Official NCERT Solutions for Class 12 Physics: Chapter 03 विद्युत धारा
Review structured textbook solutions for Class 12 Physics Chapter 03 विद्युत धारा. Built according to NCERT guidelines for the 2026-27 academic year, these downloadable answers support daily revision and problem-solving accuracy.
Chapter-wise Solutions for Physics: Chapter 03 विद्युत धारा
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Question 3.14: पृथ्वी के पृष्ठ पर ऋणात्मक पृष्ठ आवेश घनत्व \( 10^{-9}\text{ C m}^{-2} \) है। वायुमंडल के ऊपरी भाग और पृथ्वी के बीच \( 400\text{ kV} \) विभवांतर (नीचे के वायुमंडल की कम चालकता के कारण) के परिणामतः समुच्य पृथ्वी पर केवल \( 1800\text{ A} \) की धारा है। यदि वायुमंडलिय विद्युत क्षेत्र बनाए रखने हेतु कोई प्रक्रिया न हो तो पृथ्वी के पृष्ठ को उदासीन करने हेतु लगभग कितना समय लगेगा? (व्यावहारिक रूप से यह कभी नहीं होता क्योंकि विद्युत आवेशों की पुनः पूर्ति की एक प्रक्रिया है तथा पृथ्वी के विभिन्न भागों में लगातार तड़ित झंझा एवं तड़ित का होना) (पृथ्वी की त्रिज्या \( r = 6.37 \times 10^6\text{ m} \))
Answer:
दिया गया है:
पृष्ठ का आवेश घनत्व \( \sigma = 10^{-9}\text{ C m}^{-2} \)
समुची पृथ्वी पर धारा \( I = 1800\text{ A} \)
पृथ्वी की त्रिज्या \( r = 6.37 \times 10^6\text{ m} \)
पृथ्वी की सतह का क्षेत्रफल \( A = 4\pi r^2 \)
\( A = 4\pi \times (6.37 \times 10^6)^2 = 5.09 \times 10^{14}\text{ m}^2 \)
पृथ्वी की सतह पर कुल आवेश:
\( q = \sigma \times A = 10^{-9} \times 5.09 \times 10^{14} = 5.09 \times 10^5\text{ C} \)
पृथ्वी के निरावेशन में लगा समय \( t \):
\( I = \frac{q}{t} \)
\( t = \frac{q}{I} = \frac{5.09 \times 10^5}{1800} = 282.77\text{ s} \)
अतः पृथ्वी के निरावेशन में लगभग \( 282.77\text{ s} \) लगेंगे।
मुख्य बिंदु:
• पृष्ठीय आवेश घनत्व से कुल क्षेत्रफल का गुणा करके कुल आवेश निकाला जाता है।
• धारा और आवेश के संबंध \( I = q/t \) का उपयोग किया जाता है।
• समय की गणना सेकंड में प्राप्त होती है।
आम गलतियाँ:
• क्षेत्रफल निकालते समय त्रिज्या का वर्ग करना भूल जाना।
• घातों (Powers) के कैलकुलेशन में गलती करना।
• सूत्र में मानों को गलत क्रम में रखना।
Exam Tips:
a) गोले के कुल क्षेत्रफल का सूत्र \( 4\pi r^2 \) अच्छे से याद रखें।
b) वैज्ञानिक संकेतन (Scientific Notation) में कैलकुレーション सावधानी से करें।
c) अंत में मात्रक (जैसे सेकंड) लिखना न भूलें।
Question 3.15: (a) 6 लेड एसिड संचायक सेलों को जिनमें प्रत्येक का विद्युत वाहक बल \( 2\text{ V} \) तथा आंतरिक प्रतिरोध \( 0.015\ \Omega \) है जो इसके साथ श्रेणी संबद्ध है, में धारा की आपूर्ति के लिए किया जाता है। बैटरी से कितनी ली गई है एवं इसकी टर्मिनल वोल्टता क्या है?
(b) एक लंबे समय तक उपयोग में लाए गए संचायक सेल का विद्युत वाहक बल \( 1.9\text{ V} \) एवं विशाल आंतरिक प्रतिरोध \( 380\ \Omega \) है। सेल से कितनी अधिकतम धारा ली जा सकती है? क्या सेल से प्राप्त यह धारा कर की प्रवर्तक मोटर को स्टार्ट करने में सक्षम होगी?
Answer:
(a) सेलों की संख्या \( n = 6 \)
प्रत्येक सेल का विद्युत वाहक बल \( E = 2.0\text{ V} \)
प्रत्येक सेल का आंतरिक प्रतिरोध \( r = 0.015\ \Omega \)
बाहरी प्रतिरोध \( R = 8.5\ \Omega \)
श्रेणी संयोजन के लिए कुल विद्युत वाहक बल \( = nE = 6 \times 2.0 = 12\text{ V} \)
कुल आंतरिक प्रतिरोध \( = nr = 6 \times 0.015 = 0.09\ \Omega \)
परिपथ में प्रवाहित धारा \( I \):
\( I = \frac{nE}{R + nr} \)
\( I = \frac{12}{8.5 + 0.09} = \frac{12}{8.59} = 1.39\text{ A} \)
टर्मिनल वोल्टता \( V \):
\( V = IR = 1.39 \times 8.5 = 11.87\text{ V} \)
(b) सेल का विद्युत वाहक बल \( E = 1.9\text{ V} \)
आंतरिक प्रतिरोध \( r = 380\ \Omega \)
अधिकतम धारा \( I_{\text{max}} = \frac{E}{r} \)
\( I_{\text{max}} = \frac{1.9}{380} = 0.005\text{ A} \)
यह धारा बहुत कम है, इसलिए यह मोटर को स्टार्ट करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
मुख्य बिंदु:
• श्रेणी संयोजन में कुल वि.वा.बल और आंतरिक प्रतिरोध सीधे जुड़ते हैं।
• ओम के नियम से परिपथ की कुल धारा ज्ञात की जाती है।
• अधिकतम धारा के लिए बाह्य प्रतिरोध को शून्य माना जाता है।
आम गलतियाँ:
• कुल आंतरिक प्रतिरोध निकालते समय 'n' से गुणा करना भूल जाना।
• टर्मिनल वोल्टता निकालते समय आंतरिक प्रतिरोध के सिरों के विभवांतर को न घटाना।
• मात्रक सही से न लिखना।
Exam Tips:
a) श्रेणी संयोजन के लिए सूत्र \( I = \frac{nE}{R + nr} \) याद रखें।
b) गणनाओं को दशमलव के दो स्थानों तक ही निकालें।
c) वैचारिक प्रश्नों का उत्तर तार्किक रूप से दें।
Question 3.16: दो समान लंबाई की तारों में एक ऐलुमिनियम का और दूसरा कॉपर का बना है। इनके प्रतिरोध समान हैं। दोनों तारों में से कौन-सा हल्का है? अतः समझाइए कि ऊपर से जाने वाली बिजली के बिलों में ऐलुमिनियम के तारों को क्यों पसंद किया जाता है? (\( \rho_{\text{cu}} = 1.72 \times 10^{-8}\ \Omega\text{m} \), Al का आपेक्षिक घनत्व \( = 2.7 \), कॉपर का आपेक्षिक घनत्व \( = 8.9 \))
Answer:
माना ऐलुमिनियम के तार का प्रतिरोधकता \( \rho_{\text{al}} = 2.63 \times 10^{-8}\ \Omega\text{m} \), आपेक्षिक घनत्व \( d_1 = 2.7 \), लंबाई \( l_1 \) और द्रव्यमान \( m_1 \) है।
कॉपर के तार की प्रतिरोधकता \( \rho_{\text{cu}} = 1.72 \times 10^{-8}\ \Omega\text{m} \), आपेक्षिक घनत्व \( d_2 = 8.9 \), लंबाई \( l_2 \) और द्रव्यमान \( m_2 \) है।
चूँकि दोनों तार समान लंबाई के हैं (\( l_1 = l_2 = l \)) और प्रतिरोध समान हैं (\( R_1 = R_2 \)):
\( R_1 = \rho_1 \frac{l_1}{A_1} \)
\( R_2 = \rho_2 \frac{l_2}{A_2} \)
प्रकारांतर से क्षेत्रफल का अनुपात:
\( \frac{A_1}{A_2} = \frac{\rho_1}{\rho_2} = \frac{2.63 \times 10^{-8}}{1.72 \times 10^{-8}} = \frac{2.63}{1.72} \)
द्रव्यमान \( m = \text{आयतन} \times \text{घनत्व} = A \times l \times d \)
द्रव्यमानों का अनुपात:
\( \frac{m_1}{m_2} = \frac{A_1 l_1 d_1}{A_2 l_2 d_2} \)
चूँकि \( l_1 = l_2 \):
\( \frac{m_1}{m_2} = \frac{A_1 d_1}{A_2 d_2} = \left(\frac{2.63}{1.72}\right) \times \left(\frac{2.7}{8.9}\right) \approx 0.46 \)
चूँकि \( m_1 < m_2 \), अत: ऐलुमिनियम का तार कॉपर के तार से हल्का होता है। इसलिए बिजली के संचरण के लिए ऐलुमिनियम पसंद किया जाता है।
मुख्य बिंदु:
• प्रतिरोधकता और क्षेत्रफल के संबंध का उपयोग किया जाता है।
• द्रव्यमान, आयतन और घनत्व का गुणनफल होता है।
• अंत में दोनों के द्रव्यमानों की तुलना की जाती है।
आम गलतियाँ:
• क्षेत्रफल और प्रतिरोधकता के व्युत्क्रमानुपाती संबंध में भ्रमित होना।
• घनत्व के मानों को गलत रखना।
• लंबाई समान होने की शर्त का उपयोग न करना।
Exam Tips:
a) इस प्रकार के तुलनात्मक प्रश्नों में अनुपात विधि का प्रयोग करें।
b) सभी मानों की इकाइयां एक समान रखें।
c) अंतिम निष्कर्ष स्पष्ट रूप से लिखें कि कौन हल्का है।
Question 3.17: मिश्रधातु मैंगिनन के बने प्रतिरोधक पर लिए गए निम्नलिखित प्रेक्षणों से आप क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
धारा I (A) = 0.2, 0.4, 0.6, 0.8, 1.0, 2.0
वोल्टता V (V) = 3.94, 7.87, 11.8, 15.7, 19.7, 39.4
धारा I (A) = 3.0, 4.0, 5.0, 6.0, 7.0, 8.0
वोल्टता V (V) = 59.2, 78.8, 98.6, 118.5, 138.2, 158.0
Answer:
दी गई सारणी से प्रत्येक प्रेक्षण के लिए \( \frac{V}{I} \) का मान निकाला जा सकता है:
\( \frac{3.94}{0.2} = 19.7\ \Omega \)
\( \frac{7.87}{0.4} \approx 19.67\ \Omega \)
इसी प्रकार सभी प्रेक्षणों के लिए \( \frac{V}{I} \) का मान लगभग \( 19.7\ \Omega \) आता है।
निष्कर्ष: वोल्टता और धारा का अनुपात स्थिर है, जो ओम के नियम का पालन करता है। अतः मैंगिनन का प्रतिरोध \( 19.7\ \Omega \) है।
मुख्य बिंदु:
• ओम के नियम के सत्यापन के लिए \( V/I \) का मान नियत होना चाहिए।
• मैंगिनन एक ओमीय चालक है।
• औसत प्रतिरोध लगभग \( 19.7\ \Omega \) प्राप्त होता है।
आम गलतियाँ:
• केवल एक मान निकालकर निष्कर्ष लिख देना।
• भाग देने में कैलकुलेशन की गलती करना।
• ओम के नियम की शर्त को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) सारणी वाले प्रश्नों में कम से कम दो-तीन मानो का अनुपात अवश्य जांच लें।
b) निष्कर्ष में स्थिर मान (Resistance) का जिक्र जरूर करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और स्पष्ट रखें।
Question 3.18: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(a) किसी असमान अनुप्रस्थ काट वाले धात्विक चालक से एकसमान धारा प्रवाहित होती है। निम्नलिखित में से चालक में कौनसी अचर रहती है धारा, धारा घनत्व, विद्युत क्षेत्र, अपवाह चाल।
(b) क्या सभी परिपधीय अवयवों के लिए ओह्म का नियम सार्वत्रिक रूप से लागू होता है? यदि नहीं, तो उन अवयवों के उदाहरण दीजिए जो ओह्म के नियम का पालन नहीं करते।
(c) किसी निम्न वोल्टता संभरण जिससे उच्च धारा देनी होती है, आंतरिक प्रतिरोध बहुत कम होना चाहिए? क्यों?
(d) किसी उच्च विभव (H.T.) संभरण, मान लीजिए 6kV, का आंतरिक प्रतिरोध अत्यधिक होना चाहिए? क्यों?
Answer:
(a) धारा (Current) अचर रहती है, क्योंकि आवेश संरक्षण के सिद्धांत के अनुसार किसी भी परिपथ में धारा का ह्रास नहीं होता।
(b) नहीं, ओह्म का नियम सार्वत्रिक रूप से सभी अवयवों के लिए लागू नहीं होता। इसके उदाहरण निर्वात डायोड, अर्धचालक डायोड आदि हैं जो अ-ओमीय चालक हैं।
(c) यदि आंतरिक प्रतिरोध कम नहीं होगा, तो स्रोत से अधिकतम धारा प्राप्त नहीं की जा सकती क्योंकि \( I = \frac{E}{R + r} \) होता है।
(d) उच्च विभव स्रोत का आंतरिक प्रतिरोध अधिक होना चाहिए ताकि शॉर्ट सर्किट होने की स्थिति में परिपथ में बहने वाली धारा सुरक्षित सीमा के भीतर रहे और दुर्घटना से बचा जा सके।
मुख्य बिंदु:
• धारा आवेश संरक्षण पर आधारित होती है अतः अनुप्रस्थ काट बदलने पर भी नहीं बदलती।
• अर्धचालक और वैक्यूम ट्यूब ओह्म के नियम का पालन नहीं करते।
• कम आंतरिक प्रतिरोध से अधिक धारा मिलती है।
आम गलतियाँ:
• असमान क्षेत्रफल देखकर धारा घनत्व को स्थिर मान लेना।
• ओह्म के नियम को हर जगह लागू मान लेना।
• उच्च विभव में आंतरिक प्रतिरोध के महत्व को न समझना।
Exam Tips:
a) सैद्धांतिक प्रश्नों के उत्तर बिंदुवार और स्पष्ट दें।
b) कारण सहित स्पष्टीकरण देना अनिवार्य है।
c) उदाहरण अवश्य दें जहाँ लागू न हो।
Question 3.19: सही विकल्प छाँटिए-
(a) धातुओं की मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता प्रायः उनक अवयव धातुओं की अपेक्षा (अधिक/कम) होती है।
(b) आमतौर पर मिश्रधातुओं के प्रतिरोध का ताप गुणांक, शुद्ध धातुओं के प्रतिरोध के ताप गुणांक से बहुत (कम/अधिक) होती है।
(c) मिश्रधातु मैंगिनन की प्रतिरोधकता ताप में वृद्धि के साथ लगभग स्वतंत्र है/तेजी से बढ़ती है)
(d) किसी प्रारूपी विद्युत रोधी (उदाहरणार्थ, अंबर) की प्रतिरोधकता की तुलना में (\( 10^{22}/10^{23} \)) कोटि के गुणांक से बड़ी होती है।
Answer:
(a) अधिक
(b) कम
(c) स्वतंत्र है
(d) \( 10^{22} \)
मुख्य बिंदु:
• मिश्रधातुओं की प्रतिरोधकता उनके घटकों से अधिक होती है।
• इनका ताप गुणांक नगण्य या बहुत कम होता है।
• मैंगिनन का प्रतिरोध ताप पर लगभग निर्भर नहीं करता।
आम गलतियाँ:
• कम और अधिक में भ्रमित होना।
• ताप गुणांक के मान को गलत चुनना।
• विकल्पों को बिना सोचे टिक करना।
Exam Tips:
a) NCERT की थ्योरी टेबल अच्छे से याद रखें।
b) रिक्त स्थानों की पूर्ति वाले प्रश्नों में सही शब्द ही चुनें।
c) मिश्रधातुओं के विशेष गुणधर्म याद रखें।
Question 3.20: (a) आपको R प्रतिरोध वाले n प्रतिरोधक दिए गए हैं। (i) अधिकतम (ii) न्यूनतम प्रभावी प्रतिरोध प्राप्त करने के लिए आप इन्हें किस प्रकार संयोजित करेंगे? अधिकतम और न्यूनतम प्रतिरोध का अनुपात क्या होगा?
(b) यदि 1 ओह्म, 2 ओह्म, 3 ओह्म के प्रतिरोध दिए गए हों उनको आप किस प्रकार संयोजित करेंगे? की प्राप्त तुल्य प्रतिरोध हो: (i) \( (113)\ \Omega \), (ii) \( (11)\ \Omega \), (iii) \( 6\ \Omega \), (iv) \( (611)\ \Omega \)?
(c) चित्र में दिखाए गए नेटवर्कों का तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए।
Answer:
(a) (i) अधिकतम प्रतिरोध के लिए सभी को श्रेणी क्रम में जोड़ना होगा,जहाँ \( R_1 = nR \) ।
(ii) न्यूनतम प्रतिरोध के लिए सभी को समांतर क्रम में जोड़ना होगा,जहाँ \( R_2 = \frac{R}{n} \) ।
अनुपात: \( \frac{R_1}{R_2} = \frac{nR}{R/n} = n^2 \)
(b) (i) \( \frac{11}{3}\ \Omega \) प्राप्त करने के लिए, \( 1\ \Omega \) और \( 2\ \Omega \) को समांतर में तथा \( 3\ \Omega \) को श्रेणी में जोड़ेंगे: \( R' = \frac{1 \times 2}{1 + 2} + 3 = \frac{2}{3} + 3 = \frac{11}{3}\ \Omega \)
(ii) \( \frac{11}{5}\ \Omega \) के लिए: \( R' = \frac{2 \times 3}{2 + 3} + 1 = \frac{6}{5} + 1 = \frac{11}{5}\ \Omega \)
(iii) \( 6\ \Omega \) के लिए तीनों को श्रेणी में जोड़ेंगे: \( R' = 1 + 2 + 3 = 6\ \Omega \)
(iv) \( \frac{6}{11}\ \Omega \) के लिए तीनों को समांतर में जोड़ेंगे: \( R' = \frac{1 \times 2 \times 3}{1 \times 2 + 2 \times 3 + 3 \times 1} = \frac{6}{11}\ \Omega \)
(c) दिए गए नेटवर्क में श्रेणी और समांतर संयोजन के नियमों का उपयोग करके तुल्य प्रतिरोध निकाला जाता है। (चित्रानुसार हल किया गया)
मुख्य बिंदु:
• श्रेणी संयोजन में प्रतिरोध जुड़ते हैं और समांतर में व्युत्क्रम जुड़ते हैं।
• अधिकतम प्रतिरोध श्रेणी क्रम में और न्यूनतम समांतर क्रम में होता है।
• जटिल परिपथों को छोटे भागों में तोड़कर हल करते हैं।
आम गलतियाँ:
• श्रेणी और समांतर के सूत्रों को आपस में मिला देना।
• लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) निकालने में गलती करना।
• संयोजन का क्रम गलत पहचानना।
Exam Tips:
a) प्रतिरोधों के संयोजन के सूत्र भली-भांति याद रखें।
b) परिपथ चित्र को ध्यान से देखकर ही श्रेणी/समांतर पहचानें।
c) गणना के प्रत्येक चरण को साफ-सुथरा लिखें।
Question 3.21: किसी \( 0.5\ \Omega \) आंतरिक प्रतिरोध वाले \( 12\text{ V} \) के एक संभरण (supply) से चित्र 3.32 में दर्शाए गए अनंत नेटवर्क द्वारा ली गई धारा का मान ज्ञात कीजिए। प्रत्येक प्रतिरोध का मान \( 1\ \Omega \) है।
Answer:
माना अनंत नेटवर्क का कुल तुल्य प्रतिरोध \( R \) है।
चूँकि नेटवर्क अनंत है, यदि इसमें से एक इकाई हटा भी दी जाए तो भी कुल प्रतिरोध \( R \) ही रहेगा।
अतः समीकरण बनेगी:
\( R' = 2 + \frac{R' \times 1}{R' + 1} \)
इसे हल करने पर द्विघात समीकरण प्राप्त होती है:
\( (R')^2 - 2R' - 2 = 0 \)
घातीय सूत्र द्वारा हल करने पर:
\( R' = \frac{2 \pm \sqrt{4 + 8}}{2} = 1 + \sqrt{3} = 1 + 1.73 = 2.73\ \Omega \)
परिपथ का कुल प्रतिरोध \( R_{\text{total}} = R' + r = 2.73 + 0.5 = 3.23\ \Omega \)
परिपथ से ली जाने वाली धारा \( I \):
\( I = \frac{V}{R_{\text{total}}} = \frac{12}{3.23} = 3.72\text{ A} \)
मुख्य बिंदु:
• अनंत श्रृंखला वाले प्रश्नों में कुल प्रतिरोध को पुनः वही मान लिया जाता है।
• द्विघात समीकरण (Quadratic Equation) बनाकर हल किया जाता है।
• आंतरिक प्रतिरोध को कुल प्रतिरोध में जोड़ा जाता है।
आम गलतियाँ:
• द्विघात समीकरण के मूल निकालते समय चिह्न की गलती करना।
• स्रोत के आंतरिक प्रतिरोध को जोड़ना भूल जाना।
• अनंत नेटवर्क की मूल अवधारणा को न समझना।
Exam Tips:
a) अनंत श्रृंखला के ऐसे प्रश्नों के मानक तरीके को याद रखें।
b) द्विघात समीकरण के सूत्र \( x = \frac{-b \pm \sqrt{b^2 - 4ac}}{2a} \) का सही प्रयोग करें।
c) अंत में ओम के नियम से धारा अवश्य निकालें।
Question 3.22: चित्र में एक पोटेंशियोमीटर दर्शाया गया है जिसमें एक \( 2.0\text{ V} \) और आंतरिक प्रतिरोध \( 0.40\ \Omega \) का कोई सेल, पोटेंशियोमीटर के प्रतिरोधक तार AB पर वोल्टता पात बनाए रखता है। कोई मानक सेल जो \( 1.02\text{ V} \) का अचर विद्युत वाहक बल बना रखता है कक्षा mA की बहुत सामान्य धाराओं के लिए) तार की \( 67.3\text{ cm} \) लंबाई पर संतुलन बिंदु होता है। मानक सेल सीटी न्यून धारा लेना सुनिश्चित करने के लिए इसके साथ परिपथ में श्रेणी \( 600\text{ k}\Omega \) का एक अति उच्च प्रतिरोध इसके साथ संबद्ध किया जाता है, जिसके संतुलन प्राप्त होने के निकट लघु पथित (shorted) कर दिया जाता है। इसके बाद मानक सेल को किसी अज्ञात विद्युत वाहक बल \( \varepsilon \) के सेल से प्रस्थापित कर दिया जाता जिससे संतुलन बिंदु तार की \( 82.3\text{ cm} \) लंबाई पर प्राप्त होता है।
(a) \( \varepsilon \) का मान क्या है? = \( 1.02\text{ V} \)
(b) \( 600\text{ k}\Omega \) के उच्च प्रतिरोध का क्या प्रयोजन है?
(c) क्या इस उच्च प्रतिरोध से संतुलन बिन्दु प्रभावित होता है?
(d) उपरोक्त स्थिति में यदि पोटेंशियोमीटर के परिचालक सेल का विद्युत वाहक बल \( 2.0\text{ V} \) के स्थान पर \( 1.0\text{ V} \) हो तो क्या यह विधि फिर भी सफल रहेगी?
(e) क्या यह परिपथ कुछ mV की कोटि के अत्यल्प विद्युत वाहक बलों (जैसे किसी प्रारूपी ताप वैध्य युग्म का विद्युत वाहक बल) के निर्धारण में सफल होगी? यदि नहीं, तो आप इसमें किस प्रकार संशोधन करेंगे?
Answer:
(a) मानक सेल का वि.वा.बल \( E_1 = 1.02\text{ V} \), संतुलन लंबाई \( l_1 = 67.3\text{ cm} \)
अज्ञात सेल की लंबाई \( l_2 = 82.3\text{ cm} \)
सूत्र से: \( \frac{E_1}{\varepsilon} = \frac{l_1}{l_2} \implies \varepsilon = E_1 \times \frac{l_2}{l_1} \)
\( \varepsilon = 1.02 \times \frac{82.3}{67.3} = 1.247\text{ V} \)
(b) उच्च प्रतिरोध का उद्देश्य गैल्वेनोमीटर को अत्यधिक धारा से बचाना है जब संतुलन बिंदु दूर हो।
(c) नहीं, संतुलन बिंदु उच्च प्रतिरोध से प्रभावित नहीं होता क्योंकि संतुलन की स्थिति में गैल्वेनोमीटर में शून्य धारा बहती है।
(d) यदि परिचालक सेल का वि.वा.बल \( 1.0\text{ V} \) कर दिया जाए, तो वह \( 1.02\text{ V} \) के मानक सेल को संतुलित नहीं कर पाएगा क्योंकि तार पर अधिकतम विभवांतर सेल के वि.वा.बल से कम हो जाएगा।
(e) नहीं, यह अत्यल्प वि.वा.बल के लिए पर्याप्त नहीं है क्योंकि संतुलन लंबाई बहुत कम प्राप्त होगी जिसमें त्रुटि अधिक होगी। संशोधन के लिए श्रेणी क्रम में उपयुक्त प्रतिरोध जोड़कर विभव प्रवणता कम करनी होगी।
मुख्य बिंदु:
• पोटेंशियोमीटर के सिद्धांत के अनुसार \( E \propto l \) ।
• संतुलन स्थिति में गैल्वेनोमीटर में धारा शून्य होने के कारण आंतरिक या श्रेणी प्रतिरोध का प्रभाव नहीं पड़ता।
• परिचालक सेल का वि.वा.बल अज्ञात सेल से अधिक होना चाहिए।
आम गलतियाँ:
• लंबाइयों के अनुपात को उल्टा रख देना।
• उच्च प्रतिरोध के कार्य को गलत समझ लेना।
• विभव प्रवणता की शर्तों को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) पोटेंशियोमीटर के आनुपातिक सूत्र \( \frac{E_1}{E_2} = \frac{l_1}{l_2} \) को अच्छी तरह याद रखें।
b) वैوارिक भागों के उत्तर वैचारिक स्पष्टता के साथ दें।
c) गणनाओं में इकाई (cm) का विशेष ध्यान रखें।
Question 3.23: चित्र में किसी \( 1.5\text{ V} \) के सेल का आंतरिक प्रतिरोध मापने के लिए एक \( 2.0\text{ V} \) का पोटेंशियोमीटर दर्शाया गया है। खुले परिपथ में सेल का संतुलन बिंदु \( 76.3\text{ cm} \) पर मिलता है। सेल के बाह्य परिपथ में \( 9.5\ \Omega \) प्रतिरोध का एक प्रतिरोधक संयोजित करने पर संतुलन बिंदु पोटेंशियोमीटर के तार की \( 64.8\text{ cm} \) लंबाई पर पहुंच जाता है। सेल के आंतरिक प्रतिरोध का मान ज्ञात कीजिए।
Answer:
खुले परिपथ में संतुलन लंबाई \( l_1 = 76.3\text{ cm} \)
बाह्य प्रतिरोध \( R = 9.5\ \Omega \) जोड़ने पर संतुलन लंबाई \( l_2 = 64.8\text{ cm} \)
आंतरिक प्रतिरोध \( r \) का सूत्र:
\( r = \left(\frac{l_1 - l_2}{l_2}\right) R \)
मान रखने पर:
\( r = \left(\frac{76.3 - 64.8}{64.8}\right) \times 9.5 \)
\( r = \left(\frac{11.5}{64.8}\right) \times 9.5 \)
\( r \approx 1.68\ \Omega \)
अतः सेल का आंतरिक प्रतिरोध \( 1.68\ \Omega \) है।
मुख्य बिंदु:
• आंतरिक प्रतिरोध ज्ञात करने के लिए पोटेंशियोमीटर का यह मानक सूत्र है।
• \( l_1 \) खुले परिपथ की लंबाई और \( l_2 \) बंद परिपथ की लंबाई है।
• बाह्य प्रतिरोध \( R \) का मान सीधे सूत्र में रखा जाता है।
आम गलतियाँ:
• \( l_1 \) और \( l_2 \) को आपस में बदल देना।
• हर में \( l_1 \) के स्थान पर \( l_2 \) न रखना।
• घटाव (Subtraction) में गलती करना।
Exam Tips:
a) पोटेंशियोमीटर द्वारा आंतरिक प्रतिरोध ज्ञात करने का व्यंजक और सूत्र याद रखें।
b) कैलकुレーション में दशमलव के बाद कम से कम दो अंक तक हल करें।
c) उत्तर के साथ उचित मात्रक (\( \Omega \)) अवश्य लिखें।
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