NCERT Solutions for Class 12 Geography: Chapter 09 भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में चयनित कुछ मुद्दे एवं समस्याएँ
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Question 1: नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
निम्नलिखित में से सर्वाधिक नदी कौन-सी है?
(क) ब्रह्मपुत्र
(ख) सतलुज
(ग) यमुना
(घ) गोदावरी
Answer:
(ग) यमुना
मुख्य बिंदु:
• यमुना भारत की सबसे अधिक प्रदूषित नदियों में से एक है।
• इसका प्रमुख कारण दिल्ली और अन्य शहरों का मल-जल और औद्योगिक कचरा है।
• इस नदी में अपशिष्ट पदार्थों की मात्रा बहुत अधिक है।
आम गलतियाँ:
• छात्र अक्सर ब्रह्मपुत्र को अधिक प्रदूषित समझ लेते हैं क्योंकि वह बड़ी नदी है।
• जल की कुल मात्रा और प्रदूषण के स्तर में अंतर न समझ पाना।
• विकल्पों को बिना पढ़े केवल बड़े नाम पर टिक करना।
Exam Tips:
a) बहुविकल्पीय प्रश्नों में NCERT के आँकड़ों और तथ्यों को ध्यान में रखें।
b) दिल्ली के पास यमुना नदी की स्थिति से जुड़े तथ्यों को याद रखें।
c) विकल्पों को ध्यान से पढ़ने के बाद ही उत्तर चुनें।
Question 1 (Continued): निम्नलिखित में से कौन-सी रोग जल जन्य है?
(क) नेत्रश्लेष्मला शोथ
(ख) अतिसार
(ग) श्वसन संक्रमण
(घ) श्वसनली शोथ
Answer:
(ख) अतिसार
मुख्य बिंदु:
• अतिसार (डायरिए) दूषित जल के सेवन से फैलने वाला प्रमुख रोग है।
• यह दूषित जल में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और वायरस के कारण होता है।
• जल जन्य बीमारियाँ विकासशील देशों में स्वास्थ्य की एक बड़ी समस्या हैं।
आम गलतियाँ:
• श्वसन संक्रमण को जल जन्य समझ लेना जो कि वायु जन्य है।
• रोगों के फैलने के माध्यम (जल या वायु) में भ्रमित होना।
• सभी विकल्पों के अर्थ को ठीक से न समझना।
Exam Tips:
a) जल जन्य और वायु जन्य रोगों की सूची अलग से याद करें।
b) अतिसार, हैजा और पीलिया को प्रमुख जल जन्य रोगों के रूप में याद रखें।
c) प्रश्न में पूछे गए माध्यम पर विशेष ध्यान दें।
Question 1 (Continued): निम्नलिखित में से कौन-सा अम्ल वर्षा का एक कारण है?
(क) जल प्रदूषण
(ख) भूमि प्रदूषण
(ग) शोर प्रदूषण
(घ) वायु प्रदूषण
Answer:
(घ) वायु प्रदूषण
मुख्य बिंदु:
• अम्ल वर्षा वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड के मिलने से होती है।
• यह सीधे तौर पर वायु प्रदूषण का परिणाम है।
• इससे ऐतिहासिक स्मारकों और वनस्पति को भारी नुकसान पहुँचता है।
आम गलतियाँ:
• वर्षा देखकर इसे जल प्रदूषण से जोड़ देना।
• वायुमंडल में गैसों की भूमिका को नजरअंदाज करना।
• गलत विकल्प का चयन करना।
Exam Tips:
a) अम्ल वर्षा के लिए उत्तरदायी गैसों (SO2, NO2) के नाम याद रखें।
b) यह समझें कि गैसों का उत्सर्जन वायु प्रदूषण के अंतर्गत आता है।
c) पर्यावरण से जुड़े बुनियादी अंतरों को स्पष्ट रखें।
Question 1 (Continued): प्रतिकर्ष और अपकर्ष कारक उत्तरदायी हैं-
(क) प्रवास के लिए
(ख) भू-निम्नीकरण के लिए
(ग) गंदी बस्तियों
(घ) वायु प्रदूषण
Answer:
(क) प्रवास के लिए
मुख्य बिंदु:
• प्रवास (Migration) के अध्ययन में प्रतिकर्ष (Push) और अपकर्ष (Pull) मुख्य कारक होते हैं।
• प्रतिकर्ष कारक लोगों को मूल स्थान छोड़ने के लिए बाध्य करते हैं।
• अपकर्ष कारक लोगों को नए स्थान की ओर आकर्षित करते हैं।
आम गलतियाँ:
• इन्हें प्रदूषण या बस्तियों के निर्माण से जोड़ देना।
• प्रवास की परिभाषा और उसके कारकों को आपस में मिला देना।
• शब्दों के हिंदी अर्थ को गलत समझ लेना।
Exam Tips:
a) प्रवास अध्याय के मूल सिद्धांतों को अच्छी तरह समझें।
b) प्रतिकर्ष और अपकर्ष के उदाहरण याद रखें।
c) भूगोल के तकनीकी शब्दों की शब्दावली तैयार करें।
Question 2: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें।
प्रदूषण और प्रदूषकों में क्या भेद है?
Answer:
प्रदूषण: वायु, भूमि तथा जल में हानिकारक पदार्थों की उपस्थिति जो जीवों तथा पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है, वह प्रदूषण कहलाती है।
प्रदूषक: प्रदूषक वे पदार्थ हैं जिनके कारण पर्यावरण में प्रदूषण फैलता है। उदाहरण के लिए - नाइट्रोजन के ऑक्साइड, कार्बन के ऑक्साइड, सल्फर के ऑक्साइड आदि।
मुख्य बिंदु:
• प्रदूषण एक स्थिति या प्रक्रिया है जबकि प्रदूषक वह कारक या पदार्थ है जो इस स्थिति को उत्पन्न करता है।
• प्रदूषक पर्यावरण और जीवों दोनों को नुकसान पहुँचाते हैं।
• वायु, जल और भूमि तीनों में विभिन्न प्रकार के प्रदूषक पाए जाते हैं।
आम गलतियाँ:
• प्रदूषण और प्रदूषक को एक ही मान लेना।
• अंतर स्पष्ट करते समय उचित उदाहरण न देना।
• उत्तर को 30 शब्दों की सीमा से बहुत अधिक लंबा कर देना।
Exam Tips:
a) परिभाषाएँ देते समय मुख्य शब्दों (जैसे हानिकारक पदार्थ, स्थिति) का प्रयोग करें।
b) अंतर स्पष्ट करने के लिए छोटे और स्पष्ट उदाहरण दें।
c) शब्द सीमा का विशेष ध्यान रखें।
Question 2 (Continued): वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों का वर्णन कीजिए।
Answer:
वायु प्रदूषण वर्तमान मानवता की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।
वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोत: मिट्टी का तेल, कोयला, सिगरेट से निकलने वाला धूँआ आदि के जलने के दौरान निकलने वाली आम प्रदूषक गैसें कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), कार्बनडाइअक्साइड (CO2), सल्फरडाइअक्साइड (SO2) आदि लगभग 90 प्रतिशत हैं।
प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में बिजली तथा गर्मी उत्पादन, ठोस अपशिष्टों का जलना, औद्योगिक प्रक्रियाएँ तथा विशेष रूप से परिवहन हैं।
मुख्य बिंदु:
• दहन प्रक्रियाएँ जैसे कोयला और पेट्रोलियम का जलना प्रमुख स्रोत हैं।
• परिवहन और वाहन वायु प्रदूषण में सर्वाधिक योगदान देते हैं।
• औद्योगिक इकाइयाँ और कारखाने खतरनाक गैसें छोड़ते हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल एक स्रोत (जैसे वाहन) का उल्लेख करके छोड़ देना।
• विशिष्ट गैसों के रासायनिक नामों का उल्लेख न करना।
• उत्तर में स्रोतों का स्पष्ट वर्गीकरण न करना।
Exam Tips:
a) स्रोतों को बिंदुओं में लिखें ताकि परीक्षक को आसानी से समझ आए।
b) मुख्य प्रदूषक गैसों के नाम (CO, CO2, SO2) अवश्य लिखें।
c) परिवहन और उद्योगों को विशेष रूप से हाईलाइट करें।
Question 2 (Continued): भारत में नगरीय अपशिष्ट निपटान से जुड़ी प्रमुख समस्याओं का उल्लेख कीजिए।
Answer:
भारत में नगरीय अपशिष्ट निपटान से जुड़ी प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं:
• नगरों में अभी भी सभी प्रकार के ठोस अपशिष्ट एक साथ एकत्रित किए जाते हैं जैसे कि धातु - शीशा, सब्जियों के छिलके, कागज आदि जिससे इनको उचित ढंग से निपटने में बाधा आती है।
• तेज़ी से बढ़ती जनसंख्या और उसके लिए अपर्याप्त सुविधाएँ तथा विभिन्न स्रोतों द्वारा अपशिष्ट की मात्रा में वृद्धि।
• इलेक्ट्रॉनिक सामान के कबाड़, मकानों की टूट-फूट/निर्माण से उत्पन्न मलबे ने इस अपशिष्ट के निपटान की समस्या को और गंभीर बना दिया है।
• पृथक्करण न होना तथा पर्याप्त जागरूकता के अभाव में अपशिष्ट का पुनर्चक्रण नहीं हो पाता।
मुख्य बिंदु:
• कचरे का वर्गीकरण (गीला और सूखा) न होना सबसे बड़ी समस्या है।
• ई-वेस्ट (इलेक्ट्रॉनिक कचरा) और निर्माण मलबे का प्रबंधन कठिन हो गया है।
• नगरपालिकाओं के पास अपर्याप्त संसाधन और अवसंरचना है।
आम गलतियाँ:
• केवल कचरे के ढेर की बात करना और तकनीकी समस्याओं को छोड़ देना।
• ई-वेस्ट और निर्माण कचरे का उल्लेख न करना।
• नागरिक जागरूकता के अभाव को महत्व न देना।
Exam Tips:
a) समस्याओं को बुलेट पॉइंट्स में लिखें।
b) ठोस अपशिष्ट और ई-वेस्ट दोनों का जिक्र करें।
c) नगरों की बढ़ती जनसंख्या को मुख्य कारण के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 2 (Continued): मानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के क्या प्रभाव पड़ते हैं?
Answer:
मानव स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के प्रभाव:
• वायु प्रदूषण के संपर्क में तीव्र (अल्पकालिक) तथा दीर्घकालिक दोनों प्रभाव मानव स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।
• यदि वायु में अशुद्धि है तो उसमें प्रदूषक तत्वों का समावेश है तो वह 'वास द्वारा शरीर में पहुँचकर विभिन्न प्रकार से प्रभावित करती है तथा अनेक रोगों का कारण बन जाती है।
• वायु प्रदूषण का सबसे अधिक प्रभाव मनुष्य के श्वसन तंत्र पर पड़ता है क्योंकि श्वास के साथ ग्रहण की गई वायु रक्त प्लाज्मा में घुलती नहीं अपितु हीमोग्लोबिन के साथ मिश्रित होकर सम्पूर्ण शरीर में भ्रमण करती रहती है।
• वायु में प्रदूषण वाली कणिकाएँ आदि आकार में कुछ बड़ी होती है तो वे नासिका द्वार पर रोक जाती हैं। परंतु अतिसूक्ष्म कणिकाएँ फेफड़ों तक पहुँच जाती हैं तथा शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचकर रोग का कारण बन जाती हैं।
• श्वास रोगों के अतिरिक्त वायु में सल्फरडाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाईऑक्साइड की अधिकता से कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग आदि हो जाते हैं।
मुख्य बिंदु:
• श्वसन तंत्र और फेफड़ों पर इसका सबसे घातक प्रभाव पड़ता है।
• हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर जहरीली गैसें पूरे शरीर में फैल जाती हैं।
• दीर्घकालिक संपर्क से कैंसर और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियाँ होती हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल सामान्य सर्दी-खांसी तक उत्तर सीमित रखना।
• कणिकाओं (Particulate matter) के आकार और उनके प्रभाव को स्पष्ट न करना।
• दीर्घकालिक और अल्पकालिक प्रभावों में भेद न बताना।
Exam Tips:
a) श्वसन तंत्र पर पड़ने वाले प्रभाव को मुख्य बिंदु बनाएं।
b) अतिसूक्ष्म कणिकाओं के फेफड़ों तक पहुँचने की प्रक्रिया का वर्णन करें।
c) गंभीर बीमारियों के नाम जैसे कैंसर और हृदय रोग अवश्य लिखें।
Question 3: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें।
भारत में जल प्रदूषण की प्रकृति का वर्णन कीजिए।
Answer:
जल प्रदूषण: जल प्रदूषण का अर्थ है पानी में अवांछित और घातक तत्वों की उपस्थिति से पानी का दूषित हो जाना, जिससे कि वह पीने योग्य नहीं रहता।
जल प्रदूषण भारत में व्यापक सबसे बड़े संकटों में से एक है। बढ़ती हुई जनसंख्या तथा औद्योगिक विस्तार के कारण जल के अवविवेकपूर्ण उपयोग से जल की गुणवत्ता का बहुत अधिक निम्नीकरण हुआ है। नदियों, नहरों, झीलों और तालाबों आदि में उपलब्ध जल शुद्ध नहीं रह गया है। इसमें अल्प मात्र में निलंबित कण, कार्बनिक और अकाकार्बनिक पदार्थ समाहित होते हैं। जब जल में इन पदार्थों की सांद्रता बढ़ जाती है तो जल प्रदूषित हो जाता है इस तरह वह उपयोग के योग्य नहीं रहता। ऐसी स्थिति में जल में स्वतः शुद्धीकरण की क्षमता जल को शुद्ध नहीं कर पाती।
मुख्य बिंदु:
• जल प्रदूषण का अर्थ अवांछित तत्वों के मिलने से जल का अशुद्ध होना है।
• तीव्र जनसंख्या वृद्धि और औद्योगीकरण इसके मुख्य कारण हैं।
• प्राकृतिक जल स्रोतों की स्वतः शुद्धीकरण की क्षमता समाप्त हो रही है।
आम गलतियाँ:
• केवल एक नदी (जैसे गंगा या यमुना) तक उत्तर को सीमित कर देना।
• जल प्रदूषण की वैज्ञानिक परिभाषा न लिखना।
• शब्द सीमा (150 शब्द) का ध्यान न रखते हुए बहुत संक्षिप्त उत्तर लिखना।
Exam Tips:
a) दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में पहले जल प्रदूषण की सटीक परिभाषा दें।
b) कारणों और वर्तमान स्थिति का विस्तार से वर्णन करें।
c) प्राकृतिक जल स्रोतों की स्थिति का सुंदर भाषा में उल्लेख करें।
Question 3 (Continued): भारत में जल प्रदूषण के बढ़ते स्तर के प्रमुख कारण
Answer:
भारत में जल प्रदूषण के निम्नलिखित प्रमुख कारण हैं:
• औद्योगिक कचरे के निपटान की अपर्याप्त व्यवस्था
• ग्लोबल वार्मिंग
• जहाजों से होने वाला तेल का रिसाव
• कृषि क्षेत्र में अनुचित गतिविधियाँ
• मैदानी इलाकों में बहने वाली नदियों के पानी की गुणवत्ता में कमी
• औद्योगिक कूड़ा, नगरीय अपशिष्ट
• सामाजिक तथा धार्मिक रीति-रिवाजों जैसे- नदी में नहाना तथा कचरा फेंकना
• डीनाइटीफिकेशन
इसके अतिरिक्त, एक निश्चित स्तर पर प्रदूषित पानी फसलों के लिए भी हानिकारक होता है जिससे जमीन की उर्वरता कम होती है। जल प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण पानी की गुणवत्ता में गिरावट है।
मुख्य बिंदु:
• औद्योगिक अपशिष्टों का सीधा नदियों में छोड़ा जाना मुख्य कारण है।
• कृषि में उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक प्रयोग होता है।
• धार्मिक और सामाजिक गतिविधियाँ भी जल को प्रभावित करती हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल उद्योगों को दोष देना और कृषि या घरेलू कचरे को छोड़ देना।
• बिंदुओं को स्पष्ट रूप से अलग-अलग न लिखना।
• सामाजिक गतिविधियों के प्रभाव को अनदेखा करना।
Exam Tips:
a) सभी प्रमुख कारणों को सूची बनाकर विस्तार से समझाएं।
b) कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों के योगदान को स्पष्ट करें।
c) भू-उर्वरकता पर पड़ने वाले प्रभाव का भी थोड़ा उल्लेख करें।
Question 3 (Continued): जल प्रदूषण की समस्या हेतु निदान
Answer:
जल प्रदूषण की समस्या के समाधान और निदान हेतु निम्नलिखित उपाय किए जाने चाहिए:
• प्रत्येक घर में सेप्टिक टैंक होना चाहिए।
• बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियों में जल शोधन संयंत्रों को लगाना चाहिए जिससे इनके द्वारा निकाला जल शुद्ध होने के बाद ही जल स्रोतों में जा सके।
• कीटनाशकों, खरपतवार नाशियों का कम से कम प्रयोग करना चाहिए।
• वनों की कटाई रोकना चाहिए तथा वृक्षारोपण को प्रोत्साहन करना चाहिए।
• प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।
• केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण के कार्यान्वयन की सर्वोच्च संस्था है। इसकी स्थापना जल प्रदूषण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 के अधीन सितंबर 1974 में की गई थी। मौलिक रूप से जल प्रदूषण के नियंत्रण के लिए बनाई गई यह संस्था आजके प्रदूषण को नियंत्रित करने वाली शीर्ष संस्था है।
मुख्य बिंदु:
• उद्योगों और घरों से निकलने वाले गंदे पानी का उपचार (Treatment) अनिवार्य होना चाहिए।
• कृषि में रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग कम किया जाना चाहिए।
• केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसी संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है।
आम गलतियाँ:
• केवल सरकारी नियमों की बात करना और व्यक्तिगत प्रयासों को भूल जाना।
• जल शोधन संयंत्रों (Effluent Treatment Plants) का जिक्र न करना।
• अधिनियम और स्थापना वर्ष की सही जानकारी न देना।
Exam Tips:
a) निदान लिखते समय उपचारात्मक उपायों को बिंदुओं में दें।
b) 1974 के जल अधिनियम का उल्लेख जरूर करें।
c) पौधे लगाने और प्लास्टिक प्रतिबंध जैसे व्यावहारिक उपाय लिखें।
Question 3 (Continued): भारत में गंदी बस्तियों की समस्याओं का वर्णन कीजिए।
Answer:
वे सभी आवास गंदी बस्तियाँ कहलाते हैं, जहाँ स्वस्थ जीवन की आवासीय सुविधाएँ उपलब्ध नहीं होतीं। भारत में गंदी बस्तियों की निम्नलिखित समस्याएँ हैं:
• रोज़गार की तलाश में गाँव से नगरों की प्रवास बढ़ने से औद्योगिक तथा नगरीय क्षेत्र में बढ़ई हुई जनसंख्या के अनुरूप समुच्चय आवास की व्यवस्था न होने के कारण गंदी बस्ती की समस्या पैदा होती है।
• इन बस्तियों में स्वास्थ्य तथा सफाई का अभाव पाया जाता है।
• इन बस्तियों में पानी हेतु नल, बिजली, शुद्ध हवा, अच्छे पक्के रास्ते नहीं होते हैं।
• औद्योगीकरण तथा नगरीकरण गंदी बस्तियों के विकास में मुख्य कारण हैं।
• गंदी बस्तियों की अधिकांश जनसंख्या नगरीय अर्थव्यवस्था के असंगठित क्षेत्र में कम वेतन पर अधिक जोखिमपूर्ण कार्य करती है। अतः ये लोग अल्पपोषित होते हैं। इन्हें विभिन्न रोगों व बीमारियों की संभावना बनी रहती है।
• ये लोग अपने बच्चों के लिए उचित शिक्षा का खर्च भी वहन नहीं कर सकते। गरीब उन्हें नशीली दवाओं/पदार्थों का सेवन करने, अपराध, पलायन, उदासीनता और अंतः सामाजिक बहिष्कार की ओर उन्मुख करती है।
• खुले में शौच, अनियमित जल निकासी व्यवस्था, भारी भीड़ संकरी सड़कें, स्वास्थ्य और सामाजिक समस्याएँ हैं।
• गंदी बस्तियों में निवास करने वाले परिवारों में निर्धनता के परिणामस्वरूप समुचित मात्रा में भोजन उपलब्ध नहीं हो पाता है।
मुख्य बिंदु:
• गंदी बस्तियाँ ग्रामीण-नगरीय प्रवास और आवास की कमी का परिणाम हैं।
• यहाँ बुनियादी सुविधाओं (पेयजल, स्वच्छता, बिजली) का भारी अभाव होता है।
• यहाँ के निवासी कुपोषण, गरीबी और अपराध जैसी समस्याओं से घिरे रहते हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल झुग्गी-झोपड़ी होना लिख देना और उसकी सामाजिक-आर्थिक समस्याओं का वर्णन न करना।
• स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी कठिनाइयों को छोड़ देना।
• अनियोजित औद्योगीकरण की भूमिका स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) बस्तियों की समस्याओं को आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी श्रेणियों में बाँटकर लिखें।
b) ग्रामीण प्रवास को मुख्य कारण के रूप में रेखांकित करें।
c) शिक्षा और बच्चों की स्थिति पर विशेष ध्यान दें।
Question 3 (Continued): भू-निम्नीकरण को कम करने के उपाय सुझाइए।
Answer:
कृषि योग्य भूमि पर दबाव का कारण केवल सीमित उपलब्धता ही नहीं, वर्न इसकी गुणवत्ता में कमी भी इसका कारण है। मुद्रा अपरदन, लवणता (लवणकांतता) और भू-क्षारता से भू-निम्नीकरण होता है। भू-निम्नीकरण का अभिप्राय स्थायी या अस्थायी तौर पर भूमि की उत्पादकता की कमी है। सभी निम्नीकरण भूमि नहीं है, लेकिन अनियंत्रित प्रक्रियाएँ इसे व्यर्थ भूमि में परिवर्तित कर देती हैं। भू-निम्नीकरण दो प्रक्रियाओं द्वारा तीव्रता से होता है। ये प्रक्रियाएँ प्राकृतिक और मानवजनित हैं। भारतीय दूर-संवेदन संस्थान ने व्यर्थ भूमि को दूर-संवेदन तकनीक की सहायता से सीमार्क किया है तथा इन प्रक्रियाओं के आधार पर इनको वर्गीकृत किया है। जैसे- प्राकृतिक खंड, मरुस्थलीय या रेतीली भूमि, बंजर चट्टानी क्षेत्र, तीव्र ढाल वाली भूमि तथा हिमानी क्षेत्र। ये मुख्यतः प्राकृतिक कारकों द्वारा घटित हुई हैं। प्राकृतिक और मानवजनित प्रक्रियाओं से निम्कोर्ति भूमिों में जलाक्रांत तथा दलदली क्षेत्र, लवणता तथा क्षारता से प्रभावित भूमिμοί, झाड़ी सहित एवं झाड़ियों रहित भूमियाँ आदि शामिल हैं।
भू-निम्नीकरण को कम करने के उपाय:
• नगरीय तथा औद्योगिक अपशिष्ट जल को साफ करके सिंचाई के लिए प्रयोग किया जाए तथा अपशिष्ट जल से होने वाले प्रदूषण को कम किया जा सकता है।
• किसानों को रासायनिक पदार्थों का प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षण देकर भूमि के प्रदूषण को बहुत हद तक कम किया जा सकता है। उदाहरण: डी. डी. टी. और अन्य हानिकारक तत्वों पर तुरंत प्रतिबंध लगा देना चाहिए। कई देशों में ऐसा किया भी जा चुका है।
• प्लास्टिक की थैलियों की जगह पर कागज की थैलियों का प्रयोग किया जाना चाहिए। प्लास्टिक की थैलियों पर प्रभावी रूप से तुरंत प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
• जलाक्रांत भूमि एवं दलदली भूमि को कुशल प्रबंधन से उपजाऊ बनाया जा सकता है।
• कुछ भूमि जो मानवीय क्रियाओं के फलस्वरूप कृषियोग्य नहीं रह गयी है उसे नई प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से पुनः कृषियोग्य बनाया जा सकता है।
मुख्य बिंदु:
• भू-निम्नीकरण का अर्थ भूमि की उत्पादकता में स्थायी या अस्थायी कमी है।
• यह प्राकृतिक (मृदा अपरदन, लवणता) और मानवजनित दोनों कारणों से होता है।
• इसे रोकने के लिए कृषि पद्धतियों में सुधार और कचरा प्रबंधन जरूरी है।
आम गलतियाँ:
• केवल मृदा अपरदन को ही भू-निम्नीकरण मान लेना।
• रासायनिक कीटनाशकों और प्लास्टिक के दुष्प्रभावों को नजरअंदाज करना।
• उपचारात्मक उपायों को ठीक से वर्गीकृत न करना।
Exam Tips:
a) पहले भू-निम्नीकरण का अर्थ और उसके प्रकार (प्राकृतिक व मानवजनित) समझाएँ।
b) उपायों को स्पष्ट बुलेट पॉइंट्स में लिखें।
c) किसानों के प्रशिक्षण और तकनीकी के प्रयोग जैसे व्यावहारिक सुझाव दें।
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