Download NCERT Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 06 हैलोएल्केन तथा हैलोएरीन
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Question 6.1: निम्नलिखित हैलाइडों के नाम IUPAC पद्धति से लिखिए तथा उनका वर्गीकरण, ऐल्किल ऐलिलिक, बेन्जिलिक (प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक) वाइनिल अथवा ऐरिल हैलाइड के रूप में कीजिए -
(i) \( (\mathrm{CH}_3)_2\mathrm{CHCH}(\mathrm{Cl})\mathrm{CH}_3 \)
(ii) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}(\mathrm{CH}_3)\mathrm{CH}(\mathrm{C}_2\mathrm{H}_5)\mathrm{Cl} \)
(iii) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{C}(\mathrm{CH}_3)_2\mathrm{CH}_2\mathrm{I} \)
(iv) \( (\mathrm{CH}_3)_3\mathrm{CCH}_2\mathrm{CH}(\mathrm{Br})\mathrm{C}_6\mathrm{H}_5 \)
(v) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}(\mathrm{CH}_3)\mathrm{CH}(\mathrm{Br})\mathrm{CH}_3 \)
(vi) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{C}(\mathrm{C}_2\mathrm{H}_5)_2\mathrm{CH}_2\mathrm{Br} \)
(vii) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{C}(\mathrm{Cl})(\mathrm{C}_2\mathrm{H}_5)\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_3 \)
(viii) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}=\mathrm{C}(\mathrm{Cl})\mathrm{CH}(\mathrm{CH}_3)_2 \)
(ix) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}=\mathrm{CHC}(\mathrm{Br})(\mathrm{CH}_3)_2 \)
(x) \( p-\mathrm{ClC}_6\mathrm{H}_4\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}(\mathrm{CH}_3)_2 \)
(xi) \( m-\mathrm{ClCH}_2\mathrm{C}_6\mathrm{H}_4\mathrm{CH}_2\mathrm{C}(\mathrm{CH}_3)_3 \)
(xii) \( o-\mathrm{Br}-\mathrm{C}_6\mathrm{H}_4\mathrm{CH}(\mathrm{CH}_3)\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_3 \)
Answer:
(i) \( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}(\mathrm{CH}_3)-\mathrm{CH}(\mathrm{Cl})-\mathrm{CH}_3 \)
IUPAC नाम: 2-क्लोरो-3-मेथिलब्यूटेन
वर्गीकरण: द्वितीयक ऐल्काइल हैलाइड
(ii) \( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}(\mathrm{CH}_3)-\mathrm{CH}(\mathrm{C}_2\mathrm{H}_5)-\mathrm{Cl} \)
IUPAC नाम: 3-क्लोरो-4-मेथिलहेक्सेन
वर्गीकरण: द्वितीयक ऐल्काइल हैलाइड
(iii) \( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{C}(\mathrm{CH}_3)_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{I} \)
IUPAC नाम: 1-आयोडो-2,2-डाइमेथिलब्यूटेन
वर्गीकरण: प्राथमिक ऐल्काइल हैलाइड
(iv) \( (\mathrm{CH}_3)_3\mathrm{C}-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}(\mathrm{Br})-\mathrm{C}_6\mathrm{H}_5 \)
IUPAC नाम: 1-ब्रोमो-3,3-डाइमेथिल-1-फेनिलब्यूटेन
वर्गीकरण: द्वितीयक बेन्जिलिक हैलाइड
(v) \( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}(\mathrm{CH}_3)-\mathrm{CH}(\mathrm{Br})-\mathrm{CH}_3 \)
IUPAC नाम: 2-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन
वर्गीकरण: द्वितीयक ऐल्काइल हैलाइड
(vi) \( \mathrm{CH}_3-\mathrm{C}(\mathrm{C}_2\mathrm{H}_5)_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{Br} \)
IUPAC नाम: 1-ब्रोमो-2-एथिल-2-मेथिलब्यूटेन
वर्गीकरण: प्राथमिक ऐल्काइल हैलाइड
(vii) \( \mathrm{CH}_3-\mathrm{C}(\mathrm{Cl})(\mathrm{C}_2\mathrm{H}_5)-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_3 \)
IUPAC नाम: 3-क्लोरो-3-मेथिलपेन्टैन
वर्गीकरण: तृतीयक ऐल्काइल हैलाइड
(viii) \( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}=\mathrm{C}(\mathrm{Cl})-\mathrm{CH}(\mathrm{CH}_3)_2 \)
IUPAC नाम: 3-क्लोरो-5-मेथिलहेक्स-2-ईन
वर्गीकरण: वाइनिल हैलाइड
(ix) \( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}=\mathrm{CH}-\mathrm{C}(\mathrm{Br})(\mathrm{CH}_3)_2 \)
IUPAC नाम: 4-ब्रोमो-4-मेथिलपेन्ट-2-ईन
वर्गीकरण: ऐलिलिक हैलाइड
(x) \( p-\mathrm{ClC}_6\mathrm{H}_4\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}(\mathrm{CH}_3)_2 \)
IUPAC नाम: 1-क्लोरो-4-(2-मेथिलप्रोपाइल)बेन्जीन
वर्गीकरण: एरिल हैलाइड
(xi) \( m-\mathrm{ClCH}_2\mathrm{C}_6\mathrm{H}_4\mathrm{CH}_2\mathrm{C}(\mathrm{CH}_3)_3 \)
IUPAC नाम: 1-क्लोरोमेथिल-3-(2,2-डाइमेथिलप्रोपाइल)बेन्जीन
वर्गीकरण: प्राथमिक बेन्जिलिक हैलाइड
(xii) \( o-\mathrm{Br}-\mathrm{C}_6\mathrm{H}_4\mathrm{CH}(\mathrm{CH}_3)\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_3 \)
IUPAC नाम: 1-ब्रोमो-2-(1-मिथाइलप्रोपाइल)बेन्जीन
वर्गीकरण: एरिल हैलाइड
मुख्य बिंदु:
• IUPAC नामकरण में सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला का चयन किया जाता है।
• हैलोजन परमाणु से जुड़े कार्बन की प्रकृति (1°, 2°, 3°) से वर्गीकरण तय होता है।
• वाइनिल हैलाइड में हैलोजन सीधे द्विआबंध वाले कार्बन से जुड़ा होता है।
आम गलतियाँ:
• गलत लंबी श्रृंखला चुनना।
• नंबरिंग गलत सिरे से शुरू करना।
• प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक बेन्जिलिक में अंतर न समझना।
Exam Tips:
a) संरचना को खोलकर लिखें ताकि श्रृंखला स्पष्ट दिखाई दे।
b) वर्णमाला क्रम (Alphabetical order) का ध्यान रखें।
c) दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों में वर्गीकरण का कारण स्पष्ट लिखें।
Question 6.2: निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम दीजिए-
(i) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}(\mathrm{Cl})\mathrm{CH}(\mathrm{Br})\mathrm{CH}_3 \)
(ii) \( \mathrm{CHF}_2\mathrm{CBRClF \)
(iii) \( \mathrm{ClCH}_2\mathrm{C}\equiv\mathrm{CCH}_2\mathrm{Br} \)
(iv) \( (\mathrm{CCl}_3)_3\mathrm{CCl} \)
(v) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{C}(p-\mathrm{ClC}_6\mathrm{H}_4)_2\mathrm{CH}(\mathrm{Br})\mathrm{CH}_3 \)
(vi) \( (\mathrm{CH}_3)_3\mathrm{CCH}=\mathrm{CClC}_6\mathrm{H}_4\mathrm{I}-p \)
Answer:
(i) \( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}(\mathrm{Cl})-\mathrm{CH}(\mathrm{Br})-\mathrm{CH}_3 \)
IUPAC नाम: 2-bromo-3-chlorobutane (2-ब्रोमो-3-क्लोरोब्यूटेन)
(ii) \( \mathrm{CHF}_2-\mathrm{CBrCl}-\mathrm{F} \)
IUPAC नाम: 1-bromo-1-chloro-1,2,2-trifluoroethane (1-ब्रोमो-1-क्लोरो-1,2,2-ट्राइफ्लुओरोएथेन)
(iii) \( \mathrm{ClCH}_2-\mathrm{C}\equiv\mathrm{C}-\mathrm{CH}_2\mathrm{Br} \)
IUPAC नाम: 1-bromo-4-chlorobut-2-yne (1-ब्रोमो-4-क्लोरोबूट-2-आइन)
(iv) \( (\mathrm{CCl}_3)_3\mathrm{CCl} \)
IUPAC नाम: 2-(trichloromethyl)-1,1,1,2,3,3,3-heptachloropropane (2-(ट्राइक्लोरोमेथिल)-1,1,1,2,3,3,3-हेप्टाक्लोरोप्रोपेन)
(v) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{C}(p-\mathrm{ClC}_6\mathrm{H}_4)_2\mathrm{CH}(\mathrm{Br})\mathrm{CH}_3 \)
IUPAC नाम: 2-bromo-3,3-bis(4-chlorophenyl)butane (2-ब्रोमो-3,3-बिस्(4-क्लोरोफेनिल)ब्यूटेन)
(vi) \( (\mathrm{CH}_3)_3\mathrm{CCH}=\mathrm{CClC}_6\mathrm{H}_4\mathrm{I}-p \)
IUPAC नाम: 1-chloro-1-(4-iodophenyl)-3,3-dimethylbut-1-ene (1-क्लोरो-1-(4-आयोडोफेनिल)-3,3-डाइमेथिलबूट-1-ईन)
मुख्य बिंदु:
• IUPAC नियमों के अनुसार प्रतिस्थापियों को अंग्रेजी वर्णमाला क्रम में लिखा जाता है।
• बहुआबंध (द्विआबंध या त्रिआबंध) को एकल आबंध से उच्च प्राथमिकता दी जाती है।
• जटिल प्रतिस्थापियों के नाम ब्रैकेट में लिखे जाते हैं।
आम गलतियाँ:
• वर्णमाला क्रम की उपेक्षा करना।
• श्रृंखला की नंबरिंग गलत छोर से करना।
Exam Tips:
a) संरचना बनाकर अभ्यास करें।
b) उपसर्गों (di, tri आदि) को वर्णमाला क्रम में शामिल नहीं करते हैं।
c) विराम चिह्न (hyphen और comma) का सही प्रयोग करें।
Question 6.3: निम्नलिखित कार्बनिक हैलोजन यौगिकों की संरचना दीजिए-
(i) 2-क्लोरो-3-मेथिलपेन्टैन
(ii) p-ब्रोमोक्लोरोबेन्जीन
(iii) 1-क्लोरो-4-एथिलसाइक्लोहेक्सेन
(iv) 2-(2-क्लोरोफेनिल)-1-आयोडोऑक्टेन
(v) 2-ब्रोमोब्यूटेन
(vi) 4-तृतीयक-ब्यूटिल-3-आयोडोहेप्टेन
(vii) 1-ब्रोमो-4-द्वितीयक-ब्यूटिल-2-मेथिलबेन्जीन
(viii) 1,4-डाइब्रोमोबूट-2-ईन
Answer:
(i) 2-क्लोरो-3-मेथिलपेन्टैन:
\( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}(\mathrm{Cl})-\mathrm{CH}(\mathrm{CH}_3)-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_3 \)
(ii) p-ब्रोमोक्लोरोबेन्जीन:
बेंजीन रिंग पर 1 और 4 स्थिति पर क्रमशः Cl और Br समूह जुड़े होते हैं।
(iii) 1-क्लोरो-4-एथिलसाइक्लोहेक्सेन:
साइक्लोहेक्सेन वलय में C-1 पर Cl और C-4 पर \( \mathrm{C}_2\mathrm{H}_5 \) जुड़ा होता है।
(iv) 2-(2-क्लोरोफेनिल)-1-आयोडोऑक्टेन:
\( \mathrm{I}-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}(\mathrm{C}_6\mathrm{H}_4\mathrm{Cl}-o)-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_3 \)
(v) 2-ब्रोमोब्यूटेन:
\( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}(\mathrm{Br})-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_3 \)
(vi) 4-तृतीयक-ब्यूटिल-3-आयोडोहेप्टेन:
\( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}(\mathrm{t-butyl})-\mathrm{CH}(\mathrm{I})-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_3 \)
(vii) 1-ब्रोमो-4-द्वितीयक-ब्यूटिल-2-मेथिलबेन्जीन:
बेन्जीन वलय पर C-1 पर Br, C-2 पर \( \mathrm{CH}_3 \) और C-4 पर द्वितीयक-ब्यूटिल समूह।
(viii) 1,4-डाइब्रोमोबूट-2-ईन:
\( \mathrm{Br}-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}=\mathrm{CH}-\mathrm{CH}_2-\mathrm{Br} \)
मुख्य बिंदु:
• नाम से संरचना बनाते समय मुख्य श्रृंखला के कार्बन गिनकर लिखें।
• प्रतिस्थापियों को उनकी सही स्थिति पर दर्शाएँ।
• चक्रिय यौगिकों के लिए वलय संरचना का प्रयोग करें।
आम गलतियाँ:
• मुख्य श्रृंखला में कार्बन की संख्या गलत गिनना।
• स्थिति सूचक अंकों (Locants) का गलत स्थान पर प्रयोग।
Exam Tips:
a) अंत से शुरुआत करें (जैसे पेन्टैन है तो 5 कार्बन पहले बनाएं)।
b) संरचना बनाने के बाद IUPAC नियम से नाम जाँच लें।
c) साफ-सुथरा रेखाचित्र बनाएँ।
Question 6.4: निम्नलिखित में से किसका द्विध्रुव आघूर्ण सर्वाधिक होगा?
(i) \( \mathrm{CH}_2\mathrm{Cl}_2 $
(ii) \( \mathrm{CHCl}_3 $
(iii) \( \mathrm{CCl}_4 $
Answer:
दिए गए यौगिकों में \( \mathrm{CH}_2\mathrm{Cl}_2 \) का द्विध्रुव आघूर्ण सर्वाधिक होता है।
कारण:
\( \mathrm{CCl}_4 \) एक सममित अणु है, इसलिए सभी \( \mathrm{C}-\mathrm{Cl} \) आबंधों के द्विध्रुव आघूर्ण एक-दूसरे के प्रभाव को निरस्त कर देते हैं और परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है।
\( \mathrm{CHCl}_3 \) में तीन \( \mathrm{C}-\mathrm{Cl} \) आबंधों के द्विध्रुव आघूर्णों का परिणामी, एक \( \mathrm{C}-\mathrm{H} \) आबंध के द्विध्रुव आघूर्ण द्वारा आंशिक रूप से विरोध करता है।
\( \mathrm{CH}_2\mathrm{Cl}_2 \) में दो \( \mathrm{C}-\mathrm{Cl} \) आबंधों के आघूर्ण एक ही दिशा में परिणामी बनाते हैं जिससे इसका द्विध्रुव आघूर्ण \( (\mu = 1.60\mathrm{D}) \) सबसे अधिक होता है।
मुख्य बिंदु:
• सममित ज्यामिति वाले अणुओं का द्विध्रुव आघूर्ण शून्य होता है।
• \( \mathrm{CH}_2\mathrm{Cl}_2 \) का मान 1.60 D, \( \mathrm{CHCl}_3 \) का 1.08 D तथा \( \mathrm{CCl}_4 \) का 0 D होता है।
• द्विध्रुव आघूर्ण एक सदिश राशि है।
आम गलतियाँ:
• यह मान लेना कि अधिक क्लोरीन होने पर द्विध्रुव आघूर्ण अधिक होगा।
• ज्यामितीय प्रभाव (Vector addition) को नजरंदाज करना।
Exam Tips:
a) अणुओं की संरचना (आकृति) बनाकर वेक्टर दिशा दिखाएं।
b) मान (Values) याद रखना बहुविकल्पीय प्रश्नों में उपयोगी है।
c) कारण स्पष्ट रूप से सदिशों के योग के रूप में लिखें।
Question 6.5: एक हाइड्रोकार्बन \( \mathrm{C}_5\mathrm{H}_{10} \) अंधेरे में क्लोरीन के साथ अभिक्रिया नहीं करता परन्तु सूर्य के तीव्र प्रकाश में केवल एक monochloro यौगिक \( \mathrm{C}_5\mathrm{H}_9\mathrm{Cl} \) देता है। हाइड्रोकार्बन की संरचना क्या है?
Answer:
दिया गया आणविक सूत्र \( \mathrm{C}_5\mathrm{H}_{10} \) एल्कीन या साइक्लोएल्केन का सामान्य सूत्र है।
अंधेरे में अभिक्रिया न होने से यह स्पष्ट है कि यह एल्कीन नहीं है, अतः यह एक साइक्लोएल्केन होना चाहिए।
चूँकि यह सूर्य के प्रकाश में केवल एक ही मोनोक्लोरो यौगिक \( \mathrm{C}_5\mathrm{H}_9\mathrm{Cl} \) देता है, इसका अर्थ है कि इस साइक्लोएल्केन के सभी 10 H-परमाणु पर्यावरण के हिसाब से समतुल्य (Equivalent) होने चाहिए।
अतः यह हाइड्रोकार्बन साइक्लोपेन्टैन है।
मुख्य बिंदु:
• \( \mathrm{C}_n\mathrm{H}_{2n} \) सूत्र एल्कीन और साइक्लोएल्केन दोनों का होता है।
• केवल एक मोनोक्लोरो उत्पाद मिलने का मतलब सभी हाइड्रोजन समतुल्य हैं।
• साइक्लोपेन्टैन में 5 कार्बन और 10 समतुल्य हाइड्रोजन होते हैं।
आम गलतियाँ:
• इसे सीधी श्रृंखला वाली एल्कीन मान लेना।
• समतुल्य हाइड्रोजन की अवधारणा को न समझना।
Exam Tips:
a) पहले असंतृप्ति की कोटि (DU) की गणना करें।
b) अभिक्रिया की शर्तों (अंधेरा vs प्रकाश) पर विशेष ध्यान दें।
c) अंतिम संरचना का IUPAC नाम जरूर लिखें।
Question 6.6: \( \mathrm{C}_4\mathrm{H}_9\mathrm{Br} \) सूत्र वाले यौगिक के सभी समावयवी लिखिए।
Answer:
\( \mathrm{C}_4\mathrm{H}_9\mathrm{Br} \) के चार प्राथमिक और द्वितीयक संरचनात्मक समावयवी निम्नलिखित हैं:
1. \( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{Br} \) (1-ब्रोमोब्यूटेन)
2. \( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}(\mathrm{Br})-\mathrm{CH}_3 \) (2-ब्रोमोब्यूटेन)
3. \( (\mathrm{CH}_3)_2\mathrm{CH}-\mathrm{CH}_2-\mathrm{Br} \) (1-ब्रोमो-2-मेथिलप्रोपेन)
4. \( (\mathrm{CH}_3)_3\mathrm{C}-\mathrm{Br} \) (2-ब्रोमो-2-मेथिलप्रोपेन)
मुख्य बिंदु:
• समावयवी वे यौगिक होते हैं जिनका अणुसूत्र समान लेकिन संरचना भिन्न होती है।
• \( \mathrm{C}_4\mathrm{H}_9\mathrm{Br} \) के कुल 4 संरचनात्मक समावयवी संभव हैं।
• इनमें प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक सभी प्रकार के हैलाइड शामिल हैं।
आम गलतियाँ:
• समावयवी छोड़ देना या एक ही संरचना को दोबारा लिख देना।
• श्रृंखला और स्थिति समावयवता में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) श्रृंखला बदलकर (Straight chain फिर branched chain) व्यवस्थित रूप से लिखें।
b) सभी संभव स्थितियों पर ब्रोमीन जोड़कर जाँच करें।
c) प्रत्येक की संरचना के नीचे उसका IUPAC नाम भी लिखें।
Question 6.7: निम्नलिखित से 1-आयोडोब्यूटेन प्राप्त करने की समीकरण दीजिए-
(i) 1-ब्यूटेनॉल
(ii) 1-क्लोरोब्यूटेन
(iii) बूट-1-इन
Answer:
(i) 1-ब्यूटेनॉल से:
\( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{OH} + \mathrm{HI} \xrightarrow{\mathrm{ZnCl}_2} \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{I} + \mathrm{H}_2\mathrm{O} $
\)
(ii) 1-क्लोरोब्यूटेन से (फिन्केलस्टीन अभिक्रिया):
\( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{Cl} + \mathrm{NaI} \xrightarrow{\text{शुष्क एसीटोन}} \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{I} + \mathrm{NaCl} $
\)
(iii) बूट-1-इन से:
\( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}=\mathrm{CH}_2 + \mathrm{HBr} \xrightarrow{\text{परॉक्साइड}} \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{Br} $
\)
इसके बाद फिंकेलस्टीन अभिक्रिया द्वारा:
\( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{Br} + \mathrm{NaI} \xrightarrow{\text{एसीटोन}} \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{I} + \mathrm{NaBr} $
मुख्य बिंदु:
• ऐल्किल आयोडाइड बनाने के लिए फिंकेलस्टीन अभिक्रिया सबसे उत्तम विधि है।
• ऐल्कोहॉल की अभिक्रिया HI और निर्जल \( \mathrm{ZnCl}_2 \) के साथ कराई जाती है।
• एंटी-मार्कोनीकॉफ़ नियम परॉक्साइड की उपस्थिति में लगता है।
आम गलतियाँ:
• फिंकेलस्टीन अभिक्रिया में विलायक (शुष्क एसीटोन) लिखना भूल जाना।
• परॉक्साइड प्रभाव में गलत उत्पाद बनाना।
Exam Tips:
a) अभिक्रिया के अभिकर्मक और उत्प्रेरक तीर के ऊपर व नीचे स्पष्ट लिखें।
b) नाम वाली अभिक्रियाओं (जैसे फिंकेलस्टीन) को हाईलाइट करें।
c) संतुलित रासायनिक समीकरण ही लिखें।
Question 6.8: उभयदंती नाभिकरागी क्या होते हैं? एक उदाहरण की सहायता से समझाइए।
Answer:
वे नाभिकरागी (Nucleophiles) जिनमें दो अलग-अलग नाभिकरागी केंद्र होते हैं, उभयदंती नाभिकरागी (Ambident nucleophiles) कहलाते हैं।
उदाहरण के लिए, साइनाइड आयन \( (\mathrm{CN}^-) \) एक उभयदंती नाभिकरागी है। यह कार्बन और नाइट्रोजन दोनों परमाणुओं के माध्यम से आक्रमण कर सकता है। जब यह C की ओर से आक्रमण करता है तो ऐल्किल साइनाइड बनते हैं और जब N की ओर से करता है तो आइसोसाइनाइड बनते हैं:
\( \mathrm{R}-\mathrm{X} + \mathrm{KCN} \rightarrow \mathrm{R}-\mathrm{CN} + \mathrm{KX} $
\)
\( \mathrm{R}-\mathrm{X} + \mathrm{AgCN} \rightarrow \mathrm{R}-\mathrm{NC} + \mathrm{AgX} $
मुख्य बिंदु:
• उभयदंती नाभिकरागी में दो सक्रिय परमाणु होते हैं।
• \( \mathrm{NO}_2^- \) आयन भी एक अन्य उदाहरण है जो नाइट्रो और नाइट्राइटो दोनों उत्पाद दे सकता है।
• यह परिवेश और बंध की प्रकृति पर निर्भर करता है कि कौन सा सिरा आक्रमण करेगा।
आम गलतियाँ:
• केवल परिभाषा लिखकर उदाहरण न देना।
• KCN और AgCN के साथ अलग उत्पाद बनने का कारण न समझाना।
Exam Tips:
a) परिभाषा के साथ \( \mathrm{CN}^- \) या \( \mathrm{NO}_2^- \) का अनुनादी strutture जरूर बनाएँ।
b) आयनिक और सहसंयोजक बंध के प्रभाव को संक्षिप्त में बताएं।
c) उत्तर को स्पष्ट और बिंदुवार लिखें।
Question 6.9: निम्नलिखित प्रत्येक युगलों में से कौन सा यौगिक \( \mathrm{OH}^- \) के साथ \( \mathrm{S_N2} \) अभिक्रिया में अधिक तीव्रता से अभिक्रिया करेगा?
(i) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{Br} \) अथवा \( \mathrm{CH}_3\mathrm{I} $
(ii) \( (\mathrm{CH}_3)_3\mathrm{CCl} \) अथवा \( \mathrm{CH}_3\mathrm{Cl} $
Answer:
(i) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{I} \), \( \mathrm{CH}_3\mathrm{Br} \) की तुलना में अधिक तेजी से अभिक्रिया करेगा।
कारण: \( \mathrm{S_N2} \) अभिक्रिया में आयोडीन आयन, ब्रोमीन आयन की तुलना में एक बेहतर प्रस्थान समूह (Leaving group) है क्योंकि आयोडीन का आकार बड़ा और आबंध दुर्बल होता है।
(ii) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{Cl} \), \( (\mathrm{CH}_3)_3\mathrm{CCl} \) की तुलना में अधिक तेजी से अभिक्रिया करेगा।
कारण: \( \mathrm{S_N2} \) अभिक्रिया में त्रيिविम बाधा (Steric hindrance) का बहुत प्रभाव होता है। तृतीयक ब्यूटिल क्लोराइड में तीन मैथिल समूहों की उपस्थिति के कारण नाभिकरागी के आक्रमण में भारी बाधा उत्पन्न होती है, जबकि प्राथमिक क्लोराइड में यह बाधा नगण्य होती है।
मुख्य बिंदु:
• \( \mathrm{S_N2} \) अभिक्रिया में त्रिविम बाधा कम होने पर वेग बढ़ता है (\( 1^\circ > 2^\circ > 3^\circ \))।
• प्रस्थान समूह का क्रम: \( \mathrm{I}^- > \mathrm{Br}^- > \mathrm{Cl}^- > \mathrm{F}^- \)。
• \( \mathrm{S_N2} \) एक ही पद में संपन्न होती है।
आम गलतियाँ:
• \( \mathrm{S_N1} \) और \( \mathrm{S_N2} \) के कारकों को आपस में मिला देना।
• त्रिविम प्रभाव और प्रस्थान समूह के प्रभाव को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) कारण में 'त्रिविम बाधा' (Steric hindrance) शब्द का प्रयोग अवश्य करें।
b) प्रस्थान समूह (Leaving group ability) के क्रम को लिखें।
c) दोनों भागों के उत्तर अलग-अलग और स्पष्ट दें।
Question 6.10: निम्नलिखित हैलाइडों के एथेनॉल में सोडियम हाइड्रॉक्साइड द्वारा विहाइड्रोहैलोजनन के फलस्वरूप बनने वाली सभी ऐल्कीनों की संरचना लिखिए। इसमें से मुख्य ऐल्कीन कौन सी होगी?
(i) 1-ब्रोमो-1-मिथाइलसाइक्लोहेक्सेन
(ii) 2-क्लोरो-2-मेथिलब्यूटेन
(iii) 2,2,3-ट्राइमेथिल-3-溴ोपेन्टैन
Answer:
(i) 1-ब्रोमो-1-मिथाइलसाइक्लोहेक्सेन:
इससे केवल एक ही मुख्य ऐल्कीन 1-मिथाइलसाइक्लोहेक्सेन बनती है क्योंकि इसमें केवल एक ही प्रकार का \( \beta \)-हाइड्रोजन उपलब्ध है।
(ii) 2-क्लोरो-2-मेथिलब्यूटेन:
इससे दो ऐल्कीन बनती हैं:
1. 2-मेथिलबूट-2-ईन (मुख्य उत्पाद)
2. 2-मेथिलबूट-1-ईन (अल्प उत्पाद)
(iii) 2,2,3-ट्राइमेथिल-3-ब्रोमोपेन्टैन:
इससे भी दो ऐल्कीन बनती हैं जिनमें से 3,4,4-ट्राइमेथिलपेन्ट-2-ईन (सेचत्सेफ नियम के अनुसार) मुख्य उत्पाद होती है।
मुख्य बिंदु:
• विहाइड्रोहैलोजनन अभिक्रिया में एल्कोहॉलिक KOH का प्रयोग होता है।
• यह सेचत्सेफ (Saytzeff) नियम का पालन करती है।
• अधिक प्रतिस्थापित ऐल्कीन मुख्य उत्पाद होती है।
आम गलतियाँ:
• \( \beta \)-हाइड्रोजन की स्थिति गलत पहचानना।
• सेचत्सेफ नियम के विपरीत कम प्रतिस्थापित उत्पाद को मुख्य बता देना।
Exam Tips:
a) सेचत्सेफ नियम का कथन संक्षिप्त में लिखें।
b) सभी संभव \( \beta \)-हाइड्रोजन को चिह्नित करें।
c) मुख्य और अल्प उत्पादों को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
Question 6.11: निम्नलिखित परिवर्तन आप कैसे करेंगे?
(i) एथेनॉल से बूट-1-आइन
(ii) एथिन से ब्रोमोएथेन
(iii) प्रोपीन से 1-नाइट्रोप्रोपेन
(iv) टॉलूِين से बेन्जिल ऐल्कोहॉल
(v) प्रोपीन से प्रोपाइन
(vi) एथेनॉल से एथिल फ्लुओराइड
(vii) ब्रोमोमेथेन से प्रोपेनोन
(viii) बूट-1-ईन से बूट-2-ईन
(ix) बेन्जीन से बाइफेनिल
(x) 1-क्लोरोब्यूटेन से n-ऑक्टेन
Answer:
(i) एथेनॉल से बूट-1-आइन:
\( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{OH} \xrightarrow{\mathrm{SOCl}_2} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{Cl} \xrightarrow{\mathrm{HC}\equiv\mathrm{C}^-\mathrm{Na}^+} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{C}\equiv\mathrm{CH} $
\)
(ii) एथिन से ब्रोमोएथेन:
\( \mathrm{CH}\equiv\mathrm{CH} + \mathrm{H}_2 \xrightarrow{\mathrm{Pd/BaSO}_4} \mathrm{CH}_2=\mathrm{CH}_2 \xrightarrow{\mathrm{HBr}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{Br} $
\)
(iii) प्रोपीन से 1-नाइट्रोप्रोपेन:
\( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}=\mathrm{CH}_2 + \mathrm{HBr} \xrightarrow{\text{परॉक्साइड}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{Br} \xrightarrow{\mathrm{AgNO}_2} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{NO}_2 $
\)
(iv) टॉलूईन से बेन्जिल ऐल्कोहॉल:
\( \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{CH}_3 \xrightarrow[\text{प्रकाश}]{\mathrm{Cl}_2/\Delta} \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{CH}_2\mathrm{Cl} \xrightarrow{\text{जलीय }\mathrm{KOH}} \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{CH}_2\mathrm{OH} $
\)
(v) प्रोपीन से प्रोपाइन:
\( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}=\mathrm{CH}_2 \xrightarrow{\mathrm{Br}_2/\mathrm{CCl}_4} \text{डाइब्रोमाइड} \xrightarrow[\text{द्रव }\mathrm{NH}_3]{\mathrm{NaNH}_2} \mathrm{CH}_3\mathrm{C}\equiv\mathrm{CH} $
\)
(vi) एथेनॉल से एथिल फ्लुओराइड (स्वार्ट्स अभिक्रिया):
\( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{OH} \xrightarrow{\mathrm{PCl}_5} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{Cl} \xrightarrow{\mathrm{AgF}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{F} + \mathrm{AgCl} $
\)
(vii) ब्रोमोमेथेन से प्रोपेनोन:
\( \mathrm{CH}_3\mathrm{Br} \xrightarrow{\mathrm{KCN}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CN} \xrightarrow{\mathrm{CH}_3\mathrm{MgBr}} \text{यौगिक} \xrightarrow{\mathrm{H}_3\mathrm{O}^+} \mathrm{CH}_3-\mathrm{CO}-\mathrm{CH}_3 $
\)
(viii) बूट-1-ईन से बूट-2-ईन:
\( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}=\mathrm{CH}_2 \xrightarrow{\mathrm{HBr}} \text{ब्रोमोब्यूटेन} \xrightarrow{\text{ऐल्को. }\mathrm{KOH}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}=\mathrm{CHCH}_3 $
\)
(ix) बेन्जीन से बाइफेनिल (फिटिग अभिक्रिया):
\( 2\mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{Br} + 2\mathrm{Na} \xrightarrow{\text{शुष्क ईथर}} \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5-\mathrm{C}_6\mathrm{H}_5 + 2\mathrm{NaBr} $
\)
(x) 1-क्लोरोब्यूटेन से n-ऑक्टेन (वुर्ट्ज़ अभिक्रिया):
\( 2\mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{Cl} + 2\mathrm{Na} \xrightarrow{\text{शुष्क ईथर}} \mathrm{C}_8\mathrm{H}_18 + 2\mathrm{NaCl} $
मुख्य बिंदु:
• रूपांतरण प्रश्नों में अभिकर्मक और प्रतिक्रिया की स्थिति सही लिखना आवश्यक है।
• कार्बन श्रृंखला बढ़ाने के लिए ग्रिग्नาร์ड अभिकर्मक या वुर्ट्ज़ अभिक्रिया का प्रयोग करते हैं।
• हैलोजन विनिमय के लिए फिंकेलस्टीन और स्वार्ट्स अभिक्रियाएं महत्वपूर्ण हैं।
आम गलतियाँ:
• जलीय KOH और ऐल्कोहॉलिक KOH के अंतर को भूल जाना।
• परॉक्साइड प्रभाव की शर्त न लिखना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक चरण को तीर के ऊपर अभिकर्मक लिखकर स्पष्ट करें।
b) बहु-चरणीय अभिक्रियाओं में मध्यवर्ती उत्पाद की सही पहचान करें।
c) नाम वाली अभिक्रियाओं का उल्लेख जरूर करें।
Question 6.12: समझाइए क्यों?
(i) क्लोरोबेन्जीन का द्विध्रुव आघूर्ण साइक्लोहेक्सिल क्लोराइड की तुलना में कम होता है?
(ii) ऐल्किल हैलाइड ध्रुवीय होते हुए भी जल में immiscible (अमिश्रणीय) हैं?
(iii) ग्रीन्यार अभिकर्मक का विरचन निर्जलीय अवस्थाओं में करना चाहिए?
Answer:
(i) क्लोरोबेन्जीन में Cl-परमाणु \( \mathrm{sp}^2 \) संकरित कार्बन से जुड़ा होता है जबकि साइक्लोहेक्सिल क्लोराइड में \( \mathrm{sp}^3 \) संकरित कार्बन से। \( \mathrm{sp}^2 \) कार्बन अधिक विद्युतऋणी होता है जिससे C-Cl बंध की ध्रुवता कम हो जाती है। इसके अलावा \( -R \) प्रभाव के कारण भी क्लोरोबेन्जीन का द्विध्रुव आघूर्ण कम होता है।
(ii) ऐल्किल हैलाइड के अणु ध्रुवीय होते हैं लेकिन वे जल के अणुओं के साथ नए हाइड्रोजन आबंध जल के अणुओं जितने मजबूत नहीं बना पाते हैं, इसलिए वे जल में अमिश्रणीय होते हैं।
(iii) ग्रीन्यार अभिकर्मक \( (\mathrm{RMgX}) \) अत्यधिक क्रियाशील होते हैं और नमी (जल) के साथ तीव्रता से अभिक्रिया करके हाइड्रोकार्बन बनाते हैं, इसलिए इन्हें निर्जलीय परिस्थितियों में बनाया जाता है।
मुख्य बिंदु:
• \( \mathrm{sp}^2 \) कार्बन की विद्युतऋणता \( \mathrm{sp}^3 \) से अधिक होती है।
• हाइड्रोजन आबंध की ऊर्जा विलेयता तय करती है।
• ग्रीन्यार अभिकर्मक प्रोटॉनी विलायकों के प्रति अत्यंत संवेदनशील होते हैं।
आम गलतियाँ:
• संकरण (Hybridization) के प्रभाव को नजरअंदाज करना।
• जल में विलेयता का कारण केवल ध्रुवता मान लेना।
Exam Tips:
a) वैज्ञानिक कारणों को संक्षिप्त और सटीक बिंदुओं में लिखें।
b) \( \mathrm{sp}^2 \) और \( \mathrm{sp}^3 \) का अंतर स्पष्ट करें।
c) ग्रीन्यार अभिकर्मक की जल के साथ अभिक्रिया का समीकरण याद रखें।
Question 6.13: फ्रिऑन-12, DDT, कार्बन टेट्राक्लोराइड तथा आयोडोफॉर्म के उपयोग दीजिए।
Answer:
• फ्रिऑन-12: इसका उपयोग रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर में प्रशीतक (Refrigerant) के रूप में किया जाता है।
• DDT: यह एक अत्यंत प्रभावी कीटनाशक है जिसका उपयोग मुख्य रूप से मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों और जूँ को नियंत्रित करने के लिए किया जाता था।
• कार्बन टेट्राक्लोराइड: इसका उपयोग औद्योगिक विलायक के रूप में, ग्रीस हटाने और अग्निशामक (Pyrene) के रूप में किया जाता है।
• आयोडोफॉर्म: इसका उपयोग पूर्व में एंटीसेप्टिक (पुतिरोधी) के रूप में किया जाता था, जो मुक्त आयोडीन के कारण रोगाणुनाशक गुण प्रदर्शित करता है।
मुख्य बिंदु:
• फ्रिऑन ओजोन परत की क्षति के लिए उत्तरदायी है।
• DDT के जैव आवर्धन (Bioaccumulation) के कारण इसके उपयोग पर प्रतिबंध लगा है।
• कार्बन टेट्राक्लोराइड यकृत (Liver) के लिए हानिकारक है।
आम गलतियाँ:
• उपयोग लिखते समय सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभावों को न समझना।
• रासायनिक नाम के स्थान पर केवल व्यापारिक नाम लिखना।
Exam Tips:
a) सभी यौगिकों के उपयोग एक-एक वाक्य में स्पष्ट लिखें।
b) पर्यावरण पर इनके प्रभाव से जुड़ा अतिरिक्त बिंदु तैयार रखें।
c) रासायनिक सूत्र (जैसे \( \mathrm{CCl}_4, \mathrm{CHI}_3 \)) साथ में कोष्ठक में लिखें।
Question 6.14: निम्नलिखित प्रत्येक अभिक्रिया में बनने वाले मुख्य कार्बनिक उत्पाद की संरचना लिखिए -
(i) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{Cl} + \mathrm{NaI} \xrightarrow[\text{ऊष्मा}]{\text{एसीटोन}} \)
(ii) \( (\mathrm{CH}_3)_3\mathrm{CBr} + \mathrm{KOH} \xrightarrow[\text{ऊष्मा}]{\text{एथेनॉल}} \)
(iii) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}(\mathrm{Br})\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_3 + \mathrm{NaOH} \xrightarrow{\text{जल}} \)
(iv) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{Br} + \mathrm{KCN} \xrightarrow{\text{जलीय एथेनॉल}} \)
(v) \( \mathrm{C}_2\mathrm{H}_5\mathrm{ONa} + \mathrm{C}_2\mathrm{H}_5\mathrm{Cl} \)
(vi) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{OH} + \mathrm{SOCl}_2 \)
(vii) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}=\mathrm{CH}_2 + \mathrm{HBr} \xrightarrow{\text{परॉक्साइड}} \)
(viii) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}=\mathrm{C}(\mathrm{CH}_3)_2 + \mathrm{HBr} \)
Answer:
(i) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{I} + \mathrm{NaCl} \) (1-आयोडोप्रोपेन)
(ii) \( \mathrm{CH}_3-\mathrm{C}(\mathrm{CH}_3)=\mathrm{CH}_2 + \mathrm{KBr} + \mathrm{H}_2\mathrm{O} \) (2-मेथिलप्रोपène)
(iii) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}(\mathrm{OH})\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_3 + \mathrm{NaBr} \) (ब्यूटेन-2-ऑल)
(iv) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CN} + \mathrm{KBr} \) (प्रोपेनिनसाइनाइड)
(v) \( \mathrm{C}_2\mathrm{H}_5-\mathrm{O}-\mathrm{C}_2\mathrm{H}_5 + \mathrm{NaCl} \) (डाइएथिल ईथर)
(vi) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{Cl} + \mathrm{SO}_2 + \mathrm{HCl} \) (1-क्लोरोप्रोपेन)
(vii) \( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{Br} \) (1-ब्रोमोब्यूटेन)
(viii) \( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{C}(\mathrm{Br})(\mathrm{CH}_3)_2 \) (2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन)
मुख्य बिंदु:
• जलीय KOH प्रतिस्थापन (प्रतिस्थापन) देता है जबकि ऐल्कोहॉलिक KOH विलोपन देता है।
• परॉक्साइड की उपस्थिति में एंटी-मार्कोनीकॉफ़ योग होता है।
• विलियमसन संश्लेषण विधि से ईथर का निर्माण होता है।
आम गलतियाँ:
• जलीय और ऐल्कोहॉलिक माध्यम का प्रभाव भूल जाना।
• मार्कोनीकॉफ़ नियम में गलत उत्पाद बना देना।
Exam Tips:
a) अभिक्रिया की स्थिति (Reagents and conditions) पर विशेष ध्यान दें।
b) मुख्य उत्पाद के साथ सह-उत्पाद भी लिखने का प्रयास करें।
c) IUPAC नाम जरूर अंकित करें।
Question 6.15: निम्नलिखित अभिक्रिया की क्रिया विधि लिखिए -
\( \mathrm{n-BuBr} + \mathrm{KCN} \xrightarrow{\mathrm{EtOH-H}_2\mathrm{O}} \mathrm{n-BuCN} \)
Answer:
यह अभिक्रिया \( \mathrm{S_N2} \) क्रियाविधि का अनुसरण करती है।
इस अभिक्रिया में, नाभिकरागी \( \mathrm{CN}^- \) आक्रमण करता है। चूँकि \( \mathrm{n-BuBr} \) एक प्राथमिक ऐल्किल हैलाइड है, अत: \( \mathrm{S_N2} \) तंत्र सर्वाधिक अनुकूल होता है।
क्रियाविधि के चरण:
1. नाभिकरागी \( \mathrm{CN}^- \) कार्बन परमाणु पर पीछे की ओर से (Backside attack) आक्रमण करता है जिससे एक संक्रमण अवस्था (Transition state) बनती है।
2. साथ ही \( \mathrm{Br}^- \) समूह बाहर निकल जाता है जिससे विन्यास का प्रति¬लोपन (Inversion of configuration) होता है और n-ब्यूटाइलसाइनाइड मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• \( \mathrm{S_N2} \) एक-पदीय अभिक्रिया है जिसमें संक्रमण अवस्था बनती है।
• इसमें पीछे से आक्रमण (Backside attack) होता है।
• प्राथमिक हैलाइड इस क्रियाविधि को सबसे तेजी से दर्शाते हैं।
आम गलतियाँ:
• संक्रमण अवस्था को मध्यवर्ती (Intermediate) समझ लेना।
• पीछे के आक्रमण को चित्र में स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) संक्रमण अवस्था को बड़े कोष्ठक और आंशिक बंध (\( \dots \)) के साथ दर्शाएँ।
b) वलन (Inversion) का उल्लेख अवश्य करें।
c) तीर के निशानों ( Curly arrows) का सही प्रयोग करें।
Question 6.16: \( \mathrm{S_N2} \) प्रतिस्थापन के प्रति अभिक्रियाशीलता के आधार पर इन यौगिकों के समूहों को क्रमबद्ध कीजिए。
(i) 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन, 1-ब्रोमोपेन्टैन, 2-ब्रोमोपेन्टैन
(ii) 1-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन, 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन, 2-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन
(iii) 1-ब्रोमोब्यूटेन, 1-ब्रोमो-2,2-डाइमेथिलप्रोपेन, 1-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन, 1-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन
Answer:
(i) 1-ब्रोमोपेन्टैन > 2-ब्रोमोपेन्टैन > 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन
(ii) 1-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन > 2-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन > 2-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन
(iii) 1-ब्रोमोब्यूटेन > 1-ब्रोमो-3-मेथिलब्यूटेन > 1-ब्रोमो-2-मेथिलब्यूटेन > 1-ब्रोमो-2,2-डाइमेथिलप्रोपेन
मुख्य बिंदु:
• \( \mathrm{S_N2} \) अभिक्रियाशीलता का क्रम: प्राथमिक > द्वितीयक > तृतीयक होता है।
• त्रिविम बाधा (Steric hindrance) बढ़ने पर \( \mathrm{S_N2} \) दर घटती है।
• \( 1^\circ \) हैलाइडों में भी \( \beta \)-कार्बन पर शाखा बढ़ने से बाधा बढ़ती है।
आम गलतियाँ:
• इसे \( \mathrm{S_N1} \) का क्रम समझकर उल्टा लिख देना।
• \( 1^\circ \) यौगिकों के बीच त्रिविम बाधा के अंतर को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
• त्रिविम बाधा के सिद्धांत को स्पष्ट रूप से ध्यान रखें।
• सही बढ़ता या घटता हुआ चिन्ह (\( < \) या \( > \)) लगाएं।
• संरचना बनाकर बाधा को समझें।
Question 6.17: \( \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{CH}_2\mathrm{Cl} \) तथा \( \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{CHClC}_6\mathrm{H}_5 \) में से कौन सा यौगिक जलीय KOH से शीघ्रता से जलअपघटित होगा?
Answer:
\( \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{CHClC}_6\mathrm{H}_5 \) जलीय KOH द्वारा अधिक शीघ्रता से जलअपघटित होगा।
कारण:
यह जलअपघटन \( \mathrm{S_N1} \) क्रियाविधि द्वारा आगे बढ़ता है। अभिक्रिया के दौरान बनने वाला कार्बोकैटायन मध्यवर्ती जितना अधिक स्थायी होता है, अभिक्रिया उतनी ही तेजी से होती है।
\( \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{CHClC}_6\mathrm{H}_5 \) के जलअपघटन से एक द्वितीयक कार्बोकैटायन बनता है जो दो फेनिल समूहों के रेज़ोनेंस (अनुनाद) के कारण अत्यधिक स्थायी होता है, जबकि \( \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{CH}_2\mathrm{Cl} \) से केवल एक फेनिल समूह द्वारा स्थायित्व प्राप्त कार्बोकैटायन बनता है।
मुख्य बिंदु:
• \( \mathrm{S_N1} \) अभिक्रिया कार्बोकैटायन के स्थायित्व पर निर्भर करती है।
• अनुناद (Resonance) कार्बोकैटायन को स्थायी बनाता है।
• दो फेनिल समूह एक फेनिल समूह से अधिक स्थायित्व प्रदान करते हैं।
आम गलतियाँ:
• \( \mathrm{S_N1} \) और \( \mathrm{S_N2} \) की क्रियाविधि में भ्रमित होना।
• अनुनादी प्रभावों का सही आकलन न करना।
Exam Tips:
a) दोनों कार्बोकैटायन की संरचना बनाकर दिखाएं।
b) अनुनाद (Resonance stabilization) शब्द का उल्लेख अवश्य करें।
c) निष्कर्ष स्पष्ट रूप से दें।
Question 6.18: o- तथा m-समावयवीयों की तुलना में p-डाइक्लोरोबेन्जीन का गलनांक उच्च होता है, विवेचना कीजिए।
Answer:
p-डाइक्लोरोबेन्जीन का गलनांक उसके o- तथा m-समावयवीयों की तुलना में उच्च होता है क्योंकि p-समावयवी अधिक सममित (Symmetrical) होता है।
इस सममितता के कारण यह क्रिस्टल जालक (Crystal lattice) में अधिक अच्छी तरह से फिट बैठता है। परिणामस्वरूप, क्रिस्टल जालक को तोड़ने के लिए अधिक ऊष्मा ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे इसका गलनांक उच्च और विलेयता कम होती है।
मुख्य बिंदु:
• पैरा-समावयवी की संरचना अधिक सममित होती है।
• सममितीय पैकिंग के कारण क्रिस्टल जालक मजबूत होता है।
• उच्च गलनांक का कारण वाष्पशीलता या अंतर-आणविक बल नहीं बल्कि क्रिस्टल जालक की पैकिंग है।
आम गलतियाँ:
• गलनांक के उच्च होने का कारण केवल द्विध्रुव आघूर्ण मान लेना।
• क्रिस्टल जालक की पैकिंग की अवधारणा को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) 'सममितीय पैकिंग' (Symmetrical packing) शब्द का प्रयोग उत्तर में जरूर करें।
b) तीनों समावयवी (ortho, meta, para) की संरचना बना कर तुलना करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और तथ्यात्मक रखें।
Question 6.19: निम्नलिखित परिवर्तन कैसे संपन्न किए जा सकते हैं?
(1) प्रोपीन से प्रोपेन-1-ऑल
(2) एथिन से बूट-1-आइन
(3) 1-ब्रोमोप्रोपेन से 2-ब्रोमोप्रोपेन
(4) टॉलूईन से बेन्जिल ऐल्कोहॉल
(5) बेन्जीन से 4-ब्रोमोनिट्रोबेन्जीन
(6) बेन्जिलऐल्कोहॉल से 2-फेनिलएथेनोइक अम्ल
(7) एथेनॉल से प्रोपेननाइट्राइल
(8) ऐनिलीन से क्लोरोबेन्जीन
(9) 2-क्लोरोब्यूटेन से 3, 4-डाइमिथाइलहेक्सेन
(10) 2-मेथिल-1-प्रोपीन से 2-क्लोरो-2-मेथिलप्रोपेन
(11) एथिल क्लोराइड से प्रोपेनोइक अम्ल
(12) बूट-1-ईन से n-ब्यूटिल आयोडाइड
(13) 2-क्लोरोप्रोपेन से 1-प्रोपेनॉल
(14) आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल से आयोडोफॉर्म
(15) क्लोरोबेन्जीन से p-नाइट्रोफिनॉल
(16) 2-ब्रोमोप्रोपेन से 1-ब्रोमोप्रोपेन
(17) क्लोरोएथेन से ब्यूटेन
(18) बेन्जीन से डाइफेनिल
(19) तृतीयक-ब्यूटिलब्रोमाइड से आइसोब्यूटिल ब्रोमाइड
(20) ऐनिलीन से फेनिल आइसोसाइनाइड
Answer:
(1) प्रोपीन से प्रोपेन-1-ऑल:
\( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}=\mathrm{CH}_2 \xrightarrow[\text{परॉक्साइड}]{\mathrm{HBr}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{Br} \xrightarrow{\text{जलीय }\mathrm{KOH}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{OH} $
\)
(2) एथिन से बूट-1-आइन:
\( \mathrm{CH}\equiv\mathrm{CH} \xrightarrow{\mathrm{NaNH}_2} \mathrm{HC}\equiv\mathrm{C}^-\mathrm{Na}^+ \xrightarrow{\mathrm{C}_2\mathrm{H}_5\mathrm{Br}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{C}\equiv\mathrm{CH} $
\)
(3) 1-ब्रोमोप्रोपेन से 2-ब्रोमोप्रोपेन:
\( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{Br} \xrightarrow[\text{KOH}]{\text{ऐल्को.}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}=\mathrm{CH}_2 \xrightarrow{\mathrm{HBr}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}(\mathrm{Br})\mathrm{CH}_3 $
\)
(4) टॉलूईन से बेन्जिल ऐल्कोहॉल:
\( \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{CH}_3 \xrightarrow[\text{प्रकाश}]{\mathrm{Cl}_2/\Delta} \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{CH}_2\mathrm{Cl} \xrightarrow{\text{जलीय }\mathrm{KOH}} \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{CH}_2\mathrm{OH} $
\)
(5) बेन्जीन से 4-ब्रोमोनिट्रोबेन्जीन:
\( \mathrm{C}_6\mathrm{H}_6 \xrightarrow[\text{निर्जलीय }\mathrm{FeBr}_3]{\mathrm{Br}_2} \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{Br} \xrightarrow[\mathrm{H}_2\mathrm{SO}_4]{\mathrm{HNO}_3} p-\mathrm{BrC}_6\mathrm{H}_4\mathrm{NO}_2 $
\)
(6) बेन्जिलऐल्कोहॉल से 2-फेनिलएथेनोइक अम्ल:
\( \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{CH}_2\mathrm{OH} \xrightarrow{\mathrm{SOCl}_2} \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{CH}_2\mathrm{Cl} \xrightarrow{\mathrm{KCN}} \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{CH}_2\mathrm{CN} \xrightarrow[\text{जलअपघटन}]{\mathrm{H}^+} \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{CH}_2\mathrm{COOH} $
\)
(7) एथेनॉल से प्रोपेननाइट्राइल:
\( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{OH} \xrightarrow{\mathrm{PBr}_3} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{Br} \xrightarrow{\mathrm{KCN}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CN} $
\)
(8) ऐनिलीन से क्लोरोबेन्जीन (सैंडमेयर अभिक्रिया):
\( \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{NH}_2 + \mathrm{HNO}_2 \xrightarrow{273-278\mathrm{K}} \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{N}_2^+\mathrm{Cl}^- \xrightarrow{\mathrm{CuCl}/\mathrm{HCl}} \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{Cl} $
\)
(9) 2-क्लोरोब्यूटेन से 3,4-डाइमिथाइलहेक्सेन (वुर्ट्ज़ अभिक्रिया):
\( 2\mathrm{CH}_3\mathrm{CH}(\mathrm{Cl})\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_3 + 2\mathrm{Na} \xrightarrow{\text{शुष्क ईथर}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}(\mathrm{CH}_3)\mathrm{CH}(\mathrm{CH}_3)\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_3 + 2\mathrm{NaCl} $
\)
(10) 2-मेथिल-1-प्रोपीन से 2-क्लोरो-2-मेथिलप्रोपेन:
\( (\mathrm{CH}_3)_2\mathrm{C}=\mathrm{CH}_2 + \mathrm{HCl} \xrightarrow{\text{मार्कोनीकॉफ़}} (\mathrm{CH}_3)_3\mathrm{CCl} $
\)
(11) एथिल क्लोराइड से प्रोपेनोइक अम्ल:
\( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{Cl} \xrightarrow{\mathrm{KCN}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CN} \xrightarrow{\mathrm{H}_3\mathrm{O}^+} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{COOH} $
\)
(12) बूट-1-ईन से n-ब्यूटिल आयोडाइड:
\( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}=\mathrm{CH}_2 \xrightarrow[\text{परॉक्साइड}]{\mathrm{HBr}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{Br} \xrightarrow[\text{एसीटोन}]{\mathrm{NaI}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{I} $
\)
(13) 2-क्लोरोप्रोपेन से 1-प्रोपेनॉल:
\( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}(\mathrm{Cl})\mathrm{CH}_3 \xrightarrow[\Delta]{\text{ऐल्को. }\mathrm{KOH}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}=\mathrm{CH}_2 \xrightarrow[\text{परॉक्साइड}]{\mathrm{HBr}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{Br} \xrightarrow{\text{जलीय }\mathrm{KOH}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{OH} $
\)
(14) आइसोप्रोपिल ऐल्कोहॉल से आयोडोफॉर्म:
\( (\mathrm{CH}_3)_2\mathrm{CHOH} \xrightarrow{\mathrm{CrO}_3} \mathrm{CH}_3\mathrm{COCH}_3 \xrightarrow{\mathrm{NaOI}} \mathrm{CHI}_3 $
\)
(15) क्लोरोबेन्जीन से p-नाइट्रोफिनॉल:
\( \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{Cl} \xrightarrow[\mathrm{H}_2\mathrm{SO}_4]{\mathrm{HNO}_3} p-\mathrm{ClC}_6\mathrm{H}_4\mathrm{NO}_2 \xrightarrow[\text{तनु }\mathrm{HCl}]{\mathrm{NaOH}, 433\mathrm{K}} p-\mathrm{HOC}_6\mathrm{H}_4\mathrm{NO}_2 $
\)
(16) 2-ब्रोमोप्रोपेन से 1-ब्रोमोप्रोपेन:
\( \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}(\mathrm{Br})\mathrm{CH}_3 \xrightarrow[\Delta]{\text{ऐल्को. }\mathrm{KOH}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}=\mathrm{CH}_2 \xrightarrow[\text{परॉक्साइड}]{\mathrm{HBr}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{Br} $
\)
(17) क्लोरोएथेन से ब्यूटेन (वुर्ट्ज़ अभिक्रिया):
\( 2\mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{Cl} + 2\mathrm{Na} \xrightarrow{\text{शुष्क ईथर}} \mathrm{CH}_3\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_2\mathrm{CH}_3 + 2\mathrm{NaCl} $
\)
(18) बेन्जीन से डाइफेनिल (फिटिग अभिक्रिया):
\( 2\mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{Br} + 2\mathrm{Na} \xrightarrow{\text{शुष्क ईथर}} \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5-\mathrm{C}_6\mathrm{H}_5 + 2\mathrm{NaBr} $
\)
(19) तृतीयक-ब्यूटिलब्रोमाइड से आइसोब्यूटिल ब्रोमाइड:
\( (\mathrm{CH}_3)_3\mathrm{CBr} \xrightarrow{\text{ऐल्को. }\mathrm{KOH}} (\mathrm{CH}_3)_2\mathrm{C}=\mathrm{CH}_2 \xrightarrow[\text{परॉक्साइड}]{\mathrm{HBr}} (\mathrm{CH}_3)_2\mathrm{CHCH}_2\mathrm{Br} $
\)
(20) ऐनिलीन से फेनिल आइसोसाइनाइड (कार्विलामीन अभिक्रिया):
\( \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{NH}_2 + \mathrm{CHCl}_3 + 3\mathrm{KOH} \xrightarrow{\Delta} \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{NC} + 3\mathrm{KCl} + 3\mathrm{H}_2\mathrm{O} $
मुख्य बिंदु:
• कार्बन श्रृंखला की लंबाई बढ़ाने के लिए KCN या वुर्ट्ज़ अभिक्रिया का प्रयोग करते हैं।
• मार्कोनीकॉफ़ और एंटी-मार्कोनीकॉफ़ नियमों का उपयोग करके हैलाइड की स्थिति बदली जा सकती है।
• एरोमैटिक रूपांतरणों में डाइएजोनियम लवण एक महत्वपूर्ण मध्यवर्ती है।
आम गलतियाँ:
• अभिकर्मकों (Reagents) के क्रम को उलट देना।
• ब्यूटिल या प्रोपाइल समूहों में मार्कोनीकॉफ़ नियम का गलत अनुप्रयोग।
Exam Tips:
a) प्रत्येक परिवर्तन को चरणबद्ध तरीके से तीर के निशान के साथ लिखें।
b) तापमान और उत्प्रेरक की सही स्थिति दर्शाइए।
c) नाम वाली अभिक्रियाओं को ठीक से याद रखें।
Question 6.20: ऐलिलिक हैलाइड की जलीय KOH से अभिक्रिया द्वारा ऐल्कोहॉल बनती है लेकिन ऐल्कोहॉलिक KOH की उपस्थिति में ऐल्कीन मुख्य उत्पाद के रूप में प्राप्त होती है। समझाइए।
Answer:
जलीय घोल में KOH लगभग पूरी तरह से आयनित होकर \( \mathrm{OH}^- \) आयन देता है। \( \mathrm{OH}^- \) आयन एक मजबूत नाभिकरागी है जो ऐलिलिक हैलाइड को ऐल्कोहॉल बनाने के लिए प्रतिस्थापन अभिक्रिया करता है:
\( \mathrm{R}-\mathrm{Cl} + \mathrm{KOH}_{(aq)} \rightarrow \mathrm{R}-\mathrm{OH} + \mathrm{KCl} $
\)
दूसरी ओर, KOH के ऐल्कोहॉलिक विलयन में ऐल्क्साइडायन \( (\mathrm{RO}^-) \) आयन होता है, जो एक प्रबल क्षारक है। इस प्रकार, यह ऐलिलिक क्लोराइड के \( \beta \)-कार्बन से हाइड्रोजन को पृथक कर सकता है और \( \mathrm{HCl} \) के एक अणु को हटाकर एक ऐल्कीन बना सकता है:
\( \mathrm{R-CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{Cl} + \mathrm{KOH}_{(alc)} \rightarrow \mathrm{R-CH}=\mathrm{CH}_2 + \mathrm{KCl} + \mathrm{H}_2\mathrm{O} $
मुख्य बिंदु:
• जलीय KOH नाभिकरागी प्रतिस्थापन को बढ़ावा देता है।
• ऐल्कोहॉलिक KOH विलोपन (Elimination) अभिक्रिया को बढ़ावा देता है।
• \( \mathrm{RO}^- \) आयन \( \mathrm{OH}^- \) की तुलना में अधिक प्रबल क्षारक होता है।
आम गलतियाँ:
• जलीय और ऐल्कोहॉलिक माध्यम की भूमिका में अंतर न समझना।
• प्रतिस्थापन और विलोपन अभिक्रियाओं को आपस में मिला देना।
Exam Tips:
a) दोनों स्थितियों के लिए रासायनिक समीकरण अवश्य लिखें।
b) 'नाभिकरागी' और 'क्षारक' शब्दों का सही संदर्भ में प्रयोग करें।
c) उत्तर को बिंदुवार समझाएं।
Question 6.21: प्राथमिक ऐलिलिक हैलाइड \( \mathrm{C}_4\mathrm{H}_9\mathrm{Br} \) (क), ऐल्कोहॉलिक KOH में अभिक्रिया द्वारा यौगिक (ख) देता है। यौगिक 'ख' के साथ अभिक्रिया से यौगिक 'ग' देता है जो कि यौगिक 'क' का समावयवी है। जब यौगिक 'क' की अभिक्रिया सोडियम धातु से होती है तो यौगिक 'घ' \( \mathrm{C}_8\mathrm{H}_{18} \) बनता है, जो कि ब्यूटिल ब्रोमाइड की सोडियम से अभिक्रिया द्वारा बने उत्पाद से भिन्न है। यौगिक 'क' का संरचना सूत्र दीजिए तथा सभी अभिक्रियाओं की समीकरण दीजिए।
Answer:
दो प्राथमिक ऐलिलिक हैलाइड जिनका सूत्र \( \mathrm{C}_4\mathrm{H}_9\mathrm{Br} \) है, वे n-ब्यूटिल ब्रोमाइड और आइसोब्यूटिल ब्रोमाइड हैं।
चूँकि यौगिक (क) की सोडियम के साथ प्रतिक्रिया करने पर बनने वाला यौगिक (घ), n-ब्यूटिल ब्रोमाइड की सोडियम के साथ अभिक्रिया (वुर्ट्ज़ अभिक्रिया) से भिन्न है, इसलिए यौगिक (क) आइसोब्यूटिल ब्रोमाइड होना चाहिए:
\( (\mathrm{CH}_3)_2\mathrm{CH}-\mathrm{CH}_2-\mathrm{Br} \) (आइसोब्यूटिल ब्रोमाइड)
अभिक्रियाएँ:
1. \( (\mathrm{CH}_3)_2\mathrm{CH}-\mathrm{CH}_2-\mathrm{Br} \xrightarrow[\Delta]{\text{ऐल्को. }\mathrm{KOH}} (\mathrm{CH}_3)_2\mathrm{C}=\mathrm{CH}_2 + \mathrm{HBr} \) (यौगिक ख: 2-मेथिलप्रोपीन)
2. यौगिक (ख) की HBr के साथ अभिक्रिया:
\( (\mathrm{CH}_3)_2\mathrm{C}=\mathrm{CH}_2 + \mathrm{HBr} \xrightarrow{\text{मार्कोनीकॉफ़}} (\mathrm{CH}_3)_3\mathrm{C}-\mathrm{Br} \) (यौगिक ग: 2-ब्रोमो-2-मेथिलप्रोपेन)
3. यौगिक (क) की सोडियम के साथ अभिक्रिया:
\( 2(\mathrm{CH}_3)_2\mathrm{CH}-\mathrm{CH}_2\mathrm{Br} + 2\mathrm{Na} \xrightarrow{\text{शुष्क ईथर}} (\mathrm{CH}_3)_2\mathrm{CH}-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}(\mathrm{CH}_3)_2 + 2\mathrm{NaBr} \) (यौगिक घ: 2,5-डाइमेथिलहेक्सेन)
मुख्य बिंदु:
• \( \mathrm{C}_4\mathrm{H}_9\mathrm{Br} \) के प्राथमिक समावयवी n-ब्यूटिल और आइसोब्यूटिल हैं।
• वुर्ट्ज़ अभिक्रिया सममित या असमित उच्च ऐल्केन बनाती है।
• मार्कोनीकॉफ़ नियम के अनुसार HBr का योग होता है।
आम गलतियाँ:
• यौगिकों की सही पहचान करने में गलती करना।
• वुर्ट्ज़ उत्पाद के नामकरण में चूक होना।
Exam Tips:
a) प्रश्न में दी गई शर्तों (जैसे \( \mathrm{C}_8\mathrm{H}_{18} \) का भिन्न होना) का विश्लेषण करके शुरुआत करें।
b) सभी यौगिकों (क, ख, ग, घ) को स्पष्ट रूप से नाम दें।
c) समीकरणों को संतुलित लिखें।
Question 6.22: तब क्या होता है जब -
(i) n-ब्यूटिल क्लोराइड को ऐल्कोहॉलिक KOH के साथ अभिकृत किया जाता है?
(ii) शुष्क ईथर की उपस्थिति में ब्रोमोबेन्जीन की अभिक्रिया मैग्नीशियम से होती है?
(iii) क्लोरोबेन्जीन का जलअपघटन किया जाता है?
(iv) एथिल क्लोराइड की अभिक्रिया जलीय KOH से होती है?
(v) शुष्क ईथर की उपस्थिति में मैथिल ब्रोमाइड की अभिक्रिया सोडियम से होती है?
(vi) मैथिल क्लोराइड की अभिक्रिया KCN से होती है?
Answer:
(i) जब n-ब्यूटिल क्लोराइड को ऐल्कोहॉलिक KOH के साथ उपचारित किया जाता है, तो बूट-1-ईन का निर्माण होता है। यह अभिक्रिया एक विहाइड्रोहैलोजनन (विस्थापन) अभिक्रिया है:
\( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}_2-\mathrm{Cl} \xrightarrow[\Delta]{\text{ऐल्को. }\mathrm{KOH}} \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{CH}=\mathrm{CH}_2 + \mathrm{KCl} + \mathrm{H}_2\mathrm{O} $
\)
(ii) जब शुष्क ईथर की उपस्थिति में ब्रोमोबेन्जीन की Mg के साथ क्रिया की जाती है, तो फेनिलमैग्नीशियम ब्रोमाइड (ग्रीन्यार अभिकर्मक) बनता है:
\( \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{Br} + \mathrm{Mg} \xrightarrow{\text{शुष्क ईथर}} \mathrm{C}_6\mathrm{H}_5\mathrm{MgBr} $
\)
(iii) क्लोरोबेन्जीन का सामान्य परिस्थितियों में जलअपघटन नहीं होता है। हालांकि, उच्च ताप (\( 623\,\mathrm{K} \)) तथा उच्च दाब (\( 300\,\mathrm{atm} \)) पर जलीय NaOH के साथ गर्म करने पर यह फिनॉल बनाता है।
(iv) जब एथिल क्लोराइड को जलीय KOH से उपचारित किया जाता है, तो यह एथेनॉल बनाने के लिए जलअपघटन से गुजरता है:
\( \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{Cl} + \mathrm{KOH}_{(aq)} \rightarrow \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_2-\mathrm{OH} + \mathrm{KCl} $
\)
(v) जब शुष्क ईथर की उपस्थिति में मैथिल ब्रोमाइड की सोडियम के साथ क्रिया की जाती है, तो एथेन बनता है। इस अभिक्रिया को वुर्ट्ज़ अभिक्रिया कहते हैं:
\( 2\mathrm{CH}_3\mathrm{Br} + 2\mathrm{Na} \xrightarrow{\text{शुष्क ईथर}} \mathrm{CH}_3-\mathrm{CH}_3 + 2\mathrm{NaBr} $
\)
(vi) जब मैथिल क्लोराइड को KCN के साथ उपचारित किया जाता है, तो यह मैथिल साइनाइड (ऐसीटोनाइट्राइल) देने के लिए नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया से गुजरता है:
\( \mathrm{CH}_3-\mathrm{Cl} + \mathrm{KCN} \rightarrow \mathrm{CH}_3-\mathrm{CN} + \mathrm{KCl} $
मुख्य बिंदु:
• ऐल्कोहॉलिक KOH विलोपन करता है जबकि जलीय KOH प्रतिस्थापन करता है।
• ग्रीन्यार अभिकर्मक बनाने के लिए शुष्क ईथर अनिवार्य है।
• ऐरिल हैलाइड सामान्य परिस्थितियों में नाभिकरागी प्रतिस्थापन के प्रति निष्क्रिय होते हैं।
आम गलतियाँ:
• जलीय और ऐल्कोहॉलिक KOH के उत्पादों को आपस में बदलना।
• वुर्ट्ज़ अभिक्रिया में गलत ऐल्केन बनाना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक प्रश्न के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण अवश्य दें।
b) अभिक्रिया का प्रकार (जैसे विलोपन, प्रतिस्थापन) संक्षेप में बताएं।
c) अभिकर्मकों की भौतिक अवस्था या माध्यम स्पष्ट लिखें।
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