Download NCERT Solutions for Class 12 Political Science Chapter 06 लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट
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Question 1: बताएँ कि आपातकाल के बारे में निम्नलिखित कथन सही हैं या गलत:
(क) आपातकाल की घोषणा 1975 में इंदिरा गाँधी ने की थी।
(ख) आपातकाल में सभी मौलिक अधिकार निष्क्रिय हो गए।
(ग) बिगड़ती हुई आर्थिक स्थिति के मद्देनजर आपातकाल की घोषणा की गई थी।
(घ) आपातकाल के दौरान विपक्ष के अनेक नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।
(ङ) सी.पी.आई. ने आपातकाल की घोषणा का समर्थन किया।
Answer:
(क) आपातकाल की घोषणा 1975 में इंदिरा गाँधी ने की थी। - सही
(ख) आपातकाल में सभी मौलिक अधिकार निष्क्रिय हो गए। - सही
(ग) बिगड़ती हुई आर्थिक स्थिति के मद्देनजर आपातकाल की घोषणा की गई थी। - गलत (कारण मुख्य रूप से राजनीतिक और न्यायिक निर्णय थे, आर्थिक स्थिति केवल एक पृष्ठभूमि थी)
(घ) आपातकाल के दौरान विपक्ष के अनेक नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। - सही
(ङ) सी.पी.आई. ने आपातकाल की घोषणा का समर्थन किया। - सही
मुख्य बिंदु:
• 25 जून 1975 को आंतरिक अशांति के आधार पर आपातकाल लगाया गया था।
• आपातकाल के दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे।
• सरकार विरोधी नेताओं को मीसा (MISA) के तहत गिरफ्तार किया गया था।
आम गलतियाँ:
• छात्रों को लगता है कि केवल आर्थिक कारणों से आपातकाल लगा था।
• सभी कथनों को बिना पढ़े एक जैसा उत्तर देना।
• कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) की भूमिका को गलत समझना।
Exam Tips:
a) ऐसे बहुविकल्पीय या सत्य/असत्य प्रश्नों को हल करते समय प्रत्येक कथन को ध्यान से पढ़ें।
b) मुख्य ऐतिहासिक तिथियों और राजनीतिक दलों की भूमिका को याद रखें।
c) उत्तर पुस्तिका में स्पष्ट रूप से 'सही' या 'गलत' लिखें।
Question 2: निम्नलिखित में से कौन-सा आपातकाल की घोषणा के संदर्भ से मेल नहीं खाता है:
(क) 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान
(ख) 1974 की रेल-हड़ताल
(ग) नक्सलवादी आंदोलन
(घ) इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला
(ङ) शाह आयोग की रिपोर्ट
Answer:
(ग) नक्सलवादी आंदोलन
मुख्य बिंदु:
• नक्सलवादी आंदोलन आपातकाल की घोषणा का तात्कालिक या मुख्य कारण नहीं था, हालांकि यह पहले से चल रहा था।
• संपूर्ण क्रांति, रेल हड़ताल और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले ने आपातकाल की पृष्ठभूमि तैयार की थी।
• शाह आयोग का गठन आपातकाल के बाद ज्यादतियों की जाँच के लिए हुआ था, न कि उसकी घोषणा के संदर्भ में।
आम गलतियाँ:
• शाह आयोग और नक्सलवादी आंदोलन की समय-सीमा में भ्रमित होना।
• सभी घटनाओं को एक ही समय का मान लेना।
Exam Tips:
a) घटनाओं का कालक्रम (Chronology) याद रखना बेहद जरूरी है।
b) देखें कि कौन सी घटना आपातकाल से पहले हुई और कौन सी बाद में।
c) विकल्पों को ध्यान से पढ़कर सही उत्तर चुनें।
Question 3: निम्नलिखित में मेल बैठाएँ:
(क) संपूर्ण क्रांति (i) इंदिरा गाँधी
(ख) गरीबी हटाओ (ii) जयप्रकाश नारायण
(ग) छात्र आंदोलन (iii) बिहार आंदोलन
(घ) रेल हड़ताल (iv) जॉर्ज फर्नांडीस
Answer:
(क) संपूर्ण क्रांति - (ii) जयप्रकाश नारायण
(ख) गरीबी हटाओ - (i) इंदिरा गाँधी
(ग) छात्र आंदोलन - (iii) बिहार आंदोलन
(घ) रेल हड़ताल - (iv) जॉर्ज फर्नांडीस
मुख्य बिंदु:
• जयप्रकाश नारायण ने बिहार से 'संपूर्ण क्रांति' का नेतृत्व किया था।
• इंदिरा गाँधी का प्रसिद्ध नारा 'गरीबी हटाओ' 1971 के चुनाव में था।
• जॉर्ज फर्नांडीस ने राष्ट्रीय समन्वय समिति के तहत रेल हड़ताल का नेतृत्व किया था।
आम गलतियाँ:
• नेताओं और उनके आंदोलनों का गलत मिलान करना।
• छात्र आंदोलन और संपूर्ण क्रांति को अलग-अलग संदर्भ में देखना जबकि दोनों जुड़े थे।
Exam Tips:
a) मिलान करने वाले प्रश्नों में सही जोड़े तीर या आमने-सामने लिखकर स्पष्ट करें।
b) महत्वपूर्ण नारों और उनके प्रवर्तकों की सूची याद रखें।
c) परीक्षा में दोनों सूचियों को उतारकर सही मिलान दर्शाना सुरक्षित तरीका है।
Question 4: किन कारणों से 1980 में मध्यावधि चुनाव करवाने पड़े?
Answer:
जनता पार्टी ने 1977 के चुनावों में कांग्रेस पार्टी को चुनाव में हराया था लेकिन जनता पार्टी के नेताओं में प्रधानमंत्री के पद को लेकर मतभेद हुए। पहले मोरारजी देसाई और फिर बाद में कुछ समय के लिए चरण सिंह प्रधानमंत्री रहे। 18 महीने में ही मोरारजी देसाई ने लोकसभा में अपना बहुमत खो दिया जिसकी वजह से मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। मोरारजी देसाई के बाद चरण सिंह कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री बने। चरण सिंह मात्र चार महीने ही प्रधानमंत्री के पद पर रह पाए। इसके बाद 1980 में मध्यावधि चुनाव करवाने पड़े।
मुख्य बिंदु:
• जनता पार्टी में नेतृत्व की महत्वाकांक्षा और आंतरिक कलह।
• मोरारजी देसाई और चरण सिंह के बीच मतभेद।
• कांग्रेस द्वारा समर्थन वापस लिए जाने के कारण सरकार का अल्पमत में आना।
आम गलतियाँ:
• 1977 और 1980 के राजनीतिक घटनाक्रम में भ्रमित होना।
• जनता पार्टी के पतन के सही कारणों को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) उत्तर में गठबंधन सरकारों की अस्थिरता का मुख्य कारण स्पष्ट रूप से लिखें।
b) प्रधानमंत्री के नाम और उनके कार्यकाल का संक्षिप्त उल्लेख करें।
c) उत्तर को पैराग्राफ या बिंदुओं में लिखकर स्पष्टता बनाए रखें।
Question 5: जनता पार्टी ने 1977 में शाह आयोग को नियुक्त किया था। इस आयोग की नियुक्ति क्यों की गई थी और इसके क्या निष्कर्ष थे?
Answer:
शाह जाँच आयोग: 1977 में जनता पार्टी की सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के भूतपूर्व मुख्य न्यायाधीश श्री जे.सी. शाह की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया। इस आयोग का गठन '25 जून 1975' के दिन घोषित आपातकाल के दौरान की गई कार्रवाई तथा सत्ता के दुरुपयोग, अतिचार और कदाचार के विभिन्न आरोपों के विविध पहलुओं की जाँच के लिए किया गया था। आयोग ने बहुत से सदस्यों की जाँच की और हजारों गवाहों के बयान दर्ज किए। सरकार ने आयोग के द्वारा प्रस्तुत दो अंतरिम रिपोर्टों और तीसरी तथा अंतिम रिपोर्ट की सिफारिशों तथा निष्कर्षों को स्वीकार किया। यह रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों में भी विचार के लिए रखी गई।
मुख्य बिंदु:
• शाह आयोग का गठन आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों की जाँच के लिए हुआ था।
• आयोग ने कई गवाहों के बयान लिए और सत्ता के दुरुपयोग के प्रमाण पाए।
• सरकार ने आयोग की रिपोर्ट को संसद में प्रस्तुत किया और उसकी सिफारिशों को स्वीकार किया।
आम गलतियाँ:
• आयोग के अध्यक्ष का नाम गलत लिखना।
• आयोग के उद्देश्य को केवल राजनीतिक प्रतिशोध बताना जबकि यह औपचारिक जाँच थी।
Exam Tips:
a) अध्यक्ष का नाम (न्यायमूर्ति जे.सी. शाह) अवश्य उल्लेख करें।
b) आयोग के गठन का वर्ष (1977) और मुख्य उद्देश्य स्पष्ट लिखें।
c) उत्तर को तथ्यात्मक और सटीक रखें।
Question 6: 1975 में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करते हुए सरकार ने इसके क्या कारण बताए थे?
Answer:
1975 में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करते हुए सरकार ने इसके निम्न कारण बताए:
• 25 जून 1975 में सरकार द्वारा आंतरिक गड़बड़ी के आधार पर अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की गई।
• समाजवादी नेता राजनारायण ने 1971 में चुनाव हारने के बाद इंदिरा गाँधी के विरुद्ध याचिका दायर की और यह बताया कि इंदिरा गाँधी ने चुनाव प्रचार में सरकारी मशीनरी का प्रयोग किया है। 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश जगमोहन लाल सिन्हा ने याचिका को स्वीकार करते हुए इंदिरा गाँधी के निर्वाचन को रद्द किया।
• 1974 के जनवरी माह में बढ़ी हुई कीमत तथा शासन में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ गुजरात में छात्र आंदोलन हुआ। इस आंदोलन का राजनीति पर बहुत प्रभाव पड़ा। जब इस आंदोलन ने उग्र रूप धारण किया तो केंद्र सरकार ने वहाँ राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया।
• 1974 के मार्च माह में बढ़ती हुई कीमतों, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार तथा खाद्यान्न के अभाव के विरुद्ध छात्रों ने आंदोलन किया। जयप्रकाश नारायण चाहते थे कि यह आंदोलन देश के दूसरे हिस्सों में भी फैले। जयप्रकाश नारायण ने बिहार की कांग्रेस सरकार को बर्खास्त करने की माँग की। उन्होंने सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक दायरे में 'संपूर्ण क्रांति' का आह्वान किया ताकि उन्हीं के शब्दों में 'सच्चे लोकतंत्र की स्थापना की जा सके'।
• 1974 की रेल हड़ताल: 1974 में रेलवे कर्मचारियों के संघर्ष से संबंधित राष्ट्रीय समन्वय समिति ने जॉर्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में रेलवे कर्मचारियों की एक राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया। भारत के सबसे बड़े सार्वजनिक उद्यम के कर्मचारी मई 1974 में हड़ताल पर चले गये।
• सरकार और न्यायपालिका के बीच संघर्ष: संविधान के लागू होने के बाद से ही न्यायपालिका तथा संसद के बीच संघर्ष शुरू हो गया था।
मुख्य बिंदु:
• आंतरिक अशांति और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया गया।
• विपक्ष द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी आंदोलनों का उल्लेख।
• न्यायिक फैसलों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति।
आम गलतियाँ:
• केवल एक कारण (जैसे इलाहाबाद कोर्ट का फैसला) लिखकर छोड़ देना।
• आर्थिक और राजनीतिक कारणों को अलग-अलग स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न के रूप में बिंदुओं में उत्तर दें।
b) जेपी आंदोलन, रेल हड़ताल और न्यायालय के फैसले जैसे मुख्य बिंदुओं को शामिल करें।
c) अनुच्छेद 352 का उल्लेख करना न भूलें।
Question 7: 1977 के चुनावों के बाद पहली दफा केंद्र में विपक्षी दल की सरकार बनी। ऐसा किन कारणों से संभव हुआ?
Answer:
1977 के चुनावों के बाद पहली दफा केंद्र में विपक्षी दल की सरकार बनने के निम्नलिखित कारण थे:
• कांग्रेस पार्टी के कुछ अन्य नेताओं ने एक नई पार्टी बनाई। जगजीवन राम के नेतृत्व में बनाई गई इस पार्टी का नाम 'कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी' था इसके बाद यह पार्टी भी जनता पार्टी में शामिल हो गई।
• आपातकाल की घोषणा के कारण 1977 में कांग्रेस हार गई। आपातकाल लागू होने के कारण पहले ही विपक्षी पार्टियों एक-दूसरे के नजदीक आ रही थीं।
• 1977 के चुनावों की जनता पार्टी ने आपातकाल के ऊपर जनमत संग्रह का रूप दिया। इस पार्टी ने चुनाव प्रचार में शासन के अलोकतांत्रिक चरित्र और आपातकाल के दौरान की गई ज्यादतियों पर जोर दिया।
• हजारों लोगों की गिरफ्तारी और प्रेस की सेंसरशिप की पृष्ठभूमि में जनमत कांग्रेस के विरोध में था।
मुख्य बिंदु:
• विपक्षी दलों का एकजुट होना और 'जनता पार्टी' का गठन।
• आपातकाल के दौरान जनता में उपजा भारी असंतोष और दमन का डर।
• कांग्रेस पार्टी के भीतर से बगावत (जैसे जगजीवन राम का अलग होना)।
आम गलतियाँ:
• केवल जनता पार्टी की जीत लिखना और उसके कारणों का विश्लेषण न करना।
• आपातकाल के प्रभाव को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) विपक्षी एकजुटता और आपातकाल के विरोध को मुख्य आधार बनाएं।
b) 'कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी' पार्टी का उल्लेख अवश्य करें।
c) उत्तर को स्पष्ट बिंदुओं में प्रस्तुत करें।
Question 8: हमारी राजव्यवस्था के निम्नलिखित पक्ष पर आपातकाल का क्या असर हुआ?
• नागरिक अधिकारों की दशा और नागरिकों पर इसका असर
• कार्यपालिका और न्यायपालिका के संबंध
• जनसंचार माध्यमों के कामकाज पुलिस और नौकरशाही की कार्रवाईयाँ
Answer:
नागरिक अधिकारों की दशा और नागरिकों पर इसका असर:
आपातकाल में सभी मौलिक अधिकार निष्क्रिय हो गए थे। लोगों को बिना बताए गिरफ्तार किया गया। सरकार ने आपातकाल के दौरान निवारक नजरबंदी अधिनियमों का प्रयोग करके बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ कीं। जिन राजनीतिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था वे बंदी प्रत्यक्षीकरण का सहारा लेकर गिरफ्तारी को चुनौती नहीं दे सकते थे।
कार्यपालिका और न्यायपालिका के संबंध:
इंदिरा गाँधी ने कार्यपालिका की सर्वोच्चता का हवाला देकर कई संविधान संशोधन करने की योजना बनाई परंतु सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी योजना को निष्फल कर दिया। उच्च न्यायालयों को अनेक संघीय विषय पर मुकदमे सुनने का अधिकार नहीं रहा तथा सर्वोच्च न्यायालय से भी प्रांतीय विधियों से संबंधित मुकदमे सुनने का अधिकार ले लिया गया।
जनसंचार माध्यमों के कामकाज:
'इंडियन एक्सप्रेस' तथा 'स्टेट्समैन' जैसे अखबारों पर प्रेस पर सेंसरशिप का विरोध किया। जिन समाचारों को छपने से रोका जाता था उनकी जगह ये अखबार खाली छोड़ देते थे। 'सेमिनार' और 'मेनस्ट्रीम' जैसी पत्रिकाओं ने सेंसरशिप के आगे घुटने टेकने की जगह बंद होना ही सही समझा। इसके विरोध में अनेक लोगों ने अपने पदक वापस लौटा दिए।
पुलिस व नौकरशाही की कार्रवाईयाँ:
आपातकाल के समय पुलिस व नौकरशाही की कार्रवाईयाँ आलोचनापूर्ण थीं। इन अधिकारियों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया।
मुख्य बिंदु:
• मौलिक अधिकारों का निलंबन और प्रेस सेंसरशिप।
• न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर अंकुश और संवैधानिक संशोधन।
• पुलिस और नौकरशाही द्वारा शक्तियों का अत्यधिक दुरुपयोग।
आम गलतियाँ:
• चारों बिंदुओं में से किसी एक को छोड़कर बाकी का उत्तर देना।
• प्रेस सेंसरशिप और न्यायिक संघर्ष को स्पष्ट रूप से न समझाना।
Exam Tips:
a) प्रश्न में दिए गए चारों उप-शीर्षकों को अलग-अलग पैराग्राफ या बिंदुओं में उत्तर दें।
b) 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' और 'प्रेस सेंसरशिप' जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें।
c) उत्तर को संतुलित और तथ्यात्मक रखें।
Question 9: भारत की दलीय प्रणाली पर आपातकाल किस तरह असर हुआ? अपने उत्तर की पुष्टि उदाहरणों से करें।
Answer:
भारत की दलीय प्रणाली पर आपातकाल के कई प्रभाव देखने को मिले। आपातकाल के बाद सभी विपक्षी दलों ने यह निश्चय किया कि आने वाले चुनाव में गैर-कांग्रेस वोट बिखरने नहीं चाहिए। यदि गैर-कांग्रेस वोट बिखरेंगे तो कांग्रेस को सत्ता से हटाना कठिन होगा। आपातकाल के बाद देश में जनता पार्टी का गठन हुआ। इसमें सभी प्रमुख दलों ने सम्मिलित होना स्वीकार किया। 1977 में भारतीय दलीय प्रणाली में दो दलीय व्यवस्था को विकसित होते देखा गया। परंतु यह बात बहुत हद तक सही नहीं थी। आपातकाल के बाद कई राज्यों में भी विपक्षी दलों ने एकजुट होकर कांग्रेस का मुकाबला किया और कई राज्यों में विधानसभा चुनावों में उन्होंने मिलकर चुनाव लड़कर कांग्रेस को हराया। चुनावों में जनता पार्टी को भारी सफलता मिली। परंतु यह सरकार 18 महीने में विभाजन के कारण गिर गई तथा भारत में पुनः बहुदलीय प्रणाली का दौर आ गया।
मुख्य बिंदु:
• गैर-कांग्रेसवाद की राजनीति का मजबूत होना।
• जनता पार्टी के रूप में कई दलों का एक मंच पर आना।
• अल्प समय के लिए दो-दलीय प्रणाली जैसा माहौल बनना लेकिन बाद में पुनः बहुदलीय व्यवस्था में लौटना।
आम गलतियाँ:
• यह मान लेना कि आपातकाल के बाद हमेशा के लिए दो-दलीय प्रणाली स्थापित हो गई थी।
• जनता पार्टी के विघटन और बहुदलीय प्रणाली की वापसी का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) स्पष्ट करें कि कैसे आपातकाल ने विपक्षी दलों को एक होने का अवसर दिया।
b) 1977 के चुनाव और जनता पार्टी के गठन का उदाहरण दें।
c) निष्कर्ष में बहुदलीय प्रणाली की निरंतरता को समझाएं।
Question 10: निम्नलिखित अवतरण को पढ़ें और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर दें:
1977 के चुनावों के दौरान भारतीय लोकतंत्र, दो-दलीय व्यवस्था के जितना नजदीक आ गया था उतना पहले कभी नहीं आया। बहरहाल अगले कुछ सालों में मामला पूरी तरह बदल गया। हारने के तुरंत बाद कांग्रेस दो टुकड़ों में बँट गई..... जनता पार्टी में भी बड़ी अफरा-तफरी मची.....डेविड बटलर, अशोक लाहिड़ी और प्रणव रॉय।
- पार्थ चटर्जी
(क) किन वजहों से 1977 में भारत की राजनीति दो-दलीय प्रणाली के समान जान पड़ रही थी?
(ख) 1977 में दो से ज्यादा पार्टियाँ अस्तित्व में थीं। इसके बावजूद लेखकगण इस दौर को दो-दलीय प्रणाली के नजदीक बताते हैं क्योंकि बहुत से विपक्षी दल जैसे- जनसंघ, भारतीय लोकदल और सोशलिस्ट पार्टी ने मिल कर जनता पार्टी के नाम से एक पार्टी बना ली थी। इसी वजह से 1977 में केवल कांग्रेस और जनता पार्टी दोनों पार्टियों के मध्य ही चुनाव हुआ था।
(ग) कांग्रेस और जनता पार्टी में किन कारणों से टूट पैदा हुई?
Answer:
(क) 1977 में भारत की राजनीति दो-दलीय प्रणाली जैसी इसलिए लग रही थी क्योंकि सभी प्रमुख विपक्षी दल एकजुट होकर 'जनता पार्टी' के रूप में एक मंच पर आ गए थे, जिससे मुकाबला मुख्य रूप से कांग्रेस और जनता पार्टी के बीच हो गया था।
(ख) 1977 में दो से ज्यादा पार्टियाँ अस्तित्व में थीं इसके बावजूद लेखकगण इस दौर को दो-दलीय प्रणाली के नजदीक बताते हैं क्योंकि लगभग सभी मुख्य विपक्षी दल (जैसे जनसंघ, भारतीय लोकदल, सोशलिस्ट पार्टी आदि) ने मिलकर 'जनता पार्टी' का निर्माण कर लिया था, जिससे मुकाबला मुख्य रूप से कांग्रेस और नवनिर्मित जनता पार्टी के बीच ही सिमट गया था।
(ग) कांग्रेस पार्टी में अंदरूनी कलh और चुनाव हारने के बाद नेतृत्व को लेकर असंतोष के कारण टूट हुई। वहीं जनता पार्टी में वैचारिक भिन्नता, नेतृत्व की महत्वकांक्षा (मोरारजी देसाई और चरण सिंह के बीच मतभेद) तथा पूर्व जनसंघ के सदस्यों के साथ अन्य घटकों के वैचारिक मतभेदों के कारण टूट पैदा हुई।
मुख्य बिंदु:
• गद्यांश आधारित प्रश्नों में उत्तर गद्यांश के संदर्भ और पाठ की समझ के आधार पर दें।
• जनता पार्टी का गठन और विपक्षी एकजुटता मुख्य कारण थी।
• दोनों प्रमुख दलों (कांग्रेस और जनता पार्टी) में आंतरिक अंतर्विरोध और नेतृत्व की महत्वाकांक्षा टूट का कारण बनी।
आम गलतियाँ:
• गद्यांश को ठीक से पढ़े बिना अपने मन से उत्तर लिखना।
• उप-प्रश्नों (क, ख, ग) के क्रम को मिला देना।
Exam Tips:
a) स्रोत आधारित प्रश्नों को हल करते समय गद्यांश की पंक्तियों को ध्यान से समझें।
b) प्रत्येक उप-प्रश्न का उत्तर अलग से स्पष्ट रूप से लिखें।
c) उत्तर में पाठ के मुख्य तथ्यों (जैसे जनता पार्टी के घटक दल) का समायोजन करें।
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