NCERT Solutions Class 12 Chemistry Chapter 01 Solutions (विलयन) Exercise Questions in Hindi

Official NCERT Solutions for Class 12 Chemistry: Chapter 01 विलयन

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Chapter-wise Solutions for Chemistry: Chapter 01 विलयन

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Question 1.1: विलयन को परिभाषित कीजिए। कितने प्रकार के विभिन्न विलयन संभव हैं? प्रत्येक प्रकार के विलयन के संबंध में एक उदाहरण देकर संक्षेप में लिखिए।

Answer:

दो या दो से अधिक अक्रियाशील पदार्थों का सजातीय मिश्रण जिसका संघटन कुछ निश्चित सीमाओं के भीतर बदलता रहता है, विलयन के रूप में जाना जाता है।
आम तौर पर, सबसे अधिक मात्रा में मौजूद घटक को विलायक के रूप में जाना जाता है। विलायक उस भौतिक अवस्था को निर्धारित करता है जिसमें विलयन मौजूद है। विलायक के अलावा विलयन में मौजूद एक या अधिक घटक विलेय कहलाते हैं।
घटकों की भौतिक स्थिति के आधार पर, विलयन नौ प्रकार के होते हैं:
1. जब विलेय और विलायक दोनों ठोस अवस्था में हों। उदाहरण: मिश्र धातु।
2. जब विलेय ठोस अवस्था में हो और विलायक द्रव अवस्था में हो। उदाहरण: चीनी या नमक का घोल।
3. जब विलेय ठोस में हो और विलायक गैसीय अवस्था में हो। उदाहरण: हवा में आयोडीन वाष्प।
4. जब विलेय और विलायक दोनों द्रव अवस्था में हों। उदाहरण: पानी में शराब।
5. जब विलेय द्रव में हो और विलायक ठोस अवस्था में हो। उदाहरण: जिंक अमलगम।
6. जब विलेय द्रव में हो और विलायक गैसीय अवस्था में हो। उदाहरण: वायु में जलवाष्प।
7. जब विलेय और विलायक दोनों गैसीय अवस्था में हों। उदाहरण: वायु।
8. जब विलेय गैसीय अवस्था में हो और विलायक द्रव अवस्था में हो। उदाहरण: वातित पेय।
9. जब विलेय गैसीय अवस्था में हो और विलायक ठोस अवस्था में हो। उदाहरण: खनिज में गैस घोले।

मुख्य बिंदु:

• विलयन एक समांगी मिश्रण है।
• विलायक विलयन की भौतिक अवस्था तय करता है।
• विलेय और विलायक की अवस्था के आधार पर 9 प्रकार के विलयन संभव हैं।

आम गलतियाँ:

• विलेय और विलायक की परिभाषा में भ्रम होना।
• सभी 9 प्रकारों को सही भौतिक अवस्था के साथ न लिखना।
• उदाहरणों को गलत अवस्था में लिख देना।

Exam Tips:

a) विलयन की परिभाषा लिखते समय 'समांगी मिश्रण' शब्द का प्रयोग अवश्य करें।
b) वर्गीकरण को स्पष्ट रूप से तालिका या बिंदुओं में दर्शाएं।
c) प्रत्येक प्रकार का एक सटीक और परिचित उदाहरण याद रखें।

 

Question 1.2: एक ऐसे ठोस विलयन का उदाहरण दीजिए जिसमें विलेय कोई गैस हो।

Answer:

खनिज में घुली हुई गैसें।

मुख्य बिंदु:

• ठोस विलयन में विलायक ठोस होता है।
• विलेय यहाँ गैसीय अवस्था में होता है।
• खनिज में घुली गैसें इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं।

आम गलतियाँ:

• द्रव या गैस विलयन का उदाहरण लिख देना।
• विलेय और विलायक की अवस्थाओं में उलझन होना।

Exam Tips:

a) उत्तर बहुत संक्षिप्त और सटीक रखें।
b) पैलेडियम में हाइड्रोजन के अधिशोष को भी वैकल्पिक उदाहरण के रूप में याद रख सकते हैं।

 

Question 1.3: निम्नलिखित पदों को परिभाषित कीजिए:
(i) मोल-अंश
(ii) मोललता
(iii) मोलरता
(iv) द्रव्यमान प्रतिशत

Answer:

(i) मोल-अंश: मोल-अंश के लिए आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला चिह्न \( x \) है और \( x \) के दाईं ओर इस्तेमाल होने वाले अक्षर घटक को दर्शाता है। इसे इस प्रकार परिभाषित किया गया है:
\( \text{घटक का मोल-अंश} = \frac{\text{घटक के मोलों की संख्या}}{\text{सभी घटकों के मोलों की संख्या}} \)
(ii) मोललता: मोललता (\( m \)) को विलायक के प्रति किलोग्राम में विलेय के मोल की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है और इसे इस प्रकार व्यक्त किया जाता है:
\( \text{मोललता } (m) = \frac{\text{विलेय के मोल}}{\text{विलायक का द्रव्यमान किग्रा में}} \)
(iii) मोलरता: मोलरता (\( M \)) को एक लीटर (या एक डेसीमीटर) विलयन में घुले विलेय के मोल की संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है:
\( \text{मोलरता } (M) = \frac{\text{विलेय के मोल}}{\text{घोल का आयतन लीटर में}} \)
(iv) द्रव्यमान प्रतिशत: किसी विलयन के घटक के द्रव्यमान प्रतिशत को इस प्रकार परिभाषित किया जाता है:
\( \text{घटक का द्रव्यमान } \% = \frac{\text{विलयन में घटक का द्रव्यमान}}{\text{विलयन का कुल द्रव्यमान}} \times 100 \)

मुख्य बिंदु:

• सांद्रता व्यक्त करने की ये प्रमुख इकाइयाँ हैं।
• मोललता तापमान पर निर्भर नहीं करती क्योंकि इसमें द्रव्यमान का उपयोग होता है।
• मोलरता तापमान पर निर्भर करती है क्योंकि इसमें आयतन का उपयोग होता है।

आम गलतियाँ:

• मोलरता में 'विलयन का आयतन' और मोललता में 'विलायक का द्रव्यमान' में गलती करना।
• मात्रक (Units) लिखना भूल जाना।

Exam Tips:

a) सभी परिभाषाओं के साथ उनके गणितीय सूत्र अवश्य लिखें।
b) इकाइयों का विशेष ध्यान रखें (जैसे मोल/लीटर, मोल/किग्रा)।

 

Question 1.4: प्रयोगशाला के कार्य के लिए प्रयोग में लाया जाने वाला सांद्र नाइट्रिक अम्ल द्रव्यमान की दृष्टि से नाइट्रिक अम्ल का \( 68\% \) जलीय विलयन है। यदि इस विलयन का घनत्व \( 1.504\text{ g mL}^{-1} \) हो तो अम्ल के इस नमूने की मोलरता क्या होगी?

Answer:

\( 100\text{ g} \) नाइट्रिक एसिड (\( \text{HNO}_3 \)) घोल में, नाइट्रिक अम्ल का द्रव्यमान (\( \text{HNO}_3 \)) \( = 68\text{ g} \)
\( \text{HNO}_3 \) का मोलर द्रव्यमान \( = 63\text{ g/mol} \)
\( \text{HNO}_3 \) के \( 68 \) ग्राम में मोल \( = 68/63 = 1.079 \) मोल
विलयन का घनत्व \( = 1.504\text{ g mL}^{-1} \)
अतः, विलयन का आयतन \( = \frac{\text{घोल का द्रव्यमान}}{\text{घोल का घनत्व}} = \frac{100}{1.504}\text{ mL} = 0.0665\text{ L} \)
विलयन की मोलरता \( = \frac{\text{विलेय के मोल}}{\text{विलयन का आयतन लीटर में}} = \frac{1.079}{0.0665}\text{ M} = 16.23\text{ M} \)

मुख्य बिंदु:

• \( 68\% \) का अर्थ है \( 100\text{ g} \) विलयन में \( 68\text{ g} \) विलेय।
• द्रव्यमान को घनत्व की सहायता से आयतन में बदला गया है।
• मोलरता का मानक मात्रक \( \text{mol L}^{-1} \) या \( \text{M} \) है।

आम गलतियाँ:

• आयतन को लीटर में बदलना भूल जाना।
• मोलर द्रव्यमान की गणना में गलती करना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक पद को स्पष्ट रूप से लिखकर हल करें।
b) गणना के अंत में सही मात्रक लगाना न भूलें।

 

Question 1.5: ग्लूकोस का एक जलीय विलयन \( 10\% \) (w/w) है। विलयन की मोललता तथा विलयन में प्रत्येक घटक का मोल-अंश क्या है? यदि विलयन का घनत्व \( 1.2\text{ g mL}^{-1} \) हो तो विलयन की मोलरता क्या होगी?

Answer:

\( 10\% \) w/w का अर्थ है कि \( 100\text{ ग्राम घोल में } 10\text{ ग्राम ग्लूकोस मौजूद है।} \)
पानी का द्रव्यमान \( = 100 - 10 = 90\text{ ग्राम} = 0.090\text{ किग्रा} \)
\( 10\text{ ग्राम ग्लूकोस} = 10/180\text{ मोल} = 0.0555\text{ मोल} \)
\( \text{H}_2\text{O} \) के \( 90 \) ग्राम में मोलों की संख्या \( = 90/18\text{ मोल} = 5\text{ मोल} \)
विलयन की मोललता \( = 0.0555/0.090\text{ m} = 0.617\text{ m} \)
ग्लूकोस का मोल अंश \( = 0.0555/(5 + 0.0555) = 0.01 \)
\( \text{H}_2\text{O} \) का मोल अंश \( = 1 - 0.01 = 0.99 \)
\( 100 \) ग्राम घोल का आयतन \( = \frac{100}{1.2}\text{ mL} = 83.33\text{ mL} = 0.08333\text{ L} \)
मोलरता \( = \frac{0.0555\text{ मोल}}{0.08333\text{ L}} = 0.67\text{ M} \)

मुख्य बिंदु:

• \( 10\% \) w/w से विलेय और विलायक के द्रव्यमान निकाले जाते हैं।
• मोललता निकालने के लिए विलायक के किग्रा द्रव्यमान से भाग देते हैं।
• मोलरता के लिए विलयन के आयतन का उपयोग होता है।

आम गलतियाँ:

• कुल द्रव्यमान में से विलेय का द्रव्यमान घटाकर विलायक का द्रव्यमान न निकालना।
• मोल-अंश का कुल योग \( 1 \) न होना।

Exam Tips:

a) सभी चरणों को क्रमानुसार हल करें।
b) दशमलव के दो-तीन स्थानों तक मान सही निकालें।

 

Question 1.6: यदि \( 1\text{ g} \) मिश्रण में \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \) एवं \( \text{NaHCO}_3 \) के मोलों की संख्या समान हो तो इस मिश्रण से पूर्णतः क्रिया करने के लिए \( 0.1\text{ M HCl} \) के कितने \( \text{mL} \) की आवश्यकता होगी?

Answer:

चरण 1: मिश्रण में घटकों के मोलों की संख्या की गणना के लिए:
मान लीजिए मिश्रण में मौजूद \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \) का द्रव्यमान \( = x\text{ g} \)
मिश्रण में उपस्थित \( \text{NaHCO}_3 \) का द्रव्यमान \( = (1 - x)\text{ g} \)
\( \text{Na}_2\text{CO}_3 \) का मोलर द्रव्यमान \( = 2 \times 23 + 12 + 3 \times 16 = 106\text{ g mol}^{-1} \)
\( \text{NaHCO}_3 \) का मोलर द्रव्यमान \( = 23 + 1 + 12 + 3 \times 16 = 84\text{ g mol}^{-1} \)
\( x\text{ g} \) में \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \) के मोलों की संख्या \( = \frac{x}{106} \)
\( (1 - x)\text{ g} \) में \( \text{NaHCO}_3 \) के मोलों की संख्या \( = \frac{1 - x}{84} \)
चूँकि मिश्रण में दोनों की समतुल्य मात्रा है, इसलिए:
\( \frac{x}{106} = \frac{1 - x}{84} \)
\( 106 - 106x = 84x \)
\( x = \frac{106}{106 + 84} = \frac{106}{190} = 0.558\text{ g} \)
अब, \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \) के मोलों की संख्या \( = \frac{0.558}{106} = 0.00526 \)
\( \text{NaHCO}_3 \) के मोलों की संख्या \( = \frac{1 - 0.558}{84} = \frac{0.442}{84} = 0.00526 \)
चरण 2: आवश्यक \( \text{HCl} \) के मोलों की संख्या की गणना करने के लिए:
\( \text{Na}_2\text{CO}_3 + 2\text{HCl} \to 2\text{NaCl} + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2 \)
\( \text{NaHCO}_3 + \text{HCl} \to \text{NaCl} + \text{H}_2\text{O} + \text{CO}_2 \)
\( \text{Na}_2\text{CO}_3 \) के \( 1 \) मोल के लिए आवश्यक \( \text{HCl} = 2 \) मोल
इसलिए, \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \) के \( 0.00526 \) मोल के लिए आवश्यक \( \text{HCl} = 0.00526 \times 2 = 0.01052 \) मोल
अब दूसरी समीकरण से, \( \text{NaHCO}_3 \) के \( 1 \) मोल के लिए आवश्यक \( \text{HCl} = 1 \) मोल
इसलिए, \( \text{NaHCO}_3 \) के \( 0.00526 \) मोल के लिए आवश्यक \( \text{HCl} = 0.00526 \) मोल
कुल आवश्यक \( \text{HCl} = 0.01052 + 0.00526 = 0.01578 \) मोल
चरण 3: \( 0.1\text{ M HCl} \) की मात्रा की गणना करने के लिए:
\( 0.1\text{ M HCl} \) में \( 0.1 \) मोल \( 1000 \) मिलीलीटर में मौजूद है, इसलिए:
मिश्रण से पूर्णतः क्रिया करने के लिए \( 0.1\text{ M HCl} \) की आवश्यकता \( = \frac{1000}{0.1} \times 0.01578 = 157.8\text{ mL} \)

मुख्य बिंदु:

• दोनों घटकों के मोल बराबर दिए गए हैं।
• रासायनिक समीकरणों के स्टोइकोमेट्री (Stoichiometry) का उपयोग करके \( \text{HCl} \) की मात्रा निकाली जाती है।
• मोलरता के सूत्र का उपयोग करके अंतिम आयतन ज्ञात किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• रासायनिक समीकरणों को संतुलित न करना।
• \( \text{Na}_2\text{CO}_3 \) के साथ \( 2 \) मोल \( \text{HCl} \) की जगह \( 1 \) मोल ले लेना।

Exam Tips:

a) प्रश्न को चरणों में विभाजित करके हल करें।
b) रासायनिक समीकरणों को स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 1.7: द्रव्यमान की दृष्टि से \( 25\% \) विलयन के \( 300\text{ g} \) एवं \( 40\% \) के \( 400\text{ g} \) को आपस में मिलाने पर प्राप्त मिश्रण का द्रव्यमान प्रतिशत सांद्रण निकालिए।

Answer:

मिश्रण में मौजूद विलेय की कुल मात्रा \( = 300 \times \frac{25}{100} + 400 \times \frac{40}{100} = 75 + 160 = 235\text{ g} \)
विलयन की कुल मात्रा \( = 300 + 400 = 700\text{ g} \)
अतः, परिणामी विलयन में विलेय का द्रव्यमान प्रतिशत \( = \frac{235}{700} \times 100\% = 33.57\% \)
और, परिणामी विलयन में विलायक का द्रव्यमान प्रतिशत \( = (100 - 33.57)\% = 66.43\% \)

मुख्य बिंदु:

• दोनों विलयनों में विलेय की कुल मात्रा जोड़ी जाती है।
• विलयनों का कुल द्रव्यमान दोनों के द्रव्यमान का योग होता है।
• प्रतिशत निकालने के लिए कुल विलेय को कुल विलयन से विभाजित करते हैं।

आम गलतियाँ:

• विलेय की मात्रा जोड़ने के बजाय प्रतिशत को सीधे जोड़ देना।
• कुल विलयन का द्रव्यमान गलत निकालना।

Exam Tips:

a) सूत्र स्पष्ट रूप से लिखें: \( \text{कुल विलेय} / \text{कुल विलयन} \times 100 \)。
b) गणना की सावधानीपूर्वक जाँच करें।

 

Question 1.8: \( 222.6\text{ g} \) एथिलीन ग्लाइकोल, \( \text{C}_2\text{H}_4(\text{OH})_2 \) तथा \( 200\text{ g} \) जल को मिलाकर प्रतिहिम मिश्रण बनाया गया। विलयन की मोललता की गणना कीजिए। यदि विलयन का घनत्व \( 1.072\text{ g mL}^{-1} \) हो तो विलयन की मोलरता निकालिए।

Answer:

विलेय \( \text{C}_2\text{H}_6\text{O}_2 \) का द्रव्यमान \( = 222.6\text{ g} \)
\( \text{C}_2\text{H}_6\text{O}_2 \) का मोलर द्रव्यमान \( = 62\text{ g mol}^{-1} \)
विलेय के मोलों की संख्या \( = \frac{222.6\text{ g}}{62\text{ g mol}^{-1}} = 3.59 \)
विलायक का द्रव्यमान \( = 200\text{ g} = 0.200\text{ kg} \)
विलयन की मोललता \( = \frac{3.59\text{ मोल}}{0.200\text{ kg}} = 17.95\text{ m} \)
घोल का कुल द्रव्यमान \( = 222.6 + 200 = 422.6\text{ g} \)
घोल का आयतन \( = \frac{\text{घोल का द्रव्यमान}}{\text{घोल का घनत्व}} = \frac{422.6\text{ g}}{1.072\text{ g mL}^{-1}} = 394.2\text{ mL} = 0.3942\text{ L} \)
विलयन की मोलरता \( = \frac{3.59\text{ मोल}}{0.3942\text{ L}} = 9.11\text{ M} \)

मुख्य बिंदु:

• मोललता निकालने के लिए विलायक का द्रव्यमान किलोग्राम में लेते हैं।
• मोलरता के लिए कुल द्रव्यमान को घनत्व से भाग देकर आयतन निकालते हैं।
• एथिलीन ग्लाइकोल एक प्रतिहिम (Antifreeze) है।

आम गलतियाँ:

• कुल द्रव्यमान को विलायक का द्रव्यमान समझ लेना।
• आयतन को लीटर में बदलना भूल जाना।

Exam Tips:

a) मोललता और मोलरता के अंतर को स्पष्ट रखें।
b) सभी गणनाओं के मात्रक सही लिखें।

 

Question 1.9: एक पेय जल का नमूना क्लोरोफॉर्म \( (\text{CHCl}_3) \) से, कैंसरजन्य समझे जाने की सीमा तक बहुत अधिक संदूषित है। इसमें संदूषण की सीमा \( 15\text{ ppm} \) (द्रव्यमान में) है -
(i) इसे द्रव्यमान प्रतिशत में व्यक्त कीजिए।
(ii) जल के नमूने में क्लोरोफॉर्म की मोललता ज्ञात कीजिए।

Answer:

(i) \( 15\text{ ppm} \) का अर्थ है घोल के एक मिलियन (\( 10^6 \)) में द्रव्यमान के रूप में \( 15 \) भाग। इसलिए,
द्रव्यमान का प्रतिशत \( = \frac{15}{10^6} \times 100 = 15 \times 10^{-4} \% \)
(ii) विलयन के \( 10^6 \) ग्राम में \( 15 \) ग्राम क्लोरोफॉर्म लेने पर, विलायक का द्रव्यमान \( = 10^6 \) ग्राम
[∵ \( 15 \) ग्राम की मात्रा \( 10^6 \) ग्राम की तुलना में उपेक्षित है]
\( \text{CHCl}_3 \) का मोलर द्रव्यमान \( = 12 + 1 + 3 \times 35.5 = 119.5\text{ g mol}^{-1} \)
इसलिए, मोललता \( = \frac{15}{119.5} \times \frac{1}{10^6} \times 100 = 1.25 \times 10^{-4}\text{ m} \)

मुख्य बिंदु:

• \( \text{ppm} \) (Parts Per Million) बहुत कम सांद्रता व्यक्त करने की इकाई है।
• तनु विलयनों में विलेय की मात्रा को विलायक के कुल द्रव्यमान में नगण्य मान सकते हैं।
• क्लोरोफॉर्म का मोलर द्रव्यमान \( 119.5\text{ g/mol} \) होता है।

आम गलतियाँ:

• \( \text{ppm} \) को प्रतिशत में बदलते समय \( 10^6 \) की जगह किसी अन्य मान से भाग देना।
• विलायक और विलयन के द्रव्यमान में भ्रम होना।

Exam Tips:

a) \( \text{ppm} \) का अर्थ होता है \( 10 \) लाख भागों में उपस्थित अंश।
b) वैज्ञानिक संकेतन (Scientific Notation) का सही उपयोग करें।

 

Question 1.10: ऐल्कोहॉल एवं जल के एक विलयन में आण्विक अन्योन्यक्रिया की क्या भूमिका है?

Answer:

ऐल्कोहॉल के अणुओं के साथ-साथ पानी के अणुओं में अलग-अलग अंतरा-परमाणुविक हाइड्रोजन बंधन होते हैं। मिश्रण करने पर, ऐल्कोहॉल और पानी के अणुओं के बीच अंतर-परमाणुविक हाइड्रोजन बंधन तुलनात्मक रूप से कमजोर होते हैं। इसलिए, वे आदर्श व्यवहार से धनात्मक विचलन दिखाते हैं। नतीजतन, विलयन में पानी और शराब की तुलना में उच्च वाष्प दबाव और कम क्वथनांक होगा।

मुख्य बिंदु:

• ऐल्कोहॉल और जल दोनों में मजबूत हाइड्रोजन आबंध होते हैं।
• मिश्रण पर नए आबंध कमजोर हो जाते हैं।
• यह राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन (Positive Deviation) प्रदर्शित करता है।

आम गलतियाँ:

• ऋणात्मक विचलन समझ बैठना।
• हाइड्रोजन आबंध की भूमिका को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) धनात्मक विचलन और कमजोर अंतर-आण्विक बलों के मुख्य कारण को समझाएं।
b) क्वथनांक और वाष्प दाब पर प्रभाव का उल्लेख अवश्य करें।

 

Question 1.11: ताप बढ़ाने पर गैसों की द्रवों में विलेयता में, हमेशा कमी आने की प्रवृत्ति क्यों होती है?

Answer:

तरल में गैस का घुलना एक ऊष्माक्षेपी प्रक्रिया है।
\( \text{गैस} + \text{विलायक} \rightleftharpoons \text{विलयन} + \text{ऊष्मा} \)
ले शतेलियर के सिद्धांत के अनुसार, जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, संतुलन पीछे की ओर खिसक जाता है।

मुख्य बिंदु:

• गैसों का द्रवों में घुलना हमेशा ऊष्माक्षेपी (Exothermic) होता है।
• ला शातेलिए के नियम का यहाँ सीधा अनुप्रयोग होता है।
• तापमान वृद्धि से साम्यावस्था पीछे की ओर विस्थापित होती है।

आम गलतियाँ:

• इसे ऊष्माशोषी प्रक्रिया मान लेना।
• ला शातेलिए के नियम का सही संदर्भ न देना।

Exam Tips:

a) समीकरण लिखकर दिखाएं कि ऊष्मा उत्पादों की तरफ है।
b) ला शातेलिए के सिद्धांत का नाम स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।

 

Question 1.12: हेन리의 नियम तथा इसके कुछ महत्वपूर्ण अनुप्रयोग लिखिए।

Answer:

हेनरी के नियम के अनुसार, एक विशेष तापमान पर, किसी तरल के दिए गए आयतन में गैस की घुलनशीलता तरल के ऊपर गैस के दबाव के सीधे आनुपातिक होती है।
\( m \propto p \)
\( m = kp \)
जहाँ \( k = \) हेनरी नियतांक।
यहाँ \( m \) और \( p \) क्रमशः घुली हुई गैस के द्रव्यमान और दाब को निरूपित करते हैं।
हेनरी के नियम के कुछ महत्वपूर्ण अनुप्रयोग:
1. शीतल पेय में \( \text{CO}_2 \) की घुलनशीलता बढ़ाने के लिए, बोतल को उच्च दबाव में सील कर दिया जाता है।
2. स्कूबा गोताखोरों को पानी के भीतर उच्च दाब पर हवा में सांस लेने के दौरान घुली हुई गैसों की उच्च सांद्रता की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जब गोताखोर सतह पर पहुंचते हैं, तो दबाव धीरे-धीरे कम हो जाता है। इससे घुली हुई गैसें निकलती हैं और रक्त में नाइट्रोजन के बुलबुले बनने लगते हैं। यह केशिकाओं को अवरुद्ध करता है और एक चिकित्सा स्थिति बनाता है जिसे मोड़ कहते हैं जो जीवन के लिए दर्दनाक और खतरनाक होते हैं। झुकने से बचने के लिए, स्कूबा गोताखोरों द्वारा उपयोग किए जाने वाले टैंकों को हीलियम (\( 11.7\% \) हीलियम, \( 56.2\% \) नाइट्रोजन और \( 32.1\% \) ऑक्सीजन) से पतला हवा से भर दिया जाता है।
3. उच्च ऊंचाई पर ऑक्सीजन का आंशिक दबाव समुद्र तल से कम होता है। इसके परिणामस्वरूप रक्त and ऊतकों में ऑक्सीजन की कम सांद्रता होती है। रक्त में ऑक्सीजन की कमी के कारण पर्वतारोही कमजोर हो जाते हैं और सोचने में असमर्थ हो जाते हैं। ऐसे लक्षणों को एनोक्सिया के रूप में जाना जाता है।

मुख्य बिंदु:

• नियम के अनुसार \( p = k_H x \) या \( m \propto p \)。
• गोताखोरों द्वारा हीलियम-ऑक्सीजन मिश्रण का उपयोग।
• उच्च ऊंचाइयों पर ऑक्सीजन की कमी (एनोक्सिया)।

आम गलतियाँ:

• आनुपातिकता को उल्टा लिख देना।
• अनुप्रयोगों को ठीक से न समझा पाना।

Exam Tips:

a) गणितीय व्यंजक के साथ नियम की परिभाषा दें।
b) कम से कम दो व्यावहारिक अनुप्रयोग जरूर लिखें।

 

Question 1.13: \( 6.56 \times 10^{-3}\text{ g} \) एथेन युक्त एक संतृप्त विलयन में एथेन का आंशिक दाब \( 1\text{ bar} \) है। यदि विलयन में \( 5.00 \times 10^{-2}\text{ g} \) एथेन हो तो गैस का आंशिक दाब क्या होगा?

Answer:

एथेन (\text{C}_2\text{H}_6) का मोलर द्रव्यमान \( = 2 \times 12 + 6 \times 1 = 30\text{ g mol}^{-1} \)
∴ एथेन के \( 6.56 \times 10^{-3} \) ग्राम में मौजूद मोलों की संख्या \( = \frac{6.56 \times 10^{-2}}{30} = 2.187 \times 10^{-3} \) मोल
माना विलायक के मोलों की संख्या \( x \) है। हेनरी के नियम के अनुसार, \( p = k_H x \)
\( \Rightarrow 1\text{ bar} = k_H \cdot \frac{2.187 \times 10^{-3}}{2.187 \times 10^{-3} + x} \)
\( \Rightarrow 1\text{ bar} = k_H \cdot \frac{2.187 \times 10^{-3}}{x} \) \([\because x \gg 2.187 \times 10^{-3}]
\) \Rightarrow K_H = \frac{x}{2.187 \times 10^{-3}}\text{ bar} \)
\( 5.00 \times 10^{-2}\text{ g} \) एथेन में उपस्थित मोलों की संख्या \( = \frac{5.00 \times 10^{-2}}{30} = 1.67 \times 10^{-3} \) मोल
हेनरी के नियम के अनुसार,
\( p = K_H x = \frac{1.67 \times 10^{-3}}{2.187 \times 10^{-3} + 1.67 \times 10^{-3}} \times \frac{x}{1.67 \times 10^{-3}} \)
\( = \frac{x}{2.187 \times 10^{-3}} \times \frac{1.67 \times 10^{-3}}{1.67 \times 10^{-3} + x} \) \([\because x \gg 1.67 \times 10^{-3}]
\) \Rightarrow = 0.764\text{ bar} \)
अतः, गैस का आंशिक दाब \( 0.764\text{ bar} \) होगा।

मुख्य बिंदु:

• हेनरी के नियम \( p = k_H x \) का उपयोग किया जाता है।
• मोल-अंश में विलेय के मोल विलायक की तुलना में नगण्य माने जाते हैं।
• दाब सीधे मोल (या मोल-अंश) के समानुपाती होता है।

आम गलतियाँ:

• मोलर द्रव्यमान की गणना में गलती करना।
• हेनरी स्थिरांक के मान को सही से प्रतिस्थापित न करना।

Exam Tips:

a) सीधे आनुपातिक संबंध \( p_1 / p_2 = x_1 / x_2 \) का उपयोग करके भी हल कर सकते हैं।
b) अंत में उपयुक्त मात्रक अवश्य लिखें।

 

Question 1.14: राउल्ट के नियम से धनात्मक एवं ऋणात्मक विचलन का क्या अर्थ है तथा \( \Delta_{\text{mix}}H \) के चिन्ह का इन विचलनों से कैसे संबंधित है?

Answer:

राउल्ट के नियम के अनुसार, किसी भी विलयन में प्रत्येक वाष्पशील घटक का आंशिक वाष्प दाब उसके मोल अंश के समानुपाती होता है। वे विलयन जो सांद्रण के पूरे परिसर में राउल्ट के नियम का पालन करते हैं, आदर्श विलयन कहलाते हैं। जो विलयन राउल्ट के नियम (गैर-आदर्श समाधान) का पालन नहीं करते, उनमें वाष्प दाब राउल्ट के नियम की भविष्यवाणी की तुलना में अधिक या कम होता है। यदि वाष्प दाब का दबाव अधिक है, तो विलयन को धनात्मक विचलन प्रदर्शित करने वाला कहा जाता है, और यदि यह कम है, तो विलयन को राउल्ट के नियम से ऋणात्मक विचलन प्रदर्शित करने वाला कहा जाता है।
राउल्ट के नियम से धनात्मक दर्शाने दो-घटक विलयन का वाष्प दाब:
एक आदर्श विलयन की स्थिति में विलयन बनाने के लिए शुद्ध घटकों के मिश्रण की एन्थैल्पी शून्य होती है। है। \( \Delta_{\text{sol}}H = 0 \)
धनात्मक विचलन दर्शाने वाले विलयनों में गर्मा का अवशोषण होता है। \( \Delta_{\text{sol}}H = \text{धनात्मक} \)
ऋणात्मक विचलन दर्शाने वाले विलयनों में ऊष्मा का विकास होता है। \( \Delta_{\text{sol}}H = \text{ऋणात्मक} \)

मुख्य बिंदु:

• आदर्श विलयन राउल्ट के नियम का पालन करते हैं।
• धनात्मक विचलन में \( \Delta_{\text{mix}}H > 0 \) और वाष्प दाब उच्च होता है।
• ऋणात्मक विचलन में \( \Delta_{\text{mix}}H < 0 \) और वाष्प दाब कम होता है।

आम गलतियाँ:

• धनात्मक और ऋणात्मक विचलन के ग्राफ को उल्टा बना देना।
• एन्थैल्पी परिवर्तन के चिन्हों में भ्रम होना।

Exam Tips:

a) दोनों प्रकार के विचलनों के लिए ग्राफ और \( \Delta H, \Delta V \) के मान स्पष्ट रूप से याद रखें।
b) अंतर्-आण्विक आकर्षण बलों के आधार पर कारण भी समझाएं।

 

Question 1.15: विलायक के सामान्य क्वथनांक पर एक अवाष्पशील विलेय का \( 2\% \) जलीय विलयन का \( 1.004\text{ bar} \) वाष्प दाब है। विलेय का मोलर द्रव्यमान क्या है?

Answer:

यहाँ, सामान्य क्वथनांक पर घोल का वाष्प दाब (\( p_1 \)) \( = 1.004\text{ bar} \)
सामान्य क्वथनांक पर शुद्ध पानी का वाष्प दाब (\( p^\circ \)) \( = 1.013\text{ bar} \)
विलेय का द्रव्यमान, (\( w_2 \)) \( = 2\text{ g} \) और विलायक का द्रव्यमान (जल), (\( w_1 \)) \( = 98\text{ g} \)
विलायक (पानी) का मोलर द्रव्यमान, (\( M_1 \)) \( = 18\text{ g mol}^{-1} \)
राउल्ट के नियम के अनुसार,
\( \frac{p^\circ - p_1}{p^\circ} = \frac{w_2 \times M_1}{M_2 \times w_1} \)
\( \frac{1.013 - 1.004}{1.013} = \frac{2 \times 18}{M_2 \times 98} \)
\( \frac{0.009}{1.013} = \frac{2 \times 18}{M_2 \times 98} \Rightarrow M_2 = \frac{1.013 \times 2 \times 18}{0.009 \times 98} = 41.35\text{ g mol}^{-1} \)
अतः विलेय का मोलर द्रव्यमान \( 41.35\text{ g mol}^{-1} \) है।

मुख्य बिंदु:

• यह वाष्प दाब के अपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure) पर आधारित है।
• शुद्ध जल का मानक वाष्प दाब \( 1.013\text{ bar} \) (1 atm) होता है।
• सूत्र: \( \frac{p^\circ - p_1}{p^\circ} = \frac{n_2}{n_1 + n_2} \approx \frac{w_2 M_1}{M_2 w_1} \)

आम गलतियाँ:

• \( w_1 \) और \( w_2 \) के मान आपस में बदल देना।
• मोलर द्रव्यमान की गणना में गणितीय त्रुटि करना।

Exam Tips:

a) सूत्र में मान रखने से पहले सभी दी गई राशियों की पहचान कर लें।
b) सही मात्रक के साथ उत्तर समाप्त करें।

 

Question 1.16: हेptन एवं ऑक्टेन एक आदर्श विलयन बनाते हैं। \( 373\text{ K} \) पर दोनों द्रव घटकों के वाष्प दाब क्रमशः \( 105\text{ kPa} \) तथा \( 46.8\text{ kPa} \) हैं। \( 26.0\text{ g} \) हेptन एवं \( 35.0\text{ g} \) ऑक्टेन के मिश्रण का वाष्प दाब क्या होगा?

Answer:

हेptन का वाष्प दाब (\( p_1^\circ \)) \( = 105.2\text{ kPa} \)
ऑक्टेन का वाष्प दाब (\( p_2^\circ \)) \( = 46.8\text{ kPa} \)
हम जानते हैं कि हेptन (\(\text{C}_7\text{H}_{16}\)) का मोलर द्रव्यमान \( = 7 \times 12 + 16 \times 1 = 100\text{ g mol}^{-1} \)
∴ हेptन के मोलों की संख्या \( = \frac{26}{100} = 0.26 \) मोल
ऑक्टेन (\(\text{C}_8\text{H}_{18}\)) का मोलर द्रव्यमान \( = 8 \times 12 + 18 \times 1 = 114\text{ g mol}^{-1} \)
∴ ऑक्टेन के मोलों की संख्या \( = \frac{35}{114} = 0.31 \) मोल
हेptन का मोल अंश, \( x_1 = \frac{0.26}{0.26 + 0.31} = 0.456 \)
और, ऑक्टेन का मोल अंश, \( x_2 = 1 - 0.456 = 0.544 \)
अब, हेptन का आंशिक दाब, \( p_1 = x_1 p_1^\circ = 0.456 \times 105.2 = 47.97\text{ kPa} \)
ऑक्टेन का आंशिक दाब, \( p_2 = x_2 p_2^\circ = 0.544 \times 46.8 = 25.46\text{ kPa} \)
अतः, विलयन का वाष्प दाब, \( p_{\text{total}} = p_1 + p_2 = 47.97 + 25.46 = 73.43\text{ kPa} \)

मुख्य बिंदु:

• डाल्टन के आंशिक दाब के नियम और राउल्ट के नियम का संयोजन।
• \( p_{\text{total}} = x_1 p_1^\circ + x_2 p_2^\circ \)
• मोलर द्रव्यमान की सही गणना आवश्यक है।

आम गलतियाँ:

• मोल अंश निकालते समय कुल मोलों से भाग न देना।
• आंशिक दाबों को जोड़ते समय गणना में गलती करना।

Exam Tips:

a) दोनों घटकों के अलग-अलग मोल और मोल अंश निकालें।
b) अंतिम उत्तर में \( \text{kPa} \) मात्रक लिखें।

 

Question 1.17: \( 300\text{ K} \) पर जल का वाष्प दाब \( 12.3\text{ kPa} \) है। इसमें बने अवाष्पशील विलेय के एक मोलल विलयन का वाष्प दाब ज्ञात कीजिए।

Answer:

1 मोलल घोल का मतलब है कि \( 1000 \) ग्राम विलायक (पानी) में \( 1 \) मोल विलेय मौजूद है।
पानी का मोलर द्रव्यमान \( = 18\text{ g mol}^{-1} \)
अतः, \( 1000 \) ग्राम जल में उपस्थित मोलों की संख्या \( = \frac{1000}{18} = 55.56 \) मोल
इसलिए, विलयन में विलेय का मोल अंश \( x_2 = \frac{1}{1 + 55.56} = 0.0177 \)
दिया जाता है कि, पानी का वाष्प दाब, \( p_1^\circ = 12.3\text{ kPa} \)
संबंध लागू करने पर, \( \frac{p_1^\circ - p_1}{p_1^\circ} = x_2 \)
\( \Rightarrow \frac{12.3 - p_1}{12.3} = 0.0177 \Rightarrow 12.3 - p_1 = 0.2177 \Rightarrow p_1 = 12.0823 = 12.08\text{ kPa} \text{ (लगभग)} \)
अतः, विलयन का वाष्प दाब \( 12.08\text{ kPa} \) है।

मुख्य बिंदु:

• 1 मोलल का अर्थ \( 1000\text{ g} \) जल में विलेय का \( 1 \) मोल।
• \( \frac{p^\circ - p_1}{p^\circ} = x_2 \) संबंध का उपयोग।
• शुद्ध विलायक का वाष्प दाब \( 12.3\text{ kPa} \)

आम गलतियाँ:

• मोललता से सीधे मोल अंश न निकालकर गलत गणना करना।
• अंत में घटाव में गलती करना।

Exam Tips:

a) 1 मोलल विलयन का अर्थ स्पष्ट रूप से समझें (अर्थात \( 1\text{ मोल विलेय} / 1000\text{ g जल} \))।
b) गणना के चरणों को साफ-सुथरा दिखाएं।

 

Question 1.18: \( 114\text{ g} \) ऑक्टेन में किसी अवाष्पशील विलेय (मोलर द्रव्यमान \( 40\text{ g mol}^{-1} \)) की कितनी मात्र घोली जाए कि ऑक्टेन का वाष्प दाब घटकर का \( 80\% \) रह जाए।

Answer:

माना शुद्ध ऑक्टेन का वाष्प दाब \( p_1^\circ \) है।
फिर, अवाष्पशील विलेय को घोलने के बाद ऑक्टेन का वाष्प दाब \( = \frac{80}{100} p_1^\circ = 0.8p_1^\circ \)
विलेय का मोलर द्रव्यमान, \( M_2 = 40\text{ g mol}^{-1} \) और ऑक्टेन का द्रव्यमान, \( w_1 = 114\text{ g} \)
ऑक्टेन का मोलर द्रव्यमान (\(\text{C}_8\text{H}_{18}\)), \( M_1 = 8 \times 12 + 18 \times 1 = 114\text{ g mol}^{-1} \)
संबंध लागू करने पर, \( \frac{p_1^\circ - p_1}{p_1^\circ} = \frac{w_2 \times M_1}{M_2 \times w_1} \)
\( \Rightarrow \frac{p_1^\circ - 0.8p^\circ}{p_1^\circ} = \frac{w_2 \times 114}{40 \times 114} \Rightarrow \frac{0.2p_1^\circ}{p_1^\circ} = \frac{w_2}{40} \Rightarrow 0.2 = \frac{w_2}{40} \Rightarrow w_2 = 8\text{ g} \)
अतः, विलेय का अभीष्ट द्रव्यमान \( 8\text{ g} \) है।

मुख्य बिंदु:

• वाष्प दाब घटकर \( 80\% \) होने का अर्थ है \( p_1 = 0.8 p_1^\circ \)。
• वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन का सूत्र प्रयोग होता है।
• ऑक्टेन का द्रव्यमान और मोलर द्रव्यमान दोनों \( 114 \) हैं, जिससे गणना आसान हो जाती है।

आम गलतियाँ:

• 'घटकर \( 80\% \) रह जाए' को 'के \( 20\% \) तक कम हो जाए' या गलत समझ लेना।
• सूत्र में मान उल्टे रख देना।

Exam Tips:

a) भाषा को ध्यान से पढ़ें: 'घटकर \( 80\% \) हो जाना' और 'की \( 20\% \) कमी' में अंतर समझें।
b) पदों को काटकर समीकरण सरल बनाएं।

 

Question 1.19: एक विलयन जिसे एक अवाष्पशील ठोस के \( 30\text{ g} \) को \( 90\text{ g} \) जल में विलयन करके बनाया गया है। उसका \( 298\text{ K} \) पर वाष्प दाब \( 2.8\text{ kPa} \) है। विलयन में \( 18\text{ g} \) जल और मिलाया जाता है जिससे नया वाष्प दाब \( 298\text{ K} \) पर \( 2.9\text{ kPa} \) हो जाता है। निम्नलिखित की गणना कीजिए:
(i) विलेय का मोलर द्रव्यमान (ii) \( 298\text{ K} \) पर जल का वाष्प दाब।

Answer:

(i) मान लीजिए, विलेय का मोलर द्रव्यमान \( M\text{ g mol}^{-1} \) है
अब, विलायक (पानी) के मोलों की संख्या, \( n_1 = \frac{90\text{ g}}{18\text{ g mol}^{-1}} = 5 \) मोल
विलेय के मोल का, \( n_2 = \frac{30\text{ g}}{M\text{ g mol}^{-1}} = \frac{30}{M} \) मोल
संबंध \( p_1 = 2.8\text{ kPa} \) से
\( \frac{p_1^\circ - p_1}{p_1^\circ} = \frac{n_2}{n_1 + n_2} \Rightarrow \frac{p_1^\circ - 2.8}{p_1^\circ} = \frac{\frac{30}{M}}{5 + \frac{30}{M}} \Rightarrow 1 - \frac{2.8}{p_1^\circ} = \frac{30}{5M + 30} \)
\( \Rightarrow 1 - \frac{2.8}{p_1^\circ} = \frac{30}{5M + 30} \Rightarrow \frac{2.8}{p_1^\circ} = 1 - \frac{30}{5M + 30} = \frac{5M + 30 - 30}{5M + 30} = \frac{5M}{5M + 30} \dots (i) \)
\( 18 \) ग्राम पानी डालने के बाद: \( n_1 = \frac{90 + 18\text{ g}}{18\text{ g mol}^{-1}} = 6 \) मोल
संबंध \( p_1 = 2.9\text{ kPa} \) से,
\( \frac{p_1^\circ - p_1}{p_1^\circ} = \frac{n_2}{n_1 + n_2} \Rightarrow \frac{p_1^\circ - 2.9}{p_1^\circ} = \frac{\frac{30}{M}}{6 + \frac{30}{M}} \Rightarrow 1 - \frac{2.9}{p_1^\circ} = \frac{30}{6M + 30} \)
\( \Rightarrow \frac{2.9}{p_1^\circ} = 1 - \frac{30}{6M + 30} = \frac{6M}{6M + 30} \dots (ii) \)
समीकरण (i) को (ii) से भाग देने पर,
\( \frac{\frac{2.8}{p_1^\circ}}{\frac{2.9}{p_1^\circ}} = \frac{\frac{5M}{5M + 30}}{\frac{6M}{6M + 30}} \Rightarrow \frac{2.8}{2.9} = \frac{5M}{5M + 30} \times \frac{6M + 30}{6M} \Rightarrow 2.9 \times 5 \times (6M + 30) = 2.8 \times 6 \times (5M + 30) \)
\( \Rightarrow 87M + 435 = 84M + 504 \Rightarrow 3M = 69 \Rightarrow M = 23\text{u} \)
इसलिए, विलेय का मोलर द्रव्यमान \( 23\text{ g mol}^{-1} \) है।
(ii) '\( M \)' के मान को समीकरण (i) में रखने पर,
\( \frac{2.8}{p_1^\circ} = \frac{5 \times 23 + 30}{5 \times 23} \Rightarrow \frac{2.8}{p_1^\circ} = \frac{145}{115} \Rightarrow p_1^\circ = 3.53 \)
अतः \( 298\text{ K} \) पर जल का वाष्प दाब \( 3.53\text{ kPa} \) है।

मुख्य बिंदु:

• दो अलग-अलग स्थितियों के लिए राउल्ट के नियम के समीकरण बनाए जाते हैं।
• समीकरणों को आपस में भाग देकर अज्ञात मोलर द्रव्यमान निकाला जाता है।
• इसके बाद शुद्ध विलायक का वाष्प दाब ज्ञात किया जाता है।

आम गलतियाँ:

• बीजगणितीय हल में गलती करना।
• पानी की मात्रा जोड़ने पर मोलों की संख्या गलत निकालना।

Exam Tips:

a) ऐसे प्रश्नों में दो समीकरण बनाकर उन्हें विभाजित करना सबसे आसान तरीका है।
b) गणना के हर चरण को सावधानीपूर्वक हल करें।

 

Question 1.20: शक्कर के \( 5\% \) (द्रव्यमान) जलीय विलयन का हिमांक \( 271\text{ K} \) है। यदि शुद्ध जल का हिमांक \( 273.15\text{ K} \) है तो ग्लूकोस के \( 5\% \) जलीय विलयन के हिमांक की गणना कीजिए।

Answer:

यहाँ, \( \Delta T_f = (273.15 - 271)\text{ K} = 2.15\text{ K} \)
शक्कर (\(\text{C}_{12}\text{H}_{22}\text{O}_{11}\)) का मोलर द्रव्यमान \( = 12 \times 12 + 22 \times 1 + 11 \times 16 = 342\text{ g mol}^{-1} \)
पानी में शक्कर का \( 5\% \) घोल है अर्थात \( 5 \) ग्राम शक्कर \((100 - 5) = 95\) ग्राम पानी में मौजूद है।
अब, शक्कर के मोलों की संख्या \( = \frac{5}{342}\text{ मोल} = 0.0146 \) मोल
इसलिए, विलयन की मोललता, \( m = \frac{0.0146\text{ मोल}}{0.095\text{ kg}} = 0.1537\text{ mol kg}^{-1} \)
संबंध को लागू करने पर, \( \Delta T_f = K_f \times m \)
\( \Rightarrow K_f = \frac{\Delta T_f}{m} = \frac{2.15\text{ K}}{0.1537\text{ mol kg}^{-1}} = 13.99\text{ K kg mol}^{-1} \)
ग्लूकोस (\(\text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6\)) का मोलर द्रव्यमान \( = 6 \times 12 + 12 \times 1 + 6 \times 16 = 180\text{ g mol}^{-1} \)
पानी में \( 5\% \) ग्लूकोस का मतलब है कि \( 5 \) ग्राम ग्लूकोस \((100 - 5) = 95\) ग्राम पानी में मौजूद है।
इसलिए, विलयन की मोललता, \( m = \frac{5/180\text{ मोल}}{0.095\text{ kg}} = \frac{0.0278\text{ मोल}}{0.095\text{ kg}} = 0.2926\text{ mol kg}^{-1} \)
अब, \( \Delta T_f = K_f \times m = 13.99\text{ K kg mol}^{-1} \times 0.2926\text{ mol kg}^{-1} = 4.09\text{ K (लगभग)} \)
अतः \( 5\% \) ग्लूकोस विलयन का हिमांक \((273.15 - 4.09)\text{ K} = 269.06\text{ K} \) है।

मुख्य बिंदु:

• हिमांक में अवनमन का सूत्र: \( \Delta T_f = K_f \cdot m \)
• पहले विलयन से \( K_f \) का मान निकाला जाता है।
• उस \( K_f \) का उपयोग दूसरे विलयन के हिमांक अवनमन की गणना में होता है।

आम गलतियाँ:

• शक्कर और ग्लूकोस के मोलर द्रव्यमान में गलती करना।
• विलायक का द्रव्यमान \( 100\text{ g} \) लेना जबकि वह \( 95\text{ g} \) होगा।

Exam Tips:

a) मोललता निकालते समय हमेशा विलायक (जल) का द्रव्यमान लें, न कि कुल विलयन का।
b) तापमान परिवर्तन (\( \Delta T_f \)) और वास्तविक हिमांक में अंतर समझें।

 

Question 1.21: दो तत्व A एवं B मिलकर \( \text{AB}_2 \) एवं \( \text{AB}_4 \) सूत्र वाले दो यौगिक बनाते हैं। \( 20\text{ g} \) बेंजीन में घोलने पर \( 1\text{ g AB}_2 \) हिमांक को \( 2.3\text{ K} \) अवनमित करता है। जबकि \( 1.0\text{ g AB}_4 \) से \( 1.3\text{ K} \) का अवनमन होता है। बेंजीन के लिए मोलर अवनमन स्थिरांक \( 5.1\text{ K kg mol}^{-1} \) है। A एवं B के परमाणुवीय द्रव्यमान की गणना कीजिए।

Answer:

हम जानते हैं कि, \( M_2 = \frac{1000 \times w_2 \times K_f}{\Delta T_f \times w_1} \)
तब,
\( M_{\text{AB}_2} = \frac{1000 \times 1 \times 5.1}{2.3 \times 20} = 110.87\text{ g mol}^{-1} \)
\( M_{\text{AB}_4} = \frac{1000 \times 1 \times 5.1}{1.3 \times 20} = 196.15\text{ g mol}^{-1} \)
दिया है कि \( \text{AB}_2 \) और \( \text{AB}_4 \) के मोलर द्रव्यमान क्रमशः \( 110.87\text{ g mol}^{-1} \) और \( 196.15\text{ g mol}^{-1} \) हैं।
माना A और B के परमाणु द्रव्यमान क्रमशः \( x \) और \( y \) हैं।
अब, हम लिख सकते हैं:
\( x + 2y = 110.87 \dots (i) \)
\( x + 4y = 196.15 \dots (ii) \)
समीकरण (i) को (ii) से घटाने पर हमें प्राप्त होता है:
\( 2y = 85.28 \)
\( \Rightarrow y = 42.64 \)
समीकरण (1) में '\( y \)' का मान रखने पर, हमें \( x + 2 \times 42.64 = 110.87 \) प्राप्त होता है
\( \Rightarrow x = 25.59 \)
अतः A और B के परमाणु द्रव्यमान क्रमशः \( 25.59\text{ u} \) और \( 42.64\text{ u} \) हैं।

मुख्य बिंदु:

• हिमांक अवनमन से मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने के सूत्र का प्रयोग।
• यौगिकों के मोलर द्रव्यमान से दो रैखिक समीकरण बनाना।
• युगपत समीकरण (Simultaneous Equations) को हल करके तत्वों के परमाणु द्रव्यमान ज्ञात करना।

आम गलतियाँ:

• \( w_1 \) और \( w_2 \) के मानों में गड़बड़ी करना।
• समीकरणों को हल करते समय घटाने में गलती करना।

Exam Tips:

a) दोनों यौगिकों के लिए मोलर द्रव्यमान अलग-अलग निकालें।
b) समीकरणों को हल करने के लिए विलोपन विधि (Elimination Method) का प्रयोग करें।

 

Question 1.22: \( 300\text{ K} \) पर \( 36\text{ g} \) प्रति लीटर सांद्रता वाले ग्लूकोस के विलयन का परासरण दाब \( 4.98\text{ bar} \) है। यदि इसी ताप पर विलयन का परासरण दाब \( 1.52\text{ bar} \) हो तो उसकी सांद्रता क्या होगी?

Answer:

यहाँ, \( T = 300\text{ K}, \pi = 1.52\text{ bar}, R = 0.083\text{ bar L K}^{-1}\text{ mol}^{-1}, \pi = CRT \)
संबंध लागू करने पर, \( C = \frac{\pi}{RT} = \frac{1.52\text{ bar}}{0.083\text{ bar L K}^{-1} \times 300\text{ K}} = 0.061\text{ मोल} \)
चूँकि विलयन का आयतन \( 1\text{ L} \) है, विलयन की सांद्रता \( 0.061\text{ M} \) होगी।

मुख्य बिंदु:

• परासरण दाब का सूत्र: \( \pi = CRT \) या \( \pi V = nRT \)
• तापमान और गैस स्थिरांक \( R \) स्थिर रहने पर संबंध।
• सांद्रता मोल प्रति लीटर (\( \text{M} \)) में निकलती है।

आम गलतियाँ:

• \( R \) का गलत मान रख देना।
• तापमान को केल्विन में न बदलना (हालांकि यहाँ दिया गया है)।

Exam Tips:

a) परासरण दाब के सूत्र को भली-भांति याद रखें।
b) मात्रक का विशेष ध्यान रखें (\( \text{bar}, \text{L}, \text{K} \))।

 

Question 1.23: निम्नलिखित युग्मों में उपस्थित सबसे महत्वपूर्ण अंतरआण्विक आकर्षण बलों का सुझाव दीजिए:
(i) \( n \)-हेक्सेन व \( n \)-ऑक्टेन
(ii) \( I_2 \) तथा \( \text{CCl}_4\
\) (iii) \( \text{NaClO}_4 \) तथा \( \text{H}_2\text{O} \)
(iv) मेथेनॉल तथा एसीटोन
(v) एसीटोनिट्राइल \( (\text{CH}_3\text{CN}) \) तथा एसीटोन \( (\text{C}_3\text{H}_6\text{O}) \)

Answer:

(i) वैन डेर वाल्स आकर्षण बल।
(ii) वैन डेर वाल्स आकर्षण बल।
(iii) आयन-द्विध्रुवीय अंतःक्रिया।
(iv) द्विध्रुवीय-द्विध्रुवीय अंतःक्रिया।
(v) द्विध्रुवीय-द्विध्रुवीय अंतःक्रिया।

मुख्य बिंदु:

• अध्रुवीय अणुओं के बीच वैन डेर वाल्स या लंदन बल होते हैं।
• आयन और ध्रुवीय विलायक के बीच आयन-द्विध्रुवीय आकर्षण होता है।
• ध्रुवीय अणुओं के बीच द्विध्रुवीय-द्विध्रुवीय अन्योन्यक्रिया होती है।

आम गलतियाँ:

• ध्रुवीय और अध्रुवीय यौगिकों की प्रकृति पहचानने में भूल करना।

Exam Tips:

a) अणुओं की संरचना देखकर उनकी ध्रुवता (Polarity) पहचानें।
b) उत्तर को सीधे और स्पष्ट रूप से लिखें।

 

Question 1.24: विलेय-विलायक आकर्षण के आधार पर निम्नलिखित को \( n \)-ऑक्टेन की विलेयता के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए - \( \text{KCl}, \text{CH}_3\text{OH}, \text{CH}_3\text{CN}, \text{साइक्लोहेक्सेन} \) ।

Answer:

\( n \)-ऑक्टेन एक अध्रुवीय विलायक है। इसलिए गैर-ध्रुवीय विलेय की विलेयता \( n \)-ऑक्टेन में ध्रुवीय विलेय की विलेयता से अधिक होती है।
बढ़ती ध्रुवता का क्रम है: साइक्लोहेक्सेन \( < \text{CH}_3\text{CN} < \text{CH}_3\text{OH} < \text{KCl} \)
इसलिए, घुलनशीलता बढ़ने का क्रम है: \( \text{KCl} < \text{CH}_3\text{OH} < \text{CH}_3\text{CN} < \text{साइक्लोहेक्सेन} \)

मुख्य बिंदु:

• 'समान घुले समान में' (Like dissolves like) का सिद्धांत लागू होता है।
• \( n \)-ऑक्टेन अध्रुवीय है, अतः अध्रुवीय पदार्थ इसमें अधिक घुलेंगे।
• आयनिक यौگिक \( \text{KCl} \) इसमें सबसे कम घुलेगा।

आम गलतियाँ:

• ध्रुवता के बढ़ते और घटते क्रम में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) विलायक की प्रकृति (ध्रुवीय/अध्रुवीय) पहले पहचानें।
b) बढ़ते या घटते क्रम का निर्देश ध्यानपूर्वक पढ़कर उत्तर दें।

 

Question 1.25: पहचानिए कि निम्नलिखित यौगिकों में से कौन से जल में अत्यधिक विलेय, आंशिक रूप से विलेय तथा अविलेय हैं:
(i) फिनॉल
(ii) टॉलूवीन
(iii) फॉर्मिक अम्ल
(iv) एथिलीन ग्लाीकॉल
(v) क्लोरोफॉर्म
(vi) पेंटानॉल

Answer:

(i) फिनॉल \( (\text{C}_6\text{H}_5\text{OH}) \) का ध्रुवीय समूह \( -\text{OH} \) और गैर-ध्रुवीय समूह \( -\text{C}_6\text{H}_5 \) है। इस प्रकार, फिनॉल पानी में आंशिक रूप से रूप से घुलनशील है।
(ii) टॉलूवीन \( (\text{C}_6\text{H}_5 - \text{CH}_3) \) में गैर-ध्रुवीय समूह होते हैं। इस प्रकार, टॉलूवीन पानी में अवुलनशील है।
(iii) फॉर्मिक एसिड (\text{HCOOH}) का ध्रुवीय समूह \( -\text{OH} \) होता है और यह पानी के साथ H-आबंध बना सकता है। इस प्रकार, फॉर्मिक एसिड पानी में अत्यधिक घुलनशील है।
(iv) एथिलीन ग्लाीकॉल में ध्रुवीय \( -\text{OH} \) समूह होता है और यह H-बंध बना सकता है। इस प्रकार, यह पानी में अत्यधिक घुलनशील है।
(v) क्लोरोफॉर्म पानी में अघुलनशील है।
(vi) पेंटानॉल \( (\text{C}_5\text{H}_{11}\text{OH}) \) में ध्रुवीय \( -\text{OH} \) समूह होता है, लेकिन इसमें एक बहुत भारी गैर-ध्रुवीय \( -\text{C}_5\text{H}_{11} \) समूह भी होता है। इस प्रकार, पेंटानॉल पानी में आंशिक रूप से से घुलनशील है।

मुख्य बिंदु:

• \( -\text{OH} \) समूह हाइड्रोजन आबंध बनाकर पानी में विलेयता बढ़ाता है।
• लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला (अध्रुवीय भाग) विलेयता को घटाती है।
• आयनिक या अत्यधिक ध्रुवीय यौगिक जल में पूरी तरह घुल जाते हैं।

आम गलतियाँ:

• भारी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला के प्रभाव को नजरअंदाज करना।

Exam Tips:

a) संरचना में ध्रुवीय \( -\text{OH} \) और एल्काइल समूह के आकार की तुलना करें।
b) प्रत्येक के लिए कारण संक्षेप में दें।

 

Question 1.26: यदि किसी झील के जल का घनत्व \( 1.25\text{ g mL}^{-1} \) है तथा उसमें \( 92\text{ g Na}^+ \) आयन प्रति किलो जल में उपस्थित हैं। तो झील में \( \text{Na}^+ \) आयन की मोलरता ज्ञात कीजिए।

Answer:

\(\text{Na}^+\) आयनों के \( 92\text{ g} \) में उपस्थित मोलों की संख्या \( = \frac{92\text{ g}}{23\text{ g mol}^{-1}} = 4 \) मोल
इसलिए, झील में \( \text{Na}^+ \) आयनों की मोललता \( = \frac{4\text{ मोल}}{1\text{ kg}} = 4\text{ m} \)

मुख्य बिंदु:

• मोलरता और मोललता के बीच थोड़ा अंतर होता है, यहाँ प्रति किलो जल दिया है इसलिए मोललता सीधी निकलती है।
• सोडियम का परमाणु द्रव्यमान \( 23\text{ g/mol} \)

आम गलतियाँ:

• मोलरता और मोललता को एक ही समझ लेना।

Exam Tips:

a) प्रश्न में दी गई इकाइयों को ध्यान से पढ़ें।
b) प्रति किलो विलायक का अर्थ मोललता होता है।

 

Question 1.27: अगर \( \text{CuS} \) का विलेयता गुणनफल \( 6 \times 10^{-16} \) है तो जलीय विलयन में उसकी अधिकतम मोलरता ज्ञात कीजिए।

Answer:

\(\text{CuS, } K_{\text{sp}}\) का विलेयता गुणनफल \( = 6 \times 10^{-16} \) मान लीजिए कि \( \text{CuS} \) की \( \text{mol L}^{-1} \) में विलेयता है।
\( 2\text{CuS} \leftrightarrow \text{Cu}^{2+} + \text{S}^{2-} \)
अब, \( K_{\text{sp}} = [\text{Cu}^{2+}][\text{S}^{2-}] = s \times s = s^2 \)
इसलिए, \( K_{\text{sp}} = s^2 = 6 \times 10^{-16} \Rightarrow s = \sqrt{6 \times 10^{-16}} = 2.45 \times 10^{-8}\text{ mol L}^{-1} \)
अतः, जलीय विलयन में \( \text{CuS} \) की अधिकतम मोलरता \( 2.45 \times 10^{-8}\text{ mol L}^{-1} \) है।

मुख्य बिंदु:

• विलेयता गुणनफल (\( K_{\text{sp}} \)) और विलेयता (\( s \)) का संबंध।
• \( 1:1 \) इलेक्ट्रोलाइट के लिए \( K_{\text{sp}} = s^2 \)。
• मोलरता ही यहाँ विलेयता (\( s \)) को दर्शाती है।

आम गलतियाँ:

• वर्गमूल निकालते समय घात (exponent) को आधा करना भूल जाना।

Exam Tips:

a) विलेयता गुणनफल का समीकरण सही लिखें।
b) वैज्ञानिक संकेतन में वर्गमूल निकालते समय घातांक को सम संख्या बना लें।

 

Question 1.28: जब \( 6.5\text{ g} \) ऐस्पिरिन \( (\text{C}_9\text{H}_8\text{O}_4) \) को \( 450\text{ g} \) ऐसिटोनिट्राइल \( (\text{CH}_3\text{CN}) \) में घोला जाए तो ऐस्पिरिन का ऐसिटोनिट्राइल में भार प्रतिशत ज्ञात कीजिए।

Answer:

\(\text{C}_9\text{H}_8\text{O}_4\) का \( 6.5 \) ग्राम \( \text{CH}_3\text{CN} \) के \( 450 \) ग्राम में घुल जाता है।
तब, विलयन का कुल द्रव्यमान \( = (6.5 + 450)\text{ g} = 456.5\text{ g} \)
इसलिए, \( \text{C}_9\text{H}_8\text{O}_4 \) का द्रव्यमान प्रतिशत \( = 6.5/456.5 \times 100 = 1.424\% \)

मुख्य बिंदु:

• द्रव्यमान प्रतिशत \( = (\text{विलेय का द्रव्यमान} / \text{विलयन का कुल द्रव्यमान}) \times 100 \)。
• विलयन का द्रव्यमान = विलेय का द्रव्यमान + विलायक का द्रव्यमान।

आम गलतियाँ:

• कुल द्रव्यमान निकालते समय विलेय के द्रव्यमान को न जोड़ना।

Exam Tips:

a) हमेशा कुल विलयन के द्रव्यमान से भाग दें, केवल विलायक से नहीं।
b) गणना की शुद्धता की जाँच करें।

 

Question 1.29: नैलोफ़र््रीन \( (\text{C}_{19}\text{H}_{21}\text{NO}_3) \) जो कि मॉर्फिन जैसी होती है, का उपयोग स्वापक उपभोक्ताओं द्वारा स्वापक छोड़ने से उत्पन्न लक्षणों को दूर करने में किया जाता है। सामान्यतया नैलोफ़र््रीन की \( 1.5\text{ mg} \) खुराक दी जाती है। उपरोक्त खुराक के लिए \( 1.5 \times 10^{-3}\text{ m} \) जलीय विलयन का कितना द्रव्यमान आवश्यक होगा?

Answer:

नैलोफ़र््रीन \( (\text{C}_{19}\text{H}_{21}\text{NO}_3) \) का मोलर द्रव्यमान इस प्रकार दिया है:
\( 19 \times 12 + 12 \times 1 + 1 \times 14 + 3 \times 16 = 311\text{ g mol}^{-1} \)
नैलोफ़र््रीन के \( 1 \) किग्रा (\( 1000 \) ग्राम) पानी में \( 1.5 \times 10^{-3} \) mol है। इसलिए, \( 1.5 \times 10^{-3}\text{ m} \) जलीय घोल में द्रव्यमान \( = 1.5 \times 10^{-3} \times 311\text{ g} = 0.4665\text{ g} \)
अतः विलयन का कुल द्रव्यमान \( = (1000 + 0.4665)\text{ g} = 1000.4665\text{ g} \)
इसका तात्पर्य है कि \( 0.4665 \) ग्राम नैलोफ़र््रीन युक्त घोल का द्रव्यमान \( 1000.4665 \) ग्राम है।
इसलिए, \( 1.5 \) मिलीग्राम नैलोफ़र््रीन युक्त घोल का द्रव्यमान \( = \frac{1000.4665 \times 1.5 \times 10^{-3}}{0.4665} = 3.22\text{ g} \)
अतः आवश्यक जलीय विलयन का द्रव्यमान \( 3.22\text{ g} \) है।

मुख्य बिंदु:

• मोललता (\( m \)) का अर्थ है प्रति \( 1000\text{ g} \) विलायक में विलेय के मोल।
• ऐक्यक नियम (Unitary Method) का प्रयोग करके अभीष्ट मात्रा निकाली जाती है।

आम गलतियाँ:

• मिलीग्राम को ग्राम में बदलते समय घातांक की गलती करना।

Exam Tips:

a) इकाइयों का रूपांतरण बहुत सावधानी से करें।
b) प्रत्येक चरण में सूत्र और तर्क स्पष्ट रखें।

 

Question 1.30: बेंजोइक अम्ल का मेथेनॉल में \( 0.15\text{ M} \) विलयन बनाने के लिए आवश्यक मात्रा की गणना कीजिए।

Answer:

मेथेनॉल में बेंजोइक एसिड के \( 0.15\text{ M} \) घोल का मतलब है, \( 1000\text{ mL} \) घोल में \( 0.15 \) मोल बेंजोइक एसिड है।
इसलिए, \( 250\text{ mL} \) विलयन में \( = \frac{(0.15 \times 250)}{1000} \) मोल बेंजोइक एसिड होता है।
बेंजोइक एसिड (\(\text{C}_6\text{H}_5\text{COOH}\)) का मोलर द्रव्यमान \( = 7 \times 12 + 6 \times 1 + 2 \times 16 = 122\text{ g mol}^{-1} \)
इसलिए, आवश्यक बेंजोइक एसिड \( = 0.0375\text{ मोल} \times 122\text{ g mol}^{-1} = 4.575\text{ g} \)

मुख्य बिंदु:

• मोलरता का अर्थ प्रति लीटर विलयन में मोलों की संख्या है।
• आवश्यक मोल निकालकर उसे मोलर द्रव्यमान से गुणा करके द्रव्यमान ज्ञात करते हैं।

आम गलतियाँ:

• आयतन को मिलीलीटर से लीटर में बदलना भूल जाना।

Exam Tips:

a) \( \text{M} = \frac{n \times 1000}{V(\text{mL})} \) सूत्र का सीधा उपयोग कर सकते हैं।
b) गणना को अंत तक सही से हल करें।

 

Question 1.31: ऐसिटिक अम्ल, ट्राइक्लोरोऐसिटिक अम्ल एवं ट्राइफ्लुओरोऐसिटिक अम्ल की समान मात्रा से जल के हिमांक में अवनमन इनके उपरोक्त दिए गए क्रम में बढ़ता है। इसे संक्षेप में समझाइये।

Answer:

\(\text{H, Cl, F}\) और \( \text{F \) में, \( \text{F} \) सबसे अधिक विद्युत-ऋणात्मक है जबकि \( \text{F} \) सबसे अधिक विद्युत-ऋणात्मक है। फिर, \( \text{F, Cl} \) और \( \text{H} \) से अधिक इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है। इस प्रकार, ट्राइफ्लोरोऐसिटिक एसिड आसानी से \( \text{H}^+ \) आयनों को खो सकता है, यानी ट्राइफ्लोरोऐसिटिक एसिड सबसे बड़ी मात्रा में आयnit होता है। अब, जितने अधिक आयन उत्पन्न होते हैं, हिमांक का अवनमन उतना ही अधिक होता है। इसलिए, हिमांक में अवनमन क्रम निम्न प्रकार से बढ़ता है:
\( \text{ऐसिटिक अम्ल} < \text{ट्राइक्लोरोऐसिटिक अम्ल} < \text{ट्राइफ्लुओरोऐसिटिक अम्ल} \)

मुख्य बिंदु:

• हिमांक में अवनमन एक अणुसंख्य गुणधर्म है जो कणों (आयनों) की संख्या पर निर्भर करता है।
• प्रबल अम्ल अधिक आयन उत्पन्न करते हैं।
• प्रेरण प्रभाव (-I effect) अम्लीय सामर्थ्य को बढ़ाता है (\(\text{F} > \text{Cl} > \text{H}\))।

आम गलतियाँ:

• इसे केवल मोलर द्रव्यमान से जोड़ देना, जबकि यह आयनन की मात्रा पर निर्भर है।

Exam Tips:

a) विद्युत-ऋणात्मकता और प्रेरण प्रभाव का स्पष्ट उल्लेख करें।
b) कणों की संख्या और \( \Delta T_f \) के सीधे संबंध को समझाएं।

 

Question 1.32: \( \text{CH}_3 - \text{CH}_2 - \text{CHCl} - \text{COOH} \) के \( 10\text{ g} \) को \( 250\text{ g} \) जल में मिलाने से होने वाले हिमांक का अवनमन परिकलित कीजिए। (\( K_a = 1.4 \times 10^{-3}, K_f = 1.86\text{ K kg mol}^{-1} \))

Answer:

\(\text{CH}_3\text{CH}_2\text{CHClCOOH}\) का मोलर द्रव्यमान \( = 15 + 14 + 13 + 35.5 + 2 + 16 + 16 + 1 = 122.5\text{ g mol}^{-1} \)
\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CHClCOOH} \) के \( 10 \) ग्राम में मौजूद मोलों की संख्या \( = (10\text{ ग्राम}) / (122.5\text{ gram mol}^{-1}) = 0.0816 \) मोल
यह दिया गया है कि \( \text{कि 250 ग्राम पानी में } 10\text{ ग्राम }\text{CH}_3\text{CH}_2\text{CHClCOOH} \) मिलाया जाता है।
विलयन की मोललता, \( = \left(\frac{0.0186}{250}\right) \times 1000 = 0.3264\text{ mol kg}^{-1} \)
मान लीजिए \( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CHClCOOH} \) के पृथक्करण की डिग्री \( \alpha \) है।
\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CHClCOOH} \) निम्नलिखित समीकरण के अनुसार पृथक्करण से गुजरता है:
\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CHClCOOH} \leftrightarrow \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CHClCOO}^- + \text{H}^+ \)
आरंभ में मोल: \( C, 0, 0 \)
साम्यावस्था पर मोल: \( C(1 - \alpha), C\alpha, C\alpha \)
∴ \( K_a = \frac{C\alpha \cdot C\alpha}{C(1 - \alpha)} = \frac{C\alpha^2}{1 - \alpha} \)
चूँकि \( \alpha \) का मान \( 1 \) से बहुत छोटा है, इसलिए \( 1 - \alpha \approx 1 \) ले सकते हैं:
\( \frac{C\alpha^2}{1} \approx K_a \Rightarrow \alpha = \sqrt{\frac{K_a}{C}} = \sqrt{\frac{1.4 \times 10^{-3}}{0.3264}} = 0.0655 \)
पुनः:
\( \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CHClCOOH} \leftrightarrow \text{CH}_3\text{CH}_2\text{CHClCOO}^- + \text{H}^+ \)
आरंभ में मोल: \( 1, 0, 0 \)
साम्यावस्था पर मोल: \( 1 - \alpha, \alpha, \alpha \)
साम्यावस्था में कुल मोल \( = 1 - \alpha + \alpha + \alpha = 1 + \alpha \)
∴ \( i = \frac{1 + \alpha}{1} = 1 + \alpha = 1 + 0.0655 = 1.0655 \)
इसलिए, पानी के हिमांक में अवनमन इस प्रकार दिया जाता है: \( \Delta T_f = i \cdot K_f \cdot m \)
\( = 1.0655 \times 1.86\text{ K kg mol}^{-1} \times 0.3264\text{ mol kg}^{-1} = 0.65\text{ K} \)

मुख्य बिंदु:

• वेंट हॉफ गुणांक (\( i \)) की गणना दुर्बल अम्ल के लिए की जाती है।
• \( \alpha = \sqrt{K_a / C} \) सूत्र से वियोजन की मात्रा निकाली जाती है।
• \( \Delta T_f = i \cdot K_f \cdot m \) का उपयोग करके अंतिम अवनमन ज्ञात होता है।

आम गलतियाँ:

• वांट हॉफ गुणांक \( i \) को शामिल न करना।
• \( 1 - \alpha \approx 1 \) का सन्निकटन न करना।

Exam Tips:

a) दुर्बल विद्युत अपघट्यों के लिए वांट हॉफ कारक आवश्यक रूप से निकालें।
b) सभी चरणों को क्रमबद्ध लिखें।

 

Question 1.33: \( \text{CH}_2\text{FCOOH} \) के \( 19.5\text{ g} \) को \( 500\text{ g H}_2\text{O} \) में घोलाने पर जल के हिमांक में \( 1.0^\circ\text{C} \) का अवनमन देखा गया। फ्लूओरोऐसिटिक अम्ल का वान्त हॉफ गुणक तथा वियोजन स्थिरांक परिकलित कीजिए।

Answer:

यह दिया गया है कि: \( w_1 = 500\text{ g} \) और \( w_2 = 19.5\text{ g} \)
\( K_f = 1.86\text{ K kg mol}^{-1} \) और \( \Delta T_f = 1\text{ K} \)
हम जानते हैं कि:
\( M_2 = \frac{K_f \times w_2 \times 1000}{\Delta T_f \times w_1} = \frac{1.86\text{ K kg mol}^{-1} \times 19.5\text{ g} \times 1000\text{ g kg}^{-1}}{500\text{ g} \times 1\text{ K}} = 72.54\text{ g mol}^{-1} \)
इसलिए, \( \text{CH}_2\text{FCOOH} \) का प्रेक्षित द्रव्यमान \( (M_2)_{\text{obs}} = 72.54\text{ g mol}^{-1} \)
\( \text{CH}_2\text{FCOOH} \) का परिकलित द्रव्यमान, \( (M_2)_{\text{cal}} = 14 + 19 + 12 + 16 + 16 + 1 = 78\text{ g mol}^{-1} \)
इसलिए, वাঁट हॉफ कारक, \( i = \frac{(M_2)_{\text{cal}}}{(M_2)_{\text{obs}}} = \frac{78\text{ g mol}^{-1}}{72.54\text{ g mol}^{-1}} = 1.0753 \)
मान लीजिए \( \text{CH}_2\text{FCOOH} \) के पृथक्करण की डिग्री \( \alpha \) है।
\( \text{CH}_2\text{FCOOH} \leftrightarrow \text{CH}_2\text{FCOO}^- + \text{H}^+ \)
आरंभ में मोल: \( C, 0, 0 \)
साम्यावस्था पर मोल: \( C(1 - \alpha), C\alpha, C\alpha \), Total \( = C(1 + \alpha) \)
\( i = \frac{C(1 + \alpha)}{C} = 1 + \alpha \Rightarrow \alpha = i - 1 = 1.0753 - 1 = 0.0753 \)
अब, \( K_a \) का मान इस प्रकार दिया गया है:
\( K_a = \frac{[\text{CH}_2\text{FCOO}^-][\text{H}^+]}{[\text{CH}_2\text{FCOOH}]} = \frac{C\alpha \cdot C\alpha}{C(1 - \alpha)} = \frac{C\alpha^2}{1 - \alpha} \)
घोल का आयतन \( 500\text{ mL} \) लेते हुए, हमारे पास सांद्रता है:
\( C = \frac{19.5}{\frac{78}{500}} \times 1000\text{M} = 0.5\text{ M} \)
∴ \( K_a = \frac{C\alpha^2}{1 - \alpha} = \frac{0.5 \times (0.0753)^2}{1 - 0.0753} = \frac{0.002835}{0.9247} = 0.00307 \text{ (लगभग)} = 3.07 \times 10^{-3} \)

मुख्य बिंदु:

• वान्त हॉफ गुणक \( i = M_{\text{theoretical}} / M_{\text{observed}} \)
• वियोजन की मात्रा \( \alpha = i - 1 \) (द्वि-आयनिक वियोजन के लिए)।
• वियोजन स्थिरांक \( K_a = C\alpha^2 / (1 - \alpha) \)。

आम गलतियाँ:

• प्रेक्षित और परिकलित मोलर द्रव्यमान को आपस में उलटा रख देना।

Exam Tips:

a) दोनों प्रकार के मोलर द्रव्यमानों की सही गणना करें।
b) \( K_a \) निकालते समय सांद्रता \( C \) का सही मान रखें।

 

Question 1.34: \( 293\text{ K} \) पर जल का वाष्प दाब \( 17.535\text{ mm Hg} \) है। यदि \( 25\text{ g} \) ग्लूकोस को \( 450\text{ g} \) जल में घोले तो \( 293\text{ K} \) पर जल का वाष्प दाब परिकलित कीजिए।

Answer:

पानी का वाष्प दाब, \( p_1^\circ = 17.535\text{ mm Hg} \)
ग्लूकोस का द्रव्यमान, \( w_2 = 25\text{ g} \)
पानी का द्रव्यमान, \( w_1 = 450\text{ g} \)
हम जानते हैं कि, ग्लूकोस (\(\text{C}_6\text{H}_{12}\text{O}_6\)) का मोलर द्रव्यमान, \( M_2 = 6 \times 12 + 12 \times 1 + 6 \times 16 = 180\text{ g mol}^{-1} \)
पानी का मोलर द्रव्यमान, \( M_1 = 18\text{ g mol}^{-1} \)
फिर, ग्लूकोस के मोलों की संख्या, \( n_2 = \frac{25\text{ g}}{180\text{ g mol}^{-1}} = 0.139\text{ mol} \)
और, पानी के मोलों की संख्या, \( n_1 = \frac{450\text{ g}}{18\text{ g mol}^{-1}} = 25\text{ mol} \)
हम जानते हैं कि,
\( \frac{p^\circ - p_1}{p_1^\circ} = \frac{n_2}{n_2 + n_1} \Rightarrow \frac{17.535 - p_1}{17.535} = \frac{0.139}{0.139 + 25} \)
\( \Rightarrow \frac{17.535 - p_1}{17.535} = \frac{0.139}{25.139} \)
\( \Rightarrow 17.535 - p_1 = \frac{0.139 \times 17.535}{25.139} = 0.0969 \)
\( \Rightarrow 17.535 - p_1 = 0.097 \Rightarrow p_1 = 17.44\text{ mm Hg} \)
अतः जल का वाष्प दाब \( 17.44\text{ mm Hg} \) है।

मुख्य बिंदु:

• वाष्प दाब के आपेक्षिक अवनमन के सूत्र का प्रयोग।
• विलेय और विलायक दोनों के मोलों की संख्या की गणना।
• शुद्ध जल का वाष्प दाब \( 17.535\text{ mm Hg} \)

आम गलतियाँ:

• हर में \( n_1 + n_2 \) की जगह केवल \( n_1 \) लिख देना (तनु विलयन न होने पर पूरा जोड़ें)।

Exam Tips:

a) मान रखते समय सावधानी बरतें।
b) दशमलव के बाद कम से कम तीन अंकों तक गणना करें।

 

Question 1.35: \( 298\text{ K} \) पर मेथेन की बेंजीन पर मोललता का हेन्री स्थिरांक \( 4.27 \times 10^5\text{ mm Hg} \) है। \( 298\text{ K} \) तथा \( 760\text{ mm Hg} \) दाब पर मेथेन की बेंजीन में विलेयता परिकलित कीजिए।

Answer:

यहाँ, \( p = 760\text{ mm Hg}, k_H = 4.27 \times 10^5\text{ mm Hg} \) हेन्री के नियम के अनुसार, \( p = k_H x \)
\( \Rightarrow x = \frac{p}{k_H} = \frac{760\text{ mm Hg}}{4.27 \times 10^5\text{ mm Hg}} = 177.99 \times 10^{-5} = 178 \times 10^{-5} \text{ (लगभग)} \)
अतः, बेंजीन में मेथेन का मोल अंश \( 178 \times 10^{-5} \) है।

मुख्य बिंदु:

• हेनरी का नियम: \( p = k_H x \)
• मोल अंश \( x \) ही यहाँ विलेयता को व्यक्त करता है।
• दाब और हेनरी स्थिरांक दोनों के मात्रक समान होने चाहिए (\(\text{mm Hg}\))।

आम गलतियाँ:

• सूत्र को \( k_H = p \cdot x \) लिख देना।

Exam Tips:

a) \( x = p / k_H \) सूत्र का सीधा उपयोग करें।
b) वैज्ञानिक संकेतन (Scientific Notation) में उत्तर दें।

 

Question 1.36: \( 100\text{ g} \) द्रव A (मोलर द्रव्यमान \( 140\text{ g mol}^{-1} \)) को \( 1000\text{ g} \) द्रव B (मोलर द्रव्यमान \( 180\text{ g mol}^{-1} \)) में घोला गया। शुद्ध द्रव B का वाष्प दाब \( 500\text{ jvवत} \) पाया गया। शुद्ध द्रव A का वाष्प दाब तथा विलयन में उसका वाष्प दाब परिकलित कीजिए यदि विलयन का कुल वाष्प दाब \( 475\text{ Torr} \) हो।

Answer:

द्रव A के मोलों की संख्या, \( n_A = \frac{100\text{ g}}{140\text{ g mol}^{-1}} = 0.714 \) मोल
द्रव B के मोलों की संख्या, \( n_B = \frac{1000\text{ g}}{180\text{ g mol}^{-1}} = 5.556 \) मोल
फिर, A का मोल अंश, \( x_A = \frac{n_A}{n_A + n_B} = \frac{0.714}{0.714 + 50556} = 0.114 \)
और, B का मोल भिन्न, \( x_B = 1 - 0.114 = 0.886 \)
शुद्ध द्रव B का वाष्प दाब, \( p_B^\circ = 500\text{ Torr} \)
अतः, विलयन में द्रव B का वाष्प दाब, \( p_B = p_B^\circ x_B = 500 \times 0.886 = 443\text{ Torr} \)
विलयन का कुल वाष्प दाब, कुल \( p_{\text{total}} = 475\text{ Torr} \)
अतः, विलयन में द्रव A का वाष्प दाब,
\( p_A = p_{\text{total}} - p_B = 475 - 443 = 32\text{ Torr} \)
अब, \( p_A = p_A^\circ x_A \Rightarrow p_A^\circ = \frac{p_A}{x_A} = \frac{32}{0.114} = 280.7\text{ Torr} \)
अतः, शुद्ध द्रव A का वाष्प दाब \( 280.7\text{ Torr} \) है।

मुख्य बिंदु:

• डाल्टन के आंशिक दाब के नियम से कुल दाब \( p_{\text{total}} = p_A + p_B \)
• राउल्ट के नियम से किसी घटक का आंशिक दाब \( p_A = p_A^\circ x_A \)
• मोल अंशों का योग \( 1 \) होता है।

आम गलतियाँ:

• कुल दाब में से घटक का दाब घटाते समय गणना की गलती करना।

Exam Tips:

a) पहले दोनों द्रवों के मोल और मोल अंश निकालें।
b) चरणों में हल करें ताकि भ्रम न हो।

 

Question 1.37: \( 328\text{ K} \) पर शुद्ध ऐसिटोन एवं क्लोरोफॉर्म के वाष्प दाब क्रमशः \( 741.8\text{ mm Hg} \) तथा \( 632.8\text{ mm Hg} \) हैं। यह मानते हुए कि संघटन के सम्पूर्ण परास में ये आदर्श विलयन बनाते हैं, \( P_{\text{एसीटोन}}, P_{\text{क्लोरोफॉर्म}} \) तथा \( P_{\text{विलयन}} \) को ऐसिटोन के फलन के रूप में आलेखित कीजिए। मिश्रण के विभिन्न संघटन के प्रेक्षित प्रायोगिक आंकड़े निम्नलिखित हैं।
100 \times (\text{x}_{\text{एसीटोन}}) : 0 | 11.8 | 23.4 | 36.0 | 50.8 | 58.2 | 64.5 | 72.1
\( P_{\text{एसीटोन}} /\text{mm Hg} \) : 0 | 54.9 | 110.1 | 202.4 | 322.7 | 405.9 | 454.1 | 521.1
\( P_{\text{क्लोरोफॉर्म}} /\text{mm Hg} \) : 632.8 | 548.1 | 469.4 | 359.7 | 257.7 | 193.6 | 161.2 | 120.7
उपरोक्त आंकड़ों को भी उसी ग्राफ में आलेखित कीजिए और इंगित कीजिए कि क्या इसमें आदर्श विलयन से धनात्मक अथवा ऋणात्मक विचलन है?

Answer:

ग्राफ से यह देखा जा सकता है कि \( p_{\text{कुल}} \) में विलयन का ढाल नीचे की ओर घटता है। इसलिए, विलयन का व्यवहार आदर्श से ऋणात्मक विचलन को दर्शाता है।

मुख्य बिंदु:

• ऐसिटोन और क्लोरोफॉर्म का मिश्रण ऋणात्मक विचलन (Negative Deviation) प्रदर्शित करता है।
• इसका कारण दोनों के बीच मजबूत हाइड्रोजन बंध का बनना है।
• प्रायोगिक मान आदर्श रेखा से नीचे आते हैं।

आम गलतियाँ:

• धनात्मक और ऋणात्मक विचलन के ग्राफ में अंतर न समझ पाना।

Exam Tips:

a) ग्राफ बनाते समय सैद्धांतिक (आदर्श) रेखा को डॉटेड लाइन से दिखाएं।
b) ऋणात्मक विचलन के लिए वक्र नीचे की ओर झुकता है।

 

Question 1.38: संघटनों के संपूर्ण परास में बेंजीन तथा टॉलूवीन आदर्श विलयन बनाते हैं। \( 300\text{ K} \) पर शुद्ध बेंजीन तथा टॉलूवीन का वाष्प दाब क्रमशः \( 50.71\text{ mm Hg} \) तथा \( 32.06\text{ mm Hg} \) है। यदि \( 80\text{ g} \) बेंजीन को \( 100\text{ g} \) टॉलूवीन में मिलाया जावे तो वाष्प अवस्था में उपस्थित बेंजीन के मोल-अंश परिकलित कीजिए।

Answer:

बेंजीन का मोलर द्रव्यमान \( (\text{C}_6\text{H}_6) = 6 \times 12 + 6 \times 1 = 78\text{ g mol}^{-1} \)
टॉलूवीन का मोलर द्रव्यमान \( (\text{C}_6\text{H}_5\text{CH}_3) = 7 \times 12 + 8 \times 1 = 92\text{ g mol}^{-1} \)
अब, \( 80 \) ग्राम बेंजीन में मोलों की संख्या \( = \frac{80}{78} = 1.026 \) मोल
और, \( 100 \) ग्राम टॉलूवीन में मोलों की संख्या \( = \frac{100}{92} = 1.087 \) मोल
∴ बेंजीन का मोल अंश, \( x_b = \frac{1.026}{1.026 + 1.087} = 0.486 \)
और, टॉलूवीन का मोल अंश, \( x_t = 1 - 0.486 = 0.514 \)
यह दिया गया है कि शुद्ध बेंजीन का वाष्प दाब, \( p_b^\circ = 50.71\text{ mm Hg} \)
और, शुद्ध टॉलूवीन का वाष्प दाब, \( p_t^\circ = 32.06\text{ mm Hg} \)
इसलिए, बेंजीन का आंशिक वाष्प दाब, \( p_b = x_b p_b^\circ = 0.486 \times 50.71 = 24.645\text{ mm Hg} \)
और, टॉलूवीन का आंशिक वाष्प दाब, \( p_t = x_t p_t^\circ = 0.514 \times 32.06 = 16.479\text{ mm Hg} \)
इसलिए, वाष्प अवस्था में बेंजीन का मोल अंश निम्न द्वारा दिया जाता है:
\( y_b = \frac{p_b}{p_b + p_t} = \frac{24.645}{24.645 + 16.479} = \frac{24.645}{41.124} = 0.599 = 0.6 \)

मुख्य बिंदु:

• वाष्प अवस्था में किसी घटक का मोल अंश \( y_i = p_i / p_{\text{total}} \)
• पहले द्रव अवस्था में मोल अंश निकालकर आंशिक दाब ज्ञात करते हैं।
• बेंजीन और टॉलूवीन का मिश्रण आदर्श विलयन बनाता है।

आम गलतियाँ:

• द्रव अवस्था के मोल अंश \( (x) \) और वाष्प अवस्था के मोल अंश \( (y) \) को एक ही समझ लेना।

Exam Tips:

a) वाष्प अवस्था के लिए डाल्टन के नियम का उपयोग करें (\( y_i = p_i / p_{\text{total}} \))。
b) गणना के सभी चरणों को स्पष्ट लिखें।

 

Question 1.39: वायु अनेक गैसों की मिश्रण है। \( 298\text{ K} \) पर आयतन में मुख्य घटक ऑक्सीजन और नाइट्रोजन लगभग \( 20\% \) एवं \( 79\% \) के अनुपात में हैं। \( 10 \) वायुमंडल दाब पर जल वायु के साथ साम्य में है। \( 298\text{ K} \) पर यदि ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन के हेन리의 स्थिरांक क्रमशः \( 3.30 \times 10^7 \) तथा \( 6.51 \times 10^7 \) है, तो जल में इन गैसों का संघटन ज्ञात कीजिए।

Answer:

हवा में ऑक्सीजन \( (\text{O}_2) \) का प्रतिशत \( = 20\% \)
हवा में नाइट्रोजन \( (\text{N}_2) \) का प्रतिशत \( = 79\% \)
साथ ही, यह भी दिया गया है कि पानी हवा के साथ संतुलन में है, कुल दाब \( 10\text{ atm}, \) यानी \((10 \times 760)\text{ mm Hg} = 7600\text{ mm Hg} \)
इसलिए,
ऑक्सीजन का आंशिक दाब, \( p_{\text{O}_2} = \frac{20}{100} \times 7600\text{ mm Hg} = 1520\text{ mm Hg} \)
नाइट्रोजन का आंशिक दाब, \( p_{\text{N}_2} = \frac{79}{100} \times 7600\text{ mm Hg} = 6004\text{ mm Hg} \)
अब, हेन्री के नियम के अनुसार: \( p = k_H \cdot x \)
ऑक्सीजन के लिए: \( p_{\text{O}_2} = k_H \cdot x_{\text{O}_2} \)
\( \Rightarrow x_{\text{O}_2} = \frac{p_{\text{O}_2}}{k_H} = \frac{1520\text{ mm Hg}}{3.30 \times 10^7\text{ mm Hg}} = 4.6110^{-5} \)
नाइट्रोजन के लिए: \( p_{\text{N}_2} = k_H \cdot x_{\text{N}_2} \)
\( \Rightarrow x_{\text{N}_2} = \frac{p_{\text{N}_2}}{k_H} = \frac{6004\text{ mm Hg}}{6.51 \times 10^7\text{ mm Hg}} = 9.22 \times 10^{-5} \)
इसलिए, पानी में ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के मोल अंश क्रमशः \( 4.61 \times 10^{-5} \) और \( 9.22 \times 10^{-5} \) हैं।

मुख्य बिंदु:

• आंशिक दाब = (गैस का प्रतिशत / 100) × कुल दाब।
• हेनरी का नियम \( p = k_H x \) लगाकर मोल अंश ज्ञात किया जाता है।
• कुल दाब को \( \text{mm Hg} \) में बदलना आसान रहता है।

आम गलतियाँ:

• कुल दाब से गुणा किए बिना सीधे प्रतिशत को दाब मान लेना।

Exam Tips:

a) आंशिक दाब निकालने के लिए डाल्टन के आंशिक दाब के नियम का प्रयोग करें।
b) अंत में दोनों गैसों के मोल अंश अलग-अलग स्पष्ट दिखाएं।

 

Question 1.40: यदि जल का परासरण दाब \( 27^\circ\text{C} \) पर \( 0.75 \) वायुमंडल हो तो \( 2.5 \) लीटर जल में घुले \(\text{CaCl}_2 \) (\( i = 2.47 \)) की मात्रा परिकलित कीजिए।

Answer:

हम जानते हैं कि, \( \pi = i \cdot C \cdot RT \Rightarrow \pi = i \cdot \frac{n}{V} \cdot RT = i \cdot \frac{w}{MV} \cdot RT \)
\( \Rightarrow w = \frac{\pi \cdot M \cdot V}{i \cdot R \cdot T} \)
जहाँ, \( \pi = 0.75\text{ atm} \)
\( V = 2.5\text{ L} \)
\( i = 2.47 \)
\( T = (27 + 273)\text{ K} = 300\text{ K} \)
तथा, \( R = 0.0821\text{ L atm K}^{-1}\text{ mol}^{-1} \) और \( M = 1 \times 40 + 2 \times 35.5 = 111\text{ g mol}^{-1} \)
इसलिए, \( w = \frac{0.75 \times 111 \times 2.5}{2.47 \times 0.0821 \times 300} = 3.42\text{ g} \)
अतः, \(\text{CaCl}_2 \) की अभीष्ट मात्रा \( 3.42\text{ g} \) है।

मुख्य बिंदु:

• वांट हॉफ गुणक वाले विलयनों के लिए परासरण दाब का सूत्र: \( \pi = i C R T \)
• \( \text{CaCl}_2 \) के लिए मोलर द्रव्यमान \( 111\text{ g/mol} \)
• तापमान को हमेशा केल्विन में बदला जाता है।

आम गलतियाँ:

• वांट हॉफ गुणक \( i \) को सूत्र में शामिल न करना।
• सेल्सियस तापमान को केल्विन में न बदलना।

Exam Tips:

a) सूत्र को \( w \) के पदों में व्यवस्थित करके हल करना अधिक सुविधाजनक है।
b) सभी मानों की इकाइयां एक समान प्रणाली में रखें।

 

Question 1.41: \( 2 \) लीटर जल में \( 25^\circ\text{C} \) पर \( \text{K}_2\text{SO}_4 \) के \( 25\text{ mg} \) को घोलने पर बनने वाले विलयन का परासरण दाब, यह मानते हुए कि \( \text{K}_2\text{SO}_4 \) पूर्णतः वियोजित हो गया है।

Answer:

जब \( \text{K}_2\text{SO}_4 \) को पानी में घोला जाता है, \( \text{K}^+ \) तथा \( \text{SO}_4^{2-} \) आयन उत्पन्न होते हैं।
\( \text{K}_2\text{SO}_4 \to 2\text{K}^+ + \text{SO}_4^{2-} \)
उत्पादित आयनों की कुल संख्या \( = 3 \)
इसलिए, \( i = 3 \)
दिया गया है,
\( w = 25\text{ mg} = 0.025\text{ g} \)
\( V = 2\text{ L} \)
\( T = 250^\circ\text{C} = (25 + 273)\text{ K} = 298\text{ K} \) (नोट: प्रश्न में \( 25^\circ\text{C} \) होना चाहिए)
हम जानते हैं कि:
\( R = 0.0821\text{ L atm K}^{-1}\text{ mol}^{-1} \) और
\( M = (2 \times 39) + (1 \times 32) + (4 \times 16) = 174\text{ g mol}^{-1} \)
निम्नलिखित संबंध लागू करने पर,
\( \pi = i \cdot \frac{n}{V} \cdot RT = i \cdot \frac{w}{M \cdot V} \cdot RT \)
\( = 3 \times \frac{0.025}{174} \times \frac{1}{2} \times 0.0821 \times 298 \)
\( = 5.27 \times 10^{-3}\text{ atm} \)

मुख्य बिंदु:

• \( \text{K}_2\text{SO}_4 \) के पूर्ण वियोजन से \( 3 \) आयन मिलते हैं, अतः \( i = 3 \)
• मिलीग्राम को ग्राम में बदलना आवश्यक है (\( 1\text{ mg} = 10^{-3}\text{ g} \))。
• परासरण दाब का सूत्र \( \pi = i \cdot \frac{w}{M V} R T \)

आम गलतियाँ:

• \( i \) का मान \( 3 \) के बजाय \( 1 \) या \( 2 \) रख देना।
• मिलीग्राम को ग्राम में न बदलना।

Exam Tips:

a) मजबूत विद्युत अपघट्यों के लिए \( i \) का मान उनके द्वारा दिए जाने वाले कुल आयनों की संख्या के बराबर होता है।
b) गणना में घाتاंकों का विशेष ध्यान रखें।

 

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