NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 07 Alternating Current (प्रत्यावर्ती धारा) Additional Questions in Hindi

Official NCERT Solutions for Class 12 Physics: Chapter 07 प्रत्यावर्ती धारा

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Chapter-wise Solutions for Physics: Chapter 07 प्रत्यावर्ती धारा

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Question 7.12: किसी LC परिपथ में \( 20\text{ mH} \) का एक प्रेरक तथा \( 50\text{ }\mu\text{F} \) का एक संधारित्र है जिस पर प्रारम्भिक आवेश \( 10\text{ mC} \) है। परिपथ का प्रतिरोध नगण्य है। मान लीजिए कि वह क्षण जिस पर परिपथ बन्द किया जाता है \( t = 0 \) है।
(a) प्रारम्भ में कुल कितनी ऊर्जा संचित है? क्या यह LC दोलनॊं की अवधि में संरक्षित है?
(b) परिपथ की मूल आवृत्ति kya है?
(c) किस समय पर संचित ऊर्जा:
(i) पूरी तरह से विधुत है (अर्थात वह संधारित्र में संचित है)?
(ii) पूरी तरह से चुम्बकीय है (अर्थात प्रेरक में संचित है)?
(d) किन समयों पर सम्पूर्ण ऊर्जा प्रेरक and संधारित्र के मध्य समान रूप से विभाजित है?
(e) यदि एक प्रतिरोधक को परिपथ में लगाया जाए तो कितनी ऊर्जा अन्ततः ऊष्मा के रूप में क्षيत होगी?

Answer:

दिया गया है:
प्रेरकत्व, \( L = 20\text{ mH} = 20 \times 10^{-3}\text{ H} \)
धारिता, \( C = 50\text{ }\mu\text{F} = 50 \times 10^{-6}\text{ F} \)
प्रारम्भिक आवेश, \( Q = 10\text{ mC} = 10 \times 10^{-3}\text{ C} \)
(a) प्रारम्भ में कुल ऊर्जा:
\( E = \frac{1}{2} \frac{Q^2}{C} \)
\( E = \frac{1}{2} \times \frac{(10 \times 10^{-3})^2}{50 \times 10^{-6}} = 1\text{ J} \)
चूँकि परिपथ में प्रतिरोध नगण्य है, अतः LC परिपथ में कुल संचित ऊर्जा संरक्षित रहेगी।
(b) परिपथ की मूल आवृत्ति:
\( \nu = \frac{1}{2\pi\sqrt{LC}} \)
\( \nu = \frac{1}{2\pi\sqrt{20 \times 10^{-3} \times 50 \times 10^{-6}}} = \frac{10^3}{2\pi} = 159.24\text{ Hz} \)
मूल कोणीय आवृत्ति, \( \omega_r = \frac{1}{\sqrt{LC}} = \frac{1}{\sqrt{20 \times 10^{-3} \times 50 \times 10^{-6}}} = 10^3\text{ rad/s} \)
(c) समय अन्तराल \( T = \frac{1}{\nu} = 6.28\text{ ms} \) के लिए:
(i) संधारित्र में संचित ऊर्जा पूरी तरह विधुत होगी जब कुल आवेश \( Q' = Q \)
अर्थात समय \( t = 0, \frac{T}{2}, \frac{3T}{2}, \dots \)
(ii) चुम्बकीय ऊर्जा अधिकतम तब होगी जब \( Q = 0 \)
अर्थात समय \( t = \frac{T}{4}, \frac{3T}{4}, \dots \)
(d) जब कुल ऊर्जा संधारित्र and प्रेरक के बीच समान रूप से विभाजित हो:
संधारित्र में ऊर्जा \( = \frac{1}{2} (\text{अधिकतम ऊर्जा}) \)
\( \frac{1}{2}\frac{(Q')^2}{C} = \frac{1}{2} \left(\frac{1}{2}\frac{Q^2}{C}\right) \)
\( Q' = \frac{Q}{\sqrt{2}} \)
समय \( t = (2n + 1)\frac{T}{8} \) जहाँ \( n = 0, 1, 2, \dots \)
(e) यदि परिपथ में एक प्रतिरोधक जोड़ा जाता है, तो सम्पूर्ण ऊर्जा अंततः ऊष्मा के रूप में क्षय हो जाएगी क्योंकि प्रतिरोधक LC दोलनों को नष्ट कर देता है।

मुख्य बिंदु:

• LC दोलनों में ऊर्जा विधुत और चुम्बकीय रूपों के बीच दोलन करती है।
• आदर्श LC परिपथ में कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है।
• प्रतिरोध की उपस्थिति ऊर्जा को ऊष्मा में बदल देती है।

आम गलतियाँ:

• इकाइयों (mH और μF) को मानक SI इकाइयों में बदलना भूल जाना।
• समय के मानों (T/4, T/2 आदि) को गलत लिखना।
• ऊर्जा के सूत्रों में मान गलत रखना।

Exam Tips:

a) हमेशा गणना शुरू करने से पहले सभी राशियों को SI पद्धति में बदलें।
b) समय-आवृति के सूत्रों को स्पष्ट रूप से लिखें।
c) ऊर्जा संरक्षण के नियमों का उल्लेख अवश्य करें।

 

Question 7.13: एक कुण्डली को जिसका प्रेरण \( 0.50\text{ H} \) तथा प्रतिरोध \( 100\text{ }\Omega \) है, \( 240\text{ V}, 50\text{ Hz} \) की एक आपूर्ति से जोड़ा गया है।
(a) कुण्डली में अधिकतम धारा कितनी है?
(b) वोल्टेज शीर्ष व धारा शीर्ष के बीच समय-पश्चता (time lag) कितनी है?

Answer:

दिया गया है:
प्रेरकत्व, \( L = 0.50\text{ H} \)
प्रतिरोध, \( R = 100\text{ }\Omega \)
विभव, \( V = 240\text{ V} \)
आवृत्ति, \( \nu = 50\text{ Hz} \)
(a) शीर्ष वोल्टेज, \( V_0 = \sqrt{2}V = \sqrt{2} \times 240 = 339.41\text{ V} \)
कोणीय आवृत्ति, \( \omega = 2\pi\nu = 2\pi \times 50 = 100\pi\text{ rad/s} \)
प्रतिबाधा, \( Z = \sqrt{R^2 + \omega^2 L^2} = \sqrt{(100)^2 + (100\pi)^2 (0.50)^2} = \sqrt{10000 + 24674} = 186\text{ }\Omega \) (लगभग)
अधिकतम धारा, \( I_0 = \frac{V_0}{Z} = \frac{339.41}{186} = 1.82\text{ A} \)
(b) कला अन्तर \( \phi \) के लिए:
\( \tan\phi = \frac{\omega L}{R} = \frac{100\pi \times 0.50}{100} = 1.57 \)
\( \phi = 57.5^\circ = \frac{57.5\pi}{180}\text{ rad} \)
समय पश्चता (t):
\( t = \frac{\phi}{\omega} = \frac{57.5\pi}{180 \times 100\pi} = 3.19 \times 10^{-3}\text{ s} = 3.2\text{ ms} \)

मुख्य बिंदु:

• LR परिपथ में धारा वोल्टेज से पश्चगामी होती है।
• प्रतिबाधा \( Z \) निकालने के लिए \( R \) और \( \omega L \) दोनों का उपयोग होता है।
• समय-पश्चता कला कोण को कोणीय आवृत्ति से विभाजित करके निकाली जाती है।

आम गलतियाँ:

• \( \omega L \) निकालते समय \( \pi \) का मान न रखना।
• कला कोण को रेडियन में बदले बिना समय अंतराल निकालना।
• शीर्ष वोल्टेज के स्थान पर rms मान का प्रयोग करना।

Exam Tips:

a) प्रतिबाधा त्रिभुज और उसके सूत्रों को हमेशा याद रखें।
b) समय-पश्चता निकालते समय कोण को रेडियन में बदलना न भूलें।
c) प्रत्येक चरण में यूनिट्स (मात्रक) अवश्य लिखें।

 

Question 7.14: यदि परिपथ को उच्च आवृत्ति की आपूर्ति (\( 240\text{ V}, 10\text{ kHz} \)) से जोड़ा जाता है तो प्रश्न 13 (a) तथा (b) के उत्तर निकालिए। इससे इस कथन की व्याख्या कीजिए कि अति उच्च आवृत्ति पर किसी परिपथ में प्रेरक लगभग खुले परिपथ के तुल्य होता है। स्थिर अवस्था के पश्चात किसी dc परिपथ में प्रेरक किस प्रकार का व्यवहार करता है?

Answer:

दिया गया है:
\( V = 240\text{ V}, \nu = 10\text{ kHz} = 10^4\text{ Hz} \), \( L = 0.5\text{ H}, R = 100\text{ }\Omega \)
कोणीय आवृत्ति, \( \omega = 2\pi\nu = 2\pi \times 10^4\text{ rad/s} \)
(a) शीर्ष वोल्टेज, \( V_0 = \sqrt{2}V = 240\sqrt{2}\text{ V} \)
प्रतिबाधा, \( Z = \sqrt{R^2 + \omega^2 L^2} = \sqrt{(100)^2 + (2\pi \times 10^4 \times 0.5)^2} \)
अधिकतम धारा, \( I_0 = \frac{V_0}{Z} = \frac{240\sqrt{2}}{3.14 \times 10^4} = 1.1 \times 10^{-2}\text{ A} \)
(b) कला भेद \( \phi \):
\( \tan\phi = \frac{\omega L}{R} = \frac{2\pi \times 10^4 \times 0.5}{100} = 100\pi = 314 \)
\( \phi \approx 89.82^\circ = \frac{89.82\pi}{180}\text{ rad} \)
समय अन्तराल, \( t = \frac{\phi}{\omega} = \frac{89.82\pi}{180 \times 2\pi \times 10^4} = 25\text{ }\mu\text{s} \)
अति उच्च आवृत्ति पर प्रतिबाधा बहुत अधिक हो जाती है, जिससे धारा का मान नगण्य हो जाता है। अतः प्रेरक खुले परिपथ की तरह व्यवहार करता है। DC परिपथ में आवृत्ति शून्य होती है, इसलिए प्रेरक एक साधारण चालक की तरह व्यवहार करता है।

मुख्य बिंदु:

• उच्च आवृत्ति पर प्रतिघात \( X_L = \omega L \) बहुत बढ़ जाता है।
• उच्च आवृत्ति पर प्रेरक खुले परिपथ की भाँति कार्य करता है।
• DC के लिए आवृत्ति शून्य होने के कारण प्रेरक शॉर्ट सर्किट (साधारण तार) जैसा होता है।

आम गलतियाँ:

• किलोहर्ट्ज़ (kHz) को हर्ट्ज़ में बदलना भूल जाना।
• \( \tan\phi \) के बड़े मान से कोण निकालते समय त्रुटि करना।

Exam Tips:

• उच्च और निम्न आवृत्ति की सीमाओं पर प्रेरक के व्यवहार को सैद्धांतिक रूप से समझें।
• गणना में घात (powers of 10) का विशेष ध्यान रखें।
• निष्कर्ष स्पष्ट शब्दों में लिखें।

 

Question 7.15: \( 40\text{ }\Omega \) प्रतिरोध के श्रेणीक्रम में एक \( 100\text{ }\mu\text{F} \) के संधारित्र को \( 110\text{ V}, 60\text{ Hz} \) की आपूर्ति से जोड़ा गया है।
(a) परिपथ में अधिकतम धारा कितनी है?
(b) धारा शीर्ष व वोल्टेज शीर्ष के बीच समय-पश्चता कितनी है?

Answer:

दिया गया है:
\( R = 40\text{ }\Omega, C = 100\text{ }\mu\text{F} = 100 \times 10^{-6}\text{ F} \)
\( V = 110\text{ V}, \nu = 60\text{ Hz} \)
कोणीय आवृत्ति, \( \omega = 2\pi\nu = 2\pi \times 60 = 120\pi\text{ rad/s} \)
(a) प्रतिबाधा, \( Z = \sqrt{R^2 + \left(\frac{1}{\omega C}\right)^2} \)
\( \frac{1}{\omega C} = \frac{1}{120\pi \times 100 \times 10^{-6}} = 26.53\text{ }\Omega \)
\( Z = \sqrt{(40)^2 + (26.53)^2} = \sqrt{1600 + 703.8} = 47.78\text{ }\Omega \)
शीर्ष वोल्टेज, \( V_0 = \sqrt{2} \times 110 = 155.56\text{ V} \)
अधिकतम धारा, \( I_0 = \frac{V_0}{Z} = \frac{155.56}{47.78} = 3.25\text{ A} \)
(b) कला कोण \( \phi \):
\( \tan\phi = \frac{1}{\omega C R} = \frac{26.53}{40} = 0.663 \)
\( \phi = \tan^{-1}(0.663) = 33.5^\circ = \frac{33.5\pi}{180}\text{ rad} \)
समय अन्तराल, \( t = \frac{\phi}{\omega} = \frac{33.5\pi}{180 \times 120\pi} = 1.55\text{ ms} \)

मुख्य बिंदु:

• RC परिपथ में प्रतिबाधा \( Z = \sqrt{R^2 + (1/\omega C)^2} \) होती है।
• RC परिपथ में धारा वोल्टेज से अग्रगामी होती है।
• संधारित्र का धारकीय प्रतिघात आवृत्ति के व्युत्क्रमानुपाती होता है।

आम गलतियाँ:

• \( 1/\omega C \) की गणना में गलती करना।
• कला कोण और समय-पश्चता के बीच संबंध में मान गलत रखना।

Exam Tips:

a) RC परिपथ के फार्मूले याद रखें।
b) कैलकुलेशन में दशमलव के दो स्थानों तक मान निकालें।
c) मात्रक लिखना न भूलें।

 

Question 7.16: यदि परिपथ को \( 110\text{ V}, 12\text{ kHz} \) आवृत्ति से जोड़ा जाए तो अभ्यास (a) व (b) का उत्तर निकालिए। इससे इस कथन की व्याख्या कीजिए कि अति उच्च आवृत्तियों पर एक संधारित्र चालक होता है। इसकी तुलना उस व्यवहार से कीजिए जो किसी dc परिपथ में एक संधारित्र प्रदर्शित करता है।

Answer:

दिया गया है:
\( V = 110\text{ V}, \nu = 12\text{ kHz} = 12 \times 10^3\text{ Hz} \)
\( R = 40\text{ }\Omega, C = 100\text{ }\mu\text{F} \)
कोणीय आवृत्ति, \( \omega = 2\pi\nu = 24\pi \times 10^3\text{ rad/s} \)
धारकीय प्रतिघात \( X_C = \frac{1}{\omega C} \) बहुत कम हो जाता है।
प्रतिबाधा \( Z \approx R = 40\text{ }\Omega \)
अधिकतम धारा, \( I_0 = \frac{V_0}{Z} = \frac{110\sqrt{2}}{40} = 3.88\text{ A} \)
कला कोण \( \phi \approx 0^\circ \), और समय-पश्चता लगभग शून्य होती है।
अति उच्च आवृत्ति पर संधारित्र एक साधारण चालक की तरह व्यवहार करता है, जबकि DC परिपथ (\(\nu = 0\)) में इसका प्रतिघात अनंत होता है, जिससे यह खुले परिपथ की तरह कार्य करता है।

मुख्य बिंदु:

• उच्च आवृत्ति पर \( X_C \to 0 \) होता है।
• DC के लिए संधारित्र अनंत प्रतिरोध (खुला परिपथ) प्रदान करता है।
• उच्च आवृत्ति पर RC परिपथ केवल प्रतिरोधक की तरह काम करता है।

आम गलतियाँ:

• DC और AC में संधारित्र के व्यवहार को मिला देना।
• किलोहर्ट्ज़ को हर्ट्ज़ में न बदलना।

Exam Tips:

a) संधारित्र के लिए \( X_C = 1/\omega C \) संबंध को अच्छी तरह समझें।
b) उच्च और निम्न आवृत्ति के सीमांत मामलों (limiting cases) को स्पष्ट करें।
c) थ्योरी आधारित प्रश्नों में तर्क स्पष्ट लिखें।

 

Question 7.17: स्रोत की आवृत्ति को एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ की अनुनादी आवृत्ति के बराबर रखते हुए तीन अवयवों \( L, C \) तथा \( R \) को समांतरक्रम में लगाते हैं। यह दर्शाइए कि समांतर LCR परिपथ में इस आवृत्ति पर कुल के लिए अभ्यास 7.11 में निर्दिष्ट स्रोत तथा अवयवों के लिए परिपथ की हर शाखा में धारा के rms मान को परिकलित कीजिए।

Answer:

समांतर LCR परिपथ की कुल प्रतिबाधा का व्यंजक:
\( \frac{1}{Z^2} = \frac{1}{R^2} + \left(\frac{1}{\omega L} - \omega C\right)^2 \)
अनुनाद की स्थिति में, \( \frac{1}{\omega L} = \omega C \), अतः \( \frac{1}{Z} = \frac{1}{R} \Rightarrow Z = R \)
दिया गया है: \( L = 5.0\text{ H}, C = 80\text{ }\mu\text{F}, R = 40\text{ }\Omega, V = 230\text{ V} \)
अनुनादी कोणीय आवृत्ति, \( \omega_r = \frac{1}{\sqrt{LC}} = \frac{1}{\sqrt{5 \times 80 \times 10^{-6}}} = 50\text{ rad/s} \)
(1) प्रेरक शाखा में rms धारा: \( I_L = \frac{V}{\omega L} = \frac{230}{50 \times 5} = 0.92\text{ A} \)
(2) संधारित्र शाखा में rms धारा: \( I_C = V \cdot \omega C = 230 \times 50 \times 80 \times 10^{-6} = 0.92\text{ A} \)
(3) प्रतिरोधक शाखा में rms धारा: \( I_R = \frac{V}{R} = \frac{230}{40} = 5.75\text{ A} \)

मुख्य बिंदु:

• समांतर LCR परिपथ में अनुनाद के समय कुल धारा न्यूनतम होती है।
• प्रेरक और संधारित्र की शाखा धाराओं के परिमाण समान और विपरीत कला में होते हैं।
• मुख्य धारा केवल प्रतिरोधक शाखा से बहने वाली धारा के बराबर होती है।

आम गलतियाँ:

• श्रेणी और समांतर परिपथ के अनुनाद सूत्रों में भ्रमित होना।
• शाखा धाराओं को सीधे बीजगणितीय रूप से जोड़ देना।

Exam Tips:

a) समांतर अनुनाद परिपथ के मुख्य गुणों को याद रखें।
b) प्रत्येक शाखा के लिए धारा निकालते समय सही प्रतिघात का उपयोग करें।
c) गणना को साफ-सुथरा दिखाएं।

 

Question 7.18: एक परिपथ को जिसमें \( 80\text{ mH} \) का एक प्रेरक तथा \( 60\text{ }\mu\text{F} \) का संधारित्र श्रेणीक्रम में है, \( 230\text{ V}, 50\text{ Hz} \) की आपूर्ति से जोड़ा गया है। परिपथ का प्रतिरोध नगण्य है।
(a) धारा का आयाम तथा rms मानों को निकालिए।
(b) हर अवयव के सिरों पर विभवांतर के rms मानों को निकालिए।
(c) प्रेरक में स्थानांतरित माध्य शक्ति कितनी है?
(d) संधारित्र में स्थानांतरित माध्य शक्ति कितनी है?
(e) परिपथ द्वारा अवशोषण कुल माध्य शक्ति कितनी है?

Answer:

दिया गया है: \( L = 80\text{ mH}, C = 60\text{ }\mu\text{F}, V = 230\text{ V}, \nu = 50\text{ Hz}, R = 0 \)
कोणीय आवृत्ति, \( \omega = 2\pi\nu = 100\pi\text{ rad/s} \)
(a) प्रतिघात: \( X_L = \omega L = 100\pi \times 80 \times 10^{-3} = 25.13\text{ }\Omega \)
\( X_C = \frac{1}{\omega C} = \frac{1}{100\pi \times 60 \times 10^{-6}} = 53.05\text{ }\Omega \)
कुल प्रतिबाधा, \( Z = |X_C - X_L| = 53.05 - 25.13 = 27.92\text{ }\Omega \)
शीर्ष वोल्टेज, \( V_0 = \sqrt{2} \times 230 = 325.27\text{ V} \)
धारा का आयाम, \( I_0 = \frac{V_0}{Z} = \frac{325.27}{27.92} = 11.65\text{ A} \)
rms धारा, \( I = \frac{I_0}{\sqrt{2}} = 8.24\text{ A} \)
(b) प्रेरक के सिरों पर विभवांतर, \( V_L = I \times X_L = 8.24 \times 25.13 = 207\text{ V} \)
संधारित्र के सिरों पर विभवांतर, \( V_C = I \times X_C = 8.24 \times 53.05 = 437\text{ V} \)
(c) प्रेरक में माध्य शक्ति खपत = \( 0 \) (चूँकि कला कोण \( 90^\circ \) है)
(d) संधारित्र में माध्य शक्ति खपत = \( 0 \)
(e) कुल अवशोषित माध्य शक्ति = \( 0 \) (चूँकि प्रतिरोध शून्य है)

मुख्य बिंदु:

• शुद्ध प्रेरक और संधारित्र परिपथ में औसत शक्ति हमेशा शून्य होती है।
• परिपथ का प्रतिरोध शून्य होने के कारण कोई ऊष्मीय क्षय नहीं होता।
• कुल प्रतिबाधा \( X_C \) और \( X_L \) का अंतर होती है।

आम गलतियाँ:

• \( X_L \) और \( X_C \) को जोड़ देना जबकि वे श्रेणीक्रम में विपरीत होते हैं।
• शुद्ध L-C परिपथ में भी शक्ति खपत मान लेना।

Exam Tips:

a) याद रखें कि शुद्ध L और C में शक्ति गुणांक \( \cos(90^\circ) = 0 \) होता है।
b)rms मान निकालने के लिए \( I_0/\sqrt{2} \) का प्रयोग करें।
c) इकाइयों का विशेष ध्यान रखें।

 

Question 7.19: कल्पना कीजिए कि अभ्यास 7.18 में प्रतिरोध \( 15\text{ }\Omega \) है। परिपथ के हर अवयव को स्थानान्तरित माध्य शक्ति तथा सम्पूर्ण अवशोषण शक्ति को परिकलित कीजिए।

Answer:

दिया गया है: \( R = 15\text{ }\Omega, L = 80\text{ mH}, C = 60\text{ }\mu\text{F}, V = 230\text{ V}, \nu = 50\text{ Hz} \)
कोणीय आवृत्ति \( \omega = 100\pi\text{ rad/s} \)
प्रतिबाधा, \( Z = \sqrt{R^2 + (X_C - X_L)^2} = \sqrt{(15)^2 + (53.05 - 25.13)^2} = \sqrt{225 + 779.4} = 31.68\text{ }\Omega \)
परिपथ में प्रवाहित धारा, \( I = \frac{V}{Z} = \frac{230}{31.68} = 7.26\text{ A} \)
(1) प्रतिरोधक द्वारा स्थानांतरित औसत शक्ति: \( P_R = I^2 R = (7.26)^2 \times 15 = 790\text{ W} \)
(2) प्रेरक द्वारा स्थानांतरित औसत शक्ति = \( 0 \) స్థాపિત
(3) संधारित्र द्वारा स्थानांतरित औसत शक्ति = \( 0 \)
(4) कुल अवशोषित शक्ति = \( P_R + 0 + 0 = 790\text{ W} \)

मुख्य बिंदु:

• LCR परिपथ में केवल प्रतिरोधक ही शक्ति का उपभोग करता है।
• प्रेरक और संधारित्र ऊर्जा का संचय और वापसी करते हैं, उपभोग नहीं।
• कुल शक्ति केवल \( I^2 R \) से दी जाती है।

आम गलतियाँ:

• L और C में भी शक्ति व्यय जोड़ देना।
• प्रतिबाधा निकालते समय \( R \) को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) हमेशा याद रखें कि शक्ति केवल प्रतिरोध में क्षय होती है।
b) LCR परिपथ में \( Z \) का सही सूत्र प्रयोग करें।
c) गणना के चरणों को स्पष्ट लिखें।

 

Question 7.20: एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ जिसमें \( L = 0.12\text{ H}, C = 480\text{ nF}, R = 23\text{ }\Omega \), \( 230\text{ V} \) वर्ती वाल स्रोत से जोड़ा गया है।
(a) स्रोत की वह आवृत्ति कितनी है जिस पर धारा आयाम अधिकतम है? इस अधिकतम मान को निकालिए।
(b) स्रोत की वह आवृत्ति है जिसके लिए परिपथ द्वारा अवशोषण माध्य शक्ति अधिकतम है?
(c) स्रोत की किस आवृत्ति के लिए परिपथ की स्थानान्तरित शक्ति अनुनादी आवृत्ति की शक्ति की आधी है?
(d) दिए गए परिपथ के लिए Q कारक कितना है?

Answer:

दिया गया है: \( L = 0.12\text{ H}, C = 480\text{ nF} = 480 \times 10^{-9}\text{ F}, R = 23\text{ }\Omega, V = 230\text{ V} \)
(a) अधिकतम धारा अनुनाद पर होती है। अनुनादी आवृत्ति:
\( \omega_r = \frac{1}{\sqrt{LC}} = \frac{1}{\sqrt{0.12 \times 480 \times 10^{-9}}} = 4166.67\text{ rad/s} \)
आवृत्ति \( \nu_r = \frac{\omega_r}{2\pi} = 663.48\text{ Hz} \)
अधिकतम धारा आयाम, \( I_{0,\text{max}} = \frac{V_0}{R} = \frac{\sqrt{2} \times 230}{23} = 14.14\text{ A} \)
(b) अधिकतम शक्ति भी अनुनादी आवृत्ति पर ही होती है, अतः \( \nu = 663.48\text{ Hz} \).
(c) शक्ति आधी होने की आवृत्तियाँ (Half-power frequencies):
\( \omega = \omega_r \pm \Delta\omega \), जहाँ \( \Delta\omega = \frac{R}{2L} = \frac{23}{2 \times 0.12} = 95.83\text{ rad/s} \)
आवृत्तियाँ \( = 663.48 \pm \frac{95.83}{2\pi} = 663.48 \pm 15.26\text{ Hz} \), अर्थात् \( 678.74\text{ Hz} \) और \( 648.22\text{ Hz} \)
(d) Q-कारक: \( Q = \frac{\omega_r L}{R} = \frac{4166.67 \times 0.12}{23} = 21.74 \)

मुख्य बिंदु:

• अनुनाद की स्थिति में धारा और शक्ति दोनों अधिकतम होते हैं।
• अर्द्ध-शक्ति बिन्दुओं पर शक्ति अधिकतम मान की आधी होती है।
• Q-कारक तीक्ष्णता को प्रदर्शित करता है।

आम गलतियाँ:

• \( \Delta\omega \) निकालते समय \( 2L \) के स्थान पर केवल \( L \) लिख देना।
• आवृत्ति और कोणीय आवृत्ति में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) अनुनाद और तीक्ष्णता से जुड़े सभी सूत्र याद रखें।
b) अर्द्ध-शक्ति आवृत्तियों के लिए \( \pm \Delta\omega \) का प्रयोग करें।
c) प्रत्येक उप-प्रश्न का उत्तर अलग-अलग स्पष्ट करें।

 

Question 7.21: एक श्रेणीबद्ध LCR परिपथ के लिए जिसमें \( L = 3.0\text{ H}, C = 27\text{ }\mu\text{F} \) तथा \( R = 7.4\text{ }\Omega \) अनुनादी आवृत्ति तथा Q कारक निकालिए। परिपथ के अनुनाद की तीक्ष्णता को सुधारने की इच्छा से "अर्ध उच्छिष्ट पर पूर्ण चौड़ाई" को 2 गुणक द्वारा घटा दिया जाता है। इसके लिए उचित उपाय सुझाइए।

Answer:

दिया गया है: \( L = 3.0\text{ H}, C = 27\text{ }\mu\text{F} = 27 \times 10^{-6}\text{ F}, R = 7.4\text{ }\Omega \)
अनुनादी कोणीय आवृत्ति:
\( \omega_r = \frac{1}{\sqrt{LC}} = \frac{1}{\sqrt{3 \times 27 \times 10^{-6}}} = \frac{1}{9 \times 10^{-3}} = 111.11\text{ rad/s} \)
Q-कारक: \( Q = \frac{\omega_r L}{R} = \frac{111.11 \times 3}{7.4} = 45.04 \)
अर्ध-उच्छिष्ट पर पूर्ण चौड़ाई \( 2\Delta\omega = \frac{R}{L} \) होती है। इसे आधा (यानि 2 के गुणक से कम) करने के लिए या तो प्रतिरोध \( R \) को आधा करना होगा या प्रेरकत्व \( L \) को दोगुना करना होगा। चूँकि अनुनादी आवृत्ति को बिना बदले रखना है, अतः प्रतिरोध को आधा करना सबसे उचित है:
नया प्रतिरोध \( R' = \frac{R}{2} = \frac{7.4}{2} = 3.7\text{ }\Omega \)

मुख्य बिंदु:

• अनुनाद की तीक्ष्णता \( Q \) कारक पर निर्भर करती है।
• बैंडविड्थ \( 2\Delta\omega = R/L \) होती है।
• आवृत्ति बदले बिना तीक्ष्णता सुधारने के लिए प्रतिरोध घटाया जाता है।

आम गलतियाँ:

• \( L \) या \( C \) बदलते समय अनुनादी आवृत्ति के प्रभावित होने का ध्यान न रखना।
• मात्रक और गणना में गलती करना।

Exam Tips:

a) तीक्ष्णता और बैंडविड्थ के संबंधों को समझें।
b) व्यावहारिक उपायों (जैसे प्रतिरोध कम करना) का तार्किक कारण दें।
c) चरणबद्ध हल प्रस्तुत करें।

 

Question 7.22: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(a) क्या किसी ac परिपथ में प्रयुक्त तात्कालिक वोल्टता परिपथ में श्रेणीक्रम में जोड़े गए अवयवों के सिरों पर तात्कालिक वोल्टतोनों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है? क्या यही बात rms वोल्टताओं में भी लागू होती है?
(b) प्रेरण कुण्डली के प्राथमिक परिपथ में एक संधारित्र का उपयोग करते हैं।
(c) एक प्रयुक्त वोल्टता संकेत एक dc वोल्टता तथा उच्च आवृत्ति के एक ac वोल्टता के अध्यारोपण से निर्मित है। परिपथ एक श्रेणीबद्ध प्रेरक तथा संधारित्र से निर्मित है। दर्शाइए कि dc संकेत 'C' तथा ac संकेत 'L' के सिरे पर प्रकट होगा。
(d) एक लैंप से श्रेणीक्रम में जुड़ी चोक को एक dc लाइन से जोड़ा गया है। लैंप तेजी से चमकता है। चोक में लोहे के क्रोड को प्रवेश कराने पर लैंप की दीप्ति में कोई अन्तर नहीं पड़ता है। यदि एक ac लाइन से लैंप का संयोजन किया जाए तो तदनुसार प्रेक्षणों की प्रागुक्ति कीजिए?
(e) AC मैस के साथ कार्य करने वाली फ्लोरोसेंट ट्यूब में प्रयुक्त चोक कुण्डली की आवश्यकता क्यों होती है? चोक कुण्डली के स्थान पर सामान्य प्रतिरोधक का उपयोग क्यों नहीं होता?

Answer:

(a) हाँ, तात्कालिक वोल्टता के लिए यह सत्य है (किरचॉफ का नियम), परन्तु rms वोल्टताओं के बीजगणितीय योग के लिए यह सत्य नहीं है क्योंकि उनके बीच कलांतर होता है।
(b) संधारित्र का उपयोग प्रेरण कुण्डली के प्राथमिक परिपथ में स्पार्किंग (विद्युत चिंगारी) को रोकने के लिए किया जाता है जब स्विच खुलता है।
(c) DC संकेत के लिए संधारित्र का प्रतिघात अनंत (खुला परिपथ) होता है, अतः DC वोल्टता C के सिरों पर प्रकट होती है। उच्च आवृत्ति AC के लिए प्रेरक का प्रतिघात बहुत अधिक होता है, अतः AC संकेत L के सिरों पर प्रकट होता है।
(d) DC के लिए चोक कुण्डली का प्रेरकत्व प्रभाव नहीं डालता (केवल प्रतिरोध होता है), इसलिए लोहे की क्रोड डालने से फर्क नहीं पड़ता। AC में क्रोड डालने से प्रतिघात \( X_L \) बढ़ जाएगा, जिससे लैंप की चमक कम हो जाएगी।
(e) चोक कुण्डली परिपथ में बिना ऊर्जा क्षय किए धारा को नियंत्रित करती है (आभासी शक्ति क्षय नहीं), जबकि सामान्य प्रतिरोधक ऊष्मा के रूप में ऊर्जा नष्ट करता है।

मुख्य बिंदु:

• तात्कालिक मान बीजगणितीय रूप से जुड़ते हैं, rms मान सदिश (phasor) रूप से जुड़ते हैं।
• चोक कुण्डली AC परिपथ में ऊर्जा हानि के बिना धारा नियंत्रित करती है (आदर्श रूप में)।
• DC और AC के प्रतिघात व्यवहार भिन्न होते हैं।

आम गलतियाँ:

• rms वोल्टताओं को सीधे बीजगणितीय रूप से जोड़ देना।
• चोक कुण्डली के कार्य को साधारण प्रतिरोधक जैसा समझ लेना।

Exam Tips:

a) वैचारिक प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट और वैज्ञानिक तर्कों के साथ दें।
b) AC और DC के अंतर को स्पष्ट रखें।
c) महत्वपूर्ण बिन्दुओं को पॉइंट बनाकर लिखें।

 

Question 7.23: एक शक्ति संप्रेषण लाइन अपचायी ट्रांसफॉर्मर में जिसकी प्राथमिक कुण्डली में 4000 फेरे हैं, 2300 वोल्ट पर शक्ति निवेशित करती है। 230 V की निर्गत शक्ति प्राप्त करने के लिए द्वितीयक में कितने फेरे होने चाहिए?

Answer:

दिया गया है:
प्राथमिक वोल्टता, \( V_1 = 2300\text{ V} \)
प्राथमिक कुण्डली में फेरे, \( n_1 = 4000 \)
निर्गत (द्वितीयक) वोल्टता, \( V_2 = 230\text{ V} \)
फेरों और वोल्टता का संबंध:
\( \frac{V_1}{V_2} = \frac{n_1}{n_2} \)
\( \frac{2300}{230} = \frac{4000}{n_2} \)
\( 10 = \frac{4000}{n_2} \)
\( n_2 = \frac{4000}{10} = 400 \)

मुख्य बिंदु:

• ट्रांसफॉर्मर में फेरों की संख्या और वोल्टेज का अनुपात समान होता है (\( V_1/V_2 = n_1/n_2 \)).
• अपचायी (step-down) ट्रांसफॉर्मर वोल्टेज को घटाता है और फेरे भी कम करता है।

आम गलतियाँ:

• प्राथमिक और द्वितीयक के मानों को आपस में उलटा रख देना।
• गणना में शून्य की गलती करना।

Exam Tips:

a) ट्रांसफॉर्मर के मूल सूत्रों को सही से याद रखें।
b) मान रखते समय ध्यान दें कि कौन सा प्राथमिक (1) है और कौन सा द्वितीयक (2)।
c) उत्तर के साथ मात्रक या संख्या स्पष्ट लिखें।

 

Question 7.24: एक जल विधुत शक्ति संयंत्र में जल दाब शीर्ष \( 300\text{ m} \) की ऊँचाई पर है तथा उपलब्ध जल प्रवाह \( 100\text{ m}^3\text{s}^{-1} \) है। यदि टरबाइन जनित्र की दक्षता 60% हो तो संयंत्र से उपलब्ध विधुत शक्ति का आकलन कीजिए, \( g = 9.8\text{ ms}^{-2} \) ।

Answer:

दिया गया है:
जल दाब शीर्ष, \( h = 300\text{ m} \)
प्रवाह दर, \( V = 100\text{ m}^3\text{s}^{-1} \) (या जल द्रव्यमान प्रति सेकंड \( \frac{m}{t} = A \cdot v \cdot \rho \))
यहाँ जल का घनत्व, \( \rho = 10^3\text{ kg/m}^3 \)
प्रति सेकंड बहने वाले पानी का द्रव्यमान, \( \frac{m}{t} = 100 \times 10^3 = 10^5\text{ kg/s} \)
टरबाइन दक्षता, \( \eta = 60\% = 0.6 \)
गुरुत्वीय त्वरण, \( g = 9.8\text{ ms}^{-2} \)
संयंत्र से उपलब्ध विद्युत शक्ति:
\( P = \eta \cdot \frac{m}{t} \cdot g \cdot h \)
\( P = 0.6 \times (100 \times 10^3) \times 9.8 \times 300 \)
\( P = 0.6 \times 10^5 \times 2940 = 1.764 \times 10^8\text{ W} = 176.4\text{ MW} \)

मुख्य बिंदु:

• जल विद्युत संयंत्र में स्थितिज ऊर्जा का उपयोग विद्युत ऊर्जा में होता है।
• शक्ति का सूत्र \( P = \eta \cdot (\frac{m}{t})gh \) होता है।
• घनत्व और आयतन से द्रव्यमान प्रति सेकंड निकाला जाता है।

आम गलतियाँ:

• दक्षता प्रतिशत (60%) को दशमलव (0.6) में बदलना भूल जाना।
• जल के घनत्व और प्रवाह दर का गुणनफल गलत करना।

Exam Tips:

a) जलविद्युत संयंत्र से जुड़े ऊर्जा रूपांतरण के सूत्रों को समझें।
b) घातों (powers of 10) की गणना सावधानी से करें।
c) उत्तर को मेगावाट (MW) में बदलना न भूलें।

 

Question 7.25: 440 V पर शक्ति उत्पादन करने वाले किसी विधुत संयंत्र से \( 15\text{ km} \) दूर स्थित एक छोटे से कस्बे में \( 220\text{ V} \) पर \( 800\text{ kW} \) शक्ति की आवश्यकता है। विधुत शक्ति ले जाने वाली दोनों तार की लाइनों का प्रतिरोध \( 0.5\text{ }\Omega \) प्रति किलोमीटर है। कस्बे को उप-स्टेशन में लगे \( 4000-220\text{ V} \) अपचायी ट्रांसफॉर्मर से लाइन द्वारा शक्ति पहुँचती है:
(a) ऊष्मा के रूप में लाइन में होने वाली शक्ति के क्षय का आकलन कीजिए।
(b) संयंत्र से कितनी शक्ति की आपूर्ति की जानी चाहिए, यदि क्षरण द्वारा शक्ति का क्षय नगण्य है।
(c) संयंत्र के उच्चायी ट्रांसफॉर्मर की विशेषता बताइए।

Answer:

दिया गया है: कुल शक्ति \( P = 800\text{ kW} = 800 \times 10^3\text{ W} \)
आपूर्ति वोल्टेज, \( V = 220\text{ V} \) (कस्बे के लिए), उप-स्टेशन ट्रांसफॉर्मर \( 4000\text{ V} - 220\text{ V} \)
दूरी \( d = 15\text{ km} \), दो तारों का प्रतिरोध \( R = (15 + 15) \times 0.5 = 15\text{ }\Omega \)
सब-स्टेशन पर अपचायी ट्रांसफॉर्मर वोल्टेज: \( V_1 = 4000\text{ V}, V_2 = 220\text{ V} \)
लाइन में प्रवाहित rms धारा: \( I = \frac{P}{V_1} = \frac{800 \times 10^3}{4000} = 200\text{ A} \)
(a) लाइन में शक्ति क्षय: \( P_{\text{loss}} = I^2 R = (200)^2 \times 15 = 600 \times 10^3\text{ W} = 600\text{ kW} \)
(b) संयंत्र द्वारा आपूर्ति की जाने वाली कुल शक्ति = उपभोग शक्ति + शक्ति क्षय = \( 800\text{ kW} + 600\text{ kW} = 1400\text{ kW} \)
(c) उच्चायी ट्रांसफॉर्मर वोल्टेज को बढ़ाता है और धारा को कम करता है जिससे संचरण लाइनों में \( I^2 R \) शक्ति क्षय बहुत कम हो जाता है।

मुख्य बिंदु:

• उच्च वोल्टता पर शक्ति संचरण करने से ऊष्मीय क्षय \( I^2 R \) कम होता है।
• कुल प्रतिरोध दोनों आने-जाने वाले तारों का जोड़ होता है।
• कुल शक्ति = लोड शक्ति + लाइन हानि।

आम गलतियाँ:

• केवल एक तरफ की दूरी (15 km) का प्रतिरोध निकाल लेना, जबकि तार आने और जाने दोनों तरफ होते हैं (30 km)।
• धारा निकालते समय गलत वोल्टेज का उपयोग करना।

Exam Tips:

a) शक्ति संचरण के आंकिक प्रश्नों में तारों के कुल प्रतिरोध को \( 2 \times \text{distance} \times \text{resistance per km} \) से निकालें।
b) उच्चायी ट्रांसफॉर्मर के लाभ स्पष्ट रूप से लिखें।
c) इकाई (kW या W) का ध्यान रखें।

 

Question 7.26: ऊपर किए गए अभ्यास को पुनः कीजिए। इसमें पहले के ट्रांसफॉर्मर के स्थान पर \( 40,000 - 220\text{ V} \) का अपचायी ट्रांसफॉर्मर है। पूर्व की भाँति क्षरण के कारण हानियों को नगण्य मानिए, यदिप अब यह सन्निकटन उचित नहीं है क्योंकि इसमें उच्च वोल्टता पर संप्रेषण होता है। अतः समझाइए कि क्यों उच्च वोल्टता संप्रेषण अधिक वरीय है?

Answer:

नया ट्रांसफॉर्मर: \( 40,000\text{ V} - 220\text{ V} \)
शक्ति \( P = 800 \times 10^3\text{ W}, V_1 = 40,000\text{ V} \)
तारों का प्रतिरोध \( R = 15\text{ }\Omega \)
लाइन में धारा: \( I = \frac{P}{V_1} = \frac{800 \times 10^3}{40,000} = 20\text{ A} \)
लाइन में शक्ति क्षय: \( P_{\text{loss}} = I^2 R = (20)^2 \times 15 = 6000\text{ W} = 6\text{ kW} \)
कुल आपूर्ति शक्ति = \( 800\text{ kW} + 6\text{ kW} = 806\text{ kW} \)
शक्ति क्षय प्रतिशत = \( \frac{6}{806} \times 100 = 0.744\% \)
उच्च वोल्टता पर संचरण करने से धारा \( I \) बहुत कम हो जाती है, जिससे \( I^2 R \) हानि नगण्य हो जाती है, इसलिए उच्च वोल्टता संप्रेषण अत्यधिक लाभदायक और वरीय है।

मुख्य बिंदु:

• वोल्टेज बढ़ाने से धारा घटती है और शक्ति क्षय \( I^2 R \) वर्ग के रूप में कम होता है।
• उच्च वोल्टता संप्रेषण से ऊर्जा की बचत होती है।
• ट्रांसफॉर्मर लंबी दूरी के संचरण को किफायती बनाते हैं।

आम गलतियाँ:

• नए वोल्टेज (40,000 V) के साथ धारा की गणना करना भूल जाना।
• प्रतिशत हानि निकालते समय आधार मान गलत लेना।

Exam Tips:

a) तुलनात्मक प्रश्नों में दोनों स्थितियों (कम वोल्टेज बनाम उच्च वोल्टेज) के परिणामों को स्पष्ट दिखाएं।
b) सूत्र \( P_{\text{loss}} = (P/V)^2 R \) का सीधा उपयोग कर सकते हैं।
c) अंत में निष्कर्ष जरूर लिखें कि उच्च वोल्टता क्यों बेहतर है।

 

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