NCERT Solutions Class 12 Physics Chapter 01 Electric Charges and Fields (वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र) Exercise Questions in Hindi

Solutions for Class 12 Physics: Chapter 01 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

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Practice Class 12 Physics Solutions: Chapter 01 वैद्युत आवेश तथा क्षेत्र

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Question 1.1: वायु में एक-दूसरे से \( 30\text{ cm} \) दूरी पर रखे दो छोटे आवेशित गोलों पर क्रमशः \( 2 \times 10^{-7}\text{ C} \) तथा \( 3 \times 10^{-7}\text{ C} \) आवेश हैं। उनके बीच कितना बल है?

Answer:

दिया गया है:
प्रथम गोले पर आवेश \( q_1 = 2 \times 10^{-7}\text{ C} \)
द्वितीय गोले पर आवेश \( q_2 = 3 \times 10^{-7}\text{ C} \)
गोलों के बीच की दूरी \( r = 30\text{ cm} = 0.3\text{ m} \)
कूलाम के नियम के अनुसार, दोनों गोलों के बीच लगने वाला स्थिरवैद्युत बल:
\( F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r^2} \)
जहाँ \( \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} = 9 \times 10^9\text{ N m}^2\text{C}^{-2} \)
मान रखने पर:
\( F = \frac{9 \times 10^9 \times 2 \times 10^{-7} \times 3 \times 10^{-7}}{(0.3)^2} \)
\( F = \frac{5.4 \times 10^{-4}}{0.09} \)
\( F = 6 \times 10^{-3}\text{ N} \)
चूँकि दोनों आवेश समान प्रकृति के हैं (धनात्मक), इसलिए यह बल प्रतिकर्षण प्रकृति का होगा।

मुख्य बिंदु:

• दो स्थिर बिंदु आवेशों के बीच लगने वाला बल उनके परिमाणों के गुणनफल के अनुक्रमानुपाती होता है।
• बल उनकी बीच की दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
• सजातीय आवेश एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।

आम गलतियाँ:

• सेंटीमीटर (\( \text{cm} \)) को मीटर (\( \text{m} \)) में बदलना भूल जाना।
• घातों (Powers) की गणना करते समय गलती करना।
• बल का सही मात्रक न लिखना।

Exam Tips:

a) हमेशा मानों को SI मात्रक में बदलकर ही गणना करें।
b) अंतिम उत्तर में बल की प्रकृति (आकर्षण या प्रतिकर्षण) अवश्य लिखें।
c) गणना के अंत में सही मात्रक (\( \text{N} \)) अवश्य दर्शाएँ।

 

Question 1.2: \( 0.4\ \mu\text{C} \) आवेश के किसी छोटे गोले पर किसी अन्य छोटे आवेशित गोले के कारण वायु में \( 0.2\text{ N} \) बल लगता है। यदि दूसरे गोले पर \( 0.4\ \mu\text{C} \) आवेश हो तो
(a) दोनों गोलों के बीच कितनी दूरी है?
(b) दूसरे गोले पर पहले गोले के कारण कितना बल लगता है?

Answer:

(a) दिया गया है:
प्रथम गोले पर आवेश \( q_1 = 0.4\ \mu\text{C} = 0.4 \times 10^{-6}\text{ C} \)
दूसरे गोले पर आवेश \( q_2 = -0.8\ \mu\text{C} = -0.8 \times 10^{-6}\text{ C} \)
लगने वाला बल \( F = 0.2\text{ N} \)
कूलाम के सूत्र से:
\( F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_1 q_2}{r^2} \)
दूरी \( r^2 \) के लिए हल करने पर:
\( r^2 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_1 q_2}{F} \)
\( r^2 = \frac{9 \times 10^9 \times 0.4 \times 10^{-6} \times 0.8 \times 10^{-6}}{0.2} \)
\( r^2 = 144 \times 10^{-4}\text{ m}^2 \)
\( r = \sqrt{144 \times 10^{-4}} = 12 \times 10^{-2}\text{ m} = 0.12\text{ m} \)
अतः दोनों गोलों के बीच की दूरी \( 0.12\text{ m} \) है।

(b) न्यूटन के गति के तीसरे नियम के अनुसार, दोनों गोले एक-הुसरे पर बराबर और विपरीत बल लगाते हैं। इसलिए, दूसरे गोले पर पहले गोले के कारण लगने वाला बल भी \( 0.2\text{ N} \) ही होगा (प्रतिकर्षण बल)।

मुख्य बिंदु:

• न्यूटन का तीसरा नियम स्थिरवैद्युत बलों पर भी लागू होता है।
• \( \mu\text{C} \) को कूलॉम में बदलने के लिए \( 10^{-6} \) से गुणा किया जाता है।
• दूरी निकालने के लिए वर्गमूल का सही उपयोग करना आवश्यक है।

आम गलतियाँ:

• \( \mu\text{C} \) के माइक्रोन को बदलना भूल जाना।
• दोनों गोलों के बलों को अलग-अलग मान लेना (जबकि दोनों बराबर होते हैं)।
• दशमलव की गणना में त्रुटि करना।

Exam Tips:

a) उप-भाग (b) के लिए लंबी गणना न करें, सीधा न्यूटन के तीसरे नियम का उल्लेख करें।
b) वैज्ञानिक संकेतन (Scientific Notation) का प्रयोग करें।
c) मात्रक मीटर में ही निकालें जब तक अन्यथा न कहा जाए।

 

Question 1.3: जाँच द्वारा सुनिश्चित कीजिए कि \( \frac{ke^2}{Gm_e m_p} \) विमाहीन है। भौतिक नियतांकों की सारणी देखकर इस अनुपात का मान ज्ञात कीजिए। यह अनुपात क्या बताता है?

Answer:

दिया गया अनुपात: \( \frac{ke^2}{Gm_e m_p} \)
जहाँ:
\( k = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \) (स्थिरवैद्युत नियतांक), इसका मात्रक \( \text{N m}^2\text{C}^{-2} \)
\( e \) = इलेक्ट्रॉन पर आवेश, इसका मात्रक \( \text{C} \)
\( G \) = सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक, इसका मात्रक \( \text{N m}^2\text{kg}^{-2} \)
\( m_e \) = इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, मात्रक \( \text{kg} \)
\( m_p \) = प्रोटॉन का द्रव्यमान, मात्रक \( \text{kg} \)

विमीय विश्लेषण करने पर:
\( \frac{[\text{N m}^2\text{C}^{-2}][\text{C}]^2}{[\text{N m}^2\text{kg}^{-2}][\text{kg}][\text{kg}]} \)
\( = \frac{\text{N m}^2}{\text{N m}^2} = \text{M}^0\text{L}^0\text{T}^0 \)
अतः यह अनुपात विमाहीन है।

मानों को प्रतिस्थापित करने पर:
\( e = 1.6 \times 10^{-19}\text{ C} \)
\( G = 6.67 \times 10^{-11}\text{ N m}^2\text{kg}^{-2} \)
\( m_e = 9.1 \times 10^{-31}\text{ kg} \)
\( m_p = 1.67 \times 10^{-27}\text{ kg} \)
अनुपात का मान:
\( \frac{9 \times 10^9 \times (1.6 \times 10^{-19})^2}{6.67 \times 10^{-11} \times 9.1 \times 10^{-31} \times 1.67 \times 10^{-27}} \)
\( \approx 2.3 \times 10^{39} \)
यह अनुपात एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटॉन के बीच लगने वाले स्थिरवैद्युत बल और गुरुत्वाकर्षण बल के अनुपात को दर्शाता है (जबकि उनके बीच की दूरी नियत हो)।

मुख्य बिंदु:

• विमीय सूत्र निकालते समय सभी राशियों के मूल मात्रकों का ध्यान रखें।
• यह अनुपात यह प्रदर्शित करता है कि गुरुत्वाकर्षण बल की तुलना में स्थिरवैद्युत बल अत्यंत प्रबल होता है।
• गणना में घातांकों को सावधानी से हल करें।

आम गलतियाँ:

• आवेश \( e \) का वर्ग करना भूल जाना।
• द्रव्यमानों के मात्रक में संक्युर्णता दिखाना।
• विमाओं को गलत लिखना।

Exam Tips:

a) विमीय विश्लेषण वाले भाग को चरणों में स्पष्ट रूप से दिखाएं।
b) नियतांकों के मानक मान याद रखें।
c) अंत में अनुपात के भौतिक महत्व को एक वाक्य में अवश्य लिखें।

 

Question 1.4:
(a) "किसी वस्तु का वैधुत आवेश क्वांटीकृत है," इस कथन से क्या तात्पर्य है?
(b) स्थूल अथवा बड़े पैमाने पर वैधुत आवेशों से व्यवहार करते समय हम वैधुत आवेश के क्वांटीकरण की उपेक्षा कैसे कर सकते हैं?

Answer:

(a) "वैधुत आवेश का क्वांटीकरण" का तात्पर्य यह है कि किसी भी आवेशित वस्तु पर कुल आवेश एक निश्चित न्यूनतम आवेश (जो कि एक इलेक्ट्रॉन पर आवेश \( e \) के बराबर होता है) का पूर्ण गुणज होता है। अर्थात् \( q = ne \), जहाँ \( n \) एक पूर्णांक है।

(b) स्थूल (macro) पैमाने पर आवेशों का मान बहुत बड़ा होता है (\( \mu\text{C} \) या mC कोटि का), जो कि एक इलेक्ट्रॉन के आवेश की तुलना में खरबों गुना अधिक है। इस कारण क्वांटीकरण का वि discrete (विविक्त) प्रकृति छिप जाती है और आवेश को एक सतत (continuous) राशि माना जा सकता है।

मुख्य बिंदु:

• क्वांटीकरण का अर्थ है कि आवेश अनन्त रूप से विभाजित नहीं हो सकता।
• सूक्ष्मतम आवेश एक इलेक्ट्रॉन का आवेश होता है (\( 1.6 \times 10^{-19}\text{ C} \)).
• स्थूल स्तर पर क्वांटीकरण का महत्व नगण्य हो जाता है।

आम गलतियाँ:

• क्वांटीकरण की परिभाषा में पूर्णांक \( n \) का उल्लेख न करना।
• स्थूल और सूक्ष्म पैमाने के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।

Exam Tips:

a) उत्तर में सूत्र \( q = ne \) का उल्लेख अवश्य करें।
b) सैद्धांतिक प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट और बिंदुवार दें।
c) स्थूल पैमाने की व्याख्या में 'सतत आवेश' शब्द का प्रयोग करें।

 

Question 1.5: जब कांच की छड़ को रेशम के टुकड़े से रगड़ते हैं तो दोनों पर आवेश आ जाता है। इसी प्रकार की घटना का वस्तुओं के अन्य युग्मों में भी प्रेक्षण किया जाता है। स्पष्ट कीजिए कि यह प्रेक्षण आवेश संरक्षण नियम से किस प्रकार सामंजस्य रखता है?

Answer:

जब दो वस्तुओं को आपस में रगड़ा जाता है, तो दोनों पर बराबर और विपरीत आवेश उत्पन्न होता है। इसका कारण यह है कि घर्षण के कारण एक वस्तु से इलेक्ट्रॉन निकलकर दूसरी वस्तु पर चले जाते हैं। प्रक्रिया से पहले कुल आवेश शून्य होता है और रगड़ने के बाद भी कुल आवेश धनात्मक और ऋणात्मक आवेशों के बीजगणितीय योग के कारण शून्य ही रहता है। अतः यह घटना आवेश संरक्षण के सिद्धांत का पूर्ण पालन करती है, जिसके अनुसार विलगित निकाय का कुल आवेश हमेशा संरक्षित रहता है।

मुख्य बिंदु:

• घर्षण द्वारा आवेश उत्पन्न होने का मुख्य कारण इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण है।
• कुल आवेश में कोई वृद्धि या कमी नहीं होती।
• यह विलगित निकाय के आवेश संरक्षण नियम को पुष्ट करता है।

आम गलतियाँ:

• यह मान लेना कि घर्षण से नया आवेश पैदा होता है।
• बीजगणितीय योग के महत्व को न समझना।

Exam Tips:

a) 'विलगित निकाय' (Isolated system) शब्द का प्रयोग उत्तर में अवश्य करें।
b) कांच और रेशम के उदाहरण को संक्षिप्त में समझाएं।
c) संरक्षण का अर्थ स्पष्ट करें कि कुल आवेश अपरिवर्तित रहता है।

 

Question 1.6: चार बिंदु आवेश \( q_A = 2\ \mu\text{C} \), \( q_B = -5\ \mu\text{C} \), \( q_C = 2\ \mu\text{C} \) तथा \( q_D = -5\ \mu\text{C} \), \( 10\text{ cm} \) भुजा के किसी वर्ग ABCD के शीर्षों पर अवस्थित हैं। वर्ग के केंद्र पर रखे \( 1\ \mu\text{C} \) आवेश पर लगने वाला बल कितना है?

Answer:

दिया गया है:
वर्ग की भुजा \( AB = BC = CD = DA = 10\text{ cm} \)
विकर्ण \( AC = BD = 10\sqrt{2}\text{ cm} \)
केंद्र की दूरी \( AO = OC = DO = OB = 5\sqrt{2}\text{ cm} \)

केंद्र पर रखे \( 1\ \mu\text{C} \) आवेश पर लगने वाला बल:
कोने A पर स्थित \( +2\ \mu\text{C} \) आवेश केंद्र के आवेश को प्रतिकर्षित करता है, जबकि कोने C पर स्थित \( +2\ \mu\text{C} \) आवेश भी केंद्र के आवेश को विपरीत दिशा में प्रतिकर्षित करता है। चूँकि दोनों आवेश परिमाण में समान और केंद्र से समान दूरी पर हैं, इसलिए उनके द्वारा केंद्र पर लगाया गया बल एक-दूसरे को निरस्त कर देता है।
इसी प्रकार, कोने B और D पर स्थित \( -5\ \mu\text{C} \) के आवेश केंद्र के आवेश को अपनी ओर आकर्षित करते हैं और उनके बल भी दिशा में विपरीत होने के कारण एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं।
अतः केंद्र पर रखे आवेश पर कुल परिणामी बल शून्य (\( 0\text{ N} \)) होगा।

मुख्य बिंदु:

• सममित (Symmetric) निकाय में बलों के सदिश योग शून्य हो सकते हैं।
• प्रतिकर्षण बल बाहर की ओर और आकर्षण बल अंदर की ओर लगता है।
• विपरीत दिशा में समान बल एक-दूसरे को संतुलित करते हैं।

आम गलतियाँ:

• सभी बलों का परिमाण अलग-अलग मान लेना।
• सदिशों की दिशा पर ध्यान न देना।

Exam Tips:

a)対称ता (Symmetry) का तर्क देकर सीधे उत्तर स्पष्ट किया जा सकता है।
b) चित्र बनाकर बलों की दिशा को तीर द्वारा दर्शाएं।
c) अंत में कुल बल शून्य होने का कारण स्पष्ट लिखें।

 

Question 1.7:
(a) स्थिरवैद्युत क्षेत्र रेखा एक सतत वक्र होती है, अर्थात् कोई क्षेत्र रेखा एकाएक नहीं टूट सकती। क्यों?
(b) स्पष्ट कीजिए कि दो क्षेत्र रेखाएँ कभी भी एक-दूसरे का प्रतिच्छेदन क्यों नहीं करतीं?

Answer:

(a) स्थिरवैद्युत क्षेत्र रेखा एक सतत वक्र होती है क्योंकि किसी वैधुत क्षेत्र में गति करने वाला आवेश निरंतर एक बल का अनुभव करता है, अर्थात कोई क्षेत्र रेखा एकाएक नहीं टूट सकती क्योंकि आवेश सतत गति करता है और बीच में अंतराल (jump) नहीं होता।

(b) यदि दो क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को काटती हैं, तो कटान बिंदु पर वैधुत क्षेत्र की दो दिशाएँ संभव होंगी, जो कि भौतिक रूप से असंभव है क्योंकि एक ही बिंदु पर वैधुत क्षेत्र की तीव्रता की केवल एक ही अद्वितीय दिशा हो सकती है।

मुख्य बिंदु:

• क्षेत्र रेखाएँ सतत होती हैं क्योंकि बल अचानक शून्य नहीं होता।
• प्रतिच्छेदन बिंदु पर दो स्पर्श रेखाएँ खींची जा सकती हैं जो दो दिशाएँ दर्शाती हैं।
• वैधुत क्षेत्र सदिश राशि है जिसकी एक बिंदु पर एक ही दिशा होती है।

आम गलतियाँ:

• केवल परिभाषा लिखकर छोड़ देना, कारण स्पष्ट न करना।
• प्रतिच्छेदन बिंदु पर स्पर्श रेखा के नियम को न समझाना।

Exam Tips:

a) दोनों भागों के उत्तर बिंदुवार दें।
b) भाग (b) में 'अद्वितीय दिशा' (Unique direction) शब्द का प्रयोग अवश्य करें।
c) बोर्ड परीक्षा की दृष्टि से यह अत्यंत महत्वपूर्ण सैद्धांतिक प्रश्न है।

 

Question 1.8: दो बिंदु आवेश \( q_A = 3\ \mu\text{C} \) तथा \( q_B = -3\ \mu\text{C} \) निर्वात में एक-दूसरे से \( 20\text{ cm} \) दूरी पर स्थित हैं।
(a) दोनों आवेशों को मिलाने वाली रेखा AB के मध्य बिंदु O पर वैधुत क्षेत्र कितना है?
(b) यदि \( 1.5 \times 10^{-9}\text{ C} \) परिमाण का कोई ऋणात्मक परीक्षण आवेश इस बिंदु पर रख दिया जाए तो यह परीक्षण आवेश कितने बल का अनुभव करेगा?

Answer:

(a) दिया गया है:
\( AB = 20\text{ cm} \), अतः मध्य बिंदु O की दूरी \( AO = OB = 10\text{ cm} = 0.1\text{ m} \)
बिंदु O पर \( +3\ \mu\text{C} \) आवेश के कारण वैधुत क्षेत्र \( E_1 \):
\( E_1 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{3 \times 10^{-6}}{(0.1)^2} \) (दिशा OA की ओर)
\( -3\ \mu\text{C} \) आवेश के कारण वैधुत क्षेत्र \( E_2 \):
\( E_2 = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{3 \times 10^{-6}}{(0.1)^2} \) (दिशा OB की ओर)
चूँकि दोनों क्षेत्र एक ही दिशा में (OB की ओर) हैं, परिणामी क्षेत्र E:
\( E = E_1 + E_2 = 2 \times \frac{9 \times 10^9 \times 3 \times 10^{-6}}{(0.1)^2} \)
\( E = 5.4 \times 10^6\text{ N/C} \) (OB की दिशा में)

(b) परीक्षण आवेश \( q = 1.5 \times 10^{-9}\text{ C} \)
लगने वाला बल \( F = qE \)
\( F = 1.5 \times 10^{-9} \times 5.4 \times 10^6 \)
\( F = 8.1 \times 10^{-3}\text{ N} \)
इसकी दिशा OA की ओर होगी क्योंकि परीक्षण आवेश ऋणात्मक है।

मुख्य बिंदु:

• विपरीत प्रकृति के आवेशों के कारण मध्य बिंदु पर वैधुत क्षेत्र जुड़ जाते हैं।
• वैधुत क्षेत्र की दिशा धन आवेश से ऋण आवेश की ओर होती है।
• बल \( F = qE \) सूत्र का प्रयोग करके निकाला जाता है।

आम गलतियाँ:

• क्षेत्र की दिशाओं को विपरीत मानकर घटा देना (जबकि दोनों जुड़ेंगे)।
• दूरी का वर्ग करते समय इकाई बदलना भूल जाना।

Exam Tips:

a) क्षेत्र की दिशाओं को स्पष्ट रूप से तीर द्वारा या लिखकर दर्शाएं।
b) गणना के चरणों को अलग-अलग दिखाएं।
c) बल निकालते समय आवेश के ऋण चिह्न को उसकी दिशा तय करने के लिए उपयोग करें।

 

Question 1.9: किसी निकाय में दो आवेश \( q_A = 2.5 \times 10^{-7}\text{ C} \) तथा \( q_B = -2.5 \times 10^{-7}\text{ C} \) क्रमशः दो बिंदुओं A: (0, 0, -15 cm) तथा B: (0, 0, +15 cm) पर अवस्थित हैं। निकाय का कुल आवेश तथा वैधुत द्विध्रुव आघूर्ण क्या है?

Answer:

निकाय का कुल आवेश \( q = q_A + q_B \)
\( q = 2.5 \times 10^{-7}\text{ C} + (-2.5 \times 10^{-7}\text{ C}) = 0 \)
अतः निकाय का कुल आवेश शून्य है।

दोनों आवेशों के बीच की कुल दूरी \( d = 15\text{ cm} + 15\text{ cm} = 30\text{ cm} = 0.3\text{ m} \)
वैधुत द्विध्रुव आघूर्ण \( p = q \times d \)
\( p = 2.5 \times 10^{-7}\text{ C} \times 0.3\text{ m} \)
\( p = 7.5 \times 10^{-8}\text{ C m} \)
इसकी दिशा Z-अक्ष की ऋणात्मक दिशा (A से B की ओर) होगी।

मुख्य बिंदु:

• वैधुत द्विध्रुव का कुल आवेश हमेशा शून्य होता है।
• द्विध्रुव आघूर्ण की दिशा ऋण आवेश से धन आवेश की ओर होती है।
• कुल दूरी दोनों आवेशों के बीच की कुल लंबाई होती है, न कि मूलबिंदु से एक आवेश की दूरी।

आम गलतियाँ:

• \( d \) का मान केवल \( 15\text{ cm} \) ले लेना (दूरी को दोगुना न करना)।
• द्विध्रुव आघूर्ण का मात्रक गलत लिखना।

Exam Tips:

a) निर्देशांकों को देखकर कुल दूरी सावधानी से निकालें।
b) द्विध्रुव आघूर्ण का मात्रक \( \text{C m} \) स्पष्ट लिखें।
c) दिशा का उल्लेख करना न भूलें।

 

Question 1.10: \( 4 \times 10^{-9}\text{ C m} \) द्विध्रुव आघूर्ण का कोई वैधुत द्विध्रुव \( 5 \times 10^4\text{ N C}^{-1} \) परिमाण के किसी एकसमान वैधुत क्षेत्र की दिशा से \( 30^\circ \) पर सरेखित है। द्विध्रुव पर कार्यरत बल आघूर्ण का परिमाण परिकलित कीजिए।

Answer:

दिया गया है:
वैधुत द्विध्रुव आघूर्ण \( p = 4 \times 10^{-9}\text{ C m} \)
वैधुत क्षेत्र \( E = 5 \times 10^4\text{ N/C} \)
कोण \( \theta = 30^\circ \)

बल आघूर्ण \( \tau = pE \sin\theta \)
\( \tau = 4 \times 10^{-9} \times 5 \times 10^4 \times \sin(30^\circ) \)
\( \tau = 20 \times 10^{-5} \times \frac{1}{2} \)
\( \tau = 10 \times 10^{-5}\text{ N m} = 10^{-4}\text{ N m} \)
अतः द्विध्रुव पर लगने वाला बल आघूर्ण \( 10^{-4}\text{ N m} \) है।

मुख्य बिंदु:

• एकसमान वैध्रुव क्षेत्र में द्विध्रुव पर केवल बल आघूर्ण लगता है, नेट बल नहीं।
• \( \sin(30^\circ) \) का मान \( \frac{1}{2} \) होता है।
• बल आघूर्ण का मात्रक न्यूटन-मीटर (\( \text{N m} \)) है।

आम गलतियाँ:

• \( \sin\theta \) की जगह \( \cos\theta \) का प्रयोग करना।
• त्रिकोणमितीय मान गलत रखना।

Exam Tips:

a) सूत्र \( \tau = pE \sin\theta \) स्पष्ट रूप से लिखें।
b) घातों की गणना अंत में सावधानी से करें।
c) मात्रक लिखना न भूलें।

 

Question 1.11: ऊन से रगड़े जाने पर कोई पॉलीथीन का टुकड़ा \( 3 \times 10^{-7}\text{ C} \) के ऋणवेश से आवेशित पाया गया।
(a) स्थानांतरित (किस पदार्थ से किस पदार्थ में) इलेक्ट्रॉनों की संख्या काकलित कीजिए।
(b) क्या ऊन से पॉलीथीन में संहति का स्थानांतरण भी होता है?

Answer:

(a) आवेश \( q = -3 \times 10^{-7}\text{ C} \)
इलेक्ट्रॉन पर आवेश \( e = -1.6 \times 10^{-19}\text{ C} \)
इलेक्ट्रॉनों की संख्या \( n = \frac{q}{e} \)
\( n = \frac{-3 \times 10^{-7}}{-1.6 \times 10^{-19}} \)
\( n = 1.875 \times 10^{12} \)
अतः \( 1.875 \times 10^{12} \) इलेक्ट्रॉन ऊन से पॉलीथीन में स्थानांतरित हुए हैं।

(b) हाँ, चूँकि इलेक्ट्रॉन स्थानांतरित होते हैं और प्रत्येक इलेक्ट्रॉन का निश्चित द्रव्यमान होता है (\( m_e = 9.1 \times 10^{-31}\text{ kg} \)), इसलिए ऊन से पॉलीथीन में संहति (द्रव्यमान) का भी स्थानांतरण होता है।
कुल द्रव्यमान स्थानांतरण \( M = n \times m_e = 1.875 \times 10^{12} \times 9.1 \times 10^{-31} \approx 1.7 \times 10^{-18}\text{ kg} \), जो कि अत्यंत नगण्य है।

मुख्य बिंदु:

• ऋण आवेश का अर्थ है इलेक्ट्रॉनों की अधिकता।
• द्रव्यमान का स्थानांतरण होता है लेकिन वह बहुत सूक्ष्म होता है।
• क्वांटीकरण सूत्र \( q = ne \) का प्रयोग किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• ऋण चिह्न के कारण उत्तर को ऋणात्मक लिख देना (संख्या हमेशा धनात्मक होती है)।
• द्रव्यमान के स्थानांतरण को नगण्य मानकर 'ना' कह देना (जबकि सैद्धांतिक रूप से होता है)।

Exam Tips:

a) स्थानांतर की दिशा (ऊन से पॉलीथीन) स्पष्ट लिखें।
b) भाग (b) में 'हाँ' के साथ कारण में द्रव्यमान का उल्लेख करें।
c) वैज्ञानिक संकेतन का सही उपयोग करें।

 

Question 1.12: (a) दो विधुतरोधी आवेशित तांबे के गोलों A तथा B के केंद्रों के बीच की दूरी \( 50\text{ cm} \) है। यदि दोनों गोलों पर पृथक्-पृथक् आवेश \( 6.5 \times 10^{-7}\text{ C} \) हैं, तो इनमें पारस्परिक स्थिरवैद्युत प्रतिकर्षण बल कितना है? गोलों के बीच की दूरी की तुलना में गोलों A तथा B की त्रिज्याएँ नगण्य हैं।
(b) यदि प्रत्येक गोले पर आवेश की मात्रा दुगुनी तथा गोलों के बीच की दूरी आधी कर दी जाए तो प्रत्येक गोले पर कितना बल लगेगा?

Answer:

(a) दिया गया है:
\( q_A = q_B = 6.5 \times 10^{-7}\text{ C} \)
दूरी \( r = 50\text{ cm} = 0.5\text{ m} \)
बल \( F = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_A q_B}{r^2} \)
\( F = \frac{9 \times 10^9 \times (6.5 \times 10^{-7})^2}{(0.5)^2} \)
\( F = \frac{9 \times 10^9 \times 42.25 \times 10^{-14}}{0.25} \)
\( F = 1.52 \times 10^{-2}\text{ N} \)

(b) यदि आवेश दोगुना कर दिया जाए (\( q' = 2q \)) और दूरी आधी कर दी जाए (\( r' = r/2 \)):
नया बल \( F' = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{(2q_A)(2q_B)}{(r/2)^2} = 16 \left( \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_A q_B}{r^2} \right) = 16F \)
\( F' = 16 \times 1.52 \times 10^{-2} = 0.243\text{ N} \)

मुख्य बिंदु:

• कूलाम का नियम व्युत्क्रम वर्ग नियम का पालन करता है।
• दूरी आधी करने पर बल 4 गुना बढ़ जाता है क्योंकि हर में \( (1/2)^2 \) आता है जो ऊपर जाकर 4 बन जाता है।
• आवेश दोगुना करने पर गुणनफल 4 गुना हो जाता है।

आम गलतियाँ:

• दूरी आधी करने पर केवल 2 गुना बल बढ़ाना (जबकि 16 गुना बढ़ता है क्योंकि \( 4 \times 4 = 16 \)).
• मात्रक लिखना भूल जाना।

Exam Tips:

a) अनुपात विधि का प्रयोग करके भाग (b) को आसानी से हल किया जा सकता है।
b) गणना के चरणों को स्पष्ट रखें।
c) इकाई परिवर्तन (\( \text{cm} \) से \( \text{m} \)) में सावधानी बरतें।

 

Question 1.13: मान लीजिए अभ्यास 1.12 में गोले A तथा B साइज में सर्वसम हैं तथा इसी साइज का कोई तीसरा अनावेशित गोला पहले तो पहले गोले के संपर्क, तत्पश्चात दूसरे गोले के संपर्क में लाकर, अंत में दोनों से ही हटा लिया जाता है। अब A तथा B के बीच नया प्रतिकर्षण बल कितना है?

Answer:

प्रारंभ में आवेश \( q = 6.5 \times 10^{-7}\text{ C} \), दूरी \( r = 0.5\text{ m} \)
1. जब अनावेशित गोला C को गोले A से स्पर्श कराया जाता है, तो आवेश दोनों पर बराबर बंट जाता है:
\( q_A' = \frac{q}{2} \)
2. अब इस गोले C (जिस पर \( q/2 \) आवेश है) को गोले B (जिस पर \( q \) आवेश है) से स्पर्श कराया जाता है, तो कुल आवेश आधा-आधा बंट जाता है:
\( q_B' = \frac{q + q/2}{2} = \frac{3q}{4} \)
और गोले C पर भी आवेश \( \frac{3q}{4} \) हो जाता है। (लेकिन C को हटा लिया जाता है)
अब नए आवेश:
\( q_A' = \frac{q}{2} \) और \( q_B' = \frac{3q}{4} \)
नया बल:
\( F' = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q_A' q_B'}{r^2} \)
\( F' = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{(q/2)(3q/4)}{r^2} = \frac{3}{8} \left( \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q^2}{r^2} \right) \)
मान रखने पर:
\( F' = \frac{3}{8} \times 1.52 \times 10^{-2} \approx 5.7 \times 10^{-3}\text{ N} \)

मुख्य बिंदु:

• संपर्क में लाने पर आवेश चालन द्वारा समान आकार के चालकों में बराबर बंट जाता है।
• संपर्क के बाद दोनों गोलों का कुल आवेश संरक्षित रहता है।
• नए आवेशों के मान को कूलाम के नियम में रखा जाता है।

आम गलतियाँ:

• आवेशों के पुनर्वितरण के नियम को गलत समझना।
• गोले C के प्रभाव को अंत तक बनाए रखना (जबकि उसे हटा लिया गया है)।

Exam Tips:

a) प्रत्येक संपर्क के बाद आवेश के मान को स्पष्ट रूप से निकालें।
b) भिन्नों की गणना सावधानीपूर्वक करें।
c) अंतिम बल की तुलना पुराने बल से करके उत्तर की जाँच करें।

 

Question 1.14: चित्र 1.33 में किसी एकसमान स्थिरवैद्युत क्षेत्र में तीन आवेशित कणों के पथिक (tracks) दर्शाए 가 हैं। तीनों आवेशों के चिन्ह लिखिए। इनमें से किस कण का आवेश-संहति अनुपात (\( q/m \)) अधिकतम है?

Answer:

चित्र के अनुसार, कण 1 और 2 धनात्मक प्लेट की ओर विक्षेपित होते हैं, अतः वे ऋणावेशित कण हैं। कण 3 ऋणात्मक प्लेट की ओर विक्षेपित होता है, अतः वह धनावेशित कण है।
विक्षوبन (deflection) सूत्र \( y = \frac{qE}{2mv^2} x^2 \) के अनुसार, विक्षेप \( y \) आवेश-संहति अनुपात (\( q/m \)) के समानुपातिक होता है। चूँकि कण 3 का विक्षेप सबसे अधिक है, इसलिए कण 3 के लिए \( q/m \) अनुपात अधिकतम होगा।

मुख्य बिंदु:

• विपरीत आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं (धनात्मक प्लेट ऋण आवेश को खींचती है)।
• जिसका विक्षेप अधिक होता है, उसका \( q/m \) अनुपात अधिक होता है。
• विद्युत क्षेत्र में आवेशित कण पररावर्तित होकर परवलयाकार (parabolic) पथ बनाते हैं।

आम गलतियाँ:

• प्लेटों के आकर्षण और प्रतिकर्षण को उल्टा समझ लेना।
• \( q/m \) अनुपात और विक्षेप के संबंध को न पहचान पाना।

Exam Tips:

a) प्लेटों के धनात्मक और ऋणात्मक सिरों को ध्यान से देखें।
b) उत्तर को कारण सहित स्पष्ट रूप से लिखें।
c) अधिकतम विक्षेप वाले कण को सीधे पहचानकर उत्तर दें।

 

Question 1.15: एकसमान विधुत क्षेत्र \( E = 3 \times 10^3\text{ N/C} \) पर विचार कीजिए।
(a) इस क्षेत्र का \( 10\text{ cm} \) भुजा के वर्ग के उस पार्श्व से जिसका तल \( yz \) तल के समांतर है, गुजरने वाला फ्लक्स क्या है?
(b) इसी वर्ग से गुजरने वाला फ्लक्स कितना है यदि इसके तल का अभिलंब \( x \)-अक्ष से \( 60^\circ \) का कोण बनाता है?

Answer:

(a) दिया गया है:
\( E = 3 \times 10^3\text{ N/C} \)
वर्ग की भुजा \( s = 10\text{ cm} = 0.1\text{ m} \)
क्षेत्रफल \( A = s^2 = (0.1)^2 = 0.01\text{ m}^2 \)
चूँकि तल \( yz \) तल के समांतर है, इसका अभिलंब \( x \)-अक्ष के अनुदिश होगा, जो वैधुत क्षेत्र की दिशा में ही है। अतः \( \theta = 0^\circ \)
फ्लक्स \( \phi = EA \cos\theta = 3 \times 10^3 \times 0.01 \times \cos(0^\circ) = 30\text{ N m}^2/\text{C} \)

(b) यदि अभिलंब \( x \)-अक्ष से \( 60^\circ \) का कोण बनाता है, तो \( \theta = 60^\circ \)
फ्लक्स \( \phi = EA \cos(60^\circ) = 3 \times 10^3 \times 0.01 \times \cos(60^\circ) \)
\( \phi = 30 \times \frac{1}{2} = 15\text{ N m}^2/\text{C} \)

मुख्य बिंदु:

• वैधुत फ्लक्स का सूत्र \( \phi = EA \cos\theta \) होता है।
• यहाँ \( \theta \) क्षेत्र की दिशा और पृष्ठ के अभिलंब के बीच का कोण है।
• \( \cos(0^\circ) = 1 \) और \( \cos(60^\circ) = 0.5 \) होता है।

आम गलतियाँ:

• क्षेत्रफल निकालते समय सेंटीमीटर को मीटर में न बदलना।
• \( \theta \) को तल और क्षेत्र के बीच का कोण मान लेना (जबकि यह अभिलंब और क्षेत्र के बीच का कोण है)।

Exam Tips:

a) सूत्र लिखकर मान प्रतिस्थापित करें।
b) मात्रक \( \text{N m}^2/\text{C} \) या \( \text{V m} \) लिखें।
c) कोण स्पष्ट रूप से दर्शाएं।

 

Question 1.16: अभ्यास 1.15 के एकसमान विधुत क्षेत्र का \( 20\text{ cm} \) भुजा के किसी घन से (जो इस प्रकार अभिविन्यासति है कि उसके फलक निर्देशांक तलों के समांतर हैं) कितना नेट फ्लक्स गुज़रेगा?

Answer:

घन के सभी फलक निर्देशांक तलों के समांतर हैं। एकसमान विधुत क्षेत्र में रखे बंद पृष्ठ (घन) से गुजरने वाला कुल नेट वैधुत फ्लक्स हमेशा शून्य होता है, क्योंकि जितनी वैधुत क्षेत्र रेखाएँ घन में प्रवेश करती हैं, उतनी ही रेखाएँ बाहर निकलती हैं।
अतः नेट फ्लक्स \( \phi_{\text{net}} = 0 \text{ N m}^2/\text{C} \) ।

मुख्य बिंदु:

• एकसमान वैधुत क्षेत्र में किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल फ्लक्स शून्य होता है।
• प्रवेश करने वाला फ्लक्स ऋणात्मक और बाहर निकलने वाला फ्लक्स धनात्मक होता है, जिनका योग शून्य होता है।
• घन की भुजा का माप यहाँ भ्रमित करने के लिए दिया गया है।

आम गलतियाँ:

• घन के क्षेत्रफल का सूत्र लगाकर गणना करने लगना।
• गॉस के नियम या बंद पृष्ठ की प्रॉपर्टी को भूल जाना।

Exam Tips:

a) एकसमान क्षेत्र और बंद पृष्ठ की स्थिति में सीधा उत्तर शून्य लिखा जा सकता है।
b) कारण में प्रवेश करने वाले और बाहर निकलने वाले फ्लक्स की बराबर मात्रा का उल्लेख करें।
c) समय बचाने वाला प्रश्न है, अनावश्यक गणना न करें।

 

Question 1.17: किसी काले बॉक्स के पृष्ठ पर विधुत क्षेत्र की सावधानीपूर्वक ली गई माप यह संकेत देती है कि बॉक्स के पृष्ठ से गुजरने वाला नेट फ्लक्स \( 8.0 \times 10^3\text{ N m}^2/\text{C} \) है।
(a) बॉक्स के भीतर नेट आवेश कितना है?
(b) यदि बॉक्स के पृष्ठ से नेट बहिर्मुखी फ्लक्स शून्य है तो क्या आप यह निष्कर्ष निकालेंगे कि बॉक्स के भीतर कोई आवेश नहीं है? क्यों, अथवा क्यों नहीं?

Answer:

(a) गॉस के नियम से, \( \phi = \frac{q}{\varepsilon_0} \)
आवेश \( q = \phi \times \varepsilon_0 \)
यहाँ \( \phi = 8.0 \times 10^3\text{ N m}^2/\text{C} \)
\( \varepsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12}\text{ C}^2\text{N}^{-1}\text{m}^{-2} \)
\( q = 8.0 \times 10^3 \times 8.854 \times 10^{-12} \)
\( q = 7.08 \times 10^{-8}\text{ C} = 0.07\ \mu\text{C} \)

(b) नहीं, यदि नेट फ्लक्स शून्य है तो इसका यह अर्थ नहीं है कि बॉक्स के भीतर कोई आवेश नहीं है। इसका अर्थ केवल यह है कि बॉक्स के भीतर कुल (net) आवेश शून्य है (अर्थात जितने परिमाण का धन आवेश है, उतने ही परिमाण का ऋण आवेश अंदर उपस्थित है जो एक-दूसरे के प्रभाव को निरस्त कर रहे हैं)।

मुख्य बिंदु:

• गॉस का नियम कुल आवेश और कुल फ्लक्स को आपस में जोड़ता है।
• शून्य नेट फ्लक्स का मतलब शून्य कुल आवेश होता है, आवेशों की अनुपस्थिति नहीं।
• \( \varepsilon_0 \) का मानक मान याद होना चाहिए।

आम गलतियाँ:

• भाग (b) में शून्य फ्लक्स देखकर यह मान लेना कि अंदर कोई आवेश ही नहीं है।
• गुणा करते समय घातों में गलती करना।

Exam Tips:

a) गॉस के नियम का सूत्र स्पष्ट रूप से लिखें।
b) भाग (b) के वैचारिक प्रश्न का उत्तर बहुत सावधानी से 'कुल आवेश शून्य' के संदर्भ में दें।
c) मात्रक सही लिखें।

 

Question 1.18: चित्र 1.34 में दर्शाए अनुसार \( 10\text{ cm} \) भुजा के किसी वर्ग के केंद्र से ठीक \( 5\text{ cm} \) ऊँचाई पर कोई \( +10\ \mu\text{C} \) आवेश रखा है। इस वर्ग से गुजरने वाले विधुत फ्लक्स का परिमाण क्या है? (संकेत: वर्ग को \( 10\text{ cm} \) किनारे के किसी घन का एक फलक मानिए।)

Answer:

यदि वर्ग को \( 10\text{ cm} \) भुजा वाले किसी घन का एक फलक मान लिया जाए, तो आवेश \( +10\ \mu\text{C} \) इस काल्पनिक घन के केंद्र पर स्थित होगा।
गॉस के नियम के अनुसार, एक बंद घन के सभी छह फलकों से गुजरने वाला कुल वैधुत फ्लक्स:
\( \phi_{\text{total}} = \frac{q}{\varepsilon_0} \)<चूँकि घन के 6 समान फलक होते हैं, इसलिए एक फलक (दिए गए वर्ग) से गुजरने वाला फ्लक्स:
\( \phi = \frac{\phi_{\text{total}}}{6} = \frac{q}{6\varepsilon_0} \)
मान रखने पर:
\( q = 10\ \mu\text{C} = 10 \times 10^{-6}\text{ C} \)
\( \varepsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12}\text{ C}^2\text{N}^{-1}\text{m}^{-2} \)
\( \phi = \frac{10 \times 10^{-6}}{6 \times 8.854 \times 10^{-12}} \)
\( \phi = \frac{10^{-5}}{5.3124 \times 10^{-11}} \approx 1.88 \times 10^5\text{ N m}^2/\text{C} \)

मुख्य बिंदु:

• सममितीय निकाय बनाने के लिए असतत ज्यामिति को बंद पृष्ठ (घन) में बदला जाता है (समरूपता प्रमेय)।
• घन के 6 फलकों में फ्लक्स समान रूप से वितरित होता है।
• गॉस का नियम केवल बंद पृष्ठों पर लागू होता है।

आम गलतियाँ:

• 6 से भाग देना भूल जाना और पूरे घन का फ्लक्स निकाल कर छोड़ देना।
• दूरी (\( 5\text{ cm} \)) को फ्लक्स के सूत्र में प्रयोग करने की कोशिश करना (जबकि फ्लक्स दूरी पर निर्भर नहीं करता)।

Exam Tips:

a) संकेत का पालन करते हुए काल्पनिक घन की रचना का उल्लेख करें।
b) सूत्र \( \phi = \frac{q}{6\varepsilon_0} \) को स्पष्ट रूप से दिखाएं।
c) गणना को अंत तक हल करें।

 

Question 1.19: \( 2.0\ \mu\text{C} \) का कोई बिंदु आवेश किसी किनारे पर \( 9.0\text{ cm} \) किनारे वाले किसी घनीय गाऊसीय पृष्ठ के केंद्र पर स्थित है। पृष्ठ से गुजरने वाले नेट फ्लक्स क्या है?

Answer:

गॉस के नियम के अनुसार, किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल वैधुत फ्लक्स केवल पृष्ठ के अंदर उपस्थित कुल आवेश पर निर्भर करता है, पृष्ठ के आकार या आवेश की स्थिति (चाहे वह केंद्र पर हो या किनारे पर) पर नहीं।
अतः फ्लक्स \( \phi_{\text{net}} = \frac{q}{\varepsilon_0} \)
दिया गया आवेश \( q = 2.0\ \mu\text{C} = 2.0 \times 10^{-6}\text{ C} \)
\( \varepsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12}\text{ C}^2\text{N}^{-1}\text{m}^{-2} \)
\( \phi_{\text{net}} = \frac{2.0 \times 10^{-6}}{8.854 \times 10^{-12}} \)
\( \phi_{\text{net}} = 2.26 \times 10^5\text{ N m}^2/\text{C} \)

मुख्य बिंदु:

• गॉस का नियम पृष्ठ के आकार और आवेश की स्थिति से स्वतंत्र होता है।
• नेट फ्लक्स का मान केवल \( q/\varepsilon_0 \) से तय होता है।
• भुजा की लंबाई (\( 9.0\text{ cm} \)) इस गणना में अप्रাসंगिक है।

आम गलतियाँ:

• किनारे पर आवेश होने के कारण फ्लक्स को आधा या किसी अन्य भिन्न से गुणा करना (जबकि पूरे बंद गाऊसीय पृष्ठ के लिए कुल फ्लक्स वही रहता है)।
• भुजा की लंबाई को सूत्र में प्रयोग करने की कोशिश करना।

Exam Tips:

a) गॉस के नियम के मूल कथन को अपने उत्तर में शामिल करें।
b) यह स्पष्ट करें कि आकार और स्थिति का फ्लक्स पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
c) सही मात्रक के साथ उत्तर समाप्त करें।

 

Question 1.20: किसी बिंदु आवेश के कारण उस बिंदु को केंद्र मानकर खींचे गए \( 10\text{ cm} \) त्रिज्या के गोलीय गाऊसीय पृष्ठ पर वैधुत फ्लक्स \(-1.0 \times 10^3\text{ N m}^2/\text{C}\) है।
(a) यदि गाऊसीय पृष्ठ की त्रिज्या दुगुनी कर दी जाए तो पृष्ठ से कितना फ्लक्स गुजरेगा?
(b) बिंदु आवेश का मान क्या है?

Answer:

(a) यदि गाऊसीय पृष्ठ की त्रिज्या दुगुनी कर दी जाए, तो भी पृष्ठ से गुजरने वाला कुल फ्लक्स अपरिवर्तित रहेगा क्योंकि कुल फ्लक्स केवल अंदर स्थित आवेश पर निर्भर करता है, त्रिज्या पर नहीं। अतः फ्लक्स \( -1.0 \times 10^3\text{ N m}^2/\text{C} \) ही रहेगा।

(b) गॉस के नियम से आवेश \( q = \phi \times \varepsilon_0 \)
यहाँ \( \phi = -1.0 \times 10^3\text{ N m}^2/\text{C} \)
\( \varepsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12}\text{ C}^2\text{N}^{-1}\text{m}^{-2} \)
\( q = -1.0 \times 10^3 \times 8.854 \times 10^{-12} \)
\( q = -8.854 \times 10^{-9}\text{ C} = -8.854\text{ nC} \)

मुख्य बिंदु:

• वैधुत फ्लक्स गाऊसीय पृष्ठ की त्रिज्या या आकार पर निर्भर नहीं करता।
• आवेश निकालने के लिए \( q = \phi\varepsilon_0 \) का प्रयोग किया जाता है。
• ऋणात्मक फ्लक्स इंगित करता है कि आवेश ऋणात्मक है।

आम गलतियाँ:

• त्रिज्या दोगुनी करने पर फ्लक्स को भी बदलना (सोचना कि क्षेत्रफल बढ़ने से फ्लक्स बदलेगा)।
• ऋण चिह्न को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) भाग (a) का उत्तर वैचारिक स्पष्टता के साथ एक लाइन में दें।
b) भाग (b) में गणना सावधानी से करें।
c) नैनोकूलॉम (\( \text{nC} \)) में उत्तर देना अधिक उपयुक्त है।

 

Question 1.21: \( 10\text{ cm} \) त्रिज्या के चालक गोले पर अज्ञात परिणाम का आवेश है। यदि गोले के केंद्र से \( 20\text{ cm} \) दूरी पर वैधुत क्षेत्र \( 1.5 \times 10^3\text{ N/C} \) त्रिज्यातः अंतर्मुखी (radially inward) है तो गोले पर नेट आवेश कितना है?

Answer:

गोले के बाहर किसी बिंदु के लिए संपूर्ण आवेश को केंद्र पर केंद्रित माना जा सकता है।
वैधुत क्षेत्र का सूत्र: \( E = \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{d^2} \)
जहाँ \( E = 1.5 \times 10^3\text{ N/C} \)
दूरी \( d = 20\text{ cm} = 0.2\text{ m} \)
\( \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} = 9 \times 10^9\text{ N m}^2/\text{C}^2 \)
आवेश \( q \) के लिए हल करने पर:
\( q = E \times d^2 \times (4\pi\varepsilon_0) \)
\( q = \frac{1.5 \times 10^3 \times (0.2)^2}{9 \times 10^9} \)
\( q = \frac{1.5 \times 10^3 \times 0.04}{9 \times 10^9} \)
\( q = \frac{0.06 \times 10^3}{9 \times 10^9} = \frac{60}{9 \times 10^9} \times 10^{-3} \dots \)
ठीक से गणना करने पर:
\( q = 6.67 \times 10^{-9}\text{ C} = 6.67\text{ nC} \)
चूँकि क्षेत्र अंतर्मुखी (inward) है, इसलिए आवेश ऋणात्मक होगा: \( -6.67\text{ nC} \) (या यदि केवल परिमाण पूछा है तो \( 6.67\text{ nC} \))।

मुख्य बिंदु:

• गोलीय चालक के बाहर वैधुत क्षेत्र ऐसा होता है जैसे सारा आवेश केंद्र पर केंद्रित हो।
• अंतर्मुखी वैधुत क्षेत्र ऋणात्मक आवेश को प्रदर्शित करता है।
• दूरी \( d \) केंद्र से ली जाती है, न कि गोले की सतह से।

आम गलतियाँ:

• दूरी में से गोले की त्रिज्या घटा देना (जबकि केंद्र से कुल दूरी \( 20\text{ cm} \) दी गई है)।
• अंतर्मुखी शब्द के महत्व को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) सूत्र लिखकर मानों को व्यवस्थित रूप से रखें।
b) दूरी का वर्ग करना न भूलें।
c) क्षेत्र की दिशा (अंतर्मुखी) से आवेश की प्रकृति स्पष्ट करें।

 

Question 1.22: \( 2.4\text{ m} \) व्यास के किसी समान आवेशित चालक गोले का पृष्ठीय आवेश घनत्व \( 80.0\ \mu\text{C}/\text{m}^2 \) है।
(a) गोले पर आवेश ज्ञात कीजिए।
(b) गोले के पृष्ठ से निर्गत कुल वैधुत फ्लक्स क्या है?

Answer:

(a) व्यास \( d = 2.4\text{ m} \), अतः त्रिज्या \( r = \frac{2.4}{2} = 1.2\text{ m} \)
पृष्ठीय आवेश घनत्व \( \sigma = 80.0\ \mu\text{C}/\text{m}^2 = 80 \times 10^{-6}\text{ C/m}^2 \)
गोले का कुल आवेश \( Q = \sigma \times \text{שטח} (\text{Surface Area}) = \sigma \times 4\pi r^2 \)
\( Q = 80 \times 10^{-6} \times 4 \times 3.14 \times (1.2)^2 \)
\( Q = 80 \times 10^{-6} \times 12.56 \times 1.44 \)
\( Q \approx 1.447 \times 10^{-3}\text{ C} \)

(b) गॉस के नियम से कुल वैधुत फ्लक्स \( \phi_{\text{total}} = \frac{Q}{\varepsilon_0} \)
\( \phi_{\text{total}} = \frac{1.447 \times 10^{-3}}{8.854 \times 10^{-12}} \)
\( \phi_{\text{total}} \approx 1.63 \times 10^8\text{ N m}^2/\text{C} \)

मुख्य बिंदु:

• पृष्ठीय आवेश घनत्व \( \sigma = Q/A \) होता है, जिससे \( Q = \sigma A \).
• गोले का पृष्ठीय क्षेत्रफल \( 4\pi r^2 \) होता है।
• कुल फ्लक्स केवल कुल आवेश और \( \varepsilon_0 \) पर निर्भर करता है।

आम गलतियाँ:

• व्यास को ही त्रिज्या मान लेना।
• क्षेत्रफल के सूत्र में \( 4\pi r^2 \) की जगह \( \pi r^2 \) लिख देना।

Exam Tips:

a) त्रिज्या को व्यास से आधे के रूप में स्पष्ट निकालें।
b) गॉस के नियम का उपयोग करके फ्लक्स आसानी से निकालें।
c) मात्रक सही लिखें।

 

Question 1.23: कोई अनंत रैखिक आवेश \( 2\text{ cm} \) दूरी पर \( 9 \times 10^4\text{ N/C} \) वैधुत क्षेत्र उत्पन्न करता है। रैखिक आवेश घनत्व ज्ञात कीजिए।

Answer:

दिया गया है:
दूरी \( r = 2\text{ cm} = 0.02\text{ m} \)
वैधुत क्षेत्र \( E = 9 \times 10^4\text{ N/C} \)
अनंत रैखिक आवेश के कारण वैधुत क्षेत्र का सूत्र:
\( E = \frac{\lambda}{2\pi\varepsilon_0 r} = \frac{1}{2\pi\varepsilon_0} \frac{\lambda}{r} \)
चूँकि \( \frac{1}{4\pi\varepsilon_0} = 9 \times 10^9 \), इसलिए \( \frac{1}{2\pi\varepsilon_0} = 2 \times 9 \times 10^9 = 1.8 \times 10^{10} \)
रैखिक आवेश घनत्व \( \lambda \) के लिए सूत्र:
\( \lambda = E \times 2\pi\varepsilon_0 \times r \)
मान रखने पर:
\( \lambda = \frac{9 \times 10^4 \times 0.02}{2 \times 9 \times 10^9} \) (चूँकि \( \frac{1}{2\pi\varepsilon_0} = 2 \times 9 \times 10^9 \), अतः व्युत्क्रम में भाग जाएगा)
सरल रूप में:
\( E = \frac{2\lambda}{4\pi\varepsilon_0 r} \)
\( 9 \times 10^4 = \frac{2 \times (9 \times 10^9) \times \lambda}{0.02} \)
\( \lambda = \frac{9 \times 10^4 \times 0.02}{1.8 \times 10^{10}} \)
\( \lambda = \frac{1800 \times 10^4}{1.8 \times 10^{10}} = 10 \times 10^{-6}\text{ C/m} = 10\ \mu\text{C/m} \)

मुख्य बिंदु:

• अनंत रैखिक आवेश के लिए वैधुत क्षेत्र दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होता है (\( E \propto 1/r \)).
• रैखिक आवेश घनत्व \( \lambda \) का मात्रक कुल आवेश प्रति एकांक लंबाई (\( \text{C/m} \)) होता है।
• गणना में \( 2\pi\varepsilon_0 \) या \( 4\pi\varepsilon_0 \) का उचित प्रयोग करें।

आम गलतियाँ:

• \( 4\pi\varepsilon_0 \) के मान को सीधे \( 2\pi\varepsilon_0 \) की जगह रख देना बिना 2 से गुणा किए।
• दूरी को सेंटीमीटर में ही रखना।

Exam Tips:

a) सूत्र \( E = \frac{\lambda}{2\pi\varepsilon_0 r} \) से शुरुआत करें।
b) \( \lambda \) को एक तरफ रखकर बाकी पदों को पक्षांतर करें।
c) उत्तर \( \mu\text{C/m} \) में दें।

 

Question 1.24: दो बड़ी, पतली धातु की प्लेटें एक-दूसरे के समांतर एवं निकट हैं। इनके भीतरी फलकों पर, प्लेटों के पृष्ठीय आवेश घनत्वों के चिह्न विपरीत हैं तथा इनका परिमाण \( 17.0 \times 10^{-22}\text{ C/m}^2 \) है।
(a) पहली प्लेट के बाह्य क्षेत्र में, (b) दूसरी प्लेट के बाह्य क्षेत्र में, तथा (c) प्लेटों के बीच में वैधुत क्षेत्र E का परिमाण परिकलित कीजिए।

Answer:

दिया गया है:
पृष्ठीय आवेश घनत्व \( \sigma = 17.0 \times 10^{-22}\text{ C/m}^2 \)
प्लेटों के बीच विपरीत आवेश होने के कारण:
(a) पहली प्लेट के बाह्य क्षेत्र (क्षेत्र I) में वैधुत क्षेत्र शून्य होता है क्योंकि दोनों प्लेटों के कारण क्षेत्र विपरीत दिशा में होते हैं और एक-दूसरे को निरस्त करते हैं:
\( E_{\text{outer 1}} = 0 \)

(b) दूसरी प्लेट के बाह्य क्षेत्र (क्षेत्र III) में भी वैधुत क्षेत्र शून्य होता है:
\( E_{\text{outer 3}} = 0 \)

(c) दोनों प्लेटों के बीच के क्षेत्र (क्षेत्र II) में वैधुत क्षेत्र जुड़ जाते हैं और इसका मान होता है:
\( E = \frac{\sigma}{\varepsilon_0} \)
मान रखने पर:
\( \varepsilon_0 = 8.854 \times 10^{-12}\text{ C}^2\text{N}^{-1}\text{m}^{-2} \)
\( E = \frac{17.0 \times 10^{-22}}{8.854 \times 10^{-12}} \) (ध्यान दें: यहाँ वास्तविक NCERT पाठ्यपुस्तक के अनुसार स्थिरांक मानों का समायोजन किया जाता है, सामान्यतः संख्यात्मक मान \( 1.92 \times 10^{-10}\text{ N/C} \) प्राप्त होता है)
\( E = 1.92 \times 10^{-10}\text{ N/C} \)

मुख्य बिंदु:

• समांतर प्लेटों के बाहर वैधुत क्षेत्र शून्य होता है यदि उनके आवेश परिमाण में समान और विपरीत हों।
• प्लेटों के बीच वैधुत क्षेत्र \( E = \sigma/\varepsilon_0 \) होता है।
• यह गॉस के नियम के अनुप्रयोग (संधारित्र की प्लेटों के बीच क्षेत्र) पर आधारित है।

आम गलतियाँ:

• बाहर के क्षेत्रों में भी वैधुत क्षेत्र का मान निकाल देना (जबकि वहाँ शून्य होता है)।
• बीच के क्षेत्र में \( \sigma/2\varepsilon_0 \) लिख देना (जो कि एक अकेली प्लेट के लिए होता है, दो विपरीत प्लेटों के लिए \( \sigma/\varepsilon_0 \) होता है)।

Exam Tips:

a) क्षेत्रों (बाहर और अंदर) को स्पष्ट रूप से विभाजित करके समझाएं।
b) सूत्र \( E = \sigma/\varepsilon_0 \) का स्पष्ट उल्लेख करें।
c) बाह्य क्षेत्रों में क्षेत्र शून्य होने का कारण विपरीत दिशाओं में तीव्रता का समान होना बताएं।

 

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