NCERT Solutions Class 12 Biology Chapter 05 Molecular Basis of Inheritance (वंशागति के आणविक आधार) in Hindi

Solutions for Class 12 Biology: Chapter 05 वंशागति के आणविक आधार

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Practice Class 12 Biology Solutions: Chapter 05 वंशागति के आणविक आधार

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Question 1: निम्न को नाइट्रोजनिक क्षार व न्यूक्लियोटाइड के रूप में वर्गीकृत कीजिए - एडेनिन, साइटोडीन, थाईमीन, ग्वानोसीन, यूरेसिल व साइटोसीन।

Answer:

नाइट्रोजनिक क्षार: एडेनिन, थाईमीन, यूरेसिल, साइटोसीन。
न्यूक्लियोटाइड: साइटोडीन, ग्वानोसीन।

मुख्य बिंदु:

• नाइट्रोजनिक क्षार न्यूक्लिक अम्ल के मूल घटक होते हैं।
• न्यूक्लियोटाइड में नाइट्रोजनिक क्षार, पेन्टोस शर्करा और फॉस्फेट समूह होते हैं।
• साइटोडीन और ग्वानोसीन न्यूक्लियोसाइड हैं जो न्यूक्लियोटाइड के निर्माण में भाग लेते हैं।

आम गलतियाँ:

• न्यूक्लियोसाइड और न्यूक्लियोटाइड में अंतर न समझना।
• यूरेसिल को डीएनए का क्षार मान लेना।
• साइटोसीन और साइटोडीन को एक ही समझ लेना।

Exam Tips:

a) सभी नाइट्रोजनिक क्षारों के नाम अच्छे से याद रखें।
b) आरएनए और डीएनए में पाए जाने वाले क्षारों का अंतर स्पष्ट रखें।
c) वर्गीकरण करते समय headings का स्पष्ट उपयोग करें।

 

Question 2: यदि एक द्विरज्जुक्र डीएनएफ में 20 प्रतिशत साइटोसीन है तो डीएनए में मिलने वाले एडेनिन के प्रतिशत की गणना कीजिए।

Answer:

चारगाफ के नियमानुसार द्विरज्जुक्र डीएनए में \( A + G = T + C = 1 \) होता है।
अतः एडेनिन = थाईमीन और ग्वानोसीन = साइटोसीन होता है।
चूँकि साइटोसीन की दी गई मात्रा 20% है तो ग्वानोसीन भी 20% होगा।
\( \text{ग्वानोसीन} + \text{साइटोसीन} = 20 + 20 = 40\% \)
\( A + G = 100 - 40\% \)
\( A + G = 60\% \)
चूँकि \( A = G \) होता है, अतः एडेनिन की मात्रा \( 60 / 2 = 30\% \) होगी।

मुख्य बिंदु:

• चारगाफ का नियम \( A = T \) और \( G = C \) पर आधारित है।
• कुल प्यूरीन और पिरीमिडाइन की मात्रा बराबर होती है।
• प्रतिशत गणना 100 के आधार पर की जाती है।

आम गलतियाँ:

• चारगाफ नियम के समीकरण में गलती करना।
• 100 में से घटाते समय गणना त्रुटि करना।
• एडेनिन और थाईमीन का कुल प्रतिशत आधा न करना।

Exam Tips:

a) चारगाफ नियम का सूत्र हमेशा लिखें।
b) चरण-दर-चरण गणना दिखाएं ताकि पूरे अंक मिल सकें।
c) प्रतिशत चिन्ह का सही उपयोग करें।

 

Question 3: यदि डीएनए के एक रज्जुक्र के अनुक्रम निम्नव लिखे हैं:
5' - ATGCATGCATGCATGCATGCATGC - 3' तो पूरक रज्जुक्र के अनुक्रम को 5' \(\to\) 3' दिशा में लिखें।

Answer:

डीएनए द्वikuण्डली संरचना होती है अर्थात् यह दो पॉलियुक्लीटाइड श्रृंखलाओं से बना होता है।
दोनों श्रृंखलाएँ प्रतिसमानान्तर ध्रुवणता रखती हैं।
दिया गया रज्जुक्र 5' \(\to\) 3' दिशा में है, इसलिए इसका पूरक 3' \(\to\) 5' होगा।
एडेनिन (A) हमेशा थाईमीन (T) से तथा साइटोसीन (C) हमेशा ग्वानोसीन (G) से जुड़ता है।
अतः 5' \(\to\) 3' दिशा में पूरक रज्जुक्र का अनुक्रम होगा:
5' - GCATGCATGCATGCATGCATGCAT - 3'

मुख्य बिंदु:

• डीएनए रज्जुक्र हमेशा प्रतिसमानान्तर होते हैं।
• क्षारों का युग्मन विशिष्ट होता है (\( A=T \) तथा \( G\equiv C \))।
• दिशा परिवर्तन करते समय अनुक्रम को उलटना आवश्यक है।

आम गलतियाँ:

• दिशा (5' और 3') का ध्यान न रखना।
• गलत क्षार युग्मन करना (जैसे A को C से जोड़ना)।
• अनुक्रम को सीधा उतार देना बिना पूरक बनाए।

Exam Tips:

a) क्षार युग्मन के नियम (A-T, G-C) को भली-भांति याद रखें।
b) प्रश्न में पूछी गई दिशा (5' \(\to\) 3') का विशेष ध्यान रखें।
c) उत्तर लिखते समय प्राइम (') चिन्ह लगाना न भूलें।

 

Question 4: यदि अनुलेखन इकाई में कुटलेखन रज्जुक्र के अनुक्रम को निम्नवत् लिखा गया है -
5' - ATGCATGCATGCATGCATGCATGC - 3'
तो दूत-आरएनए के अनुक्रम को लिखें।

Answer:

आरएनए का निर्माण डीएनए से होता है।
आरएनए में थाईमीन नाइट्रोजनिक क्षार के स्थान पर यूरेसिल पाया जाता है।
कुटलेखन रज्जुक्र का अनुक्रम है:
5' - ATGCATGCATGCATGCATGCATGC - 3'
दूत-आरएनए (m-R.N.A.) का अनुक्रम होगा:
5' - AUGCAUGCAUGCAUGCAUGCAUGC - 3'

मुख्य बिंदु:

• कूटलेखन रज्जुक्र का अनुक्रम दूत-आरएनए के समान होता है, बस T के स्थान पर U आता है।
• आरएनए एकल रज्जुकीय होता है।
• अनुलेखन की प्रक्रिया में आरएनए पॉलीमरेज़ सहायक होता है।

आम गलतियाँ:

• कूटलेखन (Coding) और टेम्पलेट रज्जुक्र में भ्रमित होना।
• यूरेसिल के स्थान पर थाईमीन लिख देना।
• ध्रुवणता (5' और 3') लिखना भूल जाना।

Exam Tips:

a) याद रखें कि m-RNA का अनुक्रम कोडिंग स्ट्रैंड जैसा ही होता है, केवल T की जगह U होता है।
b) उत्तर में 5' और 3' सिरों को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
c) स्पेलिंग और क्षार प्रतीकों को सावधानी से लिखें।

 

Question 5: वाटसन व क्रिक ने डीएनए की कौन-सी विशेषता वाटसन व क्रिक को डीएनए-कंजर्वेटिव प्रकृति के सेमी-कंजर्वेटिव रूप को कल्पित करने में सहयोग किया? इसकी व्याख्या कीजिए।

Answer:

वाटसन व क्रिक ने डीएनए की द्विकुंडली मॉडल दिया था।
इस मॉडल की मुख्य विशेषता पॉलियुक्लीटाइड श्रृंखलाओं के बीच युग्मन का होना था।
पॉलियुक्लीटाइड श्रृंखलाओं में क्षार युग्मन ने ऐसी विशेषता दी जिससे वाटसन व क्रिक को डीएनए प्रतिकृति के सेमी-कंजर्वेटिव रूप को कल्पित करने में सहयोग किया।
क्षार-युग्मन के इसी गुण के आधार पर श्रृंखलाएँ एक-दूसरे की पूरक बनती हैं अर्थात् एक डीएनए रज्जुक्र में क्षार अनुक्रम पता होने पर दूसरे रज्जुक्र के क्षार युग्मन को ज्ञात किया जा सकता है।

मुख्य बिंदु:

• नाइट्रोजनिक क्षारों का पूरक युग्मन सेमी-कंजर्वेटिव प्रतिकृति का आधार है।
• प्रत्येक रज्जुक्र नए रज्जुक्र के संश्लेषण के लिए साँचे (template) का कार्य करता है।
• प्रतिकृति के पश्चात् एक रज्जुक्र पैतृक व एक नया रज्जुक्र होता है।

आम गलतियाँ:

• सेमी-कंजर्वेटिव शब्द को ठीक से न समझाना।
• साँचे (template) की भूमिका का उल्लेख न करना।
• क्षार युग्मन के महत्व को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) वाटसन-क्रिक मॉडल के मुख्य बिंदुओं को संक्षेप में लिखें।
b) सेमी-कंजर्वेटिव प्रतिकृति का अर्थ डायग्राम या शब्दों में स्पष्ट करें।
c) उत्तर में 'पूरक' और 'साँचा' शब्दों का प्रयोग अवश्य करें।

 

Question 6: टेम्पलेट (डीएनए या आरएनए) के रासायनिक प्रकृति व इससे (डीएनए या आरएनए) संश्लेषित न्यूक्लिक अम्लों की प्रकृति के आधार पर न्यूक्लिक अम्ल पॉलीमरेज़ के विभिन्न प्रकार की सूची बनाइए।

Answer:

न्यूक्लिक अम्ल पॉलीमरेज़ निम्नलिखित प्रकार के होते हैं:
1. डीएनए पॉलीमरेज़ (DNA polymerase): एन्जाइम प्रतिकृति के लिए आवश्यक है। यह डीएनए टेम्पलेट का उपयोग डीऑक्सीन्यूक्लियोटाइड्स के बहुलकीकरण को प्रेरित करने के लिए करता है। डीएनए अणुओं की दोनों श्रृंखलाएँ एकसाथ पृथक नहीं होतीं।
2. आरएनए पॉलीमरेज़ (R.N.A. polymerase): यह डीएनए पर निर्भर आरएनए पॉलीमरेज़ है। यह डीएनए के सभी प्रकार के आरएनए के अनुलेखन के लिए उत्तरदायी है।

मुख्य बिंदु:

• डीएनए पॉलीमरेज़ डीएनए से डीएनए बनाता है।
• आरएनए पॉलीमरेज़ डीएनए से आरएनए (अनुलेखन) बनाता है।
• दोनों एंजाइम न्यूक्लिक अम्ल संश्लेषण के लिए विशिष्ट हैं।

आम गलतियाँ:

• डीएनए और आरएनए पॉलीमरेज़ के कार्यों को मिला देना।
• टेम्पलेट की रासायनिक प्रकृति का उल्लेख न करना।
• प्रकारों के उप-भागों को स्पष्ट न लिखना।

Exam Tips:

a) पॉलीमरेज़ के विभिन्न प्रकारों के नाम स्पष्ट रूप से लिखें।
b) प्रत्येक एंजाइम का मुख्य कार्य एक-एक पंक्ति में बताएं।
c) डीएनए और आरएनए पर निर्भरता का अंतर स्पष्ट करें।

 

Question 7: डीएनए आनुवंशिक पदार्थ है, इसे सिद्ध करने हेतु अपने प्रयोग के दौरान हर्षे व चेज ने डीएनए व प्रोटीन के बीच कैसे अंतर स्थापित किया?

Answer:

हर्षे व चेज ने डीएनए को आनुवंशिक पदार्थ सिद्ध करने हेतु P32 व S35 आइसोटोप्स युक्त माध्यम में ई कोलाई जीवाणु का संवर्धन कराया।
कुछ समय वृद्धि करने के पश्चात जीवाणु को जीवाणुभोजी द्वारा संक्रमित कराया गया।
संक्रमण के पश्चात देखा गया कि जीवाणुभोजी का प्रोटीन आवरण S35 रेडियोधर्मी युक्त हो गया था जबकि डीएनए में सल्फर नहीं होता।
इसके विपरीत जीवाणुभोजी का डीएनए P32 रेडियोधर्मी आइसोटोप्स की उपस्थिति दिखा रहा था, क्योंकि डीएनए में फॉस्फोरस होता है।
प्रोटीन आवरण में P32 अनुपस्थित था।

मुख्य बिंदु:

• हर्षे और चेज का प्रयोग जीवाणुभोजी (bacteriophage) पर आधारित था।
• रेडियोधर्मी फॉस्फोरस (\( ^{32}P \)) डीएनए को चिह्नित करता है।
• रेडियोधर्मी सल्फर (\( ^{35}S \)) प्रोटीन को चिह्नित करता है।

आम गलतियाँ:

• फॉस्फोरस और सल्فر के सही आइसोटोप्स याद न रखना।
• यह भूल जाना कि किसमें सल्फर होता है और किसमें नहीं।
• प्रयोग के निष्कर्ष को स्पष्ट रूप से न लिखना।

Exam Tips:

a) हर्षे-चेज प्रयोग का नाम और वैज्ञानिक का उल्लेख जरूर करें।
b) \( ^{32}P \) और \( ^{35}S \) के उपयोग को स्पष्ट रूप से समझाएं।
c) अंत में निष्कर्ष लिखें कि डीएनए ही आनुवंशिक पदार्थ है।

 

Question 8: निम्न के बीच अंतर बताइए:
(क) पुनरावृत्ति डीएनए एवं अनुषंगी डीएनए (ख) एमआरएनए और टीआरएनए (ग) टेम्पलेट रज्जुक्र और कोडिंग रज्जुक्र

Answer:

(क) पुनरावृत्ति डीएनए एवं अनुषंगी डीएनए में अंतर:
पुनरावृत्ति डीएनए: यह डीएनए के फैले हुए भाग हैं, जो जीनोम में प्रतिलिपि में उपस्थित नाइट्रोजन क्षार के अनुक्रम हैं।
अनुषंगी डीएनए: यह डीएनए के छोटे छोटे शिखर है। इसमें नाइट्रोजन क्षार में पुनरावृत्ति क्रम अनियमित होता है।

(ख) एमआरएनए और टीआरएनए में अंतर:
एमआरएनए: यह कूट सूचना ले जाता है। इसमें नाइट्रोजन समझदार रूपांतरित नहीं होते हैं। इसका आणविक भार 2,00,000 - 5,00,000 होता है।
टीआरएनए: यह एमीनो अम्ल के संयोजन हेतु सूचना लाता है व पॉलीपेप्टाइड में इसके संयोजन हेतु प्रतिप्रद ले जाता है। इसका आणविक भार 25,000 - 30,000 होता है।

(ग) टेम्पलेट रज्जुक्र और कोडिंग रज्जुक्र में अंतर:
टेम्पलेट रज्जुक्र: यह अनुलेखन में भाग लेता है। इसमें ध्रुवतत्व 3' \(\to\) 5' होता है। न्यूक्लियोटाइड्स क्रम, एमआरएनए में मौजूद क्रम से परिपूर्ण होता है।
कोडिंग रज्जुक्र: यह अनुलेखन में भाग नहीं लेता है। इसमें ध्रुवतत्व 5' \(\to\) 3' होता है। न्यूक्लियोटाइड्स क्रम, एमआरएनए में मौजूद क्रम जैसे होते हैं सिवाय U के स्थान पर T होता है।

मुख्य बिंदु:

• तीनों अंतरों में उनकी संरचना और कार्य मुख्य आधार हैं।
• आरएनए के प्रकार (mRNA, tRNA) के विशिष्ट कार्य होते हैं।
• डीएनए के दोनों रज्जुक्रों की भूमिका अनुलेखन में भिन्न होती है।

आम गलतियाँ:

• अंतर लिखते समय कॉलम (सारणी) का प्रयोग न करना।
• mRNA और tRNA के आणविक भार या कार्य में भ्रमित होना।
• टेम्पलेट और कोडिंग स्ट्रैंड की ध्रुवणता उल्टी लिख देना।

Exam Tips:

a) अंतर हमेशा तालिका बनाकर स्पष्ट रूप से लिखें।
b) प्रत्येक भाग के लिए कम से कम 2-3 मुख्य बिंदु अवश्य दें।
c) दिशा (5' और 3') तथा कार्यों को सटीकता से लिखें।

 

Question 9: स्थानान्तरण के दौरान राइबोसोम की दो मुख्य भूमिकाओं की सूची बनाइए।

Answer:

स्थानान्तरण में राइबोसोम की भूमिका:
1. राइबोसोम का छोटा सबयूनिट एमआरएनए के प्रथम कोडॉन (AUG) के साथ बधित होकर समारंभ कॉम्प्लेक्स एमीनो अम्ल टीआरएनए बनाता है जिसकी पहचान प्रारम्भक टीआरएनए द्वारा की जाती है। एमीनो अम्ल टीआरएनए से जुड़कर एक जटिल रचना बनाते हैं जो आगे चलकर टीआरएनए के प्रकृट से पुरक क्षार युग्म बनाकर एमआरएनए के उचित आनुवंशिक कोडॉन से जुड़ जाती है।
2. राइबोसोम के बड़े सबयूनिट पर टीआरएनए अणुओं के जुड़ने के लिए दो खिंच होती है, इन्हें P-site या दाता स्थल और A-site या ग्राही स्थल कहते हैं। P-site पर पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला को धारण करने वाला टीआरएनए जुड़ता है। A-site पर एमीनो अम्ल टीआरएनए जुड़ता है। बड़े सबयूनिट के पेपाइड सिंथेटेज एन्जाइम पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला के एमीनो अम्ल के -COOH तथा एमीनो अम्ल टीआरएनए के एमीनो अम्ल के - NH2 के मध्य पेपाइड बंध बनाता है।

मुख्य बिंदु:

• राइबोसोम प्रोटीन संश्लेषण का मुख्य स्थल है।
• इसमें छोटी और बड़ी दो सबयूनिट होती हैं।
• यह पेप्टाइड बंध के निर्माण को उत्प्रेरित करता है।

आम गलतियाँ:

• P-site और A-site के कार्यों को आपस में मिला देना।
• समारंभन (initiation) प्रक्रिया का उल्लेख न करना।
• राइबोसोम की संरचना को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) राइबोसोम की दोनों सबयूनिट्स के कार्य बिंदुवार लिखें।
b) P-site और A-site का नाम स्पष्ट रूप से उल्लेख करें।
c) पेप्टाइड बंध निर्माण की प्रक्रिया को संक्षिप्त में समझाएं।

 

Question 10: उस संवर्धन में जहाँ ई कोलाई वृद्धि कर रहा हो लैक्टोज डालने पर लेक- ऑपेरन उद्प्रेरित होता है, तब कभी संवर्धन में लैक्टोज डालने पर लेक- ऑपरेशन कार्य करना क्यों बंद कर देता है?

Answer:

ऑपेरन संकल्पना: मनुष्य की आँत में पाए जाने वाले जीवाणु ई कोलाई सामान्यतया लैक्टोज के अपचय से ऊर्जा प्राप्त करते हैं। जैकब एवंमोनोड (Jacob & Monod, 1961) ने पता लगाया कि इसके डीएनए में तीन जीन का एक समूह लैक्टोज का अपचय करने वाले तीन एन्जाइम के संश्लेषण से संबंधित होता है।
पोषण माध्यम में लैक्टोज होता है तो ये जीन सक्रिय होते हैं। पोषण माध्यम में लैक्टोज के अभाव में ये निष्क्रिय रहते हैं। जैकब व मोनोड ने इस सक्रियता के नियमन के लिए ऑपेरन संकल्पना प्रस्तुत की।
(A) लैक्टोज की अनुपस्थिति में: लैक्टोज प्रेरक की अनुपस्थिति में रेगुलेटर जीन एक लैक निरोधक या दमनकारी प्रोटीन बनाता है। यह ऑपरेटर जीन से बधित होकर इसके अनुलेखन को रोकता है। इसके फलस्वरूप संरचनात्मक जीन एमआरएनए का संश्लेषण नहीं कर पाते और प्रोटीन संश्लेषण रुक जाता है।
(B) लैक्टोज की उपस्थिति में: लैक्टोज प्रेरक की उपस्थिति होने पर प्रोमोटर कोशिका में प्रवेश करके रेगुलेटर जीन से उत्पन्न दमनकर से बधित होकर जटिल यौगिक बनाता है। इसके कारण दमनकर ऑपरेटर से बंधित नहीं हो पाता और ऑपरेटर स्वतंत्र रहता है। यह आरएनए - पालीमेरेज को प्रोमोटर जीन के संभारमन स्थल से बंधित होने के लिए प्रेरित करता है जिसके फलस्वरूप पॉलिसिस्ट्रोनिक लैक एमआरएनए का अनुलेखन होता है।

मुख्य बिंदु:

• लेक ऑपेरन जीन नियमन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
• दमनकारी (repressor) प्रोटीन ऑपेरन को नियंत्रित करता है।
• लैक्टोज यहाँ प्रेरक (inducer) का कार्य करता है।

आम गलतियाँ:

• लैक्टोज की उपस्थिति और अनुपस्थिति की स्थिति में अंतर न स्पष्ट करना।
• दमनकारी प्रोटीन और ऑपरेटर जीन की परस्पर क्रिया को गलत लिखना।
• जैकब और मोनोड का नाम न लिखना।

Exam Tips:

a) लेक ऑपेरन के घटकों (i, p, o, z, y, a) को आरेख के साथ समझें।
b) प्रेरक (Inducer) और दमनकारी (Repressor) की भूमिका स्पष्ट करें।
c) उत्तर को 'उपस्थिति' और 'अनुपस्थिति' दो भागों में बांटकर लिखें।

 

Question 11: निम्न के कार्यों का वर्णन (एक या दो पंक्तियों में) से करो:
(क) उत्प्रायक (प्रमोटर)
(ख) अन्तरण आरएनए (tRNA)
(ग) एक्सॉन

Answer:

(क) उत्प्रायक (प्रमोटर): डीएनए का यह अनुक्रम जीन अनुलेखन इकाई बनता है तथा अनुलेखन इकाई में स्थित टेम्पलेट व कूटलेखन रज्जुक्र का निर्धारण करता है।
(ख) अन्तरण आरएनए (tRNA): अन्तरण आरएनए (tRNA) प्रोटीन संश्लेषण के दौरान अमीनो अम्लों को कोशिकाद्रव्य से राइबोसोम तक स्थानान्तरित करता है।
(ग) एक्सॉन: एक्सॉन में नाइट्रोजनिक क्षारकों का अनुक्रम होता है तथा ये एमआरएनए के संश्लेषण में सहायता करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• प्रमोटर अनुलेखन की शुरुआत के लिए बाइंडिंग साइट प्रदान करता है।
• tRNA एमीनो एसिड को वाहक के रूप में ले जाता है।
• एक्सॉन कूटलेखन करने वाले (coding) खंड होते हैं।

आम गलतियाँ:

• कार्यों को बहुत लंबा खींचना जबकि प्रश्न में एक-दो पंक्ति में पूछा गया है।
• प्रमोटर और टर्मिनेटर के कार्यों को मिला देना।
• एक्सॉन और इंट्रॉन में अंतर स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक शब्द का सटीक और संक्षिप्त कार्य लिखें।
b) शब्द सीमा का ध्यान रखते हुए केवल मुख्य बिंदु दें।
c) तीनों भागों को अलग-अलग उप-शीर्षक (क, ख, ग) के साथ लिखें।

 

Question 12: मानव जीनोम परियोजना को महापरियोजना क्यों कहा गया।

Answer:

मानव जीनोम परियोजना एक अत्यंत व्यापक स्तर की योजना है जिसके अंतर्गत मनुष्य के जीनोम में उपस्थित समस्त जीनों की पहचान की जाती है।
मानव जीनोम में \( 3 \times 10^9 \) क्षार युग्म हैं तथा प्रति क्षार पहचान के लिए तीन अमेरिकी डॉलर का खर्च आता है।
इस प्रकार संपूर्ण योजना पर लगभग 9 मिलियन डॉलर का खर्च आएगा।
ज्ञात अनुक्रमों का संग्रह करने के लिए 1000 पृष्ठों की लगभग 3300 पुस्तकों की आवश्यकता होगी, यदि प्रत्येक पृष्ठ पर 10000 शब्द लिखे जाये।
इस योजना को पूरी होने में 13 वर्ष का समय अनुमानित किया गया था।
अनेक देशों के हजारों वैज्ञानिक एक साथ इस पर कार्य करते हैं तो इसकी प्रथम प्रक्रिया पूर्ण होने में 10 वर्ष का समय लगता है।
इतने स्तर के आँकड़ों के संग्रह, समापन व विश्लेषण के लिए उच्च कोटि के सांख्यिकी साधनों की आवश्यकता होती है।
अतः अपने इस वृहद स्तर के कारण यह योजना, महापरियोजना कहलाती है।

मुख्य बिंदु:

• इसमें विशाल मात्रा में क्षार युग्मों (\( 3 \times 10^9 \)) का अनुक्रमण करना था।
• इसमें भारी वित्तीय लागत और उन्नत जैव सूचना विज्ञान की आवश्यकता थी।
• इसे पूरा होने में 13 वर्ष का समय लगा और यह बहु-विषयी परियोजना थी।

आम गलतियाँ:

• केवल समय लिखकर छोड़ देना, लागत और डेटा का जिक्र न करना।
• क्षार युग्मों की सही संख्या (\( 3 \times 10^9 \)) न लिखना।
• परियोजना के वैज्ञानिक महत्व को न समझाना।

Exam Tips:

a) 'महापरियोजना' कहे जाने के मुख्य कारण (समय, लागत, डेटा) बिंदुवार दें।
b) जीनोम के आकार का सटीक आँकड़ा दें।
c) अंत में इसका दूरगामी महत्व भी संक्षेप में बताएं।

 

Question 13: डी एन ए अंगुलीछापी क्या है। इसकी उपयोगिता पर प्रकाश डालिए।

Answer:

डी एन ए अंगुलीछापी: डी एन ए अंगुलीछापी तकनीक को सर्वप्रथम एलेक जेफ्रे ने इंग्लैण्ड में विकसित किया था। इसकी सहायता से विभिन्न व्यक्तियों अथवा जीवधारियों के मूल आनुवंशिक पदार्थ (डी एन ए) में भिन्नताओ को देखा जा सकता है। जैसा कि ज्ञात है कि जीवधारी की प्रजाति के सभी सदस्यों के डीएनएफ प्रारूप भिन्न होते हैं। यही कारण है कि समरूपीय जुड़वाओं को छोड़कर किसी भी व्यक्ति का फिगर प्रिंट एक-दूसरे से मेल नहीं करता। प्रत्येक जीवधारी की सभी कोशिकाओं में एक जैसा डीएनए पाया जाता है। डीएनए के कारण एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति से भिन्न होता है। डीएनए के फिंगर प्रिंटिंग द्वारा डीएनए में स्थित उन क्षेत्रों की पहचान की जाती है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में किसी भी मात्रा में भिन्नता दर्शाते हैं।
डीएनए के इन्हीं क्षेत्रों के कारण शरीर में विभिन्नताएँ उत्पन्न होती हैं। इन विभिन्नता दर्शाने वाले सैटेलाइट डीएनए को प्रोब (परीक्षण करने वाली सलाइई) की भाँति प्रयोग करते हैं। इसमें काफी बहुरूपता होती है। एक्स-रे फिल्म पर पट्टिकाओं के क्रम के रूप में प्राप्त करके उनकी स्थिति, विशिष्टता और पहचान कर सकते हैं। किसी एक व्यक्ति के डीएनए के क्रम पट्टियों के रूप में अनिवार्य रूप से विशिष्ट होते हैं। समरूप जुड़वाओं के डीएनए पूर्णरूपेन समरूप हो सकते हैं।
उपयोगिता: डीएनए अंगुलीछापी का उपयोग अपराध मामलों जैसे- खूनी, बलात्कारी को पहचान्वने के लिए, पितृत्व के झगड़ों में पारिवारिक संबंधों को ज्ञात करने आदि में किया जाता है।

मुख्य बिंदु:

• इसे एलेक जेफ्रे ने विकसित किया था।
• यह डीएनए में मौजूद पुनरावृत्ति डीएनए (VNTR) पर आधारित है।
• इसका उपयोग फॉरेंसिक साइंस और पितृत्व परीक्षण में होता है।

आम गलतियाँ:

• फिंगरप्रिंटिंग को सामान्य अंगूठे के निशान समझ लेना।
• वैज्ञानिक का नाम (एलेक जेफ्रे) भूल जाना।
• उपयोगिता के क्षेत्र स्पष्ट न लिखना।

Exam Tips:

a) वैज्ञानिक का नाम और तकनीक का मूल सिद्धांत जरूर लिखें।
b) उपयोगिताओं को अलग-अलग बिंदुओं में स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
c) VNTR और सैटेलाइट डीएनए जैसे महत्वपूर्ण शब्दों का प्रयोग करें।

 

Question 14: निम्न का संक्षिप्त वर्णन कीजिए:
(क) अनुलेखन
(ख) बहुरूपता
(ग) स्थानांतरण
(घ) जैव सूचना विज्ञान

Answer:

(क) अनुलेखन: डीएनए के रज्जुक्र में कूट के रूप में निहित आनुवंशिक सूचनाओं का एमआरएनए में प्रतिलिपिकरण, अनुलेखन कहलाता है। इस प्रक्रिया के लिए आरएनए पालीमेरेज़ नामक एंजाइम सहायक होता है। सर्वप्रथम डीएनए के न्यूक्लियोटाइड्स बनते हैं। तत्पश्चात डीएनए रज्जुक्र अलग होकर साँचे के समान कार्य करने लगते हैं जिसके अनुसार नयी श्रृंखला में क्षारक क्रम व्यवस्थित होते हैं व ह-बंधो द्वारा आप जुड़ जाते हैं।
(ख) बहुरूपता: जीन जनसंख्या में आनुवंशिक उत्परिवर्तनों का, उच्च आवृत्ति में होना, बहुरूपता कहलाता है। ऐसे उत्परिवर्तन डीएनए अनुक्रमों के परिवर्तित होने के कारण उत्पन्न होते हैं तथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी वंशागत होकर एकत्रित होते हैं तथा बहुरूपता का कारण बनते हैं। बहुरूपता अनेक प्रकार की होती है, इसमें एक ही न्यूक्लियोटाइड में अथवा वृहद स्तर पर परिवर्तन होता है।
(ग) स्थानांतरण: एमआरएनए न्यूक्लियोटाइड की श्रृंखलाओं का अमीनो अम्ल की पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलाओं में परिवर्तित होना, स्थानांतरण कहलाता है। यह प्रक्रिया राइबोसोम पर प्रोटीन संश्लेषण के दौरान होती है। इसमें सर्वप्रथम एंजाइम व ATP द्वारा अमीनो अम्ल का सक्रियकरण होता है। सक्रिय अमीनो अम्ल टीआरएनए पर स्थानांतरित होते हैं हे वे संश्लेषण प्रारंभ हो जाता है। तत्पश्चात पॉलीपेप्टाइड अनुक्रम निर्धारित होते हैं। टीआरएनए अणुओं के मध्य उपस्थित पेपाइड स्थल द्वारा पेपाइड बंध निर्मित होते हैं।
(घ) जैव सूचना विज्ञान: जीव विज्ञान का वह क्षेत्र जिसके अंतर्गत जीवों के जीनोम संबंधी आँकड़ों का संग्रह, विश्लेषण किया जाता है, जैव सूचना विज्ञान कहलाता है। इसमें मानव जीनोम के मानचित्र बनाये जाते हैं व डीएनए के अनुक्रमों को पंक्तिबद्ध किया जाता है। इसका उपयोग कृषि सुधार, ऊर्जा उत्पादन, पर्यावरण सुधार, स्वास्थ्य सुरक्षा आदि में किया जाता है।

मुख्य बिंदु:

• अनुलेखन डीएनए से आरएनए निर्माण है।
• बहुरूपता डीएनए में वंशागत भिन्नता का कारण है।
• स्थानांतरण प्रोटीन संश्लेषण की प्रक्रिया है।
• जैव सूचना विज्ञान डेटा विश्लेषण का आधुनिक क्षेत्र है।

आम गलतियाँ:

• चारों परिभाषाओं में आपस में भ्रमित होना (जैसे अनुलेखन और स्थानांतरण को मिलाना)।
• मुख्य प्रक्रियाओं (जैसे एंजाइम या tRNA की भूमिका) को छोड़ देना।
• उत्तर को बहुत लंबा या बहुत छोटा लिखना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक भाग को अलग-अलग हेडिंग के साथ स्पष्ट रूप से समझाएं।
b) मुख्य शब्दावली (RNA polymerase, tRNA, VNTR, Database) का सही प्रयोग करें।
c) प्रत्येक की संक्षिप्त और सटीक परिभाषा दें।

 

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