CBSE Class 12 Hindi Elective Question Paper 2025 Solved Code 29-1-2

Class 12 Hindi Elective Solved Question Papers: CBSE Class 12 Hindi Elective Question Paper 2025 Solved Code 29-1-2

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खंड - क

(अपठित बोध)

 

1. निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [8 Marks]

जहाँ भूमि पर पड़ा कि
सोना धँसता, चाँदी धँसती
धँसती ही जाती पृथ्वी में
बड़ों-बड़ों की हस्ती ।
शक्तिहीन जो हुआ कि
बैठा भू पर आसन मारे
खा जाते हैं उसको
मिट्टी के ढेले हत्यारे

मातृभूमि है उसकी, जिसको
उठके जीना होता है,
दहन-भूमि है उसकी, जो
क्षण-क्षण गिरता जाता है,
भूमि खींचती है मुझको भी
नीचे धीरे-धीरे
किंतु लहराता हूँ मैं नभ पर
शीतल-मंद-समीरे ।

काला बादल आता है
गुरु गर्जन स्वर भरता है
विद्रोही-मस्तक पर वह
अभिषेक किया करता है ।
विद्रोही हैं हमीं, हमारे
फूलों से फल आते हैं
और हमारी कुर्बानी पर
जड़ भी जीवन पाते हैं ।

 

(i) 'धँसती ही जाती पृथ्वी में बड़ों-बड़ों की हस्ती' - पंक्ति का आशय है - [1 Mark]
(A) पृथ्वी पर सब कुछ नश्वर है ।
(B) पृथ्वी में बड़े-बड़े समा जाते हैं ।
(C) शक्तिशालियों का जीवन क्षणभंगुर है ।
(D) शक्तिशालियों का अधः पतन निश्चित है ।

Answer: (A) पृथ्वी पर सब कुछ नश्वर है ।

Teacher's Note:
a) पंक्ति का प्रतीकात्मक अर्थ समझना आवश्यक है, शाब्दिक अर्थ नहीं।
b) 'नश्वरता' शब्द इस उत्तर की कुंजी है।

 

(ii) शक्तिहीन का क्या हश्र होता है ? [1 Mark]
(A) थक-हार कर बैठ जाता है ।
(B) लोग उनको पनपने नहीं देते ।
(C) लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाते ।
(D) अस्तित्व नष्ट हो जाता है ।

Answer: (D) अस्तित्व नष्ट हो जाता है ।

Teacher's Note:
a) 'मिट्टी के ढेले हत्यारे' पंक्ति से यह भाव स्पष्ट होता है।
b) विकल्पों में अंतिम परिणाम खोजना है, कारण नहीं।

 

(iii) कविता के केंद्रीय भाव को दर्शाने वाले कथन है/हैं [1 Mark]
(I) संसार में जीने के लिए शक्तिशाली बनना पड़ेगा ।
(II) हार मानने वालों के लिए मातृभूमि मरण-भूमि के समान है ।
(III) यहाँ सब एक-दूसरे के विरोधी हैं ।
(A) केवल (I)
(B) केवल (II)
(C) (I) और (II) दोनों ही
(D) (I) और (III) दोनों ही

Answer: (C) (I) और (II) दोनों ही

Teacher's Note:
a) दोनों कथन कविता के संघर्ष और शक्ति के विषय से मेल खाते हैं।
b) (III) कविता के भाव से मेल नहीं खाता, इसे अस्वीकार करना है।

 

(iv) अपने को विद्रोही कौन और क्यों मानते हैं ? [2 Marks]

Answer:
1. पेड़ स्वयं को विद्रोही मानते हैं।
2. क्योंकि वे विपरीत परिस्थितियों को भी अपने अनुकूल बना लेते हैं और उनसे संघर्ष करते हैं।

Teacher's Note:
a) 'हम' शब्द किसका संकेत है, यह पहचानना ज़रूरी है।
b) उत्तर में 'फूलों से फल' वाली पंक्ति का संदर्भ जोड़ें।

 

(v) इस काव्यांश के माध्यम से क्या सीख दी गई है ? [2 Marks]

Answer:
1. सत्ता, शक्ति और धन सब नश्वर हैं।
2. शक्तिहीन का नष्ट होना तय है।
3. प्रतिकूल परिस्थितियों में अडिग बने रहना चाहिए और भावी पीढ़ी को अपने जीवन से प्रेरणा देनी चाहिए।

Teacher's Note:
a) दो अलग-अलग बिंदु देना अनिवार्य है, केवल एक भाव न लिखें।
b) कविता का संदेश सकारात्मक स्वर में लिखें।

 

(vi) गुरु गर्जना करने वाले बादलों का, वृक्षों के मस्तक पर अभिषेक करना क्या दर्शाता है ? [1 Mark]

Answer: यह पुरुषार्थी, साहसी और संघर्षी व्यक्तियों का विरोधी अथवा शक्तिशाली व्यक्तियों द्वारा भी सम्मान किया जाना दर्शाता है।

Teacher's Note:
a) 'अभिषेक' शब्द सम्मान और स्वीकृति का प्रतीक है।
b) बादल यहाँ शक्ति का प्रतीक है, इसे उत्तर में स्पष्ट करें।

 

2. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [10 Marks]

सौरमंडल में पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है, जिस पर जीवन संभव है । पृथ्वी और इसके पर्यावरण को बचाने के संकल्प के साथ 'पृथ्वी दिवस' हर साल 22 अप्रैल को दुनिया भर में मनाया जाता है । इसे मनाने की शुरुआत 1970 से हुई जब अमेरिका समेत कई देशों ने बिगड़ते पर्यावरण के मुद्दे की गंभीरता को समझा और पृथ्वी बचाने के लिए एक अभियान की शुरुआत हुई । उस कार्यक्रम में हरेक समाज, वर्ग और क्षेत्र के लोगों ने हिस्सा लिया था । इस वर्ष का 'पृथ्वी दिवस' पर्यावरण के आगे प्लास्टिक से उत्पन्न खतरे पर केंद्रित है, जिसमें एकल उपयोग वाले प्लास्टिक को समाप्त करने और उसका विकल्प खोजने का आह्वान किया गया है ।

पृथ्वी पर जैसे-जैसे आबादी बढ़ती जा रही है, प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन की गति भी बढ़ती जा रही है । बढ़ते असंतुलन के कारण वह दिन बहुत दूर नहीं, जब पृथ्वी रहने लायक नहीं बचेगी । इसलिए ज़रूरी है कि सभी लोग जाग जाएँ, अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को समझें और पृथ्वी के प्रति अपने कर्तव्य निभाएँ । गांधीजी का मानना था कि पृथ्वी, वायु, जल और भूमि हमारे पूर्वजों की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि वे हमारे बच्चों और आने वाली पीढ़ियों की अमानत हैं । हमें अपनी भावी पीढ़ियों को साफ-सुथरा पर्यावरण सौंपना होगा । गांधीजी का मानना था कि पृथ्वी के पास लोगों की ज़रूरतें पूरी करने के लिए तो पर्याप्त संसाधन हैं, लोभ की पूर्ति लायक नहीं ।

हमारी पारंपरिक मान्यता है कि पृथ्वी एक माँ की तरह है, जो मनुष्य, वनस्पति, जीव-जंतु समेत सभी प्राणियों को अपनी गोद में पालती है । मनुष्य भौतिक सुख भोगने के लिए प्राकृतिक संसाधनों का अविवेकपूर्ण दोहन करता जा रहा है जिससे इसकी जैव विविधता को भारी नुकसान पहुँच रहा है । धरती पर जीवन बनाए रखने के लिए धरती और पर्यावरण को बचाना बहुत ज़रूरी है । हमें गैर-नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करने की बजाय नवीकरणीय संसाधनों जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल-विद्युत आदि पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए । प्रकृति के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना और उसकी सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाना आवश्यक है ।

 

(i) वर्ष 2024 का 'पृथ्वी दिवस' केंद्रित है - [1 Mark]
(A) पर्यावरण
(B) प्लास्टिक
(C) जलवायु
(D) प्रदूषण

Answer: (B) प्लास्टिक

Teacher's Note:
a) गद्यांश की पहली अनुच्छेद में यह सूचना सीधे दी गई है।
b) 'एकल उपयोग प्लास्टिक' वाक्यांश उत्तर की पुष्टि करता है।

 

(ii) गद्यांश में प्रयुक्त 'सभी लोग जाग जाएँ' का आशय है - [1 Mark]
(A) पृथ्वी की रक्षा के प्रति सचेत हो जाएँ ।
(B) समय पर अपने कर्तव्य की पूर्ति करें ।
(C) अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का पालन करें ।
(D) पारंपरिक अंधविश्वासों से मुक्त हो जाएँ ।

Answer: (A) पृथ्वी की रक्षा के प्रति सचेत हो जाएँ ।

Teacher's Note:
a) संदर्भ वाक्य में 'जिम्मेदारियों को समझें' शब्द ध्यान से पढ़ें।
b) विकल्प (B) और (C) सामान्य कथन हैं, प्रसंग-विशिष्ट नहीं।

 

(iii) पृथ्वी की माँ से तुलना का आधार है - [1 Mark]
(A) पालन-पोषण का गुण
(B) रक्षा करने का गुण
(C) जन्म देने का गुण
(D) सहन करने का गुण

Answer: (A) पालन-पोषण का गुण

Teacher's Note:
a) 'गोद में पालती है' पंक्ति सीधे उत्तर देती है।
b) माँ की तुलना सदैव पोषण के भाव से जोड़ें।

 

(iv) प्रकृति के प्रति गांधीजी का क्या दृष्टिकोण था ? [2 Marks]

Answer:
1. प्राकृतिक सम्पदा आने वाली पीढ़ियों की अमानत है, पूर्वजों की संपत्ति नहीं।
2. भावी पीढ़ियों को साफ-सुथरा पर्यावरण सौंपना वर्तमान पीढ़ी का दायित्व है और प्रकृति का दोहन नहीं बल्कि उसका संरक्षण करना चाहिए।

Teacher's Note:
a) गांधीजी के दो कथन (अमानत तथा लोभ-पूर्ति) दोनों का उल्लेख करें।
b) 'जरूरत बनाम लोभ' का अंतर स्पष्ट करना अंक दिलाता है।

 

(v) बढ़ती हुई आबादी के कौन-कौन से दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं ? [2 Marks]

Answer:
1. पृथ्वी का वातावरण दिन-प्रतिदिन दूषित हो रहा है।
2. प्राकृतिक संसाधनों के अविवेकपूर्ण दोहन से जैव विविधता को भारी नुकसान पहुँच रहा है।

Teacher's Note:
a) प्रदूषण और दोहन दोनों बिंदु अलग-अलग लिखें।
b) गद्यांश के दूसरे अनुच्छेद से सीधे संकेत लें।

 

(vi) गैर-नवीकरणीय ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा के बीच के अंतर को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए । [2 Marks]

Answer:
1. गैर-नवीकरणीय ऊर्जा सीमित संसाधन है, जैसे कोयला, तेल, प्राकृतिक गैस आदि।
2. नवीकरणीय ऊर्जा प्राकृतिक व असीमित संसाधन है, जैसे सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल-विद्युत आदि।

Teacher's Note:
a) दोनों के लिए कम से कम एक-एक उदाहरण देना अनिवार्य है।
b) 'सीमित' और 'असीमित/नवीकरण योग्य' शब्द अंतर स्पष्ट करते हैं।

 

(vii) प्रकृति की रक्षा प्रत्येक मनुष्य के लिए क्यों आवश्यक है ? [1 Mark]

Answer: धरती पर जीवन बनाए रखने के लिए प्रकृति की रक्षा प्रत्येक मनुष्य के लिए आवश्यक है।

Teacher's Note:
a) उत्तर संक्षिप्त एवं सीधा होना चाहिए, विस्तार में जाने की आवश्यकता नहीं।
b) गद्यांश की अंतिम पंक्ति से यह भाव लिया गया है।

 

खंड - ख

(अभिव्यक्ति और माध्यम पुस्तक पर आधारित)

 

3. निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 100 शब्दों में रचनात्मक लेख लिखिए : [5 Marks]

(क) नाटक प्रतियोगिता में जब मैंने महिला पात्र का अभिनय किया

Answer: विद्यालय की नाटक प्रतियोगिता में मुझे एक महिला पात्र की भूमिका मिली। पहले मुझे संकोच हुआ, परंतु शिक्षकों के प्रोत्साहन से मैंने चुनौती स्वीकार कर ली। मैंने वेशभूषा, बोलने का ढंग और हाव-भाव पर कड़ी मेहनत की। मंच पर जब मैंने संवाद बोले, तो दर्शकों ने खूब सराहा। इस अनुभव ने मुझे सिखाया कि कला में लिंग का बंधन नहीं होता, अभिनय के लिए संवेदनशीलता और अभ्यास ज़रूरी है। इस प्रतियोगिता में हमारी टीम प्रथम आई। इस अनुभव ने मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाया और मुझे सिखाया कि किसी भी भूमिका को पूरी लगन से निभाने से सफलता अवश्य मिलती है।

Teacher's Note:
a) व्यक्तिगत अनुभव को क्रमबद्ध ढंग से, आरंभ-मध्य-अंत के साथ लिखें।
b) निष्कर्ष में सीख या भाव अवश्य लिखें, अंक इसी पर मिलते हैं।

OR

(ख) खेलों से प्रतिस्पर्धा की सच्ची भावना [5 Marks]

Answer: खेल जीवन का महत्वपूर्ण अंग हैं। खेलों से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य मिलता है, बल्कि प्रतिस्पर्धा की सच्ची भावना भी विकसित होती है। खिलाड़ी हार-जीत को खेल भावना से स्वीकार करते हैं, प्रतिद्वंद्वी का सम्मान करते हैं और टीम भावना सीखते हैं। खेल हमें अनुशासन, सहयोग और धैर्य सिखाते हैं। सच्ची प्रतिस्पर्धा का अर्थ है दूसरों को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाना। आज के प्रतिस्पर्धी युग में यह भावना विद्यार्थियों के जीवन में सफलता और सामंजस्य दोनों लाती है। इसलिए विद्यालयों में खेलों को महत्व दिया जाना चाहिए।

Teacher's Note:
a) 'खेल भावना' और 'प्रतिस्पर्धा' दोनों शब्दों का प्रयोग निबंध में करें।
b) उदाहरण देकर विषय को व्यावहारिक बनाएँ।

OR

(ग) वरिष्ठ व्यक्तियों के प्रति हमारे कर्तव्य [5 Marks]

Answer: वरिष्ठ व्यक्ति समाज का अनुभव और ज्ञान का भंडार होते हैं। हमारा कर्तव्य है कि हम उनका सम्मान करें, उनकी बातें ध्यान से सुनें और उन्हें अकेलेपन का अनुभव न होने दें। बुढ़ापे में उन्हें शारीरिक और मानसिक सहारे की आवश्यकता होती है, इसलिए हमें उनकी सेवा करनी चाहिए। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई परिवार वृद्ध सदस्यों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं, जो गलत है। हमें उनके अनुभवों से सीखना चाहिए और उन्हें परिवार का महत्वपूर्ण हिस्सा मानना चाहिए। यही सच्ची संस्कृति और संस्कार की पहचान है।

Teacher's Note:
a) कर्तव्यों को सूचीबद्ध रूप में स्पष्ट लिखें - सम्मान, सेवा, समय देना।
b) सामाजिक मूल्यों से जोड़कर निष्कर्ष लिखें।

 

4. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए : [3+3 Marks]

(क) चित्रकला, संगीतकला या नृत्यकला की तरह कविता लेखन की कला सिखाई क्यों नहीं जा सकती ? स्पष्ट कीजिए । [3 Marks]

Answer:
1. कविता अनुभूतिजन्य नैसर्गिक अभिव्यक्ति है, इसमें बाह्य उपकरणों की आवश्यकता नहीं होती।
2. अन्य कलाओं की तरह इसमें रंग, कूची, कैनवास या वाद्ययंत्रों का सहारा नहीं लिया जाता।
3. देखने की नवीन दृष्टि तथा अनुभव को पहचानने-प्रस्तुत करने की कला प्रकृति प्रदत्त है, जिसे अभ्यास से केवल निखारा जा सकता है, सिखाया नहीं जा सकता।

Teacher's Note:
a) 'प्रकृति प्रदत्त प्रतिभा' शब्द उत्तर की मुख्य कुंजी है।
b) अन्य कलाओं से तुलना करना अंक दिलाता है।

(ख) नाटक के मंच-निर्देश हमेशा वर्तमान काल में ही क्यों लिखे जाते हैं ? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए । [3 Marks]

Answer:
1. दर्शक/प्रेक्षक नाटक देखते समय वर्तमान काल में ही उपस्थित रहता है।
2. उसे घटना से तुरंत अवगत कराना आवश्यक होता है, इसलिए भूतकाल या भविष्यकाल की घटनाओं को भी वर्तमान काल में मंचित किया जाता है।
3. उदाहरण - ऐतिहासिक या पौराणिक घटनाओं से जुड़ी कहानियों को नाटक में वर्तमान काल में प्रस्तुत किया जाता है।

Teacher's Note:
a) उदाहरण देना अनिवार्य है, बिना उदाहरण उत्तर अपूर्ण रहता है।
b) 'दर्शक की वर्तमान उपस्थिति' मुख्य बिंदु है।

(ग) कहानी में पात्रों के चरित्र-चित्रण का सबसे अधिक प्रभावशाली तरीका कौन सा है ? उदाहरण सहित लिखिए । [3 Marks]

Answer:
1. पात्रों के संवाद और उनके क्रियाकलाप द्वारा चरित्र-चित्रण सबसे प्रभावशाली तरीका है।
2. उदाहरण - 'कफ़न' कहानी में घीसू और माधव का संवाद उनके चरित्र को उजागर करता है।
3. सर्दी से ठिठुरते व्यक्ति को देखकर किसी पात्र का उसे कंबल देना या चाय पिलवाना उसकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।

Teacher's Note:
a) 'संवाद' और 'क्रियाकलाप' दोनों शब्द उत्तर में अवश्य लिखें।
b) कोई भी सुसंगत उदाहरण स्वीकार्य है।

 

5. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए : [5 Marks]

(क) पत्रकारिता की भाषा में मुखड़ा किसे कहते हैं ? इसका क्या महत्त्व है ? (शब्द सीमा - लगभग 20 शब्द) [1 Mark]

Answer: समाचार का सबसे पहला और महत्त्वपूर्ण हिस्सा मुखड़ा (इंट्रो) कहलाता है। इसका महत्त्व है कि यह कम शब्दों में घटना की आकर्षक जानकारी पाठक तक पहुँचाता है।

Teacher's Note:
a) 'इंट्रो' शब्द का उल्लेख करना अंक दिलाता है।
b) शब्द सीमा का पालन करें, अनावश्यक विस्तार न करें।

(ख) "जनसंचार के माध्यम आपस में प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक और सहयोगी हैं ।" सिद्ध कीजिए । (शब्द सीमा - लगभग 40 शब्द) [2 Marks]

Answer:
1. जनसंचार के विभिन्न माध्यम - प्रिंट, रेडियो, टेलीविज़न, इंटरनेट की अपनी-अपनी खूबियाँ और कमियाँ हैं।
2. सबका एक ही लक्ष्य है - लोगों को नवीनतम, अद्यतन और सटीक जानकारी शीघ्र उपलब्ध कराना, इसलिए ये प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि पूरक और सहयोगी हैं।

Teacher's Note:
a) प्रत्येक माध्यम का नाम लेना उत्तर को ठोस बनाता है।
b) 'पूरक' शब्द को सिद्ध करना ही मुख्य उद्देश्य है।

(ग) बीट किसे कहते हैं ? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए । (शब्द सीमा - लगभग 40 शब्द) [2 Marks]

Answer:
1. संवाददाताओं के बीच उनकी रुचि और ज्ञान को ध्यान में रखकर किए गए काम के बँटवारे को बीट कहते हैं।
2. उदाहरण - खेल क्षेत्र में रुचि व जानकारी रखने वाला संवाददाता अपने क्षेत्र की खेल-गतिविधियों की रिपोर्टिंग के लिए ज़िम्मेदार होता है।

Teacher's Note:
a) उदाहरण के बिना उत्तर अधूरा माना जाएगा।
b) किसी भी क्षेत्र (राजनीति, अपराध आदि) का उदाहरण स्वीकार्य है।

 

6. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए : [3+3 Marks]

(क) समाचार पत्र-पत्रिकाओं में विभिन्न विषयों और क्षेत्रों से संबंधित जानकारी को क्यों शामिल किया जाता है ? स्पष्ट कीजिए । [3 Marks]

Answer:
1. समाचार पत्र-पत्रिकाओं में संपूर्णता लाने के लिए विविध विषयों को शामिल किया जाता है।
2. इससे विविधता और व्यापक कलेवर प्राप्त होता है।
3. पाठकों की अलग-अलग रुचियों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न विषयों की निरंतर और पर्याप्त जानकारी देने के लिए यह आवश्यक है।

Teacher's Note:
a) 'पाठकों की रुचि' शब्द का उल्लेख अंक दिलाता है।
b) 'विविधता' और 'संपूर्णता' दोनों बिंदु लिखें।

(ख) दृश्य-श्रव्य माध्यमों की तुलना में मुद्रित माध्यम के पाठकों को कौन-कौन सी सुविधाएँ उपलब्ध हैं ? [3 Marks]

Answer:
1. मुद्रित माध्यम में स्थायित्व होता है, इसे समय और रुचि के अनुसार पढ़ा जा सकता है।
2. इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखकर संदर्भ की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
3. यह चिंतन-मनन और विश्लेषण करने की सुविधा भी देता है।

Teacher's Note:
a) 'स्थायित्व' मुख्य कुंजी-शब्द है।
b) दृश्य-श्रव्य माध्यमों से तुलना करके लिखें।

(ग) 'खोजी रिपोर्ट' और 'इन डेप्थ रिपोर्ट' के अंतर को स्पष्ट कीजिए । [3 Marks]

Answer:
1. खोजी रिपोर्ट मौलिक शोध और छानबीन द्वारा सार्वजनिक तौर पर अनुपलब्ध सूचनाओं व तथ्यों को प्रकाश में लाने वाली रिपोर्ट है, जैसे भ्रष्टाचार उजागर करने वाली खबर।
2. इन डेप्थ रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं की गहरी छानबीन कर किसी घटना के महत्त्वपूर्ण पहलुओं को प्रकाश में लाने वाली रिपोर्ट है।

Teacher's Note:
a) 'अनुपलब्ध' बनाम 'उपलब्ध' सूचना का अंतर स्पष्ट लिखें।
b) दोनों के लिए एक-एक उदाहरण देना बेहतर होता है।

 

खंड - ग

(पाठ्य पुस्तकों अंतरा, अंतराल पर आधारित)

 

7. काव्य खंड पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में लिखिए : [2+2 Marks]

(क) 'मैंने निज दुर्बल पद-बल, उससे हारी होड़ लगाई' 'देवसेना का गीत' से उद्धृत इस पंक्ति से आपको क्या प्रेरणा मिलती है ? [2 Marks]

Answer: यह प्रेरणा मिलती है कि शक्ति-सामर्थ्य और साधनों के सीमित होने पर भी हमें परिस्थितियों से हार नहीं मानना चाहिए और उनसे संघर्ष करते रहना चाहिए।

Teacher's Note:
a) 'हार न मानना' मुख्य भाव है, इसे स्पष्ट लिखें।
b) देवसेना के जीवन-संघर्ष का संदर्भ जोड़ें।

(ख) 'इसी तरह भरता और खाली होता है यह शहर' पंक्ति के संदर्भ में बनारस शहर के 'भरने' और 'खाली' होने से क्या अभिप्राय है ? [2 Marks]

Answer: भरने का अभिप्राय है रोज लोगों का मोक्ष प्राप्ति के लिए बनारस में आना और निवास करना; खाली होने का अभिप्राय है प्रतिदिन अंतहीन शवों को गंगा तट पर ले जाना, अर्थात् जीवन-मृत्यु का चक्र निरंतर चलता रहना।

Teacher's Note:
a) 'भरने' और 'खाली होने' दोनों का अलग-अलग अर्थ लिखना अनिवार्य है।
b) 'जीवन-मृत्यु का चक्र' पद उत्तर की मुख्य कुंजी है।

(ग) 'तोड़ो' कविता का कवि क्या तोड़ने की बात करता है और क्यों ? [2 Marks]

Answer: कवि समाज में व्याप्त रूढ़ियों, अंधविश्वासों तथा झूठे बंधनों को तोड़ने के साथ-साथ मन में व्याप्त ऊब और खीझ को भी तोड़ने की बात करता है, क्योंकि सृजन के लिए भीतरी (मन) और बाहरी (रूढ़ियों की) बाधाओं को तोड़ना आवश्यक है।

Teacher's Note:
a) 'भीतरी और बाहरी बाधाएँ' दोनों का उल्लेख करना अंक दिलाता है।
b) 'तोड़ो' शब्द के सकारात्मक (सृजनात्मक) अर्थ को स्पष्ट करें।

 

8. निम्नलिखित पठित काव्यांशों में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : [6 Marks]

(क) पूस जाड़ थरथर तन काँपा । सुरुज जड़ाइ लंक दिसि तापा ।।
बिरह बाढ़ि भा दारुन सीऊ । कँपि कँपि मरौं लेहि हरि जीऊ ।।
कंत कहाँ हौं लागौं हियरैं । पंथ अपार सूझ नहिं नियरैं ।।
सौर सुपेती आवै जूड़ी । जानहुँ सेज हिवंचल बूढ़ी ।।

Answer:
1. संदर्भ - प्रस्तुत पद्यांश मलिक मुहम्मद जायसी द्वारा रचित 'पद्मावत' के 'बारहमासा' खंड से लिया गया है।
2. प्रसंग - इस पद्य में नागमती के विरह का वर्णन है, जो पूस (पौष) महीने की सर्दी में अपने पति से बिछड़ी हुई तड़प रही है।
3. व्याख्या - पूस की सर्दी में नागमती का शरीर थरथर काँप रहा है, फिर भी उसे सूर्य लंका दिशा में तपता प्रतीत होता है, जो विरह की अग्नि का प्रतीक है। विरह की पीड़ा इतनी भयंकर है कि वह काँपते-काँपते मरणासन्न हो जाती है। वह सोचती है कि प्रियतम कहाँ है, मार्ग अपार और अगम है, दिशा नहीं सूझती। शीत भरी रात में सेज उसे हिमालय की तरह ठंडी और जड़वत् प्रतीत होती है।
4. विशेष - बारहमासा शैली में महीनों के माध्यम से विरहिणी की वेदना का सजीव चित्रण किया गया है।

Teacher's Note:
a) संदर्भ में कवि और कविता का नाम अवश्य लिखें, अंक इसी पर निर्धारित है।
b) 'विरह और सर्दी का सामंजस्य' व्याख्या का मुख्य केंद्र है।

OR

(ख) यह मधु है - स्वयं काल की मौना का युग-संचय,
यह गोरस - जीवन-कामधेनु का अमृत-पूत पय,
यह अंकुर - फोड़ धरा को रवि को तकता निर्भय,
यह प्रकृत, स्वयंभू, ब्रह्म, अयुतः इसको भी शक्ति को दे दो ।
यह दीप अकेला, स्नेह भरा
है गर्व भरा मदमाता, पर इसको भी पंक्ति को दे दो । [6 Marks]

Answer:
1. संदर्भ - प्रस्तुत पद्यांश सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' द्वारा रचित कविता 'यह दीप अकेला' से लिया गया है।
2. प्रसंग - इस पद्यांश में कवि व्यष्टि के महत्त्व को प्रकृति के विभिन्न उपमानों के माध्यम से समष्टि के सम्मुख प्रस्तुत करता है और उसे भी सम्मान देने का आग्रह करता है।
3. व्याख्या - यह मधु है जो काल की मौन साधना का युग-संचय है; यह गोरस है जो जीवनरूपी कामधेनु का अमृत-सा पवित्र पय है; यह अंकुर है जो धरती को फोड़कर निर्भय होकर सूर्य की ओर ताकता है। कवि कहता है कि यह प्रकृति स्वयं है, स्वयंभू और ब्रह्म के समान अतुलनीय है, इसे भी शक्ति दी जाए। यह दीप अकेला भले गर्व और मद से भरा प्रतीत हो, परंतु इसे भी समूह में स्थान (पंक्ति) दिया जाए।
4. विशेष - व्यष्टि और समष्टि के संबंधों का प्रतीकात्मक व दार्शनिक चित्रण हुआ है।

Teacher's Note:
a) 'दीप' का प्रतीकार्थ (व्यक्ति/व्यष्टि) स्पष्ट करना आवश्यक है।
b) प्रत्येक उपमान (मधु, गोरस, अंकुर) का पृथक अर्थ बताना बेहतर अंक दिलाता है।

 

9. निम्नलिखित पठित काव्यांश को पढ़कर प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कर लिखिए : [5 Marks]

पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े । नीरज नयन नेह जल बाढ़े ।।
कहब मोर मुनिनाथ निबाहा । एहि तें अधिक कहौं मैं काहा ।।
मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ । अपराधिहु पर कोह न काऊ ।।
मो पर कृपा सनेहु बिसेखी । खेलत खुनिस न कबहूँ देखी ।।
सिसुपन तें परिहरेउँ न संगू । कबहुँ न कीन्ह मोर मन भंगू ।।
मैं प्रभु कृपा रीति जियँ जोही । हारेहूँ खेल जितावहिं मोही ।।
महुँ सनेह सकोच बस सनमुख कही न बैन ।
दरसन तृपित न आजु लगि पेम पिआसे नैन ।।

 

(i) 'कबहुँ न कीन्ह मोर मन भंगू' पंक्ति के माध्यम से राम के प्रति भरत के किस विश्वास का परिचय मिलता है ? [1 Mark]
(I) राम उनके आग्रह पर अयोध्या लौट चलेंगे ।
(II) राम भरत से बहुत प्रेम करते हैं ।
(III) राम उनका मन नहीं तोड़ेंगे ।
(IV) राम उन्हें क्षमा कर देंगे ।
विकल्प :
(A) केवल (I)
(B) केवल (III)
(C) (I) और (III) दोनों
(D) (II) और (IV) दोनों

Answer: (C) (I) और (III) दोनों

Teacher's Note:
a) पंक्ति में 'मन भंग न करना' और 'लौट आने' दोनों भाव अंतर्निहित हैं।
b) संयुक्त विकल्पों वाले प्रश्न में दोनों कथनों की पुष्टि पाठ से करें।

 

(ii) राम की किस प्रकृति का वर्णन यहाँ किया गया है ? [1 Mark]
(A) कृपापूर्ण
(B) क्षमापूर्ण
(C) दयापूर्ण
(D) प्रेमपूर्ण

Answer: (A) कृपापूर्ण

Teacher's Note:
a) 'कृपा सनेहु बिसेखी' पंक्ति सीधे उत्तर की पुष्टि करती है।
b) 'क्षमा' और 'कृपा' में अंतर समझें, यहाँ कृपा प्रधान भाव है।

 

(iii) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उत्तर के लिए सही विकल्प का चयन कीजिए :
कथन : भरत ने राम के सम्मुख कभी मुँह नहीं खोला ।
कारण : शिष्टाचार की परंपरा रही है कि बड़ों के सामने विनम्रता का व्यवहार किया जाता है । [1 Mark]

(A) कथन गलत है किंतु कारण सही है ।
(B) कथन और कारण दोनों गलत हैं ।
(C) कथन सही है किंतु कारण, कथन की सही व्याख्या नहीं है ।
(D) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या है ।

Answer: (D) कथन और कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या है ।

Teacher's Note:
a) कथन-कारण प्रश्नों में दोनों को अलग-अलग जाँचना चाहिए।
b) यहाँ शिष्टाचार-परंपरा कथन की तर्कसंगत व्याख्या करती है।

 

(iv) भरत ने राम के स्वभाव की किस विशेषता का उल्लेख किया है ? [1 Mark]
(A) दूसरों पर दया करने की
(B) शत्रु को क्षमा करने की
(C) अपराधी पर भी क्रोध न करने की
(D) शरणागत पर कृपा करने की

Answer: (C) अपराधी पर भी क्रोध न करने की

Teacher's Note:
a) 'अपराधिहु पर कोह न काऊ' पंक्ति सीधा प्रमाण है।
b) विकल्पों में समान दिखने वाले शब्दों को ध्यान से पढ़ें।

 

(v) 'पुलकि सरीर सभाँ भए ठाढ़े' - पंक्ति के माध्यम से किसकी मनोदशा का वर्णन किया गया है ? [1 Mark]
(A) भरत
(B) राम
(C) लक्ष्मण
(D) कैकेयी

Answer: (A) भरत

Teacher's Note:
a) पूरे पद्यांश का वक्ता भरत है, यह प्रसंग से स्पष्ट है।
b) 'पुलकित शरीर' और 'नेत्रों में नेह जल' भावुकता के प्रतीक हैं।

 

10. निम्नलिखित पठित गद्यांशों में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : [6 Marks]

(क) हरगोबिन को अचरज हुआ - तो आज भी किसी को संवदिया की ज़रूरत पड़ सकती है । इस ज़माने में जबकि गाँव-गाँव में डाकघर खुल गए हैं, संवदिया के मार्फ़त संवाद क्यों भेजेगा कोई ? आज तो आदमी घर बैठे ही लंका तक खबर भेज सकता है और वहाँ का कुशल संवाद माँगा सकता है । फिर उसकी बुलाहट क्यों हुई ?
हरगोबिन बड़ी हवेली की टूटी ड्योढ़ी पारकर अंदर गया । सदा की भाँति उसने वातावरण को सूँघकर संवाद का अंदाज़ लगाया ।....निश्चय ही कोई गुप्त समाचार ले जाना है । चाँद-सूरज को भी नहीं मालूम हो । परेवा-पंछी तक न जाने ।
"पाँव लागी, बड़ी बहुरिया ।"
बड़ी हवेली की बड़ी बहुरिया ने हरगोबिन को पीढ़ी दी और आँख के इशारे से कुछ देर चुपचाप बैठने को कहा । बड़ी हवेली अब नाममात्र को ही बड़ी हवेली है । जहाँ दिनरात नौकर-नौकरानियों और जन-मज़दूरों की भीड़ लगी रहती थी, वहाँ आज हवेली की बड़ी बहुरिया अपने हाथ से सूपे में अनाज लेकर फटक रही है ।

Answer:
1. संदर्भ - प्रस्तुत गद्यांश फणीश्वरनाथ 'रेणु' द्वारा रचित कहानी 'संवदिया' से लिया गया है।
2. प्रसंग - इस अंश में हरगोबिन नामक संवदिया बड़ी हवेली में संदेश देने जाता है और वहाँ की बदली हुई स्थिति देखकर आश्चर्यचकित होता है।
3. व्याख्या - हरगोबिन को आश्चर्य होता है कि आधुनिक युग में जब गाँव-गाँव में डाकघर खुल गए हैं, तो संवदिया की आवश्यकता क्यों पड़ी। वह टूटी ड्योढ़ी पारकर हवेली के अंदर जाता है और वातावरण सूँघकर ही अनुमान लगा लेता है कि कोई गुप्त समाचार ले जाना है। बड़ी बहुरिया उसे पीढ़ी देकर चुपचाप बैठने का संकेत करती है। हवेली अब केवल नाममात्र की बड़ी हवेली रह गई है, जहाँ पहले नौकर-मज़दूरों की भीड़ रहती थी, वहाँ आज बड़ी बहुरिया स्वयं अनाज फटक रही है।
4. विशेष - सामंती परिवारों के पतन और बदलते सामाजिक-आर्थिक यथार्थ का सजीव चित्रण हुआ है।

Teacher's Note:
a) संदर्भ में लेखक और कहानी का नाम अवश्य लिखें।
b) 'हवेली का पतन' व्याख्या का केंद्रीय भाव है।

OR

(ख) कहीं कहीं अज्ञात नाम-गोत्र झाड़-झंखाड़ और बेहया-से पेड़ खड़े अवश्य दिख जाते हैं पर और कोई हरियाली नहीं । दूब तक सूख गई है । काली-काली चट्टानें और बीच-बीच में शुष्कता की अंतर्निरुद्ध सत्ता का इज़हार करने वाली रक्ताभ रेती ! रस कहाँ है ? ये जो ठिगने से लेकिन शानदार दरख्त गरमी की भयंकर मार खा-खाकर और भूख-प्यास की निरंतर चोट सह-सहकर भी जी रहे हैं, इन्हें क्या कहूँ ? सिर्फ जी ही नहीं रहे हैं, हँस भी रहे हैं । बेहया हैं क्या ? या मस्तमौला हैं ? कभी-कभी जो लोग ऊपर से बेहया दिखते हैं, उनकी जड़ें काफ़ी गहरी, पैठी रहती हैं । ये भी पाषाण की छाती फाड़कर न जाने किस अतल गहवर से अपना भोग्य खींच लाते हैं । [6 Marks]

Answer:
1. संदर्भ - प्रस्तुत गद्यांश हजारीप्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित निबंध 'कुटज' से लिया गया है।
2. प्रसंग - इस अंश में लेखक ने पहाड़ी क्षेत्र की सूखी बंजर भूमि तथा वहाँ किसी प्रकार जीवित बचे वृक्षों के संघर्ष का वर्णन किया है।
3. व्याख्या - कहीं-कहीं अज्ञात नाम-गोत्र वाले झाड़-झंखाड़ और बेहया जैसे पेड़ दिखते हैं, परंतु अन्य कोई हरियाली नहीं है। काली-काली चट्टानें और रक्ताभ रेती शुष्कता को दर्शाती हैं। ये ठिगने लेकिन शानदार दरख़्त भयंकर गर्मी और भूख-प्यास सहते हुए भी न केवल जी रहे हैं, बल्कि हँस भी रहे हैं। जो ऊपर से बेहया (निर्लज्ज) दिखते हैं, उनकी जड़ें भीतर गहरी होती हैं और वे पाषाण की छाती फाड़कर भी अपना पोषण खींच लाते हैं।
4. विशेष - प्रतिकूल परिस्थितियों में भी संघर्ष और जीवटता का प्रतीक कुटज वृक्ष का मानवीकरण किया गया है।

Teacher's Note:
a) 'बेहया या मस्तमौला' शब्दों के प्रतीकार्थ को समझाना अंक दिलाता है।
b) व्याख्या में लेखक की दार्शनिक दृष्टि को अवश्य रेखांकित करें।

 

11. निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर दिए गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर के लिए उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए : [5 Marks]

मेरे पिताजी फ़ारसी के अच्छे ज्ञाता और पुरानी हिंदी कविता के बड़े प्रेमी थे । फ़ारसी कवियों की उक्तियों को हिंदी कवियों की उक्तियों के साथ मिलाने में उन्हें बड़ा आनंद आता था । वे रात को प्रायः रामचरितमानस और रामचंद्रिका, घर के सब लोगों को एकत्र करके बड़े चित्ताकर्षक ढंग से पढ़ा करते थे । आधुनिक हिंदी-साहित्य में भारतेंदु जी के नाटक उन्हें बहुत प्रिय थे । उन्हें भी वे कभी-कभी सुनाया करते थे । जब उनकी बदली हमीरपुर ज़िले की राठ तहसील से मिर्ज़ापुर हुई तब मेरी अवस्था आठ वर्ष की थी । उसके पहले ही से भारतेंदु के संबंध में एक अपूर्व मधुर भावना मेरे मन में जगी रहती थी । 'सत्य हरिश्चंद्र' नाटक के नायक राजा हरिश्चंद्र और कवि हरिश्चंद्र में मेरी बाल-बुद्धि कोई भेद नहीं कर पाती थी ।

 

(i) लेखक के पिता की किसमें रुचि थी ? [1 Mark]
(A) फ़ारसी और हिंदी भाषा मिलाने में
(B) फ़ारसी और हिंदी गद्य मिलाने में
(C) नाटक और कविता मिलाकर पढ़ने में
(D) हिंदी-फ़ारसी भाषा की उक्तियाँ मिलाने में

Answer: (D) हिंदी-फ़ारसी भाषा की उक्तियाँ मिलाने में

Teacher's Note:
a) 'उक्तियों को मिलाने' शब्द उत्तर की सीधी पुष्टि करता है।
b) 'भाषा' और 'गद्य' के अंतर पर ध्यान दें।

 

(ii) गद्यांश में रामचरितमानस और रामचन्द्रिका का उल्लेख क्यों किया गया है ? [1 Mark]
(A) हिंदी साहित्य के विराट रूप का परिचय देने के लिए ।
(B) घर के धार्मिक वातावरण का उल्लेख करने के लिए ।
(C) लेखक के पिता की भक्ति भावना का उल्लेख करने के लिए ।
(D) घर के साहित्यिक परिवेश से परिपूर्ण वातावरण का उल्लेख करने के लिए ।

Answer: (D) घर के साहित्यिक परिवेश से परिपूर्ण वातावरण का उल्लेख करने के लिए ।

Teacher's Note:
a) यह उल्लेख धार्मिक नहीं, साहित्यिक परिवेश दर्शाने हेतु है।
b) संदर्भ में 'बड़े चित्ताकर्षक ढंग से पढ़ना' पंक्ति ध्यान दें।

 

(iii) लेखक के मन में भारतेंदु के संबंध में मधुर भावना जागने का कारण था - [1 Mark]
(A) पिता द्वारा चित्ताकर्षक ढंग से उनके नाटकों का सुनाया जाना ।
(B) हिंदी साहित्य जगत के प्रसिद्ध कवि और नाटककार होना ।
(C) बचपन में सत्य हरिश्चंद्र नाटकों का मंचन करना ।
(D) बचपन में सत्य हरिश्चंद्र के नाटकों का मंचन देखना ।

Answer: (A) पिता द्वारा चित्ताकर्षक ढंग से उनके नाटकों का सुनाया जाना ।

Teacher's Note:
a) गद्यांश में स्पष्ट रूप से पिता द्वारा सुनाए जाने का उल्लेख है।
b) मंचन देखने या करने का कहीं उल्लेख नहीं है, ऐसे विकल्पों को अस्वीकार करें।

 

(iv) गद्यांश में प्रयुक्त 'अवस्था' शब्द का अर्थ है - [1 Mark]
(A) हालत
(B) दशा
(C) आयु
(D) स्थिति

Answer: (C) आयु

Teacher's Note:
a) 'मेरी अवस्था आठ वर्ष की थी' वाक्य में 'अवस्था' का अर्थ उम्र है।
b) प्रसंग के अनुसार शब्दार्थ चुनना ज़रूरी है, शब्दकोशीय अर्थ नहीं।

 

(v) निम्नलिखित कथन तथा कारण को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उचित विकल्प का चयन कर लिखिए :
कथन : बचपन में लेखक राजा हरिश्चंद्र और कवि हरिश्चंद्र में कोई अंतर नहीं कर पाता था ।
कारण : लेखक की बाल-बुद्धि नाम की समानता के कारण दोनों को एक ही समझती थी । [1 Mark]

(A) कथन तथा कारण दोनों गलत हैं ।
(B) कारण सही है लेकिन कथन गलत है ।
(C) कथन सही है लेकिन कारण गलत है ।
(D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है ।

Answer: (D) कथन तथा कारण दोनों सही हैं तथा कारण, कथन की सही व्याख्या करता है ।

Teacher's Note:
a) 'नाम की समानता' कथन की तर्कसंगत व्याख्या है।
b) गद्यांश की अंतिम पंक्ति सीधे इस उत्तर की पुष्टि करती है।

 

12. गद्य खंड पर आधारित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 शब्दों में दीजिए : [2+2 Marks]

(क) 'हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति शुक्ल जी का रुझान बाल्यकाल से था ।' 'प्रेमघन की छाया स्मृति' पाठ के आधार पर पुष्टि कीजिए । [2 Marks]

Answer: पिता द्वारा 'रामचरितमानस' और 'रामचंद्रिका' के वाचन को ध्यान से सुनना, भारतेंदु के नाटकों का अच्छा लगना, घर आने वाली पत्र-पत्रिकाओं को ध्यान से पढ़ना और पुस्तकालय जाना, तथा डेढ़ मील का सफर तय कर प्रेमघन जी की झलक देखने जाना - यह सिद्ध करता है कि शुक्ल जी का रुझान बचपन से ही था।

Teacher's Note:
a) कम से कम दो ठोस उदाहरण देना पर्याप्त है।
b) पाठ के नाम के साथ घटनाओं को जोड़ें।

(ख) हरगोबिन का काम ही था संवाद पहुँचाना, फिर भी उसके कदम बड़ी बहुरिया के मैके की ओर क्यों नहीं बढ़ रहे थे ? 'संवदिया' पाठ के संदर्भ में लिखिए । [2 Marks]

Answer: हरगोबिन को अपने कर्तव्य से अधिक बड़ी बहुरिया और अपने गाँव की मर्यादा की चिंता थी। बड़ी बहुरिया के दुखद संवाद का एक-एक शब्द उसके मन को पीड़ित कर रहा था, इसलिए वह मैके की ओर बढ़ने में हिचकिचा रहा था।

Teacher's Note:
a) 'मर्यादा की चिंता' उत्तर का मुख्य बिंदु है।
b) हरगोबिन की मानवीय संवेदनशीलता को उजागर करें।

(ग) 'जहाँ कोई वापसी नहीं' पाठ में लेखक ने धान के खेतों में काम करने वाली औरतों की तुलना किनके साथ की है ? स्पष्ट करते हुए दोनों के बीच का अंतर लिखिए । [2 Marks]

Answer: लेखक ने इन औरतों की तुलना कान्हा के वन्य स्थल में विचरण करने वाली युवा हिरणियों से की है। अंतर यह है कि आहट पाते ही हिरणियाँ भाग जाती हैं, परंतु ये औरतें अजनबियों को देखकर भागती नहीं बल्कि मुस्कुराकर अपने काम में डूब जाती हैं।

Teacher's Note:
a) तुलना और अंतर दोनों बताना अनिवार्य है, केवल तुलना पर्याप्त नहीं।
b) 'आश्चर्यचकित होकर देखना' मुख्य अंतर-बिंदु है।

 

13. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 100 शब्दों में लिखिए : [5+5 Marks]

(क) 'अब भैरों के घर न जाऊँगी, अलग रहूँगी और मेहनत मजूरी करके जीवन का निर्वाह करूँगी' - कथन के संदर्भ में सुभागी के व्यक्तित्व की विशेषताएँ लिखिए । [5 Marks]

Answer:
1. सुभागी स्वाभिमानी है, वह अपमान सहकर जीना स्वीकार नहीं करती।
2. वह आत्मविश्वासी है, स्वयं मेहनत-मजूरी करके जीवन-निर्वाह का संकल्प लेती है।
3. वह दृढ़-प्रतिज्ञ है, एक बार निर्णय लेकर उस पर टिकी रहती है।
4. वह निडर और साहसी है, समाज की परवाह न करते हुए अलग रहने का फैसला करती है।
5. वह सत्य की पक्षधर है, गलत व्यवहार का विरोध करने से नहीं डरती।

Teacher's Note:
a) कम से कम चार-पाँच गुणों का उल्लेख करें, प्रत्येक को अलग पंक्ति में लिखें।
b) 'स्वाभिमान' और 'आत्मनिर्भरता' दोनों शब्द उत्तर की कुंजी हैं।

(ख) 'डग-डग रोटी पग-पग नीर' वाले मालवा की वर्तमान स्थिति 'अपना मालवा खाऊ-उजाड़ू सभ्यता में' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए । स्थिति के कारणों को स्पष्ट करते हुए यह भी लिखिए कि इसे कैसे सुधारा जा सकता है ? [5 Marks]

Answer:
1. वर्तमान स्थिति - मालवा में अतिवृष्टि या अनावृष्टि हो रही है, नदी-नाले सूख गए हैं और अत्यधिक प्रदूषित हो गए हैं, जिससे पैदावार में कमी आई है।
2. कारण - तेजी से बढ़ता औद्योगीकरण एक बड़ा कारण है।
3. भूजल का अत्यधिक दोहन और प्राकृतिक सम्पदा को क्षति पहुँचाना भी कारण हैं।
4. पर्यावरणीय असंतुलन के कारण यह समस्या और गंभीर होती जा रही है।
5. सुधार हेतु सुझाव - जल के परंपरागत संसाधनों का आधुनिकीकरण व संरक्षण करना चाहिए, मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना चाहिए तथा प्रकृति से प्रेम व सम्मान रखना चाहिए।

Teacher's Note:
a) उत्तर को स्थिति, कारण और सुधार - तीन भागों में बाँटकर लिखें, यही अंक-विभाजन है।
b) 'डग-डग रोटी पग-पग नीर' की तुलना वर्तमान संकट से करें।

(ग) 'बिस्कोहर की माटी' पाठ में वर्णित ग्रामीण जीवन की झाँकी प्रस्तुत कीजिए । [5 Marks]

Answer:
1. गाँवों का जीवन शहरों की तरह सुविधायुक्त न होकर प्रकृति पर अधिक निर्भर होता है।
2. गाँव में प्रकृति के कोमल व कठोर दोनों रूप देखे जाते हैं - एक ओर मनोहारी चाँदनी रात, रंग-बिरंगे फूल और वर्षा का सौंदर्य।
3. दूसरी ओर गाँव में बाढ़, सूखा, कीड़े-मकोड़े और साँप-बिच्छू का डर भी रहता है।
4. चिकित्सा के लिए भी लोग प्रकृति पर ही निर्भर रहते हैं।
5. गाँव के लोगों के बीच पारस्परिक लगाव और आत्मीयता होती है, जो जीवन को सहज बनाती है।

Teacher's Note:
a) प्रकृति के दोनों रूपों (सुखद व कठोर) का उल्लेख करना अनिवार्य है।
b) 'पारस्परिक लगाव' ग्रामीण जीवन की विशेष पहचान है, इसे अंत में जोड़ें।

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