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Question 11.20:
(a) एक निर्वात नली के तापेत् कैथोड से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की उस चाल का आकलन कीजिए, जिससे वे उत्सर्जक की तुलना में \( 500\text{ V} \) के विभवांतर पर रखे गए एनोड से टकराते हैं। इलेक्ट्रॉनों की लघु प्रारम्भिक चालों की उपेक्षा कर दें। इलेक्ट्रॉन का आपेक्षिक आवेश \( e/m \approx 1.76 \times 10^{11}\text{ C kg}^{-1} \) है।
(b) संग्राहक विभव \( 10\text{ MV} \) के लिए इलेक्ट्रॉनों की चाल ज्ञात करने के लिए उसी सूत्र का प्रयोग करें, जो (a) में काम में लाया गया है। क्या आप इस सूत्र को गलत पाते हैं? इस सूत्र को किस प्रकार सुधारा जा सकता है?
Answer:
(a) दिया गया विभवांतर, \( V = 500\text{ V} \)
आपेक्षिक आवेश, \( e/m = 1.76 \times 10^{11}\text{ C kg}^{-1} \)
गतिज ऊर्जा का सूत्र:
\( \frac{1}{2}mv^2 = eV \)
चाल \( v \) के लिए:
\( v = \left(\frac{2eV}{m}\right)^{\frac{1}{2}} \)
\( = (2 \times 500 \times 1.76 \times 10^{11})^{\frac{1}{2}} \)
\( = 1.327 \times 10^7\text{ m/s} \)
अतः प्रत्येक उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन की गति \( 1.327 \times 10^7\text{ m/s} \) है।
(b) एनोड का विभवांतर, \( V = 10\text{ MV} = 10 \times 10^6\text{ V} \)
सूत्र से चाल:
\( v = \left(2eV/m\right)^{\frac{1}{2}} = (2 \times 10 \times 10^6 \times 1.76 \times 10^{11})^{\frac{1}{2}} = 1.88 \times 10^9\text{ m/s} \)
यह परिणाम गलत है क्योंकि कोई भी कण प्रकाश की चाल \( c \) से अधिक तेजी से नहीं चल सकता। यहाँ \( v \ll c \) की शर्त लागू नहीं होती। उच्च गति के लिए आपेक्षिक समीकरणों का उपयोग करना चाहिए:
\( E = mc^2 \)
जहाँ \( m = \frac{m_0}{\sqrt{1 - \frac{v^2}{c^2}}} \)
मुख्य बिंदु:
• कम विभव पर पारंपरिक ऊर्जा संरक्षण समीकरण वैध होते हैं।
• उच्च विभव पर कण का वेग प्रकाश के वेग से अधिक नहीं हो सकता।
• आपेक्षिक द्रव्यमान में वृद्धि का विचार करना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• वेग निकालते समय प्रकाश की चाल की सीमा की उपेक्षा करना।
• आपेक्षिक प्रभावों को कम वेग वाले प्रश्नों की तरह हल करना।
• मात्रकों को सही ढंग से परिवर्तित न करना।
Exam Tips:
a) हमेशा जाँच लें कि क्या परिकलित वेग प्रकाश की चाल से कम है या नहीं।
b) उच्च वेग के मामलों में आपेक्षिक द्रव्यमान के सूत्र का उपयोग करें।
c) गणना करते समय घातों (powers) का विशेष ध्यान रखें।
Question 11.21:
(a) एक समोर्जी इलेक्ट्रॉन किरण-पुंज जिसमें इलेक्ट्रॉन की चाल \( 5.20 \times 10^6\text{ ms}^{-1} \) है, पर एक चुम्बकीय-क्षेत्र \( 1.30 \times 10^{-4}\text{ T} \) किरण-पुंज की चाल के लम्बवत् लगाया जाता है। किरण-पुंज द्वारा रचित वृत्त की त्रिज्या कितनी होगी, यदि इलेक्ट्रॉन \( e/m \) का मान \( 1.76 \times 10^{11}\text{ C kg}^{-1} \) है।
(b) क्या जिस सूत्र को (a) में उपयोग में लाया गया है वह वहाँ भी एक \( 20\text{ MeV} \) इलेक्ट्रॉन किरण-पुंज की त्रिज्या परिकलित करने के लिए युक्तिपरक है? यदि नहीं तो किस प्रकार इसमें संशोधन किया जा सकता है?
Answer:
(a) इलेक्ट्रॉन की चाल, \( v = 5.20 \times 10^6\text{ ms}^{-1} \)
चुम्बकीय क्षेत्र, \( B = 1.30 \times 10^{-4}\text{ T} \)
\( e/m = 1.76 \times 10^{11}\text{ C kg}^{-1} \)
चुम्बकीय बल और अभिकेंद्र बल को संतुलित करने पर:
\( evB = \frac{mv^2}{r} \)
त्रिज्या \( r \) का सूत्र:
\( r = \frac{mv}{eB} = \frac{5.20 \times 10^6}{1.76 \times 10^{11} \times 1.30 \times 10^{-4}} = 0.227\text{ m} = 22.7\text{ cm} \)
(b) इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा, \( E = 20\text{ MeV} = 20 \times 10^6 \times 1.6 \times 10^{-19}\text{ J} \)
यह परिणाम गलत है क्योंकि \( 20\text{ MeV} \) पर इलेक्ट्रॉन आपेक्षिक डोमेन में आ जाता है।
आपेक्षिक द्रव्यमान \( m = \frac{m_0}{\sqrt{1 - \frac{v^2}{c^2}}} \) का प्रयोग करने पर त्रिज्या:
\( r = \frac{mv}{eB} = \frac{m_0v}{eB\sqrt{1 - \frac{v^2}{c^2}}} \)
मुख्य बिंदु:
• वृत्ताकार गति में अभिकेंद्र बल चुम्बकीय बल से प्राप्त होता है।
• उच्च ऊर्जा पर आपेक्षिक द्रव्यमान परिवर्तन को शामिल करना अनिवार्य है।
• सूत्र \( r = \frac{mv}{eB} \) केवल गैर-आपेक्षिक वेगों के लिए सत्य है।
आम गलतियाँ:
• उच्च ऊर्जा वाले कणों के लिए साधारण न्यूटनियन यांत्रिकी का उपयोग करना।
• \( \text{MeV} \) को जूल में बदलते समय गलत मान रखना।
• मात्रकों को मीटर और सेंटीमीटर में मिला देना।
Exam Tips:
a) ऊर्जा के मान के आधार पर तय करें कि आपेक्षिक सूत्र लगेगा या नहीं।
b) व्युत्पत्ति के चरणों को स्पष्ट रूप से लिखें।
c) अंतिम उत्तर उचित मात्रक के साथ लिखें।
Question 11.22:
एक इलेक्ट्रॉन गन जिसका संग्राहक \( 100\text{ V} \) विभव पर है, एक कम दाब (\( 10^{-2}\text{ mm Hg} \)) पर हाइड्रोजन से भरे गोलाकार बल्ब में इलेक्ट्रॉन छोड़ती है। एक चुम्बकीय-क्षेत्र जिसका मान \( 2.83 \times 10^{-4}\text{ T} \) है, इलेक्ट्रॉन के मार्ग को \( 12.0\text{ cm} \) त्रिज्या के वृत्तीय कक्षा में वक्रित कर देता है। इस मार्ग को देखा जा सकता है क्योंकि मार्ग में गैस आयन किरण-पुंज को इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करके और इलेक्ट्रॉन प्रग्रहण द्वारा प्रकाश उत्सर्जित करके फोकस करते हैं; इस विधि को परिष्कृत किरण-पुंज नली विधि कहते हैं। आँकड़ों से \( e/m \) का मान निर्धारित कीजिए।
Answer:
एनोड का विभवांतर, \( V = 100\text{ V} \)
चुम्बकीय क्षेत्र, \( B = 2.83 \times 10^{-4}\text{ T} \)
वृत्ताकार कक्षा की त्रिज्या, \( r = 12.0\text{ cm} = 12.0 \times 10^{-2}\text{ m} \)
गतिज ऊर्जा और विद्युतीय कार्य की समानता से:
\( \frac{1}{2}mv^2 = eV \implies v^2 = \frac{2eV}{m} \)
चुम्बकीय बल और अभिकेंद्र बल के संतुलन से:
\( \frac{mv^2}{r} = evB \implies v = \frac{eBr}{m} \)
दोनों समीकरणों से \( v \) का मान रखने पर:
\( \frac{e}{m} = \frac{2V}{B^2r^2} \)
मान रखने पर:
\( \frac{e}{m} = \frac{2 \times 100}{(2.83 \times 10^{-4})^2 \times (12 \times 10^{-2})^2} \)
\( = 1.73 \times 10^{11}\text{ C kg}^{-1} \)
मुख्य बिंदु:
• इलेक्ट्रॉन गन द्वारा दी गई ऊर्जा गतिज ऊर्जा में बदलती है।
• चुम्बकीय क्षेत्र के कारण पथ वृत्तीय हो जाता है।
• \( e/m \) का प्रायोगिक मान इस विधि से निकाला जाता है।
आम गलतियाँ:
• सेंटीमीटर को मीटर में बदलना भूल जाना।
• सूत्र में वर्ग (\( r^2 \) और \( B^2 \)) करना छोड़ देना।
• गणना में साधारण अंकीय त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) सभी मानों को मानक SI मात्रक में बदलें।
b) अंतिम परिणाम के साथ उचित SI मात्रक अवश्य लिखें।
c) व्युत्पत्ति के प्रत्येक चरण को साफ-सुथरा दर्शाएं।
Question 11.23:
(a) एक एक्स-किरण नली विकिरण का एक संतत स्पेक्ट्रम जिसका लघु तरंगदैर्ध्य सिरा \( 0.45\text{ \AA} \) पर है, उत्पन्न करता है। विकिरण में किसी फोटॉन की अधिकतम ऊर्जा कितनी है?
(b) अपने (a) के उत्तर से अनुमान लगाइए कि किस कोटि की त्वरक वोल्टता (इलेक्ट्रॉन के लिए) की इस नली में आवश्यकता है?
Answer:
(a) न्यूनतम तरंगदैर्ध्य, \( \lambda = 0.45\text{ \AA} = 0.45 \times 10^{-10}\text{ m} \)
प्लांग स्थिरांक, \( h = 6.626 \times 10^{-34}\text{ Js} \)
प्रकाश की चाल, \( c = 3 \times 10^8\text{ m/s} \)
फोटॉन की अधिकतम ऊर्जा:
\( E = \frac{hc}{\lambda} = \frac{6.626 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{0.45 \times 10^{-10} \times 1.6 \times 10^{-19}} \)
\( = 27.6 \times 10^3\text{ eV} = 27.6\text{ keV} \)
(b) \( 27.6\text{ keV} \) की एक्स-किरण प्राप्त करने के लिए आपातीत इलेक्ट्रॉनों में कम से कम \( 27.6\text{ keV} \) की गतिज ऊर्जा होनी चाहिए। इसलिए, एक्स-किरण के उत्पादन के लिए \( 30\text{ keV} \) के क्रम की त्वरित वोल्टता की आवश्यकता होती है।
मुख्य बिंदु:
• न्यूनतम तरंगदैर्ध्य अधिकतम ऊर्जा के फोटॉन को उत्पन्न करती है।
• ऊर्जा को जूल से इलेक्ट्रॉन वोल्ट (\( \text{eV} \)) में बदला जाता है।
• आवश्यक त्वरक वोल्टता आपातीत इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा के बराबर होती है।
आम गलतियाँ:
• एंगस्ट्रॉम (\( \text{ \AA} \)) को मीटर में बदलते समय घात गलत लगाना।
• ऊर्जा को \( \text{J} \) से \( \text{eV} \) में बदलते समय \( 1.6 \times 10^{-19} \) से भाग देना भूल जाना।
• कोटि का सही आकलन न करना।
Exam Tips:
a) \( hc \) का मानक मान \( 12400\text{ eV \AA} \) याद रखने से समय बचता है।
b) ऊर्जा के मात्रक का विशेष ध्यान रखें।
c) प्रश्न के दोनों भागों के उत्तर क्रमानुसार दें।
Question 11.24:
एक त्वरित (accelerator) प्रयोग में पॉज़िट्रॉनों (\( e^+ \)) के साथ उच्च इलेक्ट्रॉनों के उच्च-ऊर्जा संघटन पर, एक विशिष्ट घटना की व्याख्या कुल ऊर्जा \( 10.2\text{ BeV} \) के इलेक्ट्रॉन-पॉज़िट्रॉन युग्म के बराबर ऊर्जा की दो \( \gamma \)-किरणों में विलोपन के रूप में की जाती है। प्रत्येक \( \gamma \)-किरण से सम्बन्धित तरंगदैर्ध्य के मान क्या होंगे? (\( 1\text{ BeV} = 10^9\text{ eV} \))
Answer:
कुल ऊर्जा, \( E = 10.2\text{ BeV} = 10.2 \times 10^9\text{ eV} = 10.2 \times 10^9 \times 1.6 \times 10^{-19}\text{ J} \)
प्रत्येक \( \gamma \)-किरण की ऊर्जा:
\( E' = \frac{E}{2} = \frac{10.2 \times 10^9 \times 1.6 \times 10^{-19}}{2} = 8.16 \times 10^{-10}\text{ J} \)
तरंगदैर्ध्य का संबंध:
\( E' = \frac{hc}{\lambda} \implies \lambda = \frac{hc}{E'} \)
\( \lambda = \frac{6.626 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{8.16 \times 10^{-10}} \)
\( = 2.436 \times 10^{-16}\text{ m} \)
मुख्य बिंदु:
• युग्म विलोपन में कुल ऊर्जा दो भागों में बंट जाती है।
• \( \text{BeV} \) को जूल में परिवर्तित करना आवश्यक है।
• तरंगदैर्ध्य और ऊर्जा का व्युत्क्रमानुपाती संबंध होता है।
आम गलतियाँ:
• कुल ऊर्जा को 2 से भाग देना भूल जाना।
• \( 10^9 \) और \( 10^{-19} \) के गुणन में गलती करना।
• मात्रक मीटर के बजाय सेंटीमीटर लिखना।
Exam Tips:
a) ऊर्जा रूपांतरण के सभी चरणों को अलग-अलग लाइन में दिखाएं।
b) गणना करते समय लघुगणक या सटीक कैलकुलेटर विधि का प्रयोग करें।
c) उत्तर के साथ मात्रक स्पष्ट लिखें।
Question 11.25:
आगे आने वाली संख्याओं का आकलन रोचक हो सकता है। पहली संख्या यह बताएगी कि रेडियो अभियान्त्रिक फोटॉन की अधिक चिंता क्यों नहीं करते। दूसरी संख्या आपको यह बताएगी कि हमारे नेत्र 'फोटोंनों की गिनती क्यों नहीं कर सकते, भले ही प्रकाश साफ-साफ संसूचन योग्य हो।
(a) एक मध्य तरंग (medium wave) \( 10\text{ kW} \) सामर्थ्य के प्रेषी, जो \( 500\text{ m} \) तरंगदैर्ध्य की रेडियो तरंग उत्सर्जित करता है, के द्वारा प्रति सेकण्ड उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या।
(b) निम्नतम तीव्रता का श्वेत प्रकाश जिसे हम देख सकते हैं (\( \sim 10^{-10}\text{ W m}^{-2} \)) के संगत फोटॉनों की संख्या जो प्रति सेकण्ड हमारे नेत्रों की पुतली में प्रवेश करती है। पुतली का क्षेत्रफल लगभग \( 0.4\text{ cm}^2 \) और श्वेत प्रकाश की औसत आवृत्ति को लगभग \( 6 \times 10^{24}\text{ Hz} \) मानिए।
Answer:
(a) प्रेषी की सामर्थ्य, \( P = 10\text{ kW} = 10^4\text{ W} \)
तरंगदैर्ध्य, \( \lambda = 500\text{ m} \)
एक फोटॉन की ऊर्जा:
\( E_1 = \frac{hc}{\lambda} = \frac{6.626 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{500} = 3.96 \times 10^{-28}\text{ J} \)
प्रति सेकण्ड उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या \( n \):
\( n = \frac{P}{E_1} = \frac{10^4}{3.96 \times 10^{-28}} = 2.525 \times 10^{31} \approx 3 \times 10^{31} \)
(b) तीव्रता, \( I = 10^{-10}\text{ W m}^{-2} \)
क्षेत्रफल, \( A = 0.4\text{ cm}^2 = 0.4 \times 10^{-4}\text{ m}^2 \)
आवृत्ति, \( \nu = 6 \times 10^{14}\text{ Hz} \)
एक फोटॉन की ऊर्जा: \( E = h\nu = 6.6 \times 10^{-34} \times 6 \times 10^{14} = 3.96 \times 10^{-19}\text{ J} \)
प्रति सेकण्ड पुतली में प्रवेश करने वाले फोटॉनों की संख्या:
\( n = \frac{IA}{E} = \frac{10^{-10} \times 0.4 \times 10^{-4}}{3.96 \times 10^{-19}} = 1.008 \times 10^4 \approx 10^4 \)
मुख्य बिंदु:
• रेडियो तरंगों में फोटॉनों की संख्या अत्यधिक होती है, इसलिए विविक्त प्रकृति नजर नहीं आती।
• मानवीय आँखें प्रति सेकण्ड हज़ारों फोटॉन ग्रहण करती हैं।
• सामर्थ्य और तीव्रता से कुल ऊर्जा निकाली जाती है।
आम गलतियाँ:
• क्षेत्रफल के सेंटीमीटर को मीटर में बदलने में त्रुटि।
• सूत्र \( n = P/E \) के स्थान पर उल्टा मान रखना।
• आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य के सूत्रों में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) दोनों भागों को अलग-अलग स्पष्ट हल करें।
b) गणना के चरणों को संक्षिप्त लेकिन पूर्ण रखें।
c) परिणाम की भौतिक सार्थकता को समझें।
Question 11.26:
एक \( 100\text{ W} \) पारद (Mercury) स्रोत से उत्पन्न \( 2271\text{ \AA} \) तरंगदैर्ध्य का पराबैंगनी प्रकाश एक मॉलिब्डेनम धातु से निर्मित प्रकाश सेल को विकिरित करता है। यदि निरोधी विभव \(-1.3\text{ V}\) हो तो धातु के कार्य-फलन का आकलन कीजिए। एक He-Ne láser द्वारा उत्पन्न \( 6328\text{ \AA} \) के उच्च तीव्रता (\(\sim 10^5\text{ W m}^{-2}\)) के लाल प्रकाश के साथ प्रकाश सेल किस प्रकार अनुक्रिया करेगा?
Answer:
पराबैंगनी प्रकाश की तरंगदैर्ध्य, \( \lambda = 2271\text{ \AA} = 2271 \times 10^{-10}\text{ m} \)
निरोधी विभव, \( V_0 = 1.3\text{ V} \)
प्लांक स्थिरांक, \( h = 6.6 \times 10^{-34}\text{ Js} \)
इलेक्ट्रॉन का आवेश, \( e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C} \)
आइंस्टीन समीकरण से कार्य-फलन \( \phi_0 \):
\( \phi_0 = \frac{hc}{\lambda} - eV_0 \)
\( = \frac{6.6 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{2271 \times 10^{-10}} - 1.6 \times 10^{-19} \times 1.3 \)
\( = 8.72 \times 10^{-19} - 2.08 \times 10^{-19} = 6.64 \times 10^{-19}\text{ J} = 4.15\text{ eV} \)
लाल प्रकाश की तरंगदैर्ध्य \( \lambda_r = 6328\text{ \AA} \)
लाल प्रकाश की आवृत्ति, \( \nu_r = \frac{c}{\lambda_r} = 4.74 \times 10^{14}\text{ Hz} \)
चूँकि देहली आवृत्ति \( \nu_0 \) से लाल प्रकाश की आवृत्ति कम है, अतः प्रकाश सेल लेज़र द्वारा उत्पन्न लाल प्रकाश पर अनुक्रिया नहीं करेगा।
मुख्य बिंदु:
• कार्य-फलन का मान \( \phi_0 = \frac{hc}{\lambda} - e\cdot V_0 \) से निकलता है।
• आपातीत प्रकाश की आवृत्ति देहली आवृत्ति से अधिक होनी चाहिए।
• तीव्रता का प्रभाव तब होता है जब आवृत्ति देहली आवृत्ति से अधिक हो।
आम गलतियाँ:
• जूल को इलेक्ट्रॉन वोल्ट में बदलना भूल जाना।
• लाल प्रकाश की आवृत्ति की तुलना देहली आवृत्ति से न करना।
• तरंगदैर्ध्य के मात्रक में \( 10^{-10} \) न लगाना।
Exam Tips:
a) कार्य-फलन के दोनों मात्रकों (\(\text{J}\) और \(\text{eV}\)) की जानकारी रखें।
b) देहली आवृत्ति की गणना करके ही निष्कर्ष लिखें।
c) सेल की अनुक्रिया पर सैद्धांतिक टिप्पणी स्पष्ट दें।
Question 11.27:
एक निर्वात लैंप से उत्पन्न \( 640.2\text{ nm} \) (\( 1\text{ nm} = 10^{-9}\text{ m} \)) तरंगदैर्ध्य का एकवर्णी विकिरण टंगस्टन पर सीजियम से निर्मित प्रकाश-संवेदी पदार्थ को विकिरित करता है। निरोधी वोल्टता \( 0.54\text{ V} \) मापी जाती है। स्रोत को एक लौह-स्रोत से बदल दिया जाता है। इसकी \( 427.2\text{ nm} \) वर्ण-रेखा उसी प्रकाश सेल को विकिरित करती है। नयी निरोधी वोल्टता ज्ञात कीजिए।
Answer:
प्रथम स्थिति में तरंगदैर्ध्य, \( \lambda_1 = 640.2\text{ nm} = 640.2 \times 10^{-9}\text{ m} \)
निरोधी विभव, \( V_{01} = 0.54\text{ V} \)
प्रकाश-विद्युत समीकरण से:
\( eV_{01} = \frac{hc}{\lambda_1} - \phi_0 \implies \phi_0 = \frac{hc}{\lambda_1} - eV_{01} \)
द्वितीय स्थिति में तरंगदैर्ध्य, \( \lambda_2 = 427.2\text{ nm} = 427.2 \times 10^{-9}\text{ m} \)
नयी निरोधी वोल्टता \( V_{02} \) के लिए:
\( eV_{02} = \frac{hc}{\lambda_2} - \phi_0 = \frac{hc}{\lambda_2} - \left(\frac{hc}{\lambda_1} - eV_{01}\right) \)
मान रखने पर:
\( V_{02} = \frac{hc}{e} \left(\frac{1}{\lambda_2} - \frac{1}{\lambda_1}\right) + V_{01} \)
\( = 1.50\text{ V} \)
मुख्य बिंदु:
• कार्य-फलन दोनों स्थितियों के लिए समान रहता है।
• निरोधी विभव और आवृत्ति/तरंगदैर्ध्य का अंतर सीधा संबंधित होता है।
• \( nm \) को मीटर में बदलना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• कार्य-फलन को दोनों स्थितियों में अलग मान लेना।
• \( hc/e \) के मान का सीधा उपयोग न करना।
• गणितीय अंतर निकालते समय चिह्न की गलती करना।
Exam Tips:
a) समीकरणों को आपस में घटाकर सीधे सूत्र का रूप बना लें।
b) नैनोमीटर (\(\text{nm}\)) के रूपांतरण में सतर्क रहें।
c) अंतिम उत्तर \( \text{V} \) (वोल्ट) में दें।
Question 11.28:
एक पारद लैंप, प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन की आवृत्ति निर्भरता के अध्ययन के लिए एक सुविधाजनक स्रोत है, क्योंकि यह दृश्य-स्पेक्ट्रम् के पराबैंगनी (UV) से लाल छोर तक कई वर्ण-रेखाएँ उत्सर्जित करता है। रूबीड़ियम प्रकाश सेल के हमारे प्रयोग में, पारद (Mercury) स्रोत की निम्न वर्ण-रेखाओं का प्रयोग किया गया
\( \lambda_1 = 3650\text{ \AA}, \lambda_2 = 4047\text{ \AA}, \lambda_3 = 4358\text{ \AA}, \lambda_4 = 5461\text{ \AA}, \lambda_5 = 6907\text{ \AA} \),
निरोधी वोल्टताएँ, क्रमशः निम्न मापी गईं हैं
\( V_{01} = 1.28\text{ V}, V_{02} = 0.95\text{ V}, V_{03} = 0.74\text{ V}, V_{04} = 0.16\text{ V}, V_{05} = 0\text{ V} \)
(a) प्लांक स्थिरांक \( h \) का मान ज्ञात कीजिए।
(b) धातु के लिए देहली आवृत्ति तथा कार्य-फलन का आकलन कीजिए। [नोट-उपयुक्त आँकड़ों से \( h \) का मान ज्ञात करने के लिए आपको \( e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C} \) की आवश्यकता होगी]। इस प्रकार के प्रयोग \( \text{Na, Li, K} \) आदि के लिए मिलिकन ने किए थे। मिलिकन ने अपने तेल-बिंदु प्रयोग से प्राप्त के मान का उपयोग कर आइंस्टीन के प्रकाश विद्युत समीकरण को सत्यापित किया तथा इन्हीं प्रेक्षणों से \( h \) के मान के पृथक अनुमान लगाया।
Answer:
(a) आइंस्टीन समीकरण से:
\( eV_0 = h\nu - \phi_0 \implies V_0 = \left(\frac{h}{e}\right)\nu - \frac{\phi_0}{e} \)
विभिन्न आवृत्तियों (\( \nu = c/\lambda \)) और \( V_0 \) के बीच ग्राफ खींचकर ढलान (\(\text{Slope}\)) से \( h/e \) ज्ञात किया जाता है:
ढलान = \( \frac{AB}{CB} = \frac{1.28 - 0.16}{(8.214 - 5.493) \times 10^{14}} = 4.11 \times 10^{-15}\text{ V s} \)
\( h = \text{ढलान} \times e = 4.11 \times 10^{-15} \times 1.6 \times 10^{-19} = 6.57 \times 10^{-34}\text{ Js} \)
(b) देहली आवृत्ति \( \nu_0 \) ग्राफ से \( V_0 = 0 \) पर आवृत्ति का मान है, जो लगभग \( 4.3 \times 10^{14}\text{ Hz} \) है।
कार्य-फलन \( \phi_0 = h\nu_0 = 6.57 \times 10^{-34} \times 4.3 \times 10^{14} = 2.54\text{ eV} \)
मुख्य बिंदु:
• \( V_0 \) और \( \nu \) के ग्राफ की ढलान \( h/e \) देती है।
• \( V_0 = 0 \) होने पर आवृत्ति देहली आवृत्ति कहलाती है।
• कार्य-फलन \( \phi_0 = h\nu_0 \) होता है।
आम गलतियाँ:
• ग्राफ से मान लेते समय पैमाना गलत पढ़ना।
• \( h \) और \( e \) के गुणन में अंक छोड़ देना।
• तरंगदैर्ध्य को आवृत्ति में बदलना भूल जाना।
Exam Tips:
a) ग्राफ आधारित प्रश्नों में ढलान (Slope) स्पष्ट रूप से दर्शाइए।
b) सभी गणनाओं को दो दशमलव स्थान तक लिखें।
c) मात्रक लिखना न भूलें।
Question 11.29:
कुछ धातुओं के कार्य-फलन निम्न प्रकार दिए गए हैं:
\(\text{Na: } 2.75\text{ eV; K: } 2.30\text{ eV; Mo: } 417\text{eV; Ni: } 5.15\text{ eV}\) इनमें धातुओं में से कौन प्रकाश सेल से \( 1\text{ m} \) दूर रखे गए \( \text{He - Cd} \) लेज़र से उत्पन्न \( 3300\text{ \AA} \) तरंगदैर्ध्य के विकिरण के लिए प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन नहीं देगा? लेज़र को सेल के निकट \( 50\text{ cm} \) दूरी पर रखने पर क्या होगा?
Answer:
आपातीत विकिरण की तरंगदैर्ध्य, \( \lambda = 3300\text{ \AA} = 3300 \times 10^{-10}\text{ m} \)
आपातीत विकिरण की ऊर्जा:
\( E = \frac{hc}{\lambda} = \frac{6.6 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{3300 \times 10^{-10} \times 1.6 \times 10^{-19}} = 3.158\text{ eV} \)
चूँकि आपातीत विकिरण की ऊर्जा \( 3.158\text{ eV} \) है, यह केवल \( \text{Na} \) और \( \text{K} \) के कार्य-फलन से अधिक है (\(\text{Mo}\) और \(\text{Ni}\) के लिए कम है)। अतः \( \text{Mo} \) और \( \text{Ni} \) प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन नहीं करेंगे।
यदि लेज़र को \( 50\text{ cm} \) पास लाया जाता है, तो तीव्रता बढ़ जाएगी, जिससे प्रति सेकण्ड उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की संख्या बढ़ जाएगी, लेकिन ऊर्जा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। अतः \( \text{Mo} \) और \( \text{Ni} \) से अभी भी उत्सर्जन नहीं होगा।
मुख्य बिंदु:
• प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन ऊर्जा की अधिकता पर निर्भर करता है, दूरी या तीव्रता पर नहीं।
• \( \text{Mo} \) और \( \text{Ni} \) का कार्य-फलन आपातीत फोटॉन की ऊर्जा से अधिक है।
• दूरी घटाने से केवल तीव्रता (फोटॉनों की संख्या) बढ़ती है।
आम गलतियाँ:
• यह सोचना कि स्रोत पास लाने से फोटॉन की ऊर्जा बढ़ जाती है।
• कार्य-फलन की तुलना आपातीत तरंगदैर्ध्य से सीधे करना बिना ऊर्जा निकाले।
• \( \text{eV} \) में मान की तुलना न करना।
Exam Tips:
a) पहले आपातीत फोटॉन की ऊर्जा निकाल कर सभी धातुओं के कार्य-फलन से तुलना करें।
b) स्पष्ट करें कि तीव्रता का उत्सर्जन की देहली शर्त पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
c) उत्तर तार्किक और बिंदुवार दें।
Question 11.30:
\( 10^{-5}\text{ W m}^{-2} \) तीव्रता का प्रकाश सोडियम प्रकाश सेल के \( 2\text{ cm}^2 \) क्षेत्रफल के पृष्ठ पर पड़ता है। यह मान लें कि ऊपर की सोडियम की पाँच परतें आपातीत ऊर्जा को अवशोषित करती हैं तो विकिरण के तरंग-चित्रण में प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन के लिए आवश्यक समय का आकलन कीजिए। धातु के कार्य-फलन लगभग \( 2\text{ eV} \) दिया गया है। आपके उत्तर का क्या निहितार्थ है?
Answer:
आपातीत प्रकाश की तीव्रता, \( I = 10^{-5}\text{ W m}^{-2} \)
क्षेत्रफल, \( A = 2\text{ cm}^2 = 2 \times 10^{-4}\text{ m}^2 \)
आपतित शक्ति, \( P = I \times A = 10^{-5} \times 2 \times 10^{-4} = 2 \times 10^{-9}\text{ W} \)
धातु का कार्य-फलन, \( \phi_0 = 2\text{ eV} = 2 \times 1.6 \times 10^{-19} = 3.2 \times 10^{-19}\text{ J} \)
सोडियम की परतों की संख्या \( 5 \) होने पर आपातीत प्रकाश को अवशोषित करने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या \( n = 5 \)
आवश्यक समय \( t \):
\( t = \frac{\phi_0}{E} = \frac{3.2 \times 10^{-19}}{2 \times 10^{-26}} = 1.6 \times 10^7\text{ s} \approx 0.507\text{ वर्ष} \)
यह समय बहुत अधिक है, जो व्यावहारिक नहीं है। अतः तरंग-चित्रण इस प्रयोग में असफल है।
मुख्य बिंदु:
• तरंग सिद्धांत के अनुसार ऊर्जा को तरंग में लगातार वितरित होना चाहिए।
• तरंगीय दृष्टिकोण से प्रकाश-विद्युत प्रभाव में अत्यधिक समय (वर्षों) का अनुमान लगता है जो गलत है।
• क्वांटम (फोटॉन) प्रकृति ही तात्क्षणिक उत्सर्जन की व्याख्या करती है।
आम गलतियाँ:
• क्षेत्रफल को \( \text{cm}^2 \) से \( \text{m}^2 \) में बदलना भूल जाना।
• शक्ति और ऊर्जा के बीच संबंध में भ्रमित होना।
• परिणाम के निहितार्थ को न समझाना।
Exam Tips:
a) तरंग सिद्धांत की विफलता को दर्शाने के लिए यह एक महत्वपूर्ण आंकिक प्रश्न है।
b) समय की गणना वर्ष में बदलकर व्यावहारिक असंभवता को स्पष्ट करें।
c) अंत में निष्कर्ष अवश्य लिखें।
Question 11.31:
\( \text{X} \)-किरणों के प्रयोग अथवा उपयुक्त वोल्टता से त्वरित इलेक्ट्रॉनों से क्रिस्टल-विवर्तन प्रयोग किए जा सकते हैं। कौन-सी जाँच अधिक ऊर्जा सम्बद्ध है? (परिमाणिक तुलना के लिए, जाँच के लिए तरंगदैर्ध्य को \( 1\text{ \AA} \) लीजिए, जो कि जालक (लेटिस) में अंतर-परमाणु अंतरण की कोटि की है) (\( m_e = 9.11 \times 10^{-31}\text{ kg} \))
Answer:
एक इलेक्ट्रॉन जाँच में समान तरंगदैर्ध्य के लिए इलेक्ट्रॉन जाँच की तुलना में अधिक ऊर्जा होती है।
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, \( m_e = 9.11 \times 10^{-31}\text{ kg} \)
प्लांक स्थिरांक, \( h = 6.6 \times 10^{-34}\text{ Js} \)
आवेश, \( e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C} \)
इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा:
\( E = \frac{p^2}{2m} = \frac{h^2}{2m\lambda^2} \)
\( E = \frac{(6.6 \times 10^{-34})^2}{2 \times (10^{-10})^2 \times 9.11 \times 10^{-31} \times 1.6 \times 10^{-19}} = 149.375\text{ eV} \)
फोटॉन की ऊर्जा (\( \text{X} \)-किरण):
\( E' = \frac{hc}{\lambda} = \frac{66 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{10^{-10} \times 1.6 \times 10^{-19}} = 12.375\text{ keV} \)
अतः समान तरंगदैर्ध्य के लिए एक फोटॉन की तुलना में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा कम होती है (या इसके विपरीत फोटॉन अधिक ऊर्जा सम्बद्ध है)।
मुख्य बिंदु:
• डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य का सूत्र \( \lambda = \frac{h}{p} \) उपयोग होता है।
• फोटॉन और इलेक्ट्रॉन की ऊर्जाओं की तुलना की जाती है।
• जालक नियतांक \( 1\text{ \AA} \) के बराबर तरंगदैर्ध्य ली जाती है।
आम गलतियाँ:
• ऊर्जा के सूत्रों में मान रखते समय घातों की गलती करना।
• इलेक्ट्रॉन और फोटॉन की ऊर्जा के सूत्रों में अंतर न समझना।
• मात्रक \( \text{eV} \) और \( \text{keV} \) में संभ्रम होना।
Exam Tips:
a) दोनों की ऊर्जाओं को अलग-अलग परिकलित करें।
b) स्पष्ट तुलनात्मक निष्कर्ष दें।
c) गणना के प्रत्येक चरण को साफ़ लिखें।
Question 11.32:
(a) एक न्यूट्रॉन, जिसकी गतिज ऊर्जा \( 150\text{ eV} \) है, का डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य प्राप्त कीजिए। जैसा कि आपने प्रश्न 31 में देखा है, इतनी ऊर्जा का इलेक्ट्रॉन किरण-पुंज क्रिस्टल विवर्तन प्रयोग के लिए उपयुक्त है। क्या समान ऊर्जा का एक न्यूट्रॉन किरण-पुंज इस प्रयोग के लिए समान रूप से उपयुक्त होगा? स्पष्ट कीजिए। [\( m_n = 1.675 \times 10^{-27}\text{ kg} \)]
(b) कमरे के सामान्य ताप (\( 27^\circ\text{ C} \)) पर ऊष्मीय न्यूट्रॉन से जुड़े डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए। इस प्रकार स्पष्ट कीजिए कि क्यों एक तीगामी न्यूट्रॉन को न्यूट्रॉन-विवर्तन प्रयोग में उपयोग में लाने से पहले वातावरण के साथ तापीकृत किया जाता है।
Answer:
(a) न्यूट्रॉन की गतिज ऊर्जा, \( K = 150\text{ eV} = 150 \times 1.6 \times 10^{-19} = 2.4 \times 10^{-17}\text{ J} \)
द्रव्यमान, \( m_n = 1.675 \times 10^{-27}\text{ kg} \)
डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य:
\( \lambda = \frac{h}{\sqrt{2m_nK}} = \frac{6.6 \times 10^{-34}}{\sqrt{2 \times 1.675 \times 10^{-27} \times 2.4 \times 10^{-17}}} = 2.327 \times 10^{-12}\text{ m} \)
यह तरंगदैर्ध्य बहुत कम है (\(\sim 0.023\text{ \AA}\)), अतः यह क्रिस्टल विवर्तन के लिए उपयुक्त नहीं है।
(b) कमरे के ताप पर, \( T = 27^\circ\text{ C} = 300\text{ K} \)
तरंगदैर्ध्य:
\( \lambda = \frac{h}{\sqrt{3m_nkT}} = \frac{6.6 \times 10^{-34}}{\sqrt{3 \times 1.675 \times 10^{-27} \times 1.38 \times 10^{-23} \times 300}} = 1.447 \times 10^{-10}\text{ m} \approx 1.45\text{ \AA} \)
यह क्रिस्टल के अंतःपरमाणु दूरी के लगभग बराबर है, अतः इसे विवर्तन प्रयोग में उपयोग किया जा सकता है।
मुख्य बिंदु:
• न्यूट्रॉन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन से बहुत अधिक होता है।
• ऊष्मीय न्यूट्रॉन की तरंगदैर्ध्य क्रिस्टल जालक के अनुकूल होती है।
• तापमान घटाने से डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य बढ़ जाती है।
आम गलतियाँ:
• तापमान को केल्विन में बदलना भूल जाना।
• \( \text{eV} \) को जूल में न बदलना।
• द्रव्यमान का मान गलत रखना।
Exam Tips:
a) दोनों स्थितियों (ऊर्जा आधारित और ताप आधारित) के सूत्रों का सही चयन करें।
b) मानों की तुलना क्रिस्टल की अंतर-परमाणु दूरी से अवश्य करें।
c) इकाई का विशेष ध्यान रखें।
Question 11.33:
एक इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी में \( 50\text{ kV} \) वोल्टता के द्वारा त्वरित इलेक्ट्रॉनों का उपयोग किया जाता है। इन इलेक्ट्रॉनों से जुड़े डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए। यदि अन्य बातों (जैसे कि संख्यात्मक द्वारक आदि) को लगभग समान मान लिया जाए, इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता की तुलना पीले प्रकाश का प्रयोग करने वाले प्रकाश सूक्ष्मदर्शी से किस प्रकार होती है?
Answer:
विभवांतर, \( V = 50\text{ kV} = 50 \times 10^3\text{ V} \)
आवेश, \( e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C} \)
द्रव्यमान, \( m_e = 9.11 \times 10^{-31}\text{ kg} \)
पीले प्रकाश की तरंगदैर्ध्य, \( \lambda_p \approx 5.9 \times 10^{-7}\text{ m} \)
इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा, \( E = eV = 1.6 \times 10^{-19} \times 50 \times 10^3 = 8 \times 10^{-15}\text{ J} \)
डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य:
\( \lambda = \frac{h}{\sqrt{2m_eE}} = \frac{6.6 \times 10^{-34}}{\sqrt{2 \times 9.11 \times 10^{-31} \times 8 \times 10^{-15}}} = 5.467 \times 10^{-12}\text{ m} \)
तरंगदैर्ध्य का अनुपात: \( \frac{\lambda_p}{\lambda} = \frac{5.9 \times 10^{-7}}{5.467 \times 10^{-12}} \approx 10^5 \)
अतः इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता प्रकाश सूक्ष्मदर्शी से लगभग \( 10^5 \) गुना अधिक होती है।
मुख्य बिंदु:
• विभेदन क्षमता तरंगदैर्ध्य के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
• इलेक्ट्रॉनों की डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य प्रकाश की तुलना में बहुत छोटी होती है।
• उच्च वोल्टता तरंगदैर्ध्य को और कम कर देती है।
आम गलतियाँ:
• \(\text{kV}\) को \(\text{V}\) में बदलना भूल जाना।
• विभेदन क्षमता और तरंगदैर्ध्य के संबंध को उल्टा लिख देना।
• भाग देते समय कोटि (order) की गलती करना।
Exam Tips:
a) इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी के लाभ को स्पष्ट रूप से समझाएं।
b) तरंगदैर्ध्य निकालने के बाद प्रकाश से तुलना का अनुपात निकालें।
c) गणना के सभी चरण स्पष्ट लिखें।
Question 11.34:
किसी जाँच की तरंगदैर्ध्य उसके द्वारा कुछ विस्तार में जाँच की जा सके वाली संरचना के आकार की लगभग आमाप है। प्रकीर्णों तथा न्यूट्रॉनों की क्वार्क (quark) संरचना \( 10^{-15}\text{ m} \) या इससे भी कम लंबाई के लघु पैमाने की है। इस संरचना को सर्वप्रथम 1970 दशक के प्रारम्भ में, एक रेखीय त्वरित्र (Linear accelerator) से उत्पन्न उच्च ऊर्जा इलेक्ट्रॉनों के किरण-पुंज के उपयोग द्वारा, स्टेनफोर्ड, संयुक्त राज्य अमेरिका में जाँच किया गया था। इन इलेक्ट्रॉनों किरण-पुंजों की ऊर्जा की कोटि का अनुमान लगाइए। (इलेक्ट्रॉन की विराम द्रव्यमान ऊर्जा \( 0.511\text{ MeV} \) है।)
Answer:
तरंगदैर्ध्य, \( \lambda = 10^{-15}\text{ m} \)
विराम द्रव्यमान ऊर्जा, \( mc^2 = 0.511\text{ MeV} = 0.511 \times 10^6 \times 1.6 \times 10^{-19} = 8.176 \times 10^{-14}\text{ J} \)
प्लांक स्थिरांक, \( h = 6.6 \times 10^{-34}\text{ Js} \)
प्रकाश की चाल, \( c = 3 \times 10^8\text{ m/s} \)
संवेग \( p \):
\( p = \frac{h}{\lambda} = \frac{6.6 \times 10^{-34}}{10^{-15}} = 6.6 \times 10^{-19}\text{ kg m/s} \)
ऊर्जा \( E \) के लिए आपेक्षिक संबंध:
\( E^2 = p^2c^2 + m^2c^4 \)
\( = (6.6 \times 10^{-19} \times 3 \times 10^8)^2 + (8.176 \times 10^{-14})^2 \)
\( = 3.92 \times 10^{-20} + 0.6685 \times 10^{-26} \approx 3.92 \times 10^{-20}\text{ J}^2 \)
\( E = 1.98 \times 10^{-10}\text{ J} = \frac{1.98 \times 10^{-10}}{1.6 \times 10^{-19}} = 1.24 \times 10^9\text{ eV} = 1.24\text{ BeV} \)
अतः ऊर्जा \( 1.24\text{ BeV} \) के क्रम की है।
मुख्य बिंदु:
• क्वार्क जैसी सूक्ष्म संरचनाओं के लिए अति लघु तरंगदैर्ध्य (\(\sim 10^{-15}\text{ m}\)) चाहिए।
• उच्च ऊर्जा पर आपेक्षिक ऊर्जा-संवेग संबंध \( E^2 = p^2c^2 + m^2c^4 \) का प्रयोग होता है।
• ऊर्जा को जूल से इलेक्ट्रॉन वोल्ट (\(\text{BeV}\)) में बदला जाता है।
आम गलतियाँ:
• साधारण ऊर्जा सूत्र \( E = \frac{hc}{\lambda} \) का उपयोग करना जबकि द्रव्यमान प्रभाव भी महत्वपूर्ण हो।
• इकाई रूपांतरण में घात की भूल करना।
• ऊर्जा को \( \text{eV} \) में बदलते समय भाग देना भूल जाना।
Exam Tips:
a) आपेक्षिक ऊर्जा-संवेग समीकरण का उपयोग करना न भूलें।
b) गणनाओं को चरणों में विभाजित करें ताकि गलती न हो।
c) परिणाम को \( \text{BeV} \) में व्यक्त करें।
Question 11.35:
कमरे के ताप (\( 27^\circ\text{ C} \)) और \( 1\text{ atm} \) दाब पर He परमाणु से जुड़े प्राक्कलपी डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य ज्ञात कीजिए और इन परिस्थितियों में इसकी तुलना दो परमाणुओं के बीच औसत दूरी से कीजिए।
Answer:
He परमाणु की तरंगदैर्ध्य, \( \lambda = \frac{h}{\sqrt{3mKT}} \)
तापमान, \( T = 27^\circ\text{ C} = 27 + 273 = 300\text{ K} \)
He परमाणु का द्रव्यमान, \( m = \frac{\text{परमाणु भार}}{N_A} = \frac{4}{6.023 \times 10^{23}} = 6.64 \times 10^{-27}\text{ kg} \)
\( \lambda = \frac{6.6 \times 10^{-34}}{\sqrt{3 \times 6.64 \times 10^{-27} \times 1.38 \times 10^{-23} \times 300}} = 0.7268 \times 10^{-10}\text{ m} \)
दो परमाणुओं के बीच औसत दूरी \( r \):
\( r = \left(\frac{V}{N}\right)^{\frac{1}{3}} = \left(\frac{kT}{P}\right)^{\frac{1}{3}} = \left(\frac{1.38 \times 10^{-23} \times 300}{1.01 \times 10^5}\right)^{\frac{1}{3}} = 3.35 \times 10^{-9}\text{ m} \)
अतः परमाणुओं के बीच औसत दूरी डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य की तुलना में बहुत अधिक है।
मुख्य बिंदु:
• गैसीय परमाणुओं के लिए औसत गतिज ऊर्जा \( \frac{3}{2}kT \) होती है।
• आदर्श गैस समीकरण से अणुओं के बीच की औसत दूरी निकाली जाती है।
• तरंगदैर्ध्य की तुलना अंतरा-परमाणु दूरी से की जाती है।
आम गलतियाँ:
• हीलियम का परमाणु द्रव्यमान निकालते समय आवोगाद्रो संख्या से भाग देना भूल जाना।
• आयतन निकालने के लिए दाब और ताप के संबंध को गलत लिखना।
• मात्रकों के रूपांतरण में त्रुटि।
Exam Tips:
a) दोनों भागों (तरंगदैर्ध्य और औसत दूरी) के सूत्रों को स्पष्ट लिखें।
b) मानों की तुलना करके अंतिम निष्कर्ष शब्दों में दें।
c) गणना में वैज्ञानिक संकेतन (scientific notation) का प्रयोग करें।
Question 11.36:
किसी धातु में (\( 27^\circ\text{ C} \)) पर एक इलेक्ट्रॉन का प्राक्कलपी डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य परिकलित कीजिए और इसकी तुलना धातु में दो इलेक्ट्रॉनों के बीच औसत पृथकत्व से कीजिए जो लगभग \( 2 \times 10^{-10}\text{ m} \) दिया गया है। (नोट-प्रश्न 35 और 36 प्रदर्शित करते हैं कि जहाँ सामान्य परिस्थितियों में गैसीय अणुओं से जुड़े तरंग पैकेट अतिव्यापी हैं, किसी धातु में इलेक्ट्रॉन तरंग पैकेट प्रबल् रूप से एक-दूसरे से अतिव्यापी हैं। यह सुझाता है कि जहाँ सामान्य गैस में अणुओं की अलगाव पहचान हो सकती है, किसी धातु में इलेक्ट्रॉन की एक-दूसरे से अलग पहचान नहीं हो सकती। इस अप्रमहता के कई मूल निहितार्थ हैं, जिन्हें आप भौतिकी के अधिक उच्च पाठ्यक्रम में जानेंगे)
Answer:
तापमान, \( T = 27^\circ\text{ C} = 27 + 273 = 300\text{ K} \)
इलेक्ट्रॉनों के बीच औसत पृथकत्व, \( r = 2 \times 10^{-10}\text{ m} \)
इलेक्ट्रॉन की डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य:
\( \lambda = \frac{h}{\sqrt{3mkT}} \)
\( h = 6.6 \times 10^{-34}\text{ Js} \)
\( m = 9.11 \times 10^{-31}\text{ kg} \)
\( k = 1.38 \times 10^{-23}\text{ J mol}^{-1}\text{ K}^{-1} \)
मान रखने पर:
\( \lambda = \frac{6.6 \times 10^{-34}}{\sqrt{3 \times 9.11 \times 10^{-31} \times 1.38 \times 10^{-23} \times 300}} = 6.2 \times 10^{-9}\text{ m} \)
अतः डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य दिए गए अंतराल-इलेक्ट्रॉन की तुलना में बहुत अधिक है।
मुख्य बिंदु:
• धातु के भीतर इलेक्ट्रॉनों का तापीय वेग \( \sqrt{3kT/m} \) से निकाला जाता है।
• डी-ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य का मान अंतरा-इलेक्ट्रॉन दूरी से बड़ा आता है।
• यह अतिव्यापन क्वांटम यांत्रिकी के सांख्यिकी व्यवहार को दर्शाता है।
आम गलतियाँ:
• इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान के स्थान पर न्यूट्रॉन का द्रव्यमान रख देना।
• वर्गमूल के अंदर गुणा करते समय घातों की गलती करना।
• तुलनात्मक निष्कर्ष न लिखना।
Exam Tips:
a) सूत्र में सभी नियतांकों के मानक मान सही रखें।
b) तरंगदैर्ध्य और पृथकत्व की तुलना स्पष्ट शब्दों में करें।
c) इकाई का विशेष ध्यान रखें।
Question 11.37:
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(a) ऐसा विचार किया गया है कि प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के भीतर क्वार्क पर आंशिक आवेश होते हैं [\( (+\frac{2}{3})e, (-\frac{1}{3})e \)] यह मिलिकन तेल-बंदूक प्रयोग में क्यों नहीं प्रकट होते?
(b) \( e/m \) संयोग की क्या विशेषता है? हम \( e \) तथा \( m \) के विषय में अलग -अलग विचार क्यों नहीं करते?
(c) गैसें सामान्य दाब पर कुचालक होती हैं, परन्तु बहुत कम दाब पर चालन प्रारम्भ कर देती हैं? क्यों?
(d) प्रत्येक धातु का एक निश्चित कार्य-फलन होता है। यदि आपातीत विकिरण एकवर्णी हो तो सभी प्रकाशिक इलेक्ट्रॉन समान ऊर्जा के साथ बाहर क्यों नहीं आते? प्रकाशिक इलेक्ट्रॉनों का एक ऊर्जा वितरण क्यों होता है?
(e) एक इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा तथा इसका संवेग इससे जुड़े पदार्थ-तरंग की आवृत्ति तथा इसके तरंगदैर्ध्य के साथ निम्न प्रकार संबंधित होते हैं:
\( E = h\nu, p = \frac{h}{\lambda} \)
परन्तु \( \lambda \) का मान जहाँ भौतिक महत्त्व का है, के मान (और इसलिए कला चाल \( \nu\lambda \)) का कोई भौतिक महत्व नहीं है। क्यों?
Answer:
(a) प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के भीतर क्वार्क पर आंशिक आवेश होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि परमाणु बल बहुत बढ़ जाता है अगर उन्हें अलग खींच लिया जाए। इसलिए, आंशिक आवेश प्रकृति में मौजूद हो सकते हैं; प्रेक्षणयोग्य विद्युत आवेश के पूर्णांक के गुणांक हैं।
(b) इन संबंधों में \( e \) (इलेक्ट्रॉनों चार्ज), \( v \) (वेग), \( m \) (द्रव्यमान), \( V \) (विभव), \( r \) (त्रिज्या), और \( B \) (चुंबकीय क्षेत्र) शामिल हैं। ये संबंध एक इलेक्ट्रॉन के वेग का मान देते हैं (\( v = \sqrt{2V\left(\frac{e}{m}\right)} \) और \( v = Br\left(\frac{e}{m}\right) \))। इन संबंधों से देखा जा सकता है कि एक इलेक्ट्रॉन की गतिशीलता \( e \) और \( m \) द्वारा अलग-अलग नहीं, बल्कि अनुपात \( e/m \) द्वारा निर्धारित की जाती है।
(c) वायुमंडलीय दाब में, गैसों के आयनों को अन्य गैस साथ टकराव और पुनर्संयोजन के कारण अपने संबंधित इलेक्ट्रॉनों तक पहुँचने का कोई मौका नहीं मिलता। इसलिए, गैसें वायुमंडलीय दाब पर कुचालक हैं। कम दाब में, आयनों को अपने संबंधित इलेक्ट्रॉनों तक पहुंचने और एक धारा का गठन करने का मौका मिलता है, इसलिए वे इन दबावों पर बिजली का संचालन करते हैं।
(d) धातु की सतह से बाहर निकलने के लिए एक चालान इलेक्ट्रॉन के लिए एक धातु का कार्य-फलन न्यूनतम ऊर्जा है। एक परमाणु में सभी इलेक्ट्रॉनों का ऊर्जा स्तर समान नहीं होता। जब कुछ फोटॉन ऊर्जा वाली किरण धातु की सतह पर टकराती हैं, तो इलेक्ट्रॉनों विभिन्न ऊर्जाओं के साथ विभिन्न स्तरों से बाहर आते हैं। इसलिए, ये उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन अलग-अलग ऊर्जा वितरण दिखाते हैं।
(e) किसी कण की ऊर्जा का निरपेक्ष मान योगात्मक स्थिरांक के भीतर होता है। इसलिए, तरंगदैर्ध्य (\(\lambda\)) महत्वपूर्ण है, लेकिन इलेक्ट्रॉन के साथ जुड़े आवृत्ति (\(\nu\)) का कोई प्रत्यक्ष भौतिक महत्व नहीं है। इसलिए, गुणनफल \( v\lambda \) (कलागति) का कोई भौतिक महत्व नहीं है।
मुख्य बिंदु:
• क्वार्क का विसंक्रमण संभव नहीं है, अतः पूर्ण आवेश ही प्रेक्षित होते हैं।
• \( e/m \) अनुपात ही अधिकांश कण-गतिशीलता को नियंत्रित करता है।
• धातु के अंदर इलेक्ट्रॉनों का ऊर्जा स्तर भिन्न होने के कारण उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा में वितरण होता है।
आम गलतियाँ:
• सैद्धांतिक प्रश्नों के उत्तर बहुत संक्षिप्त या अपूर्ण लिखना।
• क्वार्क के बंधन बल के प्रभाव को नजरअंदाज करना।
• कला चाल और समूह चाल के भौतिक अर्थ में संभ्रम होना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक उप-प्रश्न (a से e) का उत्तर अलग से स्पष्ट बिंदुओं में लिखें।
b) भौतिक तर्कों और सिद्धांतों का सटीक उल्लेख करें।
c) अनावश्यक विस्तार से बचें लेकिन मुख्य कारण अवश्य दें।
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