:
1. बेन्जीन की अभिक्रिया सांद्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) के साथ गर्म करके बेन्जीन सल्फोनिक अम्ल बनाते हैं।
2. बेन्जीन सल्फोनिक अम्ल को molten \( \text{NaOH} \) के साथ संगलित (fused) करने पर सोडियम फीनऑक्साइड बनता है।
3. सोडियम फीनऑक्साइड का अम्लीकरण करने पर फीनॉल प्राप्त होता है।
रासायनिक समीकरण:
\( \text{C}_6\text{H}_6 + \text{Conc. } \text{H}_2\text{SO}_4 \xrightarrow{\Delta} \text{C}_6\text{H}_5\text{SO}_3\text{H} + \text{H}_2\text{O} \)
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{SO}_3\text{H} + 2\text{NaOH} \xrightarrow{\Delta} \text{C}_6\text{H}_5\text{ONa} + \text{Na}_2\text{SO}_3 + \text{H}_2\text{O} \)
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{ONa} \xrightarrow{\text{H}^+} \text{C}_6\text{H}_5\text{OH} \)
मुख्य बिंदु:
• यह विधि सल्फोनीकरण और फिर क्षार संगलन पर आधारित है।
• इसमें मध्यवर्ती यौगिक के रूप में बेन्जीन सल्फोनिक अम्ल बनता है।
• अंतिम उत्पाद फीनॉल और उपउत्पाद सल्फाइट प्राप्त होते हैं।
आम गलतियाँ:
• \( \text{NaOH} \) के साथ संगलन चरण में stoichiometry (संतुलन) गलत लिखना।
• मध्यवर्ती सल्फोनिक अम्ल को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक परिवर्तन को क्रमानुसार समीकरणों में दिखाएं।
b) तापमान और हीटिंग (\( \Delta \)) का संकेत अवश्य दें।
c) अंतिम चरण में प्रोटॉन \( (\text{H}^+) \) या अम्ल का उपयोग लिखना न भूलें।
Question 7.13: आप निम्नलिखित को कैसे संश्लेषित करेंगे? दर्शाइए:
(i) एक उपयुक्त ऐल्कीन से \( 1 \)-फेनिलएथेनॉल
(ii) \( \text{SN}^2 \) अभिक्रिया द्वारा ऐल्किल हैलाइड के उपयोग से साइक्लोहेक्सिलमेथेनॉल
(iii) एक उपयुक्त ऐल्किल हैलाइड के उपयोग से पेंटेन-\( 1 \)-ऑल
Answer:
(i) एथिलबेन्जीन (स्टाइरीन) के अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन द्वारा \( 1 \)-फेनिलएथेनॉल का संश्लेषण किया जाता है:
\( \text{C}_6\text{H}_5-\text{CH}=\text{CH}_2 + \text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{H}^+} \text{C}_6\text{H}_5-\text{CH}(\text{OH})-\text{CH}_3 \)
(ii) जब क्लोरोमेथिलसाइक्लोहेक्सेन को सोडियम हाइड्रोक्साइड से उपचारित किया जाता है, तो साइक्लोहेक्सिलमेथेनॉल प्राप्त होता है:
\( \text{C}_6\text{H}_{11}-\text{CH}_2\text{Cl} + \text{NaOH} \longrightarrow \text{C}_6\text{H}_{11}-\text{CH}_2\text{OH} + \text{NaCl} \)
(iii) जब \( 1 \)-क्लोरोपेंटेन को \( \text{NaOH} \) से उपचारित किया जाता है, तो पेंटेन-\( 1 \)-ऑल उत्पन्न होता है:
\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{CH}_2\text{CH}_2\text{Cl} + \text{NaOH} \longrightarrow \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{CH}_2\text{CH}_2\text{OH} + \text{NaCl} \)
मुख्य बिंदु:
• ऐल्कीन का जलयोजन मार्कोनीकॉफ़ नियम के अनुसार होता है।
• \( \text{SN}^2 \) अभिक्रिया प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड के साथ सर्वोत्तम रूप से होती है।
• जलीय \( \text{NaOH} \) या \( \text{KOH} \) नाभिकरागी प्रतिस्थापन द्वारा एल्कोहॉल बनाते हैं।
आम गलतियाँ:
• \( \text{SN}^2 \) विधि में द्वितीयक या तृतीयक हैलाइड का चयन करना।
• जलीय और अल्कोहलिक \( \text{NaOH} \) के प्रभाव में अंतर न समझना।
Exam Tips:
a) अभिक्रिया के अभिकर्मक और स्थिति साफ-साफ लिखें।
b) ऐल्किल हैलाइड के प्राथमिक होने की पुष्टि करें।
c) संतुलित रासायनिक समीकरणों के साथ नाम भी लिखें।
Question 7.14: ऐसी दो अभिक्रियाएँ दीजिए जिनसे फीनॉल की अम्लीय प्रकृति प्रदर्शित होती हो कि फीनॉल की अम्लता की तुलना से एथेनॉल कीजिए।
Answer:
फीनॉल की अम्लीय प्रकृति को निम्नलिखित दो अभिक्रियाओं द्वारा दर्शाया जा सकता है:
1. फीनॉल सोडियम के साथ अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करता है:
\( 2\text{C}_6\text{H}_5\text{OH} + 2\text{Na} \longrightarrow 2\text{C}_6\text{H}_5\text{ONa} + \text{H}_2 \)
2. फीनॉल सोडियम हाइड्रोक्साइड के साथ अभिक्रिया करके सोडियम फीनऑक्साइड और पानी देता है:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{OH} + \text{NaOH} \longrightarrow \text{C}_6\text{H}_5\text{ONa} + \text{H}_2\text{O} \)
तुलना: फीनॉल, एथेनॉल की तुलना में अधिक अम्लीय है। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक प्रोटॉन खोने के बाद फीनऑक्साइड आयन अनुनाद (Resonance) द्वारा स्थायित्व प्राप्त कर लेता है, जबकि एथोक्साइड आयन में ऐसा नहीं होता।
मुख्य बिंदु:
• फीनॉल जल में वियोजित होकर फीनऑक्साइड आयन और \( \text{H}^+ \) देता है।
• अनुनाद संरचनाएं फीनऑक्साइड आयन को अत्यधिक स्थाई बनाती हैं।
• ऐल्कोहॉल (जैसे एथेनॉल) दुर्बल अम्ल हैं और \( \text{NaOH} \) से अभिक्रिया नहीं करते।
आम गलतियाँ:
• एथेनॉल और फीनॉल की अम्लता का गलत क्रम बताना।
• फीनऑक्साइड आयन की अनुनाद संरचनाएं न बना पाना।
Exam Tips:
a) फीनॉल की सोडियम धातु और \( \text{NaOH} \) दोनों के साथ समीकरण लिखें।
b) अनुनादी संبر संरचनाओं का जिक्र अवश्य करें।
c) स्पष्ट करें कि फीनॉल का \( -\text{OH} \) समूह इलेक्ट्रॉन-प्रत्याशी (electron-withdrawing) प्रकृति के कारण अम्लीयता बढ़ाता है।
Question 7.15: समझाइए कि ऑर्थो-नाइट्रोफीनॉल, ऑर्थो-मेथॉक्सीफीनॉल से अधिक अम्लीय क्यों होता है?
Answer:
नाइट्रो-समूह (\( -\text{NO}_2 \)) एक प्रबल इलेक्ट्रॉन-निकासी समूह (-I और -M प्रभाव) है। ऑर्थो स्थिति पर इसकी उपस्थिति से \( \text{O}-\text{H} \) बंध में इलेक्ट्रॉन घनत्व कम हो जाता है जिससे प्रोटॉन का निकलना आसान हो जाता है। इसके अलावा, प्रोटॉन के नुकसान के बाद बनने वाला \( o \)-नाइट्रोफेनक्साइड आयन अनुनाद द्वारा अत्यधिक स्थिर हो जाता है।
दूसरी ओर, मेथॉक्सी-समूह (\( -\text{OCH}_3 \)) एक इलेक्ट्रॉन-विमोचन (+M प्रभाव) समूह है, जो \( \text{O}-\text{H} \) बंध में इलेक्ट्रॉन घनत्व को बढ़ाता है और प्रोटॉन को आसानी से नहीं निकलने देता।
अतः ऑर्थो-नाइट्रोफीनॉल, ऑर्थो-मेथॉक्सीफीनॉल की तुलना में अधिक अम्लीय होता है।
मुख्य बिंदु:
• \( -\text{NO}_2 \) समूह का -M और -I प्रभाव अम्लता को बढ़ाता है।
• \( -\text{OCH}_3 \) समूह का +M प्रभाव अम्लता को घटाता है।
• ऋणायन का स्थायित्व अम्ल की शक्ति निर्धारित करता है।
आम गलतियाँ:
• +M और -M प्रभावों के प्रभाव को आपस में मिला देना।
• \( o \)-नाइट्रोफीनॉल में हाइड्रोजन बंध के कारण अम्लता घटने की गलत कल्पना करना (यहाँ प्रेणिक व अनुनाद प्रभाव प्रभावी हैं)।
Exam Tips:
a) दोनों समूहों के इलेक्ट्रॉनिक प्रभावों (-M और +M) का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) संयुग्मी क्षार (Conjugate base) के स्थायित्व के आधार पर उत्तर दें।
c) दोनों की संरचनाओं की तुलनात्मक व्याख्या करें।
Question 7.16: समझाइए कि बेन्जीन वलय से जुड़ा \( -\text{OH} \) समूह उसे इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन के प्रति कैसे सक्रिय करता है?
Answer:
\( -\text{OH} \) समूह एक इलेक्ट्रॉन-दान करने वाला समूह (+M प्रभाव) है। इस प्रकार, यह बेन्जीन वलय में इलेक्ट्रॉन घनत्व को बढ़ा देता है जैसा कि फीनॉल की अनुनाद संरचनाओं में देखा जाता है:
\( -\text{OH} \) समूह के लोन पेयर वलय की ओर विस्थापित होते हैं जिससे ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है।
इसी कारण से, बेन्जीन वलय इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन (Electrophilic aromatic substitution) के प्रति अधिक सक्रिय हो जाती है।
मुख्य बिंदु:
• \( -\text{OH} \) समूह का +M प्रभाव वलय को सक्रिय करता है।
• यह आने वाले इलेक्ट्रोफाइल को ऑर्थो और पैरा (\( o, p \)) स्थितियों पर निर्देशित करता है।
• अनुनाद के कारण मध्यवर्ती कार्बोकैटायन का स्थिरीकरण होता है।
आम गलतियाँ:
• अनुनाद संरचनाओं में इलेक्ट्रॉनों की दिशा गलत दर्शाना।
• सक्रियण का कारण केवल -I प्रभाव को बताना (जबकि +M मुख्य है)।
Exam Tips:
a) फीनॉल की अनुनाद संरचनाएं बनाकर ऑर्थो और पैरा पर ऋण आवेश दिखाएं।
b) '+M प्रभाव' और 'इलेक्ट्रॉन घनत्व में वृद्धि' शब्दों का प्रयोग जरूर करें।
c) ऑर्थो-पैरा निर्देशक (Ortho-para directing) प्रकृति का उल्लेख करें।
Question 7.17: निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए समीकरण दीजिए:
(i) प्रोपेन-\( 1 \)-ऑल का क्षारीय \( \text{KMnO}_4 \) के साथ ऑक्सीकरण
(ii) ब्रोमीन की \( \text{CS}_2 \) में फीनॉल के साथ अभिक्रिया
(iii) तनु \( \text{HNO}_3 \) की फीनॉल से अभिक्रिया
(iv) फीनॉल की जलीय \( \text{NaOH} \) की उपस्थिति में क्लोरोफॉर्म के साथ अभिक्रिया
Answer:
(i) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{OH} \xrightarrow{\text{Alk. KMnO}_4} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{COOH} \) (प्रोपेनोइक अम्ल)
(ii) फीनॉल की \( \text{CS}_2 \) (अध्रुवीय विलायक कम ताप पर) में \( \text{Br}_2 \) से अभिक्रिया कराने पर मुख्य उत्पाद \( o \)-ब्रोमोफीनॉल और \( p \)-ब्रोमोफीनॉल का मिश्रण बनता है, जिसमें \( p \)-समावयवी मुख्य होता है:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{OH} + \text{Br}_2 \xrightarrow{\text{CS}_2, 273\text{ K}} o\text{-}\text{BrC}_6\text{H}_4\text{OH} + p\text{-}\text{BrC}_6\text{H}_4\text{OH} \)
(iii) तनु \( \text{HNO}_3 \) के साथ फीनॉल की अभिक्रिया से \( o \)-नाइट्रोफीनॉल तथा \( p \)-नाइट्रोफीनॉल का मिश्रण बनता है:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{OH} + \text{dil. } \text{HNO}_3 \longrightarrow o\text{-}\text{NO}_2\text{C}_6\text{H}_4\text{OH} + p\text{-}\text{NO}_2\text{C}_6\text{H}_4\text{OH} \)
(iv) रीमर-टीमैन अभिक्रिया द्वारा सैलिसिल्डिहाइड बनता है:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{OH} + \text{CHCl}_3 + 3\text{NaOH} \longrightarrow \text{C}_6\text{H}_4(\text{OH})(\text{CHO}) + 3\text{NaCl} + 2\text{H}_2\text{O} \)
मुख्य बिंदु:
• प्राथमिक एल्कोहॉल के ऑक्सीकरण से कार्बोक्सिलिक अम्ल बनते हैं।
• \( \text{CS}_2 \) जैसे विलायक के प्रयोग से मोनोब्रोमीनीकरण को बढ़ावा मिलता है।
• रीमर-टीमैन अभिक्रिया फीनॉल में \( -\text{CHO} \) समूह प्रवेश कराने के लिए प्रयुक्त होती है।
आम गलतियाँ:
• \( \text{Br}_2 \) जल के साथ अभिक्रिया में त्राइब्रोमोफीनॉल (सफेद अवक्षेप) और \( \text{CS}_2 \) के साथ मोनोब्रोमो में अंतर न करना।
• रीमर-टीमैन अभिक्रिया में अभिकर्मकों के अनुपात को गलत संतुलित करना।
Exam Tips:
a) सभी चारों भागों के रासायनिक समीकरण अलग-अलग और स्पष्ट लिखें।
b) अभिकर्मकों की परिस्थितियाँ (जैसे \( \text{CS}_2, 273\text{ K} \) या तनु \( \text{HNO}_3 \)) जरूर दर्शाएं।
c) मुख्य और अल्प उत्पादों का सही वर्गीकरण करें।
Question 7.18: निम्नलिखित को उदाहरण सहित समझाइए:
(i) कोल्बे अभिक्रिया
(ii) राइमर-टीमैन अभिक्रिया
(iii) विलियमसन ईथर संश्लेषण
(iv) असम्मित ईथर।
Answer:
(i) कोल्बे अभिक्रिया: जब फीनॉल के सोडियम लवण (सोडियम फीनऑक्साइड) को कार्बन डाइऑक्साइड के साथ उच्च दाब पर गर्म किया जाता है और फिर अम्लीकरण किया जाता है, तो मुख्य उत्पाद के रूप में सैलिसिलिक अम्ल (ऑर्थो-हाइड्रॉक्सीबेन्जोइक एसिड) प्राप्त होता है।
(ii) राइमर-टीमैन अभिक्रिया: जब फीनॉल को सोडियम हाइड्रोक्साइड की उपस्थिति में क्लोरोफॉर्म के साथ गर्म किया जाता है, तो बेन्जीन वलय की ऑर्थो स्थिति पर \( -\text{CHO} \) समूह आ जाता है, जिससे सैलिसिल्डिहाइड बनता है।
(iii) विलियमसन ईथर संश्लेषण: यह सममित और असम्मित ईथर तैयार करने की प्रयोगशाला विधि है, जिसमें सोडियम एल्कोक्साइड की ऐल्किल हैलाइड के साथ नाभिकरागी प्रतिस्थापन (\( \text{SN}^2 \)) अभिक्रिया कराई जाती है: \( \text{R-X} + \text{R'ONa} \longrightarrow \text{R-O-R'} + \text{NaX} \)
(iv) असम्मित ईथर: वह ईथर जिसमें ऑक्सीजन परमाणु से जुड़े दोनों एल्किल या एरिल समूह भिन्न-भिन्न होते हैं (जैसे: एथिल मेथिल ईथर, \( \text{CH}_3-\text{O}-\text{CH}_2\text{CH}_3 \))।
मुख्य बिंदु:
• कोल्बे अभिक्रिया सैलिसिलिक अम्ल (ऐस्पिरिन का पूर्ववर्ती) बनाने के काम आती है।
• राइमर-टीमैन अभिक्रिया से सैलिसिल्डिहाइड का निर्माण होता है।
• विलियमसन संश्लेषण में प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड का प्रयोग सर्वोत्तम होता है।
आम गलतियाँ:
• कोल्बे और राइमर-टीमैन के उत्पादों (सैलिसिलिक अम्ल और सैलिसिल्डिहाइड) में भ्रमित होना।
• विलियमसन संश्लेषण में तृतीयक हैलाइड लेकर ईथर बनाने की कोशिश करना (जिससे ऐल्कीन बन जाती है)।
Exam Tips:
a) चारों परिभाषाओं के साथ उनका एक मानक रासायनिक समीकरण जरूर दें।
b) \( \text{SN}^2 \) तंत्र का विलियमसन संश्लेषण में विशेष रूप से उल्लेख करें।
c) असम्मित ईथर का एक स्पष्ट उदाहरण दें।
Question 7.19: एथनॉल के अम्लीय निर्जलन से एथीन प्राप्त करने की क्रियाविधि लिखिए।
Answer:
एथनॉल के अम्लीय निर्जलन से एथीन प्राप्त करने की क्रियाविधि के तीन चरण निम्नलिखित हैं:
चरण 1: एथिल ऑक्सोनियम आयन बनाने के लिए एथनॉल का प्रोटोनन:
\( \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{OH} + \text{H}^+ \rightleftharpoons \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{O}^+\text{H}_2 \)
चरण 2: कार्बोकैटायन का निर्माण (दर निर्धारण चरण):
\( \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{O}^+\text{H}_2 \xrightarrow{\text{धीमा}} \text{CH}_3-\text{CH}_2^+ + \text{H}_2\text{O} \)
चरण 3: एथीन बनाने के लिए एक प्रोटॉन का उन्मूलन (Deprotonation):
\( \text{CH}_3-\text{CH}_2^+ \rightleftharpoons \text{CH}_2=\text{CH}_2 + \text{H}^+ \)
मुख्य बिंदु:
• यह \( E1 \) विलोपन अभिक्रिया का उदाहरण है।
• इसमें प्रोटॉनीकृत एल्कोहॉल से जल के अणु का निष्कासन होता है।
• दर निर्धारण चरण में कार्बोकैटायन का निर्माण होता है।
आम गलतियाँ:
• प्रोटॉनीकृत एल्कोहॉल (ऑक्सोनियम आयन) का निर्माण छोड़े बिना सीधे पानी निकालना।
• उत्प्रेरक \( \text{H}^+ \) को अंतिम चरण में वापस न दिखाना।
Exam Tips:
a) तीनों चरणों को स्पष्ट रूप से संख्यांकित करके लिखें।
b) धीमे चरण (Rate determining step) को इंगित करें।
c) तीर के निशानों से इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण को समझाएं।
Question 7.20: निम्नलिखित परिवर्तनों को किस प्रकार किया जा सकता है?
(i) प्रोपीन \( \rightarrow \) प्रोपेन-\( 2 \)-ऑल
(ii) बेन्जीन क्लोराइड \( \rightarrow \) बेन्जिल एल्कोहॉल
(iii) एथिल मैग्नीशियम क्लोराइड \( \rightarrow \) प्रोपेन-\( 1 \)-ऑल
(iv) मेथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड \( \rightarrow \) \( 2 \)-मे틸प्रोपेन-\( 2 \)-ऑल
Answer:
(i) अम्ल उत्प्रेरक की उपस्थिति में प्रोपीन को पानी के साथ अभिकृत करने पर मार्कोनीकॉफ़ नियम के अनुसार प्रोपेन-\( 2 \)-ऑल प्राप्त होता है:
\( \text{CH}_3-\text{CH}=\text{CH}_2 + \text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{H}^+} \text{CH}_3-\text{CH}(\text{OH})-\text{CH}_3 \)
(ii) जब बेन्जिल क्लोराइड को \( \text{NaOH} \) के साथ उपचारित किया जाता है तो नाभिकरागी प्रतिस्थापन द्वारा बेन्जिल एल्कोहॉल बनता है:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_2\text{Cl} + \text{NaOH} \longrightarrow \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_2\text{OH} + \text{NaCl} \)
(iii) एथिल मैग्नीशियम क्लोराइड की मेथेनल (\( \text{HCHO} \)) के साथ अभिक्रिया और तत्पश्चात जलअपघटन कराने पर प्रोपेन-\( 1 \)-ऑल बनता है:
\( \text{HCHO} + \text{C}_2\text{H}_5\text{MgCl} \longrightarrow \text{Adduct} \xrightarrow{\text{H}_2\text{O}} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{OH} + \text{Mg}(\text{OH})\text{Cl} \)
(iv) मेथिल मैग्नीशियम ब्रोमाइड की प्रोपेनोन (ऐसीटोन) के साथ अभिक्रिया और जलअपघटन से \( 2 \)-मेथिलप्रोपेन-\( 2 \)-ऑल प्राप्त होता है:
\( (\text{CH}_3)_2\text{CO} + \text{CH}_3\text{MgBr} \longrightarrow \text{Adduct} \xrightarrow{\text{H}_2\text{O}} (\text{CH}_3)_3\text{COH} + \text{Mg}(\text{OH})\text{Br} \)
मुख्य बिंदु:
• ग्रिग्नार्ड अभिकर्मक (\( \text{RMgX} \)) का उपयोग नए \( \text{C-C} \) बंध बनाने और विभिन्न एल्कोहॉल प्राप्त करने में होता है।
• मेथेनल के साथ \( 1^\circ \) एल्कोहॉल, अन्य ऐल्डिहाइड के साथ \( 2^\circ \), और कीटोन के साथ \( 3^\circ \) एल्कोहॉल बनते हैं।
• एल्कीन का जलयोजन मार्कोनीकॉफ़ के नियम का पालन करता है।
आम गलतियाँ:
• ग्रिग्नार्ड अभिक्रिया में जलअपघटन का चरण लिखना भूल जाना।
• अभिकर्मकों के रूप में गलत ऐल्डिहाइड या कीटोन चुनना।
Exam Tips:
a) सभी चार परिवर्तनों के लिए स्पष्ट रासायनिक समीकरण दें।
b) ग्रिग्नार्ड अभिक्रिया में मध्यवर्ती योगज उत्पाद (Adduct) को दर्शाएं।
c) आवश्यक उत्प्रेरक और विलायक (शुष्क ईथर आदि) का उल्लेख करें।
Question 7.21: निम्नलिखित अभिक्रियाओं में प्रयुक्त अभिकर्मकों के नाम बताइए:
(i) प्राथमिक एल्कोहॉल का कार्बोक्सिलिक अम्ल में ऑक्सीकरण
(ii) प्राथमिक एल्कोहॉल का ऐल्डिहाइड में ऑक्सीकरण
(iii) फीनॉल का \( 2, 4, 6 \)-ट्राइब्रोमोफीनॉल में ब्रोमीनीकरण
(iv) बेन्जिल एल्कोहॉल से बेन्जोइक अम्ल
(v) प्रोपेन-\( 2 \)-ऑल का प्रोपेन में निर्जलन
(vi) ब्यूटेन-\( 2 \)-ऑन से ब्यूटेन-\( 2 \)-ऑल
Answer:
प्रयुक्त अभिकर्मक निम्नलिखित हैं:
(i) अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट (\( \text{KMnO}_4 \) या \( \text{CrO}_3 \) या जलीय \( \text{HNO}_3 \))
(ii) पाइरिडिनियम क्लोरोक्रोमेट (PCC)
(iii) ब्रोमीन जल (\( \text{Br}_2/\text{H}_2\text{O} \))
(iv) अम्लीय पोटैशियम परमैंगनेट (\( \text{KMnO}_4 \)) या क्रोमिक एनहाइड्राइड
(v) \( 85\% \) फॉस्फोरिक अम्ल (\( \text{H}_3\text{PO}_4 \)) या सांद्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) (\( \Delta \))
(vi) \( \text{NaBH}_4 \) या \( \text{LiAlH}_4 \)
मुख्य बिंदु:
• PCC प्राथमिक एल्कोहॉल को केवल ऐल्डिहाइड तक ऑक्सीकृत करता है (आगे अम्ल नहीं बनने देता)।
• \( \text{Br}_2 \) जल फीनॉल की सक्रिय वलय के कारण तुरंत ट्राइब्रोमो व्युत्पन्न बनाता है।
• कीटोन का अपचयन करने पर द्वितीयक एल्कोहॉल प्राप्त होते हैं।
आम गलतियाँ:
• प्राथमिक एल्कोहॉल के ऐल्डिहाइड में ऑक्सीकरण के लिए क्षारीय \( \text{KMnO}_4 \) लिख देना (जिससे अम्ल बन जाता है)।
• अपचायक और ऑक्सीकारक अभिकर्मकों में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) अभिकर्मकों के सही रासायनिक नाम और सूत्र याद रखें।
b) चुनिंदा ऑक्सीकरण के लिए विशिष्ट अभिकर्मक (जैसे PCC) का नाम प्राथमिकता से दें।
c) प्रश्नों के अनुसार केवल अभिकर्मक का नाम या संक्षिप्त रासायनिक सूत्र लिखें।
Question 7.22: कारण बताइए कि मेथॉक्सीमेथेन की तुलना में एथनॉल का क्वथनांक उच्च क्यों होता है?
Answer:
एथनॉल (\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{OH} \)) के अणुओं के बीच अंतराआण्विक हाइड्रोजन बंध पाया जाता है, जबकि मेथॉक्सीमेथेन (\( \text{CH}_3-\text{O}-\text{CH}_3 \)) के अणुओं में हाइड्रोजन बंध नहीं होता है (क्योंकि इसमें ध्रुवीय \( \text{O-H} \) बंध अनुपस्थित है)।
हाइड्रोजन बंध को तोड़ने के लिए अतिरिक्त ऊष्मीय ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
इस कारण से, एथनॉल का क्वथनांक मेथॉक्सीमेथेन की तुलना में काफी अधिक होता है।
मुख्य बिंदु:
• एथनॉल एक एल्कोहॉल है जिसमें \( -\text{OH} \) समूह के कारण सशक्त हाइड्रोजन बॉन्डिंग होती है।
• मेथॉक्सीमेथेन एक ईथर है जिसमें केवल द्विध्रुव-द्विध्रुव आकर्षण बल होते हैं।
• समान आण्विक द्रव्यमान वाले होने के बावजूद ईथर का क्वथनांक एल्कोहॉल से बहुत कम होता है।
आम गलतियाँ:
• ईथर में भी हाइड्रोजन बंध होने की गलत कल्पना करना।
• आण्विक भार समान होने के प्रभाव को गलत समझना।
Exam Tips:
a) उत्तर में 'अंतराआण्विक हाइड्रोजन आबंधन' का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) दोनों के रासायनिक सूत्र लिखकर दिखाएं कि किसमें \( \text{O-H} \) बंध है।
c) क्वथनांक के अंतर का मुख्य आधार अंतराआण्विक बल बताएं।
Question 7.23: निम्नलिखित ईथरों के आईूपीयसी IUPAC नाम दीजिए:
(i) \( \text{C}_2\text{H}_5\text{OCH}_2-\text{CH}-\text{CH}_3 \) (नीचे \( \text{CH}_3 \) जुड़ा है)
(ii) \( \text{CH}_3\text{OCH}_2\text{CH}_2\text{Cl} \)
(iii) \( \text{O}_2\text{N}-\text{C}_6\text{H}_4-\text{OCH}_3(p) \)
(iv) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{OCH}_3 \)
(v) साइक्लोहेक्सेन वलय पर \( -\text{OCH}_3 \) और दो मेथिल समूह
(vi) बेन्जीन वलय पर \( -\text{OC}_2\text{H}_5 \) समूह
Answer:
दिए गए ईथरों के आईूपीयसी (IUPAC) नाम निम्नलिखित हैं:
(i) \( 1 \)-एथॉक्सी-\( 2 \)-मेथिलप्रोपेन
(ii) \( 2 \)-क्लोरो-\( 1 \)-मेथॉक्सीएथेन
(iii) \( 4 \)-नाइट्रोएनिसोल (या \( 1 \)-मेथॉक्सी-\( 4 \)-नाइट्रोबेन्जीन)
(iv) \( 1 \)-मेथॉक्सीप्रोपेन
(v) \( 1 \)-एथॉक्सी-\( 4, 4 \)-डाइमेथिलसाइक्लोहेक्सेन (या उपयुक्त वलय व्युत्पन्न)
(vi) एथॉक्सीबेन्जीन (एनिसोल का सजातीय)
मुख्य बिंदु:
• ईथर का नामकरण करते समय छोटे ऐल्किल समूह को एल्कोक्सी पूर्वलग्न (Alkoxy prefix) और बड़े समूह को मूल हाइड्रोकार्बन माना जाता है।
• संख्यांकन उस दिशा से किया जाता है जिससे एल्कोक्सी समूह या प्रतिस्थापी को न्यूनतम अंक मिले।
• aromatic ईथर में ऐरोमैटिक वलय मुख्य जनक होती है।
आम गलतियाँ:
• लंबी कार्बन श्रृंखला चुनने में गलती करना।
• एल्कोक्सी और हैलो प्रतिस्थापियों के वर्णमाला क्रम (Alphabetical order) का पालन न करना।
Exam Tips:
a) संरचना को देखकर मूल एल्केन श्रृंखला को पहचानें।
b) प्राथमिकता के आधार पर लोकेन्ट (अंक) तय करें।
c) नाम लिखते समय सही स्पेलिंग और हाइफन का ध्यान रखें।
Question 7.24: निम्नलिखित ईथरों को विलियमसन संश्लेषण द्वारा बनाने के लिए अभिकर्मकों के नाम और समीकरण लिखिए:
(i) \( 1 \)-प्रोपॉक्सीप्रोपेन
(ii) एथॉक्सीबेन्जीन
(iii) \( 2 \)-मेथॉक्सी-\( 2 \)-मेथिलप्रोपेन
(iv) \( 1 \)-मेथॉक्सीएथेन
Answer:
विलियमसन संश्लेषण के लिए प्रयुक्त अभिकर्मक और समीकरण:
(i) \( 1 \)-प्रोपॉक्सीप्रोपेन: सोडियम प्रोपॉक्साइड + \( 1 \)-ब्रोमोप्रोपेन
\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{ONa} + \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{Br} \longrightarrow \text{C}_2\text{H}_5\text{CH}_2-\text{O}-\text{CH}_2\text{C}_2\text{H}_5 + \text{NaBr} \)
(ii) एथॉक्सीबेन्जीन: सोडियम फीनऑक्साइड + ब्रोमोएथेन
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{ONa} + \text{CH}_3\text{CH}_2\text{Br} \longrightarrow \text{C}_6\text{H}_5-\text{O}-\text{CH}_2\text{CH}_3 + \text{NaBr} \)
(iii) \( 2 \)-मेथॉक्सी-\( 2 \)-मेथिलप्रोपेन: सोडियम मेथोक्साइड + \( 2 \)-क्लोरो-\( 2 \)-मेथिलप्रोपेन (तृतीयक ब्यूटिल क्लोराइड)
\( (\text{CH}_3)_3\text{C-Cl} + \text{CH}_3\text{ONa} \longrightarrow (\text{CH}_3)_3\text{C-O-CH}_3 + \text{NaCl} \)
(iv) \( 1 \)-मेथॉक्सीएथेन: सोडियम एथोक्साइड + क्लोरोमेथेन
\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{ONa} + \text{CH}_3\text{Br} \longrightarrow \text{CH}_3-\text{O}-\text{CH}_2\text{CH}_3 + \text{NaBr} \)
मुख्य बिंदु:
• विलियमसन संश्लेषण \( \text{SN}^2 \) क्रियाविधि पर आधारित है।
• इस विधि में प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड का प्रयोग सर्वोत्तम होता है।
• असम्मित ईथर बनाते समय सोडियम एल्कोक्साइड और ऐल्किल हैलाइड का चुनाव सावधानी से करना चाहिए।
आम गलतियाँ:
• तृतीयक हैलाइड के साथ विलियमसन ईथर संश्लेषण कराने की कोशिश करना (जिससे ईथर की बजाय ऐल्कीन बनती है)।
• अभिकर्मकों के नाम और सूत्र गलत लिखना।
Exam Tips:
a) ऐल्किल हैलाइड को हमेशा प्राथमिक (Primary) रखने का प्रयास करें।
b) अभिक्रिया में बनने वाले सोडियम हैलाइड (\( \text{NaBr} \) या \( \text{NaCl} \)) को उपउत्पाद के रूप में दिखाएं।
c) अभिकर्मकों के नाम समीकरण के नीचे स्पष्ट लिखें।
Question 7.25: कुछ विशेष प्रकार के ईथरों का विलियमसन संश्लेषण द्वारा बनाने की सीमाओं को उदाहरणों से समझाइए।
Answer:
विलियमसन संश्लेषण की मुख्य सीमा यह है कि यह विधि केवल प्राथमिक ऐल्किल हैलाइडों के साथ उत्तम परिणाम देती है।
यदि हम प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड के स्थान पर द्वितीयक या तृतीयक ऐल्किल हैलाइड का प्रयोग करते हैं, तो प्रतिस्थापन (\( \text{SN}^2 \)) के स्थान पर विलोपन अभिक्रिया (Elimination reaction) प्रमुख हो जाती है।
परिणामस्वरूप, ईथर के स्थान पर मुख्य उत्पाद के रूप में ऐल्कीन का निर्माण होता है।
उदाहरण: तृतीयक ब्यूटिल क्लोराइड की सोडियम एथोक्साइड के साथ अभिक्रिया कराने पर ईथर की बजाय \( 2 \)-मेथिलप्रोपेन (ऐल्कीन) बनती है।
मुख्य बिंदु:
• तृतीयक हैलाइड steric hindrance (त्रिबिम बाधा) के कारण \( \text{SN}^2 \) आक्रमण में बाधा उत्पन्न करते हैं।
• मजबूत क्षार (एल्कोक्साइड आयन) हैलाइड से \( \beta \)-हाइड्रोजन खींचकर ऐल्कीन बना देता है।
• सफल ईथर संश्लेषण के लिए ऐल्किल हैलाइड \( 1^\circ \) होना चाहिए और एल्कोक्साइड \( 2^\circ \) या \( 3^\circ \) हो सकता है।
आम गलतियाँ:
• यह मान लेना कि किसी भी हैलाइड और एल्कोक्साइड से ईथर बनाया जा सकता है।
• विलोपन और प्रतिस्थापन प्रतिस्पर्धा को न समझना।
Exam Tips:
a) 'त्रिबिम बाधा' (Steric hindrance) और 'विलोपन अभिक्रिया' (Elimination reaction) शब्दों का प्रयोग करें।
b) तृतीयक हैलाइड का एक उदाहरण देकर समझाएं कि क्यों ऐल्कीन बनती है।
c) सही संयोजन (जैसे तृतीयक एल्कोक्साइड + प्राथमिक हैलाइड) का नियम बताएं।
Question 7.26: प्रोपेन-\( 1 \)-ऑल से \( 1 \)-प्रोपॉक्सीप्रोपेन को किस प्रकार बनाया जाता है? इस अभिक्रिया की क्रियाविधि लिखिए।
Answer:
\( 1 \)-प्रोपॉक्सीप्रोपेन को प्रोपेन-\( 1 \)-ऑल के अम्लीय निर्जलन द्वारा संश्लेषित किया जाता है। प्रोपेन-\( 1 \)-ऑल प्रोटिक अम्ल (जैसे \( \text{H}_2\text{SO}_4 \)) की उपस्थिति में \( 413\text{ K \) पर निर्जलीकरण से \( 1 \)-प्रोपॉक्सीप्रोपेन देता है।
रासायनिक समीकरण:
\( 2\text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{OH} \xrightarrow{\text{H}^+, 413\text{ K}} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2-\text{O}-\text{CH}_2\text{CH}_2\text{CH}_3 + \text{H}_2\text{O} \)
क्रियाविधि के चरण:
चरण 1 (प्रोटोनन): प्रोपेन-\( 1 \)-ऑल प्रोटॉन ग्रहण करके प्रोटॉनीकृत एल्कोहॉल बनाता है।
चरण 2 (नाभिकरागी हमला): एक अन्य एल्कोहॉल अणु प्रोटॉनीकृत एल्कोहॉल पर \( \text{SN}^2 \) आक्रमण करता है।
चरण 3 (अवक्षेपण/डीप्रोटोनन): प्रोटॉन के निष्कासन से ईथर प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• यह एल्कोहॉल के तापीय निर्जलन द्वारा ईथर बनाने की द्वि-आण्विक (\( \text{SN}^2 \)) प्रक्रिया है।
• इसमें तापमान का नियंत्रण बहुत महत्वपूर्ण होता है (\( 413\text{ K} \) पर ईथर, जबकि \( 443\text{ K} \) पर ऐल्कीन बनती है)।
• यह सममित ईथर बनाने की एक अच्छी विधि है।
आम गलतियाँ:
• तापमान का सही मान न लिखना।
• क्रियाविधि में कार्बोकैटायन बनाकर इसे \( E1 \) या \( S_N1 \) समझ लेना (यह \( S_N2 \) है)।
Exam Tips:
a) तापमान \( 413\text{ K} \) को तीर के ऊपर अवश्य दर्शाएं।
b) तीनों क्रियाविधि चरणों को क्रमानुसार लिखें।
c) यह स्पष्ट करें कि यह एक सममित ईथर के संश्लेषण की विधि है।
Question 7.27: द्वितीयक अथवा तृतीयक एल्कोहॉलों के अम्लीय निर्जलन द्वारा ईथरकों को बनाने की विधि उपयुक्त नहीं है। कारण बताइए।
Answer:
द्वितीयक अथवा तृतीयक एल्कोहॉलों के अम्लीय निर्जलन द्वारा ईथर का निर्माण इसलिए उपयुक्त नहीं है क्योंकि इस विधि में द्वि-आण्विक क्रियाविधि (\( \text{SN}^2 \)) के स्थान पर विलोपन अभिक्रिया प्रभावी हो जाती है।
द्वितीयक व तृतीयक एल्कोहॉलों में त्रिबिम बाधा (Steric hindrance) के कारण दूसरा एल्कोहॉल अणु नाभिकरागी आक्रमण नहीं कर पाता।
इसके फलस्वरूप, उन्मूलन (Elimination) प्रतिस्थापन पर हावी हो जाता है और ईथर के स्थान पर मुख्य रूप से ऐल्कीन बनती हैं।
मुख्य बिंदु:
• अम्लीय निर्जलन में \( 2^\circ \) और \( 3^\circ \) एल्कोहॉल आसानी से स्थायी कार्बोकैटायन बनाते हैं।
• कार्बोकैटायन बनने के बाद ऐल्कीन (विलोपन उत्पाद) बनना thermodynamically अधिक अनुकूल होता है।
• ईथर बनाने के लिए विलियमसन संश्लेषण या प्राथमिक एल्कोहॉल का निर्जलन बेहतर है।
आम गलतियाँ:
• यह सोचना कि सभी एल्कोहॉल निर्जलन पर ईथर देते हैं।
• तापमान और एल्कोहॉल की श्रेणी (Degree) के प्रभाव को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) उत्तर में 'त्रिबिम बाधा' और 'विलोपन अभिक्रिया' का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) कारण बताएं कि क्यों \( 2^\circ \) और \( 3^\circ \) एल्कोहॉल ईथर की बजाय ऐल्कीन बनाते हैं।
c) संतुलित तर्कों के साथ संक्षिप्त उत्तर लिखें।
Question 7.28: हाइड्रोजन आयोडाइड की निम्नलिखित के साथ अभिक्रिया के लिए समीकरण लिखिए:
(i) \( 1 \)-प्रोपॉक्सीप्रोपेन
(ii) मेथॉक्सीबेन्जीन तथा
(iii) बेन्जिल एथिल ईथर
Answer:
(i) \( 1 \)-प्रोपॉक्सीप्रोपेन की \( \text{HI} \) के साथ अभिक्रिया:
\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2-\text{O}-\text{CH}_2\text{CH}_2\text{CH}_3 + \text{HI} \xrightarrow{373\text{ K}} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{OH} + \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{I} \)
(ii) मेथॉक्सीबेन्जीन (एनिसोल) की \( \text{HI} \) के साथ अभिक्रिया:
\( \text{C}_6\text{H}_5-\text{O}-\text{CH}_3 + \text{HI} \longrightarrow \text{C}_6\text{H}_5\text{OH} \text{ (फीनॉल)} + \text{CH}_3\text{I} \text{ (आयोडीमेथेन)} \)
(iii) बेन्जिल एथिल ईथर की \( \text{HI} \) के साथ अभिक्रिया:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_2-\text{O}-\text{C}_2\text{H}_5 + \text{HI} \longrightarrow \text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_2\text{I} \text{ (बेन्जिल आयोडाइड)} + \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} \text{ (एथनॉल)} \)
मुख्य बिंदु:
• सममित ईथर \( \text{HI} \) के साथ एक एल्कोहॉल और एक ऐल्किल हैलाइड देते हैं।
• ऐरिल एल्किल ईथर (जैसे एनिसोल) के विदलन में हमेशा फीनॉल और ऐल्किल आयोडाइड बनता है क्योंकि \( \text{C}_{\text{aryl}}-\text{O} \) बंध में आंशिक द्विबंध गुण होता है।
• बेन्जिल ईथर में स्थायी बेन्जिल कार्बोकैटायन बनने के कारण बेन्जिल आयोडाइड मुख्य रूप से बनता है।
आम गलतियाँ:
• एनिसोल के विदलन में आयोडोबेंजीन और मेथनॉल बना देना (जो कि गलत है)।
• \( \text{HI} \) की मात्रा और तापमान की स्थिति का ध्यान न रखना।
Exam Tips:
a) तीनों अभिक्रियाओं के सही संतुलित समीकरण लिखें।
b) उत्पाद के रूप में बनने वाले यौगिकों के नीचे उनके नाम लिखें।
c) एनिसोल वाले मामले में विशेष रूप से ध्यान रखें कि \( \text{CH}_3\text{I} \) और फीनॉल ही बनते हैं।
Question 7.29: ऐरिल ऐल्किल ईथर में निम्न तथ्यों की व्याख्या कीजिए:
(i) ऐल्किॉक्सी समूह बेन्जीन वलय को इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन के प्रति सक्रिय करता है, तथा
(ii) यह प्रवेश करने वाले प्रतिस्थापियों को बेन्जीन वलय की ऑर्थो एवं पैरा स्थितियों की ओर निर्देशित करता है।
Answer:
(i) ऐरिल ऐल्किल ईथर (जैसे एनिसोल) में ऐल्किॉक्सी समूह (\( -\text{OR} \)) ऑक्सीजन पर उपस्थित एकांकी युग्म (Lone pair) के कारण +M प्रभाव प्रदर्शित करता है। इसके इलेक्ट्रॉन-दान करने के स्वभाव के कारण बेन्जीन वलय में इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ जाता है, जिससे वलय इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन के प्रति सक्रिय हो जाती है।
(ii) अनुनाद संरचनाओं से यह स्पष्ट होता है कि \( -\text{OR} \) समूह के प्रभाव से ऑर्थो (\( o \)) और पैरा (\( p \)) स्थितियों पर इलेक्ट्रॉन घनत्व सबसे अधिक हो जाता है। अतः आने वाला इलेक्ट्रोफाइल मुख्य रूप से इन्हीं स्थितियों पर आक्रमण करता है।
मुख्य बिंदु:
• \( -\text{OR} \) समूह का +M प्रभाव वलय में इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाता है।
• अनुनाद के कारण ऋण आवेश आर्थो और पैरा पोजीशन पर घूमता है।
• यह समूह ऑर्थो-पैरा निर्देशक होता है।
आम गलतियाँ:
• अनुनाद संरचनाओं में तीर के चिह्नों को गलत दिशा में लगाना।
• केवल -I प्रभाव को प्राथमिकता देना और +M प्रभाव को भूल जाना।
Exam Tips:
a) अनुनाद संरचनाओं (Resonance structures) के माध्यम से उत्तर की पुष्टि करें।
b) '+M प्रभाव' शब्द का स्पष्ट उल्लेख करें।
c) ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ने के कारण को समझाएं।
Question 7.30: मेथॉक्सीमीथेन की HI के साथ अभिक्रिया की क्रियाविधि लिखिए।
Answer:
मेथॉक्सीमीथेन (\( \text{CH}_3-\text{O}-\text{CH}_3 \)) की \( \text{HI} \) के साथ अभिक्रिया के चरण निम्नलिखित हैं:
चरण 1 (प्रोटोनन): ईथर का ऑक्सीजन परमाणु हाइड्रोजन आयोडाइड से प्रोटॉन ग्रहण करके प्रोटॉनीकृत ईथर (ऑक्सोनियम आयन) बनाता है:
\( \text{CH}_3-\text{O}-\text{CH}_3 + \text{H-I} \rightleftharpoons \text{CH}_3-\text{O}^+(\text{H})-\text{CH}_3 + \text{I}^- \)
चरण 2 (\( \text{I}^- \) का नाभिकरागी प्रतिस्थापन): आयोडाइड आयन प्रोटॉनीकृत ईथर के एक कार्बन पर \( \text{SN}^2 \) आक्रमण करता है जिससे मेथनॉल और योगात्मक रूप से मेथिल आयोडाइड बनता है:
\( \text{I}^- + \text{CH}_3-\text{O}^+(\text{H})-\text{CH}_3 \longrightarrow \text{CH}_3-\text{I} + \text{CH}_3-\text{OH} \)
चरण 3: यदि \( \text{HI} \) आधिक्य में है, तो बना हुआ मेथनॉल पुनः \( \text{HI} \) से अभिक्रिया करके दूसरा अणु मेथिल आयोडाइड और जल बनाता है:
\( \text{CH}_3-\text{OH} + \text{HI} \longrightarrow \text{CH}_3-\text{I} + \text{H}_2\text{O} \)
मुख्य बिंदु:
• यह अभिक्रिया ईथर के विदलन की मानक क्रियाविधि है।
• प्रथम चरण में प्रोटोनन से ईथर का ऑक्सीजन अच्छा लिविंग ग्रुप बनता है।
• द्वितीय चरण \( \text{SN}^2 \) तंत्र के माध्यम से आगे बढ़ता है।
आम गलतियाँ:
• \( \text{HI} \) की अधिक मात्रा होने पर भी केवल एक उत्पाद (मेथनॉल) लिखकर छोड़ देना।
• प्रोटॉनीकृत मध्यवर्ती चरण को न दिखाना।
Exam Tips:
a) तीनों चरणों (प्रोटोनन, नाभिकरागी हमला, और आधिक्य HI की अभिक्रिया) को क्रमबद्ध लिखें।
b) \( \text{SN}^2 \) आक्रमण को तीर द्वारा दर्शाएं।
c) संतुलित रासायनिक समीकरणों का प्रयोग करें।
Question 7.31: निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए समीकरण लिखिए:
(i) फ्रीडेल-काफ्रट् अभिक्रिया-एनिसोल का ऐल्कीलन
(ii) एनिसोल का नाइट्रीकरण
(iii) ऐथेनॉيك अम्ल माध्यम में एनिसोल का ब्रोमीनीकरण
(iv) एनिसोल का फ्रीडेल-काफ्रट् ऐसीटिलीकन।
Answer:
(i) फ्रीडेल-क्राफ्ट्स ऐल्कीलन:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{OCH}_3 + \text{CH}_3\text{Cl} \xrightarrow{\text{Anhy. AlCl}_3, \text{CS}_2} 4\text{-मेथॉक्सीटोल्यूइन (मुख्य)} + 2\text{-मेथॉक्सीटोल्यूइन (अल्प)} \)
(ii) नाइट्रीकरण:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{OCH}_3 + \text{HNO}_3/\text{H}_2\text{SO}_4 \longrightarrow 4\text{-नाइट्रोएनिसोल (मुख्य)} + 2\text{-नाइट्रोएनिसोल (अल्प)} \)
(iii) ब्रोमीनीकरण (एथेनोइक अम्ल में):
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{OCH}_3 + \text{Br}_2 \xrightarrow{\text{CH}_3\text{COOH}} 4\text{-ब्रोमोएनिसोल (मुख्य)} + 2\text{-ब्रोमोएनिसोल (अल्प)} \)
(iv) फ्रीडेल-क्राफ्ट्स ऐसीटिलीकन:
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{OCH}_3 + \text{CH}_3\text{COCl} \xrightarrow{\text{Anhy. AlCl}_3} 4\text{-मेथॉक्सीएसीटोफीनोन (मुख्य)} + 2\text{-मेथॉक्सीएसीटोफीनोन (अल्प)} \)
मुख्य बिंदु:
• एनिसोल का \( -\text{OCH}_3 \) समूह ऑर्थो-पैरा निर्देशक होता है।
• सभी इलेक्ट्रोफिलिक प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में पैरा-उत्पाद मुख्य (major) होता है क्योंकि इसमें त्रिबिम बाधा कम होती है।
• निर्जल \( \text{AlCl}_3 \) लुईस अम्ल उत्प्रेरक का कार्य करता है।
आम गलतियाँ:
• मुख्य उत्पाद के रूप में ऑर्थो-समावयवी को लिख देना।
• उत्प्रेरक (जैसे निर्जल \( \text{AlCl}_3 \)) का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) चारों अभिक्रियाओं के समीकरण अलग-अलग साफ-सुथरे लिखें।
b) मुख्य और अल्प (Major and Minor) उत्पादों का नामकरण सही से करें।
c) अभिकर्मकों की परिस्थितियाँ तीर के ऊपर अवश्य दिखाएं।
Question 7.32: उपयुक्त ऐल्कीनों से आप निम्नलिखित ऐल्कोहॉलों का संश्लेषण कैसे करेंगे?
(i) \( 1 \)-मेथिलसाइक्लोहेक्सानॉल
(ii) \( 4 \)-मेथिलहेप्टेन-\( 4 \)-ऑल
(iii) पेंटेन-\( 2 \)-ऑल
(iv) \( 2 \)-साइक्लोहेक्सिलब्यूटेन-\( 2 \)-ऑल
Answer:
दिए गए एल्कोहॉलों को उपयुक्त ऐल्कीन के अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन (Markownikoff's hydration) द्वारा संश्लेषित किया जा सकता है:
(i) \( 1 \)-मेथिलसाइक्लोहेक्सीन का अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन:
\( 1\text{-मेथिलसाइक्लोहेक्सीन} + \text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{H}^+} 1\text{-मेथिलसाइक्लोहेक्सानॉल} \)
(ii) \( 4 \)-मेथिलहेप्ट-\( 3 \)-ईन (या उपयुक्त आइसोमर) का जलयोजन:
\( \text{Alkene} + \text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{H}^+} 4\text{-मेथिलहेप्टेन-\( 4 \)-ऑल} \)
(iii) पेंट-\( 2 \)-ईन का अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन (जिसमें पेंटेन-\( 2 \)-ऑल मुख्य उत्पाद बनता है):
\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}=\text{CHCH}_3 + \text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{H}^+} \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{CH}(\text{OH})\text{CH}_3 \)
(iv) \( 2 \)-साइक्लोहेक्सिलबुट-\( 2 \)-ईन का जलयोजन:
\( \text{Cyclohexyl-butene} + \text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{H}^+} 2\text{-साइक्लोहेक्सिलब्यूटेन-\( 2 \)-ऑल} \)
मुख्य बिंदु:
• अम्ल-उत्प्रेरित जलयोजन मारकोनीकॉफ़ नियम का पालन करता है।
• \( -\text{OH} \) समूह उस कार्बन पर जुड़ता है जिसके पास हाइड्रोजन कम होते हैं (अधिक प्रतिस्थापित कार्बन पर)।
• तृतीयक एल्कोहॉल बनाने के लिए अत्यधिक शाखित ऐल्कीन का चयन किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• ऐल्कीन चुनते समय गलत द्विबंध स्थिति का चयन करना।
• मारकोनीकॉफ़ नियम के विपरीत उत्पाद बना देना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक एल्कोहॉल की संरचना से ठीक पहले की उपयुक्त ऐल्कीन की पहचान करें।
b) तीर के ऊपर \( \text{H}^+ \) या तनु \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) लिखें।
c) यह सुनिश्चित करें कि \( -\text{OH} \) सही कार्बन पर जुड़ा हो।
Question 7.33: \( 3 \)-मेथิลब्यूटेन-\( 2 \)-ऑल को \( \text{HBr} \) से अभिकृत कराने पर निम्नलिखित अभिक्रिया होती है:
\( (\text{CH}_3)_2\text{CH}-\text{CH}(\text{OH})-\text{CH}_3 + \text{HBr} \longrightarrow (\text{CH}_3)_2\text{C}(\text{Br})-\text{CH}_2-\text{CH}_3 \)
इस अभिक्रिया की क्रियाविधि दीजिए।
(संकेत-चरण II में प्राप्त द्वितीयक कार्बोकैटायन हाइड्राइड आयन विच्छलन के कारण पुनर्विन्यासित होकर स्थायी तृतीयक कार्बोकैटायन बनाते हैं।)
Answer:
दी गई अभिक्रिया की क्रियाविधि निम्नलिखित चरणों में पूर्ण होती है:
चरण 1 (प्रोटोनन): एल्कोहॉल का \( -\text{OH} \) समूह प्रोटॉन ग्रहण करके प्रोटॉनीकृत एल्कोहॉल बनाता है, जो जल का अणु त्यागकर द्वितीयक कार्बोकैटायन देता है:
\( (\text{CH}_3)_2\text{CH}-\text{CH}(\text{OH})-\text{CH}_3 + \text{H}^+ \rightleftharpoons (\text{CH}_3)_2\text{CH}-\text{CH}^+-\text{CH}_3 + \text{H}_2\text{O} \)
चरण 2 (कार्बोकैटायन का पुनर्विन्यास): \( 2^\circ \) कार्बोकैटायन अधिक स्थायी \( 3^\circ \) कार्बोकैटायन में बदलने के लिए 1,2-हाइड्राइड शिफ्ट (Hydride shift) से गुजरता है:
\( (\text{CH}_3)_2\text{CH}-\text{CH}^+-\text{CH}_3 \xrightarrow{1,2\text{-hydride shift}} (\text{CH}_3)_2\text{C}^+-\text{CH}_2-\text{CH}_3 \) (\( 3^\circ \) कार्बोकैटायन, अधिक स्थिर)
चरण 3 (नाभिकरागी आक्रमण): ब्रोमाइड आयन (\( \text{Br}^- \)) इस तृतीयक कार्बोकैटायन पर आक्रमण करके मुख्य उत्पाद \( 2 \)-ब्रोमो-\( 2 \)-मेथिलब्यूटेन बनाता है:
\( (\text{CH}_3)_2\text{C}^+-\text{CH}_2\text{CH}_3 + \text{Br}^- \longrightarrow (\text{CH}_3)_2\text{C}(\text{Br})-\text{CH}_2\text{CH}_3 \)
मुख्य बिंदु:
• कम स्थायी कार्बोकैटायन पुनर्विन्यास (Rearrangement) के माध्यम से अधिक स्थायी कार्बोकैटायन में परिवर्तित होते हैं।
• \( 1^\circ < 2^\circ < 3^\circ \) कार्बोकैटायन का स्थायित्व क्रम होता है।
• हाइड्राइड या मेथिल शिफ्ट द्वारा यह पुनर्विन्यास संपन्न होता है।
आम गलतियाँ:
• पुनर्विन्यास चरण को नजरअंदाज करना और सीधे \( 2^\circ \) कार्बोकैटायन पर \( \text{Br}^- \) जोड़ देना।
• 1,2-हाइड्राइड शिफ्ट की दिशा गलत दिखाना।
Exam Tips:
a) क्रियाविधि के तीनों चरणों (प्रोटोनन व \( 2^\circ \) कार्बोकैटायन, 1,2-हाइड्राइड शिफ्ट से \( 3^\circ \) बनना, और \( \text{Br}^- \) का आक्रमण) को अलग-अलग समझाएं।
b) कार्बोकैटायन के स्थायित्व (\( 3^\circ > 2^\circ \)) का कारण स्पष्ट लिखें।
c) घुमावदार तीरों का सही प्रयोग करें।
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