Step-by-Step Textbook Solutions for Class 12 Biology Chapter 07 मानव स्वास्थ्य तथा रोग
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Question 1: कौन-से विभिन्न जन स्वास्थ्य उपाय हैं, जिन्हें आप संक्रामक रोगों के विरुद्ध रक्षा-उपायों के रूप में सुझायेंगे?
Answer:
संक्रामक रोगों के विरुद्ध रक्षा हेतु निम्नलिखित जन-स्वास्थ्य उपाय अपनाए जा सकते हैं:
1. अपशिष्ट और उत्सर्जी पदार्थों का समुचित निपटान करना चाहिए।
2. संक्रमित व्यक्ति और उसके द्वारा उपयोग की जाने वाली वस्तुओं से उचित दूरी बनाए रखनी चाहिए।
3. नालियों और जल जमाव वाले स्थानों पर कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए।
4. आवासीय क्षेत्रों के निकट जल-जभराव को रोकना तथा नालियों के गंदे पानी की समुचित निकासी की व्यवस्था करनी चाहिए।
5. संक्रामक रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए समय पर टीकाकरण (Vaccination) कार्यक्रम चलाना चाहिए।
मुख्य बिंदु:
• संक्रामक रोगों की रोकथाम स्वच्छता और टीकाकरण पर निर्भर करती है।
• वेक्टर (वाहक) जनित रोगों से बचने के लिए जल जमाव रोकना आवश्यक है।
• व्यक्तिगत स्वच्छता और सामाजिक स्वास्थ्य सुरक्षा दोनों जरूरी हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान देना और सामाजिक स्वच्छता की उपेक्षा करना।
• टीकाकरण के महत्व को न समझना।
• अपशिष्ट निपटान के सही तरीकों को न लिखना।
Exam Tips:
a) जन स्वास्थ्य उपायों को बिंदुओं के रूप में लिखें ताकि उत्तर स्पष्ट दिखे।
b) स्वच्छता और टीकाकरण जैसे मुख्य शब्दों का उल्लेख अवश्य करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और सटीक रखें।
Question 2: जैरिकी के अध्ययन ने संक्रामक रोगों को नियंत्रित करने में किस प्रकार हमारी सहायता की है?
Answer:
जैविकी (Biology) के अध्ययन ने संक्रामक रोगों को नियंत्रित करने में निम्नलिखित प्रकार से सहायता की है:
1. जैव विज्ञान, रोगों के कारकों (रोगाणुओं) की पहचान करने में हमारी सहायता करता है।
2. रोग फैलाने वाले रोगाणुओं के जीवन चक्र का अध्ययन किया जाता है ताकि उनके संक्रमण के तरीकों को समझा जा सके।
3. रोगाणुओं के मनुष्य में संचरण की क्रिया-विधि की जानकारी प्राप्त होती है।
4. रोगों से किस प्रकार सुरक्षा की जा सकती है, इसकी वैज्ञानिक विधि ज्ञात होती है।
5. जैविकी के कारण ही विभिन्न रोगों के विरुद्ध प्रभावी टीके और औषधियाँ तैयार करने में सहायता मिलती है।
मुख्य बिंदु:
• जैविकी रोगाणुओं के जीवन चक्र को समझने में मदद करती है।
• टीकों और औषधियों का विकास जैविक अनुसंधान पर आधारित है।
• संचरण की विधि जानने से रोकथाम आसान होती है।
आम गलतियाँ:
• केवल टीकों का जिक्र करना और जीवन चक्र के अध्ययन को छोड़ देना।
• जैविकी और चिकित्सा विज्ञान के संबंधों को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) बिंदुओं में उत्तर लिखकर अपने तर्कों को स्पष्ट करें।
b) जीवन चक्र और रोगाणु जैसे वैज्ञानिक शब्दों का प्रयोग करें।
c) उत्तर को एनसीईआरटी के मानकों के अनुसार लिखें।
Question 3: निम्नलिखित रोगों का संचरण कैसे होता है?
(क) अमीबंता (ख) मलेरिया (ग) एस्केरिसता (घ) नुमोनिया
Answer:
(क) अमीबंता: यह रोग मानव की वृहद् आंत्र में पाए जाने वाले एंटअमीबा हिस्टोलिटिका नामक प्रोटोजोआ परजीवी से होता है। इस रोग के वाहक घरेलू मक्खियाँ हैं, जो परजीवी को संक्रमित व्यक्ति के मल से खाद्य और खाद्य पदार्थों तक ले जाकर उन्हें संदूषित कर देती हैं। संदूषित पेयजल और खाद्य पदार्थ इसके संक्रमण के मुख्य स्रोत हैं।
(ख) मलेरिया: यह रोग प्लाज्मोडियम नामक प्रोटोजोआ के कारण होता है। मादा एनोफेलीज मच्छर इस रोग के संवाहक के रूप में कार्य करते हैं। जब संक्रमित मादा एनोफेलीज मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटती है, तो परजीवी उसके लार के माध्यम से मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और लाल रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करते हैं।
(ग) एस्केरिसता: यह आंत्र परजीवी एस्केरिस द्वारा होता है। इस रोग का संक्रमण संदूषित पानी, शाक-सब्जियों, फलों और वायु आदि के माध्यम से होता है। संक्रमित व्यक्ति के मल के साथ परजीवी के अंडे बाहर आकर मिट्टी, जल और पौधों को संदूषित कर देते हैं।
(घ) नुमोनिया: मानव में नुमोनिया रोग स्ट्रेप्टोकोकस नुमोनिया और हिमोफिलस इन्फ्लूएंजा जैसे जीवाणुओं द्वारा होता है। यह संक्रमण संक्रमित व्यक्ति द्वारा छोड़ी गई खाँसी या छींक से निकली बूँदों/एरोसॉल के साँس द्वारा अंदर लेने से फैलता है।
मुख्य बिंदु:
• प्रत्येक रोग के विशिष्ट रोगजनक और संचरण के तरीके को याद रखें।
• मक्खियाँ और मच्छर जैविक वाहक के रूप में कार्य करते हैं।
• संदूषित भोजन और जल कई संक्रामक रोगों का कारण बनते हैं।
आम गलतियाँ:
• रोगजनक का नाम गलत लिखना (जैसे प्लाज्मोडियम की जगह बैक्टीरिया लिखना)।
• संचरण के माध्यम (जैसे घरेलू मक्खी या मच्छर) को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक उप-भाग (क, ख, ग, घ) को अलग-अलग पैराग्राफ या बिंदुओं में स्पष्ट रूप से हल करें।
b) रोगजनक (Pathogen) और वाहक (Vector) दोनों के नाम अवश्य लिखें।
c) वैज्ञानिक नामों को रेखांकित (underline) करने का अभ्यास करें।
Question 4: जल-वाहित रोगों की रोकथाम के लिए आप क्या उपाय अपनायेंगे?
Answer:
जल-वाहित रोगों की रोकथाम के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जाने चाहिए:
1. सभी जल स्रोतों जैसे जल कुण्ड और पानी के टैंक की नियमित सफाई करनी चाहिए तथा इन्हें असंक्रमित रखना चाहिए।
2. वाहित मल और कूड़े-करकट को जलाशयों में बहने से रोकना चाहिए।
3. भोजन बनाने, पीने और अन्य घरेलू कार्यों के लिए हमेशा परिष्कृत, संदूषित पदार्थों से मुक्त और शुद्ध जल का उपयोग करना चाहिए।
मुख्य बिंदु:
• जल की शुद्धता जल-वाहित रोगों को रोकने की कुंजी है।
• जल स्रोतों की नियमित सफाई आवश्यक है।
• सीवेज को सीधे जल स्रोतों में मिलने से रोकना चाहिए।
आम गलतियाँ:
• केवल पानी उबालने की बात लिखना और अन्य निवारक उपायों को छोड़ देना।
• जल स्रोतों के संरक्षण का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) उपायों को क्रमानुसार लिखें।
b) 'संदूषित जल' और 'वाहित मल' जैसे सही तकनीकी शब्दों का प्रयोग करें।
c) उत्तर को साफ-सुथरा और बिंदुवार प्रस्तुत करें।
Question 5: डी एन ए वैक्सीन के सन्दर्भ में 'उपयुक्त जीन' के अर्थ के बारे में अपने अध्याय से चर्चा कीजिए।
Answer:
डी एन ए वैक्सीन के संदर्भ में 'उपयुक्त जीन' का अर्थ उस जीन से है जो इम्यूनोजेनिक प्रोटीन (जो प्रतिरक्षा उत्पन्न करता है) के निर्माण को नियंत्रित करता है। ऐसे जीन को क्लोन किए जाते हैं तथा फिर वाहक के साथ समेकित करके व्यक्ति में प्रतिरक्षा उत्पन्न करने के लिए उसके शरीर में प्रवेश कराए जाते हैं।
मुख्य बिंदु:
• डीएनए वैक्सीन में संपूर्ण रोगाणु के बजाय वांछित जीन का उपयोग होता है।
• यह जीन एंटीजन (प्रोटीन) का निर्माण करता है जो प्रतिरक्षा तंत्र को सक्रिय करता है।
• जीन क्लोनिंग तकनीक का इसमें प्रयोग होता है।
आम गलतियाँ:
• 'उपयुक्त जीन' को सामान्य जीन मान लेना, जबकि यह विशेष रूप से एंटीजन बनाने वाला जीन होता है।
• वैक्सीन की कार्यप्रणाली को स्पष्ट रूप से न समझाना।
Exam Tips:
a) 'इम्यूनोजेनिक प्रोटीन' और 'क्लोनिंग' जैसे शब्दों का सही प्रयोग करें।
b) उत्तर को संक्षिप्त और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लिखें।
c) एनसीईआरटी की परिभाषा का ही अनुसरण करें।
Question 6: प्राथमिक और द्वितीयक लसिकाभो के अंगों के नाम बताइये।
Answer:
लसिकाभ अंगों के नाम निम्नलिखित हैं:
1. प्राथमिक लसिकाभ अंग: अस्थिमज्जा (Bone Marrow) और थाइमस (Thymus)।
2. द्वितीयक लसिकाभ अंग: प्लीहा (Spleen), लसिका गाँठें (Lymph nodes), टॉन्सिल, अपेंडिक्स और छोटी आंत के पियर्स पैचेज (Peyer's patches)।
मुख्य बिंदु:
• प्राथमिक अंगों में लिम्फोसाइट्स का परिपक्वव और विभेदन होता है।
• द्वितीयक अंग लिम्फोसाइट्स को एंटीजन से क्रिया करने के लिए स्थल प्रदान करते हैं।
• अस्थिमज्जा और थाइमस प्राथमिक अंग हैं जबकि प्लीहा आदि द्वितीयक हैं।
आम गलतियाँ:
• प्राथमिक और द्वितीयक अंगों के नामों को आपस में मिला देना।
• पियर्स पैचेज या अपेंडिक्स का उल्लेख भूल जाना।
Exam Tips:
a) दोनों श्रेणियों (प्राथमिक और द्वितीयक) को अलग-अलग headings के तहत लिखें।
b) सभी प्रमुख अंगों के नाम सही वर्तनी के साथ लिखें।
c) यह एक सीधा तथ्यात्मक प्रश्न है, इसलिए अनावश्यक विस्तार से बचें।
Question 7: इस अध्याय में निम्नलिखित सुप्रसिद्ध संकेताक्षर किये गये हैं। इनका पूरा रूप बताइये:
(क) एमएएलटी (ख) सीएमआई (ग) एड्स (घ) एनएसीओ (च) एचआईवी
Answer:
(क) एमएएलटी (MALT): म्यूकोसल एसोसिएटेड लिम्फॉयड टिश्यू (Mucosal-Associated Lymphoid Tissue)
(ख) सीएमआई (CMI): सेल मीडिएटेड इम्युनिटी (Cell-Mediated Immunity)
(ग) एड्स (AIDS): एक्वायर्ड इम्म्यूनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम (Acquired Immuno Deficiency Syndrome)
(घ) एनएसीओ (NACO): नेशनल एAIDS कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (National AIDS Control Organisation)
(च) एचआईवी (HIV): ह्युमन इम्युनो डेफिशिएंसी वायरस (Human Immunodeficiency Virus)
मुख्य बिंदु:
• संक्षिप्त रूपों के अंग्रेजी और हिंदी दोनों नाम याद रखना फायदेमंद है।
• प्रतिरक्षा विज्ञान और एड्स से जुड़े प्रमुख संगठन और शब्द हैं।
• वर्तनी (Spelling) की शुद्धता का विशेष ध्यान रखें।
आम गलतियाँ:
• अंग्रेजी के शब्दों का हिंदी उच्चारण लिखते समय वर्तनी की अशुद्धियाँ करना।
• MALT या NACO के पूरे रूप में एक भी शब्द गलत लिखना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक संकेताक्षर को उसकी फुल फॉर्म के साथ स्पष्ट रूप से लिखें।
b) परीक्षा में पूरे अंक प्राप्त करने के लिए स्पेलिंग सही होनी चाहिए।
c) इन्हें सूची (list) के रूप में प्रस्तुत करें।
Question 8: निम्नलिखित में भेद कीजिए और प्रत्येक के उदाहरण दीजिए:
(क) सहज (जन्मजात) और उपार्जित प्रतिरक्षा
(ख) सक्रिय और निष्क्रिय प्रतिरक्षा
Answer:
(क) सहज (जन्मजात) और उपार्जित प्रतिरक्षा में अंतर:
• सहज प्रतिरक्षा: यह जन्म के समय मौजूद होती है और यह एक गैर-विशिष्ट प्रकार की रक्षा प्रणाली है। यह शरीर में बाह्य कारकों के प्रवेश के विभिन्न अवरोध (जैसे शारीरिक, कायिकीय, कोशिकीय और साइटोकाइन अवरोध) खड़े करती है। उदाहरण: त्वचा, मुँह की लार, आँखों के आँसू।
• उपार्जित प्रतिरक्षा: यह रोग विशिष्ट होती है तथा जीवनकाल में अर्जित की जाती है। इसमें संस्मरण (Memory) आधारित विशिष्ट अनुक्रिया होती है। उदाहरण: मानव में चेचक की बीमारी के लिए प्रतिरक्षा।
(ख) सक्रिय और निष्क्रिय प्रतिरक्षा में अंतर:
• सक्रिय प्रतिरक्षा: जब व्यक्ति का शरीर अपनी कोशिकाओं द्वारा रोगाणु के प्रति प्रतिरक्षी पैदा करता है, तो यह सक्रिय प्रतिरक्षा कहलाती है। यह धीमी होती है, लेकिन प्रभावी अनुक्रिया में अधिक समय लेती है। उदाहरण: मानव में चेचक बीमारी के प्रति प्रतिरक्षा या टीकाकरण।
• निष्क्रिय प्रतिरक्षा: जब शरीर की रक्षा के लिए बने-बनाए प्रतिरक्षी सीधे ही शरीर को दिए जाते हैं, तो यह निष्क्रिय प्रतिरक्षा कहलाती है। यह तुरंत राहत पहुँचाती है। उदाहरण: मानव में काली खाँसी, टिटनेस, रेबीज, पोलियो आदि रोगों से टीकाकरण द्वारा रक्षा।
मुख्य बिंदु:
• सहज प्रतिरक्षा जन्मजात और गैर-विशिष्ट होती है।
• उपार्जित प्रतिरक्षा विशिष्ट और स्मृति पर आधारित होती है।
• सक्रिय में शरीर खुद एंटीबॉडी बनाता है, निष्क्रिय में रेडीमेड एंटीबॉडी दी जाती है।
आम गलतियाँ:
• सक्रिय और निष्क्रिय प्रतिरक्षा के उदाहरणों में भ्रमित होना।
• जन्मजात और उपार्जित प्रतिरक्षा के अंतर को स्पष्ट रूप से न लिख पाना।
Exam Tips:
a) अंतर स्पष्ट करने के लिए बिंदुओं या तालिका (table) का प्रयोग करें।
b) प्रत्येक प्रकार के साथ उपयुक्त उदाहरण अवश्य दें।
c) 'गैर-विशिष्ट' और 'विशिष्ट' जैसे मुख्य शब्दों का उपयोग करें।
Question 9: प्रतिरक्षी (प्रतिपिंड) अणु का अच्छी तरह नामांकित चित्र बनाइए।
Answer:
प्रतिरक्षी (Antibody) अणु का आकार 'Y' जैसा होता है। इसमें चार पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाएँ होती हैं - दो छोटी (Light chains) और दो लंबी (Heavy chains), जिन्हें \( H_2L_2 \) के रूप में दर्शाया जाता है।
(नोट: छात्र एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक के चित्र 7.4 (प्रतिरक्षी अणु की संरचना) का अभ्यास करें, जिसमें प्रतिजन बंधक स्थल (Antigen binding site), भारी श्रृंखला, हल्की श्रृंखला और डाइसल्फ़ाइड बंध को स्पष्ट रूप से नामांकित किया गया हो।)
मुख्य बिंदु:
• प्रतिरक्षी अणु में दो भारी और दो हल्की श्रृंखलाएँ होती हैं।
• इसमें प्रतिजन बंधक स्थल (Antigen binding site) होते हैं।
• इसका सामान्य आकार 'Y' अक्षर जैसा होता है।
आम गलतियाँ:
• नामांकण (Labelling) में भारी और हल्की श्रृंखलाओं को गलत दर्शाना।
• 'Y' आकृति को स्पष्ट रूप से न बनाना।
Exam Tips:
a) चित्र हमेशा पेंसिल और स्केल से साफ-सुथरा बनाएँ।
b) सभी मुख्य भागों (Heavy chain, Light chain, Antigen binding site) के नाम स्पष्ट लिखें।
c) चित्र के नीचे उसका शीर्षक अवश्य लिखें।
Question 10: वे कौन-कौन से विभिन्न रास्ते हैं जिनके द्वारा मानव में प्रतिरक्षाून्यूनता विषाणु (एच आई वी) का संचरण होता है?
Answer:
मानव में प्रतिरक्षाून्यूनता विषाणु (HIV) के संचरण के निम्नलिखित मुख्य रास्ते हैं:
1. संक्रमित रक्त और रक्त उत्पादों के आदान-प्रदान से।
2. संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाने से।
3. संक्रमित सुइयों या अंतःशिरा औषधि के आदी व्यक्तियों द्वारा संक्रमित सुइयों को साझा करने से।
4. संक्रमित गर्भवती माँ से प्लेसेंटा (अपरा) के माध्यम से उसके गर्भस्थ शिशु में।
मुख्य बिंदु:
• HIV मुख्य रूप से शारीरिक तरल पदार्थों (रक्त, वीर्य, योनि स्राव) के माध्यम से फैलता है।
• असुरक्षित यौन संबंध और संक्रमित सुई इसके प्रमुख कारण हैं।
• यह छूने या साथ खाने से नहीं फैलता है।
आम गलतियाँ:
• HIV और AIDS को एक ही समझ लेना।
• संचरण के सामाजिक कारणों को लिख देना जबकि जैविक माध्यम लिखना आवश्यक है।
Exam Tips:
a) संचरण के मार्गों को बिंदुओं में लिखें।
b) 'रक्त आदान-प्रदान', 'असुरक्षित यौन संबंध' और 'संक्रमित सुई' जैसे मुख्य बिंदु अवश्य शामिल करें।
c) उत्तर सटीक और वैज्ञानिक भाषा में हो।
Question 11: वे कौन सी क्रियाविधि है जिससे एड्स विषाणु संक्रमित व्यक्ति के प्रतिरक्षा तंत्र का ह्रास करता है?
Answer:
एड्स विषाणु (HIV) के द्वारा प्रतिरक्षा तंत्र के ह्रास की क्रियाविधि निम्नलिखित है:
1. संक्रमित व्यक्ति के शरीर में प्रवेश करने के पश्चात एड्स विषाणु वृहद् भक्षकाणु (Macrophage) में प्रवेश करता है।
2. यहाँ इसका आरएनए जीनोम, विलोम ट्रांसक्रिप्टेज (Reverse Transcriptase) एंजाइम की मदद से प्रतिलिपियन द्वारा डीएनए बनाता है जो होस्ट कोशिका के डीएनए में प्रवेश कर जाता है और विषाणु कणों का निर्माण करवाता है।
3. इसके बाद HIV सहायक टी-लम्फोसाइट्स (TH cells) पर आक्रमण करता है और अपनी प्रतियाँ बनाता है।
4. रक्त में उपस्थित संतति विषाणु अन्य सहायक टी-लम्फोसाइट्स पर आक्रमण करते हैं।
5. यह प्रक्रिया बार-बार दोहराई जाती है जिसके परिणामस्वरूप संक्रमित व्यक्ति के शरीर में टी-लम्फोसाइट्स की संख्या लगातार घटती जाती है।
6. परिणामस्वरूप, रोगी का प्रतिरक्षा तंत्र इतना कमजोर हो जाता है कि वह अन्य संक्रमणों से लड़ने में असमर्थ हो जाता है।
मुख्य बिंदु:
• HIV मुख्य रूप से सहायक टी-लिम्फोसाइट्स (TH cells) को नष्ट करता है।
• इसमें रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज एंजाइम की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
• टी-सेल की संख्या घटने से प्रतिरक्षा तंत्र ध्वस्त हो जाता है।
आम गलतियाँ:
• वृहद् भक्षकाणु और टी-सहायक कोशिकाओं की भूमिका को आपस में मिला देना।
• रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज प्रक्रिया का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) इस प्रक्रिया को चरण-बद्ध (step-by-step) तरीके से लिखें।
b) 'सहायक टी-लम्फोसाइट्स' और 'वृहद् भक्षकाणु' शब्दों का सही प्रयोग करें।
c) यह एक महत्वपूर्ण दीर्घ उत्तरीय प्रश्न है, इसलिए पूरी प्रक्रिया स्पष्ट लिखें।
Question 12: प्रसामान्य कोशिका से कैंसर कोशिका किस प्रकार भिन्न है?
Answer:
प्रसामान्य कोशिका और कैंसर कोशिका में निम्नलिखित अंतर हैं:
1. प्रसामान्य कोशिकाओं में कोशिका वृद्धि और कोशिका विभेदन अत्यंत नियंत्रित व नियमित होते हैं।
2. प्रसामान्य कोशिकाओं में 'संपर्कीय संदमन' (Contact inhibition) नामक गुण होता है जिसके कारण अन्य कोशिकाओं से इनका संपर्क इनकी अनियंत्रित वृद्धि को रोकता है।
3. इसके विपरीत, कैंसर कोशिकाओं में यह गुण समाप्त हो जाता है, अतः इन कोशिकाओं में अनियंत्रित रूप से विभाजन और विभेदन होने लगता है।
4. इसके परिणामस्वरूप कैंसर कोशिकाएँ लगातार विभाजित होकर कोशिकाओं का एक पिंड (ट्यूमर/रसोली) बना देती हैं।
मुख्य बिंदु:
• प्रसामान्य कोशिकाओं में संपर्कीय संदमन (Contact inhibition) पाया जाता है।
• कैंसर कोशिकाओं में अनियंत्रित विभाजन की प्रवृत्ति होती है।
• कैंसर कोशिकाएँ ट्यूमर का निर्माण करती हैं।
आम गलतियाँ:
• संपर्कीय संदमन की परिभाषा को गलत लिखना या छोड़ देना।
• केवल ट्यूमर का जिक्र करना और कोशिका विभाजन के नियंत्रण को न समझाना।
Exam Tips:
a) दोनों प्रकार की कोशिकाओं की तुलना करते हुए उत्तर लिखें।
b) 'संपर्कीय संदमन' शब्द का प्रयोग अवश्य करें क्योंकि यह परीक्षा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
c) बिंदुओं में अंतर स्पष्ट करें।
Question 13: मेटास्टेटिस का क्या मतलब है व्याख्या कीजिये।
Answer:
मेटास्टेटिस (Metastasis) कैंसर कोशिकाओं का एक अत्यंत घातक गुण है। इसके अंतर्गत प्राथमिक ट्यूमर की कोशिकाएँ रक्त वाहिनियों या लसिका वाहिकाओं के माध्यम से शरीर के अन्य स्वस्थ ऊतकों और अंगों में फैल जाती हैं। वहाँ पहुँचकर वे नए ट्यूमर का निर्माण करती हैं। इस प्रकार द्वितीयक ट्यूमर बनाने की इस प्रक्रिया को मेटास्टेटिस कहते हैं।
मुख्य बिंदु:
• मेटास्टेटिस घातक (Malignant) ट्यूमर का लक्षण है।
• इसमें कैंसर कोशिकाएँ रक्त या लसिका द्वारा फैलती हैं।
• इससे शरीर के दूरस्थ अंगों में द्वितीयक ट्यूमर बनते हैं।
आम गलतियाँ:
• साधारण (Benign) ट्यूमर में मेटास्टेटिस होना लिख देना, जबकि यह केवल दुर्दम (Malignant) ट्यूमर में होता है।
• फैलने के माध्यम (रक्त या लसिका) का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) मेटास्टेटिस की परिभाषा और प्रक्रिया को स्पष्ट शब्दों में लिखें।
b) 'दुर्दम ट्यूमर' (Malignant tumor) शब्द का उल्लेख जरूर करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और सटीक रखें।
Question 14: ऐल्कोहॉल/ड्रग के द्वारा होने वाले दुरुपयोग के हानिकारक प्रभावों की सूची बनाईये।
Answer:
ऐल्कोहॉल और ड्रग के दुरुपयोग के निम्नलिखित हानिकारक प्रभाव होते हैं:
1. अत्यधिक मात्रा में लेने पर इनसे केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की निष्क्रियता, हृदयघात, कोमा और अंततः मृत्यु हो सकती है।
2. मादक पदार्थों के आदी व्यक्तियों को पैसे न मिलने पर वे चोरी का सहारा ले सकते हैं, जिससे पारिवारिक व सामाजिक संकट उत्पन्न होता है।
3. ऐल्कोहॉल के दीर्घकालिक प्रयोग से यकृत (Liver) को गंभीर क्षति पहुँचती है।
4. रक्त शिरा में इंजेक्शन द्वारा ड्रग्स लेने से एड्स और यकृत शोथ-बी (Hepatitis B) जैसे गंभीर संक्रमणों की संभावना बढ़ जाती है।
5. गर्भवती महिलाओं द्वारा मादक पदार्थों के सेवन से प्रतिकूल प्रभाव भ्रूण पर पड़ता है।
6. इससे अंधाधुंध व्यवहार, बर्बरता और हिंसा बढ़ जाती है।
मुख्य बिंदु:
• ड्रग्स और ऐल्कोहॉल शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से हानिकारक हैं।
• इंजेक्शन के साझा इस्तेमाल से HIV और हेपेटाइटिस बी का खतरा होता है।
• इससे तंत्रिका तंत्र और यकृत सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल शारीरिक हानियाँ लिखना और सामाजिक प्रभावों को भूल जाना।
• अतिरेक (Overdose) के परिणामों को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) प्रभावों को शारीरिक, मानसिक और सामाजिक श्रेणियों में बाँटकर या बिंदुओं में लिखें।
b) मुख्य प्रभाव जैसे कोमा, यकृत क्षति और संक्रमण का जिक्र अवश्य करें।
c) उत्तर को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करें।
Question 15: क्या आप ऐसा सोचते हैं कि मित्रगण किसी को ऐल्कोहॉल/ड्रग सेवन के लिये प्रभावित कर सकते हैं? यदि हाँ, तो व्यक्ति ऐसे प्रभावों से कैसे अपने आपको बचा सकता है?
Answer:
हाँ, मित्रगण (Peer group) किसी को ऐल्कोहॉल या ड्रग्स लेने के लिए अत्यधिक प्रभावित कर सकते हैं, विशेषकर युवावस्था में। इनसे बचने के निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:
1. माता-पिता और अध्यापकों का सहयोग: माता-पिता और शिक्षकों का उचित मार्गदर्शन और संवाद होना चाहिए।
2. उचित परामर्श: ऐसे मित्रों की संगत से तुरंत दूरी बना लें और शिक्षकों या परामर्शदाताओं से उचित मार्गदर्शन लें।
3.समस्याओं का सामना करना: जीवन की असफलताओं और निराशाओं को जीवन का एक सामान्य हिस्सा मानकर उनका सामना करना सीखें।
4. सकारात्मक गतिविधियाँ: अपनी रुचि, खेलकूद और रचनात्मक कार्यों में मन लगाएँ तथा अत्यधिक दबाव से बचें।
मुख्य बिंदु:
• पीयर प्रेशर (Peer pressure) ड्रग्स के सेवन का एक मुख्य कारण है।
• उचित परामर्श और परिवार का साथ इससे बचा सकता है।
• तनाव प्रबंधन सीखना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• केवल हाँ या ना में उत्तर देना और बचाव के उपाय न लिखना।
• व्यावहारिक सुझावों के बजाय केवल किताबी बातें लिखना।
Exam Tips:
a) प्रश्न के दोनों भागों (प्रभावित करना और बचाव) का उत्तर दें।
b) निवारक उपायों को बिंदुवार लिखें।
c) सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए उत्तर समाप्त करें।
Question 16: ऐसा क्यों है कि जब कोई व्यक्ति ऐल्कोहॉल या ड्रग लेना शुरू कर देता है तो उस आदत से छुटकारा पाना कठिन होता है? अपने अध्यापक से चर्चा कीजिए।
Answer:
ऐल्कोहॉल या ड्रग्स की आदत से छुटकारा पाना कठिन होता है क्योंकि:
1. ड्रग्स और ऐल्कोहॉल के प्रति शरीर और मस्तिष्क की मनोवैज्ञानिक एवं शारीरिक आसक्ति (Addiction) हो जाती है।
2. इनके बार-बार सेवन से शरीर में मौजूद रिसेप्टर्स की सहन स्तर (Tolerance) बढ़ जाती है, जिसके कारण अधिक मात्रा में ड्रग्स लेने की आदत पड़ जाती है।
3. यह एक दुष्चक्र (Vicious circle) बन जाता है जिसमें व्यक्ति नियमित सेवन करने लगता है और चाहकर भी इसे छोड़ नहीं पाता।
मुख्य बिंदु:
• ड्रग्स और ऐल्कोहॉल के प्रति शारीरिक और मानसिक निर्भरता (Addiction) होती है।
• टॉलरेंस (सहन क्षमता) बढ़ने से मात्रा बढ़ानी पड़ती है।
• यह आदत एक दुष्चक्र का रूप ले लेती है।
आम गलतियाँ:
• केवल इच्छाशक्ति की कमी बताना और शारीरिक/मनोवैज्ञानिक निर्भरता को न समझाना।
• 'टॉलरेंस' और 'आसक्ति' जैसे जैविक शब्दों का प्रयोग न करना।
Exam Tips:
a) व्यसन (Addiction) और सहन स्तर (Tolerance) के वैज्ञानिक कारणों को समझाएँ।
b) उत्तर को तार्किक और स्पष्ट रूप से लिखें।
c) दुष्चक्र शब्द का प्रयोग करें।
Question 17: आपके विचार से किशोरों को ऐल्कोहॉल या ड्रग के सेवन के लिये क्या प्रेरित करता है और इससे कैसे बचा जा सकता है?
Answer:
किशोरों को ऐल्कोहॉल या ड्रग्स के सेवन के लिए प्रेरित करने वाले मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
1. जिज्ञासा, जोखिम उठाने की प्रवृत्ति और नए अनुभव की इच्छा।
2. साथियों का दबाव (Peer pressure) और परीक्षा का तनाव।
3. स्वतंत्रता का अहसास पाने की चाह और धूम्रपान या ड्रग्स को आधुनिकता का प्रतीक मानना।
4. तनाव, बोरियत, या असफलता से बचने का गलत तरीका।
बचत के उपाय:
• बच्चों को खेलकूद, संगीत, योग और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखना चाहिए।
• माता-पिता और शिक्षकों को बच्चों की समस्याओं को समझकर उनका मनोबल बढ़ाना चाहिए।
• आवश्यकता पड़ने पर योग्य मनोवैज्ञानिक या परामर्शदाता की सहायता लेनी चाहिए।
मुख्य बिंदु:
• जिज्ञासा और पीयर प्रेशर किशोरों में व्यसन का मुख्य कारण हैं।
• रचनात्मक गतिविधियाँ किशोरों को सही दिशा देती हैं।
• परामर्श और संवाद से इस समस्या से निपटा जा सकता है।
आम गलतियाँ:
• केवल कारणों को लिखना और निवारक उपायों को छोड़ देना।
•शोषण या पारिवारिक समस्याओं का उल्लेख न करना।
Exam Tips:
a) कारणों और उपायों दोनों के लिए अलग-अलग headings बनाएँ।
b) किशोर मनोविज्ञान को ध्यान में रखते हुए तार्किक उत्तर लिखें।
c) सकारात्मक और व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करें।
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Biology Class 12 Curriculum Solutions: Chapter 07 मानव स्वास्थ्य तथा रोग
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