Download NCERT Solutions for Class 12 Physics Chapter 08 वैद्युतचुंबकीय तरंगें
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Question 8.1: चित्र 8.6 में एक संधारित्र दर्शाया गया है जो \( 12\text{ cm} \) त्रिज्या की दो वृत्ताकार प्लेटों को \( 5.0\text{ cm} \) की दूरी पर रखकर बनाया गया है। संधारित्र को एक बाह्य स्रोत (जो चित्र में नहीं दर्शाया गया है) द्वारा आवेशित किया जा रहा है। आवेशकारी धारा नियत है और इसका मान \( 0.15\text{ A} \) है।
(a) धारिता एवं प्लेटों के बीच विभवांतर परिवर्तन की दर का परिकलन कीजिए।
(b) प्लेटों के बीच विस्थापन धारा ज्ञात कीजिए।
(c) क्या किर्चॉफ का प्रथम नियम संधारित्र की प्रत्येक प्लेट पर लागू होता है? स्पष्ट कीजिए।
Answer:
दिया गया है:
वृत्ताकार प्लेट की त्रिज्या \( r = 12\text{ cm} = 0.12\text{ m} \)
प्लेटों के बीच की दूरी \( d = 5\text{ cm} = 0.05\text{ m} \)
आवेशकारी धारा \( I = 0.15\text{ A} \)
मुक्त आकाश की विद्युतशीलता \( \varepsilon_0 = 8.85 \times 10^{-12}\text{ C}^2\text{N}^{-1}\text{m}^{-2} \)
(a) प्लेटों के बीच की धारिता का सूत्र है:
\( C = \frac{\varepsilon_0 A}{d} \)
जहाँ प्लेट का क्षेत्रफल \( A = \pi r^2 \) है। मान रखने पर:
\( C = \frac{\varepsilon_0 \pi r^2}{d} = \frac{8.85 \times 10^{-12} \times \pi \times (0.12)^2}{0.05} = 8.0032 \times 10^{-12}\text{ F} = 80.032\text{ pF} \)
संधारित्र की प्लेट पर आवेश \( q = CV \)
जहाँ \( V \) प्लेटों के मध्य विभवांतर है। दोनों तरफ समय \( t \) के सापेक्ष अवकलन करने पर:
\( \frac{dq}{dt} = C \frac{dV}{dt} \)
किंतु \( \frac{dq}{dt} = \text{धारा } (I) \)
\( \frac{dV}{dt} = \frac{I}{C} = \frac{0.15}{80.032 \times 10^{-2}} = 1.87 \times 10^{9}\text{ V/s} \)
(b) प्लेटों के बीच विस्थापन धारा चालन धारा के समान होती है, इसलिए विस्थापन धारा \( i_d = 0.15\text{ A} \) है।
(c) हाँ, किर्चॉफ का पहला नियम संधारित्र की प्रत्येक प्लेट पर मान्य है, यदि हम धारा के लिए चालन और विस्थापन का योग लेते हैं।
मुख्य बिंदु:
• प्लेटों के बीच की धारिता क्षेत्रफल और दूरी पर निर्भर करती है।
• विभवांतर के परिवर्तन की दर \( \frac{dV}{dt} = \frac{I}{C} \) से निकाली जाती है।
• संधारित्र के भीतर विस्थापन धारा चालन धारा के बराबर होती है।
आम गलतियाँ:
• त्रिज्या और दूरी को मीटर में बदलना भूल जाना।
• \( \varepsilon_0 \) का मान गलत रखना।
• विस्थापन धारा और चालन धारा को अलग समझना।
Exam Tips:
a) सभी दूरियों को SI मात्रक (मीटर) में बदलकर ही हल करें।
b) सूत्रों को स्पष्ट रूप से लिखें और मात्रक साथ में अवश्य लिखें।
c) सैद्धांतिक भाग में विस्थापन धारा की परिभाषा का उल्लेख करें।
Question 8.2: एक समान्तर प्लेट संधारित्र \( R = 6.0\text{ cm} \) त्रिज्या की दो वृत्ताकार प्लेटों से बना है और इसकी धारिता \( C = 100\text{ pF} \) है। संधारित्र को \( 230\text{ V}, 300\text{ rad s}^{-1} \) की (कोणीय) आवृत्ति के किसी स्रोत से जोड़ा गया है।
(a) चालन धारा का r.m.s. मान क्या है?
(b) क्या चालन धारा विस्थापन धारा के बराबर है?
(c) प्लेटों के बीच, अक्ष से \( 3.0\text{ cm} \) की दूरी पर स्थित बिन्दु पर \( B \) का आयाम ज्ञात कीजिए।
Answer:
दिया गया है:
त्रिज्या \( R = 6.0\text{ cm} = 0.06\text{ m} \)
धारिता \( C = 100\text{ pF} = 100 \times 10^{-12}\text{ F} \)
आवृत्ति वोल्टेज \( V = 230\text{ V} \)
कोणीय आवृत्ति \( \omega = 300\text{ rad s}^{-1} \)
(a) चालन धारा का rms मान \( I = \frac{V}{X_C} \)
जहाँ धारतीय प्रतिघात \( X_C = \frac{1}{\omega C} \) है।
\( I = V \times \omega C = 230 \times 300 \times 100 \times 10^{-12} = 6.9 \times 10^{-6}\text{ A} = 6.9\text{ }\mu\text{A} \)
अतः चालन धारा का rms मान \( 6.9\text{ }\mu\text{A} \) है।
(b) हाँ, चालन धारा विस्थापन धारा के बराबर होती है।
(c) चुंबकीय क्षेत्र इस प्रकार है: \( B = \frac{\mu_0 r}{2\pi R^2} I_0 \)
जहाँ \( \mu_0 = 4\pi \times 10^{-7}\text{ NA}^{-2} \)
\( I_0 \) धारा का अधिकतम मान = \( \sqrt{2} I \)
\( r \) प्लेटों के मध्य अक्ष से दूरी = \( 3.0\text{ cm} = 0.03\text{ m} \)
\( B = \frac{4\pi \times 10^{-7} \times 0.03 \times \sqrt{2} \times 6.9 \times 10^{-6}}{2\pi (0.06)^2} = 1.63 \times 10^{-11}\text{ T} \)
अतः अक्ष से \( 3.0\text{ cm} \) की दूरी पर स्थित बिन्दु पर \( B \) का आयाम \( 1.63 \times 10^{-11}\text{ T} \) है।
मुख्य बिंदु:
• धारतीय प्रतिघात \( X_C \) को कोणीय आवृत्ति और धारिता से ज्ञात किया जाता है।
• rms मान और शिखर मान (आयाम) में \( \sqrt{2} \) का संबंध होता है।
• वृत्ताकार प्लेट के भीतर चुंबकीय क्षेत्र त्रिज्या पर रेखीय रूप से निर्भर करता है।
आम गलतियाँ:
• rms धारा निकालते समय \( \sqrt{2} \) का गलत उपयोग करना।
• pF को फेरड में बदलते समय घात में गलती करना।
• ऐम्पियर के परिपथीय नियम में त्रिज्या \( r \) और \( R \) में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) मानों को मानक इकाइयों में बदलने के बाद ही गणना शुरू करें।
b) चुंबकीय क्षेत्र के व्यंजक में \( r \) और \( R \) के अंतर को ध्यान में रखें।
c) अंतिम उत्तर के साथ उचित मात्रक (\( \mu\text{A} \) या \( \text{T} \)) अवश्य लिखें।
Question 8.3: \( 10^{-10}\text{ m} \) तरंगदैर्ध्य की X-किरणों, \( 6800\text{ \AA} \) तरंगदैर्ध्य के प्रकाश तथा \( 500\text{ m} \) की रेडियो तरंगों के लिए किस भौतिक राशि का मान समान है?
Answer:
निर्वात में प्रकाश की चाल (\( 3 \times 10^8\text{ m/s} \)) सभी तरंगदैर्ध्य के लिए समान है। निर्वात में प्रकाश की चाल तरंगदैर्ध्य पर निर्भर नहीं करती है।
मुख्य बिंदु:
• विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम के सभी भाग निर्वात में एक ही चाल से चलते हैं।
• निर्वात में चाल \( c = 3 \times 10^8\text{ m/s} \) होती है।
• चाल तरंगदैर्ध्य या आवृत्ति पर निर्भर नहीं करती।
आम गलतियाँ:
• तरंगदैर्ध्य या आवृत्ति को समान मान लेना।
• ऊर्जा को सभी तरंगों के लिए समान समझना।
Exam Tips:
a) यह एक वैचारिक (conceptual) प्रश्न है, इसका सीधा उत्तर लिखें।
b) निर्वात में चाल के नियत रहने के सिद्धांत को स्पष्ट करें।
c) उत्तर में \( c = 3 \times 10^8\text{ m/s} \) का उल्लेख अवश्य करें।
Question 8.4: एक समतल विद्युत चुंबकीय तरंग निर्वात में \( z \text{-अक्ष} \) के अनुदिश चल रही है। इसके विधुत तथा चुंबकीय-क्षेत्रों के सदिश की दिशा के बारे में आप क्या कहेंगे? यदि तरंग की आवृत्ति \( 30\text{ MHz} \) हो तो उसकी तरंगदैर्ध्य कितनी होगी?
Answer:
विद्युतचुंबकीय तरंग \( z \text{-दिशा} \) के साथ निर्वात में जाती है। विद्युत क्षेत्र (\( \vec{E} \)) और चुंबकीय क्षेत्र (\( \vec{H} \)) \( x\text{-}y \) क्षैतिज में हैं। वे परस्पर लंबवत हैं।
तरंग की आवृत्ति, \( \nu = 30\text{ MHz} = 30 \times 10^6\text{ s}^{-1} \)
निर्वात में प्रकाश की गति, \( c = 3 \times 10^8\text{ m/s} \) तरंग की तरंगदैर्ध्य इस प्रकार है:
\( \lambda = \frac{c}{\nu} \)
\( \lambda = \frac{3 \times 10^8}{30 \times 10^6} = 10\text{ m} \)
मुख्य बिंदु:
• विद्युत चुंबकीय तरंगें अनुप्रस्थ प्रकृति की होती हैं।
• \( \vec{E} \) और \( \vec{H} \) दोनों संचरण की दिशा के लंबवत होते हैं।
• तरंगदैर्ध्य \( \lambda = \frac{c}{\nu} \) सूत्र से निकाली जाती है।
आम गलतियाँ:
• MHz को Hz में बदलते समय घात गलत लगाना।
• क्षेत्रों की दिशा में संचरण की दिशा को भी शामिल कर देना।
Exam Tips:
a) तरंग केPropagation की दिशा और क्षेत्रों के दोलन की परस्पर लंबवत स्थिति को स्पष्ट करें।
b) मात्रकों का सही रूपांतरण करें।
c) सूत्र \( \lambda = c/\nu \) का स्पष्ट उल्लेख करें।
Question 8.5: एक रेडियो \( 7.5\text{ MHz} \) से \( 12\text{ MHz} \) बैंड के किसी स्टेशन से समस्वरित हो सकता है। संगत तरंगदैर्ध्य बैंड क्या होगा?
Answer:
एक रेडियो न्यूनतम आवृत्ति को ट्यून कर सकता है, \( \nu_1 = 7.5\text{ MHz} = 7.5 \times 10^6\text{ Hz} \)
अधिकतम आवृत्ति, \( \nu_2 = 12\text{ MHz} = 12 \times 10^6\text{ Hz} \)
प्रकाश की गति, \( c = 3 \times 10^8\text{ m/s} \)
\( \nu_1 \) के लिए तरंगदैर्ध्य के रूप में गणना की जा सकती है:
\( \lambda_1 = \frac{c}{\nu_1} = \frac{3 \times 10^8}{7.5 \times 10^6} = 40\text{ m} \)
\( \nu_2 \) के लिए तरंगदैर्ध्य के रूप में गणना की जा सकती है:
\( \lambda_2 = \frac{c}{\nu_2} = \frac{3 \times 10^8}{12 \times 10^6} = 25\text{ m} \)
इस प्रकार, रेडियो का तरंग दैर्ध्य परास \( 40\text{ m} \) से \( 25\text{ m} \) है।
मुख्य बिंदु:
• आवृत्ति और तरंगदैर्ध्य व्युत्क्रमानुपाती होते हैं।
• न्यूनतम आवृत्ति से अधिकतम तरंगदैर्ध्य प्राप्त होती है।
• अधिकतम आवृत्ति से न्यूनतम तरंगदैर्ध्य प्राप्त होती है।
आम गलतियाँ:
• न्यूनतम आवृत्ति के साथ न्यूनतम तरंगदैर्ध्य का जोड़ा बना देना।
• आवृत्तियों के मान में \( 10^6 \) से गुणा न करना।
Exam Tips:
a) दोनों सिरों (min और max) के लिए अलग-अलग गणना करें।
b) बैंड को \( \lambda_1 \) से \( \lambda_2 \) के रूप में सही क्रम में लिखें।
c) गणना में सावधानी बरतें।
Question 8.6: एक आवेशित कण अपनी माध्य साम्यावस्था के दोनों और \( 10\text{ Hz} \) आवृत्ति से दोलन करता है। दोलक द्वारा जनित विधुत चुंबकीय तरंगों की आवृत्ति कितनी है?
Answer:
किसी दोलक द्वारा उत्पादित एक विद्युत चुंबकीय तरंग की आवृत्ति आवेशित कण के समान होती है, जो अपनी माध्य स्थिति के दोनों ओर दोलन करता है अर्थात, \( 10^9\text{ Hz} \) है। (नोट: मानक पाठ्यपुस्तक अनुसार दोलन आवृत्ति ही तरंग की आवृत्ति होती है)
मुख्य बिंदु:
• विद्युत चुंबकीय तरंगें त्वरित आवेशों द्वारा उत्पन्न होती हैं।
• उत्पन्न तरंग की आवृत्ति स्रोत (दोलक) की आवृत्ति के बराबर होती है।
• आवृत्ति अपरिवर्तित रहती है।
आम गलतियाँ:
• आवृत्ति को तरंग की चाल से भाग देना।
• स्रोत और तरंग की आवृत्तियों को अलग समझना।
Exam Tips:
a) यह वैचारिक प्रश्न है, इसे सिद्धांत के आधार पर हल करें।
b) मुख्य नियम लिखें कि तरंग की आवृत्ति = स्रोत की आवृत्ति।
c) उत्तर संक्षिप्त और स्पष्ट रखें।
Question 8.7: निर्वात में एक आवर्त विधुत चुंबकीय तरंग के चुंबकीय क्षेत्र वाले भाग का आयाम \( B_0 = 510\text{ nT} \) है। तरंग के विद्युत क्षेत्र वाले भाग का आयाम क्या है?
Answer:
निर्वात में एक विद्युत चुंबकीय तरंग के चुंबकीय क्षेत्र का आयाम,
\( B_0 = 510\text{ nT} = 510 \times 10^{-9}\text{ T} \)
निर्वात में प्रकाश की गति, \( c = 3 \times 10^8\text{ m/s} \)
विद्युत चुंबकीय तरंग का विद्युत क्षेत्र का आयाम निम्न संबंध द्वारा दिया जाता है,
\( E = cB_0 = 3 \times 10^8 \times 510 \times 10^{-9} = 153\text{ N/C} \)
इस प्रकार, तरंग का विद्युत क्षेत्र का आयाम \( 153\text{ N/C} \) है।
मुख्य बिंदु:
• विद्युत क्षेत्र और चुंबकीय क्षेत्र के आयामों का अनुपात प्रकाश की चाल के बराबर होता है (\( c = E_0/B_0 \))।
• nT (नैनो टेस्ला) को टेस्ला में बदलने के लिए \( 10^{-9} \) से गुणा करते हैं।
• विद्युत क्षेत्र का मात्रक \( \text{N/C} \) या \( \text{V/m} \) होता है।
आम गलतियाँ:
• नैनो (\( \text{n} \)) उपसर्ग का मान \( 10^{-6} \) लिख देना।
• \( c \) से गुणा करने के बजाय भाग दे देना।
Exam Tips:
a) सूत्र \( E_0 = c B_0 \) का स्पष्ट प्रयोग करें।
b) घातों का कैलकुलेशन ध्यान से करें।
c) सही मात्रक लिखना न भूलें।
Question 8.8: कल्पना कीजिए कि एक विधुत चुंबकीय तरंग के विधुत क्षेत्र का आयाम \( E_0 = 120\text{ N/C} \) है तथा इसकी आवृत्ति \( \nu = 50.0\text{ MHz} \) है। (a) \( B_0, \omega, k \) तथा \( \lambda \) ज्ञात कीजिए, (b) \( E \) तथा \( B \) के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Answer:
विद्युत क्षेत्र का आयाम, \( E_0 = 120\text{ N/C} \) तथा स्रोत की आवृत्ति, \( \nu = 50.0\text{ MHz} = 50 \times 10^6\text{ Hz} \)
प्रकाश की चाल, \( c = 3 \times 10^8\text{ m/s} \)
(a) चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता का परिमाण के रूप में दिया जाता है:
\( B_0 = \frac{E_0}{c} = \frac{120}{3 \times 10^8} = 4 \times 10^{-7}\text{ T} = 400\text{ nT} \)
स्रोतः की कोणीय आवृत्ति: \( \omega = 2\pi\nu = 2\pi \times 50 \times 10^6 = 3.14 \times 10^8\text{ rad/s} \)
प्रसार स्थिरांक के रूप में दिया गया है: \( k = \frac{\omega}{c} = \frac{3.14 \times 10^8}{3 \times 10^8} = 1.05\text{ rad/m} \)
तरंग की तरंगदैर्ध्य लिखे सकते हैं: \( \lambda = \frac{c}{\nu} = \frac{3 \times 10^8}{50 \times 10^6} = 6.0\text{ m} \)
(b) मान लीजिए कि तरंग धनात्मक \( x \text{-दिशा} \) में प्रसारित हो रही है। तब, विद्युत क्षेत्र वेक्टर \( +y \) दिशा में होगा और चुंबकीय क्षेत्र वेक्टर \( +z \) दिशा में होगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि तीनों वेक्टर परस्पर लंबवत हैं।
विद्युत क्षेत्र वेक्टर के लिए,
\( \vec{E} = E_0 \sin(kx - \omega t)\hat{j} = 120 \sin(1.05x - 3.14 \times 10^8 t)\hat{j} \)
और, चुंबकीय क्षेत्र वेक्टर इस प्रकार है: \( \vec{B} = B_0 \sin(kx - \omega t)\hat{k} \)
\( \Rightarrow \vec{B} = (4 \times 10^{-7}) \sin(1.05x - 3.14 \times 10^8 t)\hat{k} \)
मुख्य बिंदु:
• \( B_0 = E_0/c \) से चुंबकीय क्षेत्र का आयाम ज्ञात होता है।
• \( \omega = 2\pi\nu \) और \( k = \frac{2\pi}{\lambda} = \frac{\omega}{c} \) तरंग समीकरण के महत्वपूर्ण प्राचल हैं।
• तरंग समीकरण सामान्यतः \( \sin(kx - \omega t) \) रूप में लिखी जाती है।
आम गलतियाँ:
• \( \omega \) और \( k \) के सूत्रों में \( \pi \) का गुणा करना भूल जाना।
• सदिश रूप (\( \hat{j}, \hat{k} \)) को समीकरण में न दर्शाना।
Exam Tips:
a) भागों (a) और (b) को स्पष्ट रूप से अलग-अलग हल करें।
b) समीकरण लिखते समय प्राचल \( E_0, B_0, k, \omega \) के मान सही रखें।
c) यूनिट्स का विशेष ध्यान रखें।
Question 8.9: विधुत चुंबकीय स्पेक्ट्रम के विभिन्न भागों की पारिभाषिकी पाठ्यपुस्तक में दी गई है। सूत्र \( E = h\nu \) (विकिरण के एक क्वांटम की ऊर्जा के लिए : फोटॉन) का उपयोग कीजिए तथा \( \eV \) वर्णक्रम (विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम) के विभिन्न भागों के लिए \( \eV \) के मात्रक में फोटॉनों की ऊर्जा निकालिए। फोटॉन ऊर्जा के जो विभिन्न परिमाण आप पाते हैं वे विद्युत चुंबकीय विकिरण के स्रोतों से किस प्रकार सम्बन्धित हैं?
Answer:
एक फोटॉन की ऊर्जा इस प्रकार है: \( E = h\nu = \frac{hc}{\lambda} \)
जहाँ, \( h = \) प्लांक का स्थिरांक = \( 6.6 \times 10^{-34}\text{ Js} \) तथा \( c = \) प्रकाश की गति = \( 3 \times 10^8\text{ m/s} \)
\( \lambda = \) विकिरण की तरंगदैर्ध्य
\( E = \frac{6.6 \times 10^{-34} \times 3 \times 10^8}{\lambda'} = \frac{19.8 \times 10^{-26}}{\lambda'} = \frac{19.8 \times 10^{-26}}{\lambda' \times 1.6 \times 10^{-19}}\text{ eV} = \frac{12.375 \times 10^{-7}}{\lambda'}\text{ eV} \)
दी गई तालिका विभिन्न \( \lambda \) के लिए एक विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम के विभिन्न भागों के लिए फोटॉन ऊर्जा को सूचीबद्ध करती है। किसी स्रोत के स्पेक्ट्रम के विभिन्न भागों के लिए फोटॉन ऊर्जा स्रोत के प्रासंगिक ऊर्जा के स्तरों के अंतर को दर्शाती है।
मुख्य बिंदु:
• फोटॉन की ऊर्जा \( E = h\nu \) या \( E = \frac{hc}{\lambda} \) से दी जाती है।
• जूल को इलेक्ट्रॉन वोल्ट (\( \text{eV} \)) में बदलने के लिए \( 1.6 \times 10^{-19} \) से भाग देते हैं।
• ऊर्जा का मान तरंगदैर्ध्य के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
आम गलतियाँ:
• \( \text{Joule} \) को सीधे उत्तर मान लेना और \( \text{eV} \) में परिवर्तित न करना।
• प्लांक नियत और प्रकाश की चाल के मान में त्रुटि करना।
Exam Tips:
a) सूत्र का प्रतिपादन चरण-दर-चरण दिखाएँ।
b) ऊर्जा रूपांतरण गुणांक (\( 1.6 \times 10^{-19} \)) का स्पष्ट उल्लेख करें।
c) सैद्धांतिक टिप्पणी में ऊर्जा स्तरों के संक्रमण का जिक्र करें।
Question 8.10: एक समतल em (विद्युत चुंबकीय) तरंग में विधुत क्षेत्र, \( 2.0 \times 10^{10}\text{ Hz} \) आवृत्ति तथा \( 48\text{ Vm}^{-1} \) आयाम से ज्यावक्रीय रूप से दोलन करता है।
(a) तरंग की तरंगदैर्ध्य कितनी है?
(b) दोलनशील चुंबकीय-क्षेत्र का आयाम क्या है?
(c) यह दर्शाइए कि \( E \) क्षेत्र का औसत ऊर्जा घनत्व, \( B \) क्षेत्र के औसत ऊर्जा घनत्व के बराबर है।
\( (c = 3 \times 10^8\text{ ms}^{-1}) \)
Answer:
विद्युत चुंबकीय तरंग की आवृत्ति, \( \nu = 2.0 \times 10^{10}\text{ Hz} \)
विद्युत क्षेत्र का आयाम, \( E_0 = 48\text{ V m}^{-1} \)
प्रकाश की गति, \( c = 3 \times 10^8\text{ m s}^{-1} \)
(a) तरंग की तरंगदैर्ध्य \( \lambda = \frac{c}{\nu} = \frac{3 \times 10^8}{2.0 \times 10^{10}} = 0.015\text{ m} \)
(b) चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता \( B_0 = \frac{E_0}{c} = \frac{48}{3 \times 10^8} = 1.6 \times 10^{-7}\text{ T} \)
(c) विद्युत क्षेत्र का ऊर्जा घनत्व \( U_E = \frac{1}{2}\varepsilon_0 E^2 \)
और, चुंबकीय क्षेत्र का ऊर्जा घनत्व \( U_B = \frac{1}{2\mu_0} B^2 \)
जहाँ, \( \varepsilon_0 = \) मुक्त आकाश का परावैद्युतांक, \( \mu_0 = \) मुक्त आकाश की पारगम्यता
हम \( E \) और \( B \) को निम्न सम्बन्ध से जोड़ सकते हैं: \( E = cB \) ...(1)
जहाँ, \( c = \frac{1}{\sqrt{\mu_0\varepsilon_0}} \) ...(2)
समीकरण (2) का मान समीकरण (1) में रखने पर:
\( E = \frac{1}{\sqrt{\mu_0\varepsilon_0}} B \)
दोनों तरफ वर्ग करने पर:
\( E^2 = \frac{1}{\mu_0\varepsilon_0} B^2 \)
\( \Rightarrow \varepsilon_0 E^2 = \frac{1}{\mu_0} B^2 \)
\( \Rightarrow \frac{1}{2}\varepsilon_0 E^2 = \frac{1}{2\mu_0} B^2 \)
\( \Rightarrow U_E = U_B \)
मुख्य बिंदु:
• तरंगदैर्ध्य \( \lambda = c/\nu \) से निकाली जाती है।
• विद्युत ऊर्जा घनत्व और चुंबकीय ऊर्जा घनत्व दोनों विद्युत चुंबकीय तरंगों में समान रूप से विभाजित होते हैं (\( U_E = U_B \))।
• \( c = \frac{1}{\sqrt{\mu_0\varepsilon_0}} \) का संबंध ऊर्जा घनत्व की समानता सिद्ध करने में उपयोग होता है।
आम गलतियाँ:
• ऊर्जा घनत्व के सूत्रों में \( \frac{1}{2} \) छोड़ देना।
• व्युत्पत्ति में वर्ग करने पर पदों को गलत व्यवस्थित करना।
Exam Tips:
a) तीनों भागों (a, b, c) को स्पष्ट रूप से अलग-अलग हल करें।
b) ऊर्जा घनत्व की सिद्ध करने वाले भाग में प्रत्येक चरण को नए (
) पर लिखें।
c) अंत में \( U_E = U_B \) लिखकर निष्कर्ष स्पष्ट करें।
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