NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 07 Alternating Current (प्रत्यावर्ती धारा) Exercise Questions in Hindi

Solutions for Class 12 Physics: Chapter 07 प्रत्यावर्ती धारा

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Practice Class 12 Physics Solutions: Chapter 07 प्रत्यावर्ती धारा

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Question 7.1: एक 100 \( \Omega \) का प्रतिरोधक 220 V, 50 Hz आपूर्ति से संयोजित है।
(a) परिपथ में धारा का rms मान कितना है?
(b) एक पूरे चक्र में कितनी नेट शक्ति व्यय होती है?

Answer:

दिया गया है:
प्रतिरोधक का प्रतिरोध, \( R = 100 \; \Omega \)
आपूर्ति की वोल्टता, \( V = 220 \; \text{V} \)
आवृत्ति, \( \nu = 50 \; \text{Hz} \)

(a) परिपथ में धारा का rms मान:
\( I = \frac{V}{R} \)
\( I = \frac{220}{100} \)
\( I = 2.20 \; \text{A} \)

(b) एक पूर्ण चक्र में खपत की गई शुद्ध शक्ति:
\( P = V I \)
\( P = 220 \times 2.2 = 484 \; \text{W} \)

मुख्य बिंदु:

• शुद्ध प्रतिरोधक परिपथ में वोल्टता और धारा एक ही कला में होते हैं।
• rms धारा का मान केवल प्रतिरोध और rms वोल्टता पर निर्भर करता है।
• शुद्ध प्रतिरोधक परिपथ का शक्ति गुणांक इकाई होता है।

आम गलतियाँ:

• शिखर मान और rms मान में भ्रमित होना।
• शक्ति की गणना करते समय शक्ति गुणांक को गलत लेना।
• मात्रकों (SI units) को सही प्रकार से न लिखना।

Exam Tips:

a) हमेशा दिए गए मानों को उनके सही प्रतीकों के साथ लिखें।
b) गणना के बाद उपयुक्त मात्रक जैसे A और W अवश्य लिखें।
c) सूत्र स्पष्ट रूप से दर्शाएं ताकि स्टेप-मार्किंग का पूरा लाभ मिल सके।

 

Question 7.2: (a) ac आपूर्ति का शिखर मान 300 V है। rms वोल्टता कितनी है?
(b) ac परिपथ में धारा का rms मान 10 A है। शिखर धारा कितनी है?

Answer:

(a) ac आपूर्ति की वोल्टता का अधिकतम मान, \( V_0 = 300 \; \text{V} \)
rms वोल्टता का सूत्र:
\( V = \frac{V_0}{\sqrt{2}} \)
\( V = \frac{300}{\sqrt{2}} \)
\( V = 212.1 \; \text{V} \)

(b) परिपथ में धारा का rms मान, \( I = 10 \; \text{A} \)
शिखर धारा का सूत्र:
\( I_0 = \sqrt{2} I \)
\( I_0 = \sqrt{2} \times 10 \)
\( I_0 = 14.1 \; \text{A} \)

मुख्य बिंदु:

• rms मान शिखर मान का \( \frac{1}{\sqrt{2}} \) गुना होता है।
• शिखर मान rms मान का \( \sqrt{2} \) गुना होता है।
• \( \sqrt{2} \) का मान 1.414 उपयोग किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• rms मान और शिखर मान के सूत्रों में \( \sqrt{2} \) से गुणा या भाग करने में गलती करना।
• दशमलव के बाद के अंकों में अशुद्धि करना।

Exam Tips:

a) दोनों सूत्रों को अच्छी तरह याद रखें: \( V_{rms} = \frac{V_0}{\sqrt{2}} \) और \( I_0 = \sqrt{2} I_{rms} \) ।
b) गणना करते समय \( \sqrt{2} = 1.414 \) का सही उपयोग करें।
c) अंतिम उत्तर में मात्रक (V और A) लिखना न भूलें।

 

Question 7.3: एक 44 mH को प्रेमित्र 220 V, 50 Hz आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ में धारा के rms मान को ज्ञात कीजिए।

Answer:

दिया गया है:
प्रेमित्र का प्रेरण, \( L = 44 \; \text{mH} = 44 \times 10^{-3} \; \text{H} \)
आपूर्ति वोल्टता, \( V = 220 \; \text{V} \)
आवृत्ति, \( \nu = 50 \; \text{Hz} \)
कोणीय आवृत्ति, \( \omega = 2\pi\nu \)
प्रेरणीय प्रतिघात, \( X_L = \omega L = 2\pi\nu L = 2\pi \times 50 \times 44 \times 10^{-3} \; \Omega \)
धारा का rms मान:
\( I = \frac{V}{X_L} \)
\( I = \frac{220}{2\pi \times 50 \times 44 \times 10^{-3}} \)
\( I = 15.92 \; \text{A} \)
अतः परिपथ में धारा का rms मान 15.92 A है।

मुख्य बिंदु:

• प्रेरक द्वारा उत्पन्न प्रतिघात को प्रेरणीय प्रतिघात कहते हैं।
• \( X_L \) आवृत्ति के समानुपाती होता है।
• मिलीहेन्री (mH) को हेनरी (H) में बदलना आवश्यक है।

आम गलतियाँ:

• \( 10^{-3} \) से गुणा करना भूल जाना।
• \( \pi \) (3.14) के मान का गलत उपयोग करना।

Exam Tips:

a) इकाइयों को हमेशा SI पद्धति में बदलें।
b) प्रतिघात के सूत्र \( X_L = 2\pi\nu L \) का स्पष्ट उल्लेख करें।
c) चरणों में गणना करें ताकि गलती की संभावना कम हो।

 

Question 7.4: एक \( 60 \; \mu\text{F} \) का संधारित्र 110 V, 60 Hz ac आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ में धारा के rms मान को ज्ञात कीजिए।

Answer:

धारिता, \( C = 60 \; \mu\text{F} = 60 \times 10^{-6} \; \text{F} \)
आपूर्ति वोल्टता, \( V = 110 \; \text{V} \)
आवृत्ति, \( \nu = 60 \; \text{Hz} \)
कोणीय आवृत्ति, \( \omega = 2\pi\nu \)
धारितीय प्रतिघात, \( X_C = \frac{1}{\omega C} = \frac{1}{2\pi\nu C} \)
\( X_C = \frac{1}{2\pi \times 60 \times 60 \times 10^{-6}} \; \Omega \)
धारा का rms मान:
\( I = \frac{V}{X_C} \)
\( I = \frac{110}{2\pi \times 60 \times 60 \times 10^{-6}} \)
\( I = 2.49 \; \text{A} \)
अतः परिपथ में धारा का rms मान 2.49 A है।

मुख्य बिंदु:

• संधारित्र का प्रतिघात \( X_C \) आवृत्ति के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
• माइक्रोफैरेड (\( \mu\text{F} \)) को फैरेड (F) में बदलना अनिवार्य है।
• धारितीय प्रतिघात का मात्रक ओम (\( \Omega \)) होता है।

आम गलतियाँ:

• \( 10^{-6} \) के स्थान पर गलत घात लिखना।
• हर में दी गई गणना को अंश में ले जाते समय गलती करना।

Exam Tips:

a) \( X_C \) के व्युत्क्रम संबंध का ध्यान रखें।
b) कैलकुलेशन करते समय लघुगणक या सीधी गुणा-भाग सावधानी से करें।
c) अंतिम उत्तर के साथ मात्रक 'एम्पियर' (A) लिखें।

 

Question 7.5: अभ्यास 7.3 एवं 7.4 में एक पूरे चक्र की अवधि में प्रत्येक परिपथ में कितनी नेट शक्ति अवशोषित होती है? अपने उत्तर का विवरण दीजिए।

Answer:

प्रेरणीय परिपथ में:
धारा का rms मान, \( I = 15.92 \; \text{A} \)
वोल्टता का rms मान, \( V = 220 \; \text{V} \)
नेट अवशोषित शक्ति का सूत्र:
\( P = VI \cos\phi \)
जहाँ \( \phi = V \) और \( I \) के बीच कला भेद है।
एक शुद्ध प्रेरक परिपथ के लिए, प्रत्यावर्ती वोल्टता और धारा के बीच कला भेद \( 90^\circ \) होता है।
अर्थात, \( \phi = 90^\circ \)
इसलिए, \( P = VI \cos 90^\circ = 0 \) अर्थात नेट शक्ति शून्य होगी।

धारितीय परिपथ में:
धारा का rms मान, \( I = 2.49 \; \text{A} \)
वोल्टता का rms मान, \( V = 110 \; \text{V} \)
नेट अवशोषित शक्ति का सूत्र:
\( P = VI \cos\phi \)
एक शुद्ध धारितीय परिपथ के लिए, प्रत्यावर्ती वोल्टता और धारा के बीच कला भेद \( 90^\circ \) होता है।
अर्थात, \( \phi = 90^\circ \)
इसलिए, \( P = VI \cos 90^\circ = 0 \) अर्थात कुल शक्ति शून्य होगी।

मुख्य बिंदु:

• शुद्ध प्रेरक और शुद्ध संधारित्र दोनों में औसत शक्ति व्यय शून्य होता है।
• कला कोण \( \phi = \pi/2 \) होने के कारण \( \cos\phi = 0 \) होता है।
• ऊर्जा का केवल चक्र के आधे भाग में संचयन और शेष आधे भाग में पुनर्भरण होता है।

आम गलतियाँ:

• शक्ति गुणांक को शून्य मानने के बजाय एक मान लेना।
• कला कोण को गलत समझना।

Exam Tips:

a) कारण स्पष्ट रूप से लिखें कि कलांतर \( 90^\circ \) क्यों होता है।
b) सूत्र \( P = VI \cos\phi \) का उल्लेख अवश्य करें।
c) दोनों स्थितियों (प्रेरक और संधारित्र) के लिए अलग-अलग उत्तर दें।

 

Question 7.6: एक LCR परिपथ की, जिसमें \( L = 2.0 \; \text{H}, C = 32 \; \mu\text{F} \) तथा \( R = 10 \; \Omega \) अनुनाद आवृत्ति \( \omega_r \) परिकलित कीजिए। इस परिपथ के \( Q \) का क्या मान है?

Answer:

दिया गया है:
प्रेरण, \( L = 2.0 \; \text{H} \)
धारिता, \( C = 32 \; \mu\text{F} = 32 \times 10^{-6} \; \text{F} \)
प्रतिरोध, \( R = 10 \; \Omega \)
अनुनाद आवृत्ति \( \omega_r \) का सूत्र:
\( \omega_r = \frac{1}{\sqrt{LC}} \)
\( \omega_r = \frac{1}{\sqrt{2.0 \times 32 \times 10^{-6}}} \)
\( \omega_r = \frac{1}{\sqrt{64 \times 10^{-6}}} \)
\( \omega_r = \frac{1}{8 \times 10^{-3}} = 125 \; \text{rad/s} \)

परिपथ में \( Q \) (विशिष्टता गुणांक) का मान:
\( Q = \frac{1}{R} \sqrt{\frac{L}{C}} \)
\( Q = \frac{1}{10} \sqrt{\frac{2.0}{32 \times 10^{-6}}} \)
\( Q = \frac{1}{10} \sqrt{\frac{1}{16 \times 10^{-6}}} \)
\( Q = \frac{1}{10} \times \frac{1}{4 \times 10^{-3}} = \frac{1000}{40} = 25 \)
इसलिए, परिपथ में \( Q \) का मान 25 है।

मुख्य बिंदु:

• अनुनाद आवृत्ति स्रोत के मान पर निर्भर नहीं करती, बल्कि \( L \) और \( C \) पर निर्भर करती है।
• \( Q \)-faktor तीक्ष्णता (sharpness) को प्रदर्शित करता है।
• \( Q \) का कोई मात्रक नहीं होता (यह विमाहीन राशि है)।

आम गलतियाँ:

• वर्गमूल निकालते समय घातों का सही हिसाब न लगाना।
• \( Q \)-faktor के सूत्र में मान गलत प्रतिस्थापित करना।

Exam Tips:

a) \( \omega_r \) और \( Q \) दोनों के मानक सूत्र याद रखें।
b) गणना को सरल बनाने के लिए वर्गमूल के अंदर की संख्याओं को काटें।
c) \( Q \) मान के साथ कोई मात्रक न लिखें क्योंकि यह विमाहीन है।

 

Question 7.7: \( 30 \; \mu\text{F} \) का एक आवेशित संधारित्र 27 mH के प्रेमित्र से जोड़ा गया है। परिपथ के मुक्त दोलनों की कोणीय आवृत्ति कितनी है?

Answer:

धारिता, \( C = 30 \; \mu\text{F} = 30 \times 10^{-6} \; \text{F} \)
प्रेरण, \( L = 27 \; \text{mH} = 27 \times 10^{-3} \; \text{H} \)
कोणीय आवृत्ति \( \omega_r \) का सूत्र:
\( \omega_r = \frac{1}{\sqrt{LC}} \)
\( \omega_r = \frac{1}{\sqrt{27 \times 10^{-3} \times 30 \times 10^{-6}}} \)
\( \omega_r = \frac{1}{\sqrt{810 \times 10^{-9}}} \)
\( \omega_r = \frac{1}{\sqrt{81 \times 10^{-8}}} \)
\( \omega_r = \frac{1}{9 \times 10^{-4}} = \frac{10^4}{9} = 1.11 \times 10^3 \; \text{rad/s} \)
अतः परिपथ के मुक्त दोलनों की कोणीय आवृत्ति \( 1.11 \times 10^3 \; \text{rad/s} \) है।

मुख्य बिंदु:

• LC दोलनों में ऊर्जा प्रेरक और संधारित्र के बीच दोलन करती है।
• कोणीय आवृत्ति का मात्रक rad/s होता है।
• घटकों के मान SI मात्रकों में परिवर्तित किए जाने चाहिए।

आम गलतियाँ:

• वर्गमूल के अंदर घातों (powers of 10) को हल करने में गलती करना।
• \( \mu\text{F} \) और mH के उपसर्गों को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) गणना को आसान बनाने के लिए संख्याओं को ऐसे रूप में बदलें जिनका वर्गमूल आसानी से निकल सके (जैसे 810 को \( 81 \times 10 \) लिखना)।
b) सूत्र \( \omega = \frac{1}{\sqrt{LC}} \) को स्पष्ट रूप से लिखें।
c) उत्तर को वैज्ञानिक संकेतन (scientific notation) में व्यक्त करें।

 

Question 7.8: कल्पना कीजिए कि अभ्यास 7.7 में संधारित्र पर प्रारंभिक आवेश \( 6 \; \text{mC} \) है। प्रारम्भ में परिपथ में कुल कितनी ऊर्जा संचित होती है? बाद में कुल ऊर्जा कितनी होगी?

Answer:

धारिता, \( C = 30 \; \mu\text{F} = 30 \times 10^{-6} \; \text{F} \)
प्रेरण, \( L = 27 \; \text{mH} = 27 \times 10^{-3} \; \text{H} \)
संधारित्र पर आवेश, \( Q = 6 \; \text{mC} = 6 \times 10^{-3} \; \text{C} \)
संधारित्र में कुल संचित ऊर्जा का सूत्र:
\( E = \frac{Q^2}{2C} \)
\( E = \frac{(6 \times 10^{-3})^2}{2 \times 30 \times 10^{-6}} \)
\( E = \frac{36 \times 10^{-6}}{60 \times 10^{-6}} \)
\( E = \frac{36}{60} = 0.6 \; \text{J} \)
बाद के समय में कुल ऊर्जा समान रहेगी क्योंकि ऊर्जा संधारित्र और प्रेरण के बीच साझा की जाती है (ऊर्जा संरक्षण का नियम)।

मुख्य बिंदु:

• संधारित्र में संचित विद्युत स्थितिज ऊर्जा \( E = \frac{Q^2}{2C} \) होती है।
• आदर्श LC परिपथ में कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है (कोई ऊष्मीय क्षय नहीं होता)।
• ऊर्जा का रूपांतरण विद्युत क्षेत्र और चुम्बकीय क्षेत्र की ऊर्जा के बीच होता है।

आम गलतियाँ:

• आवेश का वर्ग करते समय घात का सही गुणा न करना।
• यह सोचना कि समय के साथ कुल ऊर्जा बदल जाएगी।

Exam Tips:

a) ऊर्जा के विभिन्न रूपों वाले सूत्रों (\( \frac{1}{2}CV^2, \frac{Q^2}{2C}, \frac{1}{2}LI^2 \)) को याद रखें।
b) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का स्पष्ट उल्लेख करें।
c) जूल (J) मात्रक लिखना न भूलें।

 

Question 7.9: एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ को, जिसमें \( R = 20 \; \Omega, L = 1.5 \; \text{H} \) तथा \( C = 35 \; \mu\text{F} \), एक प्रत्यावर्ती आवृत्ति की आपूर्ति से जोड़ा गया है। जब आपूर्ति की आवृत्ति परिपथ की मूल आवृत्ति के बराबर होती है तो एक पूरे चक्र में परिपथ को स्थानान्तरित की गई माध्य शक्ति कितनी होगी?

Answer:

अनुनाद पर, आपूर्ति शक्ति की आवृत्ति दी गई LCR सर्किट की प्राकृतिक आवृत्ति के बराबर होती है।
प्रतिरोध, \( R = 20 \; \Omega \)
प्रेरण, \( L = 1.5 \; \text{H} \)
धारिता, \( C = 35 \; \mu\text{F} = 35 \times 10^{-6} \; \text{F} \)
परिपथ LCR के लिए प्रतिबाधा: \( Z = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2} \)
अनुनाद पर, \( X_L = X_C \)
अतः \( Z = R = 20 \; \Omega \)
परिपथ में धारा:
\( I = \frac{V}{Z} = \frac{200}{20} = 10 \; \text{A} \)
इसलिए, एक पूर्ण चक्र में परिपथ को हस्तांतरित औसत शक्ति:
\( P = VI = 200 \times 10 = 2000 \; \text{W} \)

मुख्य बिंदु:

• अनुनाद की स्थिति में प्रतिबाधा न्यूनतम और प्रतिरोध के बराबर होती है (\( Z = R \))।
• अनुनाद पर शक्ति गुणांक इकाई (\( \cos\phi = 1 \)) होता है।
• अधिकतम शक्ति स्थानान्तरण अनुनाद आवृत्ति पर होता है।

आम गलतियाँ:

• प्रतिबाधा निकालते समय \( X_L \) और \( X_C \) को सीधे जोड़ने की गलती करना।
• शक्ति गुणांक को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) याद रखें कि अनुनाद पर \( Z = R \) होता है, जिससे गणना बहुत आसान हो जाती है।
b) अधिकतम शक्ति का सूत्र \( P = \frac{V^2}{R} \) या \( VI \) उपयोग करें।
c) वाट (W) में उत्तर दें।

 

Question 7.10: एक रेडियो को MW प्रसारण बैंड के एक खण्ड के आवृत्ति परस के एक ओर से दूसरी ओर (800 kHz से 1200 kHz) तक समस्वरित किया जा सकता है। यदि इसके LC परिपथ का प्रभावकारी प्रेरकत्व \( 200 \; \mu\text{H} \) हो तो उसके परिवर्ती संधारित्र की परास कितनी होनी चाहिए?
(संकेत: समस्वरित करने के लिए मूल आवृत्ति अर्थात् LC परिपथ के मुक्त दोलनों की आवृत्ति रेडियो तरंग की आवृत्ति के समान होनी चाहिए)

Answer:

रेडियो की आवृत्ति का परास (v) 800 kHz से 1200 kHz है।
न्यूनतम समस्वरित आवृत्ति, \( \nu_1 = 800 \; \text{kHz} = 800 \times 10^3 \; \text{Hz} \)
अधिकतम समस्वरित आवृत्ति, \( \nu_2 = 1200 \; \text{kHz} = 1200 \times 10^3 \; \text{Hz} \)
परिपथ का प्रभावी प्रेरण, \( L = 200 \; \mu\text{H} = 200 \times 10^{-6} \; \text{H} \)
\( \nu_1 \) के लिए परिवर्ती संधारित्र की धारिता \( C_1 = \frac{1}{\omega_1^2 L} \)
जहाँ, \( \omega_1 = \) संधारित्र \( C_1 \) के लिए कोणीय आवृत्ति = \( 2\pi\nu_1 = 2\pi \times 800 \times 10^3 \; \text{rad/s} \)
\( C_1 = \frac{1}{(2\pi \times 800 \times 10^3)^2 \times 200 \times 10^{-6}} \)
\( C_1 = 1.9809 \times 10^{-10} \; \text{F} = 198 \; \text{pF} \)

\( \nu_2 \) के लिए परिवर्ती संधारित्र की धारिता \( C_2 = \frac{1}{\omega_2^2 L} \)
जहाँ, \( \omega_2 = \) संधारित्र \( C_2 \) के लिए कोणीय आवृत्ति = \( 2\pi\nu_2 = 2\pi \times 1200 \times 10^3 \; \text{rad/s} \)
\( C_2 = \frac{1}{(2\pi \times 1200 \times 10^3)^2 \times 200 \times 10^{-6}} \)
\( C_2 = 0.8804 \times 10^{-10} \; \text{F} = 88 \; \text{pF} \)
अतः, परिवर्ती संधारित्र का परास 88.04 pF से 198.1pF तक है।

मुख्य बिंदु:

• आवृत्ति और धारिता एक दूसरे के व्युत्क्रमानुपाती होते हैं (\( \nu \propto \frac{1}{\sqrt{C}} \))।
• न्यूनतम आवृत्ति के संगत अधिकतम धारिता \( C_1 \) प्राप्त होती है।
• अधिकतम आवृत्ति के संगत न्यूनतम धारिता \( C_2 \) प्राप्त होती है।

आम गलतियाँ:

• kHz और \( \mu\text{H} \) को बदलते समय घातों में गलती करना।
• \( C_1 \) और \( C_2 \) के मानों को आवृत्तियों के साथ विपरीत क्रम में न रखना।

Exam Tips:

a) सूत्र \( \omega = 2\pi\nu \) और \( \omega = \frac{1}{\sqrt{LC}} \) को मिलाकर \( C = \frac{1}{4\pi^2\nu^2 L} \) का प्रयोग करें।
b) पिकोफैरेड (pF) में उत्तर देना अधिक सुविधाजनक रहता है।
c) परास (range) को छोटे से बड़े मान के क्रम में लिखें।

 

Question 7.11: चित्र में एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ दिखलाया गया है जिसे परिवर्ती आवृत्ति के के स्रोत से जोड़ा गया है।
\( L = 5.0 \; \text{H}, C = 80 \; \mu\text{F}, R = 40 \; \Omega, 230 \; \text{V} \)
(a) स्रोत की आवृत्ति निकालिए जो परिपथ में अनुनाद उत्पन्न करे।
(b) परिपथ की प्रतिबाधा तथा अनुनादी आवृत्ति पर धारा का आयाम निकालिए।
(c) परिपथ के तीनों अवयवों के सिरों पर विभवपात के rms मानो को निकालिए। दिखलाइए कि अनुनाद पर LC संयोग के सिरों पर विभवपात शून्य है।

Answer:

संधारित्र की धारिता, \( C = 80 \; \mu\text{F} = 80 \times 10^{-6} \; \text{F} \)
प्रेरित्र का प्रेरण, \( L = 5.0 \; \text{H} \)
प्रतिरोधक का प्रतिरोध, \( R = 40 \; \Omega \)
परिवर्ती वोल्टता स्रोत का विभव, \( V = 230 \; \text{V} \)

(a) अनुनाद कोणीय आवृत्ति: \( \omega_r = \frac{1}{\sqrt{LC}} = \frac{1}{\sqrt{5 \times 80 \times 10^{-6}}} = \frac{1}{\sqrt{400 \times 10^{-6}}} \)
\( \omega_r = \frac{1}{20 \times 10^{-3}} = \frac{10^3}{20} = 50 \; \text{rad/s} \)
इसलिए, परिपथ 50 rad/s की स्रोत आवृत्ति के लिए अनुनाद में होगा।

(b) परिपथ की प्रतिबाधा निम्नलिखित संबंध से प्रकट कर सकते हैं:
\( Z = \sqrt{R^2 + (X_L - X_C)^2} \)
अनुनादपर, \( X_L = X_C \Rightarrow Z = R = 40 \; \Omega \)
अनुनादी आवृत्ति पर धारा का आयाम: \( I_0 = \frac{V_0}{Z} \)
जहाँ, \( V_0 = \) अधिकतम वोल्टता = \( \sqrt{2}V \)
\( I_0 = \frac{\sqrt{2}V}{Z} = \frac{\sqrt{2} \times 230}{40} = 8.13 \; \text{A} \)
इसलिए, अनुनाद पर, परिपथ की प्रतिबाधा \( 40 \; \Omega \) और धारा का आयाम 8.13 A है।

(c) प्रेित्र के सिरों पर rms विभवपात, \( (V_L)_{rms} = I \times \omega L \)
जहाँ, \( I_{rms} = \frac{I_0}{\sqrt{2}} = \frac{\sqrt{2}V}{\sqrt{2}Z} = \frac{V}{Z} = \frac{230}{40} = \frac{23}{4} \; \text{A} \)
\( (V_L)_{rms} = \frac{23}{4} \times 50 \times 5 = 1437.5 \; \text{V} \)

संधारित्र के सिरों पर विभवपात: \( (V_C)_{rms} = I \times \frac{1}{\omega_r C} = \frac{23}{4} \times \frac{1}{50 \times 80 \times 10^{-6}} = 1437.5 \; \text{V} \)

प्रतिरोधक के सिरों पर विभवपात: \( (V_R)_{rms} = IR = \frac{23}{4} \times 40 = 230 \; \text{V} \)

LC संयोजन के सिरों पर विभवपात:
\( V_{LC} = I(X_L - X_C) \)
अनुनाद पर, \( X_L = X_C \Rightarrow V_{LC} = 0 \)
इसलिए, यह सिद्ध हो गया है कि LC संयोजन में विभवपात अनुनाद आवृत्ति पर शून्य है।

मुख्य बिंदु:

• अनुनाद की स्थिति में प्रेरक और संधारित्र के सिरों पर उत्पन्न विभवांतर परिमाण में समान और कला में विपरीत होते हैं।
• LC संयोजन का कुल प्रभावी विभवांतर शून्य हो जाता है।
• धारा का आयाम निकालने के लिए rms वोल्टता को शिखर मान में बदलना आवश्यक है।

आम गलतियाँ:

• rms मान और आयाम (शिखर मान) के बीच अंतर न समझना।
• LC संयोजन के विभवपात को अलग-अलग निकालने के बाद उनका बीजगणितीय योग करने की गलती करना (जबकि उनका सदिश या कला अंतर देखा जाता है)।

Exam Tips:

a) इस प्रकार के दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों को उप-भागों (a, b, c) के अनुसार क्रमानुसार हल करें।
b) अंतिम चरण में दिखाइए कि \( V_L \) और \( V_C \) एक दूसरे को निरस्त करते हैं।
c) हर गणना के बाद सही मात्रक अवश्य लिखें।

 

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FAQs

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Are the Physics NCERT solutions for Class 12 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 07 Alternating Current (प्रत्यावर्ती धारा) Exercise Questions in Hindi as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Physics concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 12 NCERT solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using NCERT language because NCERT marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 07 Alternating Current (प्रत्यावर्ती धारा) Exercise Questions in Hindi will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 07 Alternating Current (प्रत्यावर्ती धारा) Exercise Questions in Hindi in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Physics. You can access NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 07 Alternating Current (प्रत्यावर्ती धारा) Exercise Questions in Hindi in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Physics NCERT solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 07 Alternating Current (प्रत्यावर्ती धारा) Exercise Questions in Hindi in printable PDF format for offline study on any device.