NCERT Solutions Class 12 Political Science Politics in India since Independence Chapter 05 Challenges to and Restoration of the Congress System (कांग्रेस प्रणाली चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना) in Hindi

NCERT Solutions for Class 12 Political Science: Chapter 05 कांग्रेस प्रणाली चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना

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Practice Class 12 Political Science Solutions: Chapter 05 कांग्रेस प्रणाली चुनौतियाँ और पुनर्स्थापना

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Question 1: 1967 के चुनावों के बारे में निम्नलिखित में कौन-कौन से बयान सही हैं:
(क) कांग्रेस लोकसभा के चुनाव में विजयी रही, लेकिन कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव वह हार गई।
(ख) कांग्रेस लोकसभा के चुनाव भी हारी और विधानसभा के भी।
(ग) कांग्रेस को लोकसभा में बहुमत नहीं मिला, लेकिन दूसरी पार्टियों के समर्थन से एक गठबंधन सरकार बनाई।
(घ) कांग्रेस केंद्र में सत्तासीन रही और उसका बहुमत भी बढ़ा।

Answer:

(क) कांग्रेस लोकसभा के चुनाव में विजयी रही, लेकिन कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव वह हार गई।

मुख्य बिंदु:

• 1967 के चौथे आम चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा में साधारण बहुमत प्राप्त किया था।
• कांग्रेस पार्टी को देश के कई प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनावों में हार का सामना करना पड़ा।
• इन चुनावों ने भारतीय राजनीति में 'कांग्रेस प्रणाली' के एकछत्र प्रभुत्व को पहली बार बड़ी चुनौती दी।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि कांग्रेस लोकसभा और विधानसभा दोनों चुनाव पूरी तरह हार गई थी।
• यह सोचना कि केंद्र में कांग्रेस की गठबंधन सरकार बनी थी, जबकि उसे लोकसभा में बहुमत मिला था।
• विकल्पों को बिना ध्यान से पढ़े सभी को सही मान लेना।

Exam Tips:

a) 1967 के चुनावों के परिणामों को लोकसभा और राज्यों की विधानसभा के संदर्भ में अलग-अलग याद रखें।
b) बहुविकल्पीय प्रश्नों में कथनों का मिलान पाठ्यपुस्तक के मुख्य तथ्यों के आधार पर करें।
c) इस वर्ष को 'राजनीतिक भूकंप' के रूप में भी जाना जाता है, इसे उत्तर में लिख सकते हैं।

 

Question 2: निम्नलिखित का मेल करें:
(क) सिंडिकेट                               (i) कोई निर्वाचित जन-प्रतिनिधि जिस पार्टी के टिकट से जीतता है, उस पार्टी को छोड़कर अगर दूसरे दल में चला जाए।
(ख) दल-बदल                             (ii) लोगों का ध्यान आकर्षित करने वाला एक मनभावन मुहावरा।
(ग) नारा                                 (iii) कांग्रेस और इसकी नीतियों के खिलाफ अलग-अलग विचारધારाओं की पार्टियों का एकजुट होना।
(घ) गैर-कांग्रेसवाद                       (iv) कांग्रेस के भीतर ताकतवर और प्रभावशाली नेताओं का एक समूह।

Answer:

(क) सिंडिकेट - (iv) कांग्रेस के भीतर ताकतवर और प्रभावशाली नेताओं का एक समूह।
(ख) दल-बदल - (i) कोई निर्वाचित जन-प्रतिनिधि जिस पार्टी के टिकट से जीतता है, उस पार्टी को छोड़कर अगर दूसरे दल में चला जाए।
(ग) नारा - (ii) लोगों का ध्यान आकर्षित करने वाला एक मनभावन मुहावरा।
(घ) गैर-कांग्रेसवाद - (iii) कांग्रेस और इसकी नीतियों के खिलाफ अलग-अलग विचारधाराओं की पार्टियों का एकजुट होना।

मुख्य बिंदु:

• सिंडिकेट कांग्रेस संगठन के भीतर शक्तिशाली नेताओं का एक अनौपचारिक समूह था।
• दल-बदल की राजनीति ने 1967 के बाद कई राज्यों में सरकारों के बनने और गिरने में अहम भूमिका निभाई।
• गैर-कांग्रेसवाद की रणनीति राममनोहर लोहिया द्वारा दी गई थी।

आम गलतियाँ:

• मिलान करते समय भ्रमित होकर गलत विकल्पों को आपस में जोड़ देना।
• सिंडिकेट और गैर-कांग्रेसवाद के अर्थ को आपस में मिला देना।

Exam Tips:

a) मिलान वाले प्रश्नों को हल करते समय जो विकल्प सबसे स्पष्ट हों, उन्हें पहले हल करें।
b) प्रत्येक शब्दावली (Term) की परिभाषा को अच्छी तरह याद रखें।
c) उत्तरपुस्तिका में मिलान को सही क्रम (जैसे क-iv) के रूप में ही लिखें।

 

Question 3: निम्नलिखित नारे से किन नेताओं का संबंध है:
(क) जय जवान जय किसान
(ख) इंदिरा हटाओ!
(ग) गरीबी हटाओ!

Answer:

(क) जय जवान जय किसान - लाल बहादुर शास्त्री
(ख) इंदिरा हटाओ! - ग्रैंड अलायंस (विपक्षी दलों का गठबंधन)
(ग) गरीबी हटाओ! - इंदिरा गाँधी

मुख्य बिंदु:

• 'जय जवान जय किसान' का नारा लाल बहादुर शास्त्री ने 1965 के युद्ध और देश के अकाल के समय दिया था।
• 'इंदिरा हटाओ' का नारा 1971 के चुनावों में विपक्षी दलों द्वारा इंदिरा गाँधी के खिलाफ इस्तेमाल किया गया था।
• 'गरीबी हटाओ' का नारा इंदिरा गाँधी ने 1971 के चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए दिया था।

आम गलतियाँ:

• 'गरीबी हटाओ' और 'इंदिरा हटाओ' के नारों के सही प्रसंग और नेताओं को आपस में मिला देना।
• 'जय जवान जय किसान' नारे को किसी अन्य प्रधानमंत्री से जोड़ देना।

Exam Tips:

a) प्रमुख नारों और उनके प्रणेता नेताओं की सूची बनाकर याद रखें।
b) नारों का राजनीतिक प्रभाव परीक्षा में अक्सर पूछा जाता है।
c) उत्तर लिखते समय नारे के साथ संबंधित वर्ष या घटना का उल्लेख भी करें।

 

Question 4: 1971 के ग्रैंड अलायंस के बारे में कौन-सा कथन ठीक है?
(क) इसका गठन गैर-कम्युनिस्ट और गैर-कांग्रेसरी दलों ने किया था।
(ख) इसके पास एक स्पष्ट राजनीतिक तथा वैचारिक कार्यक्रम था।
(ग) इसका गठन सभी गैर-कांग्रेसरी दलों ने एकजुट होकर किया था।

Answer:

(क) इसका गठन गैर-कम्युनिस्ट और गैर-कांग्रेसरी दलों ने किया था।

मुख्य बिंदु:

• 1971 के चुनाव में इंदिरा गाँधी का मुकाबला करने के लिए कई विपक्षी दलों ने मिलकर 'ग्रैंड अलायंस' बनाया था।
• इस गठबंधन में भारतीय जनसंघ, स्वतंत्र पार्टी, संयुक्त समाजवादी पार्टी, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी (निजी गुट) आदि शामिल थे (साम्यवादी दल इसमें शामिल नहीं थे)।
• इस गठबंधन के पास कोई साझा वैचारिक कार्यक्रम नहीं था, इनका एकमात्र उद्देश्य 'इंदिरा हटाओ' था।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि सभी गैर-कांग्रेस दलों ने इसमें हिस्सा लिया था (कम्युनिस्ट दल इसमें शामिल नहीं थे)।
• यह सोचना कि इस गठबंधन के पास कोई मजबूत और स्पष्ट वैचारिक एजेंडा था।

Exam Tips:

a) ग्रैंड अलायंस की असफलता के कारणों को अच्छे से तैयार करें।
b) बहुविकल्पीय प्रश्नों में नकारात्मक शब्दों (जैसे 'गैर-कम्युनिस्ट') पर विशेष ध्यान दें।
c) उत्तर में यह स्पष्ट करें कि वैचारिक एकरूपता के अभाव में यह गठबंधन असफल रहा।

 

Question 5: किसी राजनीतिक दल को अपने अंदरूनी मतभेदों का समाधान किस तरह करना चाहिए? यहाँ कुछ समाधान दिए गए हैं। प्रत्येक पर विचार कीजिए और उसके सामने उसके फायदों और घाटों को लिखिए।
(क) पार्टी के अध्यक्ष द्वारा बताए गए मार्ग पर चलना।
(ख) पार्टी के भीतर बहुमत की राय पर अमल करना।
(ग) हरेक मामले पर गुप्त मतदान करना।
(घ) पार्टी के वरिष्ठ और अनुशंसा नेताओं से सलाह करना।

Answer:

(क) पार्टी के अध्यक्ष द्वारा बताए गए मार्ग पर चलना:
फायदा: पार्टी में अनुशासन बना रहता है और निर्णय तेजी से लिए जाते हैं।
घाटा: पार्टी के भीतर तानाशाही बढ़ सकती है और आंतरिक लोकतंत्र कमजोर होता है।

(ख) पार्टी के भीतर बहुमत की राय पर अमल करना:
फायदा: अधिकांश सदस्यों की सहमति से निर्णय लेने पर व्यापक स्वीकृति मिलती है।
घाटा: कभी-कभी बहुमत अल्पसंख्यकों की सही और तर्कसंगत राय की उपेक्षा कर सकता है।

(ग) हरेक मामले पर गुप्त मतदान करना:
फायदा: हर सदस्य बिना किसी डर या दबाव के स्वतंत्र रूप से अपनी राय रख सकता है।
घाटा: हर छोटे-मोटे मामले पर गुप्त मतदान कराना व्यावहारिक रूप से कठिन और समय लेने वाला प्रक्रिया है।

(घ) पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं से सलाह करना:
फायदा: पार्टी को वरिष्ठ नेताओं के लंबे अनुभव और राजनीतिक दूरदर्शिता का लाभ मिलता है।
घाटा: युवा नेताओं और नए कार्यकर्ताओं की आवाज को नजरअंदाज किए जाने का जोखिम रहता है।

मुख्य बिंदु:

• किसी भी राजनीतिक दल के भीतर आंतरिक लोकतंत्र का होना अति आवश्यक है।
• नेतृत्व का सम्मान और बहुमत का आदर दोनों ही दल की मजबूती के लिए जरूरी हैं।
• तानाशाही रवैया पार्टी में विभाजन का कारण बन सकता है।

आम गलतियाँ:

• केवल फायदों को लिखना और प्रत्येक विकल्प के संभावित नुकसान को छोड़ देना।
• आंतरिक लोकतंत्र के महत्व को समझे बिना एकपक्षीय उत्तर लिखना।

Exam Tips:

a) इस प्रकार के विश्लेषणात्मक प्रश्नों में सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं को संतुलित रूप से लिखें।
b) अपने उत्तर को बिंदुओं (क, ख, ग, घ) के रूप में स्पष्ट रूप से विभाजित करें।
c) लोकतंत्र और दलीय प्रणाली के सिद्धांतों का प्रयोग अपने उत्तर को प्रभावी बनाने के लिए करें।

 

Question 6: निम्नलिखित में से किसे/किन्हें 1967 के चुनावों में कांग्रेस की हार के कारण के रूप में स्वीकार किया जा सकता है? अपने उत्तर की पुष्टि में तर्क दीजिए:
(क) कांग्रेस पार्टी में करिश्माई नेता का अभाव।
(ख) कांग्रेस पार्टी के भीतर टूट।
(ग) क्षेत्रीय, जातीय और संप्रदायिक समूहों की लामबंदी को बढ़ाना।
(घ) कांग्रेस पार्टी के अंदर मतभेद।

Answer:

(क) कांग्रेस पार्टी में करिश्माई नेता का अभाव - यह कथन पूरी तरह सही नहीं है, क्योंकि उस समय इंदिरा गाँधी पार्टी की नेता थीं, हालाँकि नेहरू जी जैसा करिश्मा शुरुआती दौर में नहीं देखा जा रहा था।
(ख) कांग्रेस पार्टी के भीतर टूट - यह हार का एक प्रमुख कारण था, क्योंकि कई राज्यों में कांग्रेसी नेता पार्टी से अलग होकर अलग दल बना चुके थे (जैसे बागी दल)।
(ग) क्षेत्रीय, जातीय और संप्रदायिक समूहों की लामबंदी को बढ़ाना - यह भी सही कारण था, क्योंकि विपक्षी दलों ने क्षेत्रीय व जातीय मुद्दों को उभारकर कांग्रेस के खिलाफ माहौल बनाया।
(घ) कांग्रेस पार्टी के अंदर मतभेद - यह कांग्रेस की हार का मुख्य कारण था। सिंडिकेट और इंदिरा गाँधी के बीच के आपसी मतभेदों ने पार्टी को अंदर से कमजोर कर दिया था।

मुख्य बिंदु:

• 1967 के चुनाव में कांग्रेस की हार के पीछे आंतरिक कलह और जनता का मोहभंग मुख्य कारण थे।
• देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और खाद्यान्न संकट से जनता में असंतोष था।
• विपक्षी दलों द्वारा 'गैर-कांग्रेसवाद' की रणनीति ने कांग्रेस विरोधी वोटों को बिखरने नहीं दिया।

आम गलतियाँ:

• सभी विकल्पों को बिना सोचे-समझे सही या गलत मान लेना।
• तर्कों के बिना केवल हाँ या ना में उत्तर देना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक बिंदु के पक्ष और विपक्ष में उचित ऐतिहासिक तर्क दें।
b) 1967 के चुनावों को भारतीय राजनीतिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण टर्निंग पॉइंट बताएं।
c) उत्तर को पैराग्राफ की जगह बिंदुओं में लिखकर अधिक अंक प्राप्त करें।

 

Question 7: 1970 के दशक में इंदिरा गाँधी की सरकार किन कारणों से लोकप्रिय हुई थी?

Answer:

1970 के दशक में इंदिरा गाँधी की सरकार निम्नलिखित कारणों से लोकप्रिय हुई थी:
• प्रिवी पर्स की समाप्ति: राजा-महाराजाओं को मिलने वाले विशेष भत्ते (प्रिवी पर्स) को समाप्त करने के निर्णय ने उन्हें समाजवादी छवि प्रदान की।
• बैंकों का राष्ट्रीयकरण: 14 प्रमुख व्यावसायिक बैंकों का राष्ट्रीयकरण करके उन्होंने आम जनता और किसानों के कल्याण की दिशा में बड़ा कदम उठाया।
• बांग्लादेश संकट में विजय: 1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान पर ऐतिहासिक विजय और बांग्लादेश का निर्माण कराने से उनकी लोकप्रियता चरम पर पहुँच गई।
• गरीबी हटाओ का नारा: 'गरीबी हटाओ' जैसे लोकप्रिय नारे ने देश के गरीब, दलित और पिछड़े वर्ग को सीधे तौर पर आकर्षित किया।

मुख्य बिंदु:

• इंदिरा गाँधी ने अपनी छवि एक गरीब-समर्थक और मजबूत नेता के रूप में स्थापित की।
• 1971 के लोकसभा चुनावों में उनकी पार्टी को भारी बहुमत मिला।
• उन्होंने पार्टी संगठन के प्रभाव से निकलकर अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता के बल पर शासन किया।

आम गलतियाँ:

• केवल एक या दो कारणों का उल्लेख करना और युद्ध या नीतियों को छोड़ देना।
• घटनाओं के क्रम (Chronology) को गलत लिखना।

Exam Tips:

a) इंदिरा गाँधी की लोकप्रियता के कारणों को बिंदुओं में लिखकर समझाएँ।
b) 1971 के युद्ध और उसके परिणामों का विशेष रूप से उल्लेख करें।
c) समाजवादी नीतियों (जैसे बैंक राष्ट्रीयकरण) को उनके भाषणों और नारों से जोड़कर लिखें।

 

Question 8: 1960 के दशक की कांग्रेस पार्टी के संदर्भ में 'सिंडिकेट' ने कांग्रेस पार्टी में क्या भूमिका निभाई?

Answer:

1960 के दशक में 'सिंडिकेट' कांग्रेस पार्टी के भीतर ताकतवर और प्रभावशाली नेताओं का एक अनौपचारिक समूह था। इसकी मुख्य भूमिकाएँ निम्नलिखित थीं:
• नेतृत्व निर्धारण में भूमिका: जवाहरलाल नेहरू के निधन के बाद लाल बहादुर शास्त्री को प्रधानमंत्री बनाने में और बाद में इंदिरा गाँधी को प्रधानमंत्री पद तक पहुँचाने में इस समूह की निर्णायक भूमिका रही।
• संगठन पर नियंत्रण: सिंडिकेट के नेताओं का पार्टी संगठन पर मजबूत पकड़ था, जिसके कारण वे नीति-निर्माण और निर्णय प्रक्रिया को प्रभावित करते थे।
• सत्ता संघर्ष: जब इंदिरा गाँधी ने अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनानी शुरू की, तब सिंडिकेट और इंदिरा गाँधी के बीच पार्टी पर नियंत्रण को लेकर गहरा सत्ता संघर्ष शुरू हो गया।
• प्रमुख नेता: इस समूह में के. कामराज, एस.के. पाटिल, एस. निजलिंगप्पा, एन. संजीव रेड्डी और अतुल्य घोष जैसे दिग्गज नेता शामिल थे।

मुख्य बिंदु:

• सिंडिकेट कांग्रेस के भीतर निर्णयात्मक ताकत का केंद्र था।
• यह समूह सरकार पर अपनी नीतियों को थोपना चाहता था, जिसे इंदिरा गाँधी ने अस्वीकार कर दिया।
• 1969 के राष्ट्रपति चुनाव के समय सिंडिकेट और इंदिरा गाँधी के बीच का विवाद खुलकर सामने आ गया।

आम गलतियाँ:

• सिंडिकेट को एक राजनीतिक दल समझ लेना, जबकि यह कांग्रेस के भीतर का ही एक गुट था।
• इसमें शामिल प्रमुख नेताओं के नाम और उनकी भूमिका को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) सिंडिकेट शब्द की सटीक परिभाषा और उसके प्रमुख सदस्यों के नाम अवश्य लिखें।
b) पार्टी संगठन और सरकार के बीच वर्चस्व की लड़ाई के रूप में इस प्रसंग को समझाएँ।
c) 1969 के कांग्रेस विभाजन में सिंडिकेट की भूमिका का विशेष जिक्र करें।

 

Question 9: कांग्रेस पार्टी किन मसलों को लेकर 1969 में टूट की शिकार हुई?

Answer:

वर्ष 1969 में कांग्रेस पार्टी में ऐतिहासिक विभाजन के प्रमुख मसले निम्नलिखित थे:
• राष्ट्रपति पद का चुनाव: 1969 में जाकिर हुसैन के निधन के बाद राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर इंदिरा गाँधी और सिंडिकेट के बीच खुला विवाद हुआ। सिंडिकेट ने एन. संजीव रेड्डी को खड़ा किया, जबकि इंदिरा गाँधी ने वी.वी. गिरी का समर्थन किया।
• अंतरात्मा की आवाज पर वोट: इंदिरा गाँधी ने सांसदों और विधायकों से अपनी 'अंतरात्मा की आवाज' पर वोट डालने की अपील की, जिससे आधिकारिक उम्मीदवार एन. संजीव रेड्डी चुनाव हार गए और वी.वी. गिरी विजयी हुए।
• वैचारिक और नीतिगत मतभेद: इंदिरा गाँधी समाजवादी नीतियां (जैसे बैंकों का राष्ट्रीयकरण, प्रिवी पर्स की समाप्ति) लागू करना चाहती थीं, जबकि सिंडिकेट के नेता इसके रूढ़िवादी रुख के खिलाफ थे।
• संगठन बनाम नेतृत्व: पार्टी संगठन पर नियंत्रण किसका होगा—संगठन के नेताओं (सिंडिकेट) का या चुनी हुई प्रधानमंत्री (इंदिरा गाँधी) का—इस वर्चस्व की लड़ाई ने पार्टी को दो फाड़ (कांग्रेस (आर) और कांग्रेस (ओ)) कर दिया।

मुख्य बिंदु:

• 1969 की टूट ने कांग्रेस प्रणाली के प्रभुत्व के एक नए दौर की शुरुआत की।
• इंदिरा गाँधी ने संगठन से अलग हटकर अपनी जनसमर्थक छवि के आधार पर पार्टी पर कब्जा कर लिया।
• यह विवाद व्यक्तिगत वर्चस्व के साथ-साथ वैचारिक दिशा का भी विवाद था।

आम गलतियाँ:

• केवल राष्ट्रपति चुनाव को कारण बताना और वैचारिक व नीतिगत मतभेदों को नजरअंदाज करना।
• दोनों धड़ों (कांग्रेस (आर) और कांग्रेस (ओ)) के बीच अंतर स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) 1969 की टूट के कारणों को बिंदुओं में लिखकर उत्तर को स्पष्ट बनाएँ।
b) वी.वी. गिरी और एन. संजीव रेड्डी के नाम और राष्ट्रपति चुनाव के घटनाक्रम को सही से याद रखें।
c) यह दिखाएँ कि यह टूट किस प्रकार संगठन और सरकार के बीच सत्ता संघर्ष का परिणाम थी।

 

Question 10: निम्नलिखित अनुच्छेद को पढ़ें और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें:
हार का इंदिरा गाँधी ने कांग्रेस को अत्यंत केंद्रीकृत और अलोकतांत्रिक पार्टी संगठन में तब्दील कर दिया, जबकि नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस शुरुआती दशकों में एक संघीय, लोकतांत्रिक और विचारधाराओं के समाहार का मंच थी। नयी और लोकलुभावन राजनीति में राजनीतिक विचारधारा को महज चुनावी विमर्श में बदल दिया। कई नए नारे चलाए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि किसी के अनुकूल सरकार की नीतियों भी बनाई थीं - 1970 के दशक के शुरुआती सालों में बहुत बड़ी चुनावी जीत के जश्ने बीच कांग्रेस एक राजनीतिक संगठन के तौर पर मर गई। - सुदीप कविराज
(क) लेखक के अनुसार नेहरू और इंदिरा गाँधी द्वारा अपनाई गई नीतियों में क्या अंतर था?
(ख) लेखक ने क्यों कहा है कि सत्तर के दशक में 'कांग्रेस मर गई'।
(ग) कांग्रेस पार्टी में आए बदलावों का असर दूसरी पार्टियों पर किस तरह पड़ा?

Answer:

(क) लेखक के अनुसार, पंडित नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस एक संघीय, लोकतांत्रिक और विभिन्न विचारधाराओं को साथ लेकर चलने वाला (समाहार का) मंच थी। इसके विपरीत, इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी अत्यंत केंद्रीकृत और अलोकतांत्रिक संगठन में बदल गई, जहाँ पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र कमजोर हो गया।
(न) लेखक का यह कथन कि 'सत्तर के दशक में कांग्रेस मर गई' का आशय यह है कि पारंपरिक कांग्रेस पार्टी, जो कि एक लोकतांत्रिक और विचार-आधारित संगठन थी, अब वैसी नहीं रही। इंदिरा गाँधी ने संगठन की संस्कृति को समाप्त कर दिया और पार्टी को केवल एक व्यक्ति की लोकप्रियता और चुनावी जीत हासिल करने का साधन मात्र बना दिया।
(ग) कांग्रेस पार्टी में आए इन बदलावों का दूसरी पार्टियों पर गहरा असर पड़ा। विपक्षी दलों ने भी अब विचारधारा आधारित राजनीति के स्थान पर लोकलुभावन नारों और चुनावी गणित (जैसे गैर-कांग्रेसवाद या गठबंधन) पर जोर देना शुरू कर दिया। इसके परिणामस्वरूप दूसरी पार्टियों में भी आपसी एकता और राजनीतिक सौदेबाजी की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी।

मुख्य बिंदु:

• अनुच्छेद आधारित प्रश्न में उत्तर हमेशा गद्यांश के संदर्भ और वैचारिक विश्लेषण पर आधारित होना चाहिए।
• नेहरू और इंदिरा गाँधी के नेतृत्व की शैली में स्पष्ट अंतर था (लोकतांत्रिक बनाम केंद्रीकृत)।
• कांग्रेस के संगठनात्मक पतन ने भारतीय दलीय प्रणाली की प्रकृति को हमेशा के लिए बदल दिया।

आम गलतियाँ:

• गद्यांश को बिना पढ़े अपनी तरफ से सामान्य उत्तर लिख देना।
• उप-प्रश्नों (क, ख, ग) के उत्तर अलग-अलग स्पष्ट रूप से न देना।

Exam Tips:

a) अनुच्छेद के मुख्य शब्दों (जैसे 'केंद्रीकृत', 'लोकलुभावन', 'संगठन के रूप में मर गई') का प्रयोग अपने उत्तर में करें।
b) प्रत्येक उप-प्रश्न का उत्तर पैराग्राफ के अनुसार सटीक और संक्षिप्त रखें।
c) लेखकों या विचारकों के दृष्टिकोण को समझते हुए विश्लेषणात्मक उत्तर लिखें।

 

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