NCERT Solutions Class 12 Political Science Politics in India since Independence Chapter 07 Regional Aspirations (क्षेत्रीय आकांक्षाएँ) in Hindi

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Question 1: निम्नलिखित में मेल करें:
क्षेत्रीय आकांक्षाओं की प्रकृति
(क) सामाजिक धार्मिक पहचान के आधार पर राज्य का निर्माण
(ख) भाषायी पहचान और केंद्र के साथ तनाव
(ग) क्षेत्रीय असंतुलन के फलस्वरूप राज्य का निर्माण
(घ) आदिवासी पहचान के आधार पर अलगाववादी माँग
राज्य
(i) नागालैंड/मिजोरम
(ii) झारखंड/छत्तीसगढ़
(iii) पंजाब
(iv) तमिलनाडु

Answer:

(क) सामाजिक धार्मिक पहचान के आधार पर राज्य का निर्माण — (iii) पंजाब
(ख) भाषायी पहचान और केंद्र के साथ तनाव — (iv) तमिलनाडु
(ग) क्षेत्रीय असंतुलन के फलस्वरूप राज्य का निर्माण — (ii) झारखंड/छत्तीसगढ़
(घ) आदिवासी पहचान के आधार पर अलगाववादी माँग — (i) नागालैंड/मिजोरम

मुख्य बिंदु:

• राज्यों के पुनर्गठन का आधार भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीय विकास था।
• पंजाब का निर्माण भाषायी एवं धार्मिक पहचान के आधार पर हुआ।
• झारखंड और छत्तीसगढ़ का निर्माण क्षेत्रीय विकास और असंतुलन दूर करने के लिए हुआ।

आम गलतियाँ:

• क्षेत्रीय आकांक्षाओं और उनसे संबंधित राज्यों को गलत मिला देना।
• भाषायी पहचान और आदिवासी पहचान में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) मिलान करने वाले प्रश्नों में दोनों सूचियों को ध्यानपूर्वक पढ़ें।
b) जो विकल्प सबसे पहले स्पष्ट हों, उन्हें पहले हल करें।
c) उत्तर पुस्तिका में सही जोड़े के सामने उसका सटीक उत्तर ही लिखें।

 

Question 2: पूर्वोत्तर के लोगों की क्षेत्रीय आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति कई रूपों में होती है। बाहरी लोगों के खिलाफ आंदोलन, ज्यादा स्वायत्तता की माँग के आंदोलन और अलग देश बनाने की माँग करना, ऐसी ही कुछ अभिव्यक्तियाँ हैं। पूर्वोत्तर के मानचित्र पर इन तीनों के लिए अलग-अलग रंग भरिए और दिखाइए कि किस राज्य में कौन-सी प्रवृत्ति ज्यादा प्रबल है।

Answer:

पूर्वोत्तर भारत में क्षेत्रीय आकांक्षाओं की विभिन्न प्रवृत्तियों को निम्नलिखित प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है:
1. बाहरी लोगों के खिलाफ आंदोलन — असम
2. ज्यादा स्वायत्तता की माँग के आंदोलन — मणिपुर व त्रिपुरा
3. अलग देश की माँग — नागालैंड व मिजोरम

मुख्य बिंदु:

• पूर्वोत्तर में जनजातीय बहुलता और विविधता पाई जाती है।
• बाहरी लोगों के प्रवेश को लेकर वहाँ के मूल निवासी अपनी संस्कृति को लेकर चिंतित रहे हैं।
• अलगाववादी और स्वायत्तता की माँगे समय-समय पर प्रमुख रही हैं।

आम गलतियाँ:

• विभिन्न राज्यों की विशिष्ट समस्याओं को आपस में मिला देना।
• मानचित्र कार्य में गलत राज्यों को चिन्हित करना।

Exam Tips:

a) मानचित्र आधारित प्रश्नों का अभ्यास नियमित रूप से करें।
b) राज्यों के नाम और उनकी मुख्य समस्याओं को स्पष्ट रूप से याद रखें।
c) उत्तर को तालिका के रूप में प्रस्तुत करना अधिक प्रभावी होता है।

 

Question 3: पंजाब समझौते के मुख्य प्रावधान क्या थे? क्या ये प्रावधान पंजाब और उसके पड़ोसी राज्यों के बीच तनाव बढ़ाने के कारण बन सकते हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

Answer:

पंजाब समझौते (राजीव लोंगोवाल समझौता, 1985) के मुख्य प्रावधान निम्नलिखित थे:
1. चंडीगढ़ पंजाब को दिया जाएगा।
2. पंजाब और हरियाणा के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए एक अलग आयोग स्थापित किया जाएगा।
3. रावी और ब्यास नदी के पानी के बँटवारे के लिए एक नयाधिकरण (ट्रिब्यूनल) बैठाया जाएगा।
4. सरकार भविष्य में सिखों के साथ बेहतर व्यवहार करेगी और सेना में सिखों के योगदान का सम्मान करेगी।
हाँ, ये प्रावधान कुछ पड़ोसी राज्यों, विशेषकर हरियाणा, के साथ तनाव बढ़ाने के कारण बन सकते हैं क्योंकि चंडीगढ़ पर हरियाणा का भी दावा था और नदी जल बँटवारे को लेकर राज्यों में आपसी मतभेद रहे हैं।

मुख्य बिंदु:

• पंजाब समझौता केंद्र सरकार और अकाली दल के बीच हुआ था।
• इसका उद्देश्य पंजाब में शांति बहाल करना था।
• टेरिटरी और नदी जल बँटवारे जैसे मुद्दे लंबे समय तक विवादित रहे।

आम गलतियाँ:

• समझौते की तारीख या हस्ताक्षरकर्ताओं के नाम में गलती करना।
• पड़ोसी राज्यों पर पड़ने वाले प्रभाव का सही विश्लेषण न करना।

Exam Tips:

a) समझौते के प्रमुख बिंदुओं को क्रमानुसार लिखें।
b) विश्लेषणात्मक प्रश्नों में अपने तर्क स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
c) प्रासंगिक तिथियों और नेताओं के नाम का उल्लेख अवश्य करें।

 

Question 4: आनंदपुर साहिब प्रस्ताव के विवादास्पद होने के क्या कारण थे?

Answer:

आनंदपुर साहिब प्रस्ताव (1973) के विवादास्पद होने के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
1. इस प्रस्ताव में पंजाब सूबे के लिए अधिक स्वायत्तता की माँग की गई थी और केंद्र सरकार के अधिकारों को सीमित करने की बात थी।
2. इसमें आनंदपुर साहिब प्रस्ताव का सिख पंथ-समुदाय पर बड़ा असर पड़ा, जिससे क्षेत्र में अलगाववादी प्रवृत्तियों को बढ़ावा मिला।
3. कुछ चरमपंथी तत्वों ने धर्म और राजनीति को जोड़ते हुए भारत से अलग होकर 'खालिस्तान' बनाने की वकालत शुरू कर दी थी।

मुख्य बिंदु:

• यह प्रस्ताव अकाली दल द्वारा पारित किया गया था।
• इसमें संघीय व्यवस्था में राज्यों को अधिक अधिकार देने की बात थी।
• व्याख्या के स्तर पर इसे नरमपंथी और चरमपंथी नजरिए से देखा गया।

आम गलतियाँ:

• प्रस्ताव के मूल राजनीतिक उद्देश्य और चरमपंथी व्याख्या में अंतर न समझ पाना।
• केवल धार्मिक पहलू पर जोर देना और राजनीतिक संदर्भ छोड़ देना।

Exam Tips:

a) प्रस्ताव की मुख्य माँगों को बिंदुओं में स्पष्ट करें।
b) यह क्यों विवादास्पद बना, इसके राजनीतिक कारणों को ठीक से समझाएँ।
c) तथ्यात्मक शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।

 

Question 5: जम्मू-कश्मीर की अंदरूनी विभिन्नताओं की व्याख्या कीजिए और बताइए कि इन विभिन्नताओं के कारण इस राज़ में किस तरह अनेक क्षेत्रीय आकांक्षाओं ने सिर उठाया है।

Answer:

जम्मू-कश्मीर राज्य विभिन्न भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों से मिलकर बना है, जिनमें मुख्य रूप से तीन क्षेत्र शामिल हैं:
1. कश्मीर: यह घाटी मुस्लिम बहुल क्षेत्र है जहाँ कश्मीरी भाषा बोलने वाले लोग रहते हैं। राजनीति का केंद्र यहीं रहा है।
2. जम्मू: यह मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों का मिश्रण है जहाँ हिंदू, मुस्लिम और सिख दोनों रहते हैं तथा डोगरी और अन्य भाषाएँ बोली जाती हैं।
3. लद्दाख: यह पहाड़ी और बौद्ध बहुल क्षेत्र है जहाँ की आबादी कम है और संस्कृति तिब्बत से मिलती-जुलती है।
इन आंतरिक विभिन्नताओं के कारण ही अलग-अलग क्षेत्रीय आकांक्षाएँ पैदा हुईं। कश्मीरी जनता में स्वायत्तता और कभी-कभी स्वतंत्रता की भावना रही, जबकि जम्मू और लद्दाख के लोग कश्मीरी नेतृत्व के प्रभुत्व से नाखुश रहे और उन्होंने अलग प्रशासनिक दर्जे या केंद्र शासित प्रदेश बनने की माँग की।

मुख्य बिंदु:

• जम्मू-कश्मीर में क्षेत्रीय और भाषायी विविधता बहुत अधिक है।
• कश्मीर घाटी की राजनीति का प्रभाव पूरे राज्य पर रहा है।
• लद्दाख और जम्मू क्षेत्र लंबे समय से उपेक्षा का शिकार होने का आरोप लगाते रहे हैं।

आम गलतियाँ:

• केवल कश्मीर घाटी की स्थिति का वर्णन करना और जम्मू-लद्दाख की उपेक्षा करना।
• राज्य की आंतरिक विभिन्नताओं को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) तीनों क्षेत्रों (कश्मीर, जम्मू, लद्दाख) की विशेषताओं को अलग-अलग headings के तहत लिखें।
b) क्षेत्रीय आकांक्षाओं के उभरने के कारणों को तार्किक रूप से जोड़ें।
c) एनसीईआरटी के मानचित्र और तथ्यों का सही उपयोग करें।

 

Question 6: कश्मीर की क्षेत्रीय स्वायत्तता के मसले पर विभिन्न पक्ष क्या हैं? इनमें कौन-सा पक्ष आपको समुचित जान पड़ता है? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।

Answer:

कश्मीर की क्षेत्रीय स्वायत्तता को लेकर मुख्य रूप से तीन पक्ष हैं:
1. एक पक्ष का मानना है कि विशेष अनुच्छेद (जैसे अनुच्छेद 370) के तहत कश्मीर को जो विशेष दर्जा मिला है, उसे बनाए रखा जाना चाहिए क्योंकि राज्य का भारत में विलय विशिष्ट शर्तों पर हुआ था।
2. दूसरे पक्ष का मानना है कि अनुच्छेद 370 देश की एकता में बाधक है, इसलिए इसे समाप्त कर पूरे देश में एक समान कानून लागू होना चाहिए।
3. तीसरा पक्ष राज्य के भीतर विभिन्न क्षेत्रों (जैसे जम्मू और लद्दाख) की क्षेत्रीय स्वायत्तता और विकास की माँग करता है।
समुचित दृष्टिकोण यह है कि राष्ट्रीय अखंडता की रक्षा करते हुए क्षेत्रीय विविधताओं और स्थानीय जनता की आकांक्षाओं का सम्मान किया जाए, जिससे देश और राज्य दोनों का संतुलित विकास हो सके।

मुख्य बिंदु:

• अनुच्छेद 370 और 35A से जुड़े राजनीतिक और संवैधानिक वाद-विवाद।
• राष्ट्रीय एकता बनाम क्षेत्रीय स्वायत्तता का द्वंद्व।
• लोकतांत्रिक संवाद के माध्यम से समाधान की आवश्यकता।

आम गलतियाँ:

• केवल एक पक्ष का समर्थन करना और दूसरे पक्षों के तर्कों को नजरअंदाज करना।
• व्यक्तिगत राय लिखते समय संवैधानिक सीमाओं का ध्यान न रखना।

Exam Tips:

a) सभी पक्षों के तर्कों को निष्पक्ष रूप से प्रस्तुत करें।
b) अपना निष्कर्ष देते समय राष्ट्रीय हित और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्राथमिकता दें।
c) भाषा को संयत और संतुलित रखें।

 

Question 7: असम आंदोलन सांस्कृतिक अभियान और आर्थिक पिछड़ेपन की मिली-जुली अभिव्यक्ति था। व्याख्या कीजिए।

Answer:

असम आंदोलन (1979-1985) बाहरी लोगों के खिलाफ एक बड़ा क्षेत्रीय आंदोलन था, जिसमें सांस्कृतिक और आर्थिक चिंताएँ दोनों शामिल थीं:
1. सांस्कृतिक पहचान: असम के लोगों को डर था कि अवैध प्रवासियों (विशेषकर बांग्लादेशियों) के कारण स्थानीय असमिया लोग अपने ही राज्य में अल्पसंख्यक बन जाएंगे और उनकी भाषा व संस्कृति खतरे में पड़ जाएगी।
2. आर्थिक पिछड़ापन: असम में प्राकृतिक संसाधन (जैसे चाय, तेल और कोयला) प्रचुर मात्रा में होने के बावजूद यहाँ के स्थानीय लोगों को इसका आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा था और राज्य आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ था।
इसलिए यह आंदोलन असम की संस्कृति की रक्षा और आर्थिक संसाधनों पर नियंत्रण पाने की मिली-जुली अभिव्यक्ति थी।

मुख्य बिंदु:

• ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) ने इस आंदोलन का नेतृत्व किया था।
• अवैध अप्रवासन असम की सबसे बड़ी समस्या रहा है।
• यह आंदोलन अंततः 1985 के 'असम समझौते' के साथ समाप्त हुआ।

आम गलतियाँ:

• केवल सांस्कृतिक कारण बताना और आर्थिक कारणों को छोड़ देना।
• असम समझौते की प्रकृति को गलत समझना।

Exam Tips:

a) सांस्कृतिक और आर्थिक दोनों पहलुओं को अलग-अलग बिंदुओं में समझाएँ।
b) छात्र संघ (AASU) और असम समझौते का उल्लेख अवश्य करें।
c) उत्तर को सारगर्भित रखें।

 

Question 8: हर क्षेत्रीय आंदोलन अलगाववादी माँग की तरफ अग्रसर नहीं होता। इस अध्याय से उदाहरण देकर इस तथ्य की व्याख्या कीजिए।

Answer:

यह कथन बिल्कुल सत्य है कि हर क्षेत्रीय आंदोलन अलगाववादी नहीं होता। भारतीय लोकतंत्र में क्षेत्रीय आकांक्षाओं को अभिव्यक्ति की पूरी छूट है और अधिकांश क्षेत्रीय आंदोलनों का अंत देश से अलग होने की माँग के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय संघ के भीतर ही अधिक स्वायत्तता या विकास की माँग के रूप में होता है।
उदाहरण के लिए:
1. द्रविड आंदोलन (तमिलनाडु): शुरुआत में इसने तमिल पहचान और उत्तर भारत के वर्चस्व के खिलाफ आवाज उठाई, लेकिन बाद में इसने अलगाव की बजाय राज्य के भीतर सत्ता और विकास की राजनीति को अपनाया।
2. असम आंदोलन: यह सांस्कृतिक पहचान और अवैध प्रवासियों के खिलाफ था, जिसका समाधान असम समझौते के तहत भारतीय संविधान के दायरे में ही खोजा गया।
3. झारखंड और उत्तराखंड आंदोलन: ये क्षेत्र विशेष के विकास और पहचान से जुड़े थे, जिनका समाधान नए राज्यों के गठन के रूप में हुआ, न कि देश से अलगाव के रूप में।

मुख्य बिंदु:

• भारतीय संघ की लचीली व्यवस्था क्षेत्रीय आंदोलनों को समाहित कर लेती है।
• क्षेत्रीय स्वायत्तता और अलगाववाद में अंतर होता है।
• लोकतांत्रिक वार्ता से अधिकांश समस्याओं का समाधान संभव है।

आम गलतियाँ:

• सभी क्षेत्रीय आंदोलनों को नकारात्मक या अलगाववादी मान लेना।
• उचित उदाहरणों के बिना उत्तर लिखना।

Exam Tips:

a) सैद्धांतिक बात कहने के बाद उपयुक्त उदाहरण (जैसे तमिलनाडु या असम) जरूर दें।
b) स्पष्ट करें कि लोकतांत्रिक ढांचा ऐसी माँगों को कैसे संभालता है।
c) उत्तर की संरचना तार्किक होनी चाहिए।

 

Question 9: भारत के विभिन्न भागों में उठने वाली क्षेत्रीय माँगों से 'विविधता में एकता' के सिद्धांत की अभिव्यक्ति होती है। क्या आप इस कथन से सहमत हैं? तर्क दीजिए।

Answer:

हाँ, हम इस कथन से पूर्णतः सहमत हैं। भारत जैसी विशाल विविधता वाले देश में विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं, संस्कृतियों और धर्मों के लोगों का निवास है। जब विभिन्न क्षेत्रों से क्षेत्रीय आकांक्षाएँ या विकास की माँगे उठती हैं, तो यह इस बात का प्रमाण है कि भारत की बहुलता जीवित और सक्रिय है।
भारतीय लोकतंत्र ने इन क्षेत्रीय विभिन्नताओं को दबाने के बजाय उन्हें राजनीतिक और संवैधानिक दायरे में अपनी बात रखने का अवसर दिया है। जब केंद्र सरकार राज्यों की भाषायी या सांस्कृतिक माँगों को मानकर राज्यों का पुनर्गठन करती है या स्वायत्तता देती है, तो इससे राष्ट्र की एकता मजबूत होती है। इस प्रकार, क्षेत्रीय विविधता और राष्ट्रीय एकता एक-दूसरे के पूरक बन जाते हैं।

मुख्य बिंदु:

• भारत की मुख्य विशेषता 'विविधता में एकता' है।
• क्षेत्रीय आकांक्षाएँ लोकतंत्र को और अधिक मजबूत करती हैं।
• भारतीय संविधान विभिन्नताओं का सम्मान करता है।

आम गलतियाँ:

• क्षेत्रीय माँगों को हमेशा देश के लिए खतरा मान लेना।
• लोकतंत्र की समावेशी प्रकृति को न समझ पाना।

Exam Tips:

a) अपने उत्तर की शुरुआत स्पष्ट सहमति या असहमति से करें।
b) उचित तर्कों के साथ अपने विचारों को समर्थन दें।
c) उत्तर का समापन सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ करें।

 

Question 10: नीचे लिखे अवतरण को पढ़ें और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें:
हजारिका का गीत ...एका की विजय है; पूर्वोत्तर के सात राज्यों को इस गीत में एक ही माँ की सात बेटियाँ कहा गया है...मेघालय अपने रास्ते गई...अरुणाचल भी अलग हुई और मिजोरम असम के द्वार पर दुल्हें की तरह दूसरी बेटी से ब्याह रचाने को खड़ा है...इस गीत का अंत असमों लोगों की एकता को बनाए रखने के संकल्प के साथ होता है और इसमें समकालीन असम में मौजूद छोटी-छोटी कौमों को भी अपने साथ एकजुट रखने की बात कही गई है...करबी और मिजिंग भाई-बहन हमारे ही प्रियजन हैं।
-संजीव बरुआ
(क) लेखक यहाँ किस एकता की बात कर रहा है?
(ख) पुराने राज्य असम से अलग करके पूर्वोत्तर के कुछ राज्य क्यों बनाए गए?
(ग) क्या आपको लगता है कि भारत के सभी क्षेत्रों के ऊपर एकता की यही बात लागू हो सकती है?

Answer:

(क) लेखक यहाँ पूर्वोत्तर भारत की क्षेत्रीय, सांस्कृतिक और भाषायी विविधता के बावजूद वहाँ की आंतरिक एकता तथा असम के नेतृत्व में सभी छोटी-बड़ी जनजातियों और समुदायों के आपसी भाईचारे की बात कर रहा है।
(ख) पुराने असम राज्य से अलग करके नए राज्य इसलिए बनाए गए क्योंकि वहाँ विभिन्न जनजातीय समुदायों की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, भाषा और अलग विकास की आकांक्षाएँ थीं, जिन्हें असम के भीतर पूरा करना संभव नहीं हो पा रहा था।
(ग) हाँ, भारत के सभी क्षेत्रों पर यह बात लागू होती है क्योंकि भारत एक विविधताओं से भरा देश है। यहाँ अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों की अपनी विशिष्ट संस्कृति और भाषा है, और देश की अखंडता तभी मजबूत रह सकती है जब हम इन विविधताओं का सम्मान करते हुए सभी को साथ लेकर चलें।

मुख्य बिंदु:

• गद्यांश आधारित प्रश्नों में मूल पाठ और उसके संदेश को समझना जरूरी है।
• पूर्वोत्तर राज्यों का पुनर्गठन उनकी विशिष्ट पहचान के आधार पर हुआ था।
• विविधता का सम्मान ही भारतीय राष्ट्रवाद की मूल ताकत है।

आम गलतियाँ:

• गद्यांश को बिना पढ़े अपने मन से उत्तर लिख देना।
• उप-प्रश्नों (क, ख, ग) के अलग-अलग स्पष्ट उत्तर न देना।

Exam Tips:

a) गद्यांश को कम से कम दो बार ध्यानपूर्वक पढ़ें।
b) प्रत्येक उप-प्रश्न का उत्तर अलग पैराग्राफ या बिंदु में लिखें।
c) गद्यांश के मुख्य संदेश को अपने शब्दों में सटीक रूप से व्यक्त करें।

 

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