Solutions for Class 12 Physics: Chapter 03 विद्युत धारा
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Practice Class 12 Physics Solutions: Chapter 03 विद्युत धारा
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Question 3.1: किसी कार की संचायक बैटरी का विद्युत वाहक बल \( 12\text{ V} \) है। यदि बैटरी का आन्तरिक प्रतिरोध \( 0.4\text{ }\Omega \) हो तो बैटरी से ली जाने वाली अधिकतम धारा का मान क्या है?
Answer:
दिया गया है:
बैटरी का विद्युत वाहक बल, \( E = 12\text{ V} \)
बैटरी का आन्तरिक प्रतिरोध, \( r = 0.4\text{ }\Omega \)
ओह्म के नियमानुसार, अधिकतम धारा \( I \) के लिए परिपथ का बाह्य प्रतिरोध शून्य होना चाहिए।
\( I = \frac{E}{r} \)
\( I = \frac{12}{0.4} = 30\text{ A} \)
अतः बैटरी से ली जाने वाली अधिकतम धारा \( 30\text{ A} \) होगी।
मुख्य बिंदु:
• अधिकतम धारा के लिए बाह्य प्रतिरोध \( R = 0 \) होता है।
• बैटरी का आंतरिक प्रतिरोध धारा के मान को सीमित करता है।
• इसका मात्रक ऐम्पियर (\( \text{A} \)) है।
आम गलतियाँ:
• बाह्य प्रतिरोध को सूत्र में जोड़ देना जबकि यहाँ \( R=0 \) है।
• दशमलव की गणना में त्रुटि करना।
• मात्रक न लिखना।
Exam Tips:
a) अधिकतम धारा की स्थिति में बाह्य प्रतिरोध को शून्य मानना न भूलें।
b) गणना के बाद सही मात्रक अवश्य लिखें।
c) सूत्र स्पष्ट रूप से पहले लिखें।
Question 3.2: \( 10\text{ V} \) विद्युत वाहक बल वाली बैटरी जिसका आन्तरिक प्रतिरोध \( 3\text{ }\Omega \) है, किसी प्रतिरोधक से संयोजित है। यदि परिपथ में धारा का मान \( 0.5\text{ A} \) हो तो प्रतिरोधक का प्रतिरोध क्या होगा? जब परिपथ बन्द है, तो सेल की टर्मिनल वोल्टता क्या होगी?
Answer:
दिया गया है:
बैटरी का विद्युत वाहक बल, \( E = 10\text{ V} \)
बैटरी का आन्तरिक प्रतिरोध, \( r = 3\text{ }\Omega \)
परिपथ में धारा, \( I = 0.5\text{ A} \)
ओह्म के नियमानुसार, संबंध है:
\( I = \frac{E}{R + r} \)
\( R + r = \frac{E}{I} \)
\( R + 3 = \frac{10}{0.5} = 20 \)
\( R = 20 - 3 = 17\text{ }\Omega \)
प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर \( V = IR \)
\( V = 0.5 \times 17 = 8.5\text{ V} \)
अतः प्रतिरोधक का प्रतिरोध \( 17\text{ }\Omega \) है और प्रतिरोधक के सिरों पर विभव \( 8.5\text{ V} \) है।
मुख्य बिंदु:
• टर्मिनल वोल्टता परिपथ में बाह्य प्रतिरोध के सिरों के विभवांतर के बराबर होती है।
• आंतरिक प्रतिरोध को कुल प्रतिरोध में जोड़ा जाता है।
• \( V = E - Ir \) का भी उपयोग किया जा सकता है।
आम गलतियाँ:
• आंतरिक प्रतिरोध को बाह्य प्रतिरोध से अलग न करना।
• टर्मिनल वोल्टता और विद्युत वाहक बल को एक ही मान लेना।
Exam Tips:
a) दोनों भागों को स्पष्ट रूप से अलग-अलग हल करें।
b) इकाइयों का विशेष ध्यान रखें।
c) गणना की जाँच पुनः कर लें।
Question 3.3: (a) \( 1\text{ }\Omega, 2\text{ }\Omega \) और \( 3\text{ }\Omega \) के तीन प्रतिरोधक श्रेणी में संयोजित हैं। प्रतिरोधकों के संयोजन का कुल प्रतिरोध क्या है?
(b) यदि प्रतिरोधकों का संयोजन किसी \( 12\text{ V} \) की बैटरी जिसका आन्तरिक प्रतिरोध नगण्य है, से सम्बद्ध है, तो प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर वोल्टता पात ज्ञात कीजिए।
Answer:
(a) श्रेणी संयोजन में कुल प्रतिरोध:
\( R = R_1 + R_2 + R_3 \)
\( R = 1 + 2 + 3 = 6\text{ }\Omega \)
(b) परिपथ में प्रवाहित धारा \( I \):
\( I = \frac{E}{R} = \frac{12}{6} = 2\text{ A} \)
\( 1\text{ }\Omega \) प्रतिरोधक के अंतर्गत वैभव में गिरावट \( V_1 = I R_1 \)
\( V_1 = 2 \times 1 = 2\text{ V} \)
\( 2\text{ }\Omega \) प्रतिरोधक के अंतर्गत वैभव में गिरावट \( V_2 = I R_2 \)
\( V_2 = 2 \times 2 = 4\text{ V} \)
\( 3\text{ }\Omega \) प्रतिरोधक के अंतर्गत वैभव में गिरावट \( V_3 = I R_3 \)
\( V_3 = 2 \times 3 = 6\text{ V} \)
अतः विभवांतर क्रमशः \( 2\text{ V}, 4\text{ V} \) और \( 6\text{ V} \) हैं।
मुख्य बिंदु:
• श्रेणी क्रम में धारा का मान समान रहता है।
• कुल विभव पतन व्यक्तिगत विभव पतनों के योग के बराबर होता है।
• प्रतिरोध का मान अधिक होने पर विभव पतन भी अधिक होता है।
आम गलतियाँ:
• श्रेणी क्रम में समांतर क्रम का सूत्र लगा देना।
• प्रत्येक प्रतिरोधक पर अलग धारा मान लेना।
Exam Tips:
a) उप-भाग (a) और (b) को क्रमवार हल करें।
b) प्रत्येक भाग के अंत में उत्तर को स्पष्ट रूप से रेखांकित करें।
c) मात्रक लिखना न भूलें।
Question 3.4: (a) \( 2\text{ }\Omega, 4\text{ }\Omega \) और \( 5\text{ }\Omega \) के तीन प्रतिरोधक पार्श्व में संयोजित हैं। संयोजन का कुल प्रतिरोध क्या होगा?
(b) यदि संयोजन को \( 20\text{ V} \) के विद्युत वाहक बल की बैटरी जिसका आन्तरिक प्रतिरोध नगण्य है, से सम्बन्ध किया जाता है, तो प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली धारा तथा बैटरी से ली गई कुल धारा का मान ज्ञात कीजिए।
Answer:
(a) समांतर क्रम में कुल प्रतिरोध:
\( \frac{1}{R} = \frac{1}{R_1} + \frac{1}{R_2} + \frac{1}{R_3} \)
\( \frac{1}{R} = \frac{1}{2} + \frac{1}{4} + \frac{1}{5} \)
\( \frac{1}{R} = \frac{10 + 5 + 4}{20} = \frac{19}{20} \)
\( R = \frac{20}{19}\text{ }\Omega \)
(b) बैटरी का विद्युत वाहक बल \( V = 20\text{ V} \)
\( R_1 \) से गुजरने वाली धारा \( I_1 = \frac{V}{R_1} = \frac{20}{2} = 10\text{ A} \)
\( R_2 \) से गुजरने वाली धारा \( I_2 = \frac{V}{R_2} = \frac{20}{4} = 5\text{ A} \)
\( R_3 \) से गुजरने वाली धारा \( I_3 = \frac{V}{R_3} = \frac{20}{5} = 4\text{ A} \)
कुल धारा \( I = I_1 + I_2 + I_3 = 10 + 5 + 4 = 19\text{ A} \)
अतः कुल धारा \( 19\text{ A} \) है।
मुख्य बिंदु:
• समांतर क्रम में प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर समान होता है।
• कुल धारा व्यक्तिगत धाराओं के योग के बराबर होती है।
• तुल्य प्रतिरोध सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है।
आम गलतियाँ:
• भिन्न के जोड़ में लघुत्तम (LCM) गलत लेना।
• व्युत्क्रम करना भूल जाना (अन्त में \( R \) निकालने के लिए)।
Exam Tips:
• लघुत्तम समापवर्त्य सावधानी से निकालें।
• धाराओं के योग की जाँच मुख्य सूत्र \( I = V/R \) से भी कर सकते हैं।
• सभी उत्तरों में मात्रक अवश्य लिखें।
Question 3.5: कमरे के ताप (\( 27.0^\circ\text{C} \)) पर किसी तापन-अवयव का प्रतिरोध \( 100\text{ }\Omega \) है। यदि तापन-अवयव का प्रतिरोध \( 117\text{ }\Omega \) हो तो अवयव का ताप क्या होगा? प्रतिरोधक के पदार्थ का ताप-गुणांक \( 1.70 \times 10^{-4}\text{ }^\circ\text{C}^{-1} \) है।
Answer:
दिया गया है:
प्रारंभिक ताप \( T_1 = 27^\circ\text{C} \)
प्रारंभिक प्रतिरोध \( R_1 = 100\text{ }\Omega \)
अंतिम प्रतिरोध \( R_2 = 117\text{ }\Omega \)
ताप गुणांक \( \alpha = 1.70 \times 10^{-4}\text{ }^\circ\text{C}^{-1} \)
सूत्रानुसार:
\( \alpha = \frac{R_2 - R_1}{R_1 (T_2 - T_1)} \)
\( T_2 - T_1 = \frac{R_2 - R_1}{R_1 \alpha} \)
\( T_2 - 27 = \frac{117 - 100}{100 \times (1.70 \times 10^{-4})} \)
\( T_2 - 27 = \frac{17}{1.70 \times 10^{-2}} = 1000 \)
\( T_2 = 1000 + 27 = 1027^\circ\text{C} \)
अतः अवयव का ताप \( 1027^\circ\text{C} \) होगा।
मुख्य बिंदु:
• ताप बढ़ने पर चालकों का प्रतिरोध बढ़ता है।
• प्रतिरोधकता का ताप गुणांक \( \alpha \) इस परिवर्तन की दर को दर्शाता है।
• तापमान सेल्सियस या केल्विन दोनों में अंतर के लिए समान रहता है।
आम गलतियाँ:
• घात (\( 10^{-4} \)) के पक्षांतर में गलती करना।
• \( T_1 \) जोड़ना भूल जाना।
Exam Tips:
a) गणना करते समय घातों को पहले सरल करें।
b) सूत्र को मानक रूप में लिखें।
c) तापमान का सही मात्रक \( ^\circ\text{C} \) लिखें।
Question 3.6: \( 15\text{ m} \) लम्बे एवं \( 6.0 \times 10^{-7}\text{ m}^2 \) अनुप्रस्थ काट वाले तार से उपेक्षणीय धारा प्रवाहित की गई है, और इसका प्रतिरोध \( 5.0\text{ }\Omega \) मापा गया है। प्रायोगिक ताप पर तार के पदार्थ की प्रतिरोधकता क्या होगी?
Answer:
दिया गया है:
तार की लंबाई \( l = 15\text{ m} \)
अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल \( A = 6.0 \times 10^{-7}\text{ m}^2 \)
प्रतिरोध \( R = 5.0\text{ }\Omega \)
प्रतिरोधकता \( \rho \) का सूत्र:
\( R = \rho \frac{l}{A} \)
\( \rho = \frac{R A}{l} \)
\( \rho = \frac{5.0 \times 6.0 \times 10^{-7}}{15} \)
\( \rho = \frac{30.0 \times 10^{-7}}{15} = 2 \times 10^{-7}\text{ }\Omega\text{ m} \)
अतः पदार्थ की प्रतिरोधकता \( 2 \times 10^{-7}\text{ }\Omega\text{ m} \) है।
मुख्य बिंदु:
• प्रतिरोधकता पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करती है, उसकी लंबाई या मोटाई पर नहीं।
• इसका SI मात्रक ओम-मीटर (\( \Omega\text{ m} \)) है।
• यह प्रतिरोध और ज्यामितीय विमाओं का संबंध है।
आम गलतियाँ:
• क्षेत्रफल और लंबाई के मान को उल्टा रख देना।
• मात्रक गलत लिखना।
Exam Tips:
a) मान रखते समय मात्रकों की एकरूपता जाँच लें।
b) गणना को सरल बनाने के लिए अंश और हर को पहले काटें।
c) अंतिम उत्तर में मात्रक \( \Omega\text{ m} \) अवश्य लिखें।
Question 3.7: सिल्वर के किसी तार का \( 27.5^\circ\text{C} \) पर प्रतिरोध \( 2.1\text{ }\Omega \) और \( 100^\circ\text{C} \) पर प्रतिरोध \( 2.7\text{ }\Omega \) है। सिल्वर का प्रतिरोधकता ताप-गुणांक ज्ञात कीजिए।
Answer:
दिया गया है:
\( T_1 = 27.5^\circ\text{C}, R_1 = 2.1\text{ }\Omega \)
\( T_2 = 100^\circ\text{C}, R_2 = 2.7\text{ }\Omega \)
ताप गुणांक \( \alpha \) का सूत्र:
\( \alpha = \frac{R_2 - R_1}{R_1 (T_2 - T_1)} \)
\( \alpha = \frac{2.7 - 2.1}{2.1 \times (100 - 27.5)} \)
\( \alpha = \frac{0.6}{2.1 \times 72.5} \)
\( \alpha = \frac{0.6}{152.25} \approx 0.0039\text{ }^\circ\text{C}^{-1} \)
अतः सिल्वर का ताप गुणांक \( 0.0039\text{ }^\circ\text{C}^{-1} \) है।
मुख्य बिंदु:
• ताप गुणांक धातुओं के लिए धनात्मक होता है।
• यह प्रति डिग्री सेल्सियस प्रतिरोध में होने वाले परिवर्तन को दर्शाता है।
• तापमान का अंतर \( T_2 - T_1 \) सीधे निकाला जाता है।
आम गलतियाँ:
• घटाव में दशमलव की गलती करना।
• प्रारंभिक प्रतिरोध \( R_1 \) के स्थान पर \( R_2 \) नीचे लिख देना।
Exam Tips:
a) दशमलव के दो या तीन स्थानों तक मान निकालें।
b) वैज्ञानिक संकेतन (Scientific notation) का प्रयोग भी किया जा सकता है।
c) सूत्र को स्पष्ट रूप से दर्शाइए।
Question 3.8: नाइक्रोम का एक तापन-अवयव \( 230\text{ V} \) की सप्लाई से संयोजित है, और \( 3.2\text{ A} \) की प्रारम्भिक धारा लेता है, जो कुछ सेकण्ड में \( 2.8\text{ A} \) पर स्थायी हो जाती है। यदि कमरे का ताप \( 27.0^\circ\text{C} \) है तो तापन-अवयव का स्थायी ताप क्या होगा? यदि दिए गए ताप-परिसर में नाइक्रोम का औसत प्रतिरोध का ताप-गुणांक \( 1.70 \times 10^{-4}\text{ }^\circ\text{C}^{-1} \) है।
Answer:
दिया गया है:
सप्लाई वोल्टता \( V = 230\text{ V} \)
प्रारंभिक धारा \( I_1 = 3.2\text{ A} \)
प्रारंभिक प्रतिरोध \( R_1 = \frac{V}{I_1} = \frac{230}{3.2} = 71.875\text{ }\Omega \)
स्थायी धारा \( I_2 = 2.8\text{ A} \)
स्थायी प्रतिरोध \( R_2 = \frac{V}{I_2} = \frac{230}{2.8} = 82.14\text{ }\Omega \)
कमरे का प्रारंभिक ताप \( T_1 = 27^\circ\text{C} \)
ताप गुणांक \( \alpha = 1.70 \times 10^{-4}\text{ }^\circ\text{C}^{-1} \)
सूत्र से:
\( \alpha = \frac{R_2 - R_1}{R_1 (T_2 - T_1)} \)
\( T_2 - 27 = \frac{82.14 - 71.875}{71.875 \times 1.70 \times 10^{-4}} \)
\( T_2 - 27 = \frac{10.265}{0.012218} \approx 840.5 \)
\( T_2 = 840.5 + 27 = 867.5^\circ\text{C} \)
अतः तापीय अवयव का स्थायी तापमान \( 867.5^\circ\text{C} \) है।
मुख्य बिंदु:
• धारा कम होने का अर्थ है कि प्रतिरोध बढ़ गया है।
• पहले प्रतिरोधों की गणना ओह्म के नियम से की जाती है।
• ताप वृद्धि प्रारंभिक ताप में जोड़ी जाती है।
आम गलतियाँ:
• प्रारंभिक और स्थायी धाराओं के मान उलटे रख देना।
• भाग देने में बड़ी कैलकुलेशन त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) पहले दोनों अवस्थाओं के प्रतिरोध निकाल लें।
b) कैलकुलेशन सावधानी से करें क्योंकि संख्याएँ बड़ी हो सकती हैं।
c) अंतिम उत्तर में मात्रक लिखना न भूलें।
Question 3.9: चित्र 3.2 में दर्शाइए नेटवर्क की प्रत्येक शाखा में प्रवाहित धारा का मान ज्ञात कीजिए।
Answer:
किरchhoff के नियमों (KVL और KCL) का उपयोग करने पर:
माना विभिन्न शाखाओं में धाराएँ इस प्रकार हैं:
बाह्य परिपथ में कुल धारा = \( I \)
शाखा AB में धारा = \( I_2 \)
शाखा AD में धारा = \( I_3 \)
शाखा BC में धारा = \( I_2 - I_4 \)
शाखा CD में धारा = \( I_3 + I_4 \)
शाखा BD में धारा = \( I_4 \)
बंद परिपथ ABDA के लिए:
\( 10I_2 + 5I_4 - 5I_3 = 0 \)
\( 2I_2 + I_4 - I_3 = 0 \Rightarrow I_3 = 2I_2 + I_4 \) --- (1)
बंद परिपथ BCDB के लिए:
\( 5I_2 - 5I_4 - 10(I_3 + I_4) - 5I_4 = 0 \)
\( 5I_2 - 20I_4 - 10I_3 = 0 \Rightarrow I_2 = 2I_3 + 4I_4 \) --- (2)
इसी प्रकार समीकरणों को हल करने पर विभिन्न धाराओं के मान प्राप्त होते हैं:
शाखा AB में धारा \( = \frac{6}{17}\text{ A} \)
शाखा BC में धारा \( = \frac{6}{17}\text{ A} \)
शाखा CD में धारा \( = \frac{4}{17}\text{ A} \)
शाखा AD में धारा \( = \frac{6}{17}\text{ A} \)
शाखा BD में धारा \( = -\frac{2}{17}\text{ A} \)
कुल धारा \( I = \frac{10}{17}\text{ A} \)
मुख्य बिंदु:
• किर्चहॉफ का प्रथम नियम (KCL) संधि पर लागू होता है।
• किर्चहॉफ का द्वितीय नियम (KVL) बंद लूप पर लागू होता है।
• समीकरणों को युगपत रूप से हल किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• लूप में चलते समय चिन्हों (+/-) की गलती करना।
• धाराओं के वितरण में असंगति रखना।
Exam Tips:
a) लूप नियम लगाते समय दिशा का विशेष ध्यान रखें।
b) समीकरणों को स्पष्ट रूप से नाम दें।
c) अंतिम उत्तर भिन्न के रूप में ही छोड़ें।
Question 3.10: (a) किसी मीटर-सेतु में जब प्रतिरोधक \( S = 12.5\text{ }\Omega \) हो तो संतुलन बिन्दु, सिरे A से \( 39.5\text{ cm} \) की लम्बाई पर प्राप्त होता है। R का प्रतिरोध ज्ञात कीजिए। व्हीटस्टोइन सेतु या मीटर सेतु में प्रतिरोधकों के संयोजन के लिए मोटी कॉपर की पत्तियों क्यों प्रयोग में लाते हैं?
(b) R तथा S को अन्तरबदल करने पर उपयुक्त सेतु का संतुलन बिन्दु ज्ञात कीजिए।
(c) यदि सेतु के संतुलन की अवस्था में गैल्वेनोमीटर और सेल का अन्तरबदल कर दिया जाए तब क्या गैल्वेनोमीटर कोई धारा दर्शाएगा?
Answer:
(a) संतुलन की स्थिति के लिए:
\( \frac{X}{Y} = \frac{l_1}{100 - l_1} \)
यहाँ \( X = R, Y = S = 12.5\text{ }\Omega, l_1 = 39.5\text{ cm} \)
\( R = 12.5 \times \frac{39.5}{100 - 39.5} = 12.5 \times \frac{39.5}{60.5} \approx 8.2\text{ }\Omega \)
मोटी ताँबे की पत्तियाँ इसलिए उपयोग की जाती हैं ताकि उनका प्रतिरोध नगण्य हो और संपर्क प्रतिरोध कम से कम रहे।
(b) R और S को बदलने पर नया संतुलन बिंदु \( l_2 = 100 - l_1 \):
\( 100 - 39.5 = 60.5\text{ cm} \)
(c) नहीं, गैल्वेनोमीटर कोई विक्षेप नहीं दिखाएगा क्योंकि संतुलन की स्थिति में सेतु में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है (व्हीटस्टोइन सेतु का सिद्धांत)।
मुख्य बिंदु:
• मीटर सेतु व्हीटस्टोइन सेतु के सिद्धांत पर कार्य करता है।
• संतुलन स्थिति में गैल्वेनोमीटर से शून्य धारा बहती है。
• ताँबे की पट्टियाँ प्रतिरोध त्रुटि को कम करती हैं।
आम गलतियाँ:
• लंबाई के मान को \( 100 \) में से न घटाना।
• सूत्रों में मान उल्टे रख देना।
Exam Tips:
a) सैद्धांतिक प्रश्नों के कारण स्पष्ट और संक्षिप्त लिखें।
b) गणना में इकाई का ध्यान रखें।
c) सूत्र को सही रूप में प्रयोग करें।
Question 3.11: \( 8\text{ V} \) विद्युत वाहक बल की एक संचायक बैटरी जिसका आन्तरिक प्रतिरोध \( 0.5\text{ }\Omega \) है, को श्रेणी क्रम में \( 15.5\text{ }\Omega \) के प्रतिरोधक का उपयोग करके \( 120\text{ V} \) के D.C. स्रोत द्वारा चार्ज किया जाता है। चार्ज होते समय बैटरी की टर्मिनल वोल्टता क्या है? चार्जकारी परिपथ में प्रतिरोधक को श्रेणीक्रम में सम्बद्ध करने का क्या उद्देश्य है?
Answer:
दिया गया है:
बैटरी का वि.वा.ब., \( E = 8.0\text{ V} \)
आंतरिक प्रतिरोध, \( r = 0.5\text{ }\Omega \)
DC सप्लाई वोल्टता, \( V = 120\text{ V} \)
बाह्य प्रतिरोध, \( R = 15.5\text{ }\Omega \)
परिपथ में प्रभावी वोल्टता \( V' = V - E = 120 - 8 = 112\text{ V} \)
परिपथ में प्रवाहित धारा \( I = \frac{V - E}{R + r} \)
\( I = \frac{112}{15.5 + 0.5} = \frac{112}{16} = 7\text{ A} \)
बैटरी की टर्मिनल वोल्टता \( V_{\text{terminal}} = E + Ir \)
\( V_{\text{terminal}} = 8 + 7 \times 0.5 = 8 + 3.5 = 11.5\text{ V} \)
प्रतिरोधक जोड़ने का उद्देश्य परिपथ की धारा को नियंत्रित करना है ताकि बैटरी सुरक्षित रहे।
मुख्य बिंदु:
• चार्जिंग के दौरान बैटरी का विभव स्रोत के विपरीत जुड़ा होता है।
• टर्मिनल वोल्टता \( V = E + Ir \) होती है क्योंकि धारा अंदर जा रही है।
• श्रेणी प्रतिरोध अत्यधिक धारा को रोकता है।
आम गलतियाँ:
• चार्जिंग के समय \( E - Ir \) का गलत प्रयोग करना।
• कुल प्रतिरोध में आंतरिक प्रतिरोध जोड़ना भूल जाना।
Exam Tips:
a) चार्जिंग और डिस्चार्जिंग के सूत्रों का अंतर समझकर प्रयोग करें।
b) हर चरण की गणना साफ-सुथरी लिखें।
c) उद्देश्य वाले भाग का उत्तर सैद्धांतिक रूप से दें।
Question 3.12: किसी पोटेशियोमीटर व्यवस्था में, \( 1.25\text{ V} \) विद्युत वाहक बल से एक सेल का संतुलन बिन्दु तार के \( 35.0\text{ cm} \) लम्बाई पर प्राप्त होता है। यदि इस सेल को किसी अन्य सेल द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया जाए तो संतुलन बिन्दु \( 63.0\text{ cm} \) पर स्थानांतरित हो जाता है। दूसरे सेल का विद्युत वाहक बल क्या है?
Answer:
दिया गया है:
पहले सेल का ई.एम.एफ., \( E_1 = 1.25\text{ V} \)
पहला संतुलन बिंदु, \( l_1 = 35\text{ cm} \)
दूसरा संतुलन बिंदु, \( l_2 = 63\text{ cm} \)
पोटेंशियोमीटर के सिद्धांत से:
\( \frac{E_2}{E_1} = \frac{l_2}{l_1} \)
\( E_2 = E_1 \times \frac{l_2}{l_1} \)
\( E_2 = 1.25 \times \frac{63}{35} \)
\( E_2 = 1.25 \times 1.8 = 2.25\text{ V} \)
अतः दूसरे सेल का ई.एम.एफ. \( 2.25\text{ V} \) है।
मुख्य बिंदु:
• विभवमापी का संतुलन बिंदु लंबाई के समानुपाती होता है (\( E \propto l \)).
• इसमें धारा का प्रत्यक्ष मापन नहीं होता, अतः यह यथार्थ होता है।
• तुलना विधि का उपयोग किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• \( l_1 \) और \( l_2 \) के मान सूत्र में उल्टे रख देना।
• गुणा-भाग में त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) सूत्र लिखकर मान प्रतिस्थापित करें।
b) सरल भिन्न बनाकर हल करना आसान होता है।
c) मात्रक अवश्य लिखें।
Question 3.13: किसी ताँबे के चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों का संख्या घनत्व \( 8.5 \times 10^{28}\text{ m}^{-3} \) आकलित किया गया है। \( 3\text{ m} \) लम्बे तार के एक सिरे से दूसरे सिरे तक अपवाह करने में इलेक्ट्रॉन कितना समय लेता है? तार की अनुप्रस्थ-काट \( 2.0 \times 10^{-6}\text{ m}^2 \) है और इसमें \( 3.0\text{ A} \) धारा प्रवाहित हो रही है।
Answer:
दिया गया है:
इलेक्ट्रॉन संख्या घनत्व, \( n = 8.5 \times 10^{28}\text{ m}^{-3} \)
तार की लंबाई, \( l = 3\text{ m} \)
क्षेत्रफल, \( A = 2.0 \times 10^{-6}\text{ m}^2 \)
धारा, \( I = 3.0\text{ A} \)
इलेक्ट्रॉन आवेश, \( e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C} \)
धारा और अपवाह वेग का संबंध:
\( I = n A e v_d \)
जहाँ अपवाह वेग \( v_d = \frac{l}{t} \)
\( I = n A e \frac{l}{t} \)
समय \( t = \frac{n A e l}{I} \)
\( t = \frac{8.5 \times 10^{28} \times 2.0 \times 10^{-6} \times 1.6 \times 10^{-19} \times 3}{3.0} \)
\( t = 8.5 \times 2.0 \times 1.6 \times 10^{(28 - 6 - 19)} \)
\( t = 27.2 \times 10^3 = 2.72 \times 10^4\text{ s} \)
अतः इलेक्ट्रॉन को तार पार करने में लगभग \( 2.7 \times 10^4\text{ s} \) का समय लगेगा।
मुख्य बिंदु:
• अपवाह वेग बहुत कम होता है, अतः समय अधिक आता है।
• घातों का संयोजन सावधानी से करना चाहिए।
• \( I = nAe v_d \) धारा का मूल सूत्र है।
आम गलतियाँ:
• घातों को जोड़ते समय चिन्ह की गलती करना।
• समय के सूत्र में मान गलत रखना।
Exam Tips:
a) पहले सभी मानों को SI पद्धति में सुनिश्चित करें।
b) घातों को एकसाथ हल करके अंत में संख्या से गुणा करें।
c) समय का मात्रक सेकण्ड (\( \text{s} \)) लिखें।
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