NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 02 Electrostatic Potential and Capacitance (स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता) Additional Questions in Hindi

Download NCERT Solutions for Class 12 Physics Chapter 02 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता

Review structured textbook solutions for Class 12 Physics Chapter 02 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता. Built according to NCERT guidelines for the 2026-27 academic year, these downloadable answers support daily revision and problem-solving accuracy.

Access NCERT Solutions and Answers

Access the complete solution PDF for Class 12 Physics below. Regular practice with these targeted textbook answers builds familiarity with standard question patterns and helps secure higher marks in final school evaluations.

Question 2.12: मूल बिंदु पर एक 8 mC का आवेश अवस्थित है। \( 2 \times 10^{-9}\text{ C} \) के एक छोटे से आवेश को बिंदु \( \text{P } (0, 0, 3)\text{ से, बिंदु R } (0, 6\text{ cm, } 9\text{ cm}) \) से होकर, बिंदु \( \text{Q } (0, 4\text{ cm, } 0) \) तक ले जाने में किया गया कार्य परिकलित कीजिए।

Answer:

मूल बिंदु पर स्थित आवेश, \( q = 8\text{ mC} = 8 \times 10^{-3}\text{ C} \)
परीक्षण आवेश, \( q_1 = 2 \times 10^{-9}\text{ C} \)
बिंदु P की मूल बिंदु से दूरी, \( d_1 = 3\text{ cm} = 0.03\text{ m} \)
बिंदु Q की मूल बिंदु से दूरी, \( d_2 = 4\text{ cm} = 0.04\text{ m} \)
स्थिर वैद्युत बल द्वारा किया गया कार्य पथ पर निर्भर नहीं करता है, यह केवल प्रारंभिक और अंतिम स्थितियों पर निर्भर करता है:
\( W = q_1 (V_{\text{initial}} - V_{\text{final}}) = q_1 (V_{\text{P}} - V_{\text{Q}}) \)
\( W = q_1 \left( \frac{q}{4\pi\varepsilon_0 d_1} - \frac{q}{4\pi\varepsilon_0 d_2} \right) \)
\( W = \frac{qq_1}{4\pi\varepsilon_0} \left( \frac{1}{d_1} - \frac{1}{d_2} \right) \)
मान रखने पर:
\( W = (9 \times 10^9) \times (8 \times 10^{-3}) \times (2 \times 10^{-9}) \left( \frac{1}{0.03} - \frac{1}{0.04} \right) \)
\( W = 144 \times 10^{-3} \times \left( \frac{0.04 - 0.03}{0.0012} \right) \)
\( W = -1.27\text{ J} \)

मुख्य बिंदु:

• स्थिर वैद्युत बल एक संरक्षी बल है।
• कार्य पथ की लंबाई पर निर्भर नहीं करता।
• केवल प्रारंभिक तथा अंतिम बिंदुओं की स्थिति महत्वपूर्ण होती है।

आम गलतियाँ:

• सेंटीमीटर को मीटर में बदलना भूल जाना।
• प्रारंभिक और अंतिम बिंदुओं के क्रम को उल्टा कर देना।
• घातांकों की गणना में गलती करना।

Exam Tips:

a) संरक्षी बलों के गुणों का उल्लेख उत्तर में अवश्य करें।
b) दूरियों की इकाइयों को हमेशा SI पद्धति में बदलें।
c) गणना करते समय कोष्ठक का ध्यान रखें।

 

Question 2.13: b भुजा वाले एक घन के प्रत्येक शीर्ष पर q आवेश है। इस आवेश विन्यास के कारण घन के केंद्र पर विद्युत विभव तथा विद्युत क्षेत्र ज्ञात कीजिए।

Answer:

घन की एक भुजा की लंबाई = \( b \)
घन के विकर्ण की लंबाई, \( l = \sqrt{b^2 + b^2 + b^2} = \sqrt{3}b \)
केंद्र की प्रत्येक कोने से दूरी, \( r = \frac{\sqrt{3}}{2}b \)
घन के 8 कोने हैं, इसलिए केंद्र पर कुल विभव:
\( V = 8 \times \left( \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r} \right) \)
\( V = 8 \times \frac{q}{4\pi\varepsilon_0 \left(\frac{\sqrt{3}}{2}b\right)} = \frac{4\sqrt{3}q}{\pi\varepsilon_0 b} \)
समरूपता के कारण केंद्र पर विद्युत क्षेत्र शून्य होगा क्योंकि सभी आवेशों के कारण क्षेत्र एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं।

मुख्य बिंदु:

• घन के 8 कोने होते हैं और सभी पर समान आवेश है।
• केंद्र पर विभव अदिश राशि होने के कारण जुड़ता है।
• विद्युत क्षेत्र सदिश राशि होने के कारण समरूपता से शून्य हो जाता है।

आम गलतियाँ:

• विकर्ण की लंबाई निकालने में गलती करना।
• केंद्र से दूरी को विकर्ण के बराबर मान लेना (यह आधी दूरी होती है)।
• विद्युत क्षेत्र को भी विभव की तरह साधारण रूप से जोड़ देना।

Exam Tips:

a) ज्यामितीय दूरियों को चित्र बनाकर स्पष्ट करें।
b) अदिश और सदिश राशियों के संयोजन का अंतर समझें।
c) अंतिम उत्तर में मात्रक लिखना न भूलें।

 

Question 2.14: \( 1.5\text{ }\mu\text{C} \) और \( 2.5\text{ }\mu\text{C} \) आवेश वाले दो सूक्ष्म गोले 30 cm दूर स्थित हैं।
(a) दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा के मध्य बिंदु पर, और
(b) मध्य बिंदु से होकर जाने वाली रेखा के अभिलंब तल में मध्य बिंदु से 10 cm दूर स्थित किसी बिंदु पर विभव और विद्युत क्षेत्र ज्ञात कीजिए।

Answer:

(a) मध्य बिंदु पर:
दूरी \( d = 30\text{ cm} = 0.3\text{ m} \), अतः केंद्र से प्रत्येक आवेश की दूरी \( r = 0.15\text{ m} \)
कुल विभव \( V = V_1 + V_2 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0 r} (q_1 + q_2) \)
\( V = \frac{9 \times 10^9}{0.15} \times (1.5 + 2.5) \times 10^{-6} = 2.4 \times 10^5\text{ V} \)
विद्युत क्षेत्र \( E = E_2 - E_1 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0 r^2} (q_2 - q_1) \)
\( E = \frac{9 \times 10^9}{(0.15)^2} \times (2.5 - 1.5) \times 10^{-6} = 4 \times 10^5\text{ V/m} \) (बड़े आवेश से छोटे आवेश की ओर)

(b) अभिलंब तल में 10 cm दूर बिंदु पर:
आवेश से बिंदु की दूरी \( s = \sqrt{(0.15)^2 + (0.10)^2} = \sqrt{0.0225 + 0.01} = \sqrt{0.0325} = 0.18\text{ m} \)
कुल विभव \( V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0 s} (q_1 + q_2) = \frac{9 \times 10^9}{0.18} \times 4 \times 10^{-6} = 2 \times 10^5\text{ V} \)
विद्युत क्षेत्र \( E_1 \) और \( E_2 \) के परिणाम निकालकर उनका सदिश योग किया जाता है जिससे अंतिम परिणामी क्षेत्र प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• मध्य बिंदु पर दोनों आवेशों के कारण विभव जुड़ते हैं।
• विद्युत क्षेत्र निकालते समय विपरीत दिशाओं के कारण घटाव होता है।
• पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करके तिरछੀ दूरी ज्ञात की जाती है।

आम गलतियाँ:

• विद्युत क्षेत्र की दिशा का ध्यान न रखना।
• दूरी का वर्ग करना भूल जाना।
• माइक्रो कुलॉम (\( \mu\text{C} \)) को कुलॉम में न बदलना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक उप-भाग के लिए अलग से स्पष्ट डायग्राम बनाएं।
b) सदिश योग के नियमों का सही उपयोग करें।
c) गणना के चरणों को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।

 

Question 2.15: आंतरिक त्रिज्या \( r_1 \) तथा बाह्य त्रिज्या \( r_2 \) वाले एक गोलीय चालक कोश (कोल) पर Q आवेश है।
(a) खोल के केंद्र पर एक आवेश q रखा जाता है। खोल के भीतरी और बाहरी पृष्ठों पर पृष्ठ आवेश घनत्व क्या है?
(b) क्या किसी कोटर (जो आवेश विहीन है) में विद्युत क्षेत्र शून्य होता है, चाहे खोल गोलीय न होकर किसी भी अनियमित आकार का हो? स्पष्ट कीजिए।

Answer:

(a) खोल के केंद्र पर +q आवेश रखने के कारण खोल की भीतरी सतह पर प्रेरित आवेश \(-q\) हो जाता है।
भीतरी सतह पर पृष्ठ आवेश घनत्व \( \sigma_1 = \frac{-q}{4\pi r_1^2} \)
बाहरी सतह पर कुल आवेश \( Q + q \) हो जाता है।
बाहरी सतह पर पृष्ठ आवेश घनत्व \( \sigma_2 = \frac{Q + q}{4\pi r_2^2} \)

(b) हाँ, कोटर के भीतर विद्युत क्षेत्र हमेशा शून्य होता है, चाहे खोल की आकृति कैसी भी हो। इसे स्थिरवैद्युत shielding कहते हैं, क्योंकि चालक के अंदर स्थिर अवस्था में विद्युत क्षेत्र शून्य होता है।

मुख्य बिंदु:

• प्रेरण के कारण भीतरी सतह पर विपरीत आवेश उत्पन्न होता है।
• चालक के भीतर स्थिर अवस्था में विद्युत क्षेत्र शून्य होता है।
• पृष्ठ आवेश घनत्व = आवेश / क्षेत्रफल होता है।

आम गलतियाँ:

• बाहरी सतह के आवेश में केंद्र के आवेश को शामिल न करना।
• अनियमित आकार के लिए गाउस नियम का गलत अनुप्रयोग करना।
• ऋणात्मक चिह्न छोड़ देना।

Exam Tips:

a) प्रेरण की घटना को सैद्धांतिक रूप से स्पष्ट करें।
b) क्षेत्रफल के लिए गोलीय पृष्ठ के सूत्र \( 4\pi r^2 \) का प्रयोग करें।
c) कोटर के भीतर क्षेत्र शून्य होने का कारण चालक के गुणधर्म को बताएं।

 

Question 2.16: (a) दर्शाइए कि आवेशित पृष्ठ के एक पार्श्व से दूसरे पार्श्व पर स्थिरवैद्युत क्षेत्र के अभिलंब घटक में असंयत होता है, जिसे \( (E_2 - E_1) \cdot \hat{n} = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} \) द्वारा व्यक्त किया जाता है। जहाँ \(\hat{n}\) एक बिंदु पर पृष्ठ के अभिलंब एकांक सदिश है तथा \(\sigma\) उस बिंदु पर पृष्ठ आवेश घनत्व है।
(b) दर्शाइए कि आवेशित पृष्ठ के एक पार्श्व से दूसरे पार्श्व पर स्थिरवैद्युत क्षेत्र का स्पर्श्या घटक सतत है।

Answer:

(a) गाउस के नियम का उपयोग करके एक छोटा बेलनाकार गाउसियन पृष्ठ लेते हैं जो आवेशित पृष्ठ को काटता है।
अभिलंबवत घटक का अंतर \( E_2 - E_1 = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} \hat{n} \) होता है।

(b) एक बंद लूप लेकर उसके चारों ओर विद्युत क्षेत्र का रेखीय समाकल शून्य होता है (\( \oint E \cdot dl = 0 \)), क्योंकि स्थिरवैद्युत क्षेत्र संरक्षी होता है। इससे यह सिद्ध होता है कि स्पर्श्या घटक सतत रहता है।

मुख्य बिंदु:

• गाउसियन पृष्ठ की सहायता से अभिलंब घटक ज्ञात किया जाता है।
• संरक्षी प्रकृति के कारण बंद लूप में कार्य शून्य होता है।
• स्पर्श्या घटक पृष्ठ के दोनों ओर समान रहते हैं।

आम गलतियाँ:

• गाउसियन बेलन की लंबाई सही से न मानना।
• बंद लूप के समाकल में दिशा की उपेक्षा करना।
• सदिश नोटेशन का प्रयोग न करना।

Exam Tips:

a) गाउस के नियम का स्पष्ट चित्र बनाएं।
b) संरक्षी क्षेत्र के गुणधर्म को स्पष्ट रूप से लिखें।
c) गणितीय चरणों को क्रमिक रूप से हल करें।

 

Question 2.17: रैखिक आवेश घनत्व \(\lambda\) वाला एक लंबा आवेशित बेलन एक खोखले समाक्षीय चालक बेलन द्वारा घिरा है। दोनों बेलनों के बीच के स्थान में विद्युत क्षेत्र कितना है?

Answer:

माना बेलन की लंबाई L तथा त्रिज्या r है। गाउस के प्रमेय के अनुसार गाउसियन बेलन से गुजरने वाला विद्युत फ्लक्स:
\(\phi = E \cdot (2\pi r) L = \frac{q}{\varepsilon_0}\)
जहाँ q आंतरिक बेलन पर आवेश है।
\(E \cdot (2\pi r) L = \frac{\lambda L}{\varepsilon_0}\)
\(E = \frac{\lambda}{2\pi\varepsilon_0 r}\)

मुख्य बिंदु:

• बेलनाकार समरूपता के लिए गाउस के नियम का प्रयोग करते हैं।
• गाउसियन पृष्ठ के रूप में एक बेलन की कल्पना की जाती है।
• विद्युत क्षेत्र की तीव्रता दूरी r के व्युत्क्रमानुपाती होती है।

आम गलतियाँ:

• बेलन के वक्र पृष्ठीय क्षेत्रफल का गलत सूत्र लिखना।
• रैखिक आवेश घनत्व की परिभाषा में चूक करना।
• \(\varepsilon_0\) को हर में न लिखना।

Exam Tips:

a) गाउस के नियम का कथन लिखकर शुरुआत करें।
b) बेलनाकार पृष्ठ के वक्र क्षेत्रफल \( 2\pi r L \) को स्पष्ट करें।
c) अंतिम व्यंजक को मानक रूप में लिखें।

 

Question 2.18: एक हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटॉन लगभग \( 0.53\text{ \AA} \) दूरी पर प्रतिबद्ध हैं:
(a) निकाय की स्थिति ऊर्जा का eV में परिकलन कीजिए, जबकि प्रोटॉन से इलेक्ट्रॉन की अनंत दूरी पर स्थिति ऊर्जा को शून्य माना गया है।
(b) इलेक्ट्रॉन को स्वतंत्र करने में कितना न्यूनतम कार्य करना पड़ेगा, यदि यह दिया गया है कि इसकी कक्षा में गतिज ऊर्जा (a) में प्राप्त स्थिति ऊर्जा के परिमाण की आधी है?
(c) यदि स्थिति ऊर्जा को \( 1.06\text{ \AA} \) पृथक्करण पर शून्य ले लिया जाए तो, उपयुक्त (a) और (b) के उत्तर क्या होंगे?

Answer:

(a) स्थिति ऊर्जा \( U = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r} \)
\( U = \frac{(9 \times 10^9) \times (-1.6 \times 10^{-19}) \times (1.6 \times 10^{-19})}{0.53 \times 10^{-10}} \)
\( U = -27.2\text{ eV} \)

(b) कुल ऊर्जा = गतिज ऊर्जा + स्थिति ऊर्जा
\( E = \frac{13.6\text{ eV}}{2} - 27.2\text{ eV} = -13.6\text{ eV} \)
इलेक्ट्रॉन को स्वतंत्र करने के लिए आवश्यक ऊर्जा = \( +13.6\text{ eV} \)

(c) संदर्भ बिंदु बदलने पर स्थिति ऊर्जा के मान बदल जाते हैं, परंतु स्थिति ऊर्जा में परिवर्तन या आवश्यक ऊर्जा वही रहती है।

मुख्य बिंदु:

• स्थिति ऊर्जा का सूत्र \( U = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0}\frac{q_1 q_2}{r} \) होता है।
• कुल ऊर्जा ऋणात्मक होने पर निकाय प्रतिबद्ध होता है।
• संदर्भ बिंदु बदलने से ऊर्जा के निरपेक्ष मान बदलते हैं, अंतर नहीं।

आम गलतियाँ:

• आवेशों के चिह्न (धनात्मक/ऋणात्मक) लेना भूल जाना।
• एंगस्ट्रॉम (\(\text{\AA}\)) को मीटर में न बदलना।
• गतिज और स्थिति ऊर्जा के संबंधों में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) जूल को इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) में बदलने का रूपांतरण याद रखें।
b) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांतों का सही प्रयोग करें।
c) प्रत्येक भाग के लिए गणना अलग-अलग दिखाएं।

 

Question 2.19: यदि \( \text{H}_2 \) अणु के दो में से एक इलेक्ट्रॉन को हटा दिया जाए तो हमें हाइड्रोजन आणविक आयन (\( \text{H}_2^+ \)) प्राप्त होगा। (\( \text{H}_2^+ \)) की निम्नतम अवस्था (ground state) में दो प्रोटॉनों के बीच दूरी लगभग \( 1.5\text{ \AA} \) है और इलेक्ट्रॉन प्रत्येक प्रोटॉन से लगभग \( 1\text{ \AA} \) की दूरी पर है। निकाय की स्थिति ऊर्जा ज्ञात कीजिए। स्थिति ऊर्जा की शून्य स्थिति के चयन का उल्लेख कीजिए।

Answer:

निकाय में दो प्रोटॉन (\( q_1, q_2 \)) और एक इलेक्ट्रॉन (\( q_3 \)) है।
प्रोटॉनों के बीच की दूरी \( d_1 = 1.5 \times 10^{-10}\text{ m} \)
प्रोटॉन 1 और इलेक्ट्रॉन के बीच की दूरी \( d_2 = 1 \times 10^{-10}\text{ m} \)
प्रोटॉन 2 और इलेक्ट्रॉन के बीच की दूरी \( d_3 = 1 \times 10^{-10}\text{ m} \)
कुल स्थिति ऊर्जा \( V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \left( \frac{q_1 q_2}{d_1} + \frac{q_2 q_3}{d_3} + \frac{q_3 q_1}{d_2} \right) \)
मान रखने पर:
\( V = 9 \times 10^9 \times (1.6 \times 10^{-19})^2 \left( \frac{1}{1.5} - \frac{1}{1} - \frac{1}{1} \right) \times 10^{10} \)
\( V = -30.7\text{ eV} \) (लगभग)

मुख्य बिंदु:

• बहु-आवेशित निकाय की कुल स्थिति ऊर्जा सभी युग्मों की स्थिति ऊर्जाओं का बीजगणितीय योग होती है।
• अनंत दूरी पर स्थिति ऊर्जा को शून्य माना गया है।
• सजातीय आवेश प्रतिकर्षित करते हैं जबकि विजातीय आकर्षित करते हैं।

आम गलतियाँ:

• किसी एक युग्म को छोड़ देना।
• आकर्षण और प्रतिकर्षण के कारण ऊर्जा के चिह्नों में गलती करना।
• दूरियों के मात्रक गलत रखना।

Exam Tips:

a) सभी संभव युग्मों (pairs) की सूची बनाएं।
b) प्रत्येक युग्म के लिए आवेशों के चिह्न सावधानी से रखें।
c) गणना को चरणों में विभाजित करें।

 

Question 2.20: a और b त्रिज्याओं वाले दो आवेशित चालक गोले एक तार द्वारा एक-दूसरे से जोड़े गए हैं। दोनों गोलों के पृष्ठों पर विद्युत क्षेत्रों में क्या अनुपात है? प्राप्त परिणाम को, यह समझाने में प्रयुक्त कीजिए कि किसी एक चालक के तीखे और नुकीले सिरों पर आवेश घनत्व, चपटे भागों की अपेक्षा अधिक क्यों होता है?

Answer:

दो गोले तार से जुड़े हैं, इसलिए दोनों का विभव समान होगा: \( V_A = V_B \)
\( \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q_A}{a} = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{Q_B}{b} \implies \frac{Q_A}{Q_B} = \frac{a}{b} \)
पृष्ठ पर विद्युत क्षेत्र \( E = \frac{Q}{4\pi\varepsilon_0 r^2} \)
क्षेत्रों का अनुपात: \( \frac{E_A}{E_B} = \frac{Q_A}{Q_B} \times \frac{b^2}{a^2} = \frac{a}{b} \times \frac{b^2}{a^2} = \frac{b}{a} \)
चूँकि \( E \propto \frac{1}{r} \), अतः कम त्रिज्या (तीखे सिरों) वाले भाग पर विद्युत क्षेत्र और आवेश घनत्व अधिक होता है।

मुख्य बिंदु:

• चालकों को जोड़ने पर उनका विभव समान हो जाता है।
• आवेश त्रिज्या के समानुपाती होता है (\( Q \propto r \)).
• विद्युत क्षेत्र त्रिज्या के व्युत्क्रमानुपाती होता है (\( E \propto \frac{1}{r} \)).

आम गलतियाँ:

• विभव समान होने की शर्त को भूल जाना।
• विद्युत क्षेत्र और आवेश के अनुपात में व्युत्क्रम संबंध में गलती करना।
• निष्कर्ष गलत निकालना।

Exam Tips:

a) पहले विभव के बराबर होने की समीकरण लिखें।
b) तदनంతరం विद्युत क्षेत्र का सूत्र स्थापित करें।
c) तीखे सिरों पर प्रभाव को स्पष्ट शब्दों में समझाएं।

 

Question 2.21: बिंदु \( (0, 0, -a) \) तथा \( (0, 0, a) \) पर दो आवेश क्रमशः \(-q\) और \(+q\) स्थित हैं।
(a) बिंदुओं \( (0, 0, z) \) और \( (x, y, 0) \) पर स्थिरवैद्युत विभव क्या है?
(b) मूल बिंदु से किसी बिंदु की दूरी r पर विभव की निर्भरता ज्ञात कीजिए, जबकि तुच्छ तरह \( r/a \gg 1 \) है।
(c) x-अक्ष पर बिंदु \( (5, 0, 0) \) से बिंदु \( (-7, 0, 0) \) तक एक परीक्षण आवेश को ले जाने में कितना कार्य करना होगा? यदि परीक्षण आवेश के उन्हीं बिंदुओं के बीच \( x-\text{अक्ष} \) से होकर न ले जाएँ तो क्या उत्तर बदल जाएगा?

Answer:

(a) बिंदु \( (0, 0, z) \) पर विभव \( V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{2qa}{(z^2 - a^2)} \)
बिंदु \( (x, y, 0) \) पर विभव शून्य होगा क्योंकि यह द्विध्रुव की निरक्षीय स्थिति है।

(b) जब \( r \gg a \) हो, तब विभव दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है: \( V \propto \frac{1}{r^2} \)

(c) किया गया कार्य शून्य होगा, क्योंकि स्थिरवैद्युत बल संरक्षी है और दोनों बिंदु समविभव तल पर स्थित हैं। पथ बदलने पर भी कार्य शून्य ही रहेगा।

मुख्य बिंदु:

• विद्युत द्विध्रुव के कारण निरक्षीय स्थिति पर विभव हमेशा शून्य होता है।
• दूरस्थ बिंदुओं के लिए विभव \( 1/r^2 \) के अनुसार घटता है।
• संरक्षी बल द्वारा बंद लूप या समविभव बिंदुओं के बीच किया गया कार्य शून्य होता है।

आम गलतियाँ:

• निरक्षीय बिंदु पर विभव शून्य न मानना।
• कार्य की गणना में पथ पर निर्भरता मान लेना।
• द्विध्रुव आघूर्ण के सूत्र में गलती करना।

Exam Tips:

a) द्विध्रुव की अक्षीय और निरक्षीय स्थितियों के सूत्र याद रखें।
b) संरक्षी बल के गुणों को उत्तर में स्पष्ट रूप से उद्धृत करें।
c) सन्निकटन (approximation) के चरणों को साफ-साफ दिखाएं।

 

Question 2.22: नीचे दिए गए चित्र 2.32 में एक आवेश विन्यास जिसे विद्युत चतुध्रुवी कहा जाता है, दर्शाया गया है। चतुध्रुवी के अक्ष पर स्थित किसी बिंदु के लिए r पर विभव की निर्भरता प्राप्त कीजिए जहाँ \( r \gg a \) 1 अपने परिणाम की तुलना एक विद्युत द्विध्रुव व विद्युत एकल ध्रुव (अर्थात किसी एकल आवेश) के लिए प्राप्त परिणामों से कीजिए।

Answer:

चतुध्रुवी के कारण अक्षीय बिंदु पर विभव का व्यंजक:
\( V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \left[ \frac{q}{x - a} - \frac{2q}{x} + \frac{q}{x + a} \right] \)
इसे हल करने पर:
\( V = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{2qa^2}{r^3} \)
इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि एकल ध्रुव के लिए \( V \propto \frac{1}{r} \), द्विध्रुव के लिए \( V \propto \frac{1}{r^2} \), और चतुध्रुवी के लिए \( V \propto \frac{1}{r^3} \) होता है।

मुख्य बिंदु:

• चतुध्रुवी में चार आवेशों का विन्यास होता है।
• दूरी बढ़ने पर विभव तेजी से घटता है (\( 1/r^3 \)).
• यह बहुध्रुवी विस्तार (multipole expansion) का एक हिस्सा है।

आम गलतियाँ:

• लघुगणकीय या द्विपद प्रमेय (binomial expansion) लगाते समय गलती करना।
• आवेशों के अनुपातिक संयोजन को गलत लिखना।
• घात की निर्भरता में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) द्विपद प्रमेय का सही उपयोग करके उच्च पदों को नगण्य मानें।
b) एकल ध्रुव, द्विध्रुव और चतुध्रुवी के विभव की तुलना एक सारणी या निष्कर्ष के रूप में दें।
c) व्युत्पत्ति के मुख्य चरणों को नहीं छोड़ें।

 

Question 2.23: एक वैद्युत तकनीशियन को 1 kV विभवांतर के परिपथ में \( 2\text{ }\mu\text{F} \) संधारित्र की आवश्यकता है। \( 1\text{ }\mu\text{F} \) के संधारित्र उसे प्रचुर संख्या में उपलब्ध हैं जो 400 V से अधिक का विभवांतर वहन नहीं कर सकते। कोई संभव विन्यास सुझाइए जिसमें न्यूनतम संधारित्र की आवश्यकता हो।

Answer:

कुल वांछित धारिता, \( C = 2\text{ }\mu\text{F} \)
कुल विभवांतर, \( V = 1\text{ kV} = 1000\text{ V} \)
प्रत्येक संधारित्र की धारिता, \( C_1 = 1\text{ }\mu\text{F} \)
प्रत्येक संधारित्र द्वारा सहन किया जाने वाला अधिकतम विभवांतर, \( V_1 = 400\text{ V} \)
श्रेणी क्रम में संधारित्रों की न्यूनतम संख्या = \( \frac{1000}{400} = 2.5 \), अतः कम से कम 3 संधारित्र श्रेणी क्रम में होने चाहिए।
श्रेणी में कुल धारिता = \( \frac{1}{3}\text{ }\mu\text{F} \)
यदि ऐसी n श्रेणियाँ समांतर में जुड़ी हों, तो कुल धारिता \( \frac{n}{3} = 2 \implies n = 6 \)
अतः कुल संधारित्र = \( 3 \times 6 = 18 \)

मुख्य बिंदु:

• श्रेणी संयोजन में विभवांतर विभाजित होता है।
• समांतर संयोजन में धारिता जुड़ती है।
• संधारित्रों की संख्या हमेशा पूर्णांक होनी चाहिए।

आम गलतियाँ:

• 2.5 को 2 मान लेना (पूर्णांक में ऊपर की ओर पूर्णांकित करना होता है)।
• श्रेणी और समांतर के सूत्रों में अदला-बदली करना।
• कुल संख्या निकालने में गुणा करना भूल जाना।

Exam Tips:

a) पहले श्रेणी क्रम में आवश्यक न्यूनतम संख्या निकालें।
b) इसके बाद समांतर शाखाओं की संख्या निर्धारित करें।
c) अंतिम उत्तर में कुल संधारित्रों की गणना स्पष्ट करें।

 

Question 2.24: 2F वाले एक समांतर पट्टिका संधारित्र की पट्टिका का क्षेत्रफल क्या है, जबकि पट्टिकाओं का पृथक्करण 0.5 cm है? [अपने उत्तर से आप यह समझ जाइए कि सामान्य संधारित्र \( \mu\text{F} \) या कम परिसर के क्यों होते हैं? तथापि विद्युत-अपघटन संधारित्र (Electrolytic capacitors) की धारिता कहीं अधिक (0.1 F) होती है क्योंकि चालकों के बीच अति सूक्ष्म पृथक्करण होता है।]

Answer:

धारिता \( C = 2\text{ F} \)
दूरी \( d = 0.5\text{ cm} = 0.5 \times 10^{-2}\text{ m} \)
सूत्र: \( C = \frac{\varepsilon_0 A}{d} \implies A = \frac{Cd}{\varepsilon_0} \)
मान रखने पर:
\( A = \frac{2 \times 0.5 \times 10^{-2}}{8.85 \times 10^{-12}} \)
\( A = 1130\text{ km}^2 \)

मुख्य बिंदु:

• 2 फेरड जैसी बड़ी धारिता के लिए क्षेत्रफल बहुत अधिक (किलोमीटर में) आता है।
• सामान्य संدارित्र माइक्रोफेरत (\( \mu\text{F} \)) परास के इसीलिए होते हैं क्योंकि बड़े क्षेत्रफल व्यावहारिक नहीं हैं।
• विद्युत-अपघट्य संधारित्रों में दूरी बहुत कम होती है जिससे धारिता अधिक मिलती है।

आम गलतियाँ:

• क्षेत्रफल का मात्रक \( \text{m}^2 \) से \( \text{km}^2 \) बदलने में भूल करना।
• परमिटिविटी \( \varepsilon_0 \) का मान गलत रखना।
• सेंटीमीटर को मीटर में न बदलना।

Exam Tips:

a) प्रायोगिक सीमाओं को समझने वाले सैद्धांतिक प्रश्न का उत्तर विस्तार से दें।
b) क्षेत्रफल के बहुत बड़े मान आने के व्यावहारिक निहितार्थ को समझाएं।
c) गणना में वैज्ञानिक संकेतन (scientific notation) का प्रयोग करें।

 

Question 2.25: चित्र 2.33 के नेटवर्क (जाल) की तुल्य धारिता प्राप्त कीजिए। 300 V संभरण (सप्लाई) के साथ प्रत्येक संधारित्र का आवेश व उसकी वोल्टता ज्ञात कीजिए।

Answer:

चित्रानुसार, संधारित्र \( C_2 \) और \( C_3 \) श्रेणी क्रम में हैं, अतः उनकी तुल्य धारिता \( C' = 100\text{ pF} \)
यह संयोजन \( C_1 \) के साथ समांतर क्रम में है, जिससे नई तुल्य धारिता \( C'' = C_1 + C' = 200\text{ pF} \)
अंत में \( C'' \) और \( C_4 \) श्रेणी क्रम में हैं, जिससे कुल तुल्य धारिता \( C = \frac{200}{3}\text{ pF} \)
आवेश और वोल्टता निकालने के लिए किरचॉफ के नियमों या संधारित्रों के श्रेणी-समांतर संयोजन के नियमों का उपयोग किया जाता है।

मुख्य बिंदु:

• जटिल परिपथों को सरल बनाने के लिए छोटे उप-समूहों को हल करें।
• श्रेणी संयोजन में आवेश समान रहता है।
• समांतर संयोजन में विभवांतर समान रहता है।

आम गलतियाँ:

• श्रेणी और समांतर क्रम की पहचान में गलती करना।
• pF को फेरड में बदलते समय घातों में त्रुटि करना।
• प्रत्येक संधारित्र पर अलग से आवेश न निकालना।

Exam Tips:

a) परिपथ को चरण-दर-चरण (step-by-step) हल करें।
b) प्रत्येक चरण पर तुल्य धारिता स्पष्ट रूप से लिखें।
c) प्रत्येक संधारित्र के सिरों पर वोल्टता अलग से निकालें।

 

Question 2.26: किसी समांतर पट्टिका संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका का क्षेत्रफल \( 90\text{ cm}^2 \) है और उनके बीच पृथक्करण 2.5 mm है। 400 V संभरण से संधारित्र को आवेशित किया गया है।
(a) संधारित्र कितना स्थिरवैद्युत ऊर्जा संचित करता है?
(b) इस ऊर्जा को पट्टिकाओं के बीच स्थिरवैद्युत क्षेत्र में संचित समझकर प्रति एकांक आयतन ऊर्जा u ज्ञात कीजिए। इस प्रकार, पट्टिकाओं के बीच विद्युत क्षेत्र E के परिमाण और n में संबंध स्थापित कीजिए।

Answer:

(a) धारिता \( C = \frac{\varepsilon_0 A}{d} = \frac{8.85 \times 10^{-12} \times 90 \times 10^{-4}}{2.5 \times 10^{-3}} = 3.18 \times 10^{-11}\text{ F} \)
संचित ऊर्जा \( U = \frac{1}{2} C V^2 = \frac{1}{2} \times 3.18 \times 10^{-11} \times (400)^2 = 2.55 \times 10^{-6}\text{ J} \)

(b) प्रति एकांक आयतन ऊर्जा घनत्व \( u = \frac{U}{\text{Volume}} \)
\( u = \frac{1}{2} \varepsilon_0 E^2 \)

मुख्य बिंदु:

• संचित ऊर्जा का सूत्र \( U = \frac{1}{2}CV^2 \) होता है।
• ऊर्जा घनत्व (energy density) प्रति एकांक आयतन की ऊर्जा है।
• ऊर्जा घनत्व केवल विद्युत क्षेत्र पर निर्भर करता है।

आम गलतियाँ:

• क्षेत्रफल और दूरी की इकाइयों को SI में न बदलना।
• ऊर्जा के अन्य सूत्रों का गलत चयन करना।
• आयतन निकालते समय क्षेत्रफल और मोटाई का सही गुणा न करना।

Exam Tips:

a) ऊर्जा और ऊर्जा घनत्व दोनों के सूत्र स्पष्ट रूप से लिखें।
b) मात्रकों की एकरूपता का विशेष ध्यान रखें।
c) गणना के प्रत्येक चरण को सावधानी से हल करें।

 

Question 2.27: एक \( 4\text{ }\mu\text{F} \) के संधारित्र को 200 V संभरण (सप्लाई) से आवेशित किया गया है। फिर संभरण से हटाकर इसे एक अन्य अनावेशित \( 2\text{ }\mu\text{F} \) के संधारित्र से जोड़ा जाता है। पहले संधारित्र की कितनी स्थिरवैद्युत ऊर्जा का ऊष्मा और वैद्युत-चुंबकीय विकिरण के रूप में ह्रास होता है?

Answer:

प्रथम संधारित्र की प्रारंभिक ऊर्जा \( E_1 = \frac{1}{2} C_1 V_1^2 = \frac{1}{2} \times 4 \times 10^{-6} \times (200)^2 = 0.08\text{ J} \)
दोनों संधारित्रों को जोड़ने पर उभयनिष्ठ विभव \( V = \frac{C_1 V_1 + C_2 V_2}{C_1 + C_2} = \frac{4 \times 200 + 0}{4 + 2} = \frac{400}{3}\text{ V} \)
संयोजन की अंतिम ऊर्जा \( E_2 = \frac{1}{2} (C_1 + C_2) V^2 = \frac{1}{2} \times 6 \times 10^{-6} \times \left(\frac{400}{3}\right)^2 = 0.0533\text{ J} \)
ऊर्जा ह्रास \( \Delta E = E_1 - E_2 = 0.08 - 0.0533 = 0.0267\text{ J} \) (\( 2.67 \times 10^{-2}\text{ J} \))

मुख्य बिंदु:

• आवेश संरक्षण के सिद्धांत से उभयनिष्ठ विभव निकाला जाता है।
• संधारित्रों को जोड़ने पर हमेशा ऊर्जा का ह्रास होता है।
• ऊर्जा का यह ह्रास चिंगारी, ऊष्मा या ध्वनि के रूप में होता है।

आम गलतियाँ:

• अंतिम ऊर्जा निकालते समय कुल धारिता का उपयोग न करना।
• प्रारंभिक और अंतिम ऊर्जा के अंतर में चिह्न की गलती करना।
• माइक्रो कुलॉम और फेरड के रूपांतरण में भूल करना।

Exam Tips:

a) ऊर्जा ह्रास का सीधा सूत्र भी प्रयोग किया जा सकता है: \( \Delta E = \frac{1}{2} \frac{C_1 C_2}{C_1 + C_2} (V_1 - V_2)^2 \)。
b) गणना के सभी चरणों को स्पष्ट दिखाएं।
c) उत्तर के साथ उचित मात्रक (Joule) लिखें।

 

Question 2.28: दर्शाइए कि एक समांतर पट्टिका संधारित्र की प्रत्येक पट्टिका पर बल का परिमाण \( \frac{1}{2} QE \) है, जहाँ Q संधारित्र पर आवेश है और E पट्टिकाओं के बीच विद्युत क्षेत्र का परिमाण है। घटक \( \frac{1}{2} \) के मूल को समझाइए।

Answer:

माना पट्टिकाओं को \( \Delta x \) दूरी से विस्थापित करने के लिए किया गया कार्य \( W = F \Delta x \)
यह कार्य संधारित्र की स्थिति ऊर्जा में वृद्धि के बराबर होता है: \( U = u \cdot A \Delta x \)
चूँकि \( F \Delta x = u A \Delta x \implies F = u A \)
यहाँ ऊर्जा घनत्व \( u = \frac{1}{2} \varepsilon_0 E^2 \) है, अतः \( F = \frac{1}{2} \varepsilon_0 E^2 A \)
इसे \( F = \frac{1}{2} QE \) के रूप में लिखा जा सकता है।
घटक \( \frac{1}{2} \) का मूल यह है कि चालक के समीप बाह्य क्षेत्र E होता है, परंतु चालक के स्वयं के आवेश के कारण क्षेत्र \( E/2 \) होता है, इसलिए औसत क्षेत्र \( E/2 \) बल में योगदान देता है।

मुख्य बिंदु:

• पट्टिकाओं के बीच आकर्षण बल होता है।
• ऊर्जा घनत्व और किए गए कार्य के संबंध से बल निकाला जाता है।
• \( 1/2 \) गुणांक औसत विद्युत क्षेत्र के कारण आता है।

आम गलतियाँ:

• कुल विद्युत क्षेत्र और पट्टिका के अपने क्षेत्र में अंतर न समझना।
• कार्य-ऊर्जा प्रमेय का गलत अनुप्रयोग करना।
• व्युत्पत्ति के बीच में संकेतों की गलती करना।

Exam Tips:

a) ऊर्जा घनत्व के सूत्र से शुरुआत करें।
b) \( 1/2 \) कारक के भौतिक कारण को शब्दों में जरूर समझाएं।
c) व्युत्पत्ति को क्रमिक रूप से प्रस्तुत करें।

 

Question 2.29: दो संकेंद्री गोलीय चालकों जिनको उपयुक्त विधुतरोधी आलंबी से उनकी स्थिति में रोका गया है, से मिलकर एक गोलीय संधारित्र बना है (चित्र 2.34)। दर्शाइए कि गोलीय संधारित्र की धारिता C इस प्रकार व्यक्त की जाती है: \( C = \frac{4\pi\varepsilon_0 r_1 r_2}{r_1 - r_2} \) जहाँ \( r_1 \) और \( r_2 \) क्रमशः बाहरी तथा भीतरी गोलों की त्रिज्याएँ हैं।

Answer:

बाहरी गोले की त्रिज्या = \( r_1 \), भीतरी गोले की त्रिज्या = \( r_2 \)
भीतरी गोले पर आवेश = \( +Q \), बाहरी गोले की भीतरी सतह पर आवेश = \(-Q\)
दोनों गोलों کے बीच विभवांतर:
\( V = \frac{Q}{4\pi\varepsilon_0 r_2} - \frac{Q}{4\pi\varepsilon_0 r_1} = \frac{Q}{4\pi\varepsilon_0} \left( \frac{r_1 - r_2}{r_1 r_2} \right) \)
धारिता \( C = \frac{Q}{V} \)
\( C = \frac{Q}{\frac{Q}{4\pi\varepsilon_0} \left( \frac{r_1 - r_2}{r_1 r_2} \right)} = \frac{4\pi\varepsilon_0 r_1 r_2}{r_1 - r_2} \)

मुख्य बिंदु:

• गोलीय संधारित्र में दो संकेंद्री गोले होते हैं।
• विभवांतर दोनों गोलों के विभव का अंतर होता है।
• धारिता \( C = Q/V \) परिभाषा से प्राप्त की जाती है।

आम गलतियाँ:

• त्रिज्याओं के क्रम (\( r_1 \) और \( r_2 \)) में भ्रमित होना।
• विभवांतर के व्यंजक में ऋण चिह्न या हर की त्रुटि करना।
• अंतिम सूत्र को व्युत्पन्न करते समय पक्षांतर की गलती करना।

Exam Tips:

a) स्पष्ट चित्र बनाकर दोनों गोलों की त्रिज्याओं और आवेशों को दर्शाएं।
b) विभव का अंतर निकालते समय उच्च और निम्न विभव का ध्यान रखें।
c) अंतिम सूत्र को मानक रूप में बॉक्स में बंद करें।

 

Question 2.30: एक गोलीय संधारित्र के भीतरी गोले की त्रिज्या 12 cm तथा बाहरी गोले की त्रिज्या 13 cm है। बाहरी गोला भू-संपर्कित है तथा भीतरी गोले पर \( 2.5\text{ }\mu\text{C} \) का आवेश दिया गया है। संकेंद्री गोलों के बीच के स्थान में 32 परावैद्युतांक का द्रव भरा है।
(a) संधारित्र की धारिता ज्ञात कीजिए।
(b) भीतरी गोले का विभव क्या है?
(c) इस संधारित्र की धारिता की तुलना एक 12 cm त्रिज्या वाले किसी विसयुक्त गोले की धारिता से कीजिए। व्याख्या कीजिए कि गोले की धारिता इतनी कम क्यों है?

Answer:

(a) \( r_2 = 12\text{ cm} = 0.12\text{ m} \), \( r_1 = 13\text{ cm} = 0.13\text{ m} \), \( \varepsilon_r = 32 \)
धारिता \( C = \frac{4\pi\varepsilon_0 \varepsilon_r r_1 r_2}{r_1 - r_2} \)
\( C = \frac{32 \times 0.12 \times 0.13}{9 \times 10^9 \times (0.13 - 0.12)} = 5.5 \times 10^{-9}\text{ F} \)

(b) भीतरी गोले का विभव \( V = \frac{q}{C} = \frac{2.5 \times 10^{-6}}{5.5 \times 10^{-9}} = 4.5 \times 10^2\text{ V} \)

(c) पृथक गोले की धारिता कम होती है क्योंकि संकेंद्री गोलों में बाहरी गोला भू-संपर्कित होने के कारण विभव कम हो जाता है और धारिता बढ़ जाती है।

मुख्य बिंदु:

• परावैद्युत माध्यम भरने से धारिता \( \varepsilon_r \) गुना बढ़ जाती है।
• भू-संपर्कित बाहरी गोला विभव को कम करता है।
• संधारित्र की धारिता विलगित गोले से काफी अधिक होती है।

आम गलतियाँ:

• परावैद्युतांक को सूत्र में गुणा करना भूल जाना।
• सेंटीमीटर को मीटर में न बदलना।
• विभव निकालते समय सही आवेश और धारिता के मान न रखना।

Exam Tips:

a) सभी दिए गए मानों को SI मात्रक में बदलें।
b) संधारित्र और विलगित गोले की धारिता की तुलना स्पष्ट करें।
c) गणना के चरणों को ठीक से जांचें।

 

Question 2.31: सावधानीपूर्वक उत्तर दीजिए:
(a) दो बड़े चालक जिन पर आवेश \( Q_1 \) और \( Q_2 \) हैं, एक-दूसरे के समीप लाए जाते हैं। क्या इनके बीच स्थिरवैद्युत बल का परिमाण तथतः \( Q_1 Q_2 / 4\pi\varepsilon_0 r^2 \) द्वारा दर्शाया जाता है, जहाँ r इनके केंद्रों के बीच की दूरी है?
(b) यदि कूलॉम के नियम में \( 1/r^3 \) निर्भरता का समावेश (1/\(r^2\) के स्थान पर) हो तो क्या गाउस का नियम अभी भी सत्य होगा?
(c) स्थिरवैद्युत क्षेत्र विन्यास में एक छोटा परीक्षण आवेश किसी बिंदु पर विराम में छोड़ा जाता है। क्या यह उस बिंदु से होकर जाने वाली क्षेत्र रेखा के अनुदिश चलेगा?
(d) इलेक्ट्रॉन द्वारा एक वृतीय कक्षा पूरी करने में नाभिक के क्षेत्र द्वारा कितना कार्य किया जाता है? यदि कक्षा दीर्घवृत्ताकार हो तो क्या होगा?
(e) हमें ज्ञात है कि एक आवेशित चालक के पृष्ठ के आर-पार विद्युत क्षेत्र असंतत होता है। क्या वहीं वैद्युत विभव भी असंतत होगा?
(f) किसी एकल चालक की धारिता से आपका क्या अभिप्राय है?
(g) एक संभावित उत्तर की कल्पना कीजिए कि पानी का परावैद्युतांक (= 80), अभ्रक के परावैद्युतांक (= 6) से अधिक क्यों होता है?

Answer:

(a) नहीं, क्योंकि आवेशों का वितरण एकसमान नहीं रहता (प्रेरण के कारण)।
(b) नहीं, गाउस का नियम व्युत्क्रम-वर्ग नियम (\( 1/r^2 \)) पर ही आधारित है।
(c) हाँ, यदि क्षेत्र रेखाएँ सीधी हों (क्योंकि बल की दिशा त्वरण की दिशा तय करती है)।
(d) शून्य, क्योंकि स्थिरवैद्युत क्षेत्र संरक्षी होता है और बंद पथ में किया गया कार्य शून्य होता है (चाहे कक्षा वृत्ताकार हो या दीर्घवृत्ताकार)।
(e) नहीं, विद्युत विभव सतत रहता है।
(f) चालक को दिया गया आवेश और उसके विभव में वृद्धि का अनुपात।
(g) पानी के अणुओं का स्थायी द्विध्रुव आघूर्ण अभ्रक की तुलना में अधिक होता है।

मुख्य बिंदु:

• कूलॉम का नियम केवल बिंदु आवेशों के लिए सत्य है।
• गाउस का नियम व्युत्क्रम-वर्ग नियम पर निर्भर है।
• संरक्षी बलों द्वारा बंद पथ में कार्य शून्य होता है।

आम गलतियाँ:

• प्रेरण के प्रभाव को नजरअंदाज करना।
• विभव और विद्युत क्षेत्र की संस्तति (continuity) में भ्रमित होना।
• क्षेत्र रेखाओं और कण के मार्ग को हमेशा एक मानना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक उप-प्रश्न का उत्तर तथ्यात्मक और स्पष्ट रूप से दें।
b) मूल सिद्धांतों (जैसे संरक्षी बल, गाउस नियम) का हवाला दें।
c) वैचारिक स्पष्टता बनाए रखें।

 

Question 2.32: एक बेलناकार संधारित्र में 15 cm लंबाई एवं त्रिज्याएँ 1.5 cm तथा 1.4 cm के दो समाक्ष बेलन हैं। बाहरी बेलन भू-संपर्कित है और भीतरी बेलन को \( 3.5\text{ }\mu\text{C} \) का आवेश दिया गया है। निकाय की धारिता और भीतरी बेलन का विभव ज्ञात कीजिए। अन्य प्रभाव (अर्थात सिरों पर क्षेत्र रेखाओं का मुड़ना) की उपेक्षा कर सकते हैं।

Answer:

लंबाई \( l = 15\text{ cm} = 0.15\text{ m} \)
बाहरी बेलन की त्रिज्या \( r_1 = 1.5\text{ cm} = 0.015\text{ m} \)
भीतरी बेलन की त्रिज्या \( r_2 = 1.4\text{ cm} = 0.014\text{ m} \)
धारिता का सूत्र: \( C = \frac{2\pi\varepsilon_0 l}{\ln(r_1 / r_2)} \)
मान रखने पर: \( C = \frac{2 \times \pi \times 8.85 \times 10^{-12} \times 0.15}{2.3026 \log_{10}(1.5 / 1.4)} = 1.2 \times 10^{-10}\text{ F} \)
भीतरी बेलन का विभव \( V = \frac{q}{C} = \frac{3.5 \times 10^{-6}}{1.2 \times 10^{-10}} = 2.92 \times 10^4\text{ V} \)

मुख्य बिंदु:

• बेलनाकार संधारित्र की धारिता का विशिष्ट सूत्र होता है।
• प्राकृतिक लॉगरिथ्म (\( \ln \)) को सामान्य लॉगरिथ्म (\( \log_{10} \)) में 2.3026 से गुणा करके बदलते हैं।
• विभव \( V = q/C \) से निकाला जाता है।

आम गलतियाँ:

• प्राकृतिक लॉ को बेस-10 में बदलते समय 2.3026 का गुणा करना भूल जाना।
• त्रिज्याओं का अनुपात गलत रखना।
• इकाइयों के रूपांतरण में गलती करना।

Exam Tips:

a) बेलनाकार संधारित्र का सूत्र ठीक से याद रखें।
b) लघुगणक की सारणी या मान का सही प्रयोग करें।
c) अंत में मात्रक अवश्य लिखें।

 

Question 2.33: \( 3\text{ V/m}^{-1} \) का परावैद्युत सामर्थ्य वाले एक पदार्थ से 1 शट वोल्टता अनुमतांक के समांतर पट्टिका संधारित्र की अभिकल्पना करनी है। परावैद्युत सामर्थ्य वह अधिकतम विद्युत क्षेत्र है जिसे कोई पदार्थ बिना भग हुए अर्थात आंशिक आयनन द्वारा बिना वैद्युत संचरण आरंभ किए सहन कर सकता है। सुरक्षा की दृष्टि से क्षेत्र को कभी भी परावैद्युत सामर्थ्य के 10% से अधिक नहीं होना चाहिए। 50 pF धारिता के लिए पट्टिकाओं का कितना न्यूनतम क्षेत्रफल होना चाहिए?

Answer:

विभवांतर \( V = 1\text{ kV} = 1000\text{ V} \)
पравैद्युत सामर्थ्य = \( 10^7\text{ V/m} \)
सुरक्षित अधिकतम विद्युत क्षेत्र \( E = 10\% \text{ of } 10^7 = 10^6\text{ V/m} \)
पट्टिकाओं के बीच की दूरी \( d = \frac{V}{E} = \frac{1000}{10^6} = 10^{-3}\text{ m} \)
धारिता \( C = 50\text{ pF} = 50 \times 10^{-12}\text{ F} \)
क्षेत्रफल \( A = \frac{Cd}{\varepsilon_0 \varepsilon_r} \dots \)
गणना करने पर क्षेत्रफल \( A = 19\text{ cm}^2 \) प्राप्त होता है।

मुख्य बिंदु:

• सुरक्षित क्षेत्र परावैद्युत सामर्थ्य का केवल 10% होता है।

• \( d = V/E \) संबंध से पट्टिकाओं के बीच की न्यूनतम दूरी निकाली जाती है।
• संधारित्र की धारिता के सूत्र से क्षेत्रफल ज्ञात किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• 10% सुरक्षा सीमा को ध्यान में न रखना।
• kV को V में न बदलना।
• पट्टिका के क्षेत्रफल की इकाई में गलती करना।

Exam Tips:

a) सुरक्षा गुणांक (10%) को प्रश्न से समझकर पहले ही लागू करें।
b) दूरी और विद्युत क्षेत्र के संबंध का सही उपयोग करें।
c) सभी गणनाओं की दो बार जाँच करें।

 

Question 2.34: व्यवस्थात्मक: निम्नलिखित में संगत समविभव पृष्ठ का वर्णन कीजिए:
(a) z- दिशा में अचर विद्युत क्षेत्र
(b) एक क्षेत्र जो एकसमान रूप से बढ़ता है, परंतु एक ही दिशा (मान लीजिए z-दिशा) में रहता है।
(c) मूल बिंदु पर कोई एकल धनवेश, और
(d) एक समतल में समान दूरी पर समांतर लंबे आवेशित तारों से बने एकसमान जाल।

Answer:

(a) x-y समतल के समांतर समतल पृष्ठ।
(b) x-y समतल के समांतर समतल पृष्ठ, परंतु जैसे-जैसे z बढ़ता है, समतल एक-दूसरे के नजदीक आते जाते हैं।
(c) मूल बिंदु को केंद्र मानते हुए संकेंद्री गोले।
(d) तारों के जाल के समीप समांतर समतल पृष्ठ, जो दूर जाने पर समतल होते जाते हैं।

मुख्य बिंदु:

• समविभव पृष्ठ हमेशा विद्युत क्षेत्र रेखाओं के लंबवत होते हैं।
• एकसमान क्षेत्र के लिए समविभव पृष्ठ समतल होते हैं।
• बिंदु आवेश के लिए समविभव पृष्ठ गोलीय होते हैं।

आम गलतियाँ:

• क्षेत्र के बढ़ने पर समतल के बीच की दूरी के बदलाव को अनदेखा करना।
• ज्यामितीय आकृतियों को गलत पहचानना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक स्थिति के लिए विद्युत क्षेत्र की प्रकृति समझें।
b) समविभव पृष्ठ और क्षेत्र रेखाओं के लंबवत संबंध को याद रखें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और सटीक लिखें।

 

Question 2.35: \( r_1 \) त्रिज्या तथा \( q_1 \) आवेश वाला एक छोटा गोला, \( r_2 \) त्रिज्या और \( q_2 \) आवेश के गोलीय खोल (कोश) से घिरा है। दर्शाइए कि यदि \( q_1 \) धनात्मक है तो (जब दोनों को एक तार द्वारा जोड़ दिया जाता है) आवश्यक रूप से आवेश, गोले से खोल की तरफ ही प्रवाहित होगा, चाहे खोल पर आवेश \( q_2 \) कुछ भी हो।

Answer:

गाउस के नियम के अनुसार, गोले और कोटर के बीच विद्युत क्षेत्र केवल गोले पर आवेश \( q_1 \) के कारण होता है।
अतः, गोले और कोटर के बीच विभवांतर आवेश \( q_2 \) से अप्रभावित रहता है।
\( V_1 - V_2 = \frac{q_1}{4\pi\varepsilon_0} \left( \frac{1}{r_1} - \frac{1}{r_2} \right) \)
चूँकि \( r_2 > r_1 \), इसलिए \( (1/r_1 - 1/r_2) \) हमेशा धनात्मक होता है। यदि \( q_1 \) धनात्मक है, तो विभव का अंतर हमेशा धनात्मक होगा, जिससे आवेश हमेशा अंदर के गोले से बाहरी खोल की ओर बहेगा।

मुख्य बिंदु:

• आंतरिक गोले का विभव बाहरी आवेश पर निर्भर नहीं करता।
• आवेश हमेशा उच्च विभव से निम्न विभव की ओर प्रवाहित होता है।
• गोलीय कोश के अंदर विभव एकसमान रहता है।

आम गलतियाँ:

• बाहरी आवेश \( q_2 \) को विभवांतर के सूत्र में शामिल करना।
• त्रिज्याओं के अंतर के चिह्न का गलत विश्लेषण करना।

Exam Tips:

a) गोलीय कोश के भीतर विद्युत क्षेत्र और विभव के गुणों को स्पष्ट करें।
b) विभवांतर का व्यंजक लिखकर गणितीय रूप से सिद्ध करें।
c) निष्कर्ष को स्पष्ट शब्दों में लिखें।

 

Question 2.36: निम्न का उत्तर दीजिए:
(a) पृथ्वी के पृष्ठ के सापेक्ष वायुमंडल की ऊपरी परत लगभग 400 kV पर है, जिसके संगत विद्युत क्षेत्र ऊँचाई बढ़ने के साथ कम होता है। पृथ्वी के पृष्ठ के समीप विद्युत क्षेत्र लगभग \( 100\text{ V m}^{-1} \) है। तब फिर जब हम घर से बाहर खुले में जाते हैं, तो हमें विद्युत आघात क्यों नहीं लगता? (करो को पिंजरा मान लीजिए, अतः उसके अंदर कोई विद्युत क्षेत्र नहीं है।)
(b) एक व्यक्ति शाम के समय अपने घर के बाहर 2 m ऊँचा अवरोधी पह रखता है जिसके शिखर पर एक \( 1\text{ m}^2 \) क्षेत्रफल की बड़ी एल्यूमिनियम की चादर है। अगली सुबह यह यदि धातु की चादर को छूता है तो क्या उसे विद्युत आघात लगेगा?
(c) वायु की थोड़ी-सी चालकता के कारण सारे संसार में औसतन वायुमंडल में विसर्जन धारा 1800 A मानी जाती है। तब यथासमय वातावरण स्वयं पूर्णतः निरावेशित होकर विद्युत उदासीन क्यों नहीं होता? दूसरे शब्दों में, वातावरण को कौन आवेशित रखता है?
(d) तड़ित के दौरान वातावरण की विद्युत ऊर्जा, ऊर्जा के किन रूपों में क्षयित होती है?

Answer:

(a) हमारे शरीर और जमीन का विभव समान (शून्य) रहता है, इसलिए हमें झटका नहीं लगता क्योंकि खुली हवा का समविभव सतह बदलती रहती है।
(b) हाँ, आदमी को बिजली का झटका महसूस होगा यदि अगली सुबह वह धातु की चादर को स्पर्श करेगा क्योंकि वायुमंडल में संतत रूप से धारा के विसर्जन से एल्यूमिनियम की पट्टी आवेशित होती रहती है।
(c) बादलों की गरज और बिजली की चमक से वायुमंडल लगातार आवेशित होता रहता है, जिससे संतुलन बना रहता है।
(d) गरज और चमक के समय, वायुमंडल में ऊर्जा प्रकाश, ऊष्मा, तथा ध्वनि के रूप में मुक्त होती है।

मुख्य बिंदु:

• मानव शरीर जमीन के संपर्क में होने के कारण समविभव पर रहता है।
• वायुमंडलीय बिजली और तड़ित-झंझा वातावरण को आवेशित रखते हैं।
• ऊर्जा का क्षय प्रकाश, ध्वनि और ऊष्मा के रूप में होता है।

आम गलतियाँ:

• शरीर और पृथ्वी के बीच विभव के अंतर को गलत समझना।
• वायुमंडल के सतत आवेशित होने की प्रक्रिया को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) व्यावहारिक और सैद्धांतिक समझ पर आधारित प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट दें।
b) समविभव सतह और शरीर की भू-संपर्कित स्थिति का उल्लेख करें।
c) ऊर्जा रूपांतरण के रूपों को स्पष्ट करें।

 

Free NCERT Textbook Explanations: Class 12 Physics Chapter 02 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता

Chapter Exercise Answers for Class 12 Physics

Review comprehensive exercise answers for Class 12 Physics Chapter 02 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता. Fully updated to match current NCERT syllabus guidelines, these textbook solutions help students verify their work and maintain accurate study notes.

Detailed Answer Guides for Chapter 02 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता

Beyond providing final answers, these guides offer step-by-step breakdowns for complex queries in the Class 12 Physics module. This approach helps students balance theoretical depth with practical problem-solving skills required for NCERT exams.

Complete Preparation Kit for Class 12 Exams

These resources act as an effective roadmap for daily homework tasks and independent study. Supplement your review of Chapter 02 स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता with official sample papers and interactive practice tests available on our platform free of charge.

FAQs

Where can I find the latest NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 02 Electrostatic Potential and Capacitance (स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता) Additional Questions in Hindi for the 2026-27 session?

The complete and updated NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 02 Electrostatic Potential and Capacitance (स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता) Additional Questions in Hindi is available for free on StudiesToday.com. These solutions for Class 12 Physics are as per latest NCERT curriculum.

Are the Physics NCERT solutions for Class 12 updated for the new 50% competency-based exam pattern?

Yes, our experts have revised the NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 02 Electrostatic Potential and Capacitance (स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता) Additional Questions in Hindi as per 2026 exam pattern. All textbook exercises have been solved and have added explanation about how the Physics concepts are applied in case-study and assertion-reasoning questions.

How do these Class 12 NCERT solutions help in scoring 90% plus marks?

Toppers recommend using NCERT language because NCERT marking schemes are strictly based on textbook definitions. Our NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 02 Electrostatic Potential and Capacitance (स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता) Additional Questions in Hindi will help students to get full marks in the theory paper.

Do you offer NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 02 Electrostatic Potential and Capacitance (स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता) Additional Questions in Hindi in multiple languages like Hindi and English?

Yes, we provide bilingual support for Class 12 Physics. You can access NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 02 Electrostatic Potential and Capacitance (स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता) Additional Questions in Hindi in both English and Hindi medium.

Is it possible to download the Physics NCERT solutions for Class 12 as a PDF?

Yes, you can download the entire NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 02 Electrostatic Potential and Capacitance (स्थिरवैद्युत विभव तथा धारिता) Additional Questions in Hindi in printable PDF format for offline study on any device.