Step-by-Step Textbook Solutions for Class 12 Physics Chapter 02 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता
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Question 2.1: \( 5 \times 10^{-8} \text{ C} \) तथा \( -3 \times 10^{-8} \text{ C} \) के दो आवेश \( 16 \text{ cm} \) दूरी पर स्थित हैं। दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के किस बिंदु पर वैद्युत विभव शून्य होगा? अनंत पर विभव शून्य लीजिए।
Answer:
मान लीजिए दोनों आवेशों के बीच की कुल दूरी \( d = 16 \text{ cm} = 0.16 \text{ m} \) है।
पहला आवेश \( q_1 = 5 \times 10^{-8} \text{ C} \)
दूसरा आवेश \( q_2 = -3 \times 10^{-8} \text{ C} \)
मान लेते हैं कि आवेश \( q_1 \) से \( r \) दूरी पर वैद्युत विभव शून्य है। विभव का सूत्र होता है:
\( V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \left( \frac{q_1}{r} + \frac{q_2}{d - r} \right) \)
विभव शून्य (\( V = 0 \)) रखने पर:
\( 0 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \left( \frac{5 \times 10^{-8}}{r} + \frac{-3 \times 10^{-8}}{0.16 - r} \right) \)
\( \frac{5}{r} = \frac{3}{0.16 - r} \)
\( 5(0.16 - r) = 3r \)
\( 0.8 - 5r = 3r \)
\( 8r = 0.8 \)
\( r = 0.1 \text{ m} = 10 \text{ cm} \)
अर्थात, दोनों आवेशों के बीच में \( q_1 \) से \( 10 \text{ cm} \) की दूरी पर विभव शून्य होगा।
इसी प्रकार, यदि बिंदु दोनों आवेशों के बाहर स्थित हो और उसकी दूरी \( s \) हो:
\( 0 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \left( \frac{q_1}{s} + \frac{q_2}{s - d} \right) \)
\( \frac{5 \times 10^{-8}}{s} = \frac{3 \times 10^{-8}}{s - 0.16} \)
\( 5(s - 0.16) = 3s \)
\( 2s = 0.8 \)
\( s = 0.4 \text{ m} = 40 \text{ cm} \)
अतः, निकाय के बाहर \( 40 \text{ cm} \) की दूरी पर भी विभव शून्य होगा।
मुख्य बिंदु:
• दो आवेशों के कारण किसी बिंदु पर कुल विभव उनके व्यक्तिगत विभवों का बीजगणितीय योग होता है。
• विभव एक अदिश राशि है, इसलिए इसमें चिन्ह (+ या -) का विशेष ध्यान रखा जाता है。
• शून्य विभव की स्थिति आवेशों के बीच और आवेशों के बाहर दोनों तरफ संभव हो सकती है।
आम गलतियाँ:
• ऋणात्मक आवेश के चिन्ह को सूत्र में न रखना।
• सेमी (cm) को मीटर (m) में परिवर्तित न करना।
• केवल आंतरिक बिंदु को ज्ञात करके बाहरी बिंदु को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) परीक्षा में हमेशा दोनों स्थितियों (आवेशों के बीच और बाहर) के लिए हल करें जब तक कि प्रश्न में स्पष्ट रूप से आंतरिक बिंदु न पूछा गया हो।
b) दूरियों की इकाइयों को हल करते समय एक ही पद्धति (SI इकाई) में रखें।
c) अंत में उत्तर को सेंटीमीटर या मीटर में स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question 2.2: \( 10 \text{ cm} \) भुजा वाले एक सम-षट्भुज के प्रत्येक शीर्ष पर \( 5\,\mu\text{C} \) का आवेश है। षट्भुज के केंद्र पर विभव परिकलित कीजिए।
Answer:
सम-षट्भुज की प्रत्येक भुजा \( l = 10 \text{ cm} = 0.1 \text{ m} \) है।
सम-षट्भुज के केंद्र से प्रत्येक शीर्ष की दूरी षट्भुज की भुजा के बराबर होती है, इसलिए केंद्र से दूरी \( d = 0.1 \text{ m} \) ।
प्रत्येक शीर्ष पर आवेश \( q = 5\,\mu\text{C} = 5 \times 10^{-6} \text{ C} \)
षट्भुज में कुल 6 शीर्ष हैं और सभी पर समान आवेश है, इसलिए केंद्र पर कुल विभव होगा:
\( V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \times \frac{6 \times q}{d} \)
यहाँ \( \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} = 9 \times 10^9 \text{ N m}^2\text{C}^{-2} \)
मान रखने पर:
\( V = \frac{9 \times 10^9 \times 6 \times 5 \times 10^{-6}}{0.1} \)
\( V = \frac{270 \times 10^3}{0.1} \)
\( V = 2.7 \times 10^6 \text{ V} \)
मुख्य बिंदु:
• सम-षट्भुज के केंद्र से सभी शीर्षों की दूरियाँ आपस में समान होती हैं।
• विभव एक अदिश राशि है, इसलिए सभी 6 आवेशों के विभव सीधे जुड़ जाते हैं।
• \( 1\,\mu\text{C} = 10^{-6}\text{ C} \) का मान सही प्रकार से प्रतिस्थापित करना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• केंद्र की दूरी को षट्भुज की भुजा के बराबर न समझना।
• 6 से गुणा करना भूल जाना।
• घातों की गणना (Powers calculation) में त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) बहुभुज (Polygon) के प्रश्नों में केंद्र से दूरी हमेशा भुजा की लंबाई के बराबर होती है (समबाहु त्रिभुज और सम-षट्भुज के लिए)।
b) वैज्ञानिक संकेतन (Scientific Notation) का प्रयोग करके गणना को सरल बनाएं।
c) अंत में मात्रक (Volt) अवश्य लिखें।
Question 2.3: \( 6 \text{ cm} \) की दूरी पर अवस्थित दो बिंदुओ A एवं B पर दो आवेश \( 2\,\mu\text{C} \) तथा \( -2\,\mu\text{C} \) रखे हैं।
(a) निकाय के सम विभव पृष्ठ की पहचान कीजिए।
(b) इस पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दिशा क्या है?
Answer:
(a) चूँकि दोनों आवेश परिमाण में समान और प्रकृति में विपरीत हैं (\( +2\,\mu\text{C} \) और \( -2\,\mu\text{C} \)), इसलिए यह एक वैद्युत द्विध्रुव बनाता है।
दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा AB के ठीक मध्य में स्थित वह तल (Plane) जिस पर विभव शून्य होता है, समविभव पृष्ठ कहलाता है।
यह पृष्ठ रेखा AB के लंबवत होता है और उसके मध्य बिंदु से गुजरता है।
(b) किसी भी समविभव पृष्ठ के प्रत्येक बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दिशा हमेशा पृष्ठ के अभिलंबवत (लंबवत) होती है और यह धन आवेश से ऋण आवेश की ओर यानी AB की दिशा में होगी।
मुख्य बिंदु:
• समान परिमाण और विपरीत प्रकृति के आवेशों के निकाय के मध्य का तल समविभव पृष्ठ बनाता है जहाँ विभव शून्य होता है।
• विद्युत क्षेत्र रेखाएं हमेशा समविभव पृष्ठ के लंबवत होती हैं।
• द्विध्रुव के मध्य समद्विभाजक तल पर विभव सर्वत्र शून्य होता है।
आम गलतियाँ:
• समविभव पृष्ठ को एक बिंदु मान लेना जबकि यह एक तल (Plane) होता है।
• विद्युत क्षेत्र की दिशा को पृष्ठ के समांतर बता देना।
Exam Tips:
a) सैद्धांतिक प्रश्नों में ज्यामितीय स्थिति को स्पष्ट रूप से शब्दों में समझाएं।
b) (a) और (b) दोनों भागों का उत्तर अलग-अलग बिंदुओं में दें।
c) विद्युत क्षेत्र और समविभव पृष्ठ के लंबवत संबंध को हमेशा याद रखें।
Question 2.4: \( 12 \text{ cm} \) त्रिज्या वाले एक गोलीय चालक के पृष्ठ पर \( 1.6 \times 10^{-7} \text{ C} \) का आवेश एक समान रूप से वितरित है।
(a) गोले के अंदर
(b) गोले के ठीक बाहर
(c) गोले के केंद्र से \( 18 \text{ cm} \) पर अवस्थित, किसी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र क्या होगा?
Answer:
गोले की त्रिज्या \( r = 12 \text{ cm} = 0.12 \text{ m} \)
आवेश \( q = 1.6 \times 10^{-7} \text{ C} \)
(a) गोले के अंदर:
चालक गोले के भीतर विद्युत क्षेत्र शून्य होता है, क्योंकि आवेश केवल चालक के बाह्य पृष्ठ पर रहता है और अंदर कोई विद्युत क्षेत्र रेखा प्रवेश नहीं करती।
अतः गोले के अंदर विद्युत क्षेत्र \( E = 0 \)
(b) गोले के ठीक बाहर (पृष्ठ पर):
\( E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r^2} \)
\( E = \frac{9 \times 10^9 \times 1.6 \times 10^{-7}}{(0.12)^2} \)
\( E = \frac{14.4 \times 10^2}{0.0144} \)
\( E = 10^5 \text{ N/C} \)
(c) गोले के केंद्र से \( 18 \text{ cm} \) (\( d = 0.18 \text{ m} \)) की दूरी पर:
\( E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{d^2} \)
\( E = \frac{9 \times 10^9 \times 1.6 \times 10^{-7}}{(0.18)^2} \)
\( E = \frac{14.4 \times 10^2}{0.0324} \)
\( E = 4.4 \times 10^4 \text{ N/C} \)
मुख्य बिंदु:
• आवेशित चालक गोले के अंदर विद्युत क्षेत्र हमेशा शून्य होता है।
• ठीक बाहर या सतह पर दूरी गोले की त्रिज्या के बराबर ली जाती है।
• गोले के बाहर किसी बिंदु के लिए पूरा आवेश केंद्र पर केंद्रित माना जा सकता है।
आम गलतियाँ:
• गोले के अंदर विद्युत क्षेत्र को शून्य न मानकर सूत्र से हल करने का प्रयास करना।
• सेंटीमीटर को मीटर में बदलते समय वर्ग (Square) करना भूल जाना।
Exam Tips:
a) प्रॉपर्टी आधारित भाग (a) को सीधे एक लाइन में कारण सहित लिखें।
b) गणना करते समय दशमलव और घातों का विशेष ध्यान रखें।
c) विद्युत क्षेत्र का मात्रक \( \text{N/C} \) या \( \text{V/m} \) लिखें।
Question 2.5: एक समांतर पट्टिका संधारित्र, जिसकी पट्टिकाओं के बीच वायु है, की धारिता \( 8 \text{ pF} \) (\( 1 \text{ pF} = 10^{-12} \text{ F} \)) है। यदि पट्टिकाओं के बीच की दूरी को आधा कर दिया जाए और इनके बीच के स्थान में \( 6 \) परावैद्युतांक का एक पदार्थ भर दिया जाए तो इसकी धारिता क्या होगी?
Answer:
प्रारंभ में वायु भरे समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता:
\( C = \frac{\varepsilon_0 A}{d} = 8 \text{ pF} \) ---(1)
अब पट्टिकाओं के बीच की नई दूरी \( d' = \frac{d}{2} \)
तथा परावैद्युतांक \( k = 6 \)
नई धारिता का सूत्र है:
\( C' = \frac{k \varepsilon_0 A}{d'} \)
\( d' \) का मान रखने पर:
\( C' = \frac{6 \varepsilon_0 A}{d / 2} \)
\( C' = 12 \frac{\varepsilon_0 A}{d} \)
समीकरण (1) से \( \frac{\varepsilon_0 A}{d} = C \) का मान रखने पर:
\( C' = 12 \times C \)
\( C' = 12 \times 8 \text{ pF} \)
\( C' = 96 \text{ pF} \)
मुख्य बिंदु:
• परावैद्युत माध्यम भरने पर धारिता \( k \) गुना बढ़ जाती है।
• दूरी आधी करने पर धारिता दोगुनी हो जाती है।
• दोनों प्रभावों को संयुक्त करने पर नई धारिता \( C' = \frac{k}{d'} \times C \) हो जाती है।
आम गलतियाँ:
• दूरी आधी करने पर हर (denominator) में 2 को ऊपर अंश में ले जाना भूल जाना।
• परावैद्युतांक और दूरी के प्रभाव को अलग-अलग न समझकर गलत गुणा करना।
Exam Tips:
a) ऐसे अनुपात वाले प्रश्नों में मान रखने के बजाय प्रारंभिक समीकरण के पदों में ही हल करना आसान होता है।
b) अंतिम उत्तर में मात्रक (pF) लिखना न भूलें।
c) सूत्र स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 2.6: \( 9 \text{ pF} \) धारिता वाले तीन संधारित्रों को श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है।
(a) संयोजन की कुल धारिता क्या है?
(b) यदि संयोजन को \( 120 \text{ V} \) के संभरण (सप्लाई) से जोड़ दिया जाए, तो प्रत्येक संधारित्र पर क्या विभवांतर होगा?
Answer:
(a) श्रेणीक्रम में तुल्य धारिता (\( C_{eq} \)) का सूत्र:
\( \frac{1}{C_{eq}} = \frac{1}{C_1} + \frac{1}{C_2} + \frac{1}{C_3} \)
यहाँ \( C_1 = C_2 = C_3 = 9 \text{ pF} \)
\( \frac{1}{C_{eq}} = \frac{1}{9} + \frac{1}{9} + \frac{1}{9} \)
\( \frac{1}{C_{eq}} = \frac{3}{9} = \frac{1}{3} \)
\( C_{eq} = 3 \text{ pF} \)
(b) चूँकि तीनों संधारित्र समान धारिता के हैं और श्रेणीक्रम में जुड़े हैं, इसलिए कुल विभवांतर तीनों पर समान रूप से विभाजित होगा।
सप्लाई वोल्टेज \( V = 120 \text{ V} \)
प्रत्येक संधारित्र पर विभवांतर \( V_1 = \frac{V}{3} \)
\( V_1 = \frac{120}{3} = 40 \text{ V} \)
मुख्य बिंदु:
• श्रेणीक्रम संयोजन में कुल धारिता का व्युत्क्रम व्यक्तिगत धारिताओं के व्युत्क्रमों के योग के बराबर होता है।
• श्रेणीक्रम में प्रत्येक संधारित्र पर आवेश समान रहता है।
• समान धारिता होने पर कुल वोल्टेज संधारित्रों की संख्या में बराबर बंट जाता है।
आम गलतियाँ:
• \( \frac{1}{C_{eq}} \) निकालने के बाद उसका व्युत्क्रम (Reciprocal) करना भूल जाना।
• श्रेणीक्रम में विभवांतर को अलग-अलग संधारित्रों पर कुल वोल्टेज के बराबर मान लेना।
Exam Tips:
a) भाग (a) और (b) को स्पष्ट रूप से अलग-अलग हल करें।
b) श्रेणी और समांतर क्रम के सूत्रों में भ्रमित न हों।
c) विभवांतर का मात्रक वोल्ट (V) लिखें।
Question 2.7: \( 2 \text{ pF}, 3 \text{ pF} \) और \( 4 \text{ pF} \) धारिता वाले तीन संधारित्र पार्श्वक्रम में जोड़े हैं।
(a) संयोजन की कुल धारिता क्या है?
(b) यदि संयोजन को \( 100 \text{ V} \) के संभरण से जोड़ दें तो प्रत्येक संधारित्र पर आवेश ज्ञात कीजिए।
Answer:
(a) पार्श्वक्रम (समांतर क्रम) में तुल्य धारिता का सूत्र:
\( C_{eq} = C_1 + C_2 + C_3 \)
यहाँ \( C_1 = 2 \text{ pF}, C_2 = 3 \text{ pF}, C_3 = 4 \text{ pF} \)
\( C_{eq} = 2 + 3 + 4 = 9 \text{ pF} \)
(b) समांतर क्रम में प्रत्येक संधारित्र के सिरों पर विभवांतर समान रहता है और यह सप्लाई वोल्टेज \( V = 100 \text{ V} \) के बराबर होगा।
आवेश \( q = CV \) सूत्र का उपयोग करके प्रत्येक पर आवेश:
पहला संधारित्र (\( C_1 \)) पर आवेश:
\( q_1 = C_1 \times V = 2 \text{ pF} \times 100 \text{ V} = 200 \text{ pC} = 2 \times 10^{-10} \text{ C} \)
दूसरा संधारित्र (\( C_2 \)) पर आवेश:
\( q_2 = C_2 \times V = 3 \text{ pF} \times 100 \text{ V} = 300 \text{ pC} = 3 \times 10^{-10} \text{ C} \)
तीसरा संधारित्र (\( C_3 \)) पर आवेश:
\( q_3 = C_3 \times V = 4 \text{ pF} \times 100 \text{ V} = 400 \text{ pC} = 4 \times 10^{-10} \text{ C} \)
मुख्य बिंदु:
• समांतर क्रम में धारिताएँ सीधे जुड़ जाती हैं।
• समांतर क्रम में प्रत्येक संधारित्र पर विभवांतर समान रहता है।
• आवेश निकालने के लिए \( q = CV \) सूत्र का प्रयोग किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• समांतर क्रम में भी व्युत्क्रम सूत्र का उपयोग कर देना।
• पिकोकुलॉम (pC) को कूलॉम या सामान्य संख्या में बदलते समय गलती करना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक संधारित्र के लिए आवेश अलग-अलग निकालें क्योंकि धारिताएँ भिन्न हैं।
b) इकाइयों का ध्यान रखें (pF और V के गुणन से pC प्राप्त होता है)।
c) स्पष्ट रूप से सूत्र \( q = CV \) को दर्शाएं।
Question 2.8: पट्टिकाओं के बीच वायु वाले एक समांतर पट्टिका संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका का क्षेत्रफल \( 6 \times 10^{-3} \text{ m}^2 \) तथा उनके बीच की दूरी \( 3 \text{ mm} \) है। संधारित्र की धारिता को परिकलित कीजिए। यदि इस संधारित्र को \( 100 \text{ V} \) के संभरण से जोड़ दिया जाए तो संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका पर कितना आवेश होगा?
Answer:
क्षेत्रफल \( A = 6 \times 10^{-3} \text{ m}^2 \)
दूरी \( d = 3 \text{ mm} = 3 \times 10^{-3} \text{ m} \)
सप्लाई वोल्टेज \( V = 100 \text{ V} \)
वायु भरे समांतर प्लेट संधारित्र की धारिता:
\( C = \frac{\varepsilon_0 A}{d} \)
जहाँ \( \varepsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12} \text{ C}^2\text{N}^{-1}\text{m}^{-2} \)
मान रखने पर:
\( C = \frac{8.854 \times 10^{-12} \times 6 \times 10^{-3}}{3 \times 10^{-3}} \)
\( C = 8.854 \times 10^{-12} \times 2 \)
\( C = 17.71 \times 10^{-12} \text{ F} = 17.71 \text{ pF} \)
अब प्रत्येक पट्टिका पर आवेश \( q = CV \):
\( q = 17.71 \times 10^{-12} \times 100 \)
\( q = 17.71 \times 10^{-10} \text{ C} = 1.77 \times 10^{-9} \text{ C} \)
मुख्य बिंदु:
• धारिता ज्ञात करने के लिए \( C = \frac{\varepsilon_0 A}{d} \) सूत्र का प्रयोग होता है।
• मिलीमीटर को मीटर में बदलने के लिए \( 10^{-3} \) से गुणा करते हैं।
• आवेश निकालने के लिए धारिता को वोल्टेज से गुणा किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• मिलीमीटर को मीटर में बदलना भूल जाना।
• \( \varepsilon_0 \) का मानक मान गलत रखना।
Exam Tips:
a) मान रखते समय घातों का गुणन और भाग सावधानी से करें।
b) धारिता का मात्रक फैरड (F) और आवेश का कूलॉम (C) स्पष्ट लिखें।
c) गणना के चरणों को क्रमबद्ध तरीके से दिखाएं।
Question 2.9: अभ्यास 2.8 में दिए गए संधारित्र की पट्टिकाओं के बीच यदि \( 3 \text{ mm} \) मोटी अभ्रक की एक शीट (पत्थर) (पравैद्युतांक = \( 6 \)) रख दी जाती है तो स्पष्ट कीजिए कि क्या होगा जब
(a) विभव (वोल्टेज) संभरण जुड़ा ही रहेगा।
(b) संभरण को हटा लिया जाएगा?
Answer:
पравैद्युतांक \( k = 6 \), शीट की मोटाई प्लेटों के बीच की दूरी के बराबर है (\( t = d = 3 \text{ mm} \))।
प्रारंभिक धारिता \( C = 17.71 \text{ pF} \)
पравैद्युतक माध्यम रखने के बाद नई धारिता:
\( C' = kC = 6 \times 17.71 \text{ pF} = 106.26 \text{ pF} \approx 106 \times 10^{-12} \text{ F} \)
(a) जब विभव संभरण जुड़ा रहता है (\( V = 100 \text{ V} \) नियत रहता है):
• विभवांतर \( V = 100 \text{ V} \) अपरिवर्तित रहता है।
• नई धारिता \( C' = 106 \text{ pF} \)
• नया आवेश \( q_1 = C'V = 106 \times 10^{-12} \times 100 = 1.06 \times 10^{-8} \text{ C} \)
(b) जब संभरण को हटा लिया जाता है (आवेश \( q \) नियत रहता है, \( q = 1.77 \times 10^{-9} \text{ C} \)):
• आवेश संरक्षित रहता है और अपरिवर्तित रहता है।
• नई धारिता \( C' = 106 \text{ pF} \)
• नया विभवांतर \( V' = \frac{q}{C'} = \frac{1.77 \times 10^{-9}}{106 \times 10^{-12}} = 16.7 \text{ V} \)
मुख्य बिंदु:
• बैटरी जुड़े रहने पर विभवांतर नियत रहता है और आवेश बढ़ जाता है।
• बैटरी हटाने पर आवेश नियत रहता है और विभवांतर कम हो जाता है।
• माध्यम रखने पर धारिता हमेशा \( k \) गुना हो जाती है।
आम गलतियाँ:
• बैटरी जुड़े रहने और हटने की स्थिति में नियत रहने वाले भौतिक राशियों (V और q) में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) दोनों स्थितियों (a) और (b) को अलग-अलग उप-शीर्षक के साथ हल करें।
b) मुख्य सूत्रों जैसे \( q = CV \) का सही संदर्भ दें।
c) अंतिम उत्तर में मात्रक लिखना न भूलें।
Question 2.10: \( 12 \text{ pF} \) का एक संधारित्र \( 50 \text{ V} \) की बैटरी से जुड़ा है। संधारित्र में कितनी स्थिरवैद्युत ऊर्जा संचित होगी?
Answer:
संधारित्र की धारिता \( C = 12 \text{ pF} = 12 \times 10^{-12} \text{ F} \)
वैभवांतर \( V = 50 \text{ V} \)
संधारित्र में संचित स्थिरवैद्युत ऊर्जा (\( E \)) का सूत्र:
\( E = \frac{1}{2}CV^2 \)
मान रखने पर:
\( E = \frac{1}{2} \times 12 \times 10^{-12} \times (50)^2 \)
\( E = 6 \times 10^{-12} \times 2500 \)
\( E = 15000 \times 10^{-12} \text{ J} \)
\( E = 1.5 \times 10^{-8} \text{ J} \)
मुख्य बिंदु:
• संधारित्र में संचित ऊर्जा का सूत्र \( E = \frac{1}{2}CV^2 \) होता है।
• धारिता को फैरड (F) में बदलना अनिवार्य है।
• ऊर्जा का मात्रक जूल (J) होता है।
आम गलतियाँ:
• वोल्टेज का वर्ग (Square) करना भूल जाना।
• pF को F में बदलते समय घात \( 10^{-12} \) न लगाना।
Exam Tips:
a) सूत्र लिखकर मान प्रतिस्थापित करें।
b) गणना को सरल करने के लिए पहले संख्याओं का गुणा करें और अंत में घातों को समायोजित करें।
c) मात्रक लिखना ना भूलें।
Question 2.11: \( 200 \text{ V} \) संभरण (सप्लाई) से एक \( 600 \text{ pF} \) के संधारित्र को आवेशित किया जाता है। फिर इसको संभरण से वियोजित कर देते हैं तथा एक अन्य \( 600 \text{ pF} \) वाले अनावेशित संधारित्र से जोड़ देते हैं। इस प्रक्रिया में कितनी ऊर्जा का ह्रास होता है?
Answer:
प्रथम संधारित्र की धारिता \( C = 600 \text{ pF} = 600 \times 10^{-12} \text{ F} \)
वैभवांतर \( V = 200 \text{ V} \)
प्रारंभ में संधारित्र में संचित ऊर्जा:
\( E_1 = \frac{1}{2}CV^2 \)
\( E_1 = \frac{1}{2} \times (600 \times 10^{-12}) \times (200)^2 \)
\( E_1 = \frac{1}{2} \times 600 \times 10^{-12} \times 40000 \)
\( E_1 = 1.2 \times 10^{-5} \text{ J} \)
जब इस आवेशित संधारित्र को दूसरे समान अनावेशित संधारित्र (\( 600 \text{ pF} \)) के साथ समांतर क्रम में जोड़ा जाता है, तो उभयनिष्ठ विभव के कारण तुल्य धारिता दोगुनी हो जाती है:
\( C_{eq} = C + C = 600 + 600 = 1200 \text{ pF} \)
तथा नया विभव आधा हो जाता है या ऊर्जा का नया मान:
\( E_2 = \frac{1}{2} C_{eq} V'^2 \) (जहाँ \( V' = 100 \text{ V} \))
\( E_2 = \frac{1}{2} \times (1200 \times 10^{-12}) \times (100)^2 \)
\( E_2 = 0.6 \times 10^{-5} \text{ J} \)
ऊर्जा में ह्रास (\( \Delta E \)):
\( \Delta E = E_1 - E_2 \)
\( \Delta E = 1.2 \times 10^{-5} - 0.6 \times 10^{-5} \)
\( \Delta E = 0.6 \times 10^{-5} \text{ J} = 6 \times 10^{-6} \text{ J} \)
मुख्य बिंदु:
• दो चालकों या संधारित्रों को जोड़ने पर आवेश संरक्षण के कारण ऊर्जा का हमेशा ह्रास (Loss) होता है।
• ह्रास ऊष्मा या चिंगारी के रूप में होता है।
• \( \Delta E = E_1 - E_2 \) सूत्र से ऊर्जा ह्रास निकाला जाता है।
आम गलतियाँ:
• ऊर्जा ह्रास के सूत्र में प्रारंभिक ऊर्जा में से अंतिम ऊर्जा न घटाना।
• दूसरे संधारित्र को जोड़ने पर विभव और धारिता में होने वाले परिवर्तन को गलत समझना।
Exam Tips:
a) प्रारंभिक ऊर्जा और अंतिम ऊर्जा को अलग-अलग गणना करके निकालें।
b) ऊर्जा ह्रास के मानक सूत्र \( \Delta E = \frac{1}{2} \frac{C_1 C_2}{C_1 + C_2} (V_1 - V_2)^2 \) का भी प्रत्यक्ष उपयोग किया जा सकता है।
c) उत्तर को मानक वैज्ञानिक रूप में लिखें।
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Step-by-Step Textbook Answers: Class 12 Physics Chapter 02 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता
Chapter Exercise Answers for Class 12 Physics
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FAQs
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