Download NCERT Solutions for Class 12 Biology Chapter 04 वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत
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Question 1: मेंडल द्वारा प्रयोगों के लिए मटर के पौधे चुनने से क्या लाभ हुए?
Answer:
मेंडल द्वारा प्रयोगों के लिए मटर के पौधे (Pisum sativum) चुनने के निम्नलिखित प्रमुख लाभ थे:
1. यह एकवर्षीय पौधा है, इसलिए इसे आसानी से बगीचे में उगाया जा सकता है और कम समय में कई पीढ़ियों का अध्ययन किया जा सकता है।
2. इसमें विभिन्न लक्षणों के कई स्पष्ट वैकल्पिक रूप (जैसे लंबा-नाटा, पीला-हरा बीज) देखने को मिलते हैं।
3. इस पौधे में प्राकृतिक रूप से स्व-परागण होता है, लेकिन कृत्रिम रूप से पर-परागण भी आसानी से कराया जा सकता है।
4. मटर के फूल द्वилиंगी होते हैं, जिससे नर व मादा भाग एक ही पौधे में मिल जाते हैं और पर-परागण के दौरान इन्हें नियंत्रित करना आसान होता है।
5. ये पौधे आनुवंशिक रूप से शुद्ध होते हैं और स्व-परागण द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपने शुद्ध लक्षणों को बनाए रखते हैं।
6. मटर के पौधे की एक ही पीढ़ी में अनेक बीज उत्पन्न होते हैं, जिससे सांख्यिकीय विश्लेषण और निष्कर्ष निकालने में आसानी होती है।
मुख्य बिंदु:
• मटर का पौधा एकवर्षीय और आसानी से उगने वाला होता है।
• इसमें स्पष्ट विपरीत लक्षण पाए जाते हैं।
• स्व-परागण और कृत्रिम पर-परागण दोनों की सुविधा होती है।
• बड़ी संख्या में संतति उत्पन्न होने के कारण परिणाम विश्वसनीय होते हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल एक या दो लाभ लिखकर उत्तर अधूरा छोड़ देना।
• स्व-परागण और पर-परागण की प्रक्रिया को स्पष्ट न करना।
• वैज्ञानिक नाम गलत लिखना।
Exam Tips:
a) उत्तर को बिंदुओं (Points) में लिखें ताकि परीक्षक को जाँचने में आसानी हो।
b) मटर के वैज्ञानिक नाम का उल्लेख करना न भूलें।
c) मुख्य लाभों जैसे 'कम जीवनकाल' और 'विपरित लक्षणों की उपस्थिति' को अवश्य शामिल करें।
Question 2: (क) प्रभाविता और अप्रभाविता
(ख) समयुग्मजी और विषमयुग्मजी
(ग) एकसंकर और द्विसंकर
Answer:
(क) प्रभाविता और अप्रभाविता में अंतर:
प्रभाविता वह स्थिति है जिसमें असमान कारकों के जोड़े में कोई एक कारक दूसरे कारक पर प्रभावी होता है और F₁ पीढ़ी में अपने लक्षण को प्रदर्शित करता है।
अप्रभाविता वह स्थिति है जिसमें असमान कारकों के जोड़े में अप्रभावी कारक प्रभावी कारक के कारण छिप जाता है और F₁ पीढ़ी में प्रकट नहीं होता है।
(ख) समयुग्मजी और विषमयुग्मजी में अंतर:
समयुग्मजी (Homozygous) में एक कारक के दोनों युग्म विकल्पी (Alleles) समान होते हैं, जैसे- \( TT \) या \( tt \) ।
विषमयुग्मजी (Heterozygous) में एक कारक के दोनों युग्म विकल्पी असमान होते हैं, जैसे- \( Tt \) ।
(ग) एकसंकर और द्विसंकर में अंतर:
एकसंकर (Monohybrid) में केवल एक लक्षण के विक्षेपण या वंशागति का अध्ययन किया जाता है।
द्विसंकर (Dihybrid) में एक साथ दो विपरीत लक्षणों की वंशागति का अध्ययन किया जाता है।
मुख्य बिंदु:
• प्रभाविता F₁ पीढ़ी में लक्षण प्रकट करती है, अप्रभाविता नहीं।
• समयुग्मजी में समान युग्म विकल्पी और विषमयुग्मजी में भिन्न युग्म विकल्पी होते हैं।
• एकसंकर क्रॉस एक लक्षण और द्विसंकर क्रॉस दो लक्षणों से संबंधित है।
आम गलतियाँ:
• समयुग्मजी और विषमयुग्मजी के उदाहरण गलत देना।
• प्रभाविता और अप्रभाविता की परिभाषा में अंतर स्पष्ट न कर पाना।
• तुलनात्मक तालिका न बनाकर पैराग्राफ में लिखना।
Exam Tips:
a) अंतर स्पष्ट करने वाले प्रश्नों में हमेशा तालिका (Table) का उपयोग करें।
b) उदाहरण के साथ परिभाषा स्पष्ट करें।
c) \( TT \) और \( Tt \) जैसे संकेतों को सही ढंग से लिखें।
Question 3: कोई द्विगुणित जीन 6 स्थलों के लिए विषमयुग्मजी है, कितने प्रकार के युग्मकों का उत्पादन सम्भव है?
Answer:
युग्मकों के प्रकार की गणना के लिए सूत्र \( 2^n \) का उपयोग किया जाता है, जहाँ \( n \) विषमयुग्मजी स्थलों (Loci) की संख्या है।
यहाँ \( n = 6 \) है।
अतः संभव युग्मकों की कुल संख्या = \( 2^6 \)
\( = 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 2 \times 2 = 64 \)
अतः ऐसे जीव द्वारा 64 प्रकार के भिन्न युग्मक बनाए जा सकते हैं।
मुख्य बिंदु:
• युग्मकों की संख्या ज्ञात करने का सूत्र \( 2^n \) है।
• यहाँ 'n' विषमयुग्मजी जीन स्थलों की संख्या को दर्शाता है।
• स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम के कारण विभिन्न संयोजनों का निर्माण होता है।
आम गलतियाँ:
• सूत्र में \( n \) के स्थान पर कुल जीनों की संख्या या समयुग्मजी स्थलों को ले लेना।
• गणना में गणितीय गलती करना (\( 2^6 = 12 \) लिख देना)।
Exam Tips:
a) गणना वाले प्रश्नों में पहले सूत्र अवश्य लिखें।
b) चरण-दर-चरण गणना दिखाएं ताकि यदि अंतिम उत्तर गलत भी हो तो स्टेप्स के अंक मिल सकें।
c) मात्रक या इकाई (युग्मकों के प्रकार) स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 4: एकसंकर क्रॉस का प्रयोग करते हुए, प्रभाविता नियम की व्याख्या करो।
Answer:
प्रभाविता का नियम (Law of Dominance) मेंडल के एकसंकर क्रॉस पर आधारित है। इस नियम के अनुसार:
1. लक्षणों का नियंत्रण 'कारक' (जिसे अब जीन कहा जाता है) नामक विविक्त इकाइयों द्वारा होता है।
2. कारक हमेशा जोड़े में होते हैं।
3. यदि किसी विषमयुग्मजी जोड़े के दो कारक असमान हों, तो इनमें से एक कारक दूसरे कारक पर प्रभावी (Dominant) होता है और स्वयं को व्यक्त करता है, जबकि दूसरा अप्रभावी (Recessive) रहता है और छिपा रहता है।
उदाहरण के लिए, जब शुद्ध लंबे पौधे (\( TT \)) और शुद्ध बौने पौधे (\( tt \)) के मध्य संकरण कराया जाता है, तो F₁ पीढ़ी में सभी पौधे लंबे (\( Tt \)) होते हैं। यहाँ लंबापन का कारक (\( T \)) बौनेपन के कारक (\( t \)) पर प्रभावी होता है।
मुख्य बिंदु:
• प्रभाविता का नियम एकसंकर क्रॉस के परिणामों पर आधारित है।
• कारक हमेशा जोड़े में होते हैं।
• विषमयुग्मजी अवस्था में प्रभावी कारक अपना प्रभाव दिखाता है।
आम गलतियाँ:
• नियम को बिना उदाहरण के समझाना।
• F₁ पीढ़ी के जीनोटाइप और फेनोटाइप को स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) प्रभाविता के नियम को लिखते समय मुख्य बिंदुओं का प्रयोग करें।
b) क्रॉस का संक्षिप्त प्रतीकात्मक आरेख अवश्य बनाएँ।
c) 'कारक' और 'युग्म विकल्प' शब्दों का सही संदर्भ में प्रयोग करें।
Question 5: परीक्षार्थ संकरण की परिभाषा लिखो और चित्र बनाओ।
Answer:
परीक्षार्थ संकरण (Test Cross):
जब F₁ पीढ़ी के किसी संकर जीव का संकरण उसके समयुग्मजी अप्रभावी जनक के साथ कराया जाता है, तो इसे परीक्षार्थ संकरण कहते हैं। इसका उपयोग किसी जीव के अज्ञात जीनोटाइप का पता लगाने के लिए किया जाता है।
यदि अज्ञात लंबे पौधे का संकरण बौने पौधे (\( tt \)) से कराने पर संतति में 50% लंबे और 50% बौने पौधे प्राप्त हों, तो अज्ञात पौधा विषमयुग्मजी (\( Tt \)) है। यदि सभी संतति लंबी हों, तो वह समयुग्मजी (\( TT \)) है।
मुख्य बिंदु:
• परीक्षार्थ संकरण अज्ञात जीनोटाइप ज्ञात करने की विधि है।
• इसमें F₁ संतति का क्रॉस समयुग्मजी अप्रभावी जनक से कराया जाता है।
• इसका अनुपात एकसंकर टेस्ट क्रॉस में हमेशा 1:1 होता है।
आम गलतियाँ:
• परीक्षार्थ संकरण और बैक क्रॉस (संकर पूर्वज संकरण) में भ्रमित होना।
• अप्रभावी जनक के स्थान पर प्रभावी जनक से क्रॉस लिख देना।
Exam Tips:
a) परिभाषा के साथ इसका मुख्य उद्देश्य अवश्य लिखें।
b) पुनेट स्क्वायर (Punnett Square) या क्रॉस का रेखाचित्र स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
c) अनुपात (Ratio) लिखना न भूलें।
Question 6: एक ही जीन स्थल वाले समयुग्मजी मादा और विषमयुग्मजी नर के संकरण से प्राप्त प्रथम संतति पीढ़ी के फेनोटाइप वितरण का पनेट वर्ग बनाकर प्रदर्शन करो।
Answer:
माना जीन स्थल के लिए समयुग्मजी मादा (जैसे शुद्ध लंबे पौधे, \( TT \)) और विषमयुग्मजी नर (जैसे संकर लंबे पौधे, \( Tt \)) हैं।
मा मादा के युग्मक: \( T, T \)
नर के युग्मक: \( T, t \)
पनेट वर्ग (Punnett Square) तालिका:
| युग्मक | T | T |
|---|---|---|=
| T | TT | TT |
| t | Tt | Tt |
परिणामस्वरूप, F₁ पीढ़ी में 50% पौधे समयुग्मजी प्रभावी (\( TT \)) और 50% पौधे विषमयुग्मजी प्रभावी (\( Tt \)) होते हैं। फेनोटाइप के रूप में सभी 100% पौधे लंबे होते हैं।
मुख्य बिंदु:
• पनेट वर्ग संभाव्यता ज्ञात करने का एक आलेखीय तरीका है।
• समयुग्मजी मादा से केवल एक प्रकार का युग्मक बनता है।
• विषमयुग्मजी नर से दो प्रकार के युग्मक बनते हैं।
आम गलतियाँ:
• युग्मकों को गलत तरीके से पनेट वर्ग में रखना।
• फेनोटाइप और जीनोटाइप में अंतर स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) पनेट वर्ग बनाते समय कॉलम और रो में युग्मकों को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
b) फेनोटाइप (दृश्य रूप) और जीनोटाइप (आनुवंशिक रूप) दोनों का प्रतिशत या अनुपात लिखें।
c) तालिका को साफ-सुथरा बनाएँ।
Question 7: पीले बीज वाले पौधों (\( YyTt \)) का संकरण हरे बीज वाले (\( yytt \)) पौधे से करने पर निम्न में से किस प्रकार के फेनोटाइप संतति की आशा की जा सकती है?
(क) लंबे हरे
(ख) बौने हरे
Answer:
दिए गए प्रश्न में लक्षण बीज के रंग और आकार से संबंधित प्रतीत होते हैं, यदि प्रश्न के अनुसार फेनोटाइप का विश्लेषण किया जाए:
(क) लंबे हरे फेनोटाइप की संतति प्राप्त हो सकती है यदि स्वतंत्र अपव्यूहन के अनुसार लक्षण अलग हों।
(ख) बौने हरे फेनोटाइप की संतति भी प्राप्त हो सकती है यदि अप्रभावी लक्षणों का संयोजन हो।
मानक द्विसंकर टेस्ट क्रॉस के अनुसार, ऐसे संकरण में चार प्रकार के फेनोटाइप 1:1:1:1 के अनुपात में प्राप्त होते हैं, जिसमें पीले-गोल, पीले-झुर्रीदार, हरे-गोल और हरे-झुर्रीदार सभी प्रकार की संतति की संभावना होती है।
मुख्य बिंदु:
• यह द्विसंकर टेस्ट क्रॉस का एक उदाहरण है।
• इसमें स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम लागू होता है।
• सभी संभावित फेनोटाइपिक संयोजन समान अनुपात में बनते हैं।
आम गलतियाँ:
• केवल एक ही संयोजन को सही मान लेना।
• जीनोटाइप और फेनोटाइप के अंतर को भूल जाना।
Exam Tips:
a) विकल्पों का चयन करते समय प्रश्न की मूल शर्त को ध्यान से पढ़ें।
b) द्विसंकर क्रॉस के अनुपातों को याद रखें।
c) उत्तर को तार्किक रूप से स्पष्ट करें।
Question 8: दो विषमयुग्मजी जनकों का क्रॉस है r और y किया गया। मान लें दो स्थल (\( loci \)) सहलग्न हैं, तो द्विसंकर क्रॉस में \( F_2 \) पीढ़ी के फेनोटाइप के लक्षणों का वितरण क्या होगा?
Answer:
यदि दो जीन स्थल सहलग्न (Linked) हैं, तो वे स्वतंत्र अपव्यूहन के मेंडेलियन नियम का पालन नहीं करते हैं।
सहलग्नता के कारण जनकीय संयोजन (Parental combinations) संतति में उच्च आवृत्ति में बने रहते हैं, जबकि पुनרוम्बोजन (Recombinant) कम आवृत्ति में बनते हैं।
अतः \( F_2 \) पीढ़ी में मेंडेलियन द्विसंकर अनुपात (\( 9:3:3:1 \)) प्राप्त नहीं होगा, बल्कि जनकीय लक्षण अधिक मात्रा में तथा नए संयोजन बहुत कम मात्रा में प्राप्त होंगे।
मुख्य बिंदु:
• सहलग्नता मेंडल के स्वतंत्र अपव्यूहन नियम का अपवाद है।
• सहलग्न जीन एक ही गुणसूत्र पर पास-पास स्थित होते हैं।
• इससे \( F_2 \) पीढ़ी का अनुपात \( 9:3:3:1 \) से विचलित हो जाता है।
आम गलतियाँ:
• सहलग्नता होने पर भी सामान्य \( 9:3:3:1 \) अनुपात लिख देना।
• जनकीय और पुनर्योजी संतति के अंतर को न समझाना।
Exam Tips:
a) सहलग्नता (Linkage) की परिभाषा और उसका प्रभाव स्पष्ट रूप से लिखें।
b) यह उल्लेख अवश्य करें कि अनुपात में क्या परिवर्तन आता है।
c) मॉर्गन के प्रयोगों का संदर्भ दें यदि आवश्यक हो।
Question 9: आनुवंशिकी में टी.एच. मॉर्गन के योगदान का संक्षेप में उल्लेख करें।
Answer:
आनुवंशिकी में थॉमस हंट मॉर्गन (T.H. Morgan) का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है:
1. मॉर्गन ने ड्रोसोफिला मेलैनोगास्टर (फलों की मक्खी) पर प्रयोग करके यह सिद्ध किया कि जीन गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं।
2. उन्होंने 'सहलग्नता' (Linkage) और 'विनिमय' (Crossing Over) की खोज की।
3. उन्होंने बताया कि एक ही गुणसूत्र पर स्थित जीन सहलग्न होते हैं और इनके बीच की दूरी पुनर्संयोजन की आवृत्ति को निर्धारित करती है।
4. उनके विद्यार्थियों ने आनुवंशिक मानचित्र (Genetic Mapping) की शुरुआत की।
5. उन्होंने लिंग-सहसंलग्न वंशागति (Sex-linked inheritance) की भी खोज की।
मुख्य बिंदु:
• ड्रोसोफिला को आनुवंशिक प्रयोगों के लिए मुख्य जीव के रूप में स्थापित किया।
• सहलग्नता और विनिमय की खोज की।
• आनुवंशिक मानचित्र निर्माण का आधार रखा।
आम गलतियाँ:
• मेंडल और मॉर्गन के योगदान को मिला देना।
• ड्रोसोफिला का वैज्ञानिक नाम गलत लिखना।
Exam Tips:
a) मॉर्गन के योगदान को बिंदुओं में लिखें।
b) 'सहलग्नता' और 'विनिमय' शब्दों का उल्लेख जरूर करें।
c) ड्रोसोफिला का नाम सही वर्तनी (Spelling) के साथ लिखें।
Question 10: वंशावली विश्लेषण क्या है? यह विश्लेषण किस प्रकार उपयोगी है?
Answer:
वंशावली विश्लेषण (Pedigree Analysis):
यह किसी परिवार के कई पीढ़ियों में एक विशिष्ट लक्षण या आनुवंशिक विकार के इतिहास का अध्ययन करने का एक आलेखीय आरेख है। इसमें परिवार के सदस्यों के रिश्तों और लक्षणों को प्रतीकों द्वारा दर्शाया जाता है.
उपयोगिता:
1. यह आनुवंशिक विकारों (जैसे हीमोफीलिया, वर्णांधता) के पैटर्न को समझने में मदद करता है।
2. यह पता लगाने में उपयोगी है कि कोई लक्षण प्रभावी है या अप्रभावी, तथा ऑटोसोमल है या लिंग-सहसंलग्न।
3. यह भावी पीढ़ियों में किसी आनुवंशिक रोग के होने की संभावना का पूर्वानुमान लगाने में सहायक है।
मुख्य बिंदु:
• वंशावली विश्लेषण पारिवारिक इतिहास का आरेखीय अध्ययन है।
• यह मानव आनुवंशिकी में बहुत महत्वपूर्ण है जहाँ नियंत्रित क्रॉस संभव नहीं हैं।
• यह विकारों की वंशागति का प्रकार बताता है।
आम गलतियाँ:
• वंशावली चार्ट के मानक प्रतीकों का उल्लेख न करना।
• इसका मुख्य उद्देश्य स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) परिभाषा स्पष्ट और संक्षिप्त दें।
b) इसके कम से कम दो-तीन मुख्य उपयोग अवश्य लिखें।
c) मानव समाज में इसके महत्व को रेखांकित करें।
Question 11: मानव में लिंग निर्धारण कैसे होता है?
Answer:
मानव में लिंग निर्धारण 'XY प्रकार' का होता है:
1. मानव में कुल 46 गुणसूत्र (23 जोड़े) होते हैं, जिनमें 22 जोड़े ऑटोसोम और 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र (Sex chromosomes) होता है।
2. स्त्रियों में दो समान लिंग गुणसूत्र होते हैं जिन्हें XX कहा जाता है। अतः स्त्रियाँ समगमी (Homogametic) होती हैं और केवल एक ही प्रकार के अंडे (\( 22 + X \)) बनाती हैं।
3. पुरुषों में एक X और एक Y गुणसूत्र होता है (\( XY \))। अतः पुरुष विषमयुग्मजी होते हैं और दो प्रकार के शुक्राणु बनाते हैं—50% शुक्राणु (\( 22 + X \)) और 50% शुक्राणु (\( 22 + Y \))।
4. यदि X गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडे को निषेचित करता है, तो युग्मज XX बनता है और बालिका का जन्म होता है। यदि Y गुणसूत्र वाला शुक्राणु अंडे को निषेचित करता है, तो युग्मज XY बनता है और बालक का जन्म होता है।
मुख्य बिंदु:
• मानव में लिंग निर्धारण XY तंत्र पर आधारित है।
• महिलाएँ homogametic (XX) और पुरुष heterogametic (XY) होते हैं।
• बच्चे का लिंग पूरी तरह से पिता के शुक्राणु पर निर्भर करता है।
आम गलतियाँ:
• यह मान लेना कि शिशु का लिंग माता तय करती है।
• ऑटोसोम और लिंग गुणसूत्रों की संख्या गलत लिखना।
Exam Tips:
a) उत्तर में XX और XY तंत्र को स्पष्ट रूप से समझाएं।
b) आरेखीय निरूपण (Cross) अवश्य दिखाएं।
c) यह वैज्ञानिक तथ्य स्पष्ट करें कि पिता की भूमिका लिंग निर्धारण में निर्णायक होती है।
Question 12: शिशु का रुधिर वर्ग 'O' है। पिता का रुधिर वर्ग 'A' और माता का 'B' है। जनकों के जीनोटाइप मालूम करें और अन्य संतति में प्रत्याशित जीनोटाइपों की जानकारी प्राप्त करें।
Answer:
मानव में रुधिर वर्ग ABO रक्त समूह प्रणाली के अनुसार होता है, जो बहुविकल्पित्ता (Multiple allelism) का उदाहरण है।
1. यदि शिशु का रुधिर वर्ग 'O' है, तो उसका जीनोटाइप अवश्य ही \( I^O I^O \) होगा।
2. यह 'O' रुधिर वर्ग तभी संभव है जब एक \( I^O \) एलील पिता से और दूसरा माता से मिला हो।
3. चूंकि पिता का रुधिर वर्ग 'A' है और उसने बच्चे को \( I^O \) दिया है, अतः पिता का जीनोटाइप \( I^A I^O \) (विषमयुग्मजी A) होगा।
4. इसी प्रकार, माता का रुधिर वर्ग 'B' है और उसने भी बच्चे को \( I^O \) दिया है, अतः माता का जीनोटाइप \( I^B I^O \) (विषमयुग्मजी B) होगा।
5. इन जनकों (\( I^A I^O \times I^B I^O \)) से अन्य संतति में संभावित रुधिर वर्ग और जीनोटाइप निम्नलिखित होंगे:
• \( I^A I^B \) (रुधिर वर्ग AB)
• \( I^A I^O \) (रुधिर वर्ग A)
• \( I^B I^O \) (रुधिर वर्ग B)
• \( I^O I^O \) (रुधिर वर्ग O)
मुख्य बिंदु:
• रुधिर वर्ग O का जीनोटाइप हमेशा \( I^O I^O \) होता है।
• जनकों को विषमयुग्मजी (\( I^A I^O \) और \( I^B I^O \)) होना पड़ेगा।
• ऐसी स्थिति में सभी चारों रुधिर वर्ग (A, B, AB, O) उत्पन्न होने की संभावना होती है।
आम गलतियाँ:
• जनकों का जीनोटाइप समयुग्मजी (\( I^A I^A \) या \( I^B I^B \)) मान लेना।
• ABO रक्त समूह के एलील संकेतों को गलत लिखना।
Exam Tips:
a) आनुवंशिक समस्याओं को हल करते समय पहले दिए गए लक्षणों से जीनोटाइप निकालें।
b) पनेट वर्ग बनाकर सभी संभावित संततियों को दिखाएं।
c) एलील के सही प्रतीकों का प्रयोग करें।
Question 13: निम्न शब्दों को उदाहरण समेत समझाइये:
(अ) सह-प्रभाविता
(ब) अपूर्ण प्रभाविता।
Answer:
(अ) सह-प्रभाविता (Co-dominance):
जब दोनों युग्मविकल्पी (Alleles) स्वतंत्र रूप से और स्पष्ट रूप से F₁ पीढ़ी में अपने आपको व्यक्त करते हैं, तो इसे सह-प्रभाविता कहते हैं। इसमें कोई भी एलील दूसरे पर प्रभावी नहीं होता, बल्कि दोनों मिलकर अपना प्रभाव दिखाते हैं।
उदाहरण: मनुष्यों में ABO रक्त समूह। यदि किसी व्यक्ति में \( I^A \) और \( I^B \) दोनों एलील उपस्थित हैं, तो उसका रुधिर वर्ग AB होता है, क्योंकि दोनों एलील अपने प्रोटीन बनाते हैं।
(ब) अपूर्ण प्रभाविता (Incomplete Dominance):
जब F₁ पीढ़ी में कोई भी लक्षण पूरी तरह प्रभावी नहीं होता, बल्कि दोनों का मिला-जुला (मध्यवर्ती) लक्षण प्रकट होता है, तो इसे अपूर्ण प्रभाविता कहते हैं।
उदाहरण: मीराबिलिस जलापा (Gulans/4 o'clock plant) या श्वानफ्लॉवर (Snapdragon) में लाल फूल (\( RR \)) और सफेद फूल (\( rr \)) का संकरण कराने पर F₁ पीढ़ी में गुलाबी फूल (\( Rr \)) प्राप्त होते हैं।
मुख्य बिंदु:
• सह-प्रभाविता में दोनों लक्षण एक साथ दिखते हैं (जैसे AB रक्त वर्ग)।
• अपूर्ण प्रभाविता में मध्यवर्ती (Intermediate) लक्षण प्रकट होता है (जैसे गुलाबी रंग)।
• ये दोनों मेंडल के प्रभाविता नियम के अपवाद हैं।
आम गलतियाँ:
• सह-प्रभाविता और अपूर्ण प्रभाविता की परिभाषाओं को आपस में मिला देना।
• उचित और सटीक उदाहरण न देना।
Exam Tips:
a) दोनों की परिभाषा अलग-अलग शीर्षकों के तहत लिखें।
b) प्रत्येक के लिए एक स्पष्ट और प्रसिद्ध उदाहरण दें।
c) अपूर्ण प्रभाविता का F₂ अनुपात (\( 1:2:1 \)) भी उल्लेखित कर सकते हैं।
Question 14: बिंदु-उत्परिवर्तन क्या है? एक उदाहरण दें।
Answer:
बिंदु-उत्परिवर्तन (Point Mutation):
डीएनए (DNA) के किसी एक एकल क्षार युग्म (Base pair) में होने वाले परिवर्तन को बिंदु-उत्परिवर्तन कहते हैं। यह जीन के न्यूक्लियोटाइड क्रम में बदलाव के कारण होता है।
उदाहरण: हसियाकार कोशिका अरक्तता (Sickle-cell anemia)। इसमें हीमोग्लोबिन जीन की बीटा श्रृंखला के छठे कोodon में एक एकल क्षार युग्म के परिवर्तन (GAG से GUG) के कारण glutamic acid के स्थान पर valine आ जाता है।
मुख्य बिंदु:
• यह डीएनए के एकल क्षार युग्म में परिवर्तन से होता है।
• इससे प्रोटीन की संरचना और कार्य बदल सकता है।
• सिकल-सेल एनीमिया इसका सबसे अच्छा और प्रमुख उदाहरण है।
आम गलतियाँ:
• पूरे गुणसूत्र में परिवर्तन को बिंदु-उत्परिवर्तन बता देना।
• उदाहरण में गलत क्षार परिवर्तन या अमीनो एसिड का नाम लिखना।
Exam Tips:
a) परिभाषा स्पष्ट रूप से 'एकल क्षार युग्म' के संदर्भ में दें।
b) सिकल-सेल एनीमिया का उदाहरण अवश्य दें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और सटीक रखें।
Question 15: वंशागति के क्रोमोसोम वाद को किसने प्रस्तावित किया?
Answer:
वंशागति का क्रोमोसोम वाद (Chromosomal Theory of Inheritance) सन 1902 में वाल्टर सटन (Walter Sutton) और थियोडोर बोवेरी (Theodor Boveri) द्वारा स्वतंत्र रूप से प्रस्तावित किया गया था। बाद में थॉमस हंट मॉर्गन ने प्रयोगात्मक रूप से इसकी पुष्टि की।
मुख्य बिंदु:
• यह सिद्धांत सटन और बोवेरी द्वारा दिया गया था।
• यह बताता है कि जीन गुणसूत्रों पर स्थित होते हैं और गुणसूत्रों का व्यवहार ही मेंडेलियन कारकों (जीनों) की वंशागति को नियंत्रित करता है।
• यह मेंडेलियन आनुवंशिकी और साइटोलॉजी (कोशिका विज्ञान) को जोड़ता है।
आम गलतियाँ:
• केवल एक वैज्ञानिक का नाम लिखना (सटन या बोवेरी)।
• मॉर्गन को इस सिद्धांत का प्रस्तावक बता देना (जबकि उन्होंने इसकी पुष्टि की थी)।
Exam Tips:
a) दोनों वैज्ञानिकों (सटन और बोवेरी) के नाम स्पष्ट रूप से लिखें।
b) सन (1902) का उल्लेख करना अच्छा प्रभाव डालता है।
c) एक-दो वाक्यों में इसके मुख्य सार को भी जोड़ सकते हैं।
Question 16: किन्हीं दो लिंग सहसंलग्न आनुवंशिक विकारों का उनके लक्षणों सहित उल्लेख करो।
Answer:
दो प्रमुख लिंग सहसंलग्न आनुवंशिक विकार निम्नलिखित हैं:
1. हीमोफीलिया (Hemophilia):
यह एक अप्रभावी लिंग-सहसंलग्न रोग है। इसमें व्यक्ति में रक्त का थक्का जमने की क्षमता समाप्त या बहुत कम हो जाती है। थोड़ी सी चोट लगने पर भी लगातार रक्त बहता रहता है।
2. वर्णांधता (Color Blindness):
यह भी एक लिंग-सहसंलग्न अप्रभावी विकार है जिसमें रोगी लाल और हरे रंग में भेद नहीं कर पाता है। यह एक्स-गुणसूत्र (X-chromosome) पर स्थित जीन के उत्परिवर्तन के कारण होता है।
मुख्य बिंदु:
• दोनों विकार X-गुणसूत्र से जुड़े अप्रभावी लक्षण हैं।
• पुरुषों में इनके प्रकट होने की संभावना अधिक होती है क्योंकि उनमें केवल एक X गुणसूत्र होता है।
• हीमोफीलिया में रक्त का थक्का नहीं जमता, जबकि वर्णांधता में रंगों की पहचान नहीं होती।
आम गलतियाँ:
• विकार को ऑटोसोमल बता देना।
• लक्षणों को स्पष्ट रूप से न लिखना।
Exam Tips:
a) विकारों के नाम स्पष्ट रूप से शीर्षकों के रूप में लिखें।
b) उनके आनुवंशिक आधार (X-linked recessive) का उल्लेख जरूर करें।
c) संक्षिप्त और स्पष्ट लक्षण दें।
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