Download NCERT Solutions for Class 12 Biology Chapter 08 मानव कल्याण में सूक्ष्म जीव
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Question 1: जीवाणुओं को नग्न आँखों द्वारा नहीं देखा जा सकता, परन्तु सूक्ष्मदर्शियों की सहायता से देखा जा सकता है। यदि आपको अपने घर से अपनी जीव विज्ञान प्रयोगशाला तक एक नमूना ले जाना हो और सूक्ष्मदर्शी की सहायता से इस नमूने से सूक्ष्मजीवों की उपस्थिति को प्रदर्शित करना हो, तो किस प्रकार का नमूना आप अपने साथ ले जाएँगे और क्यों?
Answer:
हम अपने घर में आसानी से उपलब्ध होने वाले दही को प्रयोगशाला में नमूने के रूप में ले जा सकते हैं तथा सूक्ष्मजीव की उपस्थिति को प्रदर्शित कर सकते हैं क्योंकि दूध का दही में परिवर्तन या किण्वन लैक्टोबैसिलस जीवाणु की सहायता से होता है। इसलिए दही में ये सूक्ष्मजीव उपस्थित होते हैं।
मुख्य बिंदु:
• दही में लैक्टोबैसिलस (LAB) नामक जीवाणु प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
• यह नमूना घर से प्रयोगशाला तक आसानी से सुरक्षित ले जाया जा सकता है।
• सूक्ष्मदर्शी के नीचे देखने पर इसमें रॉड के आकार के जीवाणु स्पष्ट दिखाई देते हैं।
आम गलतियाँ:
• सामान्य पानी या ताजे दूध का नमूना ले लेना, जिसमें सूक्ष्मजीव आसानी से顕ित (visible) नहीं होते।
• बिना कारण बताए केवल सूक्ष्मजीव का नाम लिख देना।
• किण्वन प्रक्रिया को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) उत्तर में हमेशा विशिष्ट सूक्ष्मजीव (जैसे लैक्टोबैसिलस) का उल्लेख करें।
b) कारण को वैज्ञानिक शब्दों (किण्वन और लैक्टिक अम्ल) के साथ स्पष्ट करें।
c) उत्तर संक्षिप्त और बिंदुवार होना चाहिए।
Question 2: उपापचय के दौरान सूक्ष्मजीव गैसों का निष्कासन करते हैं; उदाहरण द्वारा सिद्ध करें।
Answer:
चावल, आटा, दाल का बना नरम-नरम आटा जिसका प्रयोग डोसा व इडली बनाने में होता है। जीवाणु द्वारा किण्वित होता है। इस आटे का फूला हुआ दिखना \( CO_2 \) के उत्पादन के कारण होता है:
\( C_6H_{12}O_6 \xrightarrow{\text{किण्वन}} 2C_2H_5OH + 2CO_2 \)
इसी तरह ब्रेड का सना हुआ आटा यीस्ट द्वारा किण्वित होता है।
मुख्य बिंदु:
• सूक्ष्मजीवों द्वारा श्वसन या किण्वन के समय कार्बन डाइऑक्साइड (\( CO_2 \)) गैस निकलती है।
• इडली और डोसे के आटे का फूलना यीस्ट और जीवाणुओं द्वारा \( CO_2 \) गैस छोड़ने का परिणाम है।
• बेकरी उद्योग में ब्रेड बनाने के लिए सैकरोमाइसेज सेरेविसी (यीस्ट) का उपयोग किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• रासायनिक समीकरण में उत्पादों को गलत लिखना।
• किण्वन और श्वसन में अंतर स्पष्ट न करना।
• केवल ब्रेड का उदाहरण देना, इडली-डोसा को छोड़ देना।
Exam Tips:
a) समीकरण हमेशा सही रूप में संतुलित करके लिखें।
b) 'यीस्ट' (सैकैरोमाइसेज सेरेविसी) का वैज्ञानिक नाम अवश्य उल्लेख करें।
c) गैस का नाम (\( CO_2 \)) स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
Question 3: किस भोजन (आहार) में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया मिलते हैं? इनके कुछ लाभप्रद उपयोगों का वर्णन करें।
Answer:
लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया लैक्टिक अम्ल उत्पन्न करके दूध को दही में बदल देता है। यह दूध की शर्करा लैक्टोज को लैक्टिक एसिड में बदलता है। लैक्टिक अम्ल दूध की प्रोटीन केसीन को जमाकर दही में परिवर्तित कर देता है। यह जीवाणु दूध से लैक्टोज को निकाल देता है परन्तु बहुत से व्यक्तियों को बिना लैक्टोज के दूध पीने पर एलर्जी होती है। ये जीवाणु महत्वपूर्ण विटामिन \( B_{12} \) उत्पन्न करते हैं तथा ये सड़ाने वाले जीवाणु व हानिकारक सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकते हैं।
मुख्य बिंदु:
• ये मुख्य रूप से दही और छाछ में पाए जाते हैं।
• दूध को दही में बदलकर उसके पोषण मान (विटामिन \( B_{12} \)) को बढ़ाते हैं।
• हमारे पेट में हानिकारक रोगाणुओं की वृद्धि को रोककर रक्षा करते हैं।
आम गलतियाँ:
• लैक्टोज और लैक्टिक अम्ल में भ्रमित होना।
• विटामिन \( B_{12} \) के स्थान पर अन्य विटामिन लिखना।
• केवल दूध से दही बनने की प्रक्रिया लिखना, लाभ न बताना।
Exam Tips:
a) लाभप्रद उपयोगों को बिंदुओं में लिखें ताकि परीक्षक को आसानी हो।
b) पाचन तंत्र में इनकी भूमिका का संक्षेप में जिक्र करें।
c) 'LAB' का पूरा नाम (लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया) कोष्ठक में लिखें।
Question 4: कुछ पारंपरिक भारतीय आहार जो गेहूं, चावल तथा चना (अथवा उनके उत्पाद) से बनते हैं और उनमें सूक्ष्मजीवों का प्रयोग शामिल हो, उनके नाम बताएँ।
Answer:
गेहूं, चावल तथा चना (अथवा उनके उत्पाद) से सूक्ष्मजीवों का प्रयोग करके भटूरा (गेहूँ से), डोसा व इडली (चावल व उड़द की दाल) इत्यादि से बनते हैं।
मुख्य बिंदु:
• भटूरे का आटा मैदा (गेहूँ) से बनता है जिसे यीस्ट द्वारा किण्वित किया जाता है।
• इडली और डोसा चावल और उड़द की दाल के मिश्रण से बनते हैं, जिनका किण्वन जीवाणुओं द्वारा होता है।
• ढोकला भी बेसन (चना) और सूजी से किण्वन प्रक्रिया द्वारा बनता है।
आम गलतियाँ:
• बिना किण्वन वाले खाद्य पदार्थों के नाम लिख देना।
• अनाज के सही स्रोतों (गेहूँ, चावल, चना) का मिलान गलत करना।
• उत्तर को अपूर्ण छोड़ देना।
Exam Tips:
a) खाद्य पदार्थ के साथ-साथ उसमें प्रयुक्त मुख्य अनाज का भी उल्लेख करें।
b) किण्वन शब्द का प्रयोग उत्तर में अनिवार्य रूप से करें।
c) स्थानीय और पारंपरिक व्यंजनों के नाम स्पष्ट लिखें।
Question 5: हानिप्रद जीवाणु द्वारा उत्पन्न करने वाले रोगों के नियंत्रण में किस प्रकार सूक्ष्मजीव महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं?
Answer:
प्रतिजैविक सूक्ष्मजीवधारियों के उपापचयो व्युत्पन्न होते हैं। ये किसी अन्य सूक्ष्म जीवधारी जैसे-जीवाणु के लिए हानिकारक अथवा निरोधी होते हैं। प्रतिजैविक, प्रतियोगिता विरोध द्वारा रोगों को ठीक करते हैं। अधिकतर प्रतिजैविक बैक्टीरिया से ही प्राप्त होते हैं। प्रतिजैविक जैसेः पेनिसिलिन का उत्पादन सूक्ष्मजीवों (कवक) द्वारा किया जाता है। यह प्रतिजैविक हानिकारक रोगों को उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीवों को मारने के काम आते हैं। प्रतिजैविक संक्रमित रोग जैसेः डिफ्थीरिया, काली खाँसी तथा न्यूमोनिया की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पेनिसिलिन सर्वप्रथम प्राप्त प्रतिजैविक है। इसकी खोज एलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने की थी।
मुख्य बिंदु:
• प्रतिजैविक (Antibiotics) ऐसे रासायनिक पदार्थ हैं जो सूक्ष्मजीवों द्वारा बनाए जाते हैं।
• ये अन्य रोगजनक सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रोकते हैं या उन्हें नष्ट करते हैं।
• पेनिसिलिन की खोज अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने पेनिसिलियम नोटेटम कवक से की थी।
आम गलतियाँ:
• प्रतिजैविक और एंटीबॉडी में अंतर न समझ पाना।
• कवक और जीवाणु के स्रोतों को आपस में मिला देना।
• खोजकर्ता का नाम गलत लिखना।
Exam Tips:
a) पेनिसिलिन का नाम और इसके खोजकर्ता का उल्लेख उत्तर में अवश्य करें।
b) परिभाषा को सटीक और वैज्ञानिक भाषा में लिखें।
c) कुछ सामान्य रोगों के नाम (जैसे न्यूमोनिया, डिफ्थीरिया) उदाहरण के रूप में दें।
Question 6: किन्हीं दो कवक प्रजातियों के नाम लिखें, जिनका प्रयोग प्रतिजैविकों (ऐंटीबायोटिक्स) के उत्पादन में किया जाता है।
Answer:
• रैमाइसिन को म्यूकोर रेमोनिायस नामक कवक से。
• पैनीसिलिन को पैनीसिलियम नोटेटम नामक कवक से प्राप्त करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• पेनिसिलियम नोटेटम से पेनिसिलिन प्राप्त होती है।
• स्ट्रेप्टोमाइसेस (यद्यपि यह एक्टिनोमाइसीट है, कवक जैसे फफूंद सदृश) या अन्य कवक प्रजातियां एंटीबायोटिक बनाती हैं।
• कवक सूक्ष्मजीव जगत के महत्वपूर्ण स्रोत हैं जिनसे जीवनरक्षक औषधियां बनती हैं।
आम गलतियाँ:
• जीवाणु और कवक के स्रोतों में भ्रमित होना।
• वैज्ञानिक नाम अशुद्ध वर्तनी (spelling) में लिखना।
• केवल एक कवक का नाम लिखकर छोड़ देना।
Exam Tips:
a) वैज्ञानिक नाम लिखते समय वंश (Genus) और जाति (Species) के नियमों का ध्यान रखें (अंडरलाइन करें)।
b) सीधे और स्पष्ट दो नाम लिखें।
c) उत्पादित प्रतिजैविक का नाम भी साथ में कोष्ठक में लिख सकते हैं।
Question 7: वाहितमल से आप क्या समझते हैं, वाहितमल हमारे लिए किस प्रकार से हानिपद है?
Answer:
प्रतिदिन नगर व शहरों से व्यर्थ जल की बहुत बड़ी मात्रा जनित होती है। इस व्यर्थ जल का प्रमुख घटक मनुष्य का मल-मूत्र है। नगर में इस व्यर्थ जल को वाहित मल (सीवेज) कहते हैं।
• वाहित मल (सीवेज) में कार्बनिक पदार्थों की बड़ी मात्रा तथा सूक्ष्मजीव पाये जाते हैं, जो अधिकांशतः रोगजनक होते हैं।
• वाहित मल में ऑक्सीजन की कमी होती है। इसलिए कार्बनिक पदार्थों का विघटन भी नहीं हो पाता है। इसके फलस्वरूप वाहित मल वातावरण को प्रदूषित करते हैं।
मुख्य बिंदु:
• वाहितमल नगरों और शहरों का गंदा, अपशिष्ट जल है जिसमें मानव मल-मूत्र होता है।
• इसमें भारी मात्रा में कार्बनिक पदार्थ और रोगजनक सूक्ष्मजीव होते हैं।
• यह जल स्रोतों में मिलकर जल प्रदूषण और ऑक्सीजन की कमी (BOD वृद्धि) का कारण बनता है।
आम गलतियाँ:
• केवल गंदा पानी लिखकर छोड़ देना, मानव मल और कार्बनिक पदार्थों का जिक्र न करना।
• इसके दुष्प्रभावों (जैसे बीमारियां और प्रदूषण) को न समझाना।
• सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट में अंतर न समझना।
Exam Tips:
a) परिभाषा में 'मानव मल-युक्त नगर का अपशिष्ट जल' मुख्य रूप से शामिल करें।
b) हानियों को बिंदुओं के रूप में लिखें।
c) पर्यावरण और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव का उल्लेख करें।
Question 8: प्राथमिक तथा द्वितीयक वाहितमल उपचार के बीच पाए जाने वाले मुख्य अंतर कौन से हैं?
Answer:
वाहितमल का उपचार वाहित मल संयंत्र में किया जाता है जिससे यह प्रदूषण मुक्त हो सके। यह उपचार दो चरणों में संपन्न होता है:
प्राथमिक उपचार: प्राथमिक उपचार में मुख्यतः बड़े-छोटे कणों को भौतिक क्रियाओं; जैसे- अवसादन, निस्यंदन, प्लवन आदि द्वारा अलग किया जाता है। सबसे पहले तैरते हुए कूड़े-करकट को न्यंदन द्वारा हटा दिया जाता है। इसके बाद ग्रिट मृदा तथा छोटे कणों को अवसादन द्वारा पृथक् किया जाता है। बारीक कण प्राथमिक स्लज के रूप में नीचे बैठ जाते हैं तथा प्लावी बहिःस्राव का निर्माण होता है। बहिः स्राव को प्राथमिक उपचार टैंक से द्वितीयक उपचार के लिए ले जाया जाता है।
द्वितीयक उपचार: द्वितीयक उपचार में सूक्ष्मजीवधारियों का उपयोग किया जाता है। जैसे: ऑक्सीकरण ताल एक उथला जलाशय होता है जिसमें वाहितमल एकत्रित किया जाता है। इसमें कार्बनिक पदार्थ होने के कारण शैवाल और जीवाणुओं की अच्छी वृद्धि होने लगती है।
जीवाणु अपघटन करते हैं और शैवाल उनसे उत्पन्न कार्बन डाइऑक्साइड का प्रकाश संश्लेषण में उपयोग करते हैं। प्रकाश संश्लेषण में विमोचित ऑक्सीजन जल को दूषित होने से बचाती है। इस प्रकार ऑक्सीकरण ताल, शैवाल और जीवाणुओं के बीच सहजीविता का उदाहरण है। ऑक्सीजन ताल में होने वाली क्रियाओं द्वारा संक्रामक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और कार्बनिक पदार्थों के अपघटन के पश्चात केवल नुकसान न देने वाले पदार्थ ही रह जाते हैं। द्वितीयक उपचार के पश्चात् बहिःस्राव सामान्यतः जल के प्राकृतिक स्रोतों जैसे-नदियों, झरनों आदि में छोड़ दिया जाता है अथवा तृतीयक उपचार हेतु रासायनिक क्रियाओं द्वारा इससे नाइट्रोजन एवं फास्फोरस लवणों को पृथक् करने के पश्चात् बहिःस्राव को जलाशयों में मुक्त कर दिया जाता है।
मुख्य बिंदु:
• प्राथमिक उपचार एक भौतिक प्रक्रिया है जिसमें निस्यंदन और अवसादन शामिल हैं।
• द्वितीयक उपचार एक जैविक प्रक्रिया है जिसमें मुख्य रूप से सूक्ष्मजीवों (जीवाणु और कवक) का उपयोग होता है।
• प्राथमिक उपचार में बड़े कण हटाए जाते हैं, जबकि द्वितीयक उपचार में BOD कम किया जाता है।
आम गलतियाँ:
• दोनों प्रक्रियाओं में सूक्ष्मजीवों की भूमिका को मिला देना।
• भौतिक और जैविक प्रक्रियाओं के अंतर को स्पष्ट न करना।
• 'स्लज' और 'बहिःस्राव' शब्दों को गलत जगह प्रयोग करना।
Exam Tips:
a) अंतर को स्पष्ट करने के लिए तालिका (Table) का प्रयोग करें।
b) प्राथमिक उपचार को 'भौतिक' और द्वितीयक को 'जैविक' प्रक्रिया के रूप में मुख्य रूप से दर्शाएं।
c) BOD (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) का द्वितीयक उपचार में महत्व अवश्य बताएं।
Question 9: सूक्ष्मजीवों का प्रयोग ऊर्जा के स्रोतों के रूप में भी किया जा सकता है। यदि हाँ, तो किस प्रकार से इस पर विचार करें?
Answer:
हाँ, सूक्ष्मजीवों का प्रयोग ऊर्जा के स्रोतों के रूप में भी किया जा सकता है। बायोगैस एक प्रकार से गैसों (मुख्यतः: मीथेन) का मिश्रण है जो सूक्ष्मजीव सक्रियता द्वारा उत्पन्न होती है। गोबर में पादपों के सेलुलोसिय व्युत्पन्न प्रचुर मात्रा में होते हैं। अतः इसका प्रयोग बायोगैस को पैदा करने में किया जाता है। गोबर में मुख्य रूप से मिथेनोजेरियम पाया जाता है, जो मीथेन का उत्पादन करते हैं। बायोगैस (गोबर गैस) संयंत्र का उपयोग मुख्य रूप से गाँवों में खाना बनाने एंड प्रकाश उत्पन्न करने में किया जाता है।
मुख्य बिंदु:
• बायोगैस मुख्य रूप से मीथेन (\( CH_4 \)), \( CO_2 \), और हाइड्रोजन का मिश्रण है।
• यह मीथेनोजेनिक बैक्टीरिया (जैसे मेथैनोबैक्टेरियम) द्वारा सेल्यूलोज युक्त कचरे के अवायवीय पाचन से बनती है।
• यह ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पर्यावरण-अनुकूल और सस्ती ऊर्जा का स्रोत है।
आम गलतियाँ:
• बायोगैस में मुख्य गैस (मीथेन) का नाम न लिखना।
• अवायवीय (Anaerobic) श्वसन के स्थान पर वायवीय लिख देना।
• गोबर गैस संयंत्र के बैक्टीरिया का गलत नाम लिखना।
Exam Tips:
a) 'मेथैनोबैक्टेरियम' का नाम और बायोगैस का संगठन अवश्य लिखें।
b) ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोत के रूप में इसका महत्व बताएं।
c) ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसके लाभ का संक्षेप में उल्लेख करें।
Question 10: सूक्ष्मजीवों का प्रयोग रसायन उर्वरक तथा पीड़कनाशियों के प्रयोग कम करने के लिए भी किया जा सकता है। यह किस प्रकार सम्भव होगा? व्याख्या कीजिए।
Answer:
जैव नियंत्रण: पादप रोगों तथा पीडकों के नियंत्रण के लिए जैविक विधि का प्रयोग ही जैव नियंत्रण है। आधुनिक समाज में ये समस्याएँ रसायनों, कीटनाश्यों तथा पीड़कनाशियों के बढ़ते हुए प्रयोगों की सहायता से नियंत्रित की जाती है। ये रसायन मनुष्यों तथा जीव-जंतुओं के लिए अत्यंत ही विषैले तथा हानिकारक होते हैं। विषाक्त रसायन खाद्य श्रृंखला के माध्यम से शरीर में पहुँचते हैं। ये पर्यावरण को भी प्रदूषित करते हैं।
जैव उर्वरक के रूप में सूक्ष्मजीव: जैव उर्वरकों का मुख्य स्रोत जीवाणु, कवक तथा साइनोबैक्टीरिया होते हैं। लेग्यूमिस पादपों की जड़ों पर उपस्थित ग्रंथियों का निर्माण राइजोबियम जीवाणु के सहजीवी संबंध द्वारा होता है। ये जीवाणु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिरीकृत कर कार्बनिक रूप में में परिवर्तित करते हैं। मृदा में मुक्तवस्था में रहने वाले अन्य जीवाणु जैसे-एजोस्पाइरिलम तथा एजोटोबेक्टर भी वायुमंडलीय नाइट्रोजन को स्थिर कर मृदा में नाइट्रोजन अवयव की मात्रा को बढ़ाते हैं।
कवक अनेक पादपों के साथ सहजीवी संबंध स्थापित करते हैं। इस संबंध को माइकोराइजा कहते हैं। ग्लोमस जीन्स के बहुत-से कवक सदृश माइकोराइजा बनाते हैं। इस संबंध में कवकीय सहजीवी मृदा से जल एवं पोषक तत्वों का अवशोषण कर पादपों को प्रदान करते हैं और पादपों से भोजन प्राप्त करते हैं।
साइनोबैक्टीरिया स्वपोषित जीव हैं जो जलीय तथा स्थानीय वायुमंडल में विस्तृत रूप से पाए जाते हैं। इनमें से अधिकांश वायुमण्डलीय नाइट्रोजन को नाइट्रोजन यौगिकों के रूप में स्थिर करके मृदा की उर्वरता को बढ़ाते हैं। जैसे-ऐनाबीना, नॉस्टॉक आदि। धान के खेत में साइनोबैक्टीरिया महत्वपूर्ण जैव उर्वरक की भूमिका निभाते हैं।
पीड़क तथा रोगों का जैव नियंत्रण: जैव नियंत्रण विधि से विषাক্ত रसायन तथा पीड़कनाशियों पर हमारी निर्भरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। बैक्टीरिया बेसिलाइज थुरिजिनिएसिस का प्रयोग कैटरपिलर नियंत्रण में किया जाता है। पिछले दशक में आनुवंशिक अभियांत्रिकी की सहायता से वैज्ञानिक बैसीलस थुरिजिनिएसिस टॉक्सिन जीन को पादपों में पहुँचा चुके हैं। ऐसे पादप पीड़क के द्वारा किए गए आक्रमण के प्रति प्रतिरोधी होते हैं। Bt-कॉटन इसका एक उदाहरण है जिसे हमारे देश के कुछ राज्यों में उगाया जाता है। ड्रैगनफ्लाई, मच्छर और ऐफिड्स आदि Bt-कॉटन को क्षति नहीं पहुँचा पाते।
जैव वैज्ञानिक नियंत्रण के तहत कटक ट्राइकोडर्मा का उपयोग पादप रोगों के उपचार में किया जाता है। यह बहुत-से पादप रोगजनकों का प्रभावशाली जैव नियंत्रण कारक है। बैकुलोवाइरस ऐसे रोगजनक हैं जो कीटों तथा संधिपादों (आर्थोपोड्स) पर हमला करते हैं। अधिकांश न्यूक्लियोपैलिवरोसिस जो जैव वैज्ञानिक नियंत्रण कारकों की तरह प्रयोग किए जाते हैं, वे न्यूक्लिओपैलिवडोवायरस प्रजाति के अंतर्गत आते हैं। यह विषाणु प्रजाति-विशेष; संकरे स्पेक्ट्रम कीटनाшіย उपचारों के अति उत्तम मानी जाती है।
मुख्य बिंदु:
• जैव उर्वरक मृदा के पोषक तत्वों (जैसे नाइट्रोजन और फास्फोरस) को प्राकृतिक रूप से बढ़ाते हैं (राइजोबियम, माइकोराइजा)।
• जैव नियंत्रण रासायनिक कीटनाशकों के स्थान पर प्राकृतिक शत्रुओं (जैसे बै-सिलस थुरिजिनिएसिस, ट्राइकोडर्मा) का उपयोग है।
• ये पर्यावरण को प्रदूषित किए बिना कीटों और रोगों से फसलों की रक्षा करते हैं।
आम गलतियाँ:
• जैव उर्वरक और जैव नियंत्रण को एक ही समझ लेना।
• राइजोबियम और माइकोराइजा के कार्यों को आपस में मिला देना।
• Bt कॉटन में Bt का अर्थ या उसका कार्य स्पष्ट न लिखना।
Exam Tips:
a) उत्तर को दो भागों (1. जैव उर्वरक के रूप में, 2. जैव नियंत्रण के रूप में) बांटकर लिखें।
b) महत्वपूर्ण जीवों के नाम (जैसे राइजोबियम, माइकोराइजा, ट्राइकोडर्मा, Bt) अवश्य लिखें।
c) पर्यावरण को रासायनिक प्रदूषण से बचाने में इनकी भूमिका का उल्लेख करें।
Question 11: जल के तीन नमूने लो, एक-नदी का जल, दूसरा-अनुपचारित वाहितमल जल तथा तीसरा - वाहितमल उपचार संयंत्र से निकला द्वितीयक बहिःस्राव; इन तीनों नमूनों पर 'अ', 'ब', 'स' के लेबल लगाओ। इस बारे में में प्रयोगशाला कर्मचारी को पता नहीं है कि कौन-सा क्या है; इन तीनों नमूनों 'अ', 'ब', 'स' का बीओडी रिकॉर्ड किया गया जो क्रमशः 20 mg/L, 8 mg/L तथा 400 mg/L निकला। इन नमूनों में कौन-सा सबसे अधिक प्रदूषित नमूना है? इस तथ्य को सामने रखते हुए कि नदी का जल अपेक्षाकृत अधिक स्वच्छ है। क्या आप सही लेबल का प्रयोग कर सकते है?
Answer:
बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) ऑक्सीजन की उस मात्रा को संदर्भित करता है जो जीवाणु द्वारा एक लीटर पानी में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों की खपत संबंधित समय-काल में करता है। तब उन्हें ऑक्सीकृत करता है।
अनुपचारित वाहितमल जल है सबसे अधिक प्रदूषित होता है क्योंकि इसमें मनुष्य का मल-मूत्र, कपड़े की धुलाई से उत्पन्न जल, औद्योगिक तथा कृषि अपशिष्ट आदि उपस्थित रहता है, इसलिए इस जल का बीओडी सबसे अधिक होता है। नदी का जल साफ होता है क्योंकि इसमें कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बहुत कम होती है, अतः इस जल को बीओडी सबसे कम होगा। इसलिए निम्नलिखित प्रकार से लेबल किए जा सकते हैं -
मुख्य बिंदु:
• BOD (Biochemical Oxygen Demand) जितनी अधिक होगी, जल उतना ही अधिक प्रदूषित होगा।
• अनुपचारित वाहितमल का BOD सबसे अधिक (400 mg/L) यानी सबसे अधिक प्रदूषित है।
• नदी के प्राकृतिक जल का BOD सबसे कम (8 mg/L) यानी सबसे स्वच्छ है।
आम गलतियाँ:
• BOD और प्रदूषण के संबंध को उल्टा समझ लेना (कम BOD को अधिक प्रदूषित मान लेना)।
• मानों (20, 8, 400) को गलत नमूनों के साथ मिला देना।
• BOD का पूरा नाम या अर्थ स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) BOD की परिभाषा और उसका प्रदूषण से संबंध एक लाइन में जरूर लिखें।
b) तालिका बनाकर उत्तर स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
c) 'स' को सबसे अधिक प्रदूषित और 'ब' को सबसे स्वच्छ साबित करने का तर्क दें।
Question 12: उन सूक्ष्मजीवों के नाम बताओ जिनसे साइक्लोस्पोरिन-A (प्रतिरक्षा निषेधात्मक औषधि) तथा स्टैटिन (रक्त कोलेस्ट्रॉल लघुकरण कारक) को प्राप्त किया जाता है।
Answer:
• साइक्लोस्पोरिन-ए का उत्पादन ट्राइकोडर्मा पॉलिसपोरम नामक कवक से किया जाता है।
• स्टैटिन (लोवास्टैटिन) का उत्पादन मोनोटस्कस परपुरियस से किया जाता है।
मुख्य बिंदु:
• साइक्लोस्पोरिन-A 'ट्राइकोडर्मा पॉलिसपोरम' कवक से प्राप्त होता है, जो अंग प्रत्यारोपण में प्रतिरक्षा抑制क (immunosuppressive) है।
• स्टैटिन 'मोनास्कस परप्यूरियस' यीस्ट से प्राप्त होता है, जो रक्त में कोलेस्ट्रॉल कम करता है।
• दोनों ही चिकित्सा क्षेत्र में सूक्ष्मजीवों के महत्वपूर्ण उत्पाद हैं।
आम गलतियाँ:
• कवक और यीस्ट के वैज्ञानिक नामों की वर्तनी (spelling) गलत लिखना।
• साइक्लोस्पोरिन और स्टैटिन के कार्यों को आपस में बदल देना।
• कवक के स्थान पर जीवाणु लिख देना।
Exam Tips:
a) दोनों औषधियों के स्रोत जीव और उनके चिकित्सीय उपयोग दोनों याद रखें।
b) वैज्ञानिक नामों को सही प्रकार से लिखें।
c) उत्तर को बिंदुवार (Bullets) लिखें ताकि स्पष्ट दिखे।
Question 13: निम्नलिखित में सूक्ष्मजीवों की भूमिका का पता लगाओ तथा अपने अध्यापक से इसके विषय में विचार-विमर्श करें।
(क) एकल कोशिका प्रोटीन (एससीपी)
(ख) मृदा
Answer:
(क) एकल कोशिका प्रोटीन (एससीपी): शैवाल, जैसे: स्पाइरुलीनर, क्लोरेला तथा सिनेडेसस एवं कवक, जैसे: यीस्ट सैकेरोमाइसीटी, टौरिलांसिस तथा कैंडिडा का उपयोग एकल कोशिका प्रोटीन के रूप में किया जा रहा है।
(ख) मृदा: यह एक अकेला निवास स्थल है जिसमें विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीव तथा प्राणिजात उपस्थित रहते हैं और उच्च पादपों को यांत्रिक सहायता and पोषक तत्व प्रदान करते हैं, जिस पर मनुष्य की सम्पता आधारित है। पौधे के विकास पर राइजोस्फियर सूक्ष्मजीवों का लाभदायक प्रभाव पड़ता है। राइजोस्फीयर में सूक्ष्मजीवों द्वारा प्रतिक्रिया के फलस्वरूप \( CO_2 \) तथा कार्बनिक अम्ल का निर्माण होता है जो पौधे में अकार्बनिक पोषकों को घोलते हैं। कुछ राइजोस्फीयर सूक्ष्मजीव वृद्धि उत्तेजक पदार्थ भी उत्पादित करते हैं | जीवाणु, कवक, साइनोबैक्टीरिया आदि जैव उर्वरک मृदा की पोषक गुणवत्ता को बढ़ाते हैं।
मुख्य बिंदु:
• SCP (Single Cell Protein) प्रोटीन का वैकल्पिक स्रोत है जो सूक्ष्मजीवों (जैसे स्पाइरुलिना) से प्राप्त होता है।
• मृदा में सूक्ष्मजीव (जैसे बैक्टीरिया, कवक) अपघटन द्वारा ह्यूमस बनाते हैं और उर्वरता बढ़ाते हैं।
• राइजोस्फीयर के सूक्ष्मजीव पौधों की वृद्धि में प्रत्यक्ष सहायता करते हैं।
आम गलतियाँ:
• SCP को केवल एक रासायनिक यौगिक समझ लेना, जबकि यह सूक्ष्मजीवों का बायोमास है।
• मृदा में सूक्ष्मजीवों की भूमिका को केवल मिट्टी गंदी करने तक सीमित समझना।
• स्पाइरुलिना जैसी प्रजातियों के नाम न लिखना।
Exam Tips:
a) (क) और (ख) दोनों भागों को अलग-अलग शीर्षक देकर स्पष्ट समझाएं।
b) SCP के उदाहरण के रूप में 'स्पाइरुलिना' का उल्लेख अवश्य करें।
c) मृदा के संदर्भ में नाइट्रोजन स्थिरीकरण और माइकोराइजा का संक्षिप्त संदर्भ दें।
Question 14: निम्नलिखित को घटते क्रम में मानव समाज कल्याण के प्रति उनक महत्त्व के अनुसार संयोजित करें; महत्त्वपूर्ण पदार्थ को पहले रखते हुए कारण सहित उत्तर लिखें।
बायोगैस, सिट्रिक एसिड, पेनिसिलिन तथा दही
Answer:
• पेनिसिलिन: यह एक प्रतिजैविक है। इसका उपयोग बहुत-से जीवाणु-जनित रोगों; जैसे- सिफलिस, गठिया, डिफ्थीरिया, फेफड़े का संक्रमण आदि के उपचार में किया जाता है।
• बायोगैस: इसका उपयोग खाना बनाने एवं प्रकाश पैदा करने में किया जाता है। गोबर गैस निर्माण के उपरांत उपयोग की गई गोबर की स्तरी का प्रयोग उर्वरक के रूप में किया जाता है।
• सिट्रिक एसिड: इसका उपयोग बहुत-से भोज्य पदार्थों के परीक्षण के रूप में किया जाता है। सिट्रिक अम्ल का उत्पादन ऐस्परजिलस नाइजर नामक कवक द्वारा किया जाता है।
• दही: यह एक दुग्ध उत्पाद है जिसका उपयोग हम प्रतिदिन करते हैं। लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया दूध को दही में परिवर्तित कर देते हैं।
मुख्य बिंदु:
• घटते क्रम का आधार मानव कल्याण, चिकित्सा और जीवन रक्षा में उनका योगदान है।
• पेनिसिलिन जीवनरक्षक होने के कारण सर्वोपरि है।
• बायोगैस ऊर्जा संकट का समाधान, सिट्रिक अम्ल परिरक्षक तथा दही दैनिक आहार का हिस्सा है।
आम गलतियाँ:
• घटते क्रम के बजाय बढ़ते क्रम में लिख देना।
• महत्व के कारणों को स्पष्ट न करना।
• सभी पदार्थों के नाम क्रम से न लिखकर उलट-पुलट कर देना।
Exam Tips:
a) प्रश्न में दिए गए घटते क्रम (Descending order) के निर्देश का विशेष ध्यान रखें।
b) प्रत्येक पदार्थ के सामने उसके महत्व का एक मुख्य कारण जरूर लिखें।
c) क्रम इस प्रकार रखें: पेनिसिलिन ➔ बायोगैस ➔ सिट्रिक अम्ल ➔ दही।
Question 15: जैव-उर्वरक किस प्रकार से मृदा की उर्वरता को बढ़ाते हैं?
Answer:
जैव-उर्वरक का निर्माण विभिन्न प्रकार के जीवों, जैसेः नील- हरित शैवाल या साइनोबैक्टीरिया, जीवाणु एवं कवक से होता है। साइनोबैक्टीरिया की कई जातियाँ, जैसे नॉस्टॉक, ऐनाबीना, टेलोपियोथ्रिक्स आदि वायुमंडल से नाइट्रोजन गैस को ग्रहण कर इसे नाइट्रोजन यौगिकों में परिणत कर देती हैं। इनमें हेटीरोसिस्ट नामक विशेष कोशिका पाई जाती है, जो नाइट्रोजन-स्थिरीकरण में मुख्य भूमिका निभाती है तथा मिट्टी की उर्वर शक्ति को बढ़ाती है।
सहजीवी जीवाणु, जैसे राइजोबियम मटर कुल के पौधों की जड़ों में ग्रंथियाँ बनाते हैं और वायुमंडल से नाइट्रोजन गैस ग्रहण कर नाइट्रोजन के यौगिकों के रूप में परिणत करते हैं। इससे मृदा की पोषक शक्ति की वृद्धि होती है। भूमि में पाए जाने वाले मुक्तजीवी जीवाणु, जैसे-एजोबैक्टर, एजोस्पाइरिलम भी वायुमंडल के नाइट्रोजन को स्थिरीकृत करते हैं। माइकोराइजा के कवक पौधों को पोषक तत्त्व प्रदान करते हैं। कवक के तंतु मृदा से फास्फोरस तथा अन्य पोषकों को ग्रहण कर पौधे को उपलब्ध कराते हैं।
मुख्य बिंदु:
• जैव-उर्वरक ऐसे जीव हैं जो मृदा के पोषक तत्वों को समृद्ध करते हैं।
• ये मुख्य रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण (राइजोबियम, साइनोबैक्टीरिया) और फास्फोरस घुलनशीलता (माइकोराइजा) द्वारा कार्य करते हैं।
• रासायनिक उर्वरकों के विपरीत ये पर्यावरण-अनुकूल होते हैं और मृदा की संरचना बिगाड़ते नहीं हैं।
आम गलतियाँ:
• रासायनिक उर्वरक और जैव उर्वरक में अंतर न समझ पाना।
• नाइट्रोजन स्थिरीकरण करने वाले जीवों (राइजोबियम, ऐनाबीना) के नाम न लिखना।
• माइकोराइजा की भूमिका को भूल जाना।
Exam Tips:
a) उत्तर में सहजीवी (Symbiotic) और स्वतंत्रजीवी (Free-living) नाइट्रोजन स्थिरीकारकों का वर्गीकरण प्रस्तुत करें।
b) माइकोराइजा द्वारा फास्फोरस अवशोषण का विशेष उल्लेख करें।
c) रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में इनके महत्व को समझाएं।
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