NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 04 Moving Charges and Magnetism (गतिमान आवेश और चुंबकत्व) Additional Questions in Hindi

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Question 4.14: दो समकेन्द्र वृत्ताकार कुंडलियाँ X और Y जिनकी त्रिज्याएँ क्रमशः \( 16\text{ cm} \) एवं \( 10\text{ cm} \) हैं, उत्तर-दक्षिण दिशा में समान ऊर्ध्वाधर तल में अवस्थित हैं। कुंडली X में \( 20 \) फेरे हैं और इसमें \( 16\text{ A} \) विधुत धारा प्रवाहित हो रही है, कुंडली Y में \( 25 \) फेरे हैं और इसमें \( 18\text{ A} \) विधुत धारा प्रवाहित हो रही है। पश्चिम की ओर मुख करके खड़ा एक प्रेक्षक देखता है कि X में धारा प्रवाह वामावर्त है जबकि Y में दक्षिणावर्त है। कुंडलियों के केन्द्र पर, उनमें प्रवाहित विधुत धाराओं के कारण उत्पन्न कुल चुम्बकीय क्षेत्र का परिमाण एवं दिशा ज्ञात कीजिए।

Answer:

कुंडली X की त्रिज्या, \( r_1 = 16\text{ cm} = 0.16\text{ m} \)
कुंडली X की फेरों की संख्या, \( n_1 = 20 \)
कुंडली X में धारा, \( I_1 = 16\text{ A} \)
कुंडली Y की त्रिज्या, \( r_2 = 10\text{ cm} = 0.1\text{ m} \)
कुंडली Y की फेरों की संख्या, \( n_2 = 25 \)
कुंडली Y में धारा, \( I_2 = 18\text{ A} \)
कुंडली X के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र का सूत्र:
\( B_1 = \frac{\mu_0 n_1 I_1}{2r_1} \)
जहाँ, \( \mu_0 = 4\pi \times 10^{-7}\text{ T m A}^{-1} \)
\( B_1 = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 20 \times 16}{2 \times 0.16} \)
\( B_1 = 4\pi \times 10^{-4}\text{ T} \) (पूर्व दिशा की ओर)
कुंडली Y के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र का सूत्र:
\( B_2 = \frac{\mu_0 n_2 I_2}{2r_2} \)
\( B_2 = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 25 \times 18}{2 \times 0.10} \)
\( B_2 = 9\pi \times 10^{-4}\text{ T} \) (पूर्व दिशा की ओर)
इस प्रकार, कुल चुम्बकीय क्षेत्र:
\( B = B_2 - B_1 = 9\pi \times 10^{-4}\text{ T} - 4\pi \times 10^{-4}\text{ T} \)
\( B = 5\pi \times 10^{-4}\text{ T} \)
\( B = 5 \times 3.14 \times 10^{-4}\text{ T} = 1.57 \times 10^{-3}\text{ T} \) (पूर्व दिशा की ओर)

मुख्य बिंदु:

• वृत्ताकार कुंडली के केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र धारा और फेरों की संख्या के समानुपाती होता है।
• विपरीत दिशा में धारा होने पर चुंबकीय क्षेत्र आपस में घट जाते हैं।
• दाएं हाथ के नियम से चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात की जाती है।

आम गलतियाँ:

• सेंटीमीटर को मीटर में बदलना भूल जाना।
• क्षेत्र की दिशा का सही निर्धारण न करना।
• फेरों की संख्या को सूत्र में शामिल न करना।

Exam Tips:

a) सभी राशियों को एस.आई. (SI) मात्रक में बदलें।
b) गणना करते समय \( \pi \) का मान अंत में रखें।
c) परिणामी क्षेत्र के साथ दिशा लिखना न भूलें।

 

Question 4.15: \( 10\text{ cm} \) लम्बाई और \( 10^{-3}\text{ m}^2 \) अनुप्रस्थ काट के एक क्षेत्र में \( 100\text{ G} \) (\( 1\text{ G} = 10^{-4}\text{ T} \)) का एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र चाहिए। जिस तार से परिनालिका का निर्माण करना है उसमें अधिकतम \( 15\text{ A} \) विधुत धारा प्रवाहित हो सकती है और क्रोड पर अधिकतम \( 1000 \) फेरे प्रति मीटर लपेटे जा सकते हैं। इस उद्देश्य के लिए परिनालिका के निर्माण का विवरण सुझाइए। यह मान लीजिए कि क्रोड लौह-चुम्बकीय नहीं है।

Answer:

चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता, \( B = 100\text{ G} = 100 \times 10^{-4}\text{ T} \)
प्रति इकाई लम्बाई पर फेरों की संख्या, \( n = 1000\text{ फेरे प्रति मीटर} \)
कुंडली में प्रवाहित धारा, \( I = 15\text{ A} \)
मुक्त आकाश की परा वैद्युतांक, \( \mu_0 = 4\pi \times 10^{-7}\text{ T m A}^{-1} \)
चुम्बकीय क्षेत्र का सूत्र:
\( B = \mu_0 n I \)
\( n I = \frac{B}{\mu_0} = \frac{100 \times 10^{-4}}{4\pi \times 10^{-7}} = 7957.74 \approx 8000\text{ Am}^{-1} \)
यदि कुंडली की लम्बाई \( 50\text{ cm} \), त्रिज्या \( 4\text{ cm} \), \( 400 \) फेरे और धारा \( 10\text{ A} \) लें, तो ये मान दिए गए उद्देश्य के लिए अद्वितीय नहीं है। सीमा के अन्दर बदलाव करके इस तरह की सम्भावना को प्राप्त किया जा सकता है।

मुख्य बिंदु:

• परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र एकसमान होता है।
• यह क्षेत्र धारा और प्रति इकाई लंबाई फेरों पर निर्भर करता है।
• व्यावहारिक डिज़ाइन के लिए कई विकल्प संभव हैं।

आम गलतियाँ:

• गॉस (Gauss) को टेस्ला में बदलना भूल जाना।
• इकाई लंबाई के फेरों की परिभाषा में गलती करना।
• विशिष्ट मान को ही एकमात्र सही उत्तर मान लेना।

Exam Tips:

a) परिनालिका के मानक सूत्रों को अच्छी तरह याद रखें।
b) मानों के चयन में भौतिक सीमाओं का ध्यान रखें।
c) स्पष्ट रूप से बताएं कि उत्तर अद्वितीय नहीं है।

 

Question 4.16: (a) धारावाही, \( N \) फेरों और \( R \) त्रिज्या वाली वृत्ताकार कुंडली के लिए, इसके अक्ष पर, केन्द्र से \( x \) दूरी पर स्थित किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र के लिए निम्नलिखित व्यंजक है: \( B = \frac{\mu_0 I R^2 N}{2(x^2 + R^2)^{3/2}} \). स्पष्ट कीजिए, इससे कुंडली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र के लिए सुपरिचित परिणाम कैसे प्राप्त किया जा सकता है?
(b) बराबर त्रिज्या \( R \), एवं फेरों की संख्या \( N \) वाली दो वृत्ताकार कुंडलियाँ एक-दूसरे से \( R \) दूरी पर एक-दूसरे के समान्तर, अक्ष मिलाकर रखी गई हैं। दोनों में समान विधुत धारा एक ही दिशा में प्रवाहित हो रही है। दर्शाइए कि कुंडलियों के अक्ष के लगभग मध्यबिन्दु पर क्षेत्र, एक बहुत छोटी दूरी के लिए जो कि \( R \) से कम है, एकसमान है और इस क्षेत्र का लगभग मान निम्नलिखित है: \( B = 0.72 \frac{\mu_0 N I}{R} \). बहुत छोटे से क्षेत्र पर एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए बनाई गई ऊपर वर्णित व्यवस्था हेल्महोल्ज कुंडलियों के नाम से जानी जाती है।

Answer:

(a) वृत्ताकार कुंडली की त्रिज्या = \( R \)
कुंडली पर फेरों की संख्या = \( N \)
कुंडली में धारा = \( I \)
अक्ष पर दूरी \( x \) पर चुंबकीय क्षेत्र:
\( B = \frac{\mu_0 I R^2 N}{2(x^2 + R^2)^{3/2}} \)
यदि चुम्बकीय क्षेत्र को कुंडली के केंद्र पर माना जाय, तो \( x = 0 \) होगा।
\( B = \frac{\mu_0 I R^2 N}{2(0^2 + R^2)^{3/2}} = \frac{\mu_0 I R^2 N}{2R^3} = \frac{\mu_0 I N}{2R} \)
यह कुंडली के केन्द्र पर चुम्बकीय क्षेत्र का ज्ञात परिमाण है।
(b) दो वृत्ताकार समानांतर संकेन्द्रित कुंडलियों की त्रिज्याएँ = \( R \)
प्रत्येक कुंडली पर फेरों की संख्या = \( N \)
दोनों कुंडलियों में धारा = \( I \)
दोनों कुंडलियों के बीच दूरी = \( R \)
यदि हम बिंदु Q को केंद्र से \( d \) दूरी पर मानते हैं, तो एक कुंडली की बिंदु Q से दूरी \( \frac{R}{2} + d \) है तथा दूसरी कुंडली की दूरी \( \frac{R}{2} - d \) है।
कुल चुम्बकीय क्षेत्र \( B = B_1 + B_2 \)
\( B = \frac{\mu_0 N I R^2}{2} \left[ \left( \left(\frac{R}{2} - d\right)^2 + R^2 \right)^{-3/2} + \left( \left(\frac{R}{2} + d\right)^2 + R^2 \right)^{-3/2} \right] \)
\( d \ll R \) मानने पर, द्विपद प्रमेय का उपयोग करने पर:
\( B \approx \left(\frac{4}{5}\right)^{3/2} \frac{\mu_0 N I}{R} = 0.72 \frac{\mu_0 N I}{R} \)
इस प्रकार, यह सिद्ध होता है कि कुंडलियों के बीच अक्ष पर मध्य बिंदु के चारों तरफ क्षेत्र एकसमान होता है।

मुख्य बिंदु:

• केंद्र पर निकालने के लिए अक्षीय सूत्र में \( x = 0 \) रखते हैं।
• हेल्महोल्ज कुंडलियाँ एकसमान चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करने के लिए उपयोग होती हैं।
• इसमें दोनों कुंडलियों के बीच की दूरी उनकी त्रिज्या के बराबर होती है।

आम गलतियाँ:

• \( x = 0 \) रखते समय घातों का सही कैलकुलेशन न करना।
• द्विपद प्रमेय लगाते समय उच्च घातों को न छोड़ना।
• दोनों कुंडलियों के योगदान को जोड़ना भूल जाना।

Exam Tips:

a) विशेष स्थितियों (\( x = 0 \) आदि) के लिए सूत्रों का सत्यापन करना सीखें।
b) हेल्महोल्ज कुंडलियों की शर्त \( d = R \) को हमेशा याद रखें।
c) व्युत्पत्ति के चरणों को क्रमबद्ध रूप से लिखें।

 

Question 4.17: एक टोरॉइड के (अलौह चुम्बकीय) क्रोड की आन्तरिक त्रिज्या \( 25\text{ cm} \) और बाह्य त्रिज्या \( 26\text{ cm} \) है। इसके ऊपर किसी तार के \( 3500 \) फेरे लपेटे गए हैं। यदि तार में प्रवाहित विधुत धारा \( 11\text{ A} \) हो तो चुम्बकीय क्षेत्र को मान क्या होगा? (i) टोरॉइड के बाहर, (ii) टोरॉइड के क्रोड में, (iii) टोरॉइड द्वारा पिरी हुई खाली जगह में।

Answer:

टोरॉइड की आंतरिक त्रिज्या, \( r_1 = 25\text{ cm} = 0.25\text{ m} \)
टोरॉइड की बाहरी त्रिज्या, \( r_2 = 26\text{ cm} = 0.26\text{ m} \)
कुंडली पर फेरों की संख्या, \( N = 3500 \)
कुंडली में धारा, \( I = 11\text{ A} \)
(i) टोरॉइड के बाहर चुम्बकीय क्षेत्र शून्य है। केवल टोरॉइड की कोर के अन्दर यह शून्य नहीं है।
(ii) टोरॉइड के कोर के अन्दर चुम्बकीय क्षेत्र का सूत्र:
\( B = \mu_0 n I \)
जहाँ, \( n = \frac{N}{2\pi r} \) और औसत त्रिज्या \( r = \frac{r_1 + r_2}{2} = \frac{0.25 + 0.26}{2} = 0.255\text{ m} \) (या औसत परिधि के साथ हल करें)
\( \text{टोरॉइड की लम्बाई} = 2\pi \left(\frac{r_1 + r_2}{2}\right) = \pi(0.25 + 0.26) = 0.51\pi \)
\( B = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 3500 \times 11}{0.51\pi} \)
\( B = \frac{4 \times 10^{-7} \times 3500 \times 11}{0.51} = 3.0 \times 10^{-2}\text{ T} \)
(iii) टोरॉइड के बाहर शून्य आकाश में चुम्बकीय क्षेत्र शून्य है।

मुख्य बिंदु:

• टोरॉइड के बाहर और उसके द्वारा घिरे खाली स्थान में चुंबकीय क्षेत्र शून्य होता है।
• टोरॉइड के भीतर चुंबकीय क्षेत्र उसकी औसत त्रिज्या पर निर्भर करता है।
• एम्पीयर के परिपथीय नियम से इसका सूत्र प्राप्त किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• आंतरिक और बाह्य त्रिज्या की जगह औसत त्रिज्या न निकालना।
• बाहर और भीतर के क्षेत्र को एक जैसा मान लेना।
• \( \pi \) के कटने पर ध्यान न देना।

Exam Tips:

a) टोरॉइड के विभिन्न क्षेत्रों (भीतर, बाहर, क्रोड) के परिणाम याद रखें।
b) औसत त्रिज्या निकालने के लिए दोनों त्रिज्याओं का औसत लें।
c) मात्रक (Tesla) लिखना न भूलें।

 

Question 4.18: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
(a) किसी प्रकोक्ष में एक ऐसा चुम्बकीय क्षेत्र स्थापित किया गया है जिसका परिमाण तो एक बिन्दु पर बदलता है, पर दिशा निश्चित है। (पूर्व से पश्चिम) इस प्रकोक्ष में एक आवेशित कण प्रवेश करता है और अवकलित एक सरल रेखा में अचर वेग से चलता रहता है। आप कण के प्रारम्भिक वेग के बारे में क्या कह सकते हैं?
(b) एक आवेशित कण, एक ऐसे शक्तिशाली असमान चुम्बकीय क्षेत्र में प्रवेश करता है। जिसका परिमाण एवं दिशा दोनों एक बिन्दु से दूसरे बिन्दु पर बदलते जाते हैं, एक जटिल पथ पर चलते हुए इसके बाहर आ जाता है। यदि यह मान लें कि चुम्बकीय क्षेत्र में इसका किसी भी दूसरे कण से कोई संघट्ट नहीं होता तो क्या इसकी अन्तिम चाल, प्रारम्भिक चाल के बराबर होगी?
(c) पश्चिम से पूर्व की ओर चलता हुआ एक इलेक्ट्रॉन ऐसे प्रकोक्ष में प्रवेश करता है। जिसमें उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर और एकसमान एक विधुत क्षेत्र है। वह दिशा बताइए जिसमें एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र स्थापित किया जाए ताकि कि इलेक्ट्रॉन अपने रेखीय पथ से विचलित होने से रोका जा सके।

Answer:

(a) कण का प्रारंभिक वेग या तो समानांतर है या चुंबकीय क्षेत्र के विपरीत दिशा में है। इसलिए, यह क्षेत्र में किसी भी विक्षेपण को प्रभावित किए बिना एक सीधी रेखा में गमन करता है।
(b) हाँ, आवेशित कण का अंतिम वेग इसके प्रारंभिक वेग के बराबर होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि चुंबकीय बल वेग की दिशा बदल सकता है, लेकिन इसकी परिमाण नहीं।
(c) पश्चिम से पूर्व की ओर जाने वाला एक इलेक्ट्रॉन उत्तर-दक्षिण दिशा में एक समान स्थिरवैद्युत क्षेत्र वाले एक कक्ष में प्रवेश करता है। यह गतिमान इलेक्ट्रॉन विविक्षेप के बिना रह सकता है यदि उस पर कार्य करने वाला विधुत क्षेत्र चुंबकीय क्षेत्र के बराबर और विपरीत हो। चुंबकीय क्षेत्र को दक्षिण की ओर निर्देशित किया जाना है। फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम के अनुसार, चुंबकीय क्षेत्र को लंबवत नीचे की दिशा में लागू किया जाना चाहिए।

मुख्य बिंदु:

• चुंबकीय बल आवेशित कण की गति की दिशा बदलता है, चाल नहीं।
• यदि वेग चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर हो, तो कोई बल नहीं लगता।
• लॉरेंज बल संतुलन के लिए विधुत और चुंबकीय बल बराबर होने चाहिए।

आम गलतियाँ:

• वेग और चाल के अंतर को न समझना।
• फ्लेमिंग के नियम में दिशाएं गलत देखना।
• चुंबकीय बल द्वारा किए गए कार्य को शून्य न समझना।

Exam Tips:

• वैचारिक प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट और तार्किक रूप से दें।
• चुंबकीय बल के गुणों (कार्य = शून्य) को ध्यान में रखें।
• दाएं/बाएं हाथ के नियमों का अभ्यास करें।

 

Question 4.19: ऊष्मित कैथोड से उत्सर्जित और \( 2.0\text{ kV} \) के विभवांतर पर त्वरित एक इलेक्ट्रॉन \( 0.15\text{ T} \) के एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में प्रवेश करता है। इलेक्ट्रॉन का दव्यमान ज्ञात कीजिए यदि चुम्बकीय क्षेत्र (a) प्रारम्भिक वेग के लम्बवत है, (b) प्रारम्भिक वेग की दिशा से \( 30^\circ \) का कोण बनाता है।

Answer:

चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता, \( B = 0.15\text{ T} \)
इलेक्ट्रॉन पर आवेश, \( e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C} \)
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, \( m = 9.1 \times 10^{-31}\text{ kg} \)
विभवांतर, \( V = 2.0\text{ kV} = 2 \times 10^3\text{ V} \)
इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा = \( eV \)
\( eV = \frac{1}{2}mv^2 \Rightarrow v = \sqrt{\frac{2eV}{m}} \dots(1) \)
(a) इलेक्ट्रॉन पर चुंबकीय बल आवश्यक केंद्राभिसारी बल प्रदान करता है।
\( Bev = \frac{mv^2}{r} \Rightarrow r = \frac{mv}{Be} \dots(2) \)
समीकरण (1) और (2) से:
\( r = \frac{m}{Be} \sqrt{\frac{2eV}{m}} = \frac{1}{B} \sqrt{\frac{2mV}{e}} \)
\( r = \frac{1}{0.15 \times 1.6 \times 10^{-19}} \sqrt{\frac{2 \times 9.1 \times 10^{-31} \times 2 \times 10^3}{1.6 \times 10^{-19}}} = 1.01 \times 10^{-3}\text{ m} = 1\text{ mm} \)
(b) जब चुम्बकीय क्षेत्र प्रारंभिक वेग की दिशा के साथ \( 30^\circ \) का कोण बनाता है, तो वेग का लम्बवत घटक \( v_1 = v\sin\theta \) होगा।
\( r_1 = \frac{mv_1}{Be} = \frac{mv\sin\theta}{Be} \)
\( r_1 = \frac{1}{0.15 \times 1.6 \times 10^{-19}} \sqrt{\frac{2 \times 9.1 \times 10^{-31} \times 2 \times 10^3}{1.6 \times 10^{-19}}} \times \sin 30^\circ = 0.5 \times 10^{-3}\text{ m} = 0.5\text{ mm} \)
पिच (Pitch) का मान भी इसी प्रकार निकाला जा सकता है।

मुख्य बिंदु:

• त्वरित विभवांतर से इलेक्ट्रॉन का वेग निकाला जाता है।
• लंबवत प्रवेश पर कण वृत्ताकार पथ बनाता है।
• किसी कोण पर प्रवेश करने पर पथ कुंडलिनी (helical) होता है।

आम गलतियाँ:

• किलोवोल्ट को वोल्ट में बदलना भूल जाना।
• वेग के घटक (sin और cos) गलत लेना।
• त्रिज्या के सूत्र में मान गलत प्रतिस्थापित करना।

Exam Tips:

a) ऊर्जा संरक्षण (\( eV = \frac{1}{2}mv^2 \)) का सही उपयोग करें।
b) कुंडलिनी पथ के प्रश्नों में त्रिज्या और पिच दोनों के सूत्र याद रखें।
c) गणनाओं में घातों (powers of 10) का विशेष ध्यान रखें।

 

Question 4.20: प्रश्न 4.16 में वर्णित हेल्महोल्ज कुंडलियों का उपयोग करके किसी लघुक्षेत्र में \( 0.75\text{ T} \) का एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र स्थापित किया है। इसी क्षेत्र में कोई एकसमान स्थिरविधुत क्षेत्र कुंडलियों के उभयनिष्ठ अक्ष के लम्बवत लगाया जाता है। (एक ही प्रकार के) आवेशित कण का \( 15\text{ kV} \) विभवांतर पर त्वरित एक संकीर्ण किरण पुंज इस क्षेत्र में दोनों कुंडलियों के अक्ष तथा स्थिरविधुत क्षेत्र की लम्बवत दिशा के अनुदिश प्रवेश करता है। यदि यह किरण पुंज \( 9.0 \times 10^{-5}\text{ Vm}^{-1} \), स्थिरविधुत क्षेत्र में विक्षेपित रहता है तो यह अनुमान लगाइए कि किरण पुंज में कौन से कण हैं। यह स्पष्ट कीजिए कि यह उत्तर एकमात्र उत्तर क्यों नहीं है?

Answer:

चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता, \( B = 0.75\text{ T} \)
इलेक्ट्रॉन पर आवेश = \( e \)
इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = \( m \)
त्वरण वोल्टता, \( V = 15\text{ kV} = 15 \times 10^3\text{ V} \)
स्थिरविधुत क्षेत्र, \( E = 9 \times 10^5\text{ V m}^{-1} \)
इलेक्ट्रॉन का वेग = \( v \)
\( eV = \frac{1}{2}mv^2 \Rightarrow v^2 = \frac{2eV}{m} \dots(1) \)
कण विधुत और चुम्बकीय क्षेत्र से अविष्कृत रहता है, अत: वेग संकोच निकाल सकते हैं क्योंकि विधुत क्षेत्र और चुम्बकीय क्षेत्र एक दूसरे को संतुलित कर रहे हैं:
\( eE = evB \Rightarrow v = \frac{E}{B} \dots(2) \)
समीकरण (2) का मान समीकरण (1) में रखने पर:
\( \frac{e}{m} = \frac{E^2}{2VB^2} = \frac{(9.0 \times 10^5)^2}{2 \times 15000 \times (0.75)^2} = 4.8 \times 10^7\text{ C/kg} \)
विशिष्ट चार्ज \( e/m \) का यह मान ड्यूट्रॉनों या ड्यूटेरियम आयनों के मान के बराबर है। इसके अतिरिक्त अन्य संभावित उत्तर \( \text{He}^+, \text{Li}^{++} \) आदि हैं।

मुख्य बिंदु:

• वेग वर्णकता (Velocity selector) के सिद्धांत का उपयोग किया जाता है।
• विधुत बल और चुंबकीय बल एक-दूसरे को संतुलित करते हैं (\( v = E/B \)).
• विशिष्ट आवेश (\( e/m \)) से कण की पहचान की जाती है।

आम गलतियाँ:

• संतुलन की शर्त \( E = vB \) न लगाना।
• विशिष्ट आवेश के मात्रक में गलती करना।
• यह मान लेना कि केवल एक ही प्रकार का कण संभव है।

Exam Tips:

a) वेग वर्णकता के व्यंजक \( v = E/B \) को अच्छी तरह समझें।
b) विशिष्ट आवेश की गणना सावधानी से करें।
c) स्पष्ट करें कि समान \( e/m \) अनुपात वाले कई कण हो सकते हैं।

 

Question 4.21: एक सीधी, क्षितिज चालक छड़ जिसकी लम्बाई \( 0.45\text{ cm} \) एवं द्रव्यमान \( 60\text{ g} \) है। इसके सिरों पर जुड़े दो ऊर्ध्वाधर तारों पर लटकी हुई है। तारों से होकर छड़ में \( 5.0\text{ A} \) विधुत धारा प्रवाहित हो रही है।
(a) चालक के लम्बवत कितना चुम्बकीय क्षेत्र लगाया जाए कि तारों में तनाव शून्य हो जाए।
(b) चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा यथावत रखते हुए यदि विधुत धारा की दिशा उल्लमित कर दी जाए तो तारों में कुल आवेश कितना होगा? (तारों के द्रव्यमान की उपेक्षा कीजिए।) (\( g = 9.8\text{ ms}^{-2} \))

Answer:

छड़ की लम्बाई, \( l = 0.45\text{ m} \)
द्रव्यमान, \( m = 60\text{ g} = 60 \times 10^{-3}\text{ kg} \)
गुरुत्वाकर्षण, \( g = 9.8\text{ m/s}^2 \)
धारा, \( I = 5\text{ A} \)
(a) चुम्बकीय क्षेत्र (B) तार के भार के बराबर और विपरीत है, \( BIl = mg \)
\( B = \frac{mg}{Il} = \frac{60 \times 10^{-3} \times 9.8}{5 \times 0.45} = 0.26\text{ T} \)
तार में शून्य तनाव प्राप्त करने के लिए कंडक्टर की लंबाई के लिए सामान्य \( 0.26\text{ T} \) का एक क्षैतिज चुंबकीय क्षेत्र स्थापित किया जाना चाहिए। चुंबकीय क्षेत्र ऐसा होना चाहिए कि फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम के अनुसार चुंबकीय बल ऊपर की दिशा में हो।
(b) यदि धारा की दिशा विपरीत कर दें, तो चुंबकीय क्षेत्र के कारण बल और तार का वजन नीचे की दिशा में कार्य करता है।
तार में कुल तनाव = \( BIl + mg = 0.26 \times 5 \times 0.45 + (60 \times 10^{-3}) \times 9.8 = 1.176\text{ N} \)

मुख्य बिंदु:

• तनाव शून्य होने के लिए चुंबकीय बल गुरुत्वाकर्षण बल को संतुलित करता है।
• धारा की दिशा बदलने पर चुंबकीय बल की दिशा भी बदल जाती है।
• फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम से बल की दिशा निर्धारित होती है।

आम गलतियाँ:

• ग्राम को किलोग्राम में बदलना भूल जाना।
• धारा की दिशा उलटने पर बल की दिशा का प्रभाव गलत समझना।
• कुल तनाव निकालते समय दोनों बलों को न जोड़ना।

Exam Tips:

a) संतुलन की स्थिति में \( BIl = mg \) का उपयोग करें।
b) बल की दिशा ज्ञात करने के लिए हमेशा दाएं/बाएं हाथ के नियम का प्रयोग करें।
c) एस.आई. मात्रकों का सख्ती से पालन करें।

 

Question 4.22: एक स्वचालित वाहन की बैटरी से इसकी चलाने मोटर को जोड़ने वाले तारों में \( 300\text{ A} \text{ (अल्प काल के लिए)} \) प्रवाहित होती है। तारों के बीच प्रति एकांक लम्बाई पर कितना बल लगता है यदि इनकी लम्बाई \( 70\text{ cm} \) एवं बीच की दूरी \( 1.5\text{ cm} \) है। यह बल आकर्षण बल है या प्रतिकर्षण बल?

Answer:

दोनों तारों में, \( I = 300\text{ A} \)
तारों के बीच की दूरी, \( r = 1.5\text{ cm} = 0.015\text{ m} \)
तारों की लम्बाई, \( l = 70\text{ cm} = 0.7\text{ m} \)
दो समांतर धारावाही चालकों के बीच बल का सूत्र:
\( F = \frac{\mu_0 I_1 I_2 l}{2\pi r} \)
प्रति एकांक लंबाई पर बल (\( F/l \)) या कुल बल:
\( F = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times (300)^2 \times 0.7}{2\pi \times 0.015} = 1.2\text{ N} \)
चूँकि दोनों तारों में धारा की दिशा विपरीत है, दोनों के बीच प्रतिकर्षण बल कार्य करेगा।

मुख्य बिंदु:

• दो समांतर धारावाही चालकों के बीच चुंबकीय बल का सूत्र उपयोग होता है।
• समान दिशा की धारा वाले तार आकर्षित और विपरीत दिशा वाले प्रतिकर्षित करते हैं।
• प्रति एकांक लंबाई बल का सूत्र \( \frac{F}{l} = \frac{\mu_0 I_1 I_2}{2\pi r} \) है।

आम गलतियाँ:

• दूरी को मीटर में न बदलना।
• आकर्षण और प्रतिकर्षण की शर्त में भ्रमित होना।
• धारा के मान का वर्ग करना भूल जाना।

Exam Tips:

a) दिशा के आधार पर आकर्षण/प्रतिकर्षण तुरंत पहचानें।
b) गणना में \( \mu_0 \) का मान \( 4\pi \times 10^{-7} \) रखें।
c) मात्रक \( \text{N/m} \) या \( \text{N} \) स्पष्ट लिखें।

 

Question 4.23: \( 1.5\text{ T} \) का एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र, \( 10.0\text{ cm} \) त्रिज्या के बेलनाकार क्षेत्र में विद्यमान है। इसकी दिशा अक्ष के समान्तर पूर्व से पश्चिम की ओर है। एक तार जिसमें \( 7.0\text{ A} \text{ विधुत धारा प्रवाहित हो रही है। इस क्षेत्र में होकर उत्तर से दक्षिण की ओर गुजरती है। तार पर लगने वाले बल का परिमाण और दिशा क्या है, यदि} \)
(a) तार अक्ष को काटता हो,
(b) तार N-S दिशा से घुमाकर उत्तर पूर्व-उत्तर पश्चिम दिशा में कर दिया जाए,
(c) N-S दिशा में रखते हुए ही तार को अक्ष से \( 6.0\text{ cm} \) नीचे उतार दिया जाए।

Answer:

चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता, \( B = 1.5\text{ T} \)
बेलनाकार क्षेत्र की त्रिज्या, \( r = 10\text{ cm} = 0.1\text{ m} \)
बेलनाकार क्षेत्र से गुजरने वाले तार में धारा, \( I = 7\text{ A} \)
(a) यदि तार अक्ष को काटता है तो तार की लम्बाई बेलनाकार क्षेत्र के व्यास के बराबर होगी। ऐसे में,
\( l = 2r = 0.2\text{ m} \)
चुम्बकीय क्षेत्र और धारा के बीच बनने वाला कोण, \( \theta = 90^\circ \)
तार पर लगने वाले चुम्बकीय क्षेत्र को निम्न संबंध द्वारा दिया जाता है:
\( F = BIl\sin\theta = 1.5 \times 7 \times 0.2 \times \sin 90^\circ = 2.1\text{ N} \)
अतः, तार पर \( 2.1\text{ N} \) का बल लम्बवत नीचे की दिशा में कार्य करेगा।
(b) तार की दिशा उत्तर-पूर्व से उत्तर-पश्चिम करने पर नई लम्बाई होगी:
\( l_1 = \frac{l}{\sin\theta} \)
चुम्बकीय क्षेत्र और धारा के बीच का कोण, \( \theta = 45^\circ \)
तार पर लगने वाला बल:
\( F = BIl_1\sin\theta = BIl = 1.5 \times 7 \times 0.2 = 2.1\text{ N} \)
अतः, तार पर \( 2.1\text{ N} \) का बल लम्बवत नीचे की दिशा में कार्य करेगा।
(c) तार को \( d = 6.0\text{ cm} \) दूरी पर अक्ष के नीचे रखा जाता है, तो यदि तार की नई लम्बाई \( l_2 \) हो,
\( \left(\frac{l_2}{2}\right)^2 = r^2 - d^2 \Rightarrow l_2 = 2\sqrt{0.1^2 - 0.06^2} = 0.16\text{ m} \)
तार पर लगने वाला बल:
\( F_2 = BIl_2 = 1.5 \times 7 \times 0.16 = 1.68\text{ N} \)
अतः, तार पर \( 1.68\text{ N} \) का बल लम्बवत नीचे की दिशा में कार्य करेगा।

मुख्य बिंदु:

• चुंबकीय बल \( F = BIl\sin\theta \) सूत्र से निकाला जाता है।
• तार की प्रभावी लंबाई क्षेत्र के भीतर के हिस्से की लंबाई होती है।
• ज्यामितीय संबंधों (पाइथागोरस प्रमेय) का उपयोग करके लंबाई निकाली जाती है।

आम गलतियाँ:

• त्रिज्या को व्यास न समझना।
• कोण \( \theta \) को गलत लेना।
• विस्थापित स्थिति में नई लंबाई गलत निकालना।

Exam Tips:

a) आरेख बनाकर प्रभावी लंबाई की गणना करें।
b) फ्लेमिंग के नियम से बल की दिशा स्पष्ट करें।
c) त्रिकोणमितीय अनुपातों का ध्यान रखें।

 

Question 4.24: धनात्मक \( z \)-दिशा में \( 3000\text{ G} \) की एक एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र लगाया गया है। एक आयताकार लूप जिसकी भुजाएँ \( 10\text{ cm} \) एवं \( 5\text{ cm} \) और जिसमें \( 12\text{ A} \) धारा प्रवाहित हो रही है, इस क्षेत्र में रखा है। चित्र में दिखायी गई लूप की विभिन्न स्थितियों में इस पर लगने वाला बल-युग्म क्या है? स्थायी सन्तुलन वाली स्थिति कौन-सी है?

Answer:

चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता, \( B = 3000\text{ G} = 3000 \times 10^{-4}\text{ T} = 0.3\text{ T} \)
आयताकार पाश की लम्बाई, \( l = 10\text{ cm} \)
आयताकार पाश की चौड़ाई, \( b = 5\text{ cm} \)
पाश का क्षेत्रफल, \( A = l \times b = 10 \times 5 = 50\text{ cm}^2 = 50 \times 10^{-4}\text{ m}^2 \)
पाश में धारा, \( I = 12\text{ A} \)
(a) आघूर्ण, \( \vec{\tau} = \vec{m} \times \vec{B} \)
\( \vec{\tau} = 12 \times (50 \times 10^{-4})\hat{i} \times 0.3\hat{k} = -1.8 \times 10^{-2}\hat{j}\text{ Nm} \)
(b) इसमें भी (a) के समान स्थितियाँ हैं, उत्तर (a) के समान होंगे।
(c) आघूर्ण \( \vec{\tau} = \vec{m} \times \vec{B} = -1.8 \times 10^{-2}\hat{i}\text{ Nm} \)
(d) आघूर्ण का परिमाण, \( |\tau| = IAB = 12 \times 50 \times 10^{-4} \times 0.3 = 1.8 \times 10^{-2}\text{ Nm} \)
(e) आघूर्ण शून्य है।
(f) आघूर्ण शून्य है।
चित्र (e) में \( \vec{m} \) और \( \vec{B} \) की दिशा समान है और उनके बीच का कोण शून्य है। यदि विस्थापित होते हैं, तो वे एक संतुलन में वापस आते हैं। इसलिए, इसका संतुलन स्थिर है।
जबकि, चित्र (f) में \( \vec{m} \) और \( \vec{B} \) की दिशा विपरीत है। उनके बीच का कोण \( 180^\circ \) है। विस्थापित होने पर, यह अपनी मूल स्थिति में वापस नहीं आता है। इसलिए, इसका संतुलन अस्थिर है।

मुख्य बिंदु:

• बल आघूर्ण का सूत्र \( \vec{\tau} = \vec{m} \times \vec{B} \) होता है।
• चुंबकीय आघूर्ण \( m = I A \) होता है।
• स्थिर संतुलन तब होता है जब \( \vec{m} \) और \( \vec{B} \) की दिशा समान हो (\( \theta = 0^\circ \)).

आम गलतियाँ:

• क्षेत्रफल को वर्ग सेंटीमीटर से वर्ग मीटर में न बदलना।
• सदिश गुणन (Cross product) में दिशा की गलती करना।
• स्थिर और अस्थिर संतुलन की शर्तों में भ्रम होना।

Exam Tips:

a) सदिश संकेतन (\(\hat{i}, \hat{j}, \hat{k}\)) का सही प्रयोग करें।
b) कोण \( \theta \) को स्पष्ट रूप से पहचानें।
c) संतुलन के प्रकार को स्पष्ट शब्दों में समझाएं।

 

Question 4.25: एक वृत्ताकार कुंडली जिसमें \( 20 \) फेरे हैं और जिसकी त्रिज्या \( 10\text{ cm} \) है, एकसमान चुम्बकीय क्षेत्र में रखी है जिसका परिमाण \( 0.10 \) है और जो कुंडली के तल के लम्बवत है। यदि कुंडली में \( 5.0\text{ A} \text{ विधुत धारा प्रवाहित हो रही हो तो,}\)
(a) कुंडली पर लगने वाला कुल बल-युग्म आघूर्ण क्या है?
(b) कुंडली पर लगने वाला कुल परिणामी बल क्या है?
(c) चुम्बकीय क्षेत्र के कारण कुंडली के प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला कुल औसत बल क्या है? (कुंडली \( 10^{-5}\text{ m}^2 \) अनुप्रस्थ क्षेत्र वाले तांबे की तार से बनी है, और तांबे में मुक्त इलेक्ट्रॉन घनत्व \( 10^{29}\text{ m}^{-3} \text{ दिया गया है।)}\)

Answer:

वृत्ताकार कुंडली पर फेरों की संख्या, \( n = 20 \)
कुंडली की त्रिज्या, \( r = 10\text{ cm} = 0.1\text{ m} \)
चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता, \( B = 0.10\text{ T} \)
कुंडली में धारा, \( I = 5.0\text{ A} \)
(a) कुंडली पर लगने वाला कुल आघूर्ण शून्य है क्योंकि क्षेत्र एकसमान है।
(b) कुंडली पर लगने वाला कुल बल शून्य है क्योंकि क्षेत्र एकसमान है।
(c) तांबे की कुंडली का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल, \( A = 10^{-5}\text{ m}^2 \)
प्रत्येक घन मीटर में तांबे पर मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या, \( N = 10^{29}/\text{m}^3 \)
इलेक्ट्रॉन पर आवेश, \( e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C} \)
चुम्बकीय बल, \( F = Bev_d \), जहाँ \( v_d \) = इलेक्ट्रॉन अपवाह वेग = \( \frac{I}{neA} \)
\( F = \frac{BeI}{NeA} = \frac{0.10 \times 5.0}{10^{29} \times 10^{-5}} = 5 \times 10^{-25}\text{ N} \)
इसलिए, प्रत्येक इलेक्ट्रॉन पर लगने वाला औसत बल \( 5 \times 10^{-25}\text{ N} \) है।

मुख्य बिंदु:

• एकसमान चुंबकीय क्षेत्र में बंद लूप पर कुल बल हमेशा शून्य होता है।
• एकसमान क्षेत्र में टॉर्क शून्य हो सकता है यदि तल लंबवत हो।
• मुक्त इलेक्ट्रॉनों पर चुंबकीय बल लॉरेंज बल के अपवाह वेग रूप से निकाला जाता है।

आम गलतियाँ:

• एकसमान और असमान क्षेत्र के प्रभावों में अंतर न समझना।
• अपवाह वेग का सूत्र गलत उपयोग करना।
• इकाई रूपांतरण में चूक करना।

Exam Tips:

a) एकसमान क्षेत्र में कुल बल के शून्य होने का सिद्धांत याद रखें।
b) अपवाह वेग और धारा के संबंध का उपयोग करें।
c) चरणों को स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 4.26: एक परिनालिका जो \( 60\text{ cm} \) लम्بي है, जिसकी त्रिज्या \( 4.0\text{ cm} \) है और जिसमें \( 300 \) फेरों वाली \( 3 \) परतें लपेटा गई हैं। इसके भीतर एक \( 2.0\text{ cm} \text{ लम्با, } 2.5\text{ g} \text{ द्रव्यमान का तार इसके (केन्द्र के निकट) अक्ष के लम्बवत रखा है। तार एवं परिनालिका का अक्ष दोनों क्षितिज तल में हैं। तार को परिनालिका के समान्तर दो वाही संयोजकों द्वारा एक बाह्य बैटरी से जोड़ा गया है और इसमें } 6.0\text{ A} \text{ विधुत धारा प्रदान करती है। किस मान की विधुत धारा (परिवाहन की उचित दिशा के साथ) इस परिनालिका के फेरों में प्रवाहित होने पर तार का भार संभाल सकेगी?} \) (\( g = 9.8\text{ ms}^{-2} \))

Answer:

परिनालिका की लम्बाई, \( L = 60\text{ cm} = 0.6\text{ m} \)
परिनालिका की त्रिज्या, \( r = 4.0\text{ cm} = 0.04\text{ m} \)
परिनालिका में 3 परतें और प्रत्येक में 300 फेरे हैं।
कुल फेरों की संख्या, \( N = 3 \times 300 = 900 \)
तार की लम्बाई, \( l = 2\text{ cm} = 0.02\text{ m} \)
तार का द्रव्यमान, \( m = 2.5\text{ g} = 2.5 \times 10^{-3}\text{ kg} \)
तार में बहने वाली धारा, \( I = 6\text{ A} \)
गुरुत्वाकर्षण, \( g = 9.8\text{ m/s}^2 \)
परिनालिका के भीतर उत्पन्न होने वाला चुम्बकीय क्षेत्र, \( B = \frac{\mu_0 n I'}{L} \)
चुम्बकीय बल को निम्न सम्बन्ध से देखा जा सकता है: \( F = BIl = \frac{\mu_0 n I' l}{L} \)
तार पर लगने वाला बल तार के भार के बराबर है: \( mg = \frac{\mu_0 n I' l}{L} \)
\( I' = \frac{mgL}{\mu_0 n l} = \frac{2.5 \times 10^{-3} \times 9.8 \times 0.6}{4\pi \times 10^{-7} \times 900 \times 0.02} = 108\text{ A} \)
अतः, परिनालिका से प्रवाहित होने वाली धारा \( 108\text{ A} \) है।

मुख्य बिंदु:

• परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र \( B = \mu_0 n I \) होता है।
• तार का वजन चुंबकीय बल द्वारा संतुलित होता है (\( mg = BIl \)).
• कुल फेरों की संख्या परतों की संख्या पर निर्भर करती है।

आम गलतियाँ:

• परतों की संख्या को कुल फेरों में शामिल न करना।
• ग्राम और सेंटीमीटर को एस.आई. मात्रक में न बदलना।
• परिनालिका की धारा और तार की धारा को मिला देना।

Exam Tips:

a) संतुलन समीकरण \( mg = BIl \) का सही उपयोग करें।
b) परिनालिका के लिए प्रति एकांक लंबाई के फेरों को ध्यान से समझें।
c) गणना में सभी मान सही जगह रखें।

 

Question 4.27: किसी गैल्वेनोमीटर की कुंडली का प्रतिरोध \( 12\ \Omega \) है। \( 4\text{ mA} \) की विधुत धारा प्रवाहित होने पर यह पूर्णस्केल विक्षेप दर्शाता है। आप इस गैल्वेनोमीटर को \( 0 \) से \( 18\text{ V} \text{ परास वाले वोल्टमीटर में कैसे रूपान्तरित करेंगे?} \)

Answer:

गैल्वेनोमीटर की कुंडली के तार का प्रतिरोध, \( G = 12\ \Omega \)
पूर्ण विक्षेपेकल विक्षेप के लिए विधुत धारा का मान, \( I_g = 3\text{ mA} = 3 \times 10^{-3}\text{ A} \) (या प्रश्न के अनुसार \( 4\text{ mA} = 4 \times 10^{-3}\text{ A} \))
वोल्टमीटर के परास को \( 0\text{ V} \) से \( 18\text{ V} \) करने के लिए, \( V = 18\text{ V} \)
यदि गैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर में बदलना है तो इसे श्रेणीक्रम में एक प्रतिरोधक लगाना पड़ेगा। इस प्रतिरोधक का मान होगा:
\( R = \frac{V}{I_g} - G = \frac{18}{3 \times 10^{-3}} - 12 = 6000 - 12 = 5988\ \Omega \)
इसलिए, गैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर में बदलना है तो इसके श्रेणीक्रम में \( 5988\ \Omega \) का प्रतिरोधक जोड़ना पड़ेगा।

मुख्य बिंदु:

• गैल्वेनोमीटर को वोल्टमीटर में बदलने के लिए उच्च प्रतिरोध श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।
• सूत्र \( R = \frac{V}{I_g} - G \) का उपयोग किया जाता है।
• वोल्टमीटर का कुल प्रतिरोध बहुत अधिक हो जाता है।

आम गलतियाँ:

• श्रेणीक्रम की जगह समांतर क्रम में प्रतिरोध जोड़ना।
• मिलीएम्पीयर को एम्पीयर में न बदलना।
• सूत्र में \( G \) को घटाना भूल जाना।

Exam Tips:

a) वोल्टमीटर रूपांतरण के लिए हमेशा श्रेणी प्रतिरोध (High resistance) का प्रयोग करें।
b) इकाइयों का विशेष ध्यान रखें (\(\text{mA}\) से \(\text{A}\)).
c) सूत्र स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 4.28: किसी गैल्वेनोमीटर की कुंडली का प्रतिरोध \( 15\ \Omega \) है। \( 4\text{ mA} \) की विधुत धारा प्रवाहित होने पर यह पूर्णस्केल विक्षेप दर्शाता है। आप इस गैल्वेनोमीटर को \( 0 \) से \( 6\text{ A} \text{ परास वाले अमीटर में कैसे रूपान्तरित करेंगे?} \)

Answer:

गैल्वेनोमीटर की कुंडली के तार का प्रतिरोध, \( G = 12\ \Omega \) (दी गई तालिका के अनुसार \( 15\ \Omega \) या \( 12\ \Omega \))
पूर्ण विक्षेपेकल विक्षेप के लिए विधुत धारा का मान, \( I_g = 4\text{ mA} = 4 \times 10^{-3}\text{ A} \)
अमीटर के परास को \( 0\text{ A} \) से \( 6\text{ A} \) करने के लिए, धारा, \( I = 6\text{ A} \)
प्रतिरोध \( S \) का एक शंट प्रतिरोधक गैल्वेनोमीटर के साथ समांतर में जोड़ना पड़ेगा ताकि इसे एक अमीटर में परिवर्तित किया जा सके। \( S \) का मान इस प्रकार है:
\( S = \frac{I_g G}{I - I_g} = \frac{4 \times 10^{-3} \times 15}{6 - 4 \times 10^{-3}} \)
\( S = \frac{60 \times 10^{-3}}{6 - 0.004} = \frac{0.06}{5.996} \)
\( S \approx 0.01\ \Omega = 10\text{ m}\Omega \)
इसलिए, एक शंत प्रतिरोधक गैल्वेनोमीटर के साथ समांतर में जोड़ना पड़ेगा।

मुख्य बिंदु:

• गैल्वेनोमीटर को अमीटर में बदलने के लिए अल्प प्रतिरोध (शंट) समांतर क्रम में जोड़ा जाता है।
• सूत्र \( S = \frac{I_g G}{I - I_g} \) का उपयोग किया जाता है।
• अमीटर का कुल प्रतिरोध बहुत कम होता है।

आम गलतियाँ:

• शंट को समांतर की जगह श्रेणीक्रम में जोड़ना।
• \( I - I_g \) की जगह केवल \( I \) लिखना।
• दशमलव और घातों की गणना में त्रुटि करना।

Exam Tips:

a) अमीटर रूपांतरण के लिए समांतर शंट का उपयोग याद रखें।
b) \( I_g \) का मान बहुत छोटा होने के कारण हर में \( I - I_g \approx I \) भी लिख सकते हैं, पर सटीक गणना बेहतर है।
c) अंतिम उत्तर के साथ मात्रक अवश्य लिखें।

 

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