NCERT Solutions Class 12 Biology Chapter 09 Biotechnology Principles and Processes (जैव प्रौद्योगिकी सिद्धांत व प्रक्रम) in Hindi

Solutions for Class 12 Biology: Chapter 09 जैव प्रौद्योगिकी सिद्धांत व प्रक्रम

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Practice Class 12 Biology Solutions: Chapter 09 जैव प्रौद्योगिकी सिद्धांत व प्रक्रम

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Question 1: क्या आप दस पुनर्रसंयोज प्रोटीन के बारे में बता सकते हैं जो चिकित्सीय व्यवहार के काम में लाए जाते हैं? पता लगाइये कि वे चिकित्सीय औषधि के रूप में कहाँ प्रयोग किये जाते हैं। (इंटरनेट की सहायता लें)।

Answer:

हाँ, चिकित्सा के क्षेत्र में विभिन्न रोगों के उपचार के लिए कई पुनर्रसंयोज प्रोटीन (recombinant proteins) का उपयोग किया जाता है। दस प्रमुख पुनर्रसंयोज प्रोटीन और उनके चिकित्सीय अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं:
1. इंसुलिन - डायबिटीज मेलिटस के उपचार के लिए।
2. ह्यूमन वृद्धि हार्मोन - नाटेपन (Dwarfism) के उपचार के लिए।
3. इंटरफेरॉन - वायरस जनित रोग, कैंसर तथा एड्स के उपचार के लिए।
4. स्ट्रेप्टोकाइनेज - थ्रोम्बोसिस (रक्त का थक्का जमना) के उपचार के लिए।
5. ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर - सेप्सिस तथा कैंसर के उपचार के लिए।
6. इंटरलुकेंस - विभिन्न प्रकार के कैंसर के उपचार के लिए।
7. हेपेटाइटिस-B सतह एंटीजन - हेपेटाइटिस-B के विरुद्ध टीका के रूप में।
8. ग्रेनुलोसाइट-कॉलोनी स्टिम्युलेटिंग फैक्टर - कैंसर एवं एड्स के उपचार के लिए तथा बोनमेरो प्रत्यारोपण में।
9. ग्रेनुलोसाइट मैक्रोफेज-कॉलोनी - कैंसर एवं एड्स के उपचार के लिए।
10. बोविन वृद्धि हार्मोन - दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए।

मुख्य बिंदु:

• पुनर्रसंयोज डीएनए तकनीक द्वारा ये प्रोटीन उच्च शुद्धता में प्राप्त किए जाते हैं।
• इनका मुख्य उपयोग हार्मोनल कमियों को दूर करने और प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने में होता है।
• ये पारंपरिक औषधियों की तुलना में अधिक प्रभावी और सुरक्षित होते हैं।

आम गलतियाँ:

• प्रोटीन के नामों और उनके सही चिकित्सीय उपयोग को आपस में मिला देना।
• इंसुलिन और ग्रोथ हार्मोन के कार्यक्षेत्र को गलत लिखना।
• स्पेलिंग या तकनीकी शब्दों को अशुद्ध लिखना।

Exam Tips:

a) परीक्षाओं में ऐसे प्रश्नों के उत्तर तालिका (Table) बनाकर दें ताकि मूल्यांकन स्पष्ट हो सके।
b) कम से कम 4-5 महत्वपूर्ण प्रोटीनों के नाम और उनके कार्य अवश्य याद रखें।
c) 'पुनर्रसंयोज प्रोटीन' शब्द की परिभाषा भी संक्षिप्त में लिख सकते हैं।

 

Question 2: एक सचित्र (चार्ट) (आरेखित निरूपण के साथ) बनाइए जो प्रतिबंध एंजाइम को, (जिस क्रियाधार डीएनए पर यह कार्य करता है उसे), उन स्थलों को जहाँ यह डीएनए को काटता है व इनसे उत्पन्न उत्पाद को दर्शाता है।

Answer:

प्रतिबंध एंजाइम (EcoRI) की क्रिया को दर्शाने वाला सचित्र आरेख:
प्रतिबंध एंडोक्लिऐज एंजाइम डीएनए के विशिष्ट अनुक्रम को पहचानता है। उदाहरण के लिए, EcoRI अनुक्रम
\( 5' - \text{GAATTC} - 3' \) को पहचानता है और इसे G तथा A के बीच काटता है।
यह कट लगने से डीएनए के दोनों रज्जुकों में चिपचिपे सिरे (Sticky ends) बन जाते हैं जो बाद में डीएनए लाइगेज की सहायता से जुड़ जाते हैं।

मुख्य बिंदु:

• EcoRI एंजाइम 'इको आर वन' प्रजाति से प्राप्त होता है।
• यह पैलिंड्रोमिक न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम को काटता है।
• कटने के बाद डीएनए खंडों पर एकल-रज्जुक फैलाव (चिपचिपे सिरे) बनते हैं।

आम गलतियाँ:

• डीएनए के
5' से 3' और 3' से 5' दिशाओं को गलत दर्शाना।
• एंजाइम द्वारा कट लगाने का सटीक स्थान (G और A के बीच) गलत दिखाना।
• चिपचिपे सिरों के निर्माण को स्पष्ट न कर पाना।

Exam Tips:

a) आरेख बनाते समय तीरों (Arrows) का प्रयोग करके काटने के स्थान को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
b)
5' और 3' सिरों की दिशाएं सही अंकित करें।
c) पैलिंड्रोम अनुक्रम का उदाहरण सही रूप में लिखें।

 

Question 3: कक्षा ग्यारहवीं में जो आप पढ़ चुके हैं उसके आधार पर क्या आप बता सकते हैं कि आण्विक आकार के आधार पर एंजाइम बड़े हैं या डीएनए। आप इसके बारे में कैसे पता लगाएँगे?

Answer:

आण्विक आकार और भार के आधार पर डीएनए, एंजाइम (प्रोटीन) की तुलना में बहुत बड़े होते हैं।
पता लगाने की विधि:
एन्जाइम प्रोटीन्स होते हैं जो अमीनो अम्लों से बने होते हैं। एक सामान्य प्रोटीन में लगभग 300 अमीनो अम्ल होते हैं। प्रत्येक अमीनो अम्ल का औसत आण्विक भार लगभग 110 डाल्टन होता है। इस प्रकार एक औसत प्रोटीन का आण्विक भार
\( 10^4 \) से
\( 10^5 \) डाल्टन होता है।
दूसरी ओर, डीएनए एक वृहद् अणु है जो न्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं से बनता है। एक सामान्य डीएनए का आण्विक भार
\( 10^6 \) से
\( 10^9 \) डाल्टन या उससे भी अधिक हो सकता है। अतः आण्विक आकार और भार दोनों दृष्टियों से डीएनए, एंजाइम से काफी बड़े होते हैं।

मुख्य बिंदु:

• प्रोटीन (एंजाइम) पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएं हैं जिनमें अमीनो अम्लों की संख्या सीमित होती है।
• डीएनए पॉलीप्यूरीन और पॉलीपाइरीमिडीन न्यूक्लियोटाइड्स की लंबी श्रृंखला है।
• आण्विक भार की गणना करके इनकी तुलना आसानी से की जा सकती है।

आम गलतियाँ:

• डीएनए और प्रोटीन के आण्विक भार की इकाइयों (डाल्टन) को गलत लिखना।
• यह मान लेना कि सभी एंजाइम डीएनए से बड़े होते हैं।
• न्यूक्लियोटाइड और अमीनो अम्ल की संरचना में अंतर न समझ पाना।

Exam Tips:

a) तुलना करते समय आण्विक भार (
\( 10^4 \) से
\( 10^5 \) बनाम
\( 10^6 \) से
\( 10^9 \) डाल्टन) का उल्लेख अवश्य करें।
b) उत्तर को वैज्ञानिक तर्कों और तौल के आधार पर समझाएं।
c) कक्षा 11 के जैव अणुओं (Biomolecules) के ज्ञान का संदर्भ दें।

 

Question 4: मानव की एक कोशिका में डीएनए की मोलर सांद्रता क्या होगी? अपने अध्यापक से परामर्श लीजिए।

Answer:

मानव की एक द्विगुणित कोशिका में डीएनए की मात्रा लगभग 6 picogram (
\( 6 \times 10^{-12} \text{ g} \)) होती है। यदि हम इसे मोलर सांद्रता में बदलें, तो मानव जीनोम का आकार लगभग
\( 3.3 \times 10^9 \) बेस पेयर है। कोशिका के आयतन को ध्यान में रखते हुए, मानव की एक कोशिका में डीएनए की लगभग मोलर सांद्रता
\( 3\text{ M} \) प्रति कोशिका होती है।

मुख्य बिंदु:

• मानव कोशिका में कुल डीएनए की लंबाई लगभग 2.2 मीटर होती है।
• सांद्रता की गणना कोशिका के केंद्रक आयतन और डीएनए के कुल द्रव्यमान के आधार पर की जाती है।
• यह मान सैद्धांतिक और आंकिक रूप से निकाला गया औसत है।

आम गलतियाँ:

• मोलर सांद्रता और द्रव्यमान सांद्रता में भ्रमित होना।
• कोशिका के आयतन और नाभिकीय आकार की उपेक्षा करना।
• गलत इकाइयों का प्रयोग करना।

Exam Tips:

a) यह एक तथ्यात्मक प्रश्न है, अतः सीधे मान (
\( 3\text{ M} \)) को याद रखें।
b) संक्षिप्त और सटीक उत्तर लिखें।
c) यदि संभव हो तो सांद्रता की इकाई (
\text{Molar} \)) का ध्यान रखें।

 

Question 5: क्या सुकेंद्रकी कोशिकाओं में प्रतिबंध एंडोन्यूक्लीज मिलते हैं? अपना उत्तर सही सिद्ध कीजिए।

Answer:

नहीं, सुकेंद्रकी (Eukaryotic) कोशिकाओं में स्वाभाविक रूप से प्रतिबंध एंडोन्यूक्लीज (Restriction endonucleases) नहीं पाए जाते हैं। प्रतिबंध एंडोन्यूक्लीज केवल प्रोकैरियोटिक (जैसे जीवाणु) कोशिकाओं में पाए जाते हैं, जहाँ वे जीवाणु को बैक्टीरियोफेज (वायरस) के आक्रमण से बचाने के लिए एक रक्षा तंत्र (प्रतिरक्षण प्रणाली) के रूप में कार्य करते हैं। ये एंजाइम विदेशी डीएनए को पहचानकर काटते हैं जबकि जीवाणु के अपने डीएनए पर मेथिल समूह जुड़ जाने के कारण सुरक्षित रहते हैं।

मुख्य बिंदु:

• प्रतिबंध एंडोन्यूक्लीज प्रोकैरियोट्स (जीवाणु) का प्राकृतिक रक्षा तंत्र हैं।
• सुकेंद्रकी जीवों में जीन नियमन और डीएनए संभरण की अन्य विधियां होती हैं।
• ये एंजाइम जैव प्रौद्योगिकी में डीएनए खंडित करने के लिए बाहरी रूप से उपयोग किए जाते हैं।

आम गलतियाँ:

• यह समझ लेना कि सभी कोशिकाओं में प्रतिबंध एंजाइम मिलते हैं।
• प्रोकैरियोट और यूकैरियोट के रक्षा तंत्र में अंतर न कर पाना।
• 'नहीं' कहने के बाद उचित कारण न देना।

Exam Tips:

a) शुरुआत स्पष्ट रूप से 'नहीं' या 'हाँ' के साथ करें और फिर कारण दें।
b) जीवाणु की रक्षा तंत्र (Defense mechanism) का उल्लेख अवश्य करें।
c) सुकेंद्रकी और प्राककेंद्रकी का अंतर स्पष्ट रखें।

 

Question 6: अच्छी हवा व मिश्रण विशेषता के अतिरिक्त की तुलना में कौन सी अन्य कम्पलसराक सुविधाएँ हैं?

Answer:

बायोरिएक्टर (Bioreactor) में अच्छी हवा (ऑक्सीजन स्थानांतरण) और मिश्रण के अतिरिक्त अन्य महत्वपूर्ण कंपलसरी (आवश्यक) सुविधाएं निम्नलिखित हैं:
1. तापमान नियंत्रण प्रणाली (Temperature control system)
2. पीएच नियंत्रण प्रणाली (pH control system)
3. फोम नियंत्रण प्रणाली (Foam control system)
4. विसंक्रमण और रोगाणुमुक्त रखने की व्यवस्था (Sterilization system)
5. पोषक तत्वों और अम्लों/क्षारों को जोड़ने के लिए पोर्ट्स (Inlets and outlets)
6. नमूना लेने की व्यवस्था (Sampling port)

मुख्य बिंदु:

• बायोरिएक्टर बड़े पैमाने पर सूक्ष्मजीवों या कोशिकाओं के संवर्धन के लिए आवश्यक है।
• इष्टतम परिस्थितियों (pH, तापमान) के बिना वांछित उत्पाद की अधिकतम प्राप्ति संभव नहीं है।
• विलायक या विडोलन तंत्र (Stirrer system) एकसमान मिश्रण सुनिश्चित करता है।

आम गलतियाँ:

• केवल विडोलन और वायु संचार का उल्लेख करना और अन्य भौतिक-रासायनिक मापदंडों को भूल जाना।
• तापमान और पीएच के महत्व को स्पष्ट न करना।
• बायोरिएक्टर के प्रकार और उसकी कार्यप्रणाली में अंतर न समझना।

Exam Tips:

a) बिंदुओं के रूप में उत्तर लिखें ताकि परीक्षक को सभी आवश्यकताएं स्पष्ट दिखें।
b) तापमान, पीएच और फोम नियंत्रण जैसे शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और तथ्यात्मक रखें।

 

Question 7: शिक्षक से परामर्श कर पाँच पैलिंड्रोम अनुप्रास करना होगा कि क्षारक-युग्म नियमों का पालन करते हुए पैलिंड्रोम अनुक्रम बनाने के उदाहरण का पता लगाइए।

Answer:

पैलिंड्रोम अनुक्रम डीएनए का वह विशिष्ट क्रम है जो
\( 5' \to 3' \) दिशा में या
\( 3' \to 5' \) दिशा में पढ़ने पर एक जैसा प्रतीत होता है। क्षारक-युग्म नियमों (A, T के साथ और G, C के साथ जुड़ता है) का पालन करते हुए पाँच पैलिंड्रोम अनुक्रम निम्नलिखित हैं:
1.
\( 5' - \text{GAATTC} - 3' \)
\( 3' - \text{CTTAAG} - 5' \)
2.
\( 5' - \text{GGATCC} - 3' \)
\( 3' - \text{CCTAGG} - 5' \)
3.
\( 5' - \text{TCGA} - 3' \)
\( 3' - \text{AGCT} - 5' \)
4.
\( 5' - \text{AGCT} - 3' \)
\( 3' - \text{TCGA} - 5' \)
5.
\( 5' - \text{AGGCCT} - 3' \)
\( 3' - \text{TCCGGA} - 5' \)

मुख्य बिंदु:

• पैलिंड्रोमिक अनुक्रम प्रतिबंध एंडोन्यूक्लीज द्वारा मान्यता प्राप्त स्थल होते हैं।
• दोनों रज्जुकों पर वर्णक्रम विपरीत दिशाओं में पढ़ने पर समान होता है।
• एडाप्टर और प्लाज्मिड क्लोनिंग में इनका बहुत महत्व है।

आम गलतियाँ:

• क्षारक युग्मन नियम (A-T, G-C) का पालन न करना।
•
\( 5' \) और
\( 3' \) सिरों की सही दिशा न लिखना।
• पैलिंड्रोम की परिभाषा में गलती करना।

Exam Tips:

a) हमेशा दोनों रज्जुकों (
\( 5' \to 3' \) और
\( 3' \to 5' \)) को लिखकर आरेखीय रूप में दर्शाएं।
b) नाइट्रोजन क्षारक के जोड़े सही बनाएं (
\text{A=T} और
\text{G}\equiv\text{C} )।
c) कम से कम तीन से पाँच उदाहरण परीक्षा में जरूर दें।

 

Question 8: अर्द्धसूत्री विभाजन को ध्यान में रखते हुए क्या बता सकते हैं कि पुनर्रसंयोज डीएनए किस अवस्था में बनते हैं?

Answer:

अर्द्धसूत्री विभाजन (Meiosis) के दौरान पुनर्रसंयोज डीएनए (Recombinant DNA) या आनुवंशिक पुनر्रसंयोजन (Genetic recombination), प्रथम अर्द्धसूत्री विभाजन (
\text{Meiosis-I}) की प्रोफेज-I (पूर्ववस्था-I) की पैकीटीन (Pachytene) अवस्था में बनता है। इस अवस्था में समझात गुणसूत्रों (Homologous chromosomes) के गैर-सिस्टर क्रोमैटिड्स के बीच आनुवंशिक पदार्थों की अदला-बदली होती है जिसे पारगमन (Crossing over) कहते हैं।

मुख्य बिंदु:

• यह घटना प्रोफेज-I की पैकीटीन उप-अवस्था में घटित होती है।
• इसमें रिकॉम्बिनेज (Recombinase) एंजाइम महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
• इसके परिणामस्वरूप संतानों में नई आनुवंशिक विभिन्नताएं उत्पन्न होती हैं।

आम गलतियाँ:

• प्रोफेज-I की जगह केवल प्रोफेज लिखना।
• पैकीटीन अवस्था का नाम भूल जाना या जाइगोटीन से भ्रमित होना।
• क्रॉसिंग ओवर की प्रक्रिया को ठीक से स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) अवस्था का नाम स्पष्ट रूप से 'प्रोफेज-I की पैकीटीन उप-अवस्था' लिखें।
b) 'क्रॉसिंग ओवर' (पारगमन) शब्द का उल्लेख अवश्य करें।
c) यह प्रश्न अक्सर बहुविकल्पीय या लघु उत्तरीय में पूछा जाता है, अतः सटीक शब्दावली याद रखें।

 

Question 9: क्या आप बता सकते हैं कि प्रतिवेदक (रिपोर्टर) एंजाइम को वरण्याचिह्न की उपस्थिति में बाहरी डीएनए को परपोषी कोशिकाओं में स्थानांतरण के लिये मॉनीटर करने के लिये किस प्रकार उपयोग में लाया जा सकता है?

Answer:

प्रतिवेदक एंजाइम (Reporter enzyme) ऐसे एंजाइम होते हैं जिन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है। जब बाहरी डीएनए को वरण्याचिह्न (selectable marker) या प्रतिवेदक जीन (जैसे
\text{lacZ}) के साथ जोड़कर परपोषी कोशिका में प्रवेश कराया जाता है, तो यह जीन एक विशिष्ट रंगीन उत्पाद बनाता है। यदि रूपांतरण (transformation) सफल होता है, तो प्रतिवेदक एंजाइम की गतिविधि के आधार पर नीले या रंगहीन कॉलोनी के रूप में रूपांतरित और अरूपांतरित कोशिकाओं की पहचान आसानी से की जा सकती है।

मुख्य बिंदु:

• प्रतिवेदक जीन (जैसे
\text{lacZ}) बीटा-डेलैक्टोसिडेस एंजाइम का कूटलेखन करते हैं।
• वर्णकीय सब्सट्रेट की उपस्थिति में ये वर्ण परिवर्तन द्वारा पहचान आसान बनाते हैं।
• यह विधि नीले-सफेद चयन (Blue-white selection) में प्रयुक्त होती है।

आम गलतियाँ:

• वरण्याचिह्न और प्रतिवेदक एंजाइम के अंतर को न समझना।
•
\text{lacZ} जीन की कार्यप्रणाली को गलत लिखना।
• रूपांतरित और गैर-रूपांतरित कोशिकाओं के अंतर को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a)
\text{lacZ} जीन और बीटा-डेलैक्टोसिडेस का उदाहरण अवश्य दें।
b) नीले और सफेद कॉलोनी के चयन का जिक्र करना न भूलें।
c) उत्तर को चरणबद्ध तरीके से स्पष्ट करें।

 

Question 10: निम्नलिखित का संक्षिप्त वर्णन कीजिए -
(क) प्रतिकृतिउत्पत्ति का उद्भव
(ख) बायोरिएक्टर
(ग) अनुप्रवाह संसाधन

Answer:

(क) प्रतिकृतिउत्पत्ति का उद्भव (Origin of Replication - Ori): यह डीएनए का वह विशेष अनुक्रम है जहाँ से प्रतिकृतियन (Replication) की शुरुआत होती है। यदि बाहरी डीएनए को इस अनुक्रम से जोड़ दिया जाए, तो वह परपोषी कोशिका के अंदर प्रतिकृति बना सकता है। यह डीएनए की प्रतिरूपों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए भी उत्तरदायी है।
(ख) बायोरिएक्टर (Bioreactor): यह एक बड़े बर्तन के समान है जिसमें सूक्ष्मजीवों, पौधों, जंतुओं या मानव कोशिकाओं का उपयोग करके कच्चे माल को जैव रूप से विशिष्ट उत्पादों या व्यष्टि एंजाइमों में परिवर्तित किया जाता है। इसमें इष्टतम परिस्थितियाँ (तापमान, pH, विटामिन, ऑक्सीजन आदि) उपलब्ध कराई जाती हैं। सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला बायोरिएक्टर विडोलन (Stirring) प्रकार का होता है।
(ग) अनुप्रवाह संसाधन (Downstream Processing): जैव प्रौद्योगिकी द्वारा तैयार उत्पाद को बाजार में भेजने से पहले उसे कई प्रक्रमों से गुजारा जाता है। इन प्रक्रमों में पृथक्करण (Separation) और शोधन (Purification) शामिल हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से अनुप्रवाह संसाधन कहते हैं। इसके बाद उत्पाद को उपयुक्त परिरक्षक (Preservative) के साथ संरूपित (Formulated) किया जाता है।

मुख्य बिंदु:

•
\text{Ori} स्थल डीएनए複製 के नियंत्रण के लिए आवश्यक है।
• बायोरिएक्टर में लगातार ऑक्सीजन संभरण और pH नियंत्रण की व्यवस्था होती है।
• अनुप्रवाह संसाधन उत्पाद की गुणवत्ता नियंत्रण और शुद्धता के लिए अंतिम चरण है।

आम गलतियाँ:

• तीनों शीर्षकों (Ori, बायोरिएक्टर, अनुप्रवाह) की परिभाषाओं को आपस में मिला देना।
• बायोरिएक्टर में विडोलन और वायु संचार के महत्व को न बताना।
• अनुप्रवाह संसाधन में पृथक्करण और शोधन चरणों का उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक भाग को (क), (ख) और (ग) डालकर अलग-अलग स्पष्ट रूप से लिखें।
b) मुख्य शब्दावली जैसे
\text{Ori}, विडोलन, शोधन और परिरक्षक का सही उपयोग करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और बिंदुओं के रूप में लिखें ताकि पूरे अंक मिल सकें।

 

Question 11: संक्षेप में बताइए:
(क) पीसीआर
(ख) प्रतिबंध एंजाइम और डीएनए
(ग) काइटिनेज

Answer:

(क) पीसीआर (PCR - Polymerase Chain Reaction): यह इन-विट्रो डीएनए (पॉलिमरेज श्रृंखला अभिक्रिया) है। इस विधि द्वारा कम समय में जीन की कई प्रतिकृतियों का संश्लेषण किया जाता है। इसके मुख्य तीन चरण हैं - विकृतिकरण (Denaturation), तापानुकूलन (Annealing) और विस्तार (Extension)।
(ख) प्रतिबंध एंजाइम और डीएनए: प्रतिबंध एंजाइम को 'आण्विक कैंची' कहा जाता है। यह एंजाइम डीएनए को विशिष्ट स्थलों पर काटता है। प्रतिबंध एंडोन्यूक्लीज डीएनए के भीतर विशिष्ट पैलिंड्रोमिक अनुक्रमों को पहचानकर काटते हैं जैसे EcoRI।
(ग) काइटिनेज (Chitinase): यह एक एंजाइम है जिसका उपयोग कवक (Fungi) कोशिका को तोड़ने के लिए किया जाता है ताकि डीएनए के साथ वृहद् अणु जैसे आरएनए, प्रोटीन, वसा और पॉलीसैकराइड बाहर निकल सकें।

मुख्य बिंदु:

• पीसीआर तकनीक में टैग पॉलिमरेज (Taq polymerase) एंजाइम का उपयोग होता है।
• प्रतिबंध एंजाइम डीएनए को काटने का कार्य करते हैं।
• काइटिनेज कवक की कोशिका भित्ति को पचाने में मदद करता है।

आम गलतियाँ:

• पीसीआर के तीनों चरणों के नाम और तापमान के क्रम को गलत लिखना।
• प्रतिबंध एंजाइम और डीएनए लाइगेज के कार्यों को मिला देना।
• काइटिनेज का संबंध कवक से न जोड़ पाना।

Exam Tips:

a) पीसीआर के तीनों चरणों (विकृतिकरण, तापानुकूलन, विस्तार) को क्रमानुसार लिखें।
b) 'आण्विक कैंची' शब्द का प्रयोग प्रतिबंध एंजाइम के संदर्भ में अवश्य करें।
c) प्रत्येक उप-भाग का उत्तर अलग पैराग्राफ में दें।

 

Question 12: अपने अध्यापक से चर्चा करके पता लगाइए कि निम्नलिखित के बीच कैसे भेद करेंगे:
(क) प्लाज्मिड डीएनए और गुणसूत्रीय डीएनए
(ख) आरएनआर और डीएनए
(ग) एक्सो-न्यूक्लीज और एंडो-न्यूक्लीज

Answer:

(क) प्लाज्मिड डीएनए और गुणसूत्रीय डीएनए में अंतर:
1. प्लाज्मिड डीएनए बाह्य गुणसूत्रीय गोलाकार डीएनए होता है जो स्वतः प्रतिकृति करता है, जबकि गुणसूत्रीय डीएनए, जीव के सभी जीनों को धारण करता है।
2. प्लाज्मिड जीवाणु में प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं, जबकि गुणसूत्रीय डीएनए मुख्य केंद्रक में होता है。
3. प्लाज्मिड की उपस्थिति कोशिका के लिए अनिवार्य नहीं है, जबकि गुणसूत्रीय डीएनए जीवन के लिए आवश्यक है।
(ख) आरएनए और डीएनए में अंतर:
1. आरएनए मुख्य रूप से कोशिकाद्रव्य और केंद्रिका में पाया जाता है, जबकि डीएनए मुख्यतः केंद्रक में पाया जाता है।
2. आरएनए में राइबोस् शर्करा होती है, जबकि डीएनए में डिऑक्सीराइबोज़ शर्करा होती है।
3. आरएनए में थायमिन के स्थान पर यूरेसिल होता है, जबकि डीएनए में थायमिन पाया जाता है।
(ग) एक्सो-न्यूक्लीज और एंडो-न्यूक्लीज में अंतर:
1. एक्सो-न्यूक्लीज डीएनए के सिरों से न्यूक्लियोटाइड खंडों को अलग करते हैं।
2. एंडो-न्यूक्लीज डीएनए के भीतर विशिष्ट स्थलों पर काटते हैं।

मुख्य बिंदु:

• अंतर स्पष्ट करने के लिए तालिका (Table) का उपयोग सबसे अच्छा तरीका है।
• प्लाज्मिड और गुणसूत्र की स्थिति और कार्य भिन्न होते हैं।
• न्यूक्लียेज एंजाइमों के काटने का स्थान (सिरों से या भीतर से) उन्हें अलग करता है।

आम गलतियाँ:

• आरएनए और डीएनए के शर्करा और नाइट्रोजन क्षारक के अंतर को गलत लिखना।
• एक्सो और एंडो न्यूक्लीज के काटने की स्थिति (सिरों पर vs भीतर) में भ्रमित होना।
• बिना तालिका के लंबे पैराग्राफ में उत्तर लिखना।

Exam Tips:

a) भेद स्पष्ट करने वाले प्रश्नों में हमेशा कॉलम या सारणी (
\text{Table}) बनाएं।
b) प्रमुख अंतरों (जैसे शर्करा, स्थिति, कार्य) को बिंदुओं में दर्शाएं।
c) वैज्ञानिक नामों की वर्तनी शुद्ध रखें।

 

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