Solutions for Class 12 Physics: Chapter 05 चुंबकत्व एवं द्रव्य
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Practice Class 12 Physics Solutions: Chapter 05 चुंबकत्व एवं द्रव्य
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Question 5.1: भू-चुंबकत्व सम्बन्धी निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(a) एक सदिश को पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए तीन राशियों की आवश्यकता होती है। उन तीन स्वतंत्र राशियों के नाम लिखिए जो परंपरागत रूप से पृथ्वी के चुंबकीय-क्षेत्र को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त होती हैं।
(b) दक्षिण भारत में किसी स्थान पर नति कोण का मान लगभग \( 18^\circ \) है। ब्रिटेन में आप इससे अधिक नति कोण की अपेक्षा करोगे या कम की?
(c) यदि आप ऑस्ट्रेलिया के मेलबॉर्न शहर में भू-चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं का नक्शा बनाएँ तो ये रेखाएँ पृथ्वी के अन्दर जाएँगी या इससे बाहर आएँगी?
(d) एक चुंबकीय सुई जो ऊर्ध्वाधर तल में घूमने के स्वतंत्र है, यदि भू-चुंबकीय उत्तर या दक्षिण ध्रुव पर रखी हो तो यह किस दिशा में संकेत करेगी?
(e) यह माना जाता है कि पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र लगभग एक चुंबकीय ध्रुव के क्षेत्र जैसा है, जो पृथ्वी के केन्द्र पर रखा है और जिसका द्विध्रुव आघूर्ण \( 8 \times 10^{22} \text{ JT}^{-1} \) है। कोई ढंग सुझाइए जिससे इस संख्या के परिमाण की कोटि जाँची जा सके।
(f) भूगर्भशास्त्रियों का मानना है कि मुख्य \( \text{N-S} \) चुंबकीय ध्रुवों के अतिरिक्त, पृथ्वी की सतह पर कई अन्य स्थानीय ध्रुव भी हैं, जो विभिन्न दिशाओं में विन्यस्त हैं। ऐसा होना कैसे सम्भव है?
Answer:
(a) पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को पूर्ण रूप से व्यक्त करने वाली तीन स्वतंत्र राशियाँ हैं:
• चुंबकीय declination (दिकपात कोण)
• चुंबकीय inclination या नति कोण
• पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक
(b) ब्रिटेन में नति कोण का मान अधिक होगा (लगभग \( 70^\circ \)) क्योंकि यह उच्च अक्षांश (उच्च चुंबकीय क्षेत्र के समीप) पर स्थित है।
(c) मेलबॉर्न, ऑस्ट्रेलिया दक्षिणी गोलार्ध में स्थित है, इसलिए यहाँ चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ ज़मीन के अंदर से बाहर आती प्रतीत होंगी।
(d) ध्रुव पर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ पूरी तरह ऊर्ध्वाधर होती हैं, अतः सुई किसी भी दिशा में संकेत कर सकती है क्योंकि क्षैतिज घटक शून्य होता है।
(e) पृथ्वी की त्रिज्या \( R = 6.4 \times 10^6 \text{ m} \) तथा चुंबकीय क्षेत्र \( B = \frac{\mu_0 M}{4\pi R^3} \) सूत्र का उपयोग करके \( M \) का आकलन किया जा सकता है।
(f) पृथ्वी की सतह पर कई स्थानीय खनिज और चट्टानें चुंबकीय होती हैं जो स्थानीय \( \text{N-S} \) द्विध्रुव का निर्माण करती हैं।
मुख्य बिंदु:
• पृथ्वी के चुंबकत्व को परिभाषित करने के लिए तीन तत्वों की आवश्यकता होती है।
• नति कोण ध्रुवों की ओर बढ़ता है।
• स्थानीय चुंबकीय क्षेत्र भूगर्भीय खनिजों के कारण उत्पन्न होते हैं।
आम गलतियाँ:
• नति कोण और दिकपात कोण की परिभाषाओं में भ्रम होना।
• दक्षिणी गोलार्ध में क्षेत्र रेखाओं की दिशा उल्टी समझना।
Exam Tips:
a) तीनों चुंबकीय तत्वों के नाम अच्छी तरह याद रखें।
b) गोलार्ध के अनुसार क्षेत्र रेखाओं की दिशा का ध्यान रखें।
c) उत्तर लिखते समय भागों (a) से (f) का स्पष्ट उल्लेख करें।
Question 5.2: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(a) एक जगह से दूसरी जगह जाने पर पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र बदलता है। क्या यह समय के साथ भी बदलता-है? यदि हाँ, तो कितने अन्तराल पर इसमें पर्याप्त परिवर्तन होते हैं?
(b) पृथ्वी के क्रोड में लोहा है, यह ज्ञात है। फिर भी भूगर्भशास्त्रियों इसको पृथ्वी के चुंबकीय-क्षेत्र का स्रोत नहीं मानते। क्यों?
(c) पृथ्वी के क्रोड के बाहरी चालक भाग में प्रवाहित होने वाली आवेश धाराएँ भू-चुंबकीय क्षेत्र के लिए उत्तरदायी समझी जाती हैं। इन धाराओं को बनाए रखने वाली बैटरी (ऊर्जा स्रोत) क्या हो सकती है?
(d) अपने 4-5 अरब वर्षों के इतिहास में पृथ्वी अपने चुंबकीय-क्षेत्र की दिशा कई बार उलट चुकी होगी। भूगर्भशास्त्री, इतने सुदूर अतीत के पृथ्वी के चुंबकीय-क्षेत्र के बारे में कैसे जान पाते हैं?
(e) बहुत अधिक दूरियों पर (\( 30,000 \text{ km} \) से अधिक) पृथ्वी का चुंबकीय-क्षेत्र अपनी द्विध्रुवीय आकृति से काफी भिन्न हो जाता है। कौन-से कारक इस विकृति के उत्तरदायी हो सकते हैं?
(f) अन्तरतारकीय अंतरिक्ष में \( 10^{-12} \text{ T \) की कोटि का बहुत ही क्षीण चुंबकीय-क्षेत्र होता है। क्या इस क्षीण चुंबकीय-क्षेत्र के भी कुछ प्रभावी परिणाम हो सकते हैं? समझाइए।
Answer:
(a) हाँ, पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र समय के साथ भी बदलता है। इसमें कुछ सौ वर्षों में महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं।
(b) पृथ्वी के क्रोड में उपस्थित लोहा पिघली हुई अवस्था में है जो फेरोमैग्नेटिक (लौहचुंबकीय) नहीं है।
(c) आंतरिक भाग में रेडियोधर्मी ऊर्जा स्रोत संवाहक क्षेत्रों में धाराओं को बनाए रखता है।
(d) चट्टानों के जमने के दौरान कमजोर चुंबकीय क्षेत्र दर्ज हो जाता है, जिसका विश्लेषण करके इतिहास का पता चलता है।
(e) आयनमंडल की उपस्थिति के कारण सौर पवनों द्वारा चुंबकीय क्षेत्र में विकृति आती है।
(f) यह क्षीण क्षेत्र अंतरिक्ष में गति करने वाले आवेशित कणों के गमन पथ को मोड़ सकता है।
मुख्य बिंदु:
• भू-चुंबकत्व का मुख्य स्रोत क्रोड में प्रवाहित धाराएँ हैं।
• पुराचुम्बکत्व (Paleomagnetism) से प्राचीन इतिहास का पता चलता है।
• सौर पवनें चुंबकीय क्षेत्र को प्रभावित करती हैं।
आम गलतियाँ:
• क्रोड के लोहे को स्थायी चुंबक मान लेना।
• समय के साथ होने वाले परिवर्तनों के पैमानों को न समझना।
Exam Tips:
a) तार्किक और वैचारिक प्रश्नों के उत्तर संक्षिप्त और स्पष्ट लिखें।
b) भू-चुंबकत्व के डायनेमो प्रभाव को समझें।
c) वैज्ञानिक शब्दावली जैसे 'आयनमंडल' और 'पुराचुम्बकत्व' का प्रयोग करें।
Question 5.3: एक छोटा छड़ चुंबक जो एकसमान बाह्य चुंबकीय-क्षेत्र \( 0.25 \text{ T} \) के साथ \( 30^\circ \) का कोण बनाता है, पर \( 4.5 \times 10^{-2} \text{ J} \) का बल आघूर्ण लगता है। चुंबक के चुंबकीय-आघूर्ण का परिमाण क्या है?
Answer:
दिया गया है:
चुंबकीय क्षेत्र, \( B = 0.25 \text{ T} \)
बल आघूर्ण, \( \tau = 4.5 \times 10^{-2} \text{ J} \)
कोण, \( \theta = 30^\circ \)
बल आघूर्ण का सूत्र है:
\( \tau = M B \sin\theta \)
इसलिए, चुंबकीय आघूर्ण \( M \) होगा:
\( M = \frac{\tau}{B \sin\theta} \)
\( M = \frac{4.5 \times 10^{-2}}{0.25 \times \sin 30^\circ} \)
\( M = \frac{4.5 \times 10^{-2}}{0.25 \times 0.5} \)
\( M = 0.36 \text{ JT}^{-1} \)
मुख्य बिंदु:
• बल आघूर्ण का सूत्र \( \tau = MB \sin\theta \) है।
• चुंबकीय आघूर्ण का मात्रक \( \text{JT}^{-1} \) या \( \text{Am}^2 \) होता है।
• \( \sin 30^\circ \) का मान \( 0.5 \) होता है।
आम गलतियाँ:
• \( \sin\theta \) के स्थान पर सीधे \( \cos\theta \) का प्रयोग करना।
• मान रखते समय घातों (powers) में गलती करना।
Exam Tips:
a) हमेशा मानों को SI मात्रक में लिखकर हल करें।
b) अंतिम उत्तर के साथ उचित मात्रक अवश्य लिखें।
c) गणना की जाँच दो बार करें।
Question 5.4: चुंबकीय-आघूर्ण \( m = 0.32 \text{ JT}^{-1} \) वाला एक छोटा छड़ चुंबक, \( 0.15 \text{ T} \) के एकसमान बाह्य चुंबकीय-क्षेत्र में रखा है। यदि यह छड़ क्षेत्र के तल में घूमने के लिए स्वतन्त्र हो तो क्षेत्र के किस विन्यास में यह (i) स्थायी संतुलन और (ii) अस्थायी संतुलन में होगा? प्रत्येक स्थिति में चुंबक की क्षैतिज ऊर्जा का मान बताइए।
Answer:
दिया गया है:
चुंबकीय आघूर्ण, \( M = 0.32 \text{ JT}^{-1} \)
चुंबकीय क्षेत्र, \( B = 0.15 \text{ T} \)
(i) स्थायी संतुलन के लिए:
छड़ चुंबक को चुंबकीय क्षेत्र के साथ संरेखित किया जाता है, अतः \( \theta = 0^\circ \)
स्थितिज ऊर्जा \( U = -M B \cos\theta \)
\( U = -0.32 \times 0.15 \times \cos 0^\circ \)
\( U = -4.8 \times 10^{-2} \text{ J} \)
(ii) अस्थायी संतुलन के लिए:
छड़ चुंबक, क्षेत्र के विपरीत \( 180^\circ \) पर उन्मुख है, अतः \( \theta = 180^\circ \)
स्थितिज ऊर्जा \( U = -M B \cos 180^\circ \)
\( U = -0.32 \times 0.15 \times \cos 180^\circ \)
\( U = 4.8 \times 10^{-2} \text{ J} \)
मुख्य बिंदु:
• स्थितिज ऊर्जा का सूत्र \( U = -MB \cos\theta \) होता है।
• स्थायी संतुलन के लिए \( \theta = 0^\circ \) और ऊर्जा न्यूनतम होती है।
• अस्थायी संतुलन के लिए \( \theta = 180^\circ \) और ऊर्जा अधिकतम होती है।
आम गलतियाँ:
• \( 0^\circ \) और \( 180^\circ \) पर cos के मान में चिन्ह की गलती करना।
• ऊर्जा के ऋनात्मक और धनात्मक मानों में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) स्थायी और अस्थायी संतुलन की स्थितियों को स्पष्ट रूप से अलग दिखाएं।
b) ऊर्जा के मात्रक (जूल) को स्पष्ट लिखें।
c) सूत्र लिखते समय ऋण चिन्ह (-) न भूलें।
Question 5.5: एक परिनालिका में पास-पास लपेटे गए \( 800 \) फेरे हैं तथा इसकी अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \( 25 \times 10^{-4} \text{ m}^2 \) है और इसमें \( 3.0 \text{ A} \) धारा प्रवाहित हो रही है। समझाइए कि किस अर्थ में यह परिनालिका एक छड़ चुंबक की तरह व्यवहार करती है। इसके साथ जुड़ा हुआ चुंबकीय-आघूर्ण कितना है?
Answer:
दिया गया है:
फेरों की संख्या, \( n = 800 \)
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल, \( A = 25 \times 10^{-4} \text{ m}^2 \)
धारा, \( I = 3.0 \text{ A} \)
धारायुक्त परिनालिका एक छड़ चुंबक के रूप में व्यवहार करती है क्योंकि इसके दोनों सिरों पर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ उत्तर और दक्षिण ध्रुव की तरह उत्पन्न होती हैं।
चुंबकीय आघूर्ण का सूत्र है:
\( M = n I A \)
मान रखने पर:
\( M = 800 \times 3.0 \times 25 \times 10^{-4} \)
\( M = 0.6 \text{ JT}^{-1} \)
मुख्य बिंदु:
• परिनालिका का चुंबकीय आघूर्ण \( M = nIA \) होता है।
• धारावाही परिनालिका एक समान छड़ चुंबक के तुल्य होती है।
• क्षेत्रफल और फेरों की संख्या सीधे आघूर्ण को बढ़ाती है।
आम गलतियाँ:
• क्षेत्रफल के मात्रक को ठीक से न बदलना।
• फेरों की कुल संख्या \( n \) से गुणा करना भूल जाना।
Exam Tips:
a) सैद्धांतिक भाग में परिनालिका और छड़ चुंबक की समानता का कारण लिखें।
b) गणना में वैज्ञानिक संकेतन (scientific notation) का सावधानी से प्रयोग करें।
c) उत्तर को उचित मात्रक के साथ समाप्त करें।
Question 5.6: यदि प्रश्न 5.5 में बताई गई परिनालिका ऊर्ध्वाधर दिशा के परितः घूमने के लिए स्वतन्त्र हो और इस पर क्षैतिज दिशा में एक \( 0.25 \text{ T} \) का एकसमान चुंबकीय-क्षेत्र लगाया जाए, तो इस परिनालिका पर लगने वाले बल आघूर्ण का परिमाण उस समय क्या होगा, जब इसकी अक्ष आरोपित क्षेत्र की दिशा से \( 30^\circ \) का कोण बना रही हो?
Answer:
दिया गया है:
चुंबकीय क्षेत्र, \( B = 0.25 \text{ T} \)
चुंबकीय आघूर्ण, \( M = 0.6 \text{ JT}^{-1} \) (प्रश्न 5.5 से)
कोण, \( \theta = 30^\circ \)
बल आघूर्ण का सूत्र है:
\( \tau = M B \sin\theta \)
मान रखने पर:
\( \tau = 0.6 \times 0.25 \times \sin 30^\circ \)
\( \tau = 0.6 \times 0.25 \times 0.5 \)
\( \tau = 7.5 \times 10^{-2} \text{ Nm} \)
मुख्य बिंदु:
• बल आघूर्ण के लिए \( \tau = MB \sin\theta \) का प्रयोग करें।
• \( M \) का मान पिछले प्रश्न से सीधे लिया गया है।
• बल आघूर्ण का मात्रक न्यूटन-मीटर (\( \text{Nm} \)) है।
आम गलतियाँ:
• \( \sin 30^\circ \) के बजाय \( \cos 30^\circ \) लिख देना।
• पिछले प्रश्न के \( M \) के मान को गलत रखना।
Exam Tips:
a) पिछले प्रश्न के परिणामों का उपयोग करते समय संदर्भ दें।
b) त्रिकोणमितीय मानों को सही-सही प्रतिस्थापित करें।
c) मात्रक लिखना न भूलें।
Question 5.7: एक छड़ चुंबक जिसका चुंबकीय-आघूर्ण \( 1.5 \text{ JT}^{-1} \) है, 0.22 T के एकसमान चुंबकीय-क्षेत्र के अनुदिश रखा है।
(a) एक बाह्य बल आघूर्ण कितना कार्य करेगा यदि यह चुंबक को चुंबकीय क्षेत्र के (i) लंबवत (ii) विपरीत दिशा में संरксиत करने के लिए घुमा दे।
(b) स्थिति (i) एवं (ii) में चुंबक पर कितना बल आघूर्ण होता है?
Answer:
दिया गया है:
चुंबकीय आघूर्ण, \( M = 1.5 \text{ JT}^{-1} \)
चुंबकीय क्षेत्र, \( B = 0.22 \text{ T} \)
(a) (i) क्षेत्र के लंबवत करने के लिए किया गया कार्य:
\( \theta_1 = 0^\circ, \theta_2 = 90^\circ \)
\( W = -MB (\cos\theta_2 - \cos\theta_1) \)
\( W = -1.5 \times 0.22 (\cos 90^\circ - \cos 0^\circ) \)
\( W = -0.33 \times (0 - 1) = 0.33 \text{ J} \)
(a) (ii) विपरीत दिशा में करने के लिए किया गया कार्य:
\( \theta_1 = 0^\circ, \theta_2 = 180^\circ \)
\( W = -1.5 \times 0.22 (\cos 180^\circ - \cos 0^\circ) \)
\( W = -0.33 \times (-1 - 1) = 0.66 \text{ J} \)
(b) बल आघूर्ण:
(i) स्थिति के लिए (\( \theta = 90^\circ \)):
\( \tau = MB \sin 90^\circ = 1.5 \times 0.22 \times 1 = 0.33 \text{ Nm} \)
(ii) स्थिति के लिए (\( \theta = 180^\circ \)):
\( \tau = MB \sin 180^\circ = 1.5 \times 0.22 \times 0 = 0 \text{ Nm} \)
मुख्य बिंदु:
• कार्य का सूत्र \( W = -MB(\cos\theta_2 - \cos\theta_1) \) होता है।
• बल आघूर्ण का सूत्र \( \tau = MB \sin\theta \) है।
• दोनों स्थितियों के कोणों को सही से पहचानना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• कार्य के सूत्र में ऋण चिन्ह लगाना भूल जाना।
• \( 180^\circ \) पर बल आघूर्ण को शून्य न समझकर कुछ और लिख देना।
Exam Tips:
a) भागों (a) और (b) तथा उनके उप-भागों को स्पष्ट रूप से हल करें।
b) त्रिकोणमितीय मानों (जैसे \( \cos 90^\circ = 0 \)) को ध्यान में रखें।
c) कार्य का मात्रक जूल और बल आघूर्ण का न्यूटन-मीटर लिखें।
Question 5.8: एक परिनालिका जिसमें पास-पास 2000 फेरे लपेटे गए हैं तथा जिसके अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \( 1.6 \times 10^{-4} \text{ m}^2 \) है और जिसमें \( 4.0 \text{ A} \) की धारा प्रवाहित हो रही है, इसके केन्द्र से इस प्रकार लटकाई गई है कि यह एक क्षैतिज तल में घूम सके।
(a) परिनालिका के चुंबकीय-आघूर्ण का मान क्या है?
(b) परिनालिका पर लगने वाला बल एवं बल आघूर्ण क्या है, यदि इस पर, इसकी अक्ष से \( 30^\circ \) का कोण बनाता हुआ \( 7.5 \times 10^{-2} \text{ T} \) का एकसमान क्षैतिज चुंबकीय-क्षेत्र लगाया जाए?
Answer:
दिया गया है:
फेरों की संख्या, \( n = 2000 \)
क्षेत्रफल, \( A = 1.6 \times 10^{-4} \text{ m}^2 \)
धारा, \( I = 4.0 \text{ A} \)
(a) चुंबकीय आघूर्ण:
\( M = n I A \)
\( M = 2000 \times 4.0 \times 1.6 \times 10^{-4} \)
\( M = 1.28 \text{ JT}^{-1} \)
(b) चुंबकीय क्षेत्र, \( B = 7.5 \times 10^{-2} \text{ T} \), \( \theta = 30^\circ \)
बल: चूँकि चुंबकीय क्षेत्र एकसमान है, अतः परिनालिका पर कुल बल शून्य होगा।
बल आघूर्ण:
\( \tau = M B \sin\theta \)
\( \tau = 1.28 \times 7.5 \times 10^{-2} \times \sin 30^\circ \)
\( \tau = 1.28 \times 7.5 \times 10^{-2} \times 0.5 \)
\( \tau = 4.8 \times 10^{-2} \text{ Nm} \)
मुख्य बिंदु:
• एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में रखे चुंबक पर कुल बल शून्य होता है।
• चुंबकीय आघूर्ण \( M = nIA \) से ज्ञात किया जाता है।
• बल आघूर्ण \( \tau = MB \sin\theta \) से निकाला जाता है।
आम गलतियाँ:
• एकसमान क्षेत्र में भी बल को शून्य न मानकर कुछ गणना करना।
• मात्रकों के रूपांतरण में गलती करना।
Exam Tips:
a) यह स्पष्ट रूप से लिखें कि एकसमान क्षेत्र में नेट बल शून्य होता है।
b) गणना के चरणों को साफ-सुथरा लिखें।
c) अंतिम उत्तर में मात्रक लिखना न भूलें।
Question 5.9: एक वृत्ताकार कुंडली जिसमें 16 फेरे हैं, जिसकी त्रिज्या 10 सेमी है और जिसमें 0.75 A धारा प्रवाहित हो रही है, इस प्रकार रखी है कि इसका तल, \( 5.0 \times 10^{-2} \text{ T} \) परिमाण वाले बाह्य क्षेत्र के लम्बवत है। कुंडली, चुंबकीय-क्षेत्र के लम्बवत और इसके अपने तल में स्थित एक अक्ष के चारों तरफ घूमने के लिए स्वतन्त्र है। यदि कुंडली को जरा-सा घुमाकर छोड़ दिया जाए तो यह अपनी स्थायी संतुलनवस्था के इधर-उधर \( 2.0 \text{ s}^{-1} \) की आवृत्ति से दोलन करती है। कुंडली का अपने घूर्णन अक्ष के परितः जड़त्व-आघूर्ण क्या है?
Answer:
दिया गया है:
फेरों की संख्या, \( N = 16 \)
त्रिज्या, \( r = 10 \text{ cm} = 0.1 \text{ m} \)
धारा, \( I = 0.75 \text{ A} \)
चुंबकीय क्षेत्र, \( B = 5.0 \times 10^{-2} \text{ T} \)
आवृत्ति, \( \nu = 2.0 \text{ s}^{-1} \)
क्षेत्रफल, \( A = \pi r^2 = \pi \times (0.1)^2 = 0.0314 \text{ m}^2 \)
चुंबकीय आघूर्ण \( M = N I A = 16 \times 0.75 \times \pi \times (0.1)^2 = 0.377 \text{ JT}^{-1} \)
दोलन की आवृत्ति का सूत्र है:
\( \nu = \frac{1}{2\pi} \sqrt{\frac{MB}{I_{\text{inertia}}}} \)
जड़त्व आघूर्ण \( I_{\text{inertia}} \) के लिए हल करने पर:
\( I_{\text{inertia}} = \frac{MB}{4\pi^2\nu^2} \)
\( I_{\text{inertia}} = \frac{0.377 \times 5.0 \times 10^{-2}}{4 \times \pi^2 \times (2.0)^2} \)
\( I_{\text{inertia}} = 1.19 \times 10^{-4} \text{ kg m}^2 \)
मुख्य बिंदु:
• चुंबकीय द्विध्रुव के दोलन की आवृत्ति \( \nu = \frac{1}{2\pi}\sqrt{\frac{MB}{I}} \) होती है।
• यहाँ \( I \) जड़त्व आघूर्ण को दर्शाता है (धारा नहीं)।
• \( M = NIA \) से चुंबकीय आघूर्ण निकाला जाता है।
आम गलतियाँ:
• धारा \( I \) और जड़त्व आघूर्ण के संकेत में भ्रमित होना।
• त्रिज्या को सेंटीमीटर से मीटर में बदलना भूल जाना।
Exam Tips:
a) प्रतीकों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें ताकि जड़त्व आघूर्ण और धारा में अंतर दिखे।
b) सूत्र को जड़त्व आघूर्ण के पदों में व्यवस्थित करें।
c) गणना में \( \pi \) के मान का सही उपयोग करें।
Question 5.10: एक चुंबकीय सुई चुंबकीय याम्योत्तर के समान्तर एक ऊर्ध्वाधर तल में घूमने के लिए स्वतन्त्र है। इसका उत्तरी ध्रुव क्षैतिज से \( 22^\circ \) के कोण पर नीचे की ओर झुका है। इसे स्थान पर क्षैतिज अवयव का मान \( 0.35 \text{ G} \) है। इस स्थान पर पृथ्वी के चुंबकीय-क्षेत्र का परिमाण ज्ञात कीजिए।
Answer:
दिया गया है:
क्षैतिज घटक, \( B_H = 0.35 \text{ G} \)
नति कोण (Dip angle), \( \delta = 22^\circ \)
हम जानते हैं कि क्षैतिज घटक और कुल चुंबकीय क्षेत्र \( B \) में संबंध होता है:
\( B_H = B \cos\delta \)
कुल चुंबकीय क्षेत्र \( B \) का मान होगा:
\( B = \frac{B_H}{\cos\delta} \)
\( B = \frac{0.35}{\cos 22^\circ} \)
\( B = \frac{0.35}{0.9272} \)
\( B = 0.377 \text{ G} \)
मुख्य बिंदु:
• \( B_H = B \cos\delta \) संबंध का प्रयोग किया जाता है।
• यहाँ \( \delta \) नति कोण है।
• चुंबकीय क्षेत्र का मात्रक गॉस (G) या टेस्ला होता है।
आम गलतियाँ:
• \( \cos \) के स्थान पर \( \sin \) का प्रयोग करना।
• \( \cos 22^\circ \) का मान गलत रखना।
Exam Tips:
a) पृथ्वी के चुंबकत्व के घटकों के सूत्रों को अच्छी तरह याद रखें।
b) त्रिकोणमितीय सारणी या कैलकुलेटर के मानों का सही प्रयोग करें।
c) उत्तर में मात्रक गॉस (G) लिखना न भूलें।
Question 5.11: दक्षिण अफ्रीका में किसी स्थान पर एक चुंबकीय सुई भौगोलिक उत्तर से \( 12^\circ \) पश्चिम की ओर संकेत करती है। चुंबकीय याम्योत्तर में संरेखित नति-वृत्त की चुंबकीय सुई का उत्तरी ध्रुव क्षैतिज से \( 60^\circ \) उत्तर की ओर संकेत करता है। पृथ्वी के चुंबकीय-क्षेत्र का क्षैतिज अवयव मापने पर \( 0.16 \text{ G} \) पाया जाता है। इस स्थान पर पृथ्वी का परिमाण और दिशा बताइए।
Answer:
दिया गया है:
दिकपात कोण, \( \theta = 12^\circ \)
नति कोण, \( \delta = 60^\circ \)
क्षैतिज घटक, \( B_H = 0.16 \text{ G} \)
हम जानते हैं कि:
\( B_H = B \cos\delta \)
कुल चुंबकीय क्षेत्र \( B \) होगा:
\( B = \frac{B_H}{\cos\delta} \)
\( B = \frac{0.16}{\cos 60^\circ} \)
\( B = \frac{0.16}{0.5} = 0.32 \text{ G} \)
दिशा: पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र ऊर्ध्वाधर तल में भौगोलिक meridian से \( 12^\circ \) पश्चिम की ओर तथा क्षैतिज से \( 60^\circ \) ऊपर की ओर है।
मुख्य बिंदु:
• कुल चुंबकीय क्षेत्र और क्षैतिज घटक का संबंध \( B = \frac{B_H}{\cos\delta} \) है।
• \( \cos 60^\circ = 0.5 \) होता है।
• पृथ्वी के क्षेत्र की पूर्ण जानकारी के लिए परिमाण और दिशा दोनों आवश्यक हैं।
आम गलतियाँ:
• दिशा के विवरण में भौगोलिक और चुंबकीय याम्योत्तर में भ्रमित होना।
• \( \cos 60^\circ \) का मान गलत लिखना।
Exam Tips:
a) परिमाण निकालने के बाद दिशा को शब्दों में स्पष्ट लिखें।
b) दिए गए मानों को सूत्र में सावधानी से रखें।
c) मात्रक गॉस (G) लिखना न भूलें।
Question 5.12: किसी छोटे छड़ चुंबक का चुंबकीय-आघूर्ण \( 0.48 \text{ JT}^{-1} \) है। चुंबक के केन्द्र से \( 10 \text{ cm} \) की दूरी पर स्थित किसी बिन्दु पर इसके चुंबकीय-क्षेत्र का परिमाण एवं दिशा बताइए यदि यह बिन्दु
(i) चुंबक के अक्ष पर स्थित हो
(ii) चुंबक के अभिलंब समद्विभाजक पर स्थित हो।
Answer:
दिया गया है:
चुंबकीय आघूर्ण, \( M = 0.48 \text{ JT}^{-1} \)
दूरी, \( d = 10 \text{ cm} = 0.1 \text{ m} \)
(i) अक्षीय स्थिति के लिए चुंबकीय क्षेत्र:
\( B = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{d^3} \)
\( B = \frac{10^{-7} \times 2 \times 0.48}{(0.1)^3} \)
\( B = \frac{0.96 \times 10^{-7}}{10^{-3}} = 0.96 \times 10^{-4} \text{ T} = 0.96 \text{ G} \)
दिशा: दक्षिण से उत्तर (N-S) की ओर।
(ii) निरक्षीय स्थिति (अभिलंब समद्विभाजक) के लिए:
\( B = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{M}{d^3} \)
\( B = \frac{10^{-7} \times 0.48}{(0.1)^3} \)
\( B = \frac{0.48 \times 10^{-7}}{10^{-3}} = 0.48 \times 10^{-4} \text{ T} = 0.48 \text{ G} \)
दिशा: उत्तर से दक्षिण (N-S) की ओर।
मुख्य बिंदु:
• अक्षीय स्थिति में क्षेत्र निरक्षीय स्थिति का दोगुना होता है।
• \( \frac{\mu_0}{4\pi} = 10^{-7} \text{ T m A}^{-1} \) होता है।
• \( 1 \text{ T} = 10^4 \text{ G} \)
आम गलतियाँ:
• अक्षीय और निरक्षीय सूत्रों में \( 2 \) के गुणक को भूल जाना।
• दूरी का घन (\( d^3 \)) निकालते समय गलती करना।
Exam Tips:
a) दोनों स्थितियों के अलग-अलग सूत्र स्पष्ट रूप से लिखें।
b) टेस्ला को गॉस में बदलना न भूलें।
c) दिशा का उल्लेख अवश्य करें।
Question 5.13: क्षैतिज तल में रखे एक छोटे छड़ चुंबक का अक्ष, चुंबकीय उत्तर-दक्षिण दिशा के अनुदिश है। संतुलन बिन्दु चुंबक के अक्ष पर, इसके केन्द्र से \( 14 \text{ सेमी} \) दूर स्थित है। इस स्थान पर पृथ्वी का चुंबकीय-क्षेत्र \( 0.36 \text{ G} \) एवं नति कोण शून्य है। चुंबक के अभिलम्ब समद्विभाजक पर इसके केन्द्र से उतनी ही दूर (\( 14 \text{ सेमी} \)) स्थित किसी बिन्दु पर परिणामी चुंबकीय-क्षेत्र क्या होगा?
Answer:
दिया गया है:
पृथ्वी का क्षैतिज चुंबकीय क्षेत्र, \( H = 0.36 \text{ G} \)
दूरी, \( d = 14 \text{ cm} \)
अक्षीय स्थिति में उदासीन बिंदु पर चुंबक का क्षेत्र पृथ्वी के क्षेत्र के बराबर होता है:
\( B_1 = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{d^3} = H \) ... (i)
निरक्षीय स्थिति में चुंबकीय क्षेत्र होगा:
\( B_2 = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{M}{d^3} = \frac{H}{2} \) [समीकरण (i) से]
कुल चुंबकीय क्षेत्र (निरक्षीय स्थिति पर):
\( B_{\text{total}} = H + B_2 = H + \frac{H}{2} \)
\( B_{\text{total}} = 0.36 + \frac{0.36}{2} \)
\( B_{\text{total}} = 0.36 + 0.18 = 0.54 \text{ G} \)
मुख्य बिंदु:
• उदासीन बिंदु पर चुंबक का क्षेत्र पृथ्वी के क्षैतिज घटक के बराबर होता है।
• निरक्षीय क्षेत्र अक्षीय क्षेत्र का आधा होता है।
• दोनों क्षेत्रों की दिशाएँ समान होने पर वे जुड़ जाते हैं।
आम गलतियाँ:
• क्षेत्र जुड़ेंगे या घटेंगे, यह निर्धारित करने में गलती करना।
• \( B_2 \) का मान सीधे \( H \) मान लेना।
Exam Tips:
a) समीकरणों का उपयोग करके संक्षिप्त हल प्रस्तुत करें।
b) उदासीन बिंदु की शर्त को स्पष्ट लिखें।
c) अंतिम परिणाम गॉस (G) में दें।
Question 5.14: यदि प्रश्न 5.13 में वर्णित चुंबक को \( 180^\circ \) से घुमा दिया जाए तो संतुलन बिन्दुओं की नई स्थिति क्या होगी?
Answer:
दिया गया है:
जब चुंबक को \( 180^\circ \) से घुमा दिया जाता है, तो इसके ध्रुव उलट जाते हैं। अब उदासीन बिंदु चुंबक के अभिलंब समद्विभाजक (निरक्षीय रेखा) पर स्थित होंगे।
निरक्षीय स्थिति के लिए सूत्र:
\( B_2 = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{M}{(d_2)^3} = H \) ... (2)
समीकरण (1) और (2) से:
\( \frac{2}{(d_1)^3} = \frac{1}{(d_2)^3} \)
\( (d_2)^3 = \frac{(d_1)^3}{2} \)
\( d_2 = \frac{d_1}{(2)^{1/3}} \)
मान रखने पर:
\( d_2 = \frac{14}{(2)^{1/3}} = \frac{14}{1.2599} = 11.1 \text{ cm} \)
अतः नई स्थिति अभिलंब समद्विभाजक पर \( 11.1 \text{ cm} \) पर होगी।
मुख्य बिंदु:
• चुंबक को \( 180^\circ \) घुमाने पर उदासीन बिंदु अक्ष से निरक्ष पर चले जाते हैं।
• दूरी का संबंध \( d_2 = \frac{d_1}{(2)^{1/3}} \) होता है।
• घनमूल (cube root) की गणना सावधानी से करें।
आम गलतियाँ:
• उदासीन बिंदु की स्थिति को गलत पहचानना।
• \( (2)^{1/3} \) का मान गलत रखना।
Exam Tips:
a) पिछले प्रश्न के परिणामों का संदर्भ दें।
b) ज्यामितीय स्थितियों (अक्षीय से निरक्षीय) के परिवर्तन को समझाएं।
c) सेंटीमीटर में सही उत्तर प्राप्त करें।
Question 5.15: एक छोटा छड़ चुंबक जिसका चुंबकीय-आघूर्ण \( 5.25 \times 10^{-2} \text{ JT}^{-1} \) है, इस प्रकार रखा है कि इसका अक्ष पृथ्वी के क्षेत्र की दिशा के लंबवत है। चुंबक के केन्द्र से कितनी दूरी पर, परिणामी क्षेत्र पृथ्वी के क्षेत्र की दिशा से \( 45^\circ \) का कोण बनाएगा, यदि हम (a) अभिलंब समद्विभाजक पर देखें, (b) अक्ष पर देखें। इस स्थान पर पृथ्वी का परिमाण 0.42 G है। प्रयुक्त दूरियों की तुलना में चुंबक की लंबाई की उपेक्षा कर सकते हैं।
Answer:
दिया गया है:
चुंबकीय आघूर्ण, \( M = 5.25 \times 10^{-2} \text{ JT}^{-1} \)
पृथ्वी का क्षेत्र, \( H = 0.42 \text{ G} = 0.42 \times 10^{-4} \text{ T} \)
कोण, \( \theta = 45^\circ \)
(a) अभिलंब समद्विभाजक पर दूरी \( R \):
\( B = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{M}{R^3} = H \tan 45^\circ = H \)
\( R^3 = \frac{\mu_0 M}{4\pi H} \)
\( R^3 = \frac{10^{-7} \times 5.25 \times 10^{-2}}{0.42 \times 10^{-4}} = 12.5 \times 10^{-5} = 0.125 \times 10^{-3} \)
\( R = 0.05 \text{ m} = 5 \text{ cm} \)
(b) अक्ष पर दूरी \( R' \):
\( B' = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2M}{(R')^3} = H \)
\( (R')^3 = \frac{2 \times 10^{-7} \times 5.25 \times 10^{-2}}{0.42 \times 10^{-4}} = 25 \times 10^{-5} \)
\( R' = 0.063 \text{ m} = 6.3 \text{ cm} \)
मुख्य बिंदु:
• परिणामी क्षेत्र का कोण \( \tan\theta = \frac{B}{H} \) से ज्ञात होता है।
• \( 45^\circ \) पर \( B = H \) होता है।
• अक्षीय क्षेत्र निरक्षीय क्षेत्र का दोगुना होता है।
आम गलतियाँ:
• गॉस को टेस्ला में बदलते समय घातों की गलती करना।
• घनमूल निकालते समय अशुद्धि करना।
Exam Tips:
a) दोनों भागों (a) और (b) को अलग-अलग स्पष्ट हल करें।
b) क्षेत्र के घटकों के संयोजन का सही सूत्र लिखें।
c) दूरी को सेंटीमीटर में बदलकर लिखें।
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