NCERT Solutions Class 12 Chemistry Chapter 07 Alcohols Phenols and Ethers (एल्कोहल फिनॉल एवं ईथर) Intext Questions in Hindi

Solutions for Class 12 Chemistry: Chapter 07 एल्कोहल फिनॉल एवं ईथर

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Practice Class 12 Chemistry Solutions: Chapter 07 एल्कोहल फिनॉल एवं ईथर

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Question 7.1: निम्नलिखित को प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक एल्कोहॉलों में वर्गीकृत कीजिए-
(i) \( \text{CH}_3 - \text{C}(\text{CH}_3)_2 - \text{CH}_2\text{OH} \)
(ii) \( \text{H}_2\text{C} = \text{CH} - \text{CH}_2\text{OH} \)
(iii) \( \text{CH}_3 - \text{CH}_2 - \text{CH}_2 - \text{OH} \)
(iv) \( \text{CH}_3 - \text{CH}(\text{OH}) - \text{CH}(\text{CH}_3)_2 \)
(v) 2-मेथिलसाइक्लोहेक्सेनॉल
(vi) \( \text{CH}_3 - \text{C}(\text{CH}_3)(\text{OH}) - \text{CH}_2 - \text{CH}_3 \)

Answer:

एल्कोहॉलों के वर्गीकरण के लिए उस कार्बन परमाणु की प्रकृति देखी जाती है जिससे \( -\text{OH} \) समूह जुड़ा होता है:
प्राथमिक एल्कोहॉल (1°) \( \rightarrow \) (i), (ii), (iii)
द्वितीयक एल्कोहॉल (2°) \( \rightarrow \) (iv), (v)
तृतीयक एल्कोहॉल (3°) \( \rightarrow \) (vi)

मुख्य बिंदु:

• प्राथमिक एल्कोहॉल में \( -\text{OH} \) समूह प्राथमिक कार्बन से जुड़ा होता है।
• द्वितीयक एल्कोहॉल में \( -\text{OH} \) समूह द्वितीयक कार्बन से जुड़ा होता है।
• तृतीयक एल्कोहॉल में \( -\text{OH} \) समूह तृतीयक कार्बन से जुड़ा होता है।

आम गलतियाँ:

• यौगिक की संरचना को बिना खोले सीधे वर्गीकरण करने का प्रयास करना।
• कार्बन की डिग्री पहचानते समय हाइड्रोजनों की संख्या से भ्रमित होना।
• डबल बॉन्ड (द्विआबंध) की उपस्थिति को प्राथमिकता देना।

Exam Tips:

a) संरचना सूत्र को हमेशा विस्तारित रूप में लिखकर \( -\text{OH} \) समूह से जुड़े कार्बन की डिग्री देखें।
b) साइक्लिक यौगिकों में भी कार्बन की संयोजकता और उससे जुड़े समूहों की संख्या की गणना सावधानी से करें।
c) वर्गीकरण के उत्तर को स्पष्ट रूप से श्रेणियों में विभाजित करके लिखें।

 

Question 7.2: उपर्युक्त उदाहरणों में से ऐलिलिक एल्कोहॉलों को पहचानिए।

Answer:

ऐलिलिक एल्कोहॉल वे यौगिक होते हैं जिनमें \( -\text{OH} \) समूह \( \text{sp}^3 \) संकरित कार्बन परमाणु से जुड़ा होता है जो कार्बन-कार्बन द्विआबंध (\( \text{C}=\text{C} \)) के अगले कार्बन (ऐलिलिक कार्बन) पर स्थित होता है।
दिए गए उदाहरणों में (ii) और (vi) ऐलिलिक एल्कोहॉल हैं।

मुख्य बिंदु:

• ऐलिलिक कार्बन द्विआबंधित कार्बन के ठीक बाद वाला कार्बन होता है।
• इस कार्बन का संकरण \( \text{sp}^3 \) होता है।
• यौगिक (ii) और (vi) इस परिभाषा को पूर्णतः संतुष्ट करते हैं।

आम गलतियाँ:

• सीधे द्विआबंधित कार्बन से जुड़े \( -\text{OH} \) समूह को ऐलिलिक मान लेना (जो कि वाइनिलिक होता है)।
• संरचना में छिपे द्विआबंधों को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) ऐलिलिक और वाइनिलिक एल्कोहॉल के अंतर को हमेशा स्पष्ट रखें।
b) \( \text{C}=\text{C} \) आबंध की स्थिति को मुख्य श्रृंखला में ध्यानपूर्वक देखें।
c) परिभाषा के अनुसार \( \text{sp}^3 \) संकरित कार्बन की पहचान करना परीक्षा में अंक दिलाता है।

 

Question 7.3: निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नामपद्धति से नाम दीजिए-
(i) \( \text{CH}_3 - \text{CH}_2 - \text{CH} - \text{CH} - \text{CH}_3 \) [नीचे क्रमशः \( -\text{CH}_2\text{OH} \) और \( -\text{CH}_2\text{Cl} \)]
(ii) \( \text{CH}_3 - \text{CH} - \text{CH}_2 - \text{CH} - \text{CH}_3 \) [नीचे क्रमशः \( -\text{OH} \) और \( -\text{CH}_2\text{OH} \)]
(iii) 3-ब्रोमोसाइक्लोहेक्सानेल
(iv) \( \text{H}_2\text{C} = \text{CH} - \text{CH}_2 - \text{CH}_2 - \text{CH}_3 \) [नीचे \( -\text{OH} \)]
(v) \( \text{CH}_3 - \text{C} = \text{C} - \text{CH}_3 \) [ऊपर \( -\text{CH}_3 \), नीचे \( -\text{OH} \) और \( -\text{Br} \)]

Answer:

(i) 3-क्लोरोमेथिल-2-आइसोप्रोपाइलपेंटेन-1-ऑल
(ii) 2, 5-डाइमेथिलहेक्सेन-1, 3-डाइऑल
(iii) 3-ब्रोमोसाइक्लोहेक्साेनॉल
(iv) हेक्स-1-ईन-3-ऑल (नोट: मुख्य श्रृंखला में कार्बनों की संख्या के अनुसार)
(v) 2-ब्रोमो-3-मेथिलबूट-2-ईन-1-ऑल

मुख्य बिंदु:

• IUPAC नामकरण में \( -\text{OH} \) समूह को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
• लंबी कार्बन श्रृंखला का चयन करते समय एल्कोहॉल कार्बन को न्यूनतम अंक मिलना चाहिए।
• प्रतिस्थापियों के नाम अंग्रेजी वर्णमाला के क्रमानुसार लिखे जाते हैं।

आम गलतियाँ:

• \( -\text{OH} \) समूह वाले कार्बन को न्यूनतम अंक न देना।
• प्रतिस्थापियों के क्रम में वर्णमाला नियम (Alphabetical order) का पालन न करना।
• द्विआबंध की स्थिति को सही नंबर न देना।

Exam Tips:

a) हमेशा सबसे लंबी श्रृंखला चुनें जिसमें मुख्य क्रियात्मक समूह शामिल हो।
b) नंबरिंग दोनों सिरों से करके देखें कि किस तरफ से क्रियात्मक समूह को कम अंक मिलते हैं।
c) हाइफन (-) और कॉमा (,) का उचित प्रयोग करें।

 

Question 7.4: दर्शाइए कि मेथेनल पर उपयुक्त ग्रीन्यार अभिकर्मक से अभिक्रिया द्वारा निम्नलिखित एल्कोहॉल कैसे विरचित किए जाते हैं?
(i) \( \text{CH}_3 - \text{CH} - \text{CH}_2\text{OH} \) (ऊपर \( -\text{CH}_3 \))
(ii) साइक्लोहेक्साइलमेथेनॉल

Answer:

(i) मेथेनल (\( \text{HCHO} \)) की अभिक्रिया आइसोप्रोपिलमैग्नीशियम ब्रोमाइड के साथ कराने पर और तत्पश्चात जल अपघटन करने पर 2-मेथिलप्रोपेन-1-ऑल प्राप्त होता है।
\( \text{HCHO} + (\text{CH}_3)_2\text{CHMgBr} \rightarrow (\text{CH}_3)_2\text{CH}-\text{CH}_2-\text{OMgBr} \)
\( (\text{CH}_3)_2\text{CH}-\text{CH}_2-\text{OMgBr} + \text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{H}^+} (\text{CH}_3)_2\text{CH}-\text{CH}_2\text{OH} + \text{Mg(OH)Br} \)

(ii) मेथेनल (\( \text{HCHO} \)) की अभिक्रिया साइक्लोहेक्साइलमैग्नीशियम ब्रोमाइड के साथ कराने और जल अपघटन करने पर साइक्लोहेक्साइलमेथेनॉल बनता है।
\( \text{HCHO} + \text{C}_6\text{H}_{11}\text{MgBr} \rightarrow \text{C}_6\text{H}_{11}\text{CH}_2\text{OMgBr} \)
\( \text{C}_6\text{H}_{11}\text{CH}_2\text{OMgBr} + \text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{H}^+} \text{C}_6\text{H}_{11}\text{CH}_2\text{OH} + \text{Mg(OH)Br} \)

मुख्य बिंदु:

• मेथेनल हमेशा प्राथमिक एल्कोहॉल देता है।
• ग्रीन्यार अभिकर्मक के प्रयोग से कार्बन श्रृंखला लंबी हो जाती है।
• अंतिम पद में अम्लीय जल अपघटन आवश्यक होता है।

आम गलतियाँ:

• ग्रीन्यार अभिकर्मक का गलत सूत्र लिखना।
• मध्यवर्ती यौगिक (Addition product) को दिखाए बिना सीधे उत्पाद लिखना।
• उपोत्पाद (By-product) के रूप में \( \text{Mg(OH)Br} \) न लिखना।

Exam Tips:

a) अभिक्रिया समीकरणों को हमेशा तीर के निशानों और अभिकर्मकों के साथ संतुलित रूप में लिखें।
b) ग्रीन्यार अभिकर्मक की ध्रुवीय प्रकृति (\( \text{R}^\delta^- - \text{Mg}^+\delta-\text{X} \)) को समझकर आक्रमण कराएं।
c) चरणों को स्पष्ट रूप से (योग और जल अपघटन) दर्शाएं।

 

Question 7.5: निम्नलिखित अभिक्रिया के उत्पादों की संरचना लिखिए-
(i) \( \text{CH}_3 - \text{CH} = \text{CH}_2 \xrightarrow{\text{H}_2\text{O} / \text{H}^+} \)
(ii) मेथिल (2-ऑक्सोसाइक्लोहेक्साइल) एथेनोएट पर \( \text{NaBH}_4 \) की अभिक्रिया
(iii) \( \text{CH}_3 - \text{CH}_2 - \text{CH} - \text{CHO} \) (नीचे \( -\text{CH}_3 \)) पर \( \text{NaBH}_4 \) की अभिक्रिया

Answer:

(i) \( \text{CH}_3 - \text{CH} = \text{CH}_2 + \text{H}_2\text{O} \xrightarrow{\text{H}^+} \text{CH}_3 - \text{CH}(\text{OH}) - \text{CH}_3 \) (प्रोपेन-2-ऑल)
(ii) \( \text{NaBH}_4 \) एस्टर समूह को प्रभावित किए बिना कीटोन समूह का अपचयन करके एल्कोहॉल में बदल देता है। उत्पाद मेथिल (2-हाइड्रॉक्सीसाइक्लोहेक्साइल) एथेनोएट है।
(iii) \( \text{CH}_3 - \text{CH}_2 - \text{CH}(\text{CH}_3) - \text{CHO} \xrightarrow{\text{NaBH}_4} \text{CH}_3 - \text{CH}_2 - \text{CH}(\text{CH}_3) - \text{CH}_2\text{OH} \) (2-मेथिलब्यूटेन-1-ऑल)

मुख्य बिंदु:

• अम्ल उत्प्रेरित जल योजन मारकोनीकॉफ नियम के अनुसार होता है।
• \( \text{NaBH}_4 \) एक वर्णनात्मक अपचायक है जो एल्डिहाइड और कीटोन को एल्कोहॉल में अपचयित करता है।
• एस्टर समूह \( \text{NaBH}_4 \) द्वारा आसानी से अपचयित नहीं होता।

आम गलतियाँ:

• मारकोनीकॉफ नियम के विपरीत उत्पाद बना देना।
• \( \text{NaBH}_4 \) की क्रियाशीलता को सभी कार्बोनिल यौगिकों पर एक समान न समझना।
• IUPAC नामकरण में गलती करना।

Exam Tips:

a) एल्कीन के जलयोजन में मारकोनीकॉफ नियम (ऋणात्मक भाग कम हाइड्रोजन वाले कार्बन पर) को याद रखें।
b) \( \text{NaBH}_4 \) और \( \text{LiAlH}_4 \) की चयनात्मकता (Selectivity) का अध्ययन करें।
c) रासायनिक समीकरणों में अभिकर्मकों को तीर के ऊपर स्पष्ट रूप से दर्शाएं।

 

Question 7.6: यदि निम्नलिखित एल्कोहॉल क्रमशः (क) \( \text{HCl}-\text{ZnCl}_2 \) (ख) \( \text{HBr} \) (ग) \( \text{SOCl}_2 \) से अभिक्रिया करें तो आप अपेक्षित उत्पादों की संरचनाएं दीजिए:
(i) ब्यूटेन-1-ऑल
(ii) 2-मेथिलब्यूटेन-2-ऑल

Answer:

(क) \( \text{HCl}-\text{ZnCl}_2 \) के साथ:
(i) ब्यूटेन-1-ऑल (प्राथमिक) \( \rightarrow \) कोई अभिक्रिया नहीं (कमरे के ताप पर)।
(ii) 2-मेथिलब्यूटेन-2-ऑल (तृतीयक) \( \rightarrow \) 2-क्लोरो-2-मेथिलब्यूटेन (तुरंत सफेद मैलापन)।

(ख) \( \text{HBr} \) के साथ:
(i) ब्यूटेन-1-ऑल \( \rightarrow \) 1-ब्रोमोब्यूटेन
(ii) 2-मेथिलब्यूटेन-2-ऑल \( \rightarrow \) 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन

(ग) \( \text{SOCl}_2 \) के साथ:
(i) ब्यूटेन-1-ऑल \( \rightarrow \) 1-क्लोरोब्यूटेन + \( \text{SO}_2 + \text{HCl} \)
(ii) 2-मेथिलब्यूटेन-2-ऑल \( \rightarrow \) 2-क्लोरो-2-मेथिलब्यूटेन + \( \text{SO}_2 + \text{HCl} \)

मुख्य बिंदु:

• लोकास अभिकर्मक (\( \text{HCl} + \text{ZnCl}_2 \)) तृतीयक एल्कोहॉलों के साथ तुरंत अभिक्रिया करता है।
• प्राथमिक एल्कोहॉल लोकास अभिकर्मक के साथ सामान्य ताप पर अभिक्रिया नहीं करते।
• थियॉनील क्लोराइड (\( \text{SOCl}_2 \)) प्राथमिक और तृतीयक दोनों एल्कोहॉलों से क्लोराइड बनाता है।

आम गलतियाँ:

• प्राथमिक एल्कोहॉल के साथ लोकास अभिकर्मक की तुरंत अभिक्रिया दिखा देना।
• उपोत्पादों को संतुलित करना भूल जाना।
• कार्बोनियम आयन के पुनर्विन्यास (Rearrangement) पर ध्यान न देना।

Exam Tips:

a) लोकास परीक्षण एल्कोहॉलों (1°, 2°, 3°) में विभेद करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
b) \( \text{SOCl}_2 \) विधि को एल्कोहॉल से एल्किल क्लोराइड बनाने की सबसे अच्छी विधि माना जाता है क्योंकि गैसें बाहर निकल जाती हैं।
c) अभिकर्मकों के नाम और उनके कार्य को अच्छी तरह याद रखें।

 

Question 7.7: (i) 1-मेथिलसाइक्लोहेक्सेनॉल और (ii) ब्यूटेन-1-ऑल के अम्लउत्प्रेरित निर्जलन के मुख्य उत्पादों की प्रागुक्ति कीजिए।

Answer:

(i) 1-मेथिलसाइक्लोहेक्सेनॉल के अम्लउत्प्रेरित निर्जलन से 1-मेथिलसाइक्लोहेक्सकीन मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।
(ii) ब्यूटेन-1-ऑल के अम्लउत्प्रेरित निर्जलन से सेटजेफ नियम के अनुसार बूट-2-ईन मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• निर्जलन अभिक्रिया में \( \text{E1} \) या \( \text{E2} \) क्रियाविधि का पालन होता है।
• तृतीयक एल्कोहॉल आसानी से निर्जलित होकर अधिक प्रतिस्थापित एल्कीन बनाते हैं।
• प्राथमिक एल्कोहॉल में कार्बोनियम आयन पुनर्विन्यास हो सकता है।

आम गलतियाँ:

• कम प्रतिस्थापित एल्कीन को मुख्य उत्पाद मान लेना।
• जल के अणु का निष्कासन गलत कार्बन से करना।
• सेटजेफ नियम की उपेक्षा करना।

Exam Tips:

a) हमेशा अधिक प्रतिस्थापित एल्कीन (सेटजेफ उत्पाद) को मुख्य उत्पाद के रूप में चुनें।
b) निर्जलन के लिए सामान्यतः सांद्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) या \( \text{H}_3\text{PO}_4 \) का उपयोग होता है।
c) अभिक्रिया का समीकरण लिखते समय \( +\text{H}_2\text{O} \) दिखाना न भूलें।

 

Question 7.8: ऑर्थो तथा पैरा नाइट्रोफीनॉल, फीनॉल से अधिक अम्लीय होती हैं। उनके संगत फीनॉक्साइड आयनों की अनुनादी संरचनाएं बनाइए।

Answer:

फीनॉक्साइड आयन में ऋणावेश अनुनाद के कारण बेंजीन रिंग के ऑर्थो और पैरा स्थितियों पर विस्थानीकृत (delocalized) हो जाता है। नाइट्रो समूह (\( -\text{NO}_2 \)) एक प्रबल इलेक्ट्रॉन-अपकर्षक (-I और -M प्रभाव) समूह है, जो फीनॉक्साइड आयन के ऋणावेश को अपनी ओर खींचकर इसे अत्यधिक स्थायित्व प्रदान करता है। स्थायित्व बढ़ने के कारण साम्यावस्था दाईं ओर विस्थापित होती है जिससे \( \text{H}^+\) आयन आसानी से निकलता है और अम्लता बढ़ती है।

मुख्य बिंदु:

• फीनॉक्साइड आयन की अनुनादी संरचनाएं ऋणावेश के विस्थानीकरण को दर्शाती हैं।
• \( -\text{NO}_2 \) समूह ऑर्थो और पैरा स्थिति पर इलेक्ट्रॉन घनत्व को कम करता है।
• अनुनाद संकर (Resonance hybrid) के कारण फीनॉल की अम्लता एल्कोहॉलों से अधिक होती है।

आम गलतियाँ:

• अनुनादी संरचनाओं में बांड और आवेशों को गलत जगह दर्शाना।
• -M और +M प्रभाव में भ्रमित होना।
• अनुनाद तीर (\( \leftrightarrow \)) के स्थान पर समता का चिह्न लगाना।

Exam Tips:

a) अनुनादी संरचनाओं का अभ्यास बार-बार करें क्योंकि परीक्षा में संरचनाएं बनाने के लिए पूछी जाती हैं।
b) नाइट्रो समूह के इलेक्ट्रॉनिक प्रभावों (-I और -R प्रभाव) का उल्लेख अवश्य करें।
c) फीनॉल और फीनॉक्साइड आयन के स्थायित्व की तुलना स्पष्ट शब्दों में करें।

 

Question 7.9: निम्नलिखित अभिक्रियाओं में सम्मिलित समीकरण लिखिए-
(i) राइमर-टीमन अभिक्रिया
(ii) कोल्बे की अभिक्रिया

Answer:

(i) राइमर-टीमन अभिक्रिया:
फीनॉल की अभिक्रिया क्लोरोफॉर्म (\( \text{CHCl}_3 \)) और जलीय सोडियम हाइड्रोक्साइड (\( \text{NaOH} \)) के साथ 340 K ताप पर कराने पर सैलिसिल्ऐल्डिहाइड (2-हाइड्रॉक्सीबेन्जैल्डिहाइड) प्राप्त होता है।
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{OH} + \text{CHCl}_3 + 3\text{NaOH} \rightarrow \text{C}_6\text{H}_4(\text{OH})(\text{CHO}) + 3\text{NaCl} + 2\text{H}_2\text{O} \)

(ii) कोल्बे की अभिक्रिया:
सोडियम फीनॉक्साइड को कार्बन डाइऑक्साइड (\( \text{CO}_2 \) ) के साथ 400 K ताप और 4-7 वायुमंडल दाब पर गर्म करने के बाद अम्लीकरण करने पर सैलिसिलिक अम्ल (2-हाइड्रॉक्सीबेन्जोइक अम्ल) मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।
\( \text{C}_6\text{H}_5\text{ONa} + \text{CO}_2 \rightarrow \text{C}_6\text{H}_4(\text{ONa})(\text{COOH}) \xrightarrow{\text{H}^+} \text{C}_6\text{H}_4(\text{OH})(\text{COOH}) + \text{Na}^+ \)

मुख्य बिंदु:

• राइमर-टीमन अभिक्रिया में इलेक्ट्रॉनस्नेही स्पीशीज डाइक्लोरोकार्बीन (\( :\text{CCl}_2 \)) होती है।
• कोल्बे अभिक्रिया में दुर्बल इलेक्ट्रॉनस्नेही \( \text{CO}_2 \) फीनॉल वलय पर आक्रमण करती है।
• दोनों अभिक्रियाएं फीनॉल के महत्वपूर्ण नाम-अभिक्रिया (Name reactions) हैं।

आम गलतियाँ:

• अभिकर्मकों (जैसे \( \text{CHCl}_3 \) और \( \text{NaOH} \)) के अनुपात को गलत लिखना।
• उत्पादों के नाम (सैलिसिल्ऐल्डिहाइड और सैलिसिलिक अम्ल) में भ्रमित होना।
• तापमान और दाब की शर्तो को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) नाम वाली अभिक्रियाओं (Name Reactions) को उनके विशिष्ट अभिकर्मकों और उत्पादों के साथ याद रखें।
b) समीकरणों को पूरी तरह संतुलित करके लिखें।
c) मुख्य उत्पाद का IUPAC नाम और सामान्य नाम दोनों याद रखें।

 

Question 7.10: एथेनॉल एवं 3-मेथिलपेंटेन-2-ऑल से प्रारंभ कर 2-एथॉक्सी-3-मेथिलपेंटेन के विलयमसन संश्लेषण की अभिक्रिया लिखिए।

Answer:

विलयमसन संश्लेषण में एक ऐल्किल हैलाइड की अभिक्रिया सोडियम एल्कोक्साइड के साथ होती है। यहाँ हमें 2-एथॉक्सी-3-मेथिलपेंटेन बनाना है, जिसके लिए एथेनॉल से एथिल ब्रोमाइड और 3-मेथिलपेंटेन-2-ऑल से सोडियम 3-मेथिलपेंटेन-2-ऑक्साइड का उपयोग किया जाएगा।
चरण 1: \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{OH} + \text{HBr} \rightarrow \text{CH}_3\text{CH}_2\text{Br} + \text{H}_2\text{O} \)
चरण 2: \( 3-\text{मेथिलपेंटेन-2-ऑल} + \text{Na} \rightarrow \text{सोडियम 3-मेथिलपेंटेन-2-ऑक्साइड} \)
चरण 3: \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{Br} + \text{CH}_3-\text{CH}_2-\text{CH}(\text{CH}_3)-\text{CH}(\text{ONa})-\text{CH}_3 \rightarrow \text{2-एथॉक्सी-3-मेथिलपेंटेन} + \text{NaBr} \)

मुख्य बिंदु:

• विलयमसन संश्लेषण \( \text{S}_\text{N}2 \) क्रियाविधि का अनुसरण करता है।
• ऐल्किल हैलाइड कम से कम steric hindrance (त्रिविम बाधा) वाला प्राथमिक होना चाहिए।
• सोडियम एल्कोक्साइड तृतीयक या द्वितीयक हो सकता है।

आम गलतियाँ:

• तृतीयक ऐल्किल हैलाइड का प्रयोग करना, जिससे ईथर के स्थान पर एल्कीन मुख्य उत्पाद बन जाती है।
• सोडियम धातु के साथ अभिक्रिया के दौरान हाइड्रोजन गैस निकलना भूल जाना।

Exam Tips:

a) विलयमसन संश्लेषण के लिए हमेशा प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड का चयन नियम याद रखें।
b) अभिक्रिया के चरणों को क्रमबद्ध तरीके से लिखें।
c) ईथर बनाने की यह सबसे उत्तम प्रयोगशाला विधि है।

 

Question 7.11: 1-मेथॉक्सी-4-नाइट्रोबेन्जीन के विरचन के लिए निम्नलिखित अभिकारकों में से कौन सा युग्म उपयुक्त है और क्यों?
(i) \( \text{p-BrC}_6\text{H}_4\text{NO}_2 + \text{CH}_3\text{ONa} \)
(ii) \( \text{p-NO}_2\text{C}_6\text{H}_4\text{ONa} + \text{CH}_3\text{Br} \)

Answer:

युग्म (ii) अर्थात् \( \text{p-NO}_2\text{C}_6\text{H}_4\text{ONa} + \text{CH}_3\text{Br} \) उपयुक्त है।
कारण: विलयमसन संश्लेषण में यदि एरिल हैलाइड का उपयोग किया जाए, तो एरिल हैलाइड्स अनुनाद के कारण \( \text{C}-\text{Cl} \) या \( \text{C}-\text{Br} \) बंध में आंशिक द्विआबंध गुण होने के कारण \( \text{S}_\text{N}2 \) प्रतिस्थापन अभिक्रिया आसानी से नहीं देते हैं। इसके विपरीत, सोडियम फीनॉक्साइड (\( \text{p-NO}_2\text{C}_6\text{H}_4\text{ONa} \)) एक प्रबल नाभिकस्नेही है जो प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड (\( \text{CH}_3\text{Br} \)) पर आसानी से आक्रमण करके ईथर का निर्माण करता है।

मुख्य बिंदु:

• एरिल हैलाइड नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन के प्रति कम क्रियाशील होते हैं।
• सोडियम फीनॉक्साइड और ऐल्किल हैलाइड का संयोजन ईथर निर्माण के लिए सही है।
• \( \text{CH}_3\text{Br} \) एक प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड है जो \( \text{S}_\text{N}2 \) अभिक्रिया के लिए सर्वोत्तम है।

आम गलतियाँ:

• एरिल हैलाइड को सोडियम एल्कोक्साइड के साथ प्रयोग करने की गलती करना।
• अनुनाद के प्रभाव को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) हमेशा याद रखें कि एरिल ईथर बनाने के लिए फीनॉक्साइड और ऐल्किल हैलाइड का जोड़ा ही उपयुक्त होता है।
b) कारण स्पष्ट करते समय अनुनाद और आंशिक द्विआबंध गुण का उल्लेख जरूर करें।
c) प्रश्न में दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनकर उसका कारण दो-तीन वाक्यों में दें।

 

Question 7.12: निम्नलिखित अभिक्रियाओं से प्राप्त उत्पादों का अनुमान लगाइए -
(i) \( \text{CH}_3 - \text{CH}_2 - \text{CH}_2 - \text{O} - \text{CH}_3 + \text{HBr} \rightarrow \)
(ii) एथॉक्सीबेन्जीन + \( \text{HBr} \rightarrow \)
(iii) एथॉक्सीबेन्जीन + सांद्र \( \text{H}_2\text{SO}_4 \) + सांद्र \( \text{HNO}_3 \rightarrow \)
(iv) \( (\text{CH}_3)_3\text{C} - \text{OC}_2\text{H}_5 + \text{HI} \rightarrow \)

Answer:

(i) \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CH}_2\text{OH} + \text{CH}_3\text{Br} \) (प्रोपेनॉल और ब्रोमोमेथेन)
(ii) फीनॉल और एथिल ब्रोमाइड (\( \text{C}_2\text{H}_5\text{Br} \))
(iii) 2-एथॉक्सीनाइट्रोबेन्जीन और 4-एथॉक्सीनाइट्रोबेन्जीन (मुख्य उत्पाद)
(iv) \( (\text{CH}_3)_3\text{C}-\text{I} + \text{C}_2\text{H}_5\text{OH} \) (तृतीयक-ब्यूटिल आयोडाइड और एथेनॉल)

मुख्य बिंदु:

• सममित ईथर में \( \text{HI}/\text{HBr} \) के साथ अभिक्रिया से एल्कोहॉल और एल्किल हैलाइड बनते हैं।
• यदि एक समूह तृतीयक है, तो कार्बोकैटायन के स्थायित्व के कारण तृतीयक हैलाइड बनता है।
• ऐरिल ऐल्किल ईथर के विदलन से हमेशा फीनॉल और ऐल्किल हैलाइड प्राप्त होता है।

आम गलतियाँ:

• असममित ईथर में गलत जगह से बंध तोड़ना (तृतीयक समूह की प्राथमिकता भूल जाना)।
• नाइट्रेशन अभिक्रिया में केवल एक ही (ऑर्थो या पैरा) उत्पाद दिखाना।

Exam Tips:

a) ईथर के विदलन (Cleavage) के नियमों को अच्छी तरह समझ लें (विशेषकर 3° समूहों के लिए)।
b) नाइट्रेशन जैसी इलेक्ट्रॉनस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में ऑर्थो और पैरा दोनों isomer उत्पाद के रूप में लिखें और पैरा को मुख्य बताएं।
c) रासायनिक समीकरणों में उत्पादों के IUPAC या सामान्य नाम कोष्ठक में अवश्य लिखें।

 

Free NCERT Textbook Explanations: Class 12 Chemistry Chapter 07 एल्कोहल फिनॉल एवं ईथर

Chapter Exercise Answers for Class 12 Chemistry

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FAQs

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