Step-by-Step Textbook Solutions for Class 12 Political Science Chapter 03 नियोजित विकास की राजनीति
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Question 1: ‘बॉम्बे प्लान’ के बारे में कौन सा बयान सही नहीं है?
(क) यह भारत के आर्थिक भविष्य का एक ब्लू प्रिंट था।
(ख) इसमें उद्योगों के ऊपर राज्य के स्वामित्व का समर्थन किया गया था।
(ग) इसकी रचना कुछ अग्रणी उद्योगपतियों ने की थी।
(घ) इसमें नियोजन के विचार का पुरजोर समर्थन गया था।
Answer:
(ख) इसमें उद्योगों के ऊपर राज्य के स्वामित्व का समर्थन किया गया था।
मुख्य बिंदु:
• बॉम्बे प्लान देश के कुछ अग्रणी उद्योगपतियों द्वारा 1944 में तैयार किया गया एक आर्थिक खाका था।
• इस योजना में देश के नियोजित विकास पर जोर दिया गया था।
• इसमें राज्य के भारी नियंत्रण की बजाय उद्योगों में निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों की भूमिका पर विचार किया गया था।
आम गलतियाँ:
• छात्र अक्सर बॉम्बे प्लान को पूरी तरह से समाजवादी समझ लेते हैं जबकि यह उद्योगपतियों द्वारा बनाया गया था।
• विकल्पों को बिना पढ़े गलत निशान लगा देना।
• 'ब्लू प्रिंट' और 'राज्य के स्वामित्व' में अंतर न समझ पाना।
Exam Tips:
a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में सभी विकल्पों को ध्यान से पढ़ें।
b) बॉम्बे प्लान के वर्ष (1944) और इसके निर्माताओं (उद्योगपतियों) को याद रखें।
c) उत्तर लिखते समय केवल सही विकल्प का क्रमांक और कथन लिखें।
Question 2: भारत ने शुरूआती दौर में विकास की जो नीति अपनाई उसमें से कौन-सा विचार शामिल नहीं था?
(क) नियोजन
(ख) उदारीकरण
(ग) सहकारी खेती
(घ) आत्मनिर्भरता
Answer:
(ख) उदारीकरण
मुख्य बिंदु:
• स्वतंत्रता के बाद भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था और केंद्रीय नियोजन को अपनाया था।
• उदारीकरण की नीति को आधिकारिक रूप से 1991 के आर्थिक सुधारों के दौरान अपनाया गया था।
• शुरुआती दौर में आत्मनिर्भरता और सहकारी खेती जैसी नीतियां विकास का हिस्सा थीं।
आम गलतियाँ:
• शुरुआती दौर और 1991 के बाद की नीतियों में भ्रमित होना।
• उदारीकरण को प्रारंभिक दौर की नीति मान लेना।
• नियोजन और उदारीकरण के अंतर को न समझना।
Exam Tips:
a) भारतीय विकास के प्रारंभिक चरण (1950-1980) और 1991 के बाद के चरण को अलग-अलग समझें।
b) उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) 1991 से संबंधित हैं।
c) प्रश्न में 'शामिल नहीं था' शब्दों पर विशेष ध्यान दें।
Question 3: भारत में नियोजित अर्थव्यवस्था चलाने का विचार-ग्रहण किया गया था:
(क) बॉम्बे प्लान से
(ख) सोवियत खेमे के देशों के अनुभवों से
(ग) समाज के बारे में गाँधीवादी विचार से
(घ) किसान संगठनों की माँगों से
(क) सिर्फ ख और घ
(ख) सिर्फ क और ख
(ग) सिर्फ घ और ग
(घ) उपर्युक्त सभी
Answer:
(घ) उपर्युक्त सभी
मुख्य बिंदु:
• भारत का नियोजित विकास किसी एक विचारधारा तक सीमित नहीं था बल्कि इसमें कई स्रोतों का प्रभाव था।
• सोवियत संघ की पंचवर्षीय योजनाओं से प्रेरणा ली गई थी।
• बॉम्बे प्लान और गांधीवादी तथा किसान संगठनों के विचारों ने भी भारतीय नियोजन की रूपरेखा को प्रभावित किया।
आम गलतियाँ:
• केवल सोवियत संघ या केवल बॉम्बे प्लान को एकमात्र कारण मान लेना।
• संयुक्त विकल्पों (क, ख, ग, घ) को समझने में गलती करना।
• गांधीवादी विचारों की नियोजन में भूमिका को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) भारतीय नियोजन के विभिन्न वैचारिक स्रोतों की सूची बनाएं।
b) बहुविकल्पीय प्रश्न में सभी उप-कथनों का विश्लेषण करें।
c) संयुक्त विकल्पों वाले प्रश्नों का उत्तर सावधानी से दें।
Question 4: निम्नलिखित का मेल करें:
(क) चरण सिंह
(ख) पी. सी. महालनोबिस
(ग) बिहार का अकाल
(घ) वर्गीज कुरियन
(i) औद्योगीकरण
(ii) जोनिंग
(iii) किसान
(iv) सहकारी डेयरी
Answer:
(क) चरण सिंह - (iii) किसान
(ख) पी. सी. महालनोबिस - (i) औद्योगीकरण
(ग) बिहार का अकाल - (ii) जोनिंग
(घ) वर्गीज कुरियन - (iv) सहकारी डेयरी
मुख्य बिंदु:
• चौधरी चरण सिंह ने कृषि और किसानों के हितों की जोरदार पैरवी की थी।
• पी. सी. महालनोबिस दूसरी पंचवर्षीय योजना के मुख्य वास्तुकार थे जो औद्योगीकरण पर केंद्रित थी।
• बिहार के अकाल के समय खाद्यान्न संकट और जोनिंग (क्षेत्रबंदी) की नीति चर्चा में आई थी।
• वर्गीज कुरियन ने 'श्वेत क्रांति' और अमूल के माध्यम से सहकारी डेयरी को बढ़ावा दिया।
आम गलतियाँ:
• महालनोबिस को कृषि से या चरण सिंह को औद्योगीकरण से मिला देना।
• जोनिंग और बिहार के अकाल के संबंध को न समझ पाना।
• मिलान करते समय तीरों को गलत मिलाना।
Exam Tips:
a) सभी प्रमुख व्यक्तित्वों और उनकी नीतियों/क्षेत्रों को याद रखें।
b) मिलान वाले प्रश्नों में उत्तर सामने लिखकर स्पष्ट रूप से दिखाएं।
c) क्रांतियों और उनके जनक (जैसे वर्गीज कुरियन) के नाम न भूलें।
Question 5: आज़ादी के समय विकास के सवाल पर प्रमुख मतभेद क्या थे? क्या इन मतभेदों को सुलझा लिया गया?
Answer:
आज़ादी के समय भारत के सामने विकास के दो प्रमुख मॉडल थे- पहला पूंजीवादी मॉडल तथा दूसरा समाजवादी मॉडल। विकास के संबंध में मुख्य मुद्दा यह था कि विकास के लिए कौन-सा मॉडल अपनाया जाए। पूंजीवादी मॉडल के समर्थक देश में औद्योगीकरण पर अधिक बल दे रहे थे जबकि समाजवादी मॉडल के समर्थक कृषि के विकास तथा ग्रामीण क्षेत्रों की गरीबी को दूर करने को आवश्यक समझते थे। इन मतभेदों को पूरी तरह से एक बार में नहीं सुलझाया गया, बल्कि भारत ने मिश्रित अर्थव्यवस्था का मार्ग अपनाया जिसमें कृषि और उद्योग दोनों को महत्व दिया गया, हालांकि शुरुआती योजनाओं में औद्योगीकरण पर अधिक जोर रहा।
मुख्य बिंदु:
• पूंजीवादी मॉडल बनाम समाजवादी मॉडल की बहस।
• कृषि विकास और औद्योगीकरण के बीच प्राथमिकता की समस्या।
• मिश्रित अर्थव्यवस्था के जरिए दोनों विचारधाराओं के बीच संतुलन बनाने का प्रयास।
आम गलतियाँ:
• केवल एक मॉडल (पूंजीवाद या समाजवाद) का उल्लेख करना।
• यह मान लेना कि मतभेद तुरंत पूरी तरह समाप्त हो गए थे।
• कृषि और उद्योग के बीच के संघर्ष को नजरअंदाज करना।
Exam Tips:
a) पूंजीवादी और समाजवादी दोनों मॉडलों की मुख्य विशेषताओं को स्पष्ट करें।
b) बताएं कि भारत ने कैसे मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाया।
c) उत्तर को पैराग्राफ और बिंदुओं दोनों रूप में संरचित करें।
Question 6: पहली पंचवर्षीय योजना का किस चीज़ पर सबसे ज्यादा जोर था? दूसरी पंचवर्षीय योजना से किन अर्थों में अलग थी?
Answer:
प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-1956) की कोशिश देश को गरीबी के मकड़जाल से निकालने की थी। योजनाकारों का बुनियादी लक्ष्य राष्ट्रीय आय के स्तर को ऊँचा करना था। योजना को तैयार करने में जुड़े विशेषज्ञों में एक के. एन. राज थे। इस युवा अर्थशास्त्री की दलील थी कि अगले दो दशक तक भारत को अपनी चाल धीमी रखनी चाहिए। पहली पंचवर्षीय योजना में ज्यादा जोर कृषि क्षेत्र पर था। इसी योजना के अंतर्गत बाँध और सिंचाई के क्षेत्र में निवेश किया गया। विभाजन के कारण कृषि क्षेत्र को गहरी मार लगी थी इस क्षेत्र पर तुरंत ध्यान देना जरूरी था। इसके विपरीत, दूसरी पंचवर्षीय योजना में भारी उद्योगों के विकास और तीव्र औद्योगीकरण पर सबसे अधिक जोर दिया गया था।
मुख्य बिंदु:
• पहली पंचवर्षीय योजना का मुख्य केंद्र कृषि और सिंचाई था।
• दूसरी पंचवर्षीय योजना का मुख्य केंद्र भारी उद्योग और औद्योगीकरण था।
• पहली योजना में के. एन. राज का मॉडल अपनाया गया जबकि दूसरी में महालनोबिस मॉडल अपनाया गया।
आम गलतियाँ:
• दोनों योजनाओं की प्राथमिकताओं को आपस में मिला देना।
• के. एन. राज और महालनोबिस की भूमिका को गलत लिखना।
• समय अवधि (1951-56 और 1956-61) का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) दोनों योजनाओं की समयावधि और मुख्य उद्देश्य स्पष्ट रूप से लिखें।
b) अंतर स्पष्ट करने के लिए तुलनात्मक बिंदुओं का प्रयोग करें।
c) कृषि बनाम उद्योग के विवाद को संक्षिप्त में जोड़ें।
Question 7: हरित क्रांति क्या थी? हरित क्रांति के दो सकारात्मक और दो नकारात्मक परिणामों का उल्लेख करें।
Answer:
हरित क्रांति उस नीति से संबंधित है जिसके तहत सरकार ने देश के कुछ चुनिंदा क्षेत्रों (जैसे पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश) में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए उन्नत बीज, उर्वरक, सिंचाई और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराई ताकि देश खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर हो सके।
सकारात्मक परिणाम:
1. देश में गेहूँ और चावल के उत्पादन में भारी वृद्धि हुई जिससे भारत खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर बन गया।
2. कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का प्रयोग बढ़ा और किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरी।
नकारात्मक परिणाम:
1. इससे समाज में अमीर और गरीब किसानों के बीच की खाई चौड़ी हो गई क्योंकि बड़े किसानों के पास ही आधुनिक संसाधनों तक पहुंच थी।
2. यह विकास केवल कुछ ही राज्यों (जैसे पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी) तक सीमित रहा जिससे क्षेत्रीय असमानता बढ़ी।
मुख्य बिंदु:
• उन्नत बीज, उर्वरक और सिंचाई पर जोर।
• खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता (सकारात्मक)।
• क्षेत्रीय और वर्गीय असमानता में वृद्धि (नकारात्मक)।
आम गलतियाँ:
• केवल सकारात्मक परिणाम लिखना और नकारात्मक परिणामों को छोड़ देना।
• हरित क्रांति के समय और प्रभावित क्षेत्रों का उल्लेख न करना।
• इसे केवल एक वैज्ञानिक बदलाव बताना, सामाजिक-आर्थिक प्रभाव न लिखना।
Exam Tips:
a) हरित क्रांति की परिभाषा स्पष्ट दें।
b) सकारात्मक और नकारात्मक बिंदुओं को अलग-अलग हेडिंग के साथ लिखें।
c) राज्यों के नाम (पंजाब, हरियाणा आदि) अवश्य लिखें।
Question 8: दूसरी पंचवर्षीय योजना के दौरान औद्योगिक विकास बनाम कृषि विकास का विवाद चला था। इस विवाद में क्या-क्या तर्क दिए गए थे?
Answer:
शुरुआती दौर में विकास की जो रणनीतियाँ अपनाई गई उन पर बड़े सवाल उठे। यहाँ हम ऐसे दो सवालों की चर्चा करेंगे जो आज भी प्रासंगिक हैं:
कृषि बनाम उद्योग: हम एक बड़े सवाल से पहले ही परिचित हो चुके हैं। यह सवाल है कि भारत जैसी पिछड़ी अर्थव्यवस्था में कृषि और उद्योग के बीच कितना संसाधन लगाए जाने चाहिए। कई लोगों का मानना था कि दूसरी पंचवर्षीय योजना में कृषि के विकास की रणनीति का अभाव था और इस योजना के दौरान उद्योगों पर जोर देने के कारण खेती और ग्रामीण इलाकों को चोट पहुँचेगी। जे.सी. कुमारप्पा जैसे गाँधीवादी अर्थशास्त्रियों ने एक वैकल्पिक योजना का खाका प्रस्तुत किया जिसमें ग्रामीण औद्योगीकरण पर ज्यादा जोर था। चौधरी चरण सिंह ने भारतीय अर्थव्यवस्था के नियोजन में कृषि को केंद्र में रखने की बात बड़े सुविचारित और दमदार ढंग से उठाई थी।
मुख्य बिंदु:
• कृषि बनाम उद्योग में संसाधनों के आबंटन को लेकर विवाद।
• गांधीवादी अर्थशास्त्री जे.सी. कुमारप्पा और चौधरी चरण सिंह द्वारा कृषि को प्राथमिकता देने के तर्क।
• भारी उद्योगों के समर्थकों का तर्क था कि देश की गरीबी और पिछड़ेपन को दूर करने के लिए तीव्र औद्योगीकरण जरूरी है।
आम गलतियाँ:
• केवल एक पक्ष (उद्योग या कृषि) के तर्कों को लिखना।
• प्रमुख विचारकों (जैसे जे.सी. कुमारप्पा और चरण सिंह) के योगदान का उल्लेख न करना।
• विवाद के मूल कारण को न समझ पाना।
Exam Tips:
a) दोनों पक्षों के तर्कों को संतुलित रूप से प्रस्तुत करें।
b) विचारकों के नाम और उनके दृष्टिकोण का स्पष्ट उल्लेख करें।
c) उत्तर को तार्किक और व्यवस्थित ढंग से लिखें।
Question 9: "अर्थव्यवस्था में राज्य की भूमिका पर जोर देकर भारतीय नीति-निर्माताओं ने गलती की थी। अगर शुरुआत से ही निजी क्षेत्र को खुली छूट दी जाती तो भारत का विकास कही ज्यादा बेहतर तरीके से होता।" इस विचार के पक्ष या विपक्ष में अपने तर्क दीजिए।
Answer:
भारत को शुरूआत में ही निजी क्षेत्र को खुली छूट देनी चाहिए। परंतु इस कथन से पूर्णतः सहमत नहीं हुआ जा सकता, क्योंकि आजादी के समय देश की आर्थिक, सामाजिक परिस्थितियाँ ऐसी नहीं थी कि सरकार निजी क्षेत्र को खुली छूट दे देती। आजादी के समय अर्थव्यवस्था पर राज्य की भूमिका पर अधिक जोर दिया गया था, अर्थात आर्थिक गतिविधियों को राज्य नियंत्रित करता था। उस समय कृषि क्षेत्र के विकास का कार्यक्रम सर्वप्रथम तथा कृषि क्षेत्र का विकास राज्य के नियंत्रणधीन ही अधिक ठीक ढंग से हो सकता था। निजी क्षेत्र के पास इतनी पूँजी नहीं थी कि वह भारी उद्योगों में निवेश कर सके, अतः राज्य की भूमिका आवश्यक थी।
मुख्य बिंदु:
• स्वतंत्रता के समय निजी क्षेत्र के पास पर्याप्त पूंजी और अनुभव का अभाव था।
• बुनियादी और भारी उद्योगों के विकास के लिए राज्य का हस्तक्षेप जरूरी था।
• राज्य के नियंत्रण से सामाजिक न्याय और संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित किया जा सकता था।
आम गलतियाँ:
• केवल एकतरफा विचार लिखना और ऐतिहासिक परिस्थितियों की उपेक्षा करना।
• प्रश्न में दिए गए कथन से बिना सोचे-समझे पूरी तरह सहमत हो जाना।
• उचित तर्कों के साथ अपने पक्ष को प्रमाणित न करना।
Exam Tips:
a) अपने उत्तर में स्पष्ट करें कि आप कथन से सहमत हैं या असहमत और क्यों।
b) ऐतिहासिक संदर्भ (1950 का दशक) को ध्यान में रखकर उत्तर लिखें।
c) राज्य के नियंत्रण के लाभों का उल्लेख करें।
Question 10: निम्नलिखित अवतरण को पढ़ें और इसके आधार पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दें:
आजादी के बाद के आरंभिक वर्षों में कांग्रेस पार्टी के भीतर दो परस्पर विरोधी प्रवृत्तियाँ पनपीं। एक तरफ राष्ट्रीय पार्टी कार्यकारिणी ने राज्य के स्वामित्व का समाजवादी सिद्धांत अपनाया, उत्पादकता को बढ़ाने के साथ-साथ आर्थिक संसाधनों के संकेंद्रण को रोकने के लिए अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों का नियंत्रण और नियमन किया। दूसरी तरफ कांग्रेस की राष्ट्रीय सरकार ने निजी निवेश के लिए उदार आर्थिक नीतियाँ अपनाईं और उसके बढ़ावा के लिए विशेष कदम उठाए। इसे उत्पादन में अधिकतम वृद्धि की अकेली कसौटी पर जायज ठहराया गया।
(क) यहाँ लेखक किस अंतर्विरोध की चर्चा कर रहा है? ऐसे अंतर्विरोध के राजनीतिक परिणाम क्या होंगे? क्या इसका संबंध विपक्षी दलों की प्रकृति से था?
(ख) अगर लेखक की बात सही है तो फिर बताए कि कांग्रेस इस नीति पर क्यों चल रही थी? क्या इसका संबंध विपक्षी दलों की प्रकृति से था?
(ग) क्या कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व एवं इसके प्रांतीय नेताओं के बीच भी कोई अंतर्विरोध था?
Answer:
(क) इस लेख में लेखक द्वारा कांग्रेस में दो समूहों की चर्चा की गई है जो क्रमशः वामपंथी विचारधारा से और दूसरा पक्ष दक्षिणपंथी विचारधारा से प्रभावित था। इस प्रकार अंतर्विरोध के राजनीतिक परिणाम देश में टकराव, वामपंथी संगठन तथा उनके द्वारा हिंसात्मक आंदोलनों को बढ़ावा मिलना जो लोकतंत्र में विश्वास नहीं करते यह निश्चित है।
(ख) कांग्रेस एक तरफ पूँजीवादी विरोधी दलों की नीति अपनाकर निजी क्षेत्र को दूसरी तरफ वामपंथी विरोधी दलों की साम्यवादी या समाजवादी नीतियों के अंतर्गत नियोजन, सार्वजनिक क्षेत्र को बढ़ावा देना।
(ग) कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व एवं प्रांतीय नेताओं में कुछ हद तक अंतर्विरोध पाया जाता था जहाँ केंद्रीय नेतृत्व राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों को महत्व देते थे।
मुख्य बिंदु:
• कांग्रेस पार्टी के भीतर वामपंथी (समाजवादी) और दक्षिणपंथी (पूंजीवादी/निजी क्षेत्र समर्थक) प्रवृत्तियों का द्वंद्व।
• नीतिगत विरोधाभास के कारण राजनीतिक टकराव और आंदोलनों को बढ़ावा मिलना।
• केंद्रीय नेतृत्व और प्रांतीय स्तर के नेताओं की प्राथमिकताओं में अंतर।
आम गलतियाँ:
• गद्यांश को बिना पढ़े सीधे उत्तर लिखने का प्रयास करना।
• उप-प्रश्नों (क, ख, ग) के अलग-अलग उत्तर स्पष्ट रूप से न देना।
• कांग्रेस की आंतरिक राजनीति और वैचारिक भिन्नता को न समझ पाना।
Exam Tips:
a) गद्यांश आधारित प्रश्नों में सबसे पहले गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें।
b) प्रत्येक उप-प्रश्न (क, ख, ग) का उत्तर अलग पैराग्राफ या बिंदु में लिखें।
c) उत्तर सीधे गद्यांश के संदर्भ और वैचारिक पृष्ठभूमि पर आधारित होने चाहिए।
Step-by-Step Textbook Answers: Class 12 Political Science Chapter 03 नियोजित विकास की राजनीति
Textbook Solutions for Class 12 Political Science Chapter 03 नियोजित विकास की राजनीति
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