Step-by-Step Textbook Solutions for Class 12 Physics Chapter 04 गतिमान आवेश और चुंबकत्व
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Question 4.1: तार की एक वृत्ताकार कुंडली में 100 फेरे हैं, प्रत्येक की त्रिज्या 8.0 cm है और इनमें 0.40 A विधुयत धारा प्रवाहित हो रही है। कुंडली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण क्या है?
Answer:
वृत्ताकार कुंडली में फेरों की संख्या, \( n = 100 \)
प्रत्येक फेरे की त्रिज्या, \( r = 8.0 \text{ cm} = 0.08 \text{ m} \)
कुंडली में प्रवाहित धारा, \( I = 0.4 \text{ A} \)
कुंडली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र का सूत्र निम्नलिखित है:
\( |B| = \frac{\mu_0 2\pi n I}{4\pi r} \)
यहाँ, मुक्त आकाश की पारगम्यता \( \mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \text{ T m A}^{-1} \) है।
मान रखने पर:
\( |B| = \frac{4\pi \times 10^{-7}}{4\pi} \times \frac{2\pi \times 100 \times 0.4}{0.08} \)
\( |B| = 3.14 \times 10^{-4} \text{ T} \)
अतः, चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण \( 3.14 \times 10^{-4} \text{ T} \) है।
मुख्य बिंदु:
• वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र धारा और फेरों की संख्या के सीधे समानुपाती होता है।
• त्रिज्या को हमेशा मीटर (m) में बदला जाना चाहिए।
• \( \mu_0 \) का मान \( 4\pi \times 10^{-7} \text{ T m A}^{-1} \) उपयोग किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• त्रिज्या को सेंटीमीटर से मीटर में बदलना भूल जाना।
• फेरों की संख्या \( n \) से गुणा करना भूल जाना।
• SI मात्रकों का सही उपयोग न करना।
Exam Tips:
a) गणना करते समय \( \pi \) के मान को सही से सरल करें।
b) उत्तर के अंत में चुंबकीय क्षेत्र का SI मात्रक (Tesla) अवश्य लिखें।
c) दिए गए सभी मानों को पहले सूत्र के रूप में लिखें।
Question 4.2: एक लम्बे, सीधे तार में 35 A विधुयत धारा प्रवाहित हो रही है। तार से 20 cm दूरी पर स्थित किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण क्या है?
Answer:
तार में प्रवाहित धारा, \( I = 35 \text{ A} \)
तार से बिंदु की दूरी, \( r = 20 \text{ cm} = 0.2 \text{ m} \)
इस बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र का सूत्र:
\( |B| = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2I}{r} \)
यहाँ, \( \frac{\mu_0}{4\pi} = 10^{-7} \text{ T m A}^{-1} \)
मान रखने पर:
\( |B| = \frac{4\pi \times 10^{-7}}{4\pi} \times \frac{2 \times 35}{0.2} \)
\( |B| = 3.5 \times 10^{-5} \text{ T} \)
अतः, तार से 20 cm दूर चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण \( 3.5 \times 10^{-5} \text{ T} \) है।
मुख्य बिंदु:
• लंबे सीधे तार के कारण चुंबकीय क्षेत्र दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
• \( \frac{\mu_0}{4\pi} \) का मान सीधे \( 10^{-7} \) रखा जा सकता है।
• दूरी \( r \) को मीटर में परिवर्तित करना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• सूत्र में \( 2I \) की जगह केवल \( I \) लिखना।
• 20 सेमी को मीटर में बदलते समय दशमलव की गलती करना।
• घातांक (powers of 10) की गणना में त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) लंबे सीधे तार के लिए बायो-सावर्त नियम के अनुप्रयोग का सीधा सूत्र याद रखें।
b) चरणों को स्पष्ट रूप से लिखकर दिखाएं ताकि गणना में गलती न हो।
c) मात्रक लिखना न भूलें।
Question 4.3: क्षितिज तल में रखे एक लम्बे सीधे तार में 50 A विधुयत धारा उत्तर से दक्षिण की ओर प्रवाहित हो रही है। तार के पूर्व में 2.5 m दूरी पर स्थित किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र B का परिमाण और उसकी दिशा ज्ञात कीजिए।
Answer:
तार में धारा, \( I = 50 \text{ A} \)
एक बिंदु जो तार से पूर्व दिशा में \( 2.5 \text{ m} \) की दूरी पर है।
बिंदु से दूरी का परिमाण, \( r = 2.5 \text{ m} \)
उस बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण:
\( |B| = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2I}{r} \)
मान रखने पर:
\( |B| = \frac{4\pi \times 10^{-7}}{4\pi} \times \frac{2 \times 50}{2.5} \)
\( |B| = 4 \times 10^{-6} \text{ T} \)
बिंदु 2.5 m की दूरी पर लम्बवत स्थित है। तार में धारा की दिशा नीचे की ओर है। मैक्सवेल के दाहिने हाथ के अंगूठे के नियमानुसार, दिए गए बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा ऊपर की ओर होगी।
मुख्य बिंदु:
• चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए दाहिने हाथ के अंगूठे के नियम का प्रयोग किया जाता है।
• तार में धारा उत्तर से दक्षिण (नीचे की ओर) बह रही है।
• पूर्व दिशा में स्थित बिंदु पर क्षेत्र ऊपर (ऊर्ध्वाधर ऊपर की ओर) होगा।
आम गलतियाँ:
• दिशा तय करते समय दाहिने हाथ के नियम को गलत लागू करना।
• परिमाण के साथ दिशा लिखना भूल जाना।
• दूरी और धारा के मान को गलत रखना।
Exam Tips:
a) ऐसे प्रश्नों में परिमाण के साथ-साथ दिशा का उल्लेख करना अनिवार्य है।
b) मैक्सवेल के नियम को संक्षिप्त रूप में उत्तर में लिख सकते हैं।
c) कैलकुलेशन साफ-सुथरी करें।
Question 4.4: व्योमस्थ खींचे क्षितिज बिजली के तार में 90 A विधुयत धारा पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित हो रही है। तार के 1.5 m नीचे विधुयत धारा के कारण उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण और दिशा क्या है?
Answer:
बिजली के तार में धारा, \( I = 90 \text{ A} \)
बिजली के तार के नीचे बिंदु की दूरी, \( r = 1.5 \text{ m} \)
इस प्रकार, उस बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र:
\( |B| = \frac{\mu_0}{4\pi} \frac{2I}{r} \)
मान रखने पर:
\( |B| = \frac{4\pi \times 10^{-7}}{4\pi} \times \frac{2 \times 90}{1.5} \)
\( |B| = 1.2 \times 10^{-5} \text{ T} \)
धारा पूर्व से पश्चिम की तरह प्रवाहित हो रही है। बिंदु बिजली के तार के नीचे है। इस प्रकार, मैक्सवेल के दाहिने हाथ के अंगूठे के नियमानुसार, चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा दक्षिण की ओर होगी।
मुख्य बिंदु:
• धारा की दिशा पूर्व से पश्चिम की ओर है।
• तार के नीचे स्थित बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दक्षिण की ओर होगी।
• सूत्र में सभी मानों को मानक इकाइयों में रखा गया है।
आम गलतियाँ:
• पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण की दिशाओं में भ्रमित होना।
• दाहिने हाथ के नियम की बजाय बाएं हाथ का नियम लगा देना।
• दशमलव स्थानों की गणना में गलती करना।
Exam Tips:
a) दिशा से संबंधित प्रश्नों को हल करते समय अपनी उत्तर पुस्तिका पर दसों दिशाओं का संकेत (नक्शा) बनाकर समझें।
b) सूत्र को पहले सामान्य रूप में लिखें और फिर मान रखें।
c) उत्तर में परिमाण और दिशा दोनों स्पष्ट रूप से बॉक्स में दर्शाएं।
Question 4.5: एक तार जिसमें 8 A विधुयत धारा प्रवाहित हो रही है, 0.15 T के एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में, क्षेत्र से \( 30^\circ \) का कोण बनाते हुए रखा है। इसकी एकांक लंबाई पर लगने वाले बल का परिमाण और इसकी दिशा क्या है?
Answer:
तार में धारा, \( I = 50 \text{ A} \text{ (दिया गया मान 8 A है)} \)
एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण, \( B = 0.15 \text{ T} \), तार और चुम्बकीय क्षेत्र के बीच का कोण, \( \theta = 30^\circ \)
इसकी एकांक लंबाई पर लगने वाला चुंबकीय बल:
\( f = \frac{F}{l} = BI \sin\theta \)
मान रखने पर:
\( f = 0.15 \times 8 \times 1 \times \sin 30^\circ = 0.6 \text{ N m}^{-1} \)
अतः, तार की एकांक लंबाई पर लगने वाला बल \( 0.6 \text{ N m}^{-1} \) है।
मुख्य बिंदु:
• धारावाही चालक पर चुंबकीय बल का सूत्र \( F = I(l \times B) \) या \( F = I l B \sin\theta \) होता है।
• एकांक लंबाई पर बल का अर्थ प्रति इकाई लंबाई बल (\( F/l \)) है।
• \( \sin 30^\circ \) का मान \( 0.5 \) होता है।
आम गलतियाँ:
• एकांक लंबाई शब्द को नजरअंदाज करके कुल बल निकाल देना।
• त्रिकोणमितीय मान \( \sin 30^\circ \) गलत रखना।
• मात्रक \( \text{N/m} \) की जगह केवल N लिखना।
Exam Tips:
a) प्रश्न में 'एकांक लंबाई' कहा गया है, इसलिए \( l = 1 \) मीटर मानकर हल करें।
b) फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम से बल की दिशा भी समझें।
c) कैलकुलेशन को स्टेप-बाय-स्टेप दिखाएं।
Question 4.6: एक \( 3.0 \text{ cm} \) लम्ба तार जिसमें \( 10 \text{ A} \) विधुयत धारा प्रवाहित हो रही है, एक परिनालिका के भीतर उसके अक्ष के लम्बवत् रखा है। परिनालिका के भीतर चुम्बकीय क्षेत्र का मान \( 0.27 \text{ T} \) है। तार पर लगने वाला चुम्बकीय बल क्या है?
Answer:
तार की लम्बाई, \( l = 3 \text{ cm} = 0.03 \text{ m} \)
तार में प्रवाहित होने والی धारा, \( I = 10 \text{ A} \)
चुम्बकीय क्षेत्र, \( B = 0.27 \text{ T} \)
धारा और चुम्बकीय क्षेत्र के बीच का कोण, \( \theta = 90^\circ \)
तार पर लगने वाले चुम्बकीय बल का सूत्र:
\( F = B I l \sin\theta \)
मान रखने पर:
\( F = 0.27 \times 10 \times 0.03 \sin 90^\circ \)
\( F = 8.1 \times 10^{-2} \text{ N} \)
अतः, तार पर लगने वाले चुम्बकीय बल का मान \( 8.1 \times 10^{-2} \text{ N} \) है। बल की दिशा फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम से प्राप्त कर सकते हैं।
मुख्य बिंदु:
• परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र अक्ष के लंबवत होता है, इसलिए \( \theta = 90^\circ \) लिया गया है।
• लंबाई सेंटीमीटर में दी गई है जिसे मीटर में बदलना आवश्यक है।
• बल का मात्रक न्यूटन (N) होता है।
आम गलतियाँ:
• लंबाई को सेंटीमीटर से मीटर में न बदलना।
• \( \sin 90^\circ \) का मान 1 न रखना।
• घातों (Powers of 10) की गणना में गलती करना।
Exam Tips:
a) मान रखते समय सभी राशियों को SI पद्धति में ही रखें।
b) फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम का संक्षिप्त संदर्भ दें।
c) उत्तर को वैज्ञानिक संकेतन (Scientific Notation) में लिखें।
Question 4.7: एक-दूसरे से \( 4.0 \text{ cm} \) की दूरी पर रखे दो लम्बे, सीधे, समान्तर तारों A एवं B से क्रमशः \( 8.0 \text{ A} \) एवं \( 5.0 \text{ A} \) की विधुयत धाराएँ एक ही दिशा में प्रवाहित हो रही हैं। तार A के \( 10 \text{ cm} \) खण्ड पर बल का आकलन कीजिए।
Answer:
तार A में प्रवाहित होने वाली धारा, \( I_A = 8.0 \text{ A} \)
तार B में प्रवाहित होने वाली धारा, \( I_B = 10 \text{ A} \)
दो तारों के बीच दूरी, \( r = 4.0 \text{ cm} = 0.04 \text{ m} \)
तार A की लम्बाई, \( L = 10 \text{ cm} = 0.1 \text{ m} \)
चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा लंबाई पर लगने वाला बल:
\( F = \frac{\mu_0 I_A I_B L}{2\pi r} \)
यहाँ, \( \mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \text{ T m A}^{-1} \)
मान रखने पर:
\( F = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 8 \times 5 \times 0.1}{2\pi \times 0.04} \)
\( F = 2 \times 10^{-5} \text{ N} \)
बल का परिमाण \( 2 \times 10^{-5} \text{ N} \) है। यह एक आकर्षण बल है, जो कि A के लम्बवत और B की ओर है, क्योंकि कितारों में प्रवाहित धारा की दिशा समान है।
मुख्य बिंदु:
• दो समांतर धारावाही चालकों के बीच प्रति एकांक लंबाई बल का सूत्र \( \frac{F}{l} = \frac{\mu_0 I_1 I_2}{2\pi r} \) होता है।
• यदि धाराएं समान दिशा में हों, तो तार एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।
• सभी दूरियों और लंबाई को मीटर में बदलना अनिवार्य है।
आम गलतियाँ:
• आकर्षण या प्रतिकर्षक प्रकृति को स्पष्ट न करना।
• लंबाई \( L \) को सूत्र में शामिल करना भूल जाना (यदि कुल बल पूछा गया हो)।
• हर में \( 2\pi r \) की जगह \( 4\pi r \) लिख देना।
Exam Tips:
a) दो समांतर तारों वाले प्रश्नों में आकर्षण/प्रतिकर्षक प्रकृति का उल्लेख अवश्य करें।
b) सूत्र लिखते समय पूर्ण सावधानी बरतें।
c) गणना को संक्षिप्त और स्पष्ट रखें।
Question 4.8: पास-पास फेरों वाली एक परिनालिका \( 80 \text{ cm} \) लम्बी है और इसमें 5 परतें हैं जिनमें से प्रत्येक में 400 फेरे हैं। परिनालिका का व्यास \( 1.8 \text{ cm} \) है। यदि इसमें \( 8.0 \text{ A} \) विधुयत धारा प्रवाहित हो रही है तो परिनालिका के भीतर केन्द्र के पास चुम्बकीय क्षेत्र B का परिमाण परिकलित कीजिए।
Answer:
परिनालिका की लम्बाई, \( l = 80 \text{ cm} = 0.8 \text{ m} \)
परिनालिका में 5 परतें हैं और प्रत्येक परत पर 400 फेरे हैं।
अतः परिनालिका पर कुल फेरे, \( N = 5 \times 400 = 2000 \)
परिनालिका का व्यास, \( D = 1.8 \text{ cm} = 0.018 \text{ m} \)
परिनालिका में प्रवाहित होने वाली धारा, \( I = 8.0 \text{ A} \)
परिनालिका भीतर केंद्र पर चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण:
\( B = \mu_0 n I = \mu_0 \left(\frac{N}{l}\right) I \)
यहाँ, \( \mu_0 = 4\pi \times 10^{-7} \text{ T m A}^{-1} \)
मान रखने पर:
\( B = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 2000 \times 8}{0.8} \)
\( B = 2.512 \times 10^{-2} \text{ T} \)
अतः, परिनालिका भीतर केंद्र पर चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण \( 2.512 \times 10^{-2} \text{ T} \) है।
मुख्य बिंदु:
• कुल फेरों की संख्या निकालने के लिए परतों की संख्या को प्रति परत फेरों से गुणा करते हैं।
• प्रति एकांक लंबाई फेरों की संख्या \( n = \frac{N}{l} \) होती है।
• व्यास का उपयोग क्षेत्र के सूत्र में सीधे नहीं होता यदि परिनालिका लंबी हो (लंबाई >> व्यास)।
आम गलतियाँ:
• केवल एक परत के फेरों को कुल फेरे मान लेना।
• परिनालिका की लंबाई को सेंटीमीटर में ही रखना।
• व्यास को त्रिज्या मानकर भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) चेक करें कि क्या लंबाई व्यास से बहुत अधिक है (यहाँ \( 80 \text{ cm} >> 1.8 \text{ cm} \)), जिससे आदर्श परिनालिका का सूत्र लगाया जा सके।
b) कुल फेरे \( N \) निकालते समय परतों का ध्यान रखें।
c) उत्तर को मानक रूप में लिखें।
Question 4.9: एक वर्ाकार कुंडली जिसकी प्रत्येक भुजा \( 10 \text{ cm} \) है, में 20 फेरे हैं और उसमें \( 12 \text{ A} \) विधुयत धारा प्रवाहित हो रही है। कुंडली ऊर्ध्वाधरतः लटकी हुई है और इसके तल पर खींचा गया अभिलम्ब \( 0.80 \text{ T} \) के एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा से \( 30^\circ \) का एक कोण बनाता है। कुंडली पर लगने वाले बल-युग्म आघूर्ण का परिमाण क्या है?
Answer:
वर्गाकार कुंडली की एक भुजा की लंबाई, \( l = 10 \text{ cm} = 0.1 \text{ m} \)
कुंडली में प्रवाहित धारा, \( I = 12 \text{ A} \)
कुंडली पर फेरों की संख्या, \( n = 20 \)
कुंडली के तल का चुम्बकीय क्षेत्र के साथ बनने वाला कोण, \( \theta = 30^\circ \)
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता, \( B = 0.80 \text{ T} \)
चुम्बकीय क्षेत्र में कुंडली द्वारा महसूस किया जाने वाला चुम्बकीय आघूर्ण का परिमाण:
\( \tau = n I A B \sin\theta \)
यहाँ, \( A = \text{वर्गाकार कुंडली का क्षेत्रफल} = l \times l = 0.1 \times 0.1 = 0.01 \text{ m}^2 \)
मान रखने पर:
\( \tau = 20 \times 12 \times 0.80 \times 0.01 \times \sin 30^\circ \)
\( \tau = 0.96 \text{ N m} \)
अतः, कुंडली पर लगने वाले बल-युग्म आघूर्ण का परिमाण \( 0.96 \text{ N m} \) है।
मुख्य बिंदु:
• कुंडली पर बल-युग्म आघूर्ण का सूत्र \( \tau = n I A B \sin\theta \) होता है।
• क्षेत्रफल \( A \) वर्गाकार होने के कारण भुजा का वर्ग होता है।
• कोण अभिलम्ब और चुंबकीय क्षेत्र के बीच का दिया गया है, इसलिए सीधे \( \sin\theta \) का प्रयोग करते हैं।
आम गलतियाँ:
• क्षेत्रफल निकालते समय सेंटीमीटर को मीटर में न बदलना।
• फेरों की संख्या से गुणा करना भूल जाना।
• कोण का चयन गलत करना (तल और क्षेत्र के बीच का कोण दिया हो तो \( 90^\circ - \theta \) लेना होता है, पर यहाँ अभिलम्ब का कोण दिया है)।
Exam Tips:
a) ध्यान दें कि कोण 'अभिलम्ब' के साथ है या 'तल' के साथ।
b) आघूर्ण का मात्रक \( \text{N m} \) लिखना न भूलें।
c) गणना को ध्यान से हल करें।
Question 4.10: दो चल कुंडली गैल्वेनोमीटर मीटरों \( M_1 \) एवं \( M_2 \) के विवरण नीचे दिए गए हैं।
\( R_1 = 10 \ \Omega, N_1 = 30, A_1 = 3.6 \times 10^{-3} \text{ m}^2, B_1 = 0.25 \text{ T} \)
\( R_2 = 14 \ \Omega, N_2 = 42, A_2 = 1.8 \times 10^{-3} \text{ m}^2, B_2 = 0.50 \text{ T} \)
(दोनो मीटरों के लिए स्प्रिंग नियतांक समान है।)
(a) \( M_2 \) एवं \( M_1 \) की धारा-सुग्राहिताओं, (b) \( M_2 \) एवं \( M_1 \) की वोल्टता-सुग्राहिताओं का अनुपात ज्ञात कीजिए।
Answer:
चल कुंडली गैल्वेनोमीटर \( M_1 \) के लिए:
प्रतिरोध, \( R_1 = 10 \ \Omega \), फेरों की संख्या, \( N_1 = 30 \)
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल, \( A_1 = 3.6 \times 10^{-3} \text{ m}^2 \)
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता, \( B_1 = 0.25 \text{ T} \), स्प्रिंग नियतांक, \( K_1 = K \)
चल कुंडली गैल्वेनोमीटर \( M_2 \) के लिए:
प्रतिरोध, \( R_2 = 14 \ \Omega \), फेरों की संख्या, \( N_2 = 42 \)
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल, \( A_2 = 1.8 \times 10^{-3} \text{ m}^2 \)
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता, \( B_2 = 0.50 \text{ T} \), स्प्रिंग नियतांक, \( K_2 = K \)
(a) \( M_1 \) की धारा की प्रति सुग्राहिता:
\( I_{s1} = \frac{N_1 B_1 A_1}{K_1} \)
और, \( M_2 \) की धारा की प्रति सुग्राहिता:
\( I_{s2} = \frac{N_2 B_2 A_2}{K_2} \)
अनुपात:
\( \frac{I_{s2}}{I_{s1}} = \frac{N_2 B_2 A_2}{N_1 B_1 A_1} \times \frac{K_1}{K_2} \)
\( \frac{I_{s2}}{I_{s1}} = \frac{42 \times 0.5 \times 1.8 \times 10^{-3}}{30 \times 0.25 \times 3.6 \times 10^{-3}} \times \frac{K}{K} = 1.4 \)
अतः, \( M_2 \) का \( M_1 \) के साथ धारा सुग्राहिता का अनुपात \( 1.4 \) है।
(b) \( M_2 \) की वोल्टता सुग्राहिता:
\( V_{s2} = \frac{N_2 B_2 A_2}{K_2 R_2} \)
और \( M_1 \) की वोल्टता सुग्राहिता:
\( V_{s1} = \frac{N_1 B_1 A_1}{K_1 R_1} \)
अनुपात:
\( \frac{V_{s2}}{V_{s1}} = \frac{N_2 B_2 A_2 K_1 R_1}{N_1 B_1 A_1 K_2 R_2} \)
\( \frac{V_{s2}}{V_{s1}} = \frac{42 \times 0.5 \times 1.8 \times 10^{-3} \times 10}{30 \times 0.25 \times 3.6 \times 10^{-3} \times 14} = 1 \)
अतः, \( M_2 \) का \( M_1 \) के साथ वोल्टता सुग्राहिता का अनुपात \( 1 \) है।
मुख्य बिंदु:
• धारा सुग्राहिता \( I_s = \frac{N B A}{K} \) होती है।
• वोल्टता सुग्राहिता \( V_s = \frac{N B A}{K R} \) होती है।
• दोनों गैल्वेनोमीटर के लिए स्प्रिंग नियतांक \( K \) समान दिया गया है।
आम गलतियाँ:
• धारा और वोल्टता सुग्राहिता के सूत्रों में भ्रमित होना (वोल्टता में प्रतिरोध \( R \) से भाग देना भूल जाना)।
• \( M_2 \) और \( M_1 \) के अनुपात में मान ऊपर-नीचे रख देना।
• गणना में बड़ी संख्याओं और घातों को सरल करने में त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) पहले दोनों सुग्राहिताओं के मानक सूत्र अलग से लिखकर दिखाएं।
b) मानों को अनुपात के रूप में रखकर ही काटें, गणना आसान होगी।
c) सुग्राहिता का कोई मात्रक नहीं होता क्योंकि यह अनुपात है।
Question 4.11: एक प्रकोष्ट में \( 6.5 \text{ G} \) (\( 1 \text{ G} = 10^{-4} \text{ T} \)) का एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र बनाए रखा गया है। इस चुम्बकीय क्षेत्र में एक इलेक्ट्रॉन \( 4.8 \times 10^6 \text{ ms}^{-1} \) के वेग से क्षेत्र के लम्बवत् भेजा गया है। व्याख्या कीजिए कि इस इलेक्ट्रॉन का पथ वृत्ताकार क्यों होगा? वृत्ताकार कक्षा की त्रिज्या ज्ञात कीजिए।
(\( e = 1.6 \times 10^{-19} \text{ C}, m_e = 9.1 \times 10^{-31} \text{ kg} \))
Answer:
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता, \( B = 6.5 \text{ G} = 6.5 \times 10^{-4} \text{ T} \)
इलेक्ट्रॉन का वेग, \( v = 4.8 \times 10^6 \text{ m/s} \)
इलेक्ट्रॉन पर आवेश, \( e = 1.6 \times 10^{-19} \text{ C} \)
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, \( m_e = 9.1 \times 10^{-31} \text{ kg} \)
प्रक्षेपिट इलेक्ट्रॉन और चुम्बकीय क्षेत्र के बीच का कोण, \( \theta = 90^\circ \)
चुम्बकीय क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला चुम्बकीय बल:
\( F = e v B \sin\theta \)
यह बल इलेक्ट्रॉन को केंद्र अभिसारी बल प्रदान करता है। इस प्रकार, इलेक्ट्रॉन वृत्ताकार पथ में गति करने लगता है जिसकी त्रिज्या \( r \) है।
साम्यावस्था में, इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला केंद्र अभिसारी बल चुम्बकीय बल के बराबर होगा, अर्थात:
\( F_c = F \)
\( \frac{m v^2}{r} = e v B \sin\theta \)
\( r = \frac{m v}{e B \sin\theta} \)
मान रखने पर:
\( r = \frac{9.1 \times 10^{-31} \times 4.8 \times 10^6}{6.5 \times 10^{-4} \times 1.6 \times 10^{-19} \times \sin 90^\circ} \)
\( r = 4.2 \times 10^{-2} \text{ m} = 4.2 \text{ cm} \)
अतः, वृत्ताकार कक्षा की त्रिज्या \( 4.2 \text{ cm} \) है।
मुख्य बिंदु:
• जब आवेशित कण चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत प्रवेश करता है, तो लॉरेंज बल अभिकेंद्र बल प्रदान करता है जिसके कारण पथ वृत्ताकार होता है।
• त्रिज्या का सूत्र \( r = \frac{mv}{qB} \) होता है।
• गॉस (Gauss) को टेसला (Tesla) में बदलना आवश्यक है (\( 1 \text{ G} = 10^{-4} \text{ T} \) ।
आम गलतियाँ:
• गॉस को टेस्ला में बदलना भूल जाना।
• वृत्ताकार पथ होने का कारण (अभिकेंद्र बल) स्पष्ट न करना।
• घातों (Powers of 10) की गणना में गलती करना।
Exam Tips:
a) सैद्धांतिक भाग ("व्याख्या कीजिए...") के लिए एक-दो पंक्तियाँ अवश्य लिखें।
b) त्रिज्या के सूत्र की व्युत्पत्ति संक्षिप्त में दिखाएं।
c) उत्तर को सेंटीमीटर में बदलकर भी लिख सकते हैं।
Question 4.12: प्रश्न 4.11 में, वृत्ताकार कक्षा में इलेक्ट्रॉन की परिक्रमण आवृत्ति प्राप्त कीजिए। क्या यह उत्तर इलेक्ट्रॉन के वेग पर निर्भर करता है? व्याख्या कीजिए।
Answer:
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता, \( B = 6.5 \times 10^{-4} \text{ T} \)
इलेक्ट्रॉन पर आवेश, \( e = 1.6 \times 10^{-19} \text{ C} \)
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, \( m_e = 9.1 \times 10^{-31} \text{ kg} \)
इलेक्ट्रॉन का वेग, \( v = 4.8 \times 10^6 \text{ m/s} \)
कक्षा की त्रिज्या, \( r = 4.2 \text{ cm} = 0.042 \text{ m} \)
इलेक्ट्रॉन की परिक्रमण की आवृत्ति = \( \nu \)
इलेक्ट्रॉन की कोणीय आवृत्ति = \( \omega = 2\pi\nu \)
परिक्रमण की आवृत्ति से सम्बन्ध इलेक्ट्रॉन का वेग, \( v = r\omega \)
वृत्ताकार कक्षा में, इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला केंद्र अभिसारी बल चुम्बकीय बल के बराबर होगा, इस प्रकार, हम लिख सकते हैं:
\( \frac{m v^2}{r} = e v B \)
\( \frac{m v}{r} = e B \Rightarrow \frac{m (r\omega)}{r} = e B \Rightarrow m (2\pi\nu) = e B \)
\( \nu = \frac{e B}{2\pi m} \)
यह अभिव्यक्ति दिखाता है कि आवृत्ति उसके वेग से स्वतंत्र है।
उपरोक्त सूत्र में सभी ज्ञात मान रखने पर, आवृत्ति प्राप्त कर सकते हैं:
\( \nu = \frac{6.5 \times 10^{-4} \times 1.6 \times 10^{-19}}{2 \times 3.14 \times 9.1 \times 10^{-31}} = 1.82 \times 10^6 \text{ Hz} \approx 18 \text{ MHz} \)
अतः, इलेक्ट्रॉन की आवृत्ति लगभग \( 18 \text{ MHz} \) है, जो कि उसके वेग से स्वतंत्र है।
मुख्य बिंदु:
• साइक्लोट्रॉन आवृत्ति का सूत्र \( \nu = \frac{qB}{2\pi m} \) होता है।
• यह आवृत्ति इलेक्ट्रॉन के वेग \( v \) या त्रिज्या \( r \) पर निर्भर नहीं करती है।
• आवृत्ति का मात्रक हर्ट्ज (Hz) होता है।
आम गलतियाँ:
• वेग पर निर्भरता के प्रश्न के सैद्धांतिक हिस्से को छोड़ देना।
• आवृत्ति के सूत्र में \( 2\pi \) लिखना भूल जाना।
• इकाई MHz में बदलते समय गणना त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) स्पष्ट रूप से लिखें कि आवृत्ति वेग पर निर्भर नहीं करती है।
b) सूत्र की व्युत्पत्ति को संक्षिप्त रूप में अवश्य दर्शाएं।
c) अंतिम उत्तर को मेगाहर्ट्ज (MHz) में प्रदर्शित करना बेहतर होता है।
Question 4.13: (a) 30 फेरोंं वाली एक वृत्ताकार कुंडली जिसकी त्रिज्या \( 8.0 \text{ cm} \) है और जिसमें \( 6.0 \text{ A} \) विधुयत धारा प्रवाहित हो रही है, \( 1.0 \text{ T} \) के एकसमान क्षैतिज चुम्बकीय क्षेत्र में ऊर्ध्वाधरतः लटकी है। क्षेत्र रेखाएँ कुंडली के अभिलम्ब से \( 60^\circ \) का कोण बनाती हैं। कुंडली को घूमने से रोकने के लिए जो प्रति आघूर्ण लगाया जाना चाहिए उसके परिमाण परिकलित कीजिए।
(b) यदि (a) में बतायी गई वृत्ताकार कुंडली को उसी क्षेत्रफल की अनियमित आकृति की समतलीय कुंडली से प्रतिस्थापित कर दिया जाए (शेष सभी विवरण अपरिवर्तित रहे) तो क्या आपका उत्तर परिवर्तित हो जाएगा?
Answer:
(a) वृत्ताकार कुंडली पर फेरों की संख्या, \( n = 30 \)
कुंडली की त्रिज्या, \( r = 8.0 \text{ cm} = 0.08 \text{ m} \)
कुंडली का क्षेत्रफल, \( \pi r^2 = \pi (0.08)^2 = 0.0201 \text{ m}^2 \)
कुंडली में प्रवाहित धारा, \( I = 6.0 \text{ A} \)
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता, \( B = 1 \text{ T} \)
क्षेत्र रेखाओं और लम्बवत के साथ कुंडली सतह का कोण, \( \theta = 60^\circ \)
चुम्बकीय क्षेत्र में कुंडली द्वारा आघूर्ण महसूस किया जाता है। इसलिए यह घूमती है।
कुंडली पर लगने वाला प्रति आघूर्ण जो कि कुंडली को घुमाने से रोकता है को निम्न सम्बन्ध से प्रदर्शित किया जा सकता है:
\( \tau = n I B A \sin\theta \) ... (1)
\( = 30 \times 6 \times 1 \times 0.0201 \times \sin 60^\circ = 3.133 \text{ N m} \)
(b) समीकरण (1) में दिए सम्बन्ध से यह निष्कर्ष निकल सकता है कि लगने वाले आघूर्ण का परिमाण कुंडली के आकार से स्वतंत्र है। यह कुंडली के क्षेत्रफल पर निर्भर करता है। यदि वृत्ताकार कुंडली को आयताकार कुंडली से बदल देते हैं जिसका क्षेत्रफल समान हो तो इस प्रकार, परिणाम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
मुख्य बिंदु:
• चुंबकीय क्षेत्र में धारावाही कुंडली पर बल-आघूर्ण \( \tau = NIAB\sin\theta \) होता है।
• आघूर्ण का मान कुंडली के आकार या आकृति पर निर्भर नहीं करता, बल्कि उसके क्षेत्रफल पर निर्भर करता है।
• \( \sin 60^\circ \) का मान \( \frac{\sqrt{3}}{2} \) उपयोग किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• अनियमित आकार होने पर क्षेत्रफल बदल जाने की गलतफहमी पालना (जबकि प्रश्न में क्षेत्रफल समान कहा गया है)।
• कोण \( \theta \) को गलत रखना।
• मात्रक \( \text{N m} \) न लिखना।
Exam Tips:
a) भाग (b) का वैचारिक उत्तर स्पष्ट रूप से दें कि क्षेत्रफल समान रहने पर आघूर्ण नहीं बदलता।
b) गणना के चरणों को साफ-सुथरा लिखें।
c) आवश्यक सूत्र को समीकरण (1) के रूप में अंकित करें।
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