NCERT Solutions Class 12 Biology Chapter 02 Human Reproduction (मानव जनन) in Hindi

Official NCERT Solutions for Class 12 Biology: Chapter 02 मानव जनन

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Chapter-wise Solutions for Biology: Chapter 02 मानव जनन

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Question 1: रिक्त स्थानों की पूर्ति करें:
(क) मानव ...... उत्पत्ति वाला है। (लैंगिक/लैंगिक)
(ख) मानव ...... हैं। (अंडप्रजक, सजीवप्रजक, अंडजरायुज)
(ग) मानव में ...... निषेचन होता है। (बाह्य/आंतरिक)
(घ) नर एवं मादा युग्मक ...... होते हैं। (अगुणित/द्विगुणित)
(ड) युग्मनज ...... होता है। (अगुणित/द्विगुणित)
(च) एक परिपक्व पुटक से अंडाणु (ओवम) के मोचित होने की प्रक्रिया को ...... कहते हैं।
(छ) अंडोत्सर्ग (ओव्यूलेशन) ...... नामक हार्मोन द्वारा प्रेरित (इन्ड्यूस्ड) होता है।
(ज) नर एवं स्त्री के युग्मक के संलयन (प्रयुजन) को ...... कहते हैं।
(झ) निषेचन ...... में संपन्न होता है।
(ञ) युग्मनज विभक्त होकर ...... की रचना करता है जो गर्भाशय में अंतर्तोपित (इंप्लांटेड) होता है।
(ट) भ्रूण और गर्भाशय के बीच संवचनी संपर्क बनाने वाली संरचना को ...... कहते हैं।

Answer:

(क) लैंगिक
(ख) सजीवप्रजक
(ग) आंतरिक निषेचन होता है
(घ) अगुणित होते हैं
(ड) द्विगुणित होता है
(च) अंडोत्सर्ग (ओव्यूलेशन) कहते हैं
(छ) ल्यूटीनाइजिंग हॉमोन (LH) नामक हॉर्मोन
(ज) निषेचन कहते हैं
(झ) अंडवाहिनी नली के संकीर्ण पथ व तुंबिका के संधিস্থल
(ञ) ब्लास्टोसिस्ट (कोरकपुटी) की रचना
(ट) अपरा (प्लासेंटा) कहते हैं

मुख्य बिंदु:

• मानव लैंगिक जनन प्रदर्शित करता है तथा यह सजीवप्रजक होता है।
• निषेचन की प्रक्रिया मादा के शरीर के भीतर (आंतरिक निषेचन) होती है।
• युग्मनज में समसूत्री विभाजन द्वारा ब्लास्टोसिस्ट का निर्माण होता है जो गर्भाशय की दीवार से जुड़ता है।

आम गलतियाँ:

• बाह्य और आंतरिक निषेचन में भ्रमित होना।
• अगुणित (n) और द्विगुणित (2n) अवस्थाओं में अंतर न समझ पाना।
• हॉर्मोन्स के नाम लिखने में वर्तनी की अशुद्धियाँ करना।

Exam Tips:

a) रिक्त स्थानों के उत्तर सटीक और स्पष्ट लिखें।
b) वैज्ञानिक शब्दावली जैसे 'ब्लास्टोसिस्ट' और 'अपरा' का सही प्रयोग करें।
c) निषेचन स्थल को हमेशा 'ऐम्पुलरी-इस्थमिक जंक्शन' के रूप में याद रखें।

 

Question 2: पुरुष जनन-तंत्र का एक नामांकित आरेख बनाएँ।

Answer:

पुरुष जनन तंत्र मुख्य रूप से वृषण, सहायक नलिकाएँ, ग्रंथियों और बाह्य जननांग से मिलकर बनता है। आरेख में निम्नलिखित मुख्य भागों को नामांकित किया जाना चाहिए:
• वृषण (Testis) जो वृषण कोष में स्थित होते हैं।
• शुक्रवाहिका (Vas deferens) जो शुक्राणुओं को आगे बढ़ाती है।
• मूत्राशय, प्रोस्टेट ग्रंथि, शुक्राशय और बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथि।
• मूत्रमार्ग और शिश्न (Penis)।

मुख्य बिंदु:

• वृषण में नर युग्मक (शुक्राणु) का निर्माण होता है।
• सहायक ग्रंथियाँ वीर्य का तरल भाग बनाती हैं जो शुक्राणुओं को पोषण देता है।
• मूत्रमार्ग मूत्र और वीर्य दोनों के लिए साझा मार्ग है।

आम गलतियाँ:

• ग्रंथियों के सही क्रम और स्थिति को गलत दर्शाना।
• नामांकित रेखाओं का स्पष्ट न होना।

Exam Tips:

a) चित्र पेंसिल से साफ और स्पष्ट बनाएँ।
b) सभी मुख्य भागों के नाम दाईं या बाईं ओर सीध में लिखें।
c) आरेख बनाते समय आनुपातिक आकार का ध्यान रखें।

 

Question 3: स्त्री जनन-तंत्र का एक नामांकित आरेख बनाएँ।

Answer:

स्त्री जनन तंत्र में एक जोड़ा अंडाशय, अंडवाहिनी (फैलोपियन ट्यूब), गर्भाशय, ग्रीवा और योनि शामिल होते हैं। आरेख में निम्नलिखित अंगों को दर्शाया जाता है:
• अंडाशय (Ovary) - मादा युग्मक (अंडाणु) का निर्माण स्थल।
• अंडवाहिनी - जिसमें कीप, ऐम्पुलरी-इस्थमिक जंक्शन और इस्थमस शामिल हैं।
• गर्भाशय (Uterus) - जिसकी दीवार में गर्भाशय अंतःस्तर (एंडोमेट्रियम) होता है।
• गर्भाशय ग्रीवा और योनि मार्ग।

मुख्य बिंदु:

• अंडाशय एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन स्रावित करता है।
• निषेचन की प्रक्रिया अंडवाहिनी में संपन्न होती है।
• गर्भाशय भ्रूण के विकास के लिए उत्तरदायी है।

आम गलतियाँ:

• फैलोपियन ट्यूब के विभिन्न भागों (कीप, तुंबिका, संकीर्ण पथ) को गलत क्रम में दर्शाना।
• गर्भाशय की परतों (पेरीमेट्रियम, मायेमेट्रियम, एंडोमेट्रियम) को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) नामांकित चित्र बनाते समय गर्भाशय के त्रिकोणीय आकार को सही दिखाएँ।
b) झालर (Fimbriae) को अंडाशय के पास खुला हुआ चित्रित करें।
c) सभी लेबल्स पेंसिल से साफ़-साफ़ लिखें।

 

Question 4: वृषण तथा अंडाशय के बारे में प्रत्येक के दो-दो प्रमुख कार्यों का वर्णन करें।

Answer:

वृषण के प्रमुख कार्य:
1. शुक्राणुजनन: वृषण की जनन उपकला की कोशिकाएं समसूत्री व अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा शुक्राणुओं का निर्माण करती हैं।
2. एंड्रोजन (टेस्टोस्टेरोन) स्रावण: वृषण की अंतरालीय कोशिकाओं (लीडिग कोशिकाओं) द्वारा एंड्रोजन हॉर्मोन का स्रावण किया जाता है, जो द्वितीयक लैंगिक लक्षणों को नियंत्रित करता है।

अंडाशय के प्रमुख कार्य:
1. अंडाणु निर्माण: अंडाशय की जनन कोशिकाओं द्वारा अंडजनन प्रक्रिया के तहत परिपक्व अंडाणुओं का निर्माण होता है।
2. हॉर्मोन स्रावण: अंडाशय एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे स्टेरोइड हॉर्मोन्स का स्रावण करता है जो मासिक चक्र और गर्भधारण को नियंत्रित करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• वृषण नर प्राथमिक जनन अंग है जबकि अंडाशय मादा प्राथमिक जनन अंग है।
• दोनों ही अंग युग्मकों के निर्माण के साथ-साथ लिंग हॉर्मोन्स भी स्रावित करते हैं।
• वृषण शरीर से बाहर वृषण कोष में स्थित होते हैं जबकि अंडाशय उदर गुहा में होते हैं।

आम गलतियाँ:

• प्राथमिक जनन अंगों और सहायक अंगों के कार्यों में भ्रमित होना।
• हॉर्मोन्स के नाम गलत लिखना (जैसे एंड्रोजन की जगह एस्ट्रोजन लिखना)।

Exam Tips:

a) उत्तर को शीर्षकों (जैसे 'वृषण के कार्य' और 'अंडाशय के कार्य') में विभाजित करके लिखें।
b) प्रत्येक अंग के लिए एक जनन संबंधी कार्य और एक हॉर्मोन संबंधी कार्य अवश्य लिखें।
c) मुख्य शब्दों को रेखांकित (underline) करें।

 

Question 5: शुक्रजनक नलिका की संरचना का वर्णन करें।

Answer:

वृषण के अंदर वृषण जालिकाओं से जुड़ी हुई अत्यधिक कुंडलित नलिकाएं पाई जाती हैं जिन्हें शुक्रजनक नलिकाएं (Seminiferous tubules) कहते हैं। प्रत्येक शुक्रजनक नलिका की आंतरिक दीवार दो प्रकार की कोशिकाओं से स्तरीकृत होती है:
1. नर जनन कोशिकाएं (स्पर्मेटोगोनिया): जो अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा शुक्राणुओं का निर्माण करती हैं।
2. सर्टोली कोशिकाएं (Sertoli cells): ये विकासशील शुक्राणुओं को पोषण प्रदान करती हैं।
शुक्रजनक नलिकाओं के बाहर अंतरालीय अवकाश में लेडिग कोशिकाएं (Interstitial cells) उपस्थित होती हैं जो एंड्रोजन हॉर्मोन स्रावित करती हैं।

मुख्य बिंदु:

• शुक्रजनक नलिकाएं वृषण की सूक्ष्‍म संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाइयाँ हैं।
• सर्टोली कोशिकाओं को 'पोषक कोशिकाएं' भी कहा जाता है।
• नलिकाओं के बीच के स्थान को अंतरालीय स्थान कहते हैं जिसमें रक्त वाहिकाएं और लेडिग कोशिकाएं होती हैं।

आम गलतियाँ:

• सर्टोली कोशिकाओं और लेडिग कोशिकाओं के कार्यों को आपस में मिला देना।
• शुक्रजनक नलिकाओं की स्थिति को गलत बताना।

Exam Tips:

a) संरचना समझाते समय जनन एपिथีलीय स्तर का उल्लेख जरूर करें।
b) सर्टोली कोशिकाओं का मुख्य कार्य (पोषण) स्पष्ट रूप से लिखें।
c) उत्तर को सरल और बिंदुवार प्रस्तुत करें।

 

Question 6: शुक्राजनन क्या है? संक्षेप में शुक्राजनन की प्रक्रिया का वर्णन करें।

Answer:

अगुणित नर युग्मक (शुक्राणुओं) के निर्माण की प्रक्रिया को शुक्राजनन (Spermatogenesis) कहते हैं। यह वृषण की शुक्रजनक नलिकाओं में संपन्न होती है और निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है:
1. गुणन प्रवस्था: प्राथमिक जनन कोशिकाएं (स्पर्मेटोगोनिया) समसूत्री विभाजन द्वारा विभाजित होकर संख्या में वृद्धि करती हैं, ये द्विगुणित (2n) होती हैं।
2. वृद्धि प्रवस्था: स्पर्मेटोगोनिया पोषण प्राप्त करके आकार में बड़ी हो जाती हैं और प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट बनाती हैं।
3. परिपक्वन प्रवस्था: प्राथमिक स्पर्मेटोसाइट में पहला अर्द्धसूत्री विभाजन होने से दो समान अगुणित (n) द्वितीयक स्पर्मेटोसाइट बनते हैं, जिनमें दूसरे अर्द्धसूत्री विभाजन से चार स्पर्मेटिड बनते हैं।
4. spermiogenesis (शुक्राणु-कायांतरण): स्पर्मेटिड बिना किसी विभाजन के संरचनात्मक परिवर्तन द्वारा पूर्ण शुक्राणु (Spermatozoa) में बदल जाते हैं।

मुख्य बिंदु:

• स्पर्मेटोगोनिया (2n) से स्पर्मेटिड (n) बनने की प्रक्रिया अर्द्धसूत्री विभाजन पर आधारित है।
• स्पर्मेटिड का शुक्राणु में रूपांतरण 'शुक्राणु-कायांतरण' कहलाता है।
• परिपक्व शुक्राणु का शीर्ष, ग्रीवा, मध्य खंड और पूंछ होती है।

आम गलतियाँ:

• शुक्राजनन और वीर्यसेचन को एक ही प्रक्रिया समझ लेना।
• गुणसूत्र संख्या (2n और n) का सही उल्लेख न करना।

Exam Tips:

a) प्रक्रिया को चरणों (गुणन, वृद्धि, परिपक्वन) के अंतर्गत लिखें।
b) फ्लोचार्ट या आरेख का प्रयोग करके चरणों को समझाएं।
c) शुक्राणु-कायांतरण (Spermiogenesis) की परिभाषा अलग से हाईलाइट करें।

 

Question 7: शुक्राजनन की प्रक्रिया के नियमन में शामिल हॉर्मोनों के नाम बताएँ।

Answer:

शुक्राजनन की प्रक्रिया का नियंत्रण हाइपोथैलेमस और पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा स्रावित हॉर्मोन्स द्वारा होता है। इसमें निम्नलिखित हॉर्मोन शामिल हैं:
1. गोनाडोट्रोपिन रिलीजिंग हॉर्मोन (GnRH): यह हाइपोथैलेमस से स्रावित होता है जो अग्र पिट्यूटरी को प्रेरित करता है।
2. ल्यूटीनाइजिंग हॉर्मोन (LH): यह अग्र पिट्यूटरी से स्रावित होकर लेडिग कोशिकाओं को एंड्रोजन स्रावित करने के लिए प्रेरित करता है।
3. फॉलिकल स्टिम्युलेटिंग हॉर्मोन (FSH): यह सर्टोली कोशिकाओं पर क्रिया करके कुछ ऐसे कारकों के संश्लेषण को प्रेरित करता है जो शुक्राणुजनन में सहायता करते हैं।
4. एंड्रोजन (टेस्टोस्टेरोन): जो सीधे शुक्राणुजनन प्रक्रिया को उत्तेजित करता है।

मुख्य बिंदु:

• हॉर्मोनल नियंत्रण एक नकारात्मक पुनर्भरण (Negative Feedback) तंत्र पर कार्य करता है।
• GnRH पियूष ग्रंथि से LH और FSH के स्रावण को नियंत्रित करता है।
• LH और FSH दोनों गोनाडोट्रोपिन हैं।

आम गलतियाँ:

• LH और FSH के अलग-अलग लक्ष्य अंगों (Target organs) को आपस में मिला देना।
• हाइपोथैलेमस और पियूष ग्रंथि के स्रावण में अंतर न समझ पाना।

Exam Tips:

a) हॉर्मोन्स के पूरे नाम (जैसे GnRH, LH, FSH) लिखें।
b) प्रत्येक हॉर्मोन का कार्य एक-एक पंक्ति में स्पष्ट करें।
c) तीर के निशान (→) का उपयोग करके हॉर्मोन के प्रभाव को दर्शाएं।

 

Question 8: शुक्राजनन एवं वीर्यसेचन (स्परमियेशन) की परिभाषा लिखें।

Answer:

शुक्राजनन (Spermatogenesis): वृषण की शुक्रजनक नलिकाओं में द्विगुणित स्पर्मेटोगोनिया कोशिकाओं से अगुणित शुक्राणुओं (Spermatozoa) के निर्माण की पूरी प्रक्रिया को शुक्राजनन कहते हैं।
वीर्यसेचन (Spermiation): शुक्राणु-कायांतरण के पश्चात परिपक्व शुक्राणु जब शुक्रजनक नलिकाओं की गुहा में मुक्त होते हैं, तो नलिकाओं की सतह से उनका अलग होना और वहाँ से बाहर निकलना 'वीर्यसेचन' कहलाता है।

मुख्य बिंदु:

• शुक्राजनन एक लंबी विकासात्मक प्रक्रिया है जिसमें विभाजन और कायांतरण दोनों शामिल हैं।
• वीर्यसेचन केवल शुक्राणुओं का शुक्रजनक नलिकाओं से मोचित होना है।
• दोनों जैविक प्रक्रियाएं नर जनन तंत्र के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक हैं।

आम गलतियाँ:

• 'शुक्राजनन' (Spermatogenesis) और 'शुक्राणु-कायांतरण' (Spermiogenesis) तथा 'वीर्यसेचन' (Spermiation) शब्दों में भ्रमित होना।

Exam Tips:

a) दोनों परिभाषाओं को अलग-अलग शीर्षकों के अंतर्गत स्पष्ट लिखें।
b) अंग्रेजी शब्दावली (Spermatogenesis और Spermiation) का कोष्ठक में उल्लेख करें।
c) मुख्य अंतर को संक्षिप्त रूप में रेखांकित करें।

 

Question 9: शुक्राणु का एक नामांकित आरेख बनाएँ।

Answer:

एक परिपक्व शुक्राणु सूक्ष्म संरचना है जो प्लाज्मा झिल्ली से ढकी होती है। इसके मुख्य भाग निम्नलिखित हैं:
• शीर्ष (Head): इसमें एक अगुणित केंद्रक होता है और शीर्ष के अग्रभाग पर एक टोपीनुमा संरचना 'एक्रोसोम' होती है जिसमें निषेचन में सहायक एंजाइम होते हैं।
• ग्रीवा (Neck): यह शीर्ष को मध्य खंड से जोड़ती है।
• मध्य खंड (Middle piece): इसमें अनेक माइटोकॉन्ड्रिया होते हैं जो पूंछ की गति के लिए ऊर्जा (ATP) प्रदान करते हैं।
• पूंछ (Tail): यह लंबी और चाबुक जैसी होती है जो शुक्राणु को तैरने में मदद करती है।

मुख्य बिंदु:

• एक्रोसोम गॉल्जीकाय द्वारा निर्मित होता है और अंडाणु को भेजने में मदद करता है।
• मध्य खंड को शुक्राणु का 'पावरहाउस' कहा जाता है क्योंकि इसमें ऊर्जा का उत्पादन होता है।
• पूंछ की गतिशीलता ही शुक्राणु को गमन करने योग्य बनाती है।

आम गलतियाँ:

• एक्रोसोम की स्थिति को केंद्रक के पीछे या मध्य खंड में दर्शाना।
• माइटोकॉन्ड्रिया की सही स्थिति (मध्य खंड) को न दिखाना।

Exam Tips:

a) आरेख बनाते समय शुक्राणु के चारों भागों (शीर्ष, ग्रीवा, मध्य खंड, पूंछ) को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
b) एक्रोसोम और केंद्रक को शीर्ष भाग में अलग से लेबल करें।
c) चित्र को पेंसिल से बनाकर नामांकित करें।

 

Question 10: शुक्र्य द्रव (सेमिनल प्लाज्मा) के प्रमुख संघटक क्या हैं?

Answer:

नर सहायक ग्रंथियों (शुक्राशय, प्रोस्टेट और बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथि) के स्राव को सामूहिक रूप से शुक्र्य द्रव या सेमिनल प्लाज्मा कहते हैं। इसके प्रमुख संघटक निम्नलिखित हैं:
• फ्रक्टोज शर्करा: जो शुक्राणुओं को ऊर्जा प्रदान करती है।
• कैल्शियम आयन: जो शुक्राणुओं की गतिशीलता को बढ़ाते हैं।
• विभिन्न प्रकार के एंजाइम जो निषेचन और वीर्य की गतिशीलता में सहायता करते हैं।
• प्रोस्टाग्लैंडिंस जो गर्भाशय में संकुचन को प्रेरित करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• सेमिनल प्लाज्मा और शुक्राणु मिलकर 'वीर्य' (Semen) का निर्माण करते हैं।
• फ्रक्टोज शुक्र्य द्रव का एक विशिष्ट घटक है जो अन्य शारीरिक द्रवों में नहीं पाया जाता।
• यह द्रव शुक्राणुओं को जीवित रहने और गति करने के लिए एक अनुकूल माध्यम देता है।

आम गलतियाँ:

• केवल शुक्राणुओं को वीर्य मान लेना और सेमिनल प्लाज्मा की भूमिका भूल जाना।
• फ्रक्टोज और ग्लूकोज में अंतर न समझना।

Exam Tips:

a) सेमिनल प्लाज्मा के मुख्य घटकों को बिंदुओं में लिखें।
b) ग्रंथियों के नाम (शुक्राशय, प्रोस्टेट) का उल्लेख अवश्य करें।
c) उत्तर में 'फ्रक्टोज' और 'कैल्शियम' का नाम विशेष रूप से शामिल करें।

 

Question 11: पुरुष की सहायक नलिकाओं एवं ग्रंथियों के प्रमुख कार्य क्या हैं?

Answer:

पुरुष की सहायक नलिकाओं (वृषण जालिका, शुक्रवाहिका, अधिवृषण तथा शुक्रवाहिनी) के प्रमुख कार्य:
• ये वृषण में निर्मित शुक्राणुओं का भंडारण और परिवहन करती हैं ताकि वे मूत्रमार्ग तक पहुँच सकें।

सहायक ग्रंथियों (शुक्राशय, प्रोस्टेट और बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथि) के प्रमुख कार्य:
• ये सेमिनल प्लाज्मा (शुक्र्य द्रव) का स्राव करती हैं जो शुक्राणुओं को पोषण और गतिशीलता प्रदान करता है।
• प्रोस्टेट द्रव शुक्राणुओं को सक्रिय करता है तथा बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथि का स्राव मूत्रमार्ग के अम्लीय प्रभाव को उदासीन करता है और स्नेहन (lubrication) प्रदान करता है।

मुख्य बिंदु:

• नलिकाएं केवल परिवहन मार्ग का कार्य करती हैं, जबकि ग्रंथियां रासायनिक पदार्थ स्रावित करती हैं।
• वीर्य का अधिकांश भाग इन सहायक ग्रंथियों के स्राव से बनता है।
• सहायक ग्रंथियों के बिना शुक्राणु जीवित या गतिशील नहीं रह सकते।

आम गलतियाँ:

• नलिकाओं और ग्रंथियों के कार्यों को आपस में मिला देना।
• ग्रंथियों के विशिष्ट स्रावों के कार्यों को न लिखना।

Exam Tips:

a) उत्तर को दो स्पष्ट भागों (सहायक नलिकाओं के कार्य और सहायक ग्रंथियों के कार्य) में बांटें।
b) परिवहन और पोषण जैसे मुख्य शब्दों का प्रयोग करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और बिंदुवार रखें।

 

Question 12: अंडजनन क्या है? अंडजनन की संक्षिप्त व्याख्या करें।

Answer:

मादा के अंडाशय में प्राथमिक जनन कोशिकाओं से परिपक्व मादा युग्मक (अंडाणु) के निर्माण की प्रक्रिया को अंडजनन (Oogenesis) कहते हैं। यह प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में पूरी होती है:
1. भ्रूणिय विकास के दौरान उलोगोनिया का निर्माण: लाखों उलोगोनिया (अंडजननी कोशिकाएं) बनती हैं और प्राथमिक ऊसाइट में बदल जाती हैं, जो प्रोफेज़-I पर रुक जाती हैं।
2. जन्म के बाद और यौवनारंभ: जन्म के बाद कोई नया उलोगोनिया नहीं बनता। यौवनारंभ पर प्रत्येक माह प्राथमिक ऊसाइट में पहला अर्द्धसूत्री विभाजन होता है जिससे एक बड़ा द्वितीयक ऊसाइट और एक छोटा प्रथम ध्रुवीय पिंड बनता है।
3. निषेचन के समय अंतिम विभाजन: द्वितीयक ऊसाइट में दूसरा अर्द्धसूत्री विभाजन केवल तभी पूरा होता है जब शुक्राणु अंडाणु में प्रवेश करता है, जिससे एक परिपक्व अंडाणु (ओवम) और द्वितीयक ध्रुवीय पिंड बनता है।

मुख्य बिंदु:

• अंडजनन की शुरुआत भ्रूण अवस्था में ही हो जाती है, जो शुक्राजनन से भिन्न है।
• इसमें असमान कोशिका विभाजन होता है जिसके फलस्वरूप ध्रुवीय पिंड (Polar bodies) बनते हैं।
• परिपक्व अंडाणु का निर्माण निषेचन की घटना पर निर्भर करता है।

आम गलतियाँ:

• शुक्राजनन और अंडजनन के समय में अंतर को स्पष्ट न करना।
• ध्रुवीय पिंडों के बनने की प्रक्रिया को छोड़ देना।

Exam Tips:

a) चरणों (भ्रूण अवस्था, यौवनारंभ, निषेचन) के आधार पर उत्तर लिखें।
b) प्राथमिक ऊसाइट और द्वितीयक ऊसाइट की गुणसूत्र अवस्था का ध्यान रखें।
c) चित्रमय निरूपण का उल्लेख करें।

 

Question 13: अंडाशय की अनुप्रस्थ काट (ट्रांसवर्स सेक्शन) का एक नामांकित आरेख बनाएँ।

Answer:

अंडाशय की अनुप्रस्थ काट का आरेख अंडाशय के भीतर विभिन्न विकास की अवस्थाओं वाले पुटिकाओं (Follicles) को दर्शाता है। इसके मुख्य नामांकित भाग हैं:
• प्राथमिक कूप (Primary follicle)
• द्वितीयक कूप (Secondary follicle)
• तृतीयक कूप (Tertiary follicle) जिसमें एक गुहा (एंट्रम) होती है।
• ग्राफी पुटक (Graafian follicle)
• अंडाणु (Ovum)
• कॉर्पस ल्यूटियम (पीत पिंड) और कॉर्पस एल्बिकेंस।

मुख्य बिंदु:

• अंडाशय के भीतर पुटिकाएं अलग-अलग परिपक्वता स्तर पर पाई जाती हैं।
• तृतीयक पुटक की विशेषता उसकी 'एंट्रम' गुहा होती है।
• अंडोत्सर्ग के बाद बचा हुआ पुटक कॉर्पस ल्यूटियम में बदल जाता है।

आम गलतियाँ:

• विभिन्न पुटकों (प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक) के सही क्रम को गलत दर्शाना।
• एंद्रम (Antrum) गुहा को आरेख में अंकित करना भूल जाना।

Exam Tips:

a) आरेख को पेंसिल से स्पष्ट रूप से बनाएं और विकास के क्रम को बाएं से दाएं दिखाएं।
b) ग्राफी पुटक और कॉर्पस ल्यूटियम को विशेष रूप से लेबल करें।
c) चित्र का शीर्षक 'अंडाशय की अनुप्रस्थ काट का दृश्य' लिखें।

 

Question 14: ग्राफी पुटक (ग्राफियन फॉलिकल) का एक नामांकित आरेख बनाएँ।

Answer:

ग्राफी पुटक परिपक्व तृतीयक पुटक होता है जो अंडाशय की सतह पर उभर आता है। इसके प्रमुख नामांकित भाग निम्नलिखित हैं:
• बाह्य थीका (Theca externa) और अंतः थीका (Theca interna)
• पुटक गुहा या एंद्रम (Antrum cavity जो तरल से भरी होती है)
• कोरोना रेडियाटा (Corona radiata) कोशिकाएं
• जोना पेलुसिडा (Zona pellucida) जो अंडाणु के चारों ओर अकोशिकीय स्तर है
• केंद्रीय अंडाणु (Ovum / Oocyte)

मुख्य बिंदु:

• ग्राफी पुटक फटने पर ही अंडोत्सर्ग (Ovulation) द्वारा द्वितीयक ऊसाइट मुक्त होता है।
• जोना पेलुसिडा झिल्ली निषेचन के दौरान शुक्राणु के प्रवेश को नियंत्रित करती है।
• थीका परतें एस्ट्रोजन हार्मोन के संश्लेषण में मदद करती हैं।

आम गलतियाँ:

• जोना पेलुसिडा और कोरोना रेडियाटा की स्थिति को आपस में बदलना।
• थीका की परतों (बाह्य और अंतः) को गलत नामांकित करना।

Exam Tips:

a) वर्तनी पर विशेष ध्यान दें (जैसे कोरोना रेडियाटा, जोना पेलुसिडा)।
b) पुटक गुहा (एंट्रम) को स्पष्ट रूप से रिक्त स्थान के रूप में दिखाएं।
c) साफ़ और स्पष्ट रेखाचित्र का प्रयोग करें।

 

Question 15: निम्नलिखित के कार्य बताइए:
(क) पीत पिंड (कॉर्पस ल्यूटियम)
(ख) गर्भाशय अंतः स्तर (एंडोमेट्रियम)
(ग) अग्रपिंडक (एक्रोसोम)
(घ) शुक्राणु पूंछ (स्पर्म टेल)
(ड) झालर (फिमरी)

Answer:

(क) पीत पिंड (कॉर्पस ल्यूटियम): यह प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन का स्रावण करता है जो गर्भावस्था को बनाए रखने के लिए गर्भाशय की दीवार को तैयार और सुरक्षित रखता है।
(ख) गर्भाशय अंतः स्तर (एंडोमेट्रियम): यह भ्रूण के आरोपण (implantation) और प्लेसेंटा के निर्माण के लिए आवश्यक है। मासिक चक्र के दौरान इसमें चक्रीय परिवर्तन होते हैं।
(ग) अग्रपिंडक (एक्रोसोम): इसमें शक्तिशाली एंजाइम होते हैं जो निषेचन के समय अंडाणु की झिल्ली को भेदने में मदद करते हैं।
(घ) शुक्राणु पूंछ (स्पर्म टेल): यह शुक्राणु को तैरने और मादा जनन मार्ग में गति करने के लिए गतिशीलता प्रदान करती है।
(ड) झालर (फिमरी): अंडोत्सर्ग के बाद अंडाशय से मोचित होने वाले अंडाणु को एकत्रित करने में यह सहायता करती है।

मुख्य बिंदु:

• कॉर्पस ल्यूटियम अस्थायी अंतःस्रावी ग्रंथि के रूप में कार्य करता है।
• एक्रोसोम गॉल्जीकाय का रूपांतरण है।
• फिमरी अंडवाहिनी के कीप (infundibulum) के किनारे उंगली जैसी संरचनाएं होती हैं।

आम गलतियाँ:

• एंडोमेट्रियम और मायोमेट्रियम के कार्यों में भ्रमित होना।
• एक्रोसोम के कार्य (एंजाइम स्राव) को भूल जाना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक भाग का कार्य एक या दो स्पष्ट वाक्यों में लिखें।
b) उप-भागों (क, ख, ग...) के क्रम को न बदलें।
c) मुख्य जैविक शब्दों को रेखांकित करें।

 

Question 16: सही अथवा गलत कथनों को पहचानें:
(क) पुंजनों (एंड्रोजेन्स) का उत्पादन सर्टोली कोशिकाओं द्वारा होता है। (सही/गलत)
(ख) शुक्राणु को सर्टोली कोशिकाओं से पोषण प्राप्त होता है। (सही/गलत)
(ग) लेडिग कोशिकाएं, अंडाशय में पाई जाती हैं। (सही/गलत)
(घ) लेडिग कोशिकाएं पुंजनों (एंड्रोजेन्स) को संश्लेषित करती हैं। (सही/गलत)
(ङ) अंडजनन पीत पिंड (कॉर्पस ल्यूटियम) में सम्पन्न होता है। (सही/गलत)
(च) गर्भावस्था के दौरान आर्तव चक्र (मेन्स्ट्रुअल साइकिल) बंद होता है। (सही/गलत)
(छ) योनिच्छद (हाइमन) की उपस्थिति अथवा उपस्थिति कौमार्य (वर्जिनिटी) या यौन अनुभव का विश्वसनीय संकेत नहीं है। (सही/गलत)

Answer:

(क) गलत (पुंजनों का उत्पादन लेडिग कोशिकाओं द्वारा होता है।)
(ख) सही
(ग) गलत (लेडिग कोशिकाएं वृषण में पाई जाती हैं, अंडाशय में नहीं।)
(घ) सही
(ङ) गलत (अंडजनन अंडाशय में होता है, कॉर्पस ल्यूटियम में नहीं।)
(च) सही
(छ) सही

मुख्य बिंदु:

• लेडिग कोशिकाएं वृषण में एंड्रोजन बनाती हैं जबकि सर्टोली कोशिकाएं पोषण देती हैं।
• गर्भावस्था के दौरान कॉर्पस ल्यूटियम की सक्रियता से आर्तव चक्र रुक जाता है।
• हाइमन का टूटना केवल सहवास से ही नहीं, बल्कि खेलकूद या साइकिल चलाने से भी हो सकता है।

आम गलतियाँ:

• लेडिग और सर्टोली कोशिकाओं के कार्यों को आपस में बदलना।
• हाइमन की उपस्थिति को लेकर सामाजिक भ्रांतियों को जीव विज्ञान में सही मान लेना।

Exam Tips:

a) प्रत्येक कथन के सामने केवल 'सही' या 'गलत' लिखें, चाहें तो कारण भी कोष्ठक में जोड़ सकते हैं।
b) कथनों को ध्यानपूर्वक पढ़ें क्योंकि एक शब्द का अंतर उत्तर बदल सकता है।
c) क्रम संख्या का विशेष ध्यान रखें।

 

Question 17: आर्तव चक्र क्या है? आर्तव चक्र (मेन्स्ट्रुअल साइकिल) का कौन से हॉर्मोन नियमन करते हैं?

Answer:

मादाओं (प्राइमेट्स जैसे मनुष्य और बंदर) में अंडाशय, गर्भाशय और हॉर्मोन्स के स्तर में होने वाले चक्रीय परिवर्तनों को आर्तव चक्र या मासिक धर्म चक्र (Menstrual cycle) कहते हैं। यह चक्र सामान्यतः 28/29 दिनों का होता है।
इस चक्र का नियमन निम्नलिखित हॉर्मोनों द्वारा होता है:
• गोनाडोट्रोपिन (LH और FSH): हाइपोथैलेमस और पीयूष ग्रंथि द्वारा स्रावित होकर चक्र की विभिन्न अवस्थाओं को नियंत्रित करते हैं।
• अंडाशय हॉर्मोन (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन): जो गर्भाशय के अंतःस्तर (एंडोमेट्रियम) को बनाए रखने और बदलने में कार्य करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• आर्तव चक्र यौवनारंभ से शुरू होकर रजोनिवृत्ति (Menopause) तक चलता है।
• चक्र के मध्य (लगभग 14वें दिन) LH का स्तर अपने चरम पर होता है जिसे 'LH सर्ज' कहते हैं जो अंडोत्सर्ग कराता है।
• गर्भावस्था के न होने पर कॉर्पस ल्यूटियम नष्ट हो जाता है जिससे प्रोजेस्टेरोन घटता है और रक्तस्राव शुरू होता है।

आम गलतियाँ:

• आर्तव चक्र और मद चक्र (Oestrus cycle) में अंतर न समझना।
• हॉर्मोनल नियंत्रण में LH और FSH की भूमिका को गलत लिखना।

Exam Tips:

a) परिभाषा लिखते समय 'प्राइमेट्स' शब्द का उल्लेख अवश्य करें।
b) हॉर्मोन्स के नाम स्पष्ट रूप से अलग बिंदुओं में लिखें।
c) चक्र की अवधि (28 दिन) का जिक्र करना न भूलें।

 

Question 18: प्रसव (पार्ट्यूरिशन) क्या है? प्रसव को प्रेरित करने में कौन-से हॉर्मोन शामिल होते हैं?

Answer:

गर्भकाल पूरा होने पर पूर्ण विकसित शिशु का माता के गर्भाशय से बाहर आना, प्रसव (Parturition) कहलाता है।
प्रसव को प्रेरित करने में मुख्य रूप से निम्नलिखित हॉर्मोन शामिल होते हैं:
1. ऑक्सीटोसिन (Oxytocin): यह पीयूष ग्रंथि से स्रावित होता है जो गर्भाशय की पेशियों में तीव्र संकुचन (uterus contractions) प्रेरित करता है।
2. कोर्टिसोल, एस्ट्रोजन और प्रोलैक्टिन: गर्भस्थ शिशु और प्लेसेंटा द्वारा मिलकर हॉर्मोनल संकेत भेजे जाते हैं जो प्रसव की प्रक्रिया को शुरू करते हैं।

मुख्य बिंदु:

• प्रसव एक तंत्रिका अंतःस्रावी तंत्र (Neuroendocrine mechanism) द्वारा प्रेरित होता है।
• गर्भाशय के संकुचन से ऑक्सीटोसिन का स्राव और अधिक बढ़ता है जिससे प्रसव पीड़ा तीव्र होती है (धनात्मक पुनर्भरण तंत्र)।
• गर्भउत्क्षेपण प्र refleks (Fetal ejection reflex) प्रसव की शुरुआत करता है।

आम गलतियाँ:

• ऑक्सीटोसिन और प्रोजेस्टेरोन के कार्यों को आपस में मिला देना।
• 'गर्भउत्क्षेपण प्रतिवर्त' प्रक्रिया को स्पष्ट न करना।

Exam Tips:

a) प्रसव की परिभाषा में 'पूर्ण विकसित शिशु का बाहर आना' मुख्य बिंदु रखें।
b) ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन का नाम प्रमुखता से लिखें।
c) उत्तर को वैज्ञानिक शब्दावली के साथ संक्षिप्त रखें।

 

Question 19: हमारे समाज में लड़कियाँ जन्म देने का दोष महिलाओं को दिया जाता है। बताएँ कि यह क्यों सही नहीं है?

Answer:

हमारे समाज में यह धारणा गलत है क्योंकि बच्चे के लिंग का निर्धारण पिता के गुणसूत्रों पर निर्भर करता है, न कि माता पर।
• मानव में स्त्री में दो X गुणसूत्र (XX) होते हैं, अतः सभी अंडाणु केवल X गुणसूत्र वाले होते हैं।
• पुरुष में एक X और एक Y गुणसूत्र (XY) होता है, जिससे शुक्राणु दो प्रकार के (50% X वाले और 50% Y वाले) बनते हैं।
• यदि पिता का X शुक्राणु माता के X अंडाणु से मिलता है, तो पुत्री (XX) पैदा होती है।
• यदि पिता का Y शुक्राणु माता के X अंडाणु से मिलता है, तो पुत्र (XY) पैदा होता है।
अतः संतान का लिंग निर्धारण पूरी तरह से पुरुष के गुणसूत्र (X या Y) पर निर्भर करता है, इसलिए महिलाओं को दोष देना सर्वथा अनुचित है।

मुख्य बिंदु:

• महिलाएँ हमेशा होमोगैमेटिक (केवल X) युग्मक बनाती हैं।
• पुरुष हेटेరోగैमेटिक (X और Y दोनों) शुक्राणु बनाते हैं।
• लिंग निर्धारण निषेचन के समय ही आनुवंशिक रूप से तय हो जाता है।

आम गलतियाँ:

• गुणसूत्रों के संयोजन (XX और XY) को गलत समझाना।
• वैज्ञानिक तथ्य के बजाय सामाजिक मान्यताओं को उत्तर में लिखना।

Exam Tips:

a) आनुवंशिक आधार (X और Y गुणसूत्र) देकर अपने उत्तर को सिद्ध करें।
b) स्पष्ट करें कि महिला की इसमें कोई भूमिका नहीं होती।
c) उत्तर को तार्किक और वैज्ञानिक भाषा में लिखें।

 

Question 20: एक माह में मानव अंडाशय से कितने अंडे मोचित होते हैं? यदि माता ने समरूप जुड़वाँ बच्चों को जन्म दिया हो तो आप क्या सोचते हैं कि कितने अंडे मोचित हुए होंगे? क्या आपका उत्तर बदलएगा यदि जन्मे हुए जुड़वाँ बच्चे द्विअंडज यमज थे?

Answer:

• सामान्यतः एक माह में मानव अंडाशय से केवल एक ही अंडाणु (अंडा) मोचित होता है।
• यदि माता ने समरूप जुड़वाँ (Identical twins) बच्चों को जन्म दिया है, तो केवल एक ही अंडाणु मोचित हुआ होगा, जो निषेचन के बाद दो भागों में विभाजित हो गया।
• हाँ, यदि जन्मे हुए बच्चे द्विअंडज यमज (Fraternal twins) थे, तो उस एक माह में दो अंडे (प्रत्येक अंडाशय से या एक से दो) मोचित हुए होंगे, जिनका अलग-अलग शुक्राणुओं द्वारा निषेचन हुआ होगा।

मुख्य बिंदु:

• समरूप जुड़वाँ (Monozygotic) एक ही युग्मनज से बनते हैं।
• द्विअंडज जुड़वाँ (Dizygotic) अलग-अलग युग्मनजों से बनते हैं जिसके लिए दो अंडों का होना जरूरी है।
• सामान्य चक्र में प्रति माह एक ही अंडाणु बनता है।

आम गलतियाँ:

• समरूप और द्विअंडज जुड़वाँ की अवधारणा में अंतर न समझना।
• मोचित अंडों की संख्या को गलत अनुमान लगाना।

Exam Tips:

a) दोनों स्थितियों (समरूप और द्विअंडज) के लिए अलग-अलग उत्तर स्पष्ट करें।
b) एक अंडाणु प्रति माह के नियम को आधार बनाएं।
c) वैज्ञानिक शब्दों (Monozygotic और Dizygotic) का प्रयोग करें।

 

Question 21: आप क्या सोचते हैं कि कुतिया जिसने 6 बच्चों को जन्म दिया है, के अंडाशय से कितने अंडे मोचित हुए थे?

Answer:

कुतिया जिसने 6 बच्चों को जन्म दिया है, के अंडाशय से कम से कम 6 अंडे (या अधिक) मोचित हुए होंगे। कुत्ते और कई अन्य स्तनधारी (बहुप्रसवी या Litter-bearing animals) एक साथ कई संतानों को जन्म देते हैं, क्योंकि उनके अंडाशय से एक साथ कई अंडाणु (अंडोत्सर्ग के दौरान) मोचित होते हैं और उन सभी का निषेचन होता है।

मुख्य बिंदु:

• कुछ स्तनधारी एक ही बार में एक से अधिक संतानों को जन्म देते हैं (बहुप्रसवता)।
• जितने बच्चे पैदा होते हैं, उतने या उससे अधिक अंडे मोचित हुए होते हैं।
• यह मानवों से भिन्न है जहाँ सामान्यतः एक ही अंडाणु मोचित होता है।

आम गलतियाँ:

• मानव प्रजनन के नियम को सभी स्तनधारियों पर लागू कर देना।
• बहुप्रसवता (Littering) के जैविक कारण को न समझना।

Exam Tips:

a) सीधा और सटीक उत्तर दें कि 6 या अधिक अंडे मोचित हुए थे।
b) इसका कारण बहुप्रसवी स्वभाव (Litter-bearing) बताएं।
c) उत्तर को एक-दो वाक्यों में संक्षिप्त रखें।

 

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