Step-by-Step Textbook Solutions for Class 12 Chemistry Chapter 02 वैद्युतरसायन
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Question 2.1: निम्नलिखित धातुओं को उस क्रम में व्यवस्थित कीजिए जिसमें वे एक दूसरे को उनके लवनों के विलयनों में से प्रतिस्थापित करती हैं।
Al, Cu, Fe, Mg एवं Zn.
Answer:
दी गई धातुओं की अपचयन क्षमता के आधार पर उनका सक्रियता क्रम निर्धारित किया जाता है।
जिस धातु का मानक अपचयन विभव जितना कम होता है, वह उतनी ही अधिक प्रबल अपचायक होती है और अपने से अधिक मानक अपचयन विभव वाली धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित कर सकती है।
इन धातुओं का सही क्रम इस प्रकार है:
\( \mathrm{Mg, Al, Zn, Fe, Cu} \)
मुख्य बिंदु:
• कम मानक अपचयन विभव वाली धातु अधिक सक्रिय होती है।
• सक्रिय धातु कम सक्रिय धातु को उसके लवण विलयन से विस्थापित करती है।
• विद्युत रासायनिक श्रेणी में ऊपर से नीचे जाने पर धातुओं की अपचायक क्षमता घटती है।
आम गलतियाँ:
• मानक अपचयन विभव के मान को उल्टा याद रखना।
• विस्थापन के नियमों में भ्रमित होना।
• सही घटते या बढ़ते क्रम को न पहचान पाना।
Exam Tips:
a) विद्युत रासायनिक श्रेणी को अच्छी तरह याद रखें।
b) प्रश्न में पूछे गए क्रम (बढ़ता या घटता) को ध्यान से पढ़ें।
c) धातुओं के प्रतीकों का सही प्रयोग करें।
Question 2.2: नीचे दिए गए मानक इलेक्ट्रोड विभवों के आधार पर धातुओं को उनकी बढ़ती हुई अपचायक क्षमता के क्रम में व्यवस्थित कीजिए:
\( \mathrm{K^+/K = -2.93\ V, Ag^+/Ag = 0.80\ V, Hg^{2+}/Hg = 0.79\ V, Mg^{2+}/Mg = -2.37\ V, Cr^{3+}/Cr = -0.74\ V} \)
Answer:
अपचायक क्षमता मानक अपचयन विभव के मान के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
अर्थात, जिसका मानक अपचयन विभव जितना कम (ऋणात्मक) होगा, उसकी अपचायक क्षमता उतनी ही अधिक होगी।
दिए गए मानों के अनुसार:
\( \mathrm{K^+/K = -2.93\ V} \)
\( \mathrm{Mg^{2+}/Mg = -2.37\ V} \)
\( \mathrm{Cr^{3+}/Cr = -0.74\ V} \)
\( \mathrm{Hg^{2+}/Hg = 0.79\ V} \)
\( \mathrm{Ag^+/Ag = 0.80\ V} \)
अतः बढ़ती हुई अपचायक क्षमता का क्रम इस प्रकार होगा:
\( \mathrm{Ag < Hg < Cr < Mg < K} \)
मुख्य बिंदु:
• अधिक ऋणात्मक अपचयन विभव वाला पदार्थ प्रबल अपचायक होता है।
• धनात्मक अपचयन विभव वाले पदार्थ दुर्बल अपचायक होते हैं।
• अपचायक क्षमता = इलेक्ट्रॉन त्यागने की प्रवृत्ति।
आम गलतियाँ:
• ऋणात्मक मानों की तुलना में भ्रमित होना (जैसे -2.93, -2.37 से छोटा है)।
• ऑक्सीकरण और अपचायक क्षमता को मिला देना।
• क्रम को उल्टा (घटता हुआ) लिख देना।
Exam Tips:
a) ऋणात्मक चिन्ह का विशेष ध्यान रखें।
b) उत्तर लिखते समय तीर के निशान (< या >) का सही प्रयोग करें।
c) गणना और मानों की तुलना दो बार जाँचें।
Question 2.3: उस गैल्वेनी सेल को दर्शाइए जिसमें निम्नलिखित अभिक्रिया होती है:
\( \mathrm{Zn(s) + 2Ag^+(aq) \rightarrow Zn^{2+}(aq) + 2Ag(s)} \)
(i) कौन-सा इलेक्ट्रोड ऋणात्मक आवेशित है?
(ii) सेल में विद्युत-धारा के वाहक कौन-से हैं?
(iii) प्रत्येक इलेक्ट्रोड पर होने वाली अभिक्रिया क्या है?
Answer:
गैल्वेनी सेल का प्रतिनिधित्व इस प्रकार किया जाता है:
\( \mathrm{Zn(s) | Zn^{2+}(aq) \parallel Ag^+(aq) | Ag(s)} \)
(i) जिंक (Zn) इलेक्ट्रोड (एनोड) ऋणात्मक रूप से आवेशित होता है।
(ii) बाह्य सर्किट में इलेक्ट्रॉन विद्युत धारा के वाहक हैं और विलयन में आयन धारा प्रवाहित करते हैं।
(iii) एनोड पर होने वाली ऑक्सीकरण अभिक्रिया:
\( \mathrm{Zn(s) \rightarrow Zn^{2+}(aq) + 2e^-} \)
कैथोड पर होने वाली अपचयन अभिक्रिया:
\( \mathrm{Ag^+(aq) + e^- \rightarrow Ag(s)} \)
मुख्य बिंदु:
• गैल्वेनी सेल में एनोड ऋणात्मक और कैथोड धनात्मक होता है।
• ऑक्सीकरण हमेशा एनोड पर होता है।
• अपचयन हमेशा कैथोड पर होता है।
आम गलतियाँ:
• एनोड और कैथोड के आवेशों को इलेक्ट्रोलाइटिक सेल के साथ मिला देना।
• सेल आरेख में लवण सेतु (||) लगाना भूल जाना।
• अर्द्ध-अभिक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनों का संतुलन न करना।
Exam Tips:
a) सेल निरूपण के नियमों का पालन करें (ANHC नियम: Anode Negative, Oxidation)।
b) प्रत्येक उप-भाग का उत्तर स्पष्ट रूप से अलग-अलग लिखें।
c) रासायनिक समीकरणों में भौतिक अवस्थाएँ (s, aq) अवश्य दर्शाएँ।
Question 2.4: निम्नलिखित अभिक्रियाओं वाले गैल्वेनी सेल का मानक सेल-विभव परिकलित कीजिए:
(i) \( \mathrm{2Cr(s) + 3Cd^{2+}(aq) \rightarrow 2Cr^{3+}(aq) + 3Cd} \)
(ii) \( \mathrm{Fe^{2+}(aq) + Ag^+(aq) \rightarrow Fe^{3+}(aq) + Ag(s)} \)
उपयुक्त अभिक्रियाओं के लिए \( \Delta_r G^\circ \) एवं साम्य स्थिरांकों की भी गणना कीजिए।
Answer:
(i) दी गई अभिक्रिया के लिए मानक सेल विभव:
\( E^\circ_{\text{cell}} = E^\circ_{\text{cathode}} - E^\circ_{\text{anode}} \)
यहाँ \( E^\circ_{\mathrm{Cd^{2+}/Cd}} = -0.40\ \mathrm{V} \) और \( E^\circ_{\mathrm{Cr^{3+}/Cr}} = -0.74\ \mathrm{V} \)
\( E^\circ_{\text{cell}} = -0.40 - (-0.74) = +0.34\ \mathrm{V} \)
गिब्स ऊर्जा में परिवर्तन \( \Delta_r G^\circ = -nFE^\circ_{\text{cell}} \)
\( n = 6, F = 96487\ \mathrm{C\ mol^{-1}} \)
\( \Delta_r G^\circ = -6 \times 96487 \times 0.34 = -196833.48\ \mathrm{J\ mol^{-1}} = -196.83\ \mathrm{kJ\ mol^{-1}} \)
साम्य स्थिरांक \( K \) की गणना:
\( \Delta_r G^\circ = -2.303 RT \log K \)
\( -196833.48 = -2.303 \times 8.314 \times 298 \log K \)
\( \log K = \frac{196833.48}{5705.8} = 34.496 \)
\( K = \text{antilog}(34.496) = 3.13 \times 10^{34} \)
(ii) दूसरी अभिक्रिया के लिए:
\( E^\circ_{\text{cell}} = E^\circ_{\text{Ag^+/Ag}} - E^\circ_{\text{Fe^{3+}/Fe^{2+}}} \)
\( E^\circ_{\text{cell}} = 0.80 - 0.77 = 0.03\ \mathrm{V} \)
यहाँ \( n = 1 \)
\( \Delta_r G^\circ = -1 \times 96487 \times 0.03 = -2894.61\ \mathrm{J\ mol^{-1}} = -2.89\ \mathrm{kJ\ mol^{-1}} \)
साम्य स्थिरांक के लिए:
\( \log K = \frac{2894.61}{5705.8} = 0.5073 \)
\( K = \text{antilog}(0.5073) = 3.2 \)
मुख्य बिंदु:
• मानक सेल विभव हमेशा \( E^\circ_{\text{cathode}} - E^\circ_{\text{anode}} \) होता है।
• \( \Delta_r G^\circ \) और \( K \) निकालने के लिए \( n \) का सही मान पहचानना आवश्यक है।
• ऊर्जा का मात्रक जूल या किलोजूल प्रति मोल होता है।
आम गलतियाँ:
• n के गलत मान का चयन करना।
• चिन्हों (+ और -) की गलती करना।
• एंटीलॉग (antilog) निकालते समय दशमलव के बाद के अंकों का गलत उपयोग करना।
Exam Tips:
a) सभी सूत्र स्पष्ट रूप से लिखें।
b) गणनाओं को चरणों में विभाजित करें ताकि गलती की संभावना कम हो।
c) अंतिम उत्तर में उचित मात्रक अवश्य लिखें।
Question 2.5: निम्नलिखित सेलों की 298 K पर नर्नस्ट समीकरण एवं emf लिखिए:
(i) \( \mathrm{Mg(s) | Mg^{2+}(0.001\ M) \parallel Cu^{2+}(0.0001\ M) | Cu(s)} \)
(ii) \( \mathrm{Fe(s) | Fe^{2+}(0.001\ M) \parallel H^+(1\ M) | H_2(g)(1\ bar) | Pt(s)} \)
(iii) \( \mathrm{Sn(s) | Sn^{2+}(0.050\ M) \parallel H^+(0.020\ M) | H_2(g)(1\ bar) | Pt(s)} \)
(iv) \( \mathrm{Pt(s) | Br^-(0.010\ M) | Br_2(l) \parallel H^+(0.030\ M) | H_2(g)(1\ bar) | Pt(s)} \)
Answer:
(i) सेल अभिक्रिया:
\( \mathrm{Mg(s) + Cu^{2+}(aq) \rightarrow Mg^{2+}(aq) + Cu(s)} \), यहाँ \( n = 2 \)
नर्नस्ट समीकरण:
\( E_{\text{cell}} = E^\circ_{\text{cell}} - \frac{0.0591}{n} \log \frac{[\mathrm{Mg^{2+}}]}{[\mathrm{Cu^{2+}}]} \)
\( E_{\text{cell}} = 2.71 - \frac{0.0591}{2} \log \frac{0.001}{0.0001} \)
\( E_{\text{cell}} = 2.71 - 0.02955 \log 10 = 2.68\ \mathrm{V} \)
(ii) सेल अभिक्रिया:
\( \mathrm{Fe(s) + 2H^+(aq) \rightarrow Fe^{2+}(aq) + H_2(g)} \), यहाँ \( n = 2 \)
\( E_{\text{cell}} = 0.44 - \frac{0.0591}{2} \log \frac{10^{-3}}{(1)^2} \)
\( E_{\text{cell}} = 0.44 - 0.02955 (-3) = 0.53\ \mathrm{V} \)
(iii) सेल अभिक्रिया:
\( \mathrm{Sn(s) + 2H^+(aq) \rightarrow Sn^{2+}(aq) + H_2(g)} \), यहाँ \( n = 2 \)
\( E_{\text{cell}} = 0.14 - \frac{0.0591}{2} \log \frac{5 \times 10^{-2}}{(2 \times 10^{-2})^2} \)
\( E_{\text{cell}} = 0.14 - 0.02955 \times 2.096 = 0.08\ \mathrm{V} \)
(iv) सेल अभिक्रिया:
\( \mathrm{2Br^- + 2H^+ \rightarrow Br_2 + H_2} \), यहाँ \( n = 2 \)
\( E_{\text{cell}} = -1.09 - \frac{0.0591}{2} \log \frac{1}{[\mathrm{Br^-}]^2[\mathrm{H^+}]^2} \)
\( E_{\text{cell}} = -1.09 - 0.02955 \log \frac{1}{(0.010)^2(0.030)^2} \)
\( E_{\text{cell}} = -1.09 - 0.208 = -1.298\ \mathrm{V} \)
मुख्य बिंदु:
• नर्नस्ट समीकरण में सांद्रता पदों की घात उनके स्टॉइकोमेट्रिक गुणांक के बराबर होती है।
• ठोस और शुद्ध द्रवों की सांद्रता इकाई (1) मानी जाती है।
• गैसों के लिए दाब (बार में) का उपयोग किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• लघुगणक (log) के गुणों का गलत प्रयोग करना।
• स्टोइकोमेट्रिक गुणांकों को घात के रूप में न लिखना।
• n का मान गलत रखना।
Exam Tips:
a) पहले संतुलित सेल अभिक्रिया लिखें।
b) सांद्रता के मानों को मानक रूप (वैज्ञानिक संकेतन) में बदलें।
c) लघुगणक की गणना सावधानी से करें।
Question 2.6: घड़ियों एवं अन्य युक्तियों में अत्यधिक उपयोग में आने वाली बटन सेलों में निम्नलिखित अभिक्रिया होती है -
\( \mathrm{Zn(s) + Ag_2O(s) + H_2O(l) \rightarrow Zn^{2+}(aq) + 2Ag(s) + 2OH^-(aq)} \)
अभिक्रिया के लिए \( \Delta_r G^\circ \) एवं \( E^\circ \) ज्ञात कीजिए।
Answer:
दी गई सेल अभिक्रिया के लिए मानक सेल विभव \( E^\circ = 1.104\ \mathrm{V} \)
गिब्स ऊर्जा परिवर्तन का सूत्र:
\( \Delta_r G^\circ = -nFE^\circ \)
इस अभिक्रिया में \( n = 2 \) इलेक्ट्रॉन स्थानांतरित होते हैं।
\( \Delta_r G^\circ = -2 \times 96487\ \mathrm{C\ mol^{-1}} \times 1.104\ \mathrm{V} \)
\( \Delta_r G^\circ = -213043.296\ \mathrm{J\ mol^{-1}} = -213.04\ \mathrm{kJ\ mol^{-1}} \)
मुख्य बिंदु:
• बटन सेल एक प्रकार का प्राथमिक सेल है।
• \( \Delta_r G^\circ \) और \( E^\circ \) का संबंध स्वतःवर्ती अभिक्रिया को दर्शाता है।
• \( \Delta_r G^\circ \) का ऋणात्मक मान अभिक्रिया की स्वतःप्रवृत्ति को इंगित करता है।
आम गलतियाँ:
• n का मान 1 मान लेना जबकि समीकरण में 2 इलेक्ट्रॉन भाग ले रहे हैं।
• जूल को किलोजूल में बदलते समय 1000 से भाग देना भूल जाना।
• चिन्ह की गलती करना।
Exam Tips:
a) समीकरण से सीधे n का मान पहचानें।
b) उत्तर को किलोजूल (kJ) में व्यक्त करना मानक अभ्यास है।
c) सूत्र स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 2.7: किसी विद्युतअपघट्य के विलयन की चालकता एवं मोलर चालकता की परिभाषा दीजिए। सांद्रता के साथ इनके परिवर्तन की विवेचना कीजिए।
Answer:
चालकता (\( \kappa \)): किसी चालक के प्रतिरोध के व्युत्क्रम को चालकता कहते हैं। इसे \( \kappa \) (कप्पा) से दर्शाया जाता है। यह विशिष्ट प्रतिरोध का व्युत्क्रम है।
मोलर चालकता (\( \Lambda_m \)): किसी विद्युतअपघट्य के 1 मोल विलयन को 1 सेमी दूरी पर स्थित दो समांतर इलेक्ट्रोडों के बीच, जिनके बीच का क्षेत्रफल इतना हो कि विलयन का पूरा आयतन उसमें आ जाए, रखने पर उत्पन्न चालकता मोलर चालकता कहलाती है।
सांद्रता के साथ परिवर्तन:
• चालकता: सांद्रता घटने (तनुता बढ़ने) पर चालकता घटती है, क्योंकि प्रति इकाई आयतन में उपस्थित आयनों की संख्या कम हो जाती है।
• मोलर चालकता: सांद्रता घटने (तनुता बढ़ने) पर मोलर चालकता बढ़ती है, क्योंकि कुल आयतन में वृद्धि के कारण आयनों का विघटन और गतिशीलता बढ़ जाती है।
मुख्य बिंदु:
• चालकता प्रति इकाई आयतन पर निर्भर करती है।
• मोलर चालकता कुल आयतन और सांद्रता का गुणनफल होती है।
• दुर्बल और प्रबळ विद्युतअपघट्य तनुता के साथ अलग-अलग व्यवहार प्रदर्शित करते हैं।
आम गलतियाँ:
• चालकता और मोलर चालकता की परिभाषा को आपस में मिला देना।
• तनुता और सांद्रता के प्रभाव को एक ही समझना।
• सही मात्रक न लिखना।
Exam Tips:
a) दोनों की परिभाषाएँ उनके गणितीय सूत्रों के साथ याद रखें।
b) ग्राफ (Debye-Hückel-Onsager) की सहायता से प्रभाव को समझें।
c) प्रमुख शब्दावली जैसे 'विशिष्ट चालकता' और 'तनुता' का सही प्रयोग करें।
Question 2.8: 298 K पर \( 0.20\ \mathrm{M} \) \( \mathrm{KCl} \) विलयन की चालकता \( 0.0248\ \mathrm{S\ cm^{-1}} \) है। इसकी मोलर चालकता का परिकलन कीजिए।
Answer:
दिया गया है:
चालकता \( \kappa = 0.0248\ \mathrm{S\ cm^{-1}} \)
सांद्रता \( c = 0.20\ \mathrm{M} \ ( \mathrm{mol\ L^{-1}} ) \)
मोलर चालकता का सूत्र:
\( \Lambda_m = \frac{\kappa \times 1000}{c} \)
मान रखने पर:
\( \Lambda_m = \frac{0.0248 \times 1000}{0.20} \)
\( \Lambda_m = \frac{24.8}{0.20} = 124\ \mathrm{S\ cm^2\ mol^{-1}} \)
मुख्य बिंदु:
• मोलर चालकता ज्ञात करने के लिए 1000 से गुणा करना आवश्यक होता है जब सांद्रता \( \mathrm{mol\ L^{-1}} \) में हो।
• \( \mathrm{S\ cm^2\ mol^{-1}} \) मोलर चालकता का मानक मात्रक है।
• गणना में दशमलव का सही स्थान पर प्रयोग करें।
आम गलतियाँ:
• 1000 से गुणा करना भूल जाना।
• मात्रक गलत लिखना।
• सांद्रता और चालकता के मानों को उल्टा रख देना।
Exam Tips:
a) गणना से पहले सभी मानों को एक ही पद्धति (CGS) में सुनिश्चित करें।
b) सूत्र को सबसे पहले लिखें।
c) अंतिम उत्तर में मात्रक अनिवार्य रूप से लिखें।
Question 2.9: 298 K पर एक चालकता सेल में \( 0.001\ \mathrm{M} \) \( \mathrm{KCl} \) विलयन है, का प्रतिरोध \( 1500\ \Omega \) है। यदि \( 0.001\ \mathrm{M} \) \( \mathrm{KCl} \) विलयन की चालकता \( 298\ \mathrm{K} \) पर \( 0.146 \times 10^{-3}\ \mathrm{S\ cm^{-1}} \) हो तो सेल स्थिरांक क्या है?
Answer:
दिया गया है:
चालकता \( \kappa = 0.146 \times 10^{-3}\ \mathrm{S\ cm^{-1}} \)
प्रतिरोध \( R = 1500\ \Omega \)
सेल स्थिरांक (\( G^* \)) का सूत्र:
\( G^* = \kappa \times R \)
मान रखने पर:
\( G^* = 0.146 \times 10^{-3} \times 1500 \)
\( G^* = 0.219\ \mathrm{cm^{-1}} \)
मुख्य बिंदु:
• सेल स्थिरांक \( G^* = \frac{l}{A} \) होता है।
• इसका मात्रक \( \mathrm{cm^{-1}} \) या \( \mathrm{m^{-1}} \) होता है।
• यह सेल के इलेक्ट्रोडों के बीच की दूरी और क्षेत्रफल पर निर्भर करता है।
आम गलतियाँ:
• प्रतिरोध और चालकता के बीच के संबंध को उलटना (\( \kappa = \frac{1}{R} \times \frac{l}{A} \)).
• घातांक (\( 10^{-3} \)) का गुणा करते समय गलती करना।
Exam Tips:
a) सेल स्थिरांक के व्युत्पन्न सूत्र को याद रखें।
b) गणना में वैज्ञानिक संकेतन का सही प्रयोग करें।
c) मात्रक लिखना न भूलें।
Question 2.10: 298 K पर सोडियम क्लोराइड की विभिन्न सांद्रता पर चालकता का मापन किया गया जिसके आँकड़े अग्रलिखित हैं:
\( 10^2 \times \kappa / \mathrm{S\ m^{-1}} \): 1.237, 11.85, 23.15, 55.53, 106.74
\( c / \mathrm{mol\ L^{-1}} \): 0.001, 0.010, 0.020, 0.050, 0.100
सभी सांद्रताओं के लिए \( \Lambda_m \) का परिकलन कीजिए एवं \( \Lambda_m \) तथा \( c^{1/2} \) के मध्य एक आलेख खींचिए। \( \Lambda_m^\circ \) का मान ज्ञात कीजिए।
Answer:
मोलर चालकता \( \Lambda_m \) की गणना \( \Lambda_m = \frac{\kappa}{c} \) सूत्र से की जाती है।
प्रत्येक मान के लिए गणना:
1. \( c = 0.001\ \mathrm{M} \) के लिए:
\( \Lambda_m = \frac{1.237 \times 10^{-2}}{0.001} = 123.7\ \mathrm{S\ cm^2\ mol^{-1}} \)
2. \( c = 0.010\ \mathrm{M} \) के लिए:
\( \Lambda_m = \frac{11.85 \times 10^{-2}}{0.010} = 118.5\ \mathrm{S\ cm^2\ mol^{-1}} \)
3. \( c = 0.020\ \mathrm{M} \) के लिए:
\( \Lambda_m = \frac{23.15 \times 10^{-2}}{0.020} = 115.8\ \mathrm{S\ cm^2\ mol^{-1}} \)
4. \( c = 0.050\ \mathrm{M} \) के लिए:
\( \Lambda_m = \frac{55.53 \times 10^{-2}}{0.050} = 111.1\ \mathrm{S\ cm^2\ mol^{-1}} \)
5. \( c = 0.100\ \mathrm{M} \) के लिए:
\( \Lambda_m = \frac{106.74 \times 10^{-2}}{0.100} = 106.74\ \mathrm{S\ cm^2\ mol^{-1}} \)
इन मानों और \( c^{1/2} \) के बीच आलेख खींचने पर, जब रेखा को \( c^{1/2} = 0 \) पर बाह्य वेशित (extrapolate) किया जाता है, तो मानक मोलर चालकता \( \Lambda_m^\circ \) प्राप्त होती है जिसका मान लगभग \( 124.0\ \mathrm{S\ cm^2\ mol^{-1}} \) है।
मुख्य बिंदु:
• प्रबल विद्युतअपघट्य के लिए \( \Lambda_m \) और \( c^{1/2} \) का आलेख एक सरल रेखा होता है।
• डिबाई-ह्यूकल-ओन्सागर समीकरण का उपयोग किया जाता है।
• अंतःखंड (intercept) \( \Lambda_m^\circ \) का मान देता है।
आम गलतियाँ:
• इकाई परिवर्तन में गलती करना।
• आलेख खींचते समय पैमाना (scale) सही न चुनना।
Exam Tips:
• सारणीबद्ध तरीके से सभी मानों की गणना करें।
• ग्राफ के अक्षों को स्पष्ट रूप से नामांकित करें।
• अंतिम मान के साथ उचित मात्रक लिखें।
Question 2.11: \( 0.00241\ \mathrm{M} \) ऐसीटिक अम्ल की चालकता \( 7.896 \times 10^{-5}\ \mathrm{S\ cm^{-1}} \) है। इसकी मोलर चालकता को परिकलित कीजिए। यदि ऐसीटिक अम्ल के लिए \( \Lambda_m^\circ \) का मान \( 390.5\ \mathrm{S\ cm^2\ mol^{-1}} \) हो तो इसका वियोजन स्थिरांक क्या है?
Answer:
दिया गया है:
\( \kappa = 7.896 \times 10^{-5}\ \mathrm{S\ cm^{-1}} \)
\( c = 0.00241\ \mathrm{M} \)
मोलर चालकता \( \Lambda_m = \frac{\kappa \times 1000}{c} \)
\( \Lambda_m = \frac{7.896 \times 10^{-5} \times 1000}{0.00241} = 32.76\ \mathrm{S\ cm^2\ mol^{-1}} \)
वियोजन की मात्रा \( \alpha = \frac{\Lambda_m}{\Lambda_m^\circ} \)
\( \alpha = \frac{32.76}{390.5} = 0.084 \)
वियोजन स्थिरांक \( K_a = \frac{c\alpha^2}{1 - \alpha} \)
\( K_a = \frac{0.00241 \times (0.084)^2}{1 - 0.084} = 1.86 \times 10^{-5}\ \mathrm{mol\ L^{-1}} \)
मुख्य बिंदु:
• दुर्बल विद्युतअपघट्य के लिए कोहलराश नियम का प्रयोग किया जाता है।
• \( \alpha \) वियोजन की मात्रा है जो मोलर चालकताओं का अनुपात होती है。
• \( K_a \) दुर्बल अम्ल का आयनन स्थिरांक है।
आम गलतियाँ:
• \( \alpha \) और \( K_a \) के सूत्रों में मान रखते समय गलती करना।
• मात्रकों का ध्यान न रखना।
Exam Tips:
a) तीनों चरणों (मोलर चालकता, \( \alpha \), और \( K_a \)) को क्रमानुसार हल करें।
b) लघुगणक या सामान्य गणना सावधानी से करें।
c) परिणाम के साथ सही मात्रक दर्शाइए।
Question 2.12: निम्नलिखित के अपचयन के लिए कितने आवेश की आवश्यकता होगी?
(i) 1 मोल \( \mathrm{Al^{3+}} \) को \( \mathrm{Al} \) में
(ii) 1 मोल \( \mathrm{Cu^{2+}} \) को \( \mathrm{Cu} \) में
(iii) 1 मोल \( \mathrm{MnO_4^-} \) को \( \mathrm{Mn^{2+}} \) में
Answer:
(i) अभिक्रिया: \( \mathrm{Al^{3+} + 3e^- \rightarrow Al} \)
1 मोल \( \mathrm{Al^{3+}} \) के अपचयन के लिए 3 मोल इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
आवश्यक आवेश = \( 3 \times F = 3 \times 96487\ \mathrm{C} = 289461\ \mathrm{C} \)
(ii) अभिक्रिया: \( \mathrm{Cu^{2+} + 2e^- \rightarrow Cu} \)
1 मोल \( \mathrm{Cu^{2+}} \) के अपचयन के लिए 2 मोल इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
आवश्यक आवेश = \( 2 \times F = 2 \times 96487\ \mathrm{C} = 192974\ \mathrm{C} \)
(iii) अभिक्रिया: \( \mathrm{MnO_4^- + 8H^+ + 5e^- \rightarrow Mn^{2+} + 4H_2O} \)
1 मोल \( \mathrm{MnO_4^-} \) के अपचयन के लिए 5 मोल इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
आवश्यक आवेश = \( 5 \times F = 5 \times 96487\ \mathrm{C} = 482435\ \mathrm{C} \)
मुख्य बिंदु:
• 1 मोल इलेक्ट्रॉन पर आवेश 1 फैराडे (\( F \approx 96487\ \mathrm{C} \)) होता है।
• आवश्यक आवेश आयन पर उपस्थित आवेश की मात्रा (इलेक्ट्रॉनों की संख्या) पर निर्भर करता है।
• अपचयन का अर्थ इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करना है।
आम गलतियाँ:
• आयन की संयोजकता को इलेक्ट्रॉनों की संख्या न समझना।
• फैराडे के मान से गुणा करना भूल जाना।
Exam Tips:
a) पहले संतुलित अर्ध-अभिक्रिया लिखें।
b) इलेक्ट्रॉनों की संख्या स्पष्ट करें।
c) उत्तर को कूलॉम (C) या फैराडे (F) में उचित रूप से दें।
Question 2.13: निम्नलिखित को प्राप्त करने में कितने फैराडे विद्युत की आवश्यकता होगी?
(i) गलित \( \mathrm{CaCl_2} \) से 20.0 g Ca
(ii) गलित \( \mathrm{Al_2O_3} \) से 40.0 g Al
Answer:
(i) अभिक्रिया: \( \mathrm{Ca^{2+} + 2e^- \rightarrow Ca} \)
कैल्शियम का molar द्रव्यमान = \( 40\ \mathrm{g\ mol^{-1}} \)
40 g Ca जमा करने के लिए आवश्यक आवेश = \( 2\ \mathrm{F} \)
अतः 20 g Ca जमा करने के लिए आवश्यक आवेश = \( \frac{2 \times 20}{40} = 1\ \mathrm{F} \)
(ii) अभिक्रिया: \( \mathrm{Al^{3+} + 3e^- \rightarrow Al} \)
ऐलुमिनियम का molar द्रव्यमान = \( 27\ \mathrm{g\ mol^{-1}} \)
27 g Al जमा करने के लिए आवश्यक आवेश = \( 3\ \mathrm{F} \)
अतः 40 g Al जमा करने के लिए आवश्यक आवेश = \( \frac{3 \times 40}{27} = 4.44\ \mathrm{F} \)
मुख्य बिंदु:
• फैराडे के विद्युत अपघटन के प्रथम नियम का प्रयोग किया जाता है।
• 1 मोल पदार्थ के निक्षेपण के लिए \( n \times F \) आवेश चाहिए होता है।
• तत्वों के परमाणु द्रव्यमान का सही ज्ञान होना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• मोलर द्रव्यमान का गलत मान प्रयोग करना।
• ऐकिक नियम (unitary method) में गलती करना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक धातु के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉन संख्या पहचानें।
b) गणना के चरणों को स्पष्ट रूप से दर्शाएँ।
c) मात्रक के रूप में 'F' या कूलॉम लिखें।
Question 2.14: निम्नलिखित को ऑक्सीकृत करने के लिए कितने कूलॉम विद्युत आवश्यक है?
(i) 1 मोल \( \mathrm{H_2O} \) को \( \mathrm{O_2} \) में
(ii) 1 मोल \( \mathrm{FeO} \) को \( \mathrm{Fe_2O_3} \) में
Answer:
(i) अभिक्रिया: \( \mathrm{H_2O \rightarrow H_2 + \frac{1}{2}O_2} \)
ऑक्सीजन के लिए अर्ध-अभिक्रिया: \( \mathrm{H_2O \rightarrow \frac{1}{2}O_2 + 2H^+ + 2e^-} \)
1 मोल \( \mathrm{H_2O} \) के ऑक्सीकरण के लिए 2 मोल इलेक्ट्रॉनों की आवश्यकता होती है।
आवश्यक विद्युत = \( 2 \times 96487\ \mathrm{C} = 192974\ \mathrm{C} \)
(ii) अभिक्रिया: \( \mathrm{Fe^{2+} \rightarrow Fe^{3+} + e^-} \) (FeO से \( \mathrm{Fe_2O_3} \) में)
1 मोल \( \mathrm{FeO} \) में \( \mathrm{Fe^{2+}} \), \( \mathrm{Fe^{3+}} \) में ऑक्सीकृत होता है, जिसमें 1 इलेक्ट्रॉन का परिवर्तन होता है।
आवश्यक विद्युत = \( 1 \times 96487\ \mathrm{C} = 96487\ \mathrm{C} \)
मुख्य बिंदु:
• ऑक्सीकरण का अर्थ इलेक्ट्रॉन त्यागना है।
• ऑक्सीकरण अवस्था में परिवर्तन से इलेक्ट्रॉनों की संख्या निर्धारित होती है।
• आवेश की मात्रा \( Q = nF \) से निकाली जाती है।
आम गलतियाँ:
• \( \mathrm{H_2O} \) के ऑक्सीकरण में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 1 मान लेना।
• FeO और \( \mathrm{Fe_2O_3} \) में आयरन की ऑक्सीकरण संख्या न पहचान पाना।
Exam Tips:
a) रेडॉक्स परिवर्तन को संतुलित रूप में लिखें।
b) n का मान सावधानी से निकालें।
c) उत्तर कूलॉम (C) में दें।
Question 2.15: \( \mathrm{Ni(NO_3)_2} \) के एक विलयन का प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के बीच 5 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित करते हुए 20 मिनट तक विद्युत-अपघटन किया गया। Ni की कितनी मात्रा कैथोड पर निक्षेपित होगी?
Answer:
दिया गया है:
धारा \( I = 5\ \mathrm{A} \)
समय \( t = 20\ \text{मिनट} = 20 \times 60 = 1200\ \mathrm{s} \)
प्रवाहित आवेश \( Q = I \times t = 5 \times 1200 = 6000\ \mathrm{C} \)
अभिक्रिया: \( \mathrm{Ni^{2+} + 2e^- \rightarrow Ni} \)
यहाँ \( n = 2 \), अतः 2 फैराडे (\( 2 \times 96487\ \mathrm{C} \)) आवेश \( 58.71\ \mathrm{g} \) (Ni का परमाणु द्रव्यमान) निकेल जमा करता है।
6000 C आवेश द्वारा जमा निकेल की मात्रा:
\( \text{मात्रा} = \frac{58.71 \times 6000}{2 \times 96487} = 1.825\ \mathrm{g} \)
अतः कैथोड पर 1.825 ग्राम निकेल जमा होगा।
मुख्य बिंदु:
• फैराडे के विद्युत अपघटन के नियम का उपयोग किया जाता है (\( m = Z \cdot I \cdot t \)).
• समय को हमेशा सेकंड में बदलना आवश्यक है।
• निकेल का परमाणु द्रव्यमान \( 58.71\ \mathrm{g\ mol^{-1}} \) होता है।
आम गलतियाँ:
• मिनट को सेकंड में न बदलना (केवल 20 से गुणा करना)।
• n का मान 1 लेना।
• रासायनिक तुल्यांक की गणना में त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) सभी मानों को SI मात्रक में बदलें।
b) फैराडे का प्रथम नियम सूत्र सहित लिखें।
c) गणना को दो बार जाँचें।
Question 2.16: \( \mathrm{ZnSO_4}, \mathrm{AgNO_3} \) एवं \( \mathrm{CuSO_4} \) विलयन वाले तीन विद्युतअपघटनी सेलों A, B, C को श्रेणीबद्ध किया गया एवं 1.5 ऐम्पियर की विद्युतधारा, सेल B के कैथोड पर 1.45 g सिल्वर निक्षेपित होने तक लगातार प्रवाहित की गई। विद्युतधारा कितने समय तक प्रवाहित हुई? निक्षेपित कॉपर एवं जिंक का द्रव्यमान क्या होगा?
Answer:
सिल्वर के लिए अभिक्रिया: \( \mathrm{Ag^+ + e^- \rightarrow Ag} \)
108 g Ag जमा करने के लिए आवश्यक आवेश = \( 96487\ \mathrm{C} \)
1.45 g Ag जमा करने के लिए आवश्यक आवेश \( Q = \frac{96487 \times 1.45}{108} = 1295.43\ \mathrm{C} \)
समय \( t = \frac{Q}{I} = \frac{1295.43}{1.5} = 863.6\ \mathrm{s} = 14.40\ \text{मिनट} \)
कॉपर के लिए (\( \mathrm{Cu^{2+} + 2e^- \rightarrow Cu} \)):
\( 2 \times 96487\ \mathrm{C} \) आवेश \( 63.5\ \mathrm{g} \) Cu जमा करता है।
1295.43 C आवेश द्वारा जमा Cu = \( \frac{63.5 \times 1295.43}{2 \times 96487} = 0.426\ \mathrm{g} \)
जिंक के लिए (\( \mathrm{Zn^{2+} + 2e^- \rightarrow Zn} \)):
\( 2 \times 96487\ \mathrm{C} \) आवेश \( 65.4\ \mathrm{g} \) Zn जमा करता है।
1295.43 C आवेश द्वारा जमा Zn = \( \frac{65.4 \times 1295.43}{2 \times 96487} = 0.439\ \mathrm{g} \)
मुख्य बिंदु:
• श्रेणीबद्ध सेलों में प्रवाहित होने वाला कुल आवेश (Q) समान रहता है।
• फैराडे के विद्युत अपघटन के द्वितीय नियम का उपयोग किया जाता है।
• विभिन्न धातुओं द्वारा जमा द्रव्यमान उनके तुल्यांक भार के समानुपाती होता है।
आम गलतियाँ:
• प्रत्येक सेल में अलग आवेश मान लेना।
• n के मान में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) पहले सर्वसुलभ आँकड़े (यहाँ Ag के लिए) से कुल आवेश या समय निकालें।
b) उसी आवेश का उपयोग अन्य धातुओं के द्रव्यमान निकालने के लिए करें।
c) इकाइयों का विशेष ध्यान रखें।
Question 2.17: तालिका 3.1 में दिए गए मानक इलेक्ट्रोड विभवों की सहायता से अनुमान लगाइए कि क्या निम्नलिखित अभिकर्मकों के बीच अभिक्रिया सम्भव है?
(i) \( \mathrm{Fe^{3+}} \) और \( \mathrm{I^-} \)
(ii) \( \mathrm{Ag^+} \) और \( \mathrm{Cu} \)
(iii) \( \mathrm{Fe^{3+}} \) और \( \mathrm{Br^-} \)
(iv) \( \mathrm{Ag} \) और \( \mathrm{Fe^{3+}} \)
(v) \( \mathrm{Br_2} \) और \( \mathrm{Fe^{2+}} \)
Answer:
(i) \( \mathrm{Fe^{3+}} \) और \( \mathrm{I^-} \): अभिक्रिया संभव है क्योंकि \( E^\circ_{\text{cell}} \) धनात्मक आता है।
(ii) \( \mathrm{Ag^+} \) और \( \mathrm{Cu} \): अभिक्रिया संभव है क्योंकि \( E^\circ_{\text{cell}} = +0.46\ \mathrm{V} \) (धनात्मक) है।
(iii) \( \mathrm{Fe^{3+}} \) और \( \mathrm{Br^-} \): अभिक्रिया संभव नहीं है क्योंकि \( E^\circ_{\text{cell}} \) ऋणात्मक आता है।
(iv) \( \mathrm{Ag} \) और \( \mathrm{Fe^{3+}} \): अभिक्रिया संभव नहीं है क्योंकि \( E^\circ_{\text{cell}} = -0.03\ \mathrm{V} \) (ऋणात्मक) है।
(v) \( \mathrm{Br_2} \) और \( \mathrm{Fe^{2+}} \): अभिक्रिया संभव है क्योंकि \( E^\circ_{\text{cell}} = +0.32\ \mathrm{V} \) (धनात्मक) है।
मुख्य बिंदु:
• किसी रासायनिक अभिक्रिया के स्वतः होने के लिए सेल का मानक विभव \( E^\circ_{\text{cell}} \) धनात्मक होना चाहिए।
• यदि \( E^\circ_{\text{cell}} \) ऋणात्मक है, तो अभिक्रिया संभव नहीं है।
• ऑक्सीकरण-अपचयन युग्मों के मानक विभवों की तुलना की जाती है।
आम गलतियाँ:
• एनोड और कैथोड के चयन में गलती करना जिससे चिन्ह विपरीत आ जाए।
• धनात्मक और ऋणात्मक मानों की शर्त को भूल जाना।
Exam Tips:
a) हमेशा \( E^\circ_{\text{cathode}} - E^\circ_{\text{anode}} \) का सही क्रम लागू करें।
b) निष्कर्ष लिखते समय \( E^\circ \) के चिन्ह का स्पष्ट उल्लेख करें।
c) सभी भागों को अलग-अलग हल करें।
Question 2.18: निम्नलिखित में से प्रत्येक के लिए विद्युत-अपघटन से प्राप्त उत्पाद बताइए:
(i) सिल्वर इलेक्ट्रोडों के साथ \( \mathrm{AgNO_3} \) का जलीय विलयन
(ii) प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के साथ \( \mathrm{AgNO_3} \) का जलीय विलयन
(iii) प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के साथ \( \mathrm{H_2SO_4} \) का तनु विलयन
(iv) प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के साथ \( \mathrm{CuCl_2} \) का जलीय विलयन
Answer:
(i) सिल्वर इलेक्ट्रोड के साथ \( \mathrm{AgNO_3} \) का जलीय विलयन:
कैथोड पर: सिल्वर (\( \mathrm{Ag} \)) निक्षेपित होती है।
एनोड पर: सिल्वर इलेक्ट्रोड घुल जाता है (Ag एनोड से \( \mathrm{Ag^+} \) के रूप में विलयन में जाता है)।
(ii) प्लैटिनम इलेक्ट्रोड के साथ \( \mathrm{AgNO_3} \) का जलीय विलयन:
कैथोड पर: सिल्वर (\(\mathrm{Ag}\)) निक्षेपित होती है।
एनोड पर: ऑक्सीजन गैस (\(\mathrm{O_2}\)) मुक्त होती है।
(iii) प्लैटिनम इलेक्ट्रोड के साथ \( \mathrm{H_2SO_4} \) का तनु विलयन:
कैथोड पर: हाइड्रोजन गैस (\(\mathrm{H_2}\)) मुक्त होती है।
एनोड पर: ऑक्सीजन गैस (\(\mathrm{O_2}\)) मुक्त होती है।
(iv) प्लैटिनम इलेक्ट्रोड के साथ \( \mathrm{CuCl_2} \) का जलीय विलयन:
कैथोड पर: कॉपर (\(\mathrm{Cu}\)) धातु जमा होती है।
एनोड पर: क्लोरीन गैस (\(\mathrm{Cl_2}\)) मुक्त होती है।
मुख्य बिंदु:
• सक्रिय और अक्रिय (प्लैटिनम) इलेक्ट्रोडों का विद्युत अपघटन पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है।
• मानक अपचयन विभव और ओवरवॉल्टेज (विभव विभव) के कारण उत्पादों का चयन होता है।
• जलीय विलयन में जल के ऑक्सीकरण/अपचयन की संभावना भी विचारणीय होती है।
आम गलतियाँ:
• सक्रिय और अक्रिय इलेक्ट्रोडों के अंतर को न समझना।
• एनोड पर हमेशा ऑक्सीजन ही बनने का भ्रम रखना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक स्थिति में कैथोड और एनोड की अर्ध-अभिक्रियाएँ लिखकर समझाइए।
b) इलेक्ट्रोड की प्रकृति (सक्रिय/अक्रिय) को पहले पहचानें।
c) उत्तर में गैस या धातु के रूप में स्पष्ट उत्पाद लिखें।
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