Solutions for Class 12 Chemistry: Chapter 05 उपसहसंयोजन यौगिक
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Practice Class 12 Chemistry Solutions: Chapter 05 उपसहसंयोजन यौगिक
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Question 5.1: निम्नलिखित उपसहसंयोजन यौगिकों के सूत्र लिखिए -
(i) टेट्राऐमीनडाइअक्वाकोबाल्ट (III) क्लोराइड
(ii) पोटैशियम टेट्रासायनोडिऑक्सोमेट्रेट (II)
(iii) ट्रिस(एथेन-1, 2-डाइऐमीन)कोबाल्ट (III) क्लोराइड
(iv) ऐमीनब्रोमिडोकलोरडोनाइट्रेट-N-प्लैटिनम (II)
(v) डाइक्लोरोबिस(एथेन-1, 2-डाइऐमीन)प्लैटिनम (IV) नाइट्रेट
(vi) आयरन (III) हेक्सासायनिडोफेरेट (II)
Answer:
दिए गए IUPAC नामों के आधार पर उपसहसंयोजन यौगಿಕों के सूत्र निम्नलिखित हैं:
(i) \( [Co(H_2O)_2(NH_3)_4]Cl_3 \)
(ii) \( K_2[Ni(CN)_4] \)
(iii) \( [Cr(en)_3]Cl_3 \)
(iv) \( [Pt(NH_3)BrCl(NO_2)]^- \)
(v) \( [PtCl_2(en)_2](NO_3)_2 \)
(vi) \( Fe_4[Fe(CN)_6]_3 \)
मुख्य बिंदु:
• उपसहसंयोजन मंडल को बड़े कोष्ठक \( [ ] \) के अंदर लिखा जाता है।
• धनायन को पहले और ऋणायन को बाद में लिखा जाता है।
• लिगैंडों को वर्णमाला क्रम (Alphabetical order) में व्यवस्थित किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• लिगैंडों का वर्णमाला क्रम गलत लिखना।
• उपसहसंयोजन मंडल के बाहर आयनों की संख्या का सही संतुलन न बनाना।
• एथेन-1, 2-डाइऐमीन के लिए 'en' का प्रयोग करते समय कोष्ठक न लगाना।
Exam Tips:
a) लिगैंडों के नाम लिखते और पढ़ते समय एथिलएमीन और डाइऐमीन का अंतर स्पष्ट रखें।
b) ऑक्सीकरण अवस्था को रोमन अंकों मेंष्ठक के भीतर सही से दर्शाएँ।
c) आयनिक यौगिकों में कुल आवेश को संतुलित करना न भूलें।
Question 5.2: निम्नलिखित उपसहसंयोजन यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए -
(i) \( [Co(NH_3)_6]Cl_3 \)
(ii) \( [Co(NH_3)_5Cl]Cl_2 \)
(iii) \( [Fe(CN)_6] \)
(iv) \( K_3[Fe(C_2O_4)_3] \)
(v) \( K_2[PdCl_4] \)
(vi) \( [Pt(NH_3)_2Cl(NH_2CH_3)]Cl \)
Answer:
दिए गए उपसहसंयोजन यौगिकों के IUPAC नाम निम्नलिखित हैं:
(i) हेक्साऐमीनकोबाल्ट (III) क्लोराइड
(ii) पेंटाऐमीनक्लोरिडोकोबाल्ट (III) क्लोराइड
(iii) पोटैशियम हेक्सासायनिडोफेरेट (III) [नोट: यौगिक में पोटैशियम होना चाहिए, यहाँ संकुल आयन \( [Fe(CN)_6]^{3-} \) दिया गया है]
(iv) पोटैशियम ट्रिऑक्सैलेटोफेरेट (III)
(v) पोटैशियम टेट्राक्लोरोडोपलाडेट (II)
(vi) डाइऐमीनक्लोरिडो (मिथाइलऐमीन)प्लैटिनम (II) क्लोराइड
मुख्य बिंदु:
• सबसे पहले धनायन का नाम लिखा जाता है, उसके बाद ऋणायन का।
• लिगैंडों का नामकरण अंग्रेजी वर्णमाला के क्रमानुसार होता है।
• धातु की ऑक्सीकरण संख्या को कोष्ठक में रोमन अंकों में लिखा जाता है।
आम गलतियाँ:
• क्लोराइड के लिए 'क्लोरो' के स्थान पर 'क्लोरिडो' IUPAC पद्धति के अनुसार प्रयोग न करना।
• उदासीन लिगैंडों और आयनिक लिगैंडों के नामों में भ्रमित होना।
• धातु के नाम के अंत में 'ऐट' (ate) प्रत्यय लगाने में गलती करना जब संकुल ऋणायनी हो।
Exam Tips:
a) IUPAC नाम लिखते समय वर्णमाला के क्रम का विशेष ध्यान रखें।
b) धातु की ऑक्सीकरण अवस्था की गणना सही से करके ही रोमन अंक लिखें।
c) संकुल पर आवेश (धनात्मक या ऋणात्मक) की पहचान पहले ही कर लें।
Question 5.3: निम्नलिखित संकुलों द्वारा प्रदर्शित समावयवता का प्रकार बतलाइए तथा इन समावयਵों की संरचनाएँ बनाइए -
(i) \( K[Cr(H_2O)_2(C_2O_4)_2] \)
(ii) \( [Co(en)_3]Cl_3 \)
(iii) \( [Co(NH_3)_5(NO_2)](NO_3)_2 \)
(iv) \( [Pt(NH_3)(H_2O)Cl_2] \)}
Answer:
(i) \( K[Cr(H_2O)_2(C_2O_4)_2] \) के लिए दोनों ज्यामितीय (समपक्ष और विपक्ष) समावयव तथा ध्रुवीय रूप में सक्रियता के कारण ध्रुवण घूर्णकता प्रदर्शित होती है।
(ii) \( [Co(en)_3]Cl_3 \) के लिए दो प्रकाशिक समावयवी (d और l रूप) मौजूद हैं।
(iii) \( [Co(NH_3)_5(NO_2)](NO_3)_2 \) बन्धनी (Linkage) समावयवता के साथ-साथ आयनन समावयवता भी प्रदर्शित करता है।
(iv) \( [Pt(NH_3)(H_2O)Cl_2] \) ज्यामितीय (समपक्ष और विपक्ष) समावयवता प्रदर्शित करता है।
मुख्य बिंदु:
• समपक्ष (Cis) रूप में समान लिगैंड पास-पास होते हैं और विपक्ष (Trans) रूप में आमने-सामने होते हैं।
• प्रकाशिक समावयव ध्रुवण घूर्णक (d और l) रूप होते हैं जो एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिम्ब होते हैं।
• बन्धनी समावयवता उभयंतुक लिगैंड (जैसे \( NO_2^- \)) की उपस्थिति के कारण होती है।
आम गलतियाँ:
• समपक्ष और विपक्ष रूप बनाते समय ज्यामितीय स्थिति को गलत दर्शाना।
• प्रकाशिक समावयवों को असंतमित मान लेना जबकि वे असममित (Chiral) होते हैं।
• बन्धनी और आयनन समावयवता में अंतर न समझ पाना।
Exam Tips:
a) संरचनाएँ बनाते समय केंद्रीय धातु और लिगैंड्स के बीच के बंधनों को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
b) प्रकाशिक समावयवों के लिए दर्पण प्रतिबिम्ब (Mirror image) बनाना न भूलें।
c) समावयवता के प्रकार का नाम हमेशा रासायनिक नियमों के आधार पर ही लिखें।
Question 5.4: इसका प्रमाण दीजिए कि \( [Co(NH_3)_5Cl]SO_4 \) तथा \( [Co(NH_3)_5SO_4]Cl \) आयनन समावयव हैं।
Answer:
जब इन आयनन समावयवों को जल में घोला जाता है, तो वे आयनित होकर विभिन्न आयन देते हैं, जो अलग-अलग अभिकर्मकों के साथ अलग-अलग उत्पाद देने के लिए अलग-अलग प्रतिक्रिया करते हैं:
\( [Co(NH_3)_5Cl]SO_4 + Ba^{2+} \to BaSO_4 \downarrow \) (सफेद अवक्षेप)
\( [Co(NH_3)_5Cl]SO_4 + Ag^+ \to \) कोई अभिक्रिया नहीं
\( [Co(NH_3)_5SO_4]Cl + Ba^{2+} \to \) कोई अभिक्रिया नहीं
\( [Co(NH_3)_5SO_4]Cl + Ag^+ \to AgCl \downarrow \) (सफेद अवक्षेप)
मुख्य बिंदु:
• आयनन समावयव विलयन में भिन्न-भिन्न आयन प्रदान करते हैं।
• \( Ba^{2+} \) आयन सल्फेट आयन (\( SO_4^{2-} \)) के साथ सफेद अवक्षेप बनाता है।
• \( Ag^+ \) आयन क्लोराइड आयन (\( Cl^- \)) के साथ सफेद अवक्षेप बनाता है।
आम गलतियाँ:
• अभिकर्मकों की पहचान में गलती करना कि कौन सा आयन किसके साथ अवक्षेप देता है।
• रासायनिक समीकरणों को संतुलित न करना।
• संकुल के भीतर और बाहर के आयनों को एक समान मान लेना।
Exam Tips:
a) परीक्षणों को स्पष्ट करने के लिए रासायनिक समीकरण अवश्य लिखें।
b) अवक्षेप के रंग (जैसे सफेद अवक्षेप) को उत्तर में जरूर उल्लेखित करें।
c) आयनन समावयवता की परिभाषा को उदाहरण सहित संक्षिप्त में समझाएँ।
Question 5.5: संयोजकता आबंध सिद्धांत के आधार पर समझाइए कि वर्ग समतलीय संरचना वाला \( [Ni(CN)_4]^{2-} \) आयन प्रतिचुंबकीय है तथा चतुष्फलकीय ज्यामिति वाला \( [NiCl_4]^{2-} \) आयन अनुचुंबकीय है।
Answer:
\( Ni^{+2} \) की ऑक्सीकरण अवस्था \( +2 \) है, अर्थात \( d^8 \) विन्यास है।
\( CN^- \) आयन एक प्रबल क्षेत्र लिगैंड है, यह अप्रयुग्मित \( 3d \) इलेक्ट्रॉनों के युग्म का कारण बनता है।
यह \( dsp^2 \) संकरण से गुजरता है। सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं, इसलिए यह प्रतिचुंबकीय है।
दूसरी ओर, \( Cl^- \) आयन एक कमजोर क्षेत्र लिगैंड है। इसलिए यह अप्रयुग्मित \( 3d \) इलेक्ट्रॉनों की जोड़ी की ओर नहीं ले जाता है।
यह \( sp^3 \) संकरण से गुजरता है और इसमें 2 अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं, इसलिए यह अनुचुंबकीय है।
मुख्य बिंदु:
• प्रबल क्षेत्र लिगैंड (\( CN^- \)) इलेक्ट्रॉनों का युग्मन (Pairing) कराते हैं।
• दुर्बल क्षेत्र लिगैंड (\( Cl^- \)) इलेक्ट्रॉनों का युग्मन नहीं कराते हैं।
• \( dsp^2 \) संकरण वर्ग समतलीय ज्यामिति और \( sp^3 \) संकरण चतुष्फलकीय ज्यामिति देता है।
आम गलतियाँ:
• प्रबल और दुर्बल क्षेत्र लिगैंड के प्रभाव में भ्रमित होना।
• संकरण और ज्यामिति का सही संबंध न लिख पाना।
• अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना में त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) \( d \)-कक्षकों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का आरेख (Diagram) परीक्षा में जरूर बनाएं।
b) चुम्बकीय प्रकृति (प्रतिचुंबकीय/अनुचुंबकीय) का कारण अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति या अनुपस्थिति को स्पष्ट रूप से बताएं।
c) VBT (Valence Bond Theory) के मुख्य चरणों को क्रमबद्ध लिखें।
Question 5.6: \( [NiCl_4]^{2-} \) अनुचुंबकीय है जबकि \( [Ni(CO)_4] \) प्रतिचुंबकीय है यद्यपि दोनों चतुष्फलकीय हैं। क्यों?
Answer:
दोनों \( [NiCl_4]^{2-} \) और \( [Ni(CO)_4] \) चतुष्फलकीय हैं, परंतु उनके चुंबकीय लक्षण भिन्न हैं।
\( [NiCl_4]^{2-} \) में \( Ni \) की ऑक्सीकरण अवस्था \( +2 \) है और इसका विन्यास \( 3d^8 \) है। यहाँ \( Cl^- \) एक कमजोर क्षेत्र लिगैंड है और यह अप्रयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की जोड़ी का कारण नहीं बनता है। इसलिए, \( [NiCl_4]^{2-} \) अनुचुंबकीय है।
दूसरी ओर, \( [Ni(CO)_4] \) में \( Ni \) शून्य ऑक्सीकरण अवस्था में है और इसका विन्यास \( 3d^8 4s^2 \) है।
लेकिन \( CO \) एक प्रबल क्षेत्र लिगैंड है। इसलिए, यह युग्मित \( 3d \) इलेक्ट्रॉनों के युग्म का कारण बनता है। इसके अलावा, यह \( 4s \) इलेक्ट्रॉनों को \( 3d \) कक्षक में स्थानांतरित करने का कारण बनता है, जिससे \( sp^3 \) संकरण को जन्म देता है। चूँकि इस स्थिति में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन मौजूद नहीं है, अतः \( [Ni(CO)_4] \) प्रतिचुंबकीय है।
मुख्य बिंदु:
• \( CO \) एक प्रबल क्षेत्र लिगैंड है जो इलेक्ट्रॉनों का युग्मन कराता है।
• \( Cl^- \) एक दुर्बल क्षेत्र लिगैंड है जो युग्मन नहीं कराता है।
• धातु की ऑक्सीकरण अवस्था चुंबकीय गुण को प्रभावित करती है।
आम गलतियाँ:
• \( CO \) और \( Cl^- \) दोनों के लिगैंड स्वभाव में अंतर न समझ पाना।
• \( Ni(CO)_4 \) में निकेल की ऑक्सीकरण अवस्था शून्य होने पर भी गलत विन्यास लिखना।
• अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति को अनदेखा करना।
Exam Tips:
• दोनों संकुलों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आरेख तुलना करके बनाएं।
• प्रबल लिगैंड के प्रभाव को स्पष्ट रूप से वाक्यों में दर्शाएं।
• उत्तर लिखते समय संकरण और अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या का मुख्य रूप से उल्लेख करें।
Question 5.7: \( [Fe(H_2O)_6]^{3+} \) प्रबल अनुचुंबकीय है जबकि \( [Fe(CN)_6]^{3-} \) दुर्बल अनुचुंबकीय है। समझाइए।
Answer:
दोनों \( [Fe(H_2O)_6]^{3+} \) और \( [Fe(CN)_6]^{3-} \) में समान Fe\( 3^+ \) ऑक्सीकरण अवस्था में मौजूद है, अर्थात \( d^5 \) विन्यास में है।
\( CN^- \) एक प्रबल क्षेत्र लिगैंड है, यह अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों के युग्म का कारण बनता है। इसलिए, \( d \)-कक्षक में केवल एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन बचता है।
इसलिए, \( \mu = \sqrt{n(n+2)} = \sqrt{1(1+2)} = \sqrt{3} = 1.732 \) BM
दूसरी ओर, \( H_2O \) एक दुर्बल क्षेत्र लिगैंड है। इसलिए, यह इलेक्ट्रॉनों की जोड़ी का कारण नहीं बन सकता है। इसका अर्थ है कि अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या 5 है।
इसलिए, \( \mu = \sqrt{n(n+2)} = \sqrt{5(5+2)} = \sqrt{35} = 6 \) BM
इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि \( [Fe(H_2O)_6]^{3+} \) प्रबल अनुचुंबकीय है, जबकि \( [Fe(CN)_6]^{3-} \) दुर्बल अनुचुंबकीय है।
मुख्य बिंदु:
• चुंबकीय आघूर्ण की गणना सूत्र \( \mu = \sqrt{n(n+2)} \) द्वारा की जाती है।
• अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या (\( n \)) जितनी अधिक होगी, चुंबकीय आघूर्ण उतना ही अधिक होगा।
• \( CN^- \) और \( H_2O \) के क्षेत्र की प्रबलता में अंतर होता है।
आम गलतियाँ:
• चुंबकीय आघूर्ण का सूत्र गलत लिखना या मानों की गणना में गलती करना।
• \( d^5 \) विन्यास में प्रबल और दुर्बल लिगैंड के कारण अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या गलत निकालना।
• मात्रक (BM - बोर मैग्नेटॉन) लिखना भूल जाना।
Exam Tips:
a) चुंबकीय आघूर्ण की गणना के चरणों को स्पष्ट रूप से दिखाएं।
b) \( n \) के मान को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें।
c) तुलनात्मक अध्ययन को दर्शाने के लिए दोनों संकुलों को अलग-अलग पैराग्राफ या खंडों में हल करें।
Question 5.8: समझाइए कि \( [Co(NH_3)_6]^{3+} \) एक आंतरिक कक्षीय संकुल है जबकि \( [Ni(NH_3)_6]^{2+} \) एक बाह्य कक्षीय संकुल है।
Answer:
\( [Co(NH_3)_6]^{3+} \) में कोबाल्ट की ऑक्सीकरण अवस्था \( +3 \) है और कोबाल्ट का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( d^6 \) है। \( NH_3 \) एक मजबूत क्षेत्र लिगैंड होने के कारण युग्मन का कारण बनता है। इसलिए, \( Ni \) \( d^2sp^3 \) संकरण से गुजर सकता है।
इसलिए, यह एक आंतरिक कक्षीय संकुल है।
दूसरी ओर, \( [Ni(NH_3)_6]^{2+} \) में निकल की ऑक्सीकरण अवस्था \( +2 \) है और निकल का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( d^8 \) है। अगर \( NH_3 \) युग्मन का कारण बनता है, तो केवल एक \( 3d \) कक्षक खाली होता है। इस प्रकार, यह \( d^2sp^3 \) संकरण से नहीं गुजर सकता है। इसलिए, यह \( sp^3d^2 \) संकरण से गुजरता है।
इसलिए, यह एक बाहरी कक्षीय परिसर बनाता है।
मुख्य बिंदु:
• आंतरिक कक्षीय संकुल में अंदर के \( d \)-कक्षकों (\( (n-1)d \)) का संकरण में प्रयोग होता है।
• बाह्य कक्षीय संकुल में बाहर के \( d \)-कक्षकों (\( nd \)) का संकरण में प्रयोग होता है।
• \( d^2sp^3 \) आंतरिक और \( sp^3d^2 \) बाह्य संकुल को दर्शाता है।
आम गलतियाँ:
• आंतरिक और बाह्य कक्षीय संकुल के संकरण प्रकारों में भ्रम होना।
• \( d^8 \) विन्यास में आंतरिक \( d \)-कक्षकों की उपलब्धता की गलत व्याख्या करना।
• धातु आयन की सही ऑक्सीकरण अवस्था न निकालना।
Exam Tips:
a) संकरण के प्रकार (\( d^2sp^3 \) और \( sp^3d^2 \)) को अपने उत्तर में मुख्य रूप से हाइलाइट करें।
b) इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के बॉक्स आरेख (Box diagrams) बनाकर समझाएं।
c) धातु आयन के आवेश और लिगैंड के प्रभाव का स्पष्ट उल्लेख करें।
Question 5.9: वर्ग समतलीय \( [Pt(CN)_4]^{2-} \) आयन में अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बतलाइए।
Answer:
इस संकुल में, \( Pt^{+2} \) अवस्था में है। यह एक वर्गाकार समतलीय संरचना बनाता है। इसका अर्थ यह है कि यह \( dsp^2 \) संकरण से गुजरता है। अब, \( Pt^{+2} \) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( 5d^8 \) है।
\( CN^- \) प्रबल क्षेत्र लिगैंड होने के कारण अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों का युग्मन होता है। इसलिए, \( [Pt(CN)_4]^{2-} \) में कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है।
मुख्य बिंदु:
• \( Pt^{2+} \) एक द्वितीय श्रेणी का संक्रमण तत्व है जिसमें हमेशा प्रबल लिगैंड की उपस्थिति में युग्मन होता है।
• वर्ग समतलीय ज्यामिति के लिए सामान्यतः \( dsp^2 \) संकरण होता है。
• सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होने के कारण यह प्रतिचुंबकीय होता है।
आम गलतियाँ:
• \( Pt \) के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में भ्रमित होना।
• \( CN^- \) के प्रभाव को नजरअंदाज करना।
• अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या शून्य के बजाय कुछ और लिख देना।
Exam Tips:
a) संकरण और ज्यामिति का उल्लेख करते हुए उत्तर शुरू करें।
b) अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या 'शून्य (0)' को स्पष्ट रूप से लिखें।
c) प्लेटिनम जैसे भारी संक्रमण धातुओं के गुणों को ध्यान में रखें।
Question 5.10: क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धांत को प्रयुक्त करते हुए समझाइए कि कैसे हेक्साअक्का मैंगनीज (II) आयन में पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन हैं जबकि हेक्सासायनाइडो आयन में केवल एक ही अयुग्मित इलेक्ट्रॉन है।
Answer:
\( [Mn(H_2O)_6]^{2+} \) में \( Mn^{+2} \) ऑक्सीकरण अवस्था में है। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( d^5 \) है। क्रिस्टल क्षेत्र अष्टफलकीय है। पानी एक कमजोर क्षेत्र लिगैंड है। इसलिए, \( [Mn(H_2O)_6]^{2+} \) में इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था \( t_{2g}^3 e_g^2 \) है। इसलिए, हेक्साअक्का मैंगनीज (II) आयन में पाँच अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होते हैं।
दूसरी ओर, \( [Mn(CN)_6]^{4-} \) में \( Mn^{+2} \) ऑक्सीकरण अवस्था में है। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास \( d^5 \) है। क्रिस्टल क्षेत्र अष्टफलकीय है। साइनाइड एक मजबूत क्षेत्र लिगैंड है। इसलिए, \( [Mn(CN)_6]^{4-} \) में इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था \( t_{2g}^5 e_g^0 \) है। इसलिए, हेक्सासायनाइडो आयन में केवल एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता है।
मुख्य बिंदु:
• क्रिस्टल क्षेत्र सिद्धांत (CFT) के अनुसार \( d \)-कक्षक अष्टफलकीय क्षेत्र में \( t_{2g} \) और \( e_g \) सेट में विभाजित होते हैं।
• दुर्बल लिगैंड के लिए युग्मन ऊर्जा (\( P \)), क्रिस्टल क्षेत्र विभाजन ऊर्जा (\( \Delta_o \)) से अधिक होती है (\( \Delta_o < P \))।
• प्रबल लिगैंड के लिए \( \Delta_o > P \) होता है, जिससे इलेक्ट्रॉनों का युग्मन होता है।
आम गलतियाँ:
• \( t_{2g} \) और \( e_g \) कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों को भरते समय आफबाउ नियम या हुंड के नियम की अवहेलना करना।
• \( H_2O \) और \( CN^- \) के क्रिस्टल क्षेत्र विभाजन पर प्रभाव को गलत समझना।
• \( d^5 \) विन्यास के लिए उच्च चक्रण और निम्न चक्रण संकुलों में अंतर न स्पष्ट कर पाना।
Exam Tips:
a) \( t_{2g} \) और \( e_g \) कक्षकों का विन्यास (\( t_{2g}^3 e_g^2 \) और \( t_{2g}^5 e_g^0 \)) स्पष्ट रूप से लिखें।
b) प्रबल और दुर्बल लिगैंड के कारण होने वाले ऊर्जा अंतर को शब्दों में समझाएं।
c) अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की गिनती की अंतिम संख्या को अलग से रेखांकित करें।
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