NCERT Solutions for Class 9 Science: Chapter 08 एक यात्रा परमाणु के भीतर
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Practice Class 9 Science Solutions: Chapter 08 एक यात्रा परमाणु के भीतर
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Question 1: अरनेस्ट रदरफोर्ड के स्वर्ण-पर्णिका प्रयोग के संदर्भ में सही विकल्पों का चयन कीजिए और सही एवं गलत विकल्पों का कारण समझाइए।
(i) इस प्रयोग ने स्पष्ट रूप से नाभिक में न्यूट्रॉनों की उपस्थिति को दर्शाया।
(ii) इसके परिणामों ने प्लम पुडिंग मॉडल को गलत सिद्ध कर दिया और परमाणु के केंद्र में नाभिक होने की अवधारणा को जन्म दिया।
(iii) कुछ अल्फा कणों का अधिक विक्षेपण यह दर्शाता है कि परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान और धन आवेश एक सूक्ष्म केंद्र में संकेंद्रित है।
(iv) जिस प्रकार अल्फा कण विक्षेपित हुए, उससे यह ज्ञात हुआ कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर गति करते हैं।
Answer:
सही विकल्प – (ii) और (iii)
(i) गलत है।
कारण: स्वर्ण-पर्णिका प्रयोग से न्यूट्रॉनों की उपस्थिति सिद्ध नहीं हुई थी। न्यूट्रॉन की खोज बाद में जेम्स चैडविक ने की थी।
(ii) सही है।
कारण: टॉमसन के मॉडल के अनुसार धन आवेश पूरे परमाणु में समान रूप से फैला होना चाहिए था। परंतु कुछ अल्फा कणों का बहुत अधिक विक्षेपण और कुछ का वापस लौटना इस मॉडल से समझाया नहीं जा सका। इससे यह निष्कर्ष निकला कि परमाणु के केंद्र में एक छोटा, सघन और धनावेशित नाभिक होता है।
(iii) सही है।
कारण: कुछ अल्फा कण बड़े कोणों से विक्षेपित हुए या लौट आए। इससे स्पष्ट हुआ कि परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान और संपूर्ण धन आवेश एक अत्यंत छोटे क्षेत्र, अर्थात नाभिक में संकेंद्रित है।
(iv) गलत है।
कारण: अल्फा कणों के विक्षेपण से नाभिक की उपस्थिति और परमाणु के अधिकांश भाग के रिक्त होने का निष्कर्ष निकला। इलेक्ट्रॉनों का नाभिक के चारों ओर गति करना रदरफोर्ड द्वारा प्रस्तुत परमाणु मॉडल का भाग था, परंतु यह निष्कर्ष सीधे अल्फा कणों के विक्षेपण से सिद्ध नहीं हुआ था।
मुख्य बिंदु:
• रदरफोर्ड के प्रयोग ने परमाणु के नाभिक की खोज की。
• टॉमसन का मॉडल इस प्रयोग के परिणामों को समझाने में असफल रहा。
• परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है।
आम गलतियाँ:
• छात्रों को लगता है कि इस प्रयोग से न्यूट्रॉन की खोज हुई थी।
• इलेक्ट्रॉन की गति के विक्षेपण से संबंध को गलत समझना।
• प्लम पुडिंग मॉडल और रदरफोर्ड मॉडल के निष्कर्षों में भ्रमित होना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक कथन का कारण वैज्ञानिक तर्कों के साथ दें।
b) सही विकल्पों को स्पष्ट रूप से पहले अलग लिखें।
c) टॉमसन और रदरफोर्ड मॉडल के अंतर को याद रखें।
Question 2: बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही अथवा गलत हैं? प्रत्येक कथन के लिए एक कारण दीजिए।
(i) इलेक्ट्रॉन निश्चित कक्षाओं में गति करते हुए अपनी ऊर्जा का ह्रास करते हैं और धीरे-धीरे नाभिक में गिर जाते हैं।
(ii) इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कहीं भी विद्यमान हो सकते हैं और उनकी ऊर्जा निश्चित नहीं होती।
(iii) इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित ऊर्जा की कक्षाओं में ऊर्जा ह्रास किए बिना चक्कर लगाते हैं।
(iv) नाभिक के चारों ओर गति करते हुए इलेक्ट्रॉन ऊर्जा स्तरों के मध्य भी पाए जा सकते हैं।
Answer:
(i) गलत है।
कारण: बोर के अनुसार इलेक्ट्रॉन निश्चित स्थायी कक्षाओं में गति करते हुए ऊर्जा का ह्रास नहीं करते और नाभिक में नहीं गिरते।
(ii) गलत है।
कारण: इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर किसी भी स्थान पर नहीं पाए जा सकते। वे केवल निश्चित ऊर्जा वाली अनुमत कक्षाओं में ही उपस्थित होते हैं।
(iii) सही है।
कारण: बोर मॉडल के अनुसार इलेक्ट्रॉन निश्चित ऊर्जा वाली स्थायी कक्षाओं में बिना ऊर्जा खोए नाभिक के चारों ओर गति करते हैं।
(iv) गलत है।
कारण: इलेक्ट्रॉन दो ऊर्जा स्तरों के मध्य उपस्थित नहीं रह सकते। वे केवल निश्चित कक्षाओं में रह सकते हैं और ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन करके एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जा सकते हैं।
मुख्य बिंदु:
• बोर मॉडल ने परमाणु के स्थायित्व को समझाया।
• इलेक्ट्रॉन निश्चित ऊर्जा वाली कक्षाओं (कोशों) में चक्कर लगाते हैं।
• कक्षाओं को K, L, M, N... से दर्शाया जाता है।
आम गलतियाँ:
• यह मानना कि इलेक्ट्रॉन ऊर्जा खोकर नाभिक में गिर जाते हैं (जो रदरफोर्ड की कमी थी)।
• ऊर्जा स्तरों के बीच इलेक्ट्रॉनों की उपस्थिति मान लेना।
Exam Tips:
a) बोर के परमाणु मॉडल की मुख्य अभिकल्पनाओं को भली-भांति याद रखें।
b) प्रत्येक कथन के लिए 'सही' या 'गलत' लिखकर स्पष्ट कारण दें।
c) ऊर्जा उत्सर्जन और अवशोषण की शर्त को समझें।
Question 3: तीन परमाणु कणों X, Y और Z के नाभिकों का संघटन नीचे दिया गया है –
[तालिका: प्रोटॉनों की संख्या - X: 18, Y: 17, Z: 17 | न्यूट्रॉनों की संख्या - X: 19, Y: 18, Z: 20]
निम्नलिखित के मध्य संबंध स्पष्ट कीजिए – (i) Y एवं Z (ii) Z एवं X
Answer:
(i) Y एवं Z के मध्य संबंध:
Y और Z दोनों में प्रोटॉन की संख्या 17 है, परंतु न्यूट्रॉनों की संख्या अलग-अलग है।
Y की द्रव्यमान संख्या = \( 17 + 18 = 35 \)
Z की द्रव्यमान संख्या = \( 17 + 20 = 37 \)
अतः Y और Z एक ही तत्व के समस्थानिक हैं।
(ii) Z एवं X के मध्य संबंध:
Z की द्रव्यमान संख्या = \( 17 + 20 = 37 \)
X की द्रव्यमान संख्या = \( 18 + 19 = 37 \)
दोनों की द्रव्यमान संख्या समान है, परंतु प्रोटॉन की संख्या भिन्न है।
अतः Z और X समभारिक हैं।
मुख्य बिंदु:
• समस्थानिकों में परमाणु क्रमांक (प्रोटॉन) समान होता है पर द्रव्यमान संख्या भिन्न होती है।
• समभारिकों में द्रव्यमान संख्या समान होती है पर परमाणु क्रमांक भिन्न होता है।
• द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या।
आम गलतियाँ:
• समस्थानिक और समभारिक की परिभाषाओं में भ्रमित होना।
• द्रव्यमान संख्या की गणना में गलती करना।
Exam Tips:
a) समस्थानिक और समभारिक के अंतर को उदाहरण सहित समझाइए।
b) गणना के चरणों को साफ-साफ लिखें।
c) अंतिम निष्कर्ष स्पष्ट रूप से दें।
Question 4: रदरफोर्ड ने स्वर्ण-पर्णिका प्रयोग में ऐसे कुछ अल्फा कण, जो पुनः लौट आए थे अथवा बड़े कोणों पर विक्षेपित हो गए थे, के आधार पर परमाणु के धनावेशित भाग की अवस्थिति और अभिलक्षणों के विषय में क्या निष्कर्ष निकाला?
Answer:
रदरफोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का धनावेश पूरे परमाणु में समान रूप से वितरित नहीं होता। परमाणु का संपूर्ण धन आवेश और अधिकांश द्रव्यमान उसके केंद्र में स्थित एक अत्यंत छोटे, सघन भाग में संकेंद्रित होता है। इस भाग को नाभिक कहा गया।
कुछ अल्फा कण बड़े कोणों से विक्षेपित हुए क्योंकि वे धनावेशित नाभिक के बहुत निकट पहुँचे और प्रबल प्रतिकर्षण बल का अनुभव किया।
बहुत कम अल्फा कण वापस लौट आए, जिससे यह भी स्पष्ट हुआ कि नाभिक अत्यंत छोटा, परंतु बहुत सघन और कठोर होता है।
अधिकांश अल्फा कण बिना विक्षेपित हुए निकल गए, इसलिए रदरफोर्ड ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है।
मुख्य बिंदु:
• परमाणु के केंद्र में धनावेशित नाभिक होता है।
• परमाणु का अधिकांश भाग खाली होता है।
• नाभिक का आकार परमाणु के आकार की तुलना में अत्यंत छोटा होता है।
आम गलतियाँ:
• यह मान लेना कि धनावेश पूरे परमाणु में फैला रहता है।
• नाभिक के आकार और कठोरता को सही से स्पष्ट न करना।
Exam Tips:
a) उत्तर को बिंदुओं के रूप में लिखें ताकि जाँचने वाले को आसानी हो।
b) मुख्य शब्दावली जैसे 'प्रतिकर्षण बल', 'सघन' और 'रिक्त स्थान' का प्रयोग अवश्य करें।
c) प्रयोग के तीनों मुख्य प्रेक्षणों और उनके निष्कर्षों को स्पष्ट करें।
Question 5: निम्नलिखित कथनों की व्याख्या कीजिए और इन्हें सही कालक्रम में व्यवस्थित कीजिए जिससे यह ज्ञात हो सके कि समय के साथ परमाणु मॉडल कैसे विकसित हुए हैं।
(i) बोर के मॉडल ने प्रस्तावित किया कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित कक्षाओं में परिभ्रमण करते हैं और प्रत्येक कक्षा की एक निश्चित ऊर्जा होती है। (ii) टॉमसन के मॉडल ने परमाणु को एक ‘प्लम पुडिंग’ के रूप में दर्शाया है जिसमें इलेक्ट्रॉन धनावेश के एक गोले में धँसे होते हैं। (iii) रदरफोर्ड के मॉडल ने प्रस्तावित किया कि परमाणुओं में एक सघन केंद्रीय नाभिक होता है। (iv) डाल्टन के मॉडल ने परमाणुओं को अविभाज्य कणों के रूप में वर्णित किया।
Answer:
सही कालक्रम:
(iv) डाल्टन का मॉडल
(ii) टॉमसन का मॉडल
(iii) रदरफोर्ड का मॉडल
(i) बोर का मॉडल
व्याख्या:
• डाल्टन ने परमाणु को पदार्थ का सबसे छोटा, अविभाज्य कण माना।
• टॉमसन ने इलेक्ट्रॉन की खोज के बाद बताया कि परमाणु धनावेशित गोला है, जिसमें ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन धँसे रहते हैं।
• रदरफोर्ड ने स्वर्ण-पर्णिका प्रयोग के आधार पर बताया कि परमाणु के केंद्र में एक छोटा, सघन तथा धनावेशित नाभिक होता है और परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है।
• बोर ने बताया कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित ऊर्जा वाली कक्षाओं में परिभ्रमण करते हैं तथा इन कक्षाओं में रहते हुए ऊर्जा का उत्सर्जन नहीं करते।
मुख्य बिंदु:
• परमाणु मॉडलों का विकास कालमानुसार हुआ है।
• प्रत्येक नए मॉडल ने पिछले मॉडल की कमियों को दूर किया।
• डाल्टन से शुरू होकर बोर तक परमाणु की संरचना स्पष्ट हुई।
आम गलतियाँ:
• मॉडलों के क्रम को आगे-पीछे लिखना।
• प्रत्येक वैज्ञानिक के योगदान को आपस में मिला देना।
Exam Tips:
a) कालक्रम को संख्या या तीरों के निशान से स्पष्ट रूप से दर्शाएं।
b) प्रत्येक मॉडल की मुख्य विशेषता एक-दो वाक्यों में लिखें।
c) वैज्ञानिक के नाम के साथ उनका मुख्य सिद्धांत याद रखें।
Question 6: इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कक्षाओं में गति करते हैं। वे परमाणु से बाहर क्यों नहीं निकल जाते? कौन-सा बल उन्हें नाभिक की ओर आकर्षित रखता है, व्याख्या कीजिए?
Answer:
नाभिक में धनावेशित प्रोटॉन होते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित होते हैं।
विपरीत प्रकार के आवेशों के बीच वैद्युत आकर्षण बल कार्य करता है। यही बल इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर आकर्षित रखता है।
बोर के अनुसार इलेक्ट्रॉन निश्चित ऊर्जा वाली कक्षाओं में इसी आकर्षण बल के कारण परिभ्रमण करते हैं और सामान्य अवस्था में परमाणु से बाहर नहीं निकलते।
अतः इलेक्ट्रॉनों को नाभिक के चारों ओर बाँधे रखने वाला बल वैद्युत आकर्षण बल है।
मुख्य बिंदु:
• प्रोटॉन धनावेशित और इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित होते हैं।
• विपरीत आवेशों के बीच आकर्षण बल होता है।
• यह वैद्युत आकर्षण बल इलेक्ट्रॉनों को कक्षा में बनाए रखता है।
आम गलतियाँ:
• बल का नाम (वैद्युत आकर्षण बल) न लिखना।
• प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन के आवेशों को गलत बताना।
Exam Tips:
a) आकर्षण बल के कारण को वैज्ञानिक भाषा में समझाएं।
b) विपरीत आवेशों के आकर्षण के सिद्धांत का उल्लेख करें।
c) उत्तर को संक्षिप्त और सटीक रखें।
Question 7: नीचे दिए गए अभिकथन एवं कारण को पढ़िए और उनके संबंध में आगे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए。
अभिकथन – अवपरमाणुक कणों की खोज ने परमाणु संरचना को समझने में सहायता की।
कारण – किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉन की संख्या के समान होती है।
(i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है। (ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं परंतु कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता है। (iii) अभिकथन सत्य है परंतु कारण असत्य है। (iv) अभिकथन असत्य है परंतु कारण सत्य है।
Answer:
सही विकल्प – (ii)
कारण:
अभिकथन सत्य है क्योंकि इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जैसे अवपरमाणुक कणों की खोज से परमाणु की संरचना को समझना संभव हुआ।
कारण भी सत्य है क्योंकि किसी उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉन की संख्या के बराबर होती है।
किंतु यह कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
मुख्य बिंदु:
• अवपरमाणुक कणों की खोज से परमाणु मॉडल विकसित हुए।
• उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन की संख्या समान होती है।
• कथन और कारण के बीच तार्किक संबंध को पहचानना आवश्यक है।
आम गलतियाँ:
• यह मान लेना कि कारण हमेशा अभिकथन की सही व्याख्या ही करेगा।
• दोनों वाक्यों के सत्य होने पर भी संबंध को ठीक से न समझ पाना।
Exam Tips:
a) पहले अभिकथन और कारण दोनों की सत्यता स्वतंत्र रूप से जाँचें।
b) देखें कि क्या कारण वास्तव में अभिकथन का स्पष्टीकरण है या नहीं।
c) सही विकल्प संख्या स्पष्ट रूप से लिखें।
Question 8: मैग्नीशियम अनेक जैविक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है जिसमें मांसपेशियों का संकुचन भी सम्मिलित है। मैग्नीशियम के परमाणु की द्रव्यमान संख्या 24 और परमाणु क्रमांक 12 है तो उसमें –
(i) प्रोटॉनों की संख्या (ii) न्यूट्रॉनों की संख्या (iii) इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए। मैग्नीशियम परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था को भी चित्रात्मक रूप से दर्शाइए।
Answer:
दिया गया है:
द्रव्यमान संख्या = 24
परमाणु क्रमांक = 12
(i) प्रोटॉनों की संख्या
= परमाणु क्रमांक
= 12
(ii) न्यूट्रॉनों की संख्या
= द्रव्यमान संख्या − परमाणु क्रमांक
= 24 − 12
= 12
(iii) इलेक्ट्रॉनों की संख्या
उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = प्रोटॉन की संख्या
= 12
अतः:
• प्रोटॉन की संख्या = 12
• न्यूट्रॉन की संख्या = 12
• इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 12
मैग्नीशियम में इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था (इलेक्ट्रॉनीय विन्यास — 2, 8, 2):
प्रथम कक्षा (K-कोश) — 2 इलेक्ट्रॉन
द्वितीय कक्षा (L-कोश) — 8 इलेक्ट्रॉन
तृतीय कक्षा (M-कोश) — 2 इलेक्ट्रॉन
मुख्य बिंदु:
• परमाणु क्रमांक = प्रोटॉनों की संख्या = इलेक्ट्रॉनों की संख्या (उदासीन परमाणु में)।
• न्यूट्रॉनों की संख्या = द्रव्यमान संख्या - परमाणु क्रमांक।
• इलेक्ट्रॉनीय विन्यास \( 2, 8, 8... \) के नियम के अनुसार होता है।
आम गलतियाँ:
• द्रव्यमान संख्या और परमाणु क्रमांक में घटाव करते समय गलती करना।
• कक्षाओं में इलेक्ट्रॉनों का वितरण गलत भरना।
Exam Tips:
a) सभी भागों (i, ii, iii) को क्रम से हल करें।
b) सूत्र लिखकर गणना स्पष्ट रूप से दिखाएं।
c) इलेक्ट्रॉनीय विन्यास को कक्षानुसार लिखकर दर्शाएं।
Question 9: चित्र 8.17 में दर्शाए गए तत्वों के लिए निम्नलिखित जानकारी ज्ञात कीजिए –
(i) तत्व का नाम (ii) प्रतीक (iii) इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या (iv) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या (v) तत्व की संयोजकता (vi) प्रोटॉनों की संख्या (vii) परमाणु क्रमांक
[क: लिथियम, ख: नाइट्रोजन, ग: ऐलुमिनियम, घ: ऑक्सीजन]
Answer:
(क)
(i) तत्व का नाम — लिथियम
(ii) प्रतीक — Li (लि)
(iii) इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या — 3
(iv) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या — 1
(v) तत्व की संयोजकता — 1
(vi) प्रोटॉनों की संख्या — 3
(vii) परमाणु क्रमांक — 3
(ख)
(i) तत्व का नाम — नाइट्रोजन
(ii) प्रतीक — N (एन)
(iii) इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या — 7
(iv) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या — 5
(v) तत्व की संयोजकता — 3
(vi) प्रोटॉनों की संख्या — 7
(vii) परमाणु क्रमांक — 7
(ग)
(i) तत्व का नाम — ऐलुमिनियम
(ii) प्रतीक — Al (एएल)
(iii) इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या — 13
(iv) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या — 3
(v) तत्व की संयोजकता — 3
(vi) प्रोटॉनों की संख्या — 13
(vii) परमाणु क्रमांक — 13
(घ)
(i) तत्व का नाम — ऑक्सीजन
(ii) प्रतीक — O (ओ)
(iii) इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या — 8
(iv) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या — 6
(v) तत्व की संयोजकता — 2
(vi) प्रोटॉनों की संख्या — 8
(vii) परमाणु क्रमांक — 8
मुख्य बिंदु:
• किसी तत्व का परमाणु क्रमांक उसमें उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या के बराबर होता है।
• बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनों को संयोजकता इलेक्ट्रॉन कहते हैं।
• अष्टक पूरा करने के लिए साझा या आदान-प्रदान किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या संयोजकता होती है।
आम गलतियाँ:
• संयोजकता इलेक्ट्रॉन और संयोजकता को एक ही समझ लेना।
• इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या गिनने में भूल करना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक उप-भाग (क, ख, ग, घ) के लिए सातों बिंदुओं के उत्तर स्पष्ट रूप से लिखें।
b) संयोजकता निकालते समय 8 में से बाहरी इलेक्ट्रॉन घटाने के नियम का ध्यान रखें (जहाँ लागू हो)।
c) तत्वों के नाम और प्रतीक सही वर्तनी में लिखें।
Question 10: रदरफोर्ड और बोर दोनों के प्रतिरूपों में इलेक्ट्रॉन नाभिक की परिक्रमा करते हैं, परंतु रदरफोर्ड का मॉडल परमाणु के स्थायित्व को समझाने में असफल क्यों रहा जबकि बोर का मॉडल सफल रहा?
Answer:
रदरफोर्ड के मॉडल के अनुसार इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा करते समय इलेक्ट्रॉन लगातार ऊर्जा का उत्सर्जन करते हैं। परिणामस्वरूप उनकी ऊर्जा घटती जाती है और अंततः वे नाभिक में गिर जाने चाहिए। यदि ऐसा होता, तो परमाणु अस्थिर हो जाता। इसलिए रदरफोर्ड का मॉडल परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर सका।
बोर ने प्रस्तावित किया कि इलेक्ट्रॉन केवल निश्चित ऊर्जा वाली कक्षाओं में ही परिभ्रमण करते हैं। इन कक्षाओं में रहते समय वे ऊर्जा का न तो उत्सर्जन करते हैं और न ही अवशोषण। इसलिए इलेक्ट्रॉन नाभिक में नहीं गिरते और परमाणु स्थिर बना रहता है। इसी कारण बोर का मॉडल परमाणु के स्थायित्व को सफलतापूर्वक समझा सका।
मुख्य बिंदु:
• त्वरित आवेशित कण ऊर्जा विकीर्ण करते हैं (वैद्युत गतिकी के अनुसार)।
• रदरफोर्ड मॉडल परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर पाया था।
• बोर की स्थायी कक्षाएँ ऊर्जा का ह्रास नहीं होने देतीं।
आम गलतियाँ:
• दोनों मॉडलों के मुख्य अंतर को स्पष्ट रूप से न लिख पाना।
• ऊर्जा के उत्सर्जन और स्थायित्व के संबंध को गलत समझाना।
Exam Tips:
a) दोनों मॉडलों की तुलना करते हुए उत्तर लिखें।
b) रदरफोर्ड की कमी और बोर के सुधार को स्पष्ट करें।
c) 'स्थाई कक्षा' शब्द का प्रयोग अवश्य करें।
Question 11: एक परमाणु ⁷⁰X में 31 इलेक्ट्रॉन हैं। बताइए कि इसके नाभिक में कितने न्यूट्रॉन हैं?
Answer:
दिया गया है:
द्रव्यमान संख्या = 70
इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 31
उदासीन परमाणु में प्रोटॉनों की संख्या = इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 31
न्यूट्रॉनों की संख्या
= द्रव्यमान संख्या − प्रोटॉन की संख्या
= 70 − 31
= 39
अतः नाभिक में न्यूट्रॉनों की संख्या 39 है।
मुख्य बिंदु:
• प्रतीक ⁷⁰X में ऊपर दी गई संख्या (70) द्रव्यमान संख्या है।
• प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन की संख्या उदासीन परमाणु में समान होती है।
• न्यूट्रॉन की संख्या = द्रव्यमान संख्या - प्रोटॉन संख्या।
आम गलतियाँ:
• द्रव्यमान संख्या को प्रोटॉन या इलेक्ट्रॉन मान लेना।
• घटाव में गणना की गलती करना।
Exam Tips:
a) दिए गए मानों को सबसे पहले अलग से लिखें।
b) सूत्र लिखकर चरणबद्ध हल दिखाएं।
c) अंतिम उत्तर यूनिट या स्पष्ट वाक्य में दें।
Question 12: एक परमाणु में 79 प्रोटॉन हैं और उसकी द्रव्यमान संख्या 197 है। इसमें –
(i) न्यूट्रॉनों की संख्या (ii) इलेक्ट्रॉनों की संख्या की गणना कीजिए।
Answer:
दिया गया है:
प्रोटॉन की संख्या = 79
द्रव्यमान संख्या = 197
(i) न्यूट्रॉनों की संख्या
= द्रव्यमान संख्या − प्रोटॉन की संख्या
= 197 − 79
= 118
(ii) इलेक्ट्रॉनों की संख्या
उदासीन परमाणु में, इलेक्ट्रॉनों की संख्या = प्रोटॉन की संख्या
= 79
अतः:
• न्यूट्रॉनों की संख्या = 118
• इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 79
मुख्य बिंदु:
• प्रोटॉनों की संख्या ही परमाणु क्रमांक होती है।
• उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन बराबर होते हैं।
• न्यूट्रॉन निकालने के लिए द्रव्यमान संख्या में से प्रोटॉन घटाए जाते हैं।
आम गलतियाँ:
• बड़ी संख्या में से छोटी संख्या घटाते समय भूल करना।
• इलेक्ट्रॉनों की संख्या निकालने में संशय होना।
Exam Tips:
a) दोनों उप-भागों को (i) और (ii) डालकर अलग-अलग हल करें।
b) प्रत्येक चरण में प्रयुक्त सूत्र का उल्लेख करें।
c) गणना की शुद्धता की जाँच एक बार पुनः कर लें।
Question 13: तालिका 8.5 को पूर्ण कीजिए।
[तालिका के रिक्त स्थान भरने हैं: परमाणु क्रमांक, द्रव्यमान संख्या, न्यूट्रॉन संख्या, प्रोटॉन संख्या, इलेक्ट्रॉन संख्या, तत्व का नाम]
Answer:
पूर्ण की गई तालिका के मान इस प्रकार हैं:
• परमाणु क्रमांक: 5 | द्रव्यमान संख्या: 11 | न्यूट्रॉन: 6 | प्रोटॉन: 5 | इलेक्ट्रॉन: 5 | तत्व का नाम: बोरॉन
• परमाणु क्रमांक: 7 | द्रव्यमान संख्या: 14 | न्यूट्रॉन: 7 | प्रोटॉन: 7 | इलेक्ट्रॉन: 7 | तत्व का नाम: नाइट्रोजन
• परमाणु क्रमांक: 12 | द्रव्यमान संख्या: 24 | न्यूट्रॉन: 12 | प्रोटॉन: 12 | इलेक्ट्रॉन: 12 | तत्व का नाम: मैग्नीशियम
• परमाणु क्रमांक: 15 | द्रव्यमान संख्या: 31 | न्यूट्रॉन: 16 | प्रोटॉन: 15 | इलेक्ट्रॉन: 15 | तत्व का नाम: फॉस्फोरस
• परमाणु क्रमांक: 1 | द्रव्यमान संख्या: 1 | न्यूट्रॉन: 0 | प्रोटॉन: 1 | इलेक्ट्रॉन: 1 | तत्व का नाम: हाइड्रोजन
मुख्य बिंदु:
• परमाणु क्रमांक = प्रोटॉन संख्या = इलेक्ट्रॉन संख्या।
• द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉन संख्या + न्यूट्रॉन संख्या।
• हाइड्रोजन के सामान्य समस्थानिक (प्रोटियम) में न्यूट्रॉन नहीं होता (शून्य होता है)।
आम गलतियाँ:
• द्रव्यमान संख्या और न्यूट्रॉन संख्या के संबंध में जोड़-घटाव की गलती।
• हाइड्रोजन के न्यूट्रॉन को 1 मान लेना।
Exam Tips:
a) परीक्षा में यदि ऐसी तालिका आए तो प्रत्येक पंक्ति को अलग से हल करें।
b) सूत्र (प्रोटॉन + न्यूट्रॉन = द्रव्यमान संख्या) का उपयोग करें।
c) तत्वों के नाम और उनके प्रतीक अच्छे से याद रखें।
Question 14: अमन अपने सहपाठियों के साथ परमाणु की संरचना पर चर्चा कर रहा था। चर्चा के समय उसे ज्ञात हुआ कि किसी तत्व X की द्रव्यमान संख्या 35 है और उसमें 18 न्यूट्रॉन हैं। इस जानकारी के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(i) तत्व X में कितने इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन हैं? (ii) इसका परमाणु क्रमांक क्या है? (iii) तत्व X की पहचान कीजिए। (iv) इसका इलेक्ट्रोनीय विन्यास लिखिए। (v) इसमें कितने संयोजकता इलेक्ट्रॉन हैं? (vi) यदि इसके नाभिक में दो न्यूट्रॉन और जोड़ दिए जाएँ तो इसकी द्रव्यमान संख्या क्या होगी? (vii) X का नए परमाणु के साथ क्या संबंध होगा?
Answer:
दिया गया है:
द्रव्यमान संख्या = 35
न्यूट्रॉनों की संख्या = 18
प्रोटॉनों की संख्या = द्रव्यमान संख्या − न्यूट्रॉनों की संख्या
= 35 − 18 = 17
(i) इलेक्ट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या:
प्रोटॉन की संख्या = 17
उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 17
(ii) परमाणु क्रमांक:
= प्रोटॉन की संख्या = 17
(iii) तत्व की पहचान:
परमाणु क्रमांक 17 वाला तत्व क्लोरीन है।
(iv) इलेक्ट्रोनीय विन्यास:
2, 8, 7
(v) संयोजकता इलेक्ट्रॉन:
= 7
(vi) यदि दो न्यूट्रॉन और जोड़ दिए जाएँ:
नई द्रव्यमान संख्या = 35 + 2 = 37
(vii) संबंध:
नया परमाणु और मूल परमाणु दोनों के प्रोटॉन की संख्या समान रहेगी, जबकि न्यूट्रॉन की संख्या भिन्न होगी। अतः दोनों एक-दूसरे के समस्थानिक होंगे।
मुख्य बिंदु:
• प्रोटॉन निकालने के लिए द्रव्यमान में से न्यूट्रॉन घटाए जाते हैं।
• क्लोरीन का परमाणु क्रमांक 17 होता है।
• समान प्रोटॉन और भिन्न न्यूट्रॉन वाले परमाणु समस्थानिक कहलाते हैं।
आम गलतियाँ:
• इलेक्ट्रॉनों की संख्या निकालने में भ्रमित होना।
• समस्थानिक और समभारिक की पहचान में गलती करना।
Exam Tips:
a) सभी सातों प्रश्नों के उत्तर क्रम से (i) से (vii) तक दें।
b) प्रत्येक भाग के लिए उचित कारण या गणना दिखाएं।
c) आवर्त सारणी के शुरुआती 20 तत्वों के परमाणु क्रमांक याद रखें।
Question 15: किसी परमाणु के नाभिक में 12 प्रोटॉन और 12 न्यूट्रॉन हैं। अब कल्पना कीजिए कि सभी इलेक्ट्रॉनों को किन्हीं काल्पनिक कणों से प्रतिस्थापित कर दिया जाता है, जिनका आवेश इलेक्ट्रॉनों के समान ही है परंतु वे 500 गुना अधिक भारी हैं। इस प्रतिस्थापन का परमाणु के निम्नलिखित गुणों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(i) परमाणु क्रमांक (ii) परमाणु द्रव्यमान (iii) द्रव्यमान संख्या (iv) समग्र आवेश
Answer:
दिया गया है:
प्रोटॉन की संख्या = 12
न्यूट्रॉन की संख्या = 12
इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 12
काल्पनिक कणों का आवेश इलेक्ट्रॉन के समान ऋणात्मक है, परंतु उनका द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन से 500 गुना अधिक है।
(i) परमाणु क्रमांक:
परमाणु क्रमांक केवल प्रोटॉन की संख्या पर निर्भर करता है। प्रोटॉन की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। अतः परमाणु क्रमांक 12 ही रहेगा।
(ii) परमाणु द्रव्यमान:
काल्पनिक कण इलेक्ट्रॉनों से 500 गुना भारी हैं। इसलिए इलेक्ट्रॉनों के स्थान पर इन कणों के आने से परमाणु का कुल द्रव्यमान बढ़ जाएगा। अतः परमाणु द्रव्यमान में वृद्धि होगी।
(iii) द्रव्यमान संख्या:
द्रव्यमान संख्या = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या
= 12 + 12 = 24
द्रव्यमान संख्या में इलेक्ट्रॉनों या काल्पनिक कणों के द्रव्यमान को सम्मिलित नहीं किया जाता। अतः द्रव्यमान संख्या 24 ही रहेगी।
(iv) समग्र आवेश:
12 प्रोटॉन का कुल धनावेश = +12
12 काल्पनिक कणों का कुल ऋणावेश = −12
चूँकि काल्पनिक कणों का आवेश इलेक्ट्रॉनों के समान है, इसलिए कुल धनावेश और कुल ऋणावेश बराबर रहेंगे।
समग्र आवेश = \( +12 - 12 = 0 \)
अतः परमाणु विद्युत रूप से उदासीन रहेगा।
मुख्य बिंदु:
• परमाणु क्रमांक प्रोटॉनों की संख्या से निर्धारित होता है।
• द्रव्यमान संख्या में केवल प्रोटॉन और न्यूट्रॉन गिने जाते हैं (इलेक्ट्रॉन नहीं)।
• उदासीन परमाणु में धन और ऋण आवेश बराबर होते हैं।
आम गलतियाँ:
• यह सोचना कि इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान जोड़ने से द्रव्यमान संख्या बदल जाएगी।
• काल्पनिक कणों के भारी होने से समग्र आवेश बदल जाना मानना।
Exam Tips:
a) प्रत्येक भाग (i से iv) का वैज्ञानिक आधार स्पष्ट रूप से लिखें।
b) द्रव्यमान संख्या और परमाणु द्रव्यमान के अंतर को समझें।
c) आवेश संतुलन के नियम को स्पष्ट करें।
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