NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 05 Magnetism and Matter (चुंबकत्व एवं द्रव्य) Additional Questions in Hindi

Official NCERT Solutions for Class 12 Physics: Chapter 05 चुंबकत्व एवं द्रव्य

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Chapter-wise Solutions for Physics: Chapter 05 चुंबकत्व एवं द्रव्य

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Question 5.16: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(a) ठण्डा करने पर किसी अनुचुम्बकीय पदार्थ का नमूना अधिक चुम्बकन क्यों प्रदर्शित करता है? (एक ही चुम्बकीय क्षेत्र के लिए)
(b) अनुचुम्बकत्व के विपरीत, प्रतिचुम्बकत्व पर ताप का प्रभाव लगभग नहीं होता। क्यों?
(c) यदि एक टॉरॉइड में बिस्कुथ का क्रोड लगाया जाए तो इसके अन्दर चुम्बकीय-क्षेत्र उस स्थिति की तुलना में (किंचित) कम होगा या (किंचित) ज्यादा होगा, जबकि क्रोड खाली हो?
(d) क्या किसी लौह चुम्बकीय पदार्थ की चुम्बकशीलता चुम्बकीय-क्षेत्र पर निर्भर करती है? यदि हाँ, तो उच्च चुम्बकीय-क्षेत्रों के लिए इसका मान कम होगा या अधिक?
(e) किसी लौह चुम्बक की सतह के प्रत्येक बिन्दु पर चुम्बकीय-क्षेत्र रेखाएँ सदैव लम्बवत होती हैं (यह तथ्य उन स्थिरविद्युत क्षेत्र रेखाओं के सदृश है जो कि चालक की सतह के प्रत्येक बिन्दु पर लम्बवत होती हैं)। क्यों?
(f) क्या किसी अनुचुम्बकीय नमूने का अधिकतम सम्भव चुम्बकन, लौह चुम्बक के चुम्बकन के परिमाण की कोटि का होगा?

Answer:

(a) अणुओं की यादृच्छिक तापीय गति के कारण द्विध्रुवों के संरेखण उच्च तापमान पर बाधित हो जाते हैं। ठंडा होने पर, यह व्यवधान कम हो जाता है। अत: ठंडा होने पर एक अनुचुम्बकीय नमूना अधिक से अधिक चुम्बकन प्रदर्शित करता है।
(b) प्रतिचुम्बकीय पदार्थ में प्रेरित द्विध्रुवीय आघूर्ण हमेशा चुम्बकीय क्षेत्र के विपरीत होता है। इसलिए, परमाणुओ की आंतरिक गति (जो तापमान से संबंधित है) किसी सामग्री के प्रति चुम्बकत्व को प्रभावित नहीं करती है।
(c) बिस्मथ एक प्रति चुम्बकीय पदार्थ है। इसलिए, एक एक टॉरॉइड बिस्मथ क्रोड के साथ में एक चुम्बकीय क्षेत्र होता है जो एक टॉरॉइड से थोड़ा अधिक होता है जिसका क्रोड खाली होता है।
(d) लौह-चुम्बकीय सामग्रियों की पारगम्यता लगाने वाले चुम्बकीय क्षेत्र से स्वतंत्र नहीं है। यह कम क्षेत्र के लिए अधिक है और इसके विपरीत है।
(e) एक लौह-चुम्बकीय सामग्री की पारगम्यता एक से कम नहीं है। यह हमेशा एक से अधिक होता है। इसलिए, हर बिंदु पर ऐसी सामग्रियों की सतह पर चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएं हमेशा लगभग लम्बवत होती हैं।
(f) एक अनुचुम्बकीय नमूना का अधिकतम संभव चुम्बकन परिमाण के उसी क्रम का हो सकता है, जैसा कि लौह-चुम्बकीय के चुम्बकन से होता है। इसके संतुप्ति के लिए उच्च चुम्बकीय क्षेत्र की आवश्यकता होती है।

मुख्य बिंदु:

• तापीय विक्षोभ तापमान बढ़ने पर चुम्बकन को कम करता है।
• प्रतिचुम्बकत्व परमाणु की आंतरिक गतियों पर निर्भर नहीं करता।
• बिस्मथ एक प्रतिचुम्बकीय पदार्थ है।

आम गलतियाँ:

• प्रतिचुम्बकत्व और अनुचुम्बकत्व के प्रभावों में भ्रमित होना।
• तापमान के प्रभाव को गलत समझना।
• क्रोड बदलने पर क्षेत्र में परिवर्तन की दिशा उल्टी लिखना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक उप-भाग (a से f) का उत्तर स्पष्ट और संक्षिप्त दें।
b) पदार्थों के चुंबकीय गुणों (अनु, प्रति, लौह) के मूल अंतर को याद रखें।
c) वैज्ञानिक शब्दावली जैसे 'तापीय विक्षोभ' और 'पारगम्यता' का सही प्रयोग करें।

 

Question 5.17: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(a) लौह चुम्बकीय पदार्थ के चुंबकन वक्र की अनुत्क्रमणीयता, डोमेनो के आधार पर गुणात्मक दृष्टिकोण से समझाइए।
(b) नर्म लोहे के एक टुकड़े के शैथिल्य लूप का क्षेत्रफल, कार्बन-स्टील के टुकड़े के शैथिल्य लूप के क्षेत्रफल से कम होता है। यदि पदार्थ को बार-बार चुंबकन चक्र से गुजारा जाए तो कौन-सा टुकड़ा अधिक ऊष्मा ऊर्जा का क्षय करेगा?
(c) लौह चुम्बक जैसा शैथिल्य लूप प्रदर्शित करने वाली कोई प्रणाली स्मृति संग्रहण की युक्ति है। इस कथन की व्याख्या कीजिए।
(d) कैसेट के चुम्बकीय फीतों पर परत चढ़ाने के लिए या आधुनिक कम्प्यूटर में स्मृति संग्रहण के लिए, किस तरह के लौह चुम्बकीय पदार्थों का इस्तेमाल होता है?
(e) किसी स्थान को चुम्बकीय-क्षेत्र से परिरक्षित करना है। कोई विधि सुझाइए।

Answer:

(a) दिए गए वक्र से यह देखा जा सकता है कि बाह्य क्षेत्र हटाए जाने पर भी चुंबकत्व बना रहता है। यह एक लौह-चुम्बक की अपरिवर्तनीयता को दर्शाता है।
(b) विधितत ऊष्मा ऊर्जा एक शैथिल्य वक्रके क्षेत्र के सीधे आनुपातिक होती है। कार्बन स्टील के टुकड़े में अधिक शैथिल्य वक्रक्षेत्र होता है। इसलिए, यह अधिक ऊष्मा ऊर्जा का प्रसार करता है।
(c) चुम्बकीकरण का मान शैथिल्यवक चकी की चुम्बकीकरण मेमोरी या रिकॉर्डेड है। सूचना के ये टुकड़े चुम्बकीकरण के चक्र के अनुरूप हैं। जानकारी संग्रहीत करने के लिए शैथिल्यवक का उपयोग किया जा सकता है।
(d) सिरेमिक का उपयोग कैसेट के फीतों में चुम्बकीय पर्त चढ़ाने के लिए और आधुनिक कंप्यूटरों में स्मृति संग्रह बनाने के लिए किया जाता है।
(e) अंतरिक्ष के एक निश्चित क्षेत्र को चुम्बकीय क्षेत्रों से परिरक्षित किया जा सकता है अगर यह नरम लोहे के छल्ले से घिरा है। ऐसी व्यवस्थाओं में, इस क्षेत्र से चुंबकीय रेखाएँ खींची जाती हैं।

मुख्य बिंदु:

• शैथिल्य लूप का क्षेत्रफल प्रति चक्र ऊर्जा क्षय को दर्शाता है।
• कार्बन स्टील का क्षेत्रफल अधिक होने से ऊर्जा क्षय अधिक होता है।
• चुंबकीय परिरक्षण के लिए नरम लोहे की ढाल का उपयोग होता है।

आम गलतियाँ:

• शैथिल्य क्षेत्रफल और ऊर्जा क्षय के संबंध को गलत लिखना।
• स्मृति संग्रहण में डोमेन की भूमिका को न समझाना।
• परिरक्षण विधि में गलत सामग्री का नाम लिखना।

Exam Tips:

a) शैथिल्य लूप के क्षेत्रफल का महत्व परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है, इसे अच्छे से तैयार करें।
b) डोमेन सिद्धांत के आधार पर उत्तर देना अधिक अंक दिलाता है।
c) व्यावहारिक अनुप्रयोगों (जैसे कंप्यूटर मेमोरी) के नाम स्पष्ट लिखें।

 

Question 5.18: एक लम्बे, सीधे, क्षैतिज केबल में \( 2.5\text{ A} \) धारा, \( 10^{\circ} \) दक्षिण-पश्चिम से \( 10^{\circ} \) उत्तर-पूर्व की ओर प्रवाहित हो रही है। इस स्थान पर चुम्बकीय याम्योत्तर भौगोलिक याम्योत्तर के \( 10^{\circ} \) पश्चिम में है। यहाँ पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र \( 0.33\text{ G} \) एवं नति कोण शून्य है। उदासीन बिन्दुओं की रेखा निर्धारित कीजिए। (केबल की मोटाई की उपेक्षा कर सकते हैं।) (उदासीन बिन्दुओं पर, धारावाही केबल द्वारा चुम्बकीय-क्षेत्र, पृथ्वी के क्षैतिज घटक के समान एवं विपरीत दिशा में होता है।)

Answer:

तार में धारा, \( I = 2.5\text{ A} \)
पृथ्वी के किसी स्थान पर नति कोण, \( \delta = 0^{\circ} \)
पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र, \( H = 0.33\text{ G} = 0.33 \times 10^{-4}\text{ T} \)
पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक दिया जा सकता है: \( H_H = H \cos\delta \)
\( = 0.33 \times 10^{-4} \times \cos 0^{\circ} = 0.33 \times 10^{-4}\text{ T} \)
संतुलन बिंदु पर केबल से \( R \) की दूरी पर चुम्बकीय क्षेत्र लिख सकते हैं:
\( H_H = \frac{\mu_0 I}{2\pi R} \)
\( \mu_0 = \) मुक्त स्थान की पारगम्यता = \( 4\pi \times 10^{-7}\text{ Tm A}^{-1} \)
\( \therefore R = \frac{\mu_0 I}{2\pi H_H} = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 2.5}{2\pi \times 0.33 \times 10^{-4}} = 15.15 \times 10^{-3}\text{ m} = 1.51\text{ cm} \)
इसलिए, केबल के समानांतर और ऊपर संतुलन बिंदुओं का एक सेट \( 1.51\text{ cm} \) की अभिलम्ब दूरी पर स्थित है।

मुख्य बिंदु:

• क्षैतिज घटक \( H_H = H \cos\delta \) का उपयोग किया जाता है।
• उदासीन बिंदु पर केबल का चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी के क्षैतिज घटक के बराबर होता है।
• \( \mu_0 \) का मानक मान \( 4\pi \times 10^{-7}\text{ Tm}^{-1} \) है।

आम गलतियाँ:

• गास (Gauss) को टेस्ला (Tesla) में बदलते समय घात की गलती करना।
• सूत्र में \( 2\pi R \) के स्थान पर केवल \( \pi R \) लिखना।
• नति कोण का मान सीधे सूत्र में गलत रखना।

Exam Tips:

a) मात्रकों (Units) को हमेशा एक ही पद्धति (SI) में बदलें।
b) गणना के चरणों को साफ-सुथरा लिखें ताकि परीक्षा में पूरे अंक मिलें।
c) अंतिम उत्तर में मात्रक \( \text{cm} \) या \( \text{m} \) स्पष्ट लिखें।

 

Question 5.19: किसी स्थान पर एक टेलीफोन केबल में चार लम्बे, सीधे, क्षैतिज तार हैं जिनमें से प्रत्येक में \( 1.0\text{ A} \) की धारा पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित हो रही है। इस स्थान पर पृथ्वी का चुम्बकीय-क्षेत्र \( 0.39\text{ G} \) एवं नति कोण \( 35^{\circ} \) है। दिक्पात कोण लगभग शून्य है। केबल के \( 4.0\text{ cm} \) नीचे और \( 4.0\text{ cm} \) ऊपर परिणामी चुम्बकीय-क्षेत्रों के मान क्या होंगे?

Answer:

टेलीफोन केबल में क्षैतिज तारों की संख्या, \( n = 4 \)
प्रत्येक तार में धारा, \( I = 1.0\text{ A} \)
उस स्थान पर पृथ्वी का चुम्बकत्व, \( H = 0.39\text{ G} = 0.39 \times 10^{-4}\text{ T} \)
उस स्थान का नति कोण, \( \delta = 35^{\circ} \)
दिक्पात कोण, \( \theta \approx 0^{\circ} \)
केबल के नीचे \( 4\text{ cm} \) की दूरी पर, \( r = 4\text{ cm} = 0.04\text{ m} \), पृथ्वी का चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक दिया जा सकता है: \( H_H = H\cos\delta - B \)
जहाँ, \( \mu_0 = \) मुक्त स्थान की पारगम्यता = \( 4\pi \times 10^{-7}\text{ Tm A}^{-1} \)
\( B = \) धारा \( I \) के कारण \( 4\text{ cm} \) नीचे चुम्बकीय क्षेत्र = \( \frac{\mu_0 I}{2\pi r} \)
कुल चार तार हैं, इसलिए:
\( B = 4 \times \frac{\mu_0 I}{2\pi r} \)
\( \therefore B = 4 \times \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 1}{2\pi \times 0.04} = 0.2 \times 10^{-4}\text{ T} = 0.2\text{ G} \)
\( \therefore H_H = 0.39\cos 35^{\circ} - 0.2 = 0.39 \times 0.819 - 0.2 \approx 0.12\text{ G} \)
पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का उर्ध्व घटक दिया जाता है:
\( H_V = H\sin\delta = 0.39\sin 35^{\circ} = 0.22\text{ G} \)
चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा अपने क्षैतिज घटक के साथ बनाने वाला कोण:
\( \theta = 10^{-1}\frac{H_v}{H_h} = \tan^{-1}\frac{0.22}{0.12} = 61.39^{\circ} \)
दिए गए बिंदु पर परिणामी क्षेत्र: \( H_1 = \sqrt{(H_v)^2 + (H_h)^2} = \sqrt{(0.22)^2 + (0.12)^2} = 0.25\text{ G} \)
केबल के ऊपर \( 4\text{ cm} \) दूरी के लिए:
पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक: \( H\cos\delta + B = 0.39\cos 35^{\circ} + 0.2 = 0.52\text{ G} \)
पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का उर्ध्व घटक: \( H\sin\delta = 0.39\sin 35^{\circ} = 0.22\text{ G} \)
कोण, \( \theta = \tan^{-1}\frac{H_v}{H_h} = \tan^{-1}\frac{0.22}{0.52} = 22.9^{\circ} \)
परिणामी क्षेत्र, \( H_1 = \sqrt{(H_v)^2 + (H_h)^2} = \sqrt{(0.22)^2 + (0.52)^2} = 0.56\text{ T} \)

मुख्य बिंदु:

• केबल के ऊपर और नीचे चुंबकीय क्षेत्र की दिशा विपरीत होती है।
• क्षैतिज घटक में केबल के क्षेत्र को या तो जोड़ा जाता है या घटाया जाता है।
• परिणामी क्षेत्र क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर घटकों के वर्गों के योग का वर्गमूल होता है।

आम गलतियाँ:

• ऊपर और नीचे की स्थितियों में चिन्हों (+ और -) का भ्रम।
• ट्रिग्नोमेट्रिक मानों (sin और cos) को गलत रखना।
• चार तारों के कारण क्षेत्र निकालते समय 4 से गुणा करना भूल जाना।

Exam Tips:

a) लंबे प्रश्नों में प्रत्येक पद को अलग-अलग गणना करके साफ-साफ लिखें।
b) कोण निकालते समय प्रतिलोम स्पर्शज्या (inverse tangent) का सही उपयोग करें।
c) अंतिम उत्तर में मात्रक लिखना न भूलें।

 

Question 5.20: एक चुम्बकीय सुई जो क्षैतिज तल में घूमने के लिए स्वतन्त्र है, 30 फेरों एवं \( 12\text{ cm} \) त्रिज्या वाली एक कुंडली के केन्द्र पर रखी है। कुंडली एक ऊर्ध्वाधर तल में है और चुम्बकीय याम्योत्तर से \( 45^{\circ} \) का कोण बनाती है। जब कुंडली में \( 0.35\text{ A} \) धारा प्रवाहित होती है, चुम्बकीय सुई पूर्व से पश्चिम की ओर संकेत करती है।
(a) इस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय-क्षेत्र के क्षैतिज अवयव का मान ज्ञात कीजिए।
(b) कुंडली में धारा की दिशा उलट दी जाती है और इसको अपनी ऊर्ध्वाधर अक्ष पर वामावर्त दिशा में (ऊपर से देखने पर) \( 90^{\circ} \) के कोण पर घुमा दिया जाता है। चुम्बकीय सुई किस दिशा में ठहरेगी? इस स्थान पर चुम्बकीय दिक्पात शून्य लीजिए।

Answer:

वृत्ताकार कुंडली में फेरों की संख्या, \( N = 30 \)
वृत्ताकार कुंडली की त्रिज्या, \( r = 12\text{ cm} = 0.12\text{ m} \)
कुंडली में धारा, \( I = 0.35\text{ A} \), नति कोण, \( \delta = 45^{\circ} \)
(a) दूरी \( r \) पर धारा। के कारण चुम्बकीय क्षेत्र:
\( B = \frac{\mu_0 2\pi NI}{4\pi r} \)
\( \mu_0 = \) मुक्त स्थान की पारगम्यता = \( 4\pi \times 10^{-7}\text{ Tm A}^{-1} \)
\( \therefore B = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 2\pi \times 30 \times 0.35}{4\pi \times 0.12} = 5.49 \times 10^{-5}\text{ T} \)
दिशा सूचक सुई W-E दिशा में ठहरेगी। इसलिए, चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक को लिख सकते हैं:
\( B_H = B\sin\delta = 5.49 \times 10^{-5}\sin 45^{\circ} = 3.88 \times 10^{-5}\text{ T} = 0.388\text{ G} \)
(b) जब कुंडली में धारा विपरीत हो जाती है और कुंडली को 90 डिग्री के कोण से अपनी ऊर्ध्वाधर अक्ष पर घुमाया जाता है, तो सुई अपनी मूल दिशा को उलट देगी। इस मामले में, सुई पूर्व से पश्चिम तरफ इंगित करेगी।

मुख्य बिंदु:

• वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र \( B = \frac{\mu_0 NI}{2r} \) होता है।
• संतुलन की स्थिति में कुंडली का क्षेत्र पृथ्वी के क्षैतिज घटक के साथ संतुलित होता है।
• धारा उलटने पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा भी विपरीत हो जाती है।

आम गलतियाँ:

• त्रिज्या को सेंटीमीटर से मीटर में बदलना भूल जाना।
• फेरों की संख्या \( N \) को सूत्र में शामिल न करना।
• कोण के घटकों (sin/cos) में गलती करना।

Exam Tips:

a) भाग (a) और (b) को स्पष्ट रूप से अलग करके हल करें।
b) वृत्त के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र अच्छी तरह याद रखें।
c) दिशा से संबंधित प्रश्नों में उत्तर के साथ दिशा (जैसे पूर्व-पश्चिम) जरूर लिखें।

 

Question 5.21: एक चुम्बकीय द्विध्रुव दो चुम्बकीय-क्षेत्रों के प्रभाव में है। ये क्षेत्र एक-दूसरे से \( 60^{\circ} \) का कोण बनाते हैं और उनमें से एक क्षेत्र का परिमाण \( 12 \times 10^{-2}\text{ T} \) है। यदि द्विध्रुव स्थायी संतुलन में इस क्षेत्र से \( 15^{\circ} \) का कोण बनाए, तो दूसरे क्षेत्र का परिमाण क्या होगा?

Answer:

एक चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण, \( B_1 = 1.2 \times 10^{-2}\text{ T} \)
दूसरे चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण, \( B_2 \)
दोनों क्षेत्रों के बीच का कोण, \( \theta = 60^{\circ} \)
स्थिर संतुलन पर, द्विध्रुव और क्षेत्र \( B_1 \) के बीच का कोण, \( \theta_1 = 15^{\circ} \)
द्विध्रुवीय और क्षेत्र \( B_2 \) के बीच का कोण, \( \theta_2 = \theta - \theta_1 = 60^{\circ} - 15^{\circ} = 45^{\circ} \)
घूर्णन संतुलन पर, दोनों क्षेत्रों के बीच का आघूर्ण एक दूसरे को संतुलित करना चाहिए।
\( \therefore B_1 \) के कारण आघूर्ण बल = क्षेत्र \( B_2 \) के कारण आघूर्ण बल
\( MB_1 \sin\theta_1 = MB_2 \sin\theta_2 \)
जहाँ, \( M = \) द्विध्रुव का चुम्बकीय आघूर्ण
\( \therefore B_2 = B_1 \frac{\sin\theta_1}{\sin\theta_2} = \frac{1.2 \times 10^{-2} \times \sin 15^{\circ}}{\sin 45^{\circ}} = 4.39 \times 10^{-3}\text{ T} \)
इसलिए, दूसरे चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण \( 4.39 \times 10^{-3}\text{ T} \) है।

मुख्य बिंदु:

• संतुलन की स्थिति में दोनों क्षेत्रों के कारण टॉर्क (आघूर्ण) बराबर होते हैं।
• टॉर्क का सूत्र \( \tau = MB \sin\theta \) होता है।
• दोनों क्षेत्रों के बीच कुल कोण \( \theta = \theta_1 + \theta_2 \) होता है।

आम गलतियाँ:

• दूसरे क्षेत्र के साथ बनने वाले कोण \( \theta_2 \) को गलत घटाना।
• \( \sin 15^{\circ} \) या अन्य त्रिकोणमितीय मानों में गलती करना।
• चुंबकीय आघूर्ण \( M \) को दोनों तरफ से काटना भूल जाना।

Exam Tips:

a) संतुलन की शर्त \( \tau_1 = \tau_2 \) स्पष्ट रूप से लिखें।
b) कोणों के बीच के ज्यामितीय संबंध को चित्र बनाकर समझ सकते हैं।
c) गणना को अंत तक सावधानीपूर्वक हल करें।

 

Question 5.22: एक समोर्जा 18 keV वाले इलेक्ट्रॉनों के किरण पुंज पर जो शुरू में क्षैतिज दिशा में गतिमान है, \( 0.04\text{ G} \) का एक क्षैतिज चुम्बकीय-क्षेत्र, जो किरण पुंज की प्रारम्भिक दिशा के लम्बवत है, लगाया गया है। आकलन कीजिए \( 30\text{ cm} \) की क्षैतिज दूरी चलने में किरण पुंज कितनी दूरी ऊपर या नीचे विस्थापित होगा?
(\( m_e = 911 \times 10^{-31}\text{kg}, e = 160 \times 10^{-19}\text{C} \))
[नोट: इस में आँकड़े इस प्रकार चुने गए हैं कि उत्तर से आपको यह अनुमान हो कि TV सेट में इलेक्ट्रॉन गन से पर्दे तक इलेक्ट्रॉन किरण पुंज की गति भू-चुम्बकीय-क्षेत्र से किस प्रकार प्रभावित होती है।]

Answer:

इलेक्ट्रॉन किरण पुंज पर ऊर्जा, \( E = 18\text{ keV} = 18 \times 10^3\text{ eV} \)
एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश, \( e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C} \)
\( \therefore E = 18 \times 10^3 \times 1.6 \times 10^{-19}\text{ J} \)
चुम्बकीय क्षेत्र, \( B = 0.04\text{ G} \)
एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, \( m_e = 9.11 \times 10^{-31}\text{ kg} \)
दूरी जहाँ तक इलेक्ट्रॉन पुंज पंचु सकता है, \( d = 30\text{ cm} = 0.3\text{ m} \)
इलेक्ट्रॉन पुंज की गतिज ऊर्जा को लिख सकते हैं: \( E = \frac{1}{2}mv^2 \)
\( \Rightarrow v = \sqrt{\frac{2E}{m}} = \sqrt{\frac{2 \times 18 \times 10^3 \times 1.6 \times 10^{-19}}{9.11 \times 10^{-31}}} = 0.795 \times 10^8\frac{\text{m}}{\text{s}} \)
इलेक्ट्रॉन पुंज त्रिज्या, \( r \) एक वृत्ताकार पथ के साथ विक्षेपित होता है। चुम्बकीय क्षेत्र के कारण बल पथ के केंद्राभिसारी बल को संतुलित करता है:
\( Bev = \frac{mv^2}{r} \Rightarrow r = \frac{mv}{Be} = \frac{9.11 \times 10^{-31} \times 0.795 \times 10^8}{0.4 \times 10^{-4} \times 1.6 \times 10^{-19}} = 11.3\text{m} \)
माना इलेक्ट्रॉन पुंज का ऊपर और नीचे की ओर विक्षेप, \( x = r(1 - \cos\theta) \) जहाँ, \( \theta = \) दिक्पात कोण
\( \sin\theta = \frac{d}{r} = \frac{0.3}{11.3} \Rightarrow \theta = \sin^{-1}\frac{0.3}{11.3} = 1.521^{\circ} \)
और \( x = 11.3(1 - \cos 1.521^{\circ}) = 0.0039\text{ m} = 3.9\text{ mm} \)
इस प्रकार, पुंज का ऊपर और नीचे विक्षेप \( 3.9\text{ mm} \) है।

मुख्य बिंदु:

• गतिज ऊर्जा से वेग \( v = \sqrt{2E/m} \) निकाला जाता है।
• वृत्ताकार पथ की त्रिज्या \( r = \frac{mv}{Be} \) होती है।
• विक्षेप का सूत्र \( x = r(1 - \cos\theta) \) का प्रयोग किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• eV को Joules में बदलते समय आवेश के मान से गुणा करना भूल जाना।
• गास (Gauss) को टेस्ला में बदलते समय घात की गलती करना।
• त्रिकोणमितीय फलनों में रेडियन और डिग्री का अंतर न समझना।

Exam Tips:

a) यह एक दीर्घ उत्तरीय प्रश्न है, अतः हर एक चरण (ऊर्जा, वेग, त्रिज्या, विक्षेप) को अलग-अलग स्पष्ट करें।
b) कैलकुलेशन में घातों (powers of 10) का विशेष ध्यान रखें।
c) अंतिम उत्तर \( \text{mm} \) या \( \text{m} \) में स्पष्ट लिखें।

 

Question 5.23: अनुचुम्बकीय लवण के एक नमूने में \( 2.0 \times 10^{24} \) परमाणु द्विध्रुव हैं जिनमें से प्रत्येक का द्विध्रुव आघूर्ण \( 1.5 \times 10^{-23}\text{ JT}^{-1} \) है। इस नमूने को \( 0.64\text{ T} \) के एक एकसमान चुम्बकीय-क्षेत्र में रखा गया है और \( 4.2\text{ K} \) ताप तक ठण्डा किया गया। इसमें \( 15\% \) चुम्बकीय संतृप्तता आ गई। यदि इस नमूने को \( 0.98\text{ T} \) के चुम्बकीय-क्षेत्र में \( 2.8\text{ K} \) ताप पर रखा हो तो इसका कुल द्विध्रुव आघूर्ण कितना होगा? (यह मान सकते हैं कि क्यूरी नियम लागू होता है।)

Answer:

परमाणु द्विध्रुवों की संख्या, \( n = 2.0 \times 10^{24} \)
प्रत्येक परमाणु द्विध्रुव का द्विध्रुव आघूर्ण, \( M = 1.5 \times 10^{-23}\text{ JT}^{-1} \)
जब चुम्बकीय क्षेत्र, \( B_1 = 0.64\text{ T} \)
नमूने केताप को \( T_1 = 4.2^{\circ}\text{K} \) तक ठंडा किया जाता है,
परमाणु द्विध्रुव का कुल द्विध्रुव आघूर्ण, \( M_{\text{tot}} = n \times M = 2 \times 10^{24} \times 1.5 \times 10^{-23} = 30\text{ JT}^{-1} \)
\( 15\% \) पर चुम्बकीय संतृप्तता प्राप्त की जा सकती है।
इसलिए, प्रभावी द्विध्रुव आघूर्ण,
\( M_1 = \frac{15}{100} \times 30 = 4.5\text{ JT}^{-1} \)
जब चुम्बकीय क्षेत्र, \( B_2 = 0.98\text{ T} \)
ताप, \( T_2 = 2.8^{\circ}\text{K} \)
इसका कुद्विदृत आघूर्ण = \( M_2 \)
क्यूरी के नियमानुसार, दो चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्णों का अनुपात:
\( \frac{M_2}{M_1} = \frac{B_2}{B_1} \times \frac{T_1}{T_2} \)
\( \therefore M_2 = \frac{B_2 T_1 M_1}{B_1 T_2} = \frac{0.98 \times 4.2 \times 4.5}{2.8 \times 0.64} = 10.336\text{ JT}^{-1} \)
इस प्रकार, चुम्बकीय क्षेत्र \( 0.98\text{ T} \) और ताप \( 2.8^{\circ}\text{K} \) पर नमूने का कुल द्विध्रुव आघूर्ण \( 10.336\text{ JT}^{-1} \) है।

मुख्य बिंदु:

• क्यूरी नियम के अनुसार चुम्बकीय आघूर्ण \( M \propto \frac{B}{T} \) होता है।
• कुल अधिकतम द्विध्रुव आघूर्ण \( n \times M \) से निकाला जाता है।
• प्रतिशतता (%) का उपयोग करके प्रभावी आघूर्ण ज्ञात करते हैं।

आम गलतियाँ:

• क्यूरी नियम के सूत्र में \( B \) और \( T \) के अनुपात को उल्टा लिखना।
• 15% संतृप्तता को कुल आघूर्ण में सीधा गुणा करना भूल जाना।
• तापमान और चुंबकीय क्षेत्र के मानों को गलत सूत्र में रखना।

Exam Tips:

a) क्यूरी नियम पर आधारित आंकिक प्रश्न परीक्षा में अक्सर आते हैं, इसका अभ्यास करें।
b) अनुपातिक विधि (Ratio method) का उपयोग करने से गणना आसान हो जाती है।
c) अंत में मात्रक \( \text{JT}^{-1} \) अवश्य लिखें।

 

Question 5.24: एक रोलैंड रिंग की औसत त्रिज्या \( 15\text{ cm} \) है और इसमें \( 800 \) आपेक्षिक चुम्बकशीलता के लौह चुम्बकीय क्रोड पर \( 3500 \) फेरे लिपटे हुए हैं। \( 1.2\text{ A} \) की चुम्बककारी धारा के कारण इसके क्रोड में कितना चुम्बकीय-क्षेत्र (B) होगा?

Answer:

रोलैंड रिंग की औसत त्रिज्या, \( r = 15\text{ cm} = 0.15\text{ m} \)
लौह चुम्बकीय क्रोड पर फेरों की संख्या, \( N = 3500 \)
आपेक्षिक चुम्बकशीलता, \( \mu_r = 800 \)
चुम्बककारी धारा, \( I = 1.2\text{ A} \)
चुम्बकीय क्षेत्र को निम्न सम्बन्ध से दिया जाता है:
\( B = \frac{\mu_r \mu_0 N I}{2\pi r} \)
जहाँ, \( \mu_0 = \) मुक्त स्थान की पारगम्यता = \( 4\pi \times 10^{-7}\text{ Tm A}^{-1} \), इसलिए
\( B = \frac{800 \times 4\pi \times 10^{-7} \times 3500 \times 1.2}{2\pi \times 0.15} = 4.48\text{ T} \)
इस प्रकार, क्रोड में चुम्बकीय क्षेत्र \( 4.48\text{ T} \) है।

मुख्य बिंदु:

• टोरॉइड या रोलैंड रिंग के भीतर चुंबकीय क्षेत्र का सूत्र \( B = \frac{\mu_r \mu_0 NI}{2\pi r} \) होता है।
• यहाँ \( \mu_r \) आपेक्षिक चुम्बकशीलता है।
• त्रिज्या को सेंटीमीटर से मीटर में बदलना आवश्यक है।

आम गलतियाँ:

• \( \mu_r \) को छोड़ देना और केवल \( \mu_0 \) का उपयोग करना।
• फेरों की संख्या \( N \) या धारा \( I \) के मान को गलत रखना।
• परिधि \( 2\pi r \) निकालते समय त्रिज्या का सही मान न रखना।

Exam Tips:

a) टॉरॉइड से जुड़े सूत्रों को एक जगह लिखकर याद करें।
b) गणना करते समय \( \pi \) के पदों को आपस में आसानी से काटा जा सकता है।
c) अंतिम उत्तर टेस्ला (\( \text{T} \)) में लिखें।

 

Question 5.25: किसी इलेक्ट्रॉन के नेज चक्रणी कोणीय संवेग \( S \) एवं कक्षीय कोणीय संवेग \( l \) के साथ जुड़े चुम्बकीय-आघूर्ण क्रमशः \( \mu_s \) और \( \mu_l \) हैं। क्वांटम सिद्धान्त के आधार पर (और प्रयोगात्मक रूप से से अत्यन्त परिशुद्धतापूर्वक पृष्ट) इनके मान क्रमशः निम्न प्रकार दिए जाते हैं:
\( \mu_s = -(e/m)S \) एवं \( \mu_l = -(e/2m)l \) इनमें से कौन-सा व्यंजक चिरसम्मत सिद्धान्तों के आधार पर प्राप्त करने की आशा की जा सकती है? उस चिरसम्मत सिद्धान्तों के आधार पर होने वाले व्यंजक को व्युत्पन्न कीजिए।

Answer:

चुम्बकीय आघूर्ण दिए गए नेज चक्रणी कोणीय संवेग तथा कक्षीय कोणीय संवेग के साथ संयोजित हैं।
चिरसम्मत सिद्धान्तों के आधार पर,
\( \mu_l = \left(\frac{e}{2m}\right)l \)
इसे निम्नलिखित प्रकार से प्राप्त किया जा सकता है:
इलेक्ट्रॉन की कक्षीय गति से जुड़ा चुम्बकीय आघूर्ण
\( \mu_l = \text{धारा} \times \text{कक्षा का क्षेत्रफल} \)
\( = IA = -\frac{e}{T}\pi r^2 \)
परिक्रमा करने वाले इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग,
\( l = mvr = m \cdot \frac{2\pi r}{T} \cdot r = \frac{2\pi mr^2}{T} \)
यहाँ, \( r \) वृत्ताकार कक्षा की त्रिज्या है।
\( \mu_l = -\frac{e\pi r^2}{T} = -\frac{e}{2m} \cdot \frac{2\pi mr^2}{T} = -\frac{e}{2m}l \)
क्योंकि इलेक्ट्रॉन का आवेश ऋणात्मक होता है, इसलिए चुम्बकीय संवेग \( \mu_l \) तथा कोणीय संवेग \( l \) कक्षा के तल के समानांतर विपरीत दिशा में होते हैं।
अतः, क्वांटम सिद्धांत के आधार पर \( \mu_l = -\frac{e}{2m}l \), चिरसम्मत रूप से अपेक्षित मूल्य \( \frac{e}{s} = \frac{e}{m} \) का दुगुना है।
यह परिणाम (बाद में प्रयोगात्मक रूप से से सत्यापित) आधुनिक क्वांटम सिद्धांत का एक उत्कृष्ट परिणाम है।

मुख्य बिंदु:

• कक्षीय चुंबकीय आघूर्ण \( \mu_l = IA \) होता है।
• धारा \( I = \frac{e}{T} \) और आवर्तकाल \( T = \frac{2\pi r}{v} \) होता है।
• कोणीय संवेग \( l = mvr \) का उपयोग करके व्युत्पत्ति की जाती है।

आम गलतियाँ:

• चक्रणी और कक्षीय चुंबकीय आघूर्ण के सूत्रों में अंतर न समझना।
• ऋणात्मक चिन्ह (ऋण आवेश के कारण) को छोड़ देना।
• आवर्तकाल और वेग के संबंध में गलती करना।

Exam Tips:

a) यह एक वैचारिक एवं व्युत्पत्ति आधारित प्रश्न है, इसके चरणों को क्रमिक रूप से याद रखें।
b) \( \mu_l \) और \( l \) के बीच के संबंध का निगमन परीक्षा में पूछा जाता है।
c) दिशाओं (विपरीत दिशा) का उल्लेख करना न भूलें।

 

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